प्रधानमंत्री मोदी आज गुजरात दौरे पर: जनजातीय गौरव दिवस पर 9,700 करोड़ की परियोजनाओं का शुभारंभ”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जनजातीय गौरव दिवस मनाने और भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती समारोह में भाग लेने के लिए आज शनिवार कोगुजरात का दौरा करेंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री नर्मदा जिले में 9,700 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भीकरेंगे। इन परियोजनाओं में आदिवासी कल्याण, बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, शिक्षा और विरासत पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। प्रधानमंत्री दोपहरकरीब 12:45 बजे नर्मदा जिले के देवमोगरा मंदिर में पूजा और दर्शन करेंगे। इसके बाद वह दोपहर करीब 2:45 बजे डेडियापाड़ा पहुंचेंगे और एकसार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल होंगे। यहां वह कई परियोजनाओं का शुभारंभ करेंगे और जनसभा को संबोधित करेंगे. जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियानइन परियोजनाओं में प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (डीए-जगुआ) के तहत बने एक लाख घरों का गृह प्रवेश शामिल है। इसके अलावा पीएम मोदी लगभग 1,900 करोड़ रुपये की लागत वाले 42 एकलव्यमॉडल आवासीय विद्यालयों, डिब्रूगढ़ में असम मेडिकल कॉलेज में एक सक्षमता केंद्र और आदिवासी संस्कृति के संरक्षण के लिए इंफाल में एकजनजातीय अनुसंधान संस्थान भवन का भी उद्घाटन करेंगे। कनेक्टिविटी बेहतर बनाने के लिएप्रधानमंत्री गुजरात के 14 आदिवासी जिलों में कनेक्टिविटी बेहतर बनाने के लिए 250 बसों को हरी झंडी दिखाएंगे। वह आदिवासी क्षेत्रों में 748 किलोमीटर नई सड़कों और डीए-जगुआ के तहत 14 आदिवासी बहु-विपणन केंद्रों की आधारशिला रखेंगे। पीएम मोदी 2,320 करोड़ रुपये से अधिककी लागत वाले 50 नए एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों की भी आधारशिला रखेंगे. पीएम मोदी सूरत में निर्माणाधीन बुलेट ट्रेन स्टेशन का दौराकरेंगे और मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर (एमएएचएसआर) की प्रगति की समीक्षा करेंगे। यह भारत की सबसे महत्वाकांक्षी बुनियादीढांचा परियोजनाओं में से एक है और देश के हाई-स्पीड कनेक्टिविटी के युग में प्रवेश का प्रतीक है। एमएएचएसआर लगभग 508 किलोमीटर लंबा है, जिसमें 352 किलोमीटर हिस्सा गुजरात और दादरा व नगर हवेली में और 156 किलोमीटर महाराष्ट्र में है। यह कॉरिडोर साबरमती, अहमदाबाद, आणंद, वडोदरा, भरूच, सूरत, बिलिमोरा, वापी, बोईसर, विरार, ठाणे और मुंबई सहित प्रमुख शहरों को जोड़ेगा।
सबसे बड़ी हार के बाद लालू परिवार में बढ़ी खटपट, तेजस्वी की नेतृत्व क्षमता पर उठे सवाल, तेज प्रताप की बगावत ने बढ़ाई मुश्किलें

