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संविधान में ‘वी द पीपल’ ‘भारत माता’ नहीं! ओवैसी के बयान से छिड़ा नया विवाद, राष्ट्रवाद की परिभाषा पर घमासान

भारत के संविधान और राष्ट्रवाद की परिभाषा को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के एक बयान ने इस मुद्दे को नए सिरे से चर्चा के केंद्र में ला दिया है। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान की शुरुआत ‘वी द पीपल’ यानी जनता से शुरू होता है, न कि भारत माता के नाम से।ओवैसी ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता देता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि संविधान का आधार समावेशी और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों पर टिका है। उन्होंने याद दिलाया कि प्रस्तावना में स्वतंत्रता, समानता, न्याय और बंधुता की बात कही गई है। उनके अनुसार देशभक्ति को किसी एक धार्मिक पहचान से जोड़ना संविधान की भावना के खिलाफ है। एक धार्मिक विचार से जोड़ना सही नहींओवैसी ने अपने भाषण में संसद में हुई वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ पर हुई बहस का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस दौरान उन्होंने संसद में खड़े होकर कहा था कि 24 जनवरी 1950 को देश ने खुद को संविधान दिया और उसकी शुरुआत “वी द पीपल” से होती है। उन्होंने कहा कि संविधान किसी खास धार्मिक प्रतीक का नाम लेकर शुरू नहीं होता, बल्कि जनता को सर्वोच्च मानता है। ओवैसी ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 25 हर नागरिक को अपने धर्म को मानने और उसका पालन करने की आजादी देता है। उन्होंने कहा कि यही भारत की संवैधानिक ताकत है। उनके मुताबिक प्रस्तावना साफ तौर पर बताती है कि देश का ढांचा न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व पर आधारित है। इसे किसी एक धार्मिक विचार से जोड़ना सही नहीं है। पहचान से जोड़ना स्वीकार नहीं किया जा सकताएआईएमआईएम प्रमुख ने कहा कि अगर देशभक्ति को किसी एक धर्म से जोड़ा जाएगा तो यह आजादी की लड़ाई लड़ने वाले कई नेताओं के योगदान को कमजोर करेगा। उन्होंने बहादुर शाह जफर और यूसुफ मेहरअली का उदाहरण देते हुए कहा कि इन लोगों ने देश के लिए बलिदान दिया। उनके मुताबिक राष्ट्र प्रेम को धार्मिक पहचान से जोड़ना स्वीकार नहीं किया जा सकता। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि भारतीय संविधान “वी द पीपल” शब्दों से शुरू होता है, न कि भारत माता के नाम से। उन्होंने संविधान की धर्मनिरपेक्ष और समावेशी भावना पर जोर दिया। अनुच्छेद 25 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता का हवाला देते हुए कहा कि देशभक्ति को धर्म से जोड़ना सही नहीं।

