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चुनावी बंगाल में कांग्रेस की बड़ी तैयारी, 17 जनवरी को दिल्ली में अहम रणनीतिक बैठक

चुनावी राज्य पश्चिम बंगाल में चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी है। टीएमसी और भाजपा के बाद अब कांग्रेस ने भी अपनी रणनीति को धार देना शुरू कर दिया है। इसके लिए कांग्रेस ने बड़ी तैयारी शुरू कर दी है। बंगाल को लेकर कांग्रेस 17 जनवरी को दिल्ली में अहम बैठक करने जा रही है, जिसमें कांग्रेस के बड़े नेता बंगाल के नेताओं के साथ विधानसभा चुनाव की रणनीति को अंतिम रूप देने का काम करेंगे। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस के बड़े नेता आगामी विधानसभा चुनावों के लिए चुनाव की तैयारियों और रणनीति पर चर्चा करने के लिए 17 जनवरी को दिल्ली में पश्चिम बंगाल के पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक करेंगे। बताया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल के लिए पार्टी की स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक भी 18 जनवरी को कोलकाता में होगी। खबरों के मुताबिक राज्य राजनीतिक कार्रवाई समिति के सदस्यों और चुनाव समिति के सदस्यों के साथ-साथ राज्य के लिए पार्टी के वरिष्ठ पर्यवेक्षकों की अन्य बैठकें भी 18 जनवरी को कोलकाता में होंगी। TMC और कांग्रेस जैसी पार्टियों ने कड़ी आलोचना कीसूत्रों ने बताया कि 17 जनवरी की बैठक के दौरान चुनावों के लिए पार्टी की रणनीति पर चर्चा होने और उसे अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है। कांग्रेस को यह भी तय करना है कि वह चुनावों के लिए किनके साथ गठबंधन करेगी। कांग्रेस ने सुदीप रॉय बर्मन, शकील अहमद खान और प्रकाश जोशी को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए वरिष्ठ पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, एआईसीसी महासचिव संगठन प्रभारी केसी वेणुगोपाल, AICC महासचिव पश्चिम बंगाल प्रभारी गुलाम अहमद मीर और पश्चिम बंगाल कांग्रेस कमेटी के प्रमुख शुभंकर सरकार सहित अन्य लोगों के 17 जनवरी की बैठक में भाग लेने की उम्मीद है। ये बैठकें पश्चिम बंगाल में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन पर विवाद के बीच हो रही हैं, जिसकी TMC और कांग्रेस जैसी पार्टियों ने कड़ी आलोचना की है। चुनावी राज्य पश्चिम बंगाल की रणनीति को धार देने के लिए कांग्रेस ने बड़ी तैयारी शुरू कर दी है। बंगाल को लेकर कांग्रेस 17 जनवरी को दिल्ली में अहम बैठक करने जा रही है, जिसमें कई मुद्दों पर मंथन किया जाएगा।

भारत–जर्मनी दोस्ती का संदेश, चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने साबरमती में दी गांधी को श्रद्धांजलि

जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज अपनी पहली भारत यात्रा पर सोमवार को गुजरात के अहमदाबाद पहुंचे। जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चांसलर मर्ज ने सुबह साबरमती आश्रम जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान मर्ज ने कहा कि महात्मा गांधी की विरासत भारतीयों और जर्मनों को दोस्त के रूप में जोड़ती है और आज की दुनिया को गांधीजी की शिक्षाओं की पहले से कहीं ज्यादा जरूरत है। बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी आश्रम में पहले ही पहुंच गए थे, जहां उन्होंने मर्ज का स्वागत किया। दोनों नेताओं ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर फूल चढ़ाए और इसके बाद ‘हृदय कुंज’ का दौरा किया। हृदय कुंज वह कमरा है जहां स्वतंत्रता आंदोलन के समय गांधीजी अपनी पत्नी कस्तूरबा गांधी के साथ रहते थे। आश्रम में चांसलर मर्ज ने चरखे पर खादी का सूत कातने की प्रक्रिया भी देखी। गांधीजी ने आजादी के आंदोलन के दौरान खादी और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए चरखे को प्रतीक बनाया था। महिला कारीगरों से बातचीत कीइसके साथ ही जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने साबरमती आश्रम की आगंतुका पुस्तिका में एक संदेश भी लिखा। मर्ज ने लिखा कि महात्मा गांधी का स्वतंत्रता और हर व्यक्ति की गरिमा में अटूट विश्वास आज भी हमें प्रेरित करता है। यह विरासत भारतीयों और जर्मनों को मित्र के रूप में जोड़ती है, खासकर ऐसे समय में जब दुनिया को गांधीजी की शिक्षाओं की सबसे ज्यादा जरूरत है। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी और चांसलर मर्ज साबरमती रिवरफ्रंट पहुंचे। यहां प्रधानमंत्री मोदी ने अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव-2026 का उद्घाटन किया। दोनों नेताओं ने महिला कारीगरों से बातचीत की और पतंग बनाने की प्रक्रिया को समझा। इसके बाद उन्होंने खुले वाहन में मैदान का चक्कर लगाया और खुद भी पतंग उड़ाया। यह महोत्सव 14 जनवरी तक चलेगागुजरात सरकार के अनुसार, इस साल के अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव में 50 देशों से 135 पतंगबाज और भारत से करीब 1,000 पतंग प्रेमी भाग ले रहे हैं। महोत्सव के तहत ये पतंगबाज पिछले दो दिनों में राजकोट, सूरत, धोलावीरा (कच्छ) और स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (नर्मदा) जैसे स्थानों पर भी जा चुके हैं और लोगों का मनोरंजन किया है। अहमदाबाद में यह महोत्सव 14 जनवरी तक चलेगा। जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज पहली भारत यात्रा पर अहमदाबाद पहुंचे। जहां पीएम मोदी के साथ उन्होंने साबरमती आश्रम में महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान मर्ज ने कहा कि गांधी की शिक्षाएं आज की दुनिया के लिए बेहद जरूरी हैं और उनकी विरासत भारत-जर्मनी को मित्रता के सूत्र में बांधती है।

वोटर लिस्ट विवाद पर ममता बनर्जी का EC पर बड़ा हमला, लिखा पांचवां पत्र

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर एक बार फिर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा, ‘आयोग अपने ही 20 वर्षों के वैधानिक सुधारों की अनदेखी कर रहा है, जिससे मतदाताओं को अपनी पहचान दोबारा स्थापित करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।’ बता दें कि मुख्यमंत्री ने इससे पहले भी एक अन्य पत्र में निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के समक्ष कई गंभीर मुद्दे उठाए थे। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को सोमवार को एक और पत्र लिखा है। यह उनका पांचवां पत्र है। इसमें उन्होंने वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (एसआईआर) प्रक्रिया में हो रही गड़बड़ियों पर चिंता जताई है। संविधान की भावना के खिलाफ बतायाममता बनर्जी का दावा है कि 2002 की वोटर लिस्ट को डिजिटल बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल किया गया, जिससे गंभीर गलतियां हुई हैं। उनका कहना है कि इन तकनीकी खामियों की वजह से असली वोटरों को गलत तरीके से ‘विसंगति’ वाली श्रेणी में डाल दिया गया है। इससे आम लोगों को भारी परेशानी हो रही है।मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया कि वह अपनी ही पुरानी प्रक्रियाओं की अनदेखी कर रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले दो दशकों में जो सुधार हुए थे, उन्हें दरकिनार कर वोटरों को फिर से अपनी पहचान साबित करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने इसे मनमाना और संविधान की भावना के खिलाफ बताया। सुधारों की अनदेखी करने के आरोप लगाएबनर्जी ने यह भी कहा कि एसआईआर के दौरान जमा किए गए दस्तावेजों की कोई रसीद नहीं दी जा रही है। उन्होंने सुनवाई प्रक्रिया को पूरी तरह मशीनी और संवेदनहीन बताया। उनका कहना है कि यह प्रक्रिया मानवीय संवेदनाओं से खाली है और लोकतंत्र की नींव को कमजोर कर रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त को नया पत्र लिखा है। उन्होंने निर्वाचन आयोग पर सुधारों की अनदेखी करने के आरोप लगाए हैं। सीएम ममता ने कहा कि आयोग के रूख के कारण मतदाताओं को अपनी पहचान दोबारा सिद्ध करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

कर्नाटक कांग्रेस में सत्ता संग्राम तेज, खड़गे बोले ज़रूरत पड़ी तो सिद्धारमैया-शिवकुमार दिल्ली बुलाए जाएंगे

कर्नाटक में सत्ताधारी कांग्रेस के अंदर चल रही सत्ता की खींचतान लगातार जारी है। इसी बीच कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का बयान सामने आाया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार को जरूरत पड़ने पर बातचीत के लिए दिल्ली बुलाया जाएगा। 20 नवंबर सत्ताधारी पार्टी के अंदर नेतृत्व की खींचतान जारी है। यह विवाद कांग्रेस सरकार ने अपने पांच साल के कार्यकाल का आधा समय पूरा करने के बाद बढ़ गया। इसके बाद से लगातार मुख्यमंत्री बदलने की अटकलें लगाई जा रही हैं। 2023 में सरकार बनने के समय सिद्धारमैया और शिवकुमार दोनों को आधे कार्यकाल में मुख्यमंत्री बनाने के लिए कहा गया था। मुख्यमंत्री पद को लेकर जंग हो रहीसिद्धारमैया, हाल ही में देवरराज उर्स का रिकॉर्ड तोड़कर राज्य के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेता बने हैं। उन्होंने दावा किया है कि वह पूरे पांच साल का कार्यकाल पूरा करेंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा है कि अंतिम फैसला कांग्रेस आलाकमान का होगा। उपमुख्यमंत्री और कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष शिवकुमार ने रविवार को कहा कि उनकी कड़ी मेहनत उन्हें राजनीति में यहां तक लाई है और उन्हें अपने बारे में कांग्रेस पार्टी के भविष्य के फैसले पर भरोसा है। कर्नाटक में सत्ताधारी कांग्रेस में लगातार खींचतान जारी है। सिद्धारमैया और शिवकुमार में मुख्यमंत्री पद को लेकर जंग हो रही है। इसी बीच मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर दोनों को दिल्ली बुलाया जाएगा।

बजट 2026 से पहले कांग्रेस का वार, जयराम रमेश ने गिनाईं अर्थव्यवस्था की तीन बड़ी चुनौतियां

केंद्र सरकार का आम बजट 2026 अगले महीने फरवरी में पेश किया जाएगा। इससे पहले कांग्रेस ने उम्मीद जताई कि आने वाला केंद्रीय बजट में सुस्त प्राइवेट कॉर्पोरेट निवेश और आय में असमानताओं की चुनौतियों से निपटने के लिए सार्थक कदम उठाए जाएंगे। कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने कहा कि घरेलू बचत दरें काफी कम हो गई हैं, और धन, आय व उपभोग में असमानताएं लगातार बढ़ रही हैं। जयराम रमेश ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह देखना बाकी है कि आने वाला केंद्रीय बजट सांख्यिकीय भ्रम के आराम से दायर से बाहर निकलकर वास्तविकताओं और चुनौतियों को स्वीकार करता है, और उनसे निपटने के लिए सार्थक कदम उठाता है या नहीं। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि संसद के आने वाले सत्र का कार्यक्रम घोषित कर दिया गया है। 2026-27 का बजट अब से 20 दिन बाद पेश किया जाएगा। असमानताएं लगातार गहराती जा रहीअपने एक्स पोस्ट में जयराम रमेश ने कहा, ‘संसद के आगामी सत्र का कार्यक्रम घोषित कर दिया गया है। वित्त वर्ष 2026/27 का बजट अब से बीस दिन बाद पेश किया जाएगा। यह बजट निस्संदेह 16वें वित्त आयोग की सिफ़ारिशों को प्रतिबिंबित करेगा, जिसने 17 नवंबर 2025 को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। ये सिफारिशें 2026/27 से 2031/32 की अवधि को कवर करती हैं और केंद्र व राज्यों के बीच कर राजस्व के बँटवारे तथा राज्यों के बीच इन राजस्व के वितरण से संबंधित हैं।’ उन्होंने आगे कहा कि मनरेगा को बुलडोजर से खत्म करने वाले नए कानून में लागू किए गए 60:40 लागत को साझा करने के फॉर्मूले से पहले ही बेहद चिंतित राज्य सरकारें अब निश्चित रूप से और भी अधिक आशंका में उंगलियाँ क्रॉस किए बैठी होंगी। अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों का सामना कर रही है। इनमें तीन सबसे प्रमुख हैं। पहला, टैक्स में कटौती और अच्छे मुनाफ़े के बावजूद निजी कॉरपोरेट निवेश की दरें अब भी स्पष्ट रूप से सुस्त बनी हुई हैं। दूसरा, घरेलू बचत दरों में काफ़ी गिरावट आई है, जिससे निवेश की क्षमता सीमित हुई है। तीसरा, संपत्ति, आय और उपभोग से जुड़ी असमानताएं लगातार गहराती जा रही हैं। बजट में उनपर ध्यान केंद्रित किया जाएगाकांग्रेस नेता ने कहा कि अब देखना यह है कि आने वाला बजट सांख्यिकीय भ्रमों के अपने आरामदेह दायरे से बाहर निकलकर इन वास्तविकताओं और चुनौतियों को स्वीकार करता है या नहीं, और उनसे निपटने के लिए कोई सार्थक कदम उठाता है या नहीं। रोजगार सृजन के बड़े पैमाने पर विस्तार के लिए अत्यंत आवश्यक उच्च जीडीपी वृद्धि दरें भी तब तक टिकाऊ नहीं हो सकतीं, जब तक ये कदम अभी नहीं उठाए जाते। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने केंद्रीय बजट 2026 से पहले देश की अर्थव्यवस्था को लेकर चुनौतियां गिनाई। उन्होंने इसके तीन प्रमुख कारण भी बताए। साथ ही उम्मीद जताई कि इस बजट में उनपर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

नगर निगम चुनाव से पहले बीजेपी का दावा, पश्चिमी महाराष्ट्र की सभी सीटों पर महायुति का कब्जा बरकरार

महाराष्ट्र नगर निगम चुनावों से पहले राज्य मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने भरोसा जताया है कि बीजेपी के नेतृत्व वाला महायुति गठबंधन आगामी नगर निगम चुनावों में पश्चिमी महाराष्ट्र की सभी पांचों सीटों पर अपना कब्जा बरकरार रखेगा। रविवार को एक इंटरव्यू में वरिष्ठ बीजेपी नेता ने दावा किया कि महायुति (बीजेपी, एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजीत पवार की एनसीपी) राज्य के सभी 29 नगर निगमों में अपना मेयर बनाएगी। इन जगहों पर 15 जनवरी को चुनाव होने हैं। उन्होंने मुंबई में विपक्ष की तरफ से उठाए गए क्षेत्रीय और भाषाई मुद्दों को बेअसर बताया। उन्होंने दावा किया कि मराठी और गैर-मराठी दोनों वोटर गठबंधन का समर्थन कर रहे हैं। पाटिल पुणे, पिंपरी-चिंचवड़, कोल्हापुर, सांगली और इचलकरंजी में चुनाव तैयारियों की देखरेख कर रहे हैं। 2017 के चुनावों के बाद यहां बीजेपी सत्ता में आई थी। 65 सीटों में से बीजेपी 55 सीटें जीतेगीबीजेपी नेता ने कहा कि उनके अंदरूनी सर्वे से पता चलता है कि इन निकायों में उन्हें अच्छी बढ़त हासिल है। 165 सदस्यों वाले पुणे नगर निगम में बीजेपी मजबूत स्थिति में है। उन्होंने कहा, “हमें 115 से ज्यादा सीटें जीतने का भरोसा है।” यह अनुमान प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण की वार्ड-स्तर की समीक्षा पर आधारित है। पाटिल ने दावा किया कि चव्हाण के सुझावों पर अमल करने के बाद 10 और सीटें बढ़ सकती हैं। पुणे में बीजेपी लगभग अकेले चुनाव लड़ रही है, बस कुछ सीटें गठबंधन सहयोगी रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (ए) के साथ साझा की गई हैं। सीट बंटवारे पर सहमति न बनने के कारण शिवसेना के साथ गठबंधन नहीं हो पाया। पाटिल ने कहा कि पिंपरी-चिंचवड़ में बीजेपी को 128 में से 80 सीटें जीतने की उम्मीद है। जबकि स्थानीय नेताओं का मानना है कि यह आंकड़ा 85 तक जा सकता है। उन्होंने बताया कि कोल्हापुर में बीजेपी, शिवसेना और एनसीपी मिलकर लड़ रहे हैं। पाटिल ने इसे ‘परफेक्ट गठबंधन’ बताया। उन्होंने कहा कि 81 में से महायुति को करीब 65 सीटें मिलेंगी और मेयर उन्हीं का होगा। वहीं, इचलकरंजी नगर निकाय की 65 सीटों में से बीजेपी 55 सीटें जीतेगी। विपक्ष अभी भी बिखरा हुआसांगली में, उन्होंने एनसीपी (एसपी) नेता जयंत पाटिल, कांग्रेस विधायक विश्वजीत कदम, पूर्व बीजेपी सांसद और एनसीपी नेता संजय काका पाटिल और मौजूदा सांसद विशाल पाटिल जैसे कुछ विपक्षी राजनीतिक दिग्गजों की मौजूदगी के बावजूद, पाटिल ने कहा बीजेपी के नेतृत्व वाला गठबंधन अपने पिछले प्रदर्शन में सुधार करने की अच्छी स्थिति में है। उन्होंने कहा पार्टी को 78 में से कम से कम 45 सीटें जीतने का भरोसा है। इसमें आरपीआई की सीटें भी शामिल हैं जो बीजेपी के चुनाव चिन्ह पर लड़ रही है। उन्होंने यह भी साफ किया कि सांगली में शिवसेना गठबंधन का हिस्सा नहीं है। इसके साथ ही बीजेपी नेता ने सोलापुर में अंदरूनी कलह की बातों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि मतभेदों के बावजूद कोई भी नेता पार्टी के खिलाफ काम नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष अभी भी बिखरा हुआ है, जबकि जिले में बीजेपी की ताकत बढ़ी है।

“RSS बदल नहीं रहा, समय के साथ सामने आ रहा है” संघ प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार (11 जनवरी) को कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) बदल नहीं रहा है, बल्कि समय के साथ धीरे-धीरे विकसित हो रहा है और बस सामने आ रहा है। मोहन भागवत दिल्ली स्थित संगठन के कार्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। जहां आने वाली फिल्म ‘शतक’ के गाने के एल्बम को लॉन्च किया गया। यह फिल्म आरएसएस के 100 साल के सफर की कहानी बताती है। आरएसएस प्रमुख भागवत ने अपने संबोधन में कहा, ‘संगठन (RSS) अपनी शताब्दी मना रहा है। लेकिन जैसे-जैसे संगठन विकसित होता है और नए रूप लेता है, लोग इसे बदलते हुए देखते हैं। हालांकि यह असल में बदल नहीं रहा है बस धीरे-धीरे सामने आ रहा है।’ बता दें कि इस मौके पर सिंगर सुखविंदर सिंह, डायरेक्टर आशीष मल्ल, को-प्रोड्यूसर आशीष तिवारी और आरएसएस पदाधिकारी भैयाजी जोशी मौजूद रहे। राष्ट्र की सेवा के लिए समर्पित कर दियाउन्होंने आगे कहा, ‘जैसे एक बीज से अंकुर निकलता है और फलों और फूलों से लदा हुआ परिपक्व पेड़ का एक अलग रूप होता है, ये दोनों रूप अलग-अलग हैं। फिर भी पेड़ मूल रूप से उसी बीज जैसा है, जिससे वह उगा है।” भागवत ने कहा कि आरएसएस के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार एक ‘जन्मजात देशभक्त’ थे और उन्होंने बचपन में ही अपना जीवन राष्ट्र की सेवा के लिए समर्पित कर दिया था। बड़े झटकों को भी सहने की क्षमताउन्होंने कहा, ‘संघ और डॉक्टर साहब (हेडगेवार) पर्यायवाची शब्द हैं। वो जब सिर्फ 11 साल के थे, जब उनके माता-पिता का प्लेग से निधन हो गया था, लेकिन उन्हें उस उम्र में या बाद में भी, बात करने या भरोसा करने वाला कोई नहीं मिला। मोहन भागवत ने कहा कि जब इतनी कम उम्र में इतना बड़ा सदमा लगता है, तो इंसान अकेला हो जाता है और उसके स्वभाव और व्यक्तित्व पर बुरा असर पड़ने का खतरा रहता है, लेकिन हेडगेवार के साथ ऐसा नहीं हुआ।’ उन्होंने आगे कहा, ‘उनके व्यक्तित्व में बड़े से बड़े झटकों को भी सहने की क्षमता थी, बिना अपने विश्वास या स्वभाव को थोड़ा भी डगमगाने दिए – यह बेहतरीन मानसिक स्वास्थ्य, एक मजबूत और स्वस्थ दिमाग की निशानी है, जो उनमें शुरू से ही था।’ उन्होंने आगे कहा कि मुझे लगता है कि डॉक्टर साहब की साइकोलॉजी भी अध्ययन और रिसर्च का विषय हो सकती है।

BMC चुनाव से पहले महायुति का बड़ा ऐलान, महिलाओं को BEST बस में 50% छूट, मुंबई को बांग्लादेशियों से मुक्त करने का वादा

मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनावों से पहले रविवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े के साथ मिलकर बीएमसी चुनावों के लिए महायुति का संयुक्त घोषणा पत्र जारी किया। महायुति गठबंधन ने अपने व्यापक घोषणापत्र में BEST बसों में महिलाओं के लिए किराए में 50 प्रतिशत की छूट और शहर को बांग्लादेशी प्रवासियों से ‘मुक्त’ करने का वादा किया है। घोषणापत्र जारी करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि हम 5 साल बाद जनता के सामने अपना रिपोर्ट कार्ड पेश करेंगे और दिखाएंगे कि हमने क्या हासिल किया है। हम मराठियों को मुंबई छोड़ने नहीं देंगे; हम उन्हें यहीं घर देंगे। कुछ लोग सिर्फ मराठियों के घरों की बातें करते हैं, लेकिन महायुति करके दिखाती है। हम डेवलपर्स नियुक्त करेंगे, और अगर वे काम नहीं करते हैं, तो MHADA (महायुति प्रशासन) काम अपने हाथ में ले लेगा। हम झुग्गीवासियों, फुटपाथ पर रहने वालों और बीएमसी के सफाई कर्मचारियों को घर देंगे। देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “हम मुंबई को बांग्लादेशियों से मुक्त कराएंगे। हमने अब तक सबसे अधिक बांग्लादेशियों को निर्वासित किया है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की मदद से हम 100% बांग्लादेशियों की पहचान करके उन्हें निर्वासित करेंगे। एआई टूल 6 महीने में तैयार हो जाएगा। हम अवैध बांग्लादेशियों की पहचान करके उन्हें निर्वासित करेंगे। फडणवीस ने आगे कहा कि बीएमसी स्कूलों को कौशल-उन्मुख बनाएंगे और मराठी भाषा सीखने के लिए प्रयोगशालाएं स्थापित करेंगे। स्वास्थ्य विभाग ने शानदार काम किया है इसे और बेहतर बनाते रहेंगे। हम 2060 की आबादी के लिए पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करेंगे और नदियों में सीवेज को रोकेंगे। नदियों को साफ करने और मुंबई को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए प्रतिष्ठित परियोजनाओं पर 16,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। उन्होंने आगे कहा कि मेट्रो, वाटर टैक्सी और सतत परिवहन पर काम करेंगे। सभी यात्रा जरूरतों के लिए एक मुंबई ऐप। हम सड़कों पर भीड़ कम करेंगे, एक्सप्रेसवे बनाएंगे और मुंबई को एक बेहतर शहर बनाएंगे। सड़कों को गड्ढों से मुक्त किया जाएगा। बसों में महिलाओं के लिए 50 फीसदी की छूट और बहनों के लिए 1 लाख रुपये का ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। हम सुरक्षित शहर के लिए एआई का उपयोग करेंगे, वर्षा जल प्रबंधन करेंगे और मुंबई को स्मार्ट बनाएंगे। सीएम ने दावा किया कि बीएमसी में बदलाव लाएंगे और मुंबई की सभी महिलाओं के लिए काम करेंगे। घोषणापत्र में परिवहन और महिलाओं की सुरक्षा पर प्रमुखता से जोर दिया गया है। फडणवीस ने कहा कि गठबंधन का लक्ष्य बृहन्मुंबई इलेक्ट्रिक सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट (BEST) बेड़े को लगभग 5,000 से बढ़ाकर 10,000 बसें करना, इलेक्ट्रिक वाहनों पर स्विच करना और महिला यात्रियों के लिए किराए में 50 प्रतिशत की छूट देना है। फडणवीस ने कहा कि हम मुंबई को बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं से मुक्त करेंगे। IIT की मदद से हम बांग्लादेशी प्रवासियों की पहचान करने के लिए एक AI टूल विकसित करेंगे।

सोमनाथ से पीएम मोदी का संदेश आक्रांताओं के नाम मिट गए, लेकिन आस्था और स्वाभिमान अमर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर पहुंचकर न केवल पूजा-अर्चना की, बल्कि देश के इतिहास, आस्था और आत्मसम्मान से जुड़ा एक सशक्त संदेश भी दिया। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अवसर पर पीएम मोदी ने कहा कि सोमनाथ को तोड़ने वाले आक्रांता आज इतिहास के पन्नों में सिमट गए हैं, लेकिन दुर्भाग्य से देश में आज भी ऐसी ताकतें मौजूद हैं, जो मंदिरों के पुनर्निर्माण का विरोध करती रही हैं। पीएम मोदी ने देशभर से जुड़े श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा आज देश के कोने-कोने से लाखों लोग हमारे साथ जुड़े हैं। ये समय अद्भुत है, ये वातावरण अद्भुत है। एक ओर महादेव, दूसरी ओर समुद्र की लहरें, मंत्रों की गूंज और भक्तों की उपस्थिति यह सब इस अवसर को दिव्य बना रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि वे इसे अपना सौभाग्य मानते हैं कि उन्हें सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में इस ऐतिहासिक पर्व में सेवा का अवसर मिला। आक्रांता आते रहेपीएम मोदी ने कहा कि जब वे आज यहां खड़े होकर बोल रहे हैं, तो उनके मन में यह सवाल बार-बार आता है कि 1000 साल पहले इसी स्थान पर कैसा माहौल रहा होगा। उन्होंने कहा हमारे पुरखों ने अपनी आस्था और महादेव के लिए सब कुछ न्योछावर कर दिया। आक्रांताओं को लगा कि वे जीत गए, लेकिन 1000 साल बाद भी सोमनाथ की ध्वजा पूरी दुनिया को भारत की शक्ति का संदेश दे रही है। प्रधानमंत्री ने साफ कहा कि सोमनाथ का इतिहास विनाश का नहीं, बल्कि विजय और पुनर्निर्माण का इतिहास है। उन्होंने कहा कि आक्रांता आते रहे, लेकिन हर युग में सोमनाथ फिर से खड़ा हुआ इतना धैर्य, संघर्ष और पुनर्निर्माण का उदाहरण दुनिया के इतिहास में दुर्लभ है। भारत के खिलाफ साजिशें की जा रहीपीएम मोदी ने कहा कि जो लोग अपने धर्म के प्रति सच्चे होते हैं, वे कभी कट्टरपंथी सोच का समर्थन नहीं करते। लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि तुष्टीकरण की राजनीति करने वालों ने हमेशा ऐसी सोच के आगे घुटने टेके। उन्होंने कहा कि जब आजादी के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया, तब भी उन्हें रोकने की कोशिश की गई। यहां तक कि 1951 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के मंदिर आने पर भी आपत्तियां जताई गई थीं। पीएम मोदी ने चेतावनी दी कि आज तलवारों की जगह नए और गुप्त तरीकों से भारत के खिलाफ साजिशें की जा रही हैं। ऐसे में देश को सतर्क, मजबूत और एकजुट रहने की जरूरत है।

