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कांग्रेस का NMMS ऐप विरोध ‘उघाड़ दी सरकार की जल्दबाजी, ‘पहले घोषणा फिर सोचो’

कांग्रेस ने गुरुवार को मनरेगा में उपस्थिति और कार्यों के डिजिटल सत्यापन के लिए प्रयोग होने वाली राष्ट्रीय मोबाइल निगरानी प्रणाली एप्लीकेशन(एनएमएमएस एप) से जुड़ी “संचालन संबंधी खामियों” को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा. मुख्य विपक्षी दल ने इस “अव्यवहारिक” और”प्रतिकूल” मॉडल को तत्काल वापस लेने की मांग की. कांग्रेस महासचिव (संचार प्रभारी) जयराम रमेश ने कहा कि FAST मोदी सरकार कास्वघोषित आदर्श वाक्य है और इसका वास्तविक अर्थ है “पहले घोषणा करो, फिर सोचो” (फर्स्ट अनाउंस, सेकंड थिंक). रमेश ने एक बयान में कहाकि मई 2022 में मोदी सरकार ने उपस्थिति और कार्यों के डिजिटल सत्यापन के लिए मनरेगा में राष्ट्रीय मोबाइल निगरानी प्रणाली (एनएमएमएस) एपपेश किया। और जब से यह किया गया है.भावना को पहुंचा रहा है नुकसानकांग्रेस एनएमएमएस के साथ परिचालन संबंधी समस्याओं को उजागर कर रही है और यह बता रही है कि यह कैसे मनरेगा की भावना को नुकसानपहुंचा रहा है. उन्होंने कहा, “अब 8 जुलाई 2025 को जारी एक अधिसूचना में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने अंततः एनएमएमएस से जुड़ी विभिन्नसमस्याओं को स्वीकार किया है. यह शुरू से ही स्पष्ट था कि नरेगा कार्यस्थलों से तस्वीरें अपलोड करने से ऐसे वास्तविक श्रमिक बाहर हो जाएंगे, जिनकी तस्वीरें कनेक्टिविटी समस्याओं के कारण अपलोड नहीं की जा सकीं. कांग्रेस नेता ने बताया कि एनएमएमएस मस्टर रोल पर “फर्जी श्रमिकों” को प्रदर्शित होने से नहीं रोक सकता, क्योंकि फर्जी श्रमिक दिन में दो बार फोटो खिंचवाने के लिए जा सकते हैं, और एक मिनट भी काम किए बिनाभुगतान प्राप्त कर सकते हैं. रमेश ने कहा, “जो बात सामने आई है- कि फर्जी और बेतरतीब तस्वीरें अपलोड की जा रही हैं-वह एनएमएमएस के पूरीतरह से निरर्थक होने का प्रमाण है. रमेश ने कहा कि हालांकि, मोदी सरकार ने इस मुद्दे को स्वीकार करने के बाद ऐसे समाधानों की ओर बढ़ी है जोसमस्या से भी बदतर हैं. फोटो कर सकते है सत्यापितउन्होंने कहा कि एनएमएमएस फोटो अब प्रभारी अधिकारियों के भौतिक सत्यापन के आधार पर भी लिए जाएंगे. उन्होंने कहा कि इस प्रस्तावितसमाधान से ऊपर से नीचे तक नरेगा पदाधिकारियों का बहुमूल्य समय बर्बाद होगा। उन्होंने तर्क दिया कि या तो वे फोटो सत्यापित कर सकते हैं, जैसाकि नवीनतम आदेश में अनिवार्य किया गया है, या फिर वे अपने नियमित कर्तव्यों का पालन कर सकते हैं। कांग्रेस महासचिव (संचार प्रभारी) जयरामरमेश ने कहा कि FAST मोदी सरकार का स्वघोषित आदर्श वाक्य है और इसका वास्तविक अर्थ है- “पहले घोषणा करो, फिर सोचो” (फर्स्ट अनाउंस, सेकंड थिंक)। कांग्रेस नेता ने मनरेगा पर सरकार को घेरते हुए और क्या कहा है, आइए जानते हैं. कांग्रेस महासचिव (संचार प्रभारी) जयराम रमेश नेगुरुवार को कहा कि NMMS ऐप में “संचालन संबंधी खामियां” हैं और इसे “अव्यवहारिक” तथा “प्रतिकूल” मॉडल करार देते हुए तुरंत वापस लेने कीमांग की.मई 2022 में लागू यह ऐप अब 8 जुलाई 2025 की अधिसूचना में मंत्रालय ने इसके भारी operational खामियों को स्वीकार किया .

ट्रंप की सेकेंडरी टैरिफ धमकी से बढ़ी भारत की चिंता, रूस से व्यापार पर मंडराया खतरा

अमेरिका और भारत के बीच बीते करीब पांच महीने से व्यापार समझौते को लेकर चर्चा जारी है. माना जा रहा है कि जल्द ही इस समझौते पर सहमतिबन सकती है. इसके बाद दोनों देशों के बीच आयात शुल्क को लेकर चल रहा विवाद सुलझ सकता है और ट्रंप भारत पर टैरिफ की बढ़ी हुई दरें लगानेका फैसला वापस ले सकते हैं. हालांकि, इससे पहले कि व्यापार पर यह चर्चा अंतिम रूप ले पाए, ट्रंप की एक और धमकी ने टैरिफ विवाद को नयाकोण दे दिया है. भारत इस बार विवाद से सीधे तौर पर जुड़ा नहीं है इसके बावजूद दिल्ली में अमेरिकी राष्ट्रपति के ताजा बयानों को लेकर चिंताएंजाहिर की जा रही हैं दरअसल, ट्रंप ने कहा है कि अगर पुतिन 50 दिन के अंदर यूक्रेन में सैन्य अभियान को नहीं रोकते तो उनकी सरकार रूस और उससेव्यापार करने वाले देशों पर 100 फीसदी आयात शुल्क लगाएगी. इतना ही नहीं ट्रंप ने धमकी दी है कि वे रूस से तेल व कुछ अन्य उत्पाद खरीदनेवाले देशों पर भी सेकेंडरी टैरिफ लगाएंगे. ट्रंप की इन धमकियों के बाद से ही यह सवाल उठने लगे हैं कि अगर अमेरिका भविष्य में रूस और उससेव्यापार करने वाले देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगा देता है.व्यापार रखकर चलता है संतुलनतो इससे कौन-कौन से देश सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे? इसका भारत पर कैसा और कितना असर होगा? भारत और रूस का व्यापार किस तरहप्रभावित होगा? इसके अलावा भारत के किन क्षेत्रों को नुकसान हो सकता है? अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा है कि अगर रूस और यूक्रेन का संघर्ष खत्मनहीं हुआ तो वे रूस पर कड़े टैरिफ लगाएंगे। उन्होंने इसे सेकेंडरी टैरिफ बताया। सेकेंडरी टैरिफ का सीधा अर्थ है वह टैरिफ जो निशाने पर रखे गए देशपर नहीं, बल्कि उसके सहयोगियों पर लगाया जाए. यानी यह टैरिफ अमेरिका उन देशों पर लगाएगा, जो रूस से व्यापार कर रहे होंगे. माना जा रहा हैकि अमेरिका अपने इस फैसले के जरिए रूस के व्यापार की सभी लाइफलाइन बंद करने की तैयारी कर रहा है. पहले ही अमेरिका और यूरोप के कईदेशों ने रूस पर व्यापार से जुड़े प्रतिबंध लगाए हैं. उधर अब अमेरिका उन देशों को भी रूस से व्यापार करने से रोकने की तैयारी कर रहा है, जिनके रूसीसरकार से परंपरागत तौर पर अच्छे रिश्ते रहे हैं इनमें भारत, चीन, ब्राजील, तुर्किये, वियतनाम और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जैसे देश शामिल हैं. गौरतलब है कि भारत लंबे समय से अमेरिका और रूस दोनों से व्यापार में संतुलन रखकर चलता आया है. होथियारों के लिए रुस पर निर्भरअपने ऐतिहासिक रिश्तों की वजह से भारत लंबे समय से हथियारों के लिए रूस पर निर्भर रहा है. दूसरी तरफ 2022 में रूस-यूक्रेन संघर्ष शुरू होने केबाद से भारत ने रूस से तेल का आयात भी बढ़ाया है. मौजूदा समय में रूस से सबसे ज्यादा तेल आयात करने वाले देशों में चीन और भारत सबसे ऊपरहैं। व्यापार के पूरे आंकड़ों को देखा जाए तो भारत और रूस ने 2024-25 में कुल 68.7 अरब डॉलर का कारोबार किया. इस दौरान जहां भारत काकुल निर्यात 4.88 अरब डॉलर का रहा वहीं, आयात 63.84 अरब डॉलर का रहा. भारत जिन चीजों को रूस को निर्यात करता है, उनमें कृषि क्षेत्र केउत्पाद, फार्मास्यूटिकल्स (दवाएं), लोहा और स्टील, हवाई जहाज के पार्ट्स, मशीनें, कपड़े, चमड़ा, रबड़, सर्जिकल टूल्स, आदि शामिल हैं। दूसरीतरफ भारत रूस से जो उत्पाद आयात करता है, उनमें सबसे बड़ा हिस्सा ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े उत्पाद- तेल, पेट्रोलियम उत्पाद, फर्टिलाइजर, मिनरल ईंधन, मशीनें, धातुएं और खाद्य तेल का है इसके अलावा भारत बड़ी मात्रा में हथियारों का भी आयातक रहा है.

कच्चातिवु विवाद फिर गरमाया, स्टालिन की पीएम से सीधी अपील और बीजेपी का पलटवार “जानें क्या है पूरा मामला”

कच्चातिवु द्वीप का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है इसकी वजह है कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन की पीएम मोदी से की गई एक अपीलऔर उस पर भारतीय जनता पार्टी के नेताओं का पलटवार समुद्र तटीय राज्य के सीएम ने प्रधानमंत्री मोदी से अपील की है कि वे लंबे समय से चले आरहे कच्चातीवु द्वीप विवाद को हल करने के लिए सीधा हस्तक्षेप करें। उनके ऐसा करने से ये विवाद हल हो सकता है. इसके अलावा स्टालिन नेश्रीलंका की जेल में बंद भारतीय मछुआरों और जब्त नावों की रिहाई कराने के लिए भी पीएम मोदी से आह्वान किया है. तमिलनाडु के सीएम नेभारतीय जनता पार्टी पर इस मुद्दे को लेकर राजनीति करने का आरोप भी लगाया है. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्रसरकार पिछले 10 वर्षों में तमिलनाडु के मछुआरों की रक्षा करने में विफल रही है. इतना ही नहीं वह बिना कोई ठोस कार्रवाई किए कच्चातीवु मुद्दे काराजनीतिकरण कर रही है. ला सकता है स्थायी समाधानउन्होंने जोर देते हुए कहा कि इस दिशा में केंद्र को ठोस कार्रवाई करनी चाहिए। केवल प्रधानमंत्री का सीधा हस्तक्षेप ही तमिल मछुआरों के लिए एकस्थायी समाधान ला सकता है. इस दौरान स्टालिन ने बड़ा सवाल भी किया. उन्होंने पूछा कि विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस मुद्दे पर श्रीलंका केहालिया दावों का खंडन क्यों नहीं किया है. दरअसल हाल ही में श्रीलंका के मत्स्य पालन मंत्री डगलस देवानंद ने टिप्पणी करते हुए कहा था कितमिलनाडु के मछुआरे अक्सर अतिक्रमण करते हैं। साथ ही उन्होंने कहा था कि कोलंबो कच्चातीवु द्वीप वापस नहीं करेगा भाजपा ने उनके इस बयानपर पलटवार किया है. भाजपा प्रवक्ता नारायण तिरुपति ने उन्हें पुरानी बातें याद दिलाते हुए कहा कि केंद्र में जब कांग्रेस और तमिलनाडु में डीएमकेकी सरकार थी तभी 1974 में कच्चातीवु श्रीलंका को सौंप दिया गया था. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि डीएमके ने 14 साल तक केंद्र में सत्ता साझाकी,लेकिन तब इस मुद्दे पर कुछ नहीं किया. उल्टा हमने अपनी सरकार में यह सुनिश्चित किया है कि श्रीलंकाई नौसेना कोई गोलीबारी न करे, जबकिकांग्रेस के शासन में लगभग 1,000 मछुआरे मारे गए थे. श्रीलंका द्वारा जब्त की गई भारतीय मछुआरों की नौकाओं की नीलामी और भारतीय मछुआरोंकी आजीविका को नुकसान पहुंचाने के सवाल पर नारायण तिरुपति ने कहा कि वार्ता जारी है. हमने प्रभावित श्रीलंकाई तमिल मछुआरों और भारतीयतमिल मछुआरों के बीच कई दौर की बातचीत की है. करुणानिधि ने किया कड़ा विरोधलेकिन जब तक आप उनसे बात करके कोई समाधान नहीं निकालेंगे, यह समस्या समाप्त नहीं होगी. कच्चातिवु पाक जलडमरूमध्य में एक छोटा साद्वीप है. जो बंगाल की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है. 285 एकड़ हरित क्षेत्र 1976 तक भारत का था. हालांकि श्रीलंका और भारत के बीच एकविवादित क्षेत्र है, जिस पर आज श्रीलंका हक जताता है. दरअसल, साल 1974 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपने समकक्ष लंकाई राष्ट्रपतिमावो भंडारनायके के साथ 1974-76 के बीच चार समुद्री सीमा समझौतों पर हस्ताक्षर किए थे. इन्हीं समझौते के तहत कच्चातिवु द्वीप श्रीलंका कोसौंप दिया गया. यह द्वीप सामरिक महत्व का था और इसका उपयोग मछुआरे करते थे. हालांकि इस द्वीप पर श्रीलंका लगातार दावा जताता रहा। यहमुद्दा तब उभरा जब भारत-श्रीलंका ने समुद्री सीमा समझौते पर हस्ताक्षर किए। साल 1974 में 26 जून को कोलंबो और 28 जून को दिल्ली में दोनोंदेशों के बीच इस द्वीप के बारे में बातचीत हुई. इन्हीं दो बैठकों में कुछ शर्तों के साथ इस द्वीप को श्रीलंका को सौंप दिया गया. तब शर्त यह रखी गईकि भारतीय मछुआरे अपना जाल सुखाने के लिए इस द्वीप का इस्तेमाल कर सकेंगे और द्वीप में बने चर्च में भारत के लोगों को बिना वीजा के जाने कीअनुमति होगी. समझौतों ने भारत और श्रीलंका की अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सीमा चिह्नित कर दी। हालांकि, इस समझौते का तमिलनाडु के तत्कालीनमुख्यमंत्री एम करुणानिधि ने कड़ा विरोध किया था.

सांसद इकरा हसन से अभद्रता का मामला गरमाया, सपा नेताओं ने एडीएम पर कार्रवाई की मांग की

सहारनपुर के कैराना से सांसद इकरा हसन के साथ अभद्रता का मामला तूल पकड़ गया. सपाई इसके विरोध में उतर आए. पदाधिकारियों की तरफ सेमुख्यमंत्री को पत्र भेजकर जांच के बाद एडीएम पर कार्रवाई की मांग की गई है. वहीं, पूर्व सांसद हाजी फजलुर्रहमान ने भी फेसबुक पर पोस्ट करलिखा है कि हम अपनी बेटी के साथ हैं. सपा जिलाध्यक्ष चौधरी अब्दुल वाहिद की तरफ से मुख्यमंत्री को शिकायती पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग कीगई है. जिलाध्यक्ष ने लिखा कि कैराना सांसद और छुटमलपुर नगर पंचायत अध्यक्षा शमा परवीन के साथ हुई घटना निंदनीय है. इसके लिए एडीएमपर कार्रवाई होनी चाहिए।उधर, सपा महानगर प्रभारी एवं पार्षद अभिषेक टिंकू अरोड़ा ने पत्र भेजकर लिखा कि जन समस्याओं को लेकर सांसद इकरा हसन और अध्यक्षाएडीएम से मिलने के लिए पहुंची थीं. व्यवहार राजनीति से है प्रेरितइस तरह उनके साथ अभद्र व्यवहार किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य फैसल सलमानी ने कहा कि यह पूरीघटना विपक्ष की राजनीति के लिए अत्यधिक गंभीर है. इसे लेकर उच्च अधिकारियों से मुलाकात की जाएगी. वहीं, सपा प्रमुख अखिलेश यादव नेफेसबुक और एक्स पर लिखा है कि जो अधिकारी सांसद का सम्मान नहीं करता वह जनता का सम्मान क्या करेगा. एक जुलाई को सांसद इकरा हसनऔर नगर पंचायत अध्यक्ष शमा परवीन एडीएम कार्यालय पहुंची थीं. इसके बाद कैराना सांसद की तरफ से शासन को शिकायत की गई. बताया किएडीएम ने उनके साथ अभद्रता की और कार्यालय से बाहर जाने के लिए कहा. शिकायत की कॉपी मंडलायुक्त को भी दी गई मंडलायुक्त के आदेश परजिलाधिकारी ने जांच शुरू कर दी है. अमर उजाला ने 16 जुलाई के अंक में इसे प्रमुखता से प्रकाशित किया। एडीएम संतोष बहादुर सिंह से भी जवाबमांगा गया है. पूर्व विधायक माविया अली ने भी इस घटना पर रोष जताया. बुधवार को जारी बयान में पूर्व विधायक माविया अली ने कहा कि कहाकि भाजपा की सरकार में उत्तर प्रदेश में अधिकारी पूरी तरह बेलगाम होकर काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि कैराना सांसद इकरा हसन के साथ अभद्रव्यवहार राजनीति से प्रेरित है. हसन के साथ घटना बेहद निंदनीयजिसे सपाई किसी सूरत बर्दाश्त नहीं करेंगे वहीं, पूर्व सभासद सिकंदर अली ने भी सांसद के साथ अभद्र व्यवहार की निंदा की है. पूर्व सांसद हाजीफजलुर्रहमान ने फेसबुक पर पोस्ट करते हुए लिखा कि कैराना सांसद, हमारी बेटी इकरा हसन के साथ घटना बेहद निंदनीय है. सांसद का अपनाप्रोटोकॉल होता है हम इस लड़ाई में अपनी बेटी के साथ है। पूर्व सांसद की इस पोस्ट पर काफी कमेंट्स आ रहे हैं, जो इस घटना की निंदा कर रहे हैं. एडीएम ने कहा कि जैसे ही मुझे कैराना सांसद के कार्यालय में पहुंचने का पता चला तो तुरंत वहां पहुंचा. कैराना सांसद ने फोन रिसीव नहीं करने परनाराजगी जताई. छुटमलपुर ईओ को लेकर शिकायत की थी. लेकिन उन्होंने लिखित में शिकायत नहीं दी वार्ता सिर्फ इतनी हुई उन्हें कार्यालय से बाहरजाने के लिए बिल्कुल नहीं कहा। यह आरोप गलत है. जनप्रतिनिधियों का पूरी तरह से सम्मान करते हैं. सांसद इकरा हसन ने बताया कि वह अपनेकिसी काम से सहारनपुर कलेक्ट्रेट गई थी, वहां छुटमलपुर नगर पंचायत की अध्यक्ष शमा परवीन ने अपनी परेशानी बताई. महिला और जनप्रतिनिधिहोने के नाते वह उनके साथ एडीएम से मिलीं.

एयरोस्पेस पार्क पर कर्नाटक-आंध्र की जुबानी जंग, भूमि अधिग्रहण रोकने के बाद नारा लोकेश और प्रियांक खरगे आमने-सामने

कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में इन दिनों एयरोस्पेस पार्क को लेकर ठनी हुई है कर्नाटक द्वारा एयरोस्पेस पार्क के लिए बंगलूरू के नजदीक देवनहल्लीइलाके में भूमि अधिग्रहण रोकने के बाद आंध्र प्रदेश के मंत्री और चंद्रबाबू नायडू के बेटे नारा लोकेश के तंज पर अब जवाब देने के लिए प्रियांक खरगेआगे आए हैं. उन्होंने कहा कि एयरोस्पेस सेक्टर के लिए आंध्र प्रदेश एक नया राज्य है. वे यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कोशिश करेंगे कि उन्हेंनया निवेश मिले, लेकिन हमारे पास पहले से ही इस सेक्टर के लिए एक विकसित पारिस्थितिकी तंत्र है इसे देखते हुए लोग अब भी हमारे पास हीआएंगे. दरअसल किसान और सामाजिक संगठन एयरोस्पेस पार्क के लिए भूमि अधिग्रहण के खिलाफ कई महीनों से विरोध प्रदर्शन कर रहे थे.भूमि अधिग्रहण का रोका दिया था कामजिसके बाद कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने एयरोस्पेस पार्क के लिए बंगलूरू के नजदीक देवनहल्ली इलाके में 1,777 एकड़ भूमि अधिग्रहण काकाम रोक दिया है. किसानों और अन्य संगठनों के 1200 दिन चले भारी विरोध प्रदर्शन के बाद इसे किसानों की बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है. जिसके बाद आंध्र प्रदेश सरकार के मंत्री और सीएम चंद्रबाबू नायडू के बेटे नारा लोकेश ने पड़ोसी राज्य पर तंज कसते हुए एयरोस्पेस उद्योग से अपीलकी है कि वे आंध्र प्रदेश में निवेश करें. जैसे ही कर्नाटक सरकार ने भूमि अधिग्रहण रोकने का आदेश जारी किया. वैसे ही आंध्र प्रदेश के मंत्री नारालोकेश ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर एयरोस्पेस उद्योग से जुड़े लोगों को आंध्र प्रदेश में निवेश करने की पेशकश कर दी. नारा लोकेश नेलिखा कि ‘प्रिय एयरोस्पेस उद्योग, इसके बारे में सुनकर दुख हुआ, लेकिन मेरे पास आपके लिए एक बेहतर उपाय है. आप आंध्र प्रदेश में निवेश क्योंनहीं करते? हमारी एयरोस्पेस नीति काफी लुभावनी है और हम बेहतर इनसेंटिव दे सकते हैं. साथ ही हमारे पास 8000 एकड़ तैयार जमीन है, वो भीबंगलूरू के बिल्कुल बाहर मुझे उम्मीद है कि आप जल्द ही बातचीत की मेज पर दिखेंगे. नारा लोकेश को जवाब देते हुए प्रियांक खरगे ने कहा कि आंध्र प्रदेश एक नया राज्य है और वे यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे किउन्हें नया निवेश मिले. वे 99 पैसे प्रति एकड़ की दर से जमीन देंगे, उन्हें निवेश आकर्षित करने की जरूरत है, इसलिए वे इसके बारे में खूब शोर मचारहे हैं हालांकि हम सब्सिडी और प्रोत्साहन भी देते हैं, लेकिन हमें वह करने की जरूरत नहीं है जो उन्हें करना है. एयरोस्पेस में नंबर एकचाहे वह आंध्र प्रदेश हो , तेलंगाना हो या महाराष्ट्र , हमारी प्रतिस्पर्धा सबसे अलग है. इसके बारे में बात करने के लिए हमारे पास आंकड़े हैं. पिछलेसाल हमारा आईटी निर्यात करीब 4.5 लाख करोड़ रुपये था. उन्होंने आंकड़े गिनाते हुए कहा कि हम यूनिकॉर्न, एयरोस्पेस रक्षा निर्माण में नंबर एक हैं।बावजूद इसके हमें प्रतिस्पर्धा पसंद है, वे मुफ्त जमीन, पानी और जितनी चाहें उतनी सब्सिडी दे सकते हैं, लेकिन लोग फिर भी हमारे पास आएंगे।इसका किसानों को कुछ एकड़ जमीन वापस देने से कोई लेना-देना नहीं है।कर्नाटक के मंत्री एमबी पाटिल ने भी इस मसले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार हर वास्तविक उद्योग के लिए भूमि उपलब्धकराने के लिए प्रतिबद्ध है. आंध्र प्रदेश में एयरोस्पेस और रक्षा उद्योग स्थापित करना उनका अधिकार है. लेकिन सिर्फ एक जमीन विवाद की घटना केकारण यह नहीं कि सब खत्म हो गया हमारे पास पर्याप्त जगह और जमीन है। हम एयरोस्पेस रक्षा के क्षेत्र में देश के 65 प्रतिशत से ज़्यादा का योगदानदे रहे हैं. हमारे राज्य में जमीन की कमी के कारण एक भी उद्योग बंद नहीं होगा.

डेंगू-मलेरिया पर दिल्ली सरकार का एक्शन मोड, सीएम रेखा गुप्ता ने दिए फौरन फॉगिंग और दो चेतावनी के बाद चालान के निर्देश

डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बुधवार को सचिवालय में एक खास बैठकबुलाई. इसमें उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मच्छरों के प्रजनन पर चालान काटने से पहले दो बार चेतावनी दी जाए. साथ ही, फॉगिंग जल्दशुरू कर मच्छरों का खात्मा किया जाए। सीएम ने जागरूकता, निगरानी और त्वरित कार्रवाई पर जोर देते हुए कहा कि अगले दो महीने डेंगू की रोकथामके लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं. बैठक में दिल्ली नगर निगम, जल बोर्ड और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. सीएम ने कहा कि दिल्ली मेंअभी डेंगू का प्रकोप नहीं फैला, लेकिन पहले से सतर्क रहना जरूरी है. प्रजनन को रोकने के लिए विशेष अभियानस्कूलों, पार्कों, अस्पतालों और खुले स्थानों में मच्छरों के प्रजनन को रोकने के लिए विशेष अभियान चलाए जाएं. लोगों को जागरूक करने के लिएप्रचार के सभी साधनों का इस्तेमाल हो. उन्होंने निर्देश दिया कि फॉगिंग, जो आमतौर पर सितंबर में शुरू होती है. उसे तुरंत शुरू किया जाए. सीएम नेयह भी सुनिश्चित करने को कहा कि दवाओं या मशीनरी की कोई कमी न हो। अगर कोई दिक्कत आए तो तुरंत सूचना दी जाए. उन्होंने बताया कि अबतक 5,09,524 घरों में फॉगिंग और मच्छरनाशक स्प्रे का काम हो चुका है. 71,086 घरों में मच्छरों का लार्वा मिला, जिन्हें मौके पर नष्ट किया गया।इसके अलावा 279 जगहों पर लार्वीवोरस मछलियां छोड़ी गई हैं, जो मच्छरों के लार्वा को प्राकृतिक रूप से खत्म करती हैं. रेखा गुप्ता ने कहा कि डेंगूसे बचाव सिर्फ सरकार का काम नहीं, जनता की भागीदारी भी जरूरी है. उन्होंने लोगों से घरों में पानी जमा न होने देने और सफाई रखने की अपीलकी।सीएम ने कहा कि दिल्ली में अभी डेंगू का प्रकोप नहीं फैला, लेकिन पहले से सतर्क रहना जरूरी है. प्रचार के लिए हो साधनों का इस्तेमालस्कूलों, पार्कों, अस्पतालों और खुले स्थानों में मच्छरों के प्रजनन को रोकने के लिए विशेष अभियान चलाए जाएं। लोगों को जागरूक करने के लिएप्रचार के सभी साधनों का इस्तेमाल हो. MCD की एक विशेष जांच में 12,344 स्थानों पर निरीक्षण किया गया. जिनमें से 1,415 जगहों पर मच्छरोंका प्रजनन पाया गया और स्थल पर ही नष्ट किया गया ऊपर से जारी 3,408 स्टिकर, 197 बैनर, 939 कानूनी नोटिस, और 209 मुकदमे दर्ज किएगए वर्ष 2025 में अब तक 246 डेंगू, 101 मलेरिया और 17 चिकनगुनिया के केस सामने आए है. जो पिछले वर्षों से काफी अधिक हैं मौसम वृद्धि(मॉनसून) के कारण मच्छरजनिक बीमारियों का खतरा तेज़ हो जाता है इसलिए सरकार अगले दो महीनों (जुलाई–अगस्त) को ‘निवारण-अभियान’ केरूप में ले रही है सतर्कता चुनौतियों से पहले अधिकतर कार्रवाई की जा रही है: फॉगिंग, जैविक नियंत्रण (मछलियाँ), दो चेतावनी प्रणाली, जागरूकताअभियानों के माध्यम से समुदाय को जागरूक किया जा रहा है. मुख्यमंत्री ने बार-बार जनता के सहयोग को जरूरी बताया है पानी जमा न होने दें. साफ-सफाई बनाए रखें. सरकार और जनता मिलकर ही इन बीमारियों से बचाव संभव है.

राहुल गांधी ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर संसद के आगामी मॉनसून सत्र के दौरानजम्मू-कश्मीर को फिर से पूर्ण राज्य का दर्जा देने के लिए विधेयक लाने की अपील की है। उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि यह मांग पूरी तरह वैध है औरयह संविधान में निहित लोकतांत्रिक अधिकारों पर आधारित है। राहुल गांधी ने यह भी रेखांकित किया कि पिछले पांच वर्षों से जम्मू-कश्मीर के लोगबार-बार पूर्ण राज्य के दर्जे की बहाली की मांग कर रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि पहले देश में कई बार केंद्रशासित प्रदेशों को राज्य का दर्जा दियागया है, लेकिन वर्ष 2019 में पहली बार किसी राज्य को केंद्रशासित प्रदेश में बदला गया। हालांकि सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार की फिलहाल संसद के इस सत्र में ऐसा कोई विधेयक लाने की योजना नहीं है। संसद का मॉनसून सत्र 21 जुलाई से शुरू हो रहा है। गौरतलब है कि 2019 में सरकार ने अनुच्छेद 370 हटाने के बाद जम्मू-कश्मीर को विभाजित कर जम्मू-कश्मीर और लद्दाखनामक दो केंद्रशासित प्रदेश बनाए थे। इसके बाद केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में यह आश्वासन भी दिया था कि राज्य का दर्जा जल्द से जल्द बहाल कियाजाएगा। इस बीच, संसद के इस सत्र में जिन प्रमुख विधेयकों के पेश होने की संभावना है, उनमें मणिपुर गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (संशोधन) विधेयक 2025, टैक्सेशन लॉ (संशोधन) विधेयक 2025, जन विश्वास (संशोधन) विधेयक 2025, इंडियन इंस्टीट्यूट्स ऑफ मैनेजमेंट (संशोधन) विधेयक 2025, माइन्स एंड मिनरल्स (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक 2025, नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस बिल 2025 और नेशनल एंटी डोपिंग (संशोधन) विधेयक 2025 शामिल हो सकते हैं।

CDS जनरल अनिल चौहान का संदेश, आधुनिक युद्ध के लिए आधुनिक तकनीक जरूरी

भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने देश की सैन्य क्षमताओं को अत्याधुनिक तकनीकों से लैस करने की आवश्यकतापर बल दिया है। उन्होंने कहा कि भविष्य के युद्ध पारंपरिक हथियारों से नहीं, बल्कि उन्नत तकनीकों जैसे ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेलड़े जाएंगे।कल की तकनीक से आज की जंग नहीं जीती जा सकतीजनरल चौहान ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत को रणनीतिक बढ़त बनाए रखने के लिए आज के युद्ध को कल की तकनीक के भरोसे नहीं छोड़ा जासकता। उन्होंने कहा, “अब लड़ाई का मैदान पूरी तरह बदल चुका है, और तकनीक ने इसमें केंद्रीय भूमिका निभा ली है।” ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के ड्रोन हमले का खुलासाउन्होंने जानकारी दी कि 10 मई को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने बिना हथियार वाले ड्रोन और लॉइटर म्युनिशन का इस्तेमाल किया था।हालांकि भारतीय सेना ने इन हमलों को सफलतापूर्वक नाकाम कर दिया। “इनमें से कोई भी ड्रोन भारतीय सेना या नागरिक संरचना को नुकसान नहींपहुंचा सका,” उन्होंने बताया। भारतीय बलों ने इन ड्रोनों को काइनेटिक और नॉन-काइनेटिक दोनों तरीकों से निष्क्रिय किया। स्वदेशी तकनीक की ओर बढ़ना समय की मांगसीडीएस ने यह भी आगाह किया कि यदि भारत अहम सैन्य अभियानों के लिए विदेशी तकनीक पर निर्भर रहता है, तो यह हमारी रणनीतिक तैयारियोंको कमजोर कर सकता है। उन्होंने बल दिया कि भारत को अब अपनी रक्षा तकनीकें खुद विकसित करनी होंगी ताकि आत्मनिर्भरता और युद्ध क्षमतादोनों सुनिश्चित हो सकें। भविष्य की जंग, भविष्य की सोच से ही जीती जाएगीअपने संबोधन के अंत में जनरल चौहान ने कहा, “हम आने वाले कल की तकनीकों से आज की जंग लड़ने के लिए तैयार हों। केवल तब ही हम अपनीसंप्रभुता की रक्षा कर सकेंगे और विरोधियों को मुंहतोड़ जवाब दे पाएंगे।”

भाजपा शासित राज्यों में बंगालियों के उत्पीड़न के खिलाफ कोलकाता में ममता बनर्जी का विरोध मार्च

