मालेगांव केस में बरी हुए सभी आरोपी, ‘भगवा आतंक’ पर गरमाई सियासत भाजपा बोली कांग्रेस को हिंदुओं से मांगनी चाहिए माफी

मालेगांव ब्लास्ट मामले में साध्वी प्रज्ञा समेत सातों आरोपियों को बरी कर दिया है. इसके बाद से भाजपा कांग्रेस पर हमलावर हो गई है. कोर्ट केफैसले पर भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि कांग्रेस और दिग्विजय सिंह ने इस्लामिक आतंकवाद पर पर्दा डालने के लिए जानबूझ कर हिंदूआतंकवाद शब्द को गढ़ा था. हिंदू न कभी आतंकवादी था, न है और न होगा. कोर्ट के फैसले के बाद दिग्विजय सिंह समेत पूरी कांग्रेस को हिंदुओं सेमाफी मांगनी चाहिए. वहीं मध्यप्रदेश विधानसभा में मंत्री राकेश सिंह ने मालेगांव ब्लास्ट में कोर्ट के फैसले से सभी को अवगत कराया। उन्होंने कहा किअभी-अभी मालेगांव ब्लास्ट को लेकर निर्णय आया है, जिन लोगों पर हिंदू आतंकवाद के आरोप लगाए गए थे. उन्हें कोर्ट ने बरी कर दिया. इससेसाबित हो गया है कि हिंदू आतंकवाद नाम की कोई चीज़ नहीं है. जो होगा प्रभावित वो करेगा अपीलवहीं, एनआईए कोर्ट में भोपाल की पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने कहा, “मैंने शुरू से ही कहा है कि जिन लोगों को जांच के लिए बुलाया जाताहै, उसके पीछे कोई आधार होना चाहिए. मुझे जांच के लिए बुलाया गया और गिरफ्तार कर प्रताड़ित किया गया. इससे मेरा पूरा जीवन बर्बाद होगया. मैं एक साधु का जीवन जी रही थी, लेकिन मुझे फंसा दिया गया. कोई भी हमारे साथ खड़ा नहीं हुआ. मैं जीवित हूं, क्योंकि मैं एक संन्यासी हूं. उन्होंने कहा कि एक षड्यंत्र के तहत भगवा को बदनाम किया. आज भगवा और हिंदुत्व की जीत हुई है. जो लोग दोषी हैं उन्हें भगवान सजा देंगे. मालेगांव विस्फोट मामले में एनआईए कोर्ट के फैसले पर कांग्रेस नेता और मप्र के पूर्व सीएम कमलनाथ का भी बयान सामने आया. उन्होंने कहा- जोभी प्रभावित होगा वह अपील करेगा. प्रियंका, राहुल का मांगनी चाहिए माफीभाजपा जो चाहे कह सकती है, लेकिन यह अदालत का फैसला है और इस पर अपील की जा सकती है. वे निश्चित रूप से दोबारा अपील करेंगेमालेगांव ब्लास्ट केस के फैसले पर मप्र की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने भी एक्स (पूर्व में ट्विटर) कर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा- भोपाल कीपूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा आज निर्दोष साबित हुईं. प्रज्ञा जी को बधाई और माननीय न्यायालय का अभिनंदन. इस विवादित प्रतिष्ठान में निजी वक्तव्यएवं राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. कोर्ट का फैसला तकनीकी तौर पर सभी आरोपियों को संदेह के लाभ पर बरी करता है. लेकिन इसकी पृष्ठभूमि में धर्म और राजनीति का मिलाजुला असमंजस भी स्पष्ट रूप से उभर रहा है. रामेश्वर शर्मा, अमित मालवीय जैसे नेताओं ने कहाकि कांग्रेस ने हिन्दुत्व को बदनाम किया, और अब सारा परिवार (सोनिया, राहुल, प्रियंका, प. चिदंबरम, मल्लिकार्जुन खरगे) को माफी मांगनी चाहिए.
अमेरिका-पाकिस्तान ऐतिहासिक तेल समझौता, ट्रंप ने भारत पर कसा तंज-दक्षिण एशिया में नया व्यापार समीकरण?

भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की खबरों के बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने गुरुवार को इस्लामाबाद और वाशिंगटन के बीच हुएऐतिहासिक व्यापार समझौते के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को धन्यवाद दिया. लंबे समय तक ओसामा बिन लादेन जैसे खूंखार आतंकी कोपालने वाले देश के पीएम ने यह भी उम्मीद जताई कि इससे दोनों देशों (अमेरिका-पाकिस्तान) के बीच सहयोग बढ़ेगा. ट्रम्प ने बुधवार को बताया किअमेरिका ने पाकिस्तान के साथ एक समझौता किया है, जिसके तहत वे दक्षिण एशियाई देश के “विशाल तेल भंडार” को विकसित करने के लिएमिलकर काम करेंगे. इस दौरान ट्रंप ने भारत को चिढ़ाने की भी कोशिश की. पाकिस्तान लंबे समय से अपने तट पर बड़े तेल भंडार होने का दावा करतारहा है, लेकिन इन भंडारों का इस्तेमाल करने में कोई प्रगति नहीं हुई है. देश वर्तमान में अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए मध्य पूर्व सेतेल आयात करता है.भारत को चिढ़ाने की भी कोशिशप्रधानमंत्री शरीफ ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, “मैं ऐतिहासिक अमेरिका-पाकिस्तान व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में उनकीनेतृत्वकारी भूमिका के लिए राष्ट्रपति ट्रम्प को हार्दिक धन्यवाद देना चाहता हूं. जिसे कल रात वाशिंगटन में दोनों पक्षों की ओर से सफलतापूर्वकअमलीजामा पहनाया गया. उन्होंने कहा, “यह ऐतिहासिक समझौता हमारे बढ़ते सहयोग को बढ़ाएगा, जिससे आने वाले दिनों में हमारी स्थायीसाझेदारी की सीमाओं का विस्तार होगा. सरकारी रेडियो पाकिस्तान के अनुसार, यह सफलता वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब की वाशिंगटन डीसी मेंअमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि राजदूत जैमीसन ग्रीर के साथ हुई बैठक के दौरान मिली। ट्रुथ सोशल पोस्ट मेंट्रम्प ने कहा, “हमने अभी-अभी पाकिस्तान के साथ एक समझौता किया है, जिसके तहत पाकिस्तान और अमेरिका अपने विशाल तेल भंडार कोविकसित करने के लिए मिलकर काम करेंगे. पाकिस्तान के साथ समझौते का एलान करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को चिढ़ाने की भी कोशिश की.प्रतिबद्धता को करता है जाहिरउन्होंने कहा, “हम उस तेल कंपनी को चुनने की प्रक्रिया में हैं जो इस साझेदारी का नेतृत्व करेगी. कौन जाने, शायद वे किसी दिन भारत को तेल बेचेंगा” रिपोर्ट के अनुसार, व्यापार समझौते का उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देना, बाजार पहुंच का विस्तार करना, निवेश आकर्षित करना औरपारस्परिक हित के क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देना है. इसमें कहा गया है, “इस समझौते के परिणामस्वरूप, विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका कोपाकिस्तानी निर्यात पर पारस्परिक शुल्क में कमी आएगी. यह समझौता विशेष रूप से ऊर्जा, खनन और खनिज, आईटी, क्रिप्टोकरेंसी और अन्य क्षेत्रोंमें आर्थिक सहयोग के एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक है. यह समझौता द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों के दायरे को व्यापक बनाने के पाकिस्तान केमौजूदा प्रयासों का पूरक है, तथा अमेरिकी बाजार तक उसकी पहुंच को भी बढ़ाता है. इसके अतिरिक्त, इस समझौते से पाकिस्तान की बुनियादीसंरचना और विकास परियोजनाओं में अमेरिकी निवेश में वृद्धि होने की उम्मीद है। रिपोर्ट के अनुसार, यह व्यापार समझौता दोनों देशों के बीच द्विपक्षीयसंबंधों को गहरा करने तथा व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत करने के सभी अवसरों का पता लगाने की प्रतिबद्धता को जाहिर करता है.
बेंगलुरु में ‘वोट चोरी’ पर राहुल गांधी का प्रदर्शन, भाजपा बोली – ‘कांग्रेस की हार छिपाने का ड्रामा’

इस साल बिहार तो अगले साल पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में विधासनभा चुनाव होने है। इस बात को ध्यान में रखते हुए राजनीतिकपार्टियों ने अपनी-अपनी तैयारी तेज कर दी है. इसी क्रम में कांग्रेस नेता राहुल गांधी अगले सप्ताह बंगलूरू में कथित वोट चोरी के खिलाफ एक विरोधप्रदर्शन करने वाले हैं. इसको लेकर भाजपा ने राहुल गांधी पर जमकर निशाना साधा है. मामले में भाजपा नेता और कर्नाटक विधानसभा में नेता विपक्षआर अशोक ने इसे पहले से तय एक नाटक करार दिया है. उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शन कांग्रेस की बिहार में होने वाली हार से ध्यान भटकाने की चालहै. राहुल पर तंज कसते हुए भाजपा नेता आर अशोक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि जिसे राहुल गांधी विरोध प्रदर्शन कह रहे हैं, वोअसल में कांग्रेस की हार छिपाने का प्री-स्क्रिप्टेड ड्रामा है. अगर कर्नाटक में वोट चोरी के पुख्ता सबूत थे. तो एक साल तक चुप क्यों बैठे? उन्होंने आगेतंज कसते हुए कहा कि तीन लोकसभा चुनाव हारने और कई राज्यों में करारी शिकस्त के बाद, यह ड्रामा कांग्रेस को नहीं बचा सकता और न ही राहुलगांधी को फिर से लॉन्च कर पाएगा. बफर जोन दिए है घटाबता दें