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पूर्व इसरो प्रमुख के. कस्तूरीरंगन का निधन, शिक्षा और अंतरिक्ष विज्ञान के युगपुरुष को अंतिम विदाई की तैयारी

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पूर्व अध्यक्ष और प्रतिष्ठित अंतरिक्ष वैज्ञानिक डॉ. के. कस्तूरीरंगन का शुक्रवार सुबह निधन हो गया।84 वर्षीय कस्तूरीरंगन ने बेंगलुरु स्थित अपने आवास पर सुबह लगभग 10 बजे अंतिम सांस ली। पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक, वे बीते कुछ महीनों सेउम्र संबंधी बीमारियों से पीड़ित थे। उनके परिवार में दो पुत्र हैं। रविवार को अंतिम संस्कार, रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट में अंतिम दर्शनकस्तूरीरंगन के पार्थिव शरीर को 27 अप्रैल (रविवार) को बेंगलुरु स्थित रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट (RRI) में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। इसकेपश्चात उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। अधिकारियों ने जानकारी दी कि आम लोगों और वैज्ञानिक समुदाय को श्रद्धांजलि देने के लिए रिसर्चसंस्थान में विशेष व्यवस्था की जाएगी।नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के शिल्पकारके. कस्तूरीरंगन सिर्फ अंतरिक्ष विज्ञान ही नहीं, बल्कि शिक्षा नीति में भी देश को दिशा देने वाले एक प्रभावशाली व्यक्तित्व रहे। वे नई राष्ट्रीय शिक्षानीति (NEP) के मसौदे की अध्यक्षता करने वाली समिति के प्रमुख थे। इस नीति में भारत के शिक्षा ढांचे में व्यापक सुधार और नवाचार की नींव रखीगई थी। उन्हें शिक्षा सुधारों के वास्तुकार के रूप में व्यापक पहचान मिली। राज्यसभा और योजना आयोग में दी सेवाएंविज्ञान और शिक्षा के साथ-साथ डॉ. कस्तूरीरंगन ने संसदीय और प्रशासनिक दायित्वों का भी सफलतापूर्वक निर्वहन किया। वे 2003 से 2009 तकराज्यसभा के सदस्य रहे और इस दौरान योजना आयोग में भी योगदान दिया। उनका कार्यकाल विचारशील नेतृत्व और विकासपरक दृष्टिकोण के लिएजाना गया। शोध संस्थानों से गहरा नाताकस्तूरीरंगन का अनुसंधान संस्थानों से भी गहरा संबंध रहा। वे 2004 से 2009 तक नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज (NIAS), बेंगलुरु केनिदेशक के रूप में कार्यरत रहे। साथ ही, उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के कुलाधिपति और कर्नाटक नॉलेज कमीशन के अध्यक्ष केरूप में भी उल्लेखनीय कार्य किया। अंतरिक्ष विज्ञान में अग्रणी भूमिकाइसरो में अपने कार्यकाल के दौरान, डॉ. कस्तूरीरंगन ने भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से स्थापित किया। उन्होंने 1994 से2003 तक इसरो के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। उनके नेतृत्व में कई महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष मिशनों की योजना बनी और क्रियान्वयन हुआ। सम्मान और पुरस्कार: पद्म विभूषण से सम्मानितकस्तूरीरंगन को उनके अद्वितीय योगदान के लिए 2000 में भारत सरकार द्वारा पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। यह सम्मान उन्हें विज्ञान, प्रौद्योगिकी और शिक्षा के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए दिया गया। व्यक्तिगत जीवन और आरंभिक पृष्ठभूमिडॉ. कस्तूरीरंगन का जन्म 24 अक्टूबर 1940 को केरल के एर्नाकुलम में हुआ था। उनके पिता सी. एम. कृष्णास्वामी अय्यर और मां विशालाक्षी थीं।तमिलनाडु से संबंध रखने वाला उनका परिवार त्रिशूर जिले के चालाकुडी में आकर बसा था। उनकी मां का संबंध पलक्कड़ अय्यर समुदाय से था। एक युग का अंतके. कस्तूरीरंगन के निधन से भारत ने एक ऐसा वैज्ञानिक, शिक्षाविद और नीति निर्माता खो दिया है, जिसने विज्ञान, शिक्षा और नीति निर्माण के क्षेत्र मेंअपनी गहरी छाप छोड़ी। उनके विचार, योजनाएं और दृष्टिकोण आने वाली पीढ़ियों को मार्गदर्शन प्रदान करते रहेंगे।

वीर सावरकर पर टिप्पणी मामले में सुप्रीम कोर्ट की राहुल गांधी को फटकार: इतिहास के प्रति ज़िम्मेदारी निभाने की नसीहत

स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कांग्रेस सांसद और नेता विपक्ष राहुल गांधी कोकड़ी फटकार लगाई। शीर्ष अदालत ने कहा कि आज़ादी के लिए संघर्ष करने वाले महापुरुषों के बारे में अपमानजनक भाषा बर्दाश्त नहीं की जासकती। “स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति सम्मान जरूरी”: सुप्रीम कोर्टसुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन शामिल थे, ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हम देश की आज़ादी के लिए संघर्षकरने वालों के खिलाफ किसी को भी अनुचित भाषा का प्रयोग करने की अनुमति नहीं दे सकते। जस्टिस दत्ता ने टिप्पणी करते हुए कहा, “इन महानलोगों ने हमें आज़ादी दिलाई, और आज हम उनके बारे में कैसी बातें कर रहे हैं? यह अस्वीकार्य है।” भविष्य में चेतावनी: स्वतः संज्ञान की बातकोर्ट ने राहुल गांधी को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि भविष्य में वह स्वतंत्रता सेनानियों को लेकर ऐसे गैर-जिम्मेदाराना बयान देंगे, तो अदालत स्वतःसंज्ञान लेकर कार्रवाई कर सकती है। कोर्ट ने कहा, “ऐसे विषयों पर बयानबाज़ी से पहले तथ्यों और इतिहास की जानकारी आवश्यक है।” राहुल गांधी को ट्रायल कोर्ट समन से राहतइस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को फिलहाल राहत देते हुए उनके खिलाफ ट्रायल कोर्ट द्वारा जारी समन पर रोक लगा दी। इससे पहलेइलाहाबाद हाईकोर्ट ने 4 अप्रैल को समन पर रोक लगाने से इंकार कर दिया था, जिसके बाद राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। “गांधी जी ने भी इस्तेमाल किया था ‘वफादार सेवक’ शब्द”सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपांकर दत्ता ने राहुल गांधी के बयान पर सवाल उठाते हुए उदाहरण दिया कि महात्मा गांधी ने भी ब्रिटिश वायसराय को पत्रलिखते समय ‘आपका वफादार सेवक’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था। उन्होंने पूछा, “क्या इसका मतलब यह है कि गांधी जी भी अंग्रेजों के नौकरथे?” यह सवाल अदालत की उस मंशा को दर्शाता है कि ऐतिहासिक व्यक्तित्वों को संदर्भ से काटकर आंकना न तो न्यायसंगत है और न हीजिम्मेदाराना। “क्या राहुल गांधी को अपने इतिहास की जानकारी है?”अदालत ने राहुल गांधी के वकील एएम सिंघवी से सवाल किया कि क्या उनके मुवक्किल को यह जानकारी है कि इंदिरा गांधी, जब देश कीप्रधानमंत्री थीं, उन्होंने वीर सावरकर की सराहना करते हुए एक प्रशंसा पत्र भेजा था? जस्टिस दत्ता ने कहा, “अगर आपको देश के इतिहास या भूगोलकी जानकारी नहीं है, तो कम से कम हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में गलतबयानी न करें।” मामले की पृष्ठभूमिराहुल गांधी ने एक भाषण के दौरान सावरकर को लेकर कथित रूप से कहा था कि उन्होंने अंग्रेजों से माफी मांगी और ब्रिटिश सरकार की सेवा की। इसबयान के बाद कई संगठनों और नेताओं ने आपत्ति जताई और मामला अदालत तक पहुंच गया।

पहलगाम आतंकी हमले के खिलाफ कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन, दिल्ली में निकाला कैंडल मार्च

नई दिल्ली: कश्मीर के पहलगाम में हाल ही में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस हमले में अब तक 26 लोगों की जानजा चुकी है और दर्जनों घायल हैं। इस हमले के विरोध में देशभर में आक्रोश है। इसी कड़ी में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने दिल्ली में कैंडल मार्चनिकालकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी और केंद्र सरकार से आतंक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। कैंडल मार्च का आयोजन और स्थानयह कैंडल मार्च इंडिया गेट से शुरू होकर राजपथ तक आयोजित किया गया। कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व, युवा कांग्रेस, महिला कांग्रेस और दिल्ली प्रदेशकांग्रेस कमेटी के सदस्य इस शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। मार्च में हिस्सा लेने वालों ने हाथों में मोमबत्तियां, शहीदों की तस्वीरें और “आतंकके खिलाफ एकजुट भारत” जैसे संदेश वाले पोस्टर लिए हुए थे। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की मौजूदगीइस कैंडल मार्च में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा भी शामिल हुए। उन्होंने इस मौके पर शहीदों को श्रद्धांजलि दी और कहा कि “यहहमला न केवल निर्दोष लोगों पर बल्कि भारत की आत्मा पर हमला है।” राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “जब-जब सुरक्षा मेंचूक होती है, तब-तब सत्ताधारी दल जिम्मेदारी से बचता है। देश यह जानना चाहता है कि आखिर इतनी बड़ी आतंकी साजिश को कैसे अंजाम दियागया।” सरकार से सवाल: कौन लेगा ज़िम्मेदारी?कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार से यह सवाल उठाया कि अगर खुफिया इनपुट्स पहले से थे, तो सुरक्षा में चूक क्यों हुई? प्रियंका गांधी ने कहा, “हम हरआतंकी हमले के बाद केवल निंदा बयान और श्रद्धांजलि नहीं देखना चाहते, हम ठोस कार्रवाई और जवाबदेही चाहते हैं।” युवा कांग्रेस का आक्रोशयुवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने इस कैंडल मार्च के दौरान “भारत मां के वीरों को सलाम”, “आतंकवाद मुर्दाबाद” और “केंद्र सरकार जवाब दो” जैसे नारेलगाए। कई युवा कार्यकर्ता काली पट्टियाँ बांधकर मार्च में शामिल हुए और सरकार की आतंकवाद से निपटने की नीति पर सवाल उठाए। दिल्ली पुलिस की कड़ी निगरानीमार्च को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। पूरे मार्ग पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था ताकि किसी भी अप्रियघटना से बचा जा सके। हालांकि मार्च शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ और इसमें किसी तरह की अव्यवस्था नहीं हुई। राजनीति से ऊपर मानवता का संदेशकैंडल मार्च केवल एक राजनीतिक प्रदर्शन नहीं था, बल्कि यह आतंक के खिलाफ एकजुटता और शांति का संदेश भी था। कई सामाजिक संगठनोंऔर नागरिकों ने भी कांग्रेस के इस मार्च में भाग लिया। लोगों ने कहा कि चाहे कोई भी पार्टी हो, जब बात देश की सुरक्षा की हो, तो सबको एक साथखड़ा होना चाहिए। भविष्य की रणनीति और चेतावनीकांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने पहलगाम हमले की निष्पक्ष और सार्वजनिक जांच नहीं कराई, तो पार्टी देशभर में विरोध प्रदर्शनकरेगी। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा, “हम इस मुद्दे को संसद से लेकर सड़क तक उठाएंगे। देश की सुरक्षा से खिलवाड़ किसी भी कीमत परबर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” शहीदों के परिवारों के लिए न्याय की मांगकैंडल मार्च के दौरान कांग्रेस नेताओं ने शहीदों के परिजनों के लिए न्याय और उचित मुआवजे की भी मांग की। उन्होंने कहा कि केवल आर्थिक मदद सेकाम नहीं चलेगा, हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।

भारत का सख्त रुख: सिंधु जल संधि निलंबित, पाकिस्तान की ओर पानी का प्रवाह रोकेगा भारत

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की कड़ी कार्रवाईकश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ निर्णायक कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इसी क्रम में भारत ने 1960 की सिंधु जल संधि को निलंबित करने की घोषणा की है। अब सरकार सिंधु नदी के पानी को पाकिस्तान की ओर जाने से रोकने की योजना पर कामकर रही है। तीन चरणों में लागू होगी योजना: जलशक्ति मंत्री की पुष्टिजलशक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने कहा कि सिंधु जल संधि के निर्णय को तीन चरणों — तुरंत, मिड टर्म और लॉन्ग टर्म — में लागू किया जाएगा।उन्होंने दोहराया कि भारत से पाकिस्तान को “एक बूंद” पानी भी नहीं जाने दिया जाएगा। बांधों की क्षमता बढ़ाने की तैयारीसूत्रों के अनुसार, भारत सरकार ने सिंधु बेसिन में बांधों की क्षमता बढ़ाने की योजना शुरू कर दी है। इसमें आधुनिक तकनीक के साथ गाद हटाकरअधिक पानी संग्रह करने की व्यवस्था की जा रही है। इस प्रक्रिया में वर्ल्ड बैंक को भी भारत के फैसले की जानकारी दी गई है। पाकिस्तान को आधिकारिक अधिसूचना सौंपी गईभारत ने संधि को निलंबित करने के निर्णय को औपचारिक अधिसूचना के माध्यम से पाकिस्तान को सूचित किया है। इसमें सिंधु आयुक्तों की बैठकें, डेटा साझा करना और परियोजनाओं की सूचना देना जैसे प्रावधानों को भी स्थगित कर दिया गया है। संधि निलंबन के बाद भारत को परियोजनाओं पर आज़ादीअब भारत को सिंधु नदी पर बिना पाकिस्तान की अनुमति के बांध और जल परियोजनाएं शुरू करने की आज़ादी है। जल संसाधन सचिव देबाश्रीमुखर्जी ने पत्र में लिखा कि पाकिस्तान की ओर से जम्मू-कश्मीर में निरंतर सीमा पार आतंकवाद भारत के अधिकारों में हस्तक्षेप है। पाकिस्तान की प्रतिक्रिया: युद्ध की चेतावनीभारत के इस निर्णय पर पाकिस्तान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और कहा है कि यदि सिंधु नदी के जल प्रवाह को रोका गया तो इसे “युद्ध की कार्रवाई” माना जाएगा। विशेषज्ञों की चेतावनी: पाकिस्तान की कृषि पर संकटविशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से पाकिस्तान की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। सिंधु जल संधि के तहत पाकिस्तान कोपश्चिमी नदियों — सिंधु, झेलम और चिनाब — से जल आपूर्ति होती रही है। इन नदियों का वार्षिक प्रवाह लगभग 135 एमएएफ है, जिसमें सेअधिकांश पाकिस्तान को मिलता है।

केंद्र सरकार का सुप्रीम कोर्ट में वक्फ संशोधन एक्ट पर बयान: कानून पर अंतिम फैसला लेने की अपील

केंद्र सरकार का जवाब: वक्फ संशोधन एक्ट धर्म के खिलाफ नहींकेंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में वक्फ संशोधन एक्ट के मामले में अपना जवाब दाखिल किया, जिसमें उसने कोर्ट से अपील की कि वह इस कानून परविचार करके अंतिम फैसला लें। सरकार ने यह भी कहा कि कुछ धाराओं पर रोक लगाना उचित नहीं होगा। सरकार का कहना था कि यह कानून किसीधर्म के खिलाफ नहीं है और वक्फ बोर्ड और वक्फ काउंसिल में अधिकतम 2 गैर-मुस्लिम सदस्य हो सकते हैं। वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्य: समावेशिता को बढ़ावाकेंद्र ने कोर्ट को यह जानकारी दी कि गैर-मुस्लिम सदस्य वक्फ बोर्ड के काम को और अधिक समावेशी बनाएंगे। सरकार ने बताया कि वक्फ कानून का100 साल पुराना इतिहास रहा है, और अब भी वक्फ बाय यूजर को रजिस्ट्रेशन के आधार पर ही मान्यता दी जाती है। संशोधित कानून भी इसी आधारपर है, और सरकारी भूमि को किसी विशेष धार्मिक समुदाय से संबंधित नहीं ठहराया जा सकता। वक्फ जमीन के रिकॉर्ड को सुधारने की व्यवस्थाकेंद्र सरकार ने यह भी कहा कि नए कानून में वक्फ भूमि से जुड़े रिकॉर्ड को सही करने की व्यवस्था की गई है, ताकि अतिक्रमण जैसी घटनाओं से बचाजा सके। सरकार ने यह तर्क दिया कि वक्फ कानून के प्रावधानों का दुरुपयोग कर निजी और सरकारी संपत्तियों पर अतिक्रमण किया गया है। वक्फ संपत्ति में वृद्धि: ऐतिहासिक आंकड़ेकेंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी कि मुग़ल काल से लेकर आजादी के बाद वक्फ की कुल संपत्ति 18,29,163.896 एकड़ थी, जबकि2013 के बाद वक्फ भूमि में 20,92,072.536 एकड़ की वृद्धि हुई है। इसके अलावा, केंद्र ने आश्वासन दिया था कि 5 मई तक वक्फ बाय यूजर यावक्फ बाय डीड संपत्तियों को डिनोटिफाई नहीं किया जाएगा, यानी इन्हें वक्फ संपत्ति के तौर पर नहीं लिया जाएगा। केंद्र सरकार का जवाब सुप्रीम कोर्ट में: कानून की वैधता पर सवालकेंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया कि वक्फ संशोधन एक्ट की वैधता को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं के प्रयास न्यायिक समीक्षा के मूलसिद्धांतों के खिलाफ हैं। सरकार ने बताया कि संशोधन व्यापक, गहन और विश्लेषणात्मक अध्ययन के बाद किए गए हैं, जिसे संसदीय समिति नेअनुमोदित किया है।

पहलगाम आतंकी हमले से पहले महिला पर्यटक का दावा: संदिग्ध से हुई थी मुलाकात, बातचीत में कोडवर्ड और अजीब सवाल

जौनपुर की महिला पर्यटक का चौंकाने वाला बयानउत्तर प्रदेश के जौनपुर से कश्मीर घूमने गई एक महिला पर्यटक ने दावा किया है कि पहलगाम आतंकी हमले से एक दिन पहले, 20 अप्रैल को, वहएक संदिग्ध व्यक्ति के संपर्क में आई थीं। महिला ने बताया कि वह बैसरन वैली घूमने गई थीं, जहां एक स्थानीय व्यक्ति ने उन्हें खच्चर की सवारीकराई—जो शक के घेरे में आए आतंकी के स्केच से मेल खाता है। धर्म से जुड़े सवाल और अजीब बातचीतमहिला का कहना है कि उस शख्स ने बातचीत के दौरान उनसे धार्मिक यात्रा, धर्म विशेष की रुचि और दोस्तों की धार्मिक पहचान को लेकर कईसवाल पूछे। उसने यह भी जानना चाहा कि क्या वह कभी अजमेर दरगाह या अमरनाथ यात्रा पर गई हैं। जब महिला ने बताया कि उन्होंने अमरनाथयात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन करवाया है, तो संदिग्ध ने कहा, “रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं, बस तारीख बताइए, हमारा आदमी लेने आ जाएगा।” कोडवर्ड वाली कॉल: ‘प्लान A ब्रेक फेल, प्लान B – 35 बंदूकें भेजी हैं’महिला के अनुसार, उसी दौरान संदिग्ध के फोन पर एक कॉल आई, जिसमें वह ‘प्लान A ब्रेक फेल’ और ‘प्लान B – 35 बंदूकें भेजी हैं, घास में छुपीहैं’ जैसी बातें कर रहा था। जब उसे यह महसूस हुआ कि महिला उसकी बातचीत पर ध्यान दे रही है, तो वह स्थानीय भाषा में बात करने लगा। धार्मिक झुकाव को लेकर पूछताछमहिला ने बताया कि संदिग्ध ने यह भी पूछा कि वह हिंदू धर्म को ज्यादा पसंद करती हैं या इस्लाम को। इसके बाद उसने कुरान पढ़ने से जुड़ा सवालकिया और कहा कि कुरान हिंदी में भी उपलब्ध है। इन सवालों और बातचीत से महिला को डर महसूस हुआ। हमला 20 अप्रैल को ही हो सकता था: महिला का अनुमानमहिला ने आशंका जताई है कि 20 अप्रैल को ही हमला हो सकता था, लेकिन किसी वजह से उसे टाल दिया गया। उन्होंने दावा किया कि उस दिनघटनास्थल पर कोई सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी। साथ ही, उन्होंने अपने मोबाइल में मौजूद एक फोटो और व्हाट्सएप ग्रुप के स्क्रीनशॉट भी सुरक्षाएजेंसियों को दिखाए हैं, जिनमें उनके दोस्त भी संदिग्ध को पहचान रहे हैं। डरे हुए हैं चश्मदीद, सामने आने से कतरा रहेमहिला के मुताबिक, उनके दोस्त इस घटना से डरे हुए हैं और खुलकर सामने नहीं आना चाहते, लेकिन व्हाट्सएप पर उन्होंने भी इस व्यक्ति की पहचानकी है। इस नए इनपुट से सुरक्षा एजेंसियों की जांच को नया मोड़ मिल सकता है।

जम्मू-कश्मीर में बढ़ी सुरक्षा, कठुआ और पुलवामा में सघन तलाशी अभियान शुरू

जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले के हीरानगर सेक्टर में सुरक्षा बलों ने बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया है। यह कदम हाल ही में पहलगाम में हुएआतंकी हमले के बाद उठाया गया है, जिसमें 26 लोगों की जान गई थी। बढ़ते सुरक्षा खतरे को देखते हुए पूरे इलाके को अलर्ट पर रखा गया है।स्थानीय महिला की सूचना से मचा हड़कंपसूत्रों के अनुसार, तलाशी अभियान की शुरुआत तब हुई जब एक स्थानीय महिला ने पुलिस को चार संदिग्धों की मौजूदगी की जानकारी दी। इस खबरके फैलते ही सुरक्षाबल सतर्क हो गए और फौरन इलाके की घेराबंदी कर दी गई। एसओजी और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाईजम्मू-कश्मीर पुलिस की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) ने स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। इलाके की सख्तनिगरानी की जा रही है और हर आने-जाने वाले पर नजर रखी जा रही है। सीमा क्षेत्र में बढ़ी निगरानी, ड्रोन और डॉग स्क्वॉड की मददयह इलाका अंतरराष्ट्रीय सीमा के करीब है, जहां पहले भी घुसपैठ की घटनाएं हो चुकी हैं। सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि संदिग्ध किसी बड़ीवारदात की योजना बना रहे हैं। इसीलिए ड्रोन कैमरे और स्निफर डॉग्स की मदद से तलाशी अभियान को अंजाम दिया जा रहा है। पुलवामा के करीमाबाद में भी ऑपरेशन जारीपुलवामा के करीमाबाद क्षेत्र में भी सुरक्षा बलों ने सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है। यह इलाका आतंकी गतिविधियों के लिए पहले से संवेदनशीलमाना जाता है। यहां का हर कोना खंगाला जा रहा है और क्षेत्र को पूरी तरह सील कर दिया गया है। थलसेना प्रमुख की सक्रियता, उधमपुर में मौजूदपहलगाम हमले के बाद थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी जम्मू-कश्मीर के उधमपुर स्थित उत्तरी कमान मुख्यालय पहुंचे हैं। वहां वे एलओसी से सटेपुंछ, राजौरी और पीर पंजाल रेंज की सुरक्षा स्थिति की गहन समीक्षा कर रहे हैं। सुरक्षा तैयारियों को मजबूत करने के लिए रणनीतियां बनाई जा रहीहैं।

पहलगाम आतंकी हमले पर असदुद्दीन ओवैसी का तीखा हमला, कहा, आतंकियों ने जानवरों से भी बदतर हरकत की

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है।हैदराबाद में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने हमलावरों को “कमीना और कुत्ता” करार देते हुए कहा कि आतंकियों ने नाम और मजहब पूछकरनिर्दोष लोगों की हत्या की, जो मानवता पर सीधा हमला है। उन्होंने इस घटना की घोर निंदा करते हुए कहा कि आतंकवाद को जड़ से खत्म करना होग सुरक्षा में चूक पर उठाए सवाल, बोले— जिम्मेदारी तय होनी चाहिए ओवैसी ने हमले के दौरान सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरी को उजागर करते हुए कहा कि इतनी संवेदनशील जगह पर न ही कोई पुलिस तैनात थी और नही सीआरपीएफ का कोई कैंप था। उन्होंने बताया कि घटनास्थल पर सुरक्षाबलों के पहुंचने में 45 मिनट का वक्त लग गया, जो चिंताजनक है। उन्होंनेसवाल उठाया कि जब आतंकवादी पहलगाम जैसे पर्यटन स्थल तक पहुंच सकते हैं, तो श्रीनगर तक पहुंचने से उन्हें कौन रोकेगा? राजनीतिक मतभेद बाद में, अभी एकजुटता जरूरी AIMIM प्रमुख ने कहा कि इस समय राजनीतिक मतभेदों को दरकिनार कर, आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने की आवश्यकता है। उन्होंने बतायाकि गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें फोन कर सर्वदलीय बैठक में आमंत्रित किया, हालांकि पहले उन्हें नहीं बुलाया गया था। ओवैसी ने कहा कि उन्होंनेबताया कि वे हैदराबाद में हैं, और यदि टिकट मिलती है तो वह जरूर बैठक में शामिल होंगे। पहले नहीं बुलाए जाने पर जताई थी नाराजगी ओवैसी ने इससे पहले सर्वदलीय बैठक में नहीं बुलाए जाने पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने कहा था कि किरण रिजिजू से 23 अप्रैल को बातचीत मेंउन्हें बताया गया कि केवल पांच या अधिक सांसदों वाली पार्टियों को ही बुलाने की योजना है। इस पर ओवैसी ने तर्क दिया कि एक सांसद वालीपार्टी की आवाज भी महत्वपूर्ण है, और प्रधानमंत्री मोदी को सभी पार्टियों की बात सुननी चाहिए। यह बीजेपी की बैठक नहीं, देश का मामला है ओवैसी ने साफ कहा कि यह किसी एक पार्टी की नहीं, बल्कि पूरे देश की बैठक है, जिसमें आतंकवाद और उसे समर्थन देने वाले देशों को स्पष्ट संदेशदेना चाहिए। उन्होंने कहा, “हर पार्टी को प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए, चाहे उसके पास एक सांसद हो या सौ।” उन्होंने प्रधानमंत्री से हर मान्यता प्राप्तदल को बैठक में आमंत्रित करने की अपील की।

पहलगाम आतंकी हमला: TRF ने ली जिम्मेदारी, देश में आक्रोश, भारत ने उठाए कड़े कदम

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने पूरे भारत को झकझोर कर रख दिया। इस हमले में कई निर्दोष नागरिकों की जान गई, जिससेदेशभर में गुस्से और शोक की लहर दौड़ गई। इस आतंकी हमले की जिम्मेदारी द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली है, जिसे पाकिस्तान स्थित आतंकीसंगठन लश्कर-ए-तैयबा का एक मोर्चा माना जाता है। सूत्रों के अनुसार, इस हमले की साजिश लश्कर कमांडर सैफुल्लाह खालिद द्वारा रची गई थी, हालांकि उसने इससे इनकार करते हुए खुद को बेगुनाह बताया है। कसूरी का वीडियो वायरल, भारत पर लगाए आरोप सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में आतंकी समर्थक कसूरी भारतीय मीडिया और सरकार पर हमले की पटकथा गढ़ने का आरोप लगातादिखाई दे रहा है। उसने कहा कि भारत ने खुद हमला कराया ताकि पाकिस्तान को बदनाम किया जा सके। कसूरी ने खालिद के हवाले से कहा किभारत की छवि खराब करने के लिए यह हमला खुद भारतीय एजेंसियों द्वारा अंजाम दिया गया। इस वीडियो को देखकर लोगों में भारी आक्रोश है औरसोशल मीडिया पर कसूरी के खिलाफ कड़ी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। पाक रक्षा मंत्री का दावा: आंतरिक गुस्से का परिणाम पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी इस हमले से पाकिस्तान के किसी भी संबंध को सिरे से खारिज किया। उन्होंने इसे भारत के अंदरूनीअसंतोष का परिणाम बताते हुए कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों जैसे कश्मीर, नगालैंड, मणिपुर और छत्तीसगढ़ में अस्थिरता है और यही घटनाएंभारत सरकार के खिलाफ जनता की नाराजगी का प्रतीक हैं। भारत ने दिए कड़े जवाब, सिंधु जल संधि निलंबित हमले के बाद भारत सरकार ने जवाबी कदम उठाते हुए 1960 की सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया। इसके साथ ही पाकिस्तान के नागरिकों केलिए जारी किए गए भारतीय वीजा भी रद्द कर दिए गए। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने बताया कि पाकिस्तान को सीमा पार आतंकवाद का समर्थनबंद करना होगा, अन्यथा यह निलंबन बना रहेगा। TRF पहले भी रही है संदिग्ध गतिविधियों में शामिल गृह मंत्रालय ने जनवरी 2023 में TRF को यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) के तहत आतंकी संगठन घोषित किया था। इससंगठन पर आतंकवादियों की भर्ती, हथियारों की तस्करी, ड्रग्स के नेटवर्क, और भारत में आतंकियों की घुसपैठ में मदद करने जैसे गंभीर आरोप हैं।अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 हटने के बाद TRF पहली बार ऑनलाइन सक्रिय हुआ था और तब से यह कई आतंकी घटनाओं में नामजद रहा है।

पहलगाम हमले के बीच गौतम गंभीर को मिली ‘ISIS कश्मीर’ से जान की धमकी, दिल्ली पुलिस में दर्ज कराई शिकायत

जहां एक ओर देश पहलगाम आतंकी हमले से गहरे शोक में डूबा है, वहीं पूर्व भाजपा सांसद और भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर को’ISIS कश्मीर’ से जान से मारने की धमकी मिली है। गंभीर ने बुधवार को दिल्ली पुलिस में इस संबंध में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई और अपनेपरिवार की सुरक्षा को लेकर तत्काल कदम उठाने की मांग की। देशभक्ति के लिए पहचाने जाते हैं गंभीरगंभीर अक्सर अपने बेबाक और राष्ट्रवादी बयानों के लिए चर्चा में रहते हैं। उन्होंने पहलगाम हमले की निंदा करते हुए पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी थी औरआतंकियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की थी। वह पहलेभी पुलवामा हमले में शहीद हुए जवानों के परिवारों की मदद कर चुके हैं। उनकी छवि एक मुखर राष्ट्रवादी की रही है, जो आतंकवाद और पाकिस्तानसमर्थित गतिविधियों के सख्त विरोध में रहते हैं। पूर्व क्रिकेटर श्रीवत्स गोस्वामी ने BCCI से की अपीलपूर्व क्रिकेटर श्रीवत्स गोस्वामी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए बीसीसीआई से अपील की कि भारत को अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट प्रतियोगिताओं मेंभी पाकिस्तान से मुकाबले नहीं खेलने चाहिए। उन्होंने कहा कि सीमापार से हो रहे आतंकी हमलों के मद्देनजर क्रिकेट संबंधों को पूरी तरह से समाप्तकर देना चाहिए। गौरतलब है कि भारत और पाकिस्तान के बीच आखिरी द्विपक्षीय श्रृंखला 2012-13 में खेली गई थी और उसके बाद से पाकिस्तानके खिलाड़ियों पर IPL में भी बैन लगाया गया है। सरकार का सख्त रुख, सिंधु जल संधि निलंबितपहलगाम हमले के बाद भारत सरकार ने भी त्वरित और कड़े फैसले लिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सऊदी अरब दौरा अधूरा छोड़कर भारत लौट आएऔर उच्चस्तरीय सुरक्षा बैठक बुलाई। इसके बाद विदेश मंत्रालय के सचिव विक्रम मिसरी ने घोषणा की कि भारत ने पाकिस्तान के साथ 1960 कीसिंधु जल संधि को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इसके अलावा पाकिस्तानी नागरिकों के भारतीय वीजा भी रद्द कर दिए गए हैं। ISJK की पुरानी गतिविधियां भी रही हैं संदिग्धबताते चलें कि ‘ISIS कश्मीर’ (ISJK) आतंकी संगठन पहले भी भारत में सक्रिय रहा है। 17 नवंबर 2017 को श्रीनगर में एक हमले की जिम्मेदारीइस गुट ने ली थी, जिसमें एक पुलिसकर्मी शहीद हुआ था। ISJK ने न केवल भारतीय संस्थाओं को बल्कि पाकिस्तान की ISI और उससे जुड़ेआतंकी गुटों को भी धमकी दी थी।