पेगासस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, बोले किसी भी रिपोर्ट को नहीं करेंगें सार्वजनिक

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पेगासस मामले में सुनवाई के दौरान इस बात पर हैरानी जताई कि अगर सरकार आतंकियों की जासूसी करा रही हैं तोइसमें गलत क्या है साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वे ऐसी किसी भी रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं करेंगे जो देश की सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़ी हो. सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि वे ऐसी किसी भी रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं करेंगे. जो देश की सुरक्षा और सुप्रभुता से जुड़ी हो हालांकि उन्होंने संकेतदिए कि वे निजता के उल्लंघन की व्यक्तिगत आशंकाओं पर विचार कर सकता है. जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहाकि तकनीकी समिति की रिपोर्ट पर सड़कों पर चर्चा नहीं होनी चाहिए. एक याचिकाकर्ता की तरफ से पेश हुए वकील दिनेश द्विवेदी ने सुनवाई केदौरान कहा कि सवाल ये था कि क्या सरकार के पास स्पाइवेयर सॉफ्टवेयर है और क्या वह इसका इस्तेमाल कर सकती है अगर सरकार के पास ये हैतो कोई भी उन्हें इसका इस्तेमाल करने से नहीं रोक सकता. इस पर पीठ ने कहा कि ‘अगर देश आतंकियों के खिलाफ स्पाइवेयर का इस्तेमाल कर रहाहै तो इसमें गलत क्या है स्पाइवेयर रखना गलत नहीं है ये किसके खिलाफ इस्तेमाल हो रहा है सवाल इसका है देश की सुरक्षा से समझौता नहीं कियाजा सकता आम नागरिकों का संविधान के तहत निजता का अधिकार सुरक्षित किया जाएगा.जो देश की संप्रभुता से जुड़ी होगा उसे छुआ नहीं जाएगाइसको लेकर पीठ ने कहा कि कोई भी रिपोर्ट जो देश की सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़ी हो उसे छुआ नहीं जाएगा. लेकिन व्यक्तिगत तौर पर अगर कोईयह जानना चाहता है कि वह रिपोर्ट में शामिल है या नहीं उसे इसकी जानकारी दी जा सकती है. लेकिन रिपोर्ट को ऐसा दस्तावेज नहीं बनाया जाएगाकि सड़कों पर भी इसकी चर्चा हो. अदालत ने कहा कि वे इस बात की जांच करेंगे कि किस हद तक तकनीकी समिति की रिपोर्ट को संबंधित व्यक्तिके साथ साझा किया जा सकता है. इसके बाद पीठ ने मामले पर सुनवाई 30 जुलाई तक के लिए टाल दी. पेगासस एक इस्राइली सॉफ्टवेयर है जिसेमोबाइल फोन को हैक कर निगरानी के लिए इस्तेमाल किया जाता है। 2021 में कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि भारत में कईपत्रकारों, नेताओं, और सामाजिक कार्यकर्ताओं के फोन की जासूसी की गई थी. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की स्वतंत्र जांच के आदेश दिएथे. साल 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने पेगासस मामले की जांच के लिए एक तकनीकी समिति और एक निगरानी समिति बनाई थी. वहीं इस जांच कीनिगरानी पूर्व न्यायाधीश आर वी रवींद्रन कर रहे हैं जिनकी सहायता पूर्व आईपीएस अधिकारी आलोक जोशी और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ संदीपओबेरॉय कर रहे हैं.
पहलगाम आतंकी हमले के बाद अब सीमा हैदर पर लटकी तलवार, जानें क्या है मामला

पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सरकार ने सार्क वीजा छूट की नीति के तहत पाकिस्तानी नागरिकों को दी जा रही सुविधा समाप्त कर दी है. इसी के साथ पाकिस्तानी नागरिकों को देश छोड़ना पड़ रहा है अवैध तरीके से भारत आई सीमा हैदर को लेकर नोएडा पुलिस का कहना है कि केंद्रसरकार से आदेश मिलने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.पाकिस्तान की सीमा हैदर मई 2023 में नेपाल के रास्ते अवैध रूप से अपने चार बच्चों केसाथ भारत आई थी. उन्होंने सचिन मीणा के साथ हिंदू रीति-रिवाज से शादी भी की है हाल ही में दोनों को एक बच्चा भी हुआ है. सीमा पर कोई सीधाअसर नहीं होगा क्योंकि सीमा वीजा के जरिये भारत नहीं आई थी. उनके खिलाफ मामला अदालत में विचाराधीन है. एडिशनल डीसीपी ग्रेनो सुधीरकुमार का कहना है कि सीमा को लेकर कोई आदेश नहीं है. आदेश के बाद कार्रवाई की जाएगी.सीमा हैदर के अधिवक्ता एपी सिंह का कहना है किसीमा के मामले की जांच यूपी एटीएस ने भी की है. उन्हें जांच में अबतक कुछ नहीं मिला है केंद्र के अलावा पुलिस से देश छोड़ने के संबंधी कोईआदेश नहीं मिला है.सीमा हैदर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उसे भारत में रहने देने की गुहार लगाई है. सीमा ने अपील करते हुए कहा कि वह बेशक पाकिस्तान की बेटी थी लेकिन अब बहू भारत की है और उन्हें भारत में रहने की इजाजत दी जाए. सोशल मीडिया पर कही बातसोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर किए जा रहे एक वीडियो में सीमा हैदर ने यह बातें कही हैं.सीमा हैदर ने एक वीडियो में कहा मैं पाकिस्तान नहींजाना चाहती. मैं मोदी जी और योगी जी से अपील करती हूं कि मैं अब उनकी शरण में हूं. मैं पाकिस्तान की बेटी थी लेकिन अब मैं भारत की बहू हूं. मुझे यहीं रहने दीजिए हैदर का दावा है कि सचिन मीना से शादी के बाद उसने हिंदू धर्म अपना लिया है.देशव्यापी विरोध के बावजूद सीमा हैदर केवकील एपी सिंह को उम्मीद है कि उन्हें भारत में रहने की अनुमति दी जाएगी. एपी सिंह ने दावा किया कि वह अब पाकिस्तानी नागरिक नहीं हैंअधिवक्ता एपी सिंह ने कहा, “सीमा अब पाकिस्तानी नागरिक नहीं है. उसने ग्रेटर नोएडा निवासी सचिन मीना से विवाह किया और हाल ही में उनकीबेटी भारती मीना को जन्म दिया. उसकी नागरिकता अब उसके भारतीय पति से जुड़ी हुई है और इसलिए केंद्र का निर्देश उस पर लागू नहीं होनाचाहिए.सीमा हैदर के वकील एपी सिंह ने कहा कि पहलगाम हमले की जानकारी होने पर सीमा बहुत परेशान और दुखी है. हम सभी इस हमले कीकड़ी निंदा करते हैं उन्होंने कहा कि सीमा पाकिस्तान से सनातन धर्म ग्रहण करके नेपाल पहुंची. नेपाल में की थी सचिन के साथ शादीनेपाल में सचिन मीणा के साथ शादी की और भारत में भी आकर दोनों ने पूरे रीति रिवाज के साथ शादी रचाई. शादी के बाद पिछले माह उसने एकबेटी को जन्म दिया है भारत सरकार ने सार्क वीजा निलंबित करने का जो निर्णय लिया है वह तारीफ के काबिल है। यह आतंकवाद के खिलाफ निर्णयहै.पहलगाम में आतंकी हमले में 26 पर्यटकों की मौत के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ एक बड़ा और कड़ा फैसला लेते हुए सार्क वीजाछूट की नीति के तहत पाकिस्तानी नागरिकों को दी जा रही सुविधा समाप्त कर दी है. इस निर्णय के अनुसार अब पाकिस्तानी नागरिक इस छूट केअंतर्गत भारत की यात्रा नहीं कर सकेंगे. वहीं जो पाकिस्तानी नागरिक पहले से इस सुविधा के तहत भारत में मौजूद हैं. उन्हें एक सप्ताह के भीतर देशछोड़ने का आदेश दिया गया है जिसके बाद सीमा हैदर को वापस पाकिस्तान भेजने की मांग की जा रही है.
जम्मू-कश्मीर में आतंक के खिलाफ जारी अभियान, 600 से अधिक ठिकानों की ली गई तलाशी

जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ अभियान जारी है पुलिस और सुरक्षा बलों ने सोमवार को श्रीनगर में 36 और डोडा व किश्तवाड़ मेंआतंकवादियों और उसके मददगारों के दर्जनों ठिकानों पर छापे मारे और तलाशी ली. पहलगाम हमले के बाद छह दिनों के भीतर सुरक्षा बलों नेआतंकियों और ओवरग्राउंड वर्कर (ओजीडब्ल्यू) के 600 से अधिक ठिकानों की तलाशी ली है. जम्मू-कश्मीर पुलिस के प्रवक्ता ने बताया किआतंकियों आतंकी संगठनों और उनके सहयोगियों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत दर्ज मामलों में यह कार्रवाई कीजा रही है. यह कार्रवाई कार्यकारी मजिस्ट्रेट और स्वतंत्र गवाहों की निगरानी में की गई श्रीनगर शहर में जिन 36 जगहों की तलाशी ली गई. उनमें सेज्यादातर आतंकवादियों और उनके मददगारों के थे आतंकवाद रोधी अभियान में सुरक्षा बलों ने सैकड़ों संदिग्धों से पूछताछ भी की है. पहलगाम केबायसरन के मैदान में 22 अप्रैल के हमले बाद से नौ आतंकियों और ओजीडब्ल्यू के घरों को भी जमींदोज किया जा चुका है. आतंकियों के घरों पर छापेमारीपुलिस ने विशेष ऑपरेशन ग्रुप और अन्य खुफिया एजेंसियों के साथ सोमवार सुबह डोडा के 13 आतंकियों के घरों में छापे मारे. तलाशी के दौरान कईघरों से संदिग्ध दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए गए हैं. जिनकी जांच की जा रही है किश्तवाड़ जिले में भी तलाशी ली गई. सभी केआतंकी समूहों और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) से सक्रिय दहशतगर्दों से जुड़े होने का संदेह है। प्रवक्ता ने बताया कि कार्रवाई काउद्देश्य हथियार दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस जब्त करने और राष्ट्र की सुरक्षा के खिलाफ किसी भी षड्यंत्रकारी या आतंकी गतिविधि का पतालगाने और उसे रोकने के लिए साक्ष्य संग्रह और खुफिया जानकारी जुटाना है.पहलगाम में पर्यटकों पर हमला करने वालों की तलाश में सुरक्षाबलों नेघाटी की चौकसी बढ़ा दी है. बीते एक सप्ताह में सुरक्षाबलों ने चार बार इन आतंकियों की घेराबंदी की. एक बार उनके साथ गोलीबारी भी हुई औरआतंकी डर कर भाग निकले. खुफिया सूचनाओं व तलाशी अभियान जारीदरअसल सुरक्षा बलों ने स्थानीय लोगों से मिली जानकारी खुफिया सूचनाओं व तलाशी अभियानों के जरिये आतंकियों का पता लगाया गया. एकसैन्य अधिकारी ने कहा कि घने जंगलों का फायदा उठाते हुए आतंकी बच रहे हैं. पर ऐसा बहुत दिन तक नहीं होगा. सूत्रों के मुताबिक सबसे पहलेअनंतनाग के पहलगाम तहसील के हापत नार गांव के पास जंगलों में दहशतगर्दों को देखा गया. फिर इनके कुलगाम के जंगलों में होने का इनपुटमिला. मौके पर सुरक्षाबलों ने इन्हें चारों ओर से घेरा. गोलीबारी भी हुई लेकिन आतंकी भाग निकले इसके बाद आतंकियों को त्राल रिज औरकोकेरनाग में देखा गया था.आतंकियों को इस बार किश्तवाड़ में कम बर्फ पड़ने का फायदा हो रहा है. बर्फ नहीं होने के कारण उन्हें पहाड़ी के रास्तेदूसरी ओर से जम्मू की तरफ घने जंगलों में भागने का मौका मिल रहा है. एक अधिकारी ने कहा कि हमारा मानना है कि वे अभी भी दक्षिण कश्मीर मेंहैं. इनके अभी भी इसी इलाके में छिपे होने की सूचना है. सुरक्षाबलों ने मुस्तैदी बढ़ा दी है और तलाशी अभियान तेज कर दिया है.
बांग्लादेश की युनूस सरकार ने रखाइन में मदद को लेकर गलियारे पर जताई सहमति, BNP बोली गंभीर चिंता का विषय

बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने म्यांमार के रखाइन राज्य में राहत सामग्री पहुंचाने के लिए मानवीय गलियारा खोलने परसैद्धांतिक सहमति दे दी है. इस पर बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने गंभीर चिंता जताईहै.बीएनपी के महासचिव मीरा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने सोमवार को एक रैली को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसाबड़ा फैसला लेने से पहले सभी राजनीतिक दलों से सलाह-मशविरा करना चाहिए था. क्योंकि यह फैसला हमारी स्वतंत्रता, संप्रभुता और भविष्य मेंक्षेत्रीय शांति को प्रभावित कर सकता है. उन्होंने कहा रिपोर्ट ने हमें चिंतित कर दिया है.अंतरिम सरकार के विदेश मामलों के सलाहकार एम तौहीद हुसैनने रविवार को घोषणा की कि बांग्लादेश ने संयुक्त राष्ट्र के उस प्रस्ताव पर सैद्धांतिक सहमति दी है. जिसमें म्यांमार में चल रहे गृहयुद्ध के बीच रखाइनराज्य में सहायता पहुंचाने के लिए बांग्लादेश के रास्ते एक मानवीय गलियारा बनाने की बात कही गई है. शर्तों के बारे में विस्तार से बताने से इनकारकरते हुए उन्होंने कहा मैं विवरण में नहीं जाऊंगा. लेकिन शर्तें पूरी होती हैं तो हम निश्चित रूप से सहायता प्रदान करेंगे. संयुक्त राष्ट्र ने जताई आशंकासंयुक्त राष्ट्र ने पहले आशंका जताई थी कि रखाइन में गृहयुद्ध के कारण अकाल जैसी स्थिति बन सकती है. जिससे रोहिंग्या और अन्य जातीय समुदायोंके लोग बांग्लादेश में शरण लेने आ सकते हैं. इस मुद्दे पर बोलते हुए बीएनपी नेता आलमगीर ने कहा हम नहीं चाहते कि बांग्लादेश एक दूसरा गाजाबन जाए. हम किसी युद्ध में शामिल नहीं होना चाहते हम नहीं चाहते कि कोई यहां आकर हमारे लिए और परेशानी खड़ी करे. हम पहले से ही रोहिंग्याके साथ एक गंभीर समस्या में फंसे हैं.आलमगीर ने आगे कहा कि बीएनपी संकट में फंसे लोगों की मदद करने के खिलाफ नहीं है लेकिन कोई भीफैसला करने से पहले सभी राजनीतिक दलों के साथ परामर्श की आवश्यकता है क्योंकि ‘हम नहीं चाहते कि कोई भी हमारे क्षेत्र में आकर नई मुसीबतखड़ी करे.बीएनपी की यह प्रतिक्रिया उन रिपोर्टों के बीच आई है जिनमें कहा गया है कि म्यांमार के विद्रोही गुट अराकान सेना से बचने के लिए हर दिनअधिक से अधिक रोहिंग्या बांग्लादेश में घुस रहे हैं. डेली स्टार अखबार ने सूत्रों के हवाले से कहा कि रोहिंग्या लोगों को हत्या यातना और जबरन गायबकिए जाने का खतरा है. विद्रोही गुट उन्हें जुंटा बलों के खिलाफ मानव ढाल की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं.
अमेरिका समेत कई अन्य शहरों में वज्रपात और ओलावृष्टि के साथ ही बवंडर आने की संभावना, सहमें लोग लोगों से सतर्क रहने की गई अपील

अमेरिका के ऊपरी मध्यपश्चिम में सोमवार को तूफान, वज्रपात, ओलावृष्टि के साथ ही बवंडर आने की संभावना जताई गई है. इन शहरों में मिनेसोटा, आयोवा और विस्कॉन्सिन के साथ ही मिनियापोलिस और उसके आसपास के क्षेत्र शामिल हैं. राष्ट्रीय मौसम सेवा के पूर्वानुमान के अनुसार, दो बारतूफान आ सकता है. एक दोपहर में और दूसरा शाम को। ओक्लाहोमा के नॉर्मन में स्टार्म प्रेडिक्शन सेंटर के पूर्वानुमानकर्ताओं के अनुसार शाम वालातूफान ज्यादा खतरनाक हो सकता है जिसमें तेज बवंडर भारी ओलावृष्टि और तेज हवाएं चलने की संभावना है.मिनियापोलिस के मौसम विभाग ने कहाकि बवंडर काफी तेज हो सकते हैं और EF-2 स्तर या उससे भी बड़े बवंडर बनने की आशंका है. सोमवार दोपहर एक बवंडर को मिनेसोटा के फेयरमोंटइलाके में देखा गया लेकिन अभी तक कोई नुकसान की खबर नहीं है.यह भी पता नहीं चल पाया कि देखा गया बवंडर नीचे उतरा या नहीं.स्टॉर्मप्रेडिक्शन सेंटर ने कहा है कि टेक्सास और ओक्लाहोमा के कुछ हिस्सों तक दक्षिण में भी तूफान आ सकते हैं लेकिन वहां खतरा थोड़ा कम है।मिनियापोलिस शहर ने लोगों को सोमवार को सतर्क रहने की सलाह दी गई है. सुरक्षित जगह पर जाने की करें तैयारीलोगों से कहा गया है कि वह मौसम अलर्ट पाने के कई साधन रखें जरूरत पड़ने पर सुरक्षित जगह पर जाने की तैयारी करें. घर के बाहर का सामानसुरक्षित करें और मोबाइल फोन और टॉर्च आदि चार्ज करके रखें.सोमवार सुबह पहले तूफान ने मिनियापोलिस के आसमान को काला कर दिया औरथोड़ी देर भारी बारिश हुई. लेकिन उस समय कोई गंभीर चेतावनी नहीं दी गई मौसम सेवा ने कहा कि असली खतरा दोपहर और शाम को था. मिनियापोलिस शहर ने दोपहर 2 बजे तक अपने मुख्य सेवा केंद्र सहित सार्वजनिक-सामने वाले गैर-आपातकालीन शहर की सुविधाओं को बंद करदिया और अपने आपातकालीन संचालन केंद्र को सक्रिय कर दिया.मिनियापोलिस सेंट पॉल और ब्लूमिंगटन स्कूल जिले के साथ ही मिनेसोटा में तेजआंधी के दौरान बड़े-बड़े ओले गिरे. बवंडर की चेतावनी है जारीदक्षिणी मिनेसोटा उत्तरी आयोवा और पश्चिमी विस्कॉन्सिन के बड़े हिस्सों में बवंडर की चेतावनी जारी की गई है जो मंगलवार रात तक प्रभावी रहेगी. अयोवा के कुछ स्कूल भी दिन के लिए बंद कर दिए गए शाम की गतिविधियां भी रद्द कर दी गईं.एक बवंडर ने उत्तर-पश्चिमी नेब्रास्का में एक मालगाड़ीको भी पलट दिया. शुरुआती रिपोर्ट्स में कहा गया था कि 1.6 किलोमीटर से ज्यादा चौड़े बवंडर ने ट्रेन की लगभग 130 बोगियों में से कई को पटरीसे उतार दिया जिससे कई बोगियां पलट गईं। हालांकि किसी के घायल होने की तत्काल कोई रिपोर्ट नहीं है और इंजन सीधा खड़ा रहा. यह रविवारशाम को नेब्रास्का के उस हिस्से में रिपोर्ट किए गए कई बवंडर में से एक था.
पहलगाम हमले के बाद भारत-पाकिस्तान में बढ़ा तनाव: जानिए किसके पास कितनी सैन्य ताकत

हाल ही में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव काफी बढ़ गया है। दोनों देशों के आक्रामक कदमों को देखतेहुए यह सवाल उठने लगे हैं कि आगे क्या होगा। क्या हालात युद्ध तक पहुंच सकते हैं? हालांकि दोनों देश परमाणु शक्ति संपन्न हैं, लेकिन फिर भीसैन्य कार्रवाई की आशंका जताई जा रही है। ऐसे माहौल में यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि भारत और पाकिस्तान की सैन्य क्षमताएं किस स्तरपर हैं। ग्लोबल फायरपावर इंडेक्स 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत को दुनिया की चौथी सबसे बड़ी सैन्य शक्ति का दर्जा मिला है, जबकि पाकिस्तान12वें स्थान पर है। थलसेना की बात करें तो भारत के पास लगभग 14.55 लाख सक्रिय सैनिक हैं, जबकि रिजर्व बलों की संख्या 11.55 लाख है।इसके अतिरिक्त भारत के पास 25.27 लाख पैरामिलिट्री जवान हैं। भारत का रक्षा बजट करीब 681210 करोड़ रुपये यानी लगभग 77.4 अरबडॉलर है। इसके मुकाबले पाकिस्तान के पास 6.54 लाख सक्रिय सैनिक, 5.5 लाख रिजर्व सैनिक और 5 लाख पैरामिलिट्री फोर्स है, जो भारत केमुकाबले कहीं कम है। जमीनी लड़ाई में टैंक और बख्तरबंद गाड़ियों की भूमिका बेहद अहम होती है। भारत के पास 4614 टैंक हैं, जिससे वह वैश्विक स्तर पर छठे स्थान परहै। भारतीय सेना के पास अर्जुन टैंक, भीम टैंक, होवित्जर तोपें और पिनाका रॉकेट सिस्टम जैसी अत्याधुनिक क्षमताएं मौजूद हैं। पाकिस्तान के पासटैंकों की संख्या 3742 है। भारत के पास 1,51,248 बख्तरबंद वाहन हैं, जो पाकिस्तान से लगभग तीन गुना अधिक हैं, और युद्ध के दौरान तेजी सेसैनिकों की तैनाती और बेहतर युद्धाभ्यास में मदद करते हैं। वायुसेना की ताकत की बात करें तो भारतीय वायुसेना के पास 2,229 एयरक्राफ्ट हैं, जिनमें 600 फाइटर जेट और 899 हेलीकॉप्टर शामिल हैं।इसके अलावा 831 सपोर्ट एयरक्राफ्ट भी भारतीय वायुसेना के बेड़े का हिस्सा हैं। राफेल, सुखोई और नेत्र जैसे आधुनिक विमानों और ब्रह्मोस, अस्त्र, निर्भय, रुद्रम, आकाश जैसी मिसाइल प्रणालियों से भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता कई गुना बढ़ गई है। वहीं पाकिस्तान के पास 1399 एयरक्राफ्ट हैं, जिनमें 328 फाइटर जेट और 57 अटैक हेलीकॉप्टर शामिल हैं। पाकिस्तान के बेड़े में चीनी जे-10सी और जेएफ-17 फाइटर जेट प्रमुखहैं, जिन्हें वह भारतीय राफेल के मुकाबले बेहतर बताता है। भारतीय नौसेना भी बेहद मजबूत स्थिति में है। भारत के पास 150 युद्धपोत, 18 पनडुब्बियां और दो एयरक्राफ्ट कैरियर (आईएनएस विक्रमादित्य औरआईएनएस विक्रांत) हैं। इसके मुकाबले पाकिस्तान के पास सिर्फ 8 पनडुब्बियां हैं और उसके पास कोई एयरक्राफ्ट कैरियर नहीं है। परमाणु हथियारों के क्षेत्र में भी भारत और पाकिस्तान लगभग बराबरी पर हैं। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की रिपोर्ट केअनुसार भारत के पास 172 परमाणु हथियार हैं जबकि पाकिस्तान के पास 170 परमाणु हथियार मौजूद हैं। भारत की प्रमुख मिसाइलों में पृथ्वी औरअग्नि सीरीज की मिसाइलें शामिल हैं, जिनकी रेंज 350 किलोमीटर से लेकर 7500 किलोमीटर तक है। पाकिस्तान के पास नस्त्र, हत्फ, गजनवी, अब्दाली, गौरी और शाहीन जैसी मिसाइलें हैं, जिनकी मारक क्षमता 60 किलोमीटर से लेकर 2700 किलोमीटर तक है।
सिद्दारमैया ने ASP को थप्पड़ मारने की कोशिश की, बेलगावी में रेल दुर्घटना, भाजपा कार्यकर्ता नाराज

बेंगलुरु: कर्नाटक विधानसभा के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस नेता डॉ. सिद्धारमैया ने आज एक विवादित घटना में शामिल होकर राज्य राजनीति में नयाउथल-पुथल मचा दिया। सोमवार दोपहर को बेंगलुरु में आयोजित एक जनहित शिविर में अचानक सिद्धारमैया ने ASP (सहायक पुलिस अधीक्षक) श्रीमती रेखा प्रसाद को थप्पड़ मारने का प्रयास किया, जिससे वहां मौजूद लोग सकते में आ गए। इस घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था और राजनीतिकनैतिकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सिद्धारमैया ने बताया कि वे शिविर स्थल पर बिजली कटौती की समस्या और पानी की कमी को लेकर ASP से बातचीत कर रहे थे। ASP नेजानकारी देते हुए बताया कि स्थानीय अधिकारियों को शिकायत के बाद समस्या का समाधान कर दिया गया है, लेकिन कई शिकायतें निस्तारित नहोने पर भी बंद हैं। इसी पर सिद्धारमैया ब्रस्त्र हो उठे और ASP को चेतावनी देने के अंदाज में हाथ बढ़ाकर थप्पड़ मारने का प्रयास किया। पास खड़ेसमर्थकों ने तुरंत उन्हें रोका, जबकि ASP को तुरंत वहां से सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। ASP ने दर्ज कराई शिकायतघटना के तुरंत बाद ASP रेखा प्रसाद ने पुलिस कंट्रोल रूम में लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसमें उन्होंने सिद्धारमैया के खिलाफ फोर्स का उपयोगकरने का आरोप लगाया। शिकायत में ASP ने कहा है कि एक वरिष्ठ नेता द्वारा इस तरह की शारीरिक हरकत निंदनीय है और इस पर कड़ी कार्रवाईहोनी चाहिए। उनके अनुसार, “मैं जनहित में काम कर रही थी, लेकिन मुझे अप्रत्याशित रूप से शिकायत नहीं सुनने का दंड भुगतना पड़ा।” पुलिस नेइस मामले में दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर लिए हैं और जांच जारी है। बेलगावी में रेल दुर्घटनाइसी बीच, कर्नाटक के बेलगावी जिले के पास गोदंबा स्टेशन के समीप एक यात्री ट्रेन और मालगाड़ी के बीच टक्कर की खबर ने क्षेत्र में नया तनावबढ़ाया है। मंगलवार तड़के हुए इस हादसे में स्टेशन मास्टर के अनुसार दो डिब्बे पटरी से उतर गए और पीछे आने वाली मालगाड़ी पीछे से टकरा गई।इसके चलते कम से कम 15 यात्री घायल हो गए, जिनमें चार की हालत गंभीर बताई जा रही है। घायलों को पास के सरकारी अस्पताल में भर्तीकराया गया है, जहाँ उनका उपचार चल रहा है। प्राथमिक जांच में पाया गया है कि रात में सिग्नल सिस्टम में तकनीकी खराबी के कारण दोनों ट्रेनों को एक ही लाइनों पर भेज दिया गया। दक्षिणपश्चिम रेलवे के एक अधिकारी ने बताया, “हमने हादसे के बाद सिग्नल सिस्टम रोक दिया और तकनीकी टीम को बुलाकर मरम्मत कार्य शुरू कर दियाहै।” रेल यातायात कुछ समय के लिए रोक दिया गया था, लेकिन अब मरम्मत के बाद एक ट्रैक पर यात्री सेवा बहाल कर दी गई है। स्थानीय भाजपा कार्यकर्ता की नाराज़गीबेलगावी रेल दुर्घटना और सिद्धारमैया की घटना के बीच भाजपा के एक स्थानीय कार्यकर्ता, श्रीमती रेनू देशपांडे ने दोनों मुद्दों पर सरकार की उदासीनताऔर पुलिस की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “जब रेल सुरक्षा प्रणाली खराब हो और जनप्रतिनिधि खुद कानून को दरकिनार करनेका प्रयास करें, तो आम जनता का भरोसा किस पर रहेगा?” रेनू ने आरोप लगाया कि रेलवे प्रशासन वर्षों से मालगाड़ी और यात्री ट्रेन के शेड्यूल मेंतालमेल नहीं बिठा पा रहा, जिससे लगातार हादसे हो रहे हैं। उनके अनुसार, “सरकार सिर्फ आंकड़ों पर बात करती है, हकीकत में पटरी सुरक्षा औरसिग्नलिंग में निवेश नगण्य है।” राजनीतिक हलकों में बढ़ा विवादसिद्धारमैया की ASP पर हमले की कोशिश और बेलगावी रेल हादसे का राजनीतिकरण पहले ही शुरू हो गया है। कांग्रेस ने बयान जारी कर कहा किसिद्धारमैया का व्यवहार “अत्यधिक भावुक” था, लेकिन ASP पर हमला करने की सलाह नहीं दी जा सकती। वहीं, भाजपा ने इस मामले को ‘अपराध’ करार देते हुए राज्य सरकार से न्यायिक जाँच की मांग की है। रेल दुर्घटना को लेकर दोनों बड़े राजनीतिक दल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहेहैं। कर्नाटक के गृह मंत्री ने कहा, “कानून सबके लिए एक समान है। अगर कोई भी नेता कानून तोड़ता है, तो उस पर कार्रवाई होगी।” वहीं, रेल राज्य मंत्रीने घटनास्थल पर अधिकारियों को हिदायत दी है कि वे दोषियों को नम्यता से बख्शें नहीं और सिग्नलिंग सिस्टम की दोषपूर्ण कड़ी की तुरंत मरम्मतकराएं। आगे की कार्यवाही और निष्कर्षASP की शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस आयुक्त ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एक उच्च स्तरीय जांच समिति गठित कर दी है। समिति तीनदिनों में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। दूसरी ओर, रेलवे बोर्ड ने भी गोदंबा स्टेशन की पूरी सिग्नल प्रणाली की अद्यतन समीक्षा के निर्देश दिए हैं। भाजपाके नाराज़ कार्यकर्ता रेनू देशपांडे ने आश्वासन मिलने के बावजूद अधिकारीयों पर भरोसा कम दिखाई, और कहा, “हमें मैदान पर बदलाव दिखाई नहीं देरहा।” ये तीनों घटनाएं—सिद्धारमैया का ASP पर हमले का प्रयास, बेलगावी रेल दुर्घटना, और भाजपा कार्यकर्ता की नाराज़गी—कर्नाटक की राजनीति औरप्रशासनिक व्यवस्था में गंभीर सवाल खड़े करती हैं। आगे देखना होगा कि जांच प्रक्रिया से क्या सच्चाई सामने आती है, और क्या प्रशासन वराजनैतिक नेतृत्व से जनता का विश्वास बहाल हो पाता है।
पहलगाम अटैक पर भावुक हुए उमर अब्दुल्ला, बोले – सुरक्षा की जिम्मेदारी मेरी थी, मृतकों के परिजनों से क्या बोलूं, माफी के बाद शब्द नहीं

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद पूरे देश में शोक और आक्रोश का माहौल है। इस हमले में कई निर्दोष तीर्थयात्रियों औरस्थानीय नागरिकों की जान चली गई। अब इस दर्दनाक घटना पर जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के वरिष्ठ नेता उमरअब्दुल्ला ने बेहद भावुक प्रतिक्रिया दी है। उमर ने कहा कि इस हमले की नैतिक और राजनीतिक जिम्मेदारी वह खुद लेते हैं और मृतकों के परिजनों सेमाफी मांगते हैं। श्रीनगर में मीडिया से बातचीत के दौरान उमर अब्दुल्ला की आंखें नम हो गईं। उन्होंने कहा, “मैं इस हमले के लिए खुद को जिम्मेदार मानता हूं। अगरसुरक्षा व्यवस्था कहीं भी चूक गई है, तो वह मेरी जिम्मेदारी बनती है। जो निर्दोष लोग मारे गए, उनके परिवारों से मैं सिर्फ माफी ही मांग सकता हूं, लेकिन सच कहूं तो अब माफी के बाद शब्द भी नहीं बचते।” उमर अब्दुल्ला ने बताया कि जब वह मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने कश्मीर घाटी में अमरनाथ यात्रा सहित अन्य धार्मिक आयोजनों की सुरक्षा व्यवस्था कोलेकर कई अहम कदम उठाए थे। “हमने हमेशा यह कोशिश की कि तीर्थयात्रा और स्थानीय जीवन सुरक्षित रहे। आतंकवाद का मुकाबला करनाआसान नहीं होता, लेकिन हमने हर संभव प्रयास किए थे। फिर भी अगर आज ऐसा हादसा हुआ है तो यह मेरी भी विफलता मानी जाएगी,” उमर नेकहा। उन्होंने आगे कहा कि यह हमला सिर्फ सुरक्षा का उल्लंघन नहीं है, बल्कि मानवता पर गहरा हमला है। “धर्म, जाति और क्षेत्र के भेदभाव से ऊपर उठकरनिर्दोषों को निशाना बनाया गया। यह आतंकियों की कायरता का उदाहरण है।” उमर ने केंद्र सरकार और जम्मू-कश्मीर प्रशासन से अपील की किसुरक्षा प्रोटोकॉल की तुरंत समीक्षा की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। हमले के बाद घाटी में तनावपहलगाम हमले के बाद कश्मीर घाटी में सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षाबल तैनात किए गए हैंऔर सर्च ऑपरेशन तेज कर दिए गए हैं। स्थानीय प्रशासन ने भीड़भाड़ वाले इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है और यात्रियों तथा पर्यटकों को एहतियातबरतने की सलाह दी गई है। राजनीतिक गलियारों में भी इस घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। विपक्षी दलों ने सरकार से जवाब मांगा है कि आखिर चूक कहां हुई।कई नेताओं ने उमर अब्दुल्ला के बयान को “ईमानदार” और “जिम्मेदाराना” बताया है, जबकि कुछ ने कहा कि वर्तमान हालात में जिम्मेदारी तय करनेके बजाय सभी को एकजुट होकर आतंक के खिलाफ लड़ना चाहिए। परिजनों से मिलने का वादाउमर अब्दुल्ला ने यह भी कहा कि वह जल्द ही पहलगाम जाकर हमले में मारे गए लोगों के परिजनों से मिलेंगे। उन्होंने कहा, “मैं व्यक्तिगत रूप से हरउस परिवार से मिलना चाहता हूं जिसने अपने प्रियजनों को खोया है। मैं उनके दर्द को बांटना चाहता हूं। यह मेरा कर्तव्य है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि शोक व्यक्त करने के साथ-साथ हमें यह भी देखना होगा कि भविष्य में ऐसे दर्दनाक हादसों से कैसे बचा जा सकता है। “केवलबयानबाजी से कुछ नहीं होगा। ज़मीनी स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था में सुधार लाना होगा।” राजनीति से ऊपर उठने की अपीलअपने संबोधन में उमर अब्दुल्ला ने राजनीतिक दलों से अपील की कि वे इस हमले पर राजनीति न करें। “यह समय एक-दूसरे पर दोषारोपण करने कानहीं है। यह समय एकजुट होकर आतंकवाद को करारा जवाब देने का है। आतंकियों का मकसद ही हमें बांटना है। अगर हम एक-दूसरे से लड़ेंगे तो हमउनके मंसूबों को सफल करेंगे।” उन्होंने कहा कि कश्मीर को शांति और विकास की जरूरत है, न कि खूनखराबे और आतंक की। “हमारा भविष्य तभी सुरक्षित होगा जब हम नफरत कीराजनीति को छोड़कर इंसानियत के रास्ते पर चलेंगे।” समाप्ति में भावुक अपीलअंत में उमर अब्दुल्ला ने मीडिया से भावुक अपील करते हुए कहा, “कृपया इस दर्दनाक क्षण को सनसनी फैलाने के लिए इस्तेमाल न करें। शहीदों कासम्मान करें। पीड़ित परिवारों की निजता का सम्मान करें। हम सभी को मिलकर इस घड़ी में संयम और संवेदनशीलता दिखानी चाहिए।” उमर अब्दुल्ला के इस भावुक बयान ने कश्मीर और देशभर में कई लोगों का दिल छू लिया है। यह बयान उस पीड़ा को भी उजागर करता है जिसे एकजिम्मेदार नेता तब महसूस करता है जब निर्दोष नागरिक आतंक की आग में झुलसते हैं।
चीन बोला – पहलगाम हमले की निष्पक्ष जांच हो, भारत-पाकिस्तान बातचीत से सुलझाएं मतभेद, ओवैसी बोले – आतंकी हिन्दू-मुस्लिम झगड़ा चाहता है

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हाल ही में हुए आतंकी हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। इस हमले में कई निर्दोष श्रद्धालुओं की जानगई, जिसके बाद भारत में गहरा आक्रोश देखा जा रहा है। अब चीन ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि हमले की “निष्पक्ष और पारदर्शी” जांच होनी चाहिए। साथ ही, चीन ने भारत और पाकिस्तान दोनों से आग्रह किया है कि वे अपने आपसी मतभेदों को बातचीत और शांतिपूर्ण संवाद केमाध्यम से सुलझाएं। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बीजिंग में पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “चीन आतंकवाद के सभी रूपों का विरोध करता है। हम इस भीषणहमले की निंदा करते हैं और पीड़ितों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना प्रकट करते हैं। हम आशा करते हैं कि भारत इस घटना की निष्पक्ष और पेशेवरजांच करेगा और जल्द से जल्द सच्चाई सामने लाएगा।” उन्होंने आगे कहा कि भारत और पाकिस्तान, दोनों के बीच लंबे समय से विवाद हैं और इनमतभेदों को बातचीत और कूटनीति के जरिए ही सुलझाया जाना चाहिए ताकि दक्षिण एशिया में स्थिरता और शांति बनी रहे। चीन की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब भारत में आतंकी हमले को लेकर पाकिस्तान पर परोक्ष रूप से आरोप लगाए जा रहे हैं। भारतीय सुरक्षाएजेंसियों ने संकेत दिए हैं कि हमले में शामिल आतंकियों के तार सीमापार से जुड़े हो सकते हैं। हालांकि भारत सरकार ने अभी तक इस परआधिकारिक रूप से पाकिस्तान का नाम नहीं लिया है। इस बीच, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी इस हमले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा, “यह हमला न केवल निर्दोष लोगों की जान लेने का एक क्रूर प्रयास था, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य भारत में हिन्दू और मुस्लिम समुदायों के बीच दरारपैदा करना है। आतंकी चाहते हैं कि देश में सांप्रदायिक तनाव फैले और आपसी भाईचारा टूटे। हमें उनकी इस साजिश को नाकाम करना होगा।” हैदराबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने कहा, “इस्लाम कभी भी निर्दोषों की हत्या की इजाजत नहीं देता। आतंकवादियों का कोईधर्म नहीं होता। वे बस नफरत और हिंसा फैलाना चाहते हैं। हमें एकजुट रहकर इस चक्रव्यूह को तोड़ना होगा।” उन्होंने सरकार से मांग की कि दोषियोंके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए, लेकिन साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि किसी एक पूरे समुदाय को इस हमले के लिए दोषी न ठहरायाजाए। भारत में आतंकी हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने जम्मू-कश्मीर और देश के अन्य संवेदनशील इलाकों में अलर्ट जारी कर दिया है। खुफिया सूत्रों केअनुसार, आगामी धार्मिक यात्राओं और त्योहारों को देखते हुए आतंकवादी संगठन और हमले की योजना बना सकते हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भीराज्यों को सतर्कता बरतने और आवश्यक सुरक्षा इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस हमले की व्यापक निंदा हो रही है। अमेरिका, फ्रांस, जापान सहित कई देशों ने इस आतंकी हमले की भर्त्सना करते हुएभारत के साथ एकजुटता व्यक्त की है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने भी एक बयान जारी कर कहा कि आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक समुदाय को एकजुटहोकर कार्रवाई करनी चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन का हालिया बयान भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव को कम करने की एक कूटनीतिक कोशिश हो सकती है। चीनचाहता है कि दक्षिण एशिया में स्थिरता बनी रहे क्योंकि क्षेत्रीय अस्थिरता का प्रभाव चीन की महत्वाकांक्षी ‘बेल्ट एंड रोड’ परियोजनाओं पर भी पड़सकता है। हालांकि भारतीय रणनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भारत को अपनी सुरक्षा नीतियों में किसी भी प्रकार की ढील नहीं देनी चाहिए। इस बीच, राजनीतिक हलकों में भी तीखी बहस छिड़ गई है। विपक्षी दलों ने सरकार से पूछा है कि खुफिया तंत्र में चूक कैसे हुई और आम लोगों कीसुरक्षा को पुख्ता करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। वहीं, सत्तारूढ़ दल ने भरोसा दिलाया है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और देश कीएकता और अखंडता को किसी भी कीमत पर आंच नहीं आने दी जाएगी। इस पूरी घटना ने एक बार फिर आतंकवाद के खिलाफ व्यापक राष्ट्रीय एकता और सतर्कता की आवश्यकता को रेखांकित किया है।
पाकिस्तान के मंत्री का भड़काऊ बयान: “भारत 130 परमाणु मिसाइलों के निशाने पर, सिंधु का पानी रोका तो युद्ध के लिए तैयार रहे”

पाकिस्तान के एक वरिष्ठ मंत्री ने हाल ही में एक बेहद भड़काऊ बयान देकर क्षेत्र में तनाव को बढ़ाने की कोशिश की है। इस्लामाबाद में एकसार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान बोलते हुए उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के पास 130 से अधिक परमाणु मिसाइलें तैयार हैं, और भारत यदि सिंधु जलसंधि का उल्लंघन करता है या पाकिस्तान का पानी रोकने की कोशिश करता है, तो उसे इसके गंभीर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना चाहिए।मंत्री ने चेतावनी देते हुए कहा कि ये परमाणु हथियार “सजावट के लिए नहीं रखे गए” हैं।भड़काऊ बयान का संदर्भपाकिस्तानी मंत्री ने अपने भाषण में भारत पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भारतीय नेतृत्व ने अतीत में सिंधु जल संधि के उल्लंघन की धमकियाँ दीहैं। उनका दावा था कि यदि भारत ने पाकिस्तान का पानी रोकने की कोशिश की तो यह सीधे तौर पर युद्ध छेड़ने के बराबर होगा।“हमारे पास 130 से अधिक परमाणु हथियार हैं, और ये महज दिखावे के लिए नहीं रखे गए। अगर भारत ने हमारी जीवनरेखा — सिंधु नदी — कोरोकने की कोशिश की, तो हम बिना झिझक करारा जवाब देंगे,” उन्होंने चेतावनी दी। मंत्री ने यह भी कहा कि पाकिस्तान एक जिम्मेदार परमाणु शक्ति है, लेकिन यदि उसके अस्तित्व पर खतरा मंडराया, तो वह अपनी पूरी ताकत काइस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटेगा। उनके अनुसार, “हमें युद्ध नहीं चाहिए, लेकिन अगर कोई हमें युद्ध के लिए मजबूर करता है, तो हम पीछे नहीं हटेंगे।” सिंधु जल संधि का मुद्दासिंधु जल संधि 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई थी। इस संधि के तहत भारत को तीन पूर्वी नदियों (रवि, ब्यास, सतलुज) का जल उपयोग करने का अधिकार मिला, जबकि पाकिस्तान को तीन पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम, चिनाब) का अधिकार सौंपागया।हाल के वर्षों में, भारत में कई नेता और विश्लेषक यह मांग करते रहे हैं कि यदि पाकिस्तान आतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं करता तो भारत कोसिंधु जल संधि की समीक्षा करनी चाहिए। इस मुद्दे को लेकर पाकिस्तान हमेशा चिंतित रहा है और समय-समय पर ऐसे उग्र बयान सामने आते रहे हैं। भारत की प्रतिक्रियाभारत सरकार ने अभी तक इस बयान पर औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन रक्षा विश्लेषकों और कूटनीतिक विशेषज्ञों ने इसे “गंभीर गैर-जिम्मेदाराना बयान” बताया है। सूत्रों के मुताबिक, भारत इस तरह की धमकियों को उकसावे की कार्रवाई मानता है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तानकी इस तरह की बयानबाजी को उजागर करने की रणनीति पर काम कर रहा है।विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “भारत अंतरराष्ट्रीय कानूनों और संधियों का सम्मान करता है, लेकिन अपनी संप्रभुता और हितों कीरक्षा के लिए हर कदम उठाने को भी तैयार है।” क्षेत्रीय तनाव का बढ़नापाकिस्तान के इस बयान ने पहले से ही तनावग्रस्त दक्षिण एशिया क्षेत्र में और अधिक चिंता पैदा कर दी है। हाल के हफ्तों में नियंत्रण रेखा (LoC) केपास भी कुछ घटनाएं हुई हैं, जिनमें संघर्षविराम उल्लंघन की खबरें सामने आई हैं। दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव में ऐसे बयानआग में घी डालने का काम कर सकते हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की बयानबाजी से न केवल क्षेत्रीय शांति प्रभावित होती है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी चिंता बढ़ती है, क्योंकिभारत और पाकिस्तान दोनों परमाणु शक्ति संपन्न देश हैं। परमाणु हथियारों का उल्लेख क्यों?पाकिस्तानी मंत्री का परमाणु हथियारों का उल्लेख करना कोई नई बात नहीं है। अतीत में भी कई बार पाकिस्तानी राजनेता और सैन्य अधिकारी भारतके खिलाफ परमाणु हमले की धमकियां दे चुके हैं। हालांकि, इस तरह के बयान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की छवि को नुकसान पहुँचाते हैं।संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक संस्थाओं ने हमेशा परमाणु हथियारों को लेकर संयम बरतने और जिम्मेदार व्यवहार की अपील की है। ऐसे में पाकिस्तानके इस प्रकार के बयानों की निंदा होना स्वाभाविक है।