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बीएमसी चुनाव से पहले उद्धव-राज का तीखा हमला, ‘यह लोकतंत्र नहीं, झुंडशाही है’

मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनावों से पहले महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) अध्यक्ष राज ठाकरे ने संयुक्त प्रेस वार्ता कर सत्ताधारी गठबंधन और चुनावी प्रक्रिया पर तीखा हमला बोला। इस दौरान दोनों नेताओं ने जल्द ही अपना संयुक्त चुनावी घोषणा पत्र जारी करने की घोषणा भी की। उद्धव ठाकरे ने कहा अब यह लोकतंत्र नहीं रहा, यह झुंडशाही बन चुका है। पहले वोट चोरी होती थी, अब उम्मीदवार ही चुरा लिए जा रहे हैं। अगर हम रंगे हाथों भी पकड़ लें, तब भी कोई कार्रवाई नहीं होती। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि वे खुद को पौराणिक उपलब्धियों से जोड़ते हैं, लेकिन वर्षों पहले समुद्र में पूजा करने के बावजूद छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा आज तक सामने नहीं आई। उद्धव ठाकरे ने चुनाव आयोग को खुली चुनौती देते हुए कहा कि सभी रिटर्निंग अधिकारियों के कॉल रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाएं, ताकि सच सामने आ सके। मतदाताओं से वोट का अधिकार छीना गयाउद्धव ठाकरे ने विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति का खुलेआम उम्मीदवारों और मतदाताओं को धमकाना बेहद चौंकाने वाला है। उन्होंने कहा कि राहुल नार्वेकर को तुरंत निलंबित किया जाना चाहिए और उनके खिलाफ मामला दर्ज होना चाहिए।उद्धव ने आरोप लगाया कि विधानसभा अध्यक्ष विधानसभा के बाहर अधिकारियों को नेताओं की सुरक्षा हटाने का निर्देश नहीं दे सकते। उन्होंने कहा कि निर्विरोध उम्मीदवारों को जिताकर मतदाताओं से वोट का अधिकार छीना गया है और ऐसे सभी स्थानों पर उपचुनाव होने चाहिए। लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेतमनसे प्रमुख राज ठाकरे ने कहा कि भाजपा ने पश्चिम बंगाल में निर्विरोध चुने गए उम्मीदवारों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, लेकिन अब महाराष्ट्र में वही पार्टी इस पर चुप क्यों है। राज ठाकरे ने चेतावनी देते हुए कहा कोई भी सत्ता स्थायी नहीं होती। जो सोचते हैं कि वे कभी सत्ता से बाहर नहीं होंगे, उन्हें फिर से सोचना चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि महाराष्ट्र को उत्तर प्रदेश और बिहार की राह पर ले जाया जा रहा है, जबकि महाराष्ट्र ने हमेशा देश को दिशा दिखाई है। राज ठाकरे ने कहा कि राजनीति में आने वाले लोग अब विचारधाराएं बदलने लगे हैं, जो लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है।

वाराणसी में नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप का शुभारंभ, पीएम मोदी ने वर्चुअल रूप से किया उद्घाटन

