ममता सरकार का बड़ा एक्शन, राजीव कुमार के रिटायर होते ही पुलिस महकमे में भारी फेरबदल

पश्चिम बंगाल सरकार ने पुलिस महकमे में बड़ा फेरबदल किया है। सरकार ने एक साथ 22 आईपीएस अधिकारियों का तबादला कर उन्हें नई जिम्मेदारियां सौंपी हैं। इस फेरबदल में कोलकाता के पुलिस कमिश्नर से लेकर कई जिलों के पुलिस अधीक्षक (एसपी) तक बदल दिए गए हैं। सबसे बड़ा बदलाव राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) पद पर हुआ है। राजीव कुमार के रिटायर होने के बाद वरिष्ठ अधिकारी पीयूष पांडे को कार्यवाहक डीजीपी बनाया गया है। वहीं, सुप्रतिम सरकार अब कोलकाता के नए पुलिस कमिश्नर होंगे। इससे पहले वह दक्षिण बंगाल के एडीजी पद पर तैनात थे। कोलकाता के पूर्व पुलिस कमिश्नर मनोज कुमार वर्मा को अब राज्य का सुरक्षा निदेशक नियुक्त किया गया है। धृतिमान सरकार मुर्शिदाबाद के नए एसपी होंगेएसटीएफ के एडीजी विनीत कुमार गोयल को अब एडीजी (कानून-व्यवस्था) बनाया गया है। उन्हें भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो का अतिरिक्त प्रभार भी मिला है। दूसरी ओर, जावेद शमीम अब एसटीएफ के एडीजी होंगे और उनके पास इंटेलिजेंस ब्यूरो का अतिरिक्त जिम्मा भी रहेगा। रेंज स्तर पर भी कई बदलाव हुए हैं। अमित पी जावलगी अब बारासात रेंज के आईजीपी होंगे। आलोक राजोरिया को बर्दवान रेंज का डीआईजी बनाया गया है। हाल ही में हिंसा का सामना करने वाले मुर्शिदाबाद जिले के एसपी कुमार सन्नी राज को हटाकर इंटेलिजेंस ब्यूरो में भेज दिया गया है। उनकी जगह धृतिमान सरकार मुर्शिदाबाद के नए एसपी होंगे। व्यवस्था को और मजबूत करने की कोशिश कीअन्य तबादलों में प्रतीक्षा झरखरिया को दार्जिलिंग का एसपी और दिनेश कुमार को कोलकाता पुलिस के नॉर्थ डिवीजन का डीसी बनाया गया है। दीपक सरकार अब डीसी साउथ की जिम्मेदारी संभालेंगे। प्रियब्रत रॉय को डीसी नॉर्थ और अरिश बिलाल को इंटेलिजेंस ब्यूरो में विशेष अधीक्षक नियुक्त किया गया है। देबजानी दत्ता अब सियालदह की रेलवे पुलिस अधीक्षक (एसआरपी) होंगी। सरकार ने इन तबादलों के जरिए प्रशासनिक व्यवस्था को और मजबूत करने की कोशिश की है।
सांसद मनोज तिवारी के नाम पर ‘फेक’ खेल, दिल्ली पुलिस के पास पहुंचे भोजपुरी सुपरस्टार

भाजपा लोकसभा सांसद मनोज तिवारी ने अपने नाम पर बनाए गए फेक फेसबुक अकाउंट के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। पूर्वोत्तर दिल्ली के सांसद व भोजपुरी गायक और अभिनेता मनोज तिवारी ने शनिवार को एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि उन्होंने पहले ही फेक आईडी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी, फिर भी यह आश्चर्यजनक रूप से सक्रिय है। मनोज तिवारी ने कहा कि उन्होंने यह शिकायत नई दिल्ली के मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई, क्योंकि उक्त फेसबुक आईडी से एक वीडियो पोस्ट किया गया था, जिसमें अब स्थगित यूजीसी नियमों की कड़ी आलोचना की गई थी और सांसद की फोटो भी थी। भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने अपने नाम का फेक फेसबुक अकाउंट चलाने वाले के खिलाफ मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि 22 जनवरी को शिकायत के बावजूद फेक आईडी सक्रिय है। अकाउंट से यूजीसी नियमों की आलोचना वाला वीडियो और उनकी फोटो पोस्ट की गई है। लोगों के खिलाफ दुरुपयोग हो सकतासांसद ने अपनी पोस्ट में कहा कि कुछ अज्ञात व्यक्ति साजिश के तहत मेरे नाम से एक फेक फेसबुक आईडी चला रहा है। मेरी असली फेसबुक आईडी पर ब्लू टिक है। मैंने 22 जनवरी को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी, फिर भी फेक आईडी सक्रिय है और इसे चला रहे व्यक्ति को पकड़ा नहीं गया, और पुलिस से उस व्यक्ति को गिरफ्तार करने की मांग की। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नियमों को स्थगित किया था, जो उच्च शिक्षा संस्थानों में SC, ST और OBC छात्रों के साथ भेदभाव से संबंधित थे, और उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए थे क्योंकि यह आशंका जताई गई थी कि इनका सामान्य श्रेणी के लोगों के खिलाफ दुरुपयोग हो सकता है।
फोन टैपिंग केस में नोटिस विवाद पर भड़के केटीआर, बोले– केसीआर के घर गेट पर नोटिस चिपकाना घमंड और दादागिरी

तेलंगाना की राजनीति इन दिनों कथित फोन टैपिंग के मामले को लेकर उबाल पर है। पूर्व मुख्यमंत्री और बीआरएस प्रमुख के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) को जांच एजेंसी एसआईटी की ओर से नोटिस जारी किया गया। इसके बाद अब देर रात को घर के गेट पर नोटिस चिपकाने को लेकर बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव भड़के हुए नजर आए हैं। उन्होंने एक्स पर चस्पा का एक वीडियो पोस्ट करते हुए रेवंत रेड्डी को जमकर घेरा। सार्वजनिक मंच पर जरूर सबकअपने पोस्ट में केटीआर काफी आक्रामक नजर। उन्होंने सीएम रेवंत रेड्डी से सवाल पूछते हुए कहा कि ‘तेलंगाना के निर्माता, विपक्ष के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री केसीआर के प्रति यह घटिया रवैया क्या है, रेवंत रेड्डी जी? जब केसीआर जी ने खुद आपकी पुलिस को अपने घर का पूरा पता बता दिया था, उसके बाद भी रात में ऐसे घर पर जाना जहां वह मौजूद नहीं थे, गेट पर नोटिस चिपकाना और उससे अजीब सी खुशी महसूस करना शर्मनाक है। अगर यह घमंड नहीं है, तो और क्या है? केटी रामा राव ने आगे कहा, ‘पुलिस तो उस नियम का भी उल्लंघन कर रही है कि 65 साल से अधिक उम्र के लोगों से उनके घर पर ही पूछताछ की जानी चाहिए। क्या आपकी पुलिस को मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) की कोई समझ है? या उनका एकमात्र काम आपके हाथों की कठपुतली बनकर विपक्षी नेताओं को परेशान करना है? हो सकता है आपको कानून, न्याय या सच्चाई के लिए कोई सम्मान न हो, लेकिन हमें उन पर पूरा भरोसा है। हम इन सभी गैर-कानूनी मामलों का पर्दाफाश करेंगे। हम आपकी हर गलत हरकत को तेलंगाना के लोगों के सामने लाएंगे। लोग देख रहे हैं कि आप कितनी दादागिरी कर रहे हैं। जब समय आएगा, तो वे आपको सार्वजनिक मंच पर जरूर सबक सिखाएंगे।’
अजित पवार के निधन के बाद डिप्टी सीएम पद पर सस्पेंस, सुनील तटकरे बोले—अंतिम फैसला सीएम फडणवीस लेंगे

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने शनिवार को एनसीपी (एससीपी) प्रमुख शरद पवार के उस बयान पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्हें एनसीपी सांसद और अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री पद के लिए नामित किए जाने की कोई जानकारी नहीं है। मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए सुनील तटकरे ने कहा कि अजित पवार के निधन के बाद खाली हुए उपमुख्यमंत्री पद पर अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस लेंगे। एनसीपी