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को कोलकाता की सड़कों पर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ नेताओं और सांसद अभिषेकबनर्जी के साथ एक बड़े विरोध मार्च का नेतृत्व किया। यह विरोध प्रदर्शन भाजपा शासित राज्यों में बंगाली भाषी प्रवासी मजदूरों के कथित उत्पीड़न केखिलाफ था। भाजपा पर लगाया बांग्लाभाषियों को निशाना बनाने का आरोपममता बनर्जी ने केंद्र सरकार और भाजपा पर बंगालियों के खिलाफ षड्यंत्र करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “भाजपा बंगाली बोलने वालों कोरोहिंग्या बताकर बदनाम कर रही है, जबकि रोहिंग्या म्यांमार में हैं। पश्चिम बंगाल भारत का हिस्सा है, फिर यहां के नागरिकों को ऐसे क्यों निशानाबनाया जा रहा है?”मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा बंगालियों को डिटेंशन सेंटरों में भेजना चाहती है, और यह पूरे समुदाय की गरिमा पर हमला है। मतदाता सूची पुनरीक्षण पर सवालबनर्जी ने चुनाव आयोग के विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया एक सोची-समझीरणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य खासकर प्रवासी और वंचित समुदाय के वैध मतदाताओं के नाम सूची से हटाना है। उन्होंने कहा, “वे अब 2002 की मतदाता सूची की जांच की बात कर रहे हैं। इतने वर्षों में न जाने कितने लोगों की मौत हुई है, कितने नए बच्चे जन्मेहैं। हर नागरिक को सतर्क रहना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि उनका नाम मतदाता सूची में हो, वरना उन्हें जेल तक भेजा जा सकता है।” बांग्ला में और बोलूंगी, चाहे निरुद्ध कर दोममता बनर्जी ने अपने भाषण में बंगाली भाषा के सम्मान की भी बात कही। उन्होंने कहा, “मैं अब और अधिक बांग्ला में बोलूंगी। अगर आपको लगताहै कि इसके लिए मुझे निरुद्ध केंद्र में डालना है, तो डाल दो। मैं डरने वाली नहीं हूं।” उन्होंने भाजपा के रवैये को “निराशाजनक और अपमानजनक” बताया। टीएमसी का आरोप, बंगाली पहचान पर सीधा हमलातृणमूल कांग्रेस ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर कहा कि भाजपा अब बंगाली पहचान को छुप-छुपाकर नहीं, बल्कि खुले तौर पर, जानबूझकर और घृणा से प्रेरित होकर निशाना बना रही है। पार्टी ने डबल इंजन सरकारों पर बंगाली प्रवासी श्रमिकों के खिलाफ कार्रवाई करने काआरोप लगाया। टीएमसी ने यह भी दावा किया कि उत्तर 24 परगना के मतुआ समुदाय के छह सदस्यों, जिनमें कुछ नाबालिग भी शामिल थे, को महाराष्ट्र पुलिस नेकथित रूप से अवैध रूप से हिरासत में लिया, जबकि उनके पास सभी वैध पहचान पत्र थे। चुनाव से पहले ममता सरकार पर दबावराज्य में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं, और ममता बनर्जी की सरकार पहले से ही भ्रष्टाचार के आरोपों और हालिया आपराधिक घटनाओं जैसेआर.जी. कर अस्पताल कांड और एक लॉ छात्रा के यौन उत्पीड़न को लेकर विपक्ष के निशाने पर है। इन सबके बीच मुख्यमंत्री ने भाजपा पर जनता कोबांटने और बंगाली अस्मिता पर हमला करने का आरोप लगाया है।

सुप्रीम कोर्ट नाराज़, 20 हाई कोर्ट्स ने नहीं सौंपी शौचालय सुविधाओं पर रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को देश भर की अदालतों और न्यायाधिकरणों में शौचालय सुविधाएं सुनिश्चित करने संबंधी अपने निर्देशों की अवहेलना पर कड़ीनाराजगी जताई है। अदालत ने पाया कि 25 उच्च न्यायालयों में से केवल 5 ने ही अनुपालन रिपोर्ट दाखिल की है। शेष 20 उच्च न्यायालयों कोरिपोर्ट सौंपने के लिए अब अंतिम रूप से 8 सप्ताह की मोहलत दी गई है। यह आखिरी मौकान्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने कड़े शब्दों में कहा, “यह अंतिम अवसर है। यदि अगले आठ हफ्तों में अनुपालनरिपोर्ट दाखिल नहीं की जाती, तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।” पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि अनुपालन में विफल रहने पर संबंधित उच्च न्यायालयोंके रजिस्ट्रार जनरल को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना पड़ेगा। जनवरी में दिया गया था ऐतिहासिक निर्णय15 जनवरी 2025 को दिए गए एक महत्वपूर्ण फैसले में, सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत स्वच्छता सुविधाओं तक पहुंच कोनागरिकों का मौलिक अधिकार घोषित किया था। अदालत ने निर्देश दिया था कि सभी अदालत परिसरों चाहे वे किसी भी स्तर पर हों में पुरुषों, महिलाओं, दिव्यांगजनों और ट्रांसजेंडर्स के लिए अलग-अलग और सुलभ शौचालयों की व्यवस्था की जाए। केवल 5 उच्च न्यायालयों ने की रिपोर्टिंगपीठ ने बताया कि अब तक केवल झारखंड, मध्य प्रदेश, कलकत्ता, दिल्ली और पटना उच्च न्यायालयों ने ही इस विषय पर हलफनामे दाखिल किएहैं। इनमें यह स्पष्ट किया गया है कि अदालत परिसरों में स्वच्छता सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। रजिस्ट्रार जनरल की व्यक्तिगत उपस्थिति की चेतावनीसुप्रीम कोर्ट ने अन्य उच्च न्यायालयों को दो टूक कहा है कि यदि वे रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं करते हैं, तो उनके रजिस्ट्रार जनरल को स्वयं अदालत में उपस्थितहोना पड़ेगा। अदालत ने यह भी कहा कि रिपोर्ट में यह सुनिश्चित किया जाए कि शौचालय सुविधाएं स्पष्ट रूप से चिह्नित हों और उनका उपयोगन्यायाधीशों, वकीलों, पक्षकारों और अदालत कर्मचारियों द्वारा सुगमता से किया जा सके। एक जनहित याचिका से शुरू हुआ मामलायह मामला अधिवक्ता राजीब कालिता द्वारा दाखिल एक जनहित याचिका से जुड़ा है, जिसमें देश भर की अदालतों में बुनियादी स्वच्छता सुविधाओंकी कमी को उजागर किया गया था। उसी याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश जारी किए थे।