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पहलगाम हमले पर सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक जांच से किया इनकार, याचिकाकर्ताओं को लगाई फटकार

22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम क्षेत्र में हुए भीषण आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। हमले में 26 निर्दोष नागरिकों कीमौत हो गई, जिनमें एक नेपाली पर्यटक भी शामिल था। इस हमले के बाद देशभर में गुस्सा था और कई संगठनों व नागरिकों ने इसकी निष्पक्ष औरस्वतंत्र जांच की मांग की। इसी संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई थी। न्यायिक जांच की मांग लेकर पहुँचे याचिकाकर्ताकश्मीर निवासी मोहम्मद जुनैद और दो अन्य याचिकाकर्ता—फतेश कुमार साहू और विक्की कुमार—ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया था कि हमले कीजांच एक सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश की अध्यक्षता में विशेष न्यायिक आयोग द्वारा कराई जाए। उनका दावा था कि वर्तमान जांच एजेंसियोंकी निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल उठ सकते हैं, इसलिए स्वतंत्र जांच आवश्यक है। इसके साथ ही याचिका में एक और मुद्दा उठाया गया—कश्मीर के बाहर पढ़ने वाले कश्मीरी छात्रों की सुरक्षा। याचिकाकर्ताओं ने आग्रह किया कि इनछात्रों को धमकी और हिंसा से सुरक्षा प्रदान करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश दिए जाएं। सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी1 मई 2025 को, इस याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की दो-न्यायाधीशों की पीठ—जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह—नेयाचिकाकर्ताओं को फटकार लगाई और याचिका खारिज कर दी।कोर्ट ने कहा, “गैर-जिम्मेदाराना” बताते हुए यह भी कहा कि आतंकवाद के खिलाफ इस समय पूरे देश को एकजुट रहने की आवश्यकता है, न किसंस्थानों पर अविश्वास जताने की। “हम जांच एजेंसी नहीं हैं”: सुप्रीम कोर्टसुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायालय का कार्य न्याय करना है, न कि जांच करना। कोर्ट ने कहा कि सेवानिवृत्त न्यायाधीशों सेकिसी मामले की जांच कराने की परंपरा तर्कसंगत नहीं है, खासकर जब देश की जांच एजेंसियां पहले से ही कार्रवाई में जुटी हैं। छात्रों की सुरक्षा का मुद्दा उच्च न्यायालय के अधीनजब याचिकाकर्ताओं ने कश्मीरी छात्रों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया, तो अदालत ने उन्हें उचित न्यायिक मंच का सुझाव दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कियह मामला संबंधित राज्यों के उच्च न्यायालयों के अधिकार क्षेत्र में आता है और वहां इस पर प्रभावी कार्यवाही हो सकती है। अदालत ने दी चेतावनी और याचिका वापस लेने की अनुमतिसुनवाई के अंत में अदालत ने याचिकाकर्ताओं को यह भी चेतावनी दी कि आतंकवाद से जुड़ी घटनाओं पर “अविवेकपूर्ण” याचिकाएं दायर करना नकेवल सुरक्षा बलों के मनोबल को नुकसान पहुंचा सकता है, बल्कि देश की एकता और अखंडता पर भी असर डाल सकता है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से अनुमति लेकर याचिका वापस ले ली, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।

पहलगाम में आतंक का तांडव: 26 पर्यटकों की बेरहमी से हत्या, शाह बोले– बख्शा नहीं जाएगा

जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में स्थित पर्यटन स्थल पहलगाम एक बार फिर आतंकवाद की आग में झुलस गया। 22 अप्रैल 2025 को यहां केबैरसन इलाके में आतंकवादियों ने एक बर्बर हमला किया, जिसमें 26 बेगुनाह पर्यटकों की जान चली गई। हमले में एक नेपाली नागरिक भी मारागया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावरों ने पहले पर्यटकों की धार्मिक पहचान पूछी, फिर निर्दोषों को गोलियों से छलनी कर दिया। आतंकियों की हाईटेक साजिश का पर्दाफाशराष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की शुरुआती जांच से स्पष्ट हुआ कि यह हमला सामान्य नहीं था, बल्कि कई दिनों की तैयारी और आधुनिक तकनीक केसहारे अंजाम दिया गया। जानकारी के अनुसार, तीन पाकिस्तानी आतंकवादी 15 अप्रैल को कश्मीर पहुंचे थे। उन्होंने घाटी के प्रमुख पर्यटन स्थलों कीरेकी की और उसके बाद हमला किया। उन्होंने एक विशेष संचार प्रणाली ‘अल्ट्रा स्टेट कम्युनिकेशन’ का उपयोग किया जो कि लोकेशन छुपाने में सक्षम है और अत्याधुनिक एनक्रिप्शन केजरिए सुरक्षा एजेंसियों को गुमराह कर देती है। पहले भी थे निशाने पर गैर-कश्मीरीNIA को यह भी जानकारी मिली है कि इन आतंकियों का संबंध पिछले वर्ष गंदेरबल जिले में हुए हमले से भी है, जिसमें गैर-कश्मीरी मजदूरों और एकडॉक्टर की हत्या की गई थी। इससे यह जाहिर होता है कि इन हमलों के पीछे एक लंबे समय से चल रही रणनीति है, जिसका मकसद घाटी में डरफैलाना और बाहरी लोगों को निशाना बनाना है। गृह मंत्री का सख्त संदेशहमले के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, “यह मोदी सरकार है, हम एक-एक आतंकी को खोजकर खत्म करेंगे। किसीको बख्शा नहीं जाएगा।” उन्होंने यह भी दोहराया कि भारत की जमीन पर आतंक को किसी भी कीमत पर पनपने नहीं दिया जाएगा और सुरक्षाएजेंसियां पूरी मुस्तैदी से काम कर रही हैं। न्यायिक जांच की मांग खारिजहमले के बाद एक जनहित याचिका के जरिए सुप्रीम कोर्ट से न्यायिक जांच की मांग की गई, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने इसे सिरे से खारिज करदिया। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में सरकार और सुरक्षा एजेंसियों को अपना काम करने देना चाहिए और न्यायपालिका को अनावश्यक रूप सेहस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस तरह की याचिकाएं कभी-कभी सुरक्षा बलों का मनोबल गिराने वाली साबित होती हैं। INS सूरत की ताकत का प्रदर्शनइस हमले के कुछ दिनों बाद ही भारतीय नौसेना ने अरब सागर में एक बड़ा सैन्य अभ्यास किया। इस दौरान नौसेना के अत्याधुनिक विध्वंसक युद्धपोतINS सूरत ने मिसाइल परीक्षण किया। यह युद्धपोत न केवल सतह से सतह पर मार करने वाले ब्रह्मोस मिसाइल से लैस है, बल्कि इसमें एंटी-सबमरीनरॉकेट लॉन्चर और एयर डिफेंस सिस्टम भी हैं। नौसेना का यह अभ्यास पाकिस्तान और अन्य विरोधियों को स्पष्ट संकेत था कि भारत अपनी जलसीमा और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर किसी भी प्रकार कीढिलाई नहीं बरतेगा। संदेश स्पष्ट है: आतंक को नहीं मिलेगी पनाहयह हमला न सिर्फ एक अमानवीय कृत्य था, बल्कि यह भारत की सुरक्षा व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द पर भी एक सीधा हमला था। हालांकि, सरकार, सुरक्षा एजेंसियों और आम नागरिकों का रुख स्पष्ट है—आतंक के सामने झुकना नहीं है। देश एकजुट है और यह संदेश देना चाहता है कि चाहे दुश्मन कितना भी शातिर क्यों न हो, भारत उसकी हर कोशिश को नाकाम करेगा। ‎

राहुल गांधी का कानपुर दौरा, पहलगाम हमले में मारे गए शुभम द्विवेदी के परिजनों से की मुलाकात

कानपुर (उत्तर प्रदेश): कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी दो दिवसीय दौरे पर उत्तर प्रदेश पहुंचे हैं। इस दौरान उन्होंने बुधवार कोअचानक कानपुर का रुख किया और जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए शुभम द्विवेदी के घर पहुंचकर उनके परिजनों से मुलाकातकी। संसद में विशेष सत्र की उठाई मांगराहुल गांधी ने इस दर्दनाक घटना को गंभीर बताते हुए कहा कि संसद में इस हमले पर विशेष सत्र बुलाया जाना चाहिए, जिसमें शोक जताने के साथ-साथ आतंकवाद के खिलाफ ठोस रणनीति पर चर्चा हो। उन्होंने शुभम की शहादत को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान देने की बात भी कही। शुभम को मिले ‘शहीद’ का दर्जा – ऐशन्या की मांगशुभम द्विवेदी की पत्नी ऐशन्या ने राहुल गांधी के सामने मांग रखी कि उनके पति को शहीद का दर्जा दिया जाए। उन्होंने कहा कि इस दर्दनाक हमले मेंउनके पति ने अपनी जान गंवाई, और उन्हें वह सम्मान मिलना चाहिए जो एक वीर को दिया जाता है। राहुल गांधी ने इस पर भरोसा दिलाया कि वहयह मुद्दा संसद और प्रधानमंत्री के सामने रखेंगे। प्रियंका गांधी से भी कराई बातचीतराहुल गांधी ने परिवार की भावना को समझते हुए ऐशन्या और उनके परिजनों की प्रियंका गांधी से फोन पर बात कराई। यह कदम परिजनों के लिएभावनात्मक समर्थन का प्रतीक बनादुख से भर उठे शुभम के माता-पिता और पत्नीमुलाकात के दौरान भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा। कांग्रेस प्रवक्ता अंशू अवस्थी के अनुसार, जैसे ही राहुल गांधी पहुंचे, शुभम की पत्नी ऐशन्या फूट-फूट कर रोने लगीं। राहुल ने उन्हें गले लगाकर ढांढस बंधाया। शुभम के पिता की आंखें भी नम हो गईं। ऐशन्या ने राहुल गांधी को बताया कि जिसवक्त हमला हुआ, वहां कोई सुरक्षा बल मौजूद नहीं था। पहलगाम आतंकी हमला: एक दुखद घटना22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम इलाके में हुए आतंकी हमले में कानपुर निवासी शुभम द्विवेदी समेत 26 पर्यटकों की मौत हो गई थी। शुभमअपने परिवार के साथ छुट्टियां मनाने गए थे और पत्नी के सामने ही आतंकवादियों ने उन्हें गोली मार दी। यह यात्रा शुभम की शादी के महज दो महीनेबाद की थी – उनका विवाह 12 फरवरी को हुआ था। मुख्यमंत्री योगी और अन्य नेताओं ने भी जताया दुखइस हमले के बाद यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी 23 अप्रैल को शुभम के परिवार से मिलने पहुंचे थे। उन्होंने परिजनों को हरसंभव सहायतादेने का आश्वासन दिया और कहा कि दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। आप सांसद संजय सिंह भी शुभम के घर जाकर संवेदना व्यक्तकर चुके हैं।कांग्रेस नेताओं की उपस्थितिराहुल गांधी के साथ यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय भी मौजूद थे। अजय राय पहले भी शुभम के अंतिम संस्कार में शामिल होकर परिजनों का दुखबांट चुके हैं। कांग्रेस पार्टी ने इस पूरे मामले में सरकार से जवाबदेही की मांग की है।

गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में कपाट खुलते ही शुरू हुई चारधाम यात्रा 2025

उत्तरकाशी/उत्तराखंड – अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर बुधवार को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट वैदिक मंत्रोच्चारण व विधिवत पूजा-अर्चना केसाथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। इसके साथ ही उत्तराखंड की बहुप्रतीक्षित चारधाम यात्रा 2025 का भी औपचारिक शुभारंभ हो गया। मुख्यमंत्री धामी ने की प्रधानमंत्री के नाम से पहली पूजामुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गंगोत्री और यमुनोत्री दोनों धामों में कपाटोद्घाटन समारोह में भाग लिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से पहली पूजाका संकल्प लिया। सीएम धामी यमुनोत्री धाम के कपाटोद्घाटन में शरीक होने वाले पहले मुख्यमंत्री बन गए हैं। उन्होंने देश और प्रदेश की समृद्धि, शांति और सफल चारधाम यात्रा की कामना करते हुए विशेष प्रार्थना की। गंगोत्री में पूजा के बाद खुले कपाटगंगोत्री धाम में बुधवार प्रातः मां गंगा की उत्सव डोली भैरव घाटी से रवाना होकर मंदिर प्रांगण पहुंची। पूर्वाह्न 10:30 बजे विशेष पूजा और वैदिकमंत्रोच्चारण के बाद मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने मां गंगा की आराधना कर पुण्य प्राप्त किया। यमुनोत्री धाम में भी श्रद्धा का सैलाबमां यमुना की डोली शीतकालीन प्रवास स्थल खरसाली से शनिदेव महाराज की अगुवाई में यमुनोत्री धाम पहुंची। 11:55 बजे यमुनोत्री मंदिर के कपाटखोले गए। यहां भी देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु पहुंचे और अखंड ज्योति के दर्शन कर गंगा व यमुना में आस्था की डुबकी लगाई। हेलीकॉप्टर से हुई पुष्प वर्षागंगोत्री और यमुनोत्री धाम में कपाट खुलने के समारोह के दौरान दोनों मंदिरों पर हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा की गई, जिसने माहौल को भक्तिमय औरदिव्य बना दिया। सीएम ने लोक देवताओं की डोलियों से लिया आशीर्वादमुख्यमंत्री ने दोनों धामों में पहुंचे लोक देवताओं की डोलियों से भी आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने मंदिर में शीश नवाते हुए विशेष पूजा-अर्चना की औरसभी श्रद्धालुओं को चारधाम यात्रा की शुभकामनाएं दीं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए किए गए व्यापक इंतजाममुख्यमंत्री धामी ने कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए यात्रा मार्गों पर सभी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं।स्वास्थ्य, परिवहन, आवास और आपातकालीन सेवाओं की व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई है। ‘ग्रीन एंड क्लीन यात्रा’ के लिए की गई अपीलमुख्यमंत्री ने सभी श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों से ग्रीन और क्लीन चारधाम यात्रा के लिए सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि देवभूमिउत्तराखंड की पवित्रता बनाए रखने की जिम्मेदारी हम सभी की है, और अतिथि देवो भवः की परंपरा के अनुरूप सभी यात्रियों को सुखद अनुभव दिलानाहमारा उद्देश्य है। उपस्थित रहे कई वरिष्ठ अधिकारी और जनप्रतिनिधिगंगोत्री धाम के कार्यक्रम में विधायक सुरेश चौहान, गंगोत्री मंदिर समिति के अध्यक्ष धर्मानंद सेमवाल, पूर्व विधायक विजय पाल सजवाण, जिलाधिकारी डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट, और एसपी सरिता डोबाल मौजूद रहे। वहीं यमुनोत्री धाम में मुख्य विकास अधिकारी एसएल सेमवाल, एसडीएम बृजेश तिवारी, मंदिर समिति उपाध्यक्ष संजीव उनियाल और सचिव सुनील उनियाल भी उपस्थित थे।

