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व्हाइट हाउस प्रेस ब्रीफिंग में हाई-वोल्टेज ड्रामा: पत्रकार को कहा वामपंथी, सवाल-जवाब के बीच भड़की तीखी नोकझोंक

व्हाइट हाउस में प्रेस ब्रीफिंग के दौरान तीखी नोकझोंक देखने को मिली। गुरुवार, 15 जनवरी को हुई ब्रीफिंग में प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट और द हिल के एसोसिएट एडिटर नायल स्टैनज के बीच माहौल उस वक्त तनावपूर्ण हो गया, जब स्टैनेज ने इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) से जुड़े मुद्दों पर लगातार कड़े सवाल दागे। सवालों से असहज दिखीं लेविट ने पत्रकार के रुख पर नाराजगी जाहिर करते हुए उन्हें (वामपंथी कार्यकर्ता) लेफ्ट-विंग एक्टिविस्ट तक कह डाला। व्हाइट हाउस प्रेस ब्रीफिंग में काफी तनावपूर्ण मोड़ पर पहुंच गई, जब पत्रकार नायल स्टैनेज ने आईसीई पर सवाल उठाते हुए कहा कि पिछले साल ICE की हिरासत में 32 लोगों की मौत हुई, यह संख्या एजेंसी के लिए पिछले दो दशकों में सबसे ज्यादा दर्ज की गई थी। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि एक एजेंट ने रिनी गुड को गोली मारी और उनकी मौत हो गई, और कई अमेरिकी नागरिकों को गलत तरीके से हिरासत में लिया गया। तथ्यों के बजाय अपनी विचारधारा को बढ़ावा दे रहास्टैनेज ने पूछा कि ऐसे में कैसे माना जा सकता है कि ICE सबकुछ सही ढंग से कर रहा है। लेविट ने उन्हें रोकते हुए कहा कि रिनी गुड दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण रूप से क्यों मारी गई? जब स्टैनेज ने जवाब में कहा कि ICE एजेंट ने बेपरवाह व्यवहार किया, तो लेविट ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्टैनेज को पक्षपाती रिपोर्टर, वामपंथी कार्यकर्ता कहा और आरोप लगाया कि वह तथ्यों के बजाय अपनी विचारधारा को बढ़ावा दे रहा है। लेविट ने कहा कि हां, क्योंकि आप वामपंथी हैं। आप रिपोर्टर ही नहीं हैं। आपको यहां बैठना भी नहीं चाहिए। उन कहानियों को तक पढ़ा नहींब्रीफिंग के बाद लेविट ने फिर सवाल किया कि क्या स्टैनेज के पास गैरकानूनी अप्रवासियों द्वारा मारे गए अमेरिकी नागरिकों की संख्या के बारे में जानकारी है, और तर्क दिया कि आईसीई उन लोगों को हटाने की कोशिश कर रहा है जो अमेरिका में अवैध रूप से हैं। उन्होंने कहा कि मुझे यकीन है कि आपके पास वे आंकड़े नहीं हैं। मुझे यकीन है कि आपने उन कहानियों को तक पढ़ा नहीं है। लेविट ने पत्रकारों पर आरोप लगाया कि मीडिया में ऐसे लोग हैं जिनकी दृष्टि पक्षपाती और विकृत है, और जो खुद को ईमानदार पत्रकार का ढोंग कर रहे हैं।

एक साल में 1634 प्रति दिन, उत्तराखंड में यूसीसी कानून ने बदली विवाह प्रक्रिया

उत्तराखंड में 27 जनवरी 2025 को यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू हुआ था। यूसीसी लागू हुए एक वर्ष पूरे होने वाला है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यूसीसी को लेकर जनता में सकारात्मक माहौल है। कहा कि पंजीकरण के लिए नागरिक तेजी से आगे आ रहे हैं। कानून में नागरिकों की सुरक्षा की गारंटी है। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू होने के बाद उत्तराखंड में विवाह पंजीकरण में 24 गुना बढ़ोतरी हुई है। यूसीसी से लोगों में विवाह पंजीकरण कराने के लिए जागरूकता बढ़ी है। सीएम धामी ने पहली कैबिनेट बैठक में ही राज्य में यूसीसी लागू करने का फैसला किया था। सभी औपचारिकताएं और जनमत संग्रह करने के बाद प्रदेश में 27 जनवरी 2025 से यूसीसी कानून लागू कर दिया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड यूसीसी लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने का संकल्प लिया था और पार्टी के सत्ता में आने पर उन्होंने यह संकल्प पूरा किया। 27 जनवरी को यूसीसी कानून लागू हुए एक वर्ष हो जाएगा। यूसीसी लागू होने बाद 1634 पहुंच गईमुख्यमंत्री का यह ऐतिहासिक फैसला सामाजिक न्याय, लैंगिक समानता और समान अधिकारों की दिशा में उठाया गया साहसिक कदम था। यह कानून भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 की भावना के अनुरूप है और इसका उद्देश्य हर वर्ग या समुदाय के सभी नागरिकों खास तौर से महिलाओं को समान अधिकार और सम्मान प्रदान करना है। विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, लिव इन रिलेशनशिप और इनसे जुड़े मुद्दों को यूसीसी में शामिल किया गया है। इस कानून में जहां महिला व पुरुषों के लिए विवाह की उम्र निर्धारित कर दी गई है। वहीं सभी धर्मों में तलाक और दूसरी प्रक्रिया के लिए भी कड़े प्रावधान किए गए हैं। इस कानून के लागू होने से महिलाओं को बहुविवाह व हलाला जैसी कुप्रथाओं से मुक्ति मिली है। यूसीसी लागू होने के बाद राज्य में विवाह पंजीकरण में तेजी आई है। आंकड़ों के अनुसार राज्य में 27 जनवरी 2025 से यूसीसी लागू होने बाद जुलाई 25 तक यानी छह माह की अवधि में विवाह पंजीकरण की संख्या तीन लाख से अधिक पहुंच गई है, जबकि वर्ष 2010 में लागू पुराने एक्ट के तहत 26 जनवरी 2025 तक कुल 3.30 लाख से अधिक विवाह पंजीकरण हुए थे। प्रतिदिन का औसत देखा जाए तो पुराने एक्ट के अनुसार प्रतिदिन विवाह पंजीकरण की औसत संख्या मात्र 67 थी, जो यूसीसी लागू होने बाद 1634 पहुंच गई है।

मतदाता सूची ड्यूटी में खतरा, बैंक अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर AIBOC ने उठाई आवाज़

3.25 लाख सदस्यों का प्रतिनिधित्व करने वाले बैंकिंग क्षेत्र के सबसे बड़े ट्रेड यूनियन संगठन ‘अखिल भारतीय बैंक अधिकारी परिसंघ’ (एआईबीओसी) ने पश्चिम बंगाल में एसआईआर ड्यूटी को लेकर चिंता जताई है। ‘एसआईआर’ ड्यूटी, बैंक अधिकारियों के लिए ‘जी का जंजाल’ बन गई है। एआईबीओसी ने तनावपूर्ण/असुरक्षित माहौल में बैंक अधिकारियों को पर्याप्त सुरक्षा देने की मांग की है। पश्चिम बंगाल में 26 दिसंबर 2025 से 14 फरवरी 2026 तक, लगभग डेढ़ महीने की अवधि के लिए, बैंक अधिकारियों को मतदाता सूची सूक्ष्म पर्यवेक्षक (ईआरएमओ) के रूप में तैनात किया गया है। परिसंघ ने इस मामले में भारतीय निर्वाचन आयोग, राज्य निर्वाचन अधिकारियों और वित्तीय सेवा विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। घटना स्थल पर पुलिस मौजूद नहींअखिल भारतीय बैंक अधिकारी परिसंघ (एआईबीओसी) के महासचिव रूपम रॉय ने अपने बयान में यह बात कही है। परिसंघ ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान अपने सदस्यों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। फरक्का में हुई एक घटना का हवाला देते हुए रॉय ने कहा, एसआईआर प्रक्रिया के सूक्ष्म पर्यवेक्षक के रूप में तैनात बैंक अधिकारियों पर कथित तौर पर असामाजिक तत्वों ने हमला किया है। इसमें कुछ अधिकारी घायल हो गए हैं। यह घटना संकेत देती है कि तनावपूर्ण एवं असुरक्षित माहौल में बिना पर्याप्त सुरक्षा के ड्यूटी कर रहे बैंक अधिकारी व्यक्तिगत जोखिम का सामना कर रहे हैं। एआईबीओसी ने आरोप लगाया है कि घटना स्थल पर पुलिस मौजूद नहीं थी। परिचालन परिणामों पर सीधा प्रभाव पड़ेगाएसआईआर ड्यूटी पर प्रतिनियुक्त अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी निर्वाचन आयोग की है। यह तैनाती, तिमाही और वर्ष के अंत के सबसे महत्वपूर्ण बैंकिंग समय के साथ मेल खाती है। एआईबीओसी को आशंका है कि अधिकारियों का इस प्रकार लंबे समय तक मुख्य बैंकिंग कार्यों से अलग होना, आंतरिक और बाह्य नियामक अनुपालन, लेखा समापन, लेखापरीक्षा संबंधी कार्य और वैधानिक/व्यावसायिक लक्ष्यों की प्राप्ति में बाधा उत्पन्न करेगा। एसआईआर ड्यूटी के चलते से ग्राहक सेवा और परिचालन परिणामों पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। इसका अन्य सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन पर भी गंभीर असर पड़ेगा। हालांकि बैंक अधिकारियों ने राष्ट्रीय हित में वैध सार्वजनिक कर्तव्यों का निरंतर पालन किया है, लेकिन इस तरह की तैनाती का पैमाना, समय और लंबी अवधि अब आवश्यक बैंकिंग कार्यों को काफी हद तक बाधित कर रहा है। बैंक अधिकारियों को अनावश्यक परिचालन, अनुपालन और सेवा जोखिमों की तरफ ले जाया जा रहा है। इससे अधिकारियों के व्यक्तिगत जीवन में भी काफी व्यवधान उत्पन्न होता है। इतना ही नहीं, एसआईआर ड्यूटी से कार्य की निरंतरता, प्रशिक्षण संबंधी दायित्व और वैध कैरियर प्रगति प्रभावित होती है।

इंडो-पैसिफिक से पिच तक, जयशंकर-मोतेगी मुलाकात में कूटनीति के साथ खेल भावना

भारत और जापान के रिश्तों में रणनीति, अर्थव्यवस्था और कूटनीति के साथ अब खेल की साझा भावना भी जुड़ गई है। 18वें भारत-जापान रणनीतिक संवाद के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर और जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी के बीच गंभीर वैश्विक मुद्दों के साथ हल्के-फुल्के क्षण भी देखने को मिले। इस बैठक में भारत ने स्पष्ट किया कि अनिश्चित वैश्विक माहौल में आर्थिक सुरक्षा अब कूटनीति का केंद्र बिंदु बन चुकी है। जयशंकर ने एक्स पर जापानी भाषा में एक भी पोस्ट किया। इस पर जयशंकर ने कहा कि जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी का भारत में स्वागत करते हुए मुझे बहुत खुशी हो रही है। आज जब हम इंडिया-जापान स्ट्रेटेजिक डायलॉग कर रहे हैं, तो मुझे यह जानकर और भी खुशी हो रही है कि मेरी तरह, मंत्री मोतेगी भी क्रिकेट के शौकीन हैं। इंडो-पैसिफिक’ दृष्टिकोण एक-दूसरे के पूरकवहीं, वार्ता में जयशंकर ने अपने शुरुआती वक्तव्य में कहा कि भारत जापान के साथ साझेदारी को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। उन्होंने बताया कि पिछले दो दशकों में दोनों देशों का रिश्ता केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह व्यापक, रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी में बदल चुका है। भारत और जापान प्रमुख लोकतंत्र और बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं, इसलिए वैश्विक व्यवस्था को आकार देने की जिम्मेदारी भी दोनों पर है। जयशंकर ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के संदर्भ में साझा सोच पर जोर दिया। उन्होंने याद दिलाया कि पूर्व जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे का 2007 में भारतीय संसद में दिया गया ‘कनफ्लुएंस ऑफ द टू सीज’ भाषण आज के इंडो-पैसिफिक ढांचे की नींव बना। जयशंकर के अनुसार, भारत की ‘महासागर’ पहल और जापान का ‘फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक’ दृष्टिकोण एक-दूसरे के पूरक हैं। जापान में उनके साथ क्रिकेट मैच देखने की उम्मीद रखतेरणनीतिक संवाद के बीच एक हल्का पल तब आया जब जयशंकर ने बताया कि उन्हें मोतेगी में क्रिकेट के प्रति गहरी रुचि देखने को मिली। जयशंकर ने सोशल मीडिया पर साझा किया कि उन्होंने जापान की राष्ट्रीय क्रिकेट टीम की जर्सी प्राप्त की और बदले में भारतीय क्रिकेट टीम द्वारा हस्ताक्षरित बल्ला भेंट किया। जयशंकर ने मुस्कुराते हुए कहा कि वे भविष्य में जापान में उनके साथ क्रिकेट मैच देखने की उम्मीद रखते हैं। जयशंकर ने भरोसा जताया कि अगले वर्ष भारत-जापान राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने के साथ यह साझेदारी और मजबूत होगी। यह बैठक ऐसे समय हुई है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापानी प्रधानमंत्री साने ने हाल ही में जी20 के दौरान मुलाकात की थी। विदेश मंत्री ने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत और जापान क्वाड, संयुक्त राष्ट्र और जी20 जैसे मंचों पर मिलकर वैश्विक स्थिरता के लिए काम करते रहेंगे।

जन्मदिन पर मायावती का बड़ा बयान

“सभी सरकारें बसपा की योजनाएं चला रही हैं, यूपी में पांचवीं बार बनाएंगे सरकार”अपने जन्मदिन पर पत्रकारों को संबोधित करते हुए बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि सभी सरकारें बसपा द्वारा ही चलाई जा रही योजनाओं का नाम बदलकर चला रही हैं। उन्होंने कहा कि विरोधियों ने भ्रम फैलाकर बसपा को तोड़ने की कोशिश की है। कांग्रेस, बीजेपी सहित अन्य जातिवादी पार्टियां अलग-अलग हथकंडे अपना रही हैं। इनको मुंहतोड़ जवाब देकर यूपी में पांचवीं बार बसपा की सरकार बनानी है। उन्होंने कहा कि शीतकालीन सत्र में बीजेपी और कांग्रेस के विधायक अपनी उपेक्षा से नाराज होकर जुटे थे। बसपा ने ब्राह्मण को भागीदारी दी। ब्राह्मणों को किसी का चोखा बाटी नहीं चाहिए। ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य समाज का बसपा सरकार पूरा ध्यान रखेगी। बसपा ने हमेशा ही उनका सम्मान किया है। बसपा ऐसी पार्टी है जिसने सभी जातियों और धर्मो का सम्मान किया है। गठबंधन करेंगे लेकिन इसमें अभी बरसों लगेंगेसरकारों पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि कांशीराम के मरने पर राष्ट्रीय शोक नहीं घोषित किया। उनकी उपेक्षा की गई। दूसरी जातियों के साथ मुस्लिम समाज के साथ अन्याय हो रहा। बसपा सरकार में दंगा फसाद नहीं हुआ। हमारी सरकार में यादवों का भी ध्यान रखा गया। मायावती ने कहा कि इस बार के विधानसभा चुनाव में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। वर्तमान में सभी समाज दुखी हैं और वह बसपा की सरकार चाह रहे हैं। इस बार गुमराह नहीं होना है। ईवीएम में धांधली और बेइमानी की चर्चा है। ये व्यवस्था कभी भी खत्म हो सकती है। एसआईआर की काफी शिकायतें है। इससे हमें सजग रहना होगा। गठबंधन से बसपा को नुकसान होता है। खासकर अपर कास्ट का वोट जातिवादी पार्टियों को मिलता है। तभी सारी पार्टियां हमसे गठबंधन चाहती हैं। भविष्य में बसपा सभी चुनाव अकेले लड़ेगी। आगे जब अपर कास्ट का वोट हमें मिलने का भरोसा हो जाएगा, तब गठबंधन करेंगे लेकिन इसमें अभी बरसों लगेंगे।

‘जेलर 2’ के बीच पोंगल पर फैंस से मिले रजनीकांत, वायरल हुआ सुपरस्टार का सादगी भरा वीडियो

साउथ के सुपरस्टार रजनीकांत ‘जेलर 2’ में नजर आएंगे। यह एक भारतीय तमिल भाषा की एक्शन कॉमेडी फिल्म है। इसी बीच सोशल मीडिया हैंडल पर एक वीडियो चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसमें सुपरस्टार रजनीकांत पोंगल के अवसर पर अपने फैंस से मिलने के लिए घर से बाहर आकर उनसे मिले। सोशल मीडिया हैंडल पर रजनीकांत का एक वीडियो जमकर वायरल हो रहा है। जिसमें रजनीकांट व्हाइट कुर्ते और लू्ंगी में नजर आ रहे हैं। रजनीकांत का यह वीडियो पोंगल के अवसर का है, जिसमें वह खासतौर पर अपने फैंस को पोंगल की बधाई देने के लिए घर से बाहर आए और उन्हें हाथ हिलाकर (हैलो) सभी फैंस का अभिवादन किया। इस दौरान रजनीकांत की झलक पाकर फैंस बेहद खुश हुए। शारीरिक व्यायाम से शरीर में चमक आती‘जेलर 2’ एक्शन फिल्म है। इस फिल्म को नेल्सन दिलीपकुमार ने लिखा और निर्देशित किया है। इसका निर्माण कलानिधि मारन ने सन पिक्चर्स के बैनर तले किया है। जेलर (2023) की अगली कड़ी में रजनीकांत मुख्य किरदार में हैं। इस फिल्म में रजनीकांत के अलावा एसजे सूर्या, राम्या कृष्णन, विनायकान, योगी बाबू और मिर्ना भी हैं। फिल्म की शूटिंग मार्च 2025 में चेन्नई में शुरू हुई है। इस फिल्म का संगीत अनिरुद्ध रविचंदर ने तैयार किया है। ‘जेलर 2’, 12 जून 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।कमल हासन ने X पर अपने फैंस को पोंगल की बधाई देते हुए लिखा, ‘पोंगल, तमिल संस्कृति के शिखर के रूप में मनाया जाता है। प्रकृति और कृषि की प्रशंसा करने वाले इस शुभ दिन पर, हर घर में खुशियां उमड़ें। तमिल भूमि की समृद्धि और तमिल लोगों का गौरव विश्वभर में फैले। सभी तमिल भाइयों को मेरी हार्दिक थाई पोंगल की शुभकामनाएं।’ प्रभु देवा ने योगासन करते हुए अपना एक वीडियो एक्स पर शेयर किया और फैंस को पोंगल की शुभकामनाएं दीं और लिखा, ‘तमिल सूर्योदय हो तो मार्ग प्रशस्त होता है। शारीरिक व्यायाम से शरीर में चमक आती है। पोंगल की हार्दिक शुभकामनाएं।’

PM मोदी ने नई दिल्ली में CSPOC 2026 का किया उद्घाटन, बोले भारत का लोकतंत्र असाधारण और समावेशी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को नई दिल्ली के संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में 28वीं कॉमनवेल्थ स्पीकर्स एंड प्रेसिडिंग ऑफिसर्स कॉन्फ्रेंस (CSPOC), 2026 का उद्घाटन किया। प्रधानमंत्री का स्वागत लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, और राज्यसभा के उपाध्यक्ष हरिवंश नारायण सिंह ने किया।प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा की भारत की राष्ट्रपति देश की पहले नागरिक, एक महिला हैं। दिल्ली की मुख्यमंत्री भी महिला हैं। आज, भारतीय महिलाएं न केवल लोकतंत्र में भाग ले रही हैं बल्कि नेतृत्व भी कर रही हैं। आपमें से कई लोग भारत को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र के रूप में जानते हैं। वास्तव में, हमारे लोकतंत्र का पैमाना असाधारण है। उदाहरण के तौर पर, 2024 में हुए भारत के आम चुनाव मानव इतिहास का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक अभ्यास थे। लगभग 98 करोड़ नागरिकों ने वोट के लिए पंजीकरण कराया। यह संख्या कुछ महाद्वीपों की जनसंख्या से भी अधिक है। चुनावों में 8,000 से अधिक उम्मीदवार और 700 से अधिक राजनीतिक पार्टियां भाग लीं। महिलाओं के मतदान में भी रिकॉर्ड भागीदारी देखी गई। हॉल में भारत के भविष्य से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण निर्णयउन्होंने कहा कि जिस स्थान पर आप सभी बैठे हैं वो भारत की डेमोक्रेटिक जर्नी का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है। गुलामी के आखिरी वर्षों में जब भारत की आजादी तय हो चुकी थी, उस समय इसी सेंट्रल हॉल में भारत की संविधान की रचना के लिए संविधान सभा की बैठकें हुई थी। भारत की आजादी के बाद 75 वर्षों तक यह इमारत भारत की संसद रही और इसी हॉल में भारत के भविष्य से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण निर्णय और अनेक चर्चाएं हुई। अब लोकतंत्र को समर्पित इस स्थान को भारत ने संविधान सदन का नाम दिया है। वैश्विक दक्षिण के लिए भी नए रास्ते बनाने का समयकॉमनवेल्थ देशों की कुल जनसंख्या का लगभग 50 फीसदी हिस्सा भारत में बसता है। हमारा प्रयास रहा है कि भारत सभी देशों के विकास में अधिक से अधिक योगदान करे। कॉमनवेल्थ के सतत विकास लक्ष्यों में स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन और आर्थिक विकास और नवाचार के क्षेत्र में हम पूरी जिम्मेदारी के साथ अपनी प्रतिबद्धता को पूरा कर रहे हैं। भारत सभी साथियों से सीखने का निरंतर प्रयास करता है। हमारा ये भी प्रयास होता है कि हमारे अनुभव अन्य कॉमनवेल्थ साझेदारों के भी काम आए। आज दुनिया अभूतपूर्व परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में वैश्विक दक्षिण के लिए भी नए रास्ते बनाने का समय है।

ईरान में फंसे 2000 कश्मीरी छात्रों की सुरक्षा पर चिंता, JKSA ने मोदी–जयशंकर से तत्काल निकासी की मांग

जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (जेकेएसए) ने ईरान में फंसे करीब 2000 कश्मीरी छात्रों और अन्य भारतीय नागरिकों की बढ़ती सुरक्षा चिंताओं को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री डॉ. एस.जयशंकर से तत्काल हस्तक्षेप कर भारतीय छात्रों सहित सभी नागरिकों की निकासी की व्यवस्था करने की मांग की है। एसोसिएशन ने कहा है कि तेहरान में भारतीय दूतावास ने छात्रों को जल्द से जल्द स्व-व्यवस्थित तरीके से ईरान छोड़ने की सलाह दी है लेकिन अभी तक कोई औपचारिक या समन्वित निकासी योजना घोषित नहीं की गई है। जेकेएसए के राष्ट्रीय संयोजक नासिर खुएहामी ने एक बयान में कहा कि ईरान में तेजी से बिगड़ती सुरक्षा स्थिति ने कश्मीर में व्यापक भय, अनिश्चितता और चिंता पैदा कर दी है। अभिभावक अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर अत्यधिक परेशान हैं। राजनयिक हस्तक्षेप की आवश्यकता पर बल दियाएसोसिएशन ने कहा कि अस्थिर और अशांत वातावरण में छात्रों से स्वयं निकासी की व्यवस्था करने की उम्मीद करना न तो सुरक्षित है और न ही व्यावहारिक। संगठित निकासी तंत्र की अनुपस्थिति ने छात्रों और उनके परिवारों की परेशानी को और बढ़ा दिया है। जेकेएसए ने विदेश मंत्रालय की क्षमताओं पर पूर्ण विश्वास जताते हुए भारत सरकार के विदेशों में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के निरंतर प्रयासों की सराहना की। हालांकि, वर्तमान स्थिति की गंभीरता को देखते हुए त्वरित, सक्रिय और समन्वित राजनयिक हस्तक्षेप की आवश्यकता पर बल दिया गया ताकि छात्र खुद संकट का सामना न करें। 2,000 कश्मीरी छात्र मुख्य रूप से मेडिकल कोर्स कर रहेएसोसिएशन ने भारत सरकार से स्पष्ट निकासी ढांचा, समर्पित आपातकालीन हेल्पलाइन और सुरक्षित पारगमन मार्ग स्थापित करने की अपील की है जिससे भारतीय छात्र सुरक्षित, सम्मानजनक और सुरक्षित तरीके से घर लौट सकें। बता दें कि ईरान में जारी व्यापक विरोध प्रदर्शनों और अशांति के बीच भारतीय दूतावास ने 14 जनवरी 2026 को ताजा सलाह जारी की है जिसमें सभी भारतीय नागरिकों (छात्रों, तीर्थयात्रियों, व्यवसायियों और पर्यटकों) को उपलब्ध परिवहन साधनों से जल्द से जल्द देश छोड़ने की सलाह दी गई है। ईरान में लगभग 2,000 कश्मीरी छात्र मुख्य रूप से मेडिकल कोर्स कर रहे हैं। पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने गुरुवार को ईरान में जारी तनाव के मद्देनजर कश्मीरी छात्रों समेत अन्य छात्रों की सुरक्षित वापसी के लिए केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की। यह मांग ईरान में पढ़ रहे कई कश्मीरी छात्रों के अभिभावकों द्वारा वहां की स्थिति पर चिंता व्यक्त करने और केंद्र से अपने बच्चों की वापसी में सहायता करने की अपील करने के एक दिन बाद की गई है।

मणिकर्णिका घाट पुनर्विकास पर खरगे का मोदी पर तीखा हमला,“विरासत मिटाकर नामपट्टिका लगाने का आरोप”

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने गुरुवार को वाराणसी के मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि वे सिर्फ अपना नाम अंकित करने के लिए हर ऐतिहासिक धरोहर को मिटाना चाहते हैं। खरगे ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा ” गुप्त काल में वर्णित और बाद में लोकमाता अहिल्याबाई होलकर द्वारा पुनर्स्थापित मणिकर्णिका घाट की दुर्लभ प्राचीन विरासत को जीर्णोद्धार के बहाने ध्वस्त करने का अपराध किया है,” आगे कहा कि सौंदर्यीकरण और व्यवसायीकरण के नाम पर प्रधानमंत्री मोदी ने वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर सदियों पुरानी धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को ध्वस्त करने के लिए बुलडोजर चलाने का आदेश दिया है। “नरेंद्र मोदी जी… आप हर ऐतिहासिक धरोहर को मिटाना चाहते हैं। वह भी बस उस पर अपनी नामपट्टिका चिपकाना चाहते हैं,” हमारी सांस्कृतिक विरासत की बारीप्रदर्शनकारियों ने मणिकर्णिका घाट की पुनर्विकास योजना के तहत विध्वंस अभियान का विरोध किया है। अहिल्याबाई होलकर की एक शताब्दी पुरानी प्रतिमा को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है, जिसे जिला प्रशासन ने खारिज कर दिया है। जिला मजिस्ट्रेट सत्येंद्र कुमार ने बुधवार को कहा कि कलाकृतियों को संस्कृति विभाग द्वारा सुरक्षित कर लिया गया है। काम पूरा होने के बाद उन्हें उनके मूल स्वरूप में पुनः स्थापित कर दिया जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि इस नवीनीकरण का उद्देश्य घाट पर स्वच्छता और स्थान प्रबंधन में सुधार करना है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में शवदाह होते हैं। खरगे के अनुसार, एक गलियारे के नाम पर छोटे-बड़े मंदिरों और तीर्थस्थलों को ध्वस्त कर दिया गया और अब प्राचीन घाटों की बारी है। विश्व का सबसे प्राचीन शहर काशी, आध्यात्मिकता, संस्कृति, शिक्षा और इतिहास का संगम है,जो पूरी दुनिया को आकर्षित करता है। “क्या इन सबके पीछे का मकसद एक बार फिर अपने व्यापारिक सहयोगियों को लाभ पहुंचाना है? आपने पानी, जंगल और पहाड़ उन्हें सौंप दिए हैं, और अब हमारी सांस्कृतिक विरासत की बारी है।” श्रद्धालुओं के विश्वास के साथ विश्वासघात करने का इरादाखरगे ने कहा”देश की जनता के आपसे दो सवाल हैं: क्या विरासत को संरक्षित रखते हुए जीर्णोद्धार, सफाई और सौंदर्यीकरण नहीं किया जा सकता था? पूरा देश याद करता है कि कैसे आपकी सरकार ने बिना किसी परामर्श के महात्मा गांधी और बाबासाहेब अंबेडकर सहित महान भारतीय हस्तियों की मूर्तियों को संसद परिसर से हटाकर एक कोने में रख दिया था।,” उन्होंने दावा किया कि जलियांवाला बाग स्मारक में, इसी “नवीनीकरण” के नाम पर हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदानों को दीवारों से मिटा दिया गया था। उन्होंने पूछा कि मणिकर्णिका घाट पर सदियों पुरानी मूर्तियां, जो बुलडोजरों का शिकार हुईं, क्यों नष्ट कर दी गईं और मलबे में तब्दील कर दी गईं? “क्या इन्हें किसी संग्रहालय में संरक्षित नहीं किया जा सकता था? आपने दावा किया था, ‘मां गंगा ने मुझे बुलाया है’। आज आप मां गंगा को भूल गए हैं। वाराणसी के घाट वाराणसी की पहचान हैं। क्या आप इन घाटों को आम जनता के लिए दुर्गम बनाना चाहते हैं?” खरगे ने कहा कि लाखों लोग हर साल अपने जीवन के अंतिम चरण में मोक्ष प्राप्त करने के लिए काशी आते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री से पूछा कि क्या उनका “इन श्रद्धालुओं के विश्वास के साथ विश्वासघात करने का इरादा है”।

यूपी बन रहा वैश्विक कंपनियों का केंद्र, 1000+ ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर से पांच लाख युवाओं को रोजगार

यूपी तेजी से विकसित होती अवसंरचना के कारण वैश्विक कंपनियों को दीर्घकालिक निवेश के लिए अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। उद्योग जगत के विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में यूपी वैश्विक कंपनियों का एक बहुत बड़ा केंद्र बनेगा। इसी कड़ी में प्रदेश में 1000 से अधिक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) स्थापित करने का लक्ष्य तय किया गया है। इससे पांच लाख से अधिक युवाओं को रोजगार मिलने की उम्मीद है। ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर वह जगह होती है जहां कोई बड़ी विदेशी कंपनी अपने महत्वपूर्ण काम खुद के कर्मचारियों से करवाती है, न कि किसी बाहरी वेंडर से। उप्र जीसीसी नीति 2024 के माध्यम से योगी सरकार ने जिस नीतिगत स्पष्टता और दीर्घकालिक दृष्टिकोण को अपनाया है उससे वैश्विक कंपनियों की सबसे बड़ी चिंता दूर हुई है। परियोजनाएं तय समय में पूरी हो सकेंइनमें नियमों की अनिश्चितता और प्रक्रियाओं में देरी सबसे प्रमुख थी। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने स्पष्ट ढांचा तैयार किया है जिससे निवेशकों को शुरुआत से ही नियम शर्तें और दायित्व समझ में आ सकें। इससे भरोसे का वातावरण बना है निर्णय लेने की गति तेज हुई है। इसी का परिणाम है कि प्रदेश में इस समय लगभग 90 जीसीसी हैं। भूमि आधारित प्रोत्साहन, निवेश की शुरुआती लागत को घटाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। सरकार की सोच है कि जब निवेशक को शुरुआती चरण में संरचनात्मक सहयोग मिलेगा तो वह लंबे समय तक प्रदेश से जुड़ा रहेगा। यही कारण है कि अस्थायी ऑफिस या किराए की व्यवस्था के स्थान पर स्थायी औद्योगिक ढांचे को प्राथमिकता दी जा रही है। यह मॉडल प्रदेश के औद्योगिक परिदृश्य को मजबूत और स्थिर बनाने में अहम है। राज्य सरकार का जोर केवल निवेश आकर्षित करने तक सीमित नहीं है, इसके समयबद्ध क्रियान्वयन पर भी है। इसके लिए जवाबदेही तय की गई है जिससे परियोजनाएं तय समय में पूरी हो सकें। उपस्थिति दर्ज करेंगीग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स के जरिये प्रदेश में हाई वैल्यू रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। सूचना प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, डाटा और प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुभव मिल रहा है। इससे न केवल प्रदेश की मानव संसाधन क्षमता सुदृढ़ होगी बल्कि प्रतिभा पलायन पर भी प्रभावी रूप से नियंत्रण होगा। विशेष रूप से कम विकसित क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहित कर सरकार क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करने की दिशा में भी आगे बढ़ रही है। जब वैश्विक कंपनियां इन क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति दर्ज करेंगी तो स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।