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सत्या शर्मा फिर बनीं दिल्ली नगर निगम की स्थायी समिति की अध्यक्ष, निर्विरोध जीत के बाद बताया पांच संकल्पों वाला विजन दिल्ली नगर निगम में सत्या शर्मा और सत्यपाल सिंह निर्विरोध चुने गए

दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की स्थायी समिति के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के लिए 27 जुलाई 2026 को निगम मुख्यालय सिविक सेंटर में चुनाव कराया गया। इस चुनाव में वार्ड संख्या-226 (गौतमपुरी) की भाजपा पार्षद सत्या शर्मा को स्थायी समिति का अध्यक्ष और वार्ड संख्या-248 (करावल नगर वेस्ट) के भाजपा पार्षद सत्यपाल सिंह को उपाध्यक्ष पद के लिए निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया। दोनों नेताओं के निर्विरोध चुने जाने के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं और पार्षदों ने खुशी जताई। सत्या शर्मा ने शीर्ष नेतृत्व का जताया आभारनिर्वाचन के बाद सत्या शर्मा ने कहा कि यह जिम्मेदारी उनके लिए सम्मान के साथ-साथ बड़ी जिम्मेदारी भी है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का धन्यवाद करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और भाजपा दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा का मार्गदर्शन उन्हें लगातार मिलता रहा है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन पर जो विश्वास जताया है, वह उसे पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ निभाने का प्रयास करेंगी। सत्या शर्मा ने रखा पांच बड़े संकल्पों वाला विजनअपने नए कार्यकाल की शुरुआत करते हुए सत्या शर्मा ने कहा कि उनका पूरा कार्यकाल पांच महत्वपूर्ण संकल्पों पर आधारित रहेगा। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं बल्कि उन्हें जमीन पर उतारना होगा ताकि दिल्ली के लोगों को उसका सीधा लाभ मिल सके। स्वच्छ दिल्ली का संकल्पसत्या शर्मा ने कहा कि दिल्ली को साफ, सुंदर और स्वच्छ बनाना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा। उन्होंने कहा कि कूड़ा प्रबंधन को और मजबूत किया जाएगा, सफाई व्यवस्था में सुधार होगा और शहर के हर इलाके में बेहतर सफाई सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा। स्वस्थ दिल्ली का लक्ष्यउन्होंने कहा कि निगम के अस्पतालों, डिस्पेंसरियों और स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाया जाएगा ताकि लोगों को समय पर अच्छी चिकित्सा सुविधाएं मिल सकें। जनस्वास्थ्य से जुड़ी सेवाओं को भी मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। शिक्षित दिल्ली का संकल्पसत्या शर्मा ने कहा कि निगम के स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने, आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने और बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए लगातार काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बेहतर शिक्षा से ही दिल्ली का भविष्य मजबूत होगा। सुशासन को मिलेगी प्राथमिकताउन्होंने कहा कि निगम के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाई जाएगी। तकनीक का अधिक उपयोग किया जाएगा ताकि लोगों को सेवाएं जल्दी और आसान तरीके से मिल सकें। हर निर्णय में जनता के हित को सबसे ऊपर रखा जाएगा। सशक्त निगम बनाने की योजनासत्या शर्मा ने कहा कि दिल्ली नगर निगम को आर्थिक और प्रशासनिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में लगातार काम किया जाएगा ताकि निगम आत्मनिर्भर बने और लोगों को बेहतर नागरिक सुविधाएं समय पर उपलब्ध करा सके। पक्ष और विपक्ष दोनों को मिलेगा पूरा सम्मानसत्या शर्मा ने कहा कि स्थायी समिति लोकतांत्रिक तरीके से काम करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि समिति में पक्ष और विपक्ष के सभी पार्षदों को अपनी बात रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा। हर जनहित के मुद्दे पर खुलकर चर्चा होगी और अच्छे सुझावों का स्वागत किया जाएगा। उनका कहना था कि राजनीति से ऊपर उठकर जनता के हित में फैसले लेना ही उनकी प्राथमिकता होगी। भाजपा के वादों को पूरा करने पर रहेगा जोरसत्या शर्मा ने कहा कि वर्ष 2022 के दिल्ली नगर निगम चुनाव में भाजपा ने दिल्ली की जनता से जो वादे किए थे, उन्हें पूरा करने की दिशा में तेजी से काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पिछले बजट में घोषित जनहित की योजनाओं और विकास परियोजनाओं को समय पर पूरा कराने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे। दिल्ली के विकास कार्यों को मिलेगी नई गतिसत्या शर्मा ने कहा कि दिल्ली में भाजपा की ट्रिपल इंजन सरकार के कारण विकास कार्यों में तेजी आई है। उन्होंने कहा कि भलस्वा, गाजीपुर और ओखला के कूड़े के पहाड़ लगातार छोटे हो रहे हैं और उन्हें तय समय में पूरी तरह खत्म करने का प्रयास जारी है। इसके अलावा सफाई व्यवस्था, ठोस कचरा प्रबंधन, पार्कों के विकास, सड़कों के रखरखाव और नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने पर लगातार काम किया जा रहा है। समय पर फंड मिलने से विकास कार्य तेज हुएसत्या शर्मा ने कहा कि दिल्ली सरकार द्वारा समय पर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराए जाने के कारण निगम कर्मचारियों को हर महीने की पहली तारीख को समय पर वेतन मिल रहा है। उन्होंने कहा कि समय पर फंड मिलने से विकास परियोजनाओं और जनहित की योजनाओं को भी तय समय में पूरा करने में मदद मिल रही है। इससे लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं। सभी से मांगा सहयोगअपने संबोधन के अंत में सत्या शर्मा ने निगम के अधिकारियों, कर्मचारियों, सभी राजनीतिक दलों के पार्षदों और दिल्लीवासियों से सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि सभी के सामूहिक प्रयासों से दिल्ली नगर निगम को और अधिक मजबूत, पारदर्शी, जवाबदेह और जनसेवा के लिए समर्पित संस्था बनाया जा सकता है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में दिल्ली के विकास और नागरिक सुविधाओं में और अधिक सुधार देखने को मिलेगा।

कारगिल विजय दिवस पर विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने रक्तदान शिविर में शहीदों को श्रद्धांजलि देकर युवाओं को राष्ट्र सेवा और रक्तदान का दिया संदेश

