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युवा शक्ति ही विकसित भारत की सबसे बड़ी ताकत, राष्ट्र निर्माण हर नागरिक की जिम्मेदारी – शिक्षा मंत्री आशीष सूद

नई दिल्ली, 12 जुलाई 2026। दिल्ली के जनकपुरी स्थित सेंट मार्क्स स्कूल में आयोजित ‘युवा फॉर गवर्नेंस – अनप्लग्ड’ कार्यक्रम में दिल्ली सरकार के शिक्षा मंत्री श्री आशीष सूद ने युवाओं से संवाद करते हुए कहा कि भारत का भविष्य उसकी युवा शक्ति पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण केवल संसद, सरकार या प्रशासन का काम नहीं है, बल्कि हर जिम्मेदार नागरिक के छोटे-छोटे अच्छे कार्य भी देश को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों, युवा पेशेवरों और भावी नेतृत्वकर्ताओं ने हिस्सा लिया। इस दौरान “क्या भारत अपनी युवा शक्ति का पूर्ण उपयोग कर रहा है या युवा संकट का सामना कर रहा है?” विषय पर विस्तृत चर्चा हुई। कार्यक्रम में ज़िप इलेक्ट्रिक के सह-संस्थापक एवं सीईओ आकाश गुप्ता तथा GOAT लाइफ के संस्थापक यश कालरा भी मौजूद रहे। युवाओं को सुशासन का भागीदार बनाने की जरूरतशिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा आबादी है, लेकिन उससे भी बड़ी ताकत युवाओं को सुशासन का सक्रिय भागीदार बनाना है। उन्होंने कहा कि सरकार कुछ लोगों से बनती है, लेकिन सुशासन पूरे समाज के सहयोग से चलता है। यदि देश का हर नागरिक अपनी जिम्मेदारी समझकर काम करे, तो विकसित भारत का सपना जल्दी पूरा हो सकता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण केवल कानून बनाने या योजनाएं तैयार करने तक सीमित नहीं है। जब कोई व्यक्ति सड़क पर कूड़ा नहीं फेंकता, पेड़ लगाता है, ट्रैफिक नियमों का पालन करता है, जरूरतमंद की मदद करता है, बच्चों को शिक्षा देता है या सार्वजनिक स्थानों को साफ रखता है, तब वह भी देश के विकास में अपना योगदान देता है। हर जिम्मेदार कदम से मजबूत होगा देशआशीष सूद ने युवाओं से कहा कि वे यह सोचकर न बैठें कि देश का विकास केवल सरकार करेगी। उन्होंने कहा कि यदि हर नागरिक अपनी जिम्मेदारी निभाएगा, तो देश तेजी से आगे बढ़ेगा। छोटे-छोटे सकारात्मक कदम भी राष्ट्र निर्माण में बड़ी भूमिका निभाते हैं और विकसित भारत की नींव को मजबूत करते हैं। उन्होंने युवाओं से समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने, सकारात्मक सोच अपनाने और देशहित को सर्वोपरि रखने का आह्वान किया। ‘युवा फॉर गवर्नेंस’ का उद्देश्य युवाओं को नीति निर्माण से जोड़नाशिक्षा मंत्री आशीष सूद ने बताया कि ‘युवा फॉर गवर्नेंस’ पहल का उद्देश्य युवाओं और शासन व्यवस्था के बीच की दूरी को कम करना है। इस मंच के माध्यम से युवाओं को सार्वजनिक नीति, लोकतंत्र, प्रशासन और नेतृत्व से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है ताकि वे भविष्य में देश के जिम्मेदार नागरिक और नेतृत्वकर्ता बन सकें। उन्होंने कहा कि भारत में प्रतिभाशाली युवाओं की कोई कमी नहीं है। जरूरत ऐसे मंचों की है जो उनकी ऊर्जा, सोच और प्रतिभा को सही दिशा देकर समाज और देश के विकास में उपयोग करें। उद्यमिता भी राष्ट्र निर्माण का मजबूत माध्यमआशीष सूद ने कहा कि आज के दौर में उद्यमिता भी राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण साधन है। स्टार्टअप केवल रोजगार ही नहीं देते, बल्कि नई तकनीक, नए विचार और समाज की समस्याओं के समाधान भी प्रस्तुत करते हैं। इससे देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है और युवाओं के लिए नए अवसर पैदा होते हैं। समाज की समस्याओं का समाधान ही सफल उद्यमिता – आकाश गुप्ताज़िप इलेक्ट्रिक के सह-संस्थापक एवं सीईओ आकाश गुप्ता ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि सफल स्टार्टअप वही होता है जो समाज की वास्तविक समस्याओं का समाधान करे। उन्होंने कहा कि केवल अधिक मूल्यांकन (वैल्यूएशन) हासिल करना सफलता नहीं है, बल्कि लोगों के जीवन को बेहतर बनाना सबसे बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि जब कोई स्टार्टअप रोजगार पैदा करता है, लोगों की जिंदगी आसान बनाता है और समाज के विकास में योगदान देता है, तभी वह राष्ट्र निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि ‘युवा फॉर गवर्नेंस’ जैसे मंच युवाओं को उद्देश्यपूर्ण कार्य करने की प्रेरणा देते हैं। धैर्य, ईमानदारी और निरंतर प्रयास से मिलती है सफलता – यश कालराGOAT लाइफ के संस्थापक यश कालरा ने युवाओं से कहा कि उन्हें त्वरित सफलता के बजाय लंबे समय तक समाज के लिए उपयोगी कार्य करने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर बड़ी शुरुआत लोगों की वास्तविक जरूरतों को समझने से होती है। उन्होंने युवाओं को ईमानदारी, निरंतर मेहनत और स्पष्ट उद्देश्य के साथ आगे बढ़ने की सलाह दी। उनके अनुसार यदि युवा समाज के लिए काम करेंगे, तो सफलता अपने आप उनके कदम चूमेगी। युवाओं ने शिक्षा, एआई और सुशासन पर पूछे सवालकार्यक्रम के अंत में खुले संवाद सत्र का आयोजन किया गया। इसमें विद्यार्थियों ने शिक्षा, सुशासन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), उद्यमिता और सार्वजनिक नीति जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर शिक्षा मंत्री आशीष सूद, आकाश गुप्ता और यश कालरा से सीधे सवाल पूछे। अतिथियों ने विस्तार से उत्तर देकर युवाओं की जिज्ञासाओं का समाधान किया। नई पीढ़ी को राष्ट्र निर्माण के लिए तैयार कर रही है पहलकार्यक्रम में बताया गया कि ‘युवा फॉर गवर्नेंस’ पहल की शुरुआत दिसंबर 2025 में की गई थी। इसका उद्देश्य युवाओं में सहभागी सुशासन की भावना विकसित करना, उन्हें लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से जोड़ना और भविष्य के जिम्मेदार नेतृत्व के लिए तैयार करना है। यह पहल नेतृत्व, नवाचार, उद्यमिता और सुशासन को एक मंच पर लाकर नई पीढ़ी को विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित कर रही है।

रोहिणी में मेगा वृक्षारोपण अभियान का शुभारंभ, दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने हर नागरिक से पेड़ों की जिम्मेदारी निभाने का किया आह्वान

“केवल पौधे लगाना नहीं, उन्हें जीवित रखना हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है” – विजेंद्र गुप्ता नई दिल्ली, 11 जुलाई 2026। दिल्ली को अधिक हरित, स्वच्छ और स्वस्थ बनाने के उद्देश्य से रोहिणी सेक्टर-14 स्थित चित्रगुप्त पार्क, डीडीए डिस्ट्रिक्ट पार्क में एक भव्य मेगा वृक्षारोपण अभियान का आयोजन किया गया। इस अभियान का शुभारंभ दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष श्री विजेंद्र गुप्ता ने किया। कार्यक्रम का आयोजन दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने संपूर्णा और भारतीयम ट्रस्ट के सहयोग से किया। इस अवसर पर लगभग 500 देशी जामुन के पौधे लगाए गए और लोगों को अधिक से अधिक देशी प्रजातियों के वृक्ष लगाने के लिए प्रेरित किया गया।कार्यक्रम में डीडीए के अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, पार्षदों, रोहिणी जोन के उपाध्यक्ष, भारतीयम ट्रस्ट, व्हाइट लोटस, संपूर्णा संस्था के प्रतिनिधियों, पर्यावरणविदों, स्वयंसेवकों और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों ने भाग लिया। सभी ने मिलकर पर्यावरण संरक्षण और हरित दिल्ली के निर्माण का संकल्प लिया। विजेंद्र गुप्ता ने कहा- पेड़ लगाना ही नहीं, उन्हें बड़ा करना भी जरूरीकार्यक्रम को संबोधित करते हुए दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि वृक्षारोपण केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि किसी भी वृक्षारोपण अभियान की सफलता इस बात से तय नहीं होती कि कितने पौधे लगाए गए, बल्कि इस बात से तय होती है कि उनमें से कितने पौधे जीवित रहकर बड़े वृक्ष बने। उन्होंने कहा कि अक्सर लोग पौधे लगाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेते हैं, जबकि असली जिम्मेदारी तो उसके बाद शुरू होती है। यदि पौधों की नियमित देखभाल नहीं होगी, उन्हें समय पर पानी नहीं मिलेगा और उनकी सुरक्षा नहीं होगी, तो वृक्षारोपण अभियान का उद्देश्य पूरा नहीं हो पाएगा। हर नागरिक को बनना होगा पर्यावरण संरक्षण का भागीदारविजेंद्र गुप्ता ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार या किसी संस्था की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें समाज के हर व्यक्ति की भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक नागरिक अपने घर, गली, पार्क या आसपास के क्षेत्र में एक पौधा लगाए और उसकी देखभाल करे, तो आने वाले वर्षों में दिल्ली को और अधिक हरा-भरा बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे जन आंदोलन का रूप देना होगा। जब हर परिवार और हर मोहल्ला वृक्षारोपण को अपनी जिम्मेदारी समझेगा, तभी पर्यावरण संरक्षण का वास्तविक उद्देश्य पूरा होगा। देशी प्रजातियों के पेड़ लगाने पर दिया विशेष जोरदिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए देशी प्रजातियों के पेड़ सबसे अधिक उपयोगी होते हैं। उन्होंने विशेष रूप से नीम और जामुन जैसे पेड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये वृक्ष स्थानीय जलवायु के अनुकूल होते हैं और पर्यावरण को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि विदेशी प्रजातियों की तुलना में देशी पेड़ अधिक समय तक जीवित रहते हैं और पक्षियों, जीव-जंतुओं तथा स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी लाभदायक होते हैं। इसलिए नागरिकों को अधिक से अधिक देशी प्रजातियों के पौधे लगाने चाहिए। “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान का किया उल्लेखअपने संबोधन के दौरान विजेंद्र गुप्ता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल पर्यावरण संरक्षण का संदेश नहीं देता, बल्कि अपनी माता के प्रति सम्मान और प्रेम व्यक्त करने का भी एक सुंदर माध्यम है। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति अपनी माँ के नाम पर एक पौधा लगाता है और उसकी देखभाल करता है, तो वह वृक्ष आने वाले वर्षों तक परिवार की यादों, संस्कारों और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का प्रतीक बन जाता है। उन्होंने सभी नागरिकों से इस अभियान से जुड़ने की अपील की। लद्दाख यात्रा का अनुभव किया साझाविजेंद्र गुप्ता ने अपने हाल ही में हुए लद्दाख दौरे का अनुभव साझा करते हुए कहा कि वहां की कठिन जलवायु और सीमित हरियाली को देखकर उन्हें पेड़ों का वास्तविक महत्व और अधिक समझ में आया।उन्होंने कहा कि लद्दाख अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन वहां जलवायु ऐसी है कि पेड़ों का जीवित रहना बहुत कठिन होता है। उन्होंने कहा कि जब वहां हरियाली के छोटे-छोटे हिस्से दिखाई दिए तो उन्हें महसूस हुआ कि दिल्ली जैसे महानगरों में हर पेड़ कितना महत्वपूर्ण है। इसलिए दिल्ली के हर नागरिक को पेड़ों के संरक्षण के लिए गंभीरता से कार्य करना चाहिए। रोहिणी के बदलते स्वरूप का किया उल्लेखविजेंद्र गुप्ता ने कहा कि जब वह वर्ष 1997 में पहली बार विधायक बने थे, तब रोहिणी में सड़कें तो थीं लेकिन उनके किनारे पर्याप्त पेड़ नहीं थे। उन्होंने बताया कि पिछले लगभग तीन दशकों में लगातार वृक्षारोपण अभियानों और जनभागीदारी के कारण आज रोहिणी दिल्ली के सबसे हरित क्षेत्रों में शामिल हो चुका है। उन्होंने कहा कि आज रोहिणी की अधिकांश सड़कें बड़े-बड़े पेड़ों से आच्छादित हैं और यह क्षेत्र शहरी हरित विकास का एक अच्छा उदाहरण बन चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि अब बड़े हो चुके पेड़ों की वैज्ञानिक तरीके से नियमित छंटाई और देखभाल भी उतनी ही जरूरी है, ताकि पर्यावरण और शहरी विकास के बीच संतुलन बना रहे। सभी संगठनों और स्वयंसेवकों का जताया आभारकार्यक्रम के अंत में विजेंद्र गुप्ता ने इस अभियान से जुड़े सभी संगठनों, पर्यावरण प्रेमियों, स्वयंसेवकों और स्थानीय नागरिकों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि कम समय की सूचना के बावजूद बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी यह दिखाती है कि समाज में पर्यावरण के प्रति जागरूकता लगातार बढ़ रही है। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे वृक्षारोपण को केवल एक अभियान न मानें, बल्कि इसे अपने जीवन का स्थायी संकल्प बनाएं। उन्होंने कहा कि यदि हर व्यक्ति एक पौधा लगाए और उसे बड़ा होने तक उसकी देखभाल करे, तो आने वाले वर्षों में दिल्ली पहले से कहीं अधिक हरित, स्वच्छ, स्वस्थ और पर्यावरण के अनुकूल शहर बन सकती है। हरित दिल्ली के निर्माण का लिया संकल्पइस मेगा वृक्षारोपण अभियान के माध्यम से दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने स्पष्ट संदेश दिया कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का साझा दायित्व है। उन्होंने कहा कि पेड़ आने वाली पीढ़ियों के लिए सबसे बड़ी प्राकृतिक धरोहर हैं

एमसीडी आयुक्त ने गोयला डेयरी सीबीजी प्लांट की प्रगति की समीक्षा की तथा वेस्ट जोन में प्रमुख ठोस अपशिष्ट प्रबंधन सुविधाओं का निरीक्षण किया

दिल्ली नगर निगमनई दिल्ली, 10 जुलाई, 2026 दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के आयुक्त श्री संजीव खिरवार ने आज नजफगढ़ क्षेत्र स्थित गोयला डेयरी सीबीजी प्लांट की व्यापक समीक्षा की तथा इसके बाद वेस्ट जोन में प्रमुख ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (एसडब्ल्यूएम) सुविधाओं का निरीक्षण कर परियोजनाओं के क्रियान्वयन एवं अवसंरचना उन्नयन का जायजा लिया। गोयला डेयरी सीबीजी प्लांट के निरीक्षण के दौरान आयुक्त के साथ नजफगढ़ क्षेत्र के उपायुक्त श्री शाश्वत सौरभ, मुख्य अभियंता श्री पी.सी. मीणा तथा एमसीडी के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। सीबीजी प्लांट को पशुओं के गोबर एवं नगर निगम के ठोस अपशिष्ट के प्रसंस्करण के माध्यम से जैव-गैस एवं जैविक खाद बनाने के उद्देश्य से विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना का क्रियान्वयन भारत सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के शहरी विकास निधि (यूडीएफ) के अंतर्गत किया जा रहा है। परियोजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए आयुक्त ने कार्यान्वयन एजेंसी को निर्देश दिए कि सभी लंबित सिविल, मैकेनिकल एवं इलेक्ट्रिकल कार्यों को पर्याप्त संसाधनों की तैनाती के साथ शीघ्र पूरा किया जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि परियोजना की प्रगति में बाधा उत्पन्न करने वाले सभी मुद्दों का प्राथमिकता के आधार पर समाधान सुनिश्चित किया जाए, ताकि परियोजना निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूर्ण हो सके। आयुक्त ने सख्त निर्देश देते हुए कहा कि परियोजना को हर हाल में 17 सितंबर, 2026 तक पूर्ण कर चालू करने के लिए तैयार किया जाए। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि पशुओं का गोबर आसपास के नालों में न बहने पाए तथा गोबर के समुचित संग्रहण, परिवहन एवं प्रसंस्करण की प्रभावी व्यवस्था बनाए रखी जाए, जिससे पर्यावरण संरक्षण एवं जनस्वास्थ्य सुनिश्चित हो सके। इसके उपरांत आयुक्त ने वेस्ट जोन की प्रमुख ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (एसडब्ल्यूएम) सुविधाओं का निरीक्षण किया। निरीक्षण की शुरुआत पंखा रोड स्थित फिक्स्ड कम्पैक्टर ट्रांसफर स्टेशन (एफसीटीएस) से हुई, जिसे जेएस एनवायरो सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड द्वारा विकसित एवं पुनर्निर्मित किया गया है। आयुक्त ने उन्नत अवसंरचना, परियोजना की ब्रांडिंग तथा परिचालन संबंधी तैयारियों का अवलोकन किया। इस अवसर पर सुविधा केंद्र पर तैनात उन्नत वाहन बेड़े—जिनमें कंटेनर कैरियर, हुक लोडर, सड़क झाड़ू से एकत्रित अपशिष्ट के परिवहन हेतु आरसी वाहन, ऑटो टिप्पर तथा ई-रिक्शा शामिल हैं—का प्रदर्शन किया गया, जिससे अपशिष्ट संग्रहण एवं परिवहन क्षमता में हुए सुधार को प्रदर्शित किया गया। आयुक्त ने परिसर में किए गए हरित विकास, लैंडस्केपिंग एवं वृक्षारोपण की भी सराहना की। इसके पश्चात उन्होंने बीओटी फिक्स्ड कम्पैक्टर ट्रांसफर स्टेशन (एफसीटीएस) का निरीक्षण किया, जहां इसी प्रकार की उन्नत अवसंरचना, परियोजना ब्रांडिंग तथा परिचालन व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई। आयुक्त ने परियोजना के अंतर्गत संचालित इलेक्ट्रिक वाहन बेड़े को सहयोग प्रदान करने हेतु स्थापित नए ईवी चार्जिंग स्टेशन का भी निरीक्षण किया। इस परिसर का भी लैंडस्केपिंग एवं वृक्षारोपण के माध्यम से सौंदर्यीकरण किया गया है। इसके बाद आयुक्त ने राजौरी गार्डन स्थित निर्माण एवं विध्वंस (सी एंड डी) अपशिष्ट संग्रहण स्थल का दौरा कर जेई स्टोर में लगाए गए वाटर स्प्रिंकलर तथा धूल नियंत्रण संबंधी अन्य उपायों का निरीक्षण किया। उन्होंने धूल उत्सर्जन को नियंत्रित करने एवं पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन के लिए की गई व्यवस्थाओं की समीक्षा की तथा इन उपायों के प्रभावी क्रियान्वयन, नियमित रखरखाव एवं सतत निगरानी सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक निर्देश दिए।

अजमेर में स्थापित होगी 250 किलो काले पाषाण से बनी भगवान तिरुपति बालाजी की भव्य प्रतिमा, भगवान विष्णु के दसों अवतारों के होंगे दर्शन

अजमेर | 10 जुलाई 2026 राजस्थान के अजमेर शहर के श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ी धार्मिक और आध्यात्मिक सौगात आने वाली है। आदर्श नगर स्थित प्राचीन शिव मंदिर में भगवान तिरुपति बालाजी की एक अत्यंत सुंदर और भव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी। यह प्रतिमा अपनी अनूठी बनावट, बारीक नक्काशी और धार्मिक महत्व के कारण लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। खास बात यह है कि इस प्रतिमा में भगवान विष्णु के दसों अवतारों को भी अत्यंत आकर्षक ढंग से दर्शाया गया है। श्रद्धालु एक ही प्रतिमा में भगवान तिरुपति बालाजी के साथ भगवान विष्णु के सभी प्रमुख अवतारों के दर्शन कर सकेंगे। भुवनेश्वर में 90 दिनों की मेहनत से तैयार हुई प्रतिमाभगवान तिरुपति बालाजी की इस भव्य प्रतिमा को ओडिशा के भुवनेश्वर में तैयार किया गया है। अनुभवी शिल्पकारों ने लगभग 90 दिनों तक लगातार मेहनत करके इस प्रतिमा को बनाया। प्रतिमा को पारंपरिक भारतीय शिल्पकला के अनुसार हाथों से तराशा गया है। प्रत्येक आकृति और हर छोटी-बड़ी नक्काशी को बहुत ही सावधानी और सुंदरता के साथ तैयार किया गया है। अब यह प्रतिमा अजमेर पहुंच चुकी है और जल्द ही मंदिर में स्थापित की जाएगी। 250 किलो काले पाषाण से बनी है दिव्य प्रतिमायह प्रतिमा लगभग 250 किलो वजनी काले पाषाण से बनाई गई है। इसकी ऊंचाई करीब तीन फीट और चौड़ाई लगभग दो फीट है। काले पाषाण से बनी यह प्रतिमा देखने में बेहद आकर्षक और भव्य दिखाई देती है। पत्थर पर की गई बारीक कलाकारी भारतीय शिल्प परंपरा की उत्कृष्ट पहचान है। प्रतिमा को इस प्रकार बनाया गया है कि इसे देखने वाला हर श्रद्धालु इसकी सुंदरता और दिव्यता से प्रभावित हो जाए। एक ही प्रतिमा में भगवान विष्णु के दसों अवतारों के दर्शनइस प्रतिमा की सबसे विशेष बात यह है कि इसमें भगवान विष्णु के दसों अवतारों को भी उकेरा गया है। भगवान मत्स्य, कूर्म, वराह, नरसिंह, वामन, परशुराम, भगवान श्रीराम, भगवान श्रीकृष्ण, भगवान बुद्ध और भविष्य के कल्कि अवतार को सुंदर रूप में दर्शाया गया है। इससे श्रद्धालुओं को एक ही स्थान पर भगवान विष्णु के संपूर्ण दशावतारों के दर्शन करने का अवसर मिलेगा। यह विशेषता इस प्रतिमा को अन्य प्रतिमाओं से अलग और अधिक महत्वपूर्ण बनाती है। शेषनाग के संरक्षण में विराजमान हैं भगवान बालाजीप्रतिमा में भगवान तिरुपति बालाजी को अत्यंत दिव्य स्वरूप में दिखाया गया है। उनके ऊपर सुंदर नक्काशी वाला तोरण और शेषनाग की आकृति बनाई गई है, जो भगवान नारायण की महिमा का प्रतीक है। पूरी प्रतिमा में भारतीय संस्कृति, धार्मिक आस्था और पारंपरिक मंदिर कला की अद्भुत झलक देखने को मिलती है। दिल्ली के समाजसेवी अनुप मित्तल ने कराया निर्माणइस भव्य प्रतिमा का निर्माण दिल्ली निवासी समाजसेवी अनुप मित्तल ने अपने माता-पिता योगी मित्तल और सुषमा रानी मित्तल की पावन स्मृति में कराया है। उन्होंने श्रद्धा और सेवा की भावना से इस प्रतिमा को मंदिर को समर्पित किया है। यह कार्य उनके परिवार की धार्मिक आस्था और समाज के प्रति समर्पण को भी दर्शाता है। 11 और 12 जुलाई को होगा प्राण-प्रतिष्ठा समारोहआदर्श नगर स्थित शिव मंदिर में 11 और 12 जुलाई को भगवान तिरुपति बालाजी की प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा का भव्य आयोजन किया जाएगा। वैदिक मंत्रोच्चार, हवन, पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच प्रतिमा की स्थापना होगी। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। मंदिर को विशेष रूप से सजाया जाएगा और पूरे परिसर में धार्मिक वातावरण देखने को मिलेगा। 1942 से आस्था का केंद्र है यह शिव मंदिरअजमेर का आदर्श नगर शिव मंदिर वर्ष 1942 में स्थापित किया गया था। पिछले कई दशकों से यह मंदिर हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। अब भगवान तिरुपति बालाजी की प्रतिमा स्थापित होने के बाद मंदिर का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाएगा। इससे दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन करने के लिए यहां पहुंचेंगे। धार्मिक पर्यटन को भी मिलेगा बढ़ावामंदिर समिति का मानना है कि इस अनोखी प्रतिमा की स्थापना के बाद अजमेर में धार्मिक पर्यटन को नई पहचान मिलेगी। भगवान विष्णु के दसों अवतारों वाली यह प्रतिमा श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगी। देश के विभिन्न राज्यों से लोग इस दिव्य प्रतिमा के दर्शन करने के लिए अजमेर आएंगे। अजमेर के आदर्श नगर शिव मंदिर में स्थापित होने जा रही भगवान तिरुपति बालाजी की 250 किलो वजनी काले पाषाण की प्रतिमा भारतीय कला, संस्कृति और धार्मिक आस्था का अद्भुत उदाहरण है। भगवान विष्णु के दसों अवतारों से सुसज्जित यह प्रतिमा श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगी। प्राण-प्रतिष्ठा के बाद यह मंदिर केवल अजमेर ही नहीं, बल्कि पूरे देश के श्रद्धालुओं के लिए आस्था और श्रद्धा का एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल बनने की ओर अग्रसर होगा।

इथेनॉल नीति को लेकर भारतीय युवा कांग्रेस का केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन, अक्षय लाकड़ा ने लगाए गंभीर आरोप

नई दिल्ली, 10 जुलाई 2026। भारतीय युवा कांग्रेस (आईवाईसी) ने शुक्रवार को नई दिल्ली में केंद्र सरकार की E20 इथेनॉल ब्लेंडिंग नीति के विरोध में प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन रायसीना रोड स्थित युवा कांग्रेस कार्यालय के बाहर आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता और संगठन के राष्ट्रीय पदाधिकारी शामिल हुए। प्रदर्शन का नेतृत्व दिल्ली प्रदेश युवा कांग्रेस के अध्यक्ष अक्षय लाकड़ा ने किया। इस दौरान युवा कांग्रेस ने केंद्र सरकार की इथेनॉल नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार इस नीति के माध्यम से आम जनता को लाभ पहुंचाने के बजाय कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने का काम कर रही है। अक्षय लाकड़ा ने कहा- इथेनॉल केवल बहाना है, सरकार अपने लोगों को लाभ पहुंचाना चाहती हैप्रदर्शन को संबोधित करते हुए दिल्ली प्रदेश युवा कांग्रेस के अध्यक्ष अक्षय लाकड़ा ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि देश की जनता अच्छी तरह समझती है कि इथेनॉल का मुद्दा केवल एक बहाना है और सरकार का असली उद्देश्य कुछ चुनिंदा लोगों को लाभ पहुंचाना है। अक्षय लाकड़ा ने आरोप लगाया कि जब सरकार ने E20 इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को बढ़ावा देना शुरू किया था, तब दावा किया गया था कि इससे पेट्रोल की लागत कम होगी और आम लोगों को सस्ता ईंधन मिलेगा। लेकिन आज भी इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल लगभग उसी कीमत पर बिक रहा है, जिस कीमत पर पहले सामान्य पेट्रोल मिलता था। ईंधन सस्ता क्यों नहीं हुआ? अक्षय लाकड़ा ने सरकार से पूछा सवालअक्षय लाकड़ा ने कहा कि यदि इथेनॉल मिश्रण से उत्पादन लागत में कमी आई है, तो उसका लाभ आम उपभोक्ताओं तक क्यों नहीं पहुंचा? उन्होंने कहा कि सरकार को इस सवाल का जवाब देना चाहिए कि जब लागत कम हुई तो पेट्रोल की कीमतों में कमी क्यों नहीं आई। उन्होंने कहा कि जनता को सस्ता ईंधन देने का वादा किया गया था, लेकिन आज लोगों को न तो सस्ता पेट्रोल मिल रहा है और न ही कोई आर्थिक राहत मिल रही है। E20 से वाहनों के इंजन पर बढ़ेगा खर्च, जनता चिंतित है- अक्षय लाकड़ाअक्षय लाकड़ा ने कहा कि E20 ईंधन के इस्तेमाल से देशभर में करोड़ों वाहन मालिकों की चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि इस ईंधन के कारण कई गाड़ियों के इंजन पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है, जिससे मेंटेनेंस का खर्च बढ़ने की आशंका है। उन्होंने कहा कि आम लोग पहले ही महंगाई से परेशान हैं और अब यदि उन्हें अपनी गाड़ियों की मरम्मत पर अतिरिक्त पैसा खर्च करना पड़ेगा तो इससे उनकी आर्थिक मुश्किलें और बढ़ जाएंगी। ‘आम आदमी की गाड़ी कोई प्रयोगशाला नहीं है’अपने संबोधन में अक्षय लाकड़ा ने कहा कि सरकार को जनता की चिंताओं को गंभीरता से सुनना चाहिए। उन्होंने कहा कि आम आदमी की गाड़ी कोई प्रयोगशाला नहीं है, जिस पर नए-नए प्रयोग किए जाएं। उन्होंने मांग की कि यदि किसी नई नीति को लागू किया जाता है तो पहले उसके सभी प्रभावों का पूरी तरह अध्ययन किया जाए और जनता का विश्वास जीता जाए। उन्होंने सरकार से E20 नीति पर पुनर्विचार करने और लोगों की चिंताओं का समाधान करने की अपील की। बड़ी संख्या में युवा कांग्रेस कार्यकर्ता प्रदर्शन में हुए शामिलभारतीय युवा कांग्रेस के इस विरोध प्रदर्शन में दिल्ली प्रदेश युवा कांग्रेस के कई पदाधिकारी, बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और संगठन की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य भी मौजूद रहे। सभी ने केंद्र सरकार की E20 नीति के खिलाफ नारे लगाए और इस नीति को वापस लेने की मांग की। कार्यकर्ताओं ने कहा कि यदि सरकार जनता की आवाज़ नहीं सुनेगी तो युवा कांग्रेस भविष्य में भी इसी तरह लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध जारी रखेगी। केंद्र सरकार से नीति पर पुनर्विचार की मांगप्रदर्शन के अंत में भारतीय युवा कांग्रेस ने केंद्र सरकार से मांग की कि E20 इथेनॉल नीति की पूरी समीक्षा की जाए। संगठन का कहना है कि सरकार को ऐसी नीतियां बनानी चाहिए जिनसे आम जनता को वास्तविक लाभ मिले, ईंधन की कीमतों में राहत मिले और वाहन मालिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े। युवा कांग्रेस ने कहा कि जनता से जुड़े हर फैसले में पारदर्शिता और जवाबदेही होनी चाहिए। संगठन का कहना है कि यदि सरकार इस मुद्दे पर ध्यान नहीं देती है तो वह देशभर में जनता की आवाज़ उठाने के लिए आगे भी आंदोलन जारी रखेगा।

पेट्रोल-डीजल के दाम घटाकर जनता को राहत दे सरकार – अरविंद केजरीवाल

नई दिल्ली, 09 जुलाई 2026 आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत काफी कम हो चुकी है, लेकिन देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में उसी हिसाब से कमी नहीं की गई है। उनका कहना है कि इसका सीधा असर आम लोगों की जेब और महंगाई पर पड़ रहा है। 82 रुपये लीटर में मिलना चाहिए शुद्ध पेट्रोलअरविंद केजरीवाल ने कहा कि देश में इस समय कच्चे तेल की कीमत लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल है। उनके अनुसार, इस कीमत पर पेट्रोल बनाने की लागत लगभग 42 रुपये प्रति लीटर आती है। यदि इसमें रिफाइनिंग, परिवहन, डीलर कमीशन, केंद्रीय कर और राज्यों के कर जोड़ दिए जाएं, तब भी शुद्ध पेट्रोल लगभग 82 रुपये प्रति लीटर मिलना चाहिए।उन्होंने कहा कि अभी लोगों को ई-20 पेट्रोल लगभग 102 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से मिल रहा है, जबकि उनकी गणना के अनुसार ई-20 पेट्रोल की कीमत इससे काफी कम, लगभग 70 रुपये प्रति लीटर होनी चाहिए। डीजल की कीमत भी कम की जा सकती हैअरविंद केजरीवाल ने कहा कि यदि पेट्रोल की कीमत कम हो सकती है, तो उसी तरह डीजल की कीमत भी घटाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि डीजल सस्ता होने से ट्रकों, बसों और अन्य वाहनों का खर्च कम होगा। इससे सामान की ढुलाई सस्ती होगी और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों में भी कमी आएगी। महंगाई कम करने का सबसे आसान तरीकाउन्होंने कहा कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों का सीधा संबंध महंगाई से है। जब ईंधन महंगा होता है तो परिवहन महंगा हो जाता है और इसका असर सब्जियों, फल, दूध, अनाज, दवाइयों और अन्य जरूरी सामान की कीमतों पर भी पड़ता है। इसलिए यदि पेट्रोल-डीजल के दाम कम किए जाएं तो आम जनता को बड़ी राहत मिलेगी और महंगाई भी कम होगी। तेल कंपनियों के मुनाफे पर उठाए सवालअरविंद केजरीवाल ने कहा कि तेल कंपनियों ने पिछले वर्षों में हजारों करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया है। उन्होंने दावा किया कि पिछले साल तेल कंपनियों को लगभग 77 हजार करोड़ रुपये का लाभ हुआ। ऐसे में सरकार यह नहीं कह सकती कि युद्ध के दौरान हुए नुकसान की भरपाई के लिए जनता से अधिक पैसे वसूले जाएं। उन्होंने कहा कि अगर कंपनियों ने पहले इतना बड़ा मुनाफा कमाया है तो उसी मुनाफे से नुकसान की भरपाई की जा सकती है। आम लोगों पर अतिरिक्त बोझ डालना सही नहीं है 2014 के बाद कई बार सस्ता हुआ कच्चा तेलअरविंद केजरीवाल ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद कई बार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट आई, लेकिन देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में उसी अनुपात में कमी नहीं की गई। उनका कहना है कि जब कच्चा तेल सस्ता होता है तो उसका लाभ सीधे जनता को मिलना चाहिए। सरकार से की तुरंत कीमतें घटाने की मांगअरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार से मांग की कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों की दोबारा समीक्षा की जाए। उन्होंने कहा कि सरकार को जनता के हित में फैसला लेते हुए शुद्ध पेट्रोल लगभग 82 रुपये प्रति लीटर उपलब्ध कराना चाहिए। यदि ई-20 पेट्रोल बेचा जा रहा है तो उसकी कीमत इससे भी कम होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पेट्रोल और डीजल सस्ते होने से लोगों का खर्च कम होगा, महंगाई पर नियंत्रण मिलेगा और देश के करोड़ों परिवारों को आर्थिक राहत मिलेगी। प्रेस वार्ता के दौरान अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मौजूदा समय में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत पहले की तुलना में काफी कम है। इसलिए अब सरकार को भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी करनी चाहिए। उनका कहना है कि इससे आम जनता को राहत मिलेगी, महंगाई कम होगी और देश की अर्थव्यवस्था पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।

श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले पर कांग्रेस का बड़ा हमला, प्रधानमंत्री से माफी और ट्रस्ट भंग करने की मांग

शक्ति सिंह गोहिल ने कहा- ट्रस्ट में नियुक्त लोगों की जिम्मेदारी प्रधानमंत्री की भी है नई दिल्ली, 8 जुलाई। कांग्रेस ने श्रीराम मंदिर में सामने आए कथित चढ़ावा चोरी के मामले को लेकर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि यह मामला केवल चोरी का नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय है। कांग्रेस ने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भंग कर नया ट्रस्ट बनाया जाए। प्रेस वार्ता में शक्ति सिंह गोहिल ने लगाए गंभीर आरोपकांग्रेस मुख्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में पार्टी के वरिष्ठ नेता शक्ति सिंह गोहिल ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में जिन लोगों की नियुक्ति की गई थी, वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की देखरेख में चुने गए थे। इसलिए यदि ट्रस्ट के अंदर किसी प्रकार की गड़बड़ी या चोरी हुई है तो इसकी नैतिक जिम्मेदारी प्रधानमंत्री पर भी बनती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को इस पूरे मामले पर अपनी चुप्पी तोड़नी चाहिए और देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए। अटल बिहारी वाजपेयी के बयान का किया जिक्रशक्ति सिंह गोहिल ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के एक पुराने बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि चौकीदार चुप रहता है तो इसका मतलब यह माना जाता है कि वह चोर से मिला हुआ है। उन्होंने इसी बयान के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें इस मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। चंपत राय की गिरफ्तारी की मांगकांग्रेस नेता ने ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यदि चढ़ावे की सुरक्षा में लापरवाही हुई है और दानपात्रों की चाबी चालक को सौंपने जैसी बातें सही हैं तो यह बहुत गंभीर मामला है। उन्होंने मांग की कि चंपत राय के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई हो और उनकी गिरफ्तारी की जाए। सीसीटीवी फुटेज में कई बार चोरी पकड़े जाने का दावाशक्ति सिंह गोहिल ने दावा किया कि 27 अप्रैल 2026 से 5 जून 2026 तक लगभग 40 दिनों के सीसीटीवी फुटेज में 70 बार चढ़ावा चोरी की घटनाएं सामने आईं। उन्होंने कहा कि यदि यह सही है तो यह बेहद चिंताजनक स्थिति है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2023 से 2025 तक की ऑडिट रिपोर्ट में भी सुरक्षा व्यवस्था की कई कमियां बताई गई थीं। रिपोर्ट में कुछ स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे नहीं होने और निगरानी व्यवस्था कमजोर होने का उल्लेख था, लेकिन ट्रस्ट ने इन कमियों को दूर करने के लिए समय रहते कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया। जमीन खरीद का मुद्दा भी उठायाकांग्रेस ने मंदिर ट्रस्ट की ओर से जमीन खरीद के पुराने मामले का भी उल्लेख किया। शक्ति सिंह गोहिल ने कहा कि जिस जमीन की कीमत लगभग 2.93 करोड़ रुपये बताई गई थी, उसे ट्रस्ट ने करीब 18 करोड़ रुपये में खरीदा। उन्होंने इस पूरे मामले की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। कर्मचारियों की नियुक्ति पर सवालकांग्रेस नेता ने कहा कि एसआईटी की एफआईआर में कई आरोपियों के नाम के साथ उनके पिता का नाम और पता अज्ञात लिखा गया है। उनका कहना था कि इससे यह सवाल उठता है कि आखिर कर्मचारियों की नियुक्ति किस प्रक्रिया से की गई और क्या नियुक्ति से पहले उनका पूरा सत्यापन किया गया था। चोरी रुकने के बाद बढ़ा चढ़ावाशक्ति सिंह गोहिल ने दावा किया कि एफआईआर दर्ज होने और कार्रवाई शुरू होने के बाद मंदिर में चोरी की घटनाएं बंद हो गईं। इसके बाद मंदिर में प्रतिदिन मिलने वाला चढ़ावा 16 से 18 लाख रुपये से बढ़कर लगभग 24 से 26 लाख रुपये प्रतिदिन हो गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे यह संकेत मिलता है कि पहले प्रतिदिन बड़ी मात्रा में चढ़ावे की चोरी हो रही थी। धार्मिक भावनाओं का किया उल्लेखकांग्रेस नेता ने कहा कि भगवान श्रीराम करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं। ऐसे पवित्र स्थान पर यदि किसी प्रकार की चोरी या अनियमितता होती है तो यह पूरे देश के श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली बात है। उन्होंने कहा कि धर्म के नाम पर किसी भी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार स्वीकार नहीं किया जा सकता। नया ट्रस्ट बनाने की मांगकांग्रेस ने मांग की कि वर्तमान श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भंग किया जाए और उसकी जगह शंकराचार्यों तथा साधु-संतों की भागीदारी वाला नया ट्रस्ट बनाया जाए। पार्टी ने यह भी कहा कि पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराई जाए ताकि सच्चाई देश के सामने आ सके और दोषियों को उचित सजा मिल सके। कांग्रेस की प्रमुख मांगेंकांग्रेस ने इस मामले में कई प्रमुख मांगें रखीं। इनमें वर्तमान ट्रस्ट को भंग करना, पूर्व महासचिव चंपत राय की गिरफ्तारी, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश से माफी मांगना शामिल है। श्रीराम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मामले को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि यह केवल आर्थिक अनियमितता का मामला नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय है। कांग्रेस ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई और ट्रस्ट में व्यापक बदलाव की मांग करते हुए सरकार से जवाब देने की अपील की है।

न्यू इंडिया फ़ाउंडेशन की अनुवाद फ़ेलोशिप 2026 चार महत्वपूर्ण भारतीय रचनाओं का होगा अंग्रेज़ी में अनुवाद

भारतीय भाषाओं की महत्वपूर्ण किताबों को दुनिया तक पहुंचाने की नई पहल नई दिल्ली, 7 जुलाई 2026। न्यू इंडिया फ़ाउंडेशन (एनआईएफ़) ने वर्ष 2026 के लिए अपनी प्रतिष्ठित अनुवाद फ़ेलोशिप के तीसरे चरण के विजेताओं की घोषणा कर दी है। इस बार चार अनुवादकों का चयन किया गया है, जो भारतीय भाषाओं की महत्वपूर्ण कथेतर (नॉन-फिक्शन) पुस्तकों का अंग्रेज़ी में अनुवाद करेंगे। इन पुस्तकों में आत्मकथा, संस्मरण, यात्रा-वृत्तांत और राजनीतिक पत्रकारिता जैसी महत्वपूर्ण विधाएं शामिल हैं। इस वर्ष जिन चार अनुवादकों को फ़ेलोशिप मिली है, उनमें जयश्री कलतिल, मिनी चंद्रन, मुरली रंगनाथन और शेफाली झा शामिल हैं। इन सभी का चयन एक लंबी और कड़ी प्रक्रिया के बाद किया गया है। फ़ाउंडेशन का उद्देश्य है कि भारतीय भाषाओं में लिखी गई महत्वपूर्ण किताबें केवल सीमित पाठकों तक ही न रहें, बल्कि उनका अंग्रेज़ी में अनुवाद होकर देश और दुनिया के बड़े पाठक वर्ग तक पहुंच सके। जयश्री कलतिल करेंगी आदिवासी संघर्ष की महत्वपूर्ण आत्मकथा का अनुवाद इस वर्ष फ़ेलोशिप पाने वाली पहली अनुवादक जयश्री कलतिल हैं। उन्हें आदिवासी भूमि अधिकारों की प्रमुख कार्यकर्ता सी.के. जानू की आत्मकथा ‘आडिममक्का’ का अंग्रेज़ी में अनुवाद करने के लिए चुना गया है। यह पुस्तक केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं है, बल्कि केरल के आदिवासी समाज के लंबे संघर्ष का दस्तावेज़ मानी जाती है। इसमें बताया गया है कि आदिवासी समुदाय ने अपनी जमीन, अधिकार और सम्मान के लिए किस तरह संघर्ष किया। पुस्तक यह भी दिखाती है कि केरल के विकास मॉडल की चर्चा तो बहुत होती है, लेकिन आदिवासी समाज के संघर्षों का उल्लेख अक्सर नहीं किया जाता। जयश्री कलतिल एक प्रसिद्ध लेखिका और अनुवादक हैं। वह द बॉम्बे लिटरेरी मैगज़ीन में अनूदित साहित्य की मैनेजिंग एडिटर हैं और नए अनुवादकों को प्रशिक्षण देने का भी काम करती हैं। उनके अनुभव को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि यह महत्वपूर्ण पुस्तक अंग्रेज़ी पाठकों तक प्रभावी रूप से पहुंचेगी। मिनी चंद्रन करेंगी मशहूर नाटककार तोप्पिल भासी के संस्मरणों का अनुवाद दूसरी फ़ेलोशिप मिनी चंद्रन को मिली है। वह आईआईटी कानपुर में अंग्रेज़ी की प्रोफ़ेसर हैं। उन्हें प्रसिद्ध मलयालम नाटककार तोप्पिल भासी की संस्मरण पुस्तक ‘ओलीविले ओरमगल’ का अंग्रेज़ी में अनुवाद करने की जिम्मेदारी दी गई है। तोप्पिल भासी भारतीय रंगमंच के बड़े नामों में गिने जाते हैं। उनका प्रसिद्ध नाटक ‘निंगलन्ने कम्युनिस्टाक्की’ आज भी मलयालम साहित्य और रंगमंच की महत्वपूर्ण रचनाओं में शामिल है। उनकी यह संस्मरण पुस्तक 1948 से 1953 के बीच के पांच वर्षों की घटनाओं पर आधारित है। हालांकि इसमें केवल पांच वर्षों का वर्णन है, लेकिन इसे मलयालम की सबसे महत्वपूर्ण आत्मकथात्मक पुस्तकों में गिना जाता है। यह पुस्तक उस समय के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक माहौल को समझने में बहुत मदद करती है। मुरली रंगनाथन करेंगे राहुल सांकृत्यायन की ऐतिहासिक यात्रा का अनुवाद इस वर्ष हिंदी भाषा की ओर से मुरली रंगनाथन का चयन किया गया है। उन्हें प्रसिद्ध लेखक और इतिहासकार राहुल सांकृत्यायन की चर्चित पुस्तक ‘तिब्बत में सवा वर्ष’ का अंग्रेज़ी में अनुवाद करने के लिए फ़ेलोशिप दी गई है। यह पुस्तक पहली बार वर्ष 1934 में प्रकाशित हुई थी। इसमें राहुल सांकृत्यायन ने दिसंबर 1928 से जून 1930 के बीच की अपनी तिब्बत यात्रा का विस्तृत वर्णन किया है। उन्होंने बुद्ध से जुड़े प्राचीन ग्रंथों और ऐतिहासिक जानकारियों की खोज के लिए कठिन यात्राएं की थीं। उस समय भारत, नेपाल और तिब्बत में विदेशियों के प्रवेश पर कई तरह की पाबंदियां थीं। इसके बावजूद राहुल सांकृत्यायन ने जोखिम उठाकर यात्रा की और वहां के समाज, संस्कृति, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को बहुत करीब से समझा। उन्होंने नेपाल, तिब्बत और चीन के बीच के संबंधों का भी विस्तार से वर्णन किया। यही कारण है कि यह पुस्तक भारतीय यात्रा साहित्य और इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण पुस्तकों में गिनी जाती है। शेफाली झा करेंगी उर्दू की महत्वपूर्ण राजनीतिक पुस्तक का अनुवाद चौथी फ़ेलोशिप शेफाली झा को दी गई है। वह एक प्रसिद्ध एंथ्रोपोलॉजिस्ट और शोधकर्ता हैं। उन्हें उर्दू लेखक इब्राहिम हुसैन जलीस की पुस्तक ‘दो मुल्क, एक कहानी’ का अंग्रेज़ी में अनुवाद करने की जिम्मेदारी मिली है। यह पुस्तक भारत की आज़ादी के बाद के समय की राजनीतिक परिस्थितियों को बहुत करीब से दिखाती है। इसमें लेखक ने अपने व्यक्तिगत अनुभवों के आधार पर उस दौर की घटनाओं का वर्णन किया है। पुस्तक में विशेष रूप से हैदराबाद रियासत के अंतिम वर्षों, वहां की राजनीति, निज़ाम शासन, इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन की गतिविधियों और रियासत के भारत में विलय की घटनाओं का विस्तार से वर्णन किया गया है। इतिहास और राजनीति को समझने वाले पाठकों के लिए यह पुस्तक एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़ मानी जाती है। नीरजा गोपाल जयाल ने फ़ेलोशिप को बताया महत्वपूर्ण पहलन्यू इंडिया फ़ाउंडेशन की गवर्निंग बोर्ड सदस्य नीरजा गोपाल जयाल ने कहा कि इस वर्ष चुने गए सभी अनुवादक अपने-अपने क्षेत्र के उत्कृष्ट विद्वान हैं। उन्होंने कहा कि जिन पुस्तकों का चयन किया गया है, वे भारत के सामाजिक, राजनीतिक और बौद्धिक इतिहास को समझने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि आत्मकथा, संस्मरण, यात्रा-वृत्तांत और राजनीतिक पत्रकारिता जैसी विधाओं की ये पुस्तकें भारत को अलग दृष्टि से देखने और समझने का अवसर देती हैं। हर फ़ेलो को मिलेगा छह लाख रुपये का अनुदानन्यू इंडिया फ़ाउंडेशन की इस फ़ेलोशिप के तहत प्रत्येक चयनित अनुवादक को छह महीने के लिए छह लाख रुपये का अनुदान दिया जाएगा। इस सहायता राशि का उद्देश्य यह है कि अनुवादक बिना आर्थिक चिंता के पूरी गंभीरता और गुणवत्ता के साथ अपना अनुवाद कार्य पूरा कर सकें। फ़ेलोशिप के अंतर्गत असमिया, बांग्ला, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, मराठी, मलयालम, ओड़िया, तमिल और उर्दू जैसी भारतीय भाषाओं की महत्वपूर्ण कथेतर पुस्तकों का अंग्रेज़ी में अनुवाद किया जाता है। चयन प्रक्रिया रही पूरी तरह निष्पक्ष और विशेषज्ञों की देखरेख में हुईइस वर्ष फ़ेलोशिप के लिए देशभर से कई आवेदन प्राप्त हुए थे। सभी आवेदनों का मूल्यांकन विशेषज्ञ समितियों ने किया। हर भाषा के लिए अलग-अलग भाषा विशेषज्ञ समिति बनाई गई थी। इन समितियों में अनुभवी प्रोफ़ेसर, साहित्यकार, द्विभाषी विद्वान और अनुवादक शामिल थे। इनके सुझावों और विस्तृत मूल्यांकन के बाद अंतिम चार नामों का चयन किया गया। श्रीनाथ राघवन ने बताया अनुवाद क्यों है जरूरीन्यू इंडिया फ़ाउंडेशन के गवर्निंग बोर्ड सदस्य श्रीनाथ राघवन ने कहा कि भारत की कई महत्वपूर्ण किताबें भारतीय