कि मामले में राहुल गांधी ने बीते 23 जुलाई को आरोप लगाया था कि देश में चुनाव चोरी हो रहे हैं और कांग्रेस ने कर्नाटक की एक लोकसभासीट का अध्ययन कर इसका तरीका समझ लिया है. इसी मुद्दे को लेकर वह पांच अगस्त को बंगलूरू में विरोध प्रदर्शन करेंगे। इसको लेकर कर्नाटककांग्रेस अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा है कि विरोध स्थल और कार्यक्रम का स्वरूप (रैली या मार्च) पर फैसला तकनीकी औरकानूनी सलाह के बाद लिया जाएगा. आर अशोक ने कांग्रेस सरकार पर बंगलूरू की झीलों की जमीन पर कब्जा कराने का भी आरोप लगाया. उन्होंनेकहा कि कांग्रेस सरकार ने हाल ही में कर्नाटक टैंक संरक्षण और विकास प्राधिकरण (संशोधन) विधेयक, 2025 को मंजूरी दी है, जिससे झीलों केआसपास के बफर जोन घटा दिए गए हैं. मतदाताओं से माफी मांगने की अपीलउन्होंने पूछा कि क्या राहुल गांधी इस जमीन चोरी के खिलाफ भी प्रदर्शन करेंगे या फिर उन्हें सिर्फ ‘वोट चोरी’ का ही नाटक करना है? आर अशोक नेकहा कि कांग्रेस सरकार झीलों को लैंड माफिया को सौंप रही है, जिससे बाढ़ का खतरा, प्राकृतिक संतुलन का नुकसान और बेंगलुरु का भविष्य खतरेमें है. भाजपा नेता और विधानसभा में नेता विपक्ष आर अशोक ने इस प्रदर्शन को कांग्रेस का पूर्व-निर्धारित (pre-scripted) नाटक बताया, जिसकाउद्देश्य बिहार में संभावित हार से ध्यान भटकाना है. “ये सब राहुल गांधी अपनी हार को छुपाने के लिए कर रहे हैं” भाजपा अध्यक्ष बी. वाई. विजयेंद्र नेइस प्रदर्शन को “सबसे मज़ेदार” (funny) कहा, सवाल उठाया कि अगर निर्वाचन आयोग ही हेरफेर किया जा सकता है तो कांग्रेस कर्नाटक में सत्ताकैसे आई? उन्होंने गांधी, सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार से कर्नाटक मतदाताओं से माफी मांगने की अपील की.
अफजल गुरु की फांसी पर गरमाई सियासत चिदंबरम बोले, अमित शाह का बयान झूठ का पुलिंदा

कांग्रेस नेता और पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम ने अफजल गुरु की फांसी में देरी वाले अमित शाह के बयान पर नाराजगी जाहिर की. उन्होंने कहा कि यहसरासर झूठ और इसे तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है.राज्यसभा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि जब तक चिदंबरम गृह मंत्री हैं तब तक अफजल गुरु को मौत की सजा नहीं दी जा सकती. इसपर पी चिदंबरम ने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में बयान दिया कि जब तक पी. चिदंबरम गृह मंत्री थे, अफजल गुरु को फांसी नहीं दीजा सकती थी. यह बयान झूठ, तोड़-मरोड़ और भ्रामक बातों का मिश्रण है अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने और सजा सुनाए जाने के बाद अफजल कीपत्नी ने उसकी ओर से अक्टूबर 2006 में भारत के राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दायर की. तुष्टिकरण की है राजनीतिउन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने 3-2-2013 को दया याचिका खारिज कर दी। अफजल गुरु को छह दिन बाद 9-2-2013 को फांसी दे दी गई. मैं 1-12-2008 और 31-7-2012 के दौरान गृह मंत्री था. मेरी पूरे कार्यकाल के दौरान दया याचिका राष्ट्रपति के समक्ष लंबित रही कानून यह है कि जब तकदया याचिका का निपटारा नहीं हो जाता, तब तक मृत्युदंड की सजा पर अमल नहीं किया जा सकता।गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस सांसद पी. चिदंबरम के बयान पर प्रतिक्रिया दी और कहा कि वह कह रहे थे कि आतंकियों के क्या सबूत हैं कि वेपाकिस्तान से आए थे. उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि जब तक पी. चिदंबरम गृह मंत्री थे तब तक अफजल गुरु को फांसी नहीं हुई अमित शाह नेराज्यसभा में कहा कि कांग्रेस पार्टी की मानसिकता को देश की जनता देख रही है इनकी प्राथमिकता देश की सुरक्षा नहीं है, राजनीति है इनकीप्राथमिकता आतंकवाद को समाप्त करना नहीं है, अपनी वोटबैंक है। इनकी प्राथमिकता हमारी सीमा की सुरक्षा करना नहीं है, तुष्टिकरण की राजनीतिहै. घटनाक्रम से नहीं खाते मेलराज्यसभा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि जब तक चिदंबरम गृह मंत्री हैं, तब तक अफजल गुरु को मौत की सजा नहीं दी जा सकती. इस पर पी चिदंबरम ने कहा कि यह बयान झूठ, तोड़-मरोड़ और भ्रामक बातों का मिश्रण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अफजल गुरु की दया याचिकाअक्टूबर 2006 में राष्ट्रपति के पास दायर की गई, इसे इसी दौरान लंबित रखा गया, और 3 फरवरी 2013 को खारिज किया गया. गुरु को 6 फरवरी2013 को फांसी दी गई। यह समय चिदंबरम के गृह मंत्रालय (1 दिसंबर 2008 – 31 जुलाई 2012) से बाहर था चिदंबरम ने जोर देकर कहा: “कानून स्पष्ट है कि जब तक दया याचिका का निर्णय नहीं हो जाता मृत्युदंड लागू नहीं किया जाता।” यानी, इंतज़ारी के दौरान फांसी देना असंभव था— न तो उनकी याचिका खारिज हुई थी, न राष्ट्रपति ने निर्णय ही दिया था इस मुद्दे ने फिर से साबित कर दिया है कि सत्ता में आकर राजनीतिक बयानकितने संवेदनशील और विवादस्पद हो सकते हैं जब वे कानूनी और सत्य घटनाक्रम से मेल नहीं खाते.
