कांग्रेस का हमला: मणिपुर हिंसा के दो साल पूरे होने पर मोदी और शाह को घेरा

नई दिल्ली: कांग्रेस ने मणिपुर में जारी हिंसा के दो साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा। पार्टी ने आरोपलगाया कि मणिपुर आज भी संकट में है, लेकिन इसके समाधान की बजाय राजनीतिक खेल खेले जा रहे हैं।मणिपुर के लोग प्रधानमंत्री का इंतजार कर रहे हैंकांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि मणिपुर के लोग आज भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राज्य में आने का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने सोशलमीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा कि आज से ठीक दो साल पहले मणिपुर में हिंसा की शुरुआत हुई थी, जो फरवरी 2022 के विधानसभा चुनावों के बादभाजपा के शासन में बढ़ी। रमेश ने आरोप लगाया कि चुनाव में भाजपा को निर्णायक जनादेश मिलने के बाद भी राज्य में स्थिति बिगड़ती चली गई। हिंसा के बाद के हालात: ‘डबल इंजन’ सरकार की विफलतारमेश ने दावा किया कि 3 मई 2023 को मणिपुर में जो हुआ, वह भाजपा के ‘डबल इंजन’ सरकार के विफल होने का परिणाम था। उन्होंने कहा कितीन महीने बाद उच्चतम न्यायालय को यह कहना पड़ा कि मणिपुर में संवैधानिक तंत्र पूरी तरह से नष्ट हो गया है।कांग्रेस के अविश्वास प्रस्ताव और मुख्यमंत्री का इस्तीफाकांग्रेस ने मणिपुर में सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी की थी, जिसके बाद मोदी सरकार ने मुख्यमंत्री बीरेन सिंह को इस्तीफा देनेके लिए मजबूर किया। अंततः 13 फरवरी 2025 को राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया। मणिपुर में राहत शिविरों में रह रहे 60,000 विस्थापित लोगरमेश ने कहा कि मणिपुर आज भी पीड़ा में है और राजनीतिक खेल खेला जा रहा है। राज्य में 60,000 से अधिक आंतरिक रूप से विस्थापित लोगराहत शिविरों में भारी तनाव में रह रहे हैं, लेकिन कोई सार्थक समाधान प्रक्रिया नहीं दिखाई दे रही।प्रधानमंत्री ने मणिपुर का दौरा क्यों नहीं किया?रमेश ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी मणिपुर के संकट से लगातार बचते रहे हैं। उन्होंने न तो राज्य का दौरा किया और न ही वहां के लोगों सेमुलाकात की। रमेश ने कहा, “प्रधानमंत्री ने दुनिया भर का दौरा किया, लेकिन मणिपुर के संकटग्रस्त राज्य का दौरा करने के लिए न तो समय निकालाऔर न ही संवेदनशीलता दिखाई।” गृह मंत्री अमित शाह की नाकामीकांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने मणिपुर का प्रबंधन गृह मंत्री अमित शाह को सौंप दिया, लेकिन वे इस संकट को हल करने मेंपूरी तरह असफल साबित हुए हैं। रमेश ने कहा, “मणिपुर के लोग अब भी इंतजार कर रहे हैं कि प्रधानमंत्री इंफाल पहुंचें और राज्य की स्थिति कोसुधारने के लिए कुछ कदम उठाएं।”
फारूक अब्दुल्ला का बड़ा दावा,“बिना लोकल मदद के हमला मुमकिन नहीं”

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने पहलगाम आतंकी हमले पर एक बार फिर बड़ा बयान दिया है।उन्होंने कहा कि इतना बड़ा हमला स्थानीय सहयोग के बिना संभव ही नहीं है। फारूक का मानना है कि अंदरूनी लोगों की मिलीभगत के बिनाआतंकियों का इतने अंदर तक पहुंचना मुश्किल है।“मैंने पहले ही चेतावनी दी थी मौलाना अजहर को न छोड़ें”एक इंटरव्यू में फारूक अब्दुल्ला ने कहा, “मैंने पहले ही कहा था कि मसूद अजहर को रिहा न किया जाए, क्योंकि वह बहुत चालाक और नेटवर्किंग मेंमाहिर है। उसे जम्मू-कश्मीर की भौगोलिक स्थिति की पूरी जानकारी थी। दुर्भाग्यवश, मेरी बात पर तब ध्यान नहीं दिया गया।” अब्दुल्ला ने इशाराकिया कि इस हमले में मसूद अजहर की भूमिका से इंकार नहीं किया जा सकता। LoC से 150 किमी दूर कैसे पहुंचे आतंकी?बैस रन घाटी, जहां हाल ही में आतंकी हमला हुआ, वह लाइन ऑफ कंट्रोल से करीब 150 किलोमीटर की दूरी पर है। सुरक्षा एजेंसियों और विशेषज्ञोंका मानना है कि इतनी दूरी तय करना बिना स्थानीय सहायता के असंभव है। एनआईए की शुरुआती जांच में भी ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGWs) केशामिल होने की आशंका जताई गई है। लॉजिस्टिक और ठिकाने की व्यवस्था में मिली मददरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आतंकियों को इस क्षेत्र में न तो ठिकानों की जानकारी थी और न ही संसाधनों की व्यवस्था की क्षमता। इसलिए बिनाकिसी स्थानीय सहयोग के उनका यहां टिक पाना और हमला कर पाना बेहद मुश्किल है। ऐसे में स्थानीय नेटवर्क की भूमिका को नज़रअंदाज़ नहीं कियाजा सकता।लश्कर कमांडर फारूक अहमद पर शक की सुईइस हमले में लश्कर-ए-तैयबा के वरिष्ठ कमांडर फारूक अहमद के शामिल होने की बात सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि फारूक ने एक मजबूतओवरग्राउंड नेटवर्क तैयार किया है, जो आतंकियों को सीमा पार से भारत में दाखिल होने में मदद करता है।कंधार हाईजैक और मसूद अजहर की रिहाई: एक ऐतिहासिक भूल?1999 के कंधार विमान अपहरण कांड में आतंकियों ने भारत सरकार के सामने मौलाना मसूद अजहर की रिहाई की शर्त रखी थी। फारूक अब्दुल्ला, जो उस समय जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री थे, इस फैसले के सख्त खिलाफ थे। उन्होंने तब केंद्र सरकार को चेतावनी दी थी कि अजहर की रिहाई देश केलिए बड़ा खतरा साबित हो सकती है। मसूद अजहर: बाद में बना जैश-ए-मोहम्मद का सरगनामसूद अजहर, जिसे भारत ने बंधकों की जान बचाने के लिए छोड़ा था, बाद में कुख्यात आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का संस्थापक बना। इससंगठन ने कई आतंकी हमलों की जिम्मेदारी ली, जिनमें 2019 का पुलवामा हमला भी शामिल है। फारूक अब्दुल्ला का दावा है कि उनकी उस समयकी चेतावनी को अगर गंभीरता से लिया गया होता, तो हालात कुछ और होते।
कर्नाटक के मंत्री का विवादित बयान,मैं आत्मघाती बम लेकर पाकिस्तान जाने को तैयार हूं

कर्नाटक सरकार में अल्पसंख्यक कल्याण और आवास मंत्री बी. ज़ेड. जमीर अहमद खान एक भावनात्मक बयान देकर चर्चा में आ गए हैं। उन्होंने कहाकि अगर केंद्र सरकार अनुमति दे, तो वे अपने कंधे पर बम बांधकर पाकिस्तान में हमला करने को तैयार हैं। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजीसे वायरल हो रहा है।पहलगाम आतंकी हमले के बाद दिया गया बयानखान का यह बयान उस समय आया है जब जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने देशभर में आक्रोश फैलाया हुआ है। इस हमले में कईनिर्दोष नागरिकों की जान गई, जिससे भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव और गहरा गया है। “मैं कोई मज़ाक नहीं कर रहा हूं”पत्रकारों से बात करते हुए खान ने कहा, “पाकिस्तान भारत का हमेशा से दुश्मन रहा है। अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह मुझेइजाजत दें, तो मैं अपने कंधे पर आत्मघाती बम बांधकर पाकिस्तान में हमला करने को तैयार हूं।” जब इस बयान पर लोग मुस्कराने लगे, तो उन्होंनेगंभीरता से कहा, “मैं कोई मज़ाक नहीं कर रहा हूं। मैं इस बारे में पूरी तरह गंभीर हूं।” देश के लिए बलिदान को तैयारखान ने यह भी कहा कि वह देश के लिए अपनी जान देने को हमेशा तैयार हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से पाकिस्तान के खिलाफ सख्त और निर्णायककार्रवाई की अपील की। साथ ही पहलगाम हमले को अमानवीय और निंदनीय बताया। कौन हैं बी. ज़ेड. जमीर अहमद खान?बी. ज़ेड. जमीर अहमद खान कर्नाटक के चामराजपेट विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं और कांग्रेस सरकार में मंत्री के तौर पर कार्यरत हैं। वे कई वर्षों सेराज्य की राजनीति में सक्रिय हैं और अल्पसंख्यक समुदाय के एक प्रमुख नेता माने जाते हैं। राजनीतिक सफर: जेडीएस से कांग्रेस तकखान ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत जनता दल सेक्युलर (JDS) के साथ की थी। 2005 में वे पहली बार विधायक बने और बाद में कांग्रेसमें शामिल हो गए। 2018 से वे कांग्रेस के साथ हैं और मौजूदा सरकार में मंत्री के रूप में काम कर रहे हैं। विवादों से रहा है नाताजमीर अहमद खान इससे पहले भी विवादों में रह चुके हैं। वे पूर्व मुख्यमंत्री एच.डी. कुमारस्वामी पर दिए गए विवादित बयान और आय से अधिकसंपत्ति के मामले में जांच एजेंसियों की रडार पर आ चुके हैं। 2021 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी उनके ठिकानों पर छापेमारी की थी।
भारत-पाक तनाव के बीच पाकिस्तान ने किया बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण, रणनीतिक चेतावनी या डराने की कोशिश?

हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 भारतीय पर्यटकों की जान चली गई। इस घटना के बाद भारत और पाकिस्तान केबीच राजनयिक संबंधों में भारी गिरावट आई। भारत ने हमले के लिए पाकिस्तान समर्थित आतंकियों को जिम्मेदार ठहराया, वहीं पाकिस्तान ने इसआरोप को सिरे से खारिज कर दिया। इसके तुरंत बाद, भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कड़े कदम उठाए — जिनमें व्यापारिक प्रतिबंध, डाक सेवाओंकी समाप्ति और बंदरगाहों तक पहुंच रोकने जैसे निर्णय शामिल थे। पाकिस्तान का जवाब: अब्दाली मिसाइल का परीक्षणतनावपूर्ण माहौल में पाकिस्तान ने ‘अब्दाली’ नामक सतह से सतह पर मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया। इस मिसाइल कीमारक क्षमता लगभग 450 किलोमीटर बताई जा रही है और यह उन्नत नेविगेशन प्रणाली से युक्त है। पाकिस्तान की सेना ने इसे रूटीन टेस्ट बताया है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि यह परीक्षण भारत के लिए एक स्पष्ट संदेश है। रणनीतिक संदेश या डराने की कोशिश?विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान का यह कदम केवल सैन्य क्षमता के प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक मनोवैज्ञानिक रणनीति भी हो सकतीहै। भारत ने हाल ही में अग्नि-5 मिसाइल का परीक्षण किया था, जिसकी पहुंच 5000 किलोमीटर तक है और जो कई परमाणु हथियार ले जाने मेंसक्षम है। ऐसे में पाकिस्तान का अब्दाली मिसाइल परीक्षण इस शक्ति संतुलन को दर्शाने का प्रयास माना जा सकता है। राजनयिक संबंधों में टूटनइस घटना के बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजनयिकों को निष्कासित कर दिया है। हवाई और सड़क मार्गों पर प्रतिबंध लगा दिए गए हैं, औरव्यापारिक गतिविधियां लगभग ठप हो चुकी हैं। दोनों देशों के बीच सीधी बातचीत बंद है, जिससे हालात और अधिक गंभीर होते जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया: तनाव घटाने की अपीलअमेरिका और संयुक्त राष्ट्र सहित कई वैश्विक संस्थाओं ने इस स्थिति को लेकर चिंता जाहिर की है। अमेरिकी विदेश मंत्री ने दोनों देशों के नेताओं सेफोन पर बातचीत कर संयम बरतने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने भी मध्यस्थता की पेशकश करते हुए कहा है कि दक्षिण एशिया मेंशांति बनाए रखना वैश्विक जिम्मेदारी है। क्षेत्रीय सुरक्षा पर खतराभारत