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दिल्ली में कोचिंग संस्थानों के लिए बनेगा नया नियामक ढांचा, छात्रों की सुरक्षा और सुविधाओं पर रहेगा विशेष ध्यान – आशीष सूद

दिल्ली सरकार ने कोचिंग संस्थानों को नियमित करने की दिशा में उठाया बड़ा कदम नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने राजधानी में संचालित होने वाले कोचिंग संस्थानों के लिए एक व्यापक नियामक ढांचा तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। दिल्ली के शिक्षा, उच्च शिक्षा एवं प्रशिक्षण, तकनीकी शिक्षा तथा शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने दिल्ली सचिवालय में एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए इस महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत की।सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दिल्ली में पढ़ने आने वाले लाखों छात्रों को सुरक्षित, व्यवस्थित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके। इस नई व्यवस्था के तहत कोचिंग संस्थानों के संचालन, सुरक्षा, शुल्क, मानसिक स्वास्थ्य और छात्रों के कल्याण से जुड़े विभिन्न पहलुओं को स्पष्ट रूप से निर्धारित किया जाएगा। ओल्ड राजेंद्र नगर की घटना के बाद बढ़ी चिंताबैठक के दौरान वर्ष 2024 में ओल्ड राजेंद्र नगर स्थित एक कोचिंग संस्थान में हुई दुखद घटना का भी उल्लेख किया गया। इस हादसे में बाढ़ और बेसमेंट सुरक्षा संबंधी गंभीर कमियों के कारण कई विद्यार्थियों की जान चली गई थी। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था और कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। इसी घटना के बाद दिल्ली उच्च न्यायालय ने न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) आर.के. गौबा की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया था। समिति को कोचिंग संस्थानों की कमियों की जांच कर सुधारात्मक सुझाव देने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। गौबा समिति ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है, जिसमें कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं। उच्च शिक्षा निदेशक होंगे नोडल अधिकारीबैठक के बाद शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने बताया कि दिल्ली सरकार इस विषय को अत्यंत गंभीरता से ले रही है। उन्होंने कहा कि कोचिंग संस्थानों के लिए नीति और नियम तैयार करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए उच्च शिक्षा निदेशक को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। उन्होंने कहा कि यह कदम दिल्ली में कोचिंग संस्थानों की निगरानी और प्रशासनिक व्यवस्था में एक बड़े बदलाव की शुरुआत है। अब अलग-अलग विभागों द्वारा की जाने वाली निगरानी के स्थान पर एक समन्वित और प्रभावी व्यवस्था विकसित की जाएगी। कई विभागों के वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूदइस महत्वपूर्ण बैठक में नगर निगम दिल्ली (एमसीडी), दिल्ली अग्निशमन सेवा, दिल्ली पुलिस, उच्च शिक्षा निदेशालय, श्रम विभाग, स्वास्थ्य विभाग और शहरी विकास विभाग सहित कई प्रमुख विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सभी विभागों ने कोचिंग संस्थानों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की और भविष्य की कार्ययोजना पर अपने सुझाव प्रस्तुत किए बनेगी बहु-विषयक समिति आशीष सूद ने बताया कि दिल्ली सरकार एक बहु-विषयक समिति का गठन करेगी। यह समिति कोचिंग संस्थानों के संचालन के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश तैयार करेगी। समिति कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम करेगी, जिनमें शुल्क संरचना, छात्र सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य सहायता, भवन सुरक्षा, अग्नि सुरक्षा और कर्मचारियों के कल्याण जैसे मुद्दे शामिल होंगे। शुल्क संरचना पर भी बनेगा नियमकोचिंग संस्थानों की फीस को लेकर छात्रों और अभिभावकों की शिकायतें अक्सर सामने आती रहती हैं। कई बार अत्यधिक फीस और अतिरिक्त शुल्क को लेकर विवाद भी होते हैं। नई नीति के तहत शुल्क संरचना को अधिक पारदर्शी बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इससे छात्रों और अभिभावकों को राहत मिलने की उम्मीद है। छात्रों की सुरक्षा होगी सर्वोच्च प्राथमिकतासरकार द्वारा तैयार किए जा रहे नियामक ढांचे में छात्र सुरक्षा को सबसे अधिक महत्व दिया जाएगा। कोचिंग संस्थानों को भवन सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा। इसके अलावा आपातकालीन निकास, अग्निशमन उपकरण, सुरक्षित बेसमेंट, स्वच्छ वातावरण और अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं को अनिवार्य बनाया जा सकता है। सरकार का मानना है कि शिक्षा प्राप्त करने आने वाले छात्रों की सुरक्षा किसी भी स्थिति में प्रभावित नहीं होनी चाहिए। मानसिक स्वास्थ्य और परामर्श पर रहेगा फोकसआज के समय में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों पर मानसिक दबाव काफी बढ़ गया है। कई छात्र तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याओं का सामना करते हैं। इसे देखते हुए नई नीति में मानसिक स्वास्थ्य सहायता और परामर्श व्यवस्था को भी शामिल किया जाएगा। कोचिंग संस्थानों को छात्रों के लिए उचित काउंसलिंग सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए जा सकते हैं। कर्मचारियों और शिक्षकों के हितों का भी रखा जाएगा ध्याननई व्यवस्था केवल छात्रों तक सीमित नहीं होगी। कोचिंग संस्थानों में कार्यरत शिक्षकों और कर्मचारियों के हितों को भी ध्यान में रखा जाएगा। उनकी कार्य परिस्थितियों को बेहतर बनाने, सुविधाएं उपलब्ध कराने और आवश्यक मानकों को निर्धारित करने पर भी समिति काम करेगी। शिकायत निवारण तंत्र होगा मजबूतसरकार कोचिंग संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों और वहां कार्यरत कर्मचारियों के लिए एक प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र विकसित करेगी। इस व्यवस्था के माध्यम से कोई भी छात्र या कर्मचारी अपनी समस्या को आसानी से संबंधित अधिकारियों तक पहुंचा सकेगा। शिकायतों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने का भी प्रयास किया जाएगा। नियमित निरीक्षण और निगरानी होगीदिल्ली सरकार ने स्पष्ट किया है कि केवल नियम बनाना ही पर्याप्त नहीं होगा। इन नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण और निगरानी की व्यवस्था भी बनाई जाएगी। जो संस्थान निर्धारित मानकों का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है। देश का अग्रणी राज्य बनने की तैयारीआशीष सूद ने कहा कि दिल्ली देश का पहला अग्रणी राज्य बनने जा रहा है, जो कोचिंग संस्थानों के संचालन और छात्रों के समग्र विकास के लिए व्यापक दिशा-निर्देश लागू करेगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली में देशभर से लाखों विद्यार्थी पढ़ाई के लिए आते हैं। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी है कि उन्हें सुरक्षित, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जाए। शिक्षा व्यवस्था को मिलेगा नया स्वरूपदिल्ली सरकार की यह पहल राजधानी की शिक्षा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकती है। यदि प्रस्तावित नियामक ढांचा प्रभावी रूप से लागू होता है तो इससे छात्रों की सुरक्षा बढ़ेगी, शिक्षा का स्तर बेहतर होगा और कोचिंग संस्थानों की जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी। सरकार का मानना है कि यह कदम न केवल छात्रों और अभिभावकों का विश्वास मजबूत करेगा बल्कि दिल्ली को शिक्षा के क्षेत्र में एक नई पहचान भी दिलाएगा। यह संस्करण समाचार-पत्र शैली में, आसान हिंदी में और नामों के साथ विस्तार से तैयार किया गया है।

कंगना रनौत ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का जताया आभार, ‘भारत भाग्य विधाता’ फिल्म दिल्ली में हुई टैक्स फ्री

12 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होगी देशभक्ति और सेवा की भावना से जुड़ी फिल्म नई दिल्ली। अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ 12 जून 2026 को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। फिल्म की रिलीज से पहले इसकी टीम पूरे देश में एक विशेष अभियान चला रही है। इस अभियान के तहत उन लोगों को सम्मानित किया जा रहा है जो बिना किसी प्रसिद्धि और पहचान की इच्छा के समाज और देश की सेवा में लगातार लगे हुए हैं। फिल्म की टीम का मानना है कि देश केवल बड़े नेताओं, अधिकारियों या मशहूर लोगों से नहीं बनता, बल्कि उन लाखों सामान्य लोगों से भी बनता है जो हर दिन अपना कर्तव्य निभाकर समाज को बेहतर बनाने का काम करते हैं। इन्हीं लोगों को सम्मान देने के उद्देश्य से देश के अलग-अलग शहरों में विशेष स्क्रीनिंग आयोजित की जा रही है। भुवनेश्वर और रायपुर के बाद दिल्ली पहुंचा अभियानफिल्म की टीम इससे पहले भुवनेश्वर और रायपुर में भी विशेष कार्यक्रम आयोजित कर चुकी है। वहां भी कई ऐसे लोगों को सम्मानित किया गया जिन्होंने समाज और देश के लिए उल्लेखनीय योगदान दिया है।इसके बाद यह अभियान देश की राजधानी दिल्ली पहुंचा, जहां फिल्म की एक भव्य और विशेष स्क्रीनिंग का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। कार्यक्रम में फिल्म से जुड़े कलाकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, सरकारी अधिकारियों और कई गणमान्य लोगों ने भी भाग लिया। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने की बड़ी घोषणाफिल्म की स्क्रीनिंग के दौरान मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने फिल्म को ध्यान से देखा। फिल्म देखने के बाद उन्होंने कहा कि यह केवल एक मनोरंजन फिल्म नहीं है, बल्कि समाज को सकारात्मक संदेश देने वाली एक प्रेरणादायक फिल्म है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि ‘भारत भाग्य विधाता’ को दिल्ली में टैक्स फ्री किया जाएगा। उनके इस फैसले का कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने जोरदार स्वागत किया। उन्होंने कहा कि ऐसी फिल्मों को प्रोत्साहन मिलना चाहिए जो देशभक्ति, सेवा और समाज के प्रति जिम्मेदारी का संदेश देती हैं। टैक्स फ्री होने से ज्यादा लोग फिल्म देख सकेंगे और इसके संदेश को समझ पाएंगे। कंगना रनौत ने मुख्यमंत्री का किया धन्यवादइस अवसर पर कंगना रनौत ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का विशेष रूप से धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने बेहद व्यस्त कार्यक्रम के बावजूद फिल्म की स्क्रीनिंग में शामिल होकर उनका उत्साह बढ़ाया है। कंगना ने कहा कि दिल्ली में पिछले कुछ समय में विकास और प्रशासन के क्षेत्र में कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री की कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि वे जनता के मुद्दों को गंभीरता से सुनती हैं और उनके समाधान के लिए लगातार प्रयास करती हैं। कंगना ने कहा, “मैं अपनी पूरी फिल्म टीम की ओर से मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का दिल से धन्यवाद करती हूं। जब मैंने उन्हें इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया तो उन्होंने तुरंत सहमति दे दी। यह हमारे लिए बहुत सम्मान की बात है।” रेखा गुप्ता ने कंगना रनौत की प्रशंसा कीमुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी कंगना रनौत के काम और उनके प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि कंगना केवल एक सफल अभिनेत्री ही नहीं हैं, बल्कि संसद में भी लोगों की आवाज को मजबूती से उठाती हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि कंगना ने अपने फिल्मी करियर में कई अलग-अलग विषयों पर काम किया है और उनकी नई फिल्म भी समाज को प्रेरित करने वाली है। उन्होंने कहा कि देशभक्ति का अर्थ केवल सीमा पर देश की रक्षा करना नहीं है। जो लोग अपने रोजमर्रा के काम के माध्यम से समाज की सेवा करते हैं, वे भी सच्चे देशभक्त हैं। यह फिल्म इसी सोच को आगे बढ़ाती है। अनदेखे नायकों को दिया गया सम्मानकार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा उन लोगों का सम्मान था जो समाज के लिए महत्वपूर्ण काम कर रहे हैं लेकिन अक्सर चर्चा में नहीं आते। इनमें सफाई कर्मचारी, नर्स, वार्ड बॉय, सुरक्षा गार्ड, पुलिसकर्मी, सामाजिक कार्यकर्ता और अन्य फ्रंटलाइन वर्कर्स शामिल थे। इन सभी लोगों ने कठिन परिस्थितियों में भी समाज की सेवा जारी रखी है। फिल्म की टीम ने कहा कि कोरोना महामारी से लेकर अन्य आपात परिस्थितियों तक इन लोगों ने अपनी जिम्मेदारियों को पूरी ईमानदारी से निभाया है। इसलिए इन्हें सम्मान देना समाज का कर्तव्य है। दिल्ली के रियल लाइफ हीरोज बने कार्यक्रम का आकर्षणदिल्ली में आयोजित इस कार्यक्रम में कई ऐसे लोगों को सम्मानित किया गया जिन्हें फिल्म की टीम ने ‘रियल लाइफ हीरो’ बताया। सम्मान पाने वालों में निशी पाठक, पुष्पा, सुमन, मेनका, नम्रता यादव, नीति शर्मा, बीके खुराना और शशि लाल शामिल थे। इन सभी को मंच पर बुलाकर ‘भारत भाग्य विधाता’ बैज प्रदान किया गया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने तालियां बजाकर उनका स्वागत किया और उनके योगदान की सराहना की। सम्मानित किए गए लोगों ने भी कहा कि यह सम्मान उनके लिए बहुत बड़ी प्रेरणा है और इससे उन्हें आगे भी समाज सेवा करने की शक्ति मिलेगी। कई केंद्रीय मंत्री भी रहे मौजूदइस कार्यक्रम में केंद्र सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री और नेता भी शामिल हुए। इनमें अन्नपूर्णा देवी, गजेंद्र सिंह शेखावत, डॉ. राज भूषण चौधरी, प्रताप राव जाधव, गिरिराज सिंह और आशीष सूद प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने फिल्म के विषय और उसके संदेश की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि समाज के वास्तविक नायकों को सम्मानित करने की यह पहल सराहनीय है और इससे लोगों को सकारात्मक प्रेरणा मिलेगी। समाज को नया संदेश देती है फिल्मफिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ का मुख्य संदेश यह है कि देश का निर्माण केवल सरकारों या बड़ी संस्थाओं द्वारा नहीं होता, बल्कि आम नागरिकों के योगदान से भी होता है। फिल्म यह दिखाने का प्रयास करती है कि हर व्यक्ति अपने काम और जिम्मेदारी के माध्यम से देश को मजबूत बनाने में योगदान दे सकता है। चाहे वह शिक्षक हो, डॉक्टर हो, सफाई कर्मचारी हो, किसान हो या फिर कोई अन्य नागरिक, हर व्यक्ति देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। फिल्म निर्माण से जुड़े प्रमुख नामफिल्म को डॉ. जयंतीलाल गड़ा के नेतृत्व में प्रस्तुत किया गया है। इसका निर्माण पेन स्टूडियोज, मणिकर्णिका फिल्म्स और परमहंस क्रिएशंस द्वारा संयुक्त रूप से

कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग से की मुलाकात, कहा- मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज करना गैरकानूनी

सिंघवी ने कहा- नटराजन पर कोई ऐसा आपराधिक मामला नहीं था, जिसका खुलासा नामांकन पत्र में करना जरूरी हो ‘चुनाव आयोग को निर्वाचन अधिकारी के फैसले को पलटने या निरस्त करने का पूरा अधिकार’ नई दिल्ली, 10 जून मध्य प्रदेश में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन के राज्यसभा नामांकन को निर्वाचन अधिकारी द्वारा खारिज किए जाने के फैसले के खिलाफ कांग्रेस का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल बुधवार को केंद्रीय चुनाव आयोग पहुंचा। कांग्रेस नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य आयुक्तों से मुलाकात कर इस निर्णय को पूरी तरह गैर-कानूनी व लोकतांत्रिक सिद्धांतों के खिलाफ बताया और तथ्यों पर आधारित विस्तृत ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, वरिष्ठ अधिवक्ता और सांसद डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, संचार विभाग के प्रभारी महासचिव जयराम रमेश, कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला, दीपा दासमुंशी, स्वयं मीनाक्षी नटराजन, विवेक तन्खा, मोहम्मद अली खान और उमर होदा शामिल थे। मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत में कांग्रेस के कानून, आरटीआई और मानवाधिकार विभाग के अध्यक्ष डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने निर्वाचन अधिकारी के फैसले पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह निर्णय पूरी तरह विकृत और कानूनी रूप से गलत है, जिसका किसी भी आधार पर समर्थन नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि निर्वाचन अधिकारी ने जिस आधार पर मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज किया है, उसका कानून में कोई अस्तित्व ही नहीं है। उनके खिलाफ ऐसा कोई आपराधिक मामला लंबित नहीं था, जिसका खुलासा कानूनन नामांकन पत्र में करना आवश्यक होता। वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने बताया कि कोर्ट से मीनाक्षी नटराजन को केवल एक नोटिस आया था, जिसमें उनसे यह पूछा गया था कि अदालत इस मामले का संज्ञान ले या नहीं। उन्होंने कहा कि मजिस्ट्रेट द्वारा संज्ञान लेना एक बेहद प्राथमिक चरण होता है, जिससे यह तय होता है कि मामला आगे चलेगा या नहीं। जब तक अदालत संज्ञान नहीं लेती, तब तक कोई भी आपराधिक मामला शुरू ही नहीं होता। उन्होंने बताया कि इस मामले में मजिस्ट्रेट ने अभी संज्ञान तक नहीं लिया है। नटराजन का पक्ष सुनने के बाद वह संज्ञान लेंगे। इसके बाद जांच होगी, चार्जशीट होगी और फिर जाकर आरोप तय होंगे। उन्होंने आगे कहा कि मजिस्ट्रेट ने संज्ञान तक नहीं लिया है, लेकिन निर्वाचन अधिकारी ने यह मान लिया कि नटराजन के खिलाफ आपराधिक मामला लंबित है। उन्होंने आगे बताया कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 33ए के अनुसार उम्मीदवार को केवल उन मामलों का खुलासा करना होता है, जिनमें अपराध सिद्ध होने पर दो साल या उससे अधिक की सजा का प्रावधान हो और जिनमें आरोप तय किए जा चुके हों। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे नामांकन खारिज करना लोकतंत्र और चुनाव में समान अवसर के सिद्धांत के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि यह संविधान के मूल ढांचे की भावना को भी आघात पहुंचाता है। कांग्रेस नेता ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग को याद दिलाया कि उसके पास निर्वाचन अधिकारी के फैसले को पलटने या उसे निरस्त करने का पूरा अधिकार क्षेत्र है। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि आयोग पहले भी हरियाणा और गुजरात के ऐसे मामलों में हस्तक्षेप कर चुका है, इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि इस मामले में चुनाव आयोग असहाय या अधिकारविहीन है।

लोकतंत्र में वोट के अधिकार को सुरक्षित बनाने के लिए कांग्रेस के बीएलए-2 सरकार और भाजपा की साजिश एसआईआर प्रक्रिया में जागरूकता से काम करके वोट चोरी पर रोक लगाएगा- देवेन्द्र यादव

नई दिल्ली, 9 जून, 2026 – दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री देवेन्द्र यादव के नेतृत्व में आज चाॅदनी चैक जिला कांग्रेस कमेटी का बीएलए-2 एसआईआर प्रशिक्षण शिविर का आयोजन आवाम ए मिर्जा गालिब ऑडिटोरियम में किया गया, जिसका आयोजन जिला अध्यक्ष श्री मोहम्मद उस्मान ने किया। श्री देवेन्द्र यादव ने परंपरागत रुप से प्रशिक्षण शिविर की शुरुआत दीप प्रज्वलित करने के साथ की। प्रशिक्षण शिविरों में प्रशिक्षण बूथ मेनेजमेंट कमेटी के चेयरमैन श्री राजेश गर्ग की टीम के द्वारा किया गया। प्रशिक्षण शिविर में प्रदेश अध्यक्ष श्री देवेन्द्र यादव के अलावा श्रीमती अलका लांबा, दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री डॉ नरेंद्र नाथ, संगठन महासचिव श्री अनिल भारद्वाज, श्री कुँवर करण सिंह पूर्व विधायक, श्री सी पी मित्तल उपाध्यक्ष, श्रीमती प्रेरणा सिंह पूर्व एम.सी., महासचिव श्री भूपेश यादव श्री मुदित अग्रवाल पूर्व विधानसभा प्रत्याशी, प्रदेश महिला अध्यक्ष श्रीमती पुष्पा सिंह, महासचिव श्री गौरी शंकर शर्मा, श्रीमती कमलेश चैधरी डीसीसी अध्यक्ष महिला कांग्रेस, श्री महमूद जिया पूर्व विधानसभा उम्मीदवार, श्री जावेद मिर्जा पूर्व डीसीसी अध्यक्ष, श्री तरूण कुमार पूर्व एआईसीसी सचिव, श्री राहुल शर्मा अध्यक्ष सोशल मीडिया, श्री राजेश गर्ग दोनों समितियों के अध्यक्ष भी मौजूद थे। प्रदेश अध्यक्ष श्री देवेन्द्र यादव ने कहा कि लोकतंत्र में वोट के अधिकार को सुरक्षित बनाने के लिए सभी बीएलए-2 को सरकार की एसआईआर प्रक्रिया को गंभीरता पूर्वक लेकर काम करना होगा, तभी हम भाजपा की वोट चोरी को नाकाम करने में कामयाब हो सकते है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस समर्थित मतदाता की पहचान सभी को होने के बाद भाजपा आसानी से उनके वोट काटने में कामयाब हो जाती है और जब तक हम कार्यवाही करते है बहुत देर हो जाती है। जिसका उदाहरण निगम चुनावों में प्रदेश अध्यक्ष रहे चै0 अनिल कुमार और कुंवर करण सिंह का वोट काटना हम सबके सामने है। श्री देवेन्द्र यादव ने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया में भाजपा की वोट चोरी पर नकेल कसना बहुत मुश्किल काम है, क्योंकि चुनाव आयोग साजिश के तहत भाजपा को फायदा पहुॅचाने के लिए काम करता रहा है। लेकिन हमारे बीएलए-2 को मुश्किल काम को जागरूकता के साथ करके वैध मतदाताओं के वोट काटने से बचाने है और अगर किसी का वोट कटता है तो तुरंत चुनाव अधिकारी, बीएलओ, एईआरओ से सम्पर्क साधकर उनका वोट पुनः बनवाने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका बीएलओ-2 निभा सकते है। उन्होंने कहा कि आने वाले वक्त में हर बूथ पर कांग्रेस का सिपाही बीएलओ-2, कार्यकर्ता के रुप में संगठन को नई मजबूती देने के लिए काम

भाजपा महिलाओं के नाम पर राजनीति कर रही है, अब महिलाएं जागरूक हो चुकी हैं – सुनील सिंह

लखनऊ, लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील सिंह ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि भाजपा चुनाव के समय महिलाओं के नाम पर बड़े-बड़े वादे करती है, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद महिलाओं को उनके वास्तविक अधिकार देने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाती। उन्होंने कहा कि महिलाओं के नाम पर राजनीति करना और उन्हें बराबरी का अधिकार न देना, यह दोहरी राजनीति ज्यादा समय तक नहीं चल सकती। महिलाओं की आड़ में राजनीति कर रही है भाजपासुनील सिंह ने कहा कि भाजपा महिलाओं के नाम पर अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रही है। महिलाओं के सम्मान और अधिकारों की बात तो की जाती है, लेकिन जब उन्हें निर्णय लेने वाली जगहों पर उचित भागीदारी देने की बात आती है तो सरकार पीछे हट जाती है। उन्होंने कहा कि देश की महिलाएं अब पहले जैसी नहीं रहीं। वे अपने अधिकारों को समझती हैं और सही समय आने पर ऐसी राजनीति का जवाब भी देंगी। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सिर्फ भाषणों और नारों से सम्मान नहीं मिलेगा। सम्मान तब मिलेगा जब उन्हें समाज और राजनीति में बराबर का स्थान दिया जाएगा। 33 प्रतिशत नहीं, 50 प्रतिशत आरक्षण की जरूरतलोकदल अध्यक्ष सुनील सिंह ने कहा कि महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि देश की लगभग आधी आबादी महिलाएं हैं, इसलिए उन्हें भी राजनीतिक और प्रशासनिक संस्थाओं में कम से कम 50 प्रतिशत भागीदारी मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि महिलाएं देश की आबादी का आधा हिस्सा हैं, तो उन्हें फैसले लेने वाली संस्थाओं में भी आधी हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। केवल सीमित आरक्षण देकर महिलाओं के अधिकारों की बात करना उचित नहीं है। कानून बनाना ही काफी नहींसुनील सिंह ने कहा कि केवल कानून बनाकर राजनीतिक लाभ लेना आसान है, लेकिन असली चुनौती उस कानून को जमीन पर लागू करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं को अधिकार देने की बात तो होती है, लेकिन व्यवहार में उन्हें पर्याप्त अवसर नहीं दिए जाते। उन्होंने कहा कि महिलाओं को चुनाव लड़ने के अवसर, संगठन में जिम्मेदार पद और प्रशासनिक संस्थाओं में मजबूत भूमिका मिलनी चाहिए। जब तक ऐसा नहीं होगा, तब तक महिला सशक्तिकरण अधूरा रहेगा। पुरुष नेताओं की सोच बदलने की जरूरतसुनील सिंह ने कहा कि महिला आरक्षण का मुद्दा वर्षों से चर्चा में है, लेकिन इसका सबसे बड़ा कारण कुछ पुरुष नेताओं की सोच है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई नेता अपनी राजनीतिक सीटें और प्रभाव छोड़ना नहीं चाहते, इसलिए महिलाओं को आगे बढ़ाने में बाधाएं पैदा की जाती हैं। उन्होंने कहा कि यदि राजनीतिक दल वास्तव में महिलाओं को आगे लाना चाहते हैं, तो उन्हें अपनी सोच बदलनी होगी और महिलाओं को नेतृत्व के अवसर देने होंगे। राजनीति और प्रशासन में महिलाओं की बराबर भागीदारी जरूरीलोकदल अध्यक्ष ने कहा कि महिलाओं का सम्मान केवल शब्दों से नहीं बल्कि भागीदारी से तय होता है। राजनीति, प्रशासन, शिक्षा, न्याय व्यवस्था और अन्य महत्वपूर्ण संस्थाओं में महिलाओं की मजबूत मौजूदगी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा बनेंगी, तभी समाज में वास्तविक बदलाव दिखाई देगा। महिलाओं को केवल वोटर या समर्थक के रूप में नहीं बल्कि नीति निर्धारक के रूप में भी देखा जाना चाहिए। महिलाओं से एकजुट होने की अपीलसुनील सिंह ने देश की महिलाओं से अपील करते हुए कहा कि वे अपने अधिकारों के लिए एकजुट हों और दिखावटी राजनीति को पहचानें। उन्होंने कहा कि महिलाओं की एकता ही उन्हें उनका हक दिला सकती है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपने अधिकारों, सम्मान और बराबरी की हिस्सेदारी के लिए संगठित होकर आवाज उठानी चाहिए। जब महिलाएं एकजुट होकर अपने अधिकारों की मांग करेंगी, तब कोई भी राजनीतिक दल उनकी अनदेखी नहीं कर पाएगा। महिलाओं को बराबरी का हक मिलना चाहिएअपने वक्तव्य के अंत में सुनील सिंह ने कहा कि देश के विकास और लोकतंत्र की मजबूती के लिए महिलाओं की बराबर भागीदारी बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को केवल आरक्षण का लाभार्थी नहीं बल्कि देश के निर्माण में बराबर का साझेदार माना जाना चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति और अधिक जागरूक होंगी तथा समान भागीदारी की लड़ाई को और मजबूत बनाएंगी।

विकसित भारत 2047 के लिए जागरूक समाज और मजबूत विधानसभाएं जरूरी – विजेंद्र गुप्ता

चंडीगढ़ में होने वाले सीपीए सम्मेलन में शामिल होंगे दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता 8 और 9 जून को चंडीगढ़ में आयोजित होने वाले राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (सीपीए) भारत क्षेत्र जोन-2 उत्तर क्षेत्र सम्मेलन में हिस्सा लेने जा रहे हैं। इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में उत्तर भारत के कई राज्यों के विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधि शामिल होंगे। सम्मेलन का मुख्य विषय “विकसित भारत 2047 के लक्ष्य और भविष्य की चुनौतियों को साकार करने में जागरूक समाज और विधायकों की भूमिका” रखा गया है। यह सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित हो रहा है जब भारत वर्ष 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में जनप्रतिनिधियों और समाज की भूमिका को लेकर गंभीर चर्चा की जाएगी। भारत को विकसित राष्ट्र बनाने पर होगी चर्चाइस सम्मेलन का सबसे बड़ा उद्देश्य भारत के भविष्य को लेकर विचार-विमर्श करना है। वर्ष 2047 में देश अपनी आजादी के 100 वर्ष पूरे करेगा। केंद्र और राज्य सरकारें इस समय विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए कई योजनाओं पर काम कर रही हैं। सम्मेलन में यह चर्चा होगी कि देश के विकास में विधानसभाओं, विधायकों और आम लोगों की क्या भूमिका हो सकती है। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि भविष्य में आने वाली चुनौतियों का सामना कैसे किया जाए ताकि विकास की गति बनी रहे।विजेंद्र गुप्ता इस विषय पर अपने विचार रखते हुए बताएंगे कि जनता और जनप्रतिनिधियों के बीच मजबूत संबंध देश को आगे बढ़ाने में सबसे बड़ी ताकत बन सकते हैं। विधायकों की जिम्मेदारी पर रहेगा विशेष फोकसकिसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में विधायक और जनप्रतिनिधि जनता और सरकार के बीच एक मजबूत कड़ी का काम करते हैं। जनता की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाना और उनके समाधान के लिए प्रयास करना उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है। सम्मेलन में इस बात पर चर्चा होगी कि बदलते समय के साथ विधायकों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। अब केवल कानून बनाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि जनता की जरूरतों को समझना और उन्हें नीतियों में शामिल करना भी जरूरी है। विजेंद्र गुप्ता इस बात पर जोर देंगे कि यदि विधायक पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ काम करें तो विकास की योजनाएं तेजी से जमीन पर उतर सकती हैं। जागरूक समाज से मजबूत होगा लोकतंत्रसम्मेलन में यह भी बताया जाएगा कि केवल सरकार या विधायक ही देश का विकास नहीं कर सकते। इसके लिए समाज के हर व्यक्ति की भागीदारी जरूरी है। जब नागरिक अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक होते हैं तो लोकतंत्र और मजबूत बनता है। जागरूक नागरिक सरकार की योजनाओं का लाभ भी बेहतर तरीके से उठा सकते हैं और समाज के विकास में योगदान भी दे सकते हैं। विजेंद्र गुप्ता का मानना है कि विकसित भारत का सपना तभी पूरा होगा जब देश का हर नागरिक विकास की इस यात्रा में अपनी भूमिका निभाएगा। लोकतांत्रिक संस्थाओं को और मजबूत बनाने की जरूरतआज के समय में लोकतांत्रिक संस्थाओं को और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। विधानसभाएं लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और यहां लिए गए फैसलों का सीधा असर जनता के जीवन पर पड़ता है। सम्मेलन में संसदीय कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने, नई तकनीकों का उपयोग बढ़ाने और विधायी प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाने पर भी चर्चा होगी। विजेंद्र गुप्ता का मानना है कि मजबूत विधानसभाएं और पारदर्शी व्यवस्था लोकतंत्र को नई ताकत देती हैं और जनता का भरोसा बढ़ाती हैं। भविष्य की चुनौतियों पर होगा मंथनदेश तेजी से बदल रहा है और इसके साथ नई चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, पर्यावरण, तकनीक और शहरी विकास जैसे कई मुद्दों पर लगातार काम करने की जरूरत है। सम्मेलन में इन विषयों पर विशेषज्ञों और जनप्रतिनिधियों के बीच चर्चा होगी। यह समझने की कोशिश की जाएगी कि आने वाले वर्षों में कौन-कौन सी चुनौतियां सामने आ सकती हैं और उनसे निपटने के लिए अभी से क्या तैयारी की जानी चाहिए। विजेंद्र गुप्ता का कहना है कि समय रहते सही योजना और सही नीतियां बनाकर भविष्य की चुनौतियों का सामना किया जा सकता है। राज्यों के बीच अनुभव साझा करने का मिलेगा अवसरइस सम्मेलन की एक खास बात यह भी है कि इसमें कई राज्यों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। सभी राज्य अपने-अपने अनुभव साझा करेंगे और एक-दूसरे से सीखेंगे। किसी राज्य में लागू हुई सफल योजना दूसरे राज्य के लिए भी उपयोगी साबित हो सकती है। इसी सोच के साथ सम्मेलन में विभिन्न विषयों पर चर्चा होगी और बेहतर सुझाव सामने आएंगे। विजेंद्र गुप्ता भी दिल्ली विधानसभा के अनुभव साझा करेंगे और अन्य राज्यों के सफल प्रयासों के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे। जनता और जनप्रतिनिधियों के बीच संवाद बढ़ाने पर जोरसम्मेलन में जनता और जनप्रतिनिधियों के बीच संवाद को मजबूत बनाने पर भी विशेष चर्चा होगी। लोकतंत्र की सफलता इसी बात पर निर्भर करती है कि जनता की आवाज कितनी प्रभावी ढंग से सरकार तक पहुंच रही है। विजेंद्र गुप्ता का मानना है कि जब जनता की समस्याओं को ध्यान से सुना जाएगा और उनके समाधान के लिए काम किया जाएगा, तभी लोकतंत्र का वास्तविक उद्देश्य पूरा होगा। विकसित भारत के सपने को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदमयह सम्मेलन केवल विचार-विमर्श का मंच नहीं है, बल्कि भारत के भविष्य को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास भी है। यहां होने वाली चर्चाएं और सुझाव आने वाले समय में नीतियों और योजनाओं को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि विकसित भारत 2047 का लक्ष्य केवल सरकार का नहीं, बल्कि पूरे देश का लक्ष्य है। इसे हासिल करने के लिए जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, युवाओं, महिलाओं और आम नागरिकों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि जागरूक समाज, मजबूत लोकतांत्रिक संस्थाओं और जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों के सहयोग से भारत वर्ष 2047 तक दुनिया के विकसित देशों की श्रेणी में अपनी एक अलग पहचान बनाने में सफल होगा। यह सम्मेलन उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण और सार्थक कदम साबित होगा।

मृत कर्मचारी के ट्रांसफर आदेश पर एमसीडी को घेरा, अंकुश नारंग ने उठाए गंभीर सवाल

मृत और निलंबित जेई का ट्रांसफर होने पर आम आदमी पार्टी ने भाजपा शासित एमसीडी पर साधा निशानादिल्ली नगर निगम (एमसीडी) में जारी एक ट्रांसफर आदेश को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया है कि भाजपा शासित एमसीडी ने एक ऐसे कर्मचारी का भी तबादला कर दिया जिसकी कई महीने पहले मृत्यु हो चुकी है। इसके अलावा एक निलंबित कर्मचारी का नाम भी ट्रांसफर सूची में शामिल किया गया है। इस मामले को लेकर आम आदमी पार्टी ने एमसीडी की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। एमसीडी में नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने कहा कि यह घटना भाजपा शासित एमसीडी की लापरवाही और अव्यवस्था को उजागर करती है। उन्होंने कहा कि यदि निगम को अपने कर्मचारियों की वर्तमान स्थिति तक की जानकारी नहीं है तो इससे प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठना स्वाभाविक है। अंकुश नारंग ने कहा- सात महीने पहले मृत कर्मचारी का कर दिया ट्रांसफरअंकुश नारंग ने बताया कि एमसीडी की ओर से जारी ट्रांसफर सूची में जूनियर इंजीनियर (जेई) अपूर्व भटनागर का नाम शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि अपूर्व भटनागर का लगभग सात महीने पहले निधन हो चुका है, इसके बावजूद उनका तबादला कर दिया गया। उन्होंने कहा कि यह केवल एक गलती नहीं बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा उदाहरण है। किसी कर्मचारी की मृत्यु के कई महीने बाद उसका ट्रांसफर आदेश जारी होना यह दिखाता है कि संबंधित विभाग में रिकॉर्ड और सत्यापन की प्रक्रिया कितनी कमजोर है। निलंबित अधिकारी का नाम भी ट्रांसफर सूची में शामिलअंकुश नारंग ने कहा कि ट्रांसफर सूची में केवल मृत कर्मचारी का ही नहीं बल्कि एक निलंबित अधिकारी का नाम भी शामिल किया गया है। उन्होंने बताया कि जेई सिविल अतुल कुमार सुमन पिछले लगभग नौ महीने से निलंबित हैं, लेकिन इसके बावजूद उनका नाम भी ट्रांसफर आदेश में डाल दिया गया। उन्होंने कहा कि यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब कोई कर्मचारी निलंबित है तो उसका तबादला कैसे किया जा सकता है। इससे साफ पता चलता है कि ट्रांसफर सूची तैयार करते समय जरूरी जांच और सत्यापन नहीं किया गया। ट्रांसफर आदेश की जांच की मांगअंकुश नारंग ने मांग की कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि मृत और निलंबित कर्मचारियों के नाम सूची में किस अधिकारी ने शामिल किए। उन्होंने कहा कि जो अधिकारी इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार हैं, उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की गलतियां दोबारा न हों। एमसीडी की कार्यशैली पर उठे सवालअंकुश नारंग ने कहा कि इस घटना से यह सवाल खड़ा होता है कि क्या एमसीडी में बिना किसी जांच और सत्यापन के फाइलों पर हस्ताक्षर किए जा रहे हैं। उन्होंने पूछा कि क्या संबंधित अधिकारियों को अपने विभाग के कर्मचारियों की स्थिति की जानकारी भी नहीं है। उन्होंने कहा कि जब मृत और निलंबित कर्मचारियों के तबादले किए जा रहे हों तो इससे प्रशासनिक व्यवस्था की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। यह केवल एक तकनीकी गलती नहीं बल्कि व्यवस्था की गंभीर कमजोरी को दर्शाता है। एडिशनल डिप्टी कमिश्नर के हस्ताक्षर पर भी उठाए सवालअंकुश नारंग ने बताया कि यह ट्रांसफर आदेश 5 जून 2026 को जारी किया गया था। इस आदेश पर इंजीनियरिंग विभाग के एडिशनल डिप्टी कमिश्नर के हस्ताक्षर भी मौजूद हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि आदेश जारी करने से पहले सूची की जांच की गई होती तो ऐसी स्थिति नहीं बनती। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार अधिकारियों को इस मामले में जवाब देना चाहिए कि आखिर इतनी बड़ी चूक कैसे हुई। डिजिटल सत्यापन प्रणाली लागू करने की मांगआम आदमी पार्टी ने केवल जांच की मांग ही नहीं की बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए नई व्यवस्था लागू करने की भी मांग की है। अंकुश नारंग ने कहा कि एमसीडी को डिजिटल सत्यापन प्रणाली शुरू करनी चाहिए। इसके तहत किसी भी ट्रांसफर, पदोन्नति या प्रशासनिक आदेश को जारी करने से पहले कर्मचारियों की वर्तमान स्थिति की ऑनलाइन जांच की जाए। इससे इस प्रकार की गलतियों को रोका जा सकेगा। भाजपा पर लगाए गंभीर आरोपअंकुश नारंग ने आरोप लगाया कि भाजपा के नेतृत्व में एमसीडी की प्रशासनिक व्यवस्था लगातार कमजोर होती जा रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग में भी गलत वरिष्ठता सूची और पदोन्नति सूची तैयार होने के मामले सामने आते रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रांसफर प्रक्रिया में भी लगातार अनियमितताओं की शिकायतें मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा को यह बताना चाहिए कि आखिर प्रशासनिक व्यवस्था में बार-बार ऐसी गलतियां क्यों हो रही हैं। आम आदमी पार्टी के खुलासे के बाद वापस लिया गया आदेशअंकुश नारंग ने दावा किया कि जैसे ही आम आदमी पार्टी ने इस मामले को सार्वजनिक किया, एमसीडी ने तुरंत कार्रवाई करते हुए ट्रांसफर आदेश वापस ले लिया। उन्होंने कहा कि यदि यह मामला सामने नहीं आता तो यह गंभीर गलती शायद अधिकारियों की नजर में भी नहीं आती। इससे यह स्पष्ट होता है कि प्रशासनिक स्तर पर निगरानी और जवाबदेही की कमी है। महापौर प्रवेश वाही से भी मांगा जवाबअंकुश नारंग ने इस मामले में एमसीडी के महापौर प्रवेश वाही से भी जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि जब इतनी बड़ी प्रशासनिक गलती हुई है तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि दिल्ली की जनता जानना चाहती है कि मृत और निलंबित कर्मचारियों के नाम ट्रांसफर सूची में कैसे शामिल हुए और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कदम उठाए जाएंगे। जवाबदेही तय करने की मांगआम आदमी पार्टी ने कहा है कि इस मामले में केवल आदेश वापस लेना पर्याप्त नहीं है। पार्टी का कहना है कि जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। अंकुश नारंग ने कहा कि यदि इस तरह की गलतियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी तो भविष्य में भी प्रशासनिक लापरवाही जारी रहेगी। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की जांच कर सच्चाई जनता के सामने लाई जाए और जवाबदेही तय की जाए। उन्होंने कहा कि दिल्ली की जनता एक जिम्मेदार और पारदर्शी प्रशासन की अपेक्षा करती है। इसलिए एमसीडी को इस मामले में स्पष्ट जवाब देना

दिल्ली स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी का टैलेंट हंट पूरा, युवा खिलाड़ियों को मिला अपनी प्रतिभा दिखाने का बड़ा मौका

दिल्ली स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी ने खोजे नए खेल सितारे नई दिल्ली। दिल्ली स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी (डीएसयू) ने खेलों में प्रतिभाशाली बच्चों को आगे बढ़ाने के लिए स्टेज-1 टैलेंट हंट कार्यक्रम का सफल आयोजन किया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बच्चों ने हिस्सा लिया और अपनी खेल प्रतिभा का प्रदर्शन किया। त्यागराज स्टेडियम में आयोजित इस कार्यक्रम में बच्चों के साथ-साथ उनके अभिभावकों ने भी उत्साह के साथ भाग लिया। पूरे आयोजन का उद्देश्य ऐसे बच्चों को पहचानना था जो भविष्य में अच्छे खिलाड़ी बन सकते हैं और देश का नाम रोशन कर सकते हैं। बच्चों ने दिखाया जोश और उत्साहटैलेंट हंट में शामिल होने वाले बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिला। कक्षा 6 में प्रवेश लेने के इच्छुक बच्चों ने विभिन्न खेल परीक्षणों में हिस्सा लिया। बच्चों ने पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनी शारीरिक क्षमता और खेल कौशल का प्रदर्शन किया। मैदान में बच्चों का जोश देखने लायक था। कई बच्चों ने बेहतरीन प्रदर्शन कर चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। आधुनिक तकनीक से हुई खिलाड़ियों की जांचदिल्ली स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी ने खिलाड़ियों की प्रतिभा को परखने के लिए आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल किया। लेवल-1 और लेवल-2 ट्रायल्स के दौरान बच्चों की दौड़ने की क्षमता, संतुलन, ताकत, गति और अन्य शारीरिक योग्यताओं की जांच की गई। इसके साथ ही अलग-अलग खेलों से जुड़े विशेष परीक्षण भी कराए गए। इससे खिलाड़ियों की वास्तविक क्षमता का सही आकलन करने में मदद मिली। निष्पक्ष तरीके से हुआ चयनविश्वविद्यालय ने पूरी चयन प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने पर विशेष ध्यान दिया। विश्वविद्यालय के अधिकारी, अनुभवी कोच और तकनीकी विशेषज्ञ पूरे समय मौजूद रहे। हर बच्चे का मूल्यांकन तय मानकों के अनुसार किया गया। इससे सभी प्रतिभागियों को समान अवसर मिला और चयन प्रक्रिया पर विश्वास भी बढ़ा। अभिभावकों ने की आयोजन की सराहनाकार्यक्रम में मौजूद अभिभावकों ने दिल्ली स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी के प्रयासों की जमकर प्रशंसा की। उनका कहना था कि आयोजन की व्यवस्था बहुत अच्छी थी और बच्चों को किसी तरह की परेशानी नहीं हुई। अभिभावकों ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम बच्चों को आगे बढ़ने का मौका देते हैं और उनमें आत्मविश्वास पैदा करते हैं। कई अभिभावकों ने विश्वविद्यालय द्वारा अपनाई गई वैज्ञानिक चयन प्रक्रिया को भी सराहा। खेल और पढ़ाई दोनों पर दिया जाता है ध्यानदिल्ली स्पोर्ट्स स्कूल में प्रवेश पाने वाले बच्चों को केवल खेल प्रशिक्षण ही नहीं बल्कि अच्छी शिक्षा भी दी जाती है। यहां छात्रों को आधुनिक खेल सुविधाएं, अनुभवी प्रशिक्षकों का मार्गदर्शन और खेल विज्ञान की सहायता मिलती है। साथ ही बच्चों के रहने और पढ़ाई की भी बेहतर व्यवस्था की जाती है। इसका उद्देश्य बच्चों का हर क्षेत्र में विकास करना है ताकि वे अच्छे खिलाड़ी बनने के साथ-साथ अच्छे विद्यार्थी भी बन सकें। अगले चरण की तैयारी शुरूस्टेज-1 टैलेंट हंट के सफल आयोजन के बाद अब चयनित खिलाड़ियों के लिए लेवल-3 परीक्षण आयोजित किए जाएंगे। यह परीक्षण जून के दूसरे सप्ताह में होंगे। इन परीक्षणों में खिलाड़ियों की क्षमता को और गहराई से परखा जाएगा। सफल खिलाड़ियों को दिल्ली स्पोर्ट्स स्कूल में प्रवेश का अवसर मिलेगा। भविष्य के चैंपियन तैयार करने की दिशा में बड़ा कदमदिल्ली स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी का यह प्रयास देश के भविष्य के खिलाड़ियों को तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विश्वविद्यालय का लक्ष्य जमीनी स्तर से प्रतिभाओं को पहचानना और उन्हें बेहतर प्रशिक्षण देना है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बच्चों को सही उम्र में सही मार्गदर्शन और सुविधाएं मिलें तो वे भविष्य में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी सफलता हासिल कर सकते हैं। दिल्ली स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी लगातार ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन कर रही है ताकि अधिक से अधिक बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिल सके। यह टैलेंट हंट भी उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ है, जिससे आने वाले समय में देश को कई नए खेल सितारे मिलने की उम्मीद है।