बूस्टर डोज़ में सुस्ती, बढ़ सकता है कोरोना का खतरा WHO की भारत को चेतावनी

कोविड टीके की बूस्टर डोज नहीं लेने वाले उच्च जोखिम समूहों यानी 60 वर्ष से अधिक आयु या पहले से बीमारी से ग्रस्त लोगों और स्वास्थ्यकर्मियोंको कोरोना का खतरा हो सकता है. यह चेतावनी विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपनी वैश्विक कोविड-19 टीकाकरण रिपोर्ट 2024 में दी है. डब्ल्यूएचओरिपोर्ट के मुताबिक टीके की बूस्टर डोज लेने की गति में भारी गिरावट आई है. यह हालात भारत में सबसे ज्यादा गंभीर है क्योंकि यहां साल 2020 और2021 में कोरोना टीकाकरण 200 करोड़ पार हुआ था. लेकिन उसके बाद इसमें गिरावट आई है. रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में भी 2024 के अंत तकपहली और दूसरी खुराक का कवरेज 90% से अधिक रहा, लेकिन बूस्टर खुराक लेने में सुस्ती आई इसके टीकाकरण को लेकर शहरी इलाकों मेंऔसतन 40–45% तक और ग्रामीण इलाकों में इससे भी कम दर्ज किया है. डब्ल्यूएचओ ने चेतावनी देते हुए कहा है कि संक्रमण की कम दर औरमहामारी का असर घटने के बावजूद उच्च जोखिम समूहों में कवरेज बनाए रखना अनिवार्य है. जोखिम होने चाहिए आधारितडब्ल्यूएचओ का मानना है कि 2025 में भी कोविड टीकाकरण रणनीति लक्षित और जोखिम आधारित होनी चाहिए. संक्रमण दर भले ही कम हो, लेकिन मौसमी उछाल और नए वेरिएंट्स की संभावना को देखते हुए बूस्टर टीकाकरण पर ध्यान देना जरूरी है. दरअसल भारत में अब तक कोरोना के4.50 करोड़ मामले सामने आए हैं, जिनमें 5,33,800 लोगों की संक्रमण के चलते मौत हुई है. कुल टीकाकरण की बात करें तो लगभग 220.7 करोड़ खुराक साल 2021 से अब तक ली गई हैं, जिसमें बूस्टर यानी एहतियाती खुराक का टीकाकरण भी शामिल है. डब्ल्यूएचओ की कोविड-19 तकनीकी प्रमुख डॉ. मारिया वैन केरकोव ने कहा, महामारी भले ही शांत हो, लेकिन वायरस पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। जोखिम समूहों की सुरक्षा केलिए सभी देशों को बूस्टर टीकाकरण पर ध्यान देना होगा. आईसीएमआर के वरिष्ठ वैज्ञानिक ने कहा, भारत में उत्साह कम हुआ है ऐसे में लक्षितजागरूकता अभियान पर फोकस जरूरी है. सबसे बड़ा फायदा है येडॉ. केरकोव ने कहा है कि भारत में कोरोना टीकाकरण का सबसे बड़ा फायदा यह है कि हमारी शुरुआती कवरेज दर दुनिया में सबसे ऊंची रही. लेकिनयह तभी असरदार रहेगा जब उच्च जोखिम समूह समय पर बूस्टर खुराक लेते रहें. यह सिर्फ व्यक्तिगत सुरक्षा का मामला नहीं, बल्कि सामूहिक प्रतिरक्षाबनाए रखने का भी सवाल है. विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में कोरोना टीका की एहतियात खुराक के टीकाकरण में कमी के लिए कई कारण हैं, जिनमें संक्रमित मरीजों में कमी आना प्रमुख है. इसकी वजह से लोग बूस्टर को उतना जरूरी नहीं मान रहे. इसके अलावा लगातार टीकाकरण अभियानोंसे लोगों में थकान और उदासीनता बढ़ी है. खासकर युवा वर्ग में यह धारणा बनी कि अब संक्रमण उतना खतरनाक नहीं. डब्ल्यूएचओ रिपोर्ट केमुताबिक टीके की बूस्टर डोज लेने की गति में भारी गिरावट आई है. यह हालात भारत में सबसे ज्यादा गंभीर है क्योंकि यहां साल 2020 और 2021 में कोरोना टीकाकरण 200 करोड़ पार हुआ था, लेकिन उसके बाद इसमें गिरावट आई है.