वाराणसी के सिगरा स्थित डॉ. संपूर्णानंद स्पोर्ट्स स्टेडियम में रविवार को मुख्यमंत्री योगी की मौजूदगी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप का वर्चुअल रूप से उद्घाटन किया।दोपहर 12 बजे आयोजन में जब पीएम नरेंद्र मोदी वर्चुअल रूप से जुड़े तो पूरा स्टेडियम हर-हर महादेव के नारे से गूंज उठा। वहीं, पीएम मोदी ने नमः पार्वती पतये हर-हर महादेव के जयघोष के साथ स्टेडियम में मौजूद खिलाड़ियों, उनके कोच और कार्यकर्ताओं का अभिवादन किया। पीएम नरेंद्र मोदी ने वर्चुअल रूप से खिलाड़ियों को संबोधित किया। उन्होंने वॉलीबॉल खिलाड़ियों से कहा कि एक कहावत है कि बनारस के जानल चाहत हउआ त बनारस आवे के पड़ी… अब आप सभी बनारस आ गए हैं तो यहां की संस्कृति को भी समझ जाएंगे। अन्य नेता मौजूद रहेआप सभी को यहां उत्साह बढ़ाने वाले दर्शक मिलेंगे। वॉलीबॉल हमें टीम फर्स्ट का संदेश देती है, सभी प्लेयर्स अपनी टीम के लिए खेलते हैं। यह खेल हमें सिखाता है कि कोई भी जीत हमारे अकेले की नहीं होती है। टीम की जीत से सभी जीतते हैं। हमारे देश में भी (इंडिया फर्स्ट) की भावना है। सुबह 11:00 बजे तक सिगरा स्टेडियम में वॉलीबाल खिलाड़ियों के साथ भाजपा नेता और कार्यकर्ता जुट गए थे। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ मंच पर शहर उत्तरी विधायक रवींद्र जायसवाल, कैंट विधायक सौरभ श्रीवास्तव, शहर दक्षिणी विधायक डा. नीलकंठ तिवारी, विधायक टी. राम जिलाध्यक्ष व एमएलसी हंसराज विश्वकर्मा समेत अन्य नेता मौजूद रहे। सके बाद वंदे मातरम… गीत गया गयाइससे पहले, सीएम योगी के आगमन और वर्चुअल रूप से पीएम मोदी को देखने के लिए आतुर भाजपा कार्यकर्ता मोदी-योगी जल्दी आवा व हर हर महादेव के नारे लगा रहे थे। 11:22 बजे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जब सिगरा स्टेडियम पहुंचे तो कार्यकर्ताओं ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। काशी में पहली बार इस तरह के वॉलीबॉल प्रतियोगिता का आयोजन हो रहा है। 72वीं सीनियर नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप में देश भर से 58 टीमें भाग ले रही हैं। आयोजन के लिए स्टेडियम को रंग-बिरंगे फ्लैग, चैंपियनशिप के बैनर और होर्डिंग से सजाया गया है। 11:15 बजे तक स्टेडियम खिलाड़ियों से भर गया था। सीएम योगी ने मंच से पीएम मोदी का आभार कर अपना संबोधन शुरू किया। इससे पहले सीएम योगी का मंच पर डिप्टी सीएम बृजेश पाठक और महापौर अशोक तिवारी ने अंग वस्त्र और स्मृति चिन्ह देकर स्वागत किया। इसके बाद वंदे मातरम… गीत गया गया।

विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस नेताओं को केसी वेणुगोपाल की नसीहत, ‘उम्मीदवारी पर खुद घोषणा न करें’

