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भगवंत सिंह मान की पहल से किसानों को बड़ी राहत अनाज उठान, मुआवजा और फंड पर अहम फैसले

नई दिल्ली/पंजाब, 10 अप्रैल 2026 पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने किसानों और मंडियों से जुड़े गंभीर मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में कई ऐसे फैसले सामने आए, जो सीधे तौर पर किसानों को राहत देने वाले हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के हितों की रक्षा करना उनकी सरकार की प्राथमिकता है और इसके लिए हर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। अनाज उठान के लिए विशेष रेल गाड़ियों का फैसलापंजाब में इस समय गेहूं और चावल का बहुत बड़ा स्टॉक गोदामों में भरा हुआ है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने बताया कि करीब 155 लाख मीट्रिक टन अनाज गोदामों में पड़ा है, जिससे भंडारण की समस्या पैदा हो गई है। उन्होंने कहा कि गोदाम लगभग पूरी तरह भर चुके हैं और नए अनाज के लिए जगह बहुत कम बची है। ऐसे में केंद्र सरकार ने विशेष रेल गाड़ियां चलाने का फैसला लिया है, जिससे इस अनाज को जल्दी से अन्य स्थानों तक पहुंचाया जा सके। यह कदम किसानों के लिए बेहद राहत भरा साबित होगा, क्योंकि अब उनकी नई फसल को रखने के लिए पर्याप्त जगह मिल पाएगी और उन्हें अपनी उपज बेचने में दिक्कत नहीं होगी। भंडारण संकट और किसानों की चिंतामुख्यमंत्री ने बताया कि पंजाब की कुल भंडारण क्षमता लगभग 183 लाख मीट्रिक टन है, जबकि लगभग पूरा गोदाम पहले से भरा हुआ है। इस स्थिति में अगर समय पर अनाज नहीं उठाया जाता, तो किसानों को अपनी फसल खुले में रखने के लिए मजबूर होना पड़ता। इससे अनाज खराब होने का खतरा बढ़ जाता है और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि इस समस्या को समझते हुए ही केंद्र से तुरंत मदद मांगी गई थी, जिस पर अब सकारात्मक फैसला लिया गया है। रबी सीजन में बड़ी खरीद और उसकी तैयारीमुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने बताया कि 1 अप्रैल से रबी मार्केटिंग सीजन शुरू हो चुका है। इस दौरान लगभग 130 से 132 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद होने की संभावना है। इतनी बड़ी मात्रा में खरीद के लिए पर्याप्त भंडारण जरूरी होता है। अगर पहले से पड़े अनाज को नहीं हटाया जाता, तो नई फसल को रखने में भारी दिक्कत आती। अब विशेष ट्रेनों के जरिए अनाज उठान होने से यह समस्या काफी हद तक हल हो जाएगी और खरीद प्रक्रिया सुचारूरूप से चल सकेगी। केंद्र सरकार के साथ अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चाइस बैठक में मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी के साथ कई अन्य जरूरी मुद्दों पर भी चर्चा की। उन्होंने पंजाब के बकाया 9,000 करोड़ रुपये के ग्रामीण विकास फंड को जारी करने की मांग रखी। यह फंड गांवों और मंडियों के विकास के लिए बहुत जरूरी है। इसके अलावा किसानों को मिलने वाले कर्ज पर ब्याज दर को कम करने की भी मांग की गई, क्योंकि अभी पंजाब को ज्यादा ब्याज देना पड़ रहा है, जिससे राज्य को हर साल भारी नुकसान होता है। ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों के लिए मुआवजे की मांगमुख्यमंत्री ने हाल ही में हुई ओलावृष्टि का मुद्दा भी गंभीरता से उठाया। उन्होंने कहा कि कई इलाकों में गेहूं की फसल को भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि एक टीम भेजकर नुकसान का सही आकलन किया जाए और प्रभावित किसानों को जल्द से जल्द मुआवजा दिया जाए। उनका कहना है कि किसानों को समय पर सहायता मिलना बहुत जरूरी है, ताकि वे अपनी आर्थिक स्थिति संभाल सकें। आढ़तियों के कमीशन और मजदूरों के मुद्देमुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आढ़तियों के कमीशन का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि आढ़ती लंबे समय से कमीशन बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। हालांकि केंद्र ने कुछ बढ़ोतरी की है, लेकिन आढ़ती इससे संतुष्ट नहीं हैं और ज्यादा वृद्धि की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही मंडी मजदूरों के ईपीएफ से जुड़े मुद्दों को भी उठाया गया और जल्द समाधान की मांग की गई। किसानों के हित में सरकार की प्रतिबद्धतामुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब देश की खाद्य सुरक्षा में अहम भूमिका निभाता है और यहां के किसान दिन-रात मेहनत करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और केंद्र के साथ मिलकर हर समस्या का समाधान निकालने की कोशिश कर रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में इन फैसलों का सकारात्मक असर दिखाई देगा और किसानों की स्थिति बेहतर होगी। कुल मिलाकर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की यह बैठक किसानों के लिए उम्मीद लेकर आई है। अनाज उठान के लिए विशेष रेल गाड़ियां, मुआवजे की मांग, फंड जारी करने की पहल और अन्य मुद्दों पर चर्चा — ये सभी कदम किसानों को राहत देने और व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं। अगर इन फैसलों को सही तरीके से लागू किया गया, तो पंजाब के किसान आने वाले समय में ज्यादा सुरक्षित और मजबूत स्थिति में नजर आएंगे।

