राहुल गांधी ने ट्रंप की भारत पर टिप्पणी से जताई सहमति, थरूर और शुक्ला ने जताया विरोध

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप टैरिफ के अलावा भारत की अर्थव्यवस्था पर टिप्पणी को लेकर भी चर्चा में हैं. उन्होंने ‘डेड इकॉनमी’ बताते हुए भारत औररूस पर दबाव बनाने की रणनीति अपनाई हालांकि, अब उन्होंने भारत पर प्रस्तावित 25 फीसदी टैरिफ के फैसले को एक हफ्ते के लिए टाल दिया है. इसी बीच डेड इकॉनमी वाले बयान के कारण ट्रंप भारत के कई राजनीतिक दलों के निशाने पर आ गए हैं. उनके बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेससांसद राहुल गांधी ने भी अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ सहमति जताई थी. हालांकि, कई अन्य सांसदों ने अमेरिकी राष्ट्रपति को आइना दिखाते हुए कहा हैकि भारत को उनकी टिप्पणी और नसीहत की जरूरत नहीं है. भारत की अर्थव्यवस्था को मृत बताने वाले बयान में ट्रंप ने ये भी कहा था कि रूस औरभारत किस तरह का द्विपक्षीय व्यापार करते हैं, उन्हें इससे फर्क नहीं पड़ता. ट्रंप ने कहा है कि वे भारत पर 25 फीसदी टैरिफ के साथ रूस से व्यापारकरने पर जुर्माना भी लगाएंगे. विदेश नीति को बताया नाकामीकई विपक्षी राजनीतिक दलों ने ट्रंप के इस बयान को सरकार की विदेश नीति की नाकामी बताया. हालांकि, राहुल गांधी ने संसद परिसर में एकसवाल का जवाब देते हुए कहा, भारत की अर्थव्यवस्था मृत हो चुकी है अगर कोई ऐसा कहता है तो इससे किसी को हैरानी नहीं होनी चाहिए. उन्होंनेट्रंप की टिप्पणी को सरकार की आर्थिक और विदेश के साथ-साथ रक्षा नीति की नाकामी भी करार दिया. राहुल गांधी की प्रतिक्रिया के बाद जब उनकेही दल के वरिष्ठ सांसदों से ट्रंप की टिप्पणी को लेकर सवाल किए गए तो उन्होंने कांग्रेस सांसद से बिल्कुल अलग राय दी. केरल से निर्वाचित कांग्रेससांसद शशि थरूर ने इस संबंध में कहा’अमेरिका और भारत के बीच व्यापार वार्ता चुनौतीपूर्ण है हम कई देशों के साथ बातचीत कर रहे हैं. अमेरिकाअकेला ऐसा देश नहीं है जिसके साथ बातचीत चल रही है. यूरोपीय संघ के साथ भी हमारी बातचीत चल रही है. हमने ब्रिटेन के साथ एक समझौताकर लिया है. हम अन्य देशों के साथ भी बातचीत कर रहे हैं. अगर हम अमेरिका में प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकते, तो हमें अमेरिका के बाहर अपने बाजारों मेंविविधता लानी पड़ सकती है. हमारे पास कोई विकल्प नहीं है. दबाव बनाने की रणनीतिकांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भारत की विदेश और आर्थिक नीति को लेकर कहा, अगर अमेरिका अपनी अनुचित मांगों के आधार पर दबाव बनाने कीरणनीति अपनाता है तो हमें कहीं और जाना होगा. यही भारत की ताकत है हम चीन की तरह पूरी तरह से निर्यात पर निर्भर अर्थव्यवस्था नहीं हैं। हमारेपास एक अच्छा और मजबूत घरेलू बाजार है. थरूर ने कहा कि व्यापार वार्ता के पहलू पर कहा, ‘इसमें शामिल लोगों को हमें सर्वोत्तम डील के लिएमजबूती से समर्थन देना चाहिए। अगर कोई अच्छा सौदा संभव नहीं है, तो हमें पीछे हटना पड़ सकता है. ट्रंप की डेड इकॉनमी वाली टिप्पणी पर एकअन्य कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने कहा, अमेरिकी राष्ट्रपति का ऐसा कहना कि भारत और रूस की अर्थव्यवस्थाएं खत्म (Dead) हो गई हैं, सरासरगलत है. भारतीय अर्थव्यवस्था खत्म नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि पीवी नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह के कार्यकाल में आर्थिक सुधार किए गए थे. अटल बिहारी वाजपेयी ने उन सुधारों को आगे बढ़ाया.
भारत अमेरिका व्यापार वार्ता में रुकावट, कृषि और डेयरी सेक्टर बना टकराव का कारण

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि भारत, रूस से तेल खरीद रहा है जिससे रूस को आर्थिक मदद मिल रही है औरयूक्रेन में युद्ध जारी है. मार्को रुबियो ने कहा कि भारत के साथ परेशानी की ये सबसे बड़ी वजह है लेकिन इसके अलावा भी कई अन्य वजह हैं. एकअमेरिकी मीडिया संस्थान के साथ इंटरव्यू में मार्को रुबियो ने दावा किया कि राष्ट्रपति ट्रंप, इस बात से बेहद नाराज हैं कि भारत, रूस से लगातार तेलकी खरीद कर रहा है. जबकि भारत के पास तेल खरीदने के लिए कई अन्य विकल्प मौजूद हैं. लेकिन रूस से तेल खरीदकर भारत, रूस की यूक्रेन केखिलाफ युद्ध में मदद कर रहा है. रुबियो ने कहा कि ‘भारत को अपनी अर्थव्यवस्था के लिए ऊर्जा की बहुत ज्यादा जरूरत है. ऐसे में भारत, रूस से तेलखरीद रहा है क्योंकि रूस का तेल प्रतिबंधों के चलते सस्ता है. कई मामलों में रूस वैश्विक तेल की कीमतों से कम पर भी तेल बेच रहा है. अन्य मुद्दे भी है शामिललेकिन दुर्भाग्य से इससे रूस को यूक्रेन के खिलाफ लड़ाई जारी रखने में मदद मिल रही है. इसलिए ये सबसे अहम वजह है. जिससे हमें परेशानी है, लेकिन ये सिर्फ इकलौती वजह नहीं हैं. हमारे बीच कुछ अन्य मुद्दे भी हैं. जिन पर असहमति है. भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते परबातचीत जारी है लेकिन एक मुद्दे पर दोनों देशों के बीच सहमति नहीं बन पा रही है. दरअसल भारत, अमेरिका के लिए अपने कृषि और डेयरी उद्योगको खोलने के लिए तैयार नहीं है, जबकि अमेरिका इसके लिए दबाव बना रहा है। अमेरिका भारत में अपने कृषि उत्पाद, जीएम फसलें, डेयरी उत्पाद, मक्का, सोयाबीन, सेब, बादाम और इथेनॉल आदि को बेचना चाहता है. अमेरिका की मांग है कि इन सेक्टर में टैरिफ कम किए जाएं. भारत का माननाहै कि अगर उन्होंने कृषि और डेयरी सेक्टर अमेरिका के लिए खोला तो हमारे देश के छोटे किसान लाखों रुपये की सब्सिडी पाने वाले अमेरिकी किसानोंसे प्रतिद्वंदिता नहीं कर पाएंगे. युद्ध जारी रखने में मिल रही है मददइनके अलावा भी कई अन्य क्षेत्र हैं, जहां अमेरिका अपने उत्पादों पर टैरिफ घटाने की मांग कर रहा है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है किभारत, रूस से सस्ती दरों पर तेल खरीद रहा है, जिससे रूस को यूक्रेन के खिलाफ युद्ध जारी रखने में मदद मिल रही है. इस बात को लेकर अमेरिकाकाफी नाराज है। इसके अलावा, भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता में सबसे बड़ा अड़चन है भारत का कृषि और डेयरी सेक्टर अमेरिकी उत्पादोंऔर जीएम फसलों के लिए खोलने से इनकार करना—जिस पर भारत दृढ़ रहता है क्योंकि इससे छोटे किसानों की मजबूती और आय प्रभावित होसकती है रुबियो ने इंटरव्यू में बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप इस बात से खासे नाराज़ हैं कि भारत के पास तेल खरीदने के कई विकल्प होते हुए भी वह रूस सेसस्ता तेल खरीद रहा है. जिससे युद्ध को आर्थिक मदद मिल रही है.
पानी में घुलनशील उर्वरकों के लिए भारत का चीन पर बढ़ता भरोसा, आपूर्ति में बाधा बनी चिंता

भारत पानी में घुलनशील उर्वरकों (वॉटर सॉल्युबल फर्टिलाइजर्स) की बड़ी मात्रा चीन से आयात करता है. इसके साथ ही बेल्जियम, मिस्र, जर्मनी, मोरक्को और अमेरिका जैसे वैकल्पिक स्रोतों से भी इन उर्वरकों की आपूर्ति की जाती है संसद में शुक्रवार को रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रियापटेल ने यह जानकारी दी. वित्त वर्ष 2024 के दौरान देश में पानी में घुलने वाले उर्वरकों की वार्षिक खपत लगभग 3.35 लाख टन रही. पटेल ने कहाकि उर्वरक कंपनियां अपने कारोबार के अनुसार फॉस्फेटिक और पोटेशियम उर्वरकों का आयात करने के लिए स्वतंत्र हैं. संसद में यह प्रश्न पूछा गया थाकि क्या चीन ने भारत को कुछ विशेष उर्वरकों का निर्यात रोक दिया है, जिससे भारतीय किसानों पर प्रतिफूल प्रभाव पड़ने की संभावना है. उर्वरकों को करता है आयातमंत्री ने कहा कि उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 के तहत 100 प्रतिशत जल घुलनशील जटिल उर्वरक और 100 प्रतिशत जल घुलनशील मिश्रण, श्रेणी को छोड़कर विशेष उर्वरक के रूप में कोई वर्गीकरण नहीं है. पानी में घुलनशील उर्वरकों का उपयोग मुख्य तौर पर नकदी और बागवानी फसलोंके लिए किया जाता है. इनमें से कोई भी उर्वरक सरकार की पोषक तत्व-आधारित सब्सिडी (एनबीएस) योजना के दायरे में आने वाला सब्सिडी वालाउर्वरक नहीं है. रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने संसद में बताया कि भारत चीन के साथ-साथ बेल्जियम, मिस्र, जर्मनी, मोरक्को औरअमेरिका जैसे वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं से बड़ी मात्रा में पानी में घुलनशील उर्वरकों का आयात करता है. अलग वर्गीकरण नहीं है कोई नियमवित्त वर्ष 24 के दौरान देश में इनकी वार्षिक खपत लगभग 3.35 लाख टन रही. भारत अपनी विशेष उर्वरक जरूरतों के लिए लगभग 80% आयामचीन पर निर्भर रहता है. लेकिन हाल में चीन ने निर्यात नियंत्रण और CIQ लम्बा परीक्षण अवधि लागू कर दी, जिससे MAP, CN, PN जैसे मुख्यघटकों की आपूर्ति में तेजी से गिरावट आई है। उदाहरण के लिए, MAP का आयात जून 2025 तक मात्र 2,842 टन था, जबकि 2024 में यह21,214टन था. जैसे-जैसे चीन से आयात घट रहा है वैसे ही भारत ने मोरक्को, रूस, जॉर्डन, सऊदी अरब जैसे देशों से आयात बढ़ाया है. हालाँकि, येस्रोत चीन को पूरी तरह से प्रतिस्थापित नहीं कर सके, जिससे मूल्य वृद्धि और बाजार अस्थिरता बनी हुई है. अनुप्रिया पटेल ने स्पष्ट किया किफॉस्फेटिक और पोटेशियम आधारित उर्वरक कंपनियों द्वारा वाणिज्यिक आधार पर स्वतंत्र रूप से आयात किए जा सकते हैं. फिलहाल, जलघुलनशील जटिल और मिश्रित उर्वरक को विशेष उर्वरक वर्गीकरण के तहत छोड़कर कोई अलग वर्गीकरण नियम नहीं हैं.
21 वर्षीय प्रियंका नेगी बनीं गैरसैंण के सारकोट गांव की ग्राम प्रधान, सीएम धामी ने दी बधाई और विकास के लिए साथ काम करने का किया आश्वासन

चमोली के गैरसैंण की 21 वर्षीय नवर्निवाचित ग्राम प्रधान प्रियंका नेगी को फोन करके सीएम पुष्कर सिंह धामी ने दी जीत की बधाई. सीएम ने कहाकि गांव के विकास के लिए मिलकर काम करेंगे. उन्होनें सारकोट के सभी लोगों को बधाई देते हुए कहा कि सारकोट के ग्रामीणों ने अच्छा चुनाव लड़ा. गैरसैंण को प्रदेश के मॉडल गांव के रूप में चुना गया है. कहा कि जिले के उच्च अधिकारी जल्द गांव का निरीक्षण करेंगे। उन्होनें नवर्निवाचित ग्रामप्रधान प्रियंका नेगी को गांव में चल रहे विकास कार्यों को आगे बढ़ाने की बात कही. साथ ही कहा कि गांव की महिलाओं को आगे बढ़ाए. उन्हेंस्वरोजगार से जोड़ा जाए उन्होनें प्रियंका नेगी को देहरादून आमंत्रित भी किया. गैरसैंण ब्लॉक के मुख्यमंत्री आदर्श गांव सारकोट की कमान अब सबसेकम उम्र की युवती प्रियंका नेगी संभालेंगी. 21 वर्ष की प्रियंका नेगी प्रधान पद के लिए निर्वाचित हुई हैं. उन्होंने अपनी प्रतिद्वंदी प्रियंका देवी कोहराकर विजय हासिल की. प्रियंका नेगी को 421 और प्रियंका देवी को 235 मत प्राप्त हुए. विकास कार्य है किए जा रहेइससे पूर्व 2014-19 तक प्रियंका के पिता भी प्रधान रह चुके हैं. प्रियंका नेगी ने गैरसैंण महाविद्यालय से राजनीतिशास्त्र विषय में स्नातक किया हैजिसका परिणाम भी तीन दिन पहले की आया. चमोली जनपद के सबसे बड़े गांवों में से एक मुख्यमंत्री आदर्श गांव सारकोट में वर्तमान में 300 सेअधिक परिवार रहते हैं. गांव से पलायन न होने के कारण मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भराड़ीसैंण में सारकोट गांव को आदर्श गांव घोषित किया था. तब से सीएम धामी सारकोट गांव को लेकर गंभीर हैं. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर गांव में कई विकास कार्य किए जा रहे हैं. अब इस गांवकी कमान नवनिर्वाचित ग्राम प्रधान प्रियंका नेगी संभालेंगी. प्रियंका ने कहा कि वह मुख्यमंत्री की ओर से किए जा रहे विकास कार्यों को आगे बढ़ाने काकाम करेंगी. गांव की महिलाओं को जागरूक बनाना प्राथमिकता रहेगी ताकि वे हर क्षेत्र में आगे बढ़ सकें। प्रियंका नेगी के पिता पूर्व प्रधान राजे सिंहनेगी ने बताया कि गांव के विकास के लिए वे अपने बेटी का हरसंभव प्रयास करेंगे. युवा चेहरे आए निकलकर सामनेउत्तराखंड पंचायत चुनाव में इस बार कई युवा चेहरे निकलकर सामने आए. गैरसैंण की 21 साल की प्रियंका को प्रधान बनने पर सीएम धामी ने फोनकर बधाई दी. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रियंका नेगी को फोन कर उनकी जीत पर बधाई दी और गांव के विकास के लिए मिलकर काम करने काभरोसा दिलाया. सीएम ने सारकोट के सभी ग्रामीणों को भी बधाई दी और कहा कि सारकोट के लोगों ने अच्छा चुनाव लड़ा है. प्रियंका के पिता, राजेसिंह नेगी, भी 2014-19 तक इसी गांव के ग्राम प्रधान रह चुके हैं, जो उनकी राजनीतिक विरासत का प्रमाण है। प्रियंका नेगी ने बताया कि वहमुख्यमंत्री के द्वारा शुरू किए गए विकास कार्यों को निरंतरता देंगी और गांव की महिलाओं को जागरूक व सशक्त बनाएंगी.
