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केरल निकाय चुनाव विवाद: साजी चेरियन ने दी सफाई, मुस्लिम लीग और भाजपा की जीत पर बात की

केरल के मंत्री साजी चेरियन के कासरगोड और मलप्पुरम में हुए निकाय चुनावों को लेकर दिए गए बयान पर सियासी बवाल मचा हुआ है। इस बीच साजी चेरियन ने अपने बयान पर सफाई देते हुए दावा किया कि नतीजों को लेकर उनकी टिप्पणियों को तोड़-मरोड़ कर लोगों को गुमराह करने के लिए इस्तेमाल किया गया। कांग्रेस ने चेरियन की टिप्पणियों को उन क्षेत्रों में मुस्लिम लीग उम्मीदवारों की जीत के संदर्भ में देखा था। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए चेरियन ने कहा कि कासरगोड नगरपालिका में कुल 39 सीटें हैं, जहां मुस्लिम बहुल इलाकों में मुस्लिम लीग को और हिंदू बहुल क्षेत्रों में भाजपा को जीत मिली। यह स्पष्ट किया जाना चाहिएउन्होंने साफ किया कि उनका आशय यह बताना था कि धर्मनिरपेक्षता की बात करने वाली पार्टियों का प्रदर्शन कमजोर रहा। उनके अनुसार सीपीआई(एम) को केवल एक सीट और कांग्रेस को दो सीटें मिलीं। वहीं, ‘सांप्रदायिक राजनीति की बात करने वाली’ भाजपा ने 12 सीटें जीतीं, जबकि मुस्लिम लीग के 22 उम्मीदवार निर्वाचित हुए। इस बीच चेरियन के बयान की कांग्रेस ने आलोचना की। केपीसीसी अध्यक्ष सनी जोसेफ ने सोमवार को सवाल उठाया कि क्या यह बयान मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की अनुमति से दिया गया था। उन्होंने कहा, ‘यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि क्या यह सीपीआई(एम) का आधिकारिक रुख है?’ देश के सामने एक वैकल्पिक शासन मॉडल पेश कियाचेरियन ने रविवार को यूडीएफ और केरल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष वीडी सतीशन पर ‘सांप्रदायिक और विभाजनकारी राजनीति’ करने का आरोप लगाया था। अलप्पुझा में संवाददाताओं से बातचीत में चेरियन ने कहा था कि राज्य में सांप्रदायिकता के खिलाफ सख्त रुख सीपीआई(एम) और एलडीएफ ने ही अपनाया है। उन्होंने यह भी कहा कि सीपीआई(एम) ने केरल में अपने नजरिए से देश के सामने एक वैकल्पिक शासन मॉडल पेश किया है।

हिमाचल कैबिनेट के बड़े फैसले, हमीरपुर में कैंसर केयर सेंटर से लेकर एशिया की सबसे लंबी जिपलाइन तक मंजूरी

हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक सोमवार को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में आयोजित की गई। इस बैठक में कई बड़े फैसले लिए गए। राज्य कैबिनेट की बैठक में डॉ. राधाकृष्णन सरकारी मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में एक अत्याधुनिक कैंसर केयर सेंटर स्थापित करने का फैसला किया गया। कैबिनेट ने 11 नए विभागों के गठन और विभिन्न श्रेणियों के जरूरी पदों के सृजन और उन्हें भरने की भी मंजूरी दी। कैबिनेट ने लाभार्थियों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए सामाजिक सुरक्षा (पेंशन और भत्ता) नियम 2010 में संशोधन करने का फैसला किया है। कैबिनेट ने राज्य में इस्तेमाल न किए गए जियोथर्मल एनर्जी रिसोर्स की खोज और विकास को आसान बनाने के लिए जियोथर्मल एनर्जी पर राष्ट्रीय नीति को अपनाने की भी मंजूरी दी। इसने इस नीति को लागू करने के लिए ऊना निदेशालय को नोडल एजेंसी के तौर पर मंजूरी दी और जियोथर्मल एनर्जी से जुड़े दिशा-निर्देशों को शामिल करने के लिए स्वर्ण जयंती एनर्जी पॉलिसी 2021 में संशोधनों को मंजूरी दी। आने वाले पर्यटकों के लिए एक बड़ा आकर्षण बनेगीकैबिनेट ने अनाथों और विधवाओं के लिए कल्याणकारी योजनाओं को मजबूत करने के मकसद से राज्य में पहली बिक्री के समय पेट्रोल और हाईस्पीड डीजल पर अनाथ और विधवा सेस लगाने के लिए एक अध्यादेश जारी करने को मंजूरी दे दी है। यह सेस उपभोक्ताओं पर बोझ नहीं डालेगा, साथ ही इन कल्याणकारी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन भी सुनिश्चित करेगा। कैबिनेट ने टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद सफल बोली लगाने वालों को 25 मेगावाट तक के चार हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट्स आवंटित करने की मंजूरी दे दी है। कैबिनेट ने कांगड़ा जिले के धर्मशाला के पास 4.3 किलोमीटर लंबा नड्डी जिपलाइन प्रोजेक्ट बनाने का फैसला किया है, जिसकी अनुमानित लागत 7.41 करोड़ रुपये होगी। पूरा होने पर यह एशिया की सबसे लंबी जिपलाइन होगी और उम्मीद है कि यह इस इलाके में आने वाले पर्यटकों के लिए एक बड़ा आकर्षण बनेगी। तय सैलरी पर फिर से काम पर रखने का भी फैसला कियाकैबिनेट ने इन सर्विस जीडीओ और एमओ के लिए 66.66 प्रतिशत कोटा और सीधे उम्मीदवारों के लिए 33.33 प्रतिशत सीटें देकर सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर पॉलिसी में बदलाव को मंजूरी दे दी। यह भी तय किया गया कि अगर संबंधित श्रेणी में योग्य उम्मीदवार नहीं मिलते हैं, तो सीटों का बंटवारा अंतरपरिवर्तनीय होगा। मंत्रिमंडल ने सहायक आयुक्त राज्य कर एवं आबकारी के 11 पदों को भरने की मंजूरी दे दी। शिमला जिले के हीरानगर में मानसिक रूप से दिव्यांग बच्चों के आवासीय संस्थान में जॉब ट्रेनी के तौर पर अलग-अलग श्रेणी के 11 पदों को भरने का भी फैसला किया। राजस्व विभाग के आपदा प्रबंधन सेल में अलग-अलग श्रेणी के 11 पद बनाने और भरने की मंजूरी दी। राजस्व विभाग में तहसीलदार के 6 पदों को भरने की भी मंजूरी दी। इसके अलावा, राजस्व विभाग में लंबित मामलों को जल्दी निपटाने के लिए सेवानिवृत्त राजस्व अधिकारियों को तय सैलरी पर फिर से काम पर रखने का भी फैसला किया गया।

ईरान ने अमेरिकी आरोपों को खारिज किया, कहा- हमारी सेना सिर्फ देश की सुरक्षा पर केंद्रित