रोहिणी में आयोजित रक्तदान शिविर में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे विजेंद्र गुप्ता नई दिल्ली, 26 जुलाई।27वें कारगिल विजय दिवस के अवसर पर रोहिणी स्थित महाराजा अग्रसेन भवन में वार्षिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत कारगिल युद्ध के अमर शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित कर और मौन रखकर श्रद्धांजलि देने के साथ हुई। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि देश की रक्षा करते हुए सैनिकों द्वारा बहाया गया रक्त भारत की सुरक्षा का प्रतीक है, जबकि स्वैच्छिक रक्तदान किसी जरूरतमंद व्यक्ति को नया जीवन देने का सबसे बड़ा माध्यम है। उन्होंने कहा कि दोनों ही कार्य निस्वार्थ सेवा और राष्ट्र के प्रति समर्पण की मिसाल हैं। कारगिल के वीर जवानों के साहस और बलिदान को याद किया – विजेंद्र गुप्ताअपने संबोधन में विजेंद्र गुप्ता ने वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय सैनिकों ने कठिन पहाड़ियों, बर्फीले मौसम और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अद्भुत साहस का परिचय दिया था। उन्होंने कहा कि हमारे वीर जवानों ने अपने प्राणों की परवाह किए बिना दुश्मनों को पीछे हटाया और देश की सीमाओं की रक्षा की। उन्होंने कहा कि कारगिल विजय दिवस हर भारतीय को देशभक्ति, साहस और कर्तव्य की भावना का संदेश देता है तथा हमें अपने सैनिकों के बलिदान को हमेशा याद रखना चाहिए। लद्दाख और कारगिल यात्रा का अनुभव साझा कियाविजेंद्र गुप्ता ने बताया कि उन्हें कारगिल और लद्दाख के युद्धस्थलों का दौरा करने का अवसर मिला था। वहां जाकर उन्होंने उन स्थानों को देखा जहां भारतीय सैनिकों ने वीरता का इतिहास रचा था। उन्होंने कहा कि सीमा से लगे गांवों के लोगों से बातचीत के दौरान उन्हें सैनिकों के साहस और समर्पण की कई प्रेरणादायक बातें सुनने को मिलीं। इन अनुभवों ने उन्हें यह महसूस कराया कि भारतीय सेना का त्याग और बलिदान देश के लिए अमूल्य है। रक्तदान को सबसे बड़ी मानव सेवा बतायारक्तदान शिविर की सराहना करते हुए विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि स्वैच्छिक रक्तदान मानवता की सबसे बड़ी सेवा है। उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति द्वारा किया गया रक्तदान कई लोगों का जीवन बचा सकता है। उन्होंने रक्तदान फाउंडेशन की प्रशंसा करते हुए कहा कि कारगिल विजय दिवस जैसे प्रेरणादायक अवसर पर रक्तदान शिविर आयोजित करना शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि देने का सराहनीय प्रयास है। युवाओं से राष्ट्र निर्माण में आगे आने की अपीलविजेंद्र गुप्ता ने युवाओं से अपील की कि वे देश के वीर सैनिकों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण और समाज सेवा के कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग लें। उन्होंने कहा कि युवाओं को नियमित रूप से रक्तदान करना चाहिए और जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए हमेशा आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि सेवा की यही भावना भारत को मजबूत और विकसित राष्ट्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। राष्ट्रीय एकता और सेवा का संदेश दियाअपने संबोधन के अंत में विजेंद्र गुप्ता ने सभी नागरिकों से राष्ट्रीय एकता, सामाजिक जिम्मेदारी और सेवा की भावना को मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि देश तभी आगे बढ़ेगा जब हर नागरिक अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करेगा और समाज की भलाई के लिए काम करेगा। उन्होंने कहा कि कारगिल के शहीदों का बलिदान हमेशा देशवासियों को राष्ट्रहित में कार्य करने की प्रेरणा देता रहेगा। रक्तदाताओं और पूर्व सैनिकों का सम्मान कर कार्यक्रम का हुआ समापनकार्यक्रम के अंत में स्वैच्छिक रक्तदाताओं, पूर्व सैनिकों और समाज सेवा में योगदान देने वाले लोगों का सम्मान किया गया। इसके बाद सभी ने कारगिल युद्ध के अमर शहीदों को सामूहिक श्रद्धांजलि अर्पित की। विजेंद्र गुप्ता ने सभी रक्तदाताओं का धन्यवाद करते हुए कहा कि उनका यह योगदान केवल किसी व्यक्ति का जीवन बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज के प्रति जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और मानवता की सच्ची सेवा का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि सैनिकों का बलिदान और रक्तदाताओं की सेवा भावना भारत को मजबूत, संवेदनशील और एकजुट राष्ट्र बनाने की प्रेरणा देती रहेगी।

बड़ा राजनीतिक भूचाल! धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से दिल्ली की सियासत में मची हलचल

नई दिल्ली | देश की राजनीति में आज उस समय बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला, जब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा देने का फैसला किया। इस्तीफे की खबर सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई। सोशल मीडिया से लेकर टीवी चैनलों तक इस खबर की चर्चा शुरू हो गई और हर ओर इसके राजनीतिक मायने निकाले जाने लगे। इस्तीफे के बाद बढ़ी राजनीतिक सरगर्मीधर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद विपक्षी दलों ने इसे अपनी बड़ी राजनीतिक जीत बताया। कई नेताओं ने कहा कि यह फैसला जवाबदेही की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। वहीं सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने कहा कि पार्टी हमेशा संगठन और जनता के हित में फैसले लेती है तथा आगे की रणनीति पर जल्द निर्णय लिया जाएगा।शिक्षा व्यवस्था फिर बनी चर्चा का केंद्रइस्तीफे के बाद शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं और छात्रों से जुड़े मुद्दे एक बार फिर राष्ट्रीय बहस का विषय बन गए। छात्र संगठनों ने उम्मीद जताई कि अब शिक्षा प्रणाली को और अधिक पारदर्शी तथा मजबूत बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे। कई अभिभावकों ने भी निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था की मांग दोहराई। समर्थकों और विपक्ष की अलग-अलग प्रतिक्रियाएंधर्मेंद्र प्रधान के समर्थकों ने कहा कि उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण योजनाओं को आगे बढ़ाया और उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा। दूसरी ओर विपक्ष ने कहा कि केवल इस्तीफा ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि व्यवस्था में व्यापक सुधार भी जरूरी हैं ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियां दोबारा पैदा न हों। सरकार के सामने नई चुनौतीअब केंद्र सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति और मंत्रालय के कामकाज को सुचारु रूप से आगे बढ़ाने की होगी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में सरकार शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कई बड़े फैसले ले सकती है, जिन पर पूरे देश की नजर रहेगी। देशभर में चर्चा का विषय बना इस्तीफाधर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर ने पूरे देश में नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। छात्र, अभिभावक, शिक्षक और राजनीतिक दल अब सरकार के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं। सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों का विश्वास मजबूत करने के लिए आगे क्या फैसले लिए जाते हैं। आगे क्या होगा?राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में राष्ट्रीय राजनीति का प्रमुख मुद्दा बना रह सकता है। अब सबकी नजर सरकार की अगली घोषणा, नए नेतृत्व और शिक्षा व्यवस्था में संभावित बदलावों पर टिकी हुई है।

दिल्ली के नालों की सफाई के लिए शुरू हुई नई तकनीक, मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने दो आधुनिक मशीनों का किया शुभारंभ

