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दिल्ली 2025: केजरीवाल की हार, BJP की वापसी और प्रदूषण व सुरक्षा की बड़ी चुनौती

2025 का साल दिल्ली के लिए कई मायनों में इतिहास रचने वाला रहा है। एक समय वैकल्पिक राजनीति के प्रेरणा स्रोत बनकर उभरे अरविंदकेजरीवाल की इसी साल के फरवरी में दिल्ली में हुए चुनावों में करारी हार हुई। शराब घोटाले में जेल गए और अपने सरकारी आवास पर भारी पैसाखर्च कर विवादों में घिरे केजरीवाल स्वयं अपनी सीट नहीं बचा सके। भाजपा 27 साल बाद दिल्ली की सत्ता में वापसी कर सकी और उसने दिल्ली मेंबुनियादी बदलाव करने का वादा किया है। साल बीतते-बीतते दिल्ली को लालकिले बम विस्फोट ने आहत कर दिया। दिल्ली की सरकार औरप्रशासन के सामने इस बात की बड़ी चुनौती रहेगी कि वह दिल्ली को आतंकी खतरों से कैसे सुरक्षित रखती है। मुख्यमंत्री बनाते हुए महिला मतदाताओं को विशेष संदेशवर्ष 2025 दिल्ली की स्थानीय राजनीति में बड़े बदलाव पैदा करने वाला साल रहा। इसी साल की शुरुआत में दिल्ली में विधानसभा चुनाव हुए औरआम आदमी पार्टी सरकार की करारी हार हुई। शराब घोटाले में कई महीने जेल के अंदर रहे अरविंद केजरीवाल की करारी हार हुई और वे अपनी सीटतक हार गए। सरकार में नंबर दो रहे मनीष सिसोदिया भी अपनी सीट नहीं बचा सके। केजरीवाल की हार का अर्थ केवल एक राजनीतिक दल की एकचुनाव में हार तक सीमित नहीं है। उनकी हार ने आम आदमी पार्टी की भविष्य की राजनीतिक यात्रा पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। केजरीवाल की हारके बाद दिल्ली में भाजपा ने 27 साल बाद सरकार बनाने में सफलता हासिल की। पार्टी ने एक महिला रेखा गुप्ता को मुख्यमंत्री बनाते हुए महिलामतदाताओं को विशेष संदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार की खिंचाई भी कीभीड़ प्रबंधन न कर पाने के कारण दिल्ली में अनेक बार बड़ी दुर्घटनाएं घट चुकी हैं। इन दुर्घटनाओं में अनेक लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है।2025 भी इस मामले में अछूता नहीं रहा। प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ के लिए 16 फरवरी को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर बड़ी संख्या में यात्रीपहुंचे। भीड़ का सही प्रबंधन न कर पाने के कारण भगदड़ मची और इसमें 18 लोगों की दुखद मौत हो गई। वायु प्रदूषण केंद्र और दिल्ली सरकार केसामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। इस वर्ष वायु प्रदूषण का स्तर 500-600 अंक को पार करता रहा है। 400 पार एक्यूआई वाले दिनों कीसंख्या लगातार बढ़ती रही है। वायु प्रदूषण पर स्थाई लगाम न लगा पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार की खिंचाई भी की है। आने वालेसमय में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए स्थाई उपाय कर पाना रेखा गुप्ता सरकार के लिए बड़ी चुनौती साबित होने वाली है।

CJI Suryakant: मध्यस्थता कानून का उच्चतम विकास, 2.5 लाख प्रशिक्षित मध्यस्थों की जरूरत

देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कानून में मध्यस्थता की अहमियत बताते हुए कहा कि मध्यस्थता, कानून की कमजोरी का संकेत नहीं हैबल्कि यह कानून का उच्चतम विकास है। सीजेआई ने कहा कि मध्यस्थता को अब एक सफल, कम लागत वाले औजार के रूप में दोनों पक्षों सेस्वीकार्यता मिल रही है। गोवा में बार काउंसिल ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय सम्मेलन और मध्यस्थता जागरूकता कार्यक्रम में बोलते हुए मुख्य न्यायाधीश नेकहा, जिला अदालतों से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक, सभी स्तरों पर बड़ी संख्या में मध्यस्थों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता, जो न्यायिक मामलोंके लंबित होने को कम कर सकती है, कानून की कमजोरी का संकेत नहीं है, बल्कि इसका उच्चतम विकास है। 2,50,000 से ज़्यादा प्रशिक्षित मधस्थों की जरूरतमुख्य न्यायाधीश ने कहा, ‘जैसे-जैसे हम भविष्य की ओर देख रहे हैं, मैं बहु-द्वार कोर्टहाउस की कल्पना करता हूं। यह एक दूरदर्शी अवधारणा है जहांकोर्ट सिर्फ ट्रायल की जगह नहीं रह जाता है। बल्कि, यह विवाद समाधान के लिए एक व्यापक केंद्र बन जाता है।’ सीजेआई ने कहा कि जब न्यायचाहने वाला कोई व्यक्ति कोर्ट आता है, तो उसे मध्यस्थता और अंततः मुकदमेबाजी के विकल्प मिलने चाहिए। उन्होंने कहा, ‘हमें यह स्वीकार करनाहोगा कि कुछ ऐसे मामले होंगे जिन्हें मध्यस्थता या मध्यस्थता के माध्यम से हल नहीं किया जा सकता है। इसलिए, न्यायिक प्रणाली हमेशा उनविवादों का निपटारा करने के लिए निष्पक्ष मुकदमेबाजी के लिए मौजूद रहेगी।’ सीजेआई ने कहा कि मध्यस्थता एक ऐसा कारण है जो उनके दिल केबहुत करीब है और जिस पर उन्हें गहरा विश्वास है। उन्होंने कहा, ‘मुकदमेबाजी अक्सर एक मृत रिश्ते का पोस्टमार्टम और क्या गलत हुआ, इसकापरीक्षण होता है। इसके उलट, मध्यस्थता वह उपचारात्मक सर्जरी है जो एक रिश्ते की जीवित रखने की कोशिश करती है।’ मध्यस्थता प्रशिक्षण कीआवश्यकता पर जोर देते हुए, उन्होंने कहा कि 39,000 प्रशिक्षित मध्यस्थ हैं, लेकिन मांग और आपूर्ति में अंतर है। CJI ने कहा कि सभी स्तरों परमध्यस्थता को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए, देश को 2,50,000 से ज़्यादा प्रशिक्षित मधस्थों की जरूरत है। इसके नतीजे बेहद उत्साहजनक रहेउन्होंने कहा कि लोगों को मध्यस्थ के तौर पर ट्रेनिंग देते समय बहुत सावधान रहना होगा क्योंकि मध्यस्थता सिर्फ एक कला नहीं है, बल्कि एकमध्यस्थ का स्वभाव, व्यवहार, दया, जुनून, प्रतिबद्धता और समर्पण प्रयासों को सफल बनाने में बहुत बड़ा फर्क डालता है। उन्होंने कहा कि ‘मेडिएशनफॉर नेशन’ अभियान इस साल जुलाई में शुरू किया गया था ताकि वैवाहिक, कमर्शियल और मोटर दुर्घटनाओं सहित कई तरह के विवादों कोसुलझाकर लंबित मामलों को कम किया जा सके। सीजेआई ने कहा कि इसके नतीजे बेहद उत्साहजनक रहे। मुख्य न्यायाधीश ने देश में मध्यस्थताप्रक्रिया की वकालत करते हुए इसे कानून का उच्चतम विकास बताया। उन्होंने कहा कि देश में मध्यस्थता कर्मियों की नियुक्ति करने पर जोर दिया।उन्होंने कहा कि मध्यस्थता से अदालतों में लंबित मुकदमों की संख्या को कम किया जा सकता है।

अंकिता हत्याकांड: दुष्यंत गौतम ने सोशल मीडिया और मीडिया पर आपत्तिजनक सामग्री हटाने की मांग की

अंकिता हत्याकांड में उर्मिला सनावर की वायरल वीडियो में नाम आने के बाद भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम नेसचिव गृह को पत्र भेजा है। उन्होंने इसे आपराधिक साजिश कराते देते हुए मीडिया, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से आपत्तिजनक सामग्री हटवाने व प्रसारपर प्रतिबंध का अनुरोध किया है। सचिव गृह को भेजे पत्र में दुष्यंत गौतम ने कहा है कि वह देशभर में आमजन के बीच एक प्रतिष्ठित सामाजिक एवंराजनीतिक कार्यकर्ता हैं। उन्हें जानकारी मिली है कि एक आपराधिक साजिश के तहत कुछ आपराधिक तत्वों ने एक फर्जी और मनगढ़त ऑडियोरिकॉर्डिंग तैयार की है। इस आपराधिक साजिश को आगे बढ़ाने के लिए मीडिया और सोशल मीडिया पर ऐसी घृणित, दुर्भावनापूर्ण और झूठी सामग्रीफैला रहे हैं। संलग्न कर पेन ड्राइव में भेजाउन्होंने उर्मिला सनावर समेत 28 फेसबुक आईडी, उनके ई-मेल और फोन नंबर के अलावा नौ इंस्टाग्राम हैंडल, आठ यूट्यूब चैनल और दो एक्स हैंडलका नाम भी इस पत्र में शामिल किया है, जिन पर यह सामग्री प्रसारित की जा रही है। सचिव गृह को लिखे पत्र में संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मऔर समाचार चैनलों को इस तरह की सभी सामग्री को हटाने, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रसारित करने पर प्रतिबंध लगाने का अनुरोध किया। उन्होंनेइन सभी सोशल मीडिया अकाउंट से डाउनलोड की गई सामग्री को पत्र के साथ संलग्न कर पेन ड्राइव में भेजा है। दुष्यंत गौतम ने कहा है किआपराधिक साजिश के तहत कुछ आपराधिक तत्वों ने एक फर्जी और मनगढ़त ऑडियो रिकॉर्डिंग तैयार की है। इस आपराधिक साजिश को आगेबढ़ाने के लिए मीडिया और सोशल मीडिया पर ऐसी घृणित, दुर्भावनापूर्ण और झूठी सामग्री फैला रहे हैं।

