सऊदी अरब में भीषण बस हादसा 40 से ज्यादा भारतीयों की मौत, PM मोदी व केजरीवाल ने जताया शोक

सऊदी अरब में हुए भीषण सड़क हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस हादसे में 40 से ज्यादा भारतीयों की मौत की आशंका है। यहहादसा उस समय हुआ, जब उमराह के लिए गए लोगों को लेकर जा रही बस एक तेल के टैंकर से टकरा गई। सऊदी अरब के मीडिया की रिपोर्ट्स केअनुसार, हादसा मदीना के नजदीक हुआ। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यंमत्री अरविंद केजरीवाल ने एक्स पर पोस्टसाझा किया है। जिसमें उन्होंने लिखा कि सऊदी अरब में हुआ यह दर्दनाक हादसा दिल दहला देने वाला है। इस हादसे में जिन भारतीयों ने अपनी जानगंवाई, उनके परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। साथ ही उन्होंने आगे लिखा कि भारत सरकार को तुरंत सऊदी सरकार से बातचीत कर सभीमृतकों और घायलों की पूरी जानकारी और हर संभव मदद उनके परिवारों तक पहुंचानी चाहिए। ऐसे समय में सरकार का हर कदम तेज, संवेदनशीलऔर जिम्मेदार होना जरूरी है। महिलाएं और बच्चे भी शामिलप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सऊदी अरब हादसे पर दुख जताया। सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में पीएम मोदी ने लिखा कि ‘मदीना में भारतीयनागरिकों के साथ हुए हादसे से बेहद दुखी हूं। पीड़ित परिवारों के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं। मैं हादसे में घायल लोगों के जल्द ठीक होने की कामना करताहूं। रियाद स्थित हमारा दूतावास और जेद्दाह का महावाणिज्य दूतावास हरसंभव मदद मुहैया करा रहे हैं। हमारे अधिकारी भी सऊदी अरब सरकार केअधिकारियों के संपर्क में हैं।’ गल्फ न्यूज की रिपोर्ट्स के अनुसार, उमराह गए लोगों को लेकर बस मक्का से मदीना जा रही थी, जब वह रास्ते में डीजलटैंकर से टकरा गई। हादसा स्थानीय समय अनुसार, सुबह करीब 1.30 बजे मुहरास या मुफरिआत इलाके में हुआ, जो मदीना से करीब 160 किलोमीटर दूर है। हादसे के समय कई यात्री सो रहे थे। टक्कर लगते ही बस आग की लपटों में घिर गई और लोगों को बचने का भी समय नहीं मिला।हादसा इतना भयानक था कि मृतकों की पहचान करना भी मुश्किल है। हादसे में कम से कम 42 लोगों की मौत की खबर है, जिनमें हैदराबाद के कईयात्रियों के होने की आशंका है। मरने वालों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।
उत्तराखंड निवास में छात्रों से संवाद, सीएम धामी ने बोले मनुष्य के अंदर होती असीम शक्ति “गलतियां सुधारें और समय का सही उपयोग करें”

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि छात्र समय प्रबंधन के साथ अगर अपनी गलतियां सुधारने पर फोकस करेंगे तो निश्चित तौर पर उनके लिए आनेवाला समय और बेहतर होगा। रविवार को नई दिल्ली स्थित उत्तराखंड निवास में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भारत दर्शन शैक्षिक भ्रमण कार्यक्रम2025 में देवप्रयाग विधानसभा क्षेत्र के मेधावी छात्र-छात्राओं के साथ संवाद किया। विश्वास जताया कि इस भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने बहुमूल्यअनुभव प्राप्त किए होंगे। विद्यार्थियों को उनके विद्यालय में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए बधाई दी। बताया कि इस तरह के शैक्षिक भ्रमण अब राज्य स्तरपर भी शुरू किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ज्ञान, विज्ञान और अनुसंधान से नई चीजें सीखने का अवसर मिलता है। उन्होंने अपने विद्यार्थी जीवनका अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनके पिताजी के सेना से सेवानिवृत्त होने के समय वे 9वीं कक्षा के छात्र थे और 10वीं उत्तीर्ण करने के लिएअकेले खटीमा से नैनीताल एक्सप्रेस पकड़कर सागर गए थे। यह उनका पहला शैक्षिक भ्रमण था, जिसने उन्हें सतत सीखने की प्रेरणा दी। कहा कियुवाओं के कंधों पर देश की जिम्मेदारियां आएंगी। मनुष्य के अंदर असीम शक्तिपढ़ाई का समय पुनः नहीं आता। इसलिए परिश्रम, कौशल और नियमों का पालन करते हुए लक्ष्य प्राप्त करना आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने कहा किलेखन प्रक्रिया को साफ-सुथरा बनाना चाहिए। कभी अपने लक्ष्यों से भटकें नहीं। स्वामी विवेकानंद का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि मनुष्य के अंदरअसीम शक्ति है। जिसे पाने के लिए स्वयं पर विश्वास करना, एकाग्र रहना और लगातार प्रयास करते रहना जरूरी है। छात्रों को समय प्रबंधन के प्रतिजागरूक रहने की सलाह दी। ऐसा करने से विद्यार्थी अपनी गलतियों में सुधार कर सकेंगे और समय का सही उपयोग कर पाएंगे। उन्होंने कहा किजीवन में चुनौतियां और प्रतिस्पर्धा जरूरी हैं, इनके बिना जीवन प्रेरणाहीन बन जाएगा। इस मौके पर देवप्रयाग विधायक विनोद कंडारी मौजूद रहे।भारत दर्शन शैक्षिक भ्रमण दल उत्तराखंड निवास में सीएम धामी से मिला। सीएम धामी ने इस दौरान स्वामी विवेकानंद का स्मरण करते हुए कहा किमनुष्य के अंदर असीम शक्ति है। जिसे पाने के लिए स्वयं पर विश्वास करना, एकाग्र रहना और लगातार प्रयास करते रहना जरूरी है।
छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, झारखंड, ओडिशा और महाराष्ट्र से आए आदिवासी युवाओं का दिल्ली विधानसभा में भव्य स्वागत

एकता, संस्कृति और लोकतंत्र का संगमदिल्ली विधानसभा परिसर में भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, झारखंड, ओडिशा और महाराष्ट्र के नक्सल प्रभावित जिलों से आए युवा और अर्द्धसैनिक बलों के अधिकारी शामिल हुए। यह कार्यक्रमएकता, संस्कृति, शिक्षा और लोकतांत्रिक समझ को एक साथ जोड़ने वाला अनूठा आयोजन बना। अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता का प्रेरणादायक संदेश बिरसा मुंडा का सम्मानकार्यक्रम में दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने भगवान बिरसा मुंडा को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनकी 150वीं जयंती न केवल उनकेयोगदान को याद करने का अवसर है, बल्कि यह दिन हमें समावेशी और सतत भारत के निर्माण के लिए संकल्प मजबूत करने की प्रेरणा देता है। उन्होंनेकहा कि बिरसा मुंडा का जनआंदोलन सामाजिक जागरण, आध्यात्मिक चेतना और राजनीतिक उत्थान का संगम था। उनकी दी हुई “जल, जंगल, जमीन” की परंपरा आज भी देश के विकास को नई दिशा देती है। गुप्ता ने युवा प्रतिनिधियों से कहा कि बिरसा मुंडा के मूल्य—समानता, ईमानदारीऔर प्रकृति का सम्मान—हर भारतीय के जीवन में जगह पाने चाहिए, क्योंकि यही मूल्य भारत को आगे ले जाते हैं। राज्यों से आए युवाओं की दिल्ली यात्रा सीख, अनुभव और उत्साहमेरा युवा भारत कार्यक्रम के तहत बस्तर, कांकेर, नारायणपुर, पश्चिमी सिंहभूम, बालाघाट, कंधमाल, कालाहांडी और गढ़चिरौली जैसे नक्सल प्रभावितजिलों से आए 200 युवाओं ने दिल्ली विधानसभा का दौरा किया। युवाओं ने दिल्ली की आधुनिक संरचनाओं, विविध सांस्कृतिक माहौल औरलोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को करीब से देखकर बहुत उत्साह व्यक्त किया। कई युवाओं ने मंच पर आकर अपने अनुभव भी साझा किए, जिससे साफदिखा कि दिल्ली का यह भ्रमण उनके दृष्टिकोण को नया विस्तार दे रहा है। सीआरपीएफ, बीएसएफ और आईटीबीपी के अधिकारी भी अपने अनुभवोंको साझा करते दिखे, जिससे कार्यक्रम और भी समृद्ध हुआ। एकता की भावना को मजबूत करने का अवसर अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने युवाओं का स्वागत कियाअपने संबोधन में विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से आए युवाओं और अर्द्धसैनिक अधिकारियों का यह दौरा राष्ट्रीय एकता और भाईचारेका प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इन युवाओं की उपस्थिति यह संदेश देती है कि भारत का भविष्य सुरक्षित हाथों में है—ऐसे हाथों में, जो अपनी संस्कृतिको भी समझते हैं और आधुनिकता को भी। अध्यक्ष ने युवाओं से कहा कि वे अपने समाज और परिवार के लिए प्रेरणा बनें और देश के विकास मेंसक्रिय भागीदार बनें। शिक्षा तब पूर्ण जब जड़ों से जुड़ी हो कैबिनेट मंत्री आशीष सूद का कथनमुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में उपस्थित कैबिनेट मंत्री आशीष सूद ने कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 का उद्देश्य तभी साकार होता है जब छात्रअपने देश की विविधता को समझें, यात्रा करें और अपनी जड़ों को जानें।उन्होंने कहा कि दिल्ली विधानसभा का यह भ्रमण युवाओं के लिए अपनी संस्कृति, परंपरा और राष्ट्रीय पहचान को समझने का उत्कृष्ट अवसर है। उन्होंनेअध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता का धन्यवाद करते हुए कहा कि यह पहल युवाओं के मन में राष्ट्रीय एकता की भावना को और मजबूत करेगी। नई ऊर्जा और नए सपनों की शुरुआत उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट का संदेशविधानसभा के उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट ने कहा कि मेरा युवा भारत कार्यक्रम के माध्यम से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के युवाओं का यह दौरा सरकार केउस राष्ट्रीय संकल्प का प्रतीक है, जो युवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि दिल्ली विधानसभा का यह अनुभवयुवाओं में नए सपने जगाएगा और उन्हें राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित करेगा। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आकर्षण परंपरा और ऊर्जा का सुंदर मिश्रणकार्यक्रम में हिंदी अकादमी के कलाकारों ने झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा और मध्य प्रदेश की पारंपरिक नृत्य शैलियों की आकर्षक प्रस्तुतियाँ दीं।नृत्य और संगीत की इन सुंदर प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को उत्साह और सांस्कृतिक समृद्धि से भर दिया। युवाओं ने इन प्रस्तुतियों का भरपूर आनंदलिया और इसे जीवन का यादगार अनुभव बताया। एक भारत, श्रेष्ठ भारत की ओर बढ़ता मजबूत कदमभगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर आयोजित यह कार्यक्रम विभिन्न राज्यों, संस्कृतियों और क्षेत्रों को एक सूत्र में जोड़ने वाला शानदार उदाहरणबना। अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता, मंत्री आशीष सूद और उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट के विचारों ने युवाओं को नया दृष्टिकोण दिया। यह कार्यक्रम यह संदेश देगया कि भारत की शक्ति उसकी विविधता, एकता, संस्कृति और युवा ऊर्जा में निहित है। यह आयोजन आने वाले समय में देश की सामूहिक चेतनाको और मजबूत करेगा और युवाओं को राष्ट्र निर्माण की दिशा में प्रेरित करता रहेगा।
ऑपरेशन सिंदूर में दिखी तीनों सेनाओं की जबरदस्त तालमेल सीडीएस चौहान का बड़ा बयान

भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने कहा कि सेना, नौसेना और वायुसेना में तेजी से बढ़ रही संयुक्तता के बावजूदतीनों सेवाओं की अलग पहचान बनी रहेगी। पहलगाम हमले के बाद हुए ऑपरेशन सिंदूर में दिखी बेहतरीन तालमेल का जिक्र करते हुए उन्होंने बतायाकि नई क्षमताएं, साझा संसाधन और तकनीक-आधारित तैयारी भारत को भविष्य के युद्धों में बढ़त दिलाएंगी, जहां जीत स्मार्ट और तेज रणनीतियों सेतय होगी। बता दें कि सीडीएस चौहान ने ये बातें नई दिल्ली में 14-15 नवंबर को आयोजित इंडियन मिलिटरी हेरिटेज फेस्टिवल के एक सत्र के दौरानकही। वायुसेना को पहले पता नहींऑपरेशन सिंदूर को लेकर जनरल चौहान ने कहा कि हाल ही में हुई ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तीनों सेनाओं के बीच बेहतरीन तालमेल देखने को मिला।उन्होंने कहा कि 22 अप्रैल से 7 मई के बीच कई महत्वपूर्ण सैन्य संसाधनों को पश्चिमी सीमा की ओर शिफ्ट करना पड़ा और यह काम बेहद सहजतरीके से, सिर्फ एक स्टार रैंक के अधिकारी स्तर पर ही पूरा हो गया। सीडीएस ने बताया कि तीनों सेनाओं में समान उपकरणों, जैसे एमआरएसएएमऔर ब्रह्मोस का इस्तेमाल बढ़ रहा है, जिससे इंटीग्रेशन आसान होता जा रहा है। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि इन हालिया हमलों में भारतीयनौसेना ने भी हिस्सा लिया और अपने पीएएलएम-400 व पीएएलएम-120 जैसे लंबी दूरी वाले घूमते हुए गोला-बारूद का इस्तेमाल किया।दिलचस्प बात यह रही कि यह क्षमता सेना और वायुसेना को पहले पता नहीं थी, लेकिन इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (आईडीएस) के पास यह जानकारीथी। तेज और स्मार्ट रणनीतियों से बढ़त बनाएगाभविष्य की तैयारी पर चर्चा करते हुए सीडीएस ने कहा कि थियेटर कमांड्स बनने पर संयुक्त हेडक्वॉर्टर में स्टाफ भी संयुक्त रूप से प्रशिक्षित कियाजाएगा, ताकि एक ‘जॉइंट कल्चर’ विकसित हो सके। उन्होंने युद्ध के बदलते स्वरूप पर भी बात की और कहा कि मानव भूगोल को समझना उतना हीआवश्यक है जितना भौगोलिक भूगोल, खासकर आतंकवाद और उग्रवाद से निपटने में। सीडीएस के मुताबिक भावी युद्ध में जीत उन्हीं की होगी जो नएक्षेत्रों, जैसे अंतरिक्ष और तकनीकी डोमेन में असमानताएं पैदा कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि पारंपरिक युद्ध हमेशा कठिन और ज्यादा नुकसान वाला होगा, जबकि नए क्षेत्रों में युद्ध तेज, स्मार्ट और तकनीक आधारित होगा। सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने कहा कि सेना, नौसेना और वायुसेना में संयुक्तताबढ़ रही है, लेकिन सेवाओं की अलग पहचान बनी रहेगी। ऑपरेशन सिंदूर में तीनों सेनाओं ने शानदार तालमेल दिखाया। एमआरएसएएम और ब्रह्मोसजैसी तकनीक और साझा संसाधनों से भारत भविष्य के युद्धों में तेज और स्मार्ट रणनीतियों से बढ़त बनाएगा।
सीएम हेमंत सोरेन से मिले सोमेश सोरेन, घाटशिला के विकास को नई गति देने का संकल्प

रांची के घाटशिला विधान चुनाव में नव निर्वाचित विधायक सह झामुमो नेता सोमेश सोरेन ने रविवार को कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवासीयकार्यालय में सीएम हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन से मुलाकात की। इस दौरान सीएम हेमंत सोरेन ने झामुमो विधायक सोमेश सोरेन को जीत की ढेरसारी बधाई दी। मौके पर घाटशिला विधानसभा के नवनिर्वाचित विधायक सोमेश मौके पर मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि यह विजय घाटशिलाकी जनता की आकांक्षाओं और विश्वास की जीत है। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय रामदास सोरेन द्वारा जनहित में आरंभ किए गए कार्यों और अधूरे सपनोंको आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी अब उनके पुत्र सोमेश सोरेन के कंधों पर है। मुख्यमंत्री ने भरोसा जताया कि सोरेन जनसेवा एवं विकास कार्यों की दिशामें अपनी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करेंगे। कल्पना सोरेन से मुलाकातघाटशिला में स्व. रामदास सोरेन ने विकास कार्यों को चलाया था उसे अब सोमेश सोरेन पूरा करने का काम करेंगे। वहीं घाटशिला के विधायक सोमेश सोरेन ने कहा कि घाटशिला की जनता ने जो भरोसा और आशीर्वाद मुझे दिया है। उसका भरोसा और विश्वास काभी तोड़ने नहीं दूंगा। घाटशिला विधानसभा क्षेत्र में मेरे पिता जी पूर्व शिक्षा मंत्री स्व. रामदास सोरेन ने शिक्षा के क्षेत्र में अनेक कार्य किए हैं उन कार्यों को और गति सेदेने का काम किया जाएगा। साथ ही राज्य और केंद्र प्रायोजित योजनाओं को जन जन तक पहुंचाने का कार्य किया जाएगा। नव निर्वाचित विधायकसोमेश सोरेन अपने पूरे परिवार के साथ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिलने उनके आवास पहुंचे थे। नव निर्वाचित विधायक सह झामुमो नेता सोमेश सोरेनने रविवार को कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में सीएम हेमंत सोरेन व कल्पना सोरेन से मुलाकात की।
लालू परिवार के विवाद पर चिराग पासवान भावुक, कहा, मैंने हमेशा रोहिणी-तेजस्वी को अपना परिवार माना लेकिन ‘ऐसे वक्त पर चुप रहना ही सही’

लालू परिवार में मचे घमासान पर अब लोक जनशक्ति पार्टी के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने प्रतिक्रिया दी है। रोहिणी आचार्य द्वाराराजनीति से संन्यास लेने और परिवार से दूरी बनाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे पर कोई राजनीतिक टिप्पणी नहीं करना चाहते, क्योंकिवह समझते हैं कि जब कोई परिवार मुश्किल दौर से गुजरता है तो उसकी मानसिक स्थिति कैसी होती है। चिराग पासवान ने भावुक होते हुए कहा किमैं खुद भी ऐसे दौर से गुजर चुका हूं। हमारे राजनीतिक मतभेद जरूर रहे होंगे, लेकिन मैंने हमेशा लालू प्रसाद यादव के पूरे परिवार को अपना परिवारमाना है। तेजस्वी हों, तेज हों, मीसा या रोहिणी मैंने सभी को भाई-बहन की तरह माना है। उन्होंने उम्मीद जताते हुए कहा कि लालू परिवार का यहविवाद जल्द खत्म हो जाए। पासवान बोले कि परिवार में एकता हो तो इंसान बाहर की हर मुश्किल से लड़ सकता है। परिवार इस समय बेहद कठिनस्थिति से गुजर रहा होगा। कोई प्रतिक्रिया दे पाएंगेरोहिणी आचार्य के राजनीति छोड़ने और परिवार से दूरी बनाने के फैसले पर पार्टी प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि, “यह पूरी तरह पारिवारिकमामला है। इस पर परिवार के सदस्य ही बात करेंगे। पार्टी की शीर्ष नेतृत्व टीम इस मामले को देखेगी। अभी-अभी चुनाव परिणाम आए हैं। ऐसेपरिणाम क्यों आए, इसकी क्या वजहें रही— इसका विश्लेषण किया जाएगा। उसके बाद ही हम कोई प्रतिक्रिया दे पाएंगे। रोहिणी जी ने जो मिसालपेश की है, वह सभी जानते हैं। हर कोई ऐसी बेटी और बहन चाहता है…” आज गंदा बता दिया गयारोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर फिर लिखा, जिसके बाद लगातार बवाल बढ़ता चला जा रहा है। उन्होंने लिखा कि, “कल मुझे गालियों के साथबोला गया कि मैं गंदी हूँ और मैंने अपने पिता को अपनी गंदी किडनी लगवा दी , करोड़ों रूपए लिए , टिकट लिया तब लगवाई गंदी किडनी .. सभीबेटी – बहन , जो शादीशुदा हैं उनको मैं बोलूंगी कि जब आपके मायके में कोई बेटा – भाई हो , तो भूल कर भी अपने भगवान रूपी पिता को नहींबचाएं , अपने भाई , उस घर के बेटे को ही बोले कि वो अपनी या अपने किसी हरियाणवी दोस्त की किडनी लगवा दे ” .. सभी बहन – बेटियां अपनाघर – परिवार देखें, अपने माता – पिता की परवाह किए बिना अपने बच्चे , अपना काम, अपना ससुराल देखें , सिर्फ अपने बारे में सोचें .. मुझसे तो येबड़ा गुनाह हो गया कि मैंने अपना परिवार, अपने तीनो बच्चों को नहीं देखा , किडनी देते वक्त न अपने पति, न अपने ससुराल से अनुमति ली .. अपनेभगवान, अपने पिता को बचाने के लिए वो कर दिया जिसे आज गंदा बता दिया गया .. आप सब मेरे जैसी गलती , कभी , ना करे किसी घर रोहिणीजैसी बेटी ना हो।”
भारत का डेफलिंपिक्स में सुनहरा आगाज़, धनुष श्रीकांत ने रचा इतिहास, तोड़ा डेफ वर्ल्ड रिकॉर्ड

भारत के युवा निशानेबाज धनुष श्रीकांत ने टोक्यो में चल रहे डेफलिंपिक्स में पुरुष 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीतकर भारत काखाता खोल दिया। 23 वर्षीय धनुष ने फाइनल में 252.2 अंक बनाते हुए डेफ फाइनल वर्ल्ड रिकॉर्ड स्थापित किया। भारत के ही मोहम्मद मुर्तजावानिया ने 250.1 अंक के साथ रजत पदक अपने नाम किया, जबकि दक्षिण कोरिया के बैक स्यूंघाक को 223.6 अंक के साथ कांस्य मिला। धनुष नेक्वालिफिकेशन राउंड में 630.6 अंक बनाकर डेफलिंपिक्स रिकॉर्ड कायम किया। मुर्तजा 626.3 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहे। फाइनल में धनुषने न सिर्फ डेफलिंपिक्स रिकॉर्ड तोड़ा बल्कि डेफ फाइनल वर्ल्ड रिकॉर्ड भी अपने नाम किया। यह उनके करियर का दूसरा पुरुष 10 मीटर एयर राइफलडेफलिंपिक्स स्वर्ण है। 2022 के कैक्सियास डू सुल डेफलिंपिक्स में उन्होंने व्यक्तिगत और मिक्स्ड टीम दोनों में स्वर्ण जीते थे। 252.4 अंक के विश्व रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण जीताधनुष अब सोमवार को महित संधू के साथ 10 मीटर एयर राइफल मिश्रित टीम इवेंट में उतरेंगे, जहां उनका लक्ष्य अपने करियर का चौथा डेफलिंपिक्सस्वर्ण हासिल करना होगा।महिला 10 मीटर एयर राइफल में भारत की महित संधू (20 वर्ष) ने 250.5 अंक के साथ रजत पदक जीता। भारत की कोमल वाघमारे (228.3) कोकांस्य मिला, जबकि यूक्रेन की लिडकोवा वायोलेटा ने 252.4 अंक के विश्व रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण जीता। डेफ फाइनल वर्ल्ड रिकॉर्ड भी अपने नाम कियाधनुष की मां आशा श्रीकांत ने कहा, ‘धनुष कल काफी आत्मविश्वास में था। उसकी रैंकिंग पिछले साल से थोड़ी उतार-चढ़ाव में थी, लेकिन यह प्रदर्शनउसके लिए बहुत प्रेरणादायक है।’ उन्होंने बताया कि धनुष पहले राष्ट्रीय स्तर पर नंबर-1 पर भी पहुंच चुके हैं। बचपन से श्रवण बाधित धनुष के दोबार कोक्लियर इम्प्लांट सर्जरी हुई, पहली एक साल की उम्र में और दूसरी नौ साल की उम्र में। उन्होंने आगे कहा, ‘वह मशीन के सहारे सुनता है। वहकुछ ही शब्द बोल पाता है और ज्यादातर इशारों के जरिए समझाता है।’ धनुष ने क्वालिफिकेशन राउंड में 630.6 अंक बनाकर डेफलिंपिक्स रिकॉर्डकायम किया। मुर्तजा 626.3 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहे। फाइनल में धनुष ने न सिर्फ डेफलिंपिक्स रिकॉर्ड तोड़ा बल्कि डेफ फाइनल वर्ल्डरिकॉर्ड भी अपने नाम किया।
युद्ध के बीच शांति की किरण, तुर्की-UAE की मध्यस्थता में 1,200 यूक्रेनी सैनिकों की रिहाई पर सहमति

रूस और यूक्रेन के बीच तीन साल से संघर्ष जारी है। रूस आज भी यूक्रेन पर हमले कर रहा है। हालांकि इनसब के बीच में अब एक अच्छी खबर सामनेआ रही है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोदिमिर जेलेंस्की ने रविवार को कहा कि उनकी सरकार रूस के साथ कैदियों के आदान-प्रदान को फिर से शुरू करनेकी कोशिश कर रही है। इसका मकसद लगभग 1200 यूक्रेनी सैनिकों को घर लाना है। जेलेंस्की ने बताया कि इस पर कई बैठकें और बातचीत चलरही हैं और अलग-अलग माध्यमों से संपर्क बनाए जा रहे हैं। यूक्रेन के राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा परिषद के सचिव रुस्तम उमेरोव ने शनिवार को कहा किइस मामले में तुर्किय और संयुक्त अरब अमीरात की मध्यस्थता में बातचीत हुई। दोनों पक्षों ने इस्तांबुल में 2022 में बनाए गए कैदियों के आदान-प्रदान के नियमों को लागू करने पर सहमति जताई है। उमेरोव ने कहा कि अब तकनीकी और प्रक्रिया से जुड़े अंतिम निर्णय जल्द लिए जाएंगे। उन्होंनेउम्मीद जताई कि लौटे हुए यूक्रेनी सैनिक नए साल और क्रिसमस अपने परिवार के साथ मना सकेंगे। सैनिक नए साल और क्रिसमस अपने परिवार के साथ मना सकेंगेहालांकि इन सबके बीच रूस का यूक्रेन पर हमला जारी है। ताजा अपडेट की बात करें तो रूस के ड्रोन हमलों से यूक्रेन के ओडेसा क्षेत्र में बिजली औरऊर्जा संबंधी कई जगहों को नुकसान हुआ। इसमें एक सोलर पावर प्लांट भी प्रभावित हुआ। यूक्रेन सर्दियों के करीब आते ही लगातार हो रहे रूसीहवाई हमलों और बिजली कटौती से जूझ रहा है। यूक्रेनी वायु सेना के अनुसार, रूस ने एक रात में 176 ड्रोन और एक मिसाइल दागी, जबकि यूक्रेनीसेनाओं ने इनमें से 139 ड्रोन को मार गिराया या बेअसर किया। दूसरी ओर रूस की रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि उसने 57 यूक्रेनी ड्रोन को नष्टकिया। इस समय यूक्रेन अपनी सीमाओं को बचाने और रूस के आगे बढ़ने की कोशिशों को रोकने में जुटा है। साथ ही अब यह कोशिश जारी है किकैदियों को जल्द घर लौटाया जाए और उन्हें अपने परिवार के बीच त्योहार मनाने का मौका मिले। यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा कि उनकीसरकार रूस के साथ कैदियों के आदान-प्रदान को फिर से शुरू करने की कोशिश कर रही है। तुर्की और UAE की मध्यस्थता में हुई बातचीत में 2022 के इस्तांबुल समझौते को लागू करने पर सहमति हुई है। उम्मीद है कि लौटे सैनिक नए साल और क्रिसमस अपने परिवार के साथ मना सकेंगे।
दलाई लामा की हिंदी जीवनी ‘अनश्वर’ का विमोचन, भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी ने तिब्बतियों के संघर्ष की सराहना की “जानें क्या कुछ कहा”

वरिष्ठ भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी ने शनिवार को कहा कि 14वें दलाई लामा की अहिंसा की शिक्षाओं के जरिए ही तिब्बत का पुनरुत्थान होगा।इसके साथ ही उन्होंने निर्वासित तिब्बती बौद्धों की भावनाओं की सराहना की। 14वें दलाई लामा तेनजिन ग्यात्सो की हिंदी में पहली अधिकृत जीवनीकी किताब ‘अनश्वर’ के विमोचन पर भाजपा नेता ने ये बात कही।14वें दलाई लामा की हिंदी में पहली अधिकृत जीवनी पत्रकार-लेखक अरविंद यादव ने ये किताब लिखी है। इस कार्यक्रम में मुरली मनोहर जोशी, पूर्वसांसद कर्ण सिंह और तिब्बत हाउस के निदेश गेशे दोरजी दामदुल मौजूद रहे। पूर्व केंद्रीय मंत्री जोशी ने कहा, ”मैं तिब्बती बौद्धों और तिब्बती लोगोंको नमन करता हूं कि उन्होंने अपने गुरु, उनके आदर्शों और उनके निर्देशों के लिए कितना कुछ सहा और स्वीकार किया है। फिर भी वे अपने सिद्धांतों सेकभी नहीं डिगे।तिब्बत अपनी जमीन पर फिर से काबिजभाजपा नेता ने कहा, “यहां आकर रहने वाले तिब्बती लोगों ने बहुत दिक्कतें सहीं। उनके सामने इतनी सारी परिस्थितियां आईं कि अगर कोई और याकोई दूसरा समुदाय होता तो वे विद्रोह कर देते या जिंदा रहने के लिए अपने मूल्यों को पूरी तरह बदल देते।” उन्होंने कहा कि बौद्ध धर्मगुरु ने सभी कोअहिंसा और सद्भाव के सिद्धांत सिखाए। उन्होंने कहा, ”तिब्बत एक बार फिर से उठ खड़ा होगा और अपनी जमीन पर फिर से हक जमाएगा। मैं जानताहूं कि वो दिन आएगा। हो सकता है कि मेरे जीवित रहते ये ना हो, लेकिन ऐसा होगा।”भाजपा नेता ने कहा, ”बहुत कम लोग जानते हैं कि बौद्ध धर्म सेचीन का परिचय तिब्बत ने ही कराया था। भारत से बौद्ध धर्म बाद में चीन पहुंचा, लेकिन पहले तिब्बतियों ने ही चीन में बौद्ध धर्म पहुंचाया।” उन्होंनेकहा कि मुझे अटूट विश्वास है कि तिब्बत अपनी जमीन पर फिर से काबिज होगा, जो चीन से भी बड़ी है।आध्यात्मिक प्रतीक के तौर पर उनके उदय तक की जानकारीउन्होंने दावा किया, ”एक समय था, जब चीन खुद तिब्बत के अंदर आता था। तिब्बत प्रशासन के अंतर्गत चीन का इलाका आता था। ये संभव है किएक दिन चीन पर तिब्बत का शासन होगा. वो उन्हें बताएगा कि इस तरह की चीज कभी नहीं करनी है और इस गलती को दोबारा नहीं दोहराना है।” मुरली मनोहर जोशी ने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान निर्वासित इस्राइल के यहूदियों के साथ भी तुलना की। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी मातृभूमि सेनिकाले जाने के अनुभव से कुछ नहीं सीखा। सर्व भाषा ट्रस्ट की ओर से प्रकाशित यह किताब दलाई लामा के जीवन के महत्वपूर्ण पलों को दर्शाती है, जिनमें अमदो में उनके बचपन से लेकर 14वें दलाई लामा के तौर पर मान्यता, तिब्बत पर चीन के कब्जे, उनके निर्वासन और एक वैश्विक आध्यात्मिकप्रतीक के तौर पर उनके उदय तक की जानकारी है।
उल्हासनगर में भाजपा को बड़ा झटका, छह पूर्व नगरसेवक शिंदे गुट शिवसेना और टीओके में शामिल

महाराष्ट्र में होने वाले स्थानीय निकाय चुनाव से पहले भाजपा को बड़ा झटका लगा है। उल्हासनगर से भाजपा के छह पूर्व नगरसेवकों ने शुक्रवार कोपार्टी छोड़कर शिंदे गुट के शिवसेना और उसकी स्थानीय सहयोगी टीम ओमी कालानी (टीओके) का दामन थाम लिया। इनमें से तीन नेता शहर मेंभाजपा के सबसे मजबूत चेहरों में माने जाते थे। बता दें कि एक तरफ जहां बिहार में भाजपा समर्थित एनडीए गठबंधन ने प्रचंड बहुमत हासिल कर, सत्ता में अपना स्थान कायम रखा है। वहीं दूसरी ओर महाराष्ट्र निकाय चुनाव से पहले छह नेताओं का पार्टी छोड़ना भाजपा के लिए बुरी खबर के तौरपर देखा जा रहा है। उल्हासनगर और कल्याण लोकसभा क्षेत्र में होने वाले आगामी नगर निगम चुनावों से पहले हुई यह टूट भाजपा के लिए बड़ानुकसान मानी जा रही है। वहीं, दो महीने पहले पांच पूर्व नगरसेवकों के भाजपा में जाने से कमजोर हुई कालानी परिवार की पकड़ को यह घटना फिर सेमजबूती की राह पर ला सकती है। शिवसेना में शामिल होने वालों मेंमीडिया रिपोर्ट की माने तो शिंदे गुट के शिवसेना में शामिल होने वालों में किशोर वनवारी और मीना सोनडे हैं, जबकि जम्नु पुरसवानी, प्रकाशमाखीजा, महेश सुखरामानी और चार्ली परवानी टीओके में शामिल हुए। इन नेताओं का स्वागत सांसद श्रीकांत शिंदे और टीओके प्रमुख ओमी कालानीने किया। बता दें कि पुरसवानी पांच बार के नगरसेवक और पूर्व उपमहापौर, माखीजा चार बार स्थायी समिति अध्यक्ष और सुखरामानी महाराष्ट्रसाहित्य अकादमी में राज्य मंत्री के पद पर रह चुके हैं। प्रकाश माखीजा ने पार्टी छोड़ने को लेकर अपना रुख साफ किया। उन्होंने कहा कि भाजपा औरशिवसेना के वरिष्ठ नेता एक-दूसरे के खिलाफ काम कर रहे हैं, इसलिए उन्होंने पार्टी छोड़ने का फैसला लिया। हालांकि सूत्रों का मानना है कि यदिपार्टी के शीर्ष नेता समय रहते हस्तक्षेप नहीं करते, तो यह खींचतान अन्य क्षेत्रों में भी फैल सकती है। शिवसेना में तकरारगौरतलब है कि महाराष्ट्र में होने वाले निकाय चुनाव से पहले भाजपा और शिंदे गुट के शिवसेना में तकरार की खबरें खूब सुर्खियां बटोर रही है। सूत्रों कीमाने तो उल्हासनगर और कल्याण लोकसभा क्षेत्र में महायुति सहयोगियों भाजपा और शिवसेना के बीच तनाव उस समय और बढ़ गया जब इस सालरविंद्र चव्हाण राज्य भाजपा अध्यक्ष बने। उन्होंने कल्याण लोकसभा क्षेत्र में अपने संगठन को मजबूत करने की कोशिश की, जो शिंदे परिवार का गढ़माना जाता है। इससे कई शिवसेना नेता भाजपा में शामिल हुए। जवाब में सांसद श्रीकांत शिंदे ने भाजपा नेताओं को अपने खेमे में शामिल करना शुरूकिया।