नई दिल्ली | 24 जुलाई दिल्ली में हर साल मानसून के दौरान जलभराव और बाढ़ जैसी समस्याओं से लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई इलाकों में सड़कें पानी से भर जाती हैं, जिससे लोगों का आना-जाना मुश्किल हो जाता है। इन समस्याओं को कम करने और दिल्ली के नालों की सफाई को तेज करने के लिए दिल्ली सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने शुक्रवार को दल्लूपुरा गांव के पास गाजीपुर ड्रेन पर दो अत्याधुनिक लॉन्ग-बूम एम्फीबियस एक्सकेवेटर मशीनों का शुभारंभ किया। इन मशीनों की मदद से नालों में वर्षों से जमा गाद और कचरे को तेजी से हटाया जाएगा, जिससे पानी की निकासी पहले से बेहतर हो सकेगी। मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने किया मशीनों का शुभारंभकार्यक्रम के दौरान मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि दिल्ली सरकार राजधानी के ड्रेनेज सिस्टम को आधुनिक बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने बताया कि गाजीपुर ड्रेन की कई वर्षों से ठीक तरह से सफाई नहीं हुई थी। इस कारण नाले में बड़ी मात्रा में गाद जमा हो गई और उसकी पानी ले जाने की क्षमता काफी कम हो गई। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य सभी प्रमुख नालों की सफाई कर उन्हें पहले की तरह पूरी क्षमता के साथ काम करने योग्य बनाना है, ताकि बारिश के समय पानी आसानी से निकल सके और लोगों को जलभराव की परेशानी न झेलनी पड़े। 30 से 40 वर्षों की जमा गाद हटाने का अभियानमंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने बताया कि गाजीपुर ड्रेन की लगभग 30 से 40 वर्षों से सही तरीके से डी-सिल्टिंग नहीं हुई थी। इतने लंबे समय में नाले के अंदर भारी मात्रा में गाद, मिट्टी, कीचड़ और कचरा जमा हो गया। इसके कारण नाले की गहराई और चौड़ाई दोनों प्रभावित हुईं और पानी का बहाव धीमा हो गया। अब नई मशीनों की मदद से वर्षों से जमा इस गाद को हटाया जाएगा। इससे नाले की जल निकासी क्षमता बढ़ेगी और बारिश के दौरान पानी तेजी से बाहर निकल सकेगा। गाजीपुर ड्रेन क्यों है इतना महत्वपूर्णगाजीपुर ड्रेन दिल्ली का एक बहुत महत्वपूर्ण ड्रेनेज चैनल है। यह नोएडा, साहिबाबाद, चिल्ला और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों से आने वाले पानी को दिल्ली से बाहर ले जाने का काम करता है। अगर इस ड्रेन में गाद जमा हो जाए तो पानी का बहाव रुक जाता है और आसपास के इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है। इसलिए इसकी समय-समय पर सफाई करना बेहद जरूरी माना जाता है। क्या खास है इन नई मशीनों में?दिल्ली सरकार द्वारा शुरू की गई ये एम्फीबियस एक्सकेवेटर मशीनें सामान्य मशीनों से बिल्कुल अलग हैं। इनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि ये केवल जमीन पर ही नहीं बल्कि पानी और दलदली क्षेत्रों में भी आसानी से काम कर सकती हैं। इन मशीनों में लगभग 15 मीटर लंबा बूम लगाया गया है, जिसकी मदद से गहरे नालों तक पहुंचकर सफाई की जा सकती है। ये मशीनें लगभग 9 मीटर की गहराई तक खुदाई कर सकती हैं। इनकी सहायता से गाद, कीचड़, कचरा, मलबा और जलकुंभी जैसी जलीय वनस्पतियों को भी आसानी से हटाया जा सकेगा। काम होगा पहले से ज्यादा तेज और सुरक्षितपहले कई स्थानों पर नालों की सफाई के लिए मजदूरों और सामान्य मशीनों पर अधिक निर्भर रहना पड़ता था। कई बार मशीनें नाले के अंदर तक नहीं पहुंच पाती थीं, जिससे काम धीमा हो जाता था। नई एम्फीबियस मशीनों के आने से अब नाले के अंदर ही सफाई का काम आसानी से किया जा सकेगा। इससे सफाई में कम समय लगेगा, काम अधिक सुरक्षित होगा और डी-सिल्टिंग पहले की तुलना में कहीं ज्यादा तेजी से पूरी होगी। मशीनों की तकनीकी विशेषताएंइन आधुनिक मशीनों में 140 हॉर्सपावर का इंजन लगाया गया है। प्रत्येक मशीन में 0.50 घन मीटर क्षमता वाली बकेट है, जिससे एक बार में अधिक मात्रा में गाद निकाली जा सकती है। ये मशीनें पानी के अंदर भी आसानी से चल सकती हैं। इसलिए जहां सामान्य मशीनें नहीं पहुंच पातीं, वहां भी ये लगातार काम कर सकेंगी। सरकार ने किया करोड़ों रुपये का निवेशदिल्ली सरकार ने इन दोनों आधुनिक मशीनों की खरीद पर बड़ा निवेश किया है। प्रत्येक मशीन की कीमत लगभग 2.62 करोड़ रुपये है। सरकार का कहना है कि यह खर्च केवल मशीन खरीदने के लिए नहीं, बल्कि भविष्य में दिल्ली को जलभराव और बाढ़ जैसी समस्याओं से बचाने के लिए किया गया एक महत्वपूर्ण निवेश है। पूरे दिल्ली के नालों में होगा इस्तेमालमंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि केवल गाजीपुर ड्रेन ही नहीं, बल्कि सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के अंतर्गत आने वाले अन्य बड़े नालों की सफाई में भी ऐसी आधुनिक मशीनों का उपयोग किया जाएगा। इससे राजधानी के सभी प्रमुख ड्रेनेज चैनलों की सफाई तेज होगी और उनकी क्षमता बढ़ाई जा सकेगी। जलभराव कम करने की दिशा में बड़ा कदमसिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के अधिकारियों के अनुसार, नई मशीनों के उपयोग से नालों की जल निकासी क्षमता में काफी सुधार होगा। जब नाले साफ रहेंगे तो बारिश का पानी तेजी से निकल सकेगा और सड़कों पर पानी भरने की घटनाएं कम होंगी। इसका सीधा लाभ दिल्ली के लाखों लोगों को मिलेगा, जिन्हें हर वर्ष मानसून में जलभराव के कारण परेशानी होती है। दिल्ली के ड्रेनेज सिस्टम को बनाया जा रहा आधुनिकदिल्ली सरकार लगातार राजधानी के ड्रेनेज सिस्टम को आधुनिक बनाने पर काम कर रही है। इसके तहत वर्षों से जमा गाद हटाई जा रही है, नालों की सफाई की जा रही है और नई तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य है कि दिल्ली के सभी बड़े नाले पूरी क्षमता के साथ काम करें, ताकि भारी बारिश के समय भी पानी आसानी से निकल सके और बाढ़ जैसी स्थिति न बने।

રાજ્યમાં અતિભારે વરસાદ અને પૂરની પરિસ્થિતિમાં અસરગ્રસ્તોને મદદરૂપ થવા માટે ભાજપા પ્રદેશ અધ્યક્ષ શ્રી જગદીશભાઈ વિશ્વકર્માના માર્ગદર્શન હેઠળ ગુજરાત પ્રદેશ ભારતીય જનતા પાર્ટી દ્વારા ‘સેવા હી સંગઠન‘ના ભાવ સાથે 24×7 હેલ્પલાઇન સેવા/ કંટ્રોલ રૂમ શરૂ કરાયો