राष्ट्रीय सुरक्षा में बड़ा बदलाव: पूर्व RAW प्रमुख आलोक जोशी बने NSAB के नए अध्यक्ष

नई दिल्ली – भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति में बड़ा और अहम बदलाव करते हुए मोदी सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड (NSAB) के नएअध्यक्ष के रूप में रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) के पूर्व प्रमुख आलोक जोशी की नियुक्ति की है। यह कदम भारत की सुरक्षा व्यवस्था को औरअधिक सुदृढ़ एवं दूरदर्शी बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने इस नियुक्ति के साथ यह संकेत दिया हैकि देश की सुरक्षा नीति अब और अधिक रणनीतिक, व्यावहारिक और अनुभवी नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ रही है। कौन हैं आलोक जोशी?आलोक जोशी 1978 बैच के हरियाणा कैडर के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी हैं। उन्होंने देश की बाहरी खुफिया एजेंसी RAW के प्रमुख केरूप में 2012 से 2014 तक कार्यभार संभाला था। अपने कार्यकाल में उन्होंने आतंकवाद रोधी नीति, सीमा पार निगरानी, और अंतरराष्ट्रीय खुफियासहयोग जैसे जटिल मसलों पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। जोशी को खुफिया तंत्र में उनकी गहरी समझ, शांत नेतृत्व शैली और राष्ट्रीय हितों के प्रति प्रतिबद्धता के लिए जाना जाता है। RAW प्रमुख के रूप मेंकार्यकाल के बाद से वे रणनीतिक विषयों पर केंद्र और थिंक टैंक के साथ जुड़कर सलाहकार की भूमिका निभा रहे थे। NSAB क्या है और इसका महत्व क्यों है?राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड (NSAB), भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (NSC) के तहत कार्य करने वाली एक सलाहकार संस्था है। इसका मुख्यकार्य देश की दीर्घकालिक रणनीतिक योजनाओं पर विचार करना, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विषयों पर विश्लेषण देना और प्रधानमंत्री को सुझाव देनाहोता है। यह बोर्ड रणनीतिक थिंक टैंक, पूर्व सैन्य अधिकारियों, वैज्ञानिकों, राजनयिकों और खुफिया विशेषज्ञों से मिलकर बनता है। इसका अध्यक्ष अक्सर ऐसाव्यक्ति होता है, जिसे व्यापक सुरक्षा अनुभव और दीर्घकालिक दृष्टिकोण हो। सरकार का उद्देश्य: रणनीतिक दृष्टिकोण को मजबूत करनामोदी सरकार ने बीते कुछ वर्षों में भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति को आक्रामक और सक्रिय रूप देने की दिशा में कई अहम बदलाव किए हैं – फिर चाहेवह सीमापार सर्जिकल स्ट्राइक हो, साइबर सुरक्षा को लेकर नीति हो, या फिर समुद्री सुरक्षा को लेकर बढ़ती चौकसी। आलोक जोशी की नियुक्ति इसी क्रम में एक तार्किक अगला कदम मानी जा रही है। वे खुफिया संचालन और रणनीतिक विश्लेषण दोनों के माहिरमाने जाते हैं। सरकार को विश्वास है कि उनके नेतृत्व में NSAB देश की सुरक्षा को लेकर ज्यादा व्यावहारिक, समन्वित और दूरदर्शी दृष्टिकोणविकसित कर सकेगा। भविष्य की चुनौतियाँ और NSAB की भूमिकाभारत को वर्तमान समय में कई जटिल सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है — चीन के साथ सीमा विवाद, पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद, साइबर हमलों का खतरा, समुद्री सुरक्षा, आंतरिक कट्टरपंथ, और तकनीकी जासूसी जैसे मुद्दे। ऐसे में NSAB की भूमिका अब केवल सुझाव देने तकसीमित नहीं रह सकती। उसे नीतिगत प्रक्रिया में प्रत्यक्ष भागीदारी निभानी होगी। आलोक जोशी के नेतृत्व में बोर्ड से यह अपेक्षा की जा रही है कि वह नई पीढ़ी की तकनीकों, जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बिग डेटा, क्वांटमसाइबर सुरक्षा आदि के संदर्भ में भारत की सुरक्षा नीति को आधुनिक बनाए। पूर्व अध्यक्षों की भूमिका और तुलनाNSAB के पहले भी कई प्रतिष्ठित लोग अध्यक्ष पद पर रहे हैं, जिनमें के. सुब्रमण्यम जैसे रणनीतिक विशेषज्ञ शामिल हैं। हाल के वर्षों में यह बोर्डअपेक्षाकृत शांत पड़ा था, लेकिन अब सरकार इसे फिर से सक्रिय करना चाहती है। आलोक जोशी की नियुक्ति यह संकेत देती है कि सरकार NSAB को फिर से नीतिगत रूप से केंद्रीय भूमिका में लाने की तैयारी में है, विशेषकर तबजब भारत एक उभरती वैश्विक शक्ति के रूप में अपने सामरिक हितों का विस्तार कर रहा है। राजनीतिक और रणनीतिक संदेशयह नियुक्ति सिर्फ प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि एक बड़ा रणनीतिक संदेश भी है। इससे यह संकेत गया है कि सरकार अब “रिएक्टिव” नहीं, बल्कि”प्रोएक्टिव” सुरक्षा नीति पर ध्यान केंद्रित कर रही है। आलोक जोशी जैसे अनुभवी अधिकारी को इस पद पर नियुक्त करना बताता है कि भारत अबखुफिया और रणनीतिक नीतियों में स्थायित्व और अनुभव को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है।

सीमा पर बढ़ी हलचल: पाकिस्तान ने खाली की चौकियां, हटाए झंडे – भारत ने दी सख्त चेतावनी

नई दिल्ली/जम्मू – भारत और पाकिस्तान के बीच अंतरराष्ट्रीय सीमा पर एक बार फिर तनाव की आहट सुनाई दी है। बीते कुछ दिनों में पाकिस्तान कीओर से अचानक कई चौकियां खाली कर दी गई हैं और उन पर लगे राष्ट्रीय झंडे भी हटा लिए गए हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय पर हुआ है जबसीमावर्ती इलाकों में पहले से ही भारी सतर्कता बरती जा रही है। इसके साथ ही पाकिस्तान द्वारा सीजफायर उल्लंघन की घटनाओं में वृद्धि देखी गईहै, जिस पर भारत ने सख्त आपत्ति जताते हुए इस्लामाबाद को स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है। सीमा पर अजीब गतिविधि: क्या संकेत दे रहा है पाकिस्तान?जम्मू और पंजाब की सीमाओं से लगते पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्रों में बीएसएफ (सीमा सुरक्षा बल) के जवानों ने यह देखा कि पाकिस्तानी रेंजर्स ने कईअग्रिम चौकियों को अचानक खाली कर दिया है। पहले जहां उनके सैनिकों की आवाजाही और गश्त दिखती थी, अब वहां सन्नाटा पसरा हुआ है।इसके अलावा, उन चौकियों पर लहराते पाकिस्तानी झंडे भी हटा दिए गए हैं। सूत्रों के अनुसार, इन गतिविधियों को हल्के में नहीं लिया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह किसी बड़े मंसूबे का हिस्सा हो सकता है — या तो यह पाकिस्तान की तरफ से रणनीतिक बदलाव की तैयारी है या फिर सीमावर्ती क्षेत्रों में घुसपैठ या आतंकी साजिश की कोई पूर्व भूमिका तैयारकी जा रही है। सीजफायर उल्लंघन से बिगड़ा माहौलइसी के साथ, जम्मू-कश्मीर के आरएस पुरा, कठुआ और अरनिया सेक्टर में हाल के दिनों में पाकिस्तान द्वारा कई बार संघर्षविराम का उल्लंघन कियागया है। रात के अंधेरे में की गई फायरिंग से गांवों में दहशत का माहौल है। स्थानीय लोगों ने बताया कि गोलियों की आवाजें रातभर गूंजती रहीं, जिससे परिवारों को बंकरों में शरण लेनी पड़ी। भारत और पाकिस्तान के बीच फरवरी 2021 में हुए सीजफायर समझौते के बाद से सीमा पर अपेक्षाकृत शांति बनी हुई थी। लेकिन अब अचानक इसप्रकार की घटनाएं एक बार फिर दोनों देशों के बीच रिश्तों में तनाव पैदा कर सकती हैं। भारत की सख्त चेतावनीभारत सरकार और सेना ने पाकिस्तान की इन गतिविधियों को गंभीरता से लिया है। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान के उच्चायुक्त कोविदेश मंत्रालय ने तलब किया और स्पष्ट शब्दों में कहा गया कि अगर सीमा पर उकसावे की कार्रवाई बंद नहीं हुई, तो भारत इसका करारा जवाब देगा। सेना प्रमुख ने भी सीमावर्ती पोस्ट्स का दौरा किया और जवानों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए। BSF और सेना दोनों ही अपने निगरानी तंत्र कोमजबूत कर रही हैं, ड्रोन और सैटेलाइट इमेजरी के जरिए हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखी जा रही है। गांवों में डर और सतर्कता दोनोंसीमा से सटे गांवों के लोग एक बार फिर डर के साए में जीने को मजबूर हो गए हैं। हाल ही में कठुआ जिले के एक किसान ने कहा, “दो साल से शांतिथी, अब अचानक रात को फायरिंग होती है, बच्चे डर जाते हैं, स्कूल बंद हो जाते हैं। हम फिर से वही दौर नहीं देखना चाहते।” प्रशासन ने सीमावर्ती इलाकों में आपातकालीन बंकरों की व्यवस्था दुरुस्त करने के आदेश दिए हैं और पुलिस बल को अतिरिक्त रूप से तैनात कियागया है। क्या है इसके पीछे की मंशा?सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान इस समय आंतरिक रूप से अस्थिर है — राजनीतिक उठा-पटक, आर्थिक संकट और बलूचिस्तान वपीओके में असंतोष अपने चरम पर है। ऐसे में सीमा पर तनाव बढ़ाकर वह आंतरिक समस्याओं से ध्यान भटकाने की कोशिश कर सकता है। दूसरा पहलू यह भी है कि आने वाले महीनों में जम्मू-कश्मीर में चुनाव और अमरनाथ यात्रा जैसे संवेदनशील आयोजन प्रस्तावित हैं। पाकिस्तान समर्थितआतंकी संगठनों की कोशिश हो सकती है कि सीमा पर अशांति फैलाई जाए, ताकि भारत को अंदरूनी सुरक्षा मोर्चे पर चुनौती दी जा सके। भारत की रणनीति स्पष्ट: जवाब में चूक नहीं होगीसरकारी सूत्रों की मानें तो भारत इस बार रक्षात्मक नहीं, बल्कि आक्रामक नीति अपना सकता है। सीजफायर उल्लंघन के हर प्रयास का मुँहतोड़ जवाबदिया जाएगा। हाल ही में रक्षा मंत्री और गृहमंत्री ने भी संकेत दिए हैं कि “भारत की सेना अब आदेश का इंतजार नहीं करती, कार्रवाई करती है।”

मोदी सरकार का बड़ा कदम: देशभर में होगी जाति जनगणना

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि केंद्र सरकार ने देशव्यापी जाति जनगणना कराने का फैसला किया है। उन्होंने कहाकि आगामी जनगणना के साथ-साथ सभी जातियों की गणना की जाएगी। यह कदम स्वतंत्र भारत में पहली बार उठाया जा रहा है। पिछली बार जातिआधारित जनगणना 1931 में हुई थी, यानी लगभग 94 साल पहले। कांग्रेस पर हमलाअश्विनी वैष्णव ने कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने जाति जनगणना को अपने राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया। जबकिमोदी सरकार इसे पारदर्शिता और समावेशन की दिशा में एक आवश्यक कदम मानती है। गन्ना किसानों को राहत: FRP में बढ़ोतरीगन्ना किसानों के लिए केंद्र सरकार ने एक और महत्वपूर्ण फैसला लिया है। अब 2025-26 सत्र के लिए गन्ने का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) यानीउचित और लाभकारी मूल्य (FRP) बढ़ाकर 355 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है। इससे किसानों की आय में सुधार की उम्मीद है। FRP वह मूल्य है जिस पर चीनी मिलों को किसानों से गन्ना खरीदना अनिवार्य होता है, जिससे किसानों को उनकी लागत का उचित मुआवजा मिले। मेघालय-असम हाईवे को मिली मंजूरीकैबिनेट मीटिंग में एक और बड़ा फैसला मेघालय और असम के बीच कनेक्टिविटी को लेकर लिया गया। 166.8 किलोमीटर लंबे और चार लेन वालेहाईवे निर्माण को हरी झंडी दे दी गई है। यह प्रोजेक्ट शिलॉन्ग से सिल्वर कॉरिडोर तक फैला होगा और इसकी कुल लागत 22,864 करोड़ रुपयेआंकी गई है। पीएम मोदी की अध्यक्षता में हुई सुपर कैबिनेट बैठकयह सारे निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई ‘सुपर कैबिनेट’ बैठक में लिए गए। इस बैठक में देश के प्रमुख केंद्रीय मंत्री मौजूद थे, जिनमेंगृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयलशामिल रहे। यह समिति सरकार के सबसे अहम और रणनीतिक निर्णयों के लिए जानी जाती है।

दिल्ली आम आदमी पार्टी की नेता प्रियंका कक्कड़ ने बीजेपी व आम आदमी पार्टी पर साधा निशाना, कहा कांग्रेस को मिल रहा बीजेपी कीतरफ से इनाम “जानें क्या है पूरा मामला”

कॉमनबेल्थ मामले में कांग्रेस को क्लीन चिट मिलने पर आम आदमी पार्टी ने भाजपा और कांग्रेस दोनों पर तीखा हमला बोला है. पार्टी का कहना हैकि कांग्रेस को यह क्लीन चिट दिल्ली में भाजपा का साथ देने का इनाम मिला है. नेशनल हेराल्ड जैसे केस में गांधी परिवार के किसी भी सदस्य कीअभी तक गिरफ्तारी न होना और जमीन घोटालों में कांग्रेस के दामाद का जेल न जाना जैसे मामले बताते हैं कि भाजपा और कांग्रेस बीच आखिरकार मेंक्या जुगलबंदी है. अब कॉमनवेल्थ मामले में ‘मोदी सरकार के तोता’ ईडी द्वारा क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करना इस नूराकुश्ती को सच साबित कर रही है. असल में भाजपा और कांग्रेस चोर-चोर मौसेरे भाई है. इसको लेकर आम आदमी पार्टी की मुख्य प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने कहा कि हाल ही में दिल्लीमें चुनाव हुए थे. जिसमें कांग्रेस ने भाजपा की भरपूर मदद की थी उसको अब कांग्रेस पार्टी को इसका इनाम मिला है. कांग्रेस के शासनकाल में लगाए गए थे भ्रष्टाचार के आरोपदरअसल इसको लेकर उन्होंने सवाल उठाया कि आज भाजपा में 90 फीसदी वही लोग हैं जिन पर कांग्रेस के शासनकाल में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपलगे थे. अमित शाह ने हिमंता बिस्वा शर्मा के ऊपर तो पूरी बुकलेट छपवाकर घर-घर बांटी थी. लेकिन भाजपा में शामिल होने के बाद वह साफ होगए और असम के मुख्यमंत्री बन गए. इसी तरह दिल्ली में भी जिस कांग्रेस ने भाजपा की मदद की उसे यह इनाम दिया गया है. इसके बाद प्रियंकाकक्कड़ ने कहा कि अरविंद केजरीवाल कांग्रेस के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराना चाह रहे थे, तब इसको लेकर कांग्रेस के खिलाफ एफआईआरकी बात उठी थी लेकिन उस समय भाजपा की केंद्र सरकार ने दिल्ली सरकार से एसीबी छीन ली थी. दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने केतीन महीने के अंदर दिल्ली सरकार से केंद्र ने एसीबी छीन ली थी. भाजपा और कांग्रेस दोनों एक ही हैं. आज भाजपा में 90 प्रतिशत वही कांग्रेसीमिलेंगे जिन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं. लेकिन अब उन पर लगे सारे भ्रष्टाचार के आरोप धुल गए हैं और आज वही कांग्रेस के साथ जा रहे हैं.

डुप्लिकेट नाम हटाने को लेकर जुटा चुनाव आयोग, आधार देना पूरी तरह है स्वैच्छिक “जानें क्या है पूरी प्रक्रिया”

चुनाव आयोग देशभर में मतदाता सूची से डुप्लिकेट नाम हटाने के अभियान में जुटा है इस बीच मंगलवार को सरकारी सूत्रों ने साफ किया किमतदाताओं के लिए आधार नंबर देना पूरी तरह स्वैच्छिक रहेगा. और इसमें कानून के तहत कोई बदलाव नहीं किया जाएगा साथ ही ये भी बताया गयाकि चुनाव कानून (संशोधन) अधिनियम, 2021 के तहत मतदाताओं द्वारा चुनाव अधिकारियों को आधार जानकारी देना जरूरी नहीं है बल्कि यहउनकी मर्जी पर निर्भर करता है.यह बयान तब आया जब कुछ लोगों ने पूछा कि क्या आधार साझा करना अनिवार्य किया जा सकता है और अगर कोईमतदाता जानकारी नहीं देता तो क्या उसे कारण बताना होगा. इस सवाल के जवाब में सूत्रों का कहना है कि अभी तक ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है और नही किसी नए नियम को जोड़ने की योजना है बता दें कि इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच चुनाव आयोग पहले ही कह चुका है कि वह जन्म और मृत्युपंजीकरण अधिकारियों के साथ समन्वय कर मतदाता सूची को नियमित रूप से अपडेट करेगा.इसके अलावा UIDAI (भारतीय विशिष्ट पहचानप्राधिकरण) और चुनाव आयोग के तकनीकी विशेषज्ञों के बीच मतदाता सूची और आधार लिंक करने को लेकर विचार-विमर्श जल्द शुरू होगा. हालांकि आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि एक मतदाता केवल उसी मतदान केंद्र में वोट डाल सकता है. जहां उसका नाम दर्ज है. चुनाव आयोग का है लक्ष्यमतदाता सूची से डुप्लिकेट नाम हटाने को लेकर चुनाव आयोग का लक्ष्य है कि देशभर में डुप्लिकेट वोटर लिस्ट की समस्या को तीन महीने में खत्मकिया जाए.मौजूदा कानून के अनुसार अगर कोई मतदाता किसी उचित कारण से आधार नंबर नहीं दे पाता. तो उसकी मतदाता सूची से प्रविष्टि नहींहटाई जा सकती इस तरह मतदाता सूची को साफ-सुथरा और सही बनाने की प्रक्रिया तेज की जा रही है लेकिन आधार साझा करना पूरी तरह स्वैच्छिकबना रहेगा.अभी आधार नंबर इकट्ठा करने के लिए फॉर्म 6B है. इसमें मतदाताओं के पास आधार न देने का कोई विकल्प नहीं है. इसमें सिर्फ दो हीविकल्प हैं पहला तो आधार दें या यह घोषणा करें कि मेरे पास आधार नंबर नहीं है इसलिए मैं इसे नहीं दे सकता.इसको लेकर 18 मार्च को अहमबैठक हुई थी. अब फॉर्म 6B में बदलाव होगा. अब इसमें ‘मेरे पास आधार नहीं है वाला बयान हटाया जाएगा. इसके बजाय एक नया बयान होगाजिसमें मतदाता कहेगा कि वह दूसरा दस्तावेज दे रहा है और एक तय तारीख को ईआरओ के सामने जाकर यह बताएगा कि उसने आधार क्यों नहींदिया.