कैंसर मरीजों की दवाओं की कमी पर भड़के देवेंद्र यादव, उपराज्यपाल से उच्च स्तरीय जांच की मांग

नई दिल्ली, 4 जून 2026। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने दिल्ली राज्य कैंसर संस्थान में कैंसर के गंभीर और गरीब मरीजों के इलाज के लिए जरूरी कीमोथेरेपी दवाओं की भारी कमी पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने इस मामले को बेहद गंभीर बताते हुए दिल्ली के उपराज्यपाल को पत्र लिखकर पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। साथ ही उन्होंने कहा कि कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से जूझ रहे मरीजों को समय पर दवाएं न मिलना स्वास्थ्य व्यवस्था की बड़ी विफलता है। कैंसर मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ नहीं होना चाहिएदेवेंद्र यादव ने कहा कि दिल्ली राज्य कैंसर संस्थान में कई महत्वपूर्ण कीमोथेरेपी दवाएं उपलब्ध नहीं हैं, जिससे गरीब और जरूरतमंद मरीजों के इलाज पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने कहा कि कैंसर का इलाज पहले से ही बेहद महंगा होता है और ऐसे में सरकारी अस्पतालों में दवाओं की कमी मरीजों और उनके परिवारों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है। उन्होंने कहा कि जिन मरीजों को मुफ्त या रियायती इलाज की उम्मीद होती है, उन्हें अब बाहर से महंगी दवाएं खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। यह स्थिति बेहद चिंताजनक है और सरकार को तुरंत इस पर कार्रवाई करनी चाहिए। दिल्ली में लगातार बढ़ रहे हैं कैंसर के मामलेदेवेंद्र यादव ने कहा कि दिल्ली में पिछले कई वर्षों से वायु प्रदूषण, धूल, दूषित यमुना जल और मिलावटी खाद्य पदार्थों के कारण लोगों का स्वास्थ्य लगातार प्रभावित हो रहा है। राजधानी के लोग सांस, फेफड़े, लीवर और पेट से जुड़ी बीमारियों के साथ-साथ कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का भी सामना कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि दिल्ली में हर साल हजारों नए कैंसर मरीज सामने आ रहे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2004 में दिल्ली में लगभग 28 हजार कैंसर मरीज थे, जबकि वर्तमान समय में यह संख्या लाखों तक पहुंच चुकी है। हर वर्ष लगभग 28 से 29 हजार नए कैंसर के मामले दर्ज किए जा रहे हैं। देवेंद्र यादव ने कहा कि दिल्ली में प्रति एक लाख आबादी पर पुरुषों में कैंसर की दर 146.70 और महिलाओं में 132.50 है। यह आंकड़े देश के अन्य बड़े शहरों जैसे मुंबई, कोलकाता और अहमदाबाद से भी अधिक हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति राजधानी के लिए खतरे की घंटी है और सरकार को इस दिशा में गंभीर कदम उठाने चाहिए। 22 प्रतिशत कीमोथेरेपी दवाएं अस्पताल में नहीं हैं उपलब्धदेवेंद्र यादव ने अपने पत्र में बताया कि दिल्ली राज्य कैंसर संस्थान में कीमोथेरेपी से जुड़ी लगभग 22 प्रतिशत जरूरी दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। इन दवाओं की कमी के कारण मरीजों की जान खतरे में पड़ सकती है। उन्होंने कहा कि कई महत्वपूर्ण दवाओं की कीमत इतनी अधिक है कि गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार उन्हें खरीदने की स्थिति में नहीं होते। कुछ दवाओं की कीमत हजारों से लेकर लाखों रुपये तक पहुंच जाती है। उनके अनुसार बेवाकिजुमैब जैसी दवा की कीमत 3 हजार से 35 हजार रुपये तक है। सेटवसीमब की एक डोज की कीमत 20 हजार से 79 हजार रुपये तक पहुंच सकती है। एफटिनिब की एक स्ट्रिप 4 हजार से 12 हजार रुपये तक की है जबकि गोसेरेलिन इंजेक्शन की कीमत 21 हजार से 29 हजार रुपये तक है। ऐसी स्थिति में आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए इलाज जारी रखना बेहद मुश्किल हो जाता है। जीवन रक्षक दवाओं की कमी से बढ़ रहा नकली दवाओं का खतरादेवेंद्र यादव ने आरोप लगाया कि सरकारी अस्पतालों में जीवन रक्षक कैंसर दवाओं की कमी का फायदा उठाकर नकली दवाओं का कारोबार बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब मरीजों को अस्पतालों में दवाएं नहीं मिलतीं तो वे मजबूरी में निजी बाजार का रुख करते हैं, जहां नकली दवाओं का खतरा बढ़ जाता है।उन्होंने कहा कि यह केवल स्वास्थ्य का मामला नहीं बल्कि लोगों की जिंदगी से जुड़ा विषय है। सरकार को इस पर तुरंत सख्त कार्रवाई करनी चाहिए ताकि मरीजों को सुरक्षित और असली दवाएं मिल सकें। सामान्य चिकित्सा सामग्री की भी कमीदेवेंद्र यादव ने कहा कि दिल्ली राज्य कैंसर संस्थान में केवल कैंसर की दवाओं की ही कमी नहीं है, बल्कि रोजमर्रा की चिकित्सा सामग्री भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं है। उन्होंने बताया कि बीटाडीन, डिस्पोजेबल सिरिंज, सर्जिकल मास्क, नोजल प्रोंग कैनुला और राइल्स ट्यूब जैसी सामान्य और जरूरी वस्तुओं की भी कमी की शिकायतें सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति अस्पताल के प्रशासनिक प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े करती है। उपराज्यपाल से हस्तक्षेप की मांगदेवेंद्र यादव ने उपराज्यपाल से अपील की कि वह स्वयं इस मामले में हस्तक्षेप करें और दिल्ली की स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए तुरंत ठोस कदम उठाएं। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया जाए ताकि दवाओं की कमी के कारणों का पता लगाया जा सके और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय खरीद एजेंसी के माध्यम से जल्द से जल्द आवश्यक कीमोथेरेपी दवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए ताकि गरीब कैंसर मरीजों का इलाज प्रभावित न हो और उनकी जान बचाई जा सके। मरीजों की जिंदगी बचाना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारीदेवेंद्र यादव ने कहा कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से लड़ रहे मरीजों को समय पर इलाज और दवाएं उपलब्ध कराना सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही सीधे लोगों के जीवन को प्रभावित करती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि उपराज्यपाल इस गंभीर विषय पर तत्काल ध्यान देंगे और मरीजों को राहत दिलाने के लिए आवश्यक कदम उठाएंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि दिल्ली के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए ताकि किसी भी मरीज को दवाओं की कमी के कारण अपनी जान न गंवानी पड़े।

दिल्ली में अवैध निर्माण और भ्रष्टाचार पर फूटा देवेंद्र यादव का गुस्सा, कहा- मिलीभगत खत्म नहीं हुई तो ऐसे हादसों में लोग मरते रहेंगे

नई दिल्ली। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने मालवीय नगर के हौजरानी स्थित लेमन ग्रीन रेस्टोरेंट में हुए भीषण अग्निकांड को लेकर भाजपा सरकार, नगर निगम, फायर विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि जब तक अवैध निर्माण को संरक्षण देने वाली सरकारी एजेंसियों की मिलीभगत खत्म नहीं होगी, तब तक दिल्ली में इस तरह के दर्दनाक हादसे होते रहेंगे और लोगों की जान जाती रहेगी। मालवीय नगर अग्निकांड पर देवेंद्र यादव ने जताया गहरा दुखमालवीय नगर के हौजरानी इलाके में हुए भीषण अग्निकांड के बाद देवेंद्र यादव ने घटनास्थल का दौरा किया और मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की। इस हादसे में 21 लोगों की मौत हो गई, जबकि तीन दर्जन से अधिक लोग घायल हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक दुर्घटना नहीं बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्ट व्यवस्था का परिणाम है। देवेंद्र यादव ने कहा कि राजधानी दिल्ली में लगातार हो रहे हादसे यह साबित करते हैं कि नियमों का पालन कराने वाली एजेंसियां अपना काम ईमानदारी से नहीं कर रही हैं। यदि समय रहते कार्रवाई की जाती तो इतने लोगों की जान बचाई जा सकती थी। सरकारी एजेंसियों की मिलीभगत से बढ़ रहे हैं अवैध निर्माणदेवेंद्र यादव ने आरोप लगाया कि दिल्ली में अवैध निर्माण का कारोबार बिना सरकारी संरक्षण के संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि नगर निगम, डीडीए, फायर विभाग और अन्य लाइसेंसिंग एजेंसियों की मिलीभगत के कारण नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि किसी भवन को सीमित संख्या में कमरे चलाने की अनुमति दी गई थी तो फिर वहां कई गुना अधिक कमरे कैसे बन गए। यह सवाल सीधे तौर पर उन अधिकारियों की भूमिका पर खड़ा होता है जिन्होंने समय रहते कार्रवाई नहीं की। भाजपा सरकार की प्रशासनिक विफलता का परिणाम हैं ऐसे हादसेदिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा शासन में प्रशासन पूरी तरह से विफल साबित हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में शासन और प्रशासन दोनों ही भ्रष्टाचार की गिरफ्त में हैं। अधिकारियों पर किसी प्रकार का नियंत्रण दिखाई नहीं देता और आम जनता को इसकी कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों के दौरान यह चौथा बड़ा हादसा है जिसमें लोगों की मौत हुई है, लेकिन अब तक किसी भी मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। इससे साफ है कि सरकार जवाबदेही तय करने में विफल रही है। मुख्यमंत्री का घटनास्थल पर नहीं पहुंचना असंवेदनशीलतादेवेंद्र यादव ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इतने बड़े हादसे के बाद मुख्यमंत्री का घटनास्थल पर न पहुंचना बेहद दुखद और असंवेदनशील रवैया है। उनका कहना था कि ऐसी त्रासदियों के समय सरकार के शीर्ष नेतृत्व को पीड़ित परिवारों के साथ खड़ा होना चाहिए और उन्हें भरोसा दिलाना चाहिए कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। लेकिन ऐसा होता दिखाई नहीं दे रहा है। फायर विभाग और निगम अधिकारियों की भूमिका की हो जांचदेवेंद्र यादव ने मांग की कि इस पूरे मामले में फायर विभाग, नगर निगम और लाइसेंस जारी करने वाले अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि यदि भवन में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था तो संबंधित विभागों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की।उन्होंने कहा कि जांच केवल औपचारिकता नहीं होनी चाहिए बल्कि दोषी अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। दिल्ली का बुनियादी ढांचा पूरी तरह चरमरायादेवेंद्र यादव ने कहा कि भाजपा शासन में दिल्ली का बुनियादी ढांचा पूरी तरह चरमरा गया है। चाहे सड़कें हों, सीवर व्यवस्था हो, भवन निर्माण नियम हों या फिर अग्नि सुरक्षा व्यवस्था, हर क्षेत्र में अव्यवस्था और भ्रष्टाचार देखने को मिल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि निगम और दिल्ली सरकार के विभिन्न विभागों में उच्च स्तर का भ्रष्टाचार फैला हुआ है, जिसके कारण नियमों का पालन कराने की बजाय उन्हें नजरअंदाज किया जाता है। इसका सबसे बड़ा नुकसान आम नागरिकों को उठाना पड़ रहा है। मृतकों और घायलों को अधिक मुआवजा देने की मांगदेवेंद्र यादव ने प्रधानमंत्री राहत कोष से घोषित मुआवजे को अपर्याप्त बताते हुए कहा कि मृतकों के परिवारों और घायलों को अधिक आर्थिक सहायता दी जानी चाहिए। उन्होंने दिल्ली सरकार से मांग की कि वह अपने स्तर पर अतिरिक्त मुआवजे की घोषणा करे ताकि पीड़ित परिवारों को राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खो दिया है, उनके दर्द की भरपाई नहीं की जा सकती, लेकिन सरकार का दायित्व है कि वह आर्थिक और सामाजिक रूप से उनके साथ खड़ी दिखाई दे। दोषियों की जवाबदेही तय करने की उठी मांगदेवेंद्र यादव ने कहा कि दिल्ली में लगातार हो रही आग की घटनाओं और भवन हादसों के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। उन्होंने मांग की कि सरकार स्पष्ट रूप से बताए कि ऐसे मामलों में कौन जिम्मेदार है और उसके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि यदि भ्रष्टाचार और अवैध निर्माण के खिलाफ कठोर कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में भी दिल्ली के लोगों को इसी तरह की त्रासदियों का सामना करना पड़ेगा। इसलिए सरकार को तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करते हुए दोषियों को कानून के दायरे में लाना चाहिए और राजधानी में सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना चाहिए।