તા. ૨૩ જુલાઈ ૨૦૨૬ 63597 01000 અને 63596 02000 હેલ્પલાઇન નંબર પર સંપર્ક કરીને અસરગ્રસ્ત નાગરિકો અથવા તેમના સ્વજનો અસરગ્રસ્ત વ્યક્તિની જરૂરિયાત, સ્થળ, સંપર્ક વિગત સહિતની જરૂરી માહિતી નોંધાવી શકશે ભાજપા પ્રદેશ કાર્યાલય ‘શ્રી કમલમ‘, કોબા, ગાંધીનગર ખાતે ભાજપા કાર્યકર્તાઓ ૨૪/૭ હાજર રહી સેવા બજાવશે ભારે વરસાદના કારણે સર્જાયેલી વિકટ પરિસ્થિતિમાં ભારતીય જનતા પાર્ટીના કાર્યકર્તાઓ જનતાની વચ્ચે રહી નિઃસ્વાર્થ સેવા, રાહત અને સહાય કાર્યો દ્વારા ‘સેવા હી સંગઠન‘ના મંત્રને સાચા અર્થમાં સાર્થક કરી રહ્યા છે આ કુદરતી આપત્તિના સમયમાં દરેક અસરગ્રસ્ત નાગરિક સુધી સહાય પહોંચે તે માટે બનતા તમામ પ્રયાસ કરવા ગુજરાત ભાજપા સંગઠન કટિબદ્ધ છે ગુજરાત પ્રદેશ ભાજપા મીડિયા વિભાગની અખબારી યાદી જણાવે છે કે, રાજ્યના વિવિધ વિસ્તારોમાં પડેલા અતિભારે વરસાદના પરિણામે સર્જાયેલી પૂરની પરિસ્થિતિને ધ્યાનમાં રાખી, અસરગ્રસ્ત નાગરિકોને ઝડપી સહાય ઉપલબ્ધ થાય તે હેતુથી ભાજપા પ્રદેશ અધ્યક્ષ શ્રી જગદીશભાઈ વિશ્વકર્માના માર્ગદર્શન હેઠળ ‘સેવા હી સંગઠન‘ના ભાવ સાથે ગુજરાત પ્રદેશ ભારતીય જનતા પાર્ટી દ્વારા 24×7 હેલ્પલાઇન સેવા/ કંટ્રોલ રૂમ શરૂ કરવામાં આવ્યો છે. અસરગ્રસ્ત નાગરિકો અથવા તેમના સ્વજનો જાહેર કરાયેલા હેલ્પલાઇન નંબર પર સંપર્ક કરીને અસરગ્રસ્ત વ્યક્તિની જરૂરિયાત, સ્થળ, સંપર્ક વિગત સહિતની જરૂરી માહિતી 63597 01000 અને 63596 02000 નંબર પર નોંધાવી શકશે. પ્રાપ્ત થતી વિગતોને પ્રાથમિકતા સાથે સંબંધિત વહીવટી તંત્ર સુધી પહોંચાડીને ત્વરિત સંકલન કરવામાં આવશે. ભાજપા પ્રદેશ કાર્યાલય ‘શ્રી કમલમ‘, કોબા, ગાંધીનગર ખાતે ભાજપા કાર્યકર્તાઓ ૨૪/૭ હાજર રહી સેવા બજાવશે. આ હેલ્પલાઇન/ કંટ્રોલ રૂમનો હેતુ પૂરગ્રસ્ત વિસ્તારોમાં ફસાયેલા અથવા મેઘતાંડવના કારણે મુશ્કેલીનો સામનો કરી રહેલા નાગરિકોની માહિતી મેળવી તેમને જરૂરી સહાય પહોંચાડવા માટેનો છે. ભારે વરસાદના કારણે સર્જાયેલી વિકટ પરિસ્થિતિમાં ભારતીય જનતા પાર્ટીના કાર્યકર્તાઓ જનતાની વચ્ચે રહી નિઃસ્વાર્થ સેવા, રાહત અને સહાય કાર્યો દ્વારા ‘સેવા હી સંગઠન‘ ના મંત્રને સાચા અર્થમાં સાર્થક કરી રહ્યા છે અને બચાવ કામગીરીમાં તંત્રને સહયોગ કરી સતત કાર્ય કરી રહ્યા છે. આ કુદરતી આપત્તિના સમયમાં દરેક અસરગ્રસ્ત નાગરિક સુધી સહાય પહોંચે તે માટે બનતા તમામ પ્રયાસ કરવા ગુજરાત ભાજપા સંગઠન કટિબદ્ધ છે. પ્રશાંત વાળાપ્રદેશ મીડિયા ઇન્ચાર્જભાજપા ગુજરાત

मैक्स, मिन और म्याऊज़ाकी’ – रिश्तों, प्यार और परिवार की भावनाओं को छू लेने वाली फिल्म~एक ऐसी कहानी जो दिल से दिल को जोड़ती है और अपनों से खुलकर बात करने का संदेश देती है