लोकसभा में मोबाइल साइबर क्राइम पर चर्चा सरकार ने बताए 29 लाख डिस्कनेक्शन, 97% स्पूफ कॉल में गिरावट

संसद के मानसून सत्र के आठवें दिन आज लोकसभा में दूरसंचार मंत्रालय, रेलवे और कोयला मंत्रालयों से कई अहम सवाल पूछे गए. लोकसभा मेंप्रश्नकाल शुरू होने के बाद मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा से निर्वाचित भाजपा सांसद बंटी विवेक साहू ने मोबाइल से होने वाले साइबर अपराध पर सवालपूछे. इसके बाद केरल से निर्वाचित सांसद ने बीएसएनएल के खस्ताहाल नेटवर्क को लेकर चिंता जाहिर की. इस पर सरकार ने उन्हें भरोसा दिलाया किसरकार स्वदेशी दूरसंचार कंपनी की सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है. दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने लोकसभामें ये भी बताया कि बीएसएनएल की 4जी-5जी सेवाएं कब से मिलेंगी. भाजपा सांसद के सवाल पर दूरसंचार मंत्रालय के मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधियाने बताया कि तकनीक के दुरुपयोग को लेकर सरकार सतर्क है. गृह मंत्रालय के साथ मिलकर उनका मंत्रालय आपराधिक तत्वों के खिलाफ कार्रवाईकर रहा है. नकेल कसने के लिए डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (DIP) बनाया गया है जिसमें 620 संस्थाओं को जोड़ा गया है. 21 लाख का लगाया गया पतादेशभर के निजी और प्राइवेट सेक्टर के 570 बैंक, 36 राज्यों की पुलिस और जांच एजेंसियों के अलावा आम नागरिकों को भी इससे जोड़ा गया है. मोबाइल चोरी या ट्रैकिंग रोकने के मकसद से 16 मई 2023 को स्थापित संचार साथी पोर्टल और इसकी सफलता का उल्लेख करते हुए सिंधिया नेबताया कि अब तक 15.5 करोड़ से अधिक हिट्स इस पोर्टल पर आए हैं. इससे प्रेरित होकर सरकार ने इसी साल 17 जनवरी को मोबाइल एपविकसित किया है. इससे लगभग 44 लोग जुड़े (हिट्स) हैं। अब तक सरकार ने 29 लाख मोबाइल डिस्कनेक्ट किए हैं. साढ़े पांच लाख मोबाइलहैंडसेट ब्लॉक किए गए हैं बल्क में संदेश भेजने की प्रैक्टिस पर भी अंकुश लगा है, ऐसे 20 हजार लोगों को ब्लॉक किया गया है 24 लाख व्हाट्सएपअकाउंट्स भी ब्लॉक किए गए हैं. संचार साथी एप के बारे में सिंधिया बताया कि उपभोक्ता खुद भी इसकी मदद से मोबाइल चोरी की रिपोर्ट करासकता है। साथ ही पुलिस के पास भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है. 35 लाख कंप्लेन आई है, जिसमें 21 लाख का पता लगाया गया है. तीन लाख स्पूफ कॅाल आते है प्रतिदिनइसमें से पांच लाख से अधिक मोबाइल उपभोक्ताओं को वापस लौटाया जा चुका है इस पोर्टल पर अपने नाम और पहचान पत्र के आधार पर लिएगए मोबाइल नंबर का पता लगाया जा सकता है. अगर उपभोक्ता को लगता है कि उसने खुद मोबाइल कनेक्शन नहीं लिया है, तो वह नंबर ब्लॉककरा सकता है. सरकार ने अब तक इसके आधार पर 1.36 करोड़ नंबर डिस्कनेक्ट किए हैं. सिंधिया ने बताया कि इसकी मदद से आर्टिफिशियलइंटेलिजेंस (एआई) के इस युग में सरकार ने अस्त्र एप विकसित कराया है. इस एआई की मदद से मोबाइल सरकार ने ऐसे 82 लाख नंबर डिस्कनेक्टकरने में कामयाबी पाई है. विदेश से आने वाले फोन और फ्रॉड से बचाव को लेकर किए जाने वाले उपायों पर सिंधिया ने बताया कि विदेश से आनेवाले फोन को ब्लॉक करने के लिए भी सरकार ने बड़ी पहल की है. उन्होंने बताया कि धोखाधड़ी और षड्यंत्र करने वाले लोग / कंपनियों ने भारत केदिखने वाले नंबर का झांसा देकर विदेश से फोन करते हैं. इसे ब्लॉक करने के लिए सेंट्रलाइज्ड इंटरनेशनल रोमिंग रजिस्ट्री (कायॉर) नाम का सॉफ्टवेयरविकसित कर इन आपराधिक तत्वों पर नकेल कसने के प्रयास किए गए हैं. इसकी मदद से ऐसे फोन कॉल में 97 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है. कायॉर सॉफ्टवेयर के आधार पर 1.35 करोड़ इंटरनेशनल स्पूफ कॉल को केवल एक दिन में ब्लॉक किया गया है. अब केवल तीन लाख स्पूफ कॉलप्रतिदिन आते हैं
केंद्रीय कैबिनेट का फैसला सहकारी समितियों को मिलेगा सस्ता ऋण, डेयरी से मत्स्यपालन तक सबको फायदा

केंद्रीय मंत्रीमंडल ने 2025-26 से 2028-29 तक 4 साल की अवधि के लिए 2000 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ केंद्रीय क्षेत्र योजना ‘राष्ट्रीयसहकारी विकास निगम को अनुदान सहायता’ की मंजूरी दी है. केंद्रीय सूचना व प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के इस फैसले की जानकारी दीहै.सरकार की ओर से बताया गया है कि वर्ष 2025-26 से 2028-29 तक 4 वर्षों की अवधि के लिए अनुदान सहायता पर 2000 करोड़ रुपये कापरिव्यय किया जाएगा. एनसीडीसी चार वर्षों की अवधि में खुले बाजार से 20,000 करोड़ रुपये जुटा सकेगी. एनसीडीसी की ओर से नईपरियोजनाओं की स्थापना/संयंत्रों के विस्तार, सहकारी समितियों को ऋण देने और कार्यशील पूंजी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए ऋण देने हेतुनिधियों का उपयोग किया जाएगा. सरकार ने बताया है कि इस कदम से देश भर में डेयरी, पशुधन, मत्स्य पालन, चीनी, कपड़ा, खाद्य प्रसंस्करण, भंडारण और कोल्ड स्टोरेज जैसे विभिन्न क्षेत्रों की 13,288 सहकारी समितियों के 2.9 करोड़ सदस्यों; श्रम और महिलाओं के नेतृत्व वाली सहकारीसमितियों को लाभ मिलेगा. चारों दिशाओं का है मिलन बिंदूवैष्णव ने बताया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गुरुवार को राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) को चार वर्षों के लिए 2,000 करोड़ रुपये कीअनुदान सहायता को मंजूरी दी है. इस कदम से संगठन को ऋण देने के लिए अधिक धन जुटाने में मदद मिलेगी. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता मेंआर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में इस संबंध में निर्णय लिया गया. सूचना व प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संवाददाताओं कोबताया, “एक अच्छे वित्तीय मॉडल को और अधिक समर्थन देने के लिए, मंत्रिमंडल ने एनसीडीसी के लिए चार वर्षों के लिए 2,000 करोड़ रुपये कीपूंजी अनुदान सहायता को मंजूरी दी. एनसीडीसी 8.25 लाख से अधिक सहकारी समितियों को ऋण देता है, जिनके 29 करोड़ सदस्य हैं. कुल सदस्योंमें से 94 प्रतिशत किसान हैं। मंत्री ने कहा कि इस वित्तीय सहायता से एनसीडीसी आगे ऋण देने के लिए 20,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त जुटाने मेंसक्षम हो सकेगी. उन्होंने कहा कि वर्तमान में एनसीडीसी की ऋण वसूली दर 99.8 प्रतिशत है और एनपीए शून्य है. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव नेकैबिनेट ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए इटारसी-नागपुर के बीच चौथी रेलवे लाइन की भी जानकारी दी उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इटारसीऔर नागपुर के बीच चौथी लाइन को मंजूरी दे दी है इसका निर्माण दिल्ली और चेन्नई के साथ-साथ मुंबई और हावड़ा को जोड़ने वाले उच्च-घनत्ववाले गलियारे पर किया जाएगा. यह चारों दिशाओं का मिलन बिंदु है.मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को भी दी मंजूरीसरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, कैबिनेट ने महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा और झारखंड राज्यों के 13 जिलों कोकवर करने वाली चार मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी है. इसमें भारतीय रेलवे का मौजूदा नेटवर्क लगभग 574 किलोमीटर बढ़ जाएगा इसपरियोजना की लागत करीब 11169 करोड़ रुपये आएगी. कैबिनेट ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए अश्विनी वैष्णव ने बताया कि अलुआबाड़ी से न्यूजलपाईगुड़ी तक रेलवे लाइन के विस्तार पर भी बात की. उन्होंने कहा, “अगला काम अलुआबाड़ी और न्यू जलपाईगुड़ी के बीच 57 किलोमीटर लंबीतीसरी और चौथी रेलवे लाइन का विस्तार है. यह पूर्वोत्तर की कनेक्टिविटी के लिए बेहद ज़रूरी है. अलुआबाड़ी बिहार से बंगाल के सिलीगुड़ी तकफैला है. इन लाइनों को मज़बूत करना बेहद जरूरी है. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने छत्रपति संभाजी नगर से परभणी तक रेलवे लाइन के दोहरीकरणकी भी जानकारी दी. उन्होंने कहा, “मराठवाड़ा कनेक्टिविटी के लिहाज से यह परियोजना बेहद महत्वपूर्ण है. इसके तहत छत्रपति संभाजी नगर सेपरभणी तक रेलवे लाइन का दोहरीकरण होगा, जो पहले 177 किलोमीटर लंबी सिंगल लाइन थी. इसका बजट 2,179 करोड़ रुपये है इन इलाकों मेंबहुत सारे उद्योग हैं और उनमें से कई को बंदरगाहों से जोड़ने की जरूरत है। इससे एक दोहरा गलियारा बनेगा. इसमें 28 बड़े पुल और 161 छोटे पुलशामिल होंगे. इससे देश को रसद लागत (लॉजिस्टिक्स कॉस्ट) में लगभग 1,714 करोड़ रुपये की बचत होगी.
तेज प्रताप बोले ‘मेरे अंदर बहता है लालू यादव का खून’, तेजस्वी को बताया नकली अर्जुन

पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और राजद नेता तेज प्रताप यादव ने अपने छोटे भाई और पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव को खुला चैलेंज दिया है। हाजीपुर केमहुआ पहुंचे तेज प्रताप ने कहा कि अगर तेजस्वी खुद को अर्जुन मानते हैं, तो पहले बांसुरी बजाकर दिखाएं. तभी तय होगा कि असली ‘कृष्ण’ कौन हैऔर ‘अर्जुन’ कौन. तेज प्रताप यादव मंगलवार को अपने पुराने विधानसभा क्षेत्र महुआ के दौरे पर पहुंचे थे. यहां उन्होंने महुआ के विधायक मुकेश रोशनको भी जमकर निशाने पर लिया और उन्हें ‘बहरूपिया’ कह डाला. उन्होंने जनता से अपील करते हुए कहा कि अगर बहरूपिया आपके यहां आए, तो उसेझुनझुना दे दीजिए. जब-जब मैं महुआ आता हूं यहां का बहरूपिया विधायक रोने लगता है. तेज प्रताप ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा किअगर उन्हें जनता मौका देती है और वे फिर से महुआ के विधायक बनते हैं, तो परसौनीया की सब्जी मंडी के लिए एक अलग और बेहतर बिल्डिंग कानिर्माण कराया जाएगा. उन्होंने कहा कि गरीब महिलाएं सड़क किनारे सब्जी बेचती हैं उनके लिए व्यवस्थित जगह मुहैया कराई जाएगी. जमीन की कीमतें है बढ़ीजनसभा के दौरान तेज प्रताप ने खुद को लालू प्रसाद यादव की विरासत का असली उत्तराधिकारी बताया. उन्होंने कहा, “मेरे शरीर में सामाजिक न्यायका खून बहता है. लालू यादव का खून बहता है. अगर आप मुझे जिताते हैं. तो असल में लालू जी को जीत दिलाते हैं. तेज प्रताप ने आगे कहा किमहुआ की माताओं और बहनों से मैं अपील करता हूं कि एक बार मुझे मौका दीजिए. यहां बिजली की समस्या है. अगर मैं विधायक बनता हूं तोबिजली फ्री कर दूंगा. तेज प्रताप यादव ने यह भी दावा किया कि महुआ में मेडिकल कॉलेज लाने का श्रेय उन्हें ही जाता है. उन्होंने कहा कि मेडिकलकॉलेज बनने से महुआ का विकास हुआ है, यहां की ज़मीन की कीमतें बढ़ी हैं. हर कान नहीं होता एकदम सेलेकिन हर काम एकदम से नहीं होता, सब कुछ स्टेप बाय स्टेप होता है। उन्होंने कहा कि जो लोग चाहते हैं कि महुआ के लोग हमेशा हार मानते रहें, वे’बहरूपिया’ हैं लेकिन वे ऐसा नहीं होने देंगे. तेज प्रताप यादव पटना से लगभग 50 गाड़ियों के काफिले के साथ महुआ पहुंचे थे दौरे की शुरुआत उन्होंनेराधा-बिहारी मंदिर में पूजा-अर्चना से की. इसके बाद उन्होंने विभिन्न जगहों पर जनसंवाद किया और एक बड़ी जनसभा को भी संबोधित किया. पार्टीऔर परिवार से निष्कासन झेल रहे तेज प्रताप यादव ने अपने छोटे भाई तेजस्वी यादव को पहली बार सीधा चैलेंज किया है. अपनी पुरानी और पसंदीदाविधानसभा सीट महुआ पहुंचे तेज प्रताप यादव ने कहा कि अर्जुन और कृष्ण कौन, यह फैसला कर लें.
नेहरू का नाम लेकर सरकार बहस से रही है भाग, कांग्रेस का मोदी-शाह पर हमला “संसद में इतिहास बनाम वर्तमान की टकराहट

लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान सरकार की ओर से पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का नाम लिए जाने पर कांग्रेस में आक्रोश है।कांग्रेस ने इस मुद्दे पर पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर हमला बोला. पार्टी ने कहा कि उनके पास अपनी विफलताओं का कोई जवाबनहीं है. वे ऑब्सेसिव-कंपल्सिव डिसऑर्डर (ओसीडी) से पीड़ित हैं. वे बात को भटकाना चाहते हैं. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि कललोकसभा में गृह मंत्री और प्रधानमंत्री दोनों ने एक बार फिर दिखाया कि जवाहरलाल नेहरू के मामले में वे उस बीमारी से पीड़ित हैं जिसे मेडिकल भाषामें ऑब्सेसिव-कंपल्सिव डिसऑर्डर (ओसीडी) कहा जाता है. संभव है कि आज राज्यसभा में भी यह बात दिखे। उन्होंने कहा कि उनके पास अपनीवर्तमान विफलताओं का कोई जवाब नहीं है. उनकी नीतियों और कार्यों पर उठाए जा रहे वैध सवालों का उनके पास कोई जवाब नहीं है. ध्यान है भटकातेउन्होंने कहा कि सार्थक बहस में शामिल होने के बजाय वे ध्यान भटकाते हैं, माहौल खराब करते हैं और बदनाम करते हैं। गृह मंत्री ने एक तरह केइतिहासकार होने का दावा किया है. वह खुद को भारत का दूसरे सबसे महान इतिहासकार मानते हैं. पीएम मोदी ने मंगलवार को लोकसभा में कहा थाकि जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने अक्साई चीन का 38,000 किलोमीटर से अधिक क्षेत्र खो दिया. उन्होंने सिंधु जल संधिसमझौते पर पाकिस्तान के साथ हस्ताक्षर किये थे यह भारत की बड़ी भूल थी. पीओके को अभी तक वापस क्यों नहीं लिया गया, कांग्रेस को जवाबदेना चाहिए कि इसे किसने जाने दिया. भारत अभी भी जवाहरलाल नेहरू से लेकर पिछली कांग्रेस सरकारों द्वारा की गई गलतियों का दर्द झेल रहा है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि मुख्य विपक्षी दल की एक गलती के कारण पाकिस्तान का निर्माण हुआ और उन्होंने दावा किया किपाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर प्रथम प्रधानमंत्री नेहरू की विरासत है, 1948 में हमारी सशस्त्र सेनाएं कश्मीर में निर्णायक स्थिति में थीं। सरदारपटेल लगातार मना करते रहे, कांग्रेस आज तक नहीं पाई है सुधरलेकिन जवाहरलाल नेहरू ने एकतरफा युद्धविराम की घोषणा कर दी अगर आज पाक अधिकृत कश्मीर मौजूद है तो यह नेहरू द्वारा घोषित एकतरफायुद्धविराम की वजह से है. जवाहरलाल नेहरू इसके लिए जिम्मेदार हैं. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि कल लोकसभा में गृह मंत्री औरप्रधानमंत्री दोनों ने एक बार फिर दिखाया कि जवाहरलाल नेहरू के मामले में वे उस बीमारी से पीड़ित हैं जिसे मेडिकल भाषा में ऑब्सेसिव-कंपल्सिवडिसऑर्डर (ओसीडी) कहा जाता है। गृह मंत्री अमित शाह ने नेहरू और पॉलिसीज़ का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस की गलत नीतियों काखामियाजा अभी तक भोग रहे हैं. तो राहुल गांधी, प्रियंका गांधी से लेकर अन्य कांग्रेसी नेताओं ने इसका पलटवार करते हुए कहा कि यह सब इतिहासके नाम पर सरकार का फैमिली‑फोकस और वर्तमान मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश है. गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि पाकिस्तान की संभावितगतिविधियाँ और कश्मीर की स्थिति नेहरू की विरासत हैं, उन्होंने इसे इतिहास की विफलता बताया जिसे कांग्रेस आज तक नहीं सुधार पाई है.
ट्रंप की डेडलाइन के करीब भारत, क्या बड़ी खरीद और निवेश से बचेगा भारी टैरिफ?

अमेरिका की तरफ से व्यापारिक साझेदारों को व्यापार सौदों को अंतिम रूप देने के लिए दी गई एक अगस्त की समयसीमा पूरी होने में बस दो दिन बचेहैं. ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या भारत उच्च टैरिफ की काट निकाल पाएगा? ट्रंप कह चुके हैं कि जिन देशों के साथ समझौते नहीं हुए हैं. उन पर15-20 फीसद के दायरे में टैरिफ लगेगा. भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता जिस तरह आगे बढ़ी है. उसे देखते अंतरिम समझौता अभी दूर की कौड़ी ही है. हालांकि, दोनों ही देशों की तरफ से कई बिंदुओं पर सहमति बनने की बात कही जा रही है. वार्ता को लेकर तीन बिंदु एकदम साफ हैं. एक, अमेरिकाभारतीय बाजारों में शून्य शुल्क पहुंच की पुरजोर कोशिश कर रहा है। दूसरी तरफ, भारत यह तय करने में जुटा है कि अमेरिका को उसके माल निर्यातपर मुख्य टैरिफ 15 प्रतिशत से अधिक न हो. टैरिफ बचने का रास्ता रहा है बनातीसरा, टैरिफ निवेश प्रतिबद्धताओं और उच्च-मूल्य वाली खरीदारी जैसे बाहरी कारकों पर भी निर्भर करता है. इसे देखते हुए यह अनुमान लगाया जारहा है कि बड़े निवेश व अमेरिकी हथियारों की खरीद पर सहमति जताकर भारत उच्च टैरिफ से बचने का रास्ता बना सकता है. माना जा रहा है कि ट्रंपप्रशासन भारत पर विशिष्ट खरीदारी और निवेश की प्रतिबद्धता जताने का दबाव बना रहा है, जैसा उसने यूरोपीय संघ और जापान से कराया था. यहभारत के लिए कोई बड़ा मुद्दा नहीं हो सकता है क्योंकि ट्रंप बिना किसी निश्चित समयसीमा के बड़ी निवेश प्रतिबद्धता के जरिये राजनीतिक लाभ उठानेके इच्छुक हो सकते हैं. द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर अगले दौर की बातचीत के लिए अमेरिकी टीम 25 अगस्त को भारत का दौरा करेगी. फिलहाल टालने में रहा कामयाबभारत कृषि और डेयरी जैसे दो विवादास्पद मुद्दों को फिलहाल टालने में कामयाब रहा है. लेकिन सार्वजनिक खरीद जैसे क्षेत्रों में लचीलापन अपनाने कोतैयार हो सकता है जैसा उसने ब्रिटेन के व्यापार समझौते में किया था। हालांकि और भी कई पेचीदगियां बरकरार है. भारतीय वार्ताकारों के लिए स्टीलव एल्युमीनियम पर आधार रेखा से ऊपर अतिरिक्त टैरिफ अतिरिक्त जटिलता है. रूसी तेल खरीदने पर ब्रिक्स देशों पर भारी टैरिफ लगाने की ट्रंप कीधमकी भी गंभीर चिंता का विषय है. माना जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन भारत पर विशिष्ट खरीदारी और निवेश की प्रतिबद्धता जताने का दबाव बना रहाहै जैसा उसने यूरोपीय संघ और जापान से कराया था. यह भारत के लिए कोई बड़ा मुद्दा नहीं हो सकता है. क्योंकि ट्रंप बिना किसी निश्चित समयसीमाके बड़ी निवेश प्रतिबद्धता के जरिये राजनीतिक लाभ उठाने के इच्छुक हो सकते हैं.