संसद में रेणुका चौधरी का कुत्ता लेकर प्रवेश, राहुल गांधी ने हल्के अंदाज में लिया मामला

संसद में शीतकालीन सत्र का आज दूसरा दिन है। इस बीच सरकार और विपक्षी दलों के बीच कई सारे मुद्दों पर जोरदार बहस भी हुई। हालांकि दूसरीतरह संसद में उस समय हलचल मच गई जब कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी एक छोटे कुत्ते को लेकर संसद परिसर पहुंच गईं। इस घटना पर जब विवादशुरू हुआ तो लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस मामले को हल्के अंदाज में लेते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मुझे लगता हैकि आज के समय में कुत्ता ही मुख्य चर्चा का विषय बन गया है। बेचारे कुत्ते ने क्या किया? क्या कुत्तों को यहां आने की इजाजत नहीं है? राहुल गांधीने आगे इस बात पर भी जोर दिया कि शायद पालतू जानवरों को अंदर आने की इजाजत नहीं होगी। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि आज भारत मेंइन्हीं सभी मुद्दों पर बातचीत हो रही है। बता दें कि ये पूरा मामला तब शुरू हुआ जब संसद में शीतकालीन सत्र के शुरूआत के पहले दिन कांग्रेस सांसदरेणुका चौधरी संसद परिसर में कुत्ता लेकर पहुंच गई। ज्यादा शिकायत ड्रग्सराहुल गांधी के अलावा खुद रेणुका चौधरी ने भी इस पूरे मामले में अपनी प्रतिक्रिया दी है। जब उनसे इस पूरे मामले में सवाल पूछा गया तब उन्होंनेकहा कि संसद आते समय रास्ते में एक स्कूटर और कार की टक्कर देखी और वहीं सड़क पर एक पिल्ला भटकता हुआ मिला। उन्हें लगा कि वहदुर्घटना का शिकार हो सकता है, इसलिए उन्होंने उसे कार में बैठाया और संसद परिसर तक लाई। रेणुका चौधरी ने कहा कि मैंने उसे सुरक्षित घरभिजवा दिया। कुत्ता भी चला गया और कार भी। तो इस पर इतना बड़ा विवाद क्यों?इस दौरान कांग्रेस सांसद चौधरी ने केंद्र सरकार पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि असली काटने वाले तो संसद में बैठे हैं, जो सरकार चलाते हैं। हमएक बेजुबान जानवर की मदद करते हैं तो यह बड़ा मुद्दा बन जाता है। रेणुका चौधरी ने कहा कि क्या सरकार के पास इससे जरूरी काम नहीं हैं? उन्होंनेकहा कि कुत्ते को सिर्फ सुरक्षा के लिए उठाया गया था और उसे तुरंत घर भेज दिया गया। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने मंगलवार को गुजरात में बढ़रही ड्रग्स, अवैध शराब और अपराध की घटनाओं को लेकर राज्य सरकार पर कड़ा हमला किया। उन्होंने दावा किया कि डबल इंजन सरकार होने केबावजूद गुजरात की हालत खराब होती जा रही है। राहुल गांधी इन दिनों गुजरात में कांग्रेस की ‘जन आक्रोश यात्रा’ में शामिल हैं। उन्होंने कहा कियात्रा के दौरान लोगों खासकर महिलाओं ने सबसे ज्यादा शिकायत ड्रग्स, अवैध शराब और बढ़ते अपराध को लेकर की है। राहुल गांधी ने यात्रा में किसानों की परेशानियों का भी जिक्र कियाराहुल ने कहा कि गांधी और सरदार पटेल की धरती पर जहां हमेशा सच, न्याय और नैतिकता का महत्व रहा, वहां आज युवाओं का भविष्य ड्रग्स औरअपराध की ओर धकेला जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में महिलाएं सड़क पर इसलिए उतर रही हैं क्योंकि अपराधियों को सत्ता मेंबैठे लोग संरक्षण दे रहे हैं, जबकि आम जनता को अनदेखा किया जा रहा है। राहुल ने सवाल उठाए भाजपा सरकार चुप क्यों है? कौन सा मंत्री इनअवैध गतिविधियों को बचा रहा है? गुजरात के गुनहगारों को क्यों संरक्षण दिया जा रहा है? इस दौरान राहुल गांधी ने यात्रा में किसानों की परेशानियोंका भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हाल ही में आई भयंकर बाढ़ ने हजारों किसानों की फसलें बर्बाद कर दीं और कई परिवार तबाह हो गए। उन्होंनेकहा कि जब मोदी जी गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब राहत पैकेज की बातें करते नहीं थकते थे। आज वे प्रधानमंत्री हैं, राज्य में डबल इंजन सरकार है, लेकिन न राहत मिल रही है और न ही संवेदना।
