"National   Voice  -   खबर देश की, सवाल आपका"   -    *Breaking News*   |     "National   Voice  -   खबर देश की, सवाल आपका"   -    *Breaking News*   |     "National   Voice  -   खबर देश की, सवाल आपका"   -    *Breaking News*   |    

राउज एवेन्यू कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, सीबीआई केस में केजरीवाल-सिसोदिया समेत सभी 23 आरोपी दोषमुक्त

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने कथित दिल्ली शराब नीति घोटाले से जुड़े केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज मामले में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने दोनों को बरी कर दिया है। इस फैसले पर अरविंद केजरीवाल थोड़ी देर में प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। इससे पहले केजरीवाल अपने आवास से पार्टी दफ्तर तक रोड शो कर रहे हैं। रोड शो के दौरान उन्होंने अपने हाथ में गदा लेकर समर्थकों का अभिवादन किया। इससे पहले 12 फरवरी को हुई सुनवाई में अदालत ने आरोप तय करने के मुद्दे पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और सभी आरोपियों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रखा था। सुनवाई में सीबीआई ने अदालत में दावा किया कि पहली चार्जशीट और पूरक आरोप पत्र में साजिश के पर्याप्त आधार मौजूद हैं, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत कुल 23 आरोपियों की ओर से आरोपों को निराधार बताया था। सीबीआई का आरोप है कि साउथ लॉबी ने दिल्ली की आबकारी मामला अपने पक्ष में कराने के लिए 100 करोड़ रुपये की रिश्वत दी थी। अनियमितताओं के आरोपों के बीच रद्द कर दिया गयाअरविंद केजरीवाल की ओर से वरिष्ठ वकील ने तर्क दिया था कि उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है। उन्होंने कहा कि केजरीवाल मुख्यमंत्री के तौर पर अपनी आधिकारिक जिम्मेदारियां निभा रहे थे और उन्हें किसी भी तरह की रिश्वत मांगने या लेने से जोड़ने वाला कोई प्रमाण नहीं है। उन्होंने यह भी कहा था कि केजरीवाल का नाम पहली चार्जशीट और तीन पूरक चार्जशीट में नहीं था, बल्कि चौथी पूरक चार्जशीट में जोड़ा गया, जो पहले की चार्जशीट का दोहराव है। बहस के दौरान अप्रूवर बने राघव मगुंटा के बयान का भी जिक्र हुआ था। बचाव पक्ष ने कहा कि ऐसा कोई सीधा लिंक नहीं है जिससे साबित हो कि केजरीवाल ने किसी से पैसे लेने को कहा था। कोरोना काल के बीच दिल्ली सरकार ने ‘दिल्ली आबकारी नीति 2021-22’ लागू की थी। इस शराब नीति के कार्यान्वयन में कथित अनियमितता की शिकायतें आईं जिसके बाद उपराज्यपाल ने सीबीआई जांच की सिफारिश की। इसके साथ ही दिल्ली आबकारी नीति 2021-22 सवालों के घेरे में आ गई थी। हालांकि, नई शराब नीति को बाद में इसे बनाने और इसके कार्यान्वयन में अनियमितताओं के आरोपों के बीच रद्द कर दिया गया।

इलाहाबाद जिला न्यायालय की स्पेशल पॉक्सो अदालत ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती समेत दो के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का दिया आदेश

इलाहाबाद जिला न्यायालय पॉक्सो एक्ट की अदालत ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य दंडी स्वामी प्रत्यक्त चैतन्य मुकुंदानंद गिरि के खिलाफ बच्चों के यौन शोषण के मामले में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। यह आदेश शाकुंभरी पीठीधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी की अर्जी पर सुनवाई करते हुए स्पेशल कोर्ट ने दिया है। स्पेशल कोर्ट पॉक्सो के न्यायाधीश विनोद कुमार चौरसिया की अदालत ने जगद्गुरु ज्योतिष पीठाधीश्वर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ बच्चों का यौन शोषण करने के आरोप में झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। अदालत ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य दंडी स्वामी प्रत्यक्त चैतन्य मुकुंदानंद गिरि के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। प्रयागराज से विद्या मठ वाराणसी के लिए पैदल यात्रा निकालेंगेन्यायालय ने पुलिस को एफआईआर दर्ज करने और मामले की विस्तृत जांच करने का निर्देश दिया। न्यायालय के आदेश के बाद अब झूंसी थाने में मामला दर्ज किया जाएगा। धारा 173 (4) के तहत शाकुंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने एफआईआर दर्ज करने और मामले की जांच करने की मांग को लेकर कोर्ट में वाद दायर किया था। जिस पर अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। शनिवार को कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए एफआईआर दर्ज करने का आदेश जारी किया है। शाकुंभरी पीठाधीश्वर और श्रीकृष्ण जन्मभूमि निर्माण ट्रस्ट के आशुतोष ब्रह्मचारी ने अदालत के आदेश पर संतोष जाहिर किया है। उन्होंने कहा कि न्याय के मंदिर से न्याय मिला है। न्यायाधीश ने बच्चों के साथ हुए लैंगिक अपराध के मामले में झूंसी थाने में एफआईआर करते हुए जांच करने का आदेश दिया है। कहा कि सनातन के नाम पर बच्चों का शोषण करने वालों को सजा मिलेगी। कहा कि वह प्रयागराज से विद्या मठ वाराणसी के लिए पैदल यात्रा निकालेंगे।