ईरान में जारी सरकार विरोधी प्रदर्शन और उसमें अमेरिकी दखल पूरे पश्चिम एशिया में तनाव का माहौल है। ऐसे में अब ईरान ने अमेरिका के उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें कहा गया था कि ईरान अमेरिकी ठिकानों पर हमले की तैयारी कर रहा है। ईरान का कहना है कि अमेरिका जानबूझकर पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। यह जानकारी ईरान के सरकारी टीवी चैनल प्रेस टीवी ने दी है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने शनिवार को कहा कि अमेरिका की ओर से लगाए गए ये आरोप बेबुनियाद हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका की यह नीति रही है कि वह इस क्षेत्र में हालात को और बिगाड़े। बगाई का यह बयान उस समय आया, जब अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर फारसी भाषा में एक पोस्ट कर दावा किया कि उसे ऐसी रिपोर्टें मिली हैं, जिनसे संकेत मिलता है कि ईरान अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने के विकल्पों पर काम कर रहा है। समर्थन प्राप्त लोगों ने कई शहरों में हमले किएइस्माइल बगाई ने साफ कहा कि ईरान की सेना पूरी तरह देश की सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा पर ध्यान केंद्रित किए हुए है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर ईरान पर किसी तरह का हमला किया गया, तो उसका जवाब मजबूती और निर्णायक तरीके से दिया जाएगा। बता दें कि इससे पहले अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने अपनी पोस्ट में कहा था कि सभी विकल्प खुले हैं और अगर अमेरिकी ठिकानों पर हमला हुआ, तो उसका जवाब बहुत ही कड़ी ताकत से दिया जाएगा। प्रेस टीवी की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले महीने ईरान में आर्थिक समस्याओं को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू हुए थे, जो बाद में हिंसक हो गए। रिपोर्ट में दावा किया गया कि इन प्रदर्शनों के दौरान तोड़फोड़ और अराजकता फैलाने के लिए अमेरिका और इजरायल से जुड़े लोगों के बयानों ने माहौल को और भड़काया। ईरान का आरोप है कि इस अशांति के दौरान विदेशी समर्थन प्राप्त लोगों ने कई शहरों में हमले किए, जिसमें सुरक्षा बलों के जवानों और आम नागरिकों की मौत हुई और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा। अपनी सुरक्षा से समझौता नहीं करेगाईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई ने शनिवार को कहा कि इन दंगों और तबाही के लिए अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को वह मुख्य जिम्मेदार मानते हैं। उन्होंने कहा कि अशांति फैलाने वाले कुछ लोग ऐसे थे, जिन्हें अमेरिकी और इजरायली एजेंसियों ने पहचाना, प्रशिक्षित किया और भर्ती किया था। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी बाहरी दबाव या धमकी से नहीं डरेगा और अपनी सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा। क्या बयानबाजी के इतर अब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव और भयावह रूप ले सकता है? कारण है कि ईरान ने दो टूक अंदाज में अमेरिका के सारे दावों को खारिज कर दिया। ईरान ने अमेरिकी दावों को बेबुनियाद करार दिया कि वह अमेरिकी ठिकानों पर हमले की तैयारी कर रहा है।

मोहन भागवत का बयान धर्म ही भारत का चालक, यही बनाएगा देश को विश्वगुरु

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने रविवार को कहा कि जब तक धर्म भारत का मार्गदर्शन करता रहेगा, देश विश्वगुरु बना रहेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत के पास जो आध्यात्मिक ज्ञान है, वह दुनिया में कहीं और उपलब्ध नहीं है, क्योंकि अन्य जगहों पर आध्यात्मिकता की कमी है। एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि धर्म पूरे ब्रह्मांड का चालक है और सृष्टि का हर काम इसी सिद्धांत पर चलता है। उन्होंने कहा कि भारत को अपने पूर्वजों, संतों और ऋषियों से एक समृद्ध आध्यात्मिक विरासत मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उदाहरण देते हुए संघ प्रमुख ने कहा, “चाहे वह नरेंद्र भाई हों, मैं हूं, आप हों या कोई और, हम सभी को चलाने वाली एक ही शक्ति है। अगर गाड़ी उस शक्ति से चलाई जाती है, तो कभी कोई दुर्घटना नहीं होगी। वह चालक धर्म ही है।” प्रयासों से इन कानूनों को समझाउन्होंने आगे कहा, धर्म पूरे ब्रह्मांड का चालक है। जब सृष्टि अस्तित्व में आई, तो उसके कामकाज को नियंत्रित करने वाले नियम धर्म बन गए। सब कुछ उसी सिद्धांत पर चलता है।भागवत ने कहा धर्म सिर्फ धर्म तक सीमित नहीं है। प्रकृति में हर चीज का अपना अंतर्निहित कर्तव्य और अनुशासन होता है। उन्होंने कहा, “पानी का धर्म बहना है, आग का धर्म जलना है। इसी तरह बेटे का कर्तव्य है, शासक का कर्तव्य है और आचरण के नियम हैं। हमारे पूर्वजों ने गहन आध्यात्मिक शोध और प्रयासों से इन कानूनों को समझा था।” वैश्विक पहचान का आधारउन्होंने यह भी राय व्यक्त की कि एक राज्य या व्यवस्था धर्मनिरपेक्ष हो सकती है, लेकिन कोई भी इंसान या रचना धर्म के बिना अस्तित्व में नहीं रह सकती। उन्होंने कहा कि भारत के सामान्य जनमानस में धर्म गहरा समाया हुआ है। “झोपड़ी में रहने वाला व्यक्ति शायद भाषण न दे पाए, लेकिन धर्म उसकी रगों में बहता है।”आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए धर्म को ब्रह्मांड का चालक बताया। उन्होंने कहा भारत की आध्यात्मिक विरासत अद्वितीय है और यही उसकी वैश्विक पहचान का आधार है। जब तक धर्म भारत का मार्गदर्शन करता रहेगा, देश विश्वगुरु बना रहेगा।

अमरावती में BJP की बगावत 22 उम्मीदवारों का फडणवीस को पत्र, नवनीत राणा को बाहर करने की मांग

अमरावती नगर निगम चुनाव में बगावत के सुर तेज हो गए हैं। यहां चुनाव लड़ने वाले 22 भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) उम्मीदवारों ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखा है। इन नेताओं ने पूर्व सांसद नवनीत राणा को पार्टी से तुरंत बाहर निकालने की मांग की है। शिकायत करने वालों में 20 हारे हुए और दो जीते हुए उम्मीदवार शामिल हैं। उम्मीदवारों का आरोप है कि नवनीत राणा ने चुनाव में भाजपा के खिलाफ काम किया। उन्होंने भाजपा उम्मीदवारों को डमी बताया और अपने पति रवि राणा की ‘युवा स्वाभिमान पार्टी’ के उम्मीदवारों को असली भाजपा उम्मीदवार बताकर उनका प्रचार किया। बता दें कि चुनाव से पहले भाजपा और रवि राणा की पार्टी का गठबंधन टूट गया था। हालांकि, एक स्थानीय भाजपा नेता ने कहा था कि नवनीत राणा पार्टी के उम्मीदवारों के लिए प्रचार करती रहेंगी। राणा ने कोई जवाब नहीं दियापत्र में नेताओं ने लिखा है कि उनकी हार जनता या विपक्ष की वजह से नहीं, बल्कि नवनीत राणा की वजह से हुई है। 15 जनवरी को हुए चुनाव के नतीजों में भाजपा को भारी नुकसान हुआ है। 87 सीटों वाले निगम में भाजपा 45 सीटों से घटकर 25 पर आ गई है। वहीं, युवा स्वाभिमान पार्टी और कांग्रेस को 15-15 सीटें मिलीं, एआईएमआईएम को 12, एनसीपी को 11, शिवसेना और बीएसपी को तीन-तीन, शिवसेना (यूबीटी) को दो और वंचित बहुजन अघाड़ी को एक सीट मिली।नाराज उम्मीदवारों ने सीएम से कहा है कि वे पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता हैं, जो समाज से जुड़े हुए हैं। लेकिन नवनीत राणा ने खुलेआम पार्टी को नुकसान पहुंचाया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर राणा को पार्टी से नहीं निकाला गया, तो वे भविष्य में अमरावती शहर में पार्टी की मौजूदगी को खत्म कर देंगी। फिलहाल इस पर नवनीत राणा ने कोई जवाब नहीं दिया है।

गुजरात में AAP-BJP टकराव तेज, केजरीवाल का कार्यकर्ता सम्मेलन रद्द, AAP बोली—लोकतंत्र पर हमला

गुजरात में आम आदमी पार्टी (AAP) और भाजपा सरकार के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी ने गुजरात की भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि अरविंद केजरीवाल के कार्यकर्ता सम्मेलन की अनुमति जानबूझकर रद्द करवाई गई। आम आदमी पार्टी गुजरात के विधायक गोपाल इटालिया ने कहा कि आज पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल का कार्यकर्ताओं के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित होना था। इसके लिए पार्टी ने पहले से एक निजी स्थल किराए पर लिया था और सभी तैयारियां पूरी कर ली गई थीं। गोपाल इटालिया के मुताबिक कल रात से भाजपा ने तानाशाही और गुंडागर्दी शुरू कर दी। कार्यक्रम स्थल के मालिक को डराया गया और दबाव बनाकर कार्यक्रम रुकवा दिया गया। विधायक का आरोप है कि पार्टी के बढ़ते जनाधार से भाजपा घबरा गई है और इसी डर के चलते लोकतांत्रिक कार्यक्रमों को रोका जा रहा है। विधायक गोपाल इटालिया ने कहा कि इससे पहले भी पार्टी के नेताओं को जेल में डाला गया, लेकिन पार्टी नहीं रुकी। अब फिर वही काम किया जा रहा है, लेकिन आम आदमी पार्टी न रुकने वाली है और न झुकने वाली। उन्होंने इसे सीधे-सीधे लोकतंत्र पर हमला करार दिया है। पार्टी का कहना है कि शांतिपूर्ण राजनीतिक कार्यक्रम रोकना संविधान और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ है। आम आदमी पार्टी की पकड़ लगातार मजबूत हो रहीगौरतलब है कि आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल 17 से 19 जनवरी तक तीन दिवसीय गुजरात दौरे पर है। दौरे के दौरान अरविंद केजरीवाल अहमदाबाद और वडोदरा में पार्टी के कार्यकर्ता सम्मेलनों में शामिल होकर करीब 20 हजार बूथ लेवल वॉलिंटियर्स को शपथ दिलाई जानी थी। 18 जनवरी को अहमदाबाद में सेंट्रल जोन के बूथ कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित होना था, जिसको अब रद्द कर दिया गया है। इसमें अहमदाबाद, गांधीनगर, खेड़ा और सुरेंद्रनगर लोकसभा क्षेत्रों के 9 हजार से अधिक बूथ वॉलिंटियर्स शपथ लेने वाले थे। इसके बाद 19 जनवरी को वडोदरा में ईस्ट जोन का बूथ कार्यकर्ता सम्मेलन होगा। इस कार्यक्रम में आनंद, वडोदरा, दाहोद, छोटा उदेपुर और पंचमहल लोकसभा क्षेत्रों के 9 हजार से अधिक बूथ वॉलिंटियर्स को शपथ दिलाई जाएगी। इतनी बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की भागीदारी यह साफ संकेत देती है कि गुजरात में आम आदमी पार्टी की पकड़ लगातार मजबूत हो रही है।

सोनम वांगचुक की एनएसए गिरफ्तारी पर बड़ा आरोप, पत्नी गीतांजलि बोलीं यह लोकतंत्र की परीक्षा

जलवायु कार्यकर्ता और मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित सोनम वांगचुक की एनएसए के तहत गिरफ्तारी को लेकर उनकी पत्नी गीतांजलि अंगमो ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में कोई ठोस आधार नहीं है, इसी वजह से सरकार अदालत में तारीख पर तारीख मांग रही है। समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए एक साक्षात्कार में गीतांजलि अंगमो ने कहा कि सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी सिर्फ एक व्यक्ति का मामला नहीं, बल्कि यह देश में लोकतंत्र की स्थिति को दर्शाती है। गीतांजलि अंगमो ने कहा यह सिर्फ सोनम की बात नहीं है, यह उस शक्ति के दुरुपयोग की कहानी है जिसके तहत देश के लिए काम करने वाले लोगों को अवैध रूप से हिरासत में लिया जा रहा है। उन्होंने चिंता जताई कि इस मामले पर समाज और राजनीति से उतनी मजबूत प्रतिक्रिया नहीं आई, जितनी आनी चाहिए थी। सोनम वांगचुक का नाम तक नहींअंगमो ने बताया कि राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत आरोपी को 5 से 10 दिनों के भीतर सभी दस्तावेज उपलब्ध कराए जाने चाहिए थे, लेकिन सोनम वांगचुक को अहम वीडियो 28वें दिन दिए गए। उन्होंने कहा कि यह सेक्शन 8 और सेक्शन 11 का स्पष्ट उल्लंघन है, जिसके चलते यह हिरासत आदेश शुरुआत से ही अवैध हो जाता है। गीतांजलि अंगमो का आरोप है कि जिला मजिस्ट्रेट का आदेश पुलिस द्वारा भेजे गए प्रस्ताव का कॉपी-पेस्ट है और उसमें स्वतंत्र रूप से दिमाग नहीं लगाया गया। उन्होंने कहा कि कई एफआईआर में सोनम वांगचुक का नाम तक नहीं है और जिन वीडियो का हवाला दिया गया है, वे एक से डेढ़ साल पुराने हैं। जिम्मेदार नागरिक की तरह सोचना चाहिएउन्होंने लद्दाख के सांसद मोहम्मद हनीफा समेत उन नेताओं का आभार जताया जिन्होंने संसद में यह मुद्दा उठाया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि यह मामला जितना उठना चाहिए था, उतना नहीं उठा। गीतांजलि अंगमो ने देश में बढ़ते ध्रुवीकरण पर चिंता जताते हुए कहा कि लोगों को पार्टी और विचारधाराओं से ऊपर उठकर एक जिम्मेदार नागरिक की तरह सोचना चाहिए। उन्होंने बताया कि इस मामले के चलते एचआईएएल और SECMOL से जुड़े नए शैक्षणिक प्रोजेक्ट्स में देरी हुई है और कुछ फंडर्स पर दबाव भी बनाया जा रहा है। हालांकि उन्होंने इसे सिल्वर लाइनिंग बताते हुए कहा कि अब ज्यादा लोग उनके संस्थानों को जानने लगे हैं।

राज्यसभा में दशकों से अटके विधेयक, 1992 का जनसंख्या नियंत्रण बिल अब भी लंबित

भारतीय संसदीय व्यवस्था में राज्यसभा एक ‘स्थायी सदन’ की भूमिका निभाती है। वर्तमान में यहां 19 सरकारी विधेयक लंबित हैं। इनमें से कुछ तो दशकों पुराने हैं। इसमें सबसे पुराना विधेयक जनसंख्या नियंत्रण से जुड़ा हुआ है, जिसे साल 1992 में पेश किया गया था। चूंकि राज्यसभा एक स्थायी सदन है जो कभी भंग नहीं होता। इसलिए यहां पेश किए गए विधेयक स्वतः समाप्त नहीं होते। राज्यसभा के एक तिहाई सदस्य हर दो वर्ष में सेवानिवृत्त होते हैं, जबकि लोकसभा के भंग होने पर वहां लंबित सभी विधेयक खत्म नहीं होता। सबसे पुराना ‘संविधानसदन के एक बुलेटिन के मुताबिक, सबसे पुराना ‘संविधान (79वां संशोधन) विधेयक 1992’ है। इस बिल में छोटे परिवार के नियम को बढ़ावा देने और इसे मौलिक कर्तव्य बनाने की बात कही गई थी। इसमें यह भी प्रस्ताव था कि अगर किसी सांसद या विधायक के दो से ज्यादा बच्चे हों, तो उसे अयोग्य घोषित कर दिया जाए। लंबित विधेयकों में ‘दिल्ली किराया (संशोधन) विधेयक 1997’ भी है। इसे किराया कानूनों को आधुनिक बनाने के लिए लाया गया था, लेकिन मकान मालिकों और किराएदारों ने इसका काफी विरोध किया। इसके अलावा ‘बीज विधेयक 2004’ भी अटका है, जिसका मकसद बीजों की गुणवत्ता सुधारना था। सरकार अब इसकी जगह बीज विधेयक 2025 लाने की तैयारी कर रही है। उपयोग से संबंधितमौजूदा एनडीए सरकार के समय पेश किए गए लंबित विधेयकों में संविधान (एक सौ पच्चीसवां संशोधन) विधेयक 2019 प्रमुख है, जिसका उद्देश्य असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम में स्वायत्त परिषदों की वित्तीय और कार्यकारी शक्तियों को बढ़ाना तथा पूर्वोत्तर में आदिवासी स्वायत्तता को मजबूत करना है। इसी श्रेणी में अनिवासी भारतीयों के विवाह के पंजीकरण से जुड़ा विधेयक 2019 भी शामिल है। राज्यसभा में सबसे नया लंबित विधेयक कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2020 है, जो देश में कीटनाशकों के नियमन और सुरक्षित उपयोग से संबंधित है।

विवादित बयान पर घिरे कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया, सीएम मोहन यादव ने राहुल गांधी से की सख्त कार्रवाई की मांग

कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया के हालिया बयान ने देश की राजनीति में तीखा विवाद खड़ा कर दिया है। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने विशेष वर्ग की महिलाओं के साथ होने वाले यौन अपराधों को धार्मिक ग्रंथों से जोड़कर अभद्र टिप्पणी कर दी। साथ ही उन्होंने अपने बयान में आपराधिक कार्यों को तीर्थ यात्रा से भी जोड़ते हुए पुण्य का बता दिया। राहुल गांधी के मध्यप्रदेश आगमन से पहले कांग्रेस की चुप्पी को बरैया के बयान का समर्थन माना जा रहा है, जिससे सियासी घमासान और तेज हो गया है। कांग्रेस विधायक के इस विवादित बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए खुद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राहुल गांधी से विधायक बरैया के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। बयान महिला-विरोधीमुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया का बयान महिला-विरोधी है। ऐसे नेता समाज में जहर घोलने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी इंदौर आ रहे हैं। उनसे वे मांग करते हैं कि ऐसे कांग्रेस नेता को निलंबित किया जाना चाहिए। कांग्रेस के विधायक फूल सिंह बरैया ने समाज में विद्वेष फैलाने का काम किया है। सीएम ने कहा कि राहुल गांधी से उम्मीद करता हूं कि वे विधायक को निलंबत करें, ताकि लगे कि उनके मन में सभी के प्रति समान भावना है। अपराधी मानसिकता पर चुपभाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष ऊषा अग्रवाल ने एक्स पर बयान की निंदा की है। उन्होंने कहा कि इंदौर में राहुल गांधी के साथ मंच पर कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया दिखे हैं। यह सहमति है या स्वीकारोक्ति है। अब स्पष्ट है कि महिलाओं के प्रति दूषित, विकृत और कुंठित मानसिकता सिर्फ़ बरैया की नहीं, बल्कि राहुल गांधी के नेतृत्व वाली पूरी कांग्रेस की सोच है। अगर आपत्ति होती, तो मंच साझा नहीं किया जाता। सोनिया गांधी व प्रियंका गांधी महिला सम्मान की बातें तो करती हैं, लेकिन अपनी ही पार्टी की अपराधी मानसिकता पर चुप हैं।

यून सुक योल को मार्शल लॉ लगाने पर 5 साल की सजा, राजनीति में हलचल

दक्षिण कोरिया की एक अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति यून सुक योल को पांच साल जेल की सजा सुनाई है। ये सजा यून सुक योल को देश में मार्शल लॉ लागू करने के एक मामले में सुनाई गई है। यून सुक योल पर 2024 के अंत में देश में मार्शल लॉ लगाने के आरोप में आठ मामले दर्ज किए गए थे। इन्हीं में से पहले मामले में सजा सुनाई गई है। उनके खिलाफ सबसे गंभीर आरोप यह है कि उन्होंने मार्शल लॉ लागू करने के दौरान एक विद्रोह का नेतृत्व किया, और इसके लिए पूर्व राष्ट्रपति को मौत की सजा तक हो सकती है। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजकों ने पूर्व राष्ट्रपति के लिए 10 साल जेल की सजा की मांग की थी। जिसकी योल की कानूनी टीम ने आलोचना की और आरोप लगाया कि 10 साल सजा की मांग राजनीति से प्रेरित है और इसका कोई कानूनी आधार नहीं है। कुछ समय के लिए मार्शल लॉ लगायायून सुक योल को महाभियोग द्वारा राष्ट्रपति पद से हटाया गया था और उसके बाद गिरफ्तार किया गया था। यून सुक योल पर आरोप है कि उन्होंने दिसंबर 2024 में देश में कुछ समय के लिए मार्शल लॉ लगाया था। हालांकि यून ने अपने बचाव में कहा कि उनका देश को सैन्य शासन के अधीन रखने का कोई इरादा नहीं था बल्कि वे सिर्फ लोगों को ये दिखाना चाहते थे कि उदारवादियों द्वारा अपने एजेंडा को चलाने के लिए संसद को नियंत्रित किया जा रहा है। जांच में कहा गया कि यून सुक योल ने अपने शासन को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए देश में मार्शल लॉ लगाया था। पूर्व राष्ट्रपति पर बगावत, सत्ता के गलत इस्तेमाल और अन्य आपराधिक मामलों में आरोप तय किए गए हैं।