संजय सिंह ने राम मंदिर जमीन खरीद मामले के दस्तावेज एसआईटी को सौंपे, निष्पक्ष जांच की उठाई मांग

संजय सिंह ने राम मंदिर जमीन खरीद मामले के दस्तावेज एसआईटी को सौंपे, निष्पक्ष जांच की उठाई मांग नई दिल्ली, 25 जून 2026। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद और उत्तर प्रदेश प्रभारी संजय सिंह ने राम मंदिर से जुड़ी जमीन खरीद के कथित घोटाले को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने इस मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) को सौंप दिए हैं। संजय सिंह का कहना है कि उन्होंने भगवान श्रीराम के भक्तों और देश की जनता के हित में यह कदम उठाया है ताकि सच्चाई सामने आ सके और यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच हो सके। इस मामले को लेकर आम आदमी पार्टी ने भी केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि करोड़ों लोगों ने भगवान श्रीराम के मंदिर निर्माण के लिए श्रद्धा और विश्वास के साथ दान दिया था। इसलिए मंदिर से जुड़े धन और जमीन खरीद के मामलों में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए। लखनऊ पहुंचकर एसआईटी को सौंपे दस्तावेजसंजय सिंह ने बताया कि एसआईटी के अध्यक्ष विजय विश्वास पंत ने उन्हें लखनऊ स्थित कार्यालय में बुलाया था। निर्धारित समय पर पहुंचकर उन्होंने जांच टीम को जमीन खरीद से संबंधित सभी जरूरी दस्तावेज सौंप दिए। उन्होंने कहा कि उनके पास कुल 13 दस्तावेज थे, लेकिन कुछ दस्तावेज एक-दूसरे से जुड़े हुए थे। इसलिए उन्होंने 11 सेट दस्तावेज जांच अधिकारियों को दिए। संजय सिंह ने कहा कि अब सारी जानकारी और दस्तावेज जांच एजेंसी के पास हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि एसआईटी पूरी गंभीरता से मामले की जांच करेगी और जो भी सच होगा, वह देश के सामने आएगा। अरविंद केजरीवाल ने क्या कहा?आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि श्रीराम मंदिर में चढ़ावे और जमीन खरीद से जुड़े मामलों की जांच कर रही एसआईटी को संजय सिंह ने सभी सबूत सौंप दिए हैं। उन्होंने कहा कि अब जांच एजेंसी की जिम्मेदारी है कि वह इन दस्तावेजों की जांच करे और लोगों के सामने सच्चाई रखे। केजरीवाल ने कहा कि मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है और इससे जुड़े किसी भी मामले में पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता होनी चाहिए। संजय सिंह बोले- यह केवल जमीन का नहीं, आस्था का मामला हैमीडिया से बातचीत करते हुए संजय सिंह ने कहा कि यह सिर्फ जमीन खरीद का मामला नहीं है, बल्कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि लोगों ने अपनी श्रद्धा और विश्वास के साथ मंदिर निर्माण के लिए दान दिया था। इसलिए यह जानना जरूरी है कि उस धन का इस्तेमाल कैसे किया गया। उन्होंने कहा कि यदि दान और चढ़ावे के पैसों में किसी प्रकार की गड़बड़ी हुई है तो यह करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला मामला है। इसलिए इसकी पूरी जांच होनी चाहिए। करोड़ों रुपये की जमीन खरीद पर उठाए सवालसंजय सिंह ने दावा किया कि उनके पास मौजूद दस्तावेजों में कई ऐसे जमीन सौदों का विवरण है, जिनमें जमीन की कीमत बाजार मूल्य से कई गुना अधिक दिखाई गई है। उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में जमीन की वास्तविक कीमत बहुत कम थी, लेकिन उसे ट्रस्ट द्वारा कई गुना अधिक कीमत पर खरीदा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि 9 करोड़ रुपये की जमीन को 55 करोड़ 47 लाख रुपये में खरीदा गया और 3 करोड़ रुपये की जमीन को 24 करोड़ रुपये में खरीदा गया। संजय सिंह का कहना है कि इन सौदों की जांच से पता चल सकेगा कि आखिर इतनी अधिक कीमत क्यों चुकाई गई। नजूल जमीन को लेकर भी उठे गंभीर सवालसंजय सिंह ने एक ऐसे जमीन सौदे का भी जिक्र किया जिसे उन्होंने नजूल भूमि बताया। उन्होंने कहा कि सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार यह नजूल जमीन थी। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि जमीन का दर्जा ऐसा था तो उसे करोड़ों रुपये देकर कैसे खरीदा गया। उन्होंने कहा कि इस मामले में प्रशासनिक और कानूनी पहलुओं की भी जांच होनी चाहिए ताकि लोगों को पूरी सच्चाई पता चल सके। पांच मिनट में करोड़ों रुपये का मुनाफा?संजय सिंह ने एक पुराने जमीन सौदे का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ लोगों ने एक जमीन खरीदी और केवल पांच मिनट बाद उसी जमीन को कई गुना ज्यादा कीमत पर ट्रस्ट को बेच दिया। उन्होंने दावा किया कि पहले जमीन लगभग 2 करोड़ रुपये में खरीदी गई और कुछ मिनट बाद उसे 18.5 करोड़ रुपये में बेच दिया गया। उन्होंने कहा कि यह मामला बेहद गंभीर है और इसकी गहराई से जांच होनी चाहिए। कई जमीन सौदों में एक जैसे नाम आने का दावासंजय सिंह ने कहा कि दस्तावेजों का अध्ययन करने पर पता चलता है कि कई जमीन सौदों में कुछ नाम बार-बार सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसी को इन सभी मामलों को जोड़कर देखना चाहिए ताकि पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सके। उनका कहना है कि यदि सभी सौदों की श्रृंखला को एक साथ देखा जाए तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। दान में मिली जमीन बेचने का भी आरोपसंजय सिंह ने आरोप लगाया कि एक मामले में किसी व्यक्ति को दान में जमीन मिली थी और बाद में वह जमीन ट्रस्ट को करोड़ों रुपये में बेच दी गई। उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों की भी जांच होनी चाहिए ताकि यह पता चल सके कि जमीनों का मूल्यांकन किस आधार पर किया गया था। किसानों की जमीन और ट्रस्ट की खरीद में अंतर का मुद्दासंजय सिंह ने कहा कि कुछ मामलों में उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों से जमीन कम कीमत पर खरीदी, जबकि ट्रस्ट ने उसी क्षेत्र में जमीन कहीं अधिक कीमत पर खरीदी। उन्होंने दावा किया कि यह अंतर इतना बड़ा है कि इसकी जांच जरूरी हो जाती है। उन्होंने कहा कि यदि जमीन का बाजार मूल्य अलग था तो ट्रस्ट द्वारा इतनी अधिक कीमत क्यों चुकाई गई, इसका जवाब मिलना चाहिए। मीडिया और जनता से की अपीलसंजय सिंह ने मीडिया से अपील की कि वह जमीनों की वास्तविक स्थिति की पड़ताल करे। उन्होंने कहा कि पत्रकार जमीनों की लोकेशन और आसपास की स्थिति देखकर खुद समझ सकते हैं कि
मानसून से पहले अंकुश नारंग ने एमसीडी से मांगा जवाब, कहा- दिल्लीवासियों को जलभराव और करंट हादसों से बचाने की पूरी तैयारी बताएं

अंकुश नारंग ने एमसीडी कमिश्नर को लिखा पत्र, मानसून की तैयारियों पर मांगी पूरी रिपोर्ट नई दिल्ली, 24 जून 2026। दिल्ली में मानसून की शुरुआत से पहले आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और एमसीडी में नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने नगर निगम प्रशासन से कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे हैं। उन्होंने एमसीडी कमिश्नर संजीव खिरवार को पत्र लिखकर राजधानी में बारिश के मौसम को लेकर की गई तैयारियों की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। अंकुश नारंग ने कहा कि हर साल बारिश आते ही दिल्ली के कई इलाकों में जलभराव, गंदगी, टूटी सड़कों और करंट लगने जैसी समस्याएं सामने आती हैं। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि इस बार नगर निगम ने लोगों की सुरक्षा और सुविधा के लिए क्या इंतजाम किए हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली की जनता हर साल मानसून के दौरान कई परेशानियों का सामना करती है। कई जगहों पर सड़कें पानी में डूब जाती हैं, यातायात ठप हो जाता है और लोगों को घंटों जाम में फंसना पड़ता है। इसके अलावा कई इलाकों में करंट लगने की घटनाएं भी सामने आती हैं, जो लोगों की जान के लिए खतरा बन जाती हैं। इसलिए निगम प्रशासन को अपनी तैयारियों की पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। क्या सभी नालों और नालियों की सफाई पूरी हो चुकी है?