जनकपुरी दुर्घटना पर राजनीति करना गलत – वीरेन्द्र सचदेवा, दिल्ली भाजपा अध्यक्ष

दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने जनकपुरी में हुई दुखद दुर्घटना को लेकर आम आदमी पार्टी के नेताओं पर कड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि किसी भी परिवार के लिए अपने बेटे या किसी प्रिय व्यक्ति को खोना बहुत बड़ा दुख होता है। ऐसे समय में राजनीति नहीं, बल्कि संवेदना और सहयोग की जरूरत होती है। किसी परिवार का दुख राजनीति का विषय नहीं होना चाहिए वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा कि किसी दुर्घटना में किसी परिवार के बच्चे की असमय मृत्यु बहुत ही पीड़ादायक होती है। सरकार और समाज का पहला कर्तव्य होता है कि वह पीड़ित परिवार के साथ खड़ा हो, उन्हें भावनात्मक और सामाजिक सहारा दे। लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि आम आदमी पार्टी के कुछ नेता इस दुखद घटना पर भी राजनीति कर रहे हैं, जो पूरी तरह निंदनीय है। 500 बसों के कार्यक्रम के बाद आया बयान दुर्भाग्यपूर्णदिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि दिल्ली सरकार द्वारा 500 नई बसों को दिल्ली की जनता को समर्पित करने के लिए एक सादा और सम्मानजनक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य दिल्ली वालों को बेहतर सार्वजनिक परिवहन सुविधा देना था। लेकिन इस सकारात्मक पहल के बाद आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज द्वारा दिया गया बयान जनकपुरी दुर्घटना के प्रति संवेदना दिखाने के बजाय राजनीतिक हताशा को दर्शाता है। 11 साल में एक भी बस नहीं ला पाने की हताशावीरेन्द्र सचदेवा ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में 11 साल तक सरकार चलाई, लेकिन इस पूरे समय में दिल्ली के लिए एक भी नई बस नहीं ला सकी। आज जब भाजपा सरकार ने दिल्ली के लोगों के लिए 500 नई बसें शुरू की हैं, तो आम आदमी पार्टी के नेता इस उपलब्धि को पचा नहीं पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसी राजनीतिक हताशा के कारण सौरभ भारद्वाज इस तरह के बयान दे रहे हैं। लुटियन दिल्ली में बैठकर बयान देना आसान हैदिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि लुटियन दिल्ली में बैठकर बयान देना बहुत आसान है, लेकिन असली संवेदना तब दिखाई देती है जब कोई नेता पीड़ित परिवार के पास जाकर उनका दुख बांटता है। उन्होंने कहा कि अगर सौरभ भारद्वाज को सच में जनकपुरी दुर्घटना में पीड़ित परिवार की चिंता होती, तो वे बयान देने के बजाय परिवार से मिलने जरूर जाते। भाजपा नेता पीड़ित परिवार के साथ खड़े हैंवीरेन्द्र सचदेवा ने कहा कि जनकपुरी दुर्घटना में दिवंगत युवक कमल ध्यानी का परिवार भाजपा परिवार से जुड़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि पालम से भाजपा विधायक कुलदीप सोलंकी पिछले तीन दिनों से लगातार परिवार के साथ खड़े हैं और हर संभव मदद कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि दिल्ली सरकार में मंत्री आशीष सूद भी आज परिवार से मिलकर उन्हें सांत्वना और संवेदना प्रकट कर चुके हैं। घड़ियाली आंसू बहाने से जनता गुमराह नहीं होगीदिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि अरविंद केजरीवाल और सौरभ भारद्वाज आज 8 फरवरी को जो पीड़ा दिखा रहे हैं, उसे दिल्ली की जनता अच्छी तरह समझती है। उन्होंने कहा कि अब आम आदमी पार्टी के नेता किसी भी दुर्घटना पर कितने भी घड़ियाली आंसू बहा लें, दिल्ली वाले उनकी सच्चाई को जान चुके हैं। दिल्ली की जनता उनकी सरकार के पुराने कामों और काले अध्याय को भूलने वाली नहीं है। भाजपा सरकार सेवा और समर्पण के रास्ते परवीरेन्द्र सचदेवा ने कहा कि भाजपा की दिल्ली सरकार सेवा और समर्पण के भाव से काम कर रही है। सरकार का उद्देश्य राजनीति नहीं, बल्कि दिल्ली की जनता की सेवा करना है। 500 नई बसों की शुरुआत इसी सोच का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार आगे भी दिल्ली के विकास, सुरक्षा और जनकल्याण के लिए पूरी ईमानदारी से काम करती रहेगी। दुख की घड़ी में राजनीति नहीं, संवेदना जरूरीदिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने अंत में कहा कि किसी भी दुर्घटना में किसी परिवार को हुए नुकसान पर राजनीति करना गलत है। ऐसे समय में नेताओं को बयानबाज़ी नहीं, बल्कि पीड़ित परिवार के साथ खड़ा होना चाहिए। भाजपा हर पीड़ित परिवार के साथ है और आगे भी रहेगी, जबकि जनता अब दिखावे की राजनीति को समझ चुकी है।

अन्नदाताओं के ऊपर सरकार ने हथौड़ा चलाया जा रहा है।

यह नीति किसान को आत्मनिर्भर बनाने की नहीं, बल्कि उसे विदेशी कंपनियों पर निर्भर बनाने की साजिश है लोकदल अध्यक्ष सुनील सिंह ने भारत सरकार और अमेरिका के बीच हो रही कथित कृषि डील पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह समझौता किसानों के हित में नहीं, बल्कि उनके अस्तित्व पर सीधा प्रहार है।सरकार दावा कर रही है कि इस डील से 1.40 लाख करोड़ की नौकरियाँ मिलेंगी, लेकिन आज तक जॉब लिस्ट सार्वजनिक नहीं की गई, इसके बावजूद बधाइयाँ बाँटी जा रही हैं। यह देश और किसानों के साथ खुला धोखा है।सरकार कह रही है कि किसानों के हित 100 प्रतिशत सुरक्षित हैं, लेकिन कैसे सुरक्षित हैं—इसका कोई जवाब नहीं। आज तक किसानों को MSP की कानूनी गारंटी नहीं मिली, और अब सरकार विदेशी ताकतों के दबाव में आकर खेती को दांव पर लगा रही है।लोकदल अध्यक्ष सुनील सिंह ने सबसे बड़ा सवाल उठाया कि भारत और अमेरिका के बयानों में साफ अंतर है।जहाँ भारत सरकार इस डील को किसानों के हित में बता रही है, वहीं अमेरिका के बयान साफ संकेत देते हैं कि उसे अपने कृषि उत्पादों और कॉरपोरेट कंपनियों के लिए भारतीय बाजार खोलना है।यह बयानबाज़ी का अंतर बताता है कि सच कौन छुपा रहा है और फायदा किसे मिलने वाला है।अन्नदाताओं के ऊपर सरकार ने हथौड़ा चलाया जा रहा है।यह नीति किसान को आत्मनिर्भर बनाने की नहीं, बल्कि उसे विदेशी कंपनियों पर निर्भर बनाने की साजिश है।लोकदल का स्पष्ट कहना है कि भारत और अमेरिका की खेती का मॉडल पूरी तरह अलग है।भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहाँ खेती आजीविका है, जबकि अमेरिका में खेती कॉरपोरेट और मुनाफा आधारित उद्योग है। ऐसे में अमेरिकी मॉडल को भारत पर थोपना, छोटे और मध्यम किसानों को खत्म करने की योजना है।यह डील किसानों के लिए खतरनाक है। इससेMSP पर सीधा खतरा,स्थानीय बीज और उत्पादन व्यवस्था का विनाश,और बहुराष्ट्रीय कंपनियों का कब्जातय माना जा सकता है।लोकदल अध्यक्ष सुनील सिंह ने कहा कि जब सरकार आज तक किसानों को उनका न्यूनतम समर्थन मूल्य तक नहीं दिला पाई, तो भविष्य की सुरक्षा की गारंटी देना केवल झूठा प्रचार है।लोकदल इस डील का कड़ा विरोध करता है और मांग करता है किकिसानों से जुड़े सभी समझौतों को सार्वजनिक किया जाए,MSP को कानूनी दर्जा दिया जाए,और अमेरिका के साथ की जा रही इस किसान-विरोधी डील को तुरंत रद्द किया जाए।यह डील विकास की नहीं, किसानों को खत्म करने की डील है—और लोकदल इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगा।

मुंबई में पहली बार खिलेगा ‘कमल’ रितु तावड़े होंगी भाजपा की पहली महिला मेयर, महायुति का शक्ति प्रदर्शन

भारतीय जनता पार्टी ने रितु तावड़े को मुंबई महापौर पद के लिए अपना उम्मीदवार घोषित किया है। मुंबई मेयर का पद खुली श्रेणी में महिला उम्मीदवारों के लिए आरक्षित है, ऐसे में साफ है कि मुंबई को एक बार फिर महिला महापौर मिलेंगी। इसी कड़ी में मुंबई में पहली बार भाजपा का महापौर बनेगा। मुंबई भाजपा अध्यक्ष अमित साटम ने नाम का एलान किया है। वहीं शिंदे गुट के संजय शंकर घाड़ी डिप्टी मेयर बनेंगे। जिसकी घोषणा शिवसेना नेता राहुल शेवाले ने की। भाजपा मेयर प्रत्याशी रितु तावड़े घाटकोपर से तीन बार की पार्षद और शिक्षा समिति की पूर्व अध्यक्ष रह चुकी है। जबकि शिवसेना ने मुंबई के वार्ड नंबर 5, मागाथाने के पार्षद संजय शंकर घाड़ी को उप महापौर पद के लिए नामित किया है। बहुमत को देखते हुए महायुति पार्टी के महापौर और उप महापौर पदों के उम्मीदवारों की जीत निश्चित मानी जा रही है। डिप्टी मेयर पदों के लिए उम्मीदवार उतार सकतीडिप्टी मेयर के पद के लिए शिवसेना ने यह साफ किया है कि घाड़ी उप महापौर पद पर डेढ़ साल तक बने रहेंगे। शिवसेना सचिव संजय मोरे ने एक बयान में कहा है कि घाड़ी 15 महीने तक उप महापौर के रूप में कार्य करेंगे। दरअसल, घाड़ी शिवसेना (यूबीटी) के उन वरिष्ठ पूर्व पार्षदों में से एक थे, जिन्होंने पाला बदलकर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए थे। मुंबई में उप महापौर के कार्यकाल को विभाजित करके शिवसेना अपने चार पार्षदों को अवसर देना चाहती है। दरअसल, मेयर और डिप्टी मेयर पदों के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि आज, सात फरवरी को समाप्त हो रही है। उसके बाद 11 फरवरी को मेयर चुनाव होने हैं। ऐसे में भाजपा-शिवसेना गठबंधन मेयर और डिप्टी मेयर पदों के लिए आवेदन दाखिल करेगा। इस दौरान सभी पार्षद मौजूग रहेंगे और अपनी शक्ति का प्रदर्शन करेंगे। इस बीच मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबि शिवसेना यूबीटी और कांग्रेस मेयर और डिप्टी मेयर पदों के लिए उम्मीदवार उतार सकती है। 25 वर्षों तक नगर निकाय पर शासन कियाबता दें कि हाल ही में हुए बृहन्मुंबई नगर निगम के 227 सदस्यीय चुनावों में भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जबकि शिवसेना ने 29 सीटें जीतीं। सत्तारूढ़ गठबंधन, जिसके पास कुल 118 पार्षद हैं, बहुमत के आंकड़े (114) को पार कर चुका है और महापौर पद हासिल करने की अच्छी स्थिति में है। शिवसेना (यूबीटी), जिसने 1997 से 25 वर्षों तक नगर निकाय पर शासन किया, उसने 65 सीटें जीतीं, जबकि उसके सहयोगी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) ने क्रमशः छह और एक सीट जीती।

ईरान को ट्रंप की ‘न्यूक्लियर’ चेतावनी! बोले समझौता करो या गंभीर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहो

ओमान की राजधानी मस्कट में अमेरिका-ईरान परमाणु समझौते पर पहले दौर की बातचीत बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई। हालांकि दोनों ही देशों ने इस वार्ता को सकारात्मक बताया। अब अगले हफ्ते फिर से वार्ता की जाएगी। इस बीच अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त लहजे में चेतावनी दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस वार्ता को ‘बहुत अच्छा’ बताया है और अगले सप्ताह की शुरुआत में और बातचीत की योजना के बारे में कहा। साथ ही दबाव भी बढ़ाया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान परमाणु कार्यक्रम पर समझौता नहीं करता है, तो उसे ‘गंभीर परिणाम’ भुगतने होंगे। विमानवाहक पोत को क्षेत्र में भेजादरअसल, ट्रंप प्रशासन का मुख्य उद्देश्य ईरान को जीरो न्यूक्लियर कैपेबिलिटी यानी शून्य परमाणु क्षमता की ओर ले जाना है। ईरान सिर्फ अपने परमाणु कार्यक्रम पर बात करना चाहता है, जबकि अमेरिका उसकी बैलिस्टिक मिसाइलों और क्षेत्रीय गतिविधियों को भी समझौते में शामिल करना चाहता है। ट्रंप ने ईरान को इस कार्यक्रम पर समझौता करने के लिए मजबूर करने के लिए सैन्य कार्रवाईकरने की बार-बार धमकी दी है, इससे पहले उन्होंने तेहरान को देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों पर की गई खूनी कार्रवाई के जवाब में इस विमानवाहक पोत को क्षेत्र में भेजा था, जिसमें हजारों लोग मारे गए थे और इस्लामिक गणराज्य में हजारों अन्य लोगों को हिरासत में लिया गया था। जहाजों और व्यक्तियों पर प्रतिबंध लगाए गएओमान में हुई बातचीत पर जब कोई ठोक नतीजा सामने नहीं आया तो नाराज राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर नए प्रतिबंध लगाए। अमेरिका ने ईरान के तेल और पेट्रोकेमिकल निर्यात से जुड़े नेटवर्क पर नई सख्त कार्रवाई की है। नए आदेश के तहत कई कंपनियों, जहाजों और व्यक्तियों पर प्रतिबंध लगाए गए हैं। अमेरिका के मुताबिक ईरान से जुड़े तेल कारोबार के जरिए नियमों को दरकिनार किया जा रहा था। बता दें कि ओमान हमेशा की तरह दोनों देशों के बीच पुल का काम कर रहा है। वार्ता में राष्ट्रपति के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जारेड कुशनर ने किया। दोनों पक्षों के राजनयिक अब अपने-अपने देशों में मशविरा करेंगे। अगली बैठक अगले सप्ताह की शुरुआत में होने की संभावना है। वार्ता के बाद अमेरिका ने तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की। इधर, बैठक को लेकर ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि यह एक अच्छी शुरुआत है। हमारे हमने अपने दृष्टिकोण एक-दूसरे तक पहुंचाए, जो बेहद जरूरी था।

दिल्ली में बच्चियों और महिलाओं की सुरक्षा पर गहराता संकट – देवेन्द्र यादव, अध्यक्ष, दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी

देश की राजधानी दिल्ली को हमेशा से एक सुरक्षित और आधुनिक शहर के रूप में देखा जाता रहा है, लेकिन आज की हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आ रही है। राजधानी में छोटे बच्चों, खासकर बच्चियों और महिलाओं के बड़ी संख्या में लापता होने की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। यह स्थिति न केवल डराने वाली है, बल्कि पूरे समाज के लिए गहरी चिंता का विषय भी है। इसी गंभीर मुद्दे को लेकर दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने दिल्ली के उपराज्यपाल को पत्र लिखकर तत्काल और ठोस कार्रवाई की मांग की है। उपराज्यपाल को पत्र लिखकर जांच की मांगदेवेन्द्र यादव ने अपने पत्र में साफ शब्दों में कहा है कि दिल्ली से लगातार बच्चों, विशेषकर लड़कियों के लापता होने की घटनाओं की गहन जांच जरूरी है। उन्होंने मांग की है कि इन मामलों की सच्चाई सामने लाने और दोषियों को पकड़ने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया जाए। उनका कहना है कि बिना ठोस जांच के न तो पीड़ित परिवारों को न्याय मिल सकता है और न ही अपराधों पर रोक लग सकती है। सिर्फ 27 दिनों में 807 लोगों का लापता होनादेवेन्द्र यादव ने दिल्ली की कानून व्यवस्था पर चिंता जताते हुए बताया कि वर्ष 2026 के पहले ही महीने के केवल 27 दिनों में राजधानी से 807 लोग लापता हो चुके हैं। इनमें सबसे अधिक संख्या छोटे बच्चों, बच्चियों और महिलाओं की है। प्रतिदिन औसतन 27 लोगों का गायब होना यह दर्शाता है कि राजधानी में आम नागरिक कितना असुरक्षित महसूस कर रहा है। सरकार और गृह मंत्रालय की चुप्पी पर सवालदिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने के बावजूद दिल्ली सरकार और केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से कोई ठोस कदम उठता नजर नहीं आ रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब हर दिन लोग गायब हो रहे हैं, तब सरकार की चुप्पी आखिर किस बात का संकेत है। उनका कहना है कि यह उदासीनता जनता के प्रति गैर-जिम्मेदार रवैये को दिखाती है। दिल्ली पुलिस की जिम्मेदारी और नाकामीदेवेन्द्र यादव ने कहा कि दिल्ली पुलिस सीधे तौर पर केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन काम करती है। इसके बावजूद राजधानी में बच्चियों और महिलाओं का इस तरह गायब होना पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि पुलिस की मौजूदगी के बावजूद अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और आम लोग खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं। राजधानी में बढ़ते अपराधों की भयावह तस्वीरदेवेन्द्र यादव ने बताया कि दिल्ली में अपराध की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। दिनदहाड़े हत्या, बलात्कार, छेड़छाड़, धमकी, लूटपाट, गोलीबारी और जबरन वसूली जैसी घटनाएं आम होती जा रही हैं। इन घटनाओं से यह साफ हो जाता है कि राजधानी की कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है और आम आदमी की सुरक्षा को लेकर सरकार गंभीर नहीं है।अपराध के आंकड़े सच्चाई उजागर करते हैं देवेन्द्र यादव ने वर्ष 2025 के अपराध आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये आंकड़े खुद ही सब कुछ बयां कर देते हैं। राजधानी में हत्याएं, हत्या के प्रयास, बलात्कार और महिलाओं के खिलाफ अपराधों की संख्या चिंताजनक स्तर तक पहुंच चुकी है। उनका कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर अपराध होना इस बात का प्रमाण है कि कानून व्यवस्था को नियंत्रित करने में प्रशासन विफल रहा है। महिला मुख्यमंत्री के बावजूद असुरक्षित महिलाएंदिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि दिल्ली में महिला मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार होने के बावजूद महिलाएं और बच्चियां सुरक्षित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सरकार और पुलिस आम नागरिकों को सुरक्षा देने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही हैं, जिससे जनता का भरोसा टूटता जा रहा है। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ नारा बनकर रह गयादेवेन्द्र यादव ने भाजपा की केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार हर मंच पर “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” का नारा देती है, लेकिन जब देश की राजधानी में ही बेटियां सुरक्षित नहीं हैं, तो इस नारे का कोई अर्थ नहीं रह जाता। उन्होंने कहा कि अगर बेटियां सुरक्षित नहीं होंगी, तो उनके भविष्य और शिक्षा की बात करना केवल दिखावा बनकर रह जाएगा। गरीब परिवारों की बच्चियां सबसे ज्यादा प्रभावितदेवेन्द्र यादव ने कहा कि लापता होने वाली बच्चियों और महिलाओं में अधिकतर गरीब परिवारों से हैं। ये वे परिवार हैं जिनकी आवाज़ अक्सर अनसुनी रह जाती है। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि अपराधी इन वर्गों को आसानी से निशाना बनाते हैं और प्रशासन की लापरवाही के कारण उन्हें बच निकलने का मौका मिल जाता है। टास्क फोर्स गठन की जरूरतअंत में देवेन्द्र यादव ने कहा कि राजधानी दिल्ली में कानून व्यवस्था की स्थिति बेहद चिंताजनक हो चुकी है। उन्होंने मांग की कि लापता मामलों की जांच, अपराधों पर रोक और बच्चियों व महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तुरंत एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया जाए। उनका कहना है कि अगर अब भी गंभीर कदम नहीं उठाए गए, तो हालात और खराब हो सकते हैं।