केरल मसाला बॉन्ड विवाद, भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने CM विजयन से 2,100 करोड़ के कर्ज पर सवाल पूछे

केरल में मसाला बॉन्ड को लेकर सियासत में गर्माहट तेज हो गई है। आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति भी अपने चरम पर है। ऐसे में अब इस मामले मेंकेरल भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने भी मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन से तीखे सवाल पूछे। मंगलवार को चंद्रशेखर ने सीएम विजयन से पूछा किउन्होंने विदेश से 9.5% ब्याज दर पर मसाला बॉन्ड के जरिए 2,100 करोड़ रुपये क्यों उधार लिए, जबकि भारत में इससे कम ब्याज पर कर्ज आसानीसे मिल सकता था। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर पोस्ट में चंद्रशेखर ने राज्य सरकार से कई तीखे सवाल पूछे। उन्होंने आरोप लगाया कि इसकर्ज को लेने के लिए 21 करोड़ रुपये कमीशन एक बिचौलिये को दिए गए। साथ चंद्रशेखर ने पूछा कि वह बिचौलिया कौन था। उन्होंने यह भीसवाल किया कि क्या इस कर्ज के लिए विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (एफईएमए) के तहत जरूरी अनुमति ली गई थी।गौरतलब है कि ईडी कीजांच यह पता लगाने के लिए हो रही है कि केआईआईएफबी द्वारा मसाला बॉन्ड के जरिए जुटाए गए 2,000 करोड़ रुपये का इस्तेमाल कैसे कियागया और क्या यह एफईएमए नियमों के अनुसार था। ऐसे में ध्यान देने वाली बात है कि केआईआईबी राज्य के बड़े और महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चरप्रोजेक्ट्स के लिए फंड जुटाने वाली प्रमुख सरकारी एजेंसी है। उसने साल 2019 में पहली बार मसाला बॉन्ड जारी कर 2,150 करोड़ रुपये जुटाए थे, जो उसके 50,000 करोड़ रुपये के फंड जुटाने के लक्ष्य का हिस्सा था। ईडी के आरोप गलत आंकड़ों और गलत समझ पर आधारितइस दौरान राज्य भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि मैंने जो सवाल किया वो महत्वपूर्ण सवाल हैं और अगर राज्य सरकार ईमानदार होती, तो अब तक जवाब देदेती। उनके अनुसार, देश के सभी राज्य भारत के भीतर से बॉन्ड के माध्यम से पैसा जुटाते हैं, लेकिन केरल ने ऐसा नहीं किया। बता दें कि यह विवादउस समय और बढ़ गया जब सोमवार को ईडी ने खुलासा किया कि उसने 466 करोड़ रुपये का एफईएमए शो-कॉज नोटिस मुख्यमंत्री विजयन, पूर्ववित्त मंत्री टीएम थॉमस आइजैक और सीएम के मुख्य प्रधान सचिव केएम अब्राहम को भेजा है। नोटिस लगभग 10–12 दिन पहले जारी किया गयाथा और इसमें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि पूरे मामले में सीएम ने अभी तक इस पर प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिनआइजैक ने इसे राजनीतिक बदला बताया है। वहीं केआईआईएफबी के सीईओ अब्राहम का कहना है कि किसी भी कानून या एफईएमए के किसीनियम का उल्लंघन नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि ईडी के आरोप गलत आंकड़ों और गलत समझ पर आधारित हैं।
नई दवाओं और मेडिकल टेक्नोलॉजी पर जीरो टैरिफ, यूके-यूएस डील तीन साल तक लागू रहेगी

अमेरिका और ब्रिटेन के बीच जीरो टैरिफ डील पर सहमति बन गई है। फार्मा सेक्टर की कंपनियों को इस डील से बड़े लाभ होने के आसार हैं। दोनोंदेशों के बीच हुए इस करार का असर तीन साल तक रहेगा। अधिकारियों के मुताबिक ब्रिटेन ने कम से कम तीन साल के लिए अमेरिका में निर्यात कीजाने वाली सभी दवाओं पर जीरो परसेंट टैरिफ की दर पक्की कर ली है। इसके बदले में ब्रिटेन अब नई दवाओं पर अधिक खर्च कर सकेगा। इस डीलके तहत अमेरिका ने आश्वासन दिया है कि ब्रिटेन में बनी दवाओं, दवा में इस्तेमाल होने वाली चीजें (इंग्रेडिएंट्स) और मेडिकल टेक्नोलॉजी को इंपोर्टटैक्स से छूट मिलेगी। अमेरिका और ब्रिटेन के बीच हुए इस समझौते के बारे में अधिकारियों ने सोमवार को कहा, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नीत प्रशासन नेकहा है कि इस डील के बदले में UK की दवा कंपनियों ने अमेरिका में अधिक निवेश करने और अधिक नौकरियों के अवसर सृजित करने का वादाकिया है। दूसरी तरफ ब्रिटेन में प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के नेतृत्व वाली सरकार ने कहा है कि यूके से सभी दवाओं के निर्यात पर जीरो परसेंट रेट किसी भीदेश को दी गई सबसे कम दर है। इस डील के हिस्से के तौर पर ब्रिटेन ने कहा है कि देश की सरकार नेशनल हेल्थ सर्विस नए और असरदार इलाज परलगभग 25 परसेंट अधिक खर्च करेगी। यह भी दिलचस्प है कि बीते दो दशकों में इस तरह के खर्च में सरकार ने पहली बार इतनी बड़ी बढ़ोतरी करनेका एलान किया है। रिचर्ड टॉरबेट ने कहाअधिकारियों के मुताबिक इस डील के बाद UK की हेल्थ अथॉरिटी अब उन दवाओं को भी मंजूरी दे पाएंगी जिनकी मदद से सेहत में काफी सुधारहोता है। इससे पहले केवल कॉस्ट-इफेक्टिवनेस के आधार पर दवाओं को मंजूरी देने से मना कर दिया गया था। इन बीमारियों में ब्रेकथ्रू कैंसर ट्रीटमेंटया रेयर बीमारियों की थेरेपी भी शामिल हैं। ब्रिटेन के साइंस और टेक्नोलॉजी सेक्रेटरी लिज केंडल ने कहा, अमेरिका के साथ यह जरूरी डील पक्काकरेगी कि ब्रिटेन के मरीजों को उनकी जरूरत के मुताबिक दवाएं जल्दी मिलें। साथ ही दुनिया की शीर्ष कंपनियों के साथ काम कर रहे वैज्ञानिक ऐसेइलाज पर शोध कर सकें जिन्हें अपनाकर जिंदगी बदली जा सके। ब्रिटेन में स्वास्थ्य क्षेत्र की शीर्ष इकाई- एसोसिएशन ऑफ द ब्रिटिश फार्मास्युटिकलइंडस्ट्री (ABPI) ने भी जीरो टैरिफ डील को लेकर खुशी का इजहार किया। इंडस्ट्री ने कहा, यह डील पक्का करने की दिशा में एक जरूरी कदम है किमरीज राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (NHS) के तहत बेहतर लाभ पा सकेंगे। मरीजों को जरूरी और नई दवाएं आसानी से मिल सकेंगी। ABPI अधिकारीरिचर्ड टॉरबेट ने कहा, इस डील के बाद UK ग्लोबल लाइफ साइंस इन्वेस्टमेंट और एडवांस्ड मेडिसिनल रिसर्च को आकर्षित कर सकेगा। मेडिकल सेजुड़े शोध में देश की स्थिति और मजबूत होगी।
कोलकाता में बीएलओ का फूटा गुस्सा SIR प्रक्रिया पर हंगामा, भारी पुलिस बल तैनात

पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया में लगे बीएलओ ने सोमवार को कोलकाता में विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान बीएलओ ने कोलकाता मेंनिर्वाचन आयोग के दफ्तर के बाहर खूब हंगामा किया। हालात इस कदर बिगड़े कि बीएलओ को रोकने के लिए भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा।पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया में लगे बीएलओ बीते कई दिनों से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। बीते हफ्ते भी विरोध प्रदर्शन के दौरान बीएलओ नेजबरन राज्य निर्वाचन आयुक्त के दफ्तर में घुसने की कोशिश की थी। चुनाव आयोग ने कोलकाता के पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर निर्वाचनआयुक्त की सुरक्षा में चूक को बेहद गंभीर बताते हुए निर्वाचन अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था। एसआईआर प्रक्रिया में लगेबूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) काम का भारी दबाव होने का आरोप लगा रहे हैं। बूथ लेवल अधिकारियों का कहना है कि एसआईआर प्रक्रिया केचलते उन्हें अमानवीय तनाव झेलना पड़ रहा है। बीएलओ का यह विरोध प्रदर्शन ऐसे समय हो रहा है, जब बंगाल समेत देश के 12 राज्यों मेंएसआईआर की प्रक्रिया चल रही है। वहीं भारी काम के दबाव के चलते देशभर से कई बीएलओ की मौत होने का दावा किया जा रहा है। परिवारों काआरोप है कि बीएलओ पर बहुत ज्यादा काम के दबाव डाला जा रहा है। अमानवीय तनाव झेलना पड़ रहावहीं बीएलओ पर काम के भारी दबाव की खबरों के बीच चुनाव आयोग ने एसआईआर की डेडलाइन सात दिन बढ़ा दी है। अब मतदाता सूची केविशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया 11 दिसंबर तक चलेगी। पुनरीक्षण की समयसीमा बढ़ाने का एलान करते हुए आयोग ने जो नोटिस जारीकिया है, इसके मुताबिक पुनरीक्षण के बाद मतदाता सूची के मसौदे का प्रकाशन 16 दिसंबर को होगा। अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी कोप्रकाशित की जाएगी। चुनाव आयोग ने कहा है कि मतदाताओं के नाम दर्ज करने के लिए फॉर्म भरे जाने यानी इन्युमरेशन की अवधि 11 दिसंबर तकबढ़ाई गई है। 50 करोड़ से अधिक मतदाताओं से जुड़ी इस प्रक्रिया को पूरा करने में 12 राज्यों में बूथ स्तर के 5.32 लाख से अधिक कर्मचारी लगाएगए हैं। पांच लाख से अधिक बीएलओ के अलावा राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट (BLA) भी इस प्रक्रिया से जुड़े हैं। 12.43 लाख से अधिकबीएलए 12 राज्यों में जारी एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े हैं। एसआईआर प्रक्रिया में लगे बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) काम का भारी दबाव होनेका आरोप लगा रहे हैं। बूथ लेवल अधिकारियों का कहना है कि एसआईआर प्रक्रिया के चलते उन्हें अमानवीय तनाव झेलना पड़ रहा है।
निकाय चुनाव स्थगित होने पर फडणवीस भड़के, ‘निर्वाचन आयोग का फैसला गलत, उम्मीदवारों के साथ अन्याय’

महाराष्ट्र में कुछ जगहों पर आगामी निकाय चुनाव स्थगित होने पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने राज्य निर्वाचन आयोगकी तीखी आलोचना करते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग का चुनाव स्थगित करने का फैसला पूरी तरह से गलत है। पैठण में मीडिया से बात करते हुएसीएम ने कहा कि अंतिम समय में चुनाव स्थगित करना उन उम्मीदवारों के साथ अन्याय है, जो नामांकन की पूरी प्रक्रिया पूरी कर चुके हैं। मुख्यमंत्रीफडणवीस ने कहा, ‘विचाराधीन याचिकाओं के चलते कुछ जगहों पर निकाय चुनाव स्थगित करने का फैसला अन्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय है।’ मुख्यमंत्री ने निर्वाचन आयोग के चुनाव स्थगित करने के फैसले की वैधानिकता पर सवाल खड़े किए। सीएम ने कहा, ‘मुझे नहीं पता कि निर्वाचनआयोग किससे सलाह ले रहा है, लेकिन जहां तक मुझे कानून का पता है, अगर कोई अदालत गया है तो इसके चलते चुनाव स्थगित नहीं किए जासकते।’ राज्य निर्वाचन आयोग ने मंगलवार को होने वाले निकाय चुनाव को कुछ जगहों पर स्थगित कर दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘कोई उम्मीदवारअगर नामांकन खारिज होने के चलते अगर अदालत गया है तो आखिरी समय पर चुनाव को ही स्थगित कर देना अन्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय है।चुनाव आयोग एक स्वतंत्र निकाय है और ये फैसला लेना उसका अधिकार है, लेकिन चुनाव को स्थगित करना पूरी तरह से गलत है।’ पानी की समस्याएं और कचरे की समस्याएं हुईंमुख्यमंत्री ने कहा, ‘कोई उम्मीदवार अगर नामांकन खारिज होने के चलते अगर अदालत गया है तो आखिरी समय पर चुनाव को ही स्थगित कर देनाअन्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय है। चुनाव आयोग एक स्वतंत्र निकाय है और ये फैसला लेना उसका अधिकार है, लेकिन चुनाव को स्थगित करना पूरीतरह से गलत है।’ फडणवीस ने इस मामले को चुनाव आयोग के सामने उठाने की बात भी कही। डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने भी राज्य निर्वाचनआयोग के फैसले की आलोचना की और कहा कि नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद कभी भी चुनाव स्थगित नहीं किए गए हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्रफडणवीस ने सोमवार को दावा किया कि पिछली सरकारों ने शहरों के विकास को नजरअंदाज किया, और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शहरीइलाकों के लिए योजनाएं शुरू कीं, क्योंकि देश की जीडीपी का 65 प्रतिशत वहीं से आता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 65 वर्षों से शहरों के लिएकोई स्कीम नहीं थी, और इस वजह से अतिक्रमण और झुग्गियां बनीं, और पानी की समस्याएं और कचरे की समस्याएं हुईं।
कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की आहट नाश्ते की राजनीति पर बोले CM–DYC ‘कोई गुटबाजी नहीं’

कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन के कयासों के बीच कांग्रेस पार्टी में एकजुटता दिखाने की कोशिशें चल रही हैं। हाल ही में डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार नेसीएम आवास पर जाकर सीएम से नाश्ते पर चर्चा की। अब सीएम सिद्धारमैया ने कहा है कि वे भी डिप्टी सीएम के आवास पर नाश्ता करने जा सकतेहैं। सीएम मंगलवार को यानी 2 दिसंबर को डीके शिवकुमार के आवास जा सकते हैं। हालांकि सीएम ने ये भी कहा कि उन्हें अभी तक औपचारिकनिमंत्रण नहीं मिला है। कर्नाटक में बीते कई दिनों से सीएम सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के बीच नेतृत्व परिवर्तन की खींचतान चलरही है। शनिवार को डीके शिवकुमार और सीएम सिद्धारमैया की सीएम आवास में नाश्ते पर मुलाकात हुई थी। इस मुलाकात के बाद दोनों नेताओं नेएकजुटता का संदेश दिया था और नेतृत्व परिवर्तन को लेकर किसी भी असमंजस की बात को खारिज कर दिया था। दोनों नेताओं ने कहा कि जो भीपार्टी आलाकमान तय करेगा, वे उसका पालन करेंगे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पार्टी आलाकमान ने सिद्धारमैया को फिलहाल सीएम पद पर बनेरहने के संकेत दिए हैं और खासकर आगामी विधानसभा सत्र तक। अपनी तरह से किसी भी विवाद की बात से इनकार कर रहेसोमवार को मीडिया से बात करते हुए सीएम सिद्धारमैया ने कहा, ‘शनिवार को शिवकुमार ने उनसे मंगलवार को नाश्ते पर घर आने को कहा था। मुझेअभी तक औपचारिक निमंत्रण नहीं मिला है, लेकिन अगर वे बुलाते हैं तो मैं जरूर जाऊंगा। मुझे लगता है कि वे मुझे आमंत्रित करेंगे।’ वहीं सीएम केबयान पर डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने सोमवार को कहा, ‘ये मेरे और मुख्यमंत्री के बीच का मामला है और हम दोनों भाई की तरह मिलकर कामकर रहे हैं। हम मीडिया के दबाव के चलते 29 नवंबर को मिले थे, लेकिन उसकी कोई जरूरत नहीं थी। आप गुटबाजी के दावे कर रहे हैं, लेकिन कोईगुटबाजी नहीं है। आप ही गुट बना रहे हैं।’ शिवकुमार ने ये भी कहा, ‘मेरे साथ 140 विधायक हैं। हम जब पैदा हुए और जब मरेंगे हम अकेले होंगे, लेकिन जब पार्टी की बात आती है तो हम सभी को साथ लेकर चलते हैं। इसलिए किसी को चिंता करने की जरूरत नहीं है।’ ऐसा दावा किया जा रहाहै कि सीएम सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के बीच ढाई-ढाई साल सीएम रहने का समझौता है। अब जब नवंबर में कर्नाटक की कांग्रेससरकार को ढाई साल का वक्त पूरा हो गया है तो राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं तेज हो गईं। कई सत्ता पक्ष और विपक्षी नेताओं की बयानबाजीने भी इस चर्चा को बल दिया। हालांकि सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार अपनी तरह से किसी भी विवाद की बात से इनकार कर रहे हैं।
प्रियंका गांधी का प्रहार प्रदूषण–SIR पर बहस क्यों नहीं? संसद में सरकार पर निशाना

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने सरकार पर संसद में चर्चा से बचने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी मुद्दे पर संवाद करने केलिए तैयार नहीं है, जिससे सदन का सुचारू रूप से चल पाना कठिन हो रहा है। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीपर निशाना साधते हुए कहा कि लोगों से जुड़े मुद्दे उठाना ड्रामा नहीं है, लेकिन उन पर चर्चा न होने देना ड्रामा है। संसद के शीतकालीन सत्र के पहलेदिन मोदी के बयान पर जवाब देते हुए, प्रियंका गांधी ने वायु प्रदूषण और एसआईआर जैसे जरूरी मुद्दों पर बहस की मांग की और कहा कि ये आमलोगों बड़े मुद्दे हैं जिन पर संसद में चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि संसद किस लिए है। यह ड्रामा नहीं है। मुद्दों पर बोलना और मुद्दे उठाना ड्रामानहीं है। ड्रामा का मतलब है चर्चा न होने देना। ड्रामा का मतलब है उन मुद्दों पर डेमोक्रेटिक चर्चा न होना जो जनता के लिए मायने रखते हैं। उन्होंनेपूछा, हमने प्रदूषण के बारे में बात की है, हम इसे क्यों नहीं उठा रहे हैं। हमें इन चीजों पर चर्चा करने की इजाजत क्यों नहीं है।प्रधानमंत्री ने सभी से मौसम का आनंद लेने को कहाउन्होंने दिल्ली में एयर क्वालिटी के मुद्दे को शर्मनाक बताया और कहा कि इस समस्या से निपटने और बच्चों, बुजुर्गों और पहले से ही सांस कीसमस्याओं से जूझ रहे लोगों की सेहत बचाने के लिए सभी को एक साथ आकर कड़े कदम उठाने चाहिए। उन्होंने कहा, मुझे सच में लगता है कि यहस्थिति शर्मनाक है। यह हमारे देश की राजधानी है। मुझे लगता है कि हमें पार्टियों को अलग रखना चाहिए और सभी को अपनी पूरी ताकत लगानीचाहिए। सोमवार को एसआईआर पर चर्चा की मांग के चलते दिनभर के लिए लोकसभा स्थगित कर दी गई। प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा, सरकारकिसी भी विषय पर चर्चा नहीं करना चाहती। फिर सदन कैसे चलेगा? हमारी कम से कम एक बात तो सुननी चाहिए। अगर एसआईआर पर नहीं, तोचुनाव सुधार या किसी अन्य संबंधित मुद्दे पर चर्चा की जा सकती है। लेकिन यदि वे किसी चीज पर चर्चा ही नहीं करेंगे, तो सदन कैसे चलेगा? उन्होंनेप्रधानमंत्री पर भी टिप्पणी की और कहा, प्रधानमंत्री ने सभी से मौसम का आनंद लेने को कहा है। दिल्लीवासी कौन-से मौसम का आनंद लें? उन्हें बाहरझांककर देखना चाहिए कि देश में क्या-क्या हो रहा है। विपक्ष को राजनीति में सकारात्मकता लाने के टिप्स देने की पेशकशएक शोध का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि 22 लाख बच्चों के फेफड़ों को पक्का नुकसान हुआ है, इसकी वजह वायु प्रदूषण है। कोई हमारे बच्चोंके साथ ऐसा कैसे कर सकता है। बूढ़े लोग परेशान हैं, जिन लोगों को पहले से अस्थमा है और लोगों को सांस की दूसरी दिक्कतें हैं, हॉस्पिटल सांसकी दिक्कतों से भरे हुए हैं। हम यहां बैठकर कुछ कैसे नहीं कर सकते। कांग्रेस नेता ने कहा, मुझे सच में लगता है कि हम सभी को एक साथ आकर कड़ेकदम उठाने चाहिए। हम यहां सरकार का सपोर्ट करने के लिए हैं। केंद्र सरकार और राज्य सरकार को तुरंत एक्शन लेना चाहिए। शीतकालीन सत्र केपहले पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा था, हमें जिम्मेदारी की भावना से काम करने की जरूरत है। संसद ड्रामा करने की जगह नहीं है, यह कामकरने की जगह है। उन्होंने कहा कि सत्र को राजनीतिक नाटक का स्टेज नहीं, बल्कि रचनात्मक और परिणामोन्मुख बहस का प्लेटफॉर्म बनना चाहिए, और उन्होंने विपक्ष को राजनीति में सकारात्मकता लाने के टिप्स देने की पेशकश की।
नगालैंड स्थापना दिवस पर देशभर के नेताओं की शुभकामनाएँ, समृद्ध संस्कृति और प्रगति की कामना

आज के दिन ही 63 साल पहले भारत के 16वें राज्य के तौर पर नगालैंड की स्थापना हुई थी। ऐसे में आज नगालैंड के 63वें स्थापना दिवस परप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, राहुल गांधी समेत देशभर के कई दिग्गज नेताओं ने बधाई दी। पीएम नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडियाप्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर वहां की जनता को बधाई दी। उन्होंने कहा कि नगालैंड की समृद्ध संस्कृति, साहस और सेवा की भावना पूरे देश में प्रशंसाकी जाती है। उन्होंने राज्य के लोगों के उज्ज्वल भविष्य और विकास की कामना की। दूसरी ओर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी नगालैंड के लोगों कोशुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि नगालैंड अपनी प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध संस्कृति और जनजातीय विविधता के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने राज्यमें शांति, समृद्धि और प्रगति की कामना की। कांग्रेस सांसद राहुल ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पोस्ट