अंकुश नारंग ने अपने पत्र में सबसे पहले नालों और नालियों की सफाई का मुद्दा उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या एमसीडी के सभी जोनों में आने वाले बड़े नाले, छोटे नाले, नालियां और जालियां पूरी तरह साफ कर दी गई हैं। उन्होंने कहा कि हर साल निगम की ओर से सफाई के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन बारिश शुरू होते ही कई इलाकों में पानी भर जाता है। उन्होंने सवाल किया कि यदि सफाई का काम पूरा हो चुका है तो उसकी पूरी जानकारी दी जाए। साथ ही यह भी बताया जाए कि सफाई के दौरान निकाली गई गाद, मिट्टी और कचरे को कहां ले जाकर डंप किया गया है। अंकुश नारंग ने कहा कि केवल कागजों में सफाई दिखाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि उसका असर जमीन पर भी दिखाई देना चाहिए। जलभराव वाले इलाकों के लिए क्या विशेष व्यवस्था की गई है?अंकुश नारंग ने उन क्षेत्रों को लेकर भी सवाल उठाए जहां हर साल बारिश के दौरान भारी जलभराव होता है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में कई ऐसे इलाके हैं जहां थोड़ी सी बारिश के बाद भी सड़कें पानी से भर जाती हैं। इससे आम लोगों, दुकानदारों, छात्रों और नौकरीपेशा लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने पूछा कि ऐसे संवेदनशील इलाकों की पहचान कर एमसीडी ने क्या विशेष कदम उठाए हैं। क्या उन स्थानों पर अतिरिक्त पंप लगाए गए हैं? क्या पानी निकासी की व्यवस्था को मजबूत किया गया है? क्या संबंधित अधिकारियों को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है? इन सभी सवालों का जवाब निगम प्रशासन को देना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर हर साल एक ही जगह जलभराव होता है तो इसका मतलब है कि समस्या की जड़ तक पहुंचकर समाधान नहीं किया गया। इसलिए यह जानना जरूरी है कि समस्या के कारणों की जांच की गई है या नहीं और उन्हें दूर करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। करंट लगने की घटनाओं को रोकने के लिए क्या तैयारी है?अंकुश नारंग ने बारिश के दौरान होने वाली करंट लगने की घटनाओं को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बरसात के मौसम में कई बार खुले बिजली के तार, खराब स्ट्रीट लाइटें और जलभराव वाले क्षेत्रों में बिजली का रिसाव लोगों की जान के लिए खतरा बन जाता है। उन्होंने पूछा कि ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए निगम और संबंधित विभागों ने क्या कदम उठाए हैं। क्या बिजली के खंभों और स्ट्रीट लाइटों की जांच की गई है? क्या संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी की व्यवस्था की गई है? क्या अधिकारियों को संभावित खतरे वाले स्थानों की पहचान करने के निर्देश दिए गए हैं? अंकुश नारंग ने कहा कि लोगों की जान की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए और इस मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती। राजेंद्र नगर की दुखद घटना का भी किया जिक्रअपने पत्र में अंकुश नारंग ने पिछले वर्ष मानसून के दौरान राजेंद्र नगर में हुई करंट लगने की दुखद घटना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस हादसे ने पूरे शहर को झकझोर दिया था और लोगों के मन में सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे। उन्होंने पूछा कि उस घटना के बाद निगम प्रशासन ने क्या समीक्षा की थी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए गए। उन्होंने कहा कि केवल हादसों के बाद जांच बैठा देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए जिससे भविष्य में किसी भी परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े। निगम बैठक से पहले मांगे सभी सवालों के जवाबअंकुश नारंग ने अपने पत्र में कहा कि गुरुवार दोपहर 2 बजे होने वाली निगम की बैठक से पहले उनके सभी सवालों के जवाब उपलब्ध कराए जाएं। उनका कहना है कि जब तक पूरी जानकारी सामने नहीं आएगी, तब तक मानसून की तैयारियों की वास्तविक स्थिति का पता नहीं चल सकेगा। उन्होंने कहा कि निगम सदन में जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने वाली है और ऐसे में अधिकारियों की जिम्मेदारी बनती है कि वे सभी तथ्यों और आंकड़ों के साथ अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करें। इससे जनता को भी यह पता चलेगा कि उनके लिए क्या तैयारियां की गई हैं। दिल्लीवासियों की सुरक्षा से जुड़ा है मामलाअंकुश नारंग ने कहा कि यह केवल प्रशासनिक प्रक्रिया का विषय नहीं है, बल्कि दिल्ली के लाखों लोगों की सुरक्षा और सुविधा से जुड़ा हुआ मामला है। मानसून के दौरान होने वाली समस्याओं का सीधा असर आम नागरिकों के जीवन पर पड़ता है। इसलिए नगर निगम को पूरी गंभीरता और जिम्मेदारी के साथ काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि दिल्ली के लोग यह जानना चाहते हैं कि इस बार बारिश के मौसम में उन्हें जलभराव, गंदगी और करंट जैसी समस्याओं से राहत मिलेगी या नहीं। नगर निगम को पारदर्शिता के साथ अपनी तैयारियों का पूरा ब्यौरा देना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए
महरौली की मासूम बच्ची के साथ हुई दरिंदगी पर भड़के देवेंद्र यादव, कानून व्यवस्था और बेघरों की सुरक्षा पर उठाए गंभीर सवाल

महरौली में 11 वर्षीय बच्ची के अपहरण, दुष्कर्म और हत्या की घटना ने दिल्ली को झकझोर दिया – देवेंद्र यादव नई दिल्ली, 23 जून 2026। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने दक्षिण दिल्ली के महरौली क्षेत्र में फुटपाथ पर परिवार के साथ सो रही 11 वर्षीय बच्ची के अपहरण, दुष्कर्म और हत्या की दर्दनाक घटना पर गहरा दुख और आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं है, बल्कि दिल्ली में बिगड़ती कानून व्यवस्था, गरीबों की असुरक्षा और बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था की विफलता का गंभीर उदाहरण है। देवेंद्र यादव ने कहा कि जिस बच्ची को अपने परिवार के साथ सुरक्षित नींद में होना चाहिए था, उसे अपराधियों ने निशाना बनाया। पहले उसका अपहरण किया गया, फिर उसके साथ अमानवीय अपराध किया गया और अंत में उसकी हत्या कर दी गई। यह घटना पूरे समाज को झकझोर देने वाली है और यह सवाल खड़ा करती है कि आखिर राजधानी में गरीब और कमजोर वर्ग के लोग कितने सुरक्षित हैं। बीजेपी सरकार की नाकामी और कानून व्यवस्था की सच्चाई सामने आईदेवेंद्र यादव ने कहा कि भाजपा की दिल्ली सरकार लगातार यह दावा करती रहती है कि राजधानी में अपराध कम हो रहे हैं और कानून व्यवस्था मजबूत है, लेकिन महरौली जैसी घटनाएं इन दावों की वास्तविकता को उजागर कर देती हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री, उपराज्यपाल और पुलिस प्रशासन अक्सर अपराध नियंत्रण के बड़े-बड़े दावे करते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि महिलाओं, किशोरियों और बच्चों के खिलाफ अपराधों में लगातार वृद्धि हो रही है। अपहरण, यौन शोषण, दुष्कर्म और हत्या जैसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जिससे लोगों के मन में भय और असुरक्षा का माहौल बन रहा है। ऐसे में सरकार के दावे लोगों को राहत देने के बजाय केवल औपचारिक बयान साबित हो रहे हैं। गरीबी और बेघरी भी इस त्रासदी का बड़ा कारण हैदेवेंद्र यादव ने कहा कि महरौली की यह घटना केवल अपराध की कहानी नहीं है, बल्कि यह उन हजारों गरीब परिवारों की पीड़ा को भी सामने लाती