मन की बात’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन: पहलगाम हमले के दोषियों को मिलेगा न्याय, देश का खून खौल रहा है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के जरिए देशवासियों को संबोधित करते हुए जम्मू-कश्मीर केपहलगाम में हुए हालिया आतंकी हमले पर गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस कायराना हमले ने पूरे देश के खून को खौला दिया है औरदेश एकजुट होकर शहीदों को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि साजिश रचने वालों को मुंहतोड़ जवाब दियाजाएगा और कोई भी दोषी बच नहीं पाएगा। देश एकजुट, पीड़ितों को मिलेगा न्यायप्रधानमंत्री ने कहा, “मैं देशवासियों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि पहलगाम हमले के दोषियों को उनके किए की सजा जरूर मिलेगी। हमले में शहीदहुए जवानों और नागरिकों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। न्याय दिलाने के लिए हर जरूरी कदम उठाया जाएगा।”उन्होंने आगे कहा कि सुरक्षा बलों को पूरी छूट दी गई है और जल्द ही इस हमले के पीछे के षड्यंत्रकारियों को पकड़कर सख्त सजा दी जाएगी। मोदीने विशेष रूप से उन सुरक्षाबलों की सराहना की, जो दिन-रात शांति बहाल करने और निर्दोष नागरिकों की रक्षा में लगे हुए हैं। हमले के बाद देश का खून खौल रहा हैप्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि इस हमले ने न केवल पीड़ित परिवारों को, बल्कि पूरे देशवासियों को गहरी पीड़ा दी है। “जब निर्दोष लोगों परहमला होता है, जब देश के सुरक्षाकर्मियों को निशाना बनाया जाता है, तो देश का खून खौल उठता है। हमारी संवेदनाएं उन परिवारों के साथ हैंजिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया है,” प्रधानमंत्री ने भावुक होते हुए कहा।उन्होंने कहा कि यह हमला आतंकियों की हताशा का परिणाम है, जो जम्मू-कश्मीर में शांति और विकास के माहौल को बिगाड़ने की साजिश कर रहेहैं। लेकिन सरकार और सुरक्षाबल उनके मंसूबों को सफल नहीं होने देंगे। साजिशकर्ताओं को मिलेगा करारा जवाबप्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि हमले की योजना बनाने वाले, उसे अंजाम देने वाले और उन्हें समर्थन देने वाले हर व्यक्ति के खिलाफ कठोर कार्रवाईकी जाएगी। उन्होंने कहा, “हम न केवल हमलावरों को ढूंढ निकालेंगे, बल्कि इस साजिश की जड़ तक पहुँचकर उसे पूरी तरह से नष्ट करेंगे। भारत अबनया भारत है, जो आतंकवाद के हर चेहरे को बेनकाब कर उसे करारा जवाब देने में सक्षम है।” शांति और विकास की राह पर कश्मीरप्रधानमंत्री ने कश्मीर में हो रहे विकास कार्यों और बदलते माहौल पर भी बात की। उन्होंने कहा कि आज का कश्मीर नए सपनों के साथ आगे बढ़ रहाहै। पर्यटन, बुनियादी ढांचे और शिक्षा के क्षेत्र में जो परिवर्तन हो रहे हैं, वे आतंकवादियों और उनके आकाओं को रास नहीं आ रहे। “यही वजह है कि वेफिर से हिंसा का रास्ता अपना रहे हैं, लेकिन वे सफल नहीं होंगे,” प्रधानमंत्री ने आत्मविश्वास से कहा।उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र सरकार, जम्मू-कश्मीर प्रशासन और स्थानीय जनता मिलकर शांति एवं समृद्धि की यात्रा को और गति देंगे। देशवासियों से एकजुटता की अपीलअपने संबोधन के अंतिम हिस्से में प्रधानमंत्री ने देशवासियों से अपील की कि वे इस कठिन समय में एकजुट रहें और सुरक्षाबलों का मनोबल बढ़ाएं।उन्होंने कहा कि “देश की जनता का एकजुट संकल्प ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। आतंक के खिलाफ लड़ाई में हर नागरिक की भूमिका महत्वपूर्णहै।”प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि जब देश एक स्वर में आतंक के खिलाफ खड़ा होता है, तो दुनिया भी भारत की दृढ़ता को महसूस करती है। पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता का वादाप्रधानमंत्री मोदी ने यह भी भरोसा दिलाया कि सरकार शहीदों के परिवारों और घायल लोगों को हर संभव मदद देगी। “सरकार उनकी हर ज़रूरत काध्यान रखेगी। चाहे आर्थिक सहायता हो, पुनर्वास हो या अन्य कोई ज़रूरत — सरकार और पूरा देश उनके साथ खड़ा है।”उन्होंने कहा कि एक भी बलिदान बेकार नहीं जाएगा और जो भी इस हमले में शामिल रहा है, उसे उसकी सजा अवश्य मिलेगी।
कश्मीर के किश्तवाड़ में आर्मी यूनिफॉर्म पर रोक, कुपवाड़ा में सिविलियन को गोली मारी, नेवी ने आराम सागर में एंटी-शिप मिसाइल दागी