मुंबई23 जुलाई 2026 आज के समय में सिनेमाघरों में ज्यादातर बड़ी एक्शन, थ्रिलर और रोमांटिक फिल्में देखने को मिलती हैं। इन फिल्मों में बड़े सितारे, शानदार दृश्य और जबरदस्त एक्शन होता है। लेकिन इन सबके बीच यदि कोई फिल्म परिवार, रिश्तों, अपनापन और भावनाओं की बात करे, तो वह अलग पहचान बना लेती है। ‘मैक्स, मिन और म्याऊज़ाकी’ ऐसी ही एक भावनात्मक फिल्म है, जो दर्शकों को सिर्फ मनोरंजन ही नहीं देती, बल्कि रिश्तों की अहमियत भी समझाती है। यह फिल्म हमें सिखाती है कि परिवार के लोगों से खुलकर बात करनी चाहिए। मन की बातें अपने अंदर छिपाकर रखने के बजाय अपनों से साझा करनी चाहिए। यही इस फिल्म का सबसे बड़ा संदेश है। फिल्म की कहानी दिल को छू लेने वाली हैफिल्म की कहानी रमेश नाम के एक सफल उद्योगपति के इर्द-गिर्द घूमती है। बाहर से देखने पर उसकी जिंदगी बहुत अच्छी लगती है। उसके पास पैसा, नाम और बड़ा कारोबार है, लेकिन उसके जीवन में खुशी और सुकून नहीं है। वह अकेलापन और तनाव महसूस करता है अपनी मानसिक परेशानी से बाहर निकलने के लिए रमेश एक मनोचिकित्सक की मदद लेता है। वह अपने मन की बातें डॉक्टर के सामने रखता है और अपने जीवन की परेशानियों को याद करता है। यहीं से फिल्म की असली कहानी शुरू होती है। पत्नी की मौत के बाद बदल गई जिंदगीरमेश की पत्नी वसुधा का कुछ वर्ष पहले कैंसर के कारण निधन हो चुका है। पत्नी के जाने के बाद उसका जीवन पूरी तरह बदल जाता है। वह अंदर से टूट चुका है। उसके जीवन में खुशियां खत्म हो जाती हैं और वह अपने परिवार से भी दूर होता चला जाता है। पिता और बेटे के रिश्ते में बढ़ती दूरियांरमेश का एक बेटा मैक्स (महेश) है। रमेश चाहता है कि उसका बेटा आगे चलकर उसका कारोबार संभाले, लेकिन मैक्स की सोच अलग है। उसे संगीत से बहुत प्यार है। वह जिंगल और वेस्टर्न म्यूजिक में अपना करियर बनाना चाहता है। मैक्स अपने सपनों को पूरा करना चाहता है, जबकि उसके पिता चाहते हैं कि वह परिवार का कारोबार संभाले। इसी सोच के अंतर के कारण दोनों के रिश्तों में दूरियां बढ़ जाती हैं। प्रेम कहानी भी देती है नया संदेशमैक्स एक मुस्लिम लड़की से प्यार करता है और उसके साथ अपना जीवन बिताना चाहता है। लेकिन रमेश इस रिश्ते को स्वीकार नहीं कर पाता। वह धर्म के कारण इस रिश्ते का विरोध करता है। इस विषय को फिल्म में बहुत शांत और भावनात्मक तरीके से दिखाया गया है। फिल्म यह बताने की कोशिश करती है कि रिश्ते प्यार और विश्वास से बनते हैं, केवल धर्म या समाज की सोच से नहीं। दादा और बेटे के रिश्ते की भावुक कहानीफिल्म में रमेश के पिता भी एक महत्वपूर्ण किरदार हैं। वे एक प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक रहे हैं। उम्र के इस पड़ाव पर उन्हें अपने बेटे के साथ रहना चाहिए था, लेकिन वे वृद्धाश्रम में रहते हैं। यह दृश्य दर्शकों को सोचने पर मजबूर करता है कि आज के समय में कई बुजुर्ग अपने ही परिवार से दूर रहने को मजबूर हैं। फिल्म इस दर्द को बहुत सरल और भावनात्मक ढंग से दिखाती है। म्याऊज़ाकी बनी फिल्म की सबसे खास किरदारइस फिल्म की सबसे अलग और खास बात है म्याऊज़ाकी नाम की बिल्ली। आमतौर पर फिल्मों में कुत्तों को परिवार का हिस्सा दिखाया जाता है, लेकिन इस फिल्म में बिल्ली कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा है। म्याऊज़ाकी केवल एक पालतू जानवर नहीं है, बल्कि वह परिवार के सदस्यों के बीच प्यार, अपनापन और भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक बन जाती है। कई दृश्यों में उसकी मौजूदगी दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान भी लाती है और आंखों को नम भी कर देती है। मुंबई और बारिश का खूबसूरत चित्रणफिल्म की शूटिंग मुंबई की पृष्ठभूमि में की गई है। बारिश का मौसम और शहर की खूबसूरती कहानी को और भी प्रभावशाली बनाती है। हर दृश्य बहुत सुंदर लगता है और दर्शकों को कहानी से जोड़कर रखता है। कलाकारों का शानदार अभिनयफिल्म में नफीसा अली, मेधा शंकर, मंदिरा बेदी, आदिल हुसैन और अन्य कलाकारों ने बेहतरीन अभिनय किया है।आदिल हुसैन ने रमेश के किरदार में एक ऐसे पिता का दर्द दिखाया है जो अपने परिवार को जोड़ना चाहता है, लेकिन परिस्थितियां उसे अकेला कर देती हैं।मेधा शंकर ने अपने किरदार को बहुत सहजता से निभाया है। नफीसा अली और मंदिरा बेदी ने भी अपने अभिनय से फिल्म को मजबूत बनाया है। सभी कलाकार अपने-अपने किरदार में पूरी तरह फिट दिखाई देते हैं। निर्देशन की सबसे बड़ी ताकतफिल्म के लेखक और निर्देशक पद्म कुमार राव ने कहानी को बहुत सादगी और संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया है। उन्होंने पूरी फिल्म में कहीं भी कहानी को भटकने नहीं दिया। उन्होंने हर किरदार को महत्व दिया है। किसी भी पात्र को केवल दिखावे के लिए नहीं रखा गया। हर किरदार कहानी को आगे बढ़ाने में मदद करता है। फिल्म की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें शोर-शराबा, अनावश्यक एक्शन या बेवजह के दृश्य नहीं हैं। पूरी फिल्म भावनाओं और रिश्तों के इर्द-गिर्द घूमती है। थोड़ी छोटी होती तो और बेहतर बनतीफिल्म की अवधि लगभग 143 मिनट है। यदि इसे 10 से 15 मिनट छोटा किया जाता तो फिल्म और भी प्रभावशाली बन सकती थी। कुछ दृश्य थोड़े लंबे महसूस होते हैं, लेकिन इससे फिल्म का भावनात्मक असर कम नहीं होता। देश-विदेश में मिल चुकी है सराहनाइस फिल्म को देश और विदेश के कई फिल्म समारोहों में दिखाया जा चुका है। वहां इसे दर्शकों, समीक्षकों और निर्णायकों से अच्छी प्रतिक्रिया मिली। फिल्म ने कई सम्मान भी अपने नाम किए हैं। इससे साफ है कि यह केवल मनोरंजन की फिल्म नहीं, बल्कि एक सार्थक और संदेश देने वाली फिल्म है। फिल्म का संगीत और भावनात्मक माहौलफिल्म का संगीत कहानी के साथ पूरी तरह मेल खाता है। गीत और पृष्ठभूमि संगीत हर भावनात्मक दृश्य को और प्रभावशाली बनाते हैं। संगीत दर्शकों को कहानी से जोड़कर रखता है और फिल्म की भावनाओं को और गहरा करता है। फिल्म क्या संदेश देती है?यह फिल्म बताती है कि परिवार का महत्व सबसे बड़ा होता है। जीवन में चाहे कितनी भी व्यस्तता क्यों न हो, हमें अपने माता-पिता, बच्चों और अपनों के लिए समय निकालना चाहिए।