बाल श्रम उन्मूलन के लिए यूपी में तैयार व्यापक योजना, महिला एवं बाल विकास विभाग को जिम्मेदारी

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य को बाल श्रम से पूरी तरह मुक्त कराने के लिए व्यापक और चरणबद्ध रणनीति तैयार की है. सीएमयोगी के नेतृत्व में श्रम विभाग ने इससे जुड़ी राज्य कार्ययोजना तैयार की है और इसके केंद्र में महिला एवं बाल विकास विभाग को रखा गया है. जो नकेवल संकटग्रस्त बच्चों की पहचान और सहायता करेगा, बल्कि उनके पुनर्वासन के हर स्तर पर प्रमुख भूमिका निभाएगा. प्रदेश सरकार का लक्ष्य है किदिसंबर 2026 तक प्रदेश के आठ आकांक्षी जनपदों- बहराइच, बलरामपुर, चंदौली, चित्रकूट, फतेहपुर, श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर और सोनभद्र को बालश्रम से मुक्त कर दिया जाएगा. इसके साथ ही कानपुर मंडल और देवीपाटन मंडल में भी विशेष बाल श्रम विरोधी अभियान चलाया जाएगा. महिलाएवं बाल विकास विभाग के तहत वन स्टॉप सेंटर, बाल सेवा योजना और स्पॉन्सरशिप योजना जैसी योजनाओं को बाल श्रमिकों के पुनर्वासन में प्रभावीरूप से उपयोग में लाया जाएगा. वन स्टॉप सेंटर के जरिए संकट में फंसे बच्चों को अस्थायी आश्रय देने की योजना तय की गई है. साथ ही इनमें बच्चोंकी पहचान, स्वास्थ्य जांच, परामर्श और समाज में पुनर्स्थापन की भी व्यवस्था करना तय किया गया है. शैक्षिक सहयोग की निभाएगा जिम्मेदारीगौरतलब है कि ‘बाल सेवा योजना’ के तहत अनाथ, परित्यक्त और संकटग्रस्त बच्चों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है, जिससे उनकी शिक्षा औरपालन-पोषण बाधित न हो. इस योजना के तहत योगी सरकार ऐसे बच्चों को 2500 रुपये प्रतिमाह उपलब्ध कराती है. इसी प्रकार, स्पॉन्सरशिपयोजना के माध्यम से कमजोर आर्थिक स्थिति वाले परिवारों के बच्चों को प्रतिमाह सहयोग राशि दी जाती है, ताकि वे शिक्षा और जीवन की मूलभूतआवश्यकताओं से वंचित न रहें. यूपी सरकार ने बाल श्रमिक विद्या योजना का विस्तार अब सभी 75 जिलों में करने की योजना बनाई है. इस योजनाके तहत काम में लगे बच्चों को दोबारा शिक्षा से जोड़ा जाएगा और उन्हें छात्रवृत्ति, पुस्तकें, यूनिफॉर्म और विशेष शिक्षण सहायता प्रदान की जाएगी. शिक्षा विभाग इन बच्चों के पुनः नामांकन और शैक्षिक सहयोग की जिम्मेदारी निभाएगा. बाल श्रम से कर दिया जाएगा मुक्तपंचायत स्तर पर कामकाजी बच्चों और प्रवासी श्रमिक परिवारों के बच्चों का विस्तृत डेटा एकत्र किया जाएगा, ताकि कोई भी बच्चा निगरानी से बाहरन रहे. पंचायत सचिव, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और स्कूल प्रबंधन समितियां इस कार्य में सहयोग करेंगी. इसके अलावा, बाल श्रम उन्मूलन अभियान कोजनांदोलन बनाने के लिए गैर सरकारी संगठनों (NGOs), शैक्षणिक संस्थानों और सिविल सोसाइटी की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी. उत्तरप्रदेश सरकार ने लक्ष्य रखा है कि दिसंबर 2026 तक प्रदेश के आठ आकांक्षी जनपदों- बहराइच, बलरामपुर, चंदौली, चित्रकूट, फतेहपुर, श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर और सोनभद्र को बाल श्रम से मुक्त कर दिया जाएगा.