सिर्फ सनसनी फैलाने के लिए है यह मामला … PM डिग्री विवाद पर कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल की तीखी दलील

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक डिग्री से जुड़ी जानकारी के खुलासे को लेकर चल रहे मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) को बड़ी राहत दी। कोर्ट ने अपील दाखिल करने में हुई देरी पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए विश्वविद्यालय को तीन सप्ताह का अतिरिक्त समय दे दिया। मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने कहा जैसा कि प्रार्थना की गई है, देरी माफ करने से संबंधित आवेदन पर आपत्ति दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया जाता है। मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल को होगी। नसनी फैलाने के लिए नहीं हो सकतादिल्ली विश्वविद्यालय की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में दलील दी कि इस पूरे मामले में कुछ भी ठोस नहीं है और इसे केवल सनसनी फैलाने के लिए आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने अपील में हुई देरी के साथ-साथ मामले के गुण-दोष पर जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। अपीलकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील ने कोर्ट को बताया कि करीब ढाई महीने बीत जाने के बावजूद डीयू ने देरी पर आपत्ति दाखिल नहीं की है। उन्होंने कहा कि यह देरी केवल 15 से 45 दिनों की है, जिसे अदालत आसानी से माफ कर सकती है। वकील ने यह भी मांग की कि यदि दिल्ली विश्वविद्यालय मुख्य अपील पर जवाब देना चाहता है, तो कोर्ट औपचारिक नोटिस जारी करे। इस पर सॉलिसिटर जनरल मेहता ने आपत्ति जताते हुए कहा नोटिस जारी करना सिर्फ सनसनी फैलाने के लिए नहीं हो सकता। अधिवक्ता मोहम्मद इरशाद शामिलयह अपील दिल्ली हाईकोर्ट के उस एकल न्यायाधीश के फैसले के खिलाफ दायर की गई है, जिसने 25 अगस्त 2025 को केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्नातक डिग्री से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने का निर्देश दिया गया था। अपीलकर्ताओं में आरटीआई कार्यकर्ता नीरज, आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता संजय सिंह और अधिवक्ता मोहम्मद इरशाद शामिल हैं।

बाबरी मस्जिद अब कभी नहीं बनने वाली”… बाराबंकी में गरजे योगी आदित्यनाथ, ‘कयामत’ वालों को दिया जवाब

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि भाजपा सरकार रुकने वाली नहीं है। ये सरकार जितना बोलती उतना करती है। उतना ही बोलती है जितना करती है। जो कयामत के दिन आने का सपना देख रहे है वह दिन आने वाला नहीं है। बाबरी मस्जिद अब कभी भी नहीं बनने वाली है। हम अपनी विरासत को यूं ही मजबूत करेंगे। याद करिए 500 साल बाद अयोध्या में गौरवपूर्ण क्षण आया। कितनी सरकारें आई कितनी गईं। कितने राजा महाराजा हुए मगर अयोध्या में राम मंदिर क्यों नहीं बनवाया। राम सबके है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग ऐसे हैं जो अवसरवादी रवैया अपनाकर संकट में राम को याद करते हैं। बाकी राम को विस्मित कर देते हैं इसलिए अब भगवान राम उनको भूल चुके हैं। सीएम योगी ने आगे कहा कि कयामत के लिए मत जियो। हिंदुस्तान में कायदे से रहना सीखो। कानून मानोगे तो फायदे में रहोगे। नहीं तो आगे का रास्ता सीधा जहन्नुम जाता है। कानून तोड़ने वाले जहन्नुम जाएंगे। हर भारत वासी का एक ध्येय एक भारत श्रेष्ठ भारत हो। हमारा देश वैभवशाली हो। विकसित हो। आयोजित जनसभा को संबोधित कियाहर संत देश के लिए है और धर्म भी देश के लिए है। धर्म और देश एक आत्मा और शरीर है। भारत और सनातन एक दूसरे के पूरक है। सीएम योगी मंगलवार को दरियाबाद विधानसभा क्षेत्र में दुल्हदेपुर स्थित बाबा हरिशंकर दास की कुटी पर आयोजित जनसभा को संबोधित कर रहे थे। दोपहर करीब सवा दो बजे सीएम का हेलीकॉप्टर कुटी के पास उतरा। यहां महंत बलरामदास ने उनका स्वागत किया। यहां पहुंचकर उन्होंने कथा मंडप का उद्घाटन किया और रामार्चा यज्ञ में आहुतियां अर्पित की। इसके बाद मुख्यमंत्री ने कुटी परिसर में आयोजित जनसभा को संबोधित किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाराबंकी में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जो लोग कयामत का दिन आने का इंतजार कर रहे हैं। वो कयामत के लिए न जिएं। हिंदुस्तान में कायदे से रहना सीखो।

जूते चाटने वाले और मारने वाले… AIMIM नेता तौकीर निजामी का मुसलमानों पर शर्मनाक बयान!

एआईएमआईएम (AIMIM) के नेता तौकीर निजामी ने एक सार्वजनिक सभा में मुसलमानों को लेकर विवादित बयान दिया, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। निजामी ने अपने बयान में कहा कि मुसलमान तीन तरह के होते हैं। उन्होंने कहा कि एक तरह के मुसलमान वो हैं जो जूते चाटने का काम करते हैं, ये कांग्रेस में मिलेंगे। दूसरा वो जो जूते खाने का काम करते हैं, ये भाजपा में मिलेंगे। और तीसरा वो मुसलमान जो जूते मारने का काम करते हैं, ये AIMIM पार्टी में मिलेंगे। इसके बाद उन्होंने सभा में मौजूद लोगों से पूछा कि “तुम कौन से मुसलमान हो?” वीडियो वायरल होने के बाद चर्चा लगातार जारीइस बयान के बाद कई विपक्षी नेताओं ने निजामी के इस बयान की निंदा की है और इसे साम्प्रदायिक रूप से विभाजनकारी बताया है। वहीं AIMIM पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि ऐसे बयान चुनावी माहौल और समाज में तनाव बढ़ा सकते हैं। सोशल मीडिया पर भी लोग अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं और वीडियो वायरल होने के बाद चर्चा लगातार जारी है।

कार्यस्थगन प्रस्ताव की तैयारी! राहुल गांधी और 8 सांसदों के निलंबन के बाद अब ‘ट्रेड डील’ बना विपक्ष का नया ब्रह्मास्त्र