उत्तराखंड में पेपर लीक पर अरविंद केजरीवाल का केंद्र सरकार पर बड़ा हमला

नई दिल्ली, 23 जुलाई 2026। सारिता साहनी नीट पेपर लीक, सीबीआई की जांच और छात्रों के आंदोलन को लेकर उठाए कई सवालआम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने उत्तराखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी में पेपर लीक की घटना को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश में लगातार पेपर लीक की घटनाएं सामने आ रही हैं और इससे लाखों छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल करते हुए कहा कि आखिर देश में पेपर लीक की घटनाएं कब रुकेंगी। उनका कहना था कि मेहनत करने वाले छात्र पूरी ईमानदारी से पढ़ाई करते हैं, लेकिन कुछ लोगों की गलत हरकतों की वजह से उनकी मेहनत बेकार हो जाती है। उत्तराखंड में पेपर लीक पर जताई चिंताअरविंद केजरीवाल ने कहा कि उत्तराखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी में पेपर लीक होना बहुत गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि जब किसी परीक्षा का प्रश्नपत्र पहले ही बाहर आ जाता है तो मेहनत से पढ़ाई करने वाले छात्रों का मन टूट जाता है। छात्र और उनके परिवार कई महीनों तक तैयारी करते हैं। ऐसे में पेपर लीक होने से उनका समय, मेहनत और पैसा तीनों बर्बाद हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि वह परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह सुरक्षित बनाए। बार-बार हो रहे पेपर लीक पर उठाए सवालअरविंद केजरीवाल ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में कई प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ियों और पेपर लीक की खबरें सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि हर बार जांच का भरोसा दिया जाता है, लेकिन फिर कुछ समय बाद एक और पेपर लीक की खबर आ जाती है। उन्होंने कहा कि इससे छात्रों का सरकार और परीक्षा प्रणाली पर विश्वास कमजोर होता जा रहा है। नीट पेपर लीक मामले का किया जिक्रअरविंद केजरीवाल ने वर्ष 2024 के नीट पेपर लीक मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस समय सरकार ने एक व्यक्ति को इस पूरे मामले का मास्टरमाइंड बताया था। बाद में उसी व्यक्ति को सीबीआई की ओर से क्लीन चिट मिलने की बात सामने आई। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे जांच प्रक्रिया पर कई सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि यदि जांच पूरी ईमानदारी से होती तो सच्चाई देश के सामने आती। सीबीआई की कार्रवाई पर लगाए आरोपअरविंद केजरीवाल ने कहा कि सीबीआई ने समय पर चार्जशीट दाखिल नहीं की। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी कारण आरोपी को कुछ ही महीनों में जमानत मिल गई। उनका कहना था कि यदि समय पर कानूनी कार्रवाई होती तो मामला अलग हो सकता था। उन्होंने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया ने छात्रों और देश के लोगों के मन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर भी दी प्रतिक्रिया अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि पहले जिस व्यक्ति को सबसे बड़ा आरोपी बताया गया, बाद में उसी को क्लीन चिट मिल गई। उन्होंने कहा कि इससे सरकार की नीयत और जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस मामले में पूरी सच्चाई सामने नहीं आने देना चाहती। प्रधानमंत्री से पूछा बड़ा सवालअरविंद केजरीवाल ने कहा कि देश के छात्र जानना चाहते हैं कि आखिर पेपर लीक कब बंद होंगे। उन्होंने कहा कि हर साल लाखों छात्र दिन-रात मेहनत करके परीक्षा की तैयारी करते हैं। यदि परीक्षा निष्पक्ष नहीं होगी तो छात्रों का भविष्य कैसे सुरक्षित रहेगा। उन्होंने सरकार से मांग की कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत कानून और सख्त व्यवस्था बनाई जाए। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों की सराहनाअरविंद केजरीवाल ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे युवाओं और छात्रों की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि युवाओं ने कठिन परिस्थितियों में भी हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने कहा कि छात्रों ने अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाई और पूरे देश का ध्यान इस मुद्दे की ओर खींचा। उन्होंने कहा कि युवाओं का यह साहस देश के लिए प्रेरणा है। तीन घटनाओं का किया उल्लेखअरविंद केजरीवाल ने अपने संबोधन में तीन घटनाओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एक छात्रा पुलिस की गाड़ी के सामने खड़ी हो गई और अपने साथियों का साथ नहीं छोड़ा। दूसरी घटना में एक छात्र पुलिस की कार्रवाई के बावजूद पीछे नहीं हटा और अपने साथियों के साथ खड़ा रहा। तीसरी घटना में एक बच्चे ने पुलिस वाहन का दरवाजा खोलकर अपने साथियों की मदद की। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं से युवाओं की हिम्मत और एकता दिखाई देती है। युवाओं के साहस की की प्रशंसाअरविंद केजरीवाल ने कहा कि देश के युवाओं ने यह साबित कर दिया है कि वे अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठा सकते हैं। उन्होंने कहा कि जब युवा एकजुट होकर अपनी बात रखते हैं तो समाज में बदलाव की उम्मीद बढ़ती है। उन्होंने छात्रों से पढ़ाई जारी रखने और हिम्मत न हारने की अपील भी की। मनीष सिसोदिया ने भी लगाए आरोपदिल्ली के पूर्व शिक्षा मंत्री और आम आदमी पार्टी के पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि मुख्य आरोपी खुलकर बोलता तो कई बड़े लोगों के नाम सामने आ सकते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी कारण पूरे मामले में सही कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि देश के छात्रों को सच्चाई जानने का अधिकार है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। छात्रों के भविष्य को सुरक्षित बनाने की मांगआम आदमी पार्टी ने कहा कि सरकार को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जिससे किसी भी परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक न हो। पार्टी का कहना है कि परीक्षा प्रणाली पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित होनी चाहिए। यदि कोई व्यक्ति पेपर लीक में शामिल पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई ऐसी गलती करने की हिम्मत न करे। शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने पर जोरपार्टी ने कहा कि देश का भविष्य छात्रों के हाथ में है। इसलिए शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना बहुत जरूरी है। छात्रों को निष्पक्ष परीक्षा, पारदर्शी चयन प्रक्रिया और सुरक्षित माहौल मिलना चाहिए। यदि परीक्षा प्रणाली पर लोगों का विश्वास बना रहेगा तो देश के युवाओं का भविष्य भी सुरक्षित रहेगा। उत्तराखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी के पेपर लीक