मल्लिकार्जुन खरगे ने राज्यसभा में सीआईएसएफ जवानों के वेल में प्रवेश को बताया ‘बेहद आपत्तिजनक’, उपसभापति को लिखा पत्र

वरिष्ठ कांग्रेस सांसद और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने उपसभापति हरिवंश को पत्र लिखा है. उन्होंने सदन के वेल मेंसीआईएसएफ जवानों के आने की घटना को ‘बेहद आपत्तिजनक’ बताया और कहा कि संसद में ऐसी घटना हैरान करने वाली है. खरगे ने उपसभापतिको लिखे पत्र में कहा, भविष्य में, जब राज्यसभा सदस्य जनहित के महत्वपूर्ण मुद्दे उठा रहे होंगे, तो सीआईएसएफ कर्मी सदन के वेल में नहीं आएंगे, उन्हें ऐसी उम्मीद है. बता दें कि संसदीय नियमावली के तहत सदन की कार्यवाही चलते समय सदन के वेल में सांसदों का आना प्रतिबंधित होता है. इसे सदन में अव्यवस्था के साथ-साथ सभापति के आसन पर दबाव बनाने के प्रयास की तरह देखा जाता है. सदन के वेल में घुसने को लेकर सभापतिसांसदों को आगाह करते हैं. पीठासीन सभापति के निर्देशों और अपील का उल्लंघन करने पर सांसदों को निलंबित भी किया जा सकता है. हैरान व स्तब्ध है मल्लिकार्जुन खरगेकांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने उपसभापति डॉ हरिवंश को लिखे पत्र में कहा, ‘हम इस बात से हैरान और स्तब्धहैं कि सीआईएसएफ कर्मियों को सदन के वेल में प्रवेश की अनुमति दी जा रही है. उन्होंने कहा कि जिस समय राज्यसभा सदस्य जब अपने लोकतांत्रिकअधिकार का प्रयोग कर रहे हैं. उस समय सुरक्षाकर्मियों का सदन के वेल में आना बेहद आपत्तिजनक है और वे इसकी कड़ी निंदा करते हैं। खरगे नेलिखा, ‘हम उम्मीद करते हैं कि भविष्य में, जब सदस्य जनहित के महत्वपूर्ण मुद्दे उठा रहे होंगे, तो सीआईएसएफ कर्मी सदन के वेल में नहीं आएंगे.संसद की कार्यवाही संचालन के समय सभापति के आसन के ठीक सामने राज्यसभा महासचिव बैठते हैं. उनके अलावा सदन की कार्यवाही चलाने मेंमदद करने वाले कई अन्य पदाधिकारी भी होते हैं. सांसदों के बैठने की जगह और सभापति के आसन के बीच अर्धचंद्राकार या यू शेप वाले हिस्से कोसदन का वेल कहा जाता है. इस जगह पर बिना अनुमति के आना नियमों का उल्लंघन और अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है. आधिकारिक संसदीय होते है दस्तावेजसदन के वेल में आना इसलिए भी आपत्तिजनक है क्योंकि राज्यसभा महासचिव और उनके अन्य सहयोगी पदाधिकारियों के पास संवेदनशील औरआधिकारिक संसदीय दस्तावेज होते हैं. बीते कुछ समय में इस जगह पर आने के कारण कई सांसदों को निलंबन का दंड भी झेलना पड़ा है. हंगामाऔर शोरशराबा करने के बाद उग्र हुए कुछ सांसदों ने तो मर्यादा की तमाम सीमाओं को तोड़ते हुए महासचिव की टेबल पर चढ़ने से भी गुरेज नहींकिया. ऐसे अशोभनीय आचरण करने वाले सांसदों को पूर्व उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के तत्कालीन सभापति वेंकैया नायडू ने सदन से पूरे सत्र निलंबितकर दिया था. राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने सदन के वेल में सीआईएसएफ जवानों के घुसने की घटना पर सख्त आपत्ति दर्ज कराईहै. उन्होंने उपसभापति हरिवंश को लिखे गए पत्र में कहा कि सांसद अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग कर रहे हैं, इसी समय वेल मेंसीआईएसएफ कर्मियों का प्रवेश हैरान करने वाला है.
उत्तराखंड में मनसा देवी पहाड़ी सहित पांच स्थानों पर भूस्खलन उपचार के लिए केंद्र ने 125 करोड़ की योजना को मंजूरी, मनसा देवी पहाड़ी को मिलेगी सुरक्षा

राज्य में मनसा देवी पहाड़ी समेत राज्य में चार अन्य जगहों पर भूस्खलन उपचार को लेकर केंद्र सरकार ने 125 करोड़ की योजना मंजूर की है। इसकेतहत पहले चरण में साढ़े चार करोड़ (डीपीआर तैयार करने के लिए) की राशि जारी भी कर दी गई है. राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण व उत्तराखंडभूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र ने प्रस्तावों को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) को भेजा था. इस राशि से मनसा देवी पहाड़ी परहो रहे भूस्खलन की रोकथाम का काम होगा। यह मार्ग कांवड़ यात्रा के दौरान वैकल्पिक मार्ग के रूप में उपयोग होता है. इसी तरह गलोगी जलविद्युतपरियोजना मार्ग मसूरी और नैनीताल स्थित चार्टन लॉज भूस्खलन से प्रभावित होता है, जहां पर उपचार का काम हो सकेगा. कर्णप्रयाग स्थित बहुगुणानगर में भूमि धंसने और पिथौरागढ़ जिले में खोतिला-घटधार भूस्खलन को लेकर संवेदनशील है, जहां पर ट्रीटमेंट का काम किया जाएगा. सुरक्षा जा सके बढ़ाईमुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस सहयोग के लिए प्रधानमंत्री व गृहमंत्री के प्रति राज्य सरकार व प्रदेशवासियों की ओर से आभार व्यक्त किया है।उन्होंने कहा कि यह परियोजना राज्य के भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में दीर्घकालिक समाधान की दिशा में एक निर्णायक पहल है. उन्होंने भूस्खलन सेअत्यधिक प्रभावित पांच संवेदनशील स्थलों को प्राथमिकता के आधार पर चयन किया है. मसूरी और नैनीताल के इन क्षेत्रों में जलविद्युत परियोजनामार्ग और पर्यटन स्थलों के आसपास भूस्खलन की समस्या है. यहां भूस्खलन रोकने के लिए उपचार कार्य होंगे ताकि क्षेत्र की सुरक्षा बढ़ाई जा सके. कर्णप्रयाग में भूमि धंसने की समस्या पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. बहुगुणा नगर में भी संवेदनशील भू-भाग पर उपचार कार्य होंगे जिससे स्थानीयलोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके. प्रबंधन प्रधिकरण को भेजे थे प्रस्तावउत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण एवं भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) को प्रस्ताव भेजेथे. जिन पर केंद्र सरकार ने स्वीकृति प्रदान की. मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री का आभार जताते हुए इस योजना को राज्य के लिए एक निर्णायकपहल बताया. उन्होंने कहा कि पांच सबसे प्रभावित और संवेदनशील स्थलों को प्राथमिकता के आधार पर चुना गया है और इससे दीर्घकालिक सुरक्षामिलेगी. उत्तराखंड में भूस्खलन की समस्या को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने मनसा देवी पहाड़ी समेत राज्य के चार अन्य संवेदनशील स्थानों परभूस्खलन उपचार के लिए 125 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है. यह परियोजना राज्य की भूस्खलन प्रभावित इलाकों में दीर्घकालिक समाधान के लिएएक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कंगना रनौत की मानहानि याचिका खारिज की, बठिंडा में केस आगे बढ़ेगा

बॉलीवुड अभिनेत्री व हिमाचल प्रदेश के मंडी से भाजपा सांसद कंगना रनौत को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है. कंगना रनौत कीतरफ से दायर उस याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने बठिंडा की अदालत में उनके खिलाफ चल रही आपराधिक मानहानि कीशिकायत को रद्द करने की मांग की थी. न्यायमूर्ति त्रिभुवन दहिया की एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रथम दृष्टया उनके खिलाफ धारा 499 और 500 आईपीसी के तहत अभियोग बनता है और मजिस्ट्रेट द्वारा जारी समन आदेश विधि सम्मत है. यह विवाद एक ट्वीट को लेकर है, जिसे कंगना ने किसानआंदोलन के दौरान पोस्ट किया था. उन्होंने एक ट्वीट को रीट्वीट करते हुए लिखा था कि ‘हा हा हा यह वही दादी हैं जो टाइम मैगजीन में सबसेप्रभावशाली भारतीय के तौर पर आई थीं. और यह 100 रुपये में उपलब्ध हैं. महिंदर कौर की लगी थी तस्वीरइस रीट्वीट में बठिंडा निवासी महिंदर कौर की तस्वीर लगी थी, जिन्होंने अदालत में शिकायत दर्ज करवाई थी कि उन्हें गलत तरीके से दिल्ली की शाहीनबाग प्रदर्शनकारी महिला से जोड़कर उनकी छवि को धूमिल किया गया. मजिस्ट्रेट ने कंगना के खिलाफ समन जारी करते हुए माना था कि यह बयानउनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वाला है और एक सार्वजनिक हस्ती होने के नाते कंगना को अधिक जिम्मेदारी से व्यवहार करना चाहिए था. हाईकोर्ट नेभी यह कहा कि मजिस्ट्रेट ने सभी साक्ष्यों की समीक्षा के बाद विधिक प्रक्रिया का पालन करते हुए समन जारी किया और रिपोर्ट न मिलने के बावजूदप्रक्रिया वैध रही. कंगना की ओर से यह तर्क दिया गया था कि ट्वीट में उनके इरादे गलत नहीं थे और यह ट्वीट उन्होंने ‘गुड फेथ’ में किया था लेकिनअदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया. साथ ही, यह दलील भी खारिज कर दी गई कि केवल कंगना के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई जबकि मूल ट्वीटकरने वाले गौतम यादव को शिकायत में शामिल नहीं किया गया. हाईकोर्ट से लगा झटकाहिमाचल प्रदेश की सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से झटका लगा है. हाई कोर्ट ने उनकी मानहानि की शिकायत रद्दकरने संबंधी याचिका खारिज कर दी है. हाईकोर्ट ने कंगना की याचिका खारिज कर दी है और स्पष्ट किया कि प्रथम दृष्टया आईपीसी की धारा 499 (मानहानि) और 500 के तहत मामला बनता है. साथ ही कहा कि बठिंडा की मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा जारी समन वैध था, और याचिका का कोईविधिक आधार नहीं पाया गया है यह भी दावा किया गया था कि शिकायत मूल ट्वीट करने वाले गौतम यादव के खिलाफ नहीं हुई. किन्तु अदालत नेइस दलील को भी खारिज कर दिया क्योंकि समग्र मामले पर जूरी निर्णय लिया जा सकता है.
25% टैरिफ, चुप्पी और चीन-पाक का दबाव, राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर साधा निशाना

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत पर 25 फीसदी टैरिफ लगाने पर कांग्रेस सांसद और विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर हमला बोलाहै. राहुल गांधी ने कहा कि ट्रंप ने 30-32 बार दावा किया है कि उन्होंने युद्धविराम कराया. उन्होंने यह भी कहा कि पांच भारतीय जेट गिर गए. ट्रंप अबकहते हैं कि वह 25% टैरिफ लगाएंगे. इस पर पीएम मोदी जवाब क्यों नहीं दे पा रहे हैं? असली वजह क्या है? उनके हाथ में नियंत्रण किसके पासहै? राहुल गांधी ने कहा कि विदेश मंत्री भाषण देते हैं और कहते हैं कि हमारी विदेश नीति प्रभावशाली है. एक तरफ अमेरिका आपको गाली दे रहा है, दूसरी तरफ चीन आपके पीछे पड़ा है. जब आप अपना प्रतिनिधिमंडल दुनिया में भेजते हैं, तो कोई भी देश पाकिस्तान की निंदा नहीं करता. वे इस देशको कैसे चला रहे हैं? यह पूरी तरह से भ्रम की स्थिति है। पीएम मोदी ने अपने भाषण में ट्रंप और चीन का नाम नहीं लिया। पाकिस्तान के सैन्य प्रमुखजिन्होंने पहलगाम हमला किया राष्ट्रपति ट्रंप उनके साथ दोपहर का भोजन कर रहे हैं और पीएम मोदी कह रहे हैं कि हमें बड़ी सफलता मिली.पीएम मोदी है चुपट्रंप के मृत अर्थव्यवस्था वाले बयान पर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा कि ट्रंप सही हैं प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को छोड़कर हर कोई यह जानता है. हर कोई जानता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था एक मृत अर्थव्यवस्था है. मुझे खुशी है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने एक सही तथ्य कहा है पूरी दुनिया जानती है किभारतीय अर्थव्यवस्था एक मृत अर्थव्यवस्था है. भाजपा ने अदाणी की मदद करने के लिए अर्थव्यवस्था को खत्म कर दिया है. राहुल गांधी ने कहा किपीएम मोदी केवल एक व्यक्ति के लिए काम करते हैं और वह व्यक्ति अदाणी है. भारत-अमेरिका के बीच व्यापार सौदा होगा और पीएम मोदी वहीकरेंगे जो ट्रंप कहेंगे। आज भारत के सामने मुख्य मुद्दा यह है कि सरकार ने हमारी आर्थिक, रक्षा और विदेश नीति को बर्बाद कर दिया है वे इस देश कोबर्बाद कर रहे हैं. कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने कहा कि टैरिफ पीएम मोदी की विफलता के कारण लगा है। पीएम मोदी की अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंपके साथ दोस्ती भारत को महंगी पड़ रही है. पीएम मोदी की गलत नीतियों और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के साथ उनकी दोस्ती के कारण भारत कोनुकसान हो रहा है। 25 बार ट्रंप ने कहा है कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध रोक दिया है. पीएम मोदी संसद में इसके खिलाफ एक शब्दभी कहने को तैयार नहीं थे। हर दिन हम पर एक के बाद एक हमले हो रहे हैं पीएम मोदी चुप हैं. बयान रहे दुर्भाग्यपूर्णकांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि पिछले दो दिनों से अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बयान बहुत दुर्भाग्यपूर्ण रहे हैं. मुझे लगता है कि विदेश मंत्री एसजयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को बदल देना चाहिए. ये दोनों प्रधानमंत्री को विदेश नीति पर सलाह देते हैं और आज आपइसके परिणाम देख रहे हैं। टैरिफ लगाना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है. लेकिन उससे भी ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण और दुखद राष्ट्रपति ट्रंप और पाकिस्तानी सरकार केबीच हुई बातचीत है. उन्होंने कहा कि वह पाकिस्तान के साथ एक समझौता करेंगे ताकि भारत भविष्य में पाकिस्तान से तेल खरीद सके. यह भारत औरअमेरिका के संबंधों में एक नई गिरावट को उजागर करता है. इसलिए मुझे लगता है कि विदेश मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार को बदल देनाचाहिए. कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि यह हमारे लिए बहुत गंभीर मामला है अमेरिका के साथ हमारे व्यापार को नष्ट कर देगा व्यापार वार्ता अभीभी चल रही है और संभावना है कि इसमें कमी आ सकती है। अगर ऐसा नहीं होता है तो यह हमारे निर्यात को नुकसान पहुंचाएगा, क्योंकि अमेरिकाहमारे लिए एक बहुत बड़ा बाजार है. दूसरी ओर, अगर उनकी मांगें पूरी तरह से अनुचित हैं, तो हमारे वार्ताकारों को विरोध करने का पूरा अधिकार है. अमेरिका को हमारी जरूरतों को भी समझना होगा. अमेरिका पर हमारे टैरिफ इतने अनुचित नहीं हैं यह लगभग 17% औसत है अमेरिकी सामान कीकीमतें भारतीय बाजार में बेचने के लिए पर्याप्त प्रतिस्पर्धी नहीं हैं.
