मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संभल को लेकर दिया बड़ा बयान, कहा- बाबर के समय हुए थे मंदिरों का विध्वंश

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में संभल जिले को लेकर एक महत्वपूर्ण बयान दिया है, जो राजनीति और धार्मिक आस्थाओं कोलेकर चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने कहा कि संभल में कुल 68 तीर्थ स्थल थे, जिनमें से अब तक केवल 18 की पहचान हो पाई है। इसके साथही, 19 प्राचीन कूपों का भी उत्खनन किया गया है, जो इस ऐतिहासिक स्थल की प्राचीनता और महत्व को दर्शाता है। योगी आदित्यनाथ ने इस अवसर पर 56 वर्षों के बाद संभल के शिव मंदिर में जलाभिषेक होने की बात भी की। यह एक ऐतिहासिक क्षण था, क्योंकिइस तरह की धार्मिक क्रियाएं लंबे समय से वहां नहीं हो पाई थीं। मुख्यमंत्री ने बाबर के समय में हिंदू मंदिरों के विध्वंश का भी उल्लेख किया, जो किऐतिहासिक घटनाओं को उजागर करता है और यह भी दर्शाता है कि भारत में धार्मिक संघर्षों की लंबी और जटिल इतिहास रहा है। योगी ने कहा, “संभल जैसे तथ्य सामने आएंगे तो मुंह दिखने लायक नहीं रहेंगे।” इस बयान के साथ ही उन्होंने यह भी जताया कि उनके नेतृत्व में राज्यमें हिंदू आस्थाओं के पुनर्निर्माण और संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उनका यह बयान राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा का कारण बना है, खासकर उन लोगों के लिए जो धार्मिक पहचान और भारतीय इतिहास के पुनर्निर्माण को लेकर सक्रिय हैं। सीएम योगी ने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य किसी भी समुदाय को पीछे छोड़ने का नहीं है, बल्कि वह सभी को साथ लेकर चलने का भाव रखते हैं।यह बयान राजनीतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश में विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के बीच तीव्र प्रतिस्पर्धा औरधार्मिक मुद्दों पर बहस चल रही है। उन्होंने आगे कहा, “हमारे अंदर सभी को 0 साथ लेकर चलने का भाव है,” जो यह दर्शाता है कि सरकार का उद्देश्य हर वर्ग और धर्म के लोगों के लिएसमावेशी विकास सुनिश्चित करना है। उनके इस बयान में यह संदेश भी छिपा है कि योगी सरकार उत्तर प्रदेश के धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों कोसंजोने के प्रति प्रतिबद्ध है, और साथ ही सभी धर्मों और समुदायों के लिए समान अवसर देने की दिशा में काम कर रही है। योगी आदित्यनाथ ने संभल को आस्था का केंद्र बताते हुए यह भी कहा कि इस जिले का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व कभी न कभी सभी के सामनेआएगा। उनके इस बयान के बाद, संभल जिले की ऐतिहासिक धरोहर और धार्मिक महत्व को लेकर सरकार की योजनाओं पर सवाल उठने कीसंभावना है। साथ ही, यह भी साफ है कि योगी आदित्यनाथ राज्य की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूती से स्थापित करने की दिशा मेंकदम उठा रहे हैं। राजनीतिक रूप से देखें तो यह बयान उन लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण है, जो धर्म, संस्कृति और भारतीय इतिहास को लेकर व्यापक चर्चा में शामिलहैं। मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब राज्य में आगामी चुनावों की तैयारियां चल रही हैं और धार्मिक मुद्दों पर चर्चा तेज हो गई है।योगी आदित्यनाथ के इस बयान ने एक बार फिर से संभल जिले को राजनीतिक और धार्मिक केंद्र के रूप में उभरने का मौका दिया है, और साथ हीराज्य के धार्मिक पुनर्निर्माण की दिशा को भी स्पष्ट किया है।
सीएम योगी का बड़ा बयान: संभल का ऐतिहासिक महत्व और धर्म के प्रति सम्मान

