केंद्र सरकार का जवाब: वक्फ संशोधन एक्ट धर्म के खिलाफ नहीं
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में वक्फ संशोधन एक्ट के मामले में अपना जवाब दाखिल किया, जिसमें उसने कोर्ट से अपील की कि वह इस कानून परविचार करके अंतिम फैसला लें। सरकार ने यह भी कहा कि कुछ धाराओं पर रोक लगाना उचित नहीं होगा। सरकार का कहना था कि यह कानून किसीधर्म के खिलाफ नहीं है और वक्फ बोर्ड और वक्फ काउंसिल में अधिकतम 2 गैर-मुस्लिम सदस्य हो सकते हैं।
वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्य: समावेशिता को बढ़ावा
केंद्र ने कोर्ट को यह जानकारी दी कि गैर-मुस्लिम सदस्य वक्फ बोर्ड के काम को और अधिक समावेशी बनाएंगे। सरकार ने बताया कि वक्फ कानून का100 साल पुराना इतिहास रहा है, और अब भी वक्फ बाय यूजर को रजिस्ट्रेशन के आधार पर ही मान्यता दी जाती है। संशोधित कानून भी इसी आधारपर है, और सरकारी भूमि को किसी विशेष धार्मिक समुदाय से संबंधित नहीं ठहराया जा सकता।
वक्फ जमीन के रिकॉर्ड को सुधारने की व्यवस्था
केंद्र सरकार ने यह भी कहा कि नए कानून में वक्फ भूमि से जुड़े रिकॉर्ड को सही करने की व्यवस्था की गई है, ताकि अतिक्रमण जैसी घटनाओं से बचाजा सके। सरकार ने यह तर्क दिया कि वक्फ कानून के प्रावधानों का दुरुपयोग कर निजी और सरकारी संपत्तियों पर अतिक्रमण किया गया है।
वक्फ संपत्ति में वृद्धि: ऐतिहासिक आंकड़े
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी कि मुग़ल काल से लेकर आजादी के बाद वक्फ की कुल संपत्ति 18,29,163.896 एकड़ थी, जबकि2013 के बाद वक्फ भूमि में 20,92,072.536 एकड़ की वृद्धि हुई है। इसके अलावा, केंद्र ने आश्वासन दिया था कि 5 मई तक वक्फ बाय यूजर यावक्फ बाय डीड संपत्तियों को डिनोटिफाई नहीं किया जाएगा, यानी इन्हें वक्फ संपत्ति के तौर पर नहीं लिया जाएगा।
केंद्र सरकार का जवाब सुप्रीम कोर्ट में: कानून की वैधता पर सवाल
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया कि वक्फ संशोधन एक्ट की वैधता को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं के प्रयास न्यायिक समीक्षा के मूलसिद्धांतों के खिलाफ हैं। सरकार ने बताया कि संशोधन व्यापक, गहन और विश्लेषणात्मक अध्ययन के बाद किए गए हैं, जिसे संसदीय समिति नेअनुमोदित किया है।