मनरेगा पर राजनीति कर रही कांग्रेस, चिराग पासवान बोले भ्रष्टाचार पर प्रहार से घबराया विपक्ष

लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने सोमवार को पटना में आयोजित प्रेस वार्ता में विपक्ष पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि विपक्ष, खासकर कांग्रेस, ने जनता को झूठ बोलकर डराने की परंपरा शुरू की है। जो योजनाएं आम लोगों के हित में हैं, उन्हें नुकसानदेह बताकर भ्रम फैलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने 15 दिनों तक बेवजह हंगामा किया, लेकिन अगर वास्तव में कोई गड़बड़ी होती तो बिहार की जनता सड़कों पर उतरकर विरोध करती, जो नहीं हुआ। स्वरोजगार से जोड़ना एक सकारात्मक कदमराष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि विपक्ष भ्रम फैला रहा है। उन्होंने मनरेगा को लेकर कांग्रेस पर राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में मनरेगा सिर्फ भ्रष्टाचार का अड्डा बनकर रह गया है और गरीब मजदूरों को उनका वाजिब हक नहीं मिला। अब जब केंद्र सरकार इस भ्रष्टाचार पर प्रहार कर रही है, तो कांग्रेस बेचैन हो रही है। उन्होंने कहा कि योजना के ढांचे में बदलाव से गरीब मजदूरों को फायदा मिलेगा। 125 दिन का रोजगार देना, मॉनिटरिंग शुरू करना और महिलाओं को आर्थिक मदद देना गलत कैसे हो सकता है? महिलाओं को पहले 10 हजार और फिर 1.90 लाख रुपये देकर स्वरोजगार से जोड़ना एक सकारात्मक कदम है, लेकिन इस पर भी विपक्ष सवाल उठा रहा है। चुनाव में जाने से पहले सभी जिम्मेदारियों को पूरा किया जाएगाचिराग पासवान ने कहा कि कांग्रेस भावनात्मक मुद्दे उठाकर लोगों को गुमराह कर रही है। महात्मा गांधी के नाम को लेकर बेवजह विवाद खड़ा किया जा रहा है, जबकि समय-समय पर योजनाओं के स्वरूप में बदलाव होते रहे हैं। उन्होंने कहा कि राम नाम से इन्हें आपत्ति क्यों है, यह किसी से छिपा नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि बांग्लादेश में धर्म के आधार पर अत्याचार हो रहा है, लेकिन इस पर विपक्ष चुप्पी साधे हुए है। आगामी चुनावों को लेकर चिराग पासवान ने कहा कि पहले असम और फिर बंगाल में एनडीए अपनी जीत सुनिश्चित करेगा। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार की योजनाओं का ही असर है कि गठबंधन लगातार मजबूत हो रहा है। उन्होंने बताया कि पार्टी संगठन में भी बदलाव किए जाएंगे और विधायकों की भूमिका को लेकर चर्चा होगी। आने वाले पांच साल को उन्होंने स्वर्णिम काल बताया और कहा कि चुनाव में जाने से पहले सभी जिम्मेदारियों को पूरा किया जाएगा।