सचिन- युवराज जैसे दिग्गज हुए 14 वर्षीय वैभव के मुरीद, जमकर की तारीफ “जानें क्या कुछ कहा”

IPL 2025: राजस्थान रॉयल्स के 14 वर्षीय बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने सोमवार को अपनी उम्र से ज्यादा बड़ा कारनामा कर रिकॉर्ड्स की झड़ी लगादी. उन्होंने गुजरात टाइटंस के खिलाफ खेले गए मुकाबले में महज 35 गेंदों में शतक जड़कर पूर्व भारतीय बल्लेबाज यूसुफ पठान का 15 साल पुरानारिकॉर्ड तोड़ दिया. उनकी इस पारी ने सचिन तेंदुलकर से लेकर युवराज सिंह तक सभी क्रिकेटर्स को अपना मुरीद बना लिया.वैभव की उम्र 14 साल 32 दिन है. लेकिन उन्होंने यूसुफ पठान का 15 वर्ष पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया है. वैभव आईपीएल में सबसे तेज शतक लगाने वाले भारतीय बन गए हैं. 2010 में यूसुफ पठान ने मुंबई इंडियंस के खिलाफ 35 गेंदों पर शतक लगाया था और वह इस टूर्नामेंट में सबसे तेज शतक लगाने वाले भारतीय थे. उनका यह रिकॉर्ड अब 2025 में टूटा है। यानी वैभव का जब जन्म भी नहीं हुआ था उस वक्त यूसुफ ने यह कारनामा किया था और अब बिहार के इसयुवा बल्लेबाज ने अपनी उम्र से भी ज्यादा का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. ओवरऑल आईपीएल में सबसे तेज शतक लगाने का रिकॉर्ड क्रिस गेल के नाम हैजिन्होंने 2013 में पुणे वॉरियर्स के खिलाफ 30 गेंदों पर शतक लगाया था.अपना 15 वर्ष पुराना रिकॉर्ड टूटने पर यूसुफ पठान ने प्रतिक्रिया दी पूर्वखिलाड़ी ने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर वैभव की तारीफ करते हुए लिखा वैभव सूर्यवंशी को भारतीय द्वारा सबसे तेज आईपीएल शतक का मेरा रिकॉर्डतोड़ने के लिए बहुत-बहुत बधाई. राजस्थान रॉयल्स के लिए ऐसा देखना है बेहद खासराजस्थान रॉयल्स के लिए खेलते हुए ऐसा होते देखना और भी खास है. युवाओं के लिए इस फेंचाइजी में वाकई कुछ जादुई है अभी बहुत आगे जानाहै.महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर भी खुद को वैभव की तारीफ करने से नहीं रोक पाए उन्होंने युवा बल्लेबाज के निडर दृष्टिकोण की तारीफ की सचिनने कहा- वैभव का निडर दृष्टिकोण, बल्ले की गति शुरुआत में ही लेंथ को पहचानना और गेंद के पीछे ऊर्जा का हस्तांतरण करना एक शानदार पारी कानुस्खा था. पूर्व भारतीय क्रिकेटर युवराज सिंह भी वैभव की शानदार पारी से प्रभावित होकर खुद को उनकी तारीफ करने से रोक नहीं पाए. उन्होंने कहा14 साल की उम्र में आप क्या कर रहे थे.वैभव टी20 क्रिकेट में शतक लगाने वाले सबसे युवा बल्लेबाज हैं. उन्होंने 14 साल 32 दिन की उम्र में यहकारनामा किया वैभव ने महाराष्ट्र के विजय जोल का रिकॉर्ड तोड़ा जिन्होंने 18 साल 118 दिन की उम्र में टी20 में शतक लगाया था. विजय ने 2013 में टी20 में शतक लगाया था वैभव ने गुजरात के खिलाफ 17 गेंदों पर अर्धशतक पूरा किया और फिर शतक पूरा करने के लिए अगले 18 गेंद लिए. वैभव शतकीय पारी खेलकर आउट हुए उन्होंने महज 38 गेंदों में 265.78 के स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी करते हुए 101 रनों की पारी खेली. इस दौरानउनके बल्ले से सात चौके और 11 छक्के निकले.