है जो मजबूरी में फुटपाथों, सड़कों और खुले स्थानों पर रहने को विवश हैं। उन्होंने कहा कि यदि गरीब परिवारों को रहने के लिए सुरक्षित स्थान और पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध होतीं तो शायद ऐसी दर्दनाक घटनाओं को रोका जा सकता था। उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी ने गरीब परिवारों की स्थिति और अधिक कठिन बना दी है। कई परिवार आर्थिक तंगी के कारण स्थायी आवास का खर्च नहीं उठा पाते और उन्हें खुले आसमान के नीचे जीवन बिताना पड़ता है। ऐसे परिवारों के बच्चे सबसे अधिक असुरक्षित रहते हैं और अपराधियों का आसान निशाना बन जाते हैं। रैन बसेरों की कमी बेघरों की परेशानी बढ़ा रही हैदेवेंद्र यादव ने कहा कि दिल्ली सरकार द्वारा संचालित शेल्टर होम और रैन बसेरे राजधानी की जरूरतों के मुकाबले पर्याप्त नहीं हैं। इसी कारण बड़ी संख्या में बेघर लोग आज भी फुटपाथों, पुलों के नीचे, बस स्टॉपों के आसपास और खुले स्थानों में रात बिताने के लिए मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की वास्तविक स्थिति इसी बात से समझी जा सकती है कि राजधानी में हजारों लोग आज भी सुरक्षित आश्रय के बिना जीवन गुजार रहे हैं। यदि रैन बसेरों की संख्या और सुविधाएं पर्याप्त होतीं तो अनेक गरीब परिवार सड़कों पर रहने को मजबूर नहीं होते। बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा के लिए विशेष नीति बनाने की जरूरत यादवदेवेंद्र यादव ने कहा कि महरौली की घटना बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चेतावनी है। उन्होंने कहा कि सरकार और पुलिस को मिलकर ऐसी व्यवस्था विकसित करनी चाहिए जिससे खुले स्थानों पर रहने वाले परिवारों और उनके बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार सड़कों, फुटपाथों और खुले स्थानों पर रहने वाले लोगों का व्यापक सर्वेक्षण कराए और उनकी जरूरतों के अनुसार सुरक्षित रैन बसेरे, आवासीय सुविधाएं और सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराए। साथ ही पुलिस को ऐसे क्षेत्रों में विशेष निगरानी और नियमित गश्त बढ़ानी चाहिए ताकि कमजोर वर्ग के लोगों को अपराधियों से बचाया जा सके। समाज के कमजोर वर्गों की सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी हैदेवेंद्र यादव ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक सरकार की पहली जिम्मेदारी अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना होती है। खासकर गरीब, बेघर, महिलाएं और बच्चे सरकार के संरक्षण के सबसे बड़े हकदार होते हैं। उन्होंने कहा कि महरौली की मासूम बच्ची के साथ हुई घटना ने यह दिखा दिया है कि अभी भी समाज के कमजोर वर्गों की सुरक्षा के लिए बहुत कुछ किया जाना बाकी है। उन्होंने मांग की कि इस मामले की निष्पक्ष और तेज जांच हो, दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सरकार ठोस कदम उठाए। देवेंद्र यादव ने कहा कि केवल अपराधियों की गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन परिस्थितियों को भी बदलना होगा जो गरीब और असहाय लोगों को ऐसे खतरों के बीच जीवन बिताने के लिए मजबूर करती हैं। महरौली की घटना पूरे समाज के लिए चेतावनी हैदेवेंद्र यादव ने कहा कि महरौली में हुई यह दर्दनाक घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि पूरे समाज और शासन व्यवस्था के लिए एक गंभीर चेतावनी है। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा, महिलाओं की सुरक्षा और बेघर लोगों के सम्मानजनक जीवन का अधिकार सुनिश्चित किए बिना किसी भी विकास की बात अधूरी है। सरकार, प्रशासन और समाज सभी को मिलकर ऐसी व्यवस्था बनानी होगी जहां कोई भी बच्चा असुरक्षित न हो और कोई भी परिवार मजबूरी में खुले आसमान के नीचे रहने को विवश न हो।
हाई कोर्ट के फैसले से बिजली कंपनियों को बड़ा झटका, आशीष सूद बोले- अब होगा सीएजी ऑडिट और सामने आएगी सच्चाई

नई दिल्ली। दिल्ली के ऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने बिजली कंपनियों के सीएजी (कैग) ऑडिट से जुड़े मामले में दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि अदालत के इस निर्णय से दिल्ली की जनता के हितों को मजबूती मिली है और अब बिजली कंपनियों के ऑडिट का रास्ता साफ हो गया है। आशीष सूद ने कहा कि यह फैसला पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि दिल्ली सरकार शुरू से ही इस मामले में जनता के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रही है। सरकार ने अदालत में पूरी मजबूती के साथ अपना पक्ष रखा और यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि जनता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर किसी प्रकार का पर्दा न रहे। बिजली कंपनियों की याचिका खारिज होने पर सरकार ने जताई संतुष्टिऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि बिजली कंपनियों ने सीएजी ऑडिट का विरोध करते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। लेकिन अदालत ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि अदालत का यह फैसला स्पष्ट करता है कि ऑडिट जैसी प्रक्रिया को रोकना उचित नहीं है। आशीष सूद ने कहा कि जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि बिजली क्षेत्र में कामकाज किस तरह से हो रहा है और उपभोक्ताओं से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बनी रहनी चाहिए। आशीष सूद ने आम आदमी पार्टी और बिजली कंपनियों के कथित संबंधों पर उठाए सवालऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने आरोप लगाया कि बिजली कंपनियों द्वारा ऑडिट का विरोध करना कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम ने आम आदमी पार्टी, अरविंद केजरीवाल और बिजली कंपनियों के बीच कथित संबंधों को लेकर नई बहस शुरू कर दी है। आशीष सूद ने कहा कि जब कोई संस्था ऑडिट से बचने की कोशिश करती है तो लोगों के मन में स्वाभाविक रूप से संदेह पैदा होता है। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि सभी तथ्य जनता के सामने आएं ताकि किसी भी प्रकार की शंका की गुंजाइश न रहे। दिल्ली सरकार ने अदालत में रखा जनता का पक्षआशीष सूद ने कहा कि दिल्ली सरकार ने इस मामले में पूरी गंभीरता और जिम्मेदारी के साथ अदालत में अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था को निशाना बनाना नहीं बल्कि जनता के हितों की रक्षा करना है।ऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि सरकार ने अदालत को बताया कि सीएजी ऑडिट एक संवैधानिक प्रक्रिया है और इससे पारदर्शिता सुनिश्चित होती है। इसी कारण सरकार ने ऑडिट की प्रक्रिया का समर्थन किया। सीएजी ऑडिट से बढ़ेगी पारदर्शिताआशीष सूद ने कहा कि सीएजी ऑडिट होने से बिजली कंपनियों के कामकाज की विस्तृत जानकारी सामने आ सकेगी। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि वित्तीय और प्रशासनिक स्तर पर क्या स्थिति है।