की बैठक शनिवार दोपहर होने वाली है। इस बैठक के बाद पार्टी डिप्टी सीएम पद के लिए अपना नाम मुख्यमंत्री को सौंपेगी। यह पद अजित पवार के निधन के बाद खाली हुआ है। राजनीतिक फैसलों की जल्दी को लेकर सवाल पूछा गयाइस बीच शरद पवार ने कहा कि उन्हें सुनेत्रा पवार के नाम को लेकर कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा, ‘यह फैसला उनकी पार्टी ने लिया होगा। मैंने आज अखबार में कुछ नाम देखे, जैसे प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे, जो फैसलों की पहल कर रहे हैं। इस पर मेरी कोई चर्चा नहीं हुई है।’ जब अजित पवार के निधन के तुरंत बाद राजनीतिक फैसलों की जल्दी को लेकर सवाल पूछा गया, तो शरद पवार ने इशारों में कहा कि ये फैसले मुंबई में महायुति सरकार के नेता कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे इस पर टिप्पणी नहीं करेंगे। सदस्य इस पद पर आसीन होताअजित पवार के निधन के बाद आज महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री के रूप में सुनेत्रा पवार के शपथ ग्रहण करने की खबरों पर समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय ने कहा, ‘यह एनसीपी का आंतरिक मामला है। यह उनके परिवार और पार्टी का मामला है; वे जो भी फैसला लें, वह उनकी मर्जी है। दुख की इस घड़ी में वे जो भी निर्णय लें, हम उनका समर्थन करते हैं।’ वहीं एनसीपी (एसपी) विधायक संदीप क्षीरसागर ने कहा, ‘मुझे पहले इसकी जानकारी नहीं थी; मुझे आज ही पता चला है। अगर पवार परिवार का कोई सदस्य इस पद पर आसीन होता है, तो हमें खुशी होगी।’
एपस्टीन फाइल्स का नया खुलासा: ट्रंप पर विदेशी दबाव और कुशनर के कथित रूसी कनेक्शन को लेकर गंभीर दावे

अमेरिका के न्याय विभाग ने बहुचर्चित एपस्टीन फाइल्स के एक और बैच को जारी कर दिया है। इस खेप में 30 लाख दस्तावेज के साथ 1.80 लाख फोटो और 2 हजार वीडियो शामिल है। शुक्रवार (31 जनवरी) को प्रकाशित किए गए दस्तावेजों में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर कई गंभीर और सनसनीखेज आरोप सामने आए हैं। जिसके बाद हड़कंप मचना तय माना जा रहा है।जेफरी एपस्टीन से जुड़ी फाइलों के नवीनतम बैच में सामने आए आरोपों पर एफबीआई की एक रिपोर्ट में ‘विश्वसनीय’ गोपनीय सूत्रों के हवाले से दावा किया गया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर इस्राइल का दबाव था यानी इस्राइल के साथ समझौता किया गया। इतनी ही नहीं ट्रंप अपने एक करीबी शख्स के इतने जाल में थे कि उनके पहले कार्यकाल के दौरान ट्रंप के कारोबार और राष्ट्रपति के कामकाज दोनों पर बहुत ज्यादा दखल था। अमेरिकी परियोजनाओं में लगाया गया थाजिस शख्स के बारे में बताया गया है, वो ट्रंप के दामाद जैरेड कुशनर हैं। इस विस्फोटक दस्तावेज में यह भी दावा किया गया है कि कुशनर के परिवार के भ्रष्टाचार, रूसी धन प्रवाह और कट्टर यहूदी चबाड नेटवर्क से संबंध थे। रिपोर्ट में कुशनर के पारिवारिक इतिहास के बारे में बताया, जिसमें कहा गया कि उनके पिता को पहले वित्तीय आरोपों में दोषी ठहराया गया था, लेकिन बाद में उन्हें ट्रंप से राष्ट्रपति क्षमादान मिला। रिपोर्ट में दावा किया गया कि कुशनर ने रूसी निवेश की बड़ी रकम को इधर-उधर स्थानांतरित किया और रूसी राज्य से जुड़े संस्थानों से संबंधित हितों का ठीक से खुलासा नहीं किया। इसी के साथ रियल एस्टेट निवेश प्लेटफॉर्म कैडर में कुशनर की हिस्सेदारी को चिंता का विषय बताया गया है और सूत्र ने सवाल उठाया है कि क्या रूसी धन को बिचौलियों के माध्यम से अमेरिकी परियोजनाओं में लगाया गया था।