इस साल केरल, असम, पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में इससे पहले अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) महासचिव केसी वेणुगोपाल ने रविवार (04 जनवरी) को पार्टी नेताओं को बड़ी नसीहत दी है। पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि कांग्रेस नेताओं को आने वाले विधानसभा चुनाव में अपनी उम्मीदवारी के बारे में खुद घोषणा करने से बचना चाहिए। दरअसल, केसी वेणुगोपाल वायनाड के सुल्तान बाथेरी में विधानसभा चुनावों की तैयारियों के तहत आयोजित दो दिवसीय नेतृत्व शिविर ‘लक्ष्य 2026’ के उद्घाटन सत्र में बोल रहे थे। जहां उन्होंने कहा, ‘हमें उम्मीदवारी के बारे में खुद घोषणा नहीं करनी चाहिए। हमें पार्टी के घोषित फैसले का इंतजार करना चाहिए।’ प्रभावी ढंग से मुकाबला कर सकतीउन्होंने कहा कि नेताओं को पार्टी नेतृत्व के साथ चर्चा करने की आजादी है। साथ ही कहा, ‘आप नेतृत्व के सामने अपनी मांगें रख सकते हैं और ऐसे सभी अवसरों का इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन उम्मीदवारी से संबंधित चर्चाएं सार्वजनिक मंचों पर सीमित होनी चाहिए।’ ‘लक्ष्य 2026’ के उद्घाटन सत्र के दौरान वेणुगोपाल ने कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ के लिए सीपीआई (एम) और भाजपा दोनों ही आम प्रतिद्वंद्वी हैं। हालांकि, हाल के स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजों से पता चला है कि कांग्रेस दोनों पार्टियों का प्रभावी ढंग से मुकाबला कर सकती है। विनम्रता से अपनी राजनीतिक गतिविधियों को मजबूत करनाउन्होंने कहा, ‘जीत ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को यह भरोसा दिलाया है कि अगर सीपीआई (एम) और भाजपा एक साथ भी आ जाएं, तो भी हम उनका सामना कर सकते हैं।’ उन्होंने कहा कि स्थानीय निकाय चुनाव की जीत से कांग्रेस नेताओं को और विनम्र होना चाहिए। उन्होंने आगे कहा, ‘जनता लोकतंत्र के मालिक हैं। हमें अगले चार महीनों में जनता के सामने विनम्रता से अपनी राजनीतिक गतिविधियों को मजबूत करना चाहिए।’ वेणुगोपाल ने कहा कि स्थानीय निकाय चुनाव के नतीजों के बाद मुख्यमंत्री पिनराई विजयन का लगातार तीसरी बार सत्ता में आने का भरोसा कमजोर हुआ है। उन्होंने कहा, ‘लेकिन पिनराई चुप नहीं बैठेंगे। पर्दे के पीछे बातचीत चल रही है।’ उन्होंने आरोप लगाया कि सीपीआई (एम) और भाजपा के बीच एक गुप्त गठबंधन है, जो उनके दावे के अनुसार हाल के महीनों में साफ हो गया है।

तटरक्षक बल को मिलेगी बड़ी ताकत, स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण पोत ‘समुद्र प्रताप’ 5 जनवरी को होगा कमीशन

भारतीय तटरक्षक बल की ताकत में जल्द ही बड़ा इजाफा होने जा रहा है। अधिकारियों ने रविवार को जानकारी दी कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 5 जनवरी को तटरक्षक बल के पहले स्वदेशी रूप से तैयार प्रदूषण नियंत्रण पोत ‘समुद्र प्रताप’ को बेड़े में शामिल करेंगे। इस 114.5 मीटर लंबे विशाल पोत के निर्माण में 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग हुआ है। 4,200 टन वजनी इस जहाज की गति 22 समुद्री मील से अधिक है और यह बिना रुके 6,000 समुद्री मील तक का सफर तय करने में सक्षम है। यह पोत समुद्री प्रदूषण नियमों को लागू करने, समुद्री कानूनों के पालन, खोज और बचाव कार्यों तथा भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाएगा। आर्थिक क्षेत्र की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगागोवा शिपयार्ड लिमिटेड ने दिसंबर में औपचारिक रूप से इसे तटरक्षक बल को सौंपा था। तटरक्षक बल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में बताया कि यह दो प्रदूषण नियंत्रण पोतों में से पहला है। उन्होंने जहाज का एक वीडियो भी साझा किया, जिसे इसे आईजीसी का सबसे बड़ा और उन्नत पोत बताया गया है। तटरक्षक बल के अनुसार, यह पोत तेल के रिसाव की जांच करने वाली मशीनों और रासायनिक डिटेक्टरों से लैस है। इसमें 30 मिमी की सीआरएन-91 तोप, एकीकृत अग्नि नियंत्रण प्रणाली वाली दो रिमोट-संचालित बंदूकें, स्वदेशी एकीकृत ब्रिज प्रणाली और स्वचालित बिजली प्रबंधन प्रणाली जैसी अत्याधुनिक तकनीक मौजूद है। साथ ही, इसमें आग बुझाने की उच्च क्षमता वाली बाहरी प्रणाली भी लगी है। अधिकारियों का कहना है कि इस जहाज के शामिल होने से भारत की समुद्री प्रदूषण से निपटने की क्षमता बढ़ेगी और रक्षा निर्माण में आत्मनिर्भरता की दिशा में देश मजबूत होगा। भारतीय तटरक्षक बल का पहला स्वदेशी रूप से निर्मित प्रदूषण नियंत्रण पोत ‘समुद्र प्रताप’ 5 जनवरी को कमीशन किया जाएगा। गोवा शिपयार्ड में निर्मित यह उन्नत जहाज समुद्री प्रदूषण से निपटने, खोज और बचाव कार्यों तथा विशेष आर्थिक क्षेत्र की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