तेजस्वी यादव हमेशा चर्चा में रहे हैं। कभी सबसे कम उम्र का डिप्टी सीएम बन कर तो कभी सबसे कम उम्र में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनकर।कभी जाति की खास पहचान वाले बिहार में अंतरजातीय शादी रचाकर, तो कभी अपनी अगुवाई में युवाओं का नायक बनकर विपक्षी महागठबंधन कोसत्ता की दहलीज में लाने को लेकर। इस बार उनकी चर्चा खुद बमुश्किल चुनाव जीतने के साथ राजद को सबसे बड़ी हार दिलाने वाले खलनायक केतौर पर है। परिवार में खटपट के बीच तेजस्वी के नेतृत्व में राजद को मिली हार के बाद पार्टी के भविष्य को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सवाल है किक्या सबसे बड़ी हार के बाद लालू परिवार में चुनाव के दौरान शुरू हुई खटपट उग्र रूप लेगी? यह सवाल इसलिए कि सोशल मीडिया में आपत्तिजनकपोस्ट के मामले में लालू के सबसे बड़े पुत्र तेजप्रताप पार्टी से निष्कासित हैं। प्रचार के दौरान लालू की सांसद पुत्री मीसा भारती और एक अन्य पुत्रीरोहिणी आचार्य के नाराज होने की भी खबरें आईं। और पार्टी का एक धड़ा राज्यसभा सदस्य बनाए गएदरअसल तेजस्वी पर लालू परिवार के सदस्य और पार्टी का एक धड़ा राज्यसभा सदस्य बनाए गए संजय यादव के इशारे पर मनमानी का आरोप लगातेरहे हैं। पार्टी से निष्कासित होने के बाद तेजप्रताप ने कई बार सार्वजनिक तौर पर संजय समेत तेजस्वी के करीबी नेताओं को शकुनियों की टीम करारदिया। चूंकि सीट बंटवारे से लेकर टिकट वितरण तक सिर्फ तेजस्वी की चली है, ऐसे में वह पार्टी को मिली अब तक की सबसे बड़ी हार की जिम्मेदारीसे बच नहीं सकते। क्रिकेट के कॅरिअर को छोड़ कर 2015 में राजनीति में आते ही तेजस्वी ने कई कीर्तिमान बनाए। उनकी यात्रा के पहले पड़ाव में हीराजद का दस साल का सत्ता का सूखा खत्म हुआ। चुनाव जीतने के बाद सबसे कम (26 वर्ष की) उम्र के डिप्टी सीएम बने। नीतीश ने जब पालाबदला, तो सबसे कम उम्र के नेता प्रतिपक्ष बने। सत्ता की दहलीज तक पहुंचायाबीते चुनाव में युवाओं का नायक बन कर विपक्षी महागठबंधन को सत्ता की दहलीज तक पहुंचाया। जाति की पहचान रखने वाले बिहार में ईसाईबिरादरी की रेचल गोडिन्हो से अंतरधार्मिक विवाह करने का साहस दिखाया। हालांकि सबसे बड़ी हार के बाद अब तेजस्वी नए और नकारात्मक कारणोंसे चर्चा में हैं। लालू प्रसाद के साए से निकल कर सियासी जमीन बनाने निकले तेज प्रताप यादव बुरी तरह विफल रहे। पारिवारिक कलह के चलतेराजद से बाहर किए गए तेज प्रताप जनशक्ति जनता दल (जेजेडी) बनाकर जोरशोर से चुनावी मैदान में उतरे थे। प्रचार के दौरान भावनात्मक अभियानचलाकर उन्होंने लोगों का ध्यान भी खींचा, लेकिन नतीजे बता रहे हैं कि इसका उन्हें तो फायदा मिला नहीं, उल्टे अपने छोटे भाई और विपक्ष के सीएमचेहरा तेजस्वी यादव को नुकसान पहुंचा। तेज प्रताप की राजनीतिक पारी की शुरुआत 2015 के चुनाव में हुई थी। वह दो बार विधायक रहे औरमंत्रिमंडल में भी।
चुनावी जादूगर से राजनीतिक चुनौती तक, बिहार में प्रशांत किशोर की पारी रही फीकी

चुनावी रणनीतिकार के पेशे से दूरी बनाकर राजनीति में उतरे प्रशांत किशोर ने अपनी जनसुराज पार्टी के इस चुनाव में अर्श या फर्श पर रहने कीभविष्यवाणी की थी। तब लगा था कि बिहार की राजनीति को मूल मुद्दे पर खींचने में कामयाब प्रशांत राज्य में नई राजनीति की नींव रखने में सफलरहेंगे। चुनाव में प्रशांत के उठाए मुद्दे तो चले, मगर उनकी पार्टी नहीं चल पाई। पार्टी का खाता खोलना तो दूर, 238 में उसके महज पांच उम्मीदवारकिसी तरह जमानत बचाने में कामयाब हो पाए। बतौर चुनावी रणनीतिकार प्रशांत ने कई दलों को सफलता दिलाई। साल 2014 में भाजपा के चुनावअभियान की कमान संभालने और चाय पर चर्चा के सफल सियासी प्रयोग ने उन्हें चर्चा में ला दिया। बाद में उन्होंने आंध्र प्रदेश में वाईएसआरसीपी केजगन