राघव चड्ढा पर आम आदमी पार्टी का बड़ा हमला, चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल

नई दिल्ली, 03 अप्रैल 2026 आम आदमी पार्टी (आप) ने अपने ही राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को लेकर बड़ा बयान दिया है। पार्टी ने उन्हें उपनेता पद से हटाने के फैसले को सामान्य कार्रवाई बताते हुए उनके रवैये पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि राघव चड्ढा लगातार पार्टी लाइन के खिलाफ जा रहे थे और जनहित के मुद्दों पर चुप्पी साधे हुए थे, जो किसी भी जिम्मेदार नेता के लिए ठीक नहीं है। पार्टी लाइन के खिलाफ जाने पर कार्रवाई जरूरी – भगवंत मानपंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने साफ कहा कि किसी भी पार्टी में अनुशासन सबसे जरूरी होता है। उन्होंने बताया कि संसद में कई बार सभी विपक्षी दलों को एक साथ मिलकर फैसले लेने होते हैं, जैसे वॉकआउट करना या सरकार की नीतियों का विरोध करना। अगर कोई नेता इन फैसलों का पालन नहीं करता और पार्टी के व्हिप के खिलाफ जाता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई होना स्वाभाविक है। उन्होंने यह भी कहा कि नेता और उपनेता बदलना एक सामान्य प्रक्रिया है और इसमें कुछ भी असामान्य नहीं है। केजरीवाल ने सिखाया निडर होकर लड़ना – संजय सिंह“आप” के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने कहा कि पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं ने अरविंद केजरीवाल से निडरता और साहस के साथ लड़ना सीखा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राघव चड्ढा ने कई महत्वपूर्ण मौकों पर पार्टी का साथ नहीं दिया। जब मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रस्ताव आया, तब उन्होंने हस्ताक्षर नहीं किए। जब एलपीजी गैस संकट का मुद्दा उठा, तब भी उन्होंने संसद में कुछ नहीं कहा। संजय सिंह के मुताबिक, एक जनप्रतिनिधि का काम जनता के मुद्दों को उठाना होता है, लेकिन अगर वह चुप रहे, तो जनता के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है। जनता के मुद्दों पर चुप रहना सही नहीं – सौरभ भारद्वाजदिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि राजनीति में डर के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पार्टी के सभी नेता जनता की आवाज उठाने के लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राघव चड्ढा ने लंबे समय से संसद में ऐसा कोई मुद्दा नहीं उठाया, जिसमें नरेंद्र मोदी सरकार से सीधे सवाल किया गया हो। सौरभ भारद्वाज ने यह भी कहा कि जब विपक्ष वॉकआउट करता है, तब भी राघव चड्ढा उसमें शामिल नहीं होते। इससे यह संदेश जाता है कि वह पार्टी के सामूहिक फैसलों से अलग चल रहे हैं। भाजपा से सवाल करने से क्यों डरते हैं? – आतिशीदिल्ली की नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने भी राघव चड्ढा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आज देश के सामने लोकतंत्र और संविधान को लेकर बड़े मुद्दे हैं, लेकिन इन पर बोलने से बचा जा रहा है। आतिशी ने कहा कि पश्चिम बंगाल और दिल्ली में चुनाव प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं, लेकिन इन मुद्दों पर भी राघव चड्ढा ने कोई ठोस बयान नहीं दिया। उन्होंने एलपीजी गैस की समस्या का जिक्र करते हुए कहा कि आम आदमी को रोजमर्रा की जिंदगी में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन इस पर भी संसद में आवाज नहीं उठाई गई। केजरीवाल की गिरफ्तारी के समय भी खामोशी पर सवालआतिशी ने यह भी कहा कि जब अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार किया गया था, तब पार्टी के कार्यकर्ता सड़कों पर संघर्ष कर रहे थे। उस समय भी राघव चड्ढा देश में मौजूद नहीं थे और उनकी भूमिका को लेकर कई सवाल उठे थे। उन्होंने कहा कि उस समय पार्टी ने उनका बचाव किया, लेकिन अब उनके व्यवहार को देखकर शंका होना स्वाभाविक है। निडरता ही पहचान, डर कर राजनीति नहीं चलती – अनुराग ढांडा“आप” के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने कहा कि पार्टी की पहचान निडरता है। उन्होंने कहा कि अगर कोई नेता डर जाएगा, तो वह देश के लिए कैसे लड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि संसद में मिलने वाले सीमित समय का सही इस्तेमाल करना चाहिए और बड़े मुद्दों पर बात करनी चाहिए, न कि छोटे विषयों पर। पार्टी में अनुशासन और जवाबदेही पर जोरपूरे मामले में आम आदमी पार्टी ने साफ संकेत दिया है कि पार्टी अनुशासन और विचारधारा से समझौता नहीं किया जाएगा। नेताओं का मानना है कि जनता के मुद्दों पर आवाज उठाना हर जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है। अब सबकी नजर राघव चड्ढा के जवाब पर है कि वह इन आरोपों पर क्या सफाई देते हैं और आगे उनकी राजनीतिक भूमिका क्या होती है।
ममता के गढ़ में शाह की दहाड़! शुभेंदु के नामांकन में शक्ति प्रदर्शन

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर तमाम सियासी दलों की तैयारियां जोर-शोर से जारी हैं। इस बीच भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह गुरुवार को भवानीपुर विधानसभा सीट से पार्टी के उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी के नामांकन दाखिल करने के कार्यक्रम में शामिल होंगे। पार्टी नेताओं ने बताया कि अमित शाह भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में शुभेंदु अधिकारी के साथ उनके रोड शो का भी हिस्सा होंगे। पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता अधिकारी के साथ मिलकर अमित शाह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के राजनीतिक गढ़ में अपनी शक्ति का प्रदर्शन करेंगे। अमित शाह बुधवार की देर रात कोलकाता पहुंचेभाजपा नेताओं के अनुसार, शाह और अधिकारी दोपहर के आसपास हाजरा क्रॉसिंग से रोड शो शुरू करेंगे। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य भी उनके साथ होंगे। यह रोड शो भवानीपुर के विभिन्न हिस्सों से गुजरते हुए सर्वे बिल्डिंग पर समाप्त होगा, जहां अधिकारी अपना नामांकन पत्र दाखिल करेंगे। पार्टी सूत्रों ने बताया कि काफिला सर्वे बिल्डिंग से लगभग 200 मीटर पहले रुकेगा। अमित शाह शुभेंदु अधिकारी के साथ उस कार्यालय तक जाएंगे, जहां भाजपा नेता अपने कागजात जमा करेंगे। भाजपा नेताओं ने कहा कि नामांकन दाखिल करने में शाह की भागीदारी का उद्देश्य भवानीपुर चुनाव को पार्टी द्वारा दिए जा रहे महत्व को रेखांकित करना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी भवानीपुर में चुनाव प्रचार करने की संभावना है। गौरतलब है कि अमित शाह बुधवार की देर रात कोलकाता पहुंचे थे।
नक्सलवाद पर रिजिजू का ‘एटमी’ वार! कांग्रेस और माओवादियों के बीच ‘गुपचुप’ रिश्तों का दावा

देश में नक्सलवाद के मुद्दे पर सियासत तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस और उसके वरिष्ठ नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के कुछ नेताओं के वामपंथी उग्रवादियों और माओवादियों से संबंध रहे हैं। उनके इस बयान से राजनीतिक माहौल गरमा गया है और आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। किरेन रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी वामपंथी उग्रवादियों को जानते हैं और कांग्रेस के कुछ नेताओं ने ऐसे समूहों से संपर्क भी बनाए रखा था। उन्होंने यह भी कहा कि यह विडंबना है कि एक तरफ कांग्रेस सार्वजनिक रूप से उग्रवाद के खिलाफ बात करती है, वहीं दूसरी तरफ उसके कुछ नेताओं पर ऐसे आरोप लग रहे हैं। रिजिजू ने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी की अगुवाई वाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के समय कुछ लोग वामपंथी उग्रवादी विचारधारा से जुड़े थे। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी इन लोगों को जानते हैं। हालांकि उन्होंने कोई ठोस सबूत सार्वजनिक नहीं किया, लेकिन उनके बयान ने राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश सुरक्षित और स्थिरकेंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि कांग्रेस के कुछ नेताओं ने माओवादियों से मुलाकात भी की थी और उनसे संपर्क बनाए रखा था। उन्होंने इसे गंभीर मामला बताते हुए कहा कि यह देश की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है। उनके अनुसार, यह स्थिति चिंताजनक है और इसकी जांच होनी चाहिए। इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में कहा था कि देश नक्सलवाद से लगभग मुक्त होने की स्थिति में पहुंच चुका है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ के बस्तर जैसे इलाके, जो पहले नक्सलवाद के गढ़ माने जाते थे, अब विकास की राह पर आगे बढ़ रहे हैं। सरकार ने 31 मार्च तक नक्सलवाद को खत्म करने का लक्ष्य भी रखा है। रिजिजू ने कहा कि कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को अपने नेतृत्व से सवाल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब कई कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं की नक्सलियों द्वारा हत्या की गई, तब पार्टी नेतृत्व की क्या भूमिका रही। उन्होंने कांग्रेस पर नकारात्मक राजनीति करने का आरोप भी लगाया और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश सुरक्षित और स्थिर है।
ट्रंप का पश्चिमी देशों पर तीखा प्रहार ‘ब्रिटेन और फ्रांस खुद लड़ना सीखें, अमेरिका नहीं आएगा साथ’

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को अपनी एक सोशल मीडिया पोस्ट में पश्चिमी देशों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन जैसे जो देश होर्मुज जलडमरूमध्य के कारण जेट ईंधन नहीं पा रहे हैं, जिन्होंने ईरान के खिलाफ कार्रवाई में हिस्सा लेने से इनकार किया था, उनके लिए उनके पास दो सुझाव हैं। ब्रिटेन जैसे जो देश होर्मुज जलडमरूमध्य की वजह से जेट ईंधन नहीं पा रहे हैं, जिन्होंने ईरान के खिलाफ कार्रवाई में शामिल होने से इनकार किया, उनके लिए मेरा सुझाव है: पहला- अमेरिका से खरीदो, हमारे पास बहुत है। दूसरा- हिम्मत जुटाओ, जलडमरूमध्य पर जाओ और उसे अपने कब्जे में ले लो। अब तुम्हें खुद अपने लिए लड़ना सीखना होगा, अमेरिका अब तुम्हारी मदद के लिए नहीं आएगा, जैसे तुम हमारे लिए नहीं आए। ईरान लगभग तबाह हो चुका है। मुश्किल काम खत्म हो गया है। जाओ, अपना तेल खुद हासिल करो। 47 वर्षों के आतंक के दौरान बेरहमी से मार डालाउन्होंने आगे लिखा, फ्रांस ने इस्राइल जा रहे सैन्य सामान से भरे विमानों को अपने हवाई क्षेत्र से गुजरने नहीं दिया। फ्रांस ने ‘ईरान के कसाई’ के मामले में बहुत ही खराब सहयोग किया, जिसे सफलतापूर्वक खत्म कर दिया गया है। अमेरिका इसे याद रखेगा। इससे पहले, सोमवार को अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि उनका देश ईरान में अपने सैन्य अभियानों को समाप्त करने के लिए एक और अधिक समझदार शासन के साथ गंभीरता से बातचीत कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस दिशा में काफी प्रगति हुई है। लेकिन अगर किसी भी वजह जल्द ही कोई समझौता नहीं हो पाता है (जिसकी बहुत अधिक संभावना है)और अगर होर्मुजलडमरूमध्य व्यापार के लिए नहीं खुलता है, तो हम उनके सभी बिजली उत्पादन संयंत्रों, तेल कुओं और खर्ग द्वीप को पूरी तरह तबाह कर देंगे, जिन्हें हमने जानबूझकर अभी तक छुआ नहीं है। उन्होंने लिखा, यह उन असंख्य सैनिकों और अन्य लोगों का बदला होगा, जिन्हें ईरान ने पिछले शासन के 47 वर्षों के आतंक के दौरान बेरहमी से मार डाला था।
नक्सलवाद पर रिजिजू का ‘एटमी’ वार! कांग्रेस और माओवादियों के बीच ‘गुपचुप’ रिश्तों का दावा

देश में नक्सलवाद के मुद्दे पर सियासत तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस और उसके वरिष्ठ नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के कुछ नेताओं के वामपंथी उग्रवादियों और माओवादियों से संबंध रहे हैं। उनके इस बयान से राजनीतिक माहौल गरमा गया है और आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। किरेन रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी वामपंथी उग्रवादियों को जानते हैं और कांग्रेस के कुछ नेताओं ने ऐसे समूहों से संपर्क भी बनाए रखा था। उन्होंने यह भी कहा कि यह विडंबना है कि एक तरफ कांग्रेस सार्वजनिक रूप से उग्रवाद के खिलाफ बात करती है, वहीं दूसरी तरफ उसके कुछ नेताओं पर ऐसे आरोप लग रहे हैं। रिजिजू ने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी की अगुवाई वाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के समय कुछ लोग वामपंथी उग्रवादी विचारधारा से जुड़े थे। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी इन लोगों को जानते हैं। हालांकि उन्होंने कोई ठोस सबूत सार्वजनिक नहीं किया, लेकिन उनके बयान ने राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश सुरक्षित और स्थिरकेंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि कांग्रेस के कुछ नेताओं ने माओवादियों से मुलाकात भी की थी और उनसे संपर्क बनाए रखा था। उन्होंने इसे गंभीर मामला बताते हुए कहा कि यह देश की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है। उनके अनुसार, यह स्थिति चिंताजनक है और इसकी जांच होनी चाहिए। इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में कहा था कि देश नक्सलवाद से लगभग मुक्त होने की स्थिति में पहुंच चुका है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ के बस्तर जैसे इलाके, जो पहले नक्सलवाद के गढ़ माने जाते थे, अब विकास की राह पर आगे बढ़ रहे हैं। सरकार ने 31 मार्च तक नक्सलवाद को खत्म करने का लक्ष्य भी रखा है। रिजिजू ने कहा कि कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को अपने नेतृत्व से सवाल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब कई कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं की नक्सलियों द्वारा हत्या की गई, तब पार्टी नेतृत्व की क्या भूमिका रही। उन्होंने कांग्रेस पर नकारात्मक राजनीति करने का आरोप भी लगाया और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश सुरक्षित और स्थिर है।
इज़राइल ने पास किया अब तक का सबसे बड़ा बजट, नेतन्याहू सरकार को समय से पहले चुनाव से राहत

इस्राइल की संसद ने सालाना बजट पास कर दिया है। इससे प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार को बड़ी राहत मिली है। दरअसल, बजट पास होने के साथ ही समय से पहले चुनाव का खतरा टल गया है। अब सरकार अपने कार्यकाल को जारी रख सकती है। हालांकि इस फैसले के बाद विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। इसे गलत प्राथमिकताओं वाला बजट बताया है। इस्राइल में एक अप्रैल तक बजट पास करना जरूरी था, नहीं तो देश में समय से पहले चुनाव हो सकते थे। संसद ने देर रात चली लंबी बैठक के बाद 62 के मुकाबले 55 वोट से बजट पास कर दिया। यह इस्राइल का अब तक का सबसे बड़ा बजट है। इसके साथ ही नेतन्याहू सरकार के लिए सत्ता में बने रहने का रास्ता साफ हो गया है। सीधा असर शासन पर भी पड़ रहाबजट पास होने के बाद अब सरकार अपने कार्यकाल को पूरा करने की स्थिति में है। इस्राइल में चुनाव अक्तूबर तक होने हैं, लेकिन अगर बजट पास नहीं होता तो पहले ही चुनाव कराने पड़ते। हालांकि प्रधानमंत्री के पास अभी भी अधिकार है कि वे चाहें तो समय से पहले चुनाव करा सकते हैं। विपक्ष ने इस बजट को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। विपक्षी नेता यायर लापिड ने इसे देश के इतिहास की सबसे बड़ी लूट वाला वजट बताया। वहीं, पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह जनता के साथ अन्याय है। खासतौर पर अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स समुदाय के लिए बढ़ाए गए फंड को लेकर विरोध तेज है। इस बार के बजट में रक्षा मंत्रालय के लिए करीब 20 प्रतिशत ज्यादा राशि रखी गई है। ईरान के साथ चल रहे युद्ध के कारण रक्षा बजट बढ़ाकर लगभग 45 अरब डॉलर कर दिया गया है। इसके चलते सरकार को अन्य मंत्रालयों के खर्च में कटौती करनी पड़ी है। बजट पर चर्चा के दौरान कई बार ईरान से मिसाइल हमले की चेतावनी सायरन बजे। सुरक्षा कारणों से संसद की बैठक मुख्य सदन की बजाय ऐसे हॉल में हुई, जो बम शेल्टर के करीब है। यह स्थिति दिखाती है कि देश में युद्ध जैसे हालात का सीधा असर शासन पर भी पड़ रहा है।
बंगाल चुनाव से पहले सियासी वार तेज: TMC का भाजपा पर पलटवार, ‘मोटा भाई-जवाब चाई’ से मांगा जवाब

पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव के चलते आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को पश्चिम बंगाल सरकार के खिलाफ ‘आरोप-पत्र’ जारी किया। अब इस पर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने पलटवार करते हुए भाजपा के खिलाफ ‘चार्जशीट’ जारी की है। तृणमूल कांग्रेस ने न केवल भाजपा-शासित राज्यों में महिला सुरक्षा पर सवाल उठाए, बल्कि मणिपुर में जातीय हिंसा और बंगाल में डिटेंशन कैंप मॉडल लागू करने की भाजपा की कथित मंशा पर भी तीखा हमला बोला। टीएमसी के इस आरोप-पत्र का नाम ‘मोटा भाई-जवाब चाई’ रखा है। आप हमें वंचित करतेटीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने मणिपुर में हुई जातीय हिंसा पर अमित शाह से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि यह पूर्वोत्तर राज्य पिछले तीन वर्षों से ‘खून से लथपथ’ है। उन्होंने आगे कहा कि भाजपा बंगाली और बांग्लादेशियों के बीच की लकीर को धुंधला करना चाहती है, ताकि वह असम की तर्ज पर बनाए गए अपने नफरत भरे डिटेंशन कैंप मॉडल को बंगाल में भी लागू कर सके। महुआ मोइत्रा ने अमित शाह की पश्चिम बंगाल सरकार के खिलाफ ‘चार्जशीट’ पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “आपने हर बंगाली को अपराधी घोषित कर दिया है। आप इसे चार चरणों में करते हैं: पहले आप हमारा अपमान करते हैं, फिर आप हमें वंचित करते हैं, फिर आप हमें अपराधी बनाते हैं, और फिर आप हमें परेशान करते हैं।”
नोएडा एयरपोर्ट जनसभा के लिए हाईटेक कंट्रोल रूम, 2500 बसों पर रखी जा रही नजर

हैलो, कंट्रोल रूम से बोल रहा हूं। आपकी बस नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुभारंभ में होने वाली जनसभा से अभी कितनी दूर है, इसकी जानकारी उपलब्ध करा दें। विभिन्न जनपदों से आने वाले 2500 बस चालकों के पास शुक्रवार से कलेक्ट्रेट के कंट्रोल रूम से फोन किए जाएंगे। इसके लिए जिला प्रशासन की ओर से छह से सात टीमें बनाई गई हैं। हर टीम में 10 से 12 लोगों की तैनाती की गई है। हर टीम के सदस्यों को 100-100 बसों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन सदस्यों का काम होगा कि हर बस चालक से उसकी लोकेशन लेकर अपडेट रहें। जनसभा स्थल पर पहुंचने पर बसों को कहां खड़ा किया जाएगा, इसकी भी जानकारी दी जाएगी। सभी कर्मियों को 27 से 28 मार्च शाम छह बजे तक कंट्रोल रूम में रहना होगा। किसी भी प्रकार की लापरवाही पर तत्काल कार्रवाई होगीकंट्रोल रूम में शामिल एक सदस्य ने बताया कि हर बस चालक को फोन करने की जिम्मेदारी दी गई है, ताकि प्रधानमंत्री की जनसभा में आने वाले किसी भी व्यक्ति को कोई परेशानी न हो। इसके लिए सभी सदस्यों को दो दिन का प्रशिक्षण भी दिया गया है। बातचीत के दौरान किसी को ऊंची आवाज में बोलने की अनुमति नहीं होगी। साथ ही बसों में आने वाले लोगों को खाना-पानी मिला या नहीं, इसकी जानकारी भी ली जाएगी। उन्होंने बताया कि कंट्रोल रूम से लाइव लोकेशन पर भी काम किया जाएगा। कई जनपदों से लोग शुक्रवार दोपहर से ही आने लगेंगे। उनके रहने और खाने की व्यवस्था भी की गई है। साथ ही निर्देश दिए गए हैं कि कंट्रोल रूम में किसी भी प्रकार की लापरवाही पर तत्काल कार्रवाई होगी।
Donald Trump की ईरान को कड़ी चेतावनी: “अब फैसला लो, वरना वापसी का रास्ता नहीं बचेगा

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि ईरान को जल्द गंभीर होकर फैसला लेना होगा, वरना हालात ऐसे हो जाएंगे जहां से वापसी संभव नहीं होगी। ट्रंप के इस बयान ने एक बार फिर वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ा दिया है। इसी के साथ उन्होंने नाटो देशों पर भी निशाना साधा और सहयोग न करने का आरोप लगाया.ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा कि ईरानी वार्ताकार बहुत अलग और अजीब हैं। वे हमसे डील करने के लिए भीख मांग रहे हैं, जो उन्हें करना चाहिए क्योंकि वो सैन्य रूप से खत्म हो चुके हैं और वापसी का कोई मौका उनके पास नहीं है, और फिर भी वे सबके सामने कहते हैं कि वे सिर्फ हमारे प्रस्ताव को देख रहे हैं। उन्हें जल्द ही गंभीर हो जाना चाहिए, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए, क्योंकि एक बार ऐसा हो गया, तो पीछे मुड़ना मुमकिन नहीं है, और यह अच्छा नहीं होगा! मिले-जुले संकेत दिएईरान ने बातचीत की संभावना पर मिले-जुले संकेत दिए हैं, जब ऐसी खबरें आईं कि ट्रंप प्रशासन ने इस हफ्ते की शुरुआत में पाकिस्तान के जरिए तेहरान को 15-सूत्रीय संघर्ष विराम योजना पेश की है। सार्वजनिक रूप से, ईरानी सरकारी मीडिया ने बताया कि तेहरान ने प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है।ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सरकारी मीडिया को बताया कि उनकी सरकार ने युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत नहीं की है और न ही उनकी किसी बातचीत की योजना है। हालांकि उन्होंने माना कि यूएस ने दूसरे देशों के जरिए ईरान को संदेश भेजने की कोशिश की थी, उन्होंने कहा कि यह “न तो बातचीत थी और न ही कोई नेगोशिएशन।”
दिल्ली बजट 2026-27: शिक्षा को सबसे बड़ा फंड, हेल्थ, सोलर और इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा दांव

दिल्ली सरकार ने वर्ष 2026-27 के बजट में शिक्षा, महिला सुरक्षा, गिग वर्कर्स और बुनियादी सुविधाओं पर फोकस करते हुए हर वर्ग को साधने कीकोशिश की है। बजट में शिक्षा को एक बार फिर विकास की धुरी बनाते हुए सबसे बड़ी प्राथमिकता दी गई है, वहीं सामाजिक सुरक्षा और शहरीसुविधाओं को भी मजबूती देने की दिशा में कई अहम घोषणाएं की गई हैं। सरकार ने कुल 1,03,700 करोड़ रुपये के बजट में शिक्षा के लिए19,326 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड प्रावधान किया है, जो कुल बजट का 18.64 प्रतिशत है। यह अब तक का सबसे अधिक आवंटन है। सरकार काकहना है कि यह खर्च नहीं बल्कि भविष्य में निवेश है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना के जरियेलोगों को सोलर पावर अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा, पुरानी दिल्ली के चांदनी चौक इलाके में 28 ऐतिहासिक सड़कों और गलियों में लटकतेबिजली के तारों को हटाने का काम शुरू हो चुका है। करीब 160 करोड़ रुपये की लागत से 52.5 किलोमीटर लंबी ओवरहेड लाइनों को भूमिगतकिया जाएगा। अन्य क्षेत्रों में हाई और लो टेंशन लाइनों को अंडरग्राउंड करने के लिए 200 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है। नए सब-स्टेशन औरट्रांसफॉर्मर भी लगाए जा रहे हैं। 553 सीट को बढ़ाकर 762 किया जाएगाराजधानी की स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए दिल्ली सरकार ने बजट 2026-27 में शिक्षा के बाद स्वास्थ्य पर सबसे ज्यादा फोकस कियाहै। दिल्ली की सेहत सुधारने के लिए बजट में 13034 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। बजट में अस्पताल परियोजनाओं को रफ्तार देने, यमुनापारमें पहला ट्रामा सेंटर स्थापित करने, नवजातों की सेहत के लिए पहली बार अनमोल योजना की घोषणा की गई है। पिछले बजट की तुलना में इस बारबजट में 141 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी की गई है। मादीपुर, सिरसपुर, हस्तसाल और ज्वालापुरी में 515 करोड़ के निवेश से अस्पताल परियोजनाएं पूरीहोंगी। राव तुला राम मेमोरियल अस्पताल, बाबा साहेब अंबेडकर अस्पताल और लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल के बुनियादी ढांचे को मजबूत कियाजाएगा। अधूरे पड़े लोकनायक अस्पताल एवं सत्यवादी राजा हरिशचंद्र अस्पताल का निर्माण कार्य पूरा किया जाएगा। 787 करोड़ से चिकित्सीयउपकरणों और दवा की खरीद होगी। आईसीयू अस्पतालों के निर्माण कार्य को पूरा करने के लिए 150 करोड़ का प्रावधान है और 750 नए आयुष्मानआरोग्य मंदिर बनेंगे, पीएम जन आरोग्य योजना के विस्तार करते हुए ट्रांसजेंडर को भी इसका हिस्सा बनाया है। यमुनापार में बनेगा ट्रामा सेंटर जीटीबीअस्पताल में 200 करोड़ की लागत से ट्रामा सेंटर का निर्माण प्रस्तावित। द्वारका स्थित इंदिरा गांधी अस्पताल में 50 करोड़ से नए मेडिकल कॉलेज काप्रस्ताव है। मेडिकल कॉलेज में यूजी की सीट को 595 से बढ़ाकर 820, पीजी की 553 सीट को बढ़ाकर 762 किया जाएगा। मौलाना आजादमेडिकल कॉलेज में छात्र-छात्राओं के लिए एक नए हॉस्टल निर्माण के लिए 50 करोड़ का बजट आवंटित किया है।