सवा सौ साल बाद लौटे भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष, PM मोदी ने कहा– भारत की विरासत लौटी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को भगवान बुद्ध से जुड़े पवित्र पिपरहवा अवशेषों की भव्य अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। इस अवसर पर अपने संबोधन में उन्होंने कहा, सवा सौ साल के इंतजार के बाद भारत की विरासत लौटी है, भारत की धरोहर लौटी है। आज से भारतीय जनमानस, भगवान बुद्ध के इन पवित्र अवशेषों के दर्शन कर पाएगा, भगवान बुद्ध के आशीर्वाद ले पाएगा। मैं इस शुभ अवसर पर यहां मौजूद सभी अतिथियों का स्वागत और अभिनंदन करता हूं। उन्होंने आगे कहा, 2026 के शुरुआत में ही यह शुभ उत्सव बहुत प्रेरणादायी है और मेरे लिए सौभाग्य की बात है कि 2026 का ये मेरा पहला सार्वजनिक कार्यक्रम है, जो भगवान बुद्ध की चरणों से शुरू हो रहा है। मेरी कामना है कि भगवान बुद्ध के आशीर्वाद से 2026 दुनिया के लिए शांति, समृद्धि और सद्भाव का नया दौर लेकर आए। जिस स्थान पर यह प्रदर्शनी लगी है वो भी अपने-आप में विशेष है। किला राय पिथौरा का यह स्थान भारत के गौरवशाली इतिहास की यशभूमि है। अवशेष को अपने बीच पाकर हम सभी धन्यउन्होंने कहा, भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष को अपने बीच पाकर हम सभी धन्य हैं। इनका भारत से बाहर जाना और लौटकर फिर भारत आना… ये दोनों ही पड़ाव अपने-आप में बहुत बड़ा सबक है। सबक ये है कि गुलामी कोई राजनीतिक और आर्थिक नहीं होती, गुलामी हमारी विरासत को भी तबाह कर देती है। भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष के साथ भी यही हुआ। गुलामी के कालखंड में इन्हें भारत से छीना गया। तब से करीब सवा सौ साल तक ये देश से बाहर ही रहे हैं। इसलिए उन्होंने इन पवित्र अवशेषों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नीलाम करने का प्रयास किया। भारत के लिए तो भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष… हमारे आराध्य का ही एक अंश है, हमारी सभ्यता का अभिन्न अंग है। प्रधानमंत्री ने कहा, भगवान बुद्ध सबके हैं… सबको जोड़ते हैं। मैं खुद को बहुत भाग्यशाली समझता हूं, क्योंकि भगवान बुद्ध का मेरे जीवन में बहुत ही गहरा स्थान रहा है। मेरा जन्म जिस वडनगर में हुआ, वो बौद्ध शिक्षा का बहुत बड़ा केंद्र था। जिस भूमि पर भगवान बुद्ध ने प्रथम उपदेश दिए, वो सारनाथ आज मेरी कर्मभूमि है। भारत केवल भगवान बुद्ध के पावन अवशेषों का संरक्षक नहीं है, बल्कि उनकी परंपरा का जीवंत वाहक भी है। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध से जुड़े अवशेष बुद्ध के संदेश की जीवित उपस्थिति है।

उत्तराखंड में परिवार रजिस्टर की गहन जांच, फर्जी प्रविष्टियों पर सख्त कार्रवाई का ऐलान

प्रदेश में परिवार रजिस्टर में सामने आ रही गंभीर अनियमितताओं को देखते हुए धामी सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। उच्च स्तरीय बैठक में सीएम धामी ने प्रदेशव्यापी जांच के निर्देश दिए हैं। प्रदेश के सभी जिलों में उपलब्ध परिवार/कुटुंब रजिस्टरों की प्रतियां तत्काल संबंधित जिलाधिकारी के पास सुरक्षित रखे जाने के लिए कहा गया, जिससे अभिलेखों में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ की संभावना न हो। साथ ही, परिवार रजिस्टरों की गहन जांच सीडीओ/ एडीएम स्तर पर कराए जाने का निर्णय लिया गया। सीएम धामी की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह भी तय किया गया कि जांच का दायरा वर्ष 2003 से अब तक रखा जाएगा, ताकि पूर्व वर्षों में हुई संभावित अनियमितताओं की भी पहचान हो सके। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नाम दर्ज कराने वालों के विरुद्ध नियमानुसार विभागीय व कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। अंतर्गत संचालित होतीसीएम धामी ने परिवार रजिस्टर का पंजीकरण एवं प्रतिलिपि सेवाएं पंचायत राज (कुटुंब रजिस्टरों का अनुरक्षण) नियमावली, 1970 के अंतर्गत संचालित होती हैं। नियमों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करने वाले प्रत्येक परिवार का नाम परिवार/कुटुंब रजिस्टर में दर्ज होना अनिवार्य है। वर्तमान प्रविष्टियों के शुद्धिकरण तथा नए नामों को जोड़ने की प्रक्रिया का प्रावधान भी नियमावली में निहित है, जिसे अब और अधिक सख़्त व पारदर्शी बनाए जाने की तैयारी है।उन्होंने स्पष्ट किया कि परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज करने का अधिकार सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) को प्राप्त है, जबकि अपील का अधिकार उप जिलाधिकारी के पास निहित है। वर्तमान में परिवार रजिस्टर से संबंधित सेवाएं अपणी सरकार पोर्टल के माध्यम से भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। बैठक में यह तथ्य भी सामने आया कि बीते वर्षों में राज्य की सीमा से लगे मैदानी जनपदों के ग्रामीण क्षेत्रों में अनधिकृत बसावट के आधार पर परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज होने से जनसांख्यिकीय संतुलन प्रभावित होने की आशंका रही है। इसी पृष्ठभूमि में सरकार द्वारा परिवार रजिस्टर से संबंधित नियमावली में आवश्यक संशोधन की आवश्यकता महसूस की गई है। पंचायती राज विभाग द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में परिवार रजिस्टर से जुड़ी सेवाओं के लिए प्रदेशभर में बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए. निरस्त आवेदनों की संख्या फर्जीएक अप्रैल से 31 दिसंबर 2025 के बीच नए परिवार जोड़ने के लिए 2,66,294 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 2,60,337 आवेदन स्वीकृत तथा 5,429 आवेदन नियमों के उल्लंघन एवं अपूर्ण दस्तावेजों के कारण निरस्त किए गए। विशेषज्ञों के अनुसार निरस्त आवेदनों की संख्या फर्जी प्रविष्टियों की आशंका की ओर संकेत करती है, जिसके दृष्टिगत प्रक्रिया को और अधिक सुदृढ़ करने का निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सीमावर्ती जिलों सहित प्रदेश के सभी जिलों में समान रूप से जांच की जाए, ताकि किसी भी क्षेत्र में भेदभाव या ढिलाई न हो। भविष्य में परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज किए जाने की प्रक्रिया को स्पष्ट नीति के अंतर्गत नियंत्रित कर कैबिनेट में प्रस्तुत किए जाने का भी निर्णय लिया गया। मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि सरकारी अभिलेखों से खिलवाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

बांग्लादेश: शरियतपुर में हिंदू व्यापारी खोकन दास को पेट्रोल डालकर जलाया, इलाज के दौरान मौत

बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा की एक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। शरियतपुर जिले के बाजार में मेडिकल स्टोर चलाने वाले हिंदू व्यापारी खोकन चंद्र दास की शनिवार सुबह ढाका के नेशनल बर्न इंस्टीट्यूट में इलाज के दौरान मौत हो गई। नए साल की पूर्व संध्या पर हमलावरों ने उन पर पेट्रोल डालकर जिंदा जला दिया था। डॉक्टरों के मुताबिक, खोकन दास के शरीर का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा झुलस गया था। उनके चेहरे और श्वसन तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचा था। अस्पताल के प्रोफेसर डॉ. शौन बिन रहमान ने बताया कि सुबह करीब 7:20 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। केउरभांगा बाजार के पास हुईस्थानीय अखबार प्रथम आलो के अनुसार, यह घटना 31 दिसंबर की रात करीब 9:30 बजे दामुदिया उपजिला के कोनेश्वर यूनियन स्थित केउरभांगा बाजार के पास हुई। दुकान बंद कर घर लौट रहे खोकन दास को रास्ते में बदमाशों ने रोका, धारदार हथियारों से हमला किया और फिर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। आग से बचने की कोशिश में खोकन दास पास के तालाब में कूद गए। उनकी चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे, जिसके बाद हमलावर फरार हो गए। गंभीर हालत में उन्हें पहले शरियतपुर सदर अस्पताल और फिर ढाका रेफर किया गया था। फूट-फूटकर रोती नजर आईंखोकन दास की पत्नी सीमा दास, गोद में छोटे बच्चे को लिए फूट-फूटकर रोती नजर आईं। उन्होंने कहा मेरे पति रोज की तरह दुकान बंद कर घर लौट रहे थे। उन्होंने कहा कि उनके पति ने दो हमलावरों को पहचान लिया था, इसी वजह से बदमाशों ने उनकी हत्या की नीयत से पेट्रोल डालकर आग लगा दी। उन्होंने कहा कि परिवार की किसी से दुश्मनी नहीं है और किसी तरह का कोई विवाद भी नहीं था, फिर भी इस तरह का हमला क्यों हुआ, यह समझ से बाहर है। परिवार ने मामले की निष्पक्ष जांच और सभी आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी की मांग की है। खोकन दास के रिश्तेदार प्रांतो दास ने कहा कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए। दामुदिया थाने के प्रभारी मोहम्मद रबिउल हक के अनुसार, पुलिस ने दो आरोपियों रब्बी और सोहाग की पहचान कर ली है। दोनों स्थानीय निवासी हैं और उनकी गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। अन्य संभावित आरोपियों की भी तलाश जारी है।

पढ़ाई पर फोकस: पंजाब सरकार ने 3,000 स्पेशल एजुकेटरों की नियुक्ति की घोषणा, सभी स्कूलों में प्रधानाचार्य होंगे और शिक्षकों को केवल पढ़ाई से जुड़े काम दिए जाएंगे

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पिछली सरकारें अपने चहेतों का ही ख्याल रखती थीं और नौकरियां में उन्हीं को तरजीह दी जाती थीं। मौजूदा सरकार ने स्पेशल एजुकेटर के लिए अलग कैडर बनाया है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में अमीर वही माना जाएगा, जिसके बच्चे पढ़े-लिखे होंगे ना कि जिसके पास शोरूम हों या बैंक में पैसा होगा। केवल पढ़ाई से जुड़ा कामसीएम मान ने कहा कि शिक्षकों को केवल पढ़ाई से जुड़ा काम ही देने की बात कही और गैर-शैक्षणिक कार्यों पर सख्ती करने की बात कही है। उन्होंने बताया कि आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार ने पहले 26–27 प्रतिशत तक शिक्षा बजट रखा था। पंजाब के आने वाले बजट में भी शिक्षा के लिए विशेष प्रावधान किए जाएंगे। शिक्षा सचिव अनिंदिता मित्रा ने जानकारी दी कि शिक्षा स्तर ऊंचा उठाने के लिए 350 करोड़ रुपये के वर्ल्ड बैंक प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली है। इसके साथ ही एक साल के भीतर 3,000 स्पेशल एजुकेटर की नियुक्ति की जाएगी. शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि राज्य के 28 लाख विद्यार्थियों में से करीब 4 लाख बच्चे पहले जमीन पर बैठते थे, लेकिन अब सभी स्कूलों में बाद बदलाव किया गया है।99.9 प्रतिशत स्कूल परिसरों की बाउंड्री कवर कर दी गई है। स्पेशल एजुकेटर की पदोन्नति की जा रही है, ताकि नए पद बहाल हो सकें। उन्होंने दावा किया कि 100 प्रतिशत स्कूलों में प्रिंसिपल की नियुक्ति होगी। बैंस ने यह भी कहा कि केंद्र द्वारा 10 हजार करोड़ रुपये रोके जाने के बावजूद ग्रामीण विकास कार्य जारी हैं और सड़कों का निर्माण कराया जा रहा है।

इंदौर में पानी नहीं, जहर बंटा” 15 मौतों पर राहुल गांधी का तीखा हमला, PM की चुप्पी पर सवाल

मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी की वजह से हुई 15 मौतों के मामले में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने निशाना साधा। राहुल गांधी ने एक्स पर साझा पोस्ट में कहा, ‘इंदौर में पानी नहीं, जहर बंटा और प्रशासन कुंभकर्णी नींद में रहा। घर-घर मातम है, गरीब बेबस हैं – और ऊपर से BJP नेताओं के अहंकारी बयान। जिनके घरों में चूल्हा बुझा है, उन्हें सांत्वना चाहिए थी; सरकार ने घमंड परोस दिया। लोगों ने बार-बार गंदे, बदबूदार पानी की शिकायत की – फिर भी सुनवाई क्यों नहीं हुई? राहुल गांधी ने सवाल उठाते हुए कहा, ‘सीवर पीने के पानी में कैसे मिला? समय रहते सप्लाई बंद क्यों नहीं हुई? जिम्मेदार अफसरों और नेताओं पर कार्रवाई कब होगी? ये ‘फोकट’ सवाल नहीं – ये जवाबदेही की मांग है। साफ पानी एहसान नहीं, जीवन का अधिकार है और इस अधिकार की हत्या के लिए BJP का डबल इंजन, उसका लापरवाह प्रशासन और संवेदनहीन नेतृत्व पूरी तरह ज़िम्मेदार है। मध्यप्रदेश अब कुप्रशासन का एपिसेंटर बन चुका है – कहीं खांसी की सिरप से मौतें, कहीं सरकारी अस्पताल में बच्चों की जान लेने वाले चूहे, और अब सीवर मिला पानी पीकर मौतें। और जब-जब गरीब मरते हैं, मोदी जी हमेशा की तरह खामोश रहते हैं।’ इस पूरे मामले पर प्रधानमंत्री की चुप्पी पर भी सवाल उठाएकांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों के मुद्दे पर भाजपा सरकार को घेरा। सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में खरगे ने लिखा, ‘जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत अभियान का ढिंढोरा पीटने वाली प्रधानमंत्री मोदी हमेशा की तरह इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों को लेकर मौन हैं।’ खरगे ने लिखा, ‘इंदौर के पास सबसे साफ शहर का खिताब है, लेकिन भाजपा के निकम्मेपन के चलते लोग साफ पानी के मोहताज हैं।’ खरगे ने बिफरते हुए लिखा, ‘देश 11 साल से खोखले दावे और डबन इंजन की डींगे सुन रहा है। जब मंत्री जी से सवाल पूछा जाता है तो वे गाली गलौज पर उतर आते हैं। उल्टा पत्रकार पर हावी हो जाते हैं। जल जीवन मिशन समेत हर योजना में भ्रष्टाचार और धांधली है। मोदी सरकार देश को न साफ पानी मुहैया करा पा रही है और न ही स्वच्छ हवा। आम जनता भुगत रही है।’ राहुल गांधी ने इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के मुद्दे पर भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने एमपी की सरकार पर संवेदनहीन होने का आरोप लगाया और साथ ही इस पूरे मामले पर प्रधानमंत्री की चुप्पी पर भी सवाल उठाए।