पश्चिम बंगाल में पीएम मोदी का बड़ा हमला, TMC पर ‘गुंडाराज’ और घुसपैठ का आरोप

पश्चिम बंगाल में प्रधानमंत्री आज लगातार तीन रैली कर रहे हैं। हले पीएम मोदी ने हल्दिया की रैली संबोधित किया था। वहां उन्होंने जनता को विकास की गारंटी दी, जबकि आसनसोल में टीएमसी के ‘पापों’ का हिसाब लेने की चेतावनी दी। वहीं, बीरभूम की रैली में भी उन्होंने टीएमसी पर बड़ा हमला बोला। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने कहा कि बीरभूम की ऐतिहासिक धरती ने संथाल क्रांति को ऊर्जा दी थी।आज उसी बीरभूम में परिवर्तन की आंधी नजर आ रही है। मेरे सामने ये विशाल जनसागर परिवर्तन की घोषणा कर रहा है। साथियों, रबींद्र नाथ टेगोर ऐसा समाज देखना चाहते थे। हर कोई भयमुक्त हो, लेकिन टीएमसी के गुंडाराज ने एकदम उल्टा कर दिया। ये हमेशा मां, माटी और मानुष की बात करते थें। लेकिन टीएमसी के राज में मां रो रही है। माटी पर घुसपैठियों का कब्जा हो रहा है और मानुष भयभीत है। डरा हुआ है। सहमा हुआ है। पीएम ने कहा कि यह स्थिति बदलने के लिए अब निर्णायक कदम उठाने की जरूरत है। गाल के लोगों को इस डर से मुक्ति दिलाना जरूरीपीएम मोदी ने कहा कि बंगाल की जमीन पर घुसपैठियों का कब्जा खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी का सिंडिकेट घुसपैठियों को फर्जी सरकारी दस्तावेज दिलाने में मदद कर रहा है। उनके मुताबिक यह सिर्फ राज्य नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर बंगाल में भाजपा की सरकार बनती है, तो घुसपैठ के खिलाफ विशेष जांच कराई जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि घुसपैठियों के हर मददगार की पहचान की जाएगी, चाहे वह कितना ही ताकतवर क्यों न हो। उन्होंने भरोसा दिलाया कि दोषियों को जेल भेजा जाएगा और घुसपैठियों को बाहर किया जाएगा। पीएम ने रामपुरहाट और मालदा की घटनाओं का जिक्र करते हुए राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हालात ऐसे हो गए हैं कि न्यायिक प्रक्रिया में लगे लोगों तक को डराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बंगाल के लोगों को इस डर से मुक्ति दिलाना जरूरी है। इसके साथ ही उन्होंने आरजी कर दुष्कर्म मामले को भी उठाया। बता दें, भाजपा ने आरजी कर मामले की पीड़िता की मां को उम्मीदवार बनाया है। उन्हें पानीहाटी विधानसभा से टिकट दिया गया है।

महिला आरक्षण और परिसीमन पर गहराई से सोच जरूरी – मल्लिकार्जुन खरगे का बयान

नई दिल्ली, 10 अप्रैल कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार के फैसलों पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने महिला आरक्षण बिल और परिसीमन जैसे बड़े मुद्दों पर चिंता जताई और कहा कि इन पर जल्दबाजी नहीं, बल्कि सोच-समझकर निर्णय लेना चाहिए। परिसीमन पर खरगे की साफ चेतावनीबैठक में खरगे ने कहा कि सरकार लोकसभा और विधानसभा सीटों को बढ़ाने की योजना बना रही है। लोकसभा की सीटों को 543 से बढ़ाकर 816 तक करने की बात सामने आ रही है। खरगे के अनुसार यह कोई छोटा फैसला नहीं है, बल्कि इसका असर पूरे देश की राजनीति पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अगर सीटों का बंटवारा बदला जाता है, तो कई राज्यों की ताकत कम या ज्यादा हो सकती है। इससे संतुलन बिगड़ सकता है। उन्होंने साफ कहा कि ऐसे फैसले जल्दबाजी में नहीं लेने चाहिए। इस पर सभी राजनीतिक दलों के साथ बैठकर, शांति से और गहराई से चर्चा होनी चाहिए ताकि कोई भी राज्य या समाज खुद को नुकसान में महसूस न करे। महिला आरक्षण पर कांग्रेस का रुखखरगे ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा से महिलाओं को अधिकार देने के पक्ष में रही है। उन्होंने बताया कि कांग्रेस ने पहले ही पंचायत और नगर निकायों में महिलाओं को आरक्षण दिलाया था। यह पहल पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के समय शुरू हुई थी। आज देश में लाखों महिलाएं राजनीति में सक्रिय हैं, जो उसी फैसले का परिणाम है। खरगे ने कहा कि कांग्रेस चाहती है कि महिला आरक्षण तुरंत लागू हो, लेकिन सरकार इसे 2029 तक टालना चाहती है। उन्होंने इसे महिलाओं के साथ अन्याय बताया। विशेष संसद सत्र पर सवालखरगे ने 16 से 18 अप्रैल के बीच बुलाए गए संसद के विशेष सत्र पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस समय कई राज्यों में चुनाव हो रहे हैं, खासकर पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में। ऐसे में कई सांसद अपने क्षेत्रों में व्यस्त हैं। इस समय संसद सत्र बुलाना सही नहीं है। खरगे का मानना है कि सरकार जानबूझकर ऐसा कर रही है ताकि विपक्ष पूरी ताकत से भाग न ले सके। उन्होंने इसे चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन भी बताया। सरकार पर राजनीतिक फायदा लेने का आरोपखरगे ने कहा कि सरकार महिला आरक्षण बिल को पास कराकर आगामी चुनावों में फायदा लेना चाहती है। उनका कहना है कि सरकार पहले इस मुद्दे पर चुप थी, लेकिन अब चुनाव नजदीक आते ही अचानक सक्रिय हो गई है। इससे साफ होता है कि सरकार का उद्देश्य महिलाओं को अधिकार देना नहीं, बल्कि चुनाव जीतना है। कांग्रेस में महिलाओं की मजबूत भूमिकाखरगे ने अपने भाषण में कांग्रेस में महिलाओं की भूमिका को भी बताया।उन्होंने कहा कि कांग्रेस में शुरू से ही महिलाओं को नेतृत्व का मौका मिला है। सरोजिनी नायडू देश की पहली महिला कांग्रेस अध्यक्ष बनी थीं। इसके बाद सोनिया गांधी ने भी लंबे समय तक पार्टी का नेतृत्व किया। इससे साफ है कि कांग्रेस हमेशा महिलाओं को आगे बढ़ाने में विश्वास रखती है। लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोपखरगे ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह लोकतंत्र को कमजोर कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार विपक्ष की बात नहीं सुनती और अपने फैसले थोपती है। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग भी स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर रहा और सरकार के दबाव में है। आगे क्या करेगी कांग्रेसबैठक के अंत में खरगे ने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर अकेले नहीं रहेगी। पार्टी अन्य विपक्षी दलों के साथ मिलकर इस पर चर्चा करेगी और एक साझा रणनीति बनाएगी। उनका लक्ष्य है कि देश के बड़े फैसले सभी की सहमति से लिए जाएं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने बयान में साफ कर दिया कि महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे मुद्दे बहुत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि इन पर राजनीति नहीं होनी चाहिए, बल्कि देशहित में सोचकर फैसला होना चाहिए। खरगे का मानना है कि अगर सभी दल मिलकर चर्चा करेंगे, तभी सही और संतुलित निर्णय लिया जा सकेगा, जिससे देश का लोकतंत्र मजबूत बना रहेगा।

नरेंद्र मोदी कैबिनेट का बड़ा फैसला, ₹1.74 लाख करोड़ की 5 मेगा परियोजनाओं को मंजूरी

देश के विकास को नई रफ्तार देने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कुल 1,74,207 करोड़ रुपये के पांच बड़ी परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इन फैसलों में जयपुर मेट्रो फेज-2, किसानों के लिए खाद सब्सिडी, एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी और अरुणाचल प्रदेश के दो बड़े हाइड्रो की परियोजनाएं भी शामिल हैं। सरकार ने जयपुर मेट्रो फेज-2 को 13,038 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी दी है। यह 41 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर होगा जिसमें 36 स्टेशन बनेंगे और यह प्रहलादपुरा से टोडी मोड तक जाएगा। वहीं, खरीफ 2026 के लिए 41,534 करोड़ रुपये की खाद सब्सिडी भी मंजूर की गई है। इससे किसानों को डीएपी और अन्य उर्वरक सस्ती कीमत पर मिलेंगे और खेती की लागत कम होगी। आइए, सरकार द्वारा सभी लिए गए फैसलों पर नजर डालते हैं। और आसान भाषा में समझने की कोशिश करते हैं। ‘ किसानों को सस्ती कीमत पर खाद उपलब्ध करानाजयपुर मेट्रो फेज-2 शहर के ट्रांसपोर्ट सिस्टम को पूरी तरह बदलने वाली परियोजना मानी जा रही है। यह 41 किलोमीटर लंबा नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर होगा, जो प्रहलादपुरा से टोडी मोड तक जाएगा। इस रूट में 36 स्टेशन होंगे और यह शहर के बड़े इलाकों जैसे एयरपोर्ट, सीतापुरा इंडस्ट्रियल एरिया, टोंक रोड और एसएमएस अस्पताल को जोड़ेगा। इससे लोगों को तेज, सस्ता और आसान सफर मिलेगा। इस परियोजना का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि शहर में ट्रैफिक जाम कम होगा और प्रदूषण भी घटेगा। अभी मेट्रो के पहले चरण में रोज करीब 60 हजार लोग सफर करते हैं, लेकिन फेज-2 आने के बाद यह संख्या कई गुना बढ़ने की उम्मीद है। यह परियोजना 2031 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है और इससे जयपुर को आधुनिक शहर बनाने में मदद मिलेगी। सरकार ने खरीफ 2026 सीजन के लिए 41,534 करोड़ रुपये की न्यूट्रिएंट बेस्ड सब्सिडी को मंजूरी दी है। यह सब्सिडी फॉस्फेटिक और पोटाश उर्वरकों पर दी जाएगी, जिसमें डीएपी और एनपीके जैसे खाद शामिल हैं। इसका मकसद किसानों को सस्ती कीमत पर खाद उपलब्ध कराना है, ताकि खेती की लागत कम हो सके।

रेखा गुप्ता का सख्त निर्देश, तय समय में पूरे हों विकास कार्य, CM प्रगति पोर्टल से होगी निगरानी