और पाकिस्तान दोनों परमाणु शक्ति संपन्न देश हैं। ऐसे में किसी भी स्तर का टकराव केवल सीमित संघर्ष नहीं रह सकता। यदि बातचीत सेसमाधान नहीं निकाला गया, तो यह संकट एक बड़े सैन्य संघर्ष में बदल सकता है, जिसका असर पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र पर पड़ेगा। आगे की राह: शांति और संवादहालात जितने तनावपूर्ण हों, समाधान युद्ध नहीं बल्कि संवाद ही है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चाहिए कि वह इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाए।भारत और पाकिस्तान के बीच फिर से बातचीत की प्रक्रिया शुरू हो, इसके लिए कूटनीतिक माध्यमों को अपनाना अनिवार्य हो गया है।
दीघा के जगन्नाथ मंदिर को लेकर बवाल, ओडिशा के लोगों ने जताई नाराज़गी – बोले ‘जगन्नाथ धाम सिर्फ पुरी में ही है

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा दीघा में बनवाए गए नए जगन्नाथ मंदिर को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ओडिशा के लोगोंऔर पुरी के जगन्नाथ मंदिर से जुड़े सेवायतों का कहना है कि “जगन्नाथ धाम” सिर्फ पुरी में है, और उसे कहीं और दोहराना न केवल गलत है, बल्किउनकी धार्मिक भावनाओं का भी अपमान है।दीघा का नया मंदिर – क्या है इसकी खासियत?बंगाल सरकार ने समुद्र तट के मशहूर पर्यटन स्थल दीघा में करीब 250 करोड़ रुपये की लागत से इस भव्य मंदिर का निर्माण करवाया है। मंदिर पुरी केप्रसिद्ध श्रीजगन्नाथ मंदिर की शैली पर आधारित है। इसका उद्घाटन 30 अप्रैल 2025 को अक्षय तृतीया के दिन हुआ। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसेराज्य में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने वाला कदम बताया है। उनका कहना है कि अब बंगाल के श्रद्धालुओं को भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिएओडिशा नहीं जाना पड़ेगा। क्यों है ओडिशा में नाराज़गी?ओडिशा के लोगों को सबसे बड़ी आपत्ति इस बात से है कि इस मंदिर को भी “जगन्नाथ धाम” कहा जा रहा है। उनके अनुसार, “जगन्नाथ धाम” कोईसामान्य मंदिर नहीं, बल्कि एक जीवंत परंपरा और हजारों वर्षों की आस्था का केंद्र है। पुरी का मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्किउसकी रथ यात्रा, महाप्रसाद और सेवायतों की भूमिका भी विशिष्ट और पवित्र मानी जाती है। पुरी के सेवायतों ने साफ कहा है कि वे दीघा में बने इस मंदिर को मान्यता नहीं देते और किसी भी सेवक को वहां पूजा-पाठ करने से मना किया गया है। राजनीति भी हो रही है गरमभाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने इस मुद्दे को लेकर तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार धर्मका राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर रही है। शुभेंदु ने सवाल उठाया कि सरकारी पैसे से मंदिर बनाना संविधान के खिलाफ है, और साथ हीपुरी की परंपरा की नकल करने की भी आलोचना की। ममता बनर्जी की सफाईममता बनर्जी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि दीघा का मंदिर पुरी के मंदिर की नकल नहीं, बल्कि एक श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक है।उन्होंने कहा कि यहां की परंपराएं पुरी से अलग होंगी—जैसे कि यहां प्रसाद में गुजिया और पेड़ा चढ़ेगा, न कि खाजा। उन्होंने मंदिर को “धार्मिक औरसांस्कृतिक परियोजना” बताया और यह भी स्पष्ट किया कि इसकी देखरेख के लिए एक समिति बनाई गई है, जिसमें इस्कॉन के वरिष्ठ सदस्य भीशामिल हैं।
जम्मू-कश्मीर के रामबन में बादल फटने से तबाही, NH-44 बंद, प्रशासन ने जारी की चेतावनी

जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले में हाल ही में आई प्राकृतिक आपदा ने पूरे इलाके में अफरा-तफरी मचा दी है। शनिवार को रामबन के धारमकुंड इलाकेमें बादल फटने की घटना सामने आई, जिसमें अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है और दर्जनों मकानों को भारी नुकसान पहुंचा है। घटना के बादइलाके में बचाव और राहत कार्य तेज़ी से चल रहे हैं, जबकि प्रशासन और मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सख़्त हिदायत दी है। 40 से अधिक मकान क्षतिग्रस्त, कई परिवार बेघरधारमकुंड गांव में अचानक बादल फटने से पानी और मलबा तेज़ी से बहने लगा, जिससे कई घरों को नुकसान पहुंचा। प्रशासन के अनुसार, करीब 40 घरों में पानी और मलबे का भराव हुआ है, जिनमें से 10 पूरी तरह तबाह हो गए हैं। कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया है। NH-44 पर यातायात पूरी तरह बंदजम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-44) जो जम्मू और कश्मीर घाटी को जोड़ने वाला सबसे अहम रास्ता है, उस पर भी बादल फटने का सीधा असरपड़ा है। भारी भूस्खलन और मलबा गिरने के कारण बनिहाल और नाशरी के बीच का हिस्सा पूरी तरह से बंद हो गया है। सैकड़ों यात्री और वाहन बीचरास्ते में फंसे हुए हैं। प्रशासन की अपील: बिना जानकारी यात्रा न करेंरामबन जिला प्रशासन ने आम लोगों और यात्रियों से अपील की है कि वे हाईवे पर यात्रा करने से पहले स्थिति की पूरी जानकारी लें। NH-44 कीस्थिति लगातार बदल रही है और मार्ग को साफ करने के प्रयास जारी हैं। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि जब तक स्थिति सामान्य नहीं होती, तब तकयात्रा न करें। सेना और राहत दल मैदान में उतरेबचाव कार्यों में भारतीय सेना, NDRF और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं। कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया हैऔर उन्हें प्राथमिक चिकित्सा, खाने-पीने का सामान और आश्रय दिया जा रहा है। रास्तों से मलबा हटाने का काम युद्ध स्तर पर किया जा रहा है। मौसम विभाग का अलर्ट: अगले कुछ दिन बेहद संवेदनशीलभारतीय मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है कि अगले कुछ दिनों तक क्षेत्र में भारी बारिश और भूस्खलन की संभावना बनी हुई है। पहाड़ी क्षेत्रों मेंरहने वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने को कहा गया है। प्रशासन किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी में है। शिक्षण संस्थान बंद, जनजीवन प्रभावितरामबन और आस-पास के इलाकों में स्कूल और कॉलेजों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। परिवहन और संचार सेवाओं पर भी असर पड़ा है।कई ग्रामीण इलाकों का संपर्क जिला मुख्यालय से टूट गया है। स्थानीय नेता बोले: ऐसा मंजर पहले नहीं देखारामबन से स्थानीय विधायक अर्जुन सिंह राजू ने घटना पर दुख जताते हुए कहा कि “अपने राजनीतिक जीवन में इतनी भयावह स्थिति कभी नहीं देखी।सरकार और प्रशासन हर संभव मदद देने में जुटा है और लोगों को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा।”
स्वामी रामदेव की रूह अफज़ा पर विवादास्पद टिप्पणी: हाई कोर्ट में नया मोड़, वीडियो प्राइवेट, अगली सुनवाई 9 मई को

योगगुरु स्वामी रामदेव द्वारा लोकप्रिय पेय रूह अफज़ा को लेकर की गई “शरबत जिहाद” वाली टिप्पणी ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस बयानको लेकर दायर याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई चल रही है। हमदर्द लैबोरेट्रीज ने कोर्ट में याचिका दाखिल की थी, जिसमें आरोप लगायागया कि रामदेव की टिप्पणी ब्रांड की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचा रही है।पतंजलि और रामदेव का जवाबताजा अपडेट में रामदेव और पतंजलि आयुर्वेद ने दिल्ली हाई कोर्ट में हलफनामा दाखिल करते हुए बताया है कि विवादित वीडियो को हटा दिया गयाहै। रामदेव के वकील ने कोर्ट को यह भी भरोसा दिलाया कि अदालत द्वारा दिए गए 24 घंटे के भीतर वीडियो को हटा दिया गया था। उन्होंने यह भीस्पष्ट किया कि वीडियो अब यूट्यूब पर ‘प्राइवेट’ कर दिया गया है। हमदर्द का दावा: वीडियो अब भी मौजूदहालांकि हमदर्द के वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कोर्ट को अवगत कराया कि वीडियो को तकनीकी रूप से हटाया नहीं गया है, बल्कि सिर्फ प्राइवेटमोड में रखा गया है, जिससे सब्सक्राइबर्स अभी भी उसे देख सकते हैं। उनका यह भी कहना था कि वही वीडियो आस्था चैनल पर भी प्रसारित हो रहाहै। हाई कोर्ट की नाराज़गीसुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति अमित बंसल ने रामदेव पक्ष को फटकार लगाते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि रामदेव नेअदालत के पिछले आदेशों का पालन नहीं किया है। कोर्ट ने साफ कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि “रामदेव पर किसी का नियंत्रण नहीं है।” यह टिप्पणी तब आई जब मुकुल रोहतगी ने अदालत को यह बताया कि पिछले आदेश के बाद भी एक नया वीडियो उसी प्रकार की भाषा और लहजेके साथ अपलोड किया गया, जो सोशल मीडिया पर वायरल भी हो गया है। अगली सुनवाई कब?दिल्ली हाई कोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई 9 मई को करेगा। अदालत अब यह जांचेगी कि रामदेव ने अपने कथनों से कोर्ट की अवमानना की हैया नहीं, और क्या आगे की कोई सख्त कार्रवाई बनती है। पृष्ठभूमि: “शरबत जिहाद” टिप्पणी पर बवालस्वामी रामदेव ने हाल ही में रूह अफज़ा को लेकर “शरबत जिहाद” जैसी विवादास्पद टिप्पणी की थी, जिसे कई लोगों ने सांप्रदायिक और ब्रांड कीछवि को नुकसान पहुंचाने वाला करार दिया। इसके बाद सोशल मीडिया और विभिन्न प्लेटफॉर्म पर इस टिप्पणी के खिलाफ तीखी प्रतिक्रियाएं आईं।
नेशनल हेराल्ड केस: सोनिया और राहुल गांधी को कोर्ट का नोटिस, अगली सुनवाई 8 मई को

नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी औरराहुल गांधी को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस प्रवर्तन निदेशालय (ED) की चार्जशीट के आधार पर जारी किया गया है। अब कोर्ट 8 मई कोअगली सुनवाई में तय करेगा कि आरोपियों के खिलाफ आगे कार्रवाई की जाए या नहीं। क्या है नेशनल हेराल्ड मामला?इस केस की जड़ें 2014 में उस वक्त पड़ीं, जब बीजेपी नेता डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी ने एक आपराधिक शिकायत दर्ज करवाई। उन्होंने आरोप लगायाकि कांग्रेस पार्टी ने एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) को अवैध तरीके से Young Indian नाम की कंपनी के जरिए अपने कब्जे में लिया। इसकंपनी में सोनिया और राहुल गांधी की 38-38% हिस्सेदारी है। सुब्रमण्यम स्वामी का दावा है कि कांग्रेस पार्टी ने AJL को करीब 90 करोड़ रुपये का बिना ब्याज का कर्ज दिया, जिसे बाद में Young Indian कोमात्र 50 लाख रुपये में ट्रांसफर कर दिया गया। इस डील के जरिए Young Indian को AJL की करोड़ों की संपत्तियों का मालिकाना हक मिलगया। कोर्ट ने क्या कहा?कोर्ट ने साफ किया कि आरोपियों को चार्जशीट की कॉपी दी जाएगी और उन्हें अपना पक्ष रखने का पूरा मौका मिलेगा। विशेष न्यायाधीश विशालगोगने ने टिप्पणी करते हुए कहा, “हर आरोपी को निष्पक्ष सुनवाई का हक है। अभी केस की मेरिट पर बात करना जल्दबाज़ी होगी।” कोर्ट की इस टिप्पणी को कानूनी प्रक्रिया की पारदर्शिता की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। कांग्रेस का जवाबकांग्रेस ने सरकार पर राजनीतिक बदले की भावना से काम करने का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि यह पूरा मामला केंद्र सरकार द्वारा जांचएजेंसियों के दुरुपयोग का उदाहरण है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, “सरकार विपक्ष की आवाज़ को दबाने की कोशिश कर रही है। लेकिन हम इससे डरने वाले नहीं हैं।सोनिया और राहुल गांधी पर लगाए गए आरोप झूठे हैं और सच्चाई जल्द सामने आएगी।” ED की कार्रवाईप्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में गहन जांच के बाद कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी। ED का दावा है कि यह केवल आर्थिक गड़बड़ी नहीं, बल्किमनी लॉन्ड्रिंग का एक जटिल मामला है, जिसमें राजनीतिक लाभ लेने की भी कोशिश की गई है। ED ने राहुल और सोनिया गांधी से कई बार पूछताछ की है। इस दौरान वित्तीय दस्तावेज़, लेन-देन और कंपनी की शेयर होल्डिंग से जुड़े सवालों परविस्तार से जवाब मांगे गए। आगे क्या?अब सभी की नजरें 8 मई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं। कोर्ट यह तय करेगा कि आरोपियों के खिलाफ ट्रायल शुरू हो या उन्हें राहत दीजाए। इस फैसले का कांग्रेस की साख और 2024 के बाद की राजनीतिक रणनीति पर भी असर पड़ सकता है।
भारत ने पाकिस्तान के यूट्यूब चैनल और सोशल मीडिया अकाउंट्स पर कसी नकेल, जानिए क्या है पूरा मामला

हाल ही में भारत सरकार ने पाकिस्तान से चलाए जा रहे कुछ यूट्यूब चैनलों और सोशल मीडिया अकाउंट्स के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं। सरकारका आरोप है कि ये चैनल भारत के खिलाफ झूठी और भ्रामक जानकारी फैलाकर देश की सुरक्षा और एकता को नुकसान पहुंचा रहे थे। क्यों हुई कार्रवाई?भारत के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने आईटी नियम, 2021 के तहत अपनी आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए 16 यूट्यूब चैनलों कोब्लॉक करने का आदेश दिया। इनमें से 6 चैनल पाकिस्तान से संचालित हो रहे थे, जबकि 10 चैनल भारत में थे लेकिन इनकी सामग्री भ्रामक औरउकसाने वाली थी। सरकार का कहना है कि इन चैनलों पर पोस्ट किए जा रहे वीडियो में सांप्रदायिक तनाव फैलाने, दहशत पैदा करने और भारत के संवेदनशील मुद्दों कोतोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा था। इन चैनलों की पहुंच करोड़ों लोगों तक थी और इन्हें लाखों सब्सक्राइबर्स फॉलो कर रहे थे। पाकिस्तान का दुष्प्रचार तंत्रये पहली बार नहीं है जब भारत ने पाकिस्तान के दुष्प्रचार नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई की हो। इससे पहले भी जनवरी 2022 में भारत ने पाकिस्तान सेसंचालित 35 यूट्यूब चैनलों और 2 वेबसाइट्स को ब्लॉक किया था। इनमें से कई चैनल ‘अपनी दुनिया नेटवर्क’ और ‘ताल्हा फिल्म्स नेटवर्क’ जैसेसमूहों से जुड़े थे, जिनका मकसद भारत में झूठी खबरें फैलाना और आम लोगों की सोच को भटकाना था। इन यूट्यूब चैनलों की सामग्री पेशेवर तरीके से तैयार की गई थी, ताकि ऐसा लगे कि ये भारत के अंदर से ही चलाई जा रही हैं। लेकिन जांच में पताचला कि इनके तार सीधे पाकिस्तान से जुड़े हुए थे। सोशल मीडिया पर भी सख्तीयूट्यूब के अलावा सरकार ने कुछ इंस्टाग्राम और फेसबुक अकाउंट्स को भी ब्लॉक किया है, जो पाकिस्तान से भारत विरोधी कंटेंट फैला रहे थे।हालांकि सोशल मीडिया पर एक अफवाह यह भी फैल रही है कि पाकिस्तान के मशहूर क्रिकेटर्स—बाबर आजम, शाहीन अफरीदी, मोहम्मद रिजवानऔर हारिस रऊफ के इंस्टाग्राम अकाउंट्स को भारत ने बंद करवा दिया है। लेकिन इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और यह महज अफवाहसाबित हुई है। भारत का सख्त संदेशभारत सरकार का यह कदम साफ संकेत देता है कि वह डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर फैलाए जा रहे झूठ और नफरत को बर्दाश्त नहीं करेगी। ऐसे चैनल औरअकाउंट्स जो देश की अखंडता, सुरक्षा और सांप्रदायिक सद्भाव के खिलाफ काम करेंगे, उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने लोगों से भी अपील की है कि वे किसी भी खबर या वीडियो को शेयर करने से पहले उसकी सच्चाई जरूर जांच लें। झूठी खबरें सिर्फ भ्रमनहीं फैलातीं, वे समाज के ताने-बाने को भी नुकसान पहुंचा सकती हैं।
भाजपा की दिल्ली सरकार की नाकामी पर आम आदमी पार्टी का हमला: “पानी और सीवर की व्यवस्था पूरी तरह से खराब”

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (आप) ने दिल्ली में भाजपा सरकार की सीवर और पानी की व्यवस्था पर तीखा हमला किया है। पार्टी ने आरोप लगायाहै कि भाजपा दिल्ली सरकार ने शहर में पानी और सीवर की समस्या को संभालने में पूरी तरह से नाकामी दिखाई है। “सीवर और गंदा पानी दिल्लीवासियों के लिए नर्क बन गया” – आतिशीआप नेता और दिल्ली की नेता प्रतिपक्ष, आतिशी ने कहा कि पिछले दो महीनों से दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में सीवर ओवरफ्लो और गंदे पानी कीसमस्या विकराल हो गई है। उन्होंने कहा, “बाल मुकुंद खंड सहित पूरी दिल्ली में लोग नर्क जैसी स्थिति में जी रहे हैं क्योंकि भाजपा सरकार के पासकाम करने के लिए कोई ठोस योजना नहीं है।” आतिशी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक वीडियो शेयर करते हुए कहा कि बाल मुकुंद खंड, गिरी नगर में लोग सीवर ओवरफ्लो और गंदेपानी से परेशान हैं, लेकिन दिल्ली सरकार अब तक इस समस्या का समाधान नहीं कर पाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली जल बोर्ड को 9000 करोड़ रुपये का बजट दिया गया था, लेकिन सीवर की एक छोटी सी लाइन भी ठीक नहीं हो पा रही है।“जल बोर्ड को 9000 करोड़ का बजट मिला, फिर भी काम नहीं हो रहा” – आतिशीआतिशी ने बताया कि दिल्ली जल बोर्ड को 9000 करोड़ रुपये का बजट तो मिला, लेकिन इसके बावजूद काम ठप पड़ा है। उन्होंने कहा, “जल बोर्डने मार्च में सीवर लाइन बदलने के लिए टेंडर तो जारी कर दिया, लेकिन काम शुरू नहीं हो पाया क्योंकि उनके पास फंड की कमी है।” “सीवर का गंदा पानी घरों में घुस रहा” – निवासियों की शिकायतगिरी नगर के बाल मुकुंद खंड के निवासी इस समस्या से बहुत परेशान हैं। उनका कहना है कि पिछले एक महीने से सीवर ओवरफ्लो होने के कारणघरों में गंदा पानी घुस रहा है। इसके कारण उन्हें न केवल पानी का इस्तेमाल करना मुश्किल हो गया है, बल्कि पानी से बीमारियां भी फैलने लगी हैं।एक महिला ने कहा, “हम जानवरों से भी बदतर जीवन जीने को मजबूर हैं। घर के किचन में सीवर का गंदा पानी भर जाता है, जिससे हम बीमार होजाते हैं।” “जल बोर्ड का 9000 करोड़ का बजट क्या सिर्फ एक जुमला था?” – निवासियों का सवालनिवासियों का कहना है कि सीवर लाइन बदलने के लिए जो टेंडर जारी किया गया था, वह भी बिना फंड के कारण निष्क्रिय पड़ा है। उनका सवाल है, “क्या जल बोर्ड को स्वीकृत किया गया 9000 करोड़ रुपये का बजट सिर्फ एक जुमला था?” आम आदमी पार्टी का सवाल: भाजपा की नाकामी पर कब होगा समाधान?आतिशी ने दिल्ली सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सरकार इसी तरह की नाकामी दिखाती रही तो आम आदमी पार्टी सड़कों पर उतरेगी औरदिल्लीवासियों को उनका हक दिलवाने के लिए संघर्ष करेगी।