मोहन रेड्डी, पंजाब के सीएम रहे कैप्टन अमरिंदर सिंह, दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल, प. बंगाल की सीएम ममता बनर्जी को सफलता कास्वाद चखाया। साल 2015 में नीतीश-लालू का मिलन कराकर बिहार में-बहार है नीतीशे कुमार है का नारा देकर भाजपा को करारी सियासी पटखनीदेने में सफलता हासिल की। हालांकि, इस दौरान उनका उत्तर प्रदेश में यूपी के लड़के का प्रयोग असफल रहा। प्रशांत ने राजनीति में उतरने के लिए अपने गृह राज्य का चयनजदयू से मोहभंग के बाद तीन साल पहले प्रशांत ने राजनीति में उतरने के लिए अपने गृह राज्य का चयन किया। पद यात्राओं और मुद्दों के जरिये बिहारकी सियासत में सनसनी पैदा की। उनके कारण राज्य में पहली बार पलायन, बेरोजगारी जैसे मुद्दे पर प्रतिद्वंद्वी गठबंधन महागठबंधन को रणनीति मेंबदलाव करना पड़ा। दोनों गठबंधनों ने बेरोजगारी और पलायन रोकने के लिए बड़े-बड़े वादे किए। प्रशांत के उठाए भ्रष्टाचार के मामले ने नीतीशसरकार की भी परेशानी बढ़ाई। इसके बावजूद प्रशांत वोट की फसल नहीं काट पाए। अपने राजनीतिक कॅरिअर में प्रशांत ने पूरे राज्य का दौरा कर एककरोड़ सदस्य बनाने का दावा किया, लेकिन चुनाव में वह कोई छाप छोड़ने में बुरी तरह नाकाम रहे। इस चुनाव में उनकी पार्टी के 238 उम्मीदवारों में से233 उम्मीदवार अपनी जमानत तक नहीं बचा पाए। हमेशा चर्चाओं के केंद्र में रहेप्रचार के दौरान प्रशांत के दावे और बयान हमेशा चर्चाओं के केंद्र में रहे। उनका जदयू का 25 से कम सीटें जीतने का दावा और ऐसा नहीं होने परराजनीति से संन्यास का बयान छाया रहा। इसी प्रकार उनका अपनी पार्टी के फर्श या अर्श पर रहने की भविष्यवाणी भी चर्चा में रही। महागठबंधन केसीएम पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव और डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी की शिक्षा पर उठाए सवालों पर भी खूब चर्चा हुई। हालांकि, नतीजे बताते हैंकि लोगों ने उन्हें गंभीरता से तो चुना मगर प्रशांत वोट हासिल करने का भरोसा पैदा नहीं कर पाए। नतीजे से पहले इस चुनाव की सबसे बड़ी सनसनीबन कर उभरे प्रशांत किशोर अब भविष्य में क्या करेंगे, इस पर सभी की नजर होगी। देखना होगा कि वह इस असफलता के बाद वापस चुनावीरणनीतिकार की भूमिका में लौटते हैं या फिर भविष्य के लिए एक बार फिर संघर्ष का रास्ता अपनाते हैं।
बिहार की मुस्लिम सियासत में बड़ा बदलाव, एआईएमआईएम बनी नई नेतृत्व शक्ति

चुनावी नतीजों से लगता है, जैसे बिहार में लंबे समय से नेतृत्व के सूखे का संकट झेल रही मुस्लिम बिरादरी ने नया नेतृत्व चुन लिया है। इस बिरादरी नेराजद के माई (मुस्लिम-यादव) समीकरण से पल्ला झाड़कर एआईएमआईएम का दामन थाम लिया। मुस्लिम मतों में हुए जबरदस्त बंटवारे के कारणबीते चुनाव के 19 विधायकों के मुकाबले इस बार महज 11 मुस्लिम प्रत्याशी ही चुनाव जीत पाए हैं। इन 11 में से भी पांच एआईएमआईएम से हैं।विपक्षी महागठबंधन में राजद से तीन और कांग्रेस के दो मुस्लिम उम्मीदवार को ही जीत मिली। एक अन्य मुस्लिम को जदयू के टिकट पर जीत मिलीहै। मुस्लिम प्रभाव वाली सीटों पर ताकतऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिममीन (एआईएमआईएम) के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने विपक्षी महागठबंधन को न सिर्फ सीमांचल, बल्कि कई अन्य मुस्लिम प्रभाव वाली सीटों पर ताकत का अहसास कराया। बीते चुनाव के बाद चार विधायकों की बगावत के बावजूद पार्टी नेपिछली बार जीती सभी सीटें बायसी, अमौर, जोकीहाट, बहादुरगंज और कोचाधामन बरकरार रखी हैं। इसके अलावा पार्टी उम्मीदवारों ने बलरामपुर, दरभंगा ग्रामीण, गौराबौरम, प्राणपुर, कसबा, ठाकुरगंज, शेरघाटी सीटों पर दूसरे या तीसरे स्थान पर रहते हुए वोट काटकर विपक्षी महागठबंधन केउम्मीदवारों को जीत हासिल नहीं होने दी। नतीजे मुस्लिम सियासत के संदर्भ में अलग संदेश दे रहे हैं। बीते चुनाव में एआईएमआईएम भले ही पांचसीटें जीती थी, मगर इसके अलावा एक भी सीट पर उसके उम्मीदवार महागठबंधन के उम्मीदवारों की हार का कारण नहीं बने थे। तब उसके अन्यउम्मीदवारों को औसतन दो से तीन हजार वोट मिले थे। इस बार पार्टी ने जिन 25 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, उनमें से 16 सीटों पर पार्टी उम्मीदवारोंको 10 हजार से लेकर एक लाख से भी अधिक वोट मिले। नब्बे के दशक से राजद का साथ देतीराज्य की 18 फीसदी मुस्लिम बिरादरी नब्बे के दशक से राजद का साथ देती रही है। इस चुनाव में महागठबंधन की ओर से मुस्लिम समुदाय से किसीको डिप्टी सीएम का उम्मीदवार नहीं बनाना बड़ा मुद्दा बन गया था। 21वीं सदी में हुए सात चुनावों में इस बार विधानसभा में सबसे कम मुस्लिमप्रतिनिधित्व होगा। जदयू के जमा खान एनडीए से जीतने वाले इकलौते मुस्लिम हैं। 2005 में 16, 2010 में 19, 2015 में 24 और बीते चुनाव में19 मुस्लिम विधानसभा पहुंचे थे।
बिहार चुनाव में कांग्रेस की करारी हार, कमजोर संगठन, गलत रणनीति और दल बदलुओं पर भरोसे ने बिगाड़ा खेल

बिहार में चुनाव की तारीखें करीब आने के साथ जमीनी स्थिति के मद्देनजर कांग्रेस के कई नेताओं को यह आभास होने लगा था कि पार्टी शायद बहुतअच्छा प्रदर्शन न कर पाए। पर इस तरह औंधे मुंह गिरने की उन्होंने भी कल्पना नहीं की थी। करारी हार से हैरान कांग्रेस नेता इसके लिए जिन प्रमुखकारणों को जिम्मेदार मान रहे हैं, उनमें कमजोर संगठन, गलत टिकट वितरण, नकारात्मक प्रदर्शन, खराब रणनीति और गठबंधन में तालमेल के अभावको जिम्मेदार मानते हैं। उनका कहना है, वोट चोरी के आरोप को जोर-शोर से उछालना, दलबदलुओं को टिकट देना और सामाजिक न्याय के मुद्दे कोपूरी तरह धार न दे पाना भी पार्टी पर भारी पड़ गया। नतीजों से यह भी साफ हो गया कि राहुल गांधी का पार्ट टाइम सियासत का तरीका नहीं चलसकता है। नेताओं ने कहा किनतीजे आने शुरू होने के बीच दिल्ली से पटना तक कई नेताओं ने कहा कि सामाजिक न्याय की राजनीति से लेकर वोट चोरी अभियान तक पार्टी केमुख्य मुद्दे जमीनी स्तर पर काम नहीं कर रहे थे, लेकिन सियासी संकेतों को ठीक से समझा नहीं गया। पार्टी नेताओं के मुताबिक, सामाजिक न्याय केमुद्दे ने पार्टी के बचे-खुचे उच्च वर्ग के वोट बैंक को भी दूर धकेल दिया। राहुल गांधी ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) औरवोट चोरी अभियान को प्रिय चुनावी मुद्दा बना लिया लेकिन जमीनी स्तर पर इनका बिल्कुल भी असर नहीं दिखा। राहुल के करीबी पार्टी की रणनीतिको लेकर इस कदर आश्वस्त थे कि उन्होंने इन्हें जोर-शोर से उठाना जारी रखा. दलबदलुओं को न केवल पार्टी में जगह दीकांग्रेस ने भाजपा, जदयू और लोजपा से आए कई दलबदलुओं को न केवल पार्टी में जगह दी, बल्कि उन्हें टिकट भी दिया। ऐसे में स्थानीय स्तर परनाराजगी बढ़ी। एक पार्टी नेता ने कहा, सोनबरसा का उम्मीदवार हो या कुम्हरार, नौतन, फारबिसगंज, कुचियाकोट या बलदौर का। पार्टी नेदलबदलुओं को अहमियत दी। अगर आप उन लोगों को टिकट देते हैं, जिनकी सोशल मीडिया वॉल पर अभी तक एनडीए नेताओं के साथ तस्वीरें हैं, तो विश्वसनीयता क्या रह जाती है?कांग्रेस के ही वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि एसआईआर और वोट चोरी जैसे मुद्दे जमीनी स्तर पर दम तोड़ते नजरआए, तब नेतृत्व ने अपनी रणनीति में थोड़ा बदलाव किया। इसके बाद रोजी-रोजगार के मुद्दे पर ध्यान केंद्रित किया गया, लेकिन तब तक काफी देरहो चुकी थी।
नीतीश कुमार को दसवीं बार CM बनने पर चिराग पासवान समेत सभी NDA नेताओं ने दी बधाई, गठबंधन सहयोगियों की भूमिका की सराहना

बिहार चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को प्रचंड बहुमत के बाद नीतीश कुमार का दसवीं बार मुख्यमंत्री बनना परिणाम आने के साथ ही स्पष्ट होगया था। शुक्रवार दोपहर जैसे ही रुझान आना शुरू हुआ, एनडीए में खुशी की लहर दौड़ गई। शाम होते-होते सीएम आवास में चहलकदमी बढ़ गई।जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा, केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर के अलावा भारतीय जनता पार्टी के भी कई नेताओं ने सीएम आवास पहुंचकरमुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बधाई दी। दिल्ली से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बधाई दी। इसके बाद भाजपा सहित एनडीए के बाकी दलों ने भी एक-एककर सीएम नीतीश को बधाई दी और नई पारी की शुभकामनाएं भी। आज, यानी शनिवार सुबह से ही गहमागहमी है। चिराग पासवान सीएम नीतीशकुमार को बधाई देने पहुंचे। पासवान ने लिखा किमुलाकात के बाद केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने लिखा कि बिहार विधानसभा चुनाव परिणाम के पश्चात आज बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सेमुलाकात कर उन्हें एनडीए के प्रचंड बहुमत की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि एनडीए ने नीतीश कुमार के नेतृत्व में ऐतिहासिकजीत दर्ज की है। इसलिए, लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास के एक प्रतिनिधिमंडल ने उनसे मुलाकात की और उन्हें बधाई दी। पटना में केंद्रीय मंत्रीचिराग पासवान ने बताया कि लोजपा (रा.) के प्रतिनिधियों ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात कर सरकार गठन पर चर्चा की। उन्होंनेकहा कि 2020 में लोजपा (रा.) की चुनावी हार के लिए कई लोग ज़िम्मेदार थे और पार्टी को पुनर्जीवित करने के लिए उन्होंने संघर्ष किया। चिरागपासवान ने यह भी कहा कि बिहार चुनाव अभियान के दौरान यह झूठा नैरेटिव तैयार किया गया था कि जदयू और लोजपा (रा.)) के बीच मतभेद हैं।कुछ लोग जदयू और लोजपा (रा.) के बारे में भ्रम फैला रहे थे, वे सिर्फ एक गलत कहानी सेट कर रहे थे। एनडीए में शामिल हर गठबंधन सहयोगीउन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एनडीए में शामिल हर गठबंधन सहयोगी की भूमिका की सराहना की है, और उन्होंने जदयू और लोजपा (रा.) के बीच “गलत कहानी” बनाने वाले विपक्ष पर निशाना साधा। मैं बहुत खुश हूं कि मुख्यमंत्री ने एनडीए में शामिल हर गठबंधन सहयोगी की भूमिकाकी सराहना की। जब वह वोट देने गए तो उन्होंने लोजपा (रा.) उम्मीदवार का समर्थन किया। आलाउली, जहां मैं वोट देता हूं, मैंने जदयू उम्मीदवार कासमर्थन किया।
जया किशोरी पहुँचीं धीरेंद्र शास्त्री की पदयात्रा में, भजन-प्रवचन और सेंड आर्ट ने खींचा ध्यान

धीरेंद्र शास्त्री की पदयात्रा में शनिवार सुबह मशहूर कथावाचक और सादगी और मधुर वाणी के लिए जाने जानी वाली जया किशोरी पहुंचीं। जयाकिशोरी का धीरेंद्र शास्त्री ने सम्मान किया। इसके बाद राष्ट्रगान हुआ और बाबा की पदयात्रा अगले पढ़ाव के लिए रवाना हो गई। इस दौरान पुंडरीकगोस्वामी और परमार्थ निकेतन आश्रम के प्रमुख चिदानंद सरस्वती भी यात्रा में शामिल हुए। यात्रा ने कोसीकलां मंडी से सुबह छाता की ओर अजीजपुर, दौताना होते हुए प्रस्थान किया। कंपनी के सामने मैदान में की गईदोपहर के भोजन की व्यवस्था बेकमेट कंपनी के सामने मैदान में की गई है। भोजन के बाद महाराज के भजन, प्रवचन कार्यक्रम होंगे। इसके बाद 8 किलोमीटर आगे रात्रि विश्राम गुप्ता रेजिडेंसी पर होगा। इससे पूर्व अन्नपूर्णा रसोई में पदयात्रियों के लिए भोजन व धीरेंद्र शास्त्री प्रवचन करेंगे। राष्ट्रीयराजमार्ग स्थित गुप्ता रेजिडेंसी पर होने वाले पदयात्रा की रात्रि विश्राम से पूर्व धीरेंद्र शास्त्री के भजन एवं प्रवचन होंगे। इसके लिए वाराणसी केकलाकारों ने बाबा बागेश्वर धाम की रेत पर कलाकृति बनाई है। वाराणसी निवासी रूपेश सिंह ने बताया कि वह पंडित धीरेंद्र शास्त्री की सेंड सेकलाकृति बना रहे हैं। हमें उम्मीद है कि महाराज हमारी सेंड आर्ट से प्रसन्न होंगे और हमसे मिलेंगे। सेंड आर्ट बनाने वालों में मोहन सिंह, अलंकुता, आशु कुमारी रोहन सिंह आदि शामिल हैं।
न्यूयॉर्क सिटी के नवनिर्वाचित मेयर ने स्टारबक्स बहिष्कार का किया आह्वान, यूनियन की ‘रेड कप रिबेलियन’ हड़ताल तेज

न्यूयॉर्क सिटी के नवनिर्वाचित मेयर जोहरान ममदानी ने शुक्रवार को स्टारबक्स के बहिष्कार की अपील करते हुए लोगों से कहा कि वे हड़ताल पर बैठेयूनियन बारिस्ताओं का साथ दें। ममदानी ने साफ कहा कि जब तक कर्मचारियों की हड़ताल जारी है, वे खुद भी स्टारबक्स से कॉफी नहीं खरीदेंगे औरजनता से भी ऐसा ही करने को कहा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, ‘स्टारबक्स के कर्मचारी पूरे देश में एकअनफेयर लेबर प्रैक्टिस स्ट्राइक पर हैं, और एक उचित कॉन्ट्रैक्ट के लिए लड़ रहे हैं। जब तक वे हड़ताल पर हैं, मैं स्टारबक्स नहीं खरीदूंगा। आप भीहमारा साथ दें। नो कॉन्ट्रैक्ट, नो कॉफी।’ इसी दिन यूनियन स्टारबक्स वर्कर यूनाइटेड ने एक ओपन-एंडेड हड़ताल शुरू की, जिसे उन्होंने ‘रेड कपरिबेलियन’ नाम दिया है। यह हड़ताल स्टारबक्स के सालाना रेड कप डे के साथ रखी गई, वह दिन जब कंपनी के स्टोर सबसे ज्यादा भीड़ देखते हैं, क्योंकि ग्राहक फ्री रीयूजेबल हॉलिडे कप लेने के लिए बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। इस हड़ताल में 25 से अधिक अमेरिकी शहरों में कर्मचारी इस हड़तालमें शामिल हुए। वहीं यूनियन ने कहा कि यह स्टारबक्स के इतिहास की सबसे बड़ी और सबसे लंबी अनुचित श्रम अभ्यास (यूएलपी) हड़ताल बनसकती है। यूनियन ने लोगों से अपील की, ‘नो कॉन्ट्रैक्ट, नो कॉफी… हड़ताल के दौरान स्टारबक्स मत खरीदिए! लगभग 9000 स्टारबक्स बारिस्ताओं का प्रतिनिधित्व करतीबारिस्ताओं का प्रतिनिधित्व करतीयूनियन, जो लगभग 9000 स्टारबक्स बारिस्ताओं का प्रतिनिधित्व करती है, कहती है कि स्टारबक्स बातचीत से बचरहा है, कंपनी के खिलाफ 1000 से अधिक अनफेयर लेबर प्रैक्टिस शिकायतें नेशनल लेबर रिलेशंस बोर्ड (एनएलआरबी) में दर्ज की गई हैं। यूनियनचेतावनी दे चुकी है कि अगर बातचीत आगे नहीं बढ़ी, तो हड़ताल और फैल सकती है। यह 2023 से अब तक यूनियन की चौथी हड़ताल है और2024 में बने सीईओ ब्रायन निकॉल के कार्यकाल में तीसरी। स्टारबक्स यूनियन के आरोपों से इनकार करती है। कंपनी के अनुसार, यूनियन की मांगेंअनुचित हैं, कंपनी पहले ही कर्मचारियों को औसतन 19 डॉलर प्रति घंटा और लाभों समेत 30 डॉलर से अधिक का पैकेज देती है। स्टारबक्स का यहभी कहना है कि वह अपने कर्मचारियों को ‘उद्योग में सर्वश्रेष्ठ सुविधाएं’ देता है। स्टारबक्स ने देशभर में सैकड़ों स्टोर्स बंद किएन्यूयॉर्क पोस्ट के अनुसार, बीते महीनों में स्टारबक्स ने देशभर में सैकड़ों स्टोर्स बंद किए, जिनमें 59 यूनियनाइज्ड स्टोर भी शामिल थे। कई बंद स्टोरोंको केवल कुछ दिनों का नोटिस ही मिला। पिछले साल भी ‘रेड कप डे’ की हड़ताल के दौरान कंपनी को करीब 60 स्टोर अस्थायी रूप से बंद करने पड़ेथे। न्यूयॉर्क पोस्ट के अनुसार, बीते महीनों में स्टारबक्स ने देशभर में सैकड़ों स्टोर्स बंद किए, जिनमें 59 यूनियनाइज्ड स्टोर भी शामिल थे। कई बंदस्टोरों को केवल कुछ दिनों का नोटिस ही मिला। पिछले साल भी ‘रेड कप डे’ की हड़ताल के दौरान कंपनी को करीब 60 स्टोर अस्थायी रूप से बंदकरने पड़े थे।
कोलकाता टेस्ट – ऋषभ पंत बने टेस्ट में सबसे ज्यादा छक्के लगाने वाले भारतीय बल्लेबाज़, भारत को 30 रनों की बढ़त

भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच जारी कोलकाता टेस्ट के दूसरे दिन स्टार विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत ने बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली। वहइस प्रारूप में सर्वाधिक छक्के लगाने वाले भारतीय बल्लेबाज बन गए। भारत के लिए पहली पारी में पंत ने दो छक्के और इतने ही चौके लगाए।भारत की पहली पारी में पांचवें नंबर पर बल्लेबाजी के लिए आए पंत ने 24 गेंदों में 27 रन बनाए। इस दौरान उनके बल्ले से दो गगनचुंबी छक्केनिकले। इसी के साथ वह टेस्ट में सर्वाधिक छक्के लगाने वाले भारतीय बल्लेबाज बन गए। अब उनके नाम 83 टेस्ट पारियों में 92 छक्के दर्ज हैंजबकि पूर्व सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने 180 पारियों में 91 छक्के लगाए। इस मामले में तीसरे स्थान पर पूर्व कप्तान रोहित शर्मा हैं जिन्होंने116 पारियों में 8 छक्के ठोके। 30 रनों की मामूली बढ़त हासिल कीभारत ने पहली पारी में 189 रन बनाए और दक्षिण अफ्रीका पर 30 रनों की मामूली बढ़त हासिल की। भारतीय कप्तान शुभमन गिल बल्लेबाजी करतेहुए चोटिल हो गए थे जिस कारण वह रिटायर्ड हर्ट होकर पवेलियन लौटे। इसके बाद वह बल्लेबाजी के लिए नहीं उतर सके जिस कारण नौ विकेटगिरने के बाद भारत की पहली पारी समाप्त हो गई। दक्षिण अफ्रीका ने पहली पारी में 159 रन बनाए थे। भारत के लिए केएल राहुल ने सबसे ज्यादा39 रन बनाए, जबकि वाशिंगटन सुंदर ने 29 रनों की पारी खेली। राहुल और वाशिंगटन के बीच दूसरे विकेट के लिए अर्धशतकीय साझेदारी हुई।भारत की ओर से ऋषभ पंत ने 27, रवींद्र जडेजा ने 27, अक्षर पटेल ने 14, ध्रुव जुरेल ने 14, यशस्वी जायसवाल ने 12, कुलदीप यादव ने 1, मोहम्मद सिराज ने 1 और जसप्रीत बुमराह ने नाबाद 1 रन बनाए। वहीं, गिल चार रन बनाकर रिटायर्ड हर्ट हुए थे। दक्षिण अफ्रीका के लिए सिमोनहार्मर ने चार विकेट झटके, जबकि मार्को यानसेन को तीन सफलता मिली। केशव महाराज और कॉर्बिन बॉश ने एक-एक विकेट लिया।
सहारनपुर अस्पताल में आतंकी साजिश, डॉक्टर आदिल की गिरफ्तारी के बाद संपर्कों की पड़ताल

डॉक्टर के वेश में आदिल कितने खतरनाक मंसूबे पाल रहा था, इसकी भनक किसी को नहीं थी। लेकिन उसकी गिरफ्तारी के बाद जैसे-जैसे एटीएसकी जांच आगे बढ़ रही है, कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। फरीदाबाद में विस्फोटक पदार्थ और हथियारों का जखीरा मिलने के बाद अबएजेंसियों को शक है कि क्या आदिल पश्चिमी यूपी में बड़ा आतंकी नेटवर्क खड़ा करने की तैयारी में था। अनंतनाग का रहने वाला डॉ. आदिल उत्तरप्रदेश के सहारनपुर जनपद में अंबाला रोड स्थित फेमस मेडिकेयर अस्पताल में कार्यरत था। 7 नवंबर को उसकी गिरफ्तारी के बाद से पुलिस औरखुफिया एजेंसियां सक्रिय हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आदिल पश्चिमी यूपी के कई डॉक्टरों के संपर्क में था, जिनमें से कुछ जम्मू-कश्मीरके मूल निवासी हैं। एजेंसियां अब इन सभी संपर्कों की गहन पड़ताल कर रही हैं। आतंकी नेटवर्क से जुड़ा निकलेगासहारनपुर को पश्चिमी यूपी का सबसे संवेदनशील जिला माना जाता है। यहां एयरफोर्स स्टेशन, एयरपोर्ट, रिमाउंट डिपो और दारुल उलूम जैसे संस्थानहैं। यही कारण माना जा रहा है कि अनंतनाग के सरकारी मेडिकल कॉलेज की नौकरी छोड़कर आदिल ने यहां काम करना शुरू किया और गुप्त रूप सेअपना नेटवर्क बढ़ाने की कोशिश की। फेमस अस्पताल से एहतियातन छुट्टी पर भेजे गए डॉ आदिल के साथी डॉ. बाबर और एडमिन इंचार्ज डॉ. असलम जैदी ने बुधवार को अपनी ड्यूटी फिर से ज्वाइन कर ली। डॉ. बाबर ने कहा, ‘हम डॉक्टर की शादी में गए थे लेकिन ये नहीं जानते थे कि वहआतंकी नेटवर्क से जुड़ा निकलेगा। चार नवंबर को शादी का निमंत्रण मिला था और हम दो दिन पहले घूमने निकले थे। हमारे उससे केवल पेशेवर रिश्तेही थे। मां की बीमारी को लेकर उसके साथियों ने बतायाउन्होंने बताया कि आदिल अक्सर कश्मीरी भाषा में बात करता था, लेकिन उसके व्यवहार से कभी संदेह नहीं हुआ। गिरफ्तारी के बाद फैली अफवाहोंको लेकर उन्होंने कहा, ‘हमारा उससे पेशेवर रिश्ता ही था, बाकी सब गलत प्रचार है। यह भी सवाल है कि क्या डॉ आदिल को अपनी गिरफ्तारी कोलेकर पहले से अंदेशा था। सहयोगी डॉ. बाबर ने बताया कि गिरफ्तारी से पहले आदिल ने कहा था कि उसकी मां बीमार हैं, इसलिए वह गांव जा रहाहै। शायद उसे पहले से शक हो गया था कि वह पकड़ा जाएगा। वहीं, एडमिन इंचार्ज डॉ. असलम जैदी ने भी ड्यूटी संभाली, हालांकि उन्होंने मीडियासे दूरी बनाए रखी। डॉ. आदिल की गिरफ्तारी के बाद जांच में नए खुलासे सामने आ रहे हैं। सहारनपुर के फेमस अस्पताल में कार्यरत डॉक्टर आदिलकी शादी और मां की बीमारी को लेकर उसके साथियों ने बताया कि किसी को अंदाजा नहीं था कि वह आतंकी गतिविधियों से जुड़ा है। एटीएस अबउसके संपर्कों की जांच कर रही है।