बजट के पैसों का सही इस्तेमाल हो, इसके लिए सोमवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सभी विभागों को एक मेज पर इकट्ठा किया। सचिवालय में हुई सभी विभागों की बैठक में सीएम ने साफ निर्देश दिए कि बजट में तय विकास कार्य निश्चित समय सीमा के भीतर पूरे किए जाएं। सभी विभाग अपने काम की अपडेट सीएम प्रगति पोर्टल पर नियमित रूप से करेंगे। इसके लिए विभाग प्रमुखों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। सचिवालय में प्रशासनिक सचिवों और विभागाध्यक्षों के साथ सीएम ने समीक्षा बैठक की। इसमें बजट 2026-27 में घोषित योजनाओं, इनकी प्रगति और समय-सीमाओं पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को विकसित दिल्ली का लक्ष्य याद दिलाया। उन्होंने कहा, दिल्ली का रूप-रंग निखरे और उस पर गर्व किया जा सके, इसके लिए सभी विभाग अपनी परियोजनाओं को समय पर पूरा करें। उन्होंने ये भी साफ किया कि इसकी सतत और गहन निगरानी सीएम प्रगति पोर्टल से वे खुद करेंगी। इस पोर्टल पर हरएक विभाग को अपने प्रोजेक्ट्स की प्रगति, तय समय-सीमा और आगामी चरणों का नियमित अपडेट करना होगा, ताकि काम की वास्तविक स्थिति पता चलती रहे। उन्होंने अधिकारियों का मनोबल भी बढ़या। मौके पर मुख्य सचिव राजीव वर्मा भी उपस्थित रहे। हरएक विभाग की कार्यकुशलता को दिखातामुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे 15 दिन, 20 दिन और एक माह के लक्ष्यों के साथ पोर्टल पर अपडेट करेंगे। टेंडरिंग, काम शुरू करने और पूरा करने की पूरी प्रक्रिया पूर्व निर्धारित योजना से चलेगी। यदि किसी परियोजना में बाधा आती है, तो इसे तुरंत अपने से ऊपर अधिकारी को बताकर समाधान निकालना है। इसी से विभागों की कार्यक्षमता और प्रदर्शन का आकलन होगा। मुख्यमंत्री ने कहा, सरकार सभी बड़ी परियोजनाएं 2029 से पहले पूरा करना चाहती है। मुख्यमंत्री ने विभागों से केंद्र सरकार से मिलने वाले फंड और योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने के लिए कहा है। ये फंड राज्यों को उनकी कार्यकुशलता के लिए मिलता है। केंद्र सरकार से मिलने वाला एसएएससीआई व अन्य फंड हरएक विभाग की कार्यकुशलता को दिखाता है।

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे खुला अब 2 घंटे में पहाड़, PM नरेंद्र मोदी करेंगे उद्घाटन

वीकेंड प्लान बनाने के लिए लंबी छुट्टी का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। ब्रेकफास्ट दिल्ली में, लंच पहाड़ों में, यह लाइन 14 अप्रैल से हकीकत बनने जा रही है। बहुप्रतीक्षित दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस हाईस्पीड कॉरिडोर का उद्घाटन करेंगे। करीब 213 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने से दिल्ली से देहरादून का सफर जो 6 घंटे या उससे अधिक समय लेता है, अब महज 2 से 2.5 घंटे में पूरा किया जा सकेगा। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे पर जाने और निकलने की व्यवस्था शास्त्री पार्क के पास होगी। यहां पर कश्मीरी गेट से देहरादून जाने वाले वाहन शास्त्री पार्क के पास एक्सप्रेसवे पर जा सकेंगे। यूपी की तरफ से एक्सप्रेस-वे से आने वाले वाहन शास्त्री पार्क के पास निकल भी सकेंगे। अधिकारियों ने बताया कि एक्सप्रेस वे के दिल्ली के हिस्से में एट्री और एग्जिट पॉइंट इस हिसाब से बनाया गया है कि दक्षिणी मध्य, उत्तरी और पूर्वी दिल्ली के वाहनों चालकों की आवाजाही आसान हो सके। दिल्ली मेरठ एक्सप्रेस वे, विकास मार्ग, गीता कॉलोनी यमुना पुल, शास्त्री पार्क, सिग्नेचर ब्रिज इन सभी मार्गों से आने वाले वाहन चालकों को एक्सप्रेस वे पर चढ़ने के लिए एंट्री पॉइंट बनाए गए हैं। हेल्पलाइन जैसी सुविधाएं भी मुहैया कराई गईएक्सप्रेसवे पर वाहन 100 किमी प्रतिघंटा की गति से फर्राटा भर सकेंगे, जिससे यात्रा न केवल तेज बल्कि कहीं अधिक सुगम भी होगी। दिल्ली में यह एक्सप्रेसवे अक्षरधाम से शुरू होता है और उत्तर प्रदेश के बागपत, शामली और सहारनपुर होते हुए उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में प्रवेश करता है। यह मार्ग हरिद्वार, ऋषिकेश और मसूरी जाने वाले यात्रियों के लिए भी बड़ी राहत लेकर आएगा। खासकर वीकेंड टूरिज्म के लिहाज से यह एक्सप्रेसवे गेमचेंजर साबित होने वाला है। इस परियोजना का निर्माण भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई ) ने कराया है। वर्ष 2020 के आसपास निर्माण शुरू हुआ था। करीब 12000 करोड़ की लागत से तैयार एक्सप्रेसवे आधुनिक इंजीनियरिंग का उदाहरण। 6 लेन का हाई-स्पीड कॉरिडोर, अत्याधुनिक इंटरचेंज, सर्विस रोड, इमरजेंसी लेन और स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम शामिल हैं। सुरक्षा के लिहाज से सीसीटीवी, एम्बुलेंस और हेल्पलाइन जैसी सुविधाएं भी मुहैया कराई गई हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संदेश, पत्रकारिता का मूल भाव राष्ट्र और समाज सेवा होना चाहिए

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पत्रकारिता के विभिन्न माध्यमों में समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि एक ही तथ्य को अलग-अलग माध्यमों से प्रस्तुत करने पर जनमानस में भ्रम फैलता है। यह स्थिति मीडिया के प्रति जनविश्वास को प्रभावित करती है। इसलिए सभी अंगों को समान मानक, मूल्यों और आदर्शों के अनुरूप आगे बढ़ना चाहिए। मुख्यमंत्री योगी ने पत्रकारिता को कभी बेलगाम न होने देने का आह्वान किया। उन्होंने मूल्यों और आदर्शों के साथ आगे बढ़ने पर जोर दिया। भारत में पत्रकारिता का मूलभाव राष्ट्र सेवा, समाज सेवा और ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ रहा है। मुख्यमंत्री ने समाज को गुमराह करने वाली पत्रकारिता से बचने की सलाह दी। इन बाधाओं से विचलित नहीं होनासामाजिक और मुद्रित माध्यम में खबर की भिन्नता जनमानस को विचलित करती है। सरकार मूल्यों पर आधारित पत्रकारिता के साथ सदैव खड़ी है। लोकतंत्र संवाद से चलता है, जिसमें आलोचना को व्यक्तिगत रंजिश नहीं मानना चाहिए। पत्रकारिता समाज का आईना है और जनविश्वास का प्रतीक है। सही-गलत के प्रति एक भाव में रहना आवश्यक है। महात्मा गांधी, बाल गंगाधर तिलक जैसे नेताओं ने भी पत्रकारिता को देश सेवा का माध्यम बनाया। तिलक ने 1916 में लखनऊ से ‘स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है’ का नारा प्रसारित किया था। पत्रकारिता ने कठिन मार्गों का अनुसरण करते हुए सदैव अपने लक्ष्यों को प्राप्त किया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि विपरीत परिस्थितियों में भी पत्रकारिता ने भारतीय लोकतंत्र को मजबूती दी है। 200 वर्ष पहले 30 मई 1826 को कोलकाता से हिंदी पत्रकारिता की शुरुआत हुई थी। जुगुल किशोर शुक्ल ने हिंदी के पहले समाचार पत्र उदंत मार्तण्ड का शुभारंभ किया था। उन्होंने देश की आजादी के स्वर को तेज करने के लिए पत्रकारिता को माध्यम बनाया। यह शानदार यात्रा 200 वर्ष से बिना रुके आगे बढ़ रही है। भारतीय पत्रकारिता का आधार उपनिषदों की ‘सत्यमेव जयते’ सूक्ति से प्रेरित है। विघटनकारी शक्तियों की चुनौती हमेशा रही है, पर हमें इन बाधाओं से विचलित नहीं होना है।

पश्चिम एशिया में तनाव जारी ईरान ने अमेरिका और इजरायल की धमकियों को ठुकराया, पाकिस्तान के युद्धविराम प्रस्ताव पर विचार

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक तरफ अमेरिका की ओर से सैन्य कार्रवाई की चेतावनियां मिल रही हैं, तो दूसरी ओर ईरान खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी संपत्तियों को निशाना बना रहा है। इस बीच, ईरान ने सोमवार को कहा कि उसने मध्यस्थों की ओर पेश किए गए प्रस्तावों अपना जवाब तैयार कर लिया है। हालांकि, उसने यह भी कहा कि जब तक अमेरिका व इस्राइल हमले तेज करते रहेंगे, वह सीधी वार्ता में शामिल नहीं होगा। ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा, अमेरिका का 15 सूत्रीय प्रस्ताव अत्यधिक मांगों वाला है। हमने अपनी मांगों का एक अलग सेट तैयार कर लिया है और उसे औपचारिक रूप दे दिया है। इस संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है कि इस्फहान में पायलट बचाव अभियान केवल एक छल-कपट था, जिसका मकसद ईरान के संवर्धित यूरेनियम को जब्त करना था। यह युद्धविराम विरोधी पक्ष को फिर से संगठित होने और अपनी कार्रवाई जारी रखने का मौका दे सकता है। मंत्रालय ने कहा, ओमान के साथ बातचीत का फोकस होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिये जहाजों के सुरक्षित मार्ग के लिए एक प्रोटोकॉल बनाने पर है। पाकिस्तान की ओर से तत्काल युद्धविराम का प्रस्ताव मिलातेहरान में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा कि जरूरत पड़ने पर तेहरान ‘अपनी पूरी ताक़त’ से अपने देश की रक्षा करेगा। उन्होंने अमेरिका और इस्राइल पर आरोप लगाया कि उनकी ‘कोई रेड लाइन नहीं है’ और वे अंतरराष्ट्रीय कानूनों की अनदेखी करते हैं। बगाई ने मध्यस्थों के जरिए भेजे गए अमेरिका के कथित 15-सूत्रीय सीजफायर प्रस्ताव को तर्कहीन करार दिया। उन्होंने कहा धमकियों के साथ बातचीत नहीं हो सकती है। साथ ही किसी भी समझौते को स्वीकार तभी किया जाएगा जब वे ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में होंगे. ईरान ने कहा है कि वह अस्थायी युद्ध के बदले होर्मुज स्ट्रेट खोलने को मना कर दिया है। रॉयटर्स के मुताबिक एक सीनियर ईरानी अधिकारी ने कहा कि पाकिस्तान के प्रस्ताव की समीक्षा चल रही है, लेकिन दबाव में फैसला नहीं लिया जाएगा।अधिकारी के मुताबिक, तेहरान अस्थायी युद्धविराम के बदले कोई रियायत नहीं देगा और होर्मुज स्ट्रेट नहीं खोलेगा। उन्होंने कहा कि ईरान को लगता है कि अमेरिका स्थायी युद्धविराम के लिए तैयार नहीं है, इसलिए अस्थायी डील का कोई मतलब नहीं है। अधिकारी ने पुष्टि की कि पाकिस्तान की ओर से तत्काल युद्धविराम का प्रस्ताव मिला है, जिस पर विचार किया जा रहा है।

असम में सियासी भूचाल, CM हिमंता पर विदेशी संपत्ति और पासपोर्ट का आरोप!

असम की राजनीति में एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और उनके परिवार पर विदेशी संपत्ति और कई पासपोर्ट रखने के गंभीर आरोप लगाए हैं। दूसरी तरफ, मुख्यमंत्री ने इन आरोपों को पूरी तरह गलत बताते हुए कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है। मामले में कांग्रेस के मीडिया और पब्लिसिटी विभाग के चेयरमैन पवन खेड़ा ने एक मीडिया वार्ता में कई दस्तावेज पेश किए। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा के पास तीन अलग-अलग देशों के पासपोर्ट हैं। खेड़ा ने इन पासपोर्ट की जानकारी भी साझा की। खेड़ा के मुताबिक इनमें यूएई, एंटीगुआ-बारबुडा और मिस्र (इजिप्ट) के पासपोर्ट शामिल हैं। खेड़ा ने सवाल उठाया कि एक मुख्यमंत्री की पत्नी को तीन पासपोर्ट की क्या जरूरत है? कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि दुबई में रिंकी भुइयां सरमा की दो संपत्तियां हैं। खेड़ा ने कहा कि चुनाव के समय दिए जाने वाले हलफनामे (एफिडेविट) में इन संपत्तियों की जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने पूछा कि मुख्यमंत्री ने अपनी पत्नी की इन संपत्तियों को जनता से क्यों छिपाया? कांग्रेस असम में अपनी हार तय देखकर इस तरह के हमले कर रहीइसके अलावा उन्होंने अमेरिका के व्योमिंग में एक कंपनी का जिक्र किया गया। उन्होंने कहा इस कंपनी के सदस्यों में मुख्यमंत्री, उनकी पत्नी और उनके बेटे का नाम शामिल है। खेड़ा के अनुसार, इस कंपनी का बजट अरबों डॉलर है और इसका उद्देश्य अमेरिका में होटल खोलना है। उन्होंने दावा किया कि कंपनी का जो पैसा परिवार के तीन लोगों में बंटना है, वह करीब 52,000 करोड़ रुपये है। उन्होंने आरोप लगाया कि टैक्स बचाने और संपत्ति छिपाने के लिए व्योमिंग में शेल कंपनियां बनाई गईं। कांग्रेस ने गृह मंत्री अमित शाह से एसआईटी जांच और चुनाव आयोग से मुख्यमंत्री का नामांकन रद्द करने की मांग की है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि पवन खेड़ा की मीडिया वार्ता कांग्रेस की गहरी हताशा और घबराहट को दिखाती है। मुख्यमंत्री ने इन आरोपों को दुर्भावनापूर्ण, मनगढ़ंत और राजनीति से प्रेरित झूठ बताया। उनका कहना है कि कांग्रेस असम की जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रही है। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि वह और उनकी पत्नी अगले 48 घंटों के भीतर पवन खेड़ा के खिलाफ आपराधिक और नागरिक मानहानि के मामले दर्ज करेंगे। उन्होंने कहा कि खेड़ा को अपने गैर-जिम्मेदाराना बयानों के लिए पूरी तरह जवाबदेह होना पड़ेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। जब अदालत में सच साबित हो जाएगा, तो पवन खेड़ा को अपने किए का परिणाम भुगतना होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस असम में अपनी हार तय देखकर इस तरह के हमले कर रही है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वह इन झूठे आरोपों के खिलाफ कानून का सहारा लेंगे।

ईरान युद्ध के बीच चीन बना ‘स्थिरता का केंद्र’, वैश्विक संकट में भी मजबूत दिखी अर्थव्यवस्था

पश्चिम एशिया में अमेरिका और इस्राइल की ओर से ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू हुए एक महीने से अधिक का समय बीत चुका है। इस युद्ध के कारण अपूर्ति शृंखला इतनी बुरी तरह प्रभावित हुई कि पूरी दुनिया असमंजस में है। हालांकि, यह संकट चीन के लिए एक अलग ही तस्वीर पेश कर रहा है। जहां एक ओर डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों और ईरान पर हमलों से वैश्विक बाजार खस्ताहाल हो रहे हैं, वहीं चीन खुद को इस हालात में भी स्थिरता और निश्चितता का प्रतीक बता रहा है। इकोनॉमिस्ट की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस युद्ध से चीन की अर्थव्यवस्था को नुकसान तो होगा, लेकिन उसके प्रतिद्वंद्वियों और पड़ोसियों की तुलना में यह असर काफी कम रहेगा। ऊर्जा आपूर्ति के मोर्चे पर चीन अपनी बेहतर तैयारी के कारण काफी सुरक्षित स्थिति में है। जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश अपने कच्चे तेल का 70% से अधिक हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते मंगाते हैं, जबकि चीन की इस मार्ग पर निर्भरता केवल एक तिहाई है। इसके अलावा, चीन के कुल ऊर्जा उपयोग में कोयला, परमाणु ऊर्जा और तेजी से बढ़ती नवीकरणीय ऊर्जा की प्रमुख हिस्सेदारी है। आर्थिक वृद्धि में एक तिहाई का योगदान दियायदि आपूर्ति शृंखला बुरी तरह बाधित होती है, तो चीन के पास लगभग चार महीने का सुरक्षित समुद्री तेल भंडार मौजूद है, जिसे सरकार फिलहाल केवल सबसे खराब स्थिति के लिए बचाकर रखना चाहती है। हालांकि, 23 मार्च को चीन में पेट्रोल की कीमतों में 13% की बढ़ोतरी की गई है। अर्थशास्त्रियों के अनुसार कच्चे माल की यह बढ़ती लागत चीन को 41 महीनों से चले आ रहे ‘डिफ्लेशन’ (कीमतों में लगातार गिरावट) के खतरनाक दौर से बाहर निकालने में मदद कर सकती है, जो 2012-16 के बाद कीमतों में गिरावट का सबसे लंबा दौर है। वैश्विक स्तर पर आपूर्ति शृंखला बाधित होने के कारण ऊर्जा महंगी होने से लोगों का अन्य वस्तुओं पर खर्च घटेगा, जिसका सीधा असर चीनी कारखानों पर पड़ेगा। पिछले साल चीन ने 1.2 ट्रिलियन डॉलर का रिकॉर्ड व्यापार अधिशेष दर्ज किया था, जिसने उसकी आर्थिक वृद्धि में एक तिहाई का योगदान दिया था।