अवामी लीग को मिटाया नहीं जा सकता, हसीना की वापसी संभव लेकिन बदलना होगा रवैया “मानष घोष”

वरिष्ठ पत्रकार और लेखक मानष घोष ने दावा किया है कि अवामी लीग को बांग्लादेश की धरती से कभी नहीं मिटाया जा सकता है. उन्होंने कहा किपार्टी और अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना भी फिर से सत्ता में लौट सकती हैं लेकिन इसके लिए हसीना को अपने तौर-तरीके बदलने होंगे. घोष अपनीनई किताब मुजीब की गलतियां उनकी हत्या के पीछे की शक्ति और साजिश’ के विमोचन के मौके पर बोल रहे थे. उन्होंने कहा कि यह किताब लिखतेसमय उनका उद्देश्य था कि वे मुजीबुर रहमान को एक ‘पवित्र और गलती न करने वाले’ नेता की तरह न दिखाएं. बल्कि उनकी कमजोरियां भी सामनेलाएं घोष ने कहा कि बांग्लादेश की वर्तमान स्थिति देखकर लगता है कि ‘इतिहास अपने आप को दोहरा रहा है. आवामी लीग की गिरी सरकार2024 में बांग्लादेश में भारी विरोध प्रदर्शन हुए, जिससे 5 अगस्त को शेख हसीना की अवामी लीग सरकार गिर गई. यह आंदोलन ‘स्टूडेंट्स अगेंस्टडिस्क्रिमिनेशन’ नाम के एक छात्र समूह ने शुरू किया था, जो सरकारी नौकरियों में कोटा प्रणाली में सुधार की मांग कर रहे थे. आंदोलन हिंसक हो गयाऔर अंत में हसीना को सत्ता छोड़नी पड़ी और वह भारत आ गईं. वर्तमान में बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में एक अंतरिम सरकार कार्यरत है. बातचीत के दौरान लेखक घोष से पूछा गया कि क्या हसीना और अवामी लीग की वापसी संभव है. इस सवाल के जवाब में घोष ने कहा, ‘मुझे लगताहै कि अवामी लीग को मिटाया नहीं जा सकता. शेख हसीना पहले भी मुश्किल हालात से निकली हैं और यह वक्त भी ज्यादा दूर नहीं जब लोग खुदकहेंगे कि वह लौटें और देश की बागडोर संभालें. हसीना ने किया था गलत व्यवहारघोष का मानना है कि अगर आज निष्पक्ष चुनाव हों तो अवामी लीग को बड़ी जीत मिल सकती है. यहां तक की वो लोग भी उनका समर्थन कर सकतेहैं जिनके साथ पहले हसीना ने गलत व्यवहार किया था.यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार की सलाहकार परिषद या मंत्रिमंडल ने मई में आतंकवाद-रोधी कानून के तहत साइबरस्पेस समेत अवामी लीगकी सभी गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया था. इसके अलावा, बांग्लादेश में एक विशेष अदालत ने 10 जुलाई को शेख हसीना पर मानवता केखिलाफ अपराध का आरोप लगाया, जो पिछले साल के विरोध प्रदर्शनों में हुई हिंसा से जुड़ा है. बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण(ICT-BD) ने मुकदमे की तारीख तीन अगस्त तय की है.लेखन मानष घोष का कहना है कि शेख हसीना और उनकी पार्टी अवामी लीग की राजनीतिक वापसी संभव है लेकिन इसके लिए जरूरी है कि वे अपनेपुराने रवैये और नीतियों को छोड़कर खुद में बदलाव लाएं। घोष ने ये बात अपनी किताब के विमोचन अवसर पर कही. घोष का कहना है कि इतिहासखुद को दोहरा रहा है जैसे मुजीब के खिलाफ साजिशें रची गईं वैसे ही 2024 में हसीना के खिलाफ भी वातावरण बना. बांग्लादेश की अदालत नेशेख हसीना पर मानवता के खिलाफ अपराध का आरोप भी तय किया है.
तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन की तबियत खराब, डॉ़क्टरों ने 3 दिन आराम करने की दी सलाह

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की सोमवार सुबह सैर के दौरान अचानक तबीयत बिगड़ गई. उन्हें हल्के चक्कर आने के बाद एक निजीअस्पताल में भर्ती कराया गया. डॉक्टरों ने उन्हें तीन दिन आराम करने की सलाह दी है. उपमुख्यमंत्री और उनके बेटे उदयनिधि स्टालिन ने इस संबंध मेंपत्रकारों से बात की. उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री को तीन दिन आराम करने की सलाह दी गई है उन्होंने यह भी बताया कि सीएम स्टालिन की हालत मेंसुधार हो रहा है. उदयनिधि ने कहा, ‘इलाज कर रहे डॉक्टरों ने उन्हें आराम करने की सलाह दी है. पिछले दो-तीन महीनों के उनके व्यस्त कार्यक्रम ने उनपर काफी असर डाला है. जब पत्रकारों ने उदयनिधि से पूछा कि सीएम को अस्पताल से कब तक छुट्टी मिलेगी. स्टलिन हुए अस्पताल में भर्तीइसके जवाब में उन्होंने कहा कि जल्द ही उदयनिधि ने दिन में सीएम स्टालिन से अस्पताल जाकर मुलाकात की. इसके बाद उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्रीको इस बात की चिंता है कि वह आज के आधिकारिक कार्यक्रमों में शामिल नहीं हो सके. अस्पताल की तरफ से जारी बयान में कहा गया किमुख्यमंत्री को तीन दिन आराम करने की सलाह दी गई है. कुछ और जांचें की जाएंगी हालांकि उम्मीद है कि वे अस्पताल में रहते हुए भी आधिकारिकतौर पर अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते रहेंगे. इस बीच अन्नाद्रमुक महासचिव एडप्पादी के पलानीस्वामी ने मन्नारगुडी (तिरुवरुर जिला) में एक रोड शोके दौरान स्टालिन के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की. पलानीस्वामी ने कहा, ‘मैंने सुना है कि डीएमके अध्यक्ष और मुख्यमंत्री एमके स्टालिन कोअस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनका इलाज चल रहा है. मैं अपनी और आपकी ओर से उनके पूर्ण स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं. सीएम स्टालिन से की मुलाकातराज्य के जल संसाधन मंत्री दुरईमुरुगन ने भी अस्पताल में सीएम स्टालिन से मुलाकात की. इसके बाद उन्होंने पत्रकारों से कहा कि मुख्यमंत्री स्वस्थ हैं. वह जल्द ही घर लौट आएंगे. चिकित्सा सेवा निदेशक डॉ. अनिल बी जी ने एक बयान में कहा कि स्टालिन को उनके लक्षणों की जांच के लिएअपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि आवश्यक नैदानिक परीक्षण किए जा रहे हैं. तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमकेस्टालिन सोमवार सुबह सैर करने के लिए घर से निकले थे. इस दौरान उन्हें हल्के चक्कर आ गए, जिसके बाद उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती करायागया। डॉक्टरों ने सीएम को तीन दिन आराम करने की सलाह दी है.इस बीच, विपक्षी दल के नेता और एआईएडीएमके महासचिव एडप्पादीपलानीस्वामी ने सीएम की जल्द स्वस्थ होने की कामना की. जल संसाधन मंत्री दुरैमुरुगन ने भी अस्पताल जाकर सीएम से मुलाकात की और कहा किवह स्वस्थ हैं और जल्द घर लौटेंगे मेडिकल डायरेक्टर डॉ. अनिल बी जी ने बताया कि आवश्यक जांच-पड़ताल चल रही है.
भाजपा का बुलडोजर अब रोज़गार पर, आतिशी ने मिरदर्द मार्ग पर व्यापारियों को दिया साथ का भरोसा

दिल्ली के मिरदर्द मार्ग पर स्थित दुकानों को भाजपा सरकार द्वारा तोड़ने की नोटिस देने के विरोध में सोमवार को आम आदमी पार्टी की वरिष्ठ नेता औरदिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी वहां के दुकानदारों से मिलीं और उनकी दुकानें बचाने का आश्वासन दिया. उन्होंने कहा कि पूरी दिल्ली मेंभाजपा का बुलडोज़र अब सिर्फ़ गरीबों के घरों तक सीमित नहीं रहा अब ये जनता के रोज़गार पर भी चलने लगा है. मिरदर्द मार्ग पर दशकों से चल रही दुकानों को भाजपा सरकार तोड़ने की तैयारी कर रही है. भाजपा क्या चाहती है? क्या दिल्ली के लोग बेरोज़गार हो जाएं. उनके घर भी टूटें और वे सड़कों पर आ जाएं? आम आदमी पार्टी मिरदर्द मार्ग के हर दुकानदार, व्यापारी के साथ मज़बूती से खड़ी है. हर मोर्चे पर इनका साथ देंगे. बीजेपी का बुलडोज़र आने दो, हम डटकर मुकाबला करेंगे. इस दौरान आतिशी ने भाजपा पर तीखा हमला बोला और कहा कि भाजपा संविधान औरगरीब विरोधी पार्टी है जब से दिल्ली में भाजपा की चार इंजन की सरकार बनी है. कार्ड पर बनी हुई है नरेंद्र मोदी की फोटोआम लोगों को परेशान कर रही है एक-एक कर दिल्ली की सारी झुग्गियों को तोड़ा जा रहा है. लोगों को बेघर किया जा रहा है. भाजपा के बड़े-बड़ेनेता चुनाव से पहले झुग्गियों में जाते थे वहां बच्चों के साथ खेलते थे और खाना खाते थे. लेकिन सरकार बनते हीं भाजपा ने उन सभी घरों को तोड़नाशुरू कर दिया है. आतिशी ने कहा कि भाजपा क्या क्या चाहती है? दिल्ली के लोग बेरोज़गार हो जाएं उनके घर भी टूटें और वे सड़कों पर आ जाएं? आम आदमी पार्टी मिरदर्द मार्ग के हर दुकानदार, व्यापारी के साथ मज़बूती से खड़ी है. हर मोर्चे पर इनका साथ देंगे आने दो बीजेपी का बुलडोज़र, हमडटकर मुकाबला करेंगे. आतिशी ने भाजपा के चुनावी वादे याद दिलाते हुए कहा कि चुनाव से पहले भाजपा वाले पूरी दिल्ली में घूम-घूम कर कहते थेकि जहां झुग्गी वहां मकान देंगे. लेकिन क्या हुआ हम सबने देखा, वो जहां भी गए वहां झुग्गियों को तोड़ा. जंगपुरा में मद्रासी कैंप में घरों को तोड़ागया. अगले ही दिन मैं वहां गई थी. वहां लोगों को खून के आंसू रोते देखा. उनके हाथ में भाजपा का जहां झुग्गी वहां मकान का कार्ड था कार्ड परप्रधामनंत्री नरेंद्र मोदी की फोटो बनी हुई थी. गरीबों से चल रहा है शहरलेकिन जब बुलडोजर आया तो उनके घरों को बचाने कोई नहीं आया. वो भाजपा वाले भी नहीं जो उनके घर खाना खाते थे. आतिशी ने कहा किभाजपा पहले घरों को तोड़ा, अब दुकानों को तोड़कर गरीबों के रोजी-रोटी को खत्म करना चाहती है। मैं करोल बाग के चुनाभट्टी जेजे कैंप में गई, दिल्ली के नंगली डेयरी में गई वहां लोग चालीस साल से पचास साल से लोग रह रहे हैं. वहां भी इसी तरह के नोटिस चस्पा किए गए हैं. भाजपा केचार इंजन की सरकार बनने के बाद चारों इंजन गरीबों को परेशान करने के लिए लगा दिया है. आतिशी ने कहा कि ये भाजपा वाले भूल गए हैं किगरीबों की कितनी ताकत है। हम गाड़ी चलाते हैं. दुकान चलाते है अभी हमारे हाथ दिल्ली चलाने में लग रहे हैं लेकिन अगर आपने गरीबों को परेशानकिया और गरीबों के हाथ शहर हो रोकने में लग गई तो शहर थम जाएगा. गरीबों की ताकत को कम मत आंको उन्होंने कहा कि आज मैं आपके बीचआई हूं, आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल कल भी गरीबों के साथ थे आज भी हैं और आगे भी रहेंगे. आप इस लड़ाई में अकेले नहीं हैं हमआपके साथ हैं इस लड़ाई में चाहे सड़क पर लड़ना हो, संसद में लड़ना हो या कोर्ट में लड़ना हो.
बिहार की चुनावी जंग में दलित वोट निर्णायक, NDA और महागठबंधन में शुरू हुआ सामाजिक समीकरणों का युद्ध

बिहार की चुनावी लड़ाई में इस बार दोनों गठबंधनों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है. इस चुनावी युद्ध में जीत उस गठबंधन की हो सकती हैजो बिहार के सामाजिक समीकरणों को अपने पक्ष में मोड़ लेने में सफल होगा. इसे ध्यान में रखते हुए भाजपा ने बिहार के दलितों को अपने पाले मेंलाने के लिए ‘दलित बस्ती संपर्क अभियान’ चला रखा है. इन संपर्क कार्यक्रमों में दलित समुदाय के पढ़े-लिखे युवाओं-विद्वानों के बीच यह विमर्शखड़ा करने की कोशिश की जा रही है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार की सरकार दलितों के उत्थान के लिए किस तरह कारगर साबित हुईहै. बिहार में दलितों की आबादी लगभग 19 प्रतिशत है.केंद्र सरकार ने विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं चलाकर दलित समुदाय को साधने का कामकिया है. भाजपा अपने दलित बस्ती संपर्क अभियान में उन दलित लाभार्थियों को भी बुला रही है जिन्होंने केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं कालाभ लिया है. इसका उद्देश्य दलित समुदाय के बीच यह संदेश देना है कि केंद्र सरकार ने उनका जीवन स्तर बदलने का काम किया है. इसी तरहनीतीश कुमार सरकार ने भी बिहार में बेहतर काम किया है भाजपा बिहार सरकार के लाभार्थियों तक भी पहुंचने की कोशिश कर रही है. वामदल भी दे रहे है सहयोगकांग्रेस-राजद का महागठबंधन जातिगत जनगणना के मुद्दे के सहारे दलितों का वोट हासिल करने की रणनीति पर चल रहा है. राज्य के वामदल भीइसमें अपना सहयोग कर रहे हैं. ऐसे में महागठबंधन की दावेदारी भी कमजोर नहीं है। लेकिन इसी विमर्श की काट के तौर पर भाजपा दलितों के बीचनए पढ़े-लिखे युवाओं को अपने साथ जोड़कर यह विमर्श पैदा करने की कोशिश कर रही है कि एनडीए ने उनके लिए बेहतर कामकाज किया है. भाजपा कार्यकर्ता दलितों के बीच केवल विमर्श ही पैदा करने की कोशिश नहीं कर रहे. बल्कि उनको साथ लेकर उन्हें सामाजिक स्तर पर सम्मान देनेका काम भी कर रहे हैं. खान-पान के कार्यक्रम रखकर उनके बीच भागीदारी बढ़ाने का काम भी चल रहा है. इसमें आरएसएस के अनुषांगिक संगठन भीजुटे हुए हैं. बिहार में पासवान दलित समुदाय की आबादी पूरे दलित समुदाय की लगभग 30.9 प्रतिशत है। दलितों के नेता के रूप में रामविलासपासवान इस समय भी सबसे बड़े नेताओं में गिने जाते हैं। उनका असर है कि चिराग पासवान की न केवल अपने क्षेत्र में लोकप्रियता है. बल्कि वे पूरेराज्य के दलितों के बीच लोकप्रिय हैं. वे भाजपा के साथ एनडीए में रहते हुए इस गठबंधन के लिए बड़े उपयोगी साबित हो सकते हैं. कांग्रेस का वोट बैक बनाकर रह गए थेहम पार्टी के नेता जीतन राम मांझी महादलित जातियों के बीच अच्छा असर रखते हैं इसके अलावा भी भाजपा अलग-अलग क्षेत्रों में दलितों को साधनेमें जुटी हुई है. भाजपा के अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. संजय निर्मल ने अमर उजाला से कहा कि दलित समुदाय के लोग आजादी केसमय से ही कांग्रेस के वोट बैंक बनकर रह गए थे. बाद में कुछ दलों ने इन जातियों के नाम पर राजनीति करने की कोशिश की. लेकिन इनके नेताओं नेइन जातियों का आर्थिक-सामाजिक उत्थान करने की बजाय अपना ही उत्थान करने का काम किया. यही कारण है कि दलितों के जीवन स्तर में कोईबड़ा व्यापक परिवर्तन नहीं हुआ. डॉ. संजय निर्मल के अनुसार, लेकिन जैसे ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में केंद्र में सरकार संभाली, उसके बादस्थिति में तेजी के साथ परिवर्तन आया है. केंद्र सरकार ने पीएम आवास योजना, पीएम विश्वकर्मा योजना और जनधन योजनाओं के सहारे दलितों केजीवन स्तर को उठाने का बड़ा काम किया है। यही कारण है कि केवल पिछले 11 वर्षों में ही दलितों के जीवन स्तर में गुणात्मक परिवर्तन आया है.
अवैध कब्जे पर सख्त हिमंता असम की 29 लाख बीघा जमीन पर संदिग्ध बांग्लादेशियों का कब्जा, चरणबद्ध अभियान से हो रहा मुक्त

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने सोमवार को दावा किया कि राज्य की लगभग 29 लाख बीघा (10 लाख एकड़) जमीन पर ‘अवैधबांग्लादेशियों और संदिग्ध नागरिकों’ का कब्जा है. मुख्यमंत्री ने कहा कि 2021 में सत्ता में आने के तुरंत बाद दरंग जिले के गोरुखुटी में इसे खालीकराने के लिए अभियान चलाया गया था. जिसके बाद उनकी सरकार पर अंतरराष्ट्रीय दबाव पड़ा था कि इस तरह की कार्रवाइयों को रोका जाए लेकिनजनता इससे पीछे नहीं हटी. सरमा गोरुखुटी बहुद्देशीय कृषि परियोजना की चौथी वर्षगांठ पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे. यहपरियोजना 2021 में 77,420 बीघा (25,500 एकड़) जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराकर शुरू की गई थी. उस समय अधिकतर बंगाली भाषीमुसलमानों को हटाया गया था. इस दौरान पुलिस की गोलीबारी में दो लोगों की मौत हुई थी जिनमें एक 12 साल का बच्चा भी था. मुख्यमंत्री ने कहा, यहां के सफल अभियान से हमें हिम्मत मिली और हम बोरसोल्ला, लुमडिंग, बुरहापहाड़, पाभा, बतद्रवा, चापर और पैकन में भी सख्त कदम उठा सके. पौधारोपण का किया जा रहा कामचार साल में हमने 1.29 लाख बीघा (लगभग 43,000 एकड़) जमीन को खाली कराया है और अब यह जमीन सार्वजनिक कार्यों में उपयोग हो रही हैउन्होंने कहा कि खाली कराई गई जमीन और वन क्षेत्रों में पौधारोपण का काम किया जा रहा है, जिससे हाथी, गैंडा और बाघ जैसे जानवर अपनेप्राकृतिक आवास में लौट रहे हैं. मुख्यमंत्री ने दोहराया, हमने संकल्प लिया है कि एक-एक इंच जमीन को अतिक्रमण से मुक्त करेंगे. चाहे उस परसंदिग्ध बांग्लादेशियों का कब्जा ही क्यों न हो. अब भी 29 लाख बीघा जमीन पर अवैध बांग्लादेशियों और संदिग्ध नागरिकों का कब्जा है। उन्होंनेकहा कि अब तक थोड़ा ही क्षेत्र खाली कराया गया है. लेकिन उन्हें भरोसा है कि बाकी जमीन को भी छुड़ाया जा सकता है क्योंकि असम के लोगों नेअपनी ताकत को फिर से पहचान लिया है. मुख्यमंत्री ने कहा अगर कोई सोचता है कि दो-तीन अभियानों के बाद हम डर जाएंगे. उनकी आंखों में आंखेंनहीं डालेंगे और झुक जाएंगे तो वे गलतफहमी में हैं. असम आंदोलन के शहीदों का बदला जरूर लिया जाएगा. कांग्रेस के आगे कर दिया था समर्पणउन्होंने कहा कि 1983 से 1985 के बीच असम आंदोलन के दौरान लोगों में हार की भावना आ गई थी और कई लोगों ने कांग्रेस के आगे ‘समर्पण’ करदिया था. जिससे राज्य की राजनीति की दिशा बदल गई थी. सरमा बोले, किसी समय हमने मान लिया था कि हमें साथ-साथ जीना होगा. शंकर-माधव की जगह हम शंकर-अजान कहने लगे. अजान पीर अपनी जगह पर रहेंगे. लेकिन माधव (माधवदेव) का भी अपना स्थान है. तभी हमारी ‘जाति’ बच सकती है। श्रीमंत शंकरदेव और श्री श्री माधवदेव असम के पूज्य वैष्णव संत हैं. जबकि अजान पीर एक मुस्लिम संत थे जो 17वीं सदी में इराक सेअसम आए थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरुखुटी का निष्कासन अभियान बहुत अहम था और इसके बाद सरकार पर अंतरराष्ट्रीय दबाव भी बना कि ऐसेअभियान रोके जाएं. लेकिन हमारे लोग नहीं रुके. हमने यह संघर्ष जीतना सीख लिया है. अब हालात ऐसे हैं कि जब हम कहते हैं कि असमियों कीजमीन पर कब्जा हो रहा है तो अवैध कब्जाधारी खुद ही वहां से हट जाते हैं.
उद्धव ठाकरे पर टिप्पणी के मामले में नारायण राणे ने हाईकोर्ट से याचिका ली वापस, थप्पड़ बयान पर दर्ज FIR अब बेमानी

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद नारायण राणे ने सोमवार को बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर अपनी उस याचिका को वापस ले लिया. जिसमें उन्होंने2021 में अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी. यह एफआईआर उस समय के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के खिलाफ की गईउनकी टिप्पणी को लेकर दर्ज की गई थी. राणे के वकील अनिकेत निकम ने न्यामूर्ति रवींद्र घुगे की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया कि रायगढ़ में दर्जमामले में पुलिस पहले ही एक रिपोर्ट दे चुकी है. जिसे ‘सी समरी’ कहते हैं. इसका मतलब है कि पुलिस को न तो मामला सही लगा और न ही गलत. अतिरिक्त लोक अभियोजक जेपी याज्ञनिक ने अदालत को बताया कि पुणे में दर्ज मामले में भी इसी तरह की रिपोर्ट दाखिल की जाएगी. पीठ ने इसपर संज्ञान लिया और रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग से लोकसभा सांसद राणे को याचिकाएं वापस लेने की अनुमति दे दी. स्वतंत्रता का वर्ष नहीं पाए बतागौरतलब है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री राणे ने कहा था कि अगर उद्धव ठाकरे अपने भाषण में कथित तौर पर भारत की स्वतंत्रता का सही साल नहीं बता पाए. तो वह उन्हें ‘एक जोरदार थप्पड़’ मारते राणे की इस टिप्पणी से विवाद खड़ा हो गया था. बाद में राणे के इसी बयान को लेकर उनके खिलाफएफआईआर दर्ज हुई थी. बीजेपी सांसद नारायण राणे ने बॉम्बे हाईकोर्ट में 2021 में दर्ज की गई एफआईआर को रद्द करने के लिए दायर अपनीयाचिकाएं वापस ले ली हैं. यह एफआईआर उनके उस बयान पर दर्ज हुई थी जिसमें उन्होंने कहा था कि “अगर उद्धव ठाकरे स्वतंत्रता का वर्ष नहीं बतापाए, तो उन्हें थप्पड़ मारूंगा. राणे के वकील ने कोर्ट को बताया कि रायगढ़ पुलिस पहले ही ‘सी-समरी’ रिपोर्ट (जिसका मतलब होता है मामला न सहीहै न गलत) दाखिल कर चुकी है. आरोग्य की जानकारी अदालत को वकील अनिकेत निकम ने दी कि रायगढ़ के एक मामले में पुलिस ने ‘C Summary’ रिपोर्ट दाखिल की है. जिसका अर्थ है कि न तो सबूत पर्याप्त हैं और न ही आरोप सही ठहराए जा सकते हैं. एफआईआर के रद्दीकरण की थी मांगपुणे में भी इसी तरह की रिपोर्ट तैयार की जा रही है भाजपा सांसद नारायण राणे ने सोमवार को बॉम्बे हाईकोर्ट में अपनी दो petitions वापस लीं, जिनमें वे 2021 में उद्धव ठाकरे पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर दर्ज एफआईआर के रद्दीकरण की मांग कर रहे थे. रायगढ़ अदालत नेअप्रैल 2023 में राणे को उनका बयान दोषपूर्ण लेकिन “अपवित्र भाषण” बताते हुए बरी किया था. उसने पाया कि यह भाषण न तो सार्वजनिकव्यवस्था भंग कर रहा था और न ही किसी अन्य समूह के खिलाफ दुष्प्रचार करता था अगस्त 2021 में राणे ने कहा था कि यदि सीएम ठाकरे स्वतंत्रतावर्ष याद नहीं कर पाए तो “मैं उन्हें एक जोरदार थप्पड़ मारता जिसने राजनीतिक और कानूनी तूफ़ान खड़ा कर दिया था इस बयान के खिलाफ शिवसेनाके समर्थकों ने आपत्तियां दर्ज करवाईं, जिसके बाद पुलिस ने कई स्थानों पर प्राथमिकी दर्ज की और राणे को गिरफ्तार किया गया पर बाद में फटाफटजमानत मिली राजनीतिक रूप से यह कदम BJP को शाहीनबाग और शिवसेना जैसे पुराने सहयोगियों के प्रति राणे की स्थिति स्पष्ट रखने मेंलाभदायक साबित हो सकता है.
स्वास्थ्य कारणों से उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने दिया इस्तीफा, भारत के इतिहास में दूसरा ऐसा मामला

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. धनखड़ ने अपने इस्तीफे में लिखा, ‘मैं स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुएऔर डॉक्टरों की सलाह का पालन करते हुए भारत के उपराष्ट्रपति पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा देता हूं. यह इस्तीफा संविधान के अनुच्छेद 67(ए) के अनुसार है मैं भारत की माननीय राष्ट्रपति को हार्दिक धन्यवाद देता हूं. जिन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान मुझे लगातार सहयोग और एक शांतिपूर्णकार्य संबंध प्रदान किया. यह मेरे लिए बेहद सुखद अनुभव रहा ‘उन्होंने आगे कहा, ‘मैं माननीय प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद का भी आभार प्रकट करताहूं. प्रधानमंत्री का सहयोग मेरे लिए बेहद मूल्यवान रहा है और मैंने अपने कार्यकाल के दौरान उनसे बहुत कुछ सीखा है. धनखड़ ने कहा, मुझे माननीयसांसदों से जो स्नेह, विश्वास और अपनापन मिला, वह मेरे लिए सदा अमूल्य रहेगा और मेरी स्मृति में अंकित रहेगा. मैं इस महान लोकतंत्र में उपराष्ट्रपतिके रूप में मिले अमूल्य अनुभवों और ज्ञान के लिए अत्यंत आभारी हूं.’ गर्व और संतोष की हो रही है बातउन्होंने आगे लिखा कि इस महत्वपूर्ण कालखंड में भारत की अभूतपूर्व आर्थिक प्रगति और असाधारण विकास का साक्षी बनना और उसमें सहभागीहोना मेरे लिए गर्व और संतोष की बात रही है. हमारे राष्ट्र के इस परिवर्तनकारी युग में सेवा करना मेरे लिए एक सच्चा सम्मान रहा है जब मैं इसप्रतिष्ठित पद को छोड़ रहा हूं, तो मैं भारत के वैश्विक उत्थान और उसकी अद्भुत उपलब्धियों पर गर्व से भर जाता हूं और उसके उज्ज्वल भविष्य में मेरीपूर्ण आस्था है. भारत के उपराष्ट्रपति के एक्स हैंडल से धनखड़ की तस्वीर को हटा दिया गया है. देश के इतिहास में यह दूसरा मामला है जब किसीउपराष्ट्रपति ने अपना कार्यकाल पूरा करने से पहले उस पद से इस्तीफा दिया है। इससे पहले वीवी गिरि ने 20 जुलाई, 1969 को स्वतंत्र उम्मीदवार केरूप में राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के लिए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. पिछले महीने उत्तराखंड के तीन दिवसीय दौरे पर गए थे. कुमाऊं विश्वविद्यालयमें कार्यक्रम खत्म होने के बाद उनकी अचानक तबीयत खराब हो गई थी. मौके पर चिकित्सकों की टीम ने उन्हें प्राथमिक उपचार दिया था. जिसके बादवह राज्यपाल गुरमीत सिंह के साथ राजभवन को रवाना हो गए थे. सरकार का है विश्वास प्राप्तइससे पहले उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा था कि ईश्वर की कृपा रही तो वह अगस्त, 2027 में सेवानिवृत्त हो जाएंगे. 14वें उपराष्ट्रपति के रूप में धनखड़का पांच साल का कार्यकाल 10 अगस्त, 2027 को समाप्त हो रहा है. पेशे से वकील धनखड़ उपराष्ट्रपति चुने जाने से पहले पश्चिम बंगाल केराज्यपाल थे. उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे ने उनके उत्तराधिकारी के लिए सत्तारूढ़ खेमे में विमर्श का दौर शुरू कर दिया है. सत्तारूढ़भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के पास लोकसभा और राज्यसभा के निर्वाचक मंडल में बहुमत है। आने वाले दिनों में एनडीएसंभावित उम्मीदवारों पर विचार करेगा. धनखड़ पहले प. बंगाल के राज्यपाल रह चुके हैं. संभव है कि एनडीए किसी अन्य राज्यपाल, अनुभवीसंगठनात्मक नेता या केंद्रीय मंत्रियों में से किसी एक का चुनाव इस पद के लिए करे. धनखड़ के पूर्ववर्ती एम. वेंकैया नायडू भाजपा के पूर्व अध्यक्ष औरनरेंद्र मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री थे. उन्हें 2017 में इस सांविधानिक पद के लिए चुना गया था. राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश जनता दल(यूनाइटेड) के सांसद हैं और 2020 से इस पद पर हैं. उनको भी संभावित उम्मीदवार माना जा रहा है, क्योंकि उन्हें सरकार का विश्वास प्राप्त है.
बिहार विधानसभा मानसून सत्र में हंगामा, तेजस्वी यादव ने मतदाता पुनरीक्षण पर चर्चा की उठाई मांग “सरकार को चेताया”

आज बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन विपक्ष ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार पर जमकर हंगामा बोला. सदन के अंदर औरबाहर विपक्ष के नेताओं ने प्रदर्शन किया. भाकपा माले के विधायकों ने कपड़े पहनकर एनडीए सरकार की नीतियों के खिलाफ अपना विरोध जताया।सदन में विपक्ष के विधायक गुंडाराज के नारे लगा रहे थे. अनुपूरक बजट पेश होने के बाद शोक प्रस्ताव हुआ. इसके बाद विधानसभा की कार्यवाहीस्थगित कर दी गई. इधर, सदन से बाहर निकले प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान नीतीश सरकार को बड़ी नसीहत दे दी. उन्होंनेकहा कि हमलोगों की मांग है कि मतदाता पुनरीक्षण कार्य पर विधानसभा में एक चर्चा होनी चाहिए. NDA सरकार को घेरालोकतंत्र का सबसे बड़ा मंदिर बिहार में विधानसभा है ऐसे में चर्चा तो जरूरी है. लेकिन अगर लोकतंत्र को समाप्त करने का कोई प्रयास करेगा तो हमलोग चुप बैठने वाले नहीं हैं. गरीबों को वोट देने के अधिकार से वंचित किया जाए. उनका अस्तित्व न मिटाया जाए, इसके लिए हमलोग यह लड़ाईलड़ेंगे। अगर सरकार विधानसभा में चर्चा करने पर राजी नहीं होती है तो हम लोग आने वाले समय में आंदोलन करेंगे. तेजस्वी यादव ने कहा कि सभीनेताओं को हम लोगों ने चिट्ठी लिखी है. सरकार को इस गंभीर मुद्दे पर चर्चा करनी होगी इंडिया गठबंधन के सभी विधायकों ने मानसून सत्र के पहलेदिन बिहार में बढ़ते अपराध और मतदाता पुनरीक्षण कार्य के मुद्दे पर NDA सरकार को घेरा. वहीं नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सरकार से बड़ी मांगकर दी. सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शनबिहार विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन विपक्ष ने एनडीए सरकार के खिलाफ सदन के अंदर और बाहर जोरदार प्रदर्शन किया. भाकपा माले केविधायकों ने विशेष वेशभूषा पहनकर एनडीए सरकार की नीतियों के खिलाफ विरोध जताया. विपक्षी विधायकों ने राज्य में कानून–व्यवस्था की स्थितिको लेकर सरकार पर हमला बोला और “गुंडाराज” के नारे लगाए। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि यदि सरकार मतदाता पुनरीक्षण जैसे गंभीरमुद्दे पर चर्चा नहीं करती तो विपक्ष आंदोलन करेगा. तेजस्वी ने कहा कि गरीबों को वोट देने के अधिकार से वंचित करने की कोशिश की जा रही है. जिसे वे बर्दाश्त नहीं करेंगे. INDIA गठबंधन के सभी विधायकों ने राज्य में बढ़ते अपराध और मतदाता पुनरीक्षण पर एनडीए सरकार को घेरा. तेजस्वीयादव ने बताया कि उन्होंने सभी नेताओं को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर समर्थन मांगा है और सरकार पर दबाव बनाया जाएगा. अनुपूरक बजट पेश होनेऔर शोक प्रस्ताव के बाद विधानसभा की कार्यवाही स्थगित कर दी गई.
टीएमसी शहीद दिवस रैली में ममता बनर्जी का भाजपा पर हमला, 27 जुलाई से बंगाली अस्मिता के लिए भाषा आंदोलन का एलान

पश्चिम बंगाल में अगले साल होने वाले विधानसभा के चुनाव को लेकर राज्य की सियासत में गर्माहट तेज है. राजनीतिक पार्टियों की तैयारी और उनकेमुद्दे को लेकर आरोप-प्रत्यारोप भी अपने चरम पर है. इसी बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को टीएमसी शहीद दिवस रैली में भाजपा केखिलाफ जमकर हमला बोला उन्होंने कहा कि भाजपा बंगालियों पर भाषाई आतंकवाद थोप रही है और अगर यह नहीं रुका तो यह विरोध आंदोलनदिल्ली तक पहुंचेगा. कोलकाता में भारी जनसमूह को संबोधित करते हुए ममता ने कहा कि 2026 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को हराना जरूरी हैऔर इसके बाद केंद्र से भी भाजपा को हटाना होगा. उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे बंगाली अस्मिता (गौरव) के लिए एकजुट होकर लड़ें. बंगालियों को किया जा रहा है परेशानइसके साथ ही मुख्यमंत्री ने एलान किया कि 27 जुलाई से राज्य में भाषा आंदोलन की शुरुआत की जाएगी. उन्होंने कहा कि भाजपा द्वारा बंगालीभाषा और पहचान पर हो रहे हमलों के खिलाफ हमें आवाज उठानी होगी. ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि भाजपा शासित राज्यों में बंगालियों कोपरेशान किया जा रहा है उन्होंने कहा कि एनआरसी नोटिस भेजे जा रहे हैं. लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं और डिटेंशन कैंपों में डाला जारहा है. उन्होंने याद दिलाया कि 2019 में भाजपा कार्यकर्ताओं ने ईश्वर चंद्र विद्यासागर की मूर्ति तोड़ी थी और अब फिर से बंगालियों को उनकीपहचान से वंचित करने की कोशिश की जा रही है. इसके साथ ही असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा पर भी ममता ने तीखा हमला बोला. उन्होंनेकहा कि अपने राज्य को संभाल नहीं पा रहे हैं लेकिन बंगाल के मामलों में दखल दे रहे हैं. चुनाव आयोग पर लगाए गंभीरमैं सुष्मिता देव से आग्रह करती हूं कि वे असम में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करें हम सब उनका साथ देंगे .ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर भी गंभीरआरोप लगाए. उन्होंने कहा कि ईसी भाजपा के इशारे पर काम कर रही है, जैसे बिहार में किया गया था.”अगर यही कोशिश बंगाल में की गई तो हमउनका घेराव करेंगे. हम ऐसा कभी नहीं होने देंगे. सीएम ममता बनर्जी के बाद टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने भी भाजपा पर निशानासाधा. उन्होंने भाजपा को बांग्ला विरोधी पार्टी करार दिया। साथ ही आरोप लगाया कि भाजपा बंगालियों को डिटेंशन कैंप में भेजना चाहती है. लेकिन2026 के विधानसभा चुनाव के बाद खुद बीजेपी को बंगाल से बाहर कर दिया जाएगा। कोलकाता में आयोजित टीएमसी के शहीद दिवस की रैलीको संबोधित करते हुए अभिषेक बनर्जी ने कहा कि भाजपा चाहती है कि बंगालियों को डिटेंशन कैंप में भेजा जाए. लेकिन मैं साफ कहता हूं – 2026 के चुनाव के बाद बीजेपी को ही डिटेंशन कैंप में भेजेंगे और राज्य से मिटा देंगे.
गेम खेलने वाले वीडियो पर बवाल, लातूर में बवाल के बाद अजित पवार सख्त “एनसीपी युवा अध्यक्ष से मांगा इस्तीफा”

महाराष्ट्र के कृषि मंत्री माणिकराव कोकाटे के विधान भवन में गेम खेलने वाले वायरल वीडियो पर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. ऐसे में अबमहाराष्ट्र के लातूर जिले में रविवार को छावा संगठन और एनसीपी (अजित पवार गुट) के कार्यकर्ताओं के बीच हुई मारपीट के मामले को लेकर डिप्टीसीएम अजित पवार ने सख्त रुख अपनाया है। पवार ने इस हरकत को पार्टी के सिद्धांतों के खिलाफ बताते गुए एनसीपी युवा मोर्चा के अध्यक्ष सूरजचव्हाण से तुरंत इस्तीफा देने को कहा है. बता दें कि ये पूरा मामला तब खड़ा हुआ जब रविवार को लातूर में एनसीपी प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे कीप्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान छावा संगठन के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया. वे राज्य के कृषि मंत्री माणिकराव कोकाटे का विरोध कर रहे थे जिनकाएक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था. कोकाटे के इस्कीफे की मांगवीडियो में कोकाटे राज्य विधानमंडल के सत्र के दौरान मोबाइल पर रम्मी खेलते हुए दिख रहे थे. विरोध में छावा संगठन के नेता विजय घाटगे ने तटकरेकी टेबल पर ताश की गड्डी फेंकी और कोकाटे के इस्तीफे की मांग की. इसके बाद एनसीपी कार्यकर्ताओं ने घाटगे और अन्य प्रदर्शनकारियों की पिटाईकर दी मामला बढ़ता देख पुलिस ने बीच-बचाव किया. मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए डिप्टी सीएम अजित पवार ने कहा कि यह घटना बेहद गंभीर, दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है. उन्होंने कहा कि वे किसी भी प्रकार की हिंसा, अभद्र व्यवहार या आपत्तिजनक भाषा के खिलाफ हैं. उन्होंने कहा कि हमसमाज के हर वर्ग की भावनाओं और मांगों का सम्मान करते हैं. उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी की पहचान लोकतंत्र, समानता और भाईचारे पर आधारितहै जैसे सिद्धांत छत्रपति शिवाजी महाराज, शाहू महाराज, महात्मा फुले और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने दिए हैं. गुस्से में आकर उठाया कदमइसके साथ ही अजित पवार ने अपने सभी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे लोकतंत्र, शांति और अहिंसा के रास्ते पर चलें। इस घटना में एनसीपी युवामोर्चा अध्यक्ष सूरज चव्हाण भी शामिल थे. उन्होंने मीडिया से कहा कि छावा संगठन के लोगों ने अपशब्द कहे, जिससे गुस्से में आकर उन्होंने यह कदमउठाया. उन्होंने कहा कि सिर्फ इसलिए कि हम सत्ता में हैं. इसका मतलब यह नहीं कि हम कुछ भी गलत कर रहे हैं. वहीं इस मामले में एनसीपी नेताअध्यक्ष सुनील तटकरे ने सोमवार को कहा कि महाराष्ट्र के कृषि मंत्री माणिकराव कोकाटे के वायरल वीडियो को लेकर पार्टी अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्रीअजित पवार इस मामले को गंभीरता से लेंगे और मंत्री से बात करेंगे. तटकरे ने कहा कि कृषि मंत्री द्वारा पहले भी दिए गए कुछ बयान सही नहीं थे, उससमय भी अजित पवार ने उनसे बात की थी. इस बार भी पार्टी अध्यक्ष इस वीडियो मामले को गंभीरता से लेंगे और उचित निर्देश देंगे. उन्होंने आगे कहाकि एनसीपी हमेशा शांति के मार्ग पर चली है. लातूर की घटना निंदनीय है. मैंने छावा संगठन के कार्यकर्ताओं की भावनाएं समझी हैं. उन्होंने मुझ परताश फेंके फिर भी मैंने उन्हें धन्यवाद दिया और कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.