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर संसद में नए सिरे से राजनीतिक घमासान के संकेत मिल रहे हैं। बजट सत्र के पहले चरण का आखिरी सप्ताह शुरू होने से पहले ही विपक्ष ने सरकार को घेरने की तैयारी कर ली है। समझौते के प्रावधान सार्वजनिक होने के बाद विपक्षी दलों ने कृषि और ऊर्जा हितों को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। इससे शेष कार्य दिवस की कार्यवाही प्रभावित होने की आशंका है। सोमवार से शुरू हो रहे सप्ताह में कांग्रेस, सपा, डीएमके और टीएमसी समेत कई विपक्षी दल इस मुद्दे पर कार्यस्थगन प्रस्ताव लाने की तैयारी में हैं। विपक्ष का आरोप है कि समझौते में कृषि क्षेत्र की अनदेखी की गई है और कुछ शर्तें देश के हित के खिलाफ हैं। पहले संकेत थे कि विपक्ष आम बजट पर चर्चा में भाग लेगा, लेकिन समझौते का स्वरूप सामने आने के बाद रुख सख्त हो गया है। विस्तृत चर्चा और जवाब मांगने की तैयारी मेंबजट सत्र का पहला चरण पहले ही लगातार हंगामे की भेंट चढ़ चुका है। इसकी शुरुआत नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवणे से जुड़ी अप्रकाशित सामग्री पढ़े जाने के विवाद से हुई थी। इस मामले में जोरदार विरोध के बाद कांग्रेस के आठ सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित किया गया। इसके बाद कई दिनों तक सदन की कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी। शुक्रवार को हुए हंगामे के बाद संकेत मिले थे कि विपक्ष अप्रकाशित किताब विवाद को पीछे छोड़कर बजट पर चर्चा करेगा। कांग्रेस और अन्य दलों ने रणनीति बदली थी ताकि आर्थिक मुद्दों पर सरकार को घेरा जा सके। लेकिन शनिवार को भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का विस्तृत स्वरूप सामने आते ही विपक्ष ने इसे नया बड़ा मुद्दा बना दिया। अब विपक्ष इस पर विस्तृत चर्चा और जवाब मांगने की तैयारी में है। किसानों के हितों से समझौता स्वीकार नहीं होगाकांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा कि समझौता गंभीर चिंता का विषय है और पार्टी इस पर संसद में चुप नहीं बैठेगी। उनका आरोप है कि सरकार ने कृषि क्षेत्र को अमेरिका के लिए खोल दिया है। साथ ही अमेरिका के दबाव में रूस से तेल आयात रोकने पर सहमति जताई गई है। आईटी और सेवा क्षेत्र को लेकर भी स्पष्ट प्रावधान सामने नहीं आए हैं। कांग्रेस ने कहा कि किसानों के हितों से समझौता स्वीकार नहीं होगा। संसद के बजट सत्र के पहले चरण का यह अंतिम सप्ताह है। ऐसे में सरकार की कोशिश लंबित कामकाज निपटाने की रहेगी, जबकि विपक्ष इस समझौते पर चर्चा और जवाब चाहता है। टकराव की स्थिति में बार-बार स्थगन की नौबत आ सकती है। राजनीतिक जानकार मान रहे हैं कि अगर सहमति नहीं बनी तो पूरा सप्ताह हंगामे की भेंट चढ़ सकता है।

संविधान में ‘वी द पीपल’ ‘भारत माता’ नहीं! ओवैसी के बयान से छिड़ा नया विवाद, राष्ट्रवाद की परिभाषा पर घमासान

भारत के संविधान और राष्ट्रवाद की परिभाषा को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के एक बयान ने इस मुद्दे को नए सिरे से चर्चा के केंद्र में ला दिया है। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान की शुरुआत ‘वी द पीपल’ यानी जनता से शुरू होता है, न कि भारत माता के नाम से।ओवैसी ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता देता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि संविधान का आधार समावेशी और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों पर टिका है। उन्होंने याद दिलाया कि प्रस्तावना में स्वतंत्रता, समानता, न्याय और बंधुता की बात कही गई है। उनके अनुसार देशभक्ति को किसी एक धार्मिक पहचान से जोड़ना संविधान की भावना के खिलाफ है। एक धार्मिक विचार से जोड़ना सही नहींओवैसी ने अपने भाषण में संसद में हुई वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ पर हुई बहस का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस दौरान उन्होंने संसद में खड़े होकर कहा था कि 24 जनवरी 1950 को देश ने खुद को संविधान दिया और उसकी शुरुआत “वी द पीपल” से होती है। उन्होंने कहा कि संविधान किसी खास धार्मिक प्रतीक का नाम लेकर शुरू नहीं होता, बल्कि जनता को सर्वोच्च मानता है। ओवैसी ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 25 हर नागरिक को अपने धर्म को मानने और उसका पालन करने की आजादी देता है। उन्होंने कहा कि यही भारत की संवैधानिक ताकत है। उनके मुताबिक प्रस्तावना साफ तौर पर बताती है कि देश का ढांचा न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व पर आधारित है। इसे किसी एक धार्मिक विचार से जोड़ना सही नहीं है। पहचान से जोड़ना स्वीकार नहीं किया जा सकताएआईएमआईएम प्रमुख ने कहा कि अगर देशभक्ति को किसी एक धर्म से जोड़ा जाएगा तो यह आजादी की लड़ाई लड़ने वाले कई नेताओं के योगदान को कमजोर करेगा। उन्होंने बहादुर शाह जफर और यूसुफ मेहरअली का उदाहरण देते हुए कहा कि इन लोगों ने देश के लिए बलिदान दिया। उनके मुताबिक राष्ट्र प्रेम को धार्मिक पहचान से जोड़ना स्वीकार नहीं किया जा सकता। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि भारतीय संविधान “वी द पीपल” शब्दों से शुरू होता है, न कि भारत माता के नाम से। उन्होंने संविधान की धर्मनिरपेक्ष और समावेशी भावना पर जोर दिया। अनुच्छेद 25 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता का हवाला देते हुए कहा कि देशभक्ति को धर्म से जोड़ना सही नहीं।

मुंबई में पहली बार खिलेगा ‘कमल’ रितु तावड़े होंगी भाजपा की पहली महिला मेयर, महायुति का शक्ति प्रदर्शन

भारतीय जनता पार्टी ने रितु तावड़े को मुंबई महापौर पद के लिए अपना उम्मीदवार घोषित किया है। मुंबई मेयर का पद खुली श्रेणी में महिला उम्मीदवारों के लिए आरक्षित है, ऐसे में साफ है कि मुंबई को एक बार फिर महिला महापौर मिलेंगी। इसी कड़ी में मुंबई में पहली बार भाजपा का महापौर बनेगा। मुंबई भाजपा अध्यक्ष अमित साटम ने नाम का एलान किया है। वहीं शिंदे गुट के संजय शंकर घाड़ी डिप्टी मेयर बनेंगे। जिसकी घोषणा शिवसेना नेता राहुल शेवाले ने की। भाजपा मेयर प्रत्याशी रितु तावड़े घाटकोपर से तीन बार की पार्षद और शिक्षा समिति की पूर्व अध्यक्ष रह चुकी है। जबकि शिवसेना ने मुंबई के वार्ड नंबर 5, मागाथाने के पार्षद संजय शंकर घाड़ी को उप महापौर पद के लिए नामित किया है। बहुमत को देखते हुए महायुति पार्टी के महापौर और उप महापौर पदों के उम्मीदवारों की जीत निश्चित मानी जा रही है। डिप्टी मेयर पदों के लिए उम्मीदवार उतार सकतीडिप्टी मेयर के पद के लिए शिवसेना ने यह साफ किया है कि घाड़ी उप महापौर पद पर डेढ़ साल तक बने रहेंगे। शिवसेना सचिव संजय मोरे ने एक बयान में कहा है कि घाड़ी 15 महीने तक उप महापौर के रूप में कार्य करेंगे। दरअसल, घाड़ी शिवसेना (यूबीटी) के उन वरिष्ठ पूर्व पार्षदों में से एक थे, जिन्होंने पाला बदलकर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए थे। मुंबई में उप महापौर के कार्यकाल को विभाजित करके शिवसेना अपने चार पार्षदों को अवसर देना चाहती है। दरअसल, मेयर और डिप्टी मेयर पदों के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि आज, सात फरवरी को समाप्त हो रही है। उसके बाद 11 फरवरी को मेयर चुनाव होने हैं। ऐसे में भाजपा-शिवसेना गठबंधन मेयर और डिप्टी मेयर पदों के लिए आवेदन दाखिल करेगा। इस दौरान सभी पार्षद मौजूग रहेंगे और अपनी शक्ति का प्रदर्शन करेंगे। इस बीच मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबि शिवसेना यूबीटी और कांग्रेस मेयर और डिप्टी मेयर पदों के लिए उम्मीदवार उतार सकती है। 25 वर्षों तक नगर निकाय पर शासन कियाबता दें कि हाल ही में हुए बृहन्मुंबई नगर निगम के 227 सदस्यीय चुनावों में भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जबकि शिवसेना ने 29 सीटें जीतीं। सत्तारूढ़ गठबंधन, जिसके पास कुल 118 पार्षद हैं, बहुमत के आंकड़े (114) को पार कर चुका है और महापौर पद हासिल करने की अच्छी स्थिति में है। शिवसेना (यूबीटी), जिसने 1997 से 25 वर्षों तक नगर निकाय पर शासन किया, उसने 65 सीटें जीतीं, जबकि उसके सहयोगी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) ने क्रमशः छह और एक सीट जीती।

ईरान को ट्रंप की ‘न्यूक्लियर’ चेतावनी! बोले समझौता करो या गंभीर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहो

ओमान की राजधानी मस्कट में अमेरिका-ईरान परमाणु समझौते पर पहले दौर की बातचीत बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई। हालांकि दोनों ही देशों ने इस वार्ता को सकारात्मक बताया। अब अगले हफ्ते फिर से वार्ता की जाएगी। इस बीच अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त लहजे में चेतावनी दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस वार्ता को ‘बहुत अच्छा’ बताया है और अगले सप्ताह की शुरुआत में और बातचीत की योजना के बारे में कहा। साथ ही दबाव भी बढ़ाया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान परमाणु कार्यक्रम पर समझौता नहीं करता है, तो उसे ‘गंभीर परिणाम’ भुगतने होंगे। विमानवाहक पोत को क्षेत्र में भेजादरअसल, ट्रंप प्रशासन का मुख्य उद्देश्य ईरान को जीरो न्यूक्लियर कैपेबिलिटी यानी शून्य परमाणु क्षमता की ओर ले जाना है। ईरान सिर्फ अपने परमाणु कार्यक्रम पर बात करना चाहता है, जबकि अमेरिका उसकी बैलिस्टिक मिसाइलों और क्षेत्रीय गतिविधियों को भी समझौते में शामिल करना चाहता है। ट्रंप ने ईरान को इस कार्यक्रम पर समझौता करने के लिए मजबूर करने के लिए सैन्य कार्रवाईकरने की बार-बार धमकी दी है, इससे पहले उन्होंने तेहरान को देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों पर की गई खूनी कार्रवाई के जवाब में इस विमानवाहक पोत को क्षेत्र में भेजा था, जिसमें हजारों लोग मारे गए थे और इस्लामिक गणराज्य में हजारों अन्य लोगों को हिरासत में लिया गया था। जहाजों और व्यक्तियों पर प्रतिबंध लगाए गएओमान में हुई बातचीत पर जब कोई ठोक नतीजा सामने नहीं आया तो नाराज राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर नए प्रतिबंध लगाए। अमेरिका ने ईरान के तेल और पेट्रोकेमिकल निर्यात से जुड़े नेटवर्क पर नई सख्त कार्रवाई की है। नए आदेश के तहत कई कंपनियों, जहाजों और व्यक्तियों पर प्रतिबंध लगाए गए हैं। अमेरिका के मुताबिक ईरान से जुड़े तेल कारोबार के जरिए नियमों को दरकिनार किया जा रहा था। बता दें कि ओमान हमेशा की तरह दोनों देशों के बीच पुल का काम कर रहा है। वार्ता में राष्ट्रपति के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जारेड कुशनर ने किया। दोनों पक्षों के राजनयिक अब अपने-अपने देशों में मशविरा करेंगे। अगली बैठक अगले सप्ताह की शुरुआत में होने की संभावना है। वार्ता के बाद अमेरिका ने तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की। इधर, बैठक को लेकर ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि यह एक अच्छी शुरुआत है। हमारे हमने अपने दृष्टिकोण एक-दूसरे तक पहुंचाए, जो बेहद जरूरी था।

मणिपुर में राष्ट्रपति शासन खत्म, युमनाम खेमचंद सिंह संभालेंगे सत्ता की कमान

मणिपुर में लगभग एक साल से चले आ रहे राष्ट्रपति शासन को हटा दिया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बुधवार को एक अधिसूचना जारी कर राज्य से राष्ट्रपति शासन को तत्काल प्रभाव से हटाने की घोषणा की। इसके साथ ही भाजपा के युमनाम खेमचंद सिंह आज शाम 6 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। बीजेपी विधायक दल के नेता युमनाम खेमचंद सिंह ने आज लोक भवन में राज्यपाल अजय भल्ला से मुलाकात कर बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार बनाने का दावा पेश किया है। राष्ट्रपति की ओर से जारी घोषणा में कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 356 के खंड (2) के तहत मिली शक्तियों का उपयोग करते हुए यह फैसला लिया गया है। इसके तहत 13 फरवरी 2025 को जारी की गई उद्घोषणा को 4 फरवरी 2026 से वापस लिया जाता है। अधिसूचना जारी कर इसकी घोषणा कीबता दें कि इससे पहले मंगलवार को भाजपा विधायक दल की बैठक में युमनाम खेमचंद को विधायक दल का नेता चुना गया था। अब वे राज्य के नए मुख्यमंत्री के तौर पर कमान संभालेंगे। पिछले साल 13 फरवरी 2025 को मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाया गया था। यह फैसला तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद लिया गया था। उस समय राज्य लंबे समय से जातीय हिंसा और संवैधानिक संकट से गुजर रहा था, जिसके चलते केंद्र सरकार को यह कदम उठाना पड़ा था। मणिपुर से तत्काल प्रभाव से राष्ट्रपति शासन हटा दिया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आज एक अधिसूचना जारी कर इसकी घोषणा की है।