सहकारिता से मजबूत होगा विकसित भारत, दिल्ली में बनेगी नई सहकारिता नीति: रविन्द्र इन्द्राज सिंह

नई दिल्ली में ‘सहकारिता सप्ताह-2026’ का भव्य समापन नई दिल्ली के एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर में ‘सहकारिता सप्ताह-2026’ का समापन समारोह बड़े उत्साह के साथ आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय की स्थापना के पाँच वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित किया गया था। इसका आयोजन दिल्ली सरकार के रजिस्ट्रार, सहकारी समितियाँ (आरसीएस) द्वारा किया गया। कार्यक्रम में दिल्ली सरकार के समाज कल्याण, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग कल्याण, सहकारिता एवं चुनाव मंत्री रविन्द्र इन्द्राज सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। वहीं, सांसद बांसुरी स्वराज विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सहकारी समितियों के प्रतिनिधि, अधिकारी, कर्मचारी और सहकारिता क्षेत्र से जुड़े लोग मौजूद रहे। इस दौरान सहकारिता आंदोलन की उपलब्धियों पर चर्चा की गई और भविष्य की योजनाओं की जानकारी भी दी गई। रविन्द्र इन्द्राज सिंह बोले- सहकारिता हमारी संस्कृति और विकास की सबसे बड़ी ताकतसमारोह को संबोधित करते हुए सहकारिता मंत्री रविन्द्र इन्द्राज सिंह ने कहा कि सहकारिता केवल एक व्यवस्था नहीं बल्कि भारत की संस्कृति, परंपरा और सामाजिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि जब लोग मिलकर काम करते हैं तो विकास की गति तेज होती है और समाज के हर वर्ग को उसका लाभ मिलता है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 का सपना तभी पूरा होगा जब सहकारिता आंदोलन और मजबूत होगा। किसानों, छोटे व्यापारियों, महिलाओं, युवाओं और आम लोगों को सहकारिता से जोड़कर देश की अर्थव्यवस्था को नई ताकत दी जा सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के नेतृत्व में मिला नया विस्ताररविन्द्र इन्द्राज सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में सहकारिता मंत्रालय की स्थापना एक ऐतिहासिक फैसला था। उन्होंने केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की भी सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में सहकारिता क्षेत्र को नई दिशा और नई गति मिली है। उन्होंने बताया कि पिछले पाँच वर्षों में सहकारी संस्थाओं को मजबूत बनाने के लिए कई बड़े कदम उठाए गए हैं। आज सहकारी संस्थाएं कृषि, डेयरी, बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, विपणन और कई अन्य क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। इससे लाखों लोगों को रोजगार और आर्थिक मजबूती मिल रही है। दिल्ली सरकार तैयार कर रही है नई सहकारिता नीतिरविन्द्र इन्द्राज सिंह ने कहा कि दिल्ली सरकार भी सहकारिता क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने बताया कि दिल्ली की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नई सहकारिता नीति तैयार की जा रही है। इस नीति का उद्देश्य सहकारी संस्थाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और आधुनिक बनाना है।उन्होंने कहा कि आने वाले समय में बहुउद्देशीय सहकारी समितियों के माध्यम से बैंकिंग, परिवहन, जनसेवा, कॉमन सर्विस सेंटर और अन्य आवश्यक सेवाओं को भी सहकारिता से जोड़ा जाएगा। इससे लोगों को एक ही स्थान पर कई सुविधाएं आसानी से मिल सकेंगी। आरसीएस कार्यालय होगा पूरी तरह डिजिटलअपने संबोधन में रविन्द्र इन्द्राज सिंह ने कहा कि रजिस्ट्रार, सहकारी समितियाँ (आरसीएस) कार्यालय का तेजी से डिजिटलीकरण किया जा रहा है। इससे सहकारी समितियों को ऑनलाइन सेवाएं मिलेंगी और उन्हें बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। उन्होंने कहा कि डिजिटल व्यवस्था आने से काम में पारदर्शिता बढ़ेगी, भ्रष्टाचार कम होगा और सभी प्रक्रियाएं पहले से अधिक सरल और तेज बनेंगी। इससे सहकारी संस्थाओं का कामकाज भी आसान होगा। बांसुरी स्वराज ने सहकारिता मंत्रालय के पाँच वर्ष पूरे होने पर दी बधाईसांसद बांसुरी स्वराज ने सहकारिता मंत्रालय के पाँच वर्ष पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री अमित शाह को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि सहकारिता मंत्रालय बनने के बाद देश में सहकारिता आंदोलन को नई मजबूती मिली है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा किए गए सुधारों का लाभ किसानों, दुग्ध उत्पादकों, मछुआरों, छोटे व्यापारियों और समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँच रहा है। इससे लोगों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है और आत्मनिर्भर भारत का सपना भी साकार हो रहा है। गांव से लेकर शहर तक सहकारिता की बढ़ रही भूमिकाबांसुरी स्वराज ने कहा कि आज सहकारी संस्थाएं केवल खेती तक सीमित नहीं हैं। वे बैंकिंग, डेयरी, विपणन, वित्तीय सेवाओं और कई अन्य क्षेत्रों में भी लोगों की मदद कर रही हैं। इससे छोटे लोगों को भी आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में सहकारिता की भूमिका लगातार बढ़ती जाएगी और आने वाले समय में यह देश के आर्थिक विकास का मजबूत आधार बनेगी। बेहतरीन काम करने वालों को किया गया सम्मानितसमारोह के दौरान सहकारिता क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली कई सहकारी संस्थाओं, पदाधिकारियों और कर्मचारियों को सम्मानित भी किया गया। उनके कार्यों की सराहना करते हुए उन्हें पुरस्कार और सम्मान प्रदान किए गए। मंच से कहा गया कि ऐसे सम्मान से अन्य संस्थाओं और कर्मचारियों को भी बेहतर काम करने की प्रेरणा मिलेगी और सहकारिता आंदोलन और अधिक मजबूत होगा। सहकारिता के माध्यम से विकसित भारत का संकल्पकार्यक्रम के अंत में यह संदेश दिया गया कि सहकारिता केवल आर्थिक विकास का माध्यम नहीं है, बल्कि समाज में सहयोग, विश्वास और सामूहिक प्रगति की भावना को भी मजबूत करती है। वक्ताओं ने विश्वास जताया कि यदि सरकार, सहकारी संस्थाएं और आम नागरिक मिलकर काम करेंगे तो विकसित भारत-2047 का लक्ष्य निश्चित रूप से हासिल किया जा सकेगा। दिल्ली सरकार ने भी भरोसा दिलाया कि वह सहकारिता क्षेत्र को आधुनिक, पारदर्शी और जनहितकारी बनाने के लिए लगातार काम करती रहेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने विकास की नई ऊंचाइयां हासिल कीं : रेखा गुप्ता

