
संजय सिंह ने राम मंदिर जमीन खरीद मामले के दस्तावेज एसआईटी को सौंपे, निष्पक्ष जांच की उठाई मांग
नई दिल्ली, 25 जून 2026।
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद और उत्तर प्रदेश प्रभारी संजय सिंह ने राम मंदिर से जुड़ी जमीन खरीद के कथित घोटाले को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने इस मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) को सौंप दिए हैं। संजय सिंह का कहना है कि उन्होंने भगवान श्रीराम के भक्तों और देश की जनता के हित में यह कदम उठाया है ताकि सच्चाई सामने आ सके और यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच हो सके। इस मामले को लेकर आम आदमी पार्टी ने भी केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि करोड़ों लोगों ने भगवान श्रीराम के मंदिर निर्माण के लिए श्रद्धा और विश्वास के साथ दान दिया था। इसलिए मंदिर से जुड़े धन और जमीन खरीद के मामलों में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए।
लखनऊ पहुंचकर एसआईटी को सौंपे दस्तावेज
संजय सिंह ने बताया कि एसआईटी के अध्यक्ष विजय विश्वास पंत ने उन्हें लखनऊ स्थित कार्यालय में बुलाया था। निर्धारित समय पर पहुंचकर उन्होंने जांच टीम को जमीन खरीद से संबंधित सभी जरूरी दस्तावेज सौंप दिए। उन्होंने कहा कि उनके पास कुल 13 दस्तावेज थे, लेकिन कुछ दस्तावेज एक-दूसरे से जुड़े हुए थे। इसलिए उन्होंने 11 सेट दस्तावेज जांच अधिकारियों को दिए। संजय सिंह ने कहा कि अब सारी जानकारी और दस्तावेज जांच एजेंसी के पास हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि एसआईटी पूरी गंभीरता से मामले की जांच करेगी और जो भी सच होगा, वह देश के सामने आएगा।
अरविंद केजरीवाल ने क्या कहा?
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि श्रीराम मंदिर में चढ़ावे और जमीन खरीद से जुड़े मामलों की जांच कर रही एसआईटी को संजय सिंह ने सभी सबूत सौंप दिए हैं। उन्होंने कहा कि अब जांच एजेंसी की जिम्मेदारी है कि वह इन दस्तावेजों की जांच करे और लोगों के सामने सच्चाई रखे। केजरीवाल ने कहा कि मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है और इससे जुड़े किसी भी मामले में पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता होनी चाहिए।
संजय सिंह बोले- यह केवल जमीन का नहीं, आस्था का मामला है
मीडिया से बातचीत करते हुए संजय सिंह ने कहा कि यह सिर्फ जमीन खरीद का मामला नहीं है, बल्कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि लोगों ने अपनी श्रद्धा और विश्वास के साथ मंदिर निर्माण के लिए दान दिया था। इसलिए यह जानना जरूरी है कि उस धन का इस्तेमाल कैसे किया गया। उन्होंने कहा कि यदि दान और चढ़ावे के पैसों में किसी प्रकार की गड़बड़ी हुई है तो यह करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला मामला है। इसलिए इसकी पूरी जांच होनी चाहिए।
करोड़ों रुपये की जमीन खरीद पर उठाए सवाल
संजय सिंह ने दावा किया कि उनके पास मौजूद दस्तावेजों में कई ऐसे जमीन सौदों का विवरण है, जिनमें जमीन की कीमत बाजार मूल्य से कई गुना अधिक दिखाई गई है। उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में जमीन की वास्तविक कीमत बहुत कम थी, लेकिन उसे ट्रस्ट द्वारा कई गुना अधिक कीमत पर खरीदा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि 9 करोड़ रुपये की जमीन को 55 करोड़ 47 लाख रुपये में खरीदा गया और 3 करोड़ रुपये की जमीन को 24 करोड़ रुपये में खरीदा गया। संजय सिंह का कहना है कि इन सौदों की जांच से पता चल सकेगा कि आखिर इतनी अधिक कीमत क्यों चुकाई गई।
नजूल जमीन को लेकर भी उठे गंभीर सवाल
संजय सिंह ने एक ऐसे जमीन सौदे का भी जिक्र किया जिसे उन्होंने नजूल भूमि बताया। उन्होंने कहा कि सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार यह नजूल जमीन थी। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि जमीन का दर्जा ऐसा था तो उसे करोड़ों रुपये देकर कैसे खरीदा गया। उन्होंने कहा कि इस मामले में प्रशासनिक और कानूनी पहलुओं की भी जांच होनी चाहिए ताकि लोगों को पूरी सच्चाई पता चल सके।
पांच मिनट में करोड़ों रुपये का मुनाफा?
संजय सिंह ने एक पुराने जमीन सौदे का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ लोगों ने एक जमीन खरीदी और केवल पांच मिनट बाद उसी जमीन को कई गुना ज्यादा कीमत पर ट्रस्ट को बेच दिया। उन्होंने दावा किया कि पहले जमीन लगभग 2 करोड़ रुपये में खरीदी गई और कुछ मिनट बाद उसे 18.5 करोड़ रुपये में बेच दिया गया। उन्होंने कहा कि यह मामला बेहद गंभीर है और इसकी गहराई से जांच होनी चाहिए।
कई जमीन सौदों में एक जैसे नाम आने का दावा
संजय सिंह ने कहा कि दस्तावेजों का अध्ययन करने पर पता चलता है कि कई जमीन सौदों में कुछ नाम बार-बार सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसी को इन सभी मामलों को जोड़कर देखना चाहिए ताकि पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सके। उनका कहना है कि यदि सभी सौदों की श्रृंखला को एक साथ देखा जाए तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
दान में मिली जमीन बेचने का भी आरोप
संजय सिंह ने आरोप लगाया कि एक मामले में किसी व्यक्ति को दान में जमीन मिली थी और बाद में वह जमीन ट्रस्ट को करोड़ों रुपये में बेच दी गई। उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों की भी जांच होनी चाहिए ताकि यह पता चल सके कि जमीनों का मूल्यांकन किस आधार पर किया गया था।
किसानों की जमीन और ट्रस्ट की खरीद में अंतर का मुद्दा
संजय सिंह ने कहा कि कुछ मामलों में उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों से जमीन कम कीमत पर खरीदी, जबकि ट्रस्ट ने उसी क्षेत्र में जमीन कहीं अधिक कीमत पर खरीदी। उन्होंने दावा किया कि यह अंतर इतना बड़ा है कि इसकी जांच जरूरी हो जाती है। उन्होंने कहा कि यदि जमीन का बाजार मूल्य अलग था तो ट्रस्ट द्वारा इतनी अधिक कीमत क्यों चुकाई गई, इसका जवाब मिलना चाहिए।
मीडिया और जनता से की अपील
संजय सिंह ने मीडिया से अपील की कि वह जमीनों की वास्तविक स्थिति की पड़ताल करे। उन्होंने कहा कि पत्रकार जमीनों की लोकेशन और आसपास की स्थिति देखकर खुद समझ सकते हैं कि इन सौदों में क्या हुआ। उन्होंने कहा कि जनता को भी पूरे मामले की जानकारी मिलनी चाहिए क्योंकि यह विषय करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा हुआ है।
निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
संजय सिंह ने कहा कि उन्होंने अपना कर्तव्य निभाते हुए सभी दस्तावेज एसआईटी को सौंप दिए हैं। अब जांच एजेंसी को निष्पक्ष तरीके से जांच करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी ने गलत काम किया है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए और यदि आरोप गलत हैं तो वह भी स्पष्ट होना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश की जनता और भगवान श्रीराम के भक्तों को यह जानने का अधिकार है कि मंदिर निर्माण से जुड़े धन और जमीन खरीद की प्रक्रिया में क्या हुआ।
आगे क्या होगा?
अब इस पूरे मामले में लोगों की नजर एसआईटी की जांच पर टिकी हुई है। जांच एजेंसी दस्तावेजों की जांच करेगी, संबंधित लोगों से पूछताछ कर सकती है और जरूरत पड़ने पर अन्य रिकॉर्ड भी जुटा सकती है। राजनीतिक रूप से भी यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। एक तरफ आम आदमी पार्टी जांच की मांग कर रही है, तो दूसरी तरफ इस मामले पर अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। आने वाले दिनों में एसआईटी की कार्रवाई और जांच रिपोर्ट इस पूरे विवाद की दिशा तय कर सकती है। राम मंदिर जमीन खरीद मामले को लेकर संजय सिंह द्वारा एसआईटी को दस्तावेज सौंपे जाने के बाद यह मुद्दा फिर से चर्चा में आ गया है। आम आदमी पार्टी का कहना है कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़े इस मामले में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए। वहीं अब सभी की नजर एसआईटी की जांच पर है, जिससे यह साफ हो सकेगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या किसी प्रकार की अनियमितता हुई थी। देशभर के लोग इस जांच के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं।