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तपोवन सत्र में बड़ा टकराव, जयराम ठाकुर ने उठाया पंचायत चुनावों का मुद्दा, CM सुखविंदर सुक्खू का कड़ा जवाब

तपोवन में हिमाचल की 14वीं विधानसभा का शीतकालीन सत्र आज से शुरू हो गया है। 5 दिसंबर तक चलने वाले सत्र के दौरान कई मुद्दों पर तपोवनतपेगा। इस सत्र में कुल आठ बैठकें होंगी। पहले दिन सदन में प्रश्नकाल में गतिरोध पैदा कर विपक्ष ने पंचायतों के चुनाव में देरी करने पर सारा कामरोककर स्थगन प्रस्ताव लाया। इस पर हंगामा होने की आशंका थी पर सरकार ने चर्चा के लिए हामी भर दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान की सबसेबड़ी रक्षक कांग्रेस पार्टी है, महिलाओं के लिए पंचायती राज संस्थाओं में कांग्रेस ने आरक्षण का प्रावधान किया। सरकार कानून के अनुसार सरकारकार्य कर रही है। सीएम ने कहा कि कानून की परिधि में रहकर पंचायत चुनाव करवाएंगे। पूर्व भाजपा सरकार ने अपने शासनकाल में शिमला नगरनिगम के चुनाव नाै महीने देरी से करवाए। कहा कि भाजपा पांच गुटों में बंटी है, इसलिए नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर तनाव में रहते हैं। इसकी आड़ में चुनाव टाले जा रहेमुख्यमंत्री ने कहा कि यूं तो यह मामला अर्धन्यायिक रहा है। लेकिन इसके बावजूद विपक्ष ने आज संविधान दिवस होने की बात की है तो सरकार नेइसे मंजूर किया है। उन्होंने कहा कि कानून का यदि सही मायने में कोई संरक्षक है तो वह कांग्रेस पार्टी ही है। जो भी इस संबंध में कार्य हो रहा है तोवह कानून की परिधि में ही हो रहा है। कानून की परिभाषा को स्पष्ट करने का अधिकार न्यायालय के पास है और मामला कोर्ट में है। इससे पूर्व भाजपाविधायक रणधीर शर्मा ने नियम 67 के तहत स्थगन प्रस्ताव लाते हुए कहा कि सरकार सांविधानिक संस्थाओं का सम्मान करे। पंचायत चुनाव समय परहोने चाहिए। आज विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने सदन में संविधान की प्रस्तावना भी सभी से पढ़वाई। चर्चा में भाग लेते हुए नेताप्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि 1975 में आपातकाल लगाकर भी इसी तरह से चुनाव टाले गए थे। जयराम ठाकुर ने कहा कि आपदा प्रबंधन एक्टलगाकर इसकी आड़ में चुनाव टाले जा रहे हैं। कोविड जैसा संकट होने के बावजूद भाजपा सरकार ने चुनाव करवाए। यह बहुत बड़ा संकट था। उससेबड़ा संकट आज की तिथि में नहीं है। हमेशा पंचायती राज संस्थाओं को सुदृढ़ कियास्थगन प्रस्ताव पर भोजनावकाश के बाद चर्चा शुरू हुई। कांग्रेस विधायक संजय अवस्थी ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि लगभग तीन वर्ष का प्रदेशसरकार का कार्यकाल होने जा रहा है। जब-जब भी विधानसभा का सत्र शुरू होता है तो विपक्ष के लोग महत्वपूर्ण मुद्दों से हट जाते हैं। विधायकों ने जोप्रश्न लगाए थे, उन पर चर्चा होनी थी, जो नहीं हो पाई। किसी भी सरकार का कार्यक्षेत्र होता है कि किस प्रकार देश, काल और परिस्थितियों कोदेखते हुए फैसले लेने हैं। किसी भी तरह के नजरिए के पैमाने अलग नहीं होने चाहिए। आज आपदा अधिनियम लागू है। इसे लागू होने को तो विपक्षके लोग भी समझते हैं। इस तरह का प्रस्ताव समझ नहीं आता, पर इसके पीछे कोई राजनीति है। अधिकतम आपदा मंडी, कुल्लू, किन्नौर, लाहौल-स्पीति में आई है। कोई भी जिला इससे अछूता नहीं है। किस सांविधानिक संकट की यह बात कर रहे हैं, जब विधायकों की खरीद फरोख्त हुई तोसांविधानिक संकट तो इन्होंने लाया है। पंडित नेहरू के समय पंचायती राज चुनाव शुरू हो गए थे। नरसिम्हा राव की सरकार में 73वां सांविधानिकसंशोधन लाया गया। कांग्रेस ने हमेशा पंचायती राज संस्थाओं को सुदृढ़ किया है।

UP चुनाव 2027: योगी सरकार पर बढ़ता दबाव, अखिलेश-सतीश मिश्रा-मायावती मैदान में पूरी तैयारी के साथ

करीब 14 महीने बाद उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। बिहार के बाद यूपी भाजपा के लिए बड़ा मुकाम है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथकी टीम तीसरी बार कड़ी चुनौती को ढंग से समझ रही है। 1-1 सीट पर समीकरण बिठाने का काम चल रहा है। हालांकि, इस तरह की तैयारी में न तोसमाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव पीछे हैं और न मायावती। अखिलेश के करीबी संजय लाठर कहते हैं कि अब कोई मौका चूकने का समय नहींहै। समाजवादी पार्टी के सचिव सुशील दुबे काफी सक्रिय हैं। ‘एसआईआर’ मुद्दे पर सतर्कता के साथ विधानसभावार संगठन को मजबूत बनाने काकाम चल रहा है। प्रो. अभिषेक मिश्रा भी सपा प्रमुख के करीबियों में गिने जाते हैं। लखनऊ की सरोजनी नगर विधानसभा सीट के साथ-साथ प्रदेश मेंब्राह्मण समाज में अलख जगाने में व्यस्त हैं। अभिषेक मिश्रा का कहना है कि यूपी में भाजपा अपना आखिरी कार्यकाल पूरा करेगी। सुशील दुबे को भीयही उम्मीदें हैं। संजय लाठर कहते हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ जनता में नाराजगी काफी बढ़ चुकी है। एसआईआर को लेकरसमाजवादी पार्टी काफी सक्रिय है। बूथ प्रहरी इसको लेकर संवेदनशील है और जमीनी स्तर पर चेक-बैलेंस में लगे हैं।एसआईआर से लेकर किसी भी मुद्दे पर कोई कोशिश कामयाब नहीं होने देगीदूसरी तरफ बसपा में जो भी हैं बहन जी और पार्टी प्रमुख मायावती हैं। मेवालाल गौतम पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव हैं, लेकिन उनका काम मायावती केसंदेश को मीडिया और बहुजन समाज पार्टी की भाई चारा बनाओं समिति समेत तमाम ईकाइयों तक पहुंचाना है। बसपा प्रमुख मायावती अपने खाससतीश चंद्र मिश्रा के साथ 2027 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव की तैयारियों के मद्देनजर संगठन में जान डालने की मंत्रणा कर रही है। सूत्र बताते हैंकि बसपा जमीन पर बड़ी तैयारी कर रही है। आकाश आनंद एक बार फिर यूपी से बड़ी तैयारी के साथ उतरेंगे। बसपा के काडर में मायावती के बादसबसे ज्यादा पसंद किया जाने वाला चेहरा आकाश आनंद ही हैं। संजय लाठर का कहना है कि हमारे पास बूथ स्तर पर हर जगह प्रहरी हैं। हम विरोधनहीं करेंगे। अपना 90-95 प्रतिशत पर पीडीए प्रहरी काम कर रहे हैं। हर स्तर पर, हर मोर्चे पर लड़ेंगे। हमारे पास साल भर का समय है। समाजवादीपार्टी एसआईआर से लेकर किसी भी मुद्दे पर कोई कोशिश कामयाब नहीं होने देगी। प्रयागराज से संघ के प्रचारक रहेबसपा ने भी एसआईआर के मुद्दे पर कमर कस ली है। सभी क्षेत्रों में बीएलए की सूची सौंपने की प्रक्रिया अंतिम दौर में है। बूथ स्तर पर मतदाता सूचीके निरीक्षण को लेकर कांग्रेस भी गंभीर है। जहां कांग्रेस का संगठन मजबूत स्थिति में है, वहां तेजी से प्रयास चल रहे हैं। बिहार विधानसभा चुनाव कानतीजा आने के बाद समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कमर कस ली है। अखिलेश यादव तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन, पश्चिमबंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लगातार संपर्क में हैं। मई 2026 में तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित है। अखिलेश यादव तमिलनाडु मेंएमके स्टालिन की पार्टी डीएमके के समर्थन में प्रचार के लिए जा सकते हैं। इसी तरह से वह तृममूल कांग्रेस के साथ भी राजनीतिक रिश्तों को मजबूतीदेने में लगे हैं। यूपी में भाजपा को अपना नया अध्यक्ष बनाना है। राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के उत्तराधिकारी की तरह यह नाम भी अभी तय होना है।पार्टी के पास इस बार एक बड़ी चुनौती अखिलेश यादव के पीडीए के मुद्दे को साधने की है। 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और समाजवादीपार्टी के गठबंधन ने उम्मीद से अधिक सफलता पाई थी। प्रयागराज से संघ के प्रचारक रहे भाजपा नेता का कहना है कि 2024 का लोकसभा चुनावजहन में है और 2027 में विपक्षी दलों की चाल सफल नहीं हो पाएगी।

ममता बनर्जी का SIR पर निशाना, कहा ‘एनआरसी के पीछे असली मंशा छुपी, भाजपा ने जवाब में बोला राज्य की जनता ने ठान लिया’

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को दावा किया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के पीछे असली मंशाएनआरसी है। संविधान दिवस के अवसर पर रेड रोड स्थित बी.आर. आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए बनर्जीने कहा कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी लोगों की नागरिकता पर सवाल उठाया जा रहा है। एक दिन पहले एक्स पर एक पोस्ट में सीएम ममता नेकहा कि जब लोकतंत्र दांव पर हो, धर्मनिरपेक्षता खतरे में हो और संघवाद को ध्वस्त किया जा रहा हो, तो लोगों को संविधान से मिले मूल्यवानमार्गदर्शन की रक्षा करनी चाहिए। सीएम बनर्जी ने कहा कि संविधान राष्ट्र की रीढ़ है, जो भारत की संस्कृतियों, भाषाओं और समुदायों की विविधता कोकुशलतापूर्वक एक साथ पिरोता है। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘इस संविधान दिवस पर मैं हमारे महान संविधान और भारत में हमें जोड़ने वालेमहान दस्तावेज के प्रति गहरा सम्मान और श्रद्धांजलि अर्पित करती हूं।’ राज्य की जनता ने ठान लियासंसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत से पहले राज्यसभा सचिवालय ने सदस्यों को संसदीय शिष्टाचार और अनुशासन को लेकर नया बुलेटिन जारीकिया है। इस बुलेटिन में सदन की गंभीरता बनाए रखने के लिए नारेबाजी समेत जय हिंद, वंदे मातरम, थैंक यू जैसे शब्दों पर भी प्रतिबंध लगाया गयाहै। इसे लेकर सवाल पूछे जाने पर मुख्यमंत्री बनर्जी ने कहा, ‘अब आप सोचिए, देश में क्या चल रहा है। क्यों नहीं बोलेंगे। जय हिंद और वंदे मातरमराष्ट्रीय गीत हैं। ये हमारी आजादी के नारे हैं। जय हिंद हमारे नेताजी सुभाष चंद्र बोस का नारा है। इससे जो टकराएगा, चूर-चूर हो जाएगा।’ वहीं, ममता बनर्जी के बयान पर भाजपा सांसद और पश्चिम बंगाल भाजपा के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा कि वो जितने आरोप लगाना चाहें, लगा लें।उन्होंने कहा कि क्या वो देश में सांप्रदायिक तनाव फैलाना चाहती हैं? भाजपा नेता ने कहा कि क्या वो एक और शाहीन बाग बनाना चाहती हैं? उन्होंनेकहा कि राज्य की जनता ने ठान लिया है कि वो पश्चिम बंगाल को पश्चिमी बांग्लादेश नहीं बनने देंगे। उन्होंने कहा कि अब ममता बनर्जी को कोई सुनताही नहीं है।

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा का संविधान दिवस संदेश, जम्मू-कश्मीर में भेदभाव और आतंकवाद को खत्म कर नागरिकों के जीवन में सुधार लाना हमारी प्राथमिकता

जम्मू और कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि उनके जम्मू-कश्मीर में मिशन का उद्देश्य नागरिकों के जीवन में सुधार लाना, भेदभाव औरअन्याय को समाप्त करना तथा आतंकवाद के पूरे तंत्र को खत्म करना रहा है। संविधान दिवस समारोह में बोलते हुए सिन्हा ने कहा कि लंबे समय तकअलगाववादियों को पुरस्कृत करने और देशभक्तों को प्रताड़ित करने की जो नीति चली आ रही थी, उसे पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। समारोह मेंउन्होंने संविधान की प्रस्तावना का पाठ कराया और संविधान निर्माताओं को श्रद्धांजलि दी। एलजी ने कहा कि 2019 में अनुच्छेद 370 को रद्द करनेऔर जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के बाद जम्मू-कश्मीर में संविधान की सभी व्यवस्थाएं पूरी तरह लागू कर दी गईं, जिससेभेदभाव और अन्याय का शासन समाप्त हुआ। वरिष्ठ नागरिक और पुलिस अधिकारी उपस्थित रहेअब जम्मू-कश्मीर संविधान में निहित समानता, सामाजिक और आर्थिक न्याय के आदर्शों के मार्गदर्शन में आगे बढ़ रहा है। मैं यह साफ करना चाहता हूंकि पिछले पांच वर्षों में जो भी उपलब्धियां मिली हैं, उनमें मुख्य उपलब्धि यह है कि अलगाववादियों को पुरस्कृत करने और देशभक्तों को प्रताड़ितकरने की नीति पूरी तरह खत्म कर दी गई है। उपराज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संविधान की सभी व्यवस्थाओं को लागू कर जम्मू-कश्मीरके नागरिकों के सम्मान, गौरव और गरिमा को सुनिश्चित किया है। संविधान दिवस समारोह संस्कृति विभाग और कानून, न्याय एवं संसदीय कार्य विभागके संयुक्त आयोजन में आयोजित किया गया। समारोह में जम्मू-कश्मीर विधान सभा के स्पीकर अब्दुल रहीम रदर, वरिष्ठ नागरिक और पुलिसअधिकारी उपस्थित रहे। सुधार लाना तथा आतंकवाद के पूरे तंत्र को खत्म करना रहासिन्हा ने अधिकारियों और नीति निर्धारकों से संविधान के मूल्यों की रक्षा और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने का आग्रह किया और कहा किसंविधान हमें एकता, समानता और आत्म-सम्मान का मार्ग दिखाता है। राष्ट्रीय एकता और अखंडता बनाए रखना हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है और हमेंभारत को शक्तिशाली और आत्मनिर्भर बनाने के लिए सभी संसाधनों का उपयोग करना चाहिए। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने संविधान दिवस पर कहाकि जम्मू-कश्मीर में उनका मिशन भेदभाव और अन्याय को समाप्त कर नागरिकों के जीवन में सुधार लाना तथा आतंकवाद के पूरे तंत्र को खत्म करनारहा है।

पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच अगले महीने से शुरू होंगी ढाका-कराची सीधी उड़ानें, कनेक्टिविटी और व्यापार में मिलेगी नई रफ्तार

ढाका के एक शीर्ष राजनयिक ने बुधवार को बताया कि पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच सीधी उड़ान सेवा अगले महीने से शुरू होगी। जो दोनोंदेशों के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में ये एक बड़ी छलांग होगी। पिछले कई वर्षों से पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच कोई सीधीफ्लाइट नहीं थी। इस साल दोनों देशों के बीच रिश्ते बेहतर होने पर, हाल ही में दो पाकिस्तानी निजी एयरलाइंस को बांग्लादेश के लिए सीधी फ्लाइटके लिए मंजूरी मिली है। इस्लामाबाद में बांग्लादेश के उच्चायुक्त इकबाल हुसैन खान ने लाहौर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (LCCI) में कहा, ‘महान एयर अगले महीने से ढाका और कराची के बीच हफ्ते में तीन फ्लाइट्स शुरू करेगी।’ हालांकि, उन्होंने कोई तारीख नहीं बताई और न ही विस्तृतजानकारी दी। उच्चायुक्त ने आगे कहा ‘वीजा प्रक्रिया को भी आसान बना दिया गया है। वीजा अब LCCI और लाहौर में बांग्लादेश ऑनरेरी कॉन्सुलेटकी संयुक्त सिफारिश पर जारी किए जा रहे हैं। सदस्यों को तीन से चार दिनों के अंदर वीजा जारी कर दिए जाएंगे, जिससे दोनों देशों के बीच यात्रा तेजऔर आसान हो जाएगा।’ बांग्लादेशी उच्चायुक्त ने कहा कि ढाका और कराची के बीच हफ्ते में तीन फ्लाइट्स संचालित होंगी। तेहरान में मौजूद एकनिजी ईरानी एयरलाइन महान एयर इन फ्लाइट्स का संचालन करेगी। तीन अरब डॉलर तक बढ़ सकताबांग्लादेशी उच्चायुक्त ने कहा कि ढाका और कराची के बीच हफ्ते में तीन फ्लाइट्स संचालित होंगी। बता दें कि महान एयरलाइंस, जो महान एयर केनाम से चलती है, तेहरान में मौजूद एक निजी ईरानी एयरलाइन है। 5 अगस्त, 2024 को बांग्लादेश में छात्रों के विरोध प्रदर्शनों के बाद प्रधानमंत्रीशेख हसीना को पद से अपदस्थ कर दिया गया था और मोहम्मद यूनुस ने वहां की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार का पद संभाला, तब से ढाकाऔर इस्लामाबाद के बीच रिश्ते बेहतर हुए हैं। हाल ही में, दो पाकिस्तानी निजी एयरलाइन फ्लाई जिन्ना और एयरसियाल को भी बांग्लादेश में उड्डयनप्राधिकरण से पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच सीधी उड़ान चलाने की मंजूरी मिली है। हाई कमिश्नर खान ने कहा कि दोनों देशों के बीच एकसीधी कार्गो शिपिंग सर्विस भी जल्द ही शुरू की जाएगी। लाहौर चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष फहीमुर रहमान सैगोल ने कहा कि पाकिस्तानबांग्लादेश को चावल का निर्यात बढ़ा सकता है और ढाका टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट्स के अलावा पाकिस्तान को फल भी सप्लाई कर सकता है।उन्होंने कहा कि दोनों देशों के पास IT, ऑटोमोबाइल और दूसरी इंडस्ट्रीज़ में मिलकर काम करने के मौके हैं। सैगोल ने कहा, ‘अभी, दोनों देशों के बीचसात करोड़ डॉलर की है, लेकिन अगले कुछ वर्षों में यह तीन अरब डॉलर तक बढ़ सकता है।’

अरुणाचल की बेटी का चीनी एयरपोर्ट पर अपमान, CM खांडू भड़कें, 18 घंटे की हिरासत पर कड़ा विरोध

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने मंगलवार को चीनी आव्रजन अधिकारियों की निंदा की। खांडू ने राज्य की एक महिला के साथ किए गएव्यवहार को अस्वीकार्य और भयावह बताया। महिला को शंघाई पुडोंग हवाई अड्डे पर करीब 18 घंटे तक हिरासत में रखा गया, क्योंकि अधिकारियों नेकथित तौर पर उसका भारतीय पासपोर्ट पहचानने से इनकार कर दिया था। सीएम खांडू ने कहा कि वह ब्रिटेन में रहने वाली भारतीय नागरिक पेमावांगजोम थोंगडोक के साथ हुई घटना से सदमे में हैं। उन्होंने दावा किया कि चीनी अधिकारियों का आचरण ‘अपमानजनक और नस्लीय उपहास’ केजैसा है। कामेंग जिले के रूपा की निवासी थोंगडोक फिलहाल ब्रिटेन में रहतीमुख्यमंत्री ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘वैध भारतीय पासपोर्ट होने के बावजूद उनके साथ ऐसा व्यवहार करना भयावह है।’ उन्होंने कहा, ‘अरुणाचलप्रदेश भारत का अभिन्न अंग है और हमेशा रहेगा। इसके विपरीत कोई भी आरोप निराधार और आपत्तिजनक है।’ इस घटना को अंतरराष्ट्रीय मानदंडों काउल्लंघन और भारतीय नागरिकों की गरिमा का अपमान बताते हुए खांडू ने कहा कि उन्हें भरोसा है कि विदेश मंत्रालय इस मामले को तत्काल उठाएगाताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। पश्चिमी कामेंग जिले के रूपा की निवासी थोंगडोक फिलहाल ब्रिटेन में रहती हैं। 21 नवंबर को लंदन से जापान जा रही थीं, जब उनका तीन घंटे का ट्रांजिट एक लंबे और कष्टदायक टकराव में बदल गया। कनेक्टिंग फ्लाइट में चढ़ने से रोक दिया गयारविवार को एक्स पर एक विस्तृत पोस्ट में, उन्होंने लिखा, ‘मुझे 21 नवंबर 2025 को चीन के आव्रजन और चाइना ईस्टर्न एयरलाइंस की ओर सेशंघाई हवाई अड्डे पर 18 घंटे से ज्यादा समय तक रोके रखा गया। उन्होंने मेरे भारतीय पासपोर्ट को अमान्य घोषित कर दिया, क्योंकि मेरा जन्मस्थानअरुणाचल प्रदेश है, जिसे उन्होंने चीनी क्षेत्र बताया।’ महिला ने बताया कि उन्हें बिना कोई ठोस वजह बताए और बिना बुनियादी सुविधाओं के ट्रांजिटएरिया में ही रोक दिया गया। कथित तौर पर उनका पासपोर्ट जब्त कर लिया गया और वैध वीजा होने के बावजूद उन्हें जापान जाने वाली कनेक्टिंगफ्लाइट में चढ़ने से रोक दिया गया। थोंगडोक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखकर इस घटना को भारत की संप्रभुताऔर अरुणाचल प्रदेश के लोगों का सीधा अपमान बताया है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह इस मामले को बीजिंग के समक्ष जोरदार तरीके सेउठाए, जवाबदेही की मांग करे, इसमें शामिल लोगों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग करे तथा उत्पीड़न के लिए मुआवजे की मांग करे।महिला ने बताया कि उन्हें बिना कोई ठोस वजह बताए और बिना बुनियादी सुविधाओं के ट्रांजिट एरिया में ही रोक दिया गया। कथित तौर पर उनकापासपोर्ट जब्त कर लिया गया और वैध वीजा होने के बावजूद उन्हें जापान जाने वाली कनेक्टिंग फ्लाइट में चढ़ने से रोक दिया गया।

500 साल का इंतज़ार खत्म अयोध्या के राम मंदिर पर लहराई धर्मध्वजा, शिखर पर आस्था का इतिहास फिर हुआ जीवंत

500 वर्षों से एक तरह का विरह झेल रही अयोध्यानगरी का राम मंदिर आज तब संपूर्ण हो गया, जब भव्य और दिव्य मंदिर के शिखर पर आस्था कीध्वजा लहराई। वही ध्वज, जो केवल वस्त्र नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति का साक्षात प्रतीक है। यह ध्वज आस्था के धागों से तैयार हुआ। इस क्षण कासाक्षी बनने के लिए स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौजूद थे। साथ में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुखमोहन भागवत भी मौजूद थे। आइए जानते हैं कि मंगलवार को आखिर अयोध्या में हुआ क्या…अयोध्या में राम मंदिर को लेकर लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आया था। इसके बाद 5 अगस्त2020 को अयोध्या में भव्य मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन हुआ। कोरोना काल में हजारों श्रमिकों की अथक मेहनत के बाद राम मंदिर का पारंपरिकनागर शैली में निर्माण पूरा हुआ। इसकी लंबाई 380 फीट, चौड़ाई 250 फीट और ऊंचाई 161 फिट है। यह कुल 392 खंभों और 44 दरवाजों सेयुक्त है। चार महीने तक अध्ययन किया गयादरअसल, 22 जनवरी 2024 को भगवान श्रीराम बालक राम के रूप में स्थापित किए गए थे। 5 जून 2025 को दूसरी प्राण प्रतिष्ठा में भगवान रामराजा के रूप में स्थापित किए गए। इसके बाद अंतिम कार्य ध्वज ध्वजा स्थापित करने का था। सनातन परंपरा में शिखर पर लहराते ध्वज को मंदिर कारक्षक, ऊर्जा का वाहक और पूर्णता तथा ईश्वर की उपस्थिति का प्रतीक माना जाता है। ध्वजा से ही मंदिर को पूर्णता प्राप्त होती है। ध्वजा आरोहण केलिए 25 नवंबर 2025 को सुबह 11:58 बजे से दोपहर 12:30 बजे के बीच का मुहूर्त निकाला गया। मंगल-स्वस्ति गान के बीच ध्वजा आरोहणहुआ। 32 मिनट का यह शुभ योग भगवान श्रीराम के जन्म नक्षत्र अभिजीत मुहूर्त से मेल खाता है। दिन भी मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी काचुना गया, जिसे विवाह पंचमी के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन भगवान श्रीराम और माता सीता का दिव्य विवाह हुआ था। यह 22 गुणा 11 फीटकी है। रंग चमकदार केसरिया है। इसे पैराशूट ग्रेड के तीन परत वाले कपड़े से बनाया गया है और आस्था के रेशमी धागों में पिरोया गया है। यहअहमदाबाद में बनकर तैयार हुआ। इसे 161 फीट ऊंचे शिखर पर 42 फीट ऊंचे एक दंड के माध्यम से स्थापित किया गया है। दंड पर 21 किलोसोना मढ़ा गया है। ध्वजा चार किमी दूर से भी दिखाई देगी। धर्म ध्वजा भयानक तूफान में भी सुरक्षित रहेगी। ध्वजा दंड पर बॉल बियरिंग लगे हैं।इससे ध्वजा हवा बदलने पर बिना उलझे पलट जाएगी। ध्वजा पर प्रभु श्रीराम के सूर्यवंश का चिह्न और ओंकार बना हुआ है। साथ ही कोविदार वृक्षका भी चिह्न है। इन चिह्नों के लिए चार महीने तक अध्ययन किया गया था। इन चिह्नों को ध्वज पर हाथ से बुना गया है। अयोध्या में अब न्यायाधीश के रूप में भगवान विराजमान हो चुकेअयोध्या का राज ध्वज और उस पर अंकित कोविदार वृक्ष सनातन संस्कृति की अमूल्य निधि रही है। इसका उल्लेख वाल्मीकि रामायण के अयोध्याकांड में है। इसके अनुसार चित्रकूट में वनवास के दौरान भगवान राम ने लक्ष्मण को अश्व और रथों से आती सेना के बारे में पता लगाने को कहा था। इसेदेखकर लक्ष्मण ने कहा था कि निश्चय ही भरत स्वयं सेना लेकर आया है। कोविदार युक्त विशाल ध्वज उसी के रथ पर फहरा रहा है। इसी प्रसंग सेजाहिर है कि कोविदार वृक्ष युक्त ध्वज अयोध्या की पहचान और प्राचीन धरोहर रही है। हरिवंश पुराण में उल्लेख है कि महर्षि कश्यप ने पारिजात केपौधे में मंदार के गुण मिलाकर इसे तैयार किया था। इस बारे में अयोध्या के महंत विवेक आचारी दिलचस्प वर्णन करते हैं। वे कहते हैं कि इसकी धर्मध्वजा की लंबाई-चौड़ाई यूं ही नहीं तय हुई है। अंक ज्योतिष की गणना में इसके मायने समझ में आते हैं। ध्वज का आकार 22 गुणा 11 फीट है। इसेगुणा करने पर 242 का अंक आता है, जिसका गुणांक आठ है। आठ को न्याय के देवता शनि का अंक माना जाता है। यह कहा जा सकता है कि राममंदिर के शिखर यानी अयोध्या में अब न्यायाधीश के रूप में भगवान विराजमान हो चुके हैं। जो मर्यादा में रहेगा, सुखी रहेगा। जो मर्यादा विहीनआचरण करेगा, उसका रावण जैसा हश्र होगा।

कर्नाटक में सत्ता संग्राम तेज: सिद्धारमैया, DK शिवकुमार खेमों की हलचल, सीएम बदलने का फैसला हाई कमान पर

कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद और शासन परिवर्तन को लेकर कांग्रेस में चल रहा सत्ता संघर्ष अभी भी थम नहीं पाया है। मंगलवार को एक तरफउपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यश्र मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात की। वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया एक बार फिरपार्टी हाई कमान के फैसले का राग गाया। उन्होंने कहा कि पार्टी हाई कमान को राज्य में मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रहे भ्रम को खत्म करना ही होगा।सिद्धारमैया ने इस दौरान फिर से इस बात को दोहराया कि वे सीएम बदलने के मामले में हाई कमान के फैसले का पालन करेंगे। उन्होंने कहा किविधायक पार्टी नेतृत्व से मिलकर अपनी राय साझा कर सकते हैं। बता दें कि कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर अटकलें तेज तब हो गई जब राज्यकी कांग्रेस सरकार ने 20 नवंबर को अपने पांच साल के कार्यकाल का आधा समय पूरा किया। इसी बीच, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और शिवकुमार केबीच कथित ‘पावर शेयरिंग’ समझौते की बातें भी सामने आई हैं। ऐसे में चर्चा तेज हो गई कि क्या अब डीके शिवकुमार को अगले ढाई साल के लिएमुख्यमंत्री पद दिया जा सकता है। सीएम बदलने के मामले में वे हाई कमान के निर्णय का पालन करेंगेसिद्धारमैया ने शिवकुमार के समर्थन में दिल्ला जाने वाले विधायकों को लेकर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि विधायक दिल्ली जाएं, उनकीस्वतंत्रता है। अंत में फैसला हाई कमान का है। हम हाई कमान के निर्णय का पालन करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जो विधायक मामला सुलझाने केलिए हाई कमान से बात करना चाहते हैं, वे अपनी बात रख सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, 23 नवंबर को छह कांग्रेस विधायक शिवकुमार का समर्थनकरने के लिए दिल्ली गए, वहीं कुछ और विधायक भी जल्द उच्च नेतृत्व से मिल सकते हैं। इससे पहले पिछले हफ्ते लगभग दस विधायक भी दिल्लीमें एआईसीसी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मिले थे। कर्नाटक में कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद और सत्ता को लेकर संघर्ष जारी है। इसी बीच सिद्धारमैया नेदो टूक अंदाज में पार्टी हाई कमान की बात को दोहराया है। उन्होंने कहा कि इस पूरे विवाद को खत्म करने का अंतिम फैसला हाई कमान का होगा।उन्होंने कहा कि सीएम बदलने के मामले में वे हाई कमान के निर्णय का पालन करेंगे।

बंगाल में वोटर लिस्ट विवाद भड़का! ममता बनर्जी का 3 किमी मार्च, TMC का एसआईआर के खिलाफ शक्ति प्रदर्शन

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को राज्य में मतदाता सूची को लेकर चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध मेंनॉर्थ 24 परगना जिले के बनगांव के चांदपारा से मतुआ के गढ़ ठाकुरनगर तक तीन किमी का मार्च निकाला। वहीं तृणमूल कांग्रेस के एक नेता नेबताया कि यह जुलूस, जो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भारत-बांग्लादेश बॉर्डर के पास बनगांव शहर में एसआईआर के खिलाफ एक रैली को संबोधितकरने के बाद निकाला, ठाकुरनगर के ढाकुरिया स्कूल में खत्म होगा। बता दें कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस जुलूस-प्रदर्शन की अगुवाई कर रही थीं, जिसमें शामिल लोग नीले और सफेद गुब्बारे लिए हुए थे, तृणमूल कांग्रेस के झंडे लहरा रहे थे और एसआईआर के खिलाफ नारे लगा रहे थे। चुनावआयोग (ईसीआई) ने पश्चिम बंगाल समेत देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची की शुद्धता के लिए एसआईआर शुरू की है।पश्चिम बंगाल में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। लेकिन एसआईआर को लेकर राज्य की सत्ताधारी दल तृणमूल कांग्रेस और मुख्य विपक्षी दलभाजपा में आरोप-प्रत्यारोप का दौर चरम पर है। भारी संख्या में टीएमसी कार्यकर्ता शामिल हुएविपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस और ‘इंडिया’ गठबंधन के घटक दलों का आरोप है कि एसआईआर की प्रक्रिया में गंभीर विसंगतियां हैं और इसकाउद्देश्य कुछ खास लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाना है, जिससे चुनावों में लाभ पहुंचाया जा सके। हाल ही में एसआईआर से जुड़े कुछ लोगों की मौतकी खबरें भी आई हैं, हालांकि इन मौतों के कारणों की स्वतंत्र जांच की मांग की जा रही है। निर्वाचन आयोग ने 27 अक्तूबर को 12 राज्यों औरकेंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों की शुद्धि का अभ्यास शुरू करने का एलान किया था। आयोग ने इसे एसआईआर का फेज-दो बताया है (बिहारमें हुए एसआईआर को फेज-1 बताया गया था)। बता दें कि एसआईआर का दूसरा चरण 4 नवंबर को शुरू हुआ और 4 दिसंबर तक चलेगा।एसआईआर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम मतदाता सूची 7 फरवरी, 2026 को प्रकाशित की जाएगी। एसआईआर का दूसरा चरण अंडमानऔर निकोबार द्वीप समूह, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगालकराया जा रहा है। बंगाल में एसआईआर के खिलाफ सीएम ममता बनर्जी ने पैदल मार्च किया है। जानकारी के मुताबिक, तीन किमी लंबे पैदल मार्चकी सीएम ने खुद अगुवाई की जो चांदपारा से मतुआ-हार्टलैंड ठाकुरनगर तक चला। इस दौरान भारी संख्या में टीएमसी कार्यकर्ता शामिल हुए।

एमी अवॉर्ड्स में दिलजीत का सितारों वाला जलवा, पर ‘अमर सिंह चमकीला’ की झोली रही खाली

53वें इंटरनेशनल एमी अवॉर्ड्स में दिलजीत दोसांझ ने भले ही अपने शानदार लुक से महफिल लूट ली। मगर, अवॉर्ड के मामले में उनकी झोली खालीरह गई। एमी अवॉर्ड्स 2025 में एक्टर-सिंगर अवॉर्ड पाने से चूक गए। उन्हें इम्तियाज अली की फिल्म ‘अमर सिंह चमकीला’ में उनकी परफॉर्मेंस केलिए नॉमिनेट किया गया था। 53वें इंटरनेशनल एमी अवॉर्ड्स में दिलजीत दोसांझ को बायोग्राफिल ड्रामा ‘अमर सिंह चमकीला’ के लिए बेस्ट एक्टरके लिए नॉमिनेट किया गया था। वहीं, इस फिल्म को बेस्ट TV मिनी मूवी/मिनी सीरीज कैटिगरी में नॉमिनेट किया गया था। मगर, दोनों ही कैटिगरी मेंफिल्म अवॉर्ड नहीं जीत पाई। शिमर ब्लेजर में वे खूब जंचेबेस्ट एक्टर का अवॉर्ड दिलजीत दोसांझ की बजाय ओरिओल प्ला को ‘आई, एडिक्ट’ फिल्म के लिए मिला। वहीं, बेस्ट टीवी मिनी मूवी/मिनी सीरीजकैटिगरी में ‘अमर सिंह चमकीला’ की बजाय ‘लॉस्ट बॉयज एंड फेयरीज’ ने अवॉर्ड झटका। दोनों कैटेगरी में फिल्म को नॉमिनेशन मिलने पर फैंस उम्मीदकर रहे थे कि इसे अवॉर्ड मिल सकता है, क्योंकि ‘अमर सिंह चमकीला’ को दुनियाभर में पसंद किया गया। मगर, दोनों श्रेणी में अवॉर्ड नहीं मिलने परफैंस निराश हैं। अवॉर्ड फंक्शन में दिलजीत दोसांझ और इम्तियाज अली को शानदार अंदाज में रेड कार्पेट पर देखा गया। दिलजीत ने शिमर सूट जैकेट, व्हाइट शर्ट, ब्लैक बो, ब्लैक ट्राउजर और अपनी सिग्नेचर ब्लैक पगड़ी में एक शानदार स्टाइल स्टेटमेंट दिया। बात करें फिल्म ‘अमर सिंह चमकीला’ कीतो यह फिल्म साल 2024 में नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई थी। दिलजीत के अपोजिट फिल्म में परिणीति चोपड़ा ने लीड रोल अदा किया। यह फिल्मपंजाब के मशहूर लोक गायक अमर सिंह चमकीला की कहानी पर आधारित है। 53वें इंटरनेशनल एमी अवॉर्ड्स में सिंगर-एक्टर दिलजीत दोसांझअपने शानदार लुक से छा गए। ऑफ व्हाइट कलर के शिमर ब्लेजर में वे खूब जंचे। मगर, अवॉर्ड के मामले में उनके हाथ खाली रह गए।