भारत रत्न अटल जी की जयंती के अवसर पर ममता चैरिटेबल ट्रस्ट ने आयोजित किया विशाल सेवा शिविर, जरूरतमंदों में बांटी कंबल और स्वास्थ्य सुविधाएँ

भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की जन्म जयंती की पूर्व संध्या पर ममता चैरिटेबल ट्रस्ट ने पीटीसी फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में एक विशालसेवा और सहायता शिविर आयोजित किया। कार्यक्रम का आयोजन 24 दिसंबर 2025 को पीटीसी कंपनी के बगल ग्राउंड, मालवीय नगर, ऐशबाग, लखनऊ में किया गया। इस अवसर पर हजारों लाभार्थियों ने शिविर में पहुंचकर कंबल, स्वास्थ्य किट, कृत्रिम अंग, व्हीलचेयर, ट्राईसाइकिल, बैसाखी, स्टिक, कान की मशीन और चश्मे प्राप्त किए। पूर्व उपमुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया और कहा किममता ट्रस्ट गरीबों, महिलाओं, बुजुर्गों, विद्यार्थियों, खिलाड़ियों, दिव्यांगों और अनाथों की सेवा में नित नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। उन्होंने कहाकि यह शिविर श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन के आदर्शों—सेवा, समर्पण और समाज कल्याण को याद करने और निभाने का प्रतीक है। प्रतिबद्धता का उदाहरणकार्यक्रम में मुख्य रूप से पीटीसी इंडस्ट्रीज के निदेशक श्री सचिन अग्रवाल, पीटीसी फाउंडेशन की निदेशक श्रीमती स्मिता अग्रवाल, नीलांश ग्रुप केचेयरमैन श्री संतोष श्रीवास्तव, कथावाचक लवी मैत्री, परम पूज्य संत पं. श्री राम शरण शास्त्री जी महाराज, संस्थापक ट्रस्टी डॉ. राजेश शुक्ला, कोषाध्यक्ष गौरव पांडेय, राजीव मिश्रा, मोहित मिश्रा, शशि कान्त शुक्ल, पूर्व मंडल अध्यक्ष मनोज लोधी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।ममता ट्रस्ट के चीफ ट्रस्टी एवं बीजेपी क्षेत्रीय उपाध्यक्ष राजीव मिश्रा ने कहा कि सेवा और समर्पण ही जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य है और यह शिविर इसीप्रतिबद्धता का उदाहरण है। उन्होंने सभी उपस्थित लोगों और सहयोगियों को धन्यवाद देते हुए कहा कि समाज की भलाई और जरूरतमंदों की सहायताके लिए उनका प्रयास निरंतर जारी रहेगा। यह शिविर ममता ट्रस्ट की नारा सेवा ही नारायण सेवा है की सोच को साकार करता है और यह दर्शाता है किकैसे संगठन सामाजिक कल्याण और सेवा के माध्यम से जरूरतमंदों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।

कर्नाटक में मुख्यमंत्री बदलाव की अटकलें तेज, डीके शिवकुमार ने मुलाकात पर स्पष्ट किया: चर्चा केवल मनरेगा मुद्दे पर

कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर हलचल बढ़ गई है। उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से बंगलूरू स्थितआवास पर मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब कांग्रेस सरकार अपने कार्यकाल केआधे रास्ते पर पहुंच चुकी है। मुलाकात के बाद शिवकुमार ने साफ किया कि उन्होंने कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं उठाया। उनके मुताबिक, चर्चा केंद्रसरकार द्वारा मनरेगा की जगह नए कानून लाने और उस पर पार्टी के रुख को लेकर थी। उन्होंने कहा कि वह और मुख्यमंत्री सिद्धारमैया हाईकमान केफैसले का सम्मान करते हैं और उसी के अनुसार काम करेंगे। कर्नाटक उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकातके बाद मुख्यमंत्री बदलाव की अटकलें तेज हो गई हैं। शिवकुमार ने साफ किया कि चर्चा केवल मनरेगा से जुड़े मुद्दों पर थी। उन्होंने कहा कि वह औरमुख्यमंत्री सिद्धारमैया हाईकमान के फैसले का पालन करेंगे। वर्किंग कमेटी की बैठक में इस मुद्दे पर रणनीति तय की जाएकांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें तब और तेज हुईं, जब सरकार ने पांच साल के कार्यकाल का आधा समय पूरा किया। हालांकि, खरगे पहले हीकह चुके हैं कि नेतृत्व को लेकर भ्रम केवल स्थानीय स्तर पर है, हाईकमान में नहीं। शिवकुमार ने इसे वरिष्ठ नेता की सलाह बताते हुए कहा कि पार्टी केअंदरूनी मामलों का समाधान संगठन के भीतर ही होगा। शिवकुमार ने खुद को आजीवन पार्टी कार्यकर्ता बताते हुए कहा कि उन्होंने कांग्रेस के लिए हरस्तर पर काम किया है। पोस्ट या पद उनके लिए प्राथमिक नहीं है। जब उनसे मेहनत का इनाम मिलने पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने इस पर टिप्पणीकरने से इनकार कर दिया। शिवकुमार ने केंद्र की नई योजना पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यह गरीबों, मजदूरों और किसानों के खिलाफ है।उन्होंने संकेत दिए कि राज्य कांग्रेस मनरेगा की बहाली के लिए बड़ा आंदोलन करेगी। 27 दिसंबर को होने वाली कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में इसमुद्दे पर रणनीति तय की जाएगी।

दिल्ली में निजी स्कूलों के लिए फीस समिति बनाना हुआ अनिवार्य, मनमानी बढ़ोतरी पर लगाम

दिल्ली सरकार ने निजी स्कूलों में मनमानी फीस बढ़ोतरी पर लगाम लगाने के लिए सख्त कदम उठाते हुए निजी स्कूलों के लिए स्कूल स्तर व जिलास्तरपर शुल्क निर्धारण समिति बनाना अनिवार्य किया है। सरकार ने इसके लिए आदेश जारी किए हैं। सभी निजी स्कूलों को इस आदेश के 15 दिन केभीतर (10 जनवरी 2026) तक 11 सदस्यीय कमेटी का गठन करना होगा। सरकार के इस कदम से कोई भी निजी स्कूल मनमाने तरीके से फीस कोनहीं बढ़ा सकेगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस आदेश का पालन नहीं करने पर स्कूल शिक्षा फीस निर्धारण और नियंत्रण अधिनियम के तहतकार्रवाई की जाएगी। दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने ने कहा कि दिल्ली स्कूल एजुकेशन ट्रांसपेरेंसी इन फिक्सेशन एंड रेगुलेशन ऑफ फीस एक्ट2025 और इसके अंतर्गत बनाए गए नियमों को शैक्षणिक सत्र 2025-26 से प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है। इस कानून के सफल क्रियान्वयनके लिए स्कूल स्तर और जिला स्तर पर दो महत्वपूर्ण समितियों, स्कूल लेवल फीस रेगुलेशन कमेटी और डिस्ट्रिक्ट लेवल फीस अपीलेट कमेटी कागठन अनिवार्य किया गया है। सरकार ने यह कदम अभिभावकों को राहत देने और मनमानी फीस बढ़ोतरी को रोकने के लिए उठाया है। गठन से फीस निर्धारण का स्थायी समाधान निकलेगाइस संबंध में शिक्षा निदेशक वेदिथा रेड्डी की ओर से एक आदेश भी जारी किया है जो कि तत्काल प्रभाव से लागू होगा। इसके अनुसार स्कूलों कोअनिवार्य रूप से 10 जनवरी 2026 तक इस समिति का गठन करना है। आदेश के अनुसार इस 11 सदस्यीय समिति में अभिभावकों के प्रतिनिधि केतौर पर पांच सदस्य होंगे। इसके साथ ही स्कूल प्रबंधन अध्यक्ष, स्कूल प्रधानाचार्य, तीन शिक्षक, तथा शिक्षा निदेशालय के प्रतिनिधि शामिल होंगे।समिति का गठन लॉटरी प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा, जिसमें पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पर्यवेक्षक की नियुक्ति भी की गई है। स्कूलोंको कमेटी के अध्यक्ष व सदस्यों के नाम स्कूल वेबसाइट व नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित करने होंगे। शिक्षा मंत्री ने कहा कि दिल्ली में लगभग 37.38 लाखबच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। हमारे लिए प्रत्येक बच्चा महत्वपूर्ण है, ना हम स्कूलों के खिलाफ हैं और ना ही शिक्षकों के। हमारा मकसद संतुलित, पारदर्शी और भरोसेमंद प्रणाली विकसित करना है। उन्होंने कहा कि इन समितियों के गठन से फीस निर्धारण का स्थायी समाधान निकलेगा। निपटारे और अपीलों पर निर्णय का अधिकार दिया गयायदि कोई स्कूल फीस बढ़ाना चाहता है तो उसे ठोस कारण के साथ अपना प्रस्ताव समिति के समक्ष रखना होगा। प्रस्ताव पर चर्चा के बाद कमेटीअपनी सिफारिश देगी और जिसके बाद उस पर निर्णय किया जाएगा। पहले स्कूलों को फीस का प्रस्ताव एक अप्रैल तक देने की व्यवस्था थी। लेकिनअब नए कानून के अनुसार फीस बढ़ाने के लिए प्रस्ताव 25 जनवरी 2026 तक ही प्रस्तुत करना होगा। यदि समिति निर्धारित समय.सीमा में निर्णयनहीं लेती है तो मामला स्वत: जिला स्तर की अपीलीय समिति के पास चला जाएगा। उन्होंने बताया कि जिला स्तर की कमेटी को फीस से संबंधितविवादों के निपटारे और अपीलों पर निर्णय का अधिकार दिया गया है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई है ताकि किसी भी स्तरपर मनमानी की गुंजाइश न रहे और हर निर्णय नियमों के दायरे में हो।

बांग्लादेश में अराजकता, पाकिस्तान की परछाईं, भारत-बांग्लादेश रिश्तों पर संकट

बांग्लादेश में इन दिनों हिंसा और अराजकता का माहौल है। भारत के साथ बांग्लादेश के रिश्ते भी खराब दौर से गुजर रहे हैं और दोनों देशों ने अपनी-अपनी वीजा सेवाएं भी बंद करने का एलान कर दिया है। अब इसे लेकर विशेषज्ञों ने बांग्लादेश सरकार की निंदा की है। विदेश मामलों के विशेषज्ञसुशांत सरीन का कहना है कि इस समय बांग्लादेश की सरकार पाकिस्तान की जेब में है।सुशांत सरीन ने कहा, ‘बांग्लादेश अपनी पाकिस्तानी जड़ों को फिर से खोज रहा है। वे पाकिस्तानी तरीके अपना रहे हैं। बांग्लादेश की मौजूदा सरकार, अवैध, गैर-कानूनी और बिना चुनी हुई सरकार है और अब वह पूरी तरह से पाकिस्तान की जेब में है। बांग्लादेश का 15-20 लोगों के छोटे से प्रदर्शनपर इतनी ज्यादा प्रतिक्रिया देना पूरी तरह से हास्यपद है, जबकि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार हो रहे हैं और लोगों की क्रूर तरीके से हत्याएंहो रही हैं।’ बांग्लादेश में कट्टरपंथी नेता उस्मान हादी की मौत के बाद बड़े पैमाने पर हिंसा और विरोध प्रदर्शन हुए। इस दौरान बांग्लादेश में भारतीयमिशनों के बाहर भी उग्र विरोध प्रदर्शन हुए। बाकी दुनिया के लिए भी एक सबक होनासुरक्षा स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने बांग्लादेश में अपने मिशनों में वीजा सेवाएं बंद करने का एलान किया। इसके जवाब में बांग्लादेश ने भीकथित सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए भारत में अपने मिशन में वीजा सेवाएं बंद करने का एलान कर दिया। इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए सुशांतसरीन ने कहा, पाकिस्तान भी ऐसी ही बेतुकी बातें करता है और अब बांग्लादेश भी अपनी पूर्वी पाकिस्तान की जड़ों को फिर से खोज रहा है। ऐसीरिपोर्ट्स सामने आ रही हैं कि पाकिस्तानी सरकार के कुछ लोग बांग्लादेश के सरकारी दफ्तरों में बैठे हैं और उन्हें बता रहे हैं कि क्या करना है। ‘ऐसी भीरिपोर्ट्स हैं कि पाकिस्तान और बांग्लादेश एक रक्षा सौदा करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसका मतलब है कि जल्द ही बांग्लादेश में पाकिस्तानीसैनिकों की तैनाती हो सकती है या किसी और तरह की मदद दी जा सकती है। बांग्लादेश भारत पर हमला करने के लिए एक चौकी बन सकता है।भारत को भी यह सोचना होगा कि वह बांग्लादेश से कैसे निपटना है। बहुत से लोग, भारत जो कर रहा है या नहीं कर रहा है, उसे एक रणनीतिक संयममानते हैं। लेकिन मुझे कभी-कभी हैरानी होती है कि यह संयम है या रणनीतिक लकवा। हमें कुछ करने की जरूरत है, और यह भारत के लिए, यहां तककि पड़ोसी देशों और बाकी दुनिया के लिए भी एक सबक होना चाहिए।’ सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर कीसुशांत सरीन ने कहा, ‘भारतीय वीजा सेवाएं निलंबित किए जाने के सुरक्षा कारण थे। बांग्लादेश में पुलिस और सरकार का कहना है कि हम (भीड़ को) कंट्रोल नहीं कर सकते क्योंकि वे हिंसक हो जाएंगे। बांग्लादेश में भारतीय मिशनों के लिए एक स्पष्ट और मौजूदा सुरक्षा खतरा है, यही वजह है किकुछ सेवाओं को निलंबित कर दिया गया था। भारत में ऐसी स्थिति नहीं है। मुझे नहीं लगता कि किसी भारतीय पुलिस वाले ने, या किसी भारतीयसरकार या भारतीय अथॉरिटी ने कहा है कि हम भीड़ को कंट्रोल नहीं कर सकते, तो बांग्लादेशियों ने कहा कि उनके मिशनों को सुरक्षा खतरा था; वेझूठ बोल रहे हैं। यह वही पाकिस्तानी जैसे को तैसा वाला कार्ड है।’ बांग्लादेश में बिगड़ती कानून व्यवस्था और भीड़तंत्र की हिंसा के बीच, जिस तरहसे बांग्लादेश ने भारत में अपने मिशन की सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर की है, उस पर विशेषज्ञों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और कहा है कि बांग्लादेशइस समय पूरी तरह से पाकिस्तान की जेब में है।

20 साल बाद ठाकरे बंधु साथ, उद्धव-राज ने BMC चुनाव के लिए किया गठबंधन

महाराष्ट्र की सियासत में ठाकरे बंधुओं ने एक बड़ा फैसला लेकर सबको चौंका दिया है। 20 साल बाद उद्धव-राज ठाकरे एक साथ चुनाव लड़ने जा रहे हैं। शिवसेना (यूबीटी) और मनसे मिलकर बीएमसी चुनाव लड़ेंगे। बुधवार को दोनों भाईयों ने संयुक्त प्रेस वार्ता करके इसका एलान किया। घोषणा से पहले उद्धव ठाकरे और एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे ने अपने परिवारों के साथ शिवाजी पार्क में बालासाहेब ठाकरे के स्मारक परश्रद्धांजलि अर्पित की। उद्धव ठाकरे ने कहा कि हम साथ रहने के लिए ही एकजुट हुए हैं। मुंबई या महाराष्ट्र पर किसी ने टेढ़ी नजर डाली, तो उसकीसियासत खत्म कर देंगे, यह शपथ लेकर हम साथ आए हैं। विधानसभा चुनाव के वक्त भाजपा ने यह गलत प्रचार किया था कि कटेंगे, तो बटेंगे। इसीपर अब हम मराठी लोगों से यह कहना चाहते हैं कि अगर अब चूक गए, तो खत्म हो जाओगे। अगर आपस में फूट पड़ी, तो पूरी तरह खत्म हो जाओगे।मराठी माणूस किसी के आड़े नहीं आता, लेकिन अगर कोई उसके रास्ते में आ गया, तो वह उसे वापस नहीं जाने देता। दोनों पार्टियों के कार्यकर्ता बहुत उत्साहितराज ठाकरे ने कहा कि किसी भी दल से महाराष्ट्र बड़ा है। हम अभी कोई आंकड़ा नहीं बताएंगे। समय आने पर इसकी घोषणा की जाएगी। बहुत दिनोंसे महाराष्ट्र जिसका इंतजार कर रहा था, उस शिवसेना-मनसे के बीच आज आखिरकार गठबंधन हो गया है। महाविकास अघाड़ी के सवाल पर उद्धव नेचुटकी ली। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने तो जाहिर कर ही दिया है। अब हम और क्या बोलें कि टूट गया है, टूट गया है? …क्या अघाड़ी अब भी कायमहै, इस पर भी उद्धव ने तंज कसते हुए कहा कि हां, सारे दल तो बाहर हो गए हैं, फिर भी आप कह सकते हैं कि महाविकास अघाड़ी अटूट है। गठबंधनके एलान पर एमएनएस नेता यशवंत किल्लेदार ने कहा कि दो भाई एक साथ आ रहे हैं और हम इस पल का लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। उन्होंनेकहा कि आज जो हो रहा है वह हमारे लिए खुशी की बात है। किल्लेदार ने कहा, ‘दोनों भाई बालासाहेब ठाकरे के स्मृति स्थल पर आएंगे और उसकेबाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। वे वहीं गठबंधन की घोषणा करेंगे। दोनों पार्टियों के कार्यकर्ता बहुत उत्साहित हैं।’ भाजपा के विरोधियों को एकजुट होना चाहिएशिवसेना (यूबीटी) के नेता ने कहा, ’20 वर्षों तक ठाकरे बंधुओं का साथ नहीं रहा और महाराष्ट्र को इसका बहुत नुकसान उठाना पड़ा। अब भाजपा कोसबक सिखाने और मुंबई में चल रही लूट को रोकने के लिए उद्धव और राज ठाकरे एकजुट हुए हैं। हम मुंबई की 10 नगर निगमों में एक साथ चुनावलड़ेंगे।’ गठबंधन को लेकर संजय राउत ने कहा कि उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे आज चुनावी गठबंधन की घोषणा करने के लिए एकजुट होंगे। उन्होंनेकहा, ‘यह महाराष्ट्र और मराठी जनता के लिए खुशी का क्षण है। बालासाहेब ठाकरे ने यहीं के मूल निवासियों के लिए शिवसेना की स्थापना की थी।’ बीएमसी चुनाव के लिए शिवसेना (यूबीटी) और एमएनएस के गठबंधन पर कांग्रेस नेता अतुल लोंढे ने कहा कि आज खबर आई है कि अजित पवारऔर शरद पवार गठबंधन करने जा रहे हैं। उन्होंने सवाल खड़े करते हुए कहा कि क्या इसका मतलब यह है कि महायुति में फूट पड़ गई है? इसगठबंधन के एलान पर शिवसेना (यूबीटी) विधायक सचिन अहीर ने कहा कि महाराष्ट्र की राजनीति में यह एक ऐतिहासिक दिन है, जब ठाकरे परिवारएक साथ आ रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘महाराष्ट्र के लिए इसकी बहुत जरूरत है। यह आशा की किरण है। आज दोपहर गठबंधन का एलान किया जाएगा।भाजपा के विरोधियों को एकजुट होना चाहिए।’

उन्नाव रेप केस: कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद सजा निलंबित,हाईकोर्ट से सशर्त जमानत

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को 2017 के उन्नाव दुष्कर्म मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे पूर्व भाजपा नेता कुलदीप सिंह सेंगर कीसजा को अपील लंबित रहने तक निलंबित कर दिया और दिल्ली में रहने समेत कई सख्त शर्तों के साथ जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है।हालांकि सेंगर अभी जेल से बाहर नहीं आ सकेगा। पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में 10 साल की सजा पर उसकी याचिका लंबित हैजिसकी सुनवाई 16 जनवरी 2026 को होनी है। नाबालिग से दुष्कर्म में उम्रकैद की सजा निलंबित होने की सूचना पर जहां पूर्व विधायक का खेमाखुश है, वहीं मामले की जानकारी होते ही पीड़िता अपनी मां के साथ दिल्ली के इंडिया गेट पर धरना देने के लिए बैठ गई। इसकी जानकारी पुलिसपहुंची और दोनों को जबरन वहां से उठा दिया। दुष्कर्म पीड़िता का कहना है कि सेंगर बाहर आया दोबारा इसी जगह पर धरना देगी। हत्या के मुकदमे में तीन मार्च 2020 को दस साल की सजा हुईमालूम हो कि गांव में रहने वाली नाबालिग ने वर्ष 2017 में तत्कालीन विधायक कुलदीप सेंगर पर दुष्कर्म की शिकायत की थी। लंबी कानूनी लड़ाईके बाद पीड़िता और परिवार की सुनवाई हुई थी। अप्रैल 2018 को प्रदेश सरकार की संस्तुति पर केंद्र सरकार ने प्रकरण की सीबीआई जांच की करानेकी मंजूरी दी। सीबीआई ने रिपोर्ट दर्ज कर 13 अप्रैल 2018 की उसे लखनऊ स्थित आवास से गिरफ्तार किया था। लंबी जांच और दिल्ली की तीसहजारी कोर्ट में मुकदमे की सुनवाई के बाद 16 दिसंबर 2019 को कोर्ट में मुकदमे की सुनवाई पूरी हुई और न्यायालय ने कुलदीप को नाबालिग सेदुष्कर्म का दोषी पाया। 20 दिसंबर 2019 को न्यायालय ने कुलदीप को उम्रकैद की सजा और 25 लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई थी। इसकेबाद उनकी विधानसभा से सदस्यता खत्म हो गई थी। बाद में कुलदीप व छोटे भाई अतुल को पीड़ित किशोरी के पिता की हत्या के मुकदमे में तीनमार्च 2020 को दस साल की सजा हुई थी। जमानत पर चल रहे लोग खुले आम धमका रहेछह साल से दिल्ली की तिहाड़ जेल में सलाखों के पीछे रह रहे कुलदीप को न्यायालय ने 15 लाख के निजी मुचलके कई शर्तों के साथ सजा कोनिलंबित किया है। हालांकि कुलदीप ने सजा के खिलाफ अपील की है। इसकी सूचना मिलते ही परिवार और कुछ समर्थक मंगलवार की दोपहर हीदिल्ली पहुंच गए। कुलदीप सेंगर की मौसी सरोज सिंह ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि मेरे बेटे को न्यायालय ने राहत दी है इसके लिए न्यायालयऔर ईश्वर का आभार जताया है। बताया कि मेरे बेटे को साजिशन फंसाया गया था। वह इस तरह का गलत काम नहीं कर सकते जिसमें उन्हें सजा हुई।वह भी गांव की बेटी को वह बेटी की तरह मानते थे। मौसी का कहना है कि कुलदीप चार बार विधायक रहे हैं। राजनीतिक प्रतिद्वंदिता में बड़ी साजिशरचकर उन्हें फंसाया गया। न्यायालय और ईश्वर पर पूरा विश्वास है। पीड़िता की बहन ने आरोप लगाया कि कुलदीप सेंगर ने मेरे बड़े पापा को फिर पिताको मरवाया इसके बहन के साथ गलत काम किया। इसके बाद भतीजी (दुष्कर्म पीड़िता) के लिए न्याय की लड़ाई लड़ने वाले चाचा को झूठे केस मेंफंसाकर जेल भिजवाया। बहन ने बताया कि अभी कुलदीप जेल से बाहर नहीं आए इससे पहले ही उनके लोग धमकियां देने लगे हैं अब खतरा मंडरारहा है। पिता की हत्या में पहले से जमानत पर चल रहे लोग खुले आम धमका रहे हैं।

सोने की चोरी से बड़ा अपराध, सबरीमाला मामले पर केरल सरकार पर BJP का हमला

केरल भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने मंगलवार को सबरीमाला मंदिर में कथित अनियमितताओं को लेकर राज्य सरकार पर हमला बोला है। उन्होंनेइसे अपवित्रता का एक गंभीर कृत्य करार देते हुए कहा कि यह सोने की चोरी से कहीं अधिक है। उन्होंने मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की मांग की है। राजीव चंद्रशेखर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में लिखा, ‘एक अयप्पा भक्त के तौर पर, इन घटनाओं सेउन्हें गहरा दुख और पीड़ा हुई है’। उन्होंने दावा किया कि नई जांच से पता चलता है कि भगवान अयप्पा मंदिर में लूटपाट सिर्फ रिपोर्ट किए गए 4.5 किलो सोने तक सीमित नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया, ‘जांच से अब पता चलता है कि एलडीएफ के नियुक्त देवस्वोम बोर्ड के तहत सबरीमाला सेचार पंचधातु की मूर्तियां निकालकर अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क को बेच दी गईं।’ भाजपा नेता के मुताबिक, 2015 में यूडीएफ शासन के दौरानबदली गई पवित्र ‘पठिनट्टम पड़ी’ (18 सीढ़ियों) के कुछ हिस्सों के साथ भी बाद में छेड़छाड़ की गई और उन्हें लूट लिया गया। इन खुलासों को बेहदपरेशान करने वाला बताते हुए चंद्रशेखर ने कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ और सीपीआई(एम) के नेतृत्व वाले एलडीएफ दोनों को शामिल करते हुएएक बड़ी राजनीतिक साजिश का आरोप लगाया।उन्होंने कहा, ‘जैसा कि मैंने पहले कहा, कुछ लोगों को गिरफ्तार करना काफी नहीं है। यह एक बड़ीराजनीतिक साजिश है – जो कांग्रेस-यूडीएफ के तहत शुरू हुई और सीपीएम-एलडीएफ के तहत पूरी हुई।’ चंद्रशेखर ने कहा कि ये भगवान अयप्पा औरदुनिया भर के लाखों भक्तों के साथ विश्वासघात है। अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क शामिलनेता ने जोर देकर कहा कि सच्चाई का पता लगाने के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) पर्याप्त नहीं होगा और उन्होंने सीबीआई जांच की अपनीमांग दोहराया। इसके साथ ही भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन पर इस मुद्दे को मामूली गलती बताकर कम आंकने की कोशिशकरने का भी आरोप लगाया, और कहा कि पार्टी अयप्पा भक्तों को न्याय दिलाने के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेगी। अपने बयान को “स्वामीये शरणमअयप्पा” के नारे के साथ खत्म करते हुए चंद्रशेखर ने कहा कि भाजपा तब तक पीछे नहीं हटेगी जब तक सच्चाई पूरी तरह सामने नहीं आ जाती। बतादें कि सबरीमाला भगवान अयप्पा मंदिर कुछ समय से सोने के गायब होने को लेकर एक बड़े राजनीतिक विवाद का केंद्र बना हुआ है। मामले में एकस्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम सोने के गायब होने और संबंधित शिकायतों की जांच कर रही है, और इस संबंध में त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (टीडीबी) के दोअध्यक्षों सहित कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है। अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क शामिलहाल ही में, एसआईटी ने एक विजिलेंस कोर्ट को बताया कि स्मार्ट क्रिएशन्स के पंकज भंडारी और बल्लारी के ज्वेलर गोवर्धन रोडम ने सबरीमालामंदिर की कलाकृतियों से सोना चुराने की साजिश में मुख्य भूमिका निभाई थी। एसआईटी ने पिछले हफ्ते भंडारी और रोडम दोनों को गिरफ्तार कियाथा। केरल भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने सबरीमाला मंदिर में कथित अनियमितताओं को लेकर राज्य सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने इसेअपवित्रता का गंभीर कृत्य बताया और सीबीआई जांच की मांग की है। चंद्रशेखर ने दावा किया कि मंदिर से सोना चोरी और मूर्तियों की तस्करी मेंअंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क शामिल है।