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण बयान दिया, जिसमें उन्होंने संभल का ऐतिहासिक महत्व और धर्म के प्रतिसम्मान की बात की। उन्होंने कहा कि संभल का उल्लेख इस्लाम से पहले के ग्रंथों में भी किया गया है, और यह स्थान 5000 साल पुराना है। सीएमयोगी ने बताया कि संभल में श्री हरि विष्णु का एक मंदिर था, जिसे 1526 में तोड़ा गया और नष्ट कर दिया गया। उन्होंने कहा, “यह स्थान वेदों मेंवर्णित है और यहां भगवान विष्णु के भावी अवतार का भी उल्लेख किया गया है।” उन्होंने यह भी कहा कि इस्लाम का उदय केवल 1,400 साल पहलेहुआ, जबकि संभल का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व इस्लाम से कम से कम 2,000 साल पुराना है। सीएम योगी ने यह स्पष्ट किया कि इस बात केसबूत सदियों से मौजूद हैं और इनका प्रमाण इतिहास में दर्ज है। मुख्यमंत्री ने 1526 में हुए इस ऐतिहासिक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि इस समय भगवान विष्णु के मंदिर को तोड़ दिया गया था और इसके दोसाल बाद 1528 में अयोध्या में राम मंदिर को भी तोड़ दिया गया। उन्होंने कहा कि दोनों कृत्य एक ही व्यक्ति द्वारा किए गए थे। योगी आदित्यनाथ नेयह भी कहा कि कोई भी धर्म और पूजा पद्धति पूरी दुनिया में अपनी अच्छाई के लिए जानी जाती है, और किसी की आस्था को जबरन छीनना याउनकी मान्यताओं को कुचलना अस्वीकार्य है। उन्होंने विशेष रूप से संभल के मामले को लेकर सच्चाई सामने रखने की बात की और कहा कि यहऐतिहासिक सत्य है, जिसे अब तक छिपाने का प्रयास किया गया था। अपने बयान में योगी आदित्यनाथ ने यह भी कहा कि वह हर संप्रदाय, समुदाय और पूजा पद्धति का सम्मान करते हैं। उन्होंने गोरखनाथ पीठ काउदाहरण देते हुए कहा कि वहां किसी प्रकार का भेदभाव नहीं है। गोरखनाथ पीठ में सभी जातियों, क्षेत्रों और संप्रदायों के लोग एक साथ बैठकर भोजनकरते हैं और यह एकता और समानता का प्रतीक है। योगी आदित्यनाथ ने कहा, “हमारे पूज्य संत, चाहे वे किसी भी धर्म से जुड़े हों, एक साथ बैठकरभोजन करते हैं और उन्हें समान सम्मान मिलता है।” उन्होंने भारत की वैदिक परंपरा को आत्मसात करने की बात की और कहा कि उपनिषदों में जोभावना व्यक्त की गई है, वह भारतीय समाज में गहरे तक समाहित है। उनका मानना है कि पूजा की हर पद्धति, चाहे वह सनातन धर्म से जुड़ी हो याअन्य किसी धर्म से, उसमें अंतर्निहित अच्छाइयां होती हैं, यही कारण है कि इतने लोग उन्हें मानते हैं। सीएम योगी ने अपने बयान में विपक्षी दलों और आलोचकों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इन लोगों को पहले धर्मग्रंथों का अध्ययन करनाचाहिए, ताकि वे सही तरीके से बहस कर सकें। योगी आदित्यनाथ का यह बयान राजनीति में एक नई चर्चा को जन्म दे सकता है, क्योंकि उन्होंने धर्मऔर इतिहास के बीच गहरे संबंधों पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक धारा इतनी विविधतापूर्ण और समृद्ध है कि यहांसभी धर्मों और पूजा पद्धतियों को समान सम्मान मिलना चाहिए। उनके इस बयान ने भारतीय समाज में धर्म, इतिहास और राजनीति के बीच एक नईबहस को जन्म दिया है।
आप नेता संजय सिंह का बीजेपी पर हमला: केंद्र सरकार पर उठाए सवाल

आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता संजय सिंह ने लोकसभा में केंद्र सरकार पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि सरकार पटरी से उतर चुकी हैऔर उसकी प्राथमिकताएँ पूरी तरह से गड़बड़ा चुकी हैं। सिंह ने बीजेपी सरकार को घेरते हुए सवाल किया कि आखिर कब तक 3 लाख कर्मचारियोंकी भर्ती की जाएगी, जिस पर पिछले लंबे समय से चर्चा हो रही है। उन्होंने कहा कि सरकार बार-बार इस मुद्दे पर समय विस्तार देती आ रही है, लेकिनकिसी ठोस कार्रवाई का कोई संकेत नहीं मिल रहा है। संजय सिंह ने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए रेलवे की पटरियों के बारे में भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने पूछा कि कब रेलवे की पटरियों की मरम्मत कीजाएगी, जो आए दिन दुर्घटनाओं का कारण बन रही हैं। उनका कहना था कि रेलवे नेटवर्क की सुरक्षा और विकास में सरकार पूरी तरह से नाकामसाबित हो रही है, जबकि यह एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्र है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों और योजनाओं के बीचकोई तालमेल नहीं है, जिससे नागरिकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। संजय सिंह ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह जनता की समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रही है और अपनी ज़िम्मेदारी से मुंह चुराती जा रहीहै। उन्होंने बीजेपी सरकार से सवाल करते हुए यह पूछा कि इन दोनों मामलों पर गंभीरता से कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे हैं। सिंह ने यह भी कहा किआम आदमी पार्टी ने हमेशा लोगों की भलाई के लिए काम किया है, और अब समय आ गया है कि केंद्र सरकार भी अपनी जिम्मेदारियों को समझे औरउन पर उचित कदम उठाए।
गौरव गोगोई का बीजेपी पर हमला: माजुली के ब्रिज प्रोजेक्ट में हो रही देरी पर उठाए सवाल

काँग्रेस नेता गौरव गोगोई ने लोकसभा में बीजेपी पर तीखा हमला करते हुए असम के माजुली द्वीप से जुड़ी एक महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना में होरही देरी को लेकर सरकार से सवाल किए। गोगोई ने कहा, “मुझे गर्व है कि दुनिया का सबसे बड़ा नदी द्वीप, माजुली असम के जोरहाट जिले में स्थितहै, जो हमारी ब्रह्मपुत्र नदी में बसा हुआ है। यह द्वीप अपनी आध्यात्मिक शक्ति, प्रसिद्धि और धार्मिक आस्था के कारण लोगों के बीच आकर्षण काकेंद्र है। यहां जाने के लिए दुनियाभर से पर्यटक आते हैं, लेकिन माजुली को मुख्य भूमि से जोड़ने वाला ब्रिज पिछले साल सितंबर से रुका हुआ है। इसपरियोजना के काम में लगातार देरी हो रही है, जिससे स्थानीय लोगों को बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।” गोगोई ने आगे कहा कि इस ब्रिज के री-टेंडरिंग का काम जनवरी में शुरू होना था, लेकिन मार्च तक भी कोई ठोस प्रगति नहीं हो पाई है। उन्होंने इसस्थिति को लेकर बीजेपी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार इस परियोजना में देरी का कोई स्पष्ट कारण नहीं बता रही है। इसके अलावा, इस परियोजना के खर्च में भी बढ़ोतरी हो रही है, जिससे स्थानीय लोगों के बीच सरकार के खिलाफ निराशा का माहौल बन रहा है। गोगोई ने यहसवाल उठाया कि आखिर क्यों इस ब्रिज के निर्माण में देरी हो रही है, और इसका खर्च बढ़ने के क्या कारण हैं? उन्होंने केंद्रीय मंत्री से यह भी पूछा किइस महत्वपूर्ण परियोजना का काम कब शुरू होगा और इसे किस प्रकार प्राथमिकता दी जाएगी। गौरव गोगोई ने माजुली को जोड़ने वाले ब्रिज के निर्माण की अहमियत को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि माजुली असम के सांस्कृतिक औरधार्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस परियोजना को समय पर पूरा करने से माजुली द्वीप के लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी और यात्रियों केलिए सुविधाएं मिल सकती हैं। गोगोई ने सरकार से अपील की कि इस परियोजना को प्राथमिकता दी जाए और समय रहते काम शुरू किया जाएताकि माजुली के विकास में गति मिल सके। उन्होंने कहा कि यदि इस परियोजना में और देरी हुई तो न केवल असम के विकास में रