व्हाइट हाउस मीटिंग में ट्रंप द्वारा जेलेंस्की को धमकाए जाने के बाद आप सांसद ने पीएम मोदी को चेताया

आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहा कि वे भारतीयों को अमेरिका से वापस भेजने के मुद्दे को मजबूती से उठाएं औरराष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा “धमकाए” न जाएं। उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की के साथ उनकी विस्फोटक बैठक का हवाला दिया ।एक्स पर एक पोस्ट में, सिंह ने पीएम मोदी से कहा कि वे ट्रंप के “पिछलग्गू” न बनें और जिस तरह से अवैध भारतीय प्रवासियों को बेड़ियों में जकड़कर अमेरिका से वापस भेजा गया, उसके बारे में उनसे न भिड़ें। आप के राज्यसभा सांसद ने पूर्व अमेरिकी विदेश मंत्री हेनरी किसिंजर के प्रसिद्ध कथन – ‘अमेरिका का दुश्मन होना खतरनाक है, लेकिन दोस्त होनाघातक है’ – का इस्तेमाल अपनी बात को पुष्ट करने के लिए किया कि कैसे ट्रम्प प्रशासन ने यूक्रेन को अपने हाल पर छोड़ दिया। युद्धग्रस्त देश कोपिछले जो बिडेन शासन से काफी समर्थन और हथियार मिले थे। सिंह ने ट्वीट किया, “इस बातचीत से यह साबित हो गया है कि ट्रंप धौंस जमा रहे हैं, इसलिए ट्रंप के पिट्ठू बनने के बजाय प्रधानमंत्री मोदी कोअपराधियों की तरह बेड़ियों में जकड़े भारतीयों को भारत वापस लाने का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाना चाहिए।” इस महीने की शुरुआत में संसद में अमेरिका द्वारा अवैध भारतीय प्रवासियों को जंजीरों और हथकड़ियों में जकड़कर निर्वासित करने के मुद्दे पर काफीहंगामा हुआ था। अमेरिका में अवैध अप्रवासियों पर ट्रंप की कार्रवाई के बीच अब तक तीन अमेरिकी सैन्य उड़ानों से 300 से अधिक भारतीयों कोनिर्वासित किया जा चुका है। एएपी नेता ने व्हाइट हाउस में ज़ेलेंस्की, ट्रंप और अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के बीच हुई तीखी नोकझोंक का वीडियो भी पोस्ट किया। वीडियो मेंवेंस ज़ेलेंस्की को रूस के साथ युद्ध में यूक्रेन को वर्षों से दिए जा रहे अमेरिकी समर्थन के प्रति अधिक आभार न दिखाने के लिए फटकार लगाते हुएदिखाई दे रहे हैं। विवादास्पद खनिज संसाधन सौदे पर चर्चा करने के लिए व्हाइट हाउस गए ज़ेलेंस्की को युद्ध के प्रति उनके दृष्टिकोण के लिए ट्रम्प से फटकार भीमिली। अमेरिकी राष्ट्रपति ने ज़ेलेंस्की से कहा कि वह “तीसरे विश्व युद्ध के साथ जुआ खेल रहे हैं” जबकि दोनों वैश्विक मीडिया के सामने एक दूसरे परचिल्लाने लगे। यह विस्फोटक टकराव तब समाप्त हुआ जब ज़ेलेंस्की को व्हाइट हाउस छोड़ने के लिए कहा गया, तथा ट्रम्प ने यूक्रेनी राष्ट्रपति से कहा कि “जब वहशांति के लिए तैयार हों, तब वापस आएं।”
‘जब तक वादे पूरे नहीं होते तब तक चैन से नहीं बैठेंगे’, दिल्ली की CM रेखा गुप्ता का बयान

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने उपराज्यपाल (LG) के अभिभाषण पर जवाब देते हुए कहा कि उनकी सरकार के द्वारा जो भी वादे संकल्प पत्र मेंकिए गए हैं, उन वादों को जब तक पूरा नहीं किया जाता, तब तक वह और उनकी पूरी टीम चैन से नहीं बैठेंगे। रेखा गुप्ता ने यह भी स्पष्ट किया किउनकी सरकार जनता से किए गए वादों को हर हाल में पूरा करेगी और कोई भी बाधा इसके रास्ते में नहीं आएगी। शपथ ग्रहण के बाद के कदमसीएम रेखा गुप्ता ने 20 फरवरी को शपथ ग्रहण के दिन को याद करते हुए बताया कि जब वह और उनकी टीम सचिवालय पहुंचे, तो उन्होंने हर एकपल का सही उपयोग किया। वह कहती हैं, “पहली कैबिनेट में आयुष्मान भारत योजना को पास किया। इसके बाद हम यमुना जी की आरती में गएऔर यमुना जी से कहा कि हम अपना संकल्प पूरा करेंगे।” उन्होंने यह बयान देते हुए अपने कार्यकाल की शुरुआत और सरकार की प्राथमिकताओं काउल्लेख किया, साथ ही यह भी कहा कि उनकी टीम हर संभव प्रयास करेगी ताकि जनता से किए गए सभी वादों को पूरा किया जा सके। जनता ने अहंकार को तोड़ासीएम रेखा गुप्ता ने विपक्षी दलों और उनके नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि वह पूरी तरह से वचनबद्ध हैं। उन्होंने कहा, “जो लोग 10 सालसत्ता में रहे और कोई वादा पूरा नहीं किया, आज वही लोग हमसे सवाल करते हैं। जो आतिशी जी (विपक्षी नेता) मुख्यमंत्री बनने से पहले धरना देतीथीं, आज विपक्ष में बैठकर वही धरना देती हैं। ये लोग कहते थे कि इस जन्म में कोई हरा नहीं सकता, लेकिन जनता ने इनका अहंकार तोड़ दिया।” सीएम गुप्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी सरकार सिर्फ चुनावी घोषणाओं तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वह अपने संकल्प पत्र में किए गए वादोंको हर हालत में पूरा करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्षी नेताओं को यह समझना होगा कि राजनीति में जनता का विश्वास और उनके दर्द काएहसास होना जरूरी है, और उनकी सरकार यही करेगी। जनता के दर्द को समझते हुएसीएम रेखा गुप्ता ने दिल्ली के लोगों के दुख और दर्द को समझने की बात करते हुए कहा कि उनकी सरकार दिल्ली की जनता के लिए हर जरूरी कदमउठाएगी। उन्होंने कहा, “मोदी जी का दिल्ली के लिए जो सपना है, वह हम जरूर पूरा करेंगे। दिल्ली की जनता के दर्द का हमें एहसास है, और हमउसका उपचार करेंगे।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि दिल्ली की बहुमत वाली सरकार बनाने के लिए वह दिल्ली की जनता का धन्यवाद करती हैं। सीएम गुप्ता ने यह भी कहा कि दिल्ली, जो देश की राजधानी है, वहां के लोगों के लिए बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। उन्होंने उदाहरण देते हुएकहा, “दिल्ली में आज भी सबसे अधिक लोग खुले में शौच करते हैं। यह शर्मनाक है, और हम इसे जल्द से जल्द सुधारने के लिए काम करेंगे।” उन्होंनेयह सवाल उठाया कि दिल्ली में सरकार की तरफ से इतनी लंबी अवधि तक कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए। केजरीवाल सरकार के दावों पर सवालसीएम रेखा गुप्ता ने अरविंद केजरीवाल की सरकार पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि केजरीवाल ने अपना “शीश महल” तो बना लिया है, लेकिनदिल्ली के लाखों लोग अब भी सड़कों पर रहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि केजरीवाल और उनकी सरकार ने जनता से किए गए वादों को पूरा करने केबजाय अपनी राजनीति और प्रचार में ज्यादा ध्यान दिया। उन्होंने यह कहा, “केजरीवाल जी चुनाव के दौरान कहते थे, ‘मैं दिल्ली का भाई हूँ’, लेकिन आज भी वह अपने महल में बैठकर राजनीति करते हैं। ऐसाकौन सा भाई होगा जो ‘एक के साथ एक फ्री’ का वादा करता है? दिल्ली की बहनें आज भी इन्हें गालियाँ देती हैं।” कोरोना काल में सरकार का रवैयासीएम रेखा गुप्ता ने कोरोना महामारी के दौरान दिल्ली सरकार की असफलताओं पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब कोरोना महामारी आईथी, तब न तो केजरीवाल के मंत्री और न ही विधायक बाहर निकले थे। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमितशाह ने दिल्ली की मदद की और स्थिति को संभालने में योगदान दिया। सीएम गुप्ता ने कहा, “कोरोना के दौरान जब दिल्ली के लोग सबसे ज्यादा संकट में थे, तब दिल्ली सरकार का कोई प्रतिनिधि सामने नहीं आया।हालांकि, प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने दिल्ली को मदद दी। यह समय था जब दिल्ली के लोगों को मदद की जरूरत थी, और जो सरकार सत्ता में थी, उसने अपनी जिम्मेदारी निभाने में असफल रही।”यमुना सफाई पर बयानसीएम रेखा गुप्ता ने यमुना नदी की सफाई को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा, “नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने यमुना नदी की सफाई के लिएएक कमेटी बनाई थी, और इस कार्य की जिम्मेदारी उपराज्यपाल को दी गई थी। लेकिन इसके खिलाफ कोर्ट में जाकर स्टे (अस्थायी रोक) ले लियागया।” उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कुंभ मेले के दौरान करोड़ों लोगों ने गंगा नदी में डुबकी लगाई, और जब गंगा को साफ किया जा सकता है तोयमुना को भी साफ किया जा सकता है। उन्होंने विश्वास जताया कि यमुना की सफाई भी हो सकती है और यह एक महत्वपूर्ण कदम होगा। सीएम गुप्ता ने इस संदर्भ में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का धन्यवाद करते हुए कहा, “आज गृहमंत्री जी ने मीटिंग में कहा कि दिल्ली में मानसून एक्शनप्लान बनाया जाए, ताकि दिल्लीवासियों को मानसून के दौरान कोई दिक्कत न हो।” उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली के मुद्दों को लेकर उपराज्यपालका समर्थन महत्वपूर्ण है, क्योंकि वह भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़े रहे हैं और यह एक सराहनीय कदम है। सीएम रेखा गुप्ता की टिप्पणी पर राजनीतिक प्रतिक्रियासीएम रेखा गुप्ता की टिप्पणी और उनके द्वारा किए गए दावे, आरोप और आलोचनाएँ राजनीतिक दृष्टिकोण से बहुत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने जहां एकओर विपक्षी दलों पर हमला बोला, वहीं दूसरी ओर दिल्ली की समस्याओं को रेखांकित किया और उन समस्याओं के समाधान के लिए अपनी सरकारकी प्रतिबद्धता जताई। विपक्ष ने जहां उनकी सरकार के पहले कुछ महीने की कार्यवाही पर सवाल उठाए हैं, वहीं सीएम ने साफ कहा कि उनका उद्देश्यकेवल जनता से किए गए वादों को पूरा करना है और वह इस दिशा में कोई कसर नहीं छोड़ेंगी। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक बार फिर साबित किया कि वह अपनी सरकार के लिए जिम्मेदार हैं और जनता से किए गए वादों को पूरा करनेके लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने विपक्ष की आलोचनाओं का सामना करते हुए अपने संकल्प को दोहराया कि उनकी सरकार दिल्लीवासियों केलिए हर संभव कदम उठाएगी। चाहे वह यमुना की सफाई हो, खुले में शौच को खत्म करना हो या कोरोना के दौरान बेहतर सरकारी कार्यवाही, रेखागुप्ता ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी सरकार की ओर से कार्रवाई करने का भरोसा दिया। उन्होंने अपने बयान में यह भी बताया कि दिल्ली की जनता का दर्द उन्हें महसूस होता है और वह उन समस्याओं के समाधान के लिए काम कर रही हैं।साथ ही, उन्होंने विपक्ष की आलोचनाओं को नकारते हुए यह कहा कि उनकी सरकार का उद्देश्य सिर्फ दिल्ली की तस्वीर बदलना है और इसे हर दृष्टि सेप्रगति की दिशा में आगे बढ़ाना है।
खरगे के दावे पर WCD का पलटवार, कहा- गायब नहीं हुआ ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ स्कीम का पैसा

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (WCD) ने शुक्रवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा लगाए गए आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा किसरकार की प्रमुख योजना ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के अंतर्गत कोई भी धनराशि गायब नहीं हुई है। मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि योजना केतहत खर्च किए गए सभी फंडों का हिसाब पूरी तरह से पारदर्शी है, और किसी भी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी या भ्रष्टाचार का कोई सवाल नहीं उठता।यह सफाई कांग्रेस अध्यक्ष के उस दावे के बाद दी गई है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि इस योजना में 455 करोड़ रुपये “गायब” हो गए हैं। मल्लिकार्जुन खरगे का आरोपकांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शुक्रवार को सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त जानकारी का हवाला देते हुए यह दावा किया कि केंद्रसरकार की ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना में 455 करोड़ रुपये का फंड गायब हो गया है। खरगे ने यह भी आरोप लगाया कि यह राशि कुछ हीवर्षों में गायब हो गई, जबकि इस योजना के तहत सरकारी विज्ञापनों के लिए भारी-भरकम राशि खर्च की गई है। उन्होंने अपने बयान में कहा, “सूचना का अधिकार कानून के तहत जो खुलासा हुआ है, उससे यह साबित होता है कि मोदी सरकार की ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना में 455 करोड़ रुपये गायब हो गए हैं।” खरगे ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में यह भी जोड़ा कि भाजपा के शासन में महिलाएंऔर लड़कियां न सिर्फ सरकारी योजनाओं से वंचित हो रही हैं, बल्कि उनके खिलाफ हिंसा भी बढ़ी है। उन्होंने लिखा, “बहुत हुआ नारी पर वार, भाजपाके विज्ञापनों की गूंज पिछले 10 वर्षों से उन सभी महिलाओं की चीखों का उपहास उड़ा रही है, जो भाजपा राज में और कभी-कभी भाजपा के गुंडोंद्वारा प्रताड़ित हुईं हैं।”WCD मंत्रालय की सफाईमल्लिकार्जुन खरगे के आरोपों के बाद महिला और बाल विकास मंत्रालय ने एक बयान जारी किया, जिसमें इन आरोपों को खारिज किया गया।मंत्रालय ने कहा कि यह दावा पूरी तरह से गलत है और इसका कोई आधार नहीं है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना केतहत 31 जनवरी 2025 तक कुल 952.04 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, और इन फंडों का सही तरीके से उपयोग किया गया है। डब्ल्यूसीडी ने बताया कि इस राशि में से 526.55 करोड़ रुपये राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आवंटित किए गए थे, जबकि 425.49 करोड़ रुपयेराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न गतिविधियों पर खर्च किए गए थे। मंत्रालय ने यह भी कहा कि “यह स्पष्ट है कि तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया गया हैऔर झूठे विमर्श को बढ़ावा देने की कोशिश की गई है।”महिला और बाल कल्याण मंत्रालय ने बताया योजना का असरमहिला और बाल विकास मंत्रालय ने यह भी बताया कि ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना न केवल सरकारी विज्ञापनों तक सीमित नहीं रही, बल्कियह एक जन आंदोलन बन चुका है। योजना का उद्देश्य बालिकाओं की शिक्षा और संरक्षण को प्राथमिकता देना है, और यह समाज में महत्वपूर्णबदलाव लाने में सक्षम रही है। मंत्रालय ने कहा कि इस योजना के जरिए समाज में एक जागरूकता फैलाने का प्रयास किया जा रहा है, जिसकेपरिणामस्वरूप बालिकाओं के प्रति सामाजिक नजरिया बदलने में मदद मिली है। डब्ल्यूसीडी मंत्रालय ने इस मामले में एक ट्वीट किया, जिसमें कहा गया, “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना के माध्यम से सरकार हर बालिका कोबचाने और शिक्षित करने के अपने मिशन में दृढ़ है। यह एक जन आंदोलन बन चुका है और महत्वपूर्ण सामाजिक और व्यावहारिक परिवर्तन ला रहाहै।” योजना की सफलता और उद्देश्य‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना का उद्देश्य भारतीय समाज में बालिकाओं की सुरक्षा और शिक्षा को बढ़ावा देना था। इस योजना को 2015 मेंप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लॉन्च किया गया था, और इसका मुख्य उद्देश्य बेटियों के खिलाफ बढ़ती हिंसा और भेदभाव को समाप्त करना था। इसकेअंतर्गत बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा देने, उनके प्रति सामाजिक चेतना जागरूक करने और लिंगानुपात में सुधार लाने का प्रयास किया गया था। अब तक यह योजना कई राज्यों में सफल रही है, और इसके परिणामस्वरूप कई सकारात्मक बदलाव देखे गए हैं। मंत्रालय ने यह भी कहा कि इसयोजना का महत्व इस बात से समझा जा सकता है कि यह केवल सरकारी नीति नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन बन गया है, जो देशभर मेंमहिलाओं और बच्चों के लिए कार्य कर रहा है। कांग्रेस के आरोपों पर सरकार की प्रतिक्रियाकांग्रेस के आरोपों पर सरकार ने लगातार प्रतिक्रिया दी है, और इन आरोपों को खारिज किया है। सरकार ने कई बार यह बताया है कि इन योजनाओंके तहत खर्च किए गए पैसे का पूरा लेखा-जोखा है और इसका सही तरीके से उपयोग किया जा रहा है। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना जैसीसामाजिक योजनाओं को लेकर विपक्षी दलों द्वारा समय-समय पर सवाल उठाए जाते रहे हैं, लेकिन सरकार ने हमेशा अपनी योजनाओं की पारदर्शिताऔर उद्देश्य को स्पष्ट किया है।‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना पर विपक्ष का राजनीतिक दृष्टिकोण विपक्ष, खासकर कांग्रेस पार्टी, हमेशा यह आरोप लगाती रही है कि भाजपा सरकार अपनी योजनाओं और प्रचार अभियानों का राजनीतिक लाभ उठातीहै। मल्लिकार्जुन खरगे का यह बयान भी इसी रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जिसमें वे सरकार पर सवाल उठाते हुए यह दिखाने की कोशिश कर रहेहैं कि योजनाओं के नाम पर सरकार ने जनता से धोखा किया है। इस प्रकार की आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति भारतीय राजनीति का एक अहम हिस्सा बन चुकी है, और यह केवल केंद्र सरकार के लिए नहीं, बल्किराज्य सरकारों के लिए भी एक चुनौती है। विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों को सरकार के द्वारा जवाब देना जरूरी होता है ताकि जनता के बीच सहीसंदेश पहुंचे। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना का उद्देश्य भारतीय समाज में बालिकाओं के खिलाफ भेदभाव और हिंसा को कम करना था, और इसमें सरकार नेमहत्वपूर्ण संसाधनों का निवेश किया है। मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा लगाए गए आरोपों को सरकार ने गलत साबित किया है और दावा किया है कियोजना के तहत खर्च किए गए सभी फंड सही तरीके से उपयोग किए गए हैं। इस विवाद के बाद, यह स्पष्ट होता है कि ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है, और इसके जरिए समाज में बालिकाओं के अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए सकारात्मक कदमउठाए जा रहे हैं। हालांकि, यह भी ध्यान रखना चाहिए कि किसी भी योजना की सफलता को लेकर विपक्ष और सरकार के बीच मतभेद होते रहते हैं, लेकिन अंततःजनता की भलाई के लिए सभी को मिलकर काम करना चाहिए।
आगरा में टीसीएस मैनेजर मानव शर्मा की आत्महत्या: बहन ने खोले राज, उकसाने का आरोप

उत्तर प्रदेश के आगरा में आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के मैनेजर मानव शर्मा ने हाल ही में आत्महत्या कर ली, जिसके बाद उनकेपरिवार ने इस मामले में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। मानव की बहन ने बताया कि उनके भाई की मौत के पीछे एक गंभीर मामला है, जिसमेंउकसाने का आरोप लगाया गया है। बहन का बयान: उकसाने का आरोपमानव शर्मा की बहन ने कहा, “शुरुआत में हमें लगा कि उसने भावनाओं में बहकर आत्महत्या की है। लेकिन जब हमने उसके मोबाइल फोन की जांचकी, तो हमें पता चला कि उसे उकसाया गया था। उसकी पत्नी ने तलाक स्वीकार नहीं किया था, जिससे मानव पर मानसिक दबाव बढ़ गया था।” उन्होंने यह भी कहा कि मानव की पत्नी के पास यह शक्ति थी कि वह किसी भी समय मदद मांग सकती थी, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। बहन नेआगे कहा, “हमने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है क्योंकि हम नहीं चाहते कि हमारी तरह कोई और अपने प्रियजन को खोए।” पूरा मामला: आत्महत्या की पृष्ठभूमिआगरा के डिफेंस कॉलोनी निवासी मानव शर्मा, जो एक निजी कंपनी में प्रबंधक के रूप में कार्यरत थे, ने 24 फरवरी को अपने घर पर आत्महत्या करली। पुलिस के अनुसार, मानव ने आत्महत्या से पहले एक वीडियो रिकॉर्ड किया, जिसमें उन्होंने अपनी पत्नी को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया। पुलिस ने बताया कि मानव ने 23 फरवरी को अपनी पत्नी निकेता के साथ आगरा यात्रा की थी, जहां कथित तौर पर उसका अपमान किया गया।इसके बाद, मानव अपनी पत्नी को लेकर अपने घर वापस आया और आत्महत्या कर ली। उनके पिता नरेंद्र शर्मा ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि मानव ने सुबह पांच बजे अपने कमरे में फांसी लगा ली। पुलिस की कार्रवाईपुलिस ने मानव के पिता की शिकायत के आधार पर भारतीय दंड संहिता की धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना) के तहत मामला दर्ज कर लियाहै। सहायक पुलिस आयुक्त विनायक भोसले ने कहा कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है। मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक दबावइस घटना ने एक बार फिर से मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक दबाव के मुद्दे को उजागर किया है। आत्महत्या की घटनाएं अक्सर मानसिक तनाव, पारिवारिक विवाद और सामाजिक अपेक्षाओं के कारण होती हैं। मानव शर्मा की आत्महत्या ने यह सवाल उठाया है कि क्या समाज में ऐसे मामलों कोगंभीरता से लिया जा रहा है और क्या परिवारों को इस तरह के मानसिक दबाव से निपटने के लिए उचित सहायता मिल रही है। मानव शर्मा की आत्महत्या का मामला न केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी है, बल्कि यह समाज में मानसिक स्वास्थ्य, पारिवारिक संबंधों और सामाजिकदबाव के मुद्दों पर भी प्रकाश डालता है। परिवार ने जो आरोप लगाए हैं, वे इस बात की ओर इशारा करते हैं कि हमें आत्महत्या के मामलों को गंभीरतासे लेना चाहिए और ऐसे मामलों में उचित कार्रवाई करनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई और इस तरह की त्रासदी का शिकार न हो। इस मामले की जांच जारी है, और उम्मीद की जा रही है कि पुलिस जल्द ही सच्चाई का पता लगाएगी और न्याय सुनिश्चित करेगी।
ओवैसी ने CM योगी पर साधा निशाना: ‘योगी के पूर्वजों ने आज़ादी की लड़ाई में नहीं लिया भाग’

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर ताजाहमले में उन्हें घेरते हुए कई कड़ी टिप्पणियाँ की हैं। ओवैसी ने योगी आदित्यनाथ के उन बयानों का जवाब दिया, जिनमें उन्होंने उर्दू को लेकर विवादितटिप्पणी की थी। ओवैसी ने योगी के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि उनके पूर्वजों में से कोई भी आजादी की लड़ाई में शामिल नहीं था और नही उर्दू पढ़ने से विज्ञान में कोई रुकावट आती है। इसके अलावा, ओवैसी ने बीजेपी और उनके समर्थकों पर निशाना साधते हुए भारतीय समाज औरसंस्कृति के बारे में अपनी राय रखी। ओवैसी का हमला: ‘योगी के पूर्वजों ने आज़ादी की लड़ाई में हिस्सा नहीं लिया‘असदुद्दीन ओवैसी ने योगी आदित्यनाथ के बयान पर पलटवार करते हुए कहा, “योगी आदित्यनाथ ने यह बयान दिया कि उर्दू पढ़ने से लोग साइंटिस्टनहीं बनते, बल्कि कठमुल्ले बनते हैं। मैं पूछता हूं, अगर उर्दू पढ़ने से साइंटिस्ट नहीं बनते तो योगी आदित्यनाथ के पूर्वजों में से किसी ने आजादी कीलड़ाई क्यों नहीं लड़ी?” ओवैसी ने आगे कहा, “योगी आदित्यनाथ तो उर्दू नहीं पढ़ते हैं, फिर वह खुद साइंटिस्ट क्यों नहीं बने?” ओवैसी का यह बयानबीजेपी के उन दावों पर भी एक तगड़ा हमला था, जिसमें पार्टी और इसके समर्थक भारतीय समाज में विभाजन की कोशिश करते हैं। उर्दू और भारतीय आज़ादीओवैसी ने आगे कहा कि उर्दू केवल एक भाषा नहीं, बल्कि देश की आजादी की जुबान भी है। उन्होंने योगी आदित्यनाथ की टिप्पणी को भारतीयसांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर के खिलाफ बताया। ओवैसी ने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी, विशेष रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS), भारतीय इतिहास को अपनी विचारधारा के हिसाब से बदलने की कोशिश कर रही है। उन्होंने यह तंज भी किया कि RSS का मानना है कि आर्यनलोग बाहर से आए थे, जबकि असल में भारतीय समाज की जड़ें यहां के आदिवासियों और द्रविड़ियों में हैं। बीजेपी और एकजुटता का सवालओवैसी ने बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी एक मजहब, एक ज़ुबान, एक तहजीब, और एक लीडर की अवधारणा को बढ़ावा दे रही है।उनके अनुसार, बीजेपी के नेता, जैसे योगी आदित्यनाथ, किसी भी धर्म या समाज के विविधतापूर्ण पहलुओं को नकारते हैं और सिर्फ एक विशेषविचारधारा का प्रचार करते हैं। ओवैसी ने इस संदर्भ में कहा, “बीजेपी की राजनीति सिर्फ एक धर्म, एक भाषा और एक संस्कृति के इर्द-गिर्द घूमती है, जबकि भारत एक विविधतापूर्ण देश है, जिसमें हर धर्म, भाषा, और संस्कृति की अपनी पहचान है।” अकबरुद्दीन ओवैसी का समर्थनइस बीच, असदुद्दीन ओवैसी के भाई और विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी ने अपने भाई की तारीफ करते हुए कहा, “क्या कोई है, जो इतनी निडरता सेहमारी बात कर सके? सीएए, एनआरसी, वक्फ बिल या गिरफ्तारियों जैसे मुद्दों पर असदुद्दीन ओवैसी ने हमेशा लड़ाई लड़ी है। वह अपनी आवाज कोकमजोर नहीं पड़ने देते और हमेशा उनके खिलाफ खड़े होते हैं, जो हमारे हक में नहीं बोलते।” अकबरुद्दीन ने यह भी कहा कि असदुद्दीन ओवैसी ही ऐसेनेता हैं, जो दुश्मनों के सामने खड़े होकर भारतीय मुसलमानों की आवाज को बुलंद करते हैं। योगी आदित्यनाथ पर ओवैसी का पुराना हमलायह पहली बार नहीं है, जब असदुद्दीन ओवैसी ने योगी आदित्यनाथ पर हमला बोला है। इससे पहले भी ओवैसी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पर कई बारतीखे आरोप लगाए हैं। एक बयान में ओवैसी ने कहा था कि “भारत सरकार खुद भारतीयों को सलाह दे रही है कि वे इजराइल की यात्रा न करें। यहभारतीय सरकार की नाकामी का सबूत है कि गरीब भारतीयों को इजराइल जैसे देश में काम करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। अगर यहां रोजगार केअवसर होते, तो कोई इजराइल मजदूरी करने क्यों जाता?” ओवैसी ने योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधते हुए कहा, “योगी जितना भी इजराइल कीभक्ति कर लें, लेकिन अभी भी भारत को सबसे ज्यादा रेमिटेंस अरब देशों से ही आता है।” सामाजिक और राजनीतिक समरसता की बातओवैसी का यह बयान भारतीय राजनीति में असहमति की नीतियों को उजागर करता है, जहां एक ओर बीजेपी ने अपनी हिन्दूवादी विचारधारा को आगेबढ़ाया है, वहीं दूसरी ओर ओवैसी ने मुस्लिम समाज और अन्य अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा की बात की है। ओवैसी का कहना है कि भारतीयसमाज के भीतर अलग-अलग धर्म, संस्कृति और भाषाओं का सम्मान किया जाना चाहिए, न कि किसी एक विचारधारा या संस्कृति को थोपने कीकोशिश की जानी चाहिए। राष्ट्रीय राजनीति में ओवैसी की स्थितिअसदुद्दीन ओवैसी का यह बयान इस बात का संकेत है कि वह राष्ट्रीय राजनीति में अपनी पहचान बनाए रखने के लिए लगातार सक्रिय रहेंगे। उनकालक्ष्य केवल भारतीय मुसलमानों के अधिकारों की रक्षा करना नहीं है, बल्कि समग्र भारतीय समाज में समानता, न्याय और सामाजिक न्याय की स्थापनाकरना है। ओवैसी के बयान से यह स्पष्ट है कि वह बीजेपी की नीतियों के खिलाफ अपनी आवाज उठाते रहेंगे, और किसी भी प्रकार के धार्मिक औरसांस्कृतिक भेदभाव के खिलाफ मजबूत अपनाएंगे। असदुद्दीन ओवैसी और योगी आदित्यनाथ के बीच यह विवाद केवल एक व्यक्तिगत हमले का मामला नहीं है, बल्कि यह भारतीय राजनीति और समाजमें विविधता के मुद्दे पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। ओवैसी के आरोपों ने बीजेपी की नीतियों और उनके दृष्टिकोण को सवालों के घेरे में डालदिया है। यह सवाल उठता है कि क्या भारत को एकजुट करने के लिए धार्मिक और सांस्कृतिक भेदभाव को खत्म करना जरूरी है, या फिर एक विशेषविचारधारा को बढ़ावा देने से ही भारतीय समाज को मजबूत किया जा सकता है। ओवैसी ने इस विवाद को न केवल एक राजनीतिक बयान के रूप में पेश किया, बल्कि इसे भारतीय समाज के भीतर विविधता और समरसता को बनाएरखने की जरूरत के रूप में प्रस्तुत किया।
आगरा में युवक ने पत्नी के उत्पीड़न से तंग आकर की आत्महत्या, लाइव वीडियो में बयां किया दर्द

उत्तर प्रदेश के आगरा में एक युवक ने अपनी पत्नी द्वारा किए जा रहे उत्पीड़न से परेशान होकर आत्महत्या कर ली। इस घटना का 6 मिनट 47 सेकंडका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें युवक ने खुद को फांसी लगाते हुए अपना दर्द बयां किया। वीडियो में उसने कहा, “सॉरीमम्मी-पापा, मैं अपनी पत्नी से तंग आ चुका हूं। कोई मर्दों के बारे में भी सोचे, वे बहुत अकेले हो जाते हैं। आत्महत्या से पहले बहन को भेजे थे संदेशइस घटना से पहले युवक की पत्नी निकिता और उसकी बहन के बीच वॉट्सएप पर बातचीत हुई थी। चैट में निकिता ने बताया था कि मानव ने शराबपी रखी थी और वह आत्महत्या करने की कोशिश कर रहा था। उसने यह भी कहा था कि वह अपने पापा को इसकी जानकारी नहीं दे सकती। परिवार ने लगाए गंभीर आरोपथाना सदर के डिफेंस कॉलोनी निवासी मानव शर्मा मुंबई में एक आईटी कंपनी में रिक्रूटमेंट मैनेजर के रूप में कार्यरत थे। उनके पिता नरेंद्र शर्मा, जोएयरफोर्स से रिटायर्ड हैं, ने पुलिस को दी गई तहरीर में कहा कि उनके बेटे की शादी 30 जनवरी 2024 को हुई थी। शादी के कुछ समय बाद हीउनकी बहू झगड़ा करने लगी और परिवार को झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देने लगी। उन्होंने आरोप लगाया कि बहू किसी अन्य व्यक्ति के साथरहने की बात करती थी।पत्नी और ससुराल पक्ष पर धमकी देने का आरोप23 फरवरी को मानव और उसकी पत्नी मुंबई से आगरा आए थे। उसी दिन मानव अपनी पत्नी को मायके छोड़ने गया, जहां उसके ससुराल वालों नेउसे धमकी दी। अगले दिन सुबह 5 बजे मानव ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस जांच में सामने आए निजी तनावआगरा के एएसपी विनायक गोपाल ने बताया कि मानव को मृत अवस्था में सैन्य अस्पताल लाया गया था। पोस्टमार्टम के बाद जब मृतक कामोबाइल खोला गया, तो उसमें एक वीडियो मिला, जिसमें उसने अपनी पत्नी के साथ तनावपूर्ण संबंधों का जिक्र किया था। शादी के बाद अतीत खत्म कर दिया थामानव की पत्नी निकिता शर्मा ने अपने बयान में कहा, “हां, मेरा अतीत था, लेकिन शादी के बाद सब कुछ खत्म कर दिया था। मेरे पति इस बात कोलेकर झगड़ा करते थे। वे शराब भी बहुत पीते थे और मेरे साथ मारपीट करते थे। मैंने तीन बार उन्हें आत्महत्या करने से रोका था। जब मैंने उनके माता-पिता को बताया, तो उन्होंने कहा कि यह पति-पत्नी का मामला है और इसे खुद सुलझाना चाहिए।” मृतक के परिवार ने निकिता पर लगाए आरोपमानव की मौत के बाद उनके परिवार ने निकिता पर उत्पीड़न का आरोप लगाया और उसे घर से निकाल दिया। मामले की जांच जारी है और पुलिस नेअभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं की है। #AgraSuicideCase #DomesticDispute #MentalHealthAwareness #MarriageConflict #JusticeForMen #CrimeNews #UttarPradeshNews #ViralVideo #SuicidePrevention #LegalRights
खड़गे का बीजेपी पर हमला: ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना में ₹455 करोड़ का फंड गायब

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बीजेपी पर तीखा हमला करते हुए कहा कि आरटीआई से यह खुलासा हुआ है कि मोदी सरकार की”बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” योजना में ₹455 करोड़ का फंड “गायब” हो गया है। उन्होंने कहा कि बीजेपी के विज्ञापनों में “बहुत हुआ नारी पर वार” का नारा पिछले 10 वर्षों से उन महिलाओं की चीखों का मजाक बना रहा है, जो भाजपा शासन में और कभी-कभी भाजपा के गुंडों द्वारा प्रताड़ित हुईहैं। खड़गे ने हाल ही में पुणे में एक महिला के साथ हुई दुष्कर्म की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि मणिपुर और हाथरस की बेटियों के मामले भी इसीतरह की गंभीरता को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा के राज में महिला सुरक्षा का कोई नामोनिशान नहीं बचा है। उन्होंने यह भी बताया कि कांग्रेस ने हाल ही में “बेटी बचाओ” पर मोदी जी से तीन सवाल पूछे थे, जिनमें से एक सवाल आंकड़ों को छिपाने से संबंधितथा। अब आरटीआई के ताजा खुलासे से मोदी सरकार के झूठ का पर्दाफाश हुआ है। खड़गे ने यह भी कहा कि भाजपा की नीतियों और उनके कार्यों के बीच एक बड़ा अंतर है, जो महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों के प्रति उनकीअसंवेदनशीलता को दर्शाता है। उन्होंने सरकार से मांग की कि वह इस मुद्दे पर गंभीरता से ध्यान दे और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिएठोस कदम उठाए। कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी कहा कि भाजपा के शासन में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में वृद्धि हुई है, और यह स्थिति चिंताजनक है। उन्होंने कहा किसरकार को चाहिए कि वह महिलाओं के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझे और उन्हें सुरक्षित वातावरण प्रदान करे। खड़गे ने अंत में कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा महिलाओं के अधिकारों और उनकी सुरक्षा के लिए खड़ी रहेगी और भाजपा की नाकामी को उजागर करतीरहेगी।
आतिशी ने विधानसभा अध्यक्ष को लिखी चिट्ठी, AAP विधायकों के निलंबन को बताया ‘लोकतंत्र पर प्रहार

दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और विधानसभा में विपक्ष की नेता आतिशी ने विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता को एक पत्र लिखकर आम आदमी पार्टी(AAP) के 21 विधायकों के निलंबन को लोकतंत्र पर प्रहार और जनादेश का अपमान बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष की आवाज कोजानबूझकर दबाया जा रहा है। आतिशी ने पत्र में चिंता व्यक्त की कि दिल्ली विधानसभा में विपक्षी दल के विधायकों को उनके विरोध प्रदर्शन के लिए भेदभावपूर्ण व्यवहार कासामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि आप विधायकों को उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना के अभिभाषण के दौरान “जय भीम” के नारे लगाने के कारणनिलंबित किया गया, जबकि “मोदी-मोदी” का नारा लगाने वाले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायकों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। विवाद तब बढ़ा जब आतिशी और अन्य निलंबित विधायकों को महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने के लिए विधानसभापरिसर में प्रवेश करने से रोक दिया गया। आतिशी ने इसे अभूतपूर्व बताते हुए कहा कि यह लोकतांत्रिक परंपराओं का उल्लंघन है। उन्होंने कहा, “दिल्ली विधानसभा में यह पहली बार है कि निर्वाचित विधायकों को विधानसभा परिसर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी गई।” उनकातर्क था कि यह निर्णय विपक्ष को दबाने और उनकी आवाज को कुचलने के लिए लिया गया है। आतिशी और 21 अन्य आप विधायकों को मंगलवार को उपराज्यपाल के अभिभाषण के दौरान मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के कार्यालय से बी.आर. आंबेडकर और भगत सिंह की तस्वीरें हटाने के विरोध में नारेबाजी करने के आरोप में निलंबित किया गया। विधानसभा अध्यक्ष ने विधायकों कोनिलंबित करते हुए उन्हें मार्शल के जरिए बाहर निकालने का आदेश दिया था। आतिशी ने विधानसभा अध्यक्ष से “लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखने” और सभी विधायकों के लिए “निष्पक्षता सुनिश्चित करने” का आग्रह किया।उन्होंने कहा, “आप इस विधानसभा के संरक्षक हैं, और आपका कर्तव्य है कि आप सभी विधायकों के साथ समान न्याय करें, चाहे वे सत्ता पक्ष के होंया विपक्ष के।” इस बीच, आतिशी ने इस घटना को दिल्ली में “लोकतंत्र की हत्या” करार दिया और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर चर्चा के लिएसमय देने का अनुरोध किया। उन्होंने भाजपा पर “तानाशाही की सभी हदें पार करने” का आरोप लगाया और लोकतांत्रिक मानदंडों को बहाल करने केलिए हस्तक्षेप करने का आह्वान किया। विधायकों का निलंबन उस समय हुआ जब विधानसभा में दिल्ली आबकारी नीति पर नियंत्रण एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट पेश की गई।इस घटनाक्रम ने दिल्ली की राजनीतिक स्थिति को और भी जटिल बना दिया है, और विपक्षी दलों के बीच असंतोष बढ़ा दिया है।
भाई ने पैसे देने से मना किया तो दरिंदे बेटे ने पार की हद, बूढ़ी मां पर फेंकी जलती लकड़ी; बाइक को भी जलाया

महाराष्ट्र के गोंदिया जिले के चिचगढ़ थाना क्षेत्र में एक च shocking घटना सामने आई है, जहां एक बेटे ने पैसों के लेनदेन को लेकर अपनी बूढ़ी मांपर जलती लकड़ी फेंक दी। इस घटना में मां गंभीर रूप से घायल हो गई। पुलिस ने आरोपी बेटे के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरूकर दी है। यह घटना 26 फरवरी की शाम 7:30 बजे से रात 11:00 बजे के बीच हुई। जानकारी के अनुसार, आरोपी डोमनदास और उसके छोटे भाई गुपेंद्रदास नेसांसद निधि से भवन निर्माण का काम साझा ठेकेदारी के तहत किया था। इसी पैसे को लेकर डोमनदास ने अपने भाई और मां से बहस की। डोमनदासने गुपेंद्रदास से काम के लिए पैसे मांगे, लेकिन गुपेंद्र ने कहा कि अभी पैसे नहीं आए हैं, और जब आएंगे, तब दे देंगे। इस पर डोमनदास ने गुस्से में आकर अपनी मां और भाई के साथ गाली-गलौज की। बहस बढ़ने पर डोमनदास ने अपने कमरे में जाकर एक डंडा लिया, जिस पर कपड़ा लपेटा हुआ था, और पेट्रोल की बोतल लेकर वापस आया। उसने डंडे में बंधे कपड़े पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी और जलती हुईलाठी से घर के बाहर रखी दो मोटरसाइकिलों पर भी पेट्रोल डालकर उन्हें आग के हवाले कर दिया। इसके बाद, डोमनदास ने जलती हुई लकड़ी अपनी मां के कमरे में फेंक दी, जिससे 61 वर्षीय ईमलाबाई झुलस गईं। उन्हें चिचगढ़ शासकीयअस्पताल के बर्न वार्ड में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। पुलिस ने बताया कि ईमलाबाई के बयान के आधार पर डोमनदास के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कियागया है। मामले की जांच चिचगढ़ थाने के सहायक पुलिस निरीक्षक काड़ेल कर रहे हैं। यह घटना परिवार के भीतर के विवादों और हिंसा की गंभीरताको दर्शाती है, जो पैसों के लेनदेन के कारण उत्पन्न हुई।
संभल की जामा मस्जिद में फिलहाल रंगाई-पुताई नहीं, कोर्ट ने सिर्फ सफाई की दी अनुमति

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल की शाही जामा मस्जिद में फिलहाल रंगाई-पुताई की अनुमति नहीं दी है। हालांकि, मस्जिद की सफाई कराई जा सकतीहै। जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की सिंगल बेंच ने यह फैसला सुनाया और मामले की अगली सुनवाई के लिए मंगलवार, 4 मार्च की तारीख तय कीहै। कोर्ट ने कहा कि मस्जिद कमेटी सफाई करवा सकती है, लेकिन अगर उसे लगता है कि पुताई आवश्यक है, तो उसे एएसआई (भारतीय पुरातत्वसर्वेक्षण) की रिपोर्ट पर आपत्ति दर्ज करनी होगी। कोर्ट में पेश हुई एएसआई की रिपोर्टशुक्रवार को इस मामले में सुनवाई के दौरान एएसआई ने कोर्ट में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट में बताया गया कि मस्जिद में रंगाई-पुताई की कोईआवश्यकता नहीं है। एएसआई ने कोर्ट में जॉइंट इंस्ट्रक्शन रिपोर्ट पेश की, जिसमें उन्होंने मस्जिद के रखरखाव से जुड़ी जानकारियां दीं। इस रिपोर्ट केआधार पर हाईकोर्ट ने फिलहाल केवल सफाई की अनुमति दी है और रंगाई-पुताई पर रोक बरकरार रखी है। मस्जिद कमेटी ने दायर की थी याचिकामस्जिद कमेटी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक सिविल रिवीजन याचिका दायर कर मस्जिद में रंगाई-पुताई की अनुमति मांगी थी। कमेटी का कहना थाकि मस्जिद की दीवारों पर समय के साथ धूल-गंदगी जम गई है, जिससे संरचना की सुंदरता प्रभावित हो रही है। इसलिए, पुताई की अनुमति दी जानीचाहिए। अब हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार, मस्जिद कमेटी को मंगलवार तक एएसआई की रिपोर्ट पर अपनी आपत्ति दर्ज करनी होगी। इसके बाद अगलीसुनवाई में कोर्ट तय करेगा कि मस्जिद में पुताई की इजाजत दी जाए या नहीं। प्रतिवादी पक्ष ने किया याचिका का विरोधइस मामले में प्रतिवादी पक्ष के वकील हरिशंकर जैन ने मस्जिद कमेटी की याचिका का विरोध किया। उन्होंने कोर्ट में तर्क दिया कि मस्जिद की पुताईके नाम पर वहां मौजूद हिंदू मंदिर के प्रतीक और चिह्नों को बदलने या मिटाने की कोशिश की जा सकती है। उनका कहना था कि मस्जिद काऐतिहासिक महत्व है, और पुताई से इसके मूल स्वरूप में बदलाव हो सकता है। एएसआई की दलील और निरीक्षण की अनुमति का मुद्दाकोर्ट में सुनवाई के दौरान एएसआई के वकील मनोज कुमार सिंह ने बताया कि एएसआई के अधिकारियों को मस्जिद में प्रवेश की अनुमति नहीं मिलीथी, इसलिए वे यह नहीं कह सकते कि वहां पुताई की आवश्यकता है या नहीं। उन्होंने कहा कि यदि अदालत अनुमति दे, तो एएसआई के अधिकारीमस्जिद का निरीक्षण कर सकते हैं और उसके आधार पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत कर सकते हैं।कोर्ट का फैसला और अगली सुनवाई कोर्ट ने फिलहाल मस्जिद में रंगाई-पुताई की अनुमति नहीं दी है और कहा है कि पहले सफाई करवाई जाए। अगर मस्जिद कमेटी को पुताई की जरूरतमहसूस होती है, तो उसे एएसआई की रिपोर्ट पर आपत्ति दर्ज करनी होगी। अगली सुनवाई मंगलवार, 4 मार्च को होगी, जिसमें कोर्ट अंतिम निर्णय लेसकता है। फिलहाल, संभल की शाही जामा मस्जिद में केवल सफाई की अनुमति दी गई है, लेकिन रंगाई-पुताई पर रोक बरकरार है। कोर्ट ने एएसआई की रिपोर्टके आधार पर यह निर्णय लिया है और अगली सुनवाई तक इस मामले में कोई बदलाव नहीं होगा। अब सभी की नजरें मंगलवार को होने वाली सुनवाईपर टिकी हैं, जहां मस्जिद कमेटी की आपत्ति और एएसआई की रिपोर्ट के आधार पर अदालत अगला कदम तय करेगी।