सीईसी चयन पैनल से CJI को हटाने पर लोकसभा में तीखी बहस, कांग्रेस–भाजपा आमने-सामने

लोकसभा में बुधवार को चुनाव सुधारों पर उस समय जोरदार बहस छिड़ गई जब कांग्रेस और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त(सीईसी) और चुनाव आयुक्तों के चयन पैनल से भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) को हटाए जाने पर अपनी-अपनी दलीलें रखीं। दोनों दलों नेइस मुद्दे पर अपनी ठोस राय सामने रखकर सदन का माहौल गरम कर दिया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल ने सरकार से पूछा कि आखिर वहसुप्रीम कोर्ट की उस व्यवस्था से पीछे क्यों हट गई, जिसमें चयन समिति में प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और सीजेआई को शामिल करने का निर्देश दियागया था। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार को बताना चाहिए कि अंतिम बिल में सीजेआई को बाहर क्यों रखा गया। इसके तुरंत बाद भाजपा केवरिष्ठ नेता और पूर्व कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस पर पलटवार किया और सरकार के फैसले का बचाव किया। हर कार्य में न्यायपालिका को शामिल करने की मांग तर्कसंगतकांग्रेस नेता वेणुगोपाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसका नेतृत्व अब सेवानिवृत्त न्यायाधीश के. एम. जोसेफ कर रहे थे, ने स्पष्ट किया था किजब तक चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर कोई व्यापक कानून नहीं बन जाता, तब तक चयन समिति में प्रधानमंत्री, सीजेआई और लोकसभा में विपक्षके नेता को शामिल किया जाए। लेकिन जब सरकार बिल लेकर आई, तो उसने सीजेआई को पूरी तरह बाहर कर दिया और उसकी जगह प्रधानमंत्रीद्वारा नामित एक केंद्रीय मंत्री को शामिल कर दिया। उन्होंने मांग की कि कानून मंत्री इस फैसले पर स्पष्ट जवाब दें। भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने इसआरोप को खारिज करते हुए कहा कि जब देश की जनता प्रधानमंत्री को परमाणु बटन तक संभालने का भरोसा देती है, तो वही प्रधानमंत्री और उनकेनेतृत्व वाली सरकार एक ईमानदार और सक्षम चुनाव आयुक्त क्यों नहीं चुन सकती। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनी हुईसरकार को निर्णय लेने का अधिकार है, और हर कार्य में न्यायपालिका को शामिल करने की मांग तर्कसंगत नहीं है। कदम चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को कमजोर करेगारविशंकर प्रसाद ने आगे कहा कि स्वयं वेणुगोपाल भी जानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट का यह प्रावधान सिर्फ एक अंतरिम व्यवस्था थी, स्थायी समाधान नहीं।उन्होंने कहा कि संसद ने व्यापक विचार के बाद नया कानून पारित किया है और इसके बाद भी सीजेआई को पैनल में शामिल रखने की मांग राजनीतिसे प्रेरित है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस चयन प्रक्रिया को राजनीतिक रंग देकर जरूरी सुधारों को बाधित करना चाहती है। सरकार द्वारापेश किए गए बिल को संसद पहले ही मंजूरी दे चुकी है, जिसके तहत प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली समिति में एक केंद्रीय मंत्री और लोकसभा केविपक्ष के नेता शामिल होंगे। लेकिन सीजेआई को शामिल न किए जाने से विपक्ष को तीखा विरोध करने का मौका मिला है। कांग्रेस का कहना है कियह कदम चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को कमजोर करेगा, जबकि भाजपा दावा करती है कि यह कदम पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए लियागया है।
इंडिगो संकट गहराया DGCA ने CEO को तलब किया, उड़ान रद्द होने का सिलसिला जारी

भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो इस समय अपने इतिहास के सबसे कठिन दौर से गुजर रही है। इस बीच नागर विमानन महानिदेशालय(डीजीसीए) ने इंडिगो के सीईओ को गुरुवार को दोपहर 3 बजे हालिया परिचालन बाधाओं से जुड़ा व्यापक डेटा और अपडेट पेश करने का निर्देश दियाहै। इंडिगो संकट के 9वें दिन बुधवार को भी बंगलूरू एयरपोर्ट से 61 उड़ानें रद्द कर दी गईं, इसमें 35 आगमन और 26 प्रस्थान वाली उड़ानें थी। यहखबर तब सामने आई जब इंडिगो के सीईओ पीटर एल्बर्स ने कल यानी नौ दिसंबर को दावा किया था कि एयरलाइन की स्थिति अब सामान्य हो गईहै। सिलसिला थम नहीं रहाडीजीसीए ने कहा कि सीईओ को सभी संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है। नियामक केआदेश के अनुसार, एयरलाइन को उड़ानें बहाल करने, पायलटों और चालक दल की भर्ती योजना, पायलट और केबिन क्रू की संख्या, रद्द की गईउड़ानों की संख्या और अब तक जारी किए गए रिफंड आदि के बारे में जानकारी प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है। रोजाना लगभग 2300 फ्लाइट्सऑपरेट करने वाली और घरेलू एविएशन मार्केट में 60% से भी अधिक हिस्सेदारी रखने वाली इस एयरलाइन का मार्केट कैप मौजूदा संकट के बादकरीब 21,000 करोड़ रुपये तक घट चुका है। ऐसे में एयरलाइन की स्थिति समान्य होने के दावों के बीच भी उड़ानें रद्द होने का सिलसिला थम नहींरहा है। उड्डयन मंत्री के राममोहन नायडू ने कहा किबता दें कि देशभर में बीते नौ दिनों से जारी इंडिगो संकट का मुख्य कारण है कि बीते 1 दिसंबर से इंडिगो देशभर में हजारों उड़ानें रद्द कर चुकी है।एयरलाइन नए सुरक्षा नियमों के अनुसार अपनी योजना समय पर नहीं बना पाई, जिसके कारण उसके संचालन में भारी अव्यवस्था फैल गई। इससेयात्रियों को परेशानी, टिकटों के दाम बढ़ना और एयरपोर्ट पर भीड़ जैसी स्थिति बन गई। ऐसे में यात्रियों का कहना है कि कई उड़ानें बिना बताए, याउनकी मंजूरी के बिना रिशेड्यूल या बहुत अधिक देरी से चलाई गईं। लगातार जारी गड़बड़ी के बीच अब बीते दिनों से सरकार भी सख्त होती नजर आरही है। इसके तहत पहले तो डीजीसीए ने इंडिगो के सीईओ और सीओओ को शो-कॉज नोटिस भेजा। उसके बाद एयरलाइंस के किराए पर कैपलगाया गया ताकि टिकट महंगे न हों। इसी क्रम में मंगलवार को सरकार ने इंडिगो की विंटर फ्लाइट शेड्यूल में 10% कटौती का आदेश दिया। इससेरोज लगभग 220 उड़ानें कम होंगी। मामले में नागरिक उड्डयन मंत्री के राममोहन नायडू ने कहा कि यह कदम इसलिए जरूरी था ताकि इंडिगो कासंचालन स्थिर हो सके और रद्द उड़ानों की संख्या कम हो।
रोहिंग्या मामले पर CJI की टिप्पणी को लेकर प्रेरित अभियान, सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के 44 पूर्व जजों का बयान

सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के 44 पूर्व जजों ने एक बयान जारी किया है। इसमें कहा गया है कि रोहिंग्या प्रवासियों के मामले में चीफ जस्टिस(सीजेआई) सूर्यकांत की ओर से की गई टिप्पणियों के खिलाफ ‘प्रेरित अभियान’ चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सीजेआई ने तो केवल एकसाधारण कानूनी सवाल पूछा था, लेकिन कुछ लोगों ने उसे गलत तरीके से पेश करके ऐसा दिखाया जैसे उन्होंने पक्षपात या भेदभाव वाली बात कहीहो। पूर्व जजों ने कहा कि नियमित न्यायिक सवालों को गलत तरीके से ‘पक्षपाती टिप्पणी’ बताना न्यायपालिका की साख को नुकसान पहुंचाने औरसांविधानिक संस्थाओं में जनता के भरोसे को कमजोर करने की कोशिश है। शरणार्थी दर्जे में नहीं बदल सकतेबयान में आगे कहा गया कि कोर्ट के फैसले और कोर्ट में हुई बहस की निष्पक्ष आलोचना की जा सकती है, लेकिन मौजूदा विवाद उस सीमा को पारकर चुका है। इसमें कहा गया, न्यायिक कार्यवाही की निष्पक्ष, तर्कपूर्ण आलोचना हो सकती है और होनी भी चाहिए। लेकिन जो हम देख रहे हैं, वहकोई सिद्धांत आधारित असहमति नहीं बल्कि न्यायपालिका को बदनाम करने का प्रयास है। चीफ जस्टिस पर इस बुनियादी सवाल को लेकर हमलाकिया जा रहा है कि कानून के तहत वह दर्जा किसने दिया है जिसकी मांग कोर्ट में की जा रही है? अधिकारों पर कोई भी फैसला तब तक नहीं होसकता जब तक इस बुनियादी सवाल का जवाब न मिल जाए। पूर्व जजों ने कहा कि अवैध रूप से आने वाले लोग खुद को किसी औपचारिकशरणार्थी दर्जे में नहीं बदल सकते। बयान में कहा गया, भारत की जिम्मेदारियां उसके संविधान, विदेशी कानून, आप्रवासन नियमों और सामान्यमानवाधिकार सिद्धांतों से पैदा होती हैं। किसी वैधानिक शरणार्थी तंत्र के माध्यम से नहीं आएउन्होंने आगे कहा कि आलोचकों ने अदालत के उस स्पष्ट संदेश को नजरअंदाज किया, जिसमें कहा गया था कि भारत की जमीन पर कोई भी व्यक्ति नतो यातना का शिकार हो सकता है, न गायब किया जा सकता है और न ही उसके साथ अमानवीय व्यवहार किया जा सकता है, चाहे वह देश कानागरिक हो या विदेशी। बयान में कहा गया, इस संदेश को छिपाकर टिप्पणी को तोड़-मरोड़कर कोर्ट पर ‘अमानवीयता’ का आरोप लगाया जा रहा है।’ भारत में रोहिंग्या समुदाय को किसी भी आधिकारिक (कानूनी) शरणार्थी सुरक्षा व्यवस्था के तहत मान्यता प्राप्त नहीं है, क्योंकि भारत न तो 1951 केसंयुक्त राष्ट्र शरणार्थी सम्मेलन का सदस्य है और न ही 1967 के उसके प्रोटोकॉल का। बयान में कहा गया, रोहिंग्या भारतीय कानून के तहत शरणार्थीनहीं हैं। वे किसी वैधानिक शरणार्थी तंत्र के माध्यम से नहीं आए। अधिकांश मामलों में उनका प्रवेश अवैध है और वे केवल दावा करके खुद कोकानूनी तौर पर ‘शरणार्थी’ घोषित नहीं कर सकते।
उत्तराखंड कैबिनेट बैठक: 19 प्रस्तावों को मंजूरी, मुआवजा बढ़ा, छोटे अपराधों में अब जेल नहीं, केवल जुर्माना

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक हुई, जिसमें कुल 19 प्रस्ताव आए। बिजली लाइन का मुआवजा बढ़ाया गया। केंद्र के नए निर्देश को अडॉप्ट किया गया। टावर और उसके एक मीटर परिधि के एरिया का 200% सर्किल रेट का कर दिया है। सर्किल रेट और मार्किट रेट में अंतर पर एक समिति बनाई जाएगी, जो प्रभावित भूमि मालिकों के लिए काम करेगी। सात एक्ट के बजाय जन विश्वास एक्टलाया जाएगा। 52 एक्ट चिन्हित किए गए हैं। छोटे अपराधों में सजा को लेकर बदलाव किए गए हैं। छोटे अपराध में जेल नहीं बल्कि जुर्माना होगा।जैसे किसी जैविक कृषि में अधिसूचित क्षेत्र में कोई पेस्टिसाइड का इस्तेमाल करेगा तो वहां एक लाख जुर्माना और एक साल जेल सजा थी, सजाहटाकर जुर्माना पांच लाख कर दिया गया। उत्तराखंड माल एवं सेवा कर संशोधन अध्यादेश को मंजूरीतकनीकी शिक्षा-.तकनीकी विवि में फैकल्टी की भर्ती लोक सेवा आयोग नहीं विवि स्तर से ही होगीलोनिवि-.कनिष्ठ अभियंता के 5% पद समूह-ग के कर्मचारियों से पदोन्नति से होती थी, लोग नहीं मिल पाते थे। अब 10 साल की सेवा पूरी करने परसीधे जेई बनेंगे. नैनी सैणी एयरपोर्ट…को एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया संचालित करेगा। सितारगंज के कल्याणपुर में जिन्हें पट्टे पर जमीन दी हुईथी, उनके नियमितीकरण को लेकर सर्किल रेट 2004 के लिए जाएंगे। जिला स्तर का अभियोजन निदेशालय बनाया जाएगामुख्यमंत्री घसियारी कल्याण और साइलेज योजना…75% देते थे, तय हुआ कि सब्सिडी 75 के बजाय 60% मिलेगी। देहरादून में रिस्पना बिंदालएलिवेटेड के लिए जीएसटी में छूट मिलेगी। रॉयल्टी और जीएसटी विभाग जमा करेगा, जिसका रिम्बर्स किया जाएगा। सगंध पौधा के केंद्र का नामइंस्टीट्यूट ऑफ परफ्यूम होगा। जो वाहन 15 साल से पुराने हैं, उन्हें स्क्रैप करने और नया वाहन खरीदने पर टैक्स में छूट मंजूरी. मुख्यमंत्री युवा भविष्यनिर्माण योजना मंजूर… यूपीएससी, नेट, गेट आदि की तैयारी के लिए ऑनलाइन कोचिंग। लाइव क्लासेज, डाउट क्लियर करने की सुविधा होगी।भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत अभियोजन निदेशालय देहरादून में मुख्यालय होगा। उसमें एक निदेशक होंगे। 15 वर्ष तक अधिवक्ता कोबना सकेंगे। जिले में भी जिला स्तर का अभियोजन निदेशालय बनाया जाएगा। 7 वर्ष से कम कारावास की धाराओं में अपील का फैसला जिला स्तर, इससे ऊपर पर राज्य स्तर पर निर्णय होगा।
पोप लियो 14वें की ट्रंप प्रशासन को कड़ी आलोचना, “यूरोप को दरकिनार कर शांति समझौता अवास्तविक”

ईसाई धर्मगुरु पोप लियो 14वें ने मंगलवार को अमेरिका के ट्रंप प्रशासन की ओर से लंबे समय से चले आ रहे अमेरिका-यूरोपीय गठबंधन को तोड़नेकी कोशिश की आलोचना की। दुनिया की सबसे बड़ी आबादी के सर्वोच्च धर्मगुरु की ओर से इस तरह की खुली आलोचना अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप केलिए बड़ा झटका माना जा सकता है। डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोपीय नेताओं को कमजोर होने के साथ यूक्रेन को मिलने वाले अमेरिकी समर्थन को कम करनेका भी संकेत दिया था। इस मुद्दे पर पोप लियो 14वें ने अप्रत्यक्ष रूप से जोर देकर कहा कि यूक्रेन शांति समझौते में यूरोप की भूमिका होनी चाहिए।पोप लियो का कीव दौरा यूरोपीय समर्थन जुटाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से मुलाकात केबाद पत्रकारों से युद्धविराम की जरूरत और रूसी अधिकारियों की ओर से पकड़े गए यूक्रेनी बच्चों की वापसी में मदद के लिए वेटिकन की कोशिशों परचर्चा की। खड़ा करने के बारे में तीसरा दस्तावेजईसाई धर्मगुरु से अमेरिकी शांति प्रस्ताव और इस प्रक्रिया में यूरोपीय शक्तियों को दरकिनार किए जाने के बारे में पूछा गया। इस पर उन्होंने जोर देकरकहा कि किसी भी समझौते में यूरोप की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, ‘यूरोप को वार्ता में शामिल किए बिना शांति समझौते की कोशिश करनाअवास्तविक है, क्योंकि युद्ध यूरोप में चल रहा है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘आज और भविष्य में सुरक्षा की गारंटी भी मांगी जा रही है। यूरोप को इसकाहिस्सा होना चाहिए, और दुर्भाग्य से हर कोई इसे नहीं समझता, लेकिन मुझे लगता है कि यूरोपीय नेताओं के लिए एकजुट होकर हल तलाशने का यहएक बेहतरीन मौका है।’ यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कहा कि अमेरिका और यूरोपीय साझेदारों के साथ शांति समझौते के तीन दस्तावेजोंपर चर्चा की जा रही है, 20 बिंदुओं का एक रूपरेखा दस्तावेज, सुरक्षा गारंटी वाला दूसरा दस्तावेज और यूक्रेन को फिर से उठ खड़ा करने के बारे मेंतीसरा दस्तावेज। व्लादिमीर पुतिन से कम से कम एक बार टेलीफोन पर बात कर चुकेबीते हफ्ते में ट्रंप प्रशासन ने अपनी अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति जारी की थी, जिसमें अमेरिका-यूरोपीय गठबंधन पर सवाल उठाए गए हैं औरअमेरिका-रूस संबंधों को बेहतर बनाने की इच्छा पर जोर दिया गया है। लियो ने कहा कि उन्होंने जो पढ़ा है, वह ‘यूरोप और अमेरिका के बीच कई वर्षोंसे चले आ रहे एक सच्चे गठबंधन में एक बड़ा बदलाव लाएगा।’ इसके अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कुछ टिप्पणियों से ऐसा लगता हैकि ‘आज और भविष्य में जिस गठबंधन की जरूरत है, उसे तोड़ने की कोशिश की जा रही है।’उन्होंने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका में कुछ लोग इस कोशिश से सहमत हो सकते हैं, लेकिन मुझे लगता है कि कई अन्य लोग चीजों को अलगतरीके से देखेंगे। पोप लियो अब तक जेलेंस्की से तीन बार मिल चुके हैं और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से कम से कम एक बार टेलीफोन पर बातकर चुके हैं।
ममता बनर्जी का मोदी पर बड़ा हमला ‘बंकिम दा’ कहने पर मांगी माफी, टीएमसी ने संसद में किया मौन प्रदर्शन

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से माफी की मांग की। बनर्जी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नेउपन्यासकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को ‘बंकिम दा’ कहकर उनका अपमान किया है। कूच बिहार जिले में एक रैली को संबोधित करते हुए ममताबनर्जी ने कहा कि प्रधानमंत्री का तब जन्म भी नहीं हुआ था, जब देश को आजादी मिली। लेकिन फिर भी उन्होंने बंगाल के सबसे बड़े सांस्कृतिकप्रतीकों में से एक को इतने साधारण तरीके से संबोधित किया। उन्होंने कहा, आपने (पीएम मोदी) उन्हें वह न्यूनतम सम्मान भी नहीं दिया जिसके वहहकदार हैं। आपको इसके लिए राष्ट्र से माफी मांगनी चाहिए। अंतिम मतदाता सूची प्रकाशितयह विवाद उस वक्त शुरू हुआ, जब सोमवार को लोकसभा में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने पर हुई चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री ने लेखकका जिक्र किया। टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने ‘दा’ शब्द के प्रयोग पर आपत्ति जताई और प्रधानमंत्री से ‘बंकिम बाबू’ कहने का आग्रह किया। पीएममोदी ने तुरंत उनकी भावना स्वीकार करते हुए कहा, मैं बंकिम ‘बाबू’ कहूंगा। धन्यवाद, मैं आपकी भावनाओं का सम्मान करता हूं। इसके बाद हल्केअंदाज में पीएम ने पूछा कि क्या वह अब रॉय को भी ‘दादा’ कह सकते हैं। भाजपा पर निशाना साधते हुए ममता बनर्जी ने दावा किया कि अगर पार्टीबंगाल में सत्ता में आती है तो वह राज्य की संस्कृति, भाषा और विरासत को नष्ट कर देगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि एसआईआर प्रक्रिया के बादअंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होते ही राज्य में विधानसभा चुनाव घोषित कर दिए जाएंगे, ताकि कोई इसे अदालत में चुनौती न दे सके। पश्चिमबंगाल में अगले साल विधानसभा चुनाव से पहले राजनेता एक-दूसरे पर हमले करने का मौका नहीं छोड़ रहे हैं। आज मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पीएमनरेंद्र मोदी से माफी की मांग की और आरोप लगाया कि उन्होंने उपन्यासकार बंकिंम चंद्र चट्टोपाध्याय को ‘बंकिंम दा’ कहकर अपमानित किया। विरासत को तोड़ा-मरोड़ा गया‘वंदे मातरम’ पर बहस के बाद आज टीएमसी के सांसदों ने संसद के सेंट्रल हॉल में मौन प्रदर्शन किया। उनका आरोप है कि भाजपा ने बंगाल के महानसाहित्यकार रवींद्रनाथ टैगोर और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय का अपमान किया है।सांसद सेंट्रल हॉल में टैगोर और चटर्जी की तस्वीरें लेकर मौन बैठे रहे।बाद में वे संविधान सदन के द्वार पर खड़े हुए। राज्यसभा में टीएमसी की उपनेता सागरिका घोष ने कहा, आज लोकसभा और राज्यसभा के हमारेसांसदों ने संसद के सेंट्रल हॉल में मौन प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा, कल वंदे मातरम पर हुई बहस में प्रधानमंत्री मोदी ने बंगाल साहित्य के सम्राट बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय और हमारे महान प्रतीक रवींद्रनाथ टैगोर का अपमान किया। बंगाल की संस्कृति, सम्मान और विरासत को ठेस पहुंचाने की कोशिशकी गई। घोष ने कहा कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय बंगाल पुनर्जागरण की महान हस्ती हैं और उनकी कृति ‘आनंदमठ’ से ही ‘वंदे मातरम’ लिया गया है।उन्होंने आरोप लगाया कि उनके नाम का गलत उच्चारण किया गया, उनकी विरासत को तोड़ा-मरोड़ा गया और टैगोर के योगदान को भी गलत तरीके सेपेश किया गया, जो राष्ट्रगान के रचयिता हैं।
राज्यसभा में अमित शाह का जोरदार संबोधन वंदे मातरम पर विपक्ष को घेरा, कहा ‘कर्तव्य और राष्ट्रभक्ति पर चर्चा आज भी जरूरी’

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को राज्यसभा में वंदे मातरम पर चर्चा की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में वंदे मातरम कीभूमिका का जिक्र किया। साथ ही उन्होंने विपक्ष पर भी जमकर निशाना साधा। शाह ने कांग्रेस के 1937 के अधिवेशन में वंदे मातरम के आखिरी चारछंदों के इस्तेमाल रोके जाने के प्रस्ताव पर भी बात की और पंडित नेहरू की भूमिका पर कई सवाल उठाए। अमित शाह ने इंडिया गठबंधन यानी विपक्षपर आरोप लगाया कि संसद में जब भी वंदे मातरम का गान होता है तब उसके कई सदस्य सदन से बाहर चले जाते हैं, जबकि भाजपा के सभी नेता खड़ेहोकर इसका उचित सम्मान करते हैं। गृह मंत्री ने कहा कि कल कुछ सदस्यों ने लोकसभा में प्रश्न उठाया था कि आज वंदे मातरम पर चर्चा की जरूरतक्या है। वंदे मातरम पर चर्चा की जरूरत जब वंदे मातरम बना था, तब भी थी, आजादी के समय भी थी, आज भी है और 2047 में जब आधुनिकभारत होगा, तब भी रहेगी। क्योंकि वंदे मातरम में कर्तव्य और राष्ट्रभक्ति की भावना है। तो जिन्हें वंदे मातरम पर चर्चा की वजह समझ नहीं आ रहा, उन्हेंनए सिरे से सोचने की जरूरत है। राज्यसभा में चर्चा की शुरुआत हुईशाह ने आगे कहा, “जिसकी उद्घोषणा 150 साल पहले बंकिम बाबू ने की, उसका भाव सदियों पुराना है। भगवान राम ने कहा था माता और मातृभूमिईश्वर से भी बड़ी होती है। मातृभूमि का महिमामंडन प्रभु श्रीराम ने किया, शंकराचार्य ने किया और इसका महिमामंडन आचार्य चाणक्य ने भी किया।मातृभूमि से ज्यादा कोई चीज हो नहीं सकती। इसलिए उस काली रात जैसे गुलामी के कालखंड में वंदे मातरम रोशनी की तरह था।” वंदे मातरम’ के150 वर्ष पूरे होने के मौके पर संसद में चर्चा हो रही है। लोकसभा के बाद मंगलवार को इस मुद्दे पर राज्यसभा में चर्चा की शुरुआत हुई। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने स्वतंत्रता आंदोलन में इसके उपयोग का कई मौकों पर जिक्र किया। साथ ही विपक्ष को भी घेरा।
राज्यसभा में खरगे का तीखा हमला ‘मोदी–शाह नेहरू और कांग्रेस नेताओं को अपमानित करने का कोई मौका नहीं छोड़ते’

संसद के शीतकालीन सत्र में मंगलवार को चुनाव सुधार पर चर्चा हो रही है। इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी औरकेंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा। खरगे ने कहा कि पीएम मोदी और गृह मंत्री शाह (देश के पहले प्रधानमंत्री) जवाहर लाल नेहरू औरकांग्रेस के अन्य नेताओं का अपमान करने का कोई मौका नहीं छोड़ते। खरगे ने कहा, राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक मौकेपर सदन में अपने विचार रखने का मुझे अवसर मिला है। मैं सौभाग्यशाली हूं और यह गीत में साठ साल से गा रहा हूं, क्योंकि मैंने 55 साल तो इसी(संसद) में गुजारे, सांसद रहा। इसलिए मुझे तो वंदे मातरम गाने की पहले से ही आदत हो गई है। लेकिन जो वंदे मातरम नहीं गाने वाले (लोग) हैं, उन्होंने अब शुरू किया है। उनके लिए मैं धन्यवाद अर्पित करता हूं। ये तो वंदे मातरम की ताकत है। वह आदत से मजबूरउन्होंने आगे कहा, वैसे तो यह राष्ट्रीय उत्सव का विषय है, बहस का नहीं। मगर सबसे पहले भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की ओर से महान रचनाकार बंकिंमचट्टोपाध्याय को नमन करता हूं। उन सेनानियों को नमन करता हूं, जिन्होंने वंदे मातरम का नारा लगाते हुए आजादी के आंदोलन में बलिदान दिया।राज्यसभा में नेता-प्रतिपक्ष ने कहा, वंदे मातरम गीत भारत के सार्वजनिक जीवन में तब प्रवेश करता है, जब गुरुदेव रवींद्र नाथ टैगोर ने 1986 कांग्रेस केकोलकाता अधिवेशन में पहली बार इसे गाया था। जिसका जिक्र हमारे गृह मंत्री ने किया। लेकिन इसकी पृष्ठभूमि क्या थी, वह नहीं बताई। जो चीजउन्हें अच्छी लगती है कांग्रेस को टोकने के लिए, हमारे नेताओं का अपमान करने के लिए जो बोलना है, वही कट पेस्ट करके बोलते हैं, दूसरा नहींबोलते, यह आदत है। लेकिन क्या कर सकते हैं, वह आदत से मजबूर हैं। अपमानित करने का कोई मौका नहीं छोड़तेउन्होंने आगे कहा, वंदे मातरम को आजादी के आंदोलन का नारा बनाने के काम कांग्रेस पार्टी ने किया। कांग्रेस ने अपने अधिवेशनों और कार्यक्रमों मेंवंदे मातरम के गायन की प्रक्रिया शुरू की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाहपर आरोप लगाया कि वे (देश के पहले प्रधानमंत्री) जवाहर लाल नेहरू और कांग्रेस के अन्य नेताओं को अपमानित करने का कोई मौका नहीं छोड़ते।
कर्नाटक में बीजेपी का बड़ा किसानों संग प्रदर्शन, सिद्धारमैया सरकार पर ‘किसान विरोधी’ होने का आरोप

भाजपा ने कर्नाटक में बड़ी संख्या में किसानों के साथ विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी ने कांग्रेस सरकार की कथित किसान विरोधी नीतियों की निंदा की।इस प्रदर्शन में कर्नाटक बीजेपी अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर अशोक, विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष चलवाड़ीनारायणस्वामी सहित कई विधायक, विधान परिषद सदस्य और वरिष्ठ नेता शामिल हुए। बीजेपी नेताओं ने कहा कि यह विरोध राज्य से जुड़े मुद्दों औरकांग्रेस सरकार की विफलताओं को उजागर करने के लिए आयोजित किया गया है। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया केनेतृत्व वाली सरकार ने किसानों की परेशानी को नजरअंदाज कर दिया है। कोई मुआवजा नहीं दिया गयाबीजेपी ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह मकई और गन्ना किसानों की शिकायतों पर कार्रवाई नहीं कर रही। पार्टी नेताओं का कहना है कि मकईकिसानों की ओर से खरीद केंद्र खोलने की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन सरकार अब तक कोई पहल नहीं कर पाई। बीजेपी के अनुसार, खरीद केंद्र न होने से किसान बिचौलियों के हाथों अपनी फसल कम कीमत पर बेचने को मजबूर हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता सी.टी. रवि ने कहा कि विपक्षकिसानों के हक की लड़ाई लड़ रहा है और सरकार को जवाब देना होगा। रवि ने कहा कि हम किसानों को न्याय दिलाने की कोशिश कर रहे हैं। राज्यसरकार ने गन्ना और मकई पर एमएसपी का ऐलान तो किया है, लेकिन खरीद केंद्र ही नहीं खोले। लाखों हेक्टेयर में फसलें बाढ़ से नष्ट हो गईं, फिरभी कोई मुआवजा नहीं दिया गया। हम किसानों का हक मांग रहे हैं। बिचौलियों के हाथों कम कीमत पर फसल बेचनी पड़ रहीबीजेपी नेता ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों को लाभ देने के लिए बड़ी सब्सिडी दे रही है। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक बोरी यूरियाकी कीमत ₹2,500 है, लेकिन केंद्र सरकार इस पर ₹2,200 की सब्सिडी देती है, जिससे किसानों को कम कीमत पर खाद मिल पाती है। रवि ने कहाकि डीएपी खाद पर भी ₹2,500 की सब्सिडी मिलती है और इसका सीधा फायदा किसानों को मिल रहा है। विरोध कर रहे बीजेपी नेताओं ने कहा किवे किसानों के साथ मिलकर बेलगावी स्थित सुवर्ण विधान सौध का घेराव करेंगे। यह कदम राज्य में जारी शीतकालीन सत्र के दौरान उठाया जाएगा।कर्नाटक में बीजेपी ने किसानों के साथ विरोध प्रदर्शन करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार किसानों की समस्याओं की अनदेखी कर रही है।प्रदर्शन में राज्य सरकार पर आरोप लगाया गया कि उसने गन्ना और मकई पर एमएसपी घोषित करने के बावजूद खरीद केंद्र नहीं खोले, जिससेकिसानों को बिचौलियों के हाथों कम कीमत पर फसल बेचनी पड़ रही है।
सोनिया गांधी 78 वर्ष की, नेताओं ने दी बधाई, कांग्रेस ने बताया ‘त्याग, नेतृत्व और संवैधानिक मूल्यों की मिसाल’

कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी का आज अपना 78वां जन्मदिन मना रही हैं। कांग्रेस नेताओं के साथ साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उन्हेंजन्मदिन की बधाई दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बधाई देते हुए लिखा, “सोनिया गांधी जी को जन्मदिन की बधाई। भगवान उन्हें लंबी उम्र और अच्छीसेहत दे।” कांग्रेस ने एक्स पर सोनिया गांधी का कोट पोस्ट किया, “हम सब मिलकर समुद्र जितनी गहरी और आसमान जितनी ऊंची किसी भी चुनौतीका सामना कर सकते हैं।” इसमें कहा गया कि उनके शब्द उस ताकत, गरिमा और शालीनता को पूरी तरह से दिखाते हैं जो वह सार्वजनिक और नीजिजिंदगी में दिखाती हैं। वह पक्की ईमानदारी, दया और हिम्मत के साथ जीती हैं। पार्टी ने आगे कहा “उनकी दूर की सोचने वाली लीडरशिप ने सिर्फ़कांग्रेस को ही रास्ता नहीं दिखाया, बल्कि इसने नमरेगा, शिक्षा का अधिकार, सूचना का अधिकार और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम जैसे अहमअधिकार-आधारित कानूनों के जरिए भारत को बदल दिया। इनसे लाखों लोगों को नौकरियां, उम्मीद, शिक्षा, आवाज और इज्जत मिली।” संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखने के पक्के इरादे को दिखाताकांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक्स पर लिखा, “कांग्रेस पार्लियामेंट्री पार्टी की चेयरपर्सन, श्रीमती सोनिया गांधी जी को जन्मदिन की हार्दिकबधाई। पिछड़े लोगों के अधिकारों की पक्की समर्थक, वह हमेशा से ही एक मिसाल रही हैं, उन्होंने हर चुनौती का सामना हिम्मत, ताकत, त्याग औरबिना किसी स्वार्थ के समर्पण के साथ किया है।” एआईसीसी के जनरल सेक्रेटरी के सी वेणुगोपाल ने लिखा, “पिछले 3 दशकों में, सार्वजनिक जीवनमें उनकी भूमिका प्रेरणा देने वाली रही है। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी के कार्यकाल में यूपीए अध्यक्ष के तौर पर, उन्होंने एक वेलफेयर एजेंडा कोआगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई, जिससे भारत का सोशल सिक्योरिटी नेट बढ़ा और एक दशक के अंदर 23 करोड़ से ज़्यादा भारतीय गरीबी सेबाहर निकले।” तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने कहा, “कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी को जन्मदिन की बधाई।उनका जीवन त्याग, एक निस्वार्थ सार्वजनिक यात्रा और सेक्युलरिज़्म और संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखने के पक्के इरादे को दिखाता है।”