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने हर क्षेत्र में तेजी से विकास किया है। आज भारत की पहचान दुनिया में पहले से कहीं अधिक मजबूत हुई है। देश की अर्थव्यवस्था लगातार आगे बढ़ रही है, सड़क, रेल, हवाई अड्डे और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हुआ है। डिजिटल सेवाओं ने लोगों का जीवन आसान बनाया है। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने, गरीबों के कल्याण, स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार और शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़े बदलाव देखने को मिले हैं।उन्होंने कहा कि सरकार ने हमेशा यह कोशिश की है कि विकास का लाभ समाज के आखिरी व्यक्ति तक पहुंचे। इसी सोच के कारण करोड़ों लोगों को सरकारी योजनाओं का सीधा फायदा मिला है। दिल्ली में डबल इंजन सरकार तेजी से कर रही है विकास कार्यमुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली में भी डबल इंजन सरकार पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ काम कर रही है। सरकार केवल वादे नहीं कर रही, बल्कि हर योजना को समय पर पूरा करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों में दिल्ली में कई बड़े फैसले लिए गए हैं, जिनका असर आने वाले वर्षों में साफ दिखाई देगा। उन्होंने बताया कि सरकार यमुना नदी की सफाई, प्रदूषण कम करने, पानी और सीवर व्यवस्था सुधारने, सड़कों को बेहतर बनाने, ड्रेनेज सिस्टम मजबूत करने, सरकारी अस्पतालों और स्कूलों की सुविधाएं बढ़ाने, हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने और डिजिटल व्यवस्था को मजबूत करने जैसे कई महत्वपूर्ण काम कर रही है। स्वच्छ और हरित दिल्ली सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकतामुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली को प्रदूषण मुक्त और साफ-सुथरा बनाना सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। इसी उद्देश्य से स्वच्छ यमुना अभियान, दिल्ली इलेक्ट्रिक व्हीकल नीति-2026, विंटर एक्शन प्लान, ‘स्वच्छ हवा-स्वस्थ दिल्ली’ अभियान, बड़े स्तर पर 70 लाख पौधे लगाने का अभियान और सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने जैसी योजनाओं पर तेजी से काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि दिल्ली का पर्यावरण बेहतर होगा तो लोगों का स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा। आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ हवा और साफ वातावरण देना सरकार का लक्ष्य है। हर नागरिक तक विकास का लाभ पहुंचाना सरकार का उद्देश्यमुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि विकसित दिल्ली तभी बन सकती है जब विकास का लाभ हर व्यक्ति तक पहुंचे। सरकार इस बात का विशेष ध्यान रख रही है कि किसी भी वर्ग को पीछे न छोड़ा जाए। गरीब, मजदूर, महिलाएं, युवा, वरिष्ठ नागरिक और जरूरतमंद परिवार सभी को योजनाओं का लाभ मिले, इसके लिए लगातार काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार जनता की जरूरतों को समझकर योजनाएं बना रही है और हर फैसले में लोगों की भागीदारी को महत्व दिया जा रहा है। पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ काम करना सरकार की प्राथमिकता है। युवाओं को रोजगार और महिलाओं को सशक्त बनाने पर विशेष जोरमुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने, कौशल विकास को बढ़ावा देने और नई तकनीक तथा नवाचार को प्रोत्साहित करने पर लगातार काम कर रही है। इसके साथ ही महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने, वरिष्ठ नागरिकों को सम्मान देने और गरीब परिवारों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए भी कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली को ऐसा शहर बनाया जाएगा जहां निवेश बढ़े, उद्योगों को बढ़ावा मिले और युवाओं के लिए अधिक रोजगार के अवसर उपलब्ध हों। जनभागीदारी से ही बनेगी विकसित दिल्लीमुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि केवल सरकार के प्रयासों से दिल्ली का विकास संभव नहीं है। इसके लिए हर नागरिक का सहयोग और भागीदारी जरूरी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, पानी बचाने, पौधे लगाने और शहर को सुंदर बनाने के अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें।उन्होंने कहा कि जब सरकार और जनता मिलकर काम करेंगे, तभी दिल्ली देश की सबसे स्वच्छ, सुरक्षित और आधुनिक राजधानी बन सकेगी। 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में दिल्ली निभाएगी महत्वपूर्ण भूमिकाअपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य अवश्य हासिल करेगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली इस यात्रा में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। राजधानी को आधुनिक सुविधाओं, बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छ पर्यावरण, मजबूत आधारभूत ढांचे और पारदर्शी प्रशासन के साथ देश की आदर्श राजधानी बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी पूरा होगा जब विकसित दिल्ली का निर्माण होगा और इसके लिए सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ लगातार काम करती रहेगी। उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि वे इस अभियान में सक्रिय रूप से जुड़ें और मिलकर ऐसी दिल्ली बनाएं जिस पर हर देशवासी को गर्व हो।