आयुष्मान आरोग्य शिविर बना स्वास्थ्य सुरक्षा की नई पहल

कर्तव्य भवन-1 में सैकड़ों कर्मचारियों ने कराई निःशुल्क स्वास्थ्य जांच, समय पर बीमारी की पहचान पर दिया गया जोर नई दिल्ली, 22 जुलाई 2026। लोगों को स्वस्थ रखने और गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान करने के उद्देश्य से दिल्ली के कर्तव्य भवन-1 में आयुष्मान आरोग्य शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर का आयोजन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के केंद्रीय टीबी प्रभाग (सीटीडी), दिल्ली राज्य टीबी प्रकोष्ठ, राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) और एसएनए प्रभाग के सहयोग से किया गया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों को निःशुल्क स्वास्थ्य जांच, डॉक्टरों की सलाह और टीबी सहित अन्य बीमारियों की समय पर पहचान की सुविधा उपलब्ध कराना था। सरकार का मानना है कि यदि बीमारी का पता शुरुआती चरण में ही चल जाए, तो उसका इलाज आसान हो जाता है और व्यक्ति लंबे समय तक स्वस्थ जीवन जी सकता है। इसी सोच के साथ यह विशेष स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया गया। बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने लिया शिविर का लाभआयुष्मान आरोग्य शिविर में लगभग 520 कर्मचारियों ने भाग लिया। इनमें से 491 लोगों को निःशुल्क स्वास्थ्य जांच और विशेषज्ञ डॉक्टरों से चिकित्सीय परामर्श दिया गया। पूरे दिन कर्मचारियों ने उत्साह के साथ अपनी जांच कराई और डॉक्टरों से स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की। शिविर में मौजूद लोगों ने कहा कि कार्यालय परिसर में ही स्वास्थ्य जांच की सुविधा मिलने से उन्हें काफी लाभ हुआ। इससे समय की बचत हुई और बिना किसी परेशानी के स्वास्थ्य परीक्षण कराया जा सका। एक ही स्थान पर मिली कई तरह की स्वास्थ्य सेवाएंशिविर में लोगों के लिए कई प्रकार की जांच की व्यवस्था की गई थी। इसमें ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, हीमोग्लोबिन, बीएमआई की जांच के साथ-साथ डिजिटल चेस्ट एक्स-रे और टीबी स्क्रीनिंग भी की गई। इन सभी जांचों के लिए आधुनिक सुविधाओं से लैस निक्षय वाहन की व्यवस्था की गई थी। इससे कर्मचारियों को अलग-अलग अस्पतालों या जांच केंद्रों पर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ी। जांच के बाद डॉक्टरों ने सभी लोगों को उनकी रिपोर्ट के अनुसार जरूरी सलाह भी दी। समय पर जांच से बचा जा सकता है गंभीर बीमारियों सेविशेषज्ञों ने बताया कि कई बार शुगर, उच्च रक्तचाप, एनीमिया और टीबी जैसी बीमारियों के शुरुआती लक्षण आसानी से दिखाई नहीं देते। यदि नियमित रूप से स्वास्थ्य जांच कराई जाए तो इन बीमारियों का पता समय रहते चल जाता है और इलाज जल्दी शुरू किया जा सकता है। यही कारण है कि सरकार लोगों को नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कराने के लिए लगातार जागरूक कर रही है। अतिरिक्त सचिव ने किया शिविर का शुभारंभइस स्वास्थ्य शिविर का उद्घाटन राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की अतिरिक्त सचिव एवं मिशन निदेशक सुश्री आराधना पटनायक ने किया। उन्होंने कहा कि स्वस्थ कर्मचारी ही किसी भी संस्था की सबसे बड़ी ताकत होते हैं। उन्होंने कहा कि प्रिवेंटिव हेल्थ केयर, यानी बीमारी होने से पहले उसकी रोकथाम, आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। नियमित जांच, सही खान-पान और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर कई गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने क्या कहादिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार लोगों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रिवेंटिव हेल्थ केयर और समय पर स्वास्थ्य जांच स्वस्थ भारत तथा टीबी मुक्त भारत के संकल्प की मजबूत नींव हैं। यदि लोगों की नियमित जांच होती रहे, तो कई गंभीर बीमारियों को समय रहते रोका जा सकता है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल बीमारियों का इलाज करना नहीं है, बल्कि लोगों को बीमार होने से पहले ही सुरक्षित रखना है। इसी उद्देश्य से ऐसे स्वास्थ्य शिविर लगातार आयोजित किए जा रहे हैं। टीबी मुक्त भारत अभियान को मिलेगा बलसरकार देश को टीबी मुक्त भारत बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इस अभियान के तहत लोगों की समय पर जांच, सही इलाज और जागरूकता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आयुष्मान आरोग्य शिविर में भी टीबी की जांच की विशेष व्यवस्था की गई, ताकि यदि किसी व्यक्ति में बीमारी के शुरुआती लक्षण हों तो उसका तुरंत पता लगाया जा सके और समय पर उपचार शुरू किया जा सके। स्वस्थ कार्यबल से मजबूत होगा देशविशेषज्ञों का मानना है कि स्वस्थ कर्मचारी किसी भी कार्यालय और संस्था की कार्यक्षमता को बढ़ाते हैं। जब कर्मचारी स्वस्थ रहते हैं, तो उनका काम बेहतर होता है और देश के विकास में भी उनका योगदान बढ़ता है। इसी सोच के साथ सरकार कार्यालयों में समय-समय पर ऐसे स्वास्थ्य शिविर आयोजित कर रही है, ताकि कर्मचारियों का स्वास्थ्य बेहतर बना रहे और वे बिना किसी चिंता के अपने कार्य कर सकें। सरकार आगे भी जारी रखेगी ऐसे प्रयासस्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने कहा कि दिल्ली सरकार भविष्य में भी ऐसे स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन करती रहेगी। सरकार का उद्देश्य है कि हर व्यक्ति को समय पर स्वास्थ्य जांच, सही सलाह और गुणवत्तापूर्ण इलाज की सुविधा मिले। उन्होंने कहा कि जागरूकता, नियमित जांच और समय पर उपचार ही एक स्वस्थ समाज की पहचान है। सरकार इसी दिशा में लगातार काम कर रही है।

राहुल गांधी सहित विपक्षी नेताओं की हिरासत पर चौधरी सुनील सिंह ने जताई नाराज़गी

लोकतंत्र में विरोध की आवाज़ दबाना ठीक नहीं – चौधरी सुनील सिंह लखनऊ, 21 जुलाई 2026। सरिता साहनी लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी सुनील सिंह ने प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित कई विपक्षी नेताओं और सांसदों को हिरासत में लिए जाने पर कड़ी नाराज़गी जताई है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक और हर राजनीतिक दल को अपनी बात रखने का अधिकार है। यदि कोई शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करता है, तो उसकी आवाज़ सुनी जानी चाहिए। ऐसे समय में विपक्षी नेताओं को हिरासत में लेना लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ माना जाएगा। क्या है पूरा मामला?हाल ही में विपक्षी दलों के नेताओं ने जनता से जुड़े कई मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित कई विपक्षी सांसद और नेता शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कई नेताओं को हिरासत में लिया। इसके बाद इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बहस शुरू हो गई। कई विपक्षी दलों ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया, जबकि सरकार की ओर से सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बात कही गई। चौधरी सुनील सिंह ने क्या कहा?चौधरी सुनील सिंह ने कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत जनता की आवाज़ और उसे उठाने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का काम सरकार से सवाल पूछना और जनता की समस्याओं को सामने रखना होता है। यदि विपक्ष अपनी बात भी नहीं रख पाएगा, तो लोकतंत्र कमजोर हो जाएगा। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी सहित विपक्षी नेताओं को हिरासत में लेना उचित नहीं है। सरकार को विरोध करने वालों की बात सुननी चाहिए और बातचीत के जरिए समस्याओं का समाधान निकालना चाहिए। लोकतंत्र में विरोध का अधिकार जरूरीचौधरी सुनील सिंह ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है। यहां हर नागरिक को संविधान ने अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का अधिकार दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार और विपक्ष दोनों लोकतंत्र के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। यदि किसी पक्ष की आवाज़ को दबाया जाएगा, तो लोकतंत्र की भावना को नुकसान पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि जनता के हितों से जुड़े मुद्दों पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए। इससे लोकतंत्र और मजबूत होता है। सरकार से संवाद की अपीललोकदल अध्यक्ष ने सरकार से अपील की कि वह विरोध की आवाज़ को दबाने के बजाय विपक्ष के साथ बातचीत करे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संवाद सबसे अच्छा रास्ता होता है। यदि सरकार विपक्ष की बात सुनेगी और मिलकर समाधान निकालेगी, तो जनता का विश्वास भी मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि किसी भी समस्या का हल बातचीत से निकल सकता है। इसलिए सरकार को सभी दलों के साथ मिलकर काम करना चाहिए।जनता के मुद्दों पर ध्यान देने की जरूरतचौधरी सुनील सिंह ने कहा कि देश में महंगाई, बेरोज़गारी, शिक्षा, स्वास्थ्य और किसानों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। सरकार को इन समस्याओं पर अधिक ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता चाहती है कि उसके मुद्दों का समाधान हो और लोकतांत्रिक तरीके से सभी की बात सुनी जाए। लोकतंत्र की मजबूती सबसे जरूरीउन्होंने कहा कि लोकतंत्र तभी मजबूत रहेगा जब सरकार और विपक्ष दोनों संविधान का सम्मान करेंगे। शांतिपूर्ण विरोध, खुली चर्चा और आपसी संवाद लोकतंत्र की पहचान हैं। किसी भी मतभेद का समाधान बातचीत और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से ही निकाला जाना चाहिए। चौधरी सुनील सिंह ने राहुल गांधी सहित विपक्षी नेताओं की हिरासत की निंदा करते हुए कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार है। उन्होंने सरकार से अपील की कि वह लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान करे, विपक्ष के साथ संवाद बनाए रखे और जनता से जुड़े मुद्दों का समाधान बातचीत के माध्यम से निकाले। उनके अनुसार मजबूत लोकतंत्र वही है, जहां सरकार और विपक्ष दोनों मिलकर जनता के हित में काम करें।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प