भारतीय ओलंपिक संघ अध्यक्ष पीटी उषा के पति वी श्रीनिवासन का 67 वर्ष की आयु में निधन, खेल जगत में शोक की लहर

भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) की अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद पीटी उषा के पति वी श्रीनिवासन का शुक्रवार तड़के निधन हो गया। पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक, उनका देहांत केरल के कोझिकोड स्थित आवास पर हुआ। वे 67 वर्ष के थे। जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार सुबह श्रीनिवासन अपने घर पर अचानक बेहोश होकर गिर पड़े। उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके। घटना से परिवार और करीबी लोगों में शोक की लहर है।मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीटी उषा से फोन पर बात कर उनके पति के निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त की। प्रधानमंत्री ने इस कठिन समय में परिवार के प्रति अपनी सहानुभूति और समर्थन भी जताया। श्रीनिवासन हर चरण में उनके साथ मौजूद रहेवी श्रीनिवासन केंद्र सरकार के पूर्व कर्मचारी रह चुके थे। वे पीटी उषा के खेल और राजनीतिक जीवन में हमेशा उनके साथ खड़े रहे। उन्हें उषा के करियर में सबसे मजबूत सहारा और प्रेरणास्रोत माना जाता था। चाहे पीटी उषा का ऐतिहासिक खेल करियर हो या फिर आईओए अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद के रूप में उनकी भूमिका, श्रीनिवासन हर चरण में उनके साथ मौजूद रहे। खेल जगत में उन्हें एक शांत, सहयोगी और समर्पित जीवनसाथी के रूप में जाना जाता था। दिग्गज खिलाड़ियों और संगठनों ने पीटी उषा के प्रति संवेदना व्यक्त कीपीटी उषा और वी श्रीनिवासन के एक पुत्र उज्ज्वल हैं। परिवार ने इस कठिन समय में निजता बनाए रखने की अपील की है। श्रीनिवासन के निधन की खबर के बाद खेल और राजनीतिक जगत से शोक संदेशों का सिलसिला शुरू हो गया है। कई दिग्गज खिलाड़ियों और संगठनों ने पीटी उषा के प्रति संवेदना व्यक्त की है। भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद पीटी उषा के पति वी श्रीनिवासन का 67 वर्ष की आयु में कोझिकोड में निधन हो गया। वे शुक्रवार तड़के घर पर बेहोश होकर गिर पड़े थे और अस्पताल में उन्हें बचाया नहीं जा सका। श्रीनिवासन केंद्र सरकार के पूर्व कर्मचारी थे और पीटी उषा के करियर में हमेशा मजबूत सहारा बने रहे।
दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता का आरोप पंजाब सरकार ने सिख गुरुओं से जुड़े FIR की फाइल रोकी, मामले की गंभीरता पर जताई चिंता

दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने शुक्रवार को दावा किया कि आम आदमी पार्टी की अगुवाई वाली पंजाब सरकार ने सिख गुरुओं पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़े मामले में राज्य पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर से संबंधित फाइल को रोक रखा है। अध्यक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों पर आम आदमी पार्टी की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। विजेंद्र गुप्ता ने पत्रकारों से कहा कि विधानसभा सिख गुरुओं के सम्मान से कोई समझौता नहीं करेगी और सच्चाई सामने आनी चाहिए। उन्होंने इस महीने की शुरुआत में दिल्ली विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष आतिशी द्वारा सिख गुरुओं के कथित अपमान को लेकर पंजाब सरकार के रवैये पर गहरी चिंता जताई। विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि संबंधित फाइल को लगातार रोके रखना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। अब तक न तो एफआईआर की प्रति उपलब्ध कराई गई है, न ही शिकायत साझा की गई है और न ही कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की गई है। मामले को किसी भी हाल में हल्के में नहीं लेगीउन्होंने कहा कि यह स्थिति किसी साजिश की ओर इशारा करती है। इस मामले में चुप्पी और बार-बार हो रही देरी तथ्यों को छिपाने की जानबूझकर की गई कोशिश को दर्शाती है। इस केस के तार सीधे पंजाब के मुख्यमंत्री तक जाते प्रतीत होते हैं, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ जाती है। विधानसभा की विशेषाधिकार समिति छह जनवरी को हुई उस कथित घटना की जांच कर रही है, जो गुरु तेग बहादुर की 350वीं शहादत वर्षगांठ पर हुई चर्चा के दौरान सामने आई थी। आतिशी ने समिति को दिए अपने जवाब में आरोपों को खारिज करते हुए उस दिन की विधानसभा कार्यवाही का बिना संपादन वाला वीडियो रिकॉर्ड मांगा है। गुप्ता ने दोहराया कि दिल्ली विधानसभा इस मामले को किसी भी हाल में हल्के में नहीं लेगी। उन्होंने कहा, यह सिर्फ एक प्रशासनिक या राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह गुरुओं के सम्मान, गरिमा और आस्था से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। इतने संवेदनशील मामले में किसी भी तरह की लापरवाही या असंवेदनशीलता पूरी तरह अस्वीकार्य है।
योगी आदित्यनाथ ने यूपी में परियोजनाओं की वित्तीय स्वीकृति प्रक्रिया तेज, सरल और पारदर्शी बनाने के दिए निर्देश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में परियोजनाओं की वित्तीय स्वीकृति प्रक्रिया को तेज, सरल और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि विभागीय मंत्री स्तर से मिलने वाली स्वीकृति की सीमा, जो अभी 10 करोड़ रुपये तक है, उसे बढ़ाकर 50 करोड़ रुपये किया जाए। 50 से 150 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं की मंजूरी वित्त मंत्री स्तर से और 150 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली परियोजनाओं की स्वीकृति मुख्यमंत्री स्तर से दी जाए, जिससे परियोजनाओं को समय पर वित्तीय मंजूरी मिले और काम तेजी से आगे बढ़े। मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को निर्देश दिया कि वे अपनी वार्षिक कार्ययोजना 15 अप्रैल तक हर हाल में स्वीकृत करा लें। समयसीमा का पालन न करने वाले विभागों की सूची मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी परियोजना की लागत में 15% से ज्यादा बढ़ोतरी होने पर विभाग कारण सहित पुनः अनुमोदन प्राप्त करे। उत्तर प्रदेश में राज्य गारंटी पॉलिसी लागू की जाएमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को वित्त विभाग की विस्तृत समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने राज्य की राजकोषीय स्थिति, बजट प्रबंधन, पूंजीगत व्यय, निर्माण कार्यों की व्यवस्था, एकमुश्त प्रावधान, डिजिटल वित्तीय सुधार, कोषागार प्रक्रियाएं, पेंशन व्यवस्था और विभागीय नवाचारों पर विस्तृत चर्चा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश को सुदृढ़, पारदर्शी और रिजल्ट ओरिएंटेड वित्तीय प्रबंधन का आदर्श राज्य बनाना है। इसके लिए सभी विभाग समयबद्धता, गुणवत्ता, पारदर्शिता और डिजिटल प्रक्रियाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। उन्होंने निर्देश दिए कि केंद्र सरकार की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में राज्य गारंटी पॉलिसी लागू की जाए। राज्य फ्रंट रनर श्रेणी में पहले स्थान परमुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि यह सुनिश्चित किया जाए कि अल्प-वेतनभोगी कर्मियों, जैसे आशा बहनों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय हर माह तय तारीख को उनके बैंक खातों में पहुंच जाए। जिन योजनाओं में केंद्रांश मिलता है, वहां राज्य अपने मद से मानदेय समय पर जारी करे, ताकि किसी कर्मी को देरी न हो। यह व्यवस्था यथाशीघ्र लागू की जाए। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2023-24 में उत्तर प्रदेश का 1,10,555 करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय देश में सबसे अधिक रहा। राज्य ने जितना शुद्ध लोक ऋण लिया, उससे भी ज्यादा राशि पूंजीगत कार्यों पर खर्च की, जो वित्तीय अनुशासन का मजबूत संकेत है। कुल व्यय का 9.39% निवेश पर खर्च कर उत्तर प्रदेश देश में पहले स्थान पर रहा। राजकोषीय घाटा, राजस्व घाटा और ऋण/जीएसडीपी अनुपात जैसे सभी संकेतक एफआरबीएम मानकों के अनुरूप रहे। वर्ष 2024-25 में राज्य की कुल देयताएं घटकर जीएसडीपी के 27% पर आ गईं। नीति आयोग के अनुसार उत्तर प्रदेश का कंपोजिट फिस्कल हेल्थ इंडेक्स 2014 में 37 से बढ़कर 2023 में 45.9 हो गया है और राज्य फ्रंट रनर श्रेणी में पहले स्थान पर है।
कांग्रेस का आरोप: फार्म-7 का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग, मतदाता सूची से नाम हटाने की साजिश

कांग्रेस ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) वाले राज्यों में फार्म-7 का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि इसके जरिये तय रणनीति के तहत योग्य मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। कांग्रेस के अनुसार 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में एक जैसा पैटर्न सामने आना बेहद गंभीर चिंता का विषय है। ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को लिखे पत्र में दावे और आपत्तियों के मौजूदा चरण के दौरान फार्म-7 के गलत इस्तेमाल पर विस्तार से आपत्ति जताई है। संख्या में एक साथ आपत्तियां दर्ज की जा रहीपत्र में कहा गया है कि फार्म-7 का प्रयोग मौत या दोहराव जैसे ठोस तथ्यों पर आधारित आपत्तियों के लिए किया जाना चाहिए, लेकिन इसका इस्तेमाल लक्षित तरीके से बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाने के लिए किया जा रहा है। कांग्रेस के मुताबिक राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम और केरल समेत कई राज्यों में एक जैसी गतिविधियां सामने आई हैं। आरोप है कि पहले से छपे फार्म-7 भरे जा रहे हैं और चुनिंदा मतदाता समूहों के खिलाफ बड़ी संख्या में एक साथ आपत्तियां दर्ज की जा रही हैं। इसके बाद एक सुनियोजित कार्ययोजना के तहत अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में ये फॉर्म जमा कराए जा रहे हैं। मतदाता सूची से हटाने के लिए बड़े पैमाने पर किया जा रहापार्टी ने चेतावनी दी है कि अगर इस पर