उन्होंने कहा कि पारदर्शिता किसी भी व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत होती है। जब सभी तथ्य सार्वजनिक होते हैं तो जनता का भरोसा भी मजबूत होता है और जवाबदेही भी तय होती है। अब उपराज्यपाल के स्तर पर आगे बढ़ेगी प्रक्रियाऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने बताया कि हाई कोर्ट के फैसले के बाद अब सीएजी ऑडिट से जुड़े मामले की सुनवाई माननीय उपराज्यपाल के स्तर पर आगे बढ़ सकेगी। उन्होंने कहा कि अदालत के निर्णय ने आगे की प्रक्रिया का रास्ता खोल दिया है। आशीष सूद ने कहा कि सरकार चाहती है कि पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से पूरी हो ताकि सभी तथ्य सामने आ सकें। जनता पर बिजली दरों का बोझ नहीं बढ़ने देंगेऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि दिल्ली सरकार की प्राथमिकता दिल्ली की जनता है। उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए लगातार काम कर रही है कि लोगों पर बिजली के बढ़े हुए बिलों का अतिरिक्त बोझ न पड़े। आशीष सूद ने कहा कि सरकार किसी भी कीमत पर जनता के हितों से समझौता नहीं करेगी। यदि किसी स्तर पर लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने की कोशिश की जाती है तो सरकार उसका विरोध करेगी। जनहित के लिए अंतिम समय तक संघर्ष जारी रहेगाऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि दिल्ली सरकार जनता के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास रहेगा कि दिल्ली के लोगों को बिना किसी अतिरिक्त बोझ के बेहतर और निर्बाध बिजली उपलब्ध होती रहे। आशीष सूद ने कहा कि सरकार अंतिम समय तक इस बात के लिए संघर्ष करती रहेगी कि बिजली दरों में बढ़ोतरी के रूप में दिल्ली की जनता पर एक रुपये का भी अतिरिक्त बोझ न पड़े। उन्होंने विश्वास जताया कि हाई कोर्ट का यह फैसला जनता के हितों की रक्षा और व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
मानसून से पहले दिल्ली की सड़कों को गड्ढामुक्त बनाने में जुटे मंत्री प्रवेश साहिब सिंह, एक दिन में 2000 से अधिक गड्ढों की मरम्मत का अभियान

नई दिल्ली में मानसून के आगमन से पहले दिल्ली सरकार ने सड़कों को सुरक्षित और बेहतर बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। लोक निर्माण विभाग (PWD) ने राजधानी के विभिन्न इलाकों में विशेष गड्ढा मरम्मत अभियान चलाया, जिसके तहत एक ही दिन में 2000 से अधिक चिन्हित गड्ढों की मरम्मत का लक्ष्य रखा गया। इस अभियान का उद्देश्य बारिश के मौसम में लोगों को बेहतर और सुरक्षित यातायात सुविधा उपलब्ध कराना है। दिल्ली सरकार में लोक निर्माण विभाग के मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने स्वयं कई स्थानों पर पहुंचकर चल रहे कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों से बातचीत कर मरम्मत कार्यों की प्रगति की जानकारी ली और निर्देश दिए कि सभी काम तय समय के भीतर और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएं। रविवार होने के बावजूद विभाग के इंजीनियर, फील्ड स्टाफ और रखरखाव टीमें पूरे दिन सड़कों पर मौजूद रहीं और गड्ढों को भरने के कार्य में लगी रहीं। दिल्ली की सड़कों को सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा प्रयासPWD के अनुसार, इस वर्ष 1 जनवरी से 4 जून 2026 के बीच विभाग की सड़कों पर कुल 14,757 गड्ढों की पहचान की गई थी। इनमें से 12,762 गड्ढों की मरम्मत पहले ही पूरी की जा चुकी थी। शेष गड्ढों को भी मानसून शुरू होने से पहले ठीक करने के लिए यह विशेष अभियान चलाया गया है। मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि दिल्ली सरकार का लक्ष्य केवल नई सड़कें बनाना नहीं है, बल्कि उनकी गुणवत्ता बनाए रखना और समय पर रखरखाव सुनिश्चित करना भी है। उन्होंने बताया कि बारिश के दौरान सड़कों पर गड्ढे लोगों के लिए परेशानी और दुर्घटनाओं का कारण बन सकते हैं, इसलिए सरकार पहले से तैयारी कर रही है ताकि नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। वर्षभर जारी रहती है सड़कों की निगरानीप्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि PWD पूरे वर्ष सड़कों की स्थिति पर नजर रखता है और गड्ढों से जुड़ी शिकायतों का समाधान करता है। उन्होंने बताया कि आज का विशेष अभियान विभाग की इसी प्रतिबद्धता का हिस्सा है। राजधानी के विभिन्न हिस्सों में चिन्हित गड्ढों की मरम्मत की जा रही है ताकि बारिश के मौसम में लोगों को सुरक्षित और सुगम यात्रा का अनुभव मिल सके। उन्होंने कहा कि दिल्ली की सड़कें राजधानी की पहचान हैं और सरकार चाहती है कि नागरिकों को बेहतर सड़क अवसंरचना उपलब्ध हो। इसी उद्देश्य से विभाग लगातार निरीक्षण और मरम्मत कार्य कर रहा है। गुणवत्ता और जवाबदेही पर विशेष जोरमंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि सड़क निर्माण केवल गड्ढे भरने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें गुणवत्ता और जवाबदेही भी बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि जिन कई सड़कों पर आज गड्ढों की मरम्मत की जा रही है, उनका निर्माण कई वर्ष पहले हुआ था और उस समय गुणवत्ता मानकों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया था। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था को और मजबूत बनाया है। अब PWD द्वारा बनाई जाने वाली नई सड़कों पर पांच वर्ष की रखरखाव अवधि लागू की गई है। इसका मतलब है कि यदि इस अवधि में सड़क में कोई खराबी या दोष सामने आता है तो उसे ठीक करने की जिम्मेदारी संबंधित ठेकेदार की होगी। इससे सड़क निर्माण में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के साथ-साथ जवाबदेही भी तय होगी। मानसून की तैयारियों में जुटी दिल्ली सरकारप्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि दिल्ली सरकार मानसून से पहले व्यापक तैयारियां कर रही है। सड़कों की मरम्मत के साथ-साथ जल निकासी व्यवस्था, नालों की सफाई और अन्य जरूरी कार्यों पर भी ध्यान दिया जा रहा है ताकि बारिश के दौरान लोगों को कम से कम परेशानी हो। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य दिल्ली को बेहतर, आधुनिक और टिकाऊ अवसंरचना उपलब्ध कराना है। इसके लिए नियमित निगरानी, समय पर रखरखाव और गुणवत्ता युक्त निर्माण कार्यों पर लगातार ध्यान दिया जा रहा है। नागरिकों को मिलेगा सुरक्षित और सुगम सफरइस विशेष अभियान के माध्यम से दिल्ली सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि मानसून के दौरान राजधानी की सड़कें बेहतर स्थिति में रहें। गड्ढों की समय पर मरम्मत से सड़क दुर्घटनाओं की संभावना कम होगी, यातायात सुचारु रहेगा और लोगों को रोजमर्रा के सफर में सुविधा मिलेगी। मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने विश्वास जताया कि विभाग के अधिकारी और कर्मचारी पूरी मेहनत के साथ कार्य कर रहे हैं तथा मानसून शुरू होने से पहले अधिकतम चिन्हित गड्ढों की मरम्मत पूरी कर ली जाएगी। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार नागरिकों को सुरक्षित, सुविधाजनक और बेहतर सड़क व्यवस्था देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
विजेन्द्र गुप्ता ने शास्त्रार्थ की परंपरा को बताया लोकतंत्र और समाज की मजबूती का आधार

नई दिल्ली में आयोजित ‘वर्तमान समय में शास्त्रार्थ’ विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी में दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेन्द्र गुप्ता ने भारतीय ज्ञान परंपरा, लोकतंत्र और संवाद की संस्कृति पर विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन शास्त्रार्थ परंपरा केवल अतीत की विरासत नहीं है, बल्कि वर्तमान समय में भी इसकी उतनी ही आवश्यकता है। उनके अनुसार जब समाज में संवाद, तर्क और विचार-विमर्श की परंपरा मजबूत होती है, तब लोकतंत्र भी अधिक सशक्त बनता है और समाज में सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त होता है। शास्त्रार्थ भारतीय ज्ञान परंपरा की आत्मा हैअपने संबोधन में विजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि भारतीय संस्कृति और सभ्यता की सबसे बड़ी विशेषता यह रही है कि यहां विचारों को कभी किसी पर थोपा नहीं गया। भारत में हमेशा संवाद, चर्चा और तर्क के माध्यम से सत्य को खोजने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि शास्त्रार्थ भारतीय ज्ञान परंपरा की आत्मा है, क्योंकि इसके माध्यम से विभिन्न विचारों का आदान-प्रदान होता है और सत्य तक पहुंचने का मार्ग खुलता है। उन्होंने बताया कि भारत के प्राचीन ग्रंथों, उपनिषदों और दार्शनिक परंपराओं में संवाद को विशेष महत्व दिया गया है। यही कारण है कि भारतीय संस्कृति में ज्ञान प्राप्ति का आधार चर्चा और विचार-विमर्श रहा है। आदि शंकराचार्य और मंडन मिश्र के शास्त्रार्थ का किया उल्लेखविजेन्द्र गुप्ता ने अपने भाषण में भारत के प्रसिद्ध दार्शनिक शास्त्रार्थों का भी उल्लेख किया। उन्होंने विशेष रूप से आदि शंकराचार्य और मंडन मिश्र के बीच हुए ऐतिहासिक शास्त्रार्थ की चर्चा करते हुए कहा कि यह केवल दो विद्वानों के बीच बहस नहीं थी, बल्कि सत्य की खोज का एक महान प्रयास था। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में किसी को हराना या नीचा दिखाना उद्देश्य नहीं होता था, बल्कि सही विचार और सत्य की स्थापना को महत्व दिया जाता था। यही कारण है कि भारतीय शास्त्रार्थ दुनिया की अन्य बहसों से अलग और विशिष्ट रहे हैं। संवाद से ही होता है सत्य का बोधविजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि भारतीय दर्शन का प्रसिद्ध सिद्धांत “वादे-वादे जायते तत्त्वबोधः” आज भी उतना ही प्रासंगिक है। इसका अर्थ है कि लगातार संवाद और विचार-विमर्श के माध्यम से ही सत्य का ज्ञान प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि जब विभिन्न विचारों वाले लोग एक-दूसरे को सुनते हैं, अपने तर्क रखते हैं और खुले मन से चर्चा करते हैं, तब समाज में बेहतर समझ विकसित होती है। यही प्रक्रिया लोकतंत्र को मजबूत बनाती है और लोगों के बीच विश्वास बढ़ाती है। आधुनिक समय में संवाद की संस्कृति कमजोर पड़ रही हैविजेन्द्र गुप्ता ने वर्तमान समय की चुनौतियों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज का युग सूचना और तकनीक का युग है। लोगों के पास पहले की तुलना में कहीं अधिक जानकारी उपलब्ध है, लेकिन इसके बावजूद धैर्यपूर्वक सुनने और विचारों को समझने की संस्कृति कमजोर होती दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया ने हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का मंच दिया है, जो एक सकारात्मक बात है। लेकिन इसके साथ ही यह भी आवश्यक है कि लोग दूसरों की बातों को सुनें, समझें और सम्मान दें। यदि केवल अपनी बात कहने की प्रवृत्ति बढ़ेगी और सुनने की संस्कृति कमजोर होगी, तो समाज में संवाद की जगह टकराव बढ़ सकता है। लोकतंत्र का आधुनिक स्वरूप है शास्त्रार्थविजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि आज के लोकतांत्रिक संस्थान, विशेष रूप से विधानसभाएं और संसद, प्राचीन शास्त्रार्थ परंपरा का आधुनिक रूप हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव जीतकर सरकार बनाने का नाम नहीं है। उनके अनुसार लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति तब दिखाई देती है जब विभिन्न विचारों, मतों और दृष्टिकोणों को सदन में अपनी बात रखने का अवसर मिलता है। चर्चा और बहस के माध्यम से ही बेहतर नीतियां बनती हैं और जनहित में निर्णय लिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि स्वस्थ बहस और सार्थक संवाद से उत्पन्न विचार-मंथन शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी और जनोन्मुख बनाता है। शास्त्रार्थ का उद्देश्य किसी को हराना नहीं, सत्य तक पहुंचना हैअपने संबोधन में विजेन्द्र गुप्ता ने स्पष्ट किया कि शास्त्रार्थ और सामान्य विवाद में बहुत बड़ा अंतर है। सामान्य विवाद का उद्देश्य अक्सर किसी को गलत साबित करना या स्वयं को सही सिद्ध करना होता है, जबकि शास्त्रार्थ का उद्देश्य सत्य की खोज करना होता है। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में उदारता, निष्पक्षता और खुले विचारों को हमेशा महत्व दिया गया है। यही मूल्य शास्त्रार्थ की आधारशिला हैं। जब लोग पूर्वाग्रह छोड़कर विचार-विमर्श करते हैं, तभी समाज को सही दिशा मिलती है। भारती की निष्पक्षता का दिया उदाहरणविजेन्द्र गुप्ता ने मंडन मिश्र और आदि शंकराचार्य के प्रसिद्ध शास्त्रार्थ का उल्लेख करते हुए भारती की निष्पक्ष भूमिका की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारती ने निर्णायक के रूप में पूरी निष्पक्षता और ईमानदारी का परिचय दिया था। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में निष्पक्षता और न्याय को हमेशा सर्वोच्च स्थान दिया गया है। यही मूल्य आज के लोकतांत्रिक समाज के लिए भी अत्यंत आवश्यक हैं। भारतीय संस्कृति के मूल मूल्य आज भी प्रासंगिकविजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि आत्मसंयम, त्याग, करुणा, सहिष्णुता और संवाद जैसे मूल्य भारतीय संस्कृति की पहचान हैं। ये मूल्य केवल अतीत की धरोहर नहीं हैं, बल्कि आज की सामाजिक और वैश्विक चुनौतियों का समाधान भी प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने कहा कि यदि समाज इन मूल्यों को अपनाए तो अनेक समस्याओं का समाधान सहज रूप से संभव हो सकता है। संवाद और सहमति की संस्कृति समाज को अधिक मजबूत और समरस बनाती है। शास्त्रार्थ की परंपरा को पुनर्जीवित करने का आह्वानसंगोष्ठी के समापन की ओर बढ़ते हुए विजेन्द्र गुप्ता ने भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद और भारत बोध केंद्र को इस महत्वपूर्ण आयोजन के लिए बधाई दी। उन्होंने विश्वास जताया कि इस दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी से ऐसे महत्वपूर्ण सुझाव सामने आएंगे, जो आधुनिक समय में शास्त्रार्थ की परंपरा को पुनर्जीवित करने में सहायक सिद्ध होंगे। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की मांग है। इसके माध्यम से एक आत्मविश्वासी, जागरूक और मूल्यनिष्ठ समाज का निर्माण किया जा सकता है। संवाद ही हर समस्या का समाधानअपने संबोधन के अंत में विजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि समाज, लोकतंत्र और राष्ट्र के सामने आने वाली अधिकांश समस्याओं का समाधान संवाद के माध्यम से
नीट पुनर्परीक्षा से पूर्व विद्यार्थियों के नाम केजरीवाल का संदेश, कहा- तनाव त्यागकर आत्मविश्वास के साथ दें परीक्षा

एक माह में दो बार परीक्षा देना सरल नहीं, अभ्यर्थियों के धैर्य और परिश्रम की सराहना सरिता साहनी | नई दिल्ली राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) की पुनर्परीक्षा से पूर्व आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने देशभर के अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं देते हुए उन्हें आत्मविश्वास एवं सकारात्मक मनोभाव के साथ परीक्षा में सम्मिलित होने का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि बीते कुछ समय में विद्यार्थियों को अनेक चुनौतियों और मानसिक दबाव का सामना करना पड़ा है, किंतु अब समय केवल अपने लक्ष्य और तैयारी पर ध्यान केंद्रित करने का है। सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा किए गए अपने संदेश में केजरीवाल ने विद्यार्थियों से अपील की कि वे चिंता और तनाव को स्वयं पर हावी न होने दें तथा अपनी मेहनत और क्षमता पर विश्वास बनाए रखें। उन्होंने कहा कि प्रत्येक अभ्यर्थी ने इस परीक्षा के लिए लंबे समय तक परिश्रम किया है और अब उसी परिश्रम को सफलता में परिवर्तित करने का अवसर है। पुनर्परीक्षा की परिस्थितियों को बताया चुनौतीपूर्णपरीक्षार्थियों के लिए जारी एक वीडियो संदेश में अरविंद केजरीवाल ने कहा कि एक माह के भीतर दो बार नीट जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा में सम्मिलित होना किसी भी विद्यार्थी के लिए आसान नहीं है। उन्होंने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में भी यह परीक्षा अत्यंत प्रतिस्पर्धी और चुनौतीपूर्ण होती है, जबकि हालिया घटनाक्रम ने विद्यार्थियों की चिंताओं को और बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद विद्यार्थियों ने धैर्य, संयम और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया है। यही गुण उन्हें सफलता की दिशा में आगे बढ़ाने का कार्य करेंगे। आत्मविश्वास और एकाग्रता बनाए रखने की अपीलकेजरीवाल ने कहा कि परीक्षा में अब केवल कुछ घंटे शेष हैं, इसलिए विद्यार्थियों को सभी विवादों और नकारात्मक चर्चाओं को पीछे छोड़कर अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि शांत मन और सकारात्मक सोच के साथ दी गई परीक्षा बेहतर परिणाम प्राप्त करने में सहायक होती है। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा, “तनाव को स्वयं पर हावी न होने दें। अपनी मेहनत और तैयारी पर विश्वास रखिए। पूर्ण आत्मविश्वास और शांत मन से परीक्षा दीजिए। मुझे विश्वास है कि आपका परिश्रम अवश्य सफल होगा।” भावी चिकित्सकों को दी शुभकामनाएंअरविंद केजरीवाल ने कहा कि देशभर के लाखों युवा चिकित्सक बनने का सपना लेकर वर्षों से कठिन परिश्रम कर रहे हैं। यह परीक्षा उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जो उनके भविष्य की दिशा निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विद्यार्थी अपनी प्रतिभा, परिश्रम और लगन के बल पर सफलता प्राप्त करेंगे तथा भविष्य में देश की स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। अपने संदेश के अंत में उन्होंने सभी अभ्यर्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें परीक्षा के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी को आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच के साथ परीक्षा में सम्मिलित होना चाहिए। नीट पुनर्परीक्षा से पूर्व आया यह संदेशविद्यार्थियों का मनोबल बढ़ाने वाला माना जा रहा है। परीक्षा की अंतिम तैयारियों में जुटे अभ्यर्थियों के लिए यह संदेश आत्मविश्वास, धैर्य और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
शिक्षा व्यवस्था पर कांग्रेस का बड़ा हमला, डॉ. कन्हैया कुमार बोले- मोदी सरकार ने शिक्षा को व्यापार बना दिया

पेपर लीक, महंगी शिक्षा और बेरोजगारी को लेकर केंद्र सरकार पर कांग्रेस का निशाना नई दिल्ली। देश में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों और शिक्षा व्यवस्था की स्थिति को लेकर कांग्रेस ने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस नेता और कांग्रेस कार्य समिति के सदस्य डॉ. कन्हैया कुमार ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने देश की शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है और शिक्षा को एक व्यापार में बदल दिया है। नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित एक पत्रकार वार्ता में डॉ. कन्हैया कुमार ने कहा कि देश के लाखों छात्र और उनके परिवार आज शिक्षा व्यवस्था से परेशान हैं। लगातार पेपर लीक होने से छात्रों का भविष्य संकट में पड़ गया है और युवाओं का भरोसा परीक्षा प्रणाली से उठता जा रहा है। नीट परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर सरकार पर सवालडॉ. कन्हैया कुमार ने कहा कि नीट परीक्षा में लगातार गड़बड़ियों की खबरें सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि यह चौथा लगातार वर्ष है जब नीट परीक्षा को लेकर विवाद और अनियमितताओं की बातें सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि पेपर लीक की घटनाओं ने छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। लाखों छात्र वर्षों तक मेहनत करते हैं, लेकिन जब परीक्षा का पेपर लीक हो जाता है तो उनकी मेहनत पर पानी फिर जाता है। कन्हैया कुमार ने कहा कि सिर्फ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म या टेलीग्राम पर प्रतिबंध लगाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। इसके लिए उन लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी होगी जो इस पूरे भ्रष्ट तंत्र का हिस्सा हैं। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और एनटीए को बैन करने की मांगकांग्रेस नेता ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि जब लगातार परीक्षाओं में गड़बड़ियां सामने आ रही हैं तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को तत्काल प्रतिबंधित करने की मांग करते हुए कहा कि सरकार को एक नई, पारदर्शी और भरोसेमंद परीक्षा संस्था का गठन करना चाहिए, जो निष्पक्ष तरीके से परीक्षाएं आयोजित कर सके। कांग्रेस का कहना है कि पेपर लीक के सभी दोषियों को कड़ी सजा दी जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। अयोग्य नियुक्तियों पर उठाए सवालडॉ. कन्हैया कुमार ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार महत्वपूर्ण शैक्षणिक संस्थानों में योग्य लोगों की जगह अयोग्य लोगों की नियुक्ति कर रही है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में कुलपति और विभिन्न संस्थानों में निदेशक ऐसे लोगों को बनाया जा रहा है जिनका मुख्य काम शिक्षा सुधार नहीं बल्कि सरकार की प्रशंसा करना रह गया है। उन्होंने कहा कि जब शिक्षा संस्थानों का नेतृत्व योग्य लोगों के हाथों में नहीं होगा तो शिक्षा व्यवस्था कैसे मजबूत होगी। ओडिशा और राजस्थान की घटनाओं का किया जिक्रपत्रकार वार्ता के दौरान कन्हैया कुमार ने शिक्षा व्यवस्था में सामने आई कुछ घटनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ओडिशा के पाठ्यक्रम में एक महान वैज्ञानिक को पायलट बताया गया, जो शिक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियों को दिखाता है। इसके अलावा उन्होंने राजस्थान की उस घटना का भी उल्लेख किया जिसमें प्रश्न पत्र की जगह छात्रों को उत्तर पुस्तिका बांट दी गई थी। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं बताती हैं कि शिक्षा व्यवस्था में कितनी बड़ी लापरवाही हो रही है। यूपीएससी जैसी परीक्षाओं पर भी उठ रहे सवालकांग्रेस नेता ने कहा कि आज देश में शायद ही कोई ऐसी परीक्षा बची हो जिस पर सवाल न उठ रहे हों। उन्होंने कहा कि अब तो देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में शामिल यूपीएससी जैसी परीक्षा को लेकर भी चर्चाएं और सवाल सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति बेहद चिंताजनक है क्योंकि इससे युवाओं का विश्वास कमजोर हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर कांग्रेस का सवालडॉ. कन्हैया कुमार ने पेपर लीक के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है तब प्रधानमंत्री को सामने आकर अपनी बात रखनी चाहिए। कांग्रेस का कहना है कि देश के युवाओं से जुड़े इतने बड़े मुद्दे पर सरकार को जवाब देना चाहिए और समाधान प्रस्तुत करना चाहिए। शिक्षा के लिए परिवारों को उठानी पड़ रही भारी कीमतकन्हैया कुमार ने कहा कि आज देश के लाखों माता-पिता अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए जमीन बेच रहे हैं, कर्ज ले रहे हैं और अपनी जमा पूंजी खर्च कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा इतनी महंगी हो गई है कि आम परिवारों के लिए बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाना कठिन होता जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों के कारण शिक्षा का बोझ लगातार आम लोगों पर बढ़ रहा है। शिक्षा का बजट और बढ़ती निजी खर्च की समस्याकांग्रेस नेता ने दावा किया कि आज लोग अपनी जेब से शिक्षा पर जितना खर्च कर रहे हैं, वह सरकार के शिक्षा बजट से भी अधिक है। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और रोजगार की कोई गारंटी नहीं है। उनका कहना था कि यदि शिक्षा व्यवस्था मजबूत होती तो छात्रों और अभिभावकों को इतनी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता। शिक्षा को व्यापार बनाने का आरोपडॉ. कन्हैया कुमार ने कहा कि मोदी सरकार ने शिक्षा को एक व्यापार में बदल दिया है। उन्होंने कहा कि जब शिक्षा को अधिकार की जगह वस्तु बना दिया जाएगा तो उसका खरीदा और बेचा जाना स्वाभाविक हो जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरी व्यवस्था शिक्षा को महंगा बनाने और आम लोगों की पहुंच से दूर करने की दिशा में काम कर रही है। युवाओं के सपने टूट रहे हैंकांग्रेस नेता ने कहा कि आज देश के युवाओं का शिक्षा व्यवस्था पर से भरोसा टूट रहा है। उन्होंने कहा कि लाखों छात्र मेहनत करते हैं लेकिन बार-बार होने वाले पेपर लीक और अनियमितताओं के कारण उनके सपने टूट जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं से सपने देखने का अधिकार छीना जा रहा है और यही सबसे बड़ी चिंता का विषय है। छात्रों की आत्महत्या पर जताई चिंताडॉ. कन्हैया कुमार ने छात्रों द्वारा की जा रही आत्महत्याओं पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ते दबाव, पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली पर
स्वच्छ दिल्ली ही विकसित भारत की आधारशिला – विजेन्द्र गुप्ता ने चांदनी चौक में चलाया स्वच्छता अभियान

नई दिल्ली, 17 जून 2026। दिल्ली को स्वच्छ, सुंदर और स्वस्थ बनाने के उद्देश्य से दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेन्द्र गुप्ता ने बुधवार को चांदनी चौक स्थित ऐतिहासिक जैन लाल मंदिर और गौरी शंकर मंदिर परिसर में विशेष स्वच्छता अभियान का नेतृत्व किया। इस दौरान उन्होंने स्वयं श्रमदान कर सफाई कार्य में भाग लिया और लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, जनप्रतिनिधि, सफाई कर्मचारी और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। यह अभियान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण के 12 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों की श्रृंखला का हिस्सा था। अभियान का मुख्य उद्देश्य लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करना और पर्यावरण संरक्षण में जनभागीदारी को बढ़ावा देना था। स्वच्छता केवल अभियान नहीं, नागरिकों की जिम्मेदारी हैस्वच्छता अभियान के दौरान विधानसभा अध्यक्ष विजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि स्वच्छता केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि यदि देश को विकसित राष्ट्र बनाना है तो स्वच्छता को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना होगा। उन्होंने कहा कि “स्वच्छ दिल्ली ही विकसित भारत की आधारशिला है। जब तक हमारी राजधानी स्वच्छ और स्वस्थ नहीं होगी, तब तक विकसित भारत का सपना पूरी तरह साकार नहीं हो सकता।”विजेन्द्र गुप्ता ने लोगों से अपील की कि वे अपने घरों के साथ-साथ सार्वजनिक स्थलों की सफाई का भी ध्यान रखें और स्वच्छता को अपनी आदत बनाएं। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में स्वच्छता की अहम भूमिकाविजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा निर्धारित “विकसित भारत 2047” का लक्ष्य तभी हासिल किया जा सकता है जब देश का हर नागरिक अपने कर्तव्यों का पालन करे। उन्होंने कहा कि स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक जिम्मेदारी विकसित भारत की मजबूत नींव हैं। उन्होंने कहा कि यदि हर व्यक्ति अपने आसपास के क्षेत्र को साफ रखने का संकल्प ले ले तो दिल्ली ही नहीं बल्कि पूरा देश स्वच्छ और सुंदर बन सकता है। स्वच्छ वातावरण से लोगों का स्वास्थ्य बेहतर होता है और शहर की पहचान भी मजबूत होती है। ‘मेरी दिल्ली, स्वच्छ दिल्ली’ का दिया संदेशकार्यक्रम के दौरान विजेन्द्र गुप्ता ने अभियान के मूल संदेश “मेरी दिल्ली, स्वच्छ दिल्ली; मेरी दिल्ली, स्वस्थ दिल्ली; मेरी दिल्ली, पर्यावरण-अनुकूल दिल्ली; मेरी दिल्ली, प्रदूषण-मुक्त दिल्ली” को दोहराया। उन्होंने कहा कि दिल्ली देश की राजधानी होने के साथ-साथ दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले शहरों में से एक है। यहां प्रतिदिन लाखों लोग आते-जाते हैं, जिससे सफाई और पर्यावरण संरक्षण की चुनौती और बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में केवल सरकारी एजेंसियों के भरोसे शहर को स्वच्छ नहीं बनाया जा सकता। इसके लिए जनता की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। दिल्ली की चुनौतियों का समाधान जनभागीदारी से संभवविजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि दिल्ली को प्रदूषण, कूड़ा प्रबंधन, यातायात और बढ़ती आबादी जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इन समस्याओं का समाधान तभी संभव है जब नागरिक स्वयं आगे आकर जिम्मेदारी निभाएं। उन्होंने कहा कि यदि लोग कूड़ा इधर-उधर फेंकने की आदत छोड़ दें, प्लास्टिक का कम उपयोग करें और सार्वजनिक स्थानों को साफ रखने में सहयोग करें तो दिल्ली की तस्वीर बदल सकती है। उन्होंने लोगों से पर्यावरण संरक्षण के लिए भी आगे आने का आग्रह किया। उपमहापौर डॉ. मोनिका पंत ने भी लिया अभियान में हिस्साइस अवसर पर दिल्ली नगर निगम की उपमहापौर डॉ. मोनिका पंत भी मौजूद रहीं। उन्होंने स्वच्छता अभियान में भाग लेते हुए नागरिकों से स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के लिए आगे आने की अपील की। डॉ. मोनिका पंत ने कहा कि स्वच्छ शहर केवल सरकार के प्रयासों से नहीं बनता, बल्कि नागरिकों की भागीदारी से बनता है। उन्होंने लोगों से अपने आसपास के क्षेत्र को साफ रखने और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करने का आह्वान किया। ऐतिहासिक मंदिरों में चला विशेष सफाई अभियानचांदनी चौक स्थित जैन लाल मंदिर और गौरी शंकर मंदिर दिल्ली की ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरों में शामिल हैं। स्वच्छता अभियान के दौरान मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों की सफाई की गई। स्वयंसेवकों और स्थानीय लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए सफाई कार्य को सफल बनाया। अभियान के दौरान लोगों ने यह संदेश दिया कि धार्मिक स्थलों की स्वच्छता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी घर और अन्य सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता। स्वच्छ भारत मिशन को आगे बढ़ाने का संकल्पकार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने स्वच्छ भारत मिशन के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। उन्होंने दिल्ली को अधिक स्वच्छ, हरित, स्वस्थ और प्रदूषण-मुक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयास करने की बात कही। विजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि दिल्ली के विकास और नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार के लिए स्वच्छता सबसे महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से इस जनआंदोलन का हिस्सा बनने का आह्वान किया। स्वच्छ और विकसित राजधानी का सपनाअपने संबोधन के अंत में विजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि दिल्ली केवल देश की राजधानी नहीं बल्कि भारत की पहचान भी है। इसलिए इसे स्वच्छ, सुंदर और व्यवस्थित बनाना हर नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि सभी लोग मिलकर प्रयास करें तो दिल्ली देश की सबसे स्वच्छ और आदर्श राजधानी बन सकती है। उन्होंने कहा कि जनसहभागिता, जागरूकता और निरंतर प्रयासों के माध्यम से ही ऐसी राजधानी का निर्माण संभव है जो विकसित भारत की आकांक्षाओं का सच्चा प्रतीक बने। स्वच्छ दिल्ली का सपना तभी साकार होगा जब हर नागरिक इसे अपना व्यक्तिगत दायित्व समझे और स्वच्छता को अपने जीवन का हिस्सा बनाए।
