“हिजाब पहनी बेटी बनेगी प्रधानमंत्री” बयान पर सियासी घमासान, ओवैसी का हिमंत बिस्वा सरमा पर तीखा हमला

महाराष्ट्र निकाय चुनाव प्रचार में व्यस्त ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी का हिजाब पहने बेटी का एक दिन देश का प्रधानमंत्री बनने वाले बयान पर सियासत शुरू हो चुकी है। ओवैसी ने अब रविवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर तीखा हमला बोला है। ओवैसी का यह बयान असम सीएम की टिप्पण के बाद आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत एक हिंदू राष्ट्र होने के नाते एक हिंदू व्यक्ति को ही देश का प्रधानमंत्री बनते हुए देखेगा। रविवार को नागपुर में ओवैसी ने असम सीएम पर करारा तंज कसते हुए कहा कि उनके दिमाग में ‘ट्यूबलाइट’ है। उन्होंने संविधान की कसम खाई है। संविधान में यह कहां लिखा है? पाकिस्तान के संविधान में लिखा है कि सिर्फ एक समुदाय का व्यक्ति ही उस देश का प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति बन सकता है। हमारे देश में बाबासाहेब अंबेडकर ने संविधान दिया है। वे हिमंत बिस्वा सरमा से अधिक बुद्धिमान और पढ़े-लिखे थे। दुर्भाग्य से जो लोग संविधान और उसकी भावना को नहीं समझते कि यह देश सिर्फ एक समुदाय का नहीं है। उनकी (असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की) सोच छोटी है, इसलिए वे ऐसी छोटी-छोटी बातें करते हैं। हिजाब पहनी हुई बेटी इस देश की प्रधानमंत्री बनेगीदरअसल, शनिवार को गुवाहाटी में ओवैसी के बयान पर असम सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा था कि संवैधानिक रूप से कोई रोक नहीं है। कोई भी प्रधानमंत्री बन सकता है। लेकिन भारत एक हिंदू राष्ट्र है, हिंदू सभ्यता है, और हम हमेशा यह मानेंगे और हमें पूरा भरोसा है कि भारत का प्रधानमंत्री हमेशा एक हिंदू व्यक्ति ही होगा।ओवैसी ने शुक्रवार, 09 जनवरी को महाराष्ट्र के सोलापुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि एक दिन ऐसा आएगा, जब हिजाब पहनी बेटी इस देश की प्रधानमंत्री बनेगी। अपने बयान में असदुद्दीन ओवैसी ने कहा था कि पाकिस्तान का संविधान साफ तौर पर कहता है कि सिर्फ एक धर्म का व्यक्ति ही देश का प्रधानमंत्री बन सकता है। लेकिन बाबा साहेब का संविधान कहता है कि भारत का कोई भी नागरिक प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मेयर बन सकता है। मेरा सपना है कि एक दिन ऐसा आएगा, जब हिजाब पहनी हुई बेटी इस देश की प्रधानमंत्री बनेगी। हामिद अंसारी को उपराष्ट्रपति बनाया गयाइधर, रायपुर में छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने असदुद्दीन ओवैसी के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि ओवैसी के मन के भाव बार-बार प्रकट होते हैं कि वे किस प्रकार की राजनीति करते हैं, किस प्रकार वे धर्म के आधार पर बात करते हैं। वास्तविकता यह है कि ओवैसी के पास इस तरह से भावनात्मक और सांप्रदायिक राजनीति करने के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचा है। ओवैसी के बयान पर जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है। अब्दुल कलाम को राष्ट्रपति बनाया गया। हामिद अंसारी को उपराष्ट्रपति बनाया गया। उन्हें और क्या चाहिए?…वह दिवास्वप्न देख रहे हैं। अगर भारत में कोई महिला प्रधानमंत्री बनेगी, तो वह साड़ी पहनकर ही बनेगी।
गुवाहाटी हाईकोर्ट के नए कॉम्प्लेक्स के विरोध पर CJI सूर्यकांत सख्त, बोले निजी हित विकास में बाधा नहीं बन सकते

गुवाहाटी हाईकोर्ट के नए कोर्ट कॉम्प्लेक्स को लेकर चल रहे विरोध को देखते हुए अब सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सीजेआई सूर्यकांत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उन्होंने कहा कि जो लोग इस नए कोर्ट परिसर का विरोध कर रहे हैं, वे पूरी जानकारी के बिना विरोध कर रहे हैं। सीजेआई ने गुवाहाटी हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के विरोध का जिक्र करते हुए कहा कि व्यक्तिगत हित या सुविधा किसी भी तरह से न्यायिक ढांचे के विकास में बाधा बनने का कारण नहीं हो सकते। दरअसल, गुवाहाटी हाईकोर्ट के लिए एक नया कोर्ट कॉम्प्लेक्स बनाए जाने की योजना है। इसे लेकर बार एसोसिएशन के कुछ वकील विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे उन्हें असुविधा हो सकती है। न्यायिक ढांचे के विकास में रुकावट नहीं बन सकतेमुख्य न्यायाधीश ने साफ शब्दों में कहा कि कोर्ट और न्याय व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए आधुनिक और बेहतर बुनियादी ढांचे की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि केवल निजी सुविधा या व्यक्तिगत कारणों के आधार पर विकास कार्यों का विरोध सही नहीं है। सीजेआई ने कहा कि ऐसे विरोध से न्याय व्यवस्था के सुधार में रुकावट आती है। इस दौरान सीजेआई ने यह भी कहा कि नए कोर्ट कॉम्प्लेक्स से न्यायिक कामकाज ज्यादा सुचारु और प्रभावी होगा, जिससे आम लोगों को भी फायदा मिलेगा।गुवाहाटी हाईकोर्ट के नए कोर्ट कॉम्प्लेक्स के विरोध पर सीजेआई सूर्यकांत ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि विरोध करने वाले पूरी जानकारी के बिना ऐसा कर रहे हैं। सीजेआई ने स्पष्ट किया कि निजी सुविधा या व्यक्तिगत हित न्यायिक ढांचे के विकास में रुकावट नहीं बन सकते।
पुणे में पूर्व प्रशिक्षु IAS पूजा खेडकर के घर लूट का दावा, घरेलू सहायिका पर नशीला पदार्थ देकर बेहोश करने का आरोप

महाराष्ट्र के पुणे में पुलिस ने पूर्व प्रशिक्षु आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर एक बार फिर से सुर्खियों में हैं। पूजा खेडकर का आरोप है कि उनके परिवार की घरेलू सहायिका ने उन्हें और उनके माता-पिता को नशीला पदार्थ देकर बेहोश कर दिया और इसके बाद घर में चोरी की वारदात को अंजाम दिया। पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पूजा खेडकर ने शनिवार देर रात बानेर रोड स्थित अपने परिवार के बंगले पर हुई इस कथित घटना की जानकारी दी थी। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की प्राथमिक जांच शुरू कर दी है। पुलिस की ओर से साझा की गई जानकारी के मुताबिक, उन्होंने दावा किया कि हाल ही में काम पर रखी गई नेपाल की निवासी घरेलू सहायिका ने उन्हें और उनके माता-पिता (मनोरमा एवं दिलीप खेडकर) को नशीली दवाएं देकर बेहोश कर दिया तथा उन्हें बांधकर उनके मोबाइल फोन और कुछ कीमती सामान लेकर फरार हो गई। एक चौंकाने वाली घटना सामने आईपूजा खेडकर ने दावा किया कि वह किसी तरह खुद को मुक्त कर पाईं और दूसरे फोन का इस्तेमाल करके पुलिस को सूचित किया। अधिकारी ने बताया कि खेडकर ने टेलीफोन पर घटना की सूचना दी, लेकिन अब तक कोई लिखित शिकायत दर्ज नहीं करवाई है और न ही चोरी हुए अन्य सामान के बारे में विवरण दिया है। मामले की जांच शुरू कर दी गई है। खेडकर दंपति के खिलाफ पिछले साल नवी मुंबई में सड़क पर झगड़े के बाद एक ट्रक चालक के अपहरण के सिलसिले में एक मामला दर्ज किया गया था। पूजा खेडकर पर 2022 की यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में आरक्षण का लाभ लेने के लिए आवेदन में तथ्यों को छुपाने का आरोप है, लेकिन उन्होंने अपने खिलाफ सभी आरोपों का खंडन किया है। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी हासिल करने के आरोपों के चलते बर्खास्त की गईं आईएएश अधिकारी पूजा खेडकर के मामले में अब एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। उन्होंने अपने घर में लूट की जाने की बात कही है।
केरल दौरे पर अमित शाह का भाजपा का बड़ा संदेश, “कमल निशान की सरकार और मुख्यमंत्री लाना हमारा अंतिम लक्ष्य”

केरल दौरे पर पहुंचे केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने पिनरई विजयन सरकार को जमकर घेरा। तिरुवनंतपुरम में एक सभा को संबोधित करते हुए अमित शाह नगर निगम में भाजपा की जीत पर बात करते हुए कहा, ‘विजय हमारा लक्ष्य नहीं है, बल्कि लक्ष्य तक पहुंचने का एक पड़ाव है। हमारा अंतिम लक्ष्य है, कमल निशान की केरल में सरकार बनाना और भाजपा का मुख्यमंत्री लाना है। इसी के साथ शाह ने केरल सरकार को सबरीमाला मंदिर में सोना चोरी मामले पर भी घेरा। शाह ने अपने बयान में कहा कि जो मंदिर का सोना नहीं बचा पाए, वो धर्म क्या बचाएंगे। इसी के साथ उन्होंने सीबीआई जांच की मांग भी की। शाह ने आगे कहा कि हमारा लक्ष्य है केरल को पूर्ण विकसित बनाना, केरल को देशविरोधी ताकतों से सुरक्षित करना और केरल में जो सदियों से आस्था की ताकत है, उसकी भी रक्षा करना है। शाह ने दावे के साथ कहा कि केरल के लोग भी मानते हैं कि यूडीएफ और एलडीएफ काम नहीं कर सकते हैं, सिर्फ नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए ही यह काम कर सकती है। विनम्रता और एक साफ विजन के साथ जाया जाएअमित शाह ने अपने बयान में कहा कि नरेंद्र मोदी ने 2047 तक इस देश को एक विकसित भारत बनाने का सपना देखा है। मैं आज यहां केरल के लोगों को यह बताने आया हूं कि विकसित भारत का रास्ता विकसित केरल से होकर जाता है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि मैं केरल के लोगों से अपील करने के लिए इस कार्यकर्ता सम्मेलन में आया हूं। केरल के भविष्य का रास्ता, चाहे वह विकास हो, सुरक्षा हो, या हमारी मान्यताओं की रक्षा हो, LDF या UDF के जरिए हासिल नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि कम्युनिस्ट पार्टियां पूरी दुनिया से गायब हो गई हैं, और कांग्रेस पार्टी पूरे देश में खत्म हो रही है। अब केरल के विकास का रास्ता सिर्फ नरेंद्र मोदी के एनडीए के साथ है। जरूरत इस बात की है कि केरल के लोगों के पास विनम्रता और एक साफ विजन के साथ जाया जाए। असम में सहयोगियों के साथ मैदान में उतरेगीकेंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की रणनीति का नेतृत्व करेंगे। इसके लिए उन्होंने इन राज्यों में चुनावी दौरे भी शुरू कर दिए हैं। इन सभी चुनावी राज्यों में शाह की रणनीति बिहार के तर्ज पर कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरने, संगठन को सक्रिय करने और सहयोगी दलों के साथ साझा अभियान और ठोस संयुक्त रणनीति को अमली जामा पहनाने की है। इन राज्यों में भाजपा पश्चिम बंगाल में अपने दम पर चुनाव मैदान में उतरेगी। जबकि तमिलनाडु, केरल और असम में सहयोगियों के साथ मैदान में उतरेगी।
चुनाव आते ही ईडी सक्रिय क्यों? कपिल सिब्बल का केंद्र पर हमला, बोले विपक्ष को डराने का हथियार बनी एजेंसी

पश्चिम बंगाल में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कार्रवाई को लेकर राज्य से लेकर देशभर की राजनीति में गर्माहट तेज है। इसी बीच इस कार्रवाई को लेकर राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि चुनाव आते ही जांच एजेंसियों को अचानक दस्तावेजों की याद आ जाती है और इसका मकसद सिर्फ विपक्षी नेताओं को परेशान करना होता है। पत्रकारों से बातचीत के दौरान सिब्बल ने पश्चिम बंगाल में ईडी की कार्रवाई का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में जहां भाजपा चुनाव नहीं जीत सकती, वहां ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को परेशान करने के लिए ईडी का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि कोई भी जांच एजेंसी किसी दफ्तर में जाकर सभी फाइलें कैसे ले जा सकती है। अगर कोयला घोटाले की जांच करनी है तो उससे जुड़ी फाइलें लें, लेकिन हर फाइल ले जाना किस अधिकार में है? किसी भी जांच एजेंसी को ऐसा करने का हक नहीं है। यूपीए सरकार ने ईडी को इतनी खुली छूट नहीं दीकपिल सिब्बल ने ईडी को एक सर्वव्यापी एजेंसी की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य कानून लागू करना नहीं, बल्कि विपक्षी नेताओं को डराना और परेशान करना है। उन्होंने केंद्र और राज्य के बीच बढ़ते टकराव का जिक्र करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में राज्य और केंद्र के बीच जानबूझकर विवाद पैदा किया जा रहा है। सिब्बल ने आगे कहा कि चुनाव के समय ही ऐसी कार्रवाइयां क्यों तेज हो जाती हैं। कोयला घोटाला कोई नया मामला नहीं है, यह कई वर्षों से चल रहा है। फिर अब ही अचानक कार्रवाई क्यों? राज्यसभा सांसद ने यूपीए सरकार के कार्यकाल (2004 से 2014) को याद करते हुए कहा कि उस समय इस तरह की खबरें अखबारों में नहीं आती थीं। उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार ने ईडी को इतनी खुली छूट नहीं दी थी। उस दौर में किसी भी राजनीतिक पार्टी या नेता के खिलाफ झूठी जानकारी के आधार पर कार्रवाई नहीं की गई। केंद्र सरकार पर निशाना साधासिब्बल ने आरोप लगाते हुए कहा कि आज ईडी एक ऐसी एजेंसी बन गई है जो देश में कहीं भी, कभी भी पहुंच जाती है। उन्होंने कहा कि जब भी कहीं कोई एफआईआर दर्ज होती है, ईडी वहां पहुंच जाती है और खासतौर पर चुनाव के समय उसकी सक्रियता बढ़ जाती है। इससे देश की संघीय व्यवस्था (फेडरल स्ट्रक्चर) को नुकसान पहुंच रहा है। ईडी की कार्रवाई को लेकर जहां एक ओर पश्चिम बंगाल की राजनीति में गर्माहट तेज है। वहीं दूसरी ओर अब राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने ईडी की कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय ही जांच एजेंसियां सक्रिय होती हैं और इसका मकसद विपक्षी नेताओं को परेशान करना है।
मलयालम थोपने के आरोपों पर पिनराई विजयन का जवाब, बोले भाषा विधेयक 2025 पूरी तरह समावेशी

केरल के मलयालम भाषा विधेयक 2025 को लेकर कर्नाटक समेत कई जगहों पर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप यह लग रहा है कि यह कानून दूसरी भाषाओं पर जबरन मलयालम थोपेगा। ऐसे में बढ़ते विवाद को देखते हुए मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इन सभी दावों को खारिज करते हुए इस विधेयक को लेकर जो आशंकाएं जताई जा रही हैं, वे तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि केरल विधानसभा द्वारा पारित यह कानून पूरी तरह समावेशी है और इसमें भाषाई अल्पसंख्यकों के अधिकारों की विशेष सुरक्षा की गई है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कहा कि केरल की प्रगति हमेशा समानता, भाईचारे और समग्र विकास पर आधारित रही है। राज्य सरकार धर्मनिरपेक्षता और बहुलतावाद जैसे संवैधानिक मूल्यों को पूरी मजबूती से बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। मलयालम की परीक्षा देने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगाविजयन ने स्पष्ट किया कि मलयालम भाषा विधेयक में एक साफ और मजबूत प्रावधान (धारा 7) शामिल है, जो भाषाई अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करता है। खासतौर पर कन्नड़ और तमिल भाषी समुदायों के हितों को सुरक्षित रखा गया है। उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी नागरिक पर कोई भाषा थोपने के पक्ष में नहीं है और भाषाई विविधता की रक्षा करना उसकी प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने बताया कि जिन क्षेत्रों को अधिसूचित किया गया है, वहां तमिल और कन्नड़ भाषी लोग सचिवालय, विभागाध्यक्षों और स्थानीय कार्यालयों से अपनी मातृभाषा में पत्राचार कर सकते हैं। इतना ही नहीं, उन्हें जवाब भी उसी भाषा में दिया जाएगा। दूसरी ओर शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर उठाई गई चिंताओं को लेकर खासकर कासरगोड जिले में कन्नड़ माध्यम के स्कूलों को लेकर पिनराई विजयन ने कहा कि जिन छात्रों की मातृभाषा मलयालम नहीं है, वे राष्ट्रीय शिक्षा पाठ्यक्रम के अनुसार स्कूलों में उपलब्ध भाषाओं में से अपनी पसंद की भाषा चुन सकते हैं। उन्होंने साफ किया कि अन्य राज्यों या विदेशी छात्रों को कक्षा 9, 10 या उच्च माध्यमिक स्तर पर मलयालम की परीक्षा देने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। राज्यों में विवाद खड़ा हो गयामुख्यमंत्री ने कहा कि केरल की भाषा नीति पूरी तरह से भारत के संविधान और आधिकारिक भाषा अधिनियम 1963 के अनुरूप है। यह नीति संविधान के अनुच्छेद 346 और 347 का पूरी तरह पालन करती है। उन्होंने कहा कि भारत की विविधता हमारी ताकत है, इसे एक ही ढांचे में जबरन नहीं ढाला जा सकता। इसके साथ ही केरल मॉडल ऑफ गवर्नेंस का जिक्र करते हुए पिनराई विजयन ने कहा कि राज्य की प्रगति भागीदारी और पारदर्शिता पर आधारित रही है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी सरकार संघीय ढांचे के अधिकारों की रक्षा करते हुए हर नागरिक की भाषाई पहचान को सुरक्षित रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मलयालम भाषा विधेयक 2025 को लेकर कर्नाटक समेत कई राज्यों में विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि केरल सरकार दूसरी भाषाओं पर मलयालम थोपना चाहती है। ऐसे में मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने इन दावों को गलत बताते हुए कहा कि विधेयक पूरी तरह समावेशी है।
टी20 विश्व कप टीम में जगह नहीं, फिर भी शुभमन गिल ने न्यूजीलैंड वनडे सीरीज में भारतीय टीम की कमान संभाली

भारतीय टेस्ट और वनडे टीम के कप्तान शुभमन गिल को अगले महीने होने वाले टी20 विश्व कप के लिए भारतीय टीम में जगह नहीं मिली थी। गिल अब न्यूजीलैंड के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज में टीम की कमान संभालेंगे। उन्होंने इससे पहले टी20 विश्व कप टीम में जगह नहीं बना पाने पर चुप्पी तोड़ी। गिल दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टी20 सीरीज तक भारतीय टीम के उपकप्तान थे, लेकिन उन्हें इस वैश्विक टूर्नामेंट के लिए 15 सदस्यीय टीम में शामिल नहीं किया गया था। गिल हालांकि, विश्व कप टीम में चुने जाने से चिंतित नहीं है। गिल ने कहा कि वह चयनकर्ताओं के फैसले का सम्मान करते हैं और जब भी मौका मिलेगा अपनी पूरी क्षमता के साथ योगदान देने की कोशिश करेंगे। गिल ने भारत के लिए 36 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 869 रन बनाए हैं। इस दौरान उनका औसत 28.03 और स्ट्राइक रेट 138.59 का रहा है। भारत टी20 विश्व कप से पहले तीन वनडे और पांच टी20 मुकाबले खेलेगा। विश्व कप की शुरुआत सात फरवरी से होगी। बहुत मेहनत और दृढ़ संकल्प की जरूरत होतीन्यूजीलैंड के खिलाफ तीन मैचों की सीरीज के शुरुआती वनडे से पहले गिल ने कहा, मैं वहीं हूं, जहां मुझे होना है। मेरी तकदीर में जो लिखा है उसे कोई मुझसे नहीं छीन सकता। एक खिलाड़ी हमेशा यह मानता है कि वह देश के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ देगा। चयनकर्ताओं ने अपना निर्णय लिया है। मैं हमेशा वर्तमान में रहने की कोशिश करता हूं, इससे जीवन आसान हो जाता है। मैं टीम को टी20 विश्व कप के लिए शुभमकामनाएं देता हूं। गिल ने कहा, जब हम पिछली बार न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे खेले थे तब मेरा पदार्पण हुआ था और मैं हमेशा उस दिन को संजोकर रखता हूं। किसी भी प्रारूप को आसान नहीं मानना चाहिए। अगर आप देखें, तो भारतीय टीम ने 2011 के बाद कोई वनडे विश्व कप नहीं जीता है। ऐसे में कोई भी प्रारूप आसान नहीं होता और इसके लिए बहुत मेहनत और दृढ़ संकल्प की जरूरत होती है। भारतीय टीम की कमान संभालने के लिए तैयारगिल को पिछले साल नवंबर में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ दूसरे टेस्ट और उसके बाद की वनडे सीरीज छोड़नी पड़ी थी, क्योंकि कोलकाता में पहले टेस्ट के दूसरे दिन लगी गर्दन की चोट के कारण उन्हें दो दिन अस्पताल में रहना पड़ा। भारतीय कप्तान ने कहा, किसी मैच को छोड़कर टीम को खेलते हुए देखना कभी आसान नहीं होता। कप्तान के रूप में बहुत कुछ करना होता है, आपको गति बनानी होती है और उसी पर निर्माण करना होता है। भारत के अनुभवी बल्लेबाज शुभमन गिल न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज में भारतीय टीम की कमान संभालने के लिए तैयार हैं। इससे पहले उन्होंने टी20 विश्व कप के लिए टीम में नहीं चुने जाने पर चुप्पी तोड़ी है।
मीरा-भायंदर नगर निगम चुनाव: भाजपा ने ट्रिपल इंजन सरकार के तहत विकास का घोषणापत्र जारी, नई सड़कें, अस्पताल और 24 घंटे पानी का वादा

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण और विधायक नरेंद्र मेहता ने शुक्रवार को मीरा भायंदर नगर निगम (एमबीएमसी) चुनाव के लिए भाजपा का घोषणापत्र जारी किया। 15 जनवरी को होने वाले इन चुनावों के लिए पार्टी ने ‘मीरा-भायंदर के विकास का संकल्प’ लिया है। इसमें शहर को आधुनिक और सुरक्षित बनाने के लिए एक विस्तृत रोडमैप पेश किया गया है। महायुति के दो सहयोगी भाजपा और शिवसेना नगर निकाय पर नियंत्रण पाने की दौड़ में हैं। घोषणापत्र में ‘ट्रिपल इंजन’ सरकार पर जोर दिया गया है, ताकि केंद्र और राज्य की सत्ता का लाभ स्थानीय विकास में मिल सके। पार्टी ने शहर को गड्ढों से मुक्त करने के लिए 100 से ज्यादा नई कंक्रीट सड़कें बनाने का वादा किया है। इसके अलावा, मेट्रो रेल, दहिसर-भायंदर लिंक रोड और जेसल पार्क-घोड़बंदर कोस्टल रोड को पूरा करने की बात कही गई है, जिससे मुंबई की यात्रा का समय काफी कम हो सके। प्रदूषण मुक्ति जैसे कई लुभावने वादे किए गएपानी की समस्या सुलझाने के लिए सूर्य परियोजना और 75 एमएलडी की नई योजना के जरिए 24 घंटे जलापूर्ति का भरोसा दिलाया गया है। पार्टी ने कहा कि अगर वह नगर निकाय में सत्ता में आती है, तो वह एक नया 300 बेड का सिविल अस्पताल स्थापित करेगी। इसके साथ ही मौजूदा पंडित भीमसेन जोशी अस्पताल का आधुनिकीकरण करेगी और अधिक आयुष्मान भारत कार्ड केंद्र खोलेगी। इसके साथ ही पार्टी ने स्थानीय जरूरतों के अनुसार क्लस्टर विकास नीति लागू करना, झुग्गियों का पुनर्विकास करके आधुनिक शौचालय और जलापूर्ति सुनिश्चित करना, पेनकरपाड़ा कचरा प्रोजेक्ट रद्द करना, बायोडायवर्सिटी पार्क बनाना, हवा और ध्वनि प्रदूषण कंट्रोल करना, और महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा के लिए हाई-टेक कैमरा सर्विलांस टावर लगाना शामिल है। भाजपा ने मीरा भायंदर नगर निगम चुनाव के लिए अपना घोषणापत्र जारी किया है। पार्टी ने ट्रिपल इंजन सरकार के जरिए क्षेत्रीय विकास का वादा किया है। इस घोषणापत्र के जरिए नई कंक्रीट सड़कें, 24 घंटे पानी, अस्पतालों में बेड और प्रदूषण मुक्ति जैसे कई लुभावने वादे किए गए हैं।
अखिलेश यादव का हमला यूपी में चार करोड़ वोट काटे जाने की आशंका, भाजपा सरकार पर माफिया राज और महिला असुरक्षा का आरोप

अखिलेश यादव ने लखनऊ में प्रेसवार्ता की। उन्होंने कहा, ये जो SIR का काम चल रहा है, किसी भी पार्टी ने इसका विरोध नहीं किया। मैं बता दूं कि कोई न कोई साजिश चल रही है। PDA समाज का वोट काटने की और अपना वोट बढ़ाने की। जब एक प्रतिष्ठित अखबार में ये बात सामने कि सरकार ने ये निर्देश दिए हैं कि हर बूथ में 200 वोट बढ़ाए जाएं, तब ये शक और भी गहरा हो जाता है। मेरी मांग कि सभी वोटों को आधार से जोड़ा जाए। यूपी में BLO के बनाए गए आंकड़े पंचायत चुनाव की लिस्ट में अलग हैं, जबकि विधानसभा की लिस्ट में अलग हैं। हम ऐसा नहीं होने देंगे। इसके लिए हमने एक प्रारूप तैयार कर लिया है। हम चुनाव आयोग से जांच की मांग करेंगे। करीब चार करोड़ वोट काटे जाएंगेअखिलेश यादव ने कहा, जैसे ही ड्राफ्ट वोटर लिस्ट सामने आई, वैसे ही मेरी आशंकाएं सच साबित होती दिख रही हैं। मुझे करीब तीन करोड़ वोट काटे जाने की आशंका थी। प्रक्रिया के दौरान ही खुद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने पहले ही चार करोड़ वोट काटे जाने की बात सार्वजनिक मंचों पर कही थी। अखिलेश यादव ने कहा, जब वोटर लिस्ट अभी आई भी नहीं थी और किसी को यह जानकारी नहीं थी कि कितने वोट हटाए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने अपने नेताओं, कार्यकर्ताओं और अधिकारियों के बीच यह बात कही कि करीब चार करोड़ वोट काटे जाएंगे। यह बयान रिकॉर्ड में है। कई लोगों ने सुना भी है। जब पहले से यह आंकड़ा तय कर लिया गया था, तो यह पूरी प्रक्रिया कितनी निष्पक्ष है। उत्तर प्रदेश में माफिया राज खत्म नहीं हुआवहीं, शुक्रवार को सपा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा था कि भाजपा सरकार ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था को बर्बाद कर दिया है। प्रदेश में अपराध और भ्रष्टाचार चरम पर है। महिलाएं और बेटियां सुरक्षित नहीं हैं। इस सरकार का जीरो टॉलरेंस का वादा जीरो हो चुका है। मेरठ में मां पर कातिलाना हमला और बेटी को उठाकर ले जाने का मामला बेहद गंभीर है। महिला अपराध और साइबर क्राइम में उत्तर प्रदेश सबसे ऊपर पहुंच गया है। प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में रोज 5 महिलाएं हिंसा का शिकार हो रही हैं। हर 15 दिन में दुष्कर्म की शर्मनाक घटनाएं हो रही है। महिला सुरक्षा के झूठे दावे करने वाले मुख्यमंत्री को प्रदेश की जनता 2027 में सत्ता से बाहर कर देगी। भाजपा सरकार में तमाम तरह के अपराध पनप रहे हैं। जिस कफ सिरप मामले को पहले लोग स्थानीय अपराध समझ रहे थे, वो अब अंतरराष्ट्रीय स्तर का क्राइम निकल रहा है। उत्तर प्रदेश में माफिया राज खत्म नहीं हुआ है, बल्कि आगे बढ़ रहा है।
योगी आदित्यनाथ ने रामानंदाचार्य उत्सव में विपक्ष पर हमला, जाति-धर्म के विभाजन को समाज के लिए खतरा बताया

धर्मनिर्पेक्षता के नाम का ठेका लेकर चलने वाले लोग जिन्होंने हिंदू समाज को तोड़ने में पूरी ताकत दी, उनके मुंह बांग्लादेश के नाम पर बंद हैं। ऐसा लगता है कि उनके मुंह पर किसी ने फेवीकोल या टेप लगा दिया है। विपक्ष पर हमलावर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को माघ मेला स्थित खाक चौक केशिविर में आयोजित जगद्गुरु रामानंदाचार्य जी महाराज के 726वें प्राकट्य उत्सव में यह बातें कहीं। रामानांदाचार्य जी महाराज के मूल मंत्र ‘जात-पात पूछे ना कोई, हरि को भजे सो हरि का होई’ को दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जाति व धर्म के आधार पर विभाजन उसी तरह सर्वनाश का कारण बन जाएगा, जैसा कि बांग्लादेश में हो रहा है। उन्होंने आह्वान किया कि मत व संप्रदाय के आधार पर मत बंटो। भगवान रामानंदाचार्य जी हैं जिन्होंने एक नहीं द्वादश शिष्य बनाए और अलग-अलग जाति के बनाए। सोनकर समेत तमाम लोग मौजूद रहेमुख्यमंत्री ने कहा कि वह आज भी देखते हैं कि रामानंदाचार्य परंपरा से निकलीं अलग-अलग धाराएं समाज को अब भी जोड़ने का काम करती हैं। उन्होंने साधु-संतों से कहा कि यह आपका दायित्व है कि बांटने व तोड़ने वालों को कभी पनपने न दें। कमजोर करने वालों को किसी भी स्थिति में आगे नहीं बढ़ने देना है। अगर हम एकजुट होकर ऐसे ही आगे बढ़ते रहे तो आने वाला समय सनातन धर्म का हो जाएगा। तब बांग्लादेश में कोई निरीह व दलित हिंदू को काटने का काम नहीं कर पाएगा।मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जो लोग आज भी आपको बांट रहे हैं वे आपके हितैषी नहीं हो सकते। जब सत्ता में थे तो स्वयं अपने परिवार के बारे में सोचते थे। उससे बाहर उनकी दृष्टि नहीं थी। ये नारे देंगे, स्लोगन देंगे लेकिन जब भी मौका मिलेगा, यह वही करंगे जो पहले किया था। पहचान का संकट होगा, दंगों की आड़ में लोगों को झुलसाने का काम करेंगे। हमें इसकी पुनरावृत्ति नहीं होनी देनी चाहिए। कार्यक्रम में परमार्थ निकेतन आश्रम के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती, श्री बाघंबरी पीठ और श्री बड़े हनुमान मंदिर के महंत बलवीर गिरि जी महाराज, सतुआ बाबा पीठ काशी के पीठाधीश्वर संतोष दास उर्फ सतुआ बाबा, निर्मोही अखाड़े के राजेंद्र दास जी समेत कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, नंद गोपाल गुप्ता नंदी, सांसद प्रवीण पटेल, महापौर गणेश केसरवानी, विधायक सिद्धार्थनाथ सिंह, हर्षवर्धन बाजपेयी, दीपक पटेल, केपी सिंह, पीयूष रंजन निषाद, गुरु प्रसाद मौर्य, डॉ. वाचस्पति, पूर्व सांसद विनोद सोनकर समेत तमाम लोग मौजूद रहे। उत्तर भारत में रामभक्ति को जन-जन तक पहुंचायामुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि स्वामी रामानंदाचार्य ने काफी समय प्रयागराज में व्यतीत किया था। पता चला है कि दारागंज इलाके में कहीं पर उनका स्थान रहा है। सरकार उस स्थान का पता लगा रही है। इसके बाद रामानंदाचार्य के स्थान का जीर्णोद्धा और सुंदरीकरण कराकर उसको भव्य रूप प्रदान किया जाएगा। जाति-पाति पूछे नहीं कोई हरि को भे जो हरि का होई, यह अलख स्वामी रामानंदाचार्य ने प्रयागराज में ही जगाई थी। स्वामी रामानंदाचार्य भारत के महान संत, समाज-सुधारक और भक्ति आंदोलन के प्रमुख आचार्य थे। उन्होंने उत्तर भारत में रामभक्ति को जन-जन तक पहुंचाया और भक्ति को जाति-भेद से मुक्त किया। उनका जन्म लगभग 14वीं शताब्दी में माना जाता है। वे वैष्णव संप्रदाय रामानुजाचार्य की परंपरा से जुड़े थे। वह भगवान राम में भक्ति में लीन रहते थे। उन्होंने प्रयागराज में काफी समय व्यतीत किया। उनका मुख्य स्थान काशी था। स्वामी रामानंदाचार्य जी का मानना था कि भक्ति का मार्ग सबके लिए है। रामानंदाचार्य ने कहा कि ईश्वर-भक्ति पर किसी जाति, वर्ग या लिंग का बंधन नहीं होना चाहिए। कोई भी व्यक्ति रामभक्ति कर सकता है। जाति-पाति पूछे नहीं कोई जो हरि को भजे वह हरि का होई। उन्होंने संस्कृत के बजाय आम जनता की भाषा में उपदेश दिए ताकि हर व्यक्ति समझ सके।