तुरंत रोक नहीं लगाई गई तो इससे न केवल सत्ताधारी भाजपा को चुनावी लाभ मिलेगा, बल्कि बड़ी संख्या में नागरिकों का मताधिकार भी छिन सकता है। कांग्रेस का कहना है कि यह प्रक्रिया खासकर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यक और वरिष्ठ नागरिकों जैसे कमजोर वर्गों को प्रभावित कर सकती है। कांग्रेस ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर फार्म-7 के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि कुछ राज्यों में इसका इस्तेमाल योग्य मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए बड़े पैमाने पर किया जा रहा है।
अजित पवार के अंतिम संस्कार के बाद खुलासा, एनसीपी के दोनों गुटों के विलय के इच्छुक

महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार का 28 जनवरी को एक विमान दुर्घटना में निधन हो गया। गुरुवार को बारामती के विद्या प्रतिष्ठान मैदान में एनसीपी प्रमुख का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। अजित पवार के निधन के बाद से ही उनके राजनीतिक विरासत को लेकर अलग-अलग तरह से कयास लगाए जा रहे हैं। इस बीच अब उनके एक करीबी ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया था कि वो जल्द एनसीपी के दोनों गुटों का विलय करने जा रहे थे। बारामती में न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए विद्या प्रतिष्ठान के सदस्य और पवार परिवार के करीबी किरण गुजर ने कहा, “आज यहां अजित पवार की अस्थियों का विसर्जन किया गया। ‘दादा’ की आखिरी इच्छा थी कि एनसीपी के दोनों गुटों का विलय हो। सभी को एकजुट होना चाहिए। इस बारे में पूरे परिवार में बात हो रही थी। उनसे मेरी आखिरी फोन कॉल में उन्होंने मुझसे चुनाव से जुड़े कुछ कागजात मांगे थे।’ दुर्घटना से सिर्फ पांच दिन पहले ही उन्हें इस बारे में बतायादिवंगत अजित पवार के करीबी किरण गुजर ने दावा किया कि वो राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के दोनों गुटों के विलय के लिए उत्सुक थे, और यह जल्द ही होने वाला था। दिग्गज नेता के निधन के दो दिन बाद उनके किरण गुजर ने बताया कि उनसे यह बात खुद अजित पवार ने साझा की थी। 1980 के दशक के मध्य में राजनीति में आने से पहले से ही किरण गुजर अजित पवार से जुड़े हुए थे। वो दिवंगत नेता के करीबी सहयोगी और विश्वसनीय सहयोगी थे। अब किरण गुजर ने गुरुवार (29 जनवरी) को बातचीत में कहा कि अजित पवार ने बुधवार (28 जनवरी) को विमान दुर्घटना से सिर्फ पांच दिन पहले ही उन्हें इस बारे में बताया था। एनसीपी के भविष्य के लिए एक रोडमैप तैयारगुजर ने आगे कहा कि वह दोनों गुटों को मिलाने के लिए सौ प्रतिशत उत्सुक थे। उन्होंने मुझे पांच दिन पहले बताया था कि पूरी प्रक्रिया पूरी हो गई है और अगले कुछ दिनों में विलय होने वाला है। बता दें कि हाल के नगर निगम चुनावों के दौरान जिसमें दोनों गुटों ने गठबंधन में चुनाव लड़ा था। अजित पवार ने कुछ चुनिंदा पत्रकारों से यह भी कहा था कि वह अपनी पार्टी का NCP (SP) में विलय करना चाहते हैं। पुणे और पिंपरी चिंचवड़ में 15 जनवरी को हुए नगर निगम चुनावों में एक साथ चुनाव लड़ने के बाद दोनों गुटों ने अगले महीने होने वाले जिला परिषद चुनावों के लिए भी गठबंधन जारी रखने का फैसला किया था। इतना ही नहीं गुजर ने दाने के साथ कहा कि अजित पवार के पास विलय और एकजुट एनसीपी के भविष्य के लिए एक रोडमैप तैयार था।