चौधरी ब्रह्म प्रकाश के योगदान के बिना आधुनिक दिल्ली की कहानी अधूरी, दिल्ली विधानसभा ने 108वीं जयंती पर दी श्रद्धांजलि

दिल्ली के प्रथम मुख्यमंत्री चौधरी ब्रह्म प्रकाश को किया गया नमन नई दिल्ली, 16 जून 2026। दिल्ली विधानसभा परिसर में मंगलवार को दिल्ली के प्रथम मुख्यमंत्री चौधरी ब्रह्म प्रकाश की 108वीं जयंती के अवसर पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेन्द्र गुप्ता ने चौधरी ब्रह्म प्रकाश की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें याद किया और उनके योगदान को देश तथा दिल्ली के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। कार्यक्रम में दिल्ली विधानसभा के उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट, विधायक ओम प्रकाश शर्मा, विधायक राजकुमार भाटिया, चौधरी ब्रह्म प्रकाश के परिवार के सदस्य और अन्य गणमान्य लोग भी मौजूद रहे। आधुनिक दिल्ली के निर्माण में चौधरी ब्रह्म प्रकाश की बड़ी भूमिका गुप्तादिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि आधुनिक दिल्ली की कहानी चौधरी ब्रह्म प्रकाश के योगदान को स्वीकार किए बिना पूरी नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि चौधरी ब्रह्म प्रकाश एक ऐसे नेता थे जिन्होंने अपनी दूरदर्शिता, मेहनत और जनसेवा के बल पर दिल्ली को विकास और लोकतंत्र की नई दिशा दी। विजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि आज दिल्ली जिस रूप में दिखाई देती है, उसके पीछे चौधरी ब्रह्म प्रकाश जैसे नेताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने दिल्ली के विकास और जनता के हितों को हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता दी। कम उम्र में स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े थे चौधरी ब्रह्म प्रकाशविजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि चौधरी ब्रह्म प्रकाश ने बहुत छोटी उम्र में ही देश की आजादी के लिए संघर्ष शुरू कर दिया था। उन्होंने किसी पद, प्रतिष्ठा या व्यक्तिगत लाभ के लिए राजनीति में प्रवेश नहीं किया था। उन्होंने कहा कि जब देश ब्रिटिश शासन के अधीन था, तब चौधरी ब्रह्म प्रकाश ने स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भागीदारी निभाई। उस समय अंग्रेजी शासन के खिलाफ आवाज उठाना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने साहस के साथ देश की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया। विजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि चौधरी ब्रह्म प्रकाश पहले एक स्वतंत्रता सेनानी थे और बाद में मुख्यमंत्री तथा सांसद बने। उनका पूरा जीवन देश और समाज की सेवा को समर्पित रहा। सादगी और सिद्धांतों पर आधारित था उनका जीवनदिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि स्वतंत्रता मिलने के बाद भी चौधरी ब्रह्म प्रकाश ने सादगीपूर्ण जीवन जीना जारी रखा। उन्होंने कभी सत्ता को अपने लिए नहीं बल्कि जनता की सेवा का माध्यम माना। उन्होंने किसानों, गरीबों और आम लोगों की समस्याओं को हमेशा प्राथमिकता दी। दिल्ली के विकास के लिए उन्होंने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए और लोगों के जीवन को बेहतर बनाने का प्रयास किया। विजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि चौधरी ब्रह्म प्रकाश का पूरा जीवन ईमानदारी, सादगी और सिद्धांतों का उदाहरण रहा है। आज भी उनका जीवन जनप्रतिनिधियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। जनहित के लिए बड़े नेताओं से भी मतभेद जताने में नहीं हिचकेविजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि चौधरी ब्रह्म प्रकाश का व्यक्तित्व साहसी और स्पष्टवादी था। उन्होंने हमेशा सच का साथ दिया और जनता के हितों की रक्षा के लिए अपनी बात मजबूती से रखी। उन्होंने कहा कि उस समय देश के प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का राष्ट्रीय राजनीति में बहुत प्रभाव था। इसके बावजूद यदि किसी मुद्दे पर चौधरी ब्रह्म प्रकाश को लगता था कि दिल्ली के हित प्रभावित हो रहे हैं, तो वे अपनी राय खुलकर रखते थे। विजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि यह उनकी लोकतांत्रिक सोच और जनता के प्रति जवाबदेही का प्रमाण था। आपातकाल के दौरान जेल में बिताए 19 महीनेचौधरी ब्रह्म प्रकाश के संघर्षपूर्ण जीवन को याद करते हुए विजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि देश में लगाए गए आपातकाल के दौरान उन्होंने लोकतंत्र की रक्षा के लिए बड़ी कीमत चुकाई। उन्होंने लगभग 19 महीने जेल में बिताए और अनेक कठिनाइयों का सामना किया। इसके बावजूद उन्होंने अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। विजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि यह त्याग लोकतंत्र, संविधान और नागरिक अधिकारों के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। दिल्ली विधानसभा में स्थापित है उनकी प्रतिमाविजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि दिल्ली विधानसभा परिसर में स्थापित चौधरी ब्रह्म प्रकाश की प्रतिमा उनके जीवनभर की जनसेवा और योगदान के प्रति सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी चौधरी ब्रह्म प्रकाश के योगदान को सम्मान दिया था। विपक्ष के नेता रहते हुए अटल बिहारी वाजपेयी स्वयं विधानसभा परिसर आए थे और उनकी प्रतिमा का अनावरण किया था। यह सम्मान दर्शाता है कि चौधरी ब्रह्म प्रकाश केवल किसी एक दल के नेता नहीं थे, बल्कि सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत थे। नई पीढ़ी को उनके जीवन से प्रेरणा लेने की जरूरतअपने संबोधन में विजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी और जनप्रतिनिधियों को चौधरी ब्रह्म प्रकाश के जीवन से सीख लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उनका जीवन त्याग, ईमानदारी, लोकतांत्रिक मूल्यों और जनसेवा का उत्कृष्ट उदाहरण है। यदि समाज और राजनीति में इन मूल्यों को अपनाया जाए तो देश और दिल्ली दोनों का विकास तेजी से हो सकता है। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे चौधरी ब्रह्म प्रकाश के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएं और एक मजबूत, विकसित और समृद्ध भारत के निर्माण में योगदान दें। मोहन सिंह बिष्ट ने भी किया याददिल्ली विधानसभा के उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट ने भी चौधरी ब्रह्म प्रकाश को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने अपने दूरदर्शी नेतृत्व और जनसेवा के माध्यम से दिल्ली के विकास में ऐतिहासिक योगदान दिया। उन्होंने कहा कि चौधरी ब्रह्म प्रकाश ने हमेशा समाज के कमजोर वर्गों की चिंता की और जनता के कल्याण के लिए लगातार काम किया। उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करता रहेगा। चौधरी ब्रह्म प्रकाश की विरासत आज भी जीवित हैचौधरी ब्रह्म प्रकाश का जीवन संघर्ष, सेवा और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतीक रहा है। स्वतंत्रता संग्राम से लेकर दिल्ली के विकास और लोकतंत्र की रक्षा तक, उन्होंने हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। आज उनकी 108वीं जयंती पर दिल्ली विधानसभा द्वारा दी गई श्रद्धांजलि केवल एक महान नेता को याद करना नहीं है, बल्कि उन आदर्शों को सम्मान देना है जिन्होंने दिल्ली और देश के विकास की मजबूत नींव रखी। उनका जीवन संदेश देता है कि सच्चा नेतृत्व वही है जो जनता के हित को सर्वोपरि रखे, लोकतंत्र की रक्षा करे और समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास