एअर इंडिया विमान हादसा जांच में नहीं हुआ पक्षपात, सरकार ने संसद में दी सफाई ब्लैक बॉक्स से मिले अहम सुराग

अहमदाबाद विमान हादसे को लेकर विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) की रिपोर्ट में पक्षपात किए जाने के आरोपों पर सरकार ने जवाब दिया है. संसद में नागरिक उड्डयन मंत्री के राममोहन नायडू ने कहा कि विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) एक विस्तृत, नियम-आधारित प्रक्रिया का पालनकरता है और पूरी तरह से निष्पक्ष है। नियमों के तहत जांच हो रही है. उन्होंने कहा कि एएआईबी की रिपोर्ट को लेकर विदेशी मीडिया मनगढ़ंत बातें कररहा है. राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू ने एअर इंडिया दुर्घटना को लेकर सवालों के जवाब दिए. उन्होंनेकहा कि हम सच्चाई के साथ खड़े होना चाहते हैं. किसी और चीज के साथ नहीं.जमकर की नारेबाजीहम यह जानना चाहते हैं कि एअर इंडिया विमान दुर्घटना में वास्तव में क्या हुआ था और यह एएआईबी की अंतिम जांच रिपोर्ट के बाद ही सामनेआएगा. राज्यसभा में विपक्ष ने एअर इंडिया हादसे को लेकर जमकर नारेबाजी की. इस बीच नायडू ने कहा कि विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) पारदर्शी तरीके से जांच कर रहा है मैंने कई रिपोर्ट देखी हैं. इसमें विदेशी मीडिया ने अपने दृष्टिकोण को बढ़ावा देने की कोशिश की है उन्होंने कहा किएएआईबी दुर्घटनाग्रस्त एयर इंडिया विमान के ब्लैक बॉक्स से डेटा को डिकोड करने में सफल रहा है. उन्होंने कहा कि विमान दुर्घटना के कारणों परअभी कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी. क्योंकि जांच अभी जारी है और अंतिम रिपोर्ट मूल कारणों के साथ सामने आएगी. साथ ही उन्होंने सभीसे समय से पहले कोई भी अफवाह फैलाने से बचने का आग्रह किया. 12 जून को अहमदाबाद में एअर इंडिया के विमान हादसे की जांच कर रहीएएआईबी ने अपने प्रारंभिक रिपोर्ट में बताया कि हादसे वाले बोइंग ड्रीमलाइनर विमान के दोनों इंजन टेकऑफ के कुछ ही सेकंड बाद बंद हो गएक्योंकि ईंधन की आपूर्ति रुक गई थी. एएआईबी के तहत कर रही है जांचएअर इंडिया विमान के ब्लैक बॉक्स की जांच में पता चला कि उड़ान के अंतिम क्षणों में, कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर से पता चला कि एक पायलट कोदूसरे से यह पूछा कि उसने ईंधन स्विच को बंद क्यों किया? इस पर दूसरे पायलट ने जवाब दिया कि उसने ऐसा नहीं किया. जांच में पता चला किउड़ान भरने के तुरंत बाद ईंधन स्विच कटऑफ में बदल गए थे. जिससे विमान के इंजनों में ईंधन की आपूर्ति रुक गई जो हादसे के मुख्य वजहों में एकमाना जा रहा है. 12 जून को अहमदाबाद में एअर इंडिया के विमान हादसे की जांच कर रही एएआईबी की प्रारंभिक रिपोर्ट को लेकर उठे सवालों परसरकार ने राज्यसभा में जवाब दिया. केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ने कहा कि एएआईबी नियमों के तहत जांच कर रही है.
संसद का मानसून सत्र हंगामेदार शुरुआत के साथ शुरू, ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम हमले पर विपक्ष ने सरकार को घेरा

संसद के मानसून सत्र की शुरुआत हंगामेदार रही और पहले ही दिन जमकर हंगामा देखने को मिला. विपक्ष ऑपरशन सिंदूर पर चर्चा की मांग कर रहाहै. राज्यसभा में इस मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम आतंकी हमले के मुद्दे परसरकार को घेरने की कोशिश की. जिस पर भाजपा अध्यक्ष और सदन के नेता जेपी नड्डा ने भी जोरदार जवाब दिया. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगेने पहलगाम आतंकी हमले को लेकर राज्यसभा में सवाल उठाते हुए कहा कि ‘पहलगाम आतंकी हमले के आरोपी अभी तक न पकड़े गए हैं और न हीमारे गए हैं। सभी पार्टियों ने एकजुट होकर सरकार को इस मुद्दे पर समर्थन दिया. ऐसे सरकार की तरफ से हमें पहलगाम हमले पर और उसके बाद केघटनाक्रम पर हमें जानकारी दी जानी चाहिए. भारत- पाकिस्तान का थमा संघर्षखरगे ने कहा कि ‘पहलगाम हमले में सरकार से सुरक्षा लापरवाही हुई और ये खुद एलजी ने स्वीकार किया है. साथ ही कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों नेभी कई खुलासे किए ऐसे में सरकार को हमें जानकारी दी जानी चाहिए. अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप 24 बार कहा कि मेरी मध्यस्थता से समझौता हुआ, तब भारत-पाकिस्तान का संघर्ष थमा. ये देश के लिए अपमानजनक है कि एक बाहर का आदमी ऐसा दावा कर रहा है. ‘इस पर सदन के नेता औरभाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि ‘इस सदन के माध्यम से देश में ये संदेश नहीं जाना चाहिए कि हम ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा नहीं चाहते. हम चर्चाकरेंगे और इस मुद्दे पर हर बात को सदन के पटल पर रखा जाएगा. मैं ये भी कहना चाहूंगा कि देश की आजादी के बाद देश में आज तक ऐसाऑपरेशन नहीं हुआ. जैसा प्रधानमंत्री के नेतृत्व में ऑपरेशन सिंदूर में हुआ. सदन में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के लिए नोटिस दिया गया है और जो भीसमय तय किया जाएगा. सरकार इस पर चर्चा करेगी और हर सवाल का जवाब दिया जाएगा. सदन के पटल जाएगा रखासदन के नेता और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि ‘इस सदन के माध्यम से देश में ये संदेश नहीं जाना चाहिए कि हम ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चानहीं चाहते, हम चर्चा करेंगे और इस मुद्दे पर हर बात को सदन के पटल पर रखा जाएगा. ‘सदन के नेता और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा किसरकार चर्चा से पीछे नहीं हट रही, बल्कि ऑपरेशन सिंदूर जैसा अभूतपूर्व सैन्य अभियान देश के इतिहास में पहली बार हुआ है. नड्डा ने कहा किऑपरेशन सिंदूर पर सदन में नोटिस दिया गया है और तय समय पर इस पर विस्तार से चर्चा की जाएगी. विपक्ष ने जहां सरकार को सुरक्षा नीतियों कोलेकर कठघरे में खड़ा किया वहीं सरकार ने जवाब दिया कि वह पूरी पारदर्शिता से चर्चा के लिए तैयार है.
यमुना की सफाई पर बड़ा सवाल – संजीव झा ने बीजेपी को घेरा

दिल्ली की यमुना नदी को लेकर एक नई रिपोर्ट सामने आई है, जिससे बड़ा खुलासा हुआ है। यह रिपोर्ट DPCC यानी दिल्ली प्रदूषण नियंत्रणसमिति की है, जिसमें साफ कहा गया है कि यमुना की हालत पहले से भी ज्यादा खराब हो गई है। इस रिपोर्ट के आने के बाद आम आदमी पार्टी केविधायक संजीव झा ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को कड़ी आलोचना का निशाना बनाया है। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने यमुना को साफ करने काजो वादा किया था, वह सिर्फ एक झूठा वादा निकला। चुनाव से पहले बहुत बड़े-बड़े दावे किए गए थे। प्रधानमंत्री और बीजेपी के नेता यमुना किनारेगए थे, फोटो खिंचवाए गए थे, वीडियो बनाए गए थे। लोगों को उम्मीद थी कि अब यमुना की सफाई सही तरीके से होगी। लेकिन अब जो सच्चाईसामने आई है, वह बहुत चौंकाने वाली और दुखद है। रिपोर्ट में क्या कहा गया?1 जुलाई को आई DPCC की रिपोर्ट में बताया गया है कि वजीराबाद से लेकर ओखला तक 22 किलोमीटर तक यमुना नदी का जो हिस्सा है, वहांप्रदूषण तीन गुना ज्यादा हो गया है। यह वही इलाका है, जहां बीजेपी ने कहा था कि हम जल्द ही सफाई करके यमुना को स्वच्छ बनाएंगे।संजीव झा ने सवाल किया कि जब सफाई हो रही थी, तो यमुना और गंदी कैसे हो गई? अगर आप सफाई का दावा कर रहे हो, तो पानी में सुधारदिखना चाहिए। लेकिन अब तो स्थिति और खराब हो गई है। यह कैसे हुआ? 90 दिन में यमुना साफ करने का वादाबीजेपी ने दावा किया था कि वो यमुना को 90 दिनों में पूरी तरह साफ कर देंगे। लेकिन अब तो 6 महीने से ज्यादा का समय बीत गया है और यमुनाकी हालत और बिगड़ गई है। जो इलाके पहले थोड़ा साफ थे, अब वहां भी गंदगी फैल गई है।इससे यह साफ हो जाता है कि सिर्फ दिखावे के लिए सफाई का काम किया गया, असल में कोई सुधार नहीं हुआ। आम आदमी पार्टी का कहना हैकि अगर सच में काम हुआ होता, तो रिपोर्ट में यह नहीं आता कि यमुना और गंदी हो गई है। हरियाणा और उत्तर प्रदेश का गंदा पानीसंजीव झा ने यह भी कहा कि हम पहले से ही यह बात कह रहे थे कि हरियाणा और उत्तर प्रदेश से बिना साफ किया हुआ इंडस्ट्रियल वेस्ट (औद्योगिकगंदा पानी) यमुना में डाला जा रहा है। लेकिन बीजेपी इसे झूठ बता रही थी। अब DPCC की रिपोर्ट ने यह बात साबित कर दी है कि वाकई मेंहरियाणा और उत्तर प्रदेश से गंदा पानी यमुना में आता है। इन राज्यों की फैक्ट्रियों का कचरा बिना ट्रीटमेंट के यमुना में मिल रहा है, जिससे प्रदूषणबहुत बढ़ गया है। पर्यावरण मंत्री की रीलों पर तंजसंजीव झा ने दिल्ली सरकार के पर्यावरण मंत्री पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा, जब यमुना की हालत दिखाने का समय था, तब मंत्री जी रीलें बना रहेथे। अब जाकर देखें कि यमुना की सच्चाई क्या है। उन्होंने कहा कि सिर्फ सोशल मीडिया पर वीडियो बनाकर दिखाने से यमुना साफ नहीं हो जाएगी।असली काम जमीन पर होना चाहिए। आम आदमी पार्टी की मांगसंजीव झा ने साफ कहा कि सरकार को जनता को यह बताना चाहिए कि पिछले 6 महीनों में यमुना सफाई का कितना काम हुआ है। उन्होंने मांग कीकि सरकार को इसकी रिपोर्ट तुरंत सार्वजनिक करनी चाहिए। उन्होंने कहा, अगर आप सही में सफाई कर रहे थे, तो गंगा और यमुना और गंदी क्यों होगईं? यमुना नदी केवल एक नदी नहीं है। यह दिल्ली के लोगों के जीवन, आस्था और पर्यावरण से जुड़ी हुई है। बीजेपी ने वादा किया था कि यमुना कोसाफ करेंगे, लेकिन सच इसके उल्टा है। रिपोर्ट बता रही है कि यमुना की हालत और खराब हो गई है। अब जनता को सिर्फ वादे नहीं चाहिए। अबलोग चाहते हैं कि सरकार सही काम करे, और हर 3 महीने में रिपोर्ट दे, कि कितना काम हुआ, कितना बजट खर्च हुआ, और उसका असर क्या है।
सर्वदलीय बैठक में दिखा संवाद और सहमति का संकल्प, सरकार ऑपरेशन सिंदूर सहित सभी मुद्दों पर चर्चा को तैयार

संसद के मानसून सत्र से पहले हुई सर्वदलीय बैठक के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तमाम मुद्दों पर चर्चा हुई. सर्वदलीय बैठक के बाद संसदीयकार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि संसद को सुचारू रूप से चलाने के लिए सरकार-विपक्ष के बीच समन्वय होना चाहिए। हम मानसून सत्र में ऑपरेशनसिंदूर जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार हैं. उन्होंने कहा कि न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा को हटाने के प्रस्ताव पर सांसदों के हस्ताक्षरों कीसंख्या पहले ही 100 को पार कर चुकी है. सर्वदलीय बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि संसद सत्र शुरू होने से पहले सभीदलों के नेताओं की एक बैठक हुई. इस सत्र में कुल 51 राजनीतिक दल और स्वतंत्र सांसद भाग लेंगे. इन 51 दलों के 54 सदस्यों ने बैठक में भागलिया. पार्टियों की ओर से रखी गई राय40 सांसदों ने अपनी पार्टियों की ओर से अपनी राय रखी. यह बहुत रचनात्मक थी सभी राजनीतिक नेताओं ने अपनी पार्टियों की स्थिति और उन मुद्दोंको बताया जो वे इस सत्र में लाना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि सरकार ने सभी की बातों पर ध्यान दिया है. हमने अनुरोध किया है कि सदन की कार्यवाहीसुचारू रूप से चले, इसके लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष को अच्छे समन्वय के साथ मिलकर काम करना चाहिए. हम अलग-अलग विचारधाराओं वालेराजनीतिक दल हो सकते हैं. लेकिन यह सुनिश्चित करना सभी की जिम्मेदारी है कि संसद सुचारू रूप से चले. संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि ऑपरेशनसिंदूर पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के दावों के मुद्दे पर सरकार संसद में उचित जवाब देगी. कई मुद्दे ऐसे हैं जिन पर पार्टियों ने कहा है कि इन पर संसद मेंचर्चा होनी चाहिए. हम खुले दिल से चर्चा के लिए तैयार हैं. हम नियमों और परंपराओं के अनुसार काम करते हैं और इनका बहुत महत्व रखते हैं।इसलिए हम हर मुद्दे पर चर्चा करेंगे लेकिन नियमों और परंपराओं के अनुसार. उन्होंने कहा कि विपक्ष ने अपनी राय रखी. सभी मुद्दों को ले जाया जाएगा संसदएनडीए, यूपीए (इंडिया गठबंधन) और उनके बीच के दलों ने अपनी राय रखी है. हम इन सभी मुद्दों को संसद में ले जाएंगे, क्या चर्चा करनी है औरक्या नहीं इसका फैसला बीएसी (कार्य मंत्रणा समिति) में किया जाएगा. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि छोटे राजनीतिक दलों, खासकरजिनके 1-2 सांसद हैं को बोलने के लिए कम समय मिलता है क्योंकि समय उनकी संख्या के अनुसार आवंटित किया जाता है. लेकिन हमने इसकासंज्ञान लिया है हम छोटे दलों को पर्याप्त समय आवंटित करने पर सहमत हुए हैं. हम इसे लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति के समक्ष रखेंगेऔर फिर हम इस मुद्दे को कार्य मंत्रणा समिति में उठाएंगे. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि जस्टिस वर्मा मामले में सभी पक्ष मिलकरप्रक्रिया अपनाएंगे. यह अकेले सरकार का कदम नहीं है। मामले को लेकर हस्ताक्षर की प्रक्रिया चल रही है और यह पहले ही 100 को पार कर चुकाहै. उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद विभिन्न दलों के साथ सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडलों की बैठकें बहुत अच्छी और प्रभावी रहीं और उन सभीअच्छे अनुभवों को राष्ट्र के सामने साझा किया जाना चाहिए। हमें इसका स्वागत करना चाहिए.
प्रधानमंत्री मोदी का ब्रिटेन और मालदीव दौरा, रणनीतिक साझेदारी और द्विपक्षीय सहयोग को मिलेगा नया आयाम

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 23-24 जुलाई को ब्रिटेन के आधिकारिक दौरे पर रहेंगे. यह प्रधानमंत्री मोदी की ब्रिटेन की चौथी आधिकारिक यात्राहोगी. यह प्रधानमंत्री मोदी की चौथी ब्रिटेन यात्रा होगी. ब्रिटेन के बाद पीएम मोदी मालदीव की आधिकारिक यात्रा पर जाएंगे, जो 25-26 जुलाई, 2025 तक होगी. प्रधानमंत्री मोदी मालदीव के राष्ट्रपति डॉ. मोहम्मद मोइजु के आमंत्रण पर मालदीव जा रहे हैं. प्रधानमंत्री की यह मालदीव की तीसरीयात्रा होगी. पीएम मोदी की यह मालदीव यात्रा, मालदीव में राष्ट्रपति मोइजु के सत्ता संभालने के बाद पहली बार किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष का दौराहोगा. ब्रिटेन दौरे पर पीएम मोदी विभिन्न मुद्दों पर प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर से चर्चा करेंगे. वैश्विक मुद्दों पर होगी बातक्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी दोनों नेताओं के बीच बात होगी. प्रधानमंत्री मोदी, ब्रिटेन दौरे पर किंग चार्ल्स से भी मुलाकात कर सकते हैं. दोनों देशव्यापक रणनीतिक साझेदारी की प्रगति पर भी चर्चा करेंगे और इसमें व्यापार, अर्थव्यवस्था, तकनीक, अविष्कार, सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य, शिक्षा और लोगों को लोगों से संबंधों को बेहतर बनाने पर चर्चा होगी. प्रधानमंत्री मोदी 26 जुलाई को मालदीव के 60वें स्वतंत्रता दिवस में बतौरमुख्य अतिथि शामिल होंगे. पीएम मोदी, मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मोइजु के साथ विभिन्न मुद्दों पर द्विपक्षीय चर्चा भी करेंगे. दोनों नेता भारत-मालदीव के बीच संयुक्त आर्थिक और मेरीटाइम सुरक्षा समझौते पर प्रगति की भी समीक्षा करेंगे. अक्तूबर 2024 में जब मोहम्मद मोइजु ने भारत कादौरा किया था. उस समय दोनों देशों के बीच इस समझौते पर सहमति बनी थी. प्रधानमंत्री ब्रिटेन के बाद मालदीव दौरे पर भी जाएंगे. विदेशी राष्ट्रध्यक्ष का होगा दौराप्रधानमंत्री की यह मालदीव की तीसरी यात्रा होगी पीएम मोदी की यह मालदीव यात्रा, राष्ट्रपति मोइजु के सत्ता संभालने के बाद पहली बार किसीविदेशी राष्ट्राध्यक्ष का दौरा होगा. ब्रिटेन दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की ब्रिटेन के किंग चार्ल्स से भी मुलाकात हो सकती है. भारत और ब्रिटेन के बीचव्यापक रणनीतिक साझेदारी की प्रगति की समीक्षा की जाएगी. इस साझेदारी में व्यापार, अर्थव्यवस्था, तकनीक, नवाचार, सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य, शिक्षा और जन-जन संपर्क जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. प्रधानमंत्री मोदी 26 जुलाई को मालदीव के 60वें स्वतंत्रता दिवससमारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लेंगे. इसके अलावा वे राष्ट्रपति मोइजु के साथ द्विपक्षीय बैठक भी करेंगे, जिसमें भारत-मालदीव के बीचसंयुक्त आर्थिक और समुद्री सुरक्षा समझौते की प्रगति की समीक्षा की जाएगी. यह समझौता अक्टूबर 2024 में राष्ट्रपति मोइजु की भारत यात्रा केदौरान तय हुआ था.
विपक्ष एकजुट, संसद के मानसून सत्र में पहलगाम हमला, ट्रंप के दावे बिहार मतदाता सूची और मणिपुर पर मांगा जवाब

संसद का मानसून सत्र 21 जुलाई से शुरू हो रहा है मानसून सत्र में केंद्र सरकार को घेरने के लिए विपक्ष एकजुट हो गया है. रविवार को बुलाई गईसर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने तमाम मुद्दे उठाए। इस दौरान विपक्ष ने पहलगाम हमला, भारत-पाकिस्तान संघर्ष विराम पर ट्रंप के दावे पर सरकार केजवाब, बिहार मतदाता सूची पुनरीक्षण पर बात की. संसद का यह मानसून सत्र 21 अगस्त तक चलेगा इसमें कुल 21 बैठकें होंगी. सर्वदलीय बैठक मेंभाग लेने के बाद कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि इस सत्र में हम पहलगाम हमला, बांग्लादेश सीमाओं पर संघर्ष, बिहार में विशेष मतदातापुनरीक्षण, ट्रंप के दावों समेत कई मुद्दे उठाएंगे. प्रधानमंत्री का यह कर्तव्य और नैतिक जिम्मेदारी है कि वे संसद के माध्यम से राष्ट्र को संबोधित करें. मुझे उम्मीद है कि प्रधानमंत्री अपना नैतिक और नैतिक कर्तव्य निभाएंगे. उन्होंने कहा कि कई अहम मुद्दे हैं जिन पर सरकार को अपनी बात रखनीचाहिए. पहला मुद्दा पहलगाम का है और उस पर उपराज्यपाल द्वारा दिए गए बयान भी गंभीर हैं.संसद में रखनी चाहिए अपनी स्थितिकाफी समय बीत चुका है और अब सरकार को इस पर स्पष्ट रूप से अपनी स्थिति संसद में रखनी चाहिए. उन्होंने कहा, दूसरा मुद्दा अमेरिकी राष्ट्रपति केहालिया बयान से जुड़ा है, जो भारत की गरिमा और हमारी सेना की वीरता पर सवाल उठाने का है. इसका जवाब सिर्फ भारत के प्रधानमंत्री ही दे सकतेहैं. तीसरा अहम मुद्दा मतदान के अधिकार और चुनाव प्रक्रिया से जुड़ा है. आज जब चुनाव आयोग विभिन्न राजनीतिक दलों से संवाद से बच रहा है, स्पष्टता नहीं दे रहा है तो आगामी राज्य चुनावों और लोकतांत्रिक ढांचे पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. ऐसे में प्रधानमंत्री की यह जिम्मेदारी बनती है किवे संसद में आकर सरकार का पक्ष रखें. गोगोई ने कहा कि तीसरी बात ये है कि हमारे वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने एक बहुत ही संवेदनशील मुद्दा उठायाहै. चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ हमारी सीमा पर जो दो-मोर्चे की धुरी बन गई है. इसलिए यह बहुत महत्वपूर्ण है कि हम रक्षा और विदेशनीति पर बात करें. प्रधानमंत्री मोदी का इस सदन में आना और इन तीनों विषयों पर अपने विचार रखना बहुत महत्वपूर्ण होगा. उन्होंने कहा कि सरकारमणिपुर से संबंधित कई विधेयक ला रही है, लेकिन प्रधानमंत्री ने पहले कहा था कि कुछ महीनों में मणिपुर में शांति लौटेगी.अशांति का बना हुआ है माहौलअब लगभग ढाई साल बीत चुके हैं लेकिन वहां अभी भी अशांति का माहौल बना हुआ है. प्रधानमंत्री छोटे-छोटे देशों की यात्रा तो करते हैं लेकिन अपनेही देश के एक छोटे राज्य में, जहां अब भी हालात गंभीर हैं, वहां जाने से परहेज कर रहे हैं. हमें उम्मीद है कि आगामी संसद सत्र में इन सभी महत्वपूर्णमुद्दों पर सकारात्मक और गंभीर चर्चा होगी और प्रधानमंत्री इन पर सदन में अपना पक्ष स्पष्ट करेंगे. बीजद सांसद सस्मित पात्रा ने कहा कि हमाराप्राथमिक मुद्दा ओडिशा में बिगड़ती कानून-व्यवस्था की स्थिति होगा. भाजपा सरकार के कारण ओडिशा में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है औरमहिलाओं व बच्चियों के खिलाफ जघन्य अपराधों में दिन-प्रतिदिन, चिंताजनक वृद्धि हो रही है. ओडिशा के बालासोर जिले में एक छात्रा के आत्मदाहकी घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। पुरी जिले में एक 15 वर्षीय लड़की को बदमाशों ने आग लगा दी. 20 दिन पहले भुवनेश्वर नगरनिगम के अतिरिक्त आयुक्त की भाजपा के पांच स्थानीय नेताओं ने पिटाई की थी. इससे साफ है कि भाजपा सरकार किस तरह घोर अराजकता औरअराजकता के माहौल में ओडिशा राज्य चला रही है. पुरी रथ यात्रा के दौरान हुई भगदड़ और ऐसे ही कई मुद्दों को मानसून सत्र में उठाया जाएगा.
सऊदी अरब के ‘स्लीपिंग प्रिंस’ अलवलीद बिन खालेद का 20 साल बाद कोमा में हुआ निधन, दशकों से जीवन और मृत्यु के बीच रहे थे जूझ

सऊदी अरब के युवराज अलवलीद बिन खालेद का शनिवार को निधन हो गया. युवराज अलवलीद बीते 20 वर्षों से कोमा में थे. इस वजह सेअलवलीद बिन खालेद को स्पीपिंग प्रिंस के नाम से भी जाना जाता था. साल 2005 में लंदन में एक कार हादसे में अलवलीद बिन खालेद गंभीर रूपसे चोटिल हुए थे. सिर में गहरी चोट लगने के बाद अलवलीद कोमा में चले गए थे. सऊदी प्रिंस अलवलीद बिन खालेद बिन तलाल का 36 साल कीउम्र में निधन हुआ। उनके परिवार ने इसकी पुष्टि कर दी है. 15 साल की उम्र में कोमा में गए प्रिंस अलवलीद ने कोमा में ही दुनिया को अलविदा कहाहै. युवराज के निधन पर उनके पिता ने बयान जारी कर कहा ‘खुदा की इच्छा और उनके आदेश में विश्वास रखने वाले दिलों और गहरे दुख के साथ, हमअपने प्यारे बेटे, प्रिंस अल-वलीद बिन खालिद बिन तलाल बिन अब्दुलअजीज अल सऊद के लिए शोक मनाते हैं. दो बार देखी गई थी शरीर में हलचलखुदा उस पर दया करें जिनका आज निधन हो गया’युवराज अलवलीद जब 15 साल के थे. तब लंदन में एक सैन्य कॉलेज में पढ़ाई के दौरान युवराजएक कार हादसे का शिकार हुए थे. इस हादसे में युवराज के सिर में गंभीर चोट लगी और उससे उनके मस्तिष्क में आंतरिक ब्लीडिंग हुई और वे कोमा मेंचले गए. बाद में युवराज को रियाद के किंग अब्दुलअजीज मेडिकल सिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया. जहां वे 20 साल तक मेडिकल सपोर्ट पररहे. इस दौरान एक दो बार उनके शरीर में हलचल देखी गई. लेकिन दुनिया भर के विशेषज्ञों को दिखाने के बाद भी युवराज कोमा से बाहर नहीं आपाए. युवराज के पिता प्रिंस खालेद बिन तलाल बेटे की जान बचाने की कोशिशों में लगे रहे और उन्होंने लाइफ सपोर्ट सिस्टम नहीं हटाने दिया. उनकाकहना था कि सिर्फ अल्लाह ही उनके बेटे की मौत का समय तय करेगा. सिर में लगी थी गंभीर चोटयुवराज अलवलीद बिन खालेद, तीन भाइयों में सबसे बड़े थे. हादसे में युवराज के सिर में गंभीर चोट लगी और उससे उनके मस्तिष्क में आंतरिकब्लीडिंग हुई और वे कोमा में चले गए. बाद में युवराज को रियाद के किंग अब्दुलअजीज मेडिकल सिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां वे 20 साल तक मेडिकल सपोर्ट पर रहे. अलवलीद बिन खालेद लंदन के एक सैन्य कॉलेज में पढ़ाई कर रहे थे, जब वे एक गंभीर कार हादसे का शिकार हुए. हादसे में उनके सिर में गंभीर चोट लगी और मस्तिष्क में आंतरिक रक्तस्राव हुआ. जिससे वे कोमा में चले गए। बाद में उन्हें सऊदी अरब के किंगअब्दुलअज़ीज़ मेडिकल सिटी, रियाद में भर्ती कराया गया, जहां वे लगातार 20 साल तक मेडिकल सपोर्ट पर रहे इस दौरान कई बार उनके शरीर मेंहलचल देखी गई. जिससे परिवार को उम्मीदें बंधीं दुनियाभर के विशेषज्ञों से इलाज कराया गया. लेकिन वे कोमा से बाहर नहीं आ सके. युवराज केपिता ने कभी भी लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटाने से इनकार कर दिया उनका मानना था.
कंगना रनौत ने मंडी आपदा को बताया ‘भारी-भरकम भूकंप’, सोशल मीडिया और कांग्रेस ने जताई नाराजगी

अभिनेत्री एवं मंडी की सांसद कंगना रनौत एक बार फिर अपने बयान से चर्चाओं में हैं. दिल्ली में एक एजेंसी को दिए इंटरव्यू में कंगना ने मंडी संसदीयक्षेत्र में आई आपदा को भारी-भरकम भूकंप बता दिया. इससे एक बार फिर वह सोशल मीडिया यूजर्स और कांग्रेस के निशाने पर हैं. इंटरव्यू में कंगना नेसंसद के सत्र को लेकर उत्साहित होने की बात कही. पीएम नरेंद्र मोदी की तारीफ भी की। मंडी संसदीय क्षेत्र में आई आपदा को भारी भरकम भूकंपबताते हुए कहा कि इस संबंध में अलग-अलग मंत्रालय से मिलने को लेकर काम किया जा रहा है. ऑपरेशन सिंदूर और विश्वभर में भारत की स्थिति कोलेकर भी खुशी जताई. तथ्यात्मक रुप से माना जा रहा है गलतबता दें कि पहले कंगना आपदा के बीच मंडी में न होने को लेकर सोशल मीडिया से लेकर कांग्रेस नेताओं के निशाने पर रहीं. बाद में स्थिति संभालनेआपदा प्रभावित क्षेत्र सराज में दौरा करते हुए उनके मीडिया को दिए बयान काफी चर्चा में रहे. अपने बयान में उन्होंने आपदा को लेकर कोई फंड न होनेकी बात कही थी. अब बादल फटने के बाद हुई तबाही को कंगना ने भारी भरकम भूकंप बता दिया है. यूजर्स वीडियो पर टिप्पणी करते हुए सांसद कीकार्यप्रणाली पर ही सवाल उठा रहे है और ज्ञान रखने की सलाह दे रहे हैं. सांसद कंगना रनौत ने मंडी संसदीय क्षेत्र में आई आपदा को भारी भरकमभूकंप बताते हुए कहा कि इस संबंध में अलग-अलग मंत्रालय से मिलने को लेकर काम किया जा रहा है. मंडी में हाल ही में बादल फटने और भूस्खलनजैसी घटनाओं ने भारी तबाही मचाई थी. लेकिन कंगना द्वारा इसे ‘भारी-भरकम भूकंप’ कहना तथ्यात्मक रूप से गलत माना जा रहा है. सोशल मीडिया पर दी तीखी प्रतिक्रियाएंसोशल मीडिया पर लोगों ने इस बयान पर तीखी प्रतिक्रियाएं दी हैं. यूज़र्स का कहना है कि एक सांसद को स्थिति की सटीक जानकारी औरसंवेदनशीलता होनी चाहिए। इससे पहले भी कंगना आपदा के वक्त मंडी में मौजूद न रहने को लेकर आलोचनाओं का शिकार हो चुकी हैं. हालांकिबाद में उन्होंने आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और सराज में मीडिया को दिए गए बयान में फंड की कमी की बात कही थी. अब उनके हालियाइंटरव्यू ने एक बार फिर उनकी कार्यशैली और जानकारी पर सवाल खड़े कर दिए हैं. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में यूजर्स ने ‘स्लीपिंगसांसद’, ‘फेक नॉलेज’, ‘भूकंप बनाम क्लाउडबर्स्ट’ जैसे कमेंट्स किए हैं। कई लोगों ने उन्हें जिम्मेदारी के साथ बयान देने की सलाह दी है. कंगना रनौतएक चर्चित चेहरा जरूर हैं, लेकिन अब जब वे सांसद की जिम्मेदारी निभा रही हैं तो उनसे सटीक जानकारी, संवेदनशीलता और जागरूकता की अपेक्षाहै. ऐसे में हर बयान केवल व्यक्तिगत राय नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधि की सार्वजनिक ज़िम्मेदारी बन जाता है.
सुधांशु त्रिवेदी का विपक्ष पर तीखा हमला “इतना गैर-जिम्मेदार विपक्ष पहले कभी नहीं देखा”, विदेश नीति को बताया ऐतिहासिक

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने शुक्रवार को विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि भारत ने पहले कभी इतना गैर-जिम्मेदार विपक्ष नहींदेखा. उन्होंने मोदी सरकार की विदेश नीति की भी प्रशंसा करते हुए इसे ऐतिहासिक बताया. उन्होंने यहां पार्टी कार्यालय में प्रेसवार्ता में कहा, ‘आज हमविपक्ष की ओर से जो देख रहे हैं वह पूरी तरह से गैर-जिम्मेदाराना है भारत ने पहले कभी ऐसा व्यवहार नहीं देखा।’उन्होंने कहा कि मोदी सरकार कीविदेश नीति बेहद कुशल और अभूतपूर्व है. सुधांशु त्रिवेदी ने ‘इंडिया’ गठबंधन पर निशाना साधते हुए कहा कि यह गठबंधन निराशाजनक है. उन्होंनेकहा, ‘जहां तक भाजपा का सवाल है भाजपा और राजग को मिले अभूतपूर्व और ऐतिहासिक जनादेश के बाद, तथाकथित ‘इंडिया’ गठबंधन निश्चितरूप से हताश एवं निराश है महाराष्ट्र में ‘इंडिया’ गठबंधन के लोग जिस तरह की राजनीति कर रहे हैं, वह चिंताजनक और दुखद है. ‘उन्होंने कहा, ‘देश मेंटकराव की राजनीति की शुरुआत महाराष्ट्र से होना निश्चित रूप से दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है, जहां से राष्ट्रवाद के कई स्वर उभरे हैं. 2024 के चुनाव केबाद भाजपा और राजग मजबूत एवं एकजुट होते दिख रहे हैं। दूसरी ओर, विपक्ष का गठबंधन टूटता और बिखरता दिख रहा है विपक्षी गठबंधन मेंटकराव साफ दिखाई दे रहा है. भारत की विदेश नीति हुई मजबूतउन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत की विदेश नीति मजबूत हुई है. अहमदाबाद विमान दुर्घटना की जांच के लिए न्यायिक आयोगके गठन की पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की मांग पर उन्होंने कहा कि विमान दुर्घटना एक अत्यंत तकनीकी मुद्दा है जिस पर केवल विषय विशेषज्ञ हीजानकारी दे सकते हैं. उन्होंने कहा, ‘इसके लिए अंतरराष्ट्रीय मानक हैं किसी भी हवाई दुर्घटना की जांच कैसे की जाती है. इसके मानक स्पष्ट हैं औरअंतरराष्ट्रीय संस्था स्थापित हैं. इसके बावजूद, इस दुखद घटना पर राजनीति करके कांग्रेस ने न केवल अपनी तुच्छ मानसिकता, बल्कि राहुल गांधी केप्रभाव से उत्पन्न अपनी अज्ञानता और मानसिक विकलांगता का भी परिचय दिया है. इससे पहले, सुधांशु त्रिवेदी ने पार्टी कार्यालय में एक राज्य स्तरीयमीडिया कार्यशाला को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में भारत ने ‘गुलाम मानसिकता’ को अपनाया, जबकि भाजपा सरकार नेभारतीय विचारधारा पर आधारित ‘स्वशासन व्यवस्था’ स्थापित की. पार्टी की ओर से जारी बयान में सुधांशु त्रिवेदी ने बताया, ‘1947 में अंग्रेजों सेआजादी मिली, 1977 में हम राजनीतिक रूप से आजाद हुए, 1990 के दशक में हम सांस्कृतिक रूप से आजाद हुए और आज हम वैचारिक लोकतंत्रके रूप में स्थापित हुए है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस और वामपंथी लोगों ने पाठ्यक्रमों में इस तरह की विषय वस्तु शामिल करवाई, जिससे भारतीय होनेपर ग्लानि और हिन्दू होने पर शर्म महसूस हो. टेक्स देना किया था स्वीकारउन्होंने कहा, ‘क्या कारण है कि महाराणा प्रताप को हारा हुआ पढ़ाया जाता रहा, क्या महाराणा प्रताप युद्ध क्षेत्र में वीर गति को प्राप्त हो गए थे. क्याउन्हें बंदी बना लिया गया था क्या उन्होंने टैक्स देना स्वीकार किया था, तो फिर कैसे महाराणा प्रताप की पराजय का इतिहास हमारी युवा पीढ़ी कोपढ़ाया गया. राणा सांगा के बारे में लुटेरों के लिखें झूठ को इतिहास बनाकर क्यों पढ़ाया गया?’उन्होंने कहा कि आज कांग्रेस के लोग शिक्षा केपाठ्यक्रम में परिवर्तन को लेकर सवाल उठा रहे है कि भगवाकरण हो रहा है. यह भगवाकरण नहीं, बल्कि भारत का प्रकटीकरण है। भाजपा नेता नेकहा, ‘पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने अपनी पुस्तक ‘डिस्कवरी आफ इंडिया’ में गजनी की मथुरा यात्रा का जिक्र करते हुए उसे कला प्रेमी बतादिया, जबकि महमूद गजनी के दरबारी इतिहासकार अल उतबी ने ‘तारीख-ए-यामिनी’ नाम के पुस्तक में लिखा है कि गजनी ने मथुरा की इमारतों एवंमंदिरों की भव्यता को देखकर कहा था कि ये इंसान की बनाई नहीं हो सकती, इसे देवताओं ने बनाया है, इसलिए इन्हें जमीदोज कर दिया जाए. भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि क्यों देश से नेहरू ने यह सच छुपाया और आक्रांताओं का महिमा मंडन किया.
फडणवीस के मज़ाक से सियासत में हलचल, उद्धव बोले चड्डी बनियान गिरोह की थी बात “जानें क्या है पूरा मामला”

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के एक ‘प्रस्ताव’ पर कुछ इस अंदाज में प्रतिक्रिया दी कि राज्य में सियासीउठापटक की अटकलें तेज हो गई हैं. दोनों पूर्व सहयोगियों की ऐसी टिप्पणियां कीं जो किसी महत्वपूर्ण संकेत की तरह प्रतीत हो रही हैं. हालांकिफडणवीस ने इस पर सफाई भी दी थी. उन्होंने अपनी उस टिप्पणी का हवाला देते हुए कहा था कि उद्धव जी के सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के साथफिर से जुड़ने की गुंजाइश है यह महज एक मजाक था. मुख्यमंत्री ने कहा था ‘उद्धव जी, 2029 तक सरकार बदलने की कोई गुंजाइश नहीं है. हमारेविपक्ष पक्ष में आने की गुंजाइश नहीं है. आपके पास यहां आने की गुंजाइश है. इस पर विचार किया जा सकता है. हम इसके बारे में अलग तरह सेसोच सकते हैं. शुक्रवार को पत्रकारों के एक सवाल पर फडणवीस ने कहा’आप हमारे चुटकुलों को गंभीरता से क्यों लेते हैं? उद्धव ने भी कहा है कि यहहल्के-फुल्के अंदाज में कहा गया था. हमारी चिंता मत कीजिए महायुति सक्षम हैं. अटकलों पर हुई चर्चा तेजइस बीच शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने गुरुवार को मुख्यमंत्री से मुलाकात भी की जिसके बाद कुछ तरह-तरह की अटकलों पर चर्चा शुरूहो गई. बाद में उद्धव के बेटे आदित्य ठाकरे ने कहा कि उनके पिता ने हाल के दिनों में चर्चा में रहे मराठी भाषा के मुद्दे पर चर्चा के लिए फडणवीस सेमुलाकात की थी. लगभग आधे घंटे तक चली इस बैठक में वर्ली विधायक आदित्य भी मौजूद थे. शुक्रवार को जब पत्रकारों ने उद्धव ठाकरे सेफडणवीस की पेशकश के बारे में पूछा तो शिवसेना (यूबीटी) नेता ने कहा’आपसे बात करने से पहले मैं प्रिंट मीडिया से बात कर रहा था. मैंने चड्डीबनियान गिरोह के बारे में बात की थी. चड्डी बनियान का भी एक विज्ञापन होता है यह अंदर की बात है. चड्डी बनियान’ का संदर्भ कांग्रेस नेता विजयवडेट्टीवार की एक टिप्पणी से था जिन्होंने विधानसभा में कहा था कि भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन ने हिंसा, कुशासन और भ्रष्टाचार कीसंस्कृति को बढ़ावा दिया है, जिससे महाराष्ट्र 20 प्रतिशत कमीशन वाला राज्य बन गया है. पुणे में मचाया था उत्पादवडेट्टीवार ने कहा, ‘कोयता गिरोह (कोयता चाकू रखने वाले गिरोह) ने पुणे में उत्पात मचाया था. ऐसे ही सत्तारूढ़ दल का अपना चड्ढी बनियान गिरोहहै, जो चीजें उनके हिसाब से नहीं होने पर हिंसा का सहारा लेता है.’उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली अविभाजित शिवसेना ने 2019 के विधानसभा चुनावके बाद मुख्यमंत्री पद साझा करने के विवाद को लेकर अपने लंबे समय के सहयोगी भाजपा से नाता तोड़ लिया था. अब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस केबयान के बाद महाराष्ट्र की सियासत फिर से गर्म हो गई है.अगले दिन उद्धव ठाकरे ने फडणवीस से लगभग 20–30 मिनट की बैठक की, जिसमेंआदित्य ठाकरे भी मौजूद थे. यह स्वागत भरा ‘फ्रेंडली एक्सचेंज’ बताया गया. जिसका मकसद मराठी भाषा से जुड़े मुद्दे थे उद्धव ने मीडिया को बतायाकि वह “चड्डी बनियान गिरोह” की बात कर रहे थे. यह कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार की परिभाषा थी. उन्होंने कहा कि महायुति मजबूत है और उन्होंनेमज़ाक को मज़ाक ही रहने दिया