राहुल ने RSS प्रमुख पर बोला तीखा हमला, राहुल बोले – भागवत का बयान देशद्रोह, कहीं और बोलते तो गिरफ्तार होते

कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने हाल ही में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। भागवतने कहा था कि भारत को सच्ची आजादी 1947 में नहीं, बल्कि अयोध्या में राम मंदिर बनने के बाद मिली। राहुल गांधी ने इस बयान को ‘राजद्रोह’ करार दिया। उन्होंने कहा, “भागवत का यह बयान भारतीय संविधान, स्वतंत्रता संग्राम और हर नागरिक का अपमान है। यह कहना कि भारत 1947 में आजाद नहींहुआ, संविधान की वैधता पर सवाल उठाने जैसा है। किसी और देश में ऐसे बयान पर कार्रवाई होती।” राहुल गांधी ने यह भी कहा कि यह देश दो विचारधाराओं की लड़ाई से गुजर रहा है। एक तरफ संविधान और लोकतंत्र का विचार है, जबकि दूसरी ओरआरएसएस की विचारधारा है, जो इसके विपरीत है। खरगे ने भी की कड़ी आलोचनाकांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी भागवत के बयान की आलोचना की। उन्होंने कहा, “जो लोग स्वतंत्रता संग्राम में कभी शामिल नहीं हुए, उन्हेंआजादी की कीमत का अंदाजा नहीं। ऐसे बयान से देश में उनकी स्वीकृति और मुश्किल हो जाएगी।” मोहन भागवत ने क्या दिया था बयान ?भागवत ने कहा था कि अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की तिथि को ‘सच्ची स्वतंत्रता’ का दिन माना जाना चाहिए। उन्होंने इसे सदियों कीगुलामी के बाद मिली आजादी से जोड़ा।
17 राज्यों में घना कोहरा, दिल्ली में 26 ट्रेनें लेट, हिमाचल के शहरों में पारा माइनस 10 डिग्री, यूपी और राजस्थान में भी ओले का अलर्ट

उत्तर भारत समेत देश के 17 राज्यों में घने कोहरे के कारण जनजीवन प्रभावित हो गया है। दृश्यता कम होने से यातायात, रेल और हवाई सेवाओं परबुरा असर पड़ा है। दिल्ली और अन्य उत्तर भारतीय क्षेत्रों में ठंड और कोहरे ने आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। *दिल्ली: ट्रेनें लेट, यात्री परेशान*दिल्ली में कोहरे के चलते 26 ट्रेनें अपने निर्धारित समय से देरी से चल रही हैं। यात्रियों को प्लेटफॉर्म पर लंबे समय तक इंतजार करना पड़ रहा है, जबकि कई लोगों को ट्रेन की सही स्थिति की जानकारी भी नहीं मिल पा रही है। हवाई यात्रा भी इससे अछूती नहीं रही, और कई उड़ानों में देरी हो रहीहै। *हिमाचल प्रदेश में बर्फबारी और ठंड*हिमाचल प्रदेश के केलांग और किन्नौर जैसे इलाकों में तापमान माइनस 10 डिग्री तक पहुंच गया है। बर्फबारी के कारण स्थानीय निवासियों काजीवन कठिन हो गया है। कई प्रमुख सड़कों के बंद होने से आवागमन बाधित हुआ है। उत्तर प्रदेश और राजस्थान में ओलावृष्टि की चेतावनीमौसम विभाग ने अगले 48 घंटों में उत्तर प्रदेश और राजस्थान में ओलावृष्टि की संभावना जताई है। पहले से ठंड का सामना कर रहे इन राज्यों मेंओलावृष्टि से फसलों को नुकसान हो सकता है। किसानों को फसल बचाने के लिए सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। *सड़क दुर्घटनाओं में वृद्धि*हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश में कोहरे के कारण कई सड़क हादसे हुए हैं। कम दृश्यता की वजह से वाहन चालकों को बेहद सतर्क रहना पड़ रहाहै। स्कूली बसों और अन्य यात्री वाहनों के संचालन में भी देरी हो रही है। मौसम विभाग का पूर्वानुमानमौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि उत्तर भारत में ठंड और कोहरे का सिलसिला अभी कुछ दिनों तक जारी रहेगा। सुबह और रात के समय कोहरे केकारण हवाई और रेल सेवाओं में व्यवधान की संभावना बनी हुई है। सावधानी और बचाव के उपाय– वाहन धीरे चलाएं और फॉग लाइट्स का इस्तेमाल करें।– हीटर और गर्म कपड़ों का इस्तेमाल करें।– बाहर निकलने से पहले मौसम का हाल जान लें।– ठंड से बचने के लिए गर्म पेय पदार्थों का सेवन करें। प्रशासन की तैयारियांप्रशासन ने सड़कों पर फॉग लाइट्स और अन्य उपकरणों की मदद से यातायात को सुचारू बनाने के प्रयास तेज कर दिए हैं। रेलवे को यात्रियों कोसमय पर सूचना देने के निर्देश दिए गए हैं। *सावधान रहें, सुरक्षित रहें*इस मौसम में सतर्कता बेहद जरूरी है। विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों का ध्यान रखें। आवश्यकता होने पर ही यात्रा करें और सभी एहतियात बरतें।
दिल्ली के 400 स्कूलों को बम धमकी भेजने वाला 12वीं का छात्र गिरफ्तार, विवादित NGO से परिवार का जुड़ाव

दिल्ली के 400 से अधिक स्कूलों को बम धमकी भेजने के मामले में दिल्ली पुलिस ने एक 12वीं कक्षा के छात्र को गिरफ्तार किया है। पुलिस काकहना है कि इस छात्र का परिवार एक ऐसे NGO से जुड़ा है, जिसने संसद हमले के दोषी अफजल गुरु की फांसी का विरोध किया था। स्पेशल पुलिस कमिश्नर (लॉ एंड ऑर्डर) मधुप तिवारी ने जानकारी दी कि पुलिस ने 8 जनवरी को धमकी भरे ईमेल प्राप्त होने के बाद छात्र को ट्रेसकिया। नाबालिग होने के कारण उसके लैपटॉप और मोबाइल फोन को जब्त कर फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया। जांच में यह खुलासा हुआ किछात्र ने 400 से अधिक धमकी भरे ईमेल भेजे थे। बताया जा रहा है कि उसके पिता एक ऐसे NGO से जुड़े हैं, जो अफजल गुरु की फांसी का विरोधकरने वाले समूह का हिस्सा है और एक राजनीतिक दल के साथ भी संबंध रखता है। भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जिस किशोर ने धमकी दी, उसका संबंध एक ऐसे संगठन से है जो अफजल गुरुकी फांसी का विरोध करता रहा है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या यह किशोर किसी बड़े साजिश का हिस्सा है और इसके पीछे कौन लोग हैं।उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि इस प्रकार की गतिविधियां दिल्ली में माहौल खराब करने और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश हो सकती हैं। पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है कि क्या नाबालिग को किसी और ने ईमेल भेजने के लिए प्रेरित किया। हालांकि, अभी तक संबंधितराजनीतिक दल का नाम उजागर नहीं किया गया है, और जांच जारी है। गौरतलब है कि मई से दिसंबर 2024 के बीच दिल्ली में 50 से अधिक धमकी भरे मामले सामने आए थे, जिनमें स्कूलों के साथ-साथ अस्पताल, एयरपोर्ट और एयरलाइंस भी निशाने पर थे। दिसंबर 2024 में 44 स्कूलों को धमकी भरे ईमेल मिले थे, जिनमें 30,000 अमेरिकी डॉलर की मांग कीगई थी। हालांकि, सभी धमकियां फर्जी साबित हुईं।
पंजाब में खालिस्तान समर्थक ‘वारिस पंजाब दे’ पार्टी का गठन, अमृतपाल सिंह बने अध्यक्ष

पंजाब में खालिस्तान समर्थक संगठनों और नेताओं की बढ़ती सक्रियता के बीच एक नई राजनीतिक पार्टी का गठन हुआ है, जिसका नाम *”वारिशपंजाब दे” रखा गया है। यह पार्टी *सिमरनजीत सिंह मन्न*और उनके सहयोगियों द्वारा बनाई गई है, जो अकाली दल के पूर्व नेता और खालिस्तान आंदोलन से जुड़े हुए हैं। इस पार्टी का ऐलान 13 जनवरी2025 को किया गया, और दिलचस्प बात यह है कि इसके अध्यक्ष **अमृतपाल सिंह** को बनाया गया है, जो फिलहाल जेल में बंद हैं। पार्टी का उद्देश्य“वारिश पंजाब दे” पार्टी का मुख्य उद्देश्य पंजाब में स्वतंत्र खालिस्तान की स्थापना को पुनः ज़िंदा करना है। पार्टी का दावा है कि यह संगठन पंजाब केलोगों के अधिकारों की रक्षा करेगा और खालिस्तान की दिशा में काम करेगा। पार्टी का गठन पंजाब में खालिस्तान समर्थक विचारधारा को फिर सेजिंदा करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, खासकर जब यह आंदोलन कुछ समय से शांत था। अमृतपाल सिंह का नेतृत्वअमृतपाल सिंह*, जो पहले *वारिस पंजाब दे* के प्रमुख थे, अब इस नई पार्टी के अध्यक्ष बने हैं। फिलहाल वह पंजाब पुलिस की हिरासत में हैं, लेकिन पार्टी ने उन्हें अध्यक्ष बना कर यह स्पष्ट कर दिया है कि वह खालिस्तान समर्थक विचारधारा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाएंगे। हालांकि, यहदेखना होगा कि जेल में रहते हुए अमृतपाल पार्टी का नेतृत्व और गतिविधियाँ कैसे संभालेंगे। अकाली दल और खालिस्तान आंदोलनअकाली दल, जो पहले खालिस्तान समर्थक था, अब इस नई पार्टी से जुड़ा नहीं है। समय के साथ अकाली दल ने खालिस्तान मुद्दे से अपनी दूरी बनाली है और मुख्यधारा की राजनीति में अपनी पहचान बनाई है। अब “वारिश पंजाब दे” इस शून्य को भरने का दावा कर रहा है, और यह अकाली दल केलिए चुनौती का कारण बन सकता है। पंजाब सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की प्रतिक्रियापंजाब सरकार और सुरक्षा एजेंसियां इस नई पार्टी के गठन को लेकर सतर्क हैं। उनका मानना है कि खालिस्तान समर्थक आंदोलनों से राज्य की सुरक्षाको खतरा हो सकता है, क्योंकि पहले पंजाब में ऐसे आंदोलनों के कारण हिंसा और तनाव उत्पन्न हो चुका है। सरकार ने कानून-व्यवस्था बनाए रखनेके लिए सुरक्षा बलों को अलर्ट किया है। पार्टी के समर्थन और वादे “वारिश पंजाब दे” ने अपनी शुरुआत में ही यह घोषणा की है कि पार्टी पंजाब के लोगों के अधिकारों की रक्षा करेगी और एक स्वतंत्र खालिस्तान कीदिशा में काम करेगी। समर्थकों का कहना है कि खालिस्तान की स्थापना पंजाबी लोगों के हितों की रक्षा के लिए जरूरी है। पार्टी का मानना है कि यहराज्य में बढ़ती असमानता और बेरोज़गारी जैसी समस्याओं का समाधान साबित हो सकता है। अमृतपाल सिंह और अकाली दल के लिए चुनौतीअमृतपाल सिंह का नेतृत्व और खालिस्तान समर्थक विचारधारा अकाली दल के लिए एक नई चुनौती उत्पन्न कर सकती है। अकाली दल ने पहलेखालिस्तान मुद्दे को उठाया था, लेकिन अब यह पार्टी शांति और विकास की ओर केंद्रित हो गई है। अमृतपाल सिंह की पार्टी का गठन उस पुरानीविचारधारा को पुनः जिंदा करने की कोशिश कर रहा है, और इससे अकाली दल को अपनी रणनीति में बदलाव की आवश्यकता हो सकती है। अकाली दल के लिए खतरे1.राजनीतिक प्रतिस्पर्धाअमृतपाल सिंह की पार्टी अकाली दल से सीधी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा कर सकती है। अगर पार्टी को पंजाब के लोगों का समर्थन मिलता है, तो यहअकाली दल के लिए एक गंभीर चुनावी चुनौती बन सकती है, विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां खालिस्तान समर्थक विचारधारा का प्रभाव है। 2. आंदोलन का प्रभावअमृतपाल सिंह का खालिस्तान समर्थक आंदोलन अकाली दल के लिए एक चुनौती हो सकती है, क्योंकि पार्टी ने शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिकराजनीति अपनाई है, जबकि अमृतपाल सिंह का उद्देश्य खालिस्तान की स्थापना है। 3. आंतरिक विभाजनपार्टी के गठन से अकाली दल में आंतरिक विभाजन हो सकता है। कुछ पुराने समर्थक खालिस्तान समर्थक विचारधारा से जुड़े हो सकते हैं, और वेअमृतपाल सिंह के पक्ष में जा सकते हैं, जिससे अकाली दल में असंतोष और गड़बड़ी हो सकती है। अकाली दल के मजबूत पहलूअकाली दल के पास मजबूत नेतृत्व और पंजाबी समाज में गहरी जड़ें हैं। उनकी विकास, शांति और लोकतांत्रिक नीतियां उन्हें आम लोगों के बीचसमर्थन दिलाने में मदद कर सकती हैं। इसके अलावा, पार्टी की प्रमुख धारा की राजनीति में एक मजबूत पहचान है, जो अमृतपाल सिंह की पार्टी केप्रभाव को सीमित कर सकती है। अमृतपाल सिंह का उदय और उनकी पार्टी अकाली दल के लिए एक चुनौती हो सकती है, लेकिन यह पार्टी के aap भविष्य को पूरी तरह से प्रभावितनहीं करेगा। अकाली दल को अपने विकास और शांति की नीतियों को मजबूत कर अमृतपाल सिंह और उनकी पार्टी का मुकाबला करना होगा। पार्टीको पंजाब की जटिलताओं और राजनीतिक माहौल को समझते हुए अपनी रणनीति को नई दिशा देनी होगी।
दिल्ली चुनाव: केजरीवाल का आरोप कांग्रेस और बीजेपी में है “जुगलबंदी”

दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर तीखे आरोपलगाए हैं। उन्होंने कहा कि दोनों पार्टियां आपस में मिली हुई हैं और जनता को गुमराह कर रही हैं। केजरीवाल ने कहा, “जब मैं राहुल गांधी कीआलोचना करता हूं, तो बीजेपी उन्हें बचाने के लिए सामने आ जाती है। इससे साफ पता चलता है कि कांग्रेस और बीजेपी के बीच गुप्त समझौताहै।” कांग्रेस-बीजेपी पर “मिलीभगत” का आरोपकेजरीवाल ने दोनों राष्ट्रीय पार्टियों पर निशाना साधते हुए कहा कि ये पार्टियां एक-दूसरे के खिलाफ दिखावा करती हैं, लेकिन असल में साथ मिलकरकाम करती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ये पार्टियां जनता के मुद्दों को हल करने की बजाय अपने हित साधने में लगी रहती हैं। राजनीतिक पर प्रभावकेजरीवाल के इस बयान से कांग्रेस, बीजेपी और आप के बीच पहले से चल रहे राजनीतिक तनाव में और बढ़ोतरी हो सकती है। यह बयान खासतौरपर आगामी चुनावों को देखते हुए महत्वपूर्ण हो गया है, जहां सभी दल अपने पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश में जुटे हैं। दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 की घोषणादिल्ली में विधानसभा चुनाव 2025 के लिए तारीखों का ऐलान हो चुका है। राज्य की 70 विधानसभा सीटों के लिए मतदान 5 फरवरी 2025 कोहोगा, जबकि मतगणना 8 फरवरी 2025 को होगी। विधानसभा का कार्यकाल और उम्मीदवारवर्तमान विधानसभा का कार्यकाल 15 फरवरी 2025 को समाप्त हो रहा है। इस बार के चुनाव में आम आदमी पार्टी, बीजेपी, और कांग्रेस सहित कईदल सक्रिय रूप से हिस्सा ले रहे हैं। सरकार बनाने के लिए किसी भी पार्टी को 36 सीटों पर जीत दर्ज करनी होगी। मतदाता के आंकड़ेदिल्ली में कुल 1.55 करोड़ मतदाता हैं, जिनमें 83 लाख पुरुष और 71 लाख महिलाएं शामिल हैं। चुनाव आयोग ने मतदाताओं की सुविधा के लिएकई प्रबंध किए हैं, जैसे वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों के लिए पिक एंड ड्रॉप सेवा। चुनाव की प्रमुख तिथियां*मतदान:* 5 फरवरी 2025 मतगणना:8 फरवरी 2025कुल सीटें:* 70मतदाताओं से अपीलचुनाव आयोग ने सभी मतदाताओं से आग्रह किया है कि वे अपने मताधिकार का सही इस्तेमाल करें और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारीनिभाएं।
प्रधानमंत्री IMD के 150वें स्थापना दिवस में हुए शामिल, कार्यक्रम में बोले मोदी- आज वॉट्सएप पर मौसम अपडेट मिलता है

14 जनवरी 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के 150वें स्थापना दिवससमारोह में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने ‘मिशन मौसम’ की शुरुआत की और ‘IMD विज़न-2047’ दस्तावेज़ का अनावरण किया। मिशन मौसम का उद्देश्यमिशन मौसम का लक्ष्य भारत को “मौसम के प्रति तैयार और जलवायु के प्रति स्मार्ट” राष्ट्र बनाना है। इसके तहत अत्याधुनिक मौसम निगरानी तकनीकोंऔर प्रणालियों का विकास किया जाएगा। यह मिशन बेहतर मौसम पूर्वानुमान, वायुमंडलीय डेटा विश्लेषण और उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग के माध्यम सेदीर्घकालिक जलवायु रणनीतियों को मजबूत करेगा। प्रमुख पहलूतकनीकी प्रगति: आधुनिक रडार, उपग्रह और उच्च-रिज़ॉल्यूशन वायुमंडलीय अवलोकन उपकरण स्थापित करना।सटीक पूर्वानुमान: मौसम चेतावनी प्रणाली को सटीक और तेज़ बनाने के लिए उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटरों का उपयोग।जलवायु परिवर्तन का सामना:जलवायु जोखिम आकलन और दीर्घकालिक जलवायु सेवाओं को मजबूत करना।क्षेत्रीय सहयोग: पड़ोसी देशों के साथ सहयोग और ज्ञान-साझा करना। IMD विज़न-2047प्रधानमंत्री ने ‘IMD विज़न-2047’ दस्तावेज़ भी जारी किया, जो भविष्य में मौसम प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन से निपटने की योजनाओं का खाकाप्रस्तुत करता है। इसका उद्देश्य भारत को मौसम और जलवायु संबंधी सेवाओं में वैश्विक नेतृत्व प्रदान करना है। दस्तावेज़ के मुख्य बिंदु– मौसम पूर्वानुमान की सटीकता बढ़ाना।– जलवायु परिवर्तन शमन और अनुकूलन रणनीतियां लागू करना।– कृषि, जल संसाधन, और आपदा प्रबंधन क्षेत्रों में बेहतर सेवाएं प्रदान करना। प्रधानमंत्री का संबोधनअपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने IMD की 150 वर्षों की यात्रा की सराहना की और इसे देश की वैज्ञानिक प्रगति का प्रतीक बताया। उन्होंने कहाकि 10 साल पहले तक केवल 10% किसान और पशुपालक मौसम संबंधी सुझावों का उपयोग करते थे, लेकिन अब यह संख्या 50% तक पहुंचगई है। मकर संक्रांति का उल्लेखप्रधानमंत्री ने मकर संक्रांति का जिक्र करते हुए इसे कृषि आधारित त्योहार बताया और देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने गुजरात की पतंगबाजीकी परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह त्योहार खेती-किसानी की तैयारियों का संकेत देता है। IMD की उपलब्धियां और भविष्य की योजनाएं150वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में IMD ने अपनी प्रमुख उपलब्धियों और सेवाओं को प्रदर्शित करने के लिए कार्यक्रमों और कार्यशालाओं काआयोजन किया। ये पहल भारत को जलवायु परिवर्तन और मौसम संबंधी चुनौतियों के प्रति अधिक लचीला बनाने की दिशा में एक कदम है। ‘मिशन मौसम’ और ‘IMD विज़न-2047’ का शुभारंभ भारत की मौसम संबंधी क्षमताओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यहदेश को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने और मौसम से संबंधित आपदाओं के प्रति अधिक तैयार बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।
महाकुंभ 2025: अमृत स्नान पर उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, नागा साधुओं की पेशवाई ने मोहा मन, सुरक्षा और स्वच्छता बनी प्राथमिकता

महाकुंभ 2025 का पहला अमृत स्नान सोमवार को लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में संपन्न हुआ। संगम नगरी प्रयागराज में गंगा, यमुना और अदृश्यसरस्वती के पावन संगम पर आस्था का महापर्व देखने को मिला। लगभग 2 करोड़ लोगों ने गंगा में डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित किया। इसआयोजन ने आध्यात्मिकता, सांस्कृतिक परंपराओं और आधुनिक प्रबंधन का अद्वितीय संगम प्रस्तुत किया। नागा साधुओं का भव्य प्रदर्शनमहाकुंभ के अमृत स्नान की सबसे खास झलक नागा साधुओं की पेशवाई रही। तलवार, त्रिशूल और अन्य हथियारों के साथ नागा साधु पूरे उत्साह सेस्नान के लिए पहुंचे। उनका प्रदर्शन देखने के लिए हजारों श्रद्धालु सुबह से ही घाटों पर इकट्ठा हो गए थे। नगाड़ों की गूंज और साधुओं के जयकारों नेमाहौल को भक्तिमय बना दिया। दिगंबर नागा साधुओं का गंगा में प्रवेश एक दिव्य दृश्य प्रस्तुत कर रहा था। हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षापहले अमृत स्नान के अवसर पर प्रशासन द्वारा विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। श्रद्धालुओं का उत्साह बढ़ाने के लिए हेलीकॉप्टर से गंगा घाटों पर पुष्पवर्षा की गई। यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए अद्वितीय अनुभव लेकर आया। हेलीकॉप्टर से गिरते फूलों ने पूरे वातावरण को और भी भक्ति सेसराबोर कर दिया। *भव्य सुरक्षा इंतजाम*इस विशाल आयोजन को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए प्रशासन ने सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए। करीब 20,000 सुरक्षाकर्मियों को तैनातकिया गया। ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों के जरिए घाटों पर हर गतिविधि पर नजर रखी गई। भीड़ नियंत्रण के लिए सेना को स्टैंडबाय पर रखा गया था, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई की जा सके। स्वास्थ्य और आपातकालीन सेवाएश्रद्धालुओं की भारी भीड़ को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने स्वास्थ्य सेवाओं की भी पर्याप्त व्यवस्था की थी। घाटों पर 50 से अधिक प्राथमिकचिकित्सा केंद्र स्थापित किए गए। 100 से अधिक एंबुलेंस और हजारों स्वास्थ्यकर्मी तैनात थे। *आध्यात्मिक महत्व और आकर्षण*महाकुंभ का पहला अमृत स्नान हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, इस दिन गंगा में स्नान करने से सभी पापों से मुक्तिमिलती है और अमृत की प्राप्ति होती है। इस स्नान में केवल देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु आए। विदेशी पर्यटकों ने भी इस आयोजन मेंगहरी रुचि दिखाई। यातायात और परिवहन व्यवस्थामहाकुंभ में आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए विशेष परिवहन व्यवस्था की गई थी। रेलवे और बस सेवाओं को अतिरिक्त ट्रेनों और बसों के साथमजबूत किया गया। प्रयागराज के मुख्य मार्गों को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए विशेष ट्रैफिक प्लान तैयार किया गया। सफाई और पर्यावरण संरक्षणगंगा की स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए विशेष सफाई अभियान चलाया गया। हर दिन हजारों सफाईकर्मी घाटों पर तैनात रहे। गंगा में प्लास्टिक औरअन्य प्रदूषकों को रोकने के लिए कड़ी निगरानी रखी गई। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से भी अपील की कि वे गंगा की पवित्रता बनाए रखने में सहयोग करें। सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजनअमृत स्नान के अवसर पर विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया गया। इनमें कथक नृत्य, भजन संध्या और आध्यात्मिक प्रवचन शामिलथे। इन कार्यक्रमों ने श्रद्धालुओं को मनोरंजन के साथ-साथ आध्यात्मिक प्रेरणा भी दी। सफल आयोजनपहले अमृत स्नान के साथ महाकुंभ 2025 का आगाज बेहद सफल और भव्य रहा। प्रशासन, श्रद्धालु और साधु-संतों के सामूहिक प्रयास से यहआयोजन ऐतिहासिक बन गया। महाकुंभ का यह पर्व न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं की समृद्धि का प्रतीक भी है। महाकुंभ का पहला अमृत स्नान न केवल धार्मिक, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण रहा। इस आयोजन ने भारत की गहरीआध्यात्मिक जड़ों और आधुनिक प्रबंधन की क्षमता को उजागर किया। करोड़ों श्रद्धालुओं के उत्साह और प्रशासन की चुस्त व्यवस्था ने इस आयोजनको ऐतिहासिक बना दिया। अब अगला स्नान पर्व भी इसी ऊर्जा और भव्यता के साथ संपन्न होने की उम्मीद है।
संजीव बालियान की हटाई गई सुरक्षा, बीजेपी के पूर्व मंत्री ने पुलिस को बताया था भ्रष्ट, जानिए क्या है पूरा मामला?

भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) के नेता और मुजफ्फरनगर से सांसद, डॉ. संजीव बालियान की सुरक्षा हटाए जाने की खबरें सामने आई हैं। यह कदमउस समय उठाया गया है जब उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे। हालांकि इस बारे में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहींहुई है संजीव बालियान का राजनीतिकदृष्टिकोणहाल ही में, डॉ. बालियान ने मुजफ्फरनगर के मंसूरपुर थाना क्षेत्र के ग्राम खानुपुर में मंदिर और धर्मशाला की भूमि पर अवैध कब्जे के प्रयासों केखिलाफ आवाज उठाई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस भू-माफियाओं के साथ मिलकर धार्मिक स्थलों की भूमि पर कब्जा करने में शामिल है।इस मुद्दे को लेकर उन्होंने थाना प्रभारी से भी तीखी बहस की थी। इसके अलावा, अक्टूबर 2024 में बुढ़ाना कस्बे में मुस्लिम समुदाय द्वारा सड़कों परप्रदर्शन करने के मामले में भी डॉ. बालियान ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए थे और प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग की थी। सुरक्षा पर उठे सवालइन घटनाओं के बाद यदि उनकी सुरक्षा में कटौती की गई है, तो यह एक गंभीर विषय बन जाता है। सांसद होने के नाते उनकी सुरक्षा प्रशासन कीजिम्मेदारी बनती है, विशेष रूप से जब वे प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हैं। यदि डॉ. बालियान ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपनीसुरक्षा के बारे में पत्र लिखा है, तो यह संकेत देता है कि उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता है। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच संवाद की आवश्यकतायह महत्वपूर्ण है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच संवाद बनाए रखा जाए, ताकि किसी भी गलतफहमी या असहमति को बातचीत के माध्यमसे सुलझाया जा सके। सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर सभी पक्षों को मिलकर समाधान निकालने की आवश्यकता है, ताकि जनप्रतिनिधि स्वतंत्र रूपसे और सुरक्षित माहौल में अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकें। संजीव बालियान का प्रारंभिक जीवन और शिक्षासंजीव बालियान का जन्म 26 नवंबर 1969 को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के एक छोटे से गांव में हुआ था। वे एक पशुपालन विशेषज्ञ हैं औरसमाज सेवा में भी सक्रिय रहे हैं। राजनीति में प्रवेशसंजीव बालियान ने भारतीय जनता पार्टी से जुड़कर भारतीय राजनीति में कदम रखा। उनका राजनीतिक सफर 2000 के दशक के मध्य में शुरू हुआ, जब उन्होंने भाजपा से अपने करियर की शुरुआत की। सांसद के रूप में कार्यकालसंजीव बालियान ने 2014 के लोकसभा चुनाव में मुजफ्फरनगर से भाजपा के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। उन्होंने 2019 मेंभी अपनी सीट बरकरार रखी। वे लोकसभा में कृषि, जलवायु परिवर्तन, और पशुपालन से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं। केंद्रीय मंत्री का पदसंजीव बालियान को नरेंद्र मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री बनने का मौका मिला। वे “पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन” मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप मेंकार्यरत रहे और इस दौरान उन्होंने कृषि व पशुपालन क्षेत्र में कई सुधारात्मक कदम उठाए। विवाद और बयानबाजीसंजीव बालियान का राजनीतिक सफर विवादों से भी जुड़ा रहा है। 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों के समय उनका नाम भी सामने आया था, हालांकिउन्होंने इन आरोपों से खुद को मुक्त किया। इसके अलावा, वे अक्सर अपने कड़े बयानों के लिए चर्चित रहते हैं और पार्टी की नीतियों के पक्ष में कठोररुख अपनाते हैं। समाजसेवा और विकास कार्यसंजीव बालियान न केवल राजनीति में सक्रिय रहे हैं, बल्कि वे समाजसेवा के भी पक्षधर हैं। मुजफ्फरनगर और आसपास के गांवों में उन्होंने कई विकासयोजनाओं को बढ़ावा दिया है और स्थानीय लोगों के कल्याण के लिए काम किया है। संजीव बालियान भारतीय राजनीति में एक प्रभावशाली नेता के रूप में उभरे हैं। उनका राजनीतिक सफर विवादों, संघर्षों और सफलता से भरा हुआ है।उनके कार्यों ने उन्हें एक मजबूत राजनीतिक शख्सियत बना दिया है, जो जनहित के मुद्दों को उठाने में लगातार सक्रिय रहते हैं।
दिल्ली में राहुल गांधी की रैली: मोदी और केजरीवाल पर जोरदार हमला

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोमवार को दिल्ली के सलीमपुर इलाके में अपनी पहली रैली को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीऔर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर जमकर निशाना साधा। राहुल गांधी ने कहा कि दोनों नेता एक जैसी राजनीति करते हैं और अदाणीजैसे उद्योगपतियों के खिलाफ कभी आवाज नहीं उठाते। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की राजनीति और अर्थव्यवस्था पर मुट्ठीभर अरबपतियों कानियंत्रण है।राहुल गांधी ने अपने भाषण में अदाणी समूह का जिक्र करते हुए कहा कि मोदी और केजरीवाल अदाणी के खिलाफ बोलने से बचते हैं। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री और दिल्ली के मुख्यमंत्री दोनों अदाणी के खिलाफ एक भी शब्द नहीं बोलते। आखिर क्यों? क्योंकि ये नेता उन ताकतों से नियंत्रित होतेहैं, जो आम जनता के हितों को नजरअंदाज कर देती हैं।” यह बयान कांग्रेस की ओर से अदाणी समूह पर लगातार उठाए जा रहे वालों की कड़ी मेंआया है। मोदी और केजरीवाल की राजनीति पर सवालराहुल गांधी ने कहा कि नरेंद्र मोदी और अरविंद केजरीवाल भले ही अलग-अलग दलों से हैं, लेकिन उनकी राजनीति एक ही दिशा में जाती है। उन्होंनेकहा, “दोनों नेताओं की नीतियां बड़े उद्योगपतियों के हित में हैं। ये जनता का ध्यान असली मुद्दों से भटकाने के लिए लड़ाई का नाटक करते हैं, लेकिनपर्दे के पीछे एक ही एजेंडे पर काम करते हैं—देश के संसाधनों को कुछ उद्योगपतियों के हाथों में सौंपने का।” देश पर मुट्ठीभर अरबपतियों का दबदबाराहुल गांधी ने देश की आर्थिक स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल 150 अरबपति ही भारत की अर्थव्यवस्था को नियंत्रित कर रहे हैं। उन्होंनेकहा, “इन कुछ लोगों के पास इतनी ताकत है कि वे नीतियों और राजनीतिक फैसलों को अपने अनुसार प्रभावित कर सकते हैं। गरीब और मध्यम वर्गके लोगों को उनकी समस्याओं के साथ छोड़ दिया गया है।” जनता के मुद्दों पर फोकसरैली में राहुल गांधी ने महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक असमानता जैसे मुद्दों को उठाया। उन्होंने कहा, “देश में अमीर और अमीर बनते जा रहे हैं, जबकिगरीब और गरीब होते जा रहे हैं। यह स्थिति इसलिए बनी है क्योंकि सरकार केवल चुनिंदा बड़े उद्योगपतियों के लिए काम कर रही है। आम जनता केहितों को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है।” केजरीवाल पर तीखा प्रहारदिल्ली के मुख्यमंत्री पर बोलते हुए राहुल गांधी ने कहा कि अरविंद केजरीवाल, जो खुद को आम आदमी का नेता बताते हैं, अदाणी जैसे उद्योगपतियोंपर सवाल उठाने से बचते हैं। उन्होंने कहा, “केजरीवाल ने भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई का दावा किया था, लेकिन अदाणी के मामले में उनकी चुप्पीबहुत कुछ कहती है। क्या उनका भ्रष्टाचार विरोधी अभियान केवल दिखावा था?” कांग्रेस की चुनावी रणनीतिदिल्ली विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस अदाणी के मुद्दे को प्रमुखता से उठा रही है। राहुल गांधी का यह भाषण कांग्रेस की उसीरणनीति का हिस्सा है, जिसमें पार्टी मोदी और केजरीवाल दोनों पर हमले कर रही है। कांग्रेस का उद्देश्य है कि अदाणी के मुद्दे को गरीब और मध्यम वर्गके हितों से जोड़कर जनता को अपनी ओर आकर्षित किया जाए। राहुल गांधी ने जनता से की अपीलरैली के अंत में राहुल गांधी ने जनता से कांग्रेस को समर्थन देने की अपील की। उन्होंने कहा, “यह लड़ाई सिर्फ कांग्रेस की नहीं है, बल्कि हर उसनागरिक की है जो अन्याय के खिलाफ खड़ा होना चाहता है। हमें साथ मिलकर इस ताकतवर गठजोड़ का सामना करना होगा।” राहुल गांधी की इस रैली ने कांग्रेस की चुनावी तैयारी और रणनीति को स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने अपने भाषण में मोदी और केजरीवाल को घेरते हुएअदाणी के मुद्दे पर जोर दिया। अब यह देखना बाकी है कि राहुल गांधी की इस रणनीति का दिल्ली की राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ेगा और क्याकांग्रेस इसे जनता के बीच एक प्रभावी मुद्दा बना पाएगी।
तमिलनाडु: स्कूल में छात्रों से टॉयलेट सफाई का मामला, प्रिंसिपल निलंबित, पेरेंट्स में आक्रोश

तमिलनाडु के तिरुपथुर जिले के एक सरकारी स्कूल में छात्रों से टॉयलेट साफ करवाने की घटना सामने आई है, जिसने पेरेंट्स और स्थानीय लोगों कोआक्रोशित कर दिया। इस मामले के उजागर होने के बाद स्कूल की प्रिंसिपल को निलंबित कर दिया गया है। इस घटना ने स्कूलों में छात्रों से गैर-शैक्षणिक कार्य करवाने और उनके अधिकारों के हनन की गंभीर समस्या को एक बार फिर से उजागर किया है। *घटना का विवरण*तिरुपथुर जिले के एक सरकारी स्कूल में छात्रों से सफाई कर्मियों की कमी के कारण टॉयलेट और स्कूल परिसर की सफाई करवाई गई। पेरेंट्स काआरोप है कि बच्चों से केवल टॉयलेट की सफाई ही नहीं, बल्कि पानी भरने और अन्य काम भी करवाए जाते हैं। यह सब बच्चों की पढ़ाई को प्रभावितकरता है और उनके अधिकारों के खिलाफ है। पेरेंट्स ने स्कूल प्रशासन पर बच्चों की गरिमा को ठेस पहुंचाने और उनके साथ अनुचित व्यवहार करने का आरोप लगाया। *पेरेंट्स की नाराजगी*घटना के बाद पेरेंट्स ने स्कूल के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। उनका कहना था कि बच्चों को शिक्षा के लिए स्कूल भेजा जाता है, न कि सफाई जैसेकामों के लिए। एक पेरेंट ने कहा, “हम अपने बच्चों को पढ़ने के लिए स्कूल भेजते हैं। इस तरह के काम उनकी मानसिक और शारीरिक स्थिति पर बुराअसर डालते हैं और उनके आत्म-सम्मान को ठेस पहुंचाते हैं।” प्रशासन का कदममामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) ने स्कूल का निरीक्षण किया। जांच में पुष्टि हुई कि बच्चों से सफाई करवाने काकाम हो रहा था। इस पर कार्रवाई करते हुए प्रिंसिपल को निलंबित कर दिया गया और स्कूल प्रशासन को निर्देश दिए गए कि भविष्य में ऐसी घटनाएंन हों। डीईओ ने इसे गंभीर और अनुचित करार दिया। कानूनी और नैतिक पहलूभारत में *बाल श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम, 1986*के तहत बच्चों से किसी भी प्रकार का श्रम करवाना गैरकानूनी है। साथ ही, **शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009** बच्चों को मुफ्त और अनिवार्यशिक्षा का अधिकार देता है। यह घटना बच्चों के अधिकारों और गरिमा का स्पष्ट उल्लंघन है। समाज की भूमिकाऐसी घटनाओं को रोकने के लिए समाज और पेरेंट्स को सतर्क रहना होगा। बच्चों के साथ किसी भी प्रकार के दुर्व्यवहार पर तुरंत संबंधित अधिकारियोंको सूचित करना चाहिए। तमिलनाडु की यह घटना शिक्षा प्रणाली में मौजूद खामियों को दर्शाती है। छात्रों से इस तरह के काम करवाना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्किउनके भविष्य के साथ अन्याय भी है। प्रशासन ने प्रिंसिपल को निलंबित कर दिया है, लेकिन इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी निगरानीऔर सख्त नियम लागू करने की आवश्यकता है।