किश्तवाड़ में आर्मी यूनिफॉर्म पर प्रतिबंध:जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ ज़िले में प्रशासन ने हाल ही में एक अहम फैसला लेते हुए आम नागरिकों के लिए आर्मी यूनिफॉर्म पहनने पर सख्त रोकलगा दी है। जिला प्रशासन ने आदेश जारी करते हुए कहा है कि किसी भी गैर-सैनिक व्यक्ति द्वारा सेना या अर्धसैनिक बलों की वर्दी पहनना गैरकानूनीमाना जाएगा और दोषी व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।इस आदेश का उद्देश्य क्षेत्र में आतंकवाद विरोधी अभियानों के दौरान सुरक्षाबलों और आम नागरिकों के बीच स्पष्ट अंतर बनाए रखना है। अधिकारियोंके अनुसार, हाल के दिनों में आतंकी गतिविधियों के दौरान नकली वर्दी पहनकर हमले करने के कुछ मामले सामने आए थे। ऐसे में यह कदम सुरक्षाव्यवस्था को मजबूत करने और जनता में भरोसा बनाए रखने के लिए जरूरी समझा गया। आदेश के मुताबिक, वर्दी बनाने वाली दुकानों को भी हिदायत दी गई है कि वे केवल अधिकृत व्यक्तियों को ही सेना या सुरक्षाबलों की वर्दी बेचें।आदेश का उल्लंघन करने वालों पर कठोर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। किश्तवाड़ जिला आतंकवाद से पहले भी प्रभावित रहा है और प्रशासनकिसी भी संभावित खतरे को समय रहते नियंत्रित करना चाहता है। कुपवाड़ा में नागरिक को गोली मारी:कश्मीर घाटी के कुपवाड़ा ज़िले में शनिवार को एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई जब सुरक्षाबलों ने संदेह के आधार पर एक स्थानीयनागरिक को गोली मार दी। घटना हंदवाड़ा के पास उस समय घटी जब एक युवक सुरक्षाबलों के एक नाके के पास से तेज़ी से गुजरने की कोशिश कररहा था। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, सुरक्षाबलों ने उसे रुकने के लिए इशारा किया, लेकिन वह बिना रुके आगे बढ़ा, जिसके बाद जवानों ने चेतावनीके तौर पर गोलियां चलाईं। दुर्भाग्यवश एक गोली युवक को जा लगी।घायल युवक की पहचान 25 वर्षीय आदिल अहमद लोन के रूप में हुई है। उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी हालतगंभीर बताई जा रही है। इस घटना के बाद इलाके में तनाव व्याप्त हो गया। स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया और न्यायिक जांच की मांग की। जिला प्रशासन नेमामले की निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है और कहा है कि दोषी पाए जाने पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। सेना की ओर से जारी बयान मेंकहा गया कि यह एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी और वे घायल नागरिक के इलाज का पूरा खर्च उठाएंगे। नेवी का एंटी-शिप मिसाइल परीक्षण:भारतीय नौसेना ने शनिवार को आराम सागर क्षेत्र में अत्याधुनिक एंटी-शिप मिसाइल का सफल परीक्षण किया। इस परीक्षण के तहत एक पुरानेडिकमिशन्ड पोत को लक्ष्य बनाकर मिसाइल दागी गई, जिसे सटीकता से ध्वस्त कर दिया गया।नेवी के प्रवक्ता ने बताया कि इस मिसाइल का परीक्षण स्वदेशी तकनीक से बनी क्षमताओं को परखने के लिए किया गया था। मिसाइल ने समुद्र मेंअपने टारगेट को सटीक निशाना बनाते हुए पूरी तरह से नष्ट कर दिया, जिससे भारतीय नौसेना की आक्रामक क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोत्तरी दर्ज की गईहै। यह परीक्षण ऐसे समय पर हुआ है जब हिंद महासागर क्षेत्र में चीन समेत कई देशों की समुद्री गतिविधियां बढ़ रही हैं। भारतीय नौसेना तेजी से अपनीरणनीतिक क्षमताओं को मजबूत कर रही है।नेवी चीफ एडमिरल आर. हरिकुमार ने इस सफलता पर टीम को बधाई दी और कहा कि “यह परीक्षण आत्मनिर्भर भारत मिशन के तहत हमारी नौसेनाकी क्षमताओं को दर्शाता है। यह हमें भविष्य के खतरों से निपटने में और भी मजबूत बनाएगा।” रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह परीक्षण भारत की समुद्री सुरक्षा नीति में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। अब भारतीय नेवी अपने आप में अधिकसक्षम हो चुकी है कि वह किसी भी चुनौतीपूर्ण हालात में दुश्मन के जहाजों को दूर से ही निष्क्रिय कर सके।
सहारनपुर में पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट, 3 की मौत

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में एक पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट में तीन मजदूरों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। यहघटना सहारनपुर के एक ग्रामीण इलाके में स्थित पटाखा फैक्ट्री में घटी, जहां अचानक जोरदार धमाका हुआ। धमाका इतना शक्तिशाली था कि इसकेप्रभाव से आसपास की इमारतों में भी नुकसान हुआ और फैक्ट्री की दीवारें व छत उखड़ गईं। विस्फोट के बाद मौके पर पुलिस और बचाव दल पहुंच गए, और घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। हादसे की सूचना मिलने के बाद प्रशासनने तुरंत जांच के आदेश दिए हैं। विस्फोट के कारणों की जांच शुरूस्थानीय पुलिस और फोरेंसिक टीम घटनास्थल पर पहुंच गई हैं और विस्फोट के कारणों की जांच कर रही हैं। पुलिस का मानना है कि फैक्ट्री में भारीमात्रा में पटाखों और आतिशबाजी सामग्री का भंडारण किया गया था, जो धमाके का कारण बन सकती है। हालांकि, यह पूरी तरह से स्पष्ट नहीं होपाया है कि विस्फोट का कारण क्या था, लेकिन माना जा रहा है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण यह घटना हुई। फैक्ट्री के मालिक के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है, क्योंकि घटनास्थल पर भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री रखी हुई थी, जो नियमों केखिलाफ था। स्थानीय प्रशासन ने बताया कि फैक्ट्री में काम करने वाले कई मजदूरों ने सुरक्षा नियमों का पालन नहीं किया था, जिससे इस तरह कीगंभीर दुर्घटना घटित हुई। मृतक और घायलों की पहचानफैक्ट्री में काम कर रहे मजदूरों की पहचान अब तक नहीं हो पाई है, लेकिन रिपोर्ट्स के अनुसार तीन लोगों की मौत हो गई और कई अन्य गंभीर रूप सेघायल हो गए हैं। घायलों में कुछ की स्थिति नाजुक बताई जा रही है, जिन्हें सहारनपुर के जिला अस्पताल में भर्ती किया गया है। मृतक मजदूरों के शव पोस्टमॉर्टम के लिए भेजे गए हैं, और उनके परिवारों को घटना की सूचना दी जा चुकी है। पुलिस ने भी घटना की जांच में तेजीदिखाई है और फैक्ट्री के मालिक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की योजना बना रही है। स्थानीय प्रशासन की प्रतिक्रियाघटना के बाद सहारनपुर के जिला मजिस्ट्रेट ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और बचाव कार्यों की निगरानी की। प्रशासन ने मृतकों केपरिवारों को वित्तीय सहायता देने का ऐलान किया है और उन्हें हर संभव मदद की पेशकश की है। जिला अधिकारी ने बताया कि दुर्घटना के बादफैक्ट्री के आसपास के इलाके को सुरक्षित कर लिया गया है और किसी अन्य प्रकार के खतरे से बचाव के लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं। इसके साथ ही, सहारनपुर पुलिस ने यह भी कहा कि पटाखा फैक्ट्रियों में सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कीजाएगी। प्रशासन इस घटना को गंभीरता से ले रहा है और दोषियों को जल्द से जल्द सजा दिलवाने की कोशिश करेगा। घटना के बाद फैक्ट्री मालिक की भूमिकाफैक्ट्री मालिक का नाम अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक वह फरार हो गया है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है।हालांकि, फैक्ट्री में काम करने वाले कुछ लोगों ने यह आरोप लगाया है कि मालिक और उसके कर्मचारियों ने सुरक्षा मानकों की अनदेखी की थी। स्थानीय लोगों के अनुसार, फैक्ट्री के भीतर सुरक्षा उपायों की कमी थी, और कोई भी नियमित रूप से निरीक्षण नहीं किया जाता था। इस घटना ने यहसवाल भी खड़ा कर दिया है कि क्या राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन पटाखा फैक्ट्रियों की उचित जांच और सुरक्षा उपायों पर पर्याप्त ध्यान दे रहाहै। पटाखा फैक्ट्रियों से जुड़े खतरों पर विचारइस घटना ने एक बार फिर पटाखा फैक्ट्रियों में सुरक्षा की खामियों को उजागर किया है। राज्य और केंद्र सरकार के लिए यह समय है कि वह इनफैक्ट्रियों की सुरक्षा मानकों को कड़े तरीके से लागू करें, ताकि इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके। माना जा रहा है कि कई पटाखा फैक्ट्रियों में सुरक्षा उपायों का अभाव है और इनकी जांच-परख भी बहुत कम की जाती है, जिससे मजदूरों की जानजोखिम में डालने वाले हादसों की संभावना बनी रहती है। ऐसे में, अधिकारियों को चाहिए कि वे इन फैक्ट्रियों की सुरक्षा व्यवस्था को सख्ती से लागूकरें और लापरवाही बरतने वाले फैक्ट्री मालिकों के खिलाफ कार्रवाई करें।
नाबालिग की ब्रेस्ट छूने के मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट का अहम फैसला: रेप केस नहीं

उच्च न्यायालय का महत्वपूर्ण निर्णयकलकत्ता हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि नाबालिग की ब्रेस्ट छूने के मामले को रेप केस के रूप में नहीं लिया जा सकता। अदालत ने इसमामले में आरोपी को दोषी ठहराते हुए कहा कि यह मामला छेड़खानी का है, न कि रेप का। इस फैसले ने कानूनी दायरे में नाबालिगों के खिलाफअपराधों को परिभाषित करने के तरीकों पर नई बहस छेड़ दी है। यह मामला तब सामने आया था जब एक व्यक्ति ने एक नाबालिग लड़की के साथ यौन उत्पीड़न किया था, जिसमें उसने कथित रूप से लड़की कीब्रेस्ट को छुआ था। लड़की ने आरोपी के खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी, जिसके बाद मामला अदालत में पहुँचा। हालांकि, उच्च न्यायालयने इसे रेप के बजाय छेड़छाड़ के दायरे में रखा। अदालत ने क्या कहा?कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस मामले में अपना निर्णय देते हुए कहा कि नाबालिग के साथ शारीरिक संपर्क करना, विशेष रूप से ब्रेस्ट को छूना, यद्यपि यहयौन उत्पीड़न है, लेकिन यह ‘रेप’ की श्रेणी में नहीं आता। अदालत ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 375 के तहत रेप की परिभाषा का हवालादेते हुए कहा कि ‘रेप’ का मामला तभी बनता है जब किसी महिला के साथ पूर्ण यौन संबंध बनाए जाएं या बलात्कार किया जाए। अदालत ने कहा कि केवल ब्रेस्ट को छूना, जबकि यह एक गंभीर अपराध है, उसे ‘रेप’ के रूप में परिभाषित नहीं किया जा सकता। इसके बजाय, इसे’छेड़छाड़’ और ‘यौन उत्पीड़न’ की श्रेणी में रखा गया। अदालत ने आरोपी को यौन अपराध के लिए दोषी ठहराया, लेकिन रेप के बजाय उसे अन्यअपराधों के तहत सजा दी। भारतीय दंड संहिता और यौन उत्पीड़नभारतीय दंड संहिता (IPC) में बलात्कार (Section 375) की परिभाषा स्पष्ट है और इसमें महिला के साथ पूर्ण यौन संबंध बनाने को रेप माना जाताहै। इसमें बलात्कार के सभी प्रकार, जैसे बलात्कार के दौरान हिंसा, धोखाधड़ी, या मानसिक दबाव के तहत यौन संबंध बनाने की स्थिति शामिल है।हालांकि, इस मामले में अदालत ने स्पष्ट किया कि नाबालिग के ब्रेस्ट को छूने का कृत्य भारतीय दंड संहिता के तहत रेप के तहत नहीं आता, बल्कि इसेछेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न के दायरे में रखा गया। इस फैसले पर विवादकलकत्ता हाई कोर्ट के इस फैसले ने कानूनी और सामाजिक क्षेत्रों में विवाद उत्पन्न किया है। कई कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला यौनउत्पीड़न के मामलों में नाबालिगों के अधिकारों और सुरक्षा को पर्याप्त रूप से सुनिश्चित नहीं करता। उनके अनुसार, यौन उत्पीड़न के मामलों में आरोपीको गंभीर सजा मिलनी चाहिए, चाहे वह रेप के तहत आता हो या नहीं।कुछ विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि इस फैसले से यौन अपराधों के खिलाफ संघर्ष को कमजोर किया जा सकता है, क्योंकि इस तरह के अपराधों कोहल्के रूप में लिया गया है। कई महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने भी इस फैसले की आलोचना की और कहा कि यह नाबालिगों के खिलाफ अपराधोंको लेकर समाज में गलत संदेश दे सकता है। समाज और कानूनी दृष्टिकोणइस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर भी हलचल मच गई है। कई लोगों ने इसे नाबालिगों के प्रति असंवेदनशीलता की ओर इशारा किया, जबकिकुछ ने इसे न्यायपूर्ण निर्णय बताया। इस मामले में न्यायपालिका की भूमिका पर सवाल उठाए गए, और यह भी कहा गया कि यौन अपराधों केखिलाफ सख्त और स्पष्ट कानूनों की आवश्यकता है। नाबालिगों के खिलाफ यौन उत्पीड़न के मामलों में समाज का दृष्टिकोण भी धीरे-धीरे बदल रहा है। ऐसे मामलों में पुलिस और न्यायालय को त्वरितऔर कठोर कार्रवाई करनी चाहिए ताकि अपराधियों को सजा मिल सके और पीड़ित को न्याय मिल सके। इसके साथ ही, बच्चों और किशोरों को यौनशिक्षा देने के लिए अभियान चलाए जाने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया है।
पहलगाम आतंकी हमले के शहीदों को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने दी श्रद्धांजलि, कैंडल मार्च का आयोजन

निर्दोष नागरिकों की मासूमियत पर आतंक का हमलाजम्मू-कश्मीर के पहलगाम क्षेत्र में हाल ही में हुए आतंकी हमले में मारे गए निर्दोष नागरिकों को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने भावपूर्ण श्रद्धांजलिअर्पित की। दिल्ली प्रदेश इकाई द्वारा आयोजित श्रद्धांजलि सभा और कैंडल मार्च के जरिए पार्टी कार्यकर्ताओं ने उन मासूम लोगों की याद में श्रद्धासुमन अर्पित किए, जो केवल शांति और प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने कश्मीर घाटी आए थे। एनसीपी की ओर से जारी संदेश में कहा गया कि इन आम नागरिकों की मासूमियत और सुकून के कुछ पल बिताने की चाहत को आतंक ने बेरहमी सेछीन लिया। पार्टी ने इस कायराना हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि आतंकवाद के खिलाफ पूरे देश को एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए।कैंडल मार्च में उमड़ी भीड़, दिया गया एकजुटता का संदेशएनसीपी दिल्ली प्रदेश इकाई ने श्रद्धांजलि सभा के साथ एक कैंडल मार्च का भी आयोजन किया, जिसमें पार्टी पदाधिकारी, कार्यकर्ता और बड़ी संख्यामें आम नागरिक शामिल हुए। मार्च के दौरान प्रतिभागियों ने हाथों में मोमबत्तियां लेकर शहीदों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और पीड़ितपरिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। कार्यक्रम के दौरान एनसीपी नेताओं ने कहा कि यह हमला न केवल निर्दोष नागरिकों पर था, बल्कि भारत की अखंडता और शांति पर भी हमला था।उन्होंने सभी देशवासियों से आतंक के खिलाफ एकजुट रहने का आह्वान किया। एनसीपी का पीड़ित परिवारों के प्रति समर्थनश्रद्धांजलि सभा के दौरान पार्टी की ओर से स्पष्ट संदेश दिया गया कि एनसीपी इस कठिन समय में शहीदों के परिवारों के साथ खड़ी है। पार्टी नेताओं नेकहा कि दुख की इस घड़ी में पूरा देश इन परिवारों के साथ है और उन्हें हर संभव सहायता एवं संबल प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। एनसीपी दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, “हम अपने निर्दोष नागरिकों की शहादत को व्यर्थ नहीं जाने देंगे। आतंकवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई औरअधिक मजबूत होगी।” अजित पवार गुट की सक्रियता का संदेशगौरतलब है कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का यह कार्यक्रम अजित पवार गुट की सक्रियता का भी परिचायक है, जो विभिन्न सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दोंपर दिल्ली सहित देशभर में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश कर रहा है। विशेष रूप से दिल्ली जैसे संवेदनशील राजनीतिक केंद्र में ऐसे आयोजन कर पार्टी ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह राष्ट्रीय स्तर पर भी जनता केभावनात्मक मुद्दों से जुड़ने का प्रयास कर रही है।
पांच साल बाद फिर से शुरू होगी कैलाश मानसरोवर यात्रा, श्रद्धालुओं में खुशी की लहर

केंद्र सरकार ने दी यात्रा फिर से शुरू करने की मंजूरीकरीब पांच साल के लंबे अंतराल के बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू करने का फैसला लिया गया है। केंद्र सरकार ने इसकीआधिकारिक घोषणा करते हुए बताया कि आगामी यात्रा सत्र से श्रद्धालु एक बार फिर कैलाश और मानसरोवर की पवित्र यात्रा कर सकेंगे। कोविड-19 महामारी और भारत-चीन सीमा पर बढ़े तनाव के कारण 2020 से कैलाश मानसरोवर यात्रा स्थगित कर दी गई थी। अब हालात सामान्यहोने के बाद केंद्र ने इसे फिर से बहाल करने का निर्णय लिया है, जिससे देशभर में श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल है। विदेश मंत्रालय करेगा यात्रा का संचालनकैलाश मानसरोवर यात्रा का संचालन भारत सरकार के विदेश मंत्रालय द्वारा किया जाएगा। मंत्रालय हर साल एक निर्धारित समय पर यात्रा आयोजितकरता है, जिसमें यात्रियों को सीमित बैचों में भेजा जाता है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि यात्रा के लिए जल्द ही आवेदन प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इच्छुक यात्री मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम सेऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। इसके साथ ही स्वास्थ्य जांच, पासपोर्ट, वीज़ा प्रक्रिया और अन्य नियमों की जानकारी भी समय रहते साझा कीजाएगी। यात्रा के दो मार्गपरंपरागत रूप से कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए दो मार्ग उपलब्ध हैं:लिपुलेख दर्रा मार्ग (उत्तराखंड के पिथौरागढ़ से होकर)नाथू ला मार्ग (सिक्किम के रास्ते) लिपुलेख मार्ग अपेक्षाकृत कठिन है, जिसमें यात्रियों को ट्रेकिंग करनी पड़ती है, जबकि नाथू ला मार्ग से वाहन द्वारा यात्रा संभव होती है, जो वरिष्ठनागरिकों के लिए सुविधाजनक है। दोनों मार्गों पर यात्रियों को चीन के तिब्बत ऑटोनॉमस रीजन (TAR) में प्रवेश करना होता है। इस बार सरकार दोनों ही मार्गों के विकल्प खोलने पर विचार कर रही है, ताकि अधिक से अधिक श्रद्धालु यात्रा में शामिल हो सकें। तीर्थयात्रियों के लिए नए दिशा-निर्देशविदेश मंत्रालय ने यात्रियों के लिए कुछ नए दिशा-निर्देश जारी करने की योजना बनाई है। इन दिशा-निर्देशों में स्वास्थ्य प्रमाण पत्र अनिवार्य रहेगा, जिसमें उच्च ऊंचाई पर यात्रा करने के लिए शारीरिक रूप से फिट होने का प्रमाण देना होगा। इसके अलावा कोविड-19 के बाद बदलती अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए यात्रियों को यात्रा बीमा और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं कालाभ उठाने की सलाह दी जाएगी। मंत्रालय यात्रियों की सुरक्षा के मद्देनजर विशेष व्यवस्थाएं करेगा, जिसमें मेडिकल टीम, आवश्यक उपकरण औरसंचार सुविधा शामिल होगी। यात्रा का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्वकैलाश पर्वत और मानसरोवर झील हिंदू, बौद्ध, जैन और बोंग धर्मों के अनुयायियों के लिए अत्यंत पवित्र स्थल हैं। हिंदू मान्यता के अनुसार, कैलाशपर्वत भगवान शिव का निवास स्थान है और मानसरोवर झील को पवित्र जल का स्रोत माना जाता है। हर साल हजारों श्रद्धालु इस कठिन यात्रा पर जाकर दर्शन करने का सपना देखते हैं। यात्रा न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्किआत्मानुशासन, धैर्य और साहस की भी परीक्षा है। सीमा परिस्थितियों में सुधार के बाद लिया गया फैसलाविशेषज्ञों के अनुसार, भारत-चीन सीमा पर हाल के महीनों में तनाव में आई कमी के चलते यह निर्णय संभव हो पाया है। दोनों देशों के बीच कई दौरकी सैन्य और कूटनीतिक बातचीत के बाद सीमावर्ती इलाकों में हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं। सरकार का मानना है कि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कूटनीतिक सहमति और व्यवस्थाएं अब फिर से तैयार हो गई हैं। श्रद्धालुओं में उत्साहकैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू होने की खबर से देशभर के श्रद्धालुओं में खुशी की लहर है। विभिन्न धार्मिक संगठनों ने सरकार के इस फैसले कास्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि अधिक से अधिक लोगों को इस पवित्र तीर्थ के दर्शन का अवसर मिलेगा। कई तीर्थयात्रियों ने कहा कि वर्षों से यात्रा पर जाने का इंतजार कर रहे थे और अब अपने जीवन के सबसे बड़े आध्यात्मिक अनुभव को साकार करने कामौका मिलेगा।
देशभर में अवैध विदेशी नागरिकों पर सख्ती, गुजरात में 1000 से ज्यादा बांग्लादेशी हिरासत में, हरियाणा से 460 पाकिस्तानी निकाले जाएंगे

गुजरात में बड़ा अभियान: अवैध बांग्लादेशियों पर कार्रवाईगुजरात पुलिस और गृह विभाग ने राज्यभर में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया है। इस कार्रवाई के दौरान अबतक 1,000 से अधिक बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया गया है। सूत्रों के मुताबिक, ये लोग बिना वैध दस्तावेजों के गुजरात के विभिन्न इलाकों — अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा और गांधीनगर — में रह रहे थे। कईबांग्लादेशी नागरिकों ने स्थानीय पहचान पत्र बनवाकर खुद को भारतीय नागरिक के तौर पर पेश करने की भी कोशिश की थी। पुलिस अब दस्तावेजोंकी गहन जांच कर रही है और फर्जी पहचान पत्र तैयार कराने वाले नेटवर्क पर भी शिकंजा कसा जा रहा है। हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला: 460 पाकिस्तानी नागरिकों को देश छोड़ने का आदेशइधर, हरियाणा सरकार ने भी अपने राज्य में अवैध रूप से रह रहे 460 पाकिस्तानी नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। प्रशासन ने इननागरिकों को भारत छोड़ने के आदेश जारी कर दिए हैं। संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि इन लोगों को जल्द से जल्द वापस भेजने कीप्रक्रिया पूरी करें। बताया जा रहा है कि इन पाकिस्तानी नागरिकों में से कई ऐसे हैं जिन्होंने वीजा अवधि समाप्त होने के बाद भी भारत में रहना जारी रखा था, जबकि कुछने अवैध रूप से रोजगार या व्यापार करना शुरू कर दिया था। हरियाणा सरकार ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर यह कदम उठाया गया है। संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षकों को निर्देशित कियागया है कि वे इन विदेशी नागरिकों की निगरानी करें और डिपोर्टेशन की प्रक्रिया में तेजी लाएं। अटारी बॉर्डर से भेजे जाएंगे वापसइन अवैध विदेशी नागरिकों को भारत-पाकिस्तान के बीच स्थित अटारी बॉर्डर के रास्ते भेजा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियों ने अटारीबॉर्डर पर सभी आवश्यक इंतजाम कर लिए हैं। विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय के समन्वय से इन लोगों की वापसी सुनिश्चित की जा रही है। प्रक्रिया के तहत सभी संबंधित विदेशी नागरिकों केदस्तावेजों की जांच के बाद उनकी पहचान पाकिस्तान या बांग्लादेश से पुष्टि कराई जा रही है, जिसके बाद उन्हें डिपोर्ट किया जा रहा है। राष्ट्रीय सुरक्षा और जनसंख्या प्रबंधन पर सरकार का फोकसविशेषज्ञों का कहना है कि भारत सरकार पिछले कुछ समय से अवैध प्रवासियों पर कड़ा रुख अपना रही है। इससे न केवल देश की राष्ट्रीय सुरक्षा कोमजबूती मिलती है, बल्कि स्थानीय संसाधनों पर पड़ने वाला अनावश्यक बोझ भी कम होता है। अधिकारियों के मुताबिक, कई बार अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिक आपराधिक गतिविधियों या देश विरोधी तत्वों के संपर्क में आ जाते हैं, जिससेआंतरिक सुरक्षा को खतरा उत्पन्न होता है। इसी कारण से विभिन्न राज्यों में अवैध नागरिकों की पहचान और निष्कासन की प्रक्रिया को प्राथमिकता दीजा रही है। गुजरात और हरियाणा के बाद अन्य राज्यों में भी तैयारीसूत्रों का यह भी कहना है कि केंद्र सरकार ने अन्य राज्यों को भी निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में रह रहे अवैध विदेशी नागरिकों का सर्वेक्षण करेंऔर उनकी स्थिति पर रिपोर्ट तैयार करें। जल्द ही देशव्यापी स्तर पर एक और व्यापक अभियान चलाए जाने की संभावना है, जिसमें बांग्लादेश, पाकिस्तान, म्यांमार और नेपाल के नागरिकों की स्थिति का आकलन किया जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्यों से कहा है कि अवैध प्रवासियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई करें, ताकि देश की आंतरिकसुरक्षा व्यवस्था और मजबूत हो सके। मानवाधिकारों का ध्यान भी जरूरीहालांकि, कुछ मानवाधिकार संगठनों ने चिंता जताई है कि डिपोर्टेशन की प्रक्रिया में मानवीय पहलुओं का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। उनका कहनाहै कि निर्वासन के दौरान यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जिन लोगों को वापस भेजा जा रहा है, उन्हें मूल देश में किसी भी तरह की प्रताड़ना याकठिनाई का सामना न करना पड़े। सरकारी अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि भारत सरकार सभी अंतरराष्ट्रीय मानकों और मानवाधिकार प्रावधानों का पालन करते हुए यह प्रक्रियासंचालित कर रही है।
पहलगाम हमले के बाद सरकार की सख्ती: मीडिया को सुरक्षा बलों के ऑपरेशन का लाइव टेलीकास्ट न करने की एडवायजरी

सरकार ने जारी की एडवायजरीजम्मू-कश्मीर के पहलगाम इलाके में हुए हालिया आतंकी हमले के बाद केंद्र सरकार और जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने मीडिया संस्थानों के लिए एक सख्तएडवायजरी जारी की है। इस एडवायजरी में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि किसी भी सैन्य या सुरक्षा बलों के ऑपरेशन का लाइव टेलीकास्ट न कियाजाए। सरकार का कहना है कि इस तरह की रिपोर्टिंग से सुरक्षा बलों के अभियान प्रभावित हो सकते हैं और आतंकवादियों को जरूरी सूचनाएं मिलसकती हैं, जिससे उनके खिलाफ चल रही कार्रवाई को खतरा हो सकता है। पहलगाम हमला: घटना का विवरणकुछ दिन पहले पहलगाम क्षेत्र में आतंकवादियों ने एक बड़ी आतंकी वारदात को अंजाम दिया था, जिसमें सुरक्षाबलों और स्थानीय नागरिकों कोनिशाना बनाया गया। इस हमले में कई सुरक्षाकर्मी घायल हुए, जबकि कुछ नागरिकों की जान भी चली गई। हमले के बाद पूरे इलाके में हाई अलर्टघोषित कर दिया गया है और बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि इस हमले को अंजाम देने वाले आतंकी एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा हैं, जिनकी तलाश के लिए विशेष ऑपरेशन शुरू कियागया है। ऐसे माहौल में मीडिया कवरेज की संवेदनशीलता और भी बढ़ जाती है। मीडिया से अपेक्षित सावधानियांएडवायजरी में मीडिया संस्थानों से आग्रह किया गया है कि वे सुरक्षा बलों की मूवमेंट,ऑपरेशन की लाइव तस्वीरें,या रियल-टाइम अपडेट्स का प्रसारण न करें।सरकार ने यह भी कहा है कि मीडिया को केवल अधिकृत सरकारी बयानों या प्रेस रिलीज़ के आधार पर ही जानकारी साझा करनी चाहिए। प्रशासन ने चेताया है कि अगर किसी मीडिया संस्थान ने एडवायजरी का उल्लंघन किया, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है, जिसमेंप्रसारण पर रोक से लेकर कानूनी कार्रवाई तक शामिल हो सकती है। ऑपरेशनल सिक्योरिटी क्यों जरूरी?विशेषज्ञों के अनुसार, जब सुरक्षा बल आतंकवादियों के खिलाफ ऑपरेशन चलाते हैं, तो उनकी रणनीति, मूवमेंट और तैनाती की जानकारी का लीकहोना बेहद खतरनाक हो सकता है। आतंकवादी अक्सर लाइव प्रसारण के जरिए सुरक्षा बलों की स्थिति का अंदाजा लगा लेते हैं, जिससे वे हमले कोअंजाम देने या भागने में सफल हो सकते हैं।पहलगाम हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने पाया कि कुछ चैनलों द्वारा दिखाई गईं लाइव तस्वीरें संभावित रूप से आतंकियों तक महत्वपूर्ण सूचनाएंपहुंचा सकती थीं। इसी कारण से यह एडवायजरी तत्काल प्रभाव से लागू की गई है। पहले भी दी जा चुकी हैं ऐसी हिदायतेंयह पहली बार नहीं है जब सरकार ने इस तरह की एडवायजरी जारी की है। इससे पहले भी, उरी हमला (2016) और पुलवामा हमले (2019) केबाद ऐसी ही हिदायतें दी गई थीं, जिसमें मीडिया से संयम बरतने को कहा गया था। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यही मान्यता है कि आतंक से जुड़ीघटनाओं में मीडिया की रिपोर्टिंग बेहद जिम्मेदारी से होनी चाहिए ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा प्रभावित न हो। पत्रकार संगठनों की प्रतिक्रियामीडिया संगठनों ने सरकार की एडवायजरी का स्वागत करते हुए कहा है कि वे राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हैं। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया औरएडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने भी बयान जारी कर कहा कि वे रिपोर्टिंग के दौरान सभी निर्देशों का पालन करेंगे। हालांकि कुछ स्वतंत्र पत्रकारों ने यह भीकहा है कि पारदर्शिता बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है और सरकार को समय-समय पर प्रेस को ब्रीफिंग देनी चाहिए।
जम्मू-कश्मीर में छह आतंकियों के घर ध्वस्त, सरकार ने सेना मूवमेंट की कवरेज पर लगाई रोक

आतंकियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाईजम्मू-कश्मीर प्रशासन ने आतंकवाद पर कड़ा प्रहार करते हुए छह आतंकियों के मकानों को ध्वस्त कर दिया। यह कदम उन आतंकियों के खिलाफउठाया गया है जो राज्य में आतंकी गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे या उन्हें समर्थन दे रहे थे। प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई कानूनव्यवस्था बनाए रखने और आतंकवाद को जड़ से खत्म करने के उद्देश्य से की गई है। मीडिया को सेना मूवमेंट की रिपोर्टिंग से रोकाइस कार्रवाई के बीच सरकार ने मीडिया संस्थानों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि सेना की मूवमेंट से जुड़ी किसी भी तरह की रिपोर्टिंग या लाइवकवरेज न की जाए। अधिकारियों का कहना है कि ऑपरेशनल सिक्योरिटी को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है, ताकि किसी भी सैन्यअभियान की जानकारी आतंकियों तक न पहुंचे। सुरक्षा एजेंसियों का बड़ा अभियानसूत्रों के मुताबिक, यह पूरी कार्रवाई खुफिया सूचनाओं के आधार पर संचालित की गई। सुरक्षा बलों ने चिन्हित आतंकियों के घरों को गिराने से पहलेपूरी तैयारी कर ली थी। इस अभियान में स्थानीय पुलिस के साथ-साथ केंद्रीय सुरक्षा बलों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। आतंकवाद के खिलाफ सख्त संदेशविशेषज्ञों का मानना है कि मकान ध्वस्तीकरण जैसे कदमों से आतंकियों और उनके समर्थकों को स्पष्ट संदेश दिया जा रहा है कि राज्य में आतंकवादको किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन ने संकेत दिया है कि भविष्य में भी इस तरह की सख्त कार्रवाइयां जारी रहेंगी।
कुरुक्षेत्र में अंबेडकर जयंती: रामदास आठवले की प्रेरणादायक उपस्थिति

25 अप्रैल 2025 को हरियाणा के कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें भारत के संविधान निर्माता औरसमाज सुधारक डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती मनाई गई। इस अवसर पर कई प्रमुख हस्तियों ने भाग लिया और डॉ. अंबेडकर के विचारों और उनकेयोगदानों को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। यह आयोजन न केवल अंबेडकर के विचारों को पुनर्जीवित करने का एक मंच था, बल्कि यहसमकालीन सामाजिक और राजनीतिक विमर्श के लिए भी एक महत्वपूर्ण अवसर बना।डॉ. भीमराव अंबेडकर का देश निर्माण में योगदानडॉ. भीमराव अंबेडकर का जीवन और कार्य भारतीय समाज के लिए एक प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने संविधान के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाईऔर समाज में व्याप्त जातिवाद और असमानता के खिलाफ आवाज उठाई। अंबेडकर ने शिक्षा को समाज के उत्थान का एक महत्वपूर्ण साधन मानाऔर इसे अपने जीवन में प्राथमिकता दी। उनका मानना था कि शिक्षा ही एकमात्र ऐसा माध्यम है, जिसके द्वारा समाज के कमजोर वर्गों को सशक्तबनाया जा सकता है। अंबेडकर ने जातिवाद के खिलाफ संघर्ष किया और दलितों के अधिकारों के लिए आवाज उठाई। उनके विचारों ने न केवल दलितों को जागरूककिया, बल्कि समस्त समाज को एक नई दिशा दी। अंबेडकर का यह संदेश आज भी प्रासंगिक है, और उनके विचारों को आगे बढ़ाने की आवश्यकताहै। रामदास आठवले की उपस्थितिइस विशेष कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (A) के नेता रामदास आठवले ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। उन्होंनेअपने अनोखे और प्रभावशाली अंदाज में डॉ. अंबेडकर के जीवन और कार्यों पर प्रकाश डाला। आठवले ने कहा कि डॉ. अंबेडकर केवल दलित समाजके उद्धारक नहीं थे, बल्कि वे पूरे भारत के लिए सामाजिक न्याय के प्रतीक थे। आठवले ने अंबेडकर के विचारों को आज की राजनीति और समाज के लिए अत्यंत प्रासंगिक बताया। उन्होंने कहा कि अंबेडकर का सपना एक ऐसाभारत था, जहां सभी को समान अधिकार और अवसर मिलें। उन्होंने यह भी कहा कि आज के समय में हमें अंबेडकर के विचारों को अपनाने कीआवश्यकता है, ताकि हम एक समतामूलक समाज की दिशा में आगे बढ़ सकें। रवि कुंडली का संबोधनकार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष रवि कुंडली ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने अंबेडकर की विराट विचारधारा की सराहना करते हुए रामदास आठवलेको उनके “विचारों का उत्तराधिकारी” बताया। कुंडली ने कहा, “रामदास जी को मैं डॉ. अंबेडकर का बेटा मानता हूं,” जो पूरे सभागार में गूंज उठा औरलोगों ने इसका जोरदार स्वागत किया। कुंडली ने अपने भाषण में अंबेडकर के विचारों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज के समय में हमें अंबेडकर केसिद्धांतों को अपनाने की आवश्यकता है, ताकि हम एक समतामूलक और न्यायपूर्ण समाज की दिशा में आगे बढ़ सकें। उन्होंने यह भी कहा किअंबेडकर का सपना केवल दलितों का नहीं, बल्कि समस्त समाज का सपना है। आत्मविश्वास और सुरक्षा पर रामदास आठवले की बातकार्यक्रम के दौरान, रामदास आठवले ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम क्षेत्र में हाल ही में हुए हमले पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने पाकिस्तान के प्रतिकड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि भारत शांति चाहता है, लेकिन आतंकवाद के खिलाफ किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार है। उनके इस भाषण नेउपस्थित जनसमूह में नया उत्साह भर दिया और अंबेडकर की मूल भावना—”न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुता”—को जीवंत कर दिया। आठवले ने यह भी कहा कि हमें अपने देश की सुरक्षा के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत एक मजबूत राष्ट्र है और हमें अपने देशकी रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार रहना चाहिए। उनके इस भाषण ने उपस्थित जनसमूह में एक नई ऊर्जा भर दी और सभी कोएकजुट होने की प्रेरणा दी।