20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान बना तनाव का माहौल, कई जगह हुई धक्का-मुक्की नई दिल्ली, 20 जुलाई। सरिता साहनी दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को बड़ी संख्या में छात्र, युवा और विभिन्न संगठनों के लोग अपनी मांगों को लेकर एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों ने जंतर-मंतर से संसद की ओर मार्च निकालने की योजना बनाई थी। उनका कहना था कि वे अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं और चाहते हैं कि उनकी समस्याओं का जल्द समाधान किया जाए। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा कारणों और संसद क्षेत्र में लागू निषेधाज्ञा का हवाला देते हुए मार्च की अनुमति नहीं दी। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से अपील की कि वे जंतर-मंतर पर ही शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करें। इसके बाद कुछ स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव पैदा हो गया और धक्का-मुक्की की घटनाएं सामने आईं। सुबह से ही जुटने लगी थी भीड़सुबह से ही जंतर-मंतर पर लोगों का पहुंचना शुरू हो गया था। धीरे-धीरे हजारों लोग वहां एकत्र हो गए। कई लोग हाथों में तख्तियां, बैनर और झंडे लिए हुए थे। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगा रहे थे। पूरे इलाके में काफी हलचल थी। पुलिस भी सुबह से पूरी तैयारी के साथ मौजूद थी। जंतर-मंतर, संसद मार्ग और आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। सुरक्षा के लिए कई जगह बैरिकेड लगाए गए थे ताकि कोई भी बिना अनुमति संसद की ओर न जा सके। संसद की ओर बढ़ने की कोशिशकुछ समय बाद प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर बढ़ने की कोशिश की। पुलिस ने उन्हें रोकते हुए बताया कि वहां जाने की अनुमति नहीं है। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से कई बार शांत रहने और आगे न बढ़ने की अपील की। इसके बावजूद कुछ प्रदर्शनकारी बैरिकेड के पास पहुंच गए और आगे जाने का प्रयास करने लगे। इसी दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई। कुछ जगह हुई धक्का-मुक्कीजब कुछ प्रदर्शनकारी आगे बढ़ने लगे, तब पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की हुई। कुछ मीडिया रिपोर्टों में लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल का भी उल्लेख किया गया। घटनास्थल पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि कुछ ही देर बाद पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित कर लिया और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। यातायात पर भी पड़ा असरप्रदर्शन के कारण जंतर-मंतर और संसद मार्ग के आसपास का यातायात भी प्रभावित हुआ। कई सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। कुछ रास्तों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा। इससे दफ्तर जाने वाले लोगों और आम नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने लोगों से वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने की सलाह दी ताकि जाम की स्थिति कम हो सके। पुलिस ने क्या कहादिल्ली पुलिस का कहना था कि संसद क्षेत्र देश का सबसे संवेदनशील इलाका है। इसलिए वहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। पुलिस के अनुसार, बिना अनुमति किसी भी मार्च को संसद की ओर जाने की इजाजत नहीं दी जा सकती। पुलिस ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखना और सभी लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। उन्होंने यह भी कहा कि हालात को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए। प्रदर्शनकारियों का क्या कहना थाप्रदर्शन में शामिल कई लोगों ने कहा कि वे अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाना चाहते थे। उनका कहना था कि उनका उद्देश्य शांतिपूर्ण तरीके से मार्च करना था। कुछ प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि उन्हें आगे बढ़ने से रोका गया और उनके साथ सख्ती की गई। उन्होंने कहा कि सरकार को उनकी बात सुननी चाहिए और उनकी समस्याओं का समाधान निकालना चाहिए। घटना को लेकर अलग-अलग दावेइस घटना के बाद अलग-अलग पक्षों की अलग-अलग बातें सामने आईं। कुछ लोगों ने प्रदर्शन के दौरान हुई अव्यवस्था और झड़पों का जिक्र किया। वहीं पुलिस ने कहा कि उसने स्थिति को नियंत्रित रखा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इतना कहना उचित है कि प्रदर्शन के दौरान कुछ स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं। सभी प्रदर्शनकारियों के बारे में एक जैसा निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा, क्योंकि घटना के अलग-अलग पक्ष सामने आए हैं। लोकतंत्र में संवाद जरूरीलोकतंत्र में नागरिकों को अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का अधिकार है। वहीं प्रशासन की जिम्मेदारी होती है कि कानून-व्यवस्था और सुरक्षा बनाए रखी जाए। ऐसे मामलों में दोनों पक्षों द्वारा संयम और संवाद बनाए रखना बहुत जरूरी होता है ताकि किसी भी प्रकार की हिंसा या तनाव की स्थिति पैदा न हो। यदि समय रहते बातचीत के माध्यम से समाधान निकाला जाए, तो ऐसी परिस्थितियों से बचा जा सकता है। 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुआ प्रदर्शन कई कारणों से चर्चा में रहा। संसद की ओर मार्च की अनुमति नहीं मिलने के बाद कुछ स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की और झड़पें हुईं। सुरक्षा व्यवस्था के कारण पुलिस ने भीड़ को आगे बढ़ने से रोका और कुछ समय के लिए तनाव का माहौल बन गया। बाद में स्थिति सामान्य कर दी गई। यह घटना इस बात की याद दिलाती है कि लोकतंत्र में अधिकारों के साथ-साथ शांति, कानून-व्यवस्था और आपसी संवाद भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। सभी पक्षों का प्रयास होना चाहिए कि किसी भी विवाद का समाधान बातचीत और शांतिपूर्ण तरीके से निकाला जाए।