मालेगांव ब्लास्ट केस में सभी आरोपी बरी, ‘भगवा आतंकवाद’ पर सियासी घमासान तेज

महाराष्ट्र के मालेगांव विस्फोट मामले में गुरुवार को 17 साल बाद एनआईए की विशेष अदालत ने पूर्व भाजपा सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर और लेफ्टिनेंटकर्नल प्रसाद पुरोहित सहित सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया। कोर्ट के इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारे में बयानबाजी तेज हो गई है. एक तरफ जहां तरफ भाजपा नेताओं ने इस फैसले का स्वागत किया. साथ ही ‘भगवा आतंकवाद’ के मुद्दे पर विपक्ष को आड़े हाथ लेना शुरू कर दियाहै. वहीं दूसरी ओर कांग्रेस फिर से इस फैसले को चुनौती देने की बात पर जोर दे रही है. एनआईए कोर्ट के फैसले के बाद तेज होती सियासत के बीचमहाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि आतंकवाद न कभीभगवा था, न है और न ही कभी होगा. उन्होंने कहा कि अब सच सामने आ गया है. एनआईए कोर्ट के फैसले के बाद भाजपा सांसद रवि किशन नेमामले मे कहा कि हमें समझ नहीं आ रहा कि खुश हों या दुखी मेरी बहन साध्वी प्रज्ञा मेरे बगल में संसद में बैठती थीं उनका शरीर आज लगभगलकवाग्रस्त है. कांग्रेस ने गढ़ा भगवा आतंकवाद शब्दउन्होंने कहा कि सोचिए जिन लोगों पर झूठे आरोप लगे, उनके और उनके परिवारों पर क्या बीती होगी.कौन लौटाएगा उनके 17 साल? रवि किशन नेकांग्रेस पर सीधा हमला करते हुए कहा कि जिस कांग्रेस ने भगवा आतंकवाद शब्द गढ़ा, आज उन्हें इसका जवाब देना होगा. उन्हें देश के 100 करोड़हिंदुओं से माफी मांगनी चाहिए. किस आधार पर उन्होंने भगवा आतंक का नैरेटिव खड़ा किया? इसके पीछे का मास्टरमाइंड कौन था? उन्होंने कहा किअब यह साबित हो चुका है कि हिंदू आतंकी नहीं हो सकता और इस मुद्दे को भाजपा संसद में उठाएगी. कोर्ट के फैसले के बाद समाजवादी पार्टी केसांसद और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि मैंने पूरी रिपोर्ट नहीं पढ़ी है. लेकिन जो लोग इतनी बड़ीघटना में शामिल थे, उन्हें सजा मिलनी चाहिए. दोबारा की जाएगी अपीलवहीं इस फैसले पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता कमलनाथ ने कहा कि इससे फर्क पड़ा है, वे इसे चुनौती देंगे। भाजपा कुछ भी कहे, लेकिन ये कोर्ट का फैसला हैऔर इसे चुनौती दी जा सकती है. निश्चित रूप से दोबारा अपील की जाएगी. केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कोर्ट के फैसले पर कहा कि इस केस कीसुनवाई कई वर्षों तक चली. अदालत ने सभी आरोपियों को बरी किया क्योंकि उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं था. उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवादीसिर्फ आतंकवादी होता है, उसका कोई धर्म नहीं होता। जब कोर्ट में सुनवाई होती है तो सबूत देना जरूरी होता है. वहीं इस फैसले का शिवसेनाप्रवक्ता कृष्णा हेगड़े ने स्वागत करते हुए कहा कि हमें इस फैसले से बहुत खुशी है. कांग्रेस ने एक सोची-समझी साजिश के तहत इन लोगों को फंसायाऔर ‘हिंदू आतंकवाद’ शब्द गढ़ा. अब उनकी पोल खुल चुकी है उन्होंने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह पहले ही संसद में कह चुके थे कि “हिंदू कभीआतंकी नहीं हो सकता”, और अब यह बात साबित हो गई है. भाजपा सांसद बृजलाल ने कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि मैं कर्नलपुरोहित, साध्वी प्रज्ञा और सभी निर्दोषों को बधाई देता हूं. कोर्ट ने ना सिर्फ उन्हें, बल्कि पूरे हिंदू समाज को न्याय दिया है। उन्होंने कांग्रेस पर निशानासाधते हुए कहा कि एक फर्जी भगवा आतंकवाद’ की थ्योरी गढ़ी गई थी. कांग्रेस और उसके नेता मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी, प्रियंका औरराहुल गांधी को पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए. कांग्रेस ने देश के साथ विश्वासघात किया है.