कर शुभकामनाएं दी। राहुल गांधी ने कहा किनगालैंड की खूबसूरत पहाड़ियां, जैव विविधता और जीवंत संस्कृति भारत की विविधता को और समृद्ध बनाती हैं। उन्होंने कहा कि राज्य स्थायी विकासके साथ आगे बढ़े और और भी सफलता हासिल करे। आइए मिलकर इसकी अनोखी विरासत को संरक्षित करें। समृद्धि के साथ आगे बढ़ता रहेगृह मंत्री अमित शाह ने नगालैंड के स्थापना दिवस पर राज्य के लोगों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि उत्तर-पूर्वी राज्य की समृद्ध परंपराएं और वहां केलोगों की मजबूत भावना देश की सांस्कृतिक एकता को और मजबूत बनाती है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में अमित शाह ने लिखा किनगालैंड के भाई-बहनों को स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। राज्य की जीवंत परंपराएं और लोगों की दृढ़ता हमारे देश की सांस्कृतिक धरोहरको मजबूत करती हैं। अमित शाह मैं कामना करता हूं कि नगालैंड शांति, प्रगति और समृद्धि के साथ आगे बढ़ता रहे। हर साल स्थापना दिवस के रूप में मनाया जातासर पर नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने कहा कि 63वें स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। हम अपने उन नेताओं को सम्मान देते हैं जिन्होंनेहमारी पहचान और अधिकारों की रक्षा की, और उन दूरदर्शी लोगों को भी जिन्होंने हमारे भविष्य की नींव रखी। सीएम रियो ने इस बात पर जोर दियाकि आइए मिलकर एक समृद्ध, समावेशी और टिकाऊ नगालैंड बनाने की दिशा में काम करें। इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी नगालैंड केलोगों को संदेश दिया। उन्होंने कहा कि नगालैंड के स्थापना दिवस पर वहां के लोगों को हार्दिक शुभकामनाएं। राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, मजबूत जज़्बा और राष्ट्र के विकास में उसका योगदान हम सबके लिए गर्व की बात है। आने वाले साल राज्य के लिए नई संभावनाएँ, प्रगति औरखुशहाली लेकर आएँ। बता दें कि नगालैंड को 1 दिसंबर 1963 को भारत का 16वां राज्य घोषित किया गया था और तब से यह दिन हर सालस्थापना दिवस के रूप में मनाया जाता है।
एसआईआर के खिलाफ ममता की मेगा मुहिम, मालदा, मुर्शिदाबाद और कूच बिहार में विशाल रैलियों की तैयारी

बंगाल में जारी एसआईआर का ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी द्वारा विरोध किया जा रहा है। हालांकि विरोध के बावजूद एसआईआर की प्रक्रियातेजी से चल रही है। ऐसे में अब ममता बनर्जी ने एसआईआर की धार को कुंद करने के लिए जनमत जुटाने का फैसला किया है। इसी के तहत ममताबनर्जी चुनावी मोड में लगातार रैलियां करने जा रही हैं। इस हफ्ते ममता बनर्जी मालदा और मुर्शिदाबाद में विशाल रैलियां करेंगी और फिर अगले हफ्तेकूच बिहार में एक बड़ी रैली को संबोधित कर केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश करेंगी। गौरतलब है कि इससे पहले ममता बनर्जी ने बीते हफ्तेबोनगांव में एसआईआर के खिलाफ रैली की थी। यह रैली मतुआ समुदाय के प्रभाव वाले इलाके में की गई, जो एसआईआर को लेकर डरे हुए हैं।रैली के दौरान ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि एसआईआर का इस्तेमाल परिवारों को डराने के लिए किया जा रहा है। टीएमसी ने जिला स्तर पर भीएसआईआर के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है। टीएमसी नेताओं ने बताया कि ममता बनर्जी 3 और 4 दिसंबर को मालदा और मुर्शिदाबाद मेंरैलियों को संबोधित करेंगी। वहीं 9 दिसंबर को कूच बिहार में रैली करेंगी। पार्षद और पंचायत अधिकारी मुख्यमंत्री की रैली की योजना पर चर्चा की जाएगीये तीनों ही जिले सीमावर्ती है और यहां पर बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक समुदाय, प्रवासी और विस्थापित लोग रहते हैं। इन समुदायों में एसआईआर कोलेकर ज्यादा आशंकाएं हैं। यही वजह है कि टीएमसी लोगों के इस डर और आशंका को भुनाने और 2026 के विधानसभा चुनाव में फायदा लेने कीकोशिश कर रही है। इन रैलियों को टीएमसी के शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है। मालदा की रैली गजोले में और मुर्शिदाबाद की बेहरामपुरस्टेडियम में होनी है। वहीं 9 दिसंबर को ऐतिहासिक रास मेला मैदान में होने वाली कूच बिहार रैली को ममता बनर्जी की सबसे बड़ी लामबंदी के तौरपर पेश किया जा रहा है। तैयारियों की घोषणा करते हुए, जिला टीएमसी अध्यक्ष अभिजीत डे भौमिक ने बताया कि 1 दिसंबर को ब्लॉक अध्यक्षों केसाथ एक आपात बैठक होगी, जिसके बाद 2 दिसंबर को रवींद्र भवन में जिला स्तर पर तैयारी का सत्र आयोजित होगा, जिसमें मंत्री, पार्टी सांसद औरविधायकों के साथ ही पार्षद और पंचायत अधिकारी मुख्यमंत्री की रैली की योजना पर चर्चा की जाएगी।
आईपीएस प्रशिक्षुओं को सीएम योगी का संदेश, ‘संवाद, संवेदनशीलता और सकारात्मकता’ से बनें सिटीजन-सेंट्रिक पुलिस ऑफिसर

सीएम योगी ने भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) 2023 और 2024 बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों को सफल, प्रभावी और सिटीजन सेंट्रिक पुलिसअधिकारी बनने के लिए ‘संवाद, संवेदनशीलता और सकारात्मकता’ का मंत्र दिया है। सोमवार को 23 प्रशिक्षु अधिकारियों के साथ औपचारिक भेंट केदौरान उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश जैसा विशाल राज्य पुलिस के लिए अनेक चुनौतियां लेकर आता है, इसलिए प्रशिक्षु अवधि को सीखने, समझने औरअपने पुलिसिंग मॉडल को मजबूत बनाने का सुनहरा अवसर मानें। मुख्यमंत्री ने कहा, जनपदों में प्रशिक्षण के दौरान यह सीखना सबसे आवश्यक है किवास्तविक समस्याओं का प्रभावी और संतुष्टिपरक समाधान कैसे किया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि पुलिस हमेशा फर्स्ट रिस्पांडर होती है। आपकीतत्परता, भाषा और प्राथमिकता पर ही पीड़ित का विश्वास टिका होता है। उन्होंने प्रशिक्षुओं को यह सलाह दी कि प्रशिक्षण अवधि में थाने का चार्ज, उसके प्रशासन, विवेचना, ड्यूटी मैनेजमेंट और स्थानीय विवादों की प्रकृति को बहुत बारीकी से समझें। मुख्यमंत्री ने कहा कि थाना पुलिसिंग की नींवहै। ह्यूमन इंटेलिजेंस आज भी किसी भी पुलिस अधिकारी का सबसे बड़ा हथियार है। स्थानीय लोगों से संवाद, फील्ड में उपस्थिति और विश्वास हीआपको मजबूत बनाते हैं। ड्रग्स नेटवर्क पर त्वरित कार्रवाई पर जोर दियामुख्यमंत्री ने ‘थाना, सर्किल तथा पुलिस लाइन’ तीनों की कार्यप्रणाली, संसाधनों और चुनौतियों को समझने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इन तीनोंस्तरों का सामंजस्य ही किसी जिले की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करता है। जनप्रतिनिधियों के साथ संवाद को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह संवादगरिमापूर्ण और संयत होना चाहिए। कैजुअल अप्रोच पुलिस अधिकारी के लिए उचित नहीं है। जनप्रतिनिधि जनता की आवाज होते हैं, उनके साथतालमेल कानून-व्यवस्था को और प्रभावी बनाता है। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से महिलाओं के प्रति अपराध, साइबर क्राइम और अवैध ड्रग्स के नेटवर्कके खिलाफ सतर्कता बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा, अपराध की प्रकृति तेजी से बदल रही है, इसलिए आपकी प्रतिक्रिया और तैयारी भी उतनी हीआधुनिक और त्वरित होनी चाहिए। डिजिटल फॉरेंसिक, साइबर टूल्स और तकनीक का कुशल उपयोग सीखें। उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों से कहा किपुलिस सेवा में सत्यनिष्ठा, अनुशासन और मानवीय दृष्टि ही सबसे बड़ी पूंजी है। आपका आचरण आने वाले वर्षों में न केवल कानून-व्यवस्था को दिशादेगा, बल्कि प्रदेश की सुरक्षा और जनता के विश्वास को भी मजबूत करेगा। सीएम योगी ने आईपीएस प्रशिक्षुओं को संवेदनशील, संवाद-प्रधान औरआधुनिक पुलिसिंग अपनाने की नसीहत दी, खासकर साइबर क्राइम और ड्रग्स नेटवर्क पर त्वरित कार्रवाई पर जोर दिया।