केंद्र सरकार की मंशा अब पूरी तरह उजागर हो चुकी है – चौधरी सुनील सिंह, राष्ट्रीय अध्यक्ष, लोकदल

लोकतंत्र की असली ताक़त आम आदमी के वोट में होती है। भारत जैसे देश में हर नागरिक को वोट देने का अधिकार मिला है, ताकि वह अपनी बात सरकार तक पहुँचा सके। लेकिन आज यही अधिकार खतरे में दिखाई दे रहा है। लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी सुनील सिंह जी ने केंद्र सरकार की नीतियों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि अब सरकार की मंशा जनता के सामने साफ़ हो चुकी है। उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जी द्वारा उठाए गए साहसिक और संवैधानिक कदमों का पूरा समर्थन किया है। SIR योजना के नाम पर लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिशचौधरी सुनील सिंह जी ने अपने पत्र में कहा है कि केंद्र सरकार जिस SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) योजना की बात कर रही है, वह असल में वोट सुधार की योजना नहीं है। यह योजना उन लोगों को निशाना बनाने के लिए लाई जा रही है जो सरकार से सवाल पूछते हैं। इस योजना के ज़रिए यह कोशिश की जा रही है कि आम आदमी का नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया जाए, ताकि वह मतदान न कर सके और सरकार से जवाब न मांग सके। आम नागरिकों को डराने और भ्रम में डालने का प्रयासपश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के नाम पर जिस तरह से लोगों को डराया जा रहा है, वह बहुत ही चिंताजनक है। आम नागरिकों से बार-बार काग़ज़ मांगे जा रहे हैं। उनकी नागरिकता पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। लोगों को यह डर दिखाया जा रहा है कि अगर उन्होंने ज़्यादा सवाल किए या ज़्यादा विरोध किया, तो उनका नाम वोटर लिस्ट से काट दिया जाएगा। चौधरी सुनील सिंह जी ने कहा कि यह तरीका लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ़ है। वोट सुधार नहीं, वोट चोरी की साजिशलोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने साफ शब्दों में कहा कि यह पूरी योजना वोट सुधार की नहीं, बल्कि वोट चोरी की साजिश है। जब सरकार जनता की समस्याओं पर बात करने से बचने लगती है, तब वह जनता की आवाज़ को ही दबाने की कोशिश करती है। वोटर लिस्ट से नाम हटाकर सरकार यह तय करना चाहती है कि कौन वोट देगा और कौन नहीं, जो लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक है। ममता बनर्जी आम आदमी की आवाज़ बनकर खड़ी हैंचौधरी सुनील सिंह जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जी आज अकेली नहीं हैं। वे उस आम आदमी की आवाज़ बनकर सामने आई हैं, जिसे केंद्र सरकार चुप कराना चाहती है। ममता बनर्जी जी ने संविधान के दायरे में रहते हुए जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए जो कदम उठाए हैं, वे पूरे देश के लिए एक मिसाल हैं। लोकदल पूरी मजबूती से इस लड़ाई में उनके साथ खड़ा है। असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिशचौधरी सुनील सिंह जी ने कहा कि देश आज बेरोज़गारी, महंगाई और किसानों की बदहाली जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। युवा काम के लिए परेशान हैं, किसान अपनी फसल का सही दाम नहीं पा रहे हैं और आम आदमी रोज़मर्रा की ज़रूरतों को पूरा करने में संघर्ष कर रहा है। लेकिन केंद्र सरकार इन मुद्दों पर बात करने के बजाय वोटर लिस्ट और नागरिकता जैसे सवाल खड़े कर रही है, ताकि जनता का ध्यान असली समस्याओं से हटाया जा सके। लोकतंत्र को तानाशाही की ओर ले जाने वाला रास्तालोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर वोट देने के अधिकार के साथ इस तरह खिलवाड़ किया गया, तो देश धीरे-धीरे तानाशाही की ओर बढ़ जाएगा। लोकतंत्र में सरकार जनता से डरती है, लेकिन आज ऐसा लग रहा है कि सरकार जनता को डराने का काम कर रही है। यह स्थिति देश के भविष्य के लिए बेहद खतरनाक है। लोकतंत्र बचाने की सामूहिक लड़ाईचौधरी सुनील सिंह जी ने कहा कि यह लड़ाई किसी एक राज्य, एक पार्टी या एक नेता की नहीं है। यह लड़ाई देश के संविधान और लोकतंत्र को बचाने की है। लोकदल हर उस ताक़त के साथ खड़ा रहेगा जो आम आदमी के वोट और अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष कर रही है। जनता की आवाज़ को दबाने की हर कोशिश का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध किया जाएगा।

तन्वी शर्मा का ‘जाइंट किलर’ अवतार! थाईलैंड से हारा भारत, पर शान से क्वार्टर फाइनल में मारी एंट्री

युवा तन्वी शर्मा के शानदार प्रदर्शन के बावजूद गत चैंपियन भारत को बैडमिंटन एशिया टीम चैम्पियनशिप में ग्रुप वाय के दूसरे मैच में गुरुवार को थाईलैंड के हाथों 2-3 से पराजय झेलनी पड़ी। इस हार के बावजूद भारत ने क्वार्टर फाइनल के लिये क्वालिफाई कर लिया है। म्यांमार को पहले मैच में 5-0 से हराने के बाद भारत ग्रुप वाय में थाईलैंड के बाद दूसरे स्थान पर रहा। दुनिया की 42वें नंबर की खिलाड़ी और 2024 में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक विजेता भारतीय टीम की सदस्य रही तन्वी ने विश्व रैंकिंग में 16वें स्थान पर काबिज बुसानन ओंगामरूनंगफान को 21-14, 17-21, 21-18 से हराया। गायत्री गोपीचंद और त्रिसा जॉली की जोड़ी ने इसके बाद 65वीं रैंकिंग वाली टी क्लीबायीसुन और नत्तामोन लेइसुआन की जोड़ी को 21-14, 20-22, 21-11 से हराया। रक्षिता रामराज हालांकि 2023 विश्व जूनियर चैम्पियन 19 वर्ष की पिचामोन ओमात्निपुत से 19-21, 17-21 से हार गई। दूसरे युगल मैच में तनीषा क्रास्टो और श्रुति मिश्रा को एच मिजाद और नापापाकोर्न तुंगकासातान ने 19-21, 21-14, 21-15 से हराया।मालविका बंसोड को पहले एकल में पोर्नपिचा चोइकीवोंग ने 21-18, 21-14 से हराया। दमदार जीत दर्ज कींओलंपिक कांस्य पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन ने स्पेन के अलीकांटे में जारी बोक्सैम एलीट इंटरनेशनल 2026 में यूक्रेन की ओल्हा पिलिपचुक को आसानी से हराकर अपने अभियान की शुरुआत की जबकि हितेश गुलिया भी अगले दौर में पहुंच गए जिससे भारतीय मुक्केबाजों ने अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखा। लवलीना महिलाओं के 75 किलोग्राम वर्ग में शानदार फॉर्म में थीं, उन्होंने तेज और सटीक मुक्कों के संयोजन से यूक्रेन की ओल्हा पिलिपचुक को 5-0 के सर्वसम्मत फैसले में हराकर आसानी से अगले दौर में प्रवेश किया। पुरुषों के 70 किलोग्राम वर्ग में हितेश ने भी शानदार फॉर्म जारी रखते हुए कनाडा के विन्सेंट सांटाओरिएलो को 5-0 से शिकस्त दी। लवलीना के अलावा भारत की अन्य महिला मुक्केबाजों ने भी दमदार जीत दर्ज कीं। मंजू रानी (48 किलोग्राम) ने फ्रांस की ग्लोरिया डिअलेमेडा को 5-0 से हराया तो वहीं नीतू (51 किलोग्राम) ने स्पेन की लौरा काल्डेरॉन को पहले राउंड में आरएससी (रैफरी द्वारा मुकाबला रोका जाना) से जीत दर्ज की।

मणिपुर में राष्ट्रपति शासन खत्म, युमनाम खेमचंद सिंह संभालेंगे सत्ता की कमान

मणिपुर में लगभग एक साल से चले आ रहे राष्ट्रपति शासन को हटा दिया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बुधवार को एक अधिसूचना जारी कर राज्य से राष्ट्रपति शासन को तत्काल प्रभाव से हटाने की घोषणा की। इसके साथ ही भाजपा के युमनाम खेमचंद सिंह आज शाम 6 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। बीजेपी विधायक दल के नेता युमनाम खेमचंद सिंह ने आज लोक भवन में राज्यपाल अजय भल्ला से मुलाकात कर बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार बनाने का दावा पेश किया है। राष्ट्रपति की ओर से जारी घोषणा में कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 356 के खंड (2) के तहत मिली शक्तियों का उपयोग करते हुए यह फैसला लिया गया है। इसके तहत 13 फरवरी 2025 को जारी की गई उद्घोषणा को 4 फरवरी 2026 से वापस लिया जाता है। अधिसूचना जारी कर इसकी घोषणा कीबता दें कि इससे पहले मंगलवार को भाजपा विधायक दल की बैठक में युमनाम खेमचंद को विधायक दल का नेता चुना गया था। अब वे राज्य के नए मुख्यमंत्री के तौर पर कमान संभालेंगे। पिछले साल 13 फरवरी 2025 को मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाया गया था। यह फैसला तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद लिया गया था। उस समय राज्य लंबे समय से जातीय हिंसा और संवैधानिक संकट से गुजर रहा था, जिसके चलते केंद्र सरकार को यह कदम उठाना पड़ा था। मणिपुर से तत्काल प्रभाव से राष्ट्रपति शासन हटा दिया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आज एक अधिसूचना जारी कर इसकी घोषणा की है।

RSS ने 100 साल में क्या किया? राज्यसभा में खरगे ने महिला आरक्षण पर मोदी सरकार को धोया

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बुधवार को राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, 6062 शब्दों को अभिभाषण इस सरकार ने तैयार किया है। लेकिन कई अहम सवालों पर अभिभाषण मौन है। मैं सदन में सिर्फ पांच जरूरी मुद्दे आपके सामने रखना चाहूंगा। मैं सामाजिक न्याय, सामाजिक सद्भाव, संसदीय लोकतंत्र पर हमला, अर्थव्यवस्था और किसानों मजदूरों की दिक्कतें और विदेश नीति की खामियां.. पर अपनी बात रखना चाहता हूं। विधेयक पास कर सकतेखरगे ने कहा, आपको यह बताना चाहता हूं कि इस सत्ता ने कितना समय देश की भलाई के लिए दिया है। कितना समय इन्होंने देश के बाहर बिताया। यह आप सबको मालूम है। सबसे पहले मैं सामाजिक न्याय पर बात रखूंगा। पिछले 11 वर्षों में मोदी सरकार ने सामाजिक न्याय के ताने-बाने को कमजोर किया है। उनके सांविधानिक हक-हकूकों पर चोट पहुंचाई है। राष्ट्रपति के अभिभाषण में महिला सशक्तिकरण पर बात हुई, लेकिन सच यह है कि महिलाएं भाजपा के लिए केवल वोट बैंक बनकर रह गई हैं। अगर मोदी वाकई महिलाओं का नेतृत्व आगे लाना चाहते हैं, तो सबसे महिला आरक्षण विधेयक पारित करते, इस पर शर्तें नहीं रखते। अगर आपको उन्हें शक्ति देनी है, तो आप ये विधेयक पास कर सकते हैं। उसको लागू कर सकते हैं। आप कहते हैं कुछ, करते हैं कुछ। महिलाओं पर अत्याचार बढ़ रहेआप इस पर शर्तें लागू नहीं करते, जैसे आपने जनगणना के नाम पर किया। आपसे सौ साल पहले जब महिलाओं को वोट का अधिकार भी नहीं था। तब कांग्रेस ने अपनी पार्टी की नेता सरोजनी नायडू को अध्यक्ष चुना। है आपके पास कोई उदाहरण? इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री बनने के भी साठ साल पूरे हो गए। भाजपा ने किसी महिला को अब तक अध्यक्ष नहीं बनाया है। आरएसएस ने सौ साल में किसी महिला को अपना नेतृत्व नहीं सौंपा है। उन्होंने आगे कहा, कमजोर तबकों, खासकर आदिवासियों, अल्पसंख्यकों और महिलाओं पर अत्याचार बढ़ रहे हैं। कांग्रेस की सरकारों में अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति (एससी-एसटी) समुदाय के आर्थिक विकास के लिए कई कदम उठाए गए।