अमेरिका में क्रिप्टो को मिला कानूनी दर्जा ट्रंप ने ‘जीनियस एक्ट’ पर किए हस्ताक्षर, स्टेबलकॉइन को मिला नियामक ढांचा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर से जुड़ी क्रिप्टोकरेंसी, जिसे स्टेबलकॉइन के नाम से भी जाना जाता है. के लिए एकनियामक व्यवस्था बनाने के लिए एक कानून पर हस्ताक्षर किए. विशेषज्ञ इस कानून को एक मील का पत्थर बता रहे हैं. इससे डिजिटल परिसंपत्तियोंको भुगतान करने और धन स्थानांतरित करने का एक रोजमर्रा का तरीका बनने का मार्ग प्रशस्त हो सकता है. ‘जीनियस एक्ट’ नामक यह विधेयक 308 बनाम 122 मतों से पारित हुआ और इसे लगभग आधे डेमोक्रेटिक सदस्यों और अधिकांश रिपब्लिकन ने समर्थन दिया. यह कानून क्रिप्टो समर्थकों केलिए एक बड़ी जीत ह वे लंबे समय से इस तरह के नियामक ढांचे की पैरवी कर रहे थे. ट्रंप ने कहा, यह हस्ताक्षर आपकी कड़ी मेहनत और अग्रणीभावना का एक बड़ा सत्यापन है. आम लोग अपनाएंगे ज्यादाइसमें कई क्रिप्टो अधिकारी शामिल हैं स्टेबलकॉइन्स को एक स्थिर मूल्य बनाए रखने के लिए डिजाइन किया गया है इनका उपयोग तेजी से बढ़ रहाहै. खासकर क्रिप्टो ट्रेडर्स द्वारा जो टोकन के बीच फंड ट्रांसफर करते हैं. उद्योग को उम्मीद है कि ये तुरंत भुगतान भेजने और प्राप्त करने के लिएमुख्यधारा में आ जाएंगे. नए कानून के अनुसार, हर स्टेबलकॉइन के पीछे असली और सुरक्षित संपत्ति होनी चाहिए. जैसे कि नकद डॉलर या सरकारीट्रेजरी बिल जो कंपनियां स्टेबलकॉइन जारी करेंगी. उन्हें हर महीने बताना होगा कि उनके पास कितना और किस तरह का भंडार (रिजर्व) है. क्रिप्टोकंपनियों का मानना है कि इस कानून से स्टेबलकॉइन पर लोगों का भरोसा बढ़ेगा और बैंक, दुकानदार और आम लोग इन्हें जादा अपनाएंगे. 122 मतों से हुआ पारित‘जीनियस एक्ट’ नामक यह विधेयक 308 बनाम 122 मतों से पारित हुआ और इसे लगभग आधे डेमोक्रेटिक सदस्यों और अधिकांश रिपब्लिकन नेसमर्थन दिया। यह कानून क्रिप्टो समर्थकों के लिए एक बड़ी जीत है. वे लंबे समय से इस तरह के नियामक ढांचे की पैरवी कर रहे थे. हर स्टेबलकॉइनको नकद डॉलर या अल्पकालिक ट्रेज़री बिल जैसे लिक्विड असेट्स द्वारा 1:1 मान्यता के साथ समर्थित होना चाहिए आलोचकों ने ज़ोर देकर कहा कियह बड़ी टेक कंपनियों को बैंक जैसे कार्यों का मौका देगा, और एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग व सुरक्षा के दृष्टिकोण से उच्च मानकों की कमी है GENIUS Act संघीय स्तर पर स्थिर स्टेबलकॉइन पर नियामक ढांचा स्थापित करने वाला पहला कानून है, जो पारदर्शिता, उपभोक्ता सुरक्षा व वित्तीय स्थिरता कोप्राथमिकता देता है. यह क्रिप्टो उद्योग के लिए बड़ी वैधता और मुख्यधारा अपनाने का मार्ग खोलता है. जिससे आगामी वर्षों में परिसंपत्तियों व लेन-देनकी दर में बड़ा उछाल आ सकता है.
भारत-पाक संघर्ष विराम पर ट्रंप के दावे से सियासत गरमाई, कांग्रेस ने मोदी सरकार पर लगाया ‘देश के सम्मान से समझौता’ का आरोप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत-पाकिस्तान संघर्ष विराम का श्रेय लेने पर एक बार फिर कांग्रेस ने केंद्र सरकार को घेरा है. कांग्रेस ने पीएम मोदीपर देश के सम्मान से समझौता करने का आरोप लगाया. कांग्रेस ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी ने व्यापार के लिए देश के सम्मान से समझौता क्योंकिया? दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर कहा कि मेरी वजह से ही भारत और पाकिस्तान संघर्ष विराम पर सहमत हुए. इस मुद्देपर कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी सरकार पर हमला बोला.ट्रंप के पोस्ट को लेकर कांग्रेस ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि ट्रंप ने कहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध में पांच जेट मार गिराए गए. उन्होंने 24वीं बार कहा कि मैंने व्यापार की धमकी देकर भारत-पाकिस्तान युद्ध रोक दिया. ट्रंप लगातार यह दोहरा रहे हैं और नरेंद्र मोदी चुप हैं नरेंद्रमोदी ने व्यापार के लिए देश के सम्मान से समझौता क्यों किया? कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि संसद का मानसून सत्र शुरू होने से ठीकदो दिन पहले, ट्रंप मिसाइल 24वीं बार फिर से उन्हीं दो संदेशों के साथ दागी गई. भारत- पाकिस्तान के बीत रोका गया युद्धपहला यह कि अमेरिका ने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध रोक दिया. दूसरा कि अगर युद्ध जारी रहा तो कोई व्यापार समझौता नहीं होगा. इसलिएअगर भारत और पाकिस्तान अमेरिका के साथ व्यापार समझौता करना चाहते हैं. तो उन्हें तत्काल युद्धविराम के लिए सहमत होना होगा.उन्होंने कहा कि इस बार राष्ट्रपति ट्रंप ने सनसनीखेज नया खुलासा किया कि हो सकता है कि पांच जेट मार गिराए गए हों. प्रधानमंत्री मोदी जिनकीराष्ट्रपति ट्रंप के साथ सितंबर 2019 में हाउडी मोदी और फरवरी 2020 में नमस्ते ट्रंप के समय से वर्षों की दोस्ती और गले मिलने का रिश्ता है को अबखुद संसद में स्पष्ट और दो टूक बयान देना होगा कि राष्ट्रपति ट्रंप पिछले 70 दिनों से क्या दावा कर रहे हैं? ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि हमने कई युद्धरोके. ये गंभीर युद्ध थे भारत और पाकिस्तान में जो चल रहा था। वहां से विमानों को मार गिराया जा रहा था. मुझे लगता है कि पांच जेट मार गिराएगए थे। ये दो परमाणु शक्ति संपन्न देश हैं. वे एक-दूसरे पर हमला कर रहे थे. परमाणु क्षणता हो सकती है पूरी तरह खत्मआप जानते हैं कि यह युद्ध का और भी खतरनाक हो सकता था. हमने हाल ही में ईरान में जो किया, आपने उसे देखा, जहां हमने उनकी परमाणु क्षमताको पूरी तरह से खत्म कर दिया. इसके उलट भारत और पाकिस्तान लड़ते जा रहे थे। वे पीछे हटने को तैयार नहीं थे. यह बढ़ता ही जा रहा था. हमनेइसे व्यापार के जरिए हल किया। हमने कहा कि एक व्यापार समझौता करते हैं। हम व्यापार समझौता नहीं कर रहे हैं, अगर आप ऐसे ही लड़ते रहेंगेतो. ट्रंप ने विकासशील देशों के समूह ब्रिक्स के सदस्यों से आयात पर 10% टैरिफ लगाने की अपनी धमकी दोहराई. उन्होंने यह भी कहा कि यदि येसमूह कभी सार्थक रास्ते पर आ भी गया तो भी यह बहुत दिन तक नहीं टिक पाएगा. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर कहा कि मेरी वजहसे ही भारत और पाकिस्तान संघर्ष विराम पर सहमत हुए. इस मुद्दे पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार को घेरा। कांग्रेस ने कहा कि पीएम मोदी ने देश के सम्मानसे समझौता किया.
बिहार में 125 यूनिट बिजली अब मुफ्त नीतीश सरकार का चुनावी तोहफा, 90% घरेलू उपभोक्ताओं को होगा सीधा फायदा

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले सीएम नीतीश कुमार ने सभी घरेलु उपभोक्ताओं को बड़ी सौगात दी है. अब बिहार में 125 यूनिट बिजली पर कोईशुल्क नहीं लगेगा. राज्य सरकार ने इसे शत-प्रतिशत सब्सिडी नाम दिया है. लेकिन, आम भाषा में कहें तो यह घरेलु उपभोक्ताओं को 125 यूनिटबिजली मुफ्त में मिलेगी. ऊर्जा मंत्री विजेंद्र यादव के अनुसार, बिहार में घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं की संख्या एक करोड़ 86 लाख 60 हजार है। इनमें125 यूनिट तक बिजली की मासिक खपत करने वाले उपभोक्ताओं की संख्या एक करोड़ 67 लाख 94 हजार है जो कुल घरेलू उपभोक्ताओं का 90 प्रतिशत है इन उपभोक्ताओं को अब बिजली का बिल नहीं देना पड़ेगा. इससे अधिक यानी 125 यूनिट से अधिक बिजली की खपत करने पर बिजलीपर पहले से लागू टैरिफ के हिसाब से बिजली का बिल देना होगा. इधर, सरकार के इस नए एलान के बाद उपभोक्ताओं के खुशी की लहर है. लेकिनकुछ सवाल भी है. जिनके सवाल लोगों को नहीं मिले हैं. 125 यूनिट से ज्यादा होगी खपतऊर्जा विभाग ने इन सवालों का जवाब दिया ऊर्जा विभाग के अनुसार, सरकार ने 125 यूनिट बिजली का बिल शून्य कर दिया है इस पर कोई भी टैक्सनहीं लगेगा 125 यूनिट से अधिक जितनी खपत होगी, उतना का भी बिल होगा. जैसे 200 यूनिट खपत होने पर मात्र 75 यूनिट बिजली का ही शुल्कदेना होगा. नहीं, अगर अलग-अलग मकान या फ्लैट में एक ही नाम से कनेक्शन है तो 125 यूनिट मुफ्त बिजली का लाभ एक जगह मिलेगा. अगरमकान मालिक और किराएदार के नाम से अलग-अलग कनेक्शन है तो इसका लाभ दोनों को मिलेगा. आपको भी 125 यूनिट बिजली का बिल नहींदेना होगा. शेष बची 200 यूनिट बिजली पर पहले 100 यूनिट के लिए 4.12 रुपये और बाकी के 100 यूनिट पर 5.52 रुपये के हिसाब से बिलदेना होगा. यानी आपको विद्युत शुल्क के साथ 1124 रुपया भुगतान करना होगा. वहीं ग्रामीण क्षेत्र में आपको शहरी क्षेत्र की तुलना में लगभग आधीराशि का भुगतान करना होगा. क्योंकि ग्रामीण क्षेत्र में बिजली का दर कम है। इसमें एक से 200 यूनिट बिजली खपत करने पर 2.45 रुपये ही लगतेहैं। यहां पहले से 125 यूनिट बिजली का बिल शून्य रहेगा. बाकी बची 200 यूनिट बिजली के लिए 570 रुपये का भुगतान करना होगा. शहरी क्षेत्र मेंप्रति किलोवाट 80 रुपये के हिसाब से फिक्स चार्ज देना होता है. देना पड़ता है फिक्स चार्जवहीं ग्रामीण क्षेत्रों में 40 रुपये प्रतिकिलोवाट के हिसाब से फिक्स चार्ज देना पड़ता है. उर्जा मंत्री विजेंद्र यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री विद्युत उपभोक्तासहायता योजना के विस्तारीकरण के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए अतिरिक्त रुपये 3797 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है. इस वर्ष 19 हजार 792 करोड़ रुपये के वित्तीय भार का वहन राज्य सरकार को करना पड़ेगा। अगले वित्तीय वर्ष से यह राशि बढ़ती जाएगी. कैबिनेट में लिए निर्णयके अनुसार, इसके साथ ही घरेलू उपभोक्ताओं को न्यूनतम 1.1 किलोवाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने के लिए कुटीर ज्योति उपभोक्ताओंको पूर्ण वित्तीय सहायता एवं अन्य घरेलू उपभोक्ताओं को सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की भी स्वीकृति दी गई है. उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के सभी घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं को 125 यूनिट प्रति माह तक यादि शत-प्रतिशत अनुदान पर बिजली दी जाती है।उनके घर की छतों पर अथवा सार्वजनिक स्थलों पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाया जाता है. तो राज्य के सभी घरेलू उपभोक्ताओं को विशेष कर कम बिजलीखपत करने वाले सभी उपभोक्ताओं को आर्थिक लाभ होगा। इससे न सिर्फ इन घरेलू उपभोक्ताओं को बिना रूके बिजली मिलेगी. बल्कि सौर ऊर्जाउत्पाद को भी बढ़ावा मिलेगा.
उत्तराखंड में ‘ऑपरेशन क्लीन’ शुरू, नकली दवाओं के खिलाफ राज्यव्यापी कार्रवाई STF और CNB ने पकड़ी करोड़ों की फर्जी दवाएं

प्रदेश में नकली व खराब गुणवत्ता वाली दवाओं के खिलाफ शनिवार से ऑपरेशन क्लीन अभियान चलाया जाएगा. इस अभियान के तहत फार्माकंपनियों, थोक व फुटकर विक्रेता दुकानों का निरीक्षण कर सैंपल जांच के लिए भेजे जाएंगे. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर खाद्य संरक्षा एवंऔषधि प्रशासन विभाग ने अभियान के लिए क्विक रिस्पांस टीम (क्यूआरटी) गठित की है। सहायक औषधि नियंत्रक हेमंत सिंह नेगी की अध्यक्षता मेंगठित टीम में आठ सदस्य शामिल हैं. स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया कि अभियान का उद्देश्य प्रदेश को नशामुक्त उत्तराखंड बनाने केसाथ गुणवत्ता युक्त दवाएं उपलब्ध कराना है. औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 और नियम 1945 के तहत अभियान चलाया जाएगा. इसके तहत प्रदेशभर में नकली दवा बनाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। नकली, अधोमानक, मिसब्रांडेड व मादक औषधियों कानिर्माण, भंडारण के साथ विक्रय करने वालों की निगरानी कर कार्रवाई की जाएगी. क्षेत्रों में किया जाएगी सघन निगरानीइसके अलावा भारत-नेपाल सीमा के साथ अन्य सीमावर्ती क्षेत्रों में सघन निगरानी की जाएगी. स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया, क्यूआरटी में सहायक औषधि नियंत्रक मुख्यालय डॉ. सुधीर कुमार, वरिष्ठ औषधि निरीक्षक मुख्यालय नीरज कुमार, वरिष्ठ औषधि निरीक्षक नैनीतालमीनाक्षी बिष्ट, वरिष्ठ औषधि निरीक्षक टिहरी सीपी नेगी, वरिष्ठ औषधि निरीक्षक हरिद्वार अनिता भारती, औषधि निरीक्षक देहरादून मानवेन्द्र सिंह राणा, औषधि निरीक्षक मुख्यालय निशा रावत, औषधि निरीक्षक मुख्यालय गौरी कुकरेती शामिल हैं. अभियान के तहत जिलों को औषधि निरीक्षण कार्य केलिए दो श्रेणियों में बांटा गया है. इसमें श्रेणी-एक में देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल, ऊधमसिंह नगर, पौड़ी, और श्रेणी-दो में अल्मोड़ा, रुद्रप्रयाग, टिहरी, उत्तरकाशी, चंपावत शामिल हैं. प्रत्येक सप्ताह जिलों से प्राप्त औषधियों के नमूनों की प्राथमिकता के आधार पर जांच की जाएगी. हेल्पलाइन 18001804246 किया गया शुरूविभाग ने नकली दवाइयों की सूचना के लिए टोल फ्री हेल्पलाइन 18001804246 शुरू किया है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर खाद्यसुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने क्विक रिस्पांस टीम (QRT) बनाई है. जिसका नेतृत्व सहायक औषधि नियंत्रक हेमंत सिंह नेगी करेंगे। टीम में 8 सदस्य शामिल हैं लक्ष्य और नियमन: अभियान के अनुसार नकली, अधोमानक, मिसब्रांडेड और मादक औषधियों की रचना, भंडारण और बिक्री परसख्त नजर रखी जाएगी, और ये कार्रवाई औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 एवं नियम, 1945 के तहत होगी STF की गिरफ्तारीदेहरादून के सेलाकुई औद्योगिक क्षेत्र में नकली दवाओं के एक रैकेट का खुलासा हुआ है. जिसमें डीवी डेयल गुप्ता, एक फार्मा कंपनी मालिक, कोSTF ने गिरफ्तार किया. उन्होंने 1.4 करोड़ फर्जी टैबलेट्स और 2 लाख कैप्सूल्स सप्लाई किए थे राष्ट्रीय स्तर की कार्रवाई CNB और अन्य एजेंसियोंने सहारनपुर (UP) और उत्तराखंड में झूठी दवाओं के खिलाफ छापे मारे, ₹3 करोड़ की नकली दवा जब्त की गई – 5 लोग गिरफ्तार हुए.
महाराष्ट्र राजनीति में उठे नए सियासी सुराग, फडणवीस-उद्धव की मुलाकात ने बढ़ाई गठबंधन की संभावनाएं

महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर करवट लेती दिख रही है. बुधवार को विधानसभा में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे कोअप्रत्यक्ष रूप से सत्ताधारी पक्ष में शामिल होने का प्रस्ताव दिया था इसके बाद दोनों नेता एक-दूसरे से मिलते नजर आए थे. वहीं ठीक एक दिन बादगुरुवार को दोनों नेताओं की मुलाकात विधान परिषद के सभापति राम शिंदे के कार्यालय में हुई. यह बैठक करीब 20 मिनट तक चली. इस बैठक मेंआदित्य ठाकरे भी मौजूद थे. इन दो मुलाकातों ने राजनीतिक गलियारों में नई संभावनाओं को जन्म दे दिया है. इस मुलाकात पर शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने कहा कि आज हमने मुख्यमंत्री को एक संकलन दिया है. जिसमें लिखा है कि पहली कक्षा से तीन-भाषा नीति क्यों नहीं होनीचाहिए. बता दें कि बुधवार को विधानसभा में फडणवीस ने साफ कहा था कि भारतीय जनता पार्टी 2029 तक विपक्ष में जाने वाली नहीं है. दोनों में आ गई दरारउन्होंने उद्धव ठाकरे को इशारों में संदेश दिया था कि वह चाहें तो किसी अलग रास्ते से सत्तापक्ष में आ सकते हैं. उनका यह बयान ऐसे समय आया हैजब उद्धव ठाकरे लगातार गठबंधन सरकार की तीन-भाषा नीति को लेकर आलोचना कर रहे हैं. शिवसेना और भाजपा ने 25 साल तक साथ मिलकरमहाराष्ट्र में राजनीति की। लेकिन 2014 में सीटों के बंटवारे को लेकर दोनों में दरार आ गई. 2019 में उद्धव ठाकरे ने भाजपा से नाता तोड़कर कांग्रेसऔर एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बनाई. लेकिन 2022 में एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद सरकार गिर गई और फडणवीस ने शिंदे के साथमिलकर सत्ता संभाली. हाल के दिनों में उद्धव ठाकरे और उनके चचेरे भाई राज ठाकरे के बीच भी नजदीकियां बढ़ी हैं. 5 जुलाई को दोनों ने पहली बारदो दशक बाद एक मंच साझा किया। यह मौका था महाराष्ट्र सरकार द्वारा स्कूलों में हिंदी को तीसरी भाषा बनाने वाले दो आदेशों को वापस लेने केजश्न का. मुलाकातों को लेकर अटकलें हुई फिर से तेजइससे पहले अप्रैल में राज ठाकरे ने कहा था कि दोनों भाइयों के बीच पुरानी बातें तुच्छ थीं और मराठी मानूस के लिए एक होना जरूरी है. फडणवीसऔर उद्धव की मुलाकातों को लेकर अब यह अटकलें तेज हो गई हैं कि क्या दोनों पुराने साथी एक बार फिर साथ आ सकते हैं. खास बात यह है किफडणवीस का बयान और फिर उनकी मुलाकात ऐसे समय हुई है जब उद्धव ठाकरे फडणवीस सरकार पर तीखे हमले कर रहे हैं और एमएनएस के साथतालमेल की चर्चा चल रही है. राज और उद्धव के बीच बढ़ती नजदीकियों ने भाजपा को सोचने पर मजबूर किया है. अगर मराठी वोट बैंक को लेकरठाकरे बंधु एक हो जाते हैं तो भाजपा को 2029 की राजनीति में नुकसान हो सकता है। इसलिए फडणवीस की कोशिश यही मानी जा रही है किकिसी भी हालत में उद्धव को अपने पाले में वापस लाया जाए. महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल उस वक्त तेज हो गई. जब पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरेऔर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बीच बुधवार को करीब 20 मिनट की मुलाकात हुई। यह मुलाकात विधान परिषद के सभापति के कार्यालय में हुई. एक दिन पहले विधानसभा सत्र के दौरान फडणवीस ने उद्धव को साथ आने का प्रस्ताव भी दिया था.
महाराष्ट्र विधानसभा में ‘राइट टू रिप्लाई’ विवाद, भास्कर जाधव ने अध्यक्ष पर पक्षपात का लगाया आरोप

महाराष्ट्र विधानसभा में गुरुवार को सत्र के दौरान विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।पूरा मामला ‘राइट टू रिप्लाई’ यानी जवाबदेने के अधिकार को लेकर था. जिस पर शिवसेना (यूबीटी) के विधायक भास्कर जाधव ने विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर पर पक्षपात का गंभीरआरोप लगाया। पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने विधानसभा नियम 293 के तहत चल रही बहस का जवाब दिया. इसनियम के तहत सार्वजनिक महत्व के मुद्दों पर चर्चा की जा सकती है। जैसे ही शिंदे ने अपना जवाब पूरा किया. शिवसेना (यूबीटी) के विधायक भास्करजाधव खड़े हो गए और जवाब का जवाब देने की मांग की. भास्कर जाधव ने अध्यक्ष से अनुरोध किया कि उन्हें भी शिंदे के जवाब पर प्रतिक्रिया देने काअधिकार मिलना चाहिए. लेकिन विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने कहा कि यह अधिकार केवल उसी सदस्य को होता है जिसने बहस की शुरुआतकी हो. चूंकि आदित्य ठाकरे उस समय सदन में मौजूद नहीं थे. इसलिए जाधव को बोलने की अनुमति नहीं दी गई. भास्कर जाधव ने जताई नाराजगीइस पर भास्कर जाधव ने नाराजगी जताई. जिससे सत्ता पक्ष की शिवसेना के सदस्य विरोध में खड़े हो गए. हंगामे की स्थिति बनने पर अध्यक्ष ने सदनकी कार्यवाही दस मिनट के लिए स्थगित कर दी। सदन दोबारा शुरू होने पर मंत्री शंभुराज देसाई ने जाधव और ठाकरे पर ‘कुर्सी’ और सत्ता पक्ष की ओरइशारे करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि इस तरह का व्यवहार स्वीकार्य नहीं है. उपमुख्यमंत्री शिंदे ने भी कहा कि भास्कर जाधव ने खुद कोनिलंबित करने की चुनौती दी थी. जो सदन की गरिमा के खिलाफ है वहीं विपक्ष के नेता अजॉय चौधरी ने कहा कि बहस शुरू करने वाले सदस्य कुछसमय के लिए बाहर गए थे. ऐसे में दूसरे सदस्य को बोलने का अवसर मिलना चाहिए. उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास सरकार की प्रतिक्रिया पर जवाबदेने का अधिकार है. विधानसभा अध्यक्ष नार्वेकर ने स्पष्ट किया कि सदन की प्रक्रिया का अपमान करना, पूरी विधानसभा का अपमान है. उन्होंने कहाकि वह आदित्य ठाकरे को जवाब देने का अधिकार देने को तैयार हैं. बशर्ते वे सदन में उपस्थित हों। इसके बाद भास्कर जाधव ने मीडिया से बातचीत मेंकहा कि स्पीकर ने पक्षपातपूर्ण तरीके से काम किया और उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि अध्यक्ष विपक्ष के अधिकारोंकी रक्षा नहीं कर रहे हैं और वे सरकार का हिस्सा बनकर व्यवहार कर रहे हैं. राज्य से जुड़े मुद्दों पर देना था जवाबजाधव ने कहा कि उपमुख्यमंत्री को पूरे राज्य से जुड़े मुद्दों का जवाब देना था. लेकिन उन्होंने केवल मुंबई से जुड़ी बातों पर ध्यान केंद्रित किया. उन्होंनेकहा कि ठाणे, परभणी, शिक्षा, आंगनवाड़ी, पानी और स्वच्छता जैसे कई अहम मुद्दों को शिंदे ने नजरअंदाज कर दिया. उन्होंने शिंदे के भाषण कोनझूठऔर भ्रामकनबताते हुए कहा कि सरकार की जबावदेही तय करने के लिए विपक्ष का बोलना जरूरी होता है। लेकिन जब उन्हें बोलने नहीं दिया गया. तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। जाधव ने आरोप लगाया कि स्पीकर अब खुद को सदन के तटस्थ संरक्षक की बजाय सरकार का हिस्सासमझते हैं. उन्होंने कहा कि अध्यक्ष की भूमिका निष्पक्षता की होनी चाहिए. लेकिन वे विपक्ष को बोलने का समान अवसर नहीं दे रहे हैं. विधानसभा मेंयह घटनाक्रम दिखाता है कि सत्ता और विपक्ष के बीच अब सिर्फ विचारों का मतभेद नहीं, बल्कि प्रक्रिया को लेकर भी बड़ा टकराव बनता जा रहा है।महाराष्ट्र विधानसभा में ‘राइट टू रिप्लाई’ को लेकर जोरदार हंगामा हुआ. शिवसेना (यूबीटी) विधायक भास्कर जाधव ने विधानसभा अध्यक्ष राहुलनार्वेकर पर पक्षपात का आरोप लगाया. उपमुख्यमंत्री शिंदे के जवाब पर विपक्ष बोलना चाहता था लेकिन अनुमति न मिलने पर सदन स्थगित हो गया.
PM मोदी के मोतिहारी दौरे के दौरान यूट्यूब लाइव पर धमकी भरे कमेंट, सुरक्षा एजेंसियां हुई सतर्क

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज बिहार और पश्चिम बंगाल के दौरे पर हैं दौरे के बीच उनके ही पेज पर चल रहे लाइव में एक शख्स ने धमकी भरे कमेंट किएहैं. मोतिहारी में उनकी सभा के लिए जो लिंक जेनरेट किया गया है. उस पर समर्थन-विरोध के संदेशों के बीच एक यूजर ने कई बार ऐसी बातें लिखी हैंजो जांच का विषय हैं।28.5 मिलियन सब्सक्राइबर वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यूट्यूब पेज पर मोतिहारी के कार्यक्रम का लिंक लाइव होने के बादएक यूजर आदित्य सिन्हा के नाम से कई बार चेतावनी भरे संदेश दिए गए. ये सभी मैसेज रोमन में लिखे गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार कोदोपहर होने के पहले मोतिहारी पहुंचे. यहां पीएम मोदी, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी व विजय कुमार सिन्हा के साथ रोड शोकरते हुए सभा के मंच तक पहुंचे. मंच पर राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के साथ केंद्रीय मंत्रियों की कतार भी मौजूद है. बिहार में कार्यक्रम के बादप्रधानमंत्री बंगाल भी जाएंगे. गठबंधन के चेहरे के रुप में आए थे पीएम बिहार2014 में गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए प्रधानमंत्री पद पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के चेहरे के रूप में नरेंद्र मोदी बिहार आए थे. इस दौरान पटना केगांधी मैदान में बम धमाकों के बीच उन्होंने सभा की थी उन धमाकों के दोषी पकड़े जा चुके हैं. प्रधानमंत्री के 28.5 मिलियन सब्सक्राइबर वालेआधिकारिक यूट्यूब चैनल पर मोतिहारी कार्यक्रम का लाइव लिंक उपलब्ध कराया गया था. इस लाइव स्ट्रीम पर ‘आदित्य सिन्हा’ नामक यूजर द्वाराकई बार धमकी भरे और चेतावनी वाले संदेश पोस्ट किए गए. जो प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बने हैं. ये संदेश रोमन लिपिमें लिखे गए थे और उनके कंटेंट की जांच की जा रही है ताकि कोई भी सुरक्षा जोखिम को तुरंत टाला जा सके. प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 में भी गुजरातके मुख्यमंत्री के तौर पर बिहार का दौरा किया था. उस दौरान पटना के गांधी मैदान में हुई बम धमाकों के बावजूद उन्होंने सभा को जारी रखा था. आजके दौर में भी सुरक्षा एजेंसियां बेहद सतर्क हैं. खासकर जब प्रधानमंत्री बड़े जनसभा कार्यक्रमों में हिस्सा लेते हैं. मोतिहारी में इस बार सुरक्षा के व्यापकइंतजाम किए गए थे. ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके मोतिहारी के बाद प्रधानमंत्री मोदी का अगला पड़ाव पश्चिम बंगाल है. जनता से करेंगें सीधे संवादयहां वे आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर जनता से सीधे संवाद करेंगे. पश्चिम बंगाल में राजनीतिक गतिविधियां तीव्र हैं और मोदी का यह दौराबीजेपी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इस दौरे के दौरान मोदी कई जनसभाओं और कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे, जिससे उनकी पार्टी को चुनावी बढ़तमिलने की उम्मीद है। बिहार में पीएम मोदी के साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और अन्य वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे, जो बिहारमें एनडीए गठबंधन की ताकत का परिचय देता है. मंच से प्रधानमंत्री ने विकास, रोजगार, और भ्रष्टाचार मुक्त शासन के मुद्दों पर जोर दिया औरप्रदेशवासियों को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाने का भरोसा दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बिहार और पश्चिम बंगाल दौरा राजनीतिकसक्रियता के साथ-साथ सुरक्षा के लिहाज से भी संवेदनशील है. यूट्यूब लाइव पर मिली धमकियों ने सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता बढ़ा दी है. इसकेबावजूद मोदी की सभाओं में भारी जनसमर्थन और राजनीतिक संगठनों की एकजुटता साफ नजर आ रही है। इस दौरे से आगामी चुनावों की दिशा परभी प्रभाव पड़ेगा.
ईडी के जरिए कांग्रेस पर मंथली अटैक? मोदी-शाह पर के सी वेणुगोपाल का बड़ा आरोप, बघेल के बेटे की गिरफ्तारी से सियासत गरम

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने एक बार फिर मोदी सरकार पर बड़ा आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीऔर गृह मंत्री अमित शाह ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को हर महीने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और उनके परिवार पर कार्रवाई करने का काम सौंप दियाहै. आगे उन्होंने लिखा कि रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ ईडी की नई कार्रवाई सिर्फ एक राजनीतिक प्रतिशोध है और डराने-धमकाने का एक निरर्थक प्रयासहै. शुक्रवार को सुबह छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे के ठिकानों पर भी छापा मारा गया. प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने छत्तीसगढ़ केपूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल के निवास पर छापामारी की। यह कार्रवाई राज्य में चल रहे करोड़ों के कथित शराब घोटाले की जांचके तहत की गई. एक्स पर लिखा गया ईडी आ गईईडी का कहना है कि इस घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध कमीशन के जरिए मोटी रकम इकट्ठा की गई. भूपेश बघेल के कार्यालय की ओर से एक्सपर लिखा गया कि ईडी आ गई है. आज विधानसभा सत्र का अंतिम दिन है तमनार में अडानी के लिए पेड़ काटे जाने का मुद्दा उठाया जाना था. लेकिन‘साहब’ ने ईडी को भेज दिया. बघेल का आरोप है कि यह सब सरकार की आलोचना को दबाने की कोशिश है। ईडी ने इसी साल मार्च में बघेल औरउनके बेटे के निवास से 30 लाख रुपये जब्त किए थे। वह कार्रवाई भी इसी शराब घोटाले से जुड़ी थी. तब राज्य के अलग-अलग 14 स्थानों परछापेमारी की गई थी. ईडी का कहना है कि इस मामले में कई बिचौलियों और अधिकारियों की भूमिका की जांच की जा रही है. रॉबर्ट वाड्रा से ईडी कीपूछताछ के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है. केसी वेणुगोपाल ने कहा कि मोदी-शाह ने ईडी को कांग्रेस नेताओं पर हर महीने कार्रवाईका टारगेट दिया है. भूपेश बघेल के घर हुई छापेमारीहालांकि इसके बाद छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे के घर भी छापेमारी हुई. इसको लेकर भी पूर्व सीएम ने भाजपा पर हमला बोला है. कांग्रेस इस गिरोह की कार्रवाई को “विधानसभा में निष्पक्ष आवाज दबाने की कोशिश” मान रही है. क्योंकि छापे समय की Assembly सत्र से कईमुद्दों (जैसे अडानी के लिए गड़बड़ी) से ध्यान हटाने के लिए किए गए लग रहे हैं. भाजपा की ओर से कहा जा रहा है कि ईडी की कार्रवाई पूरी तरहकानूनी आधार पर आधारित है और इसमें कोई सियासी मिलीभगत नहीं है। के.सी. वेणुगोपाल उस ट्रेंड को रेखांकित कर रहे हैं. जिसमें वे कहते हैं किप्रधानमंत्री और गृह मंत्री सीधे तौर पर केंद्र में बैठकर ईडी को कांग्रेस पर नियमित हमले का एजेंडा दे रहे हैं. हालिया वाड्रा मामले और बघेल के बेटे कीगिरफ्तारी को वे इस रणनीति की कड़ी मान रहे हैं इस मामले पर बड़ा राजनीतिक हल्ला मचा चुका है. छत्तीसगढ़ विधानसभा में प्रदर्शन और भाजपा–कांग्रेस के बीच तीखी बहस तूल पकड़ चुकी है.
जमीन के बदले नौकरी घोटाले में लालू यादव को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, कार्यवाही पर रोक से इनकार

जमीन के बदले नौकरी घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राजद सुप्रीमो लालू यादव को करारा झटका दिया है. अदालत ने लालू प्रसाद यादव केखिलाफ निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. साथ ही दिल्ली हाईकोर्ट को मामले की सुनवाई में तेजी लाने कानिर्देश दिया है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत की कार्यवाही में पेशी से छूट देते हुए लालू यादव को थोड़ी राहत जरूर दी है. न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ लालू प्रसाद यादव की याचिका पर सुनवाई कर रही थी. पीठ ने दिल्ली हाई कोर्ट से सीबीआईकी प्राथमिकी रद्द करने की उनकी याचिका पर सुनवाई में तेजी लाने का अनुरोध किया. बता दें कि आरजेडी सुप्रीमो बीते दिन ही राहत की मांग लिएसुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे. इससे पहले लालू यादव की इस मांग को दिल्ली हाईकोर्ट ने राहत देने से इनकार कर दिया था. सीबीआई को किया था नोटिस जारीदिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा था कि कार्यवाही पर रोक लगाने का कोई ठोस कारण नहीं है. उच्च न्यायालय ने सीबीआई को नोटिस जारी किया थाऔर सुनवाई 12 अगस्त के लिए स्थगित कर दी थी. अपनी याचिका में लालू प्रसाद यादव ने सीबीआई की एफआईआर और 2022, 2023 और2024 में दायर तीन आरोपपत्रों और संज्ञान आदेशों को रद्द करने की मांग की. उन्होंने कहा है कि रिपोर्ट 14 साल की देरी से 2022 में दर्ज की गई. जबकि सीबीआई ने प्रारंभिक पूछताछ और जांच सक्षम अदालत के समक्ष क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने के बाद बंद कर दी गई थी. उन्होंने कहा है किपिछली जांच और उसकी क्लोजर रिपोर्ट को छुपाकर नई जांच शुरू करना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है. उन्होंने तर्क दिया है कि उनको अवैधजांच से कष्ट सहना पड़ रहा है. जो निष्पक्ष जांच के उनके मौलिक अधिकार का उल्लंघन है. वर्तमान जांच और पूछताछ दोनों ही गैर-कानूनी हैं. क्योंकिदोनों ही अनिवार्य अनुमोदन के बिना शुरू की गई हैं। इस तरह की मंजूरी के बिना की गई कोई भी जांच शुरू से ही अमान्य होगी। अधिकारियों नेबताया कि यह मामला मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित भारतीय रेलवे के पश्चिम मध्य क्षेत्र में ग्रुप-डी की नियुक्तियों से संबंधित है. यह नियुक्ति 2004 से 2009 के बीच लालू के रेल मंत्री रहने के दौरान की गई थी. उपहार में दिए या किए हस्तांतरितइन नियुक्तियों के बदले में लोगों ने राजद सुप्रीमो के परिवार या सहयोगियों के नाम पर जमीन के टुकड़े उपहार में दिए या हस्तांतरित किए. 18 मई2022 को लालू और उनकी पत्नी, दो बेटियों, अज्ञात सरकारी अधिकारियों और निजी व्यक्तियों सहित अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था. इससे पहले कथित जमीन के बदले नौकरी घोटाले से जुड़े एक मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने 14 मई को दिल्ली की एक अदालत को बताया था किराष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव पर मुकदमा चलाने के मंजूरी मिल गई है. यह घोटाला उस समय हुआ था जब लालू प्रसाद केंद्रीयरेल मंत्री थे. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 8 मई को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लालू पर मुकदमा चलाने की अनुमति दी थी. राष्ट्रपति ने सीआरपीसी की धारा197(1) (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 218) के तहत अनुमति प्रदान की थी। जमीन के बदले नौकरी मामले में लालू प्रसादयादव को दिल्ली हाईकोर्ट के बाद अब सुप्रीम कोर्ट से भी झटका लगा है. सुप्रीम कोर्ट ने मामले में निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाने कीउनकी मांग खारिज कर दी है.
राहुल गांधी का हमला RSS‑CPM ‘जनता के लिए भाव‑विहीन’, वाड्रा मामले को बताया ‘राजनीतिक विरोध’ जानें क्या है पूरा मामला

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और माकपा लोगों के बारे में नहीं सोचते हैं. उन्होंने कहा कि अगर कोई जनताके बारे में नहीं सोचता और उनसे नहीं जुड़ पाता तो वह नेता नहीं बन सकता. शुक्रवार को राहुल गांधी केरल के कोट्टायम में राज्य के पूर्व सीएम ओमानचांडी की दूसरी पुण्यतिथि के कार्यक्रम में शामिल हुए. राहुल गांधी ने कहा कि ‘मेरी संघ और माकपा से वैचारिक लड़ाई है. लेकिन मेरी सबसे बड़ीशिकायत ये है कि ये लोगों के बारे में नहीं सोचते. उनके मन में जनता के लिए कोई भावना नहीं है. राहुल गांधी ने कहा कि ‘मेरी यही सबसे बड़ीशिकायत है कि अगर आप राजनीति में हैं तो लोग क्या सोचते हैं. हिम्मत और गरिमा के साथ करते रहेगे ऐसाउसे महसूस करें उनकी बात सुनें और उन तक पहुंचने की कोशिश करें. लेकिन भारतीय राजनीति की त्रासदी है कि आज बहुत कम लोग हैं जो असल मेंदूसरों की भावनाओं का ख्याल रखते हैं. हरियाणा के शिकोहपुर में एक जमीन सौदे में कथित अनियमितताओं से जुड़े धन शोधन के एक मामले मेंप्रवर्तन निदेशालय ने रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ आरोप-पत्र दायर किया है. इसे लेकर ही राहुल गांधी ने सरकार पर निशाना साधा है. ‘एक्स’ पर साझाएक पोस्ट में उन्होंने कहा ‘मेरे बहनोई को पिछले 10 साल से यह सरकार परेशान कर रही है. यह हालिया आरोप-पत्र उसी प्रताड़ना अभियान का एकऔर हिस्सा है. मैं रॉबर्ट, प्रियंका और उनके बच्चों के साथ खड़ा हूं क्योंकि उन्हें दुर्भावनापूर्ण, राजनीतिक रूप से प्रेरित एक और हमला झेलना पड़ रहाहै. मुझे पता है कि वे सभी किसी भी तरह की मुसीबत का सामना करने के लिए पर्याप्त बहादुर हैं. वे हिम्मत और गरिमा के साथ ऐसा करते रहेंगे. सच्चाई की होगी जीतलोकसभा में विपक्ष के नेता ने कहा, अंततः सच्चाई की जीत होगी. राहुल गांधी ने कहा कि ‘मेरी यही सबसे बड़ी शिकायत है कि अगर आप राजनीतिमें हैं तो लोग क्या सोचते हैं. उसे महसूस करें उनकी बात सुनें और उन तक पहुंचने की कोशिश करें. ‘राहुल गांधी ने RSS-CPM पर जनभावनाओं कीकमी का आरोप लगाते हुए चुनावी राजनीति में सच्चे नेता के लिए ‘जन-समवेदना’ को ज़रूरी बताया. वहीं, वाड्रा के समर्थन में बयान देकर उन्होंने ED की कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध बताते हुए केंद्र पर दबाव बनाए रखने का प्रयास किया है. उन्होंने बताया कि राजनीति में जो नेता जनता के भावको समझ नहीं सकता, वह नेता नहीं बन सकता. वाड्रा के खिलाफ ED की नवीनतम कार्रवाई पर राहुल ने केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार किया.उन्होंनेयह बयान पूर्व मुख्यमंत्री ओमान चांडी की पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में दिया.रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ ED द्वारा दाखिल चार्जशीट को राहुल ने “10 साल से चल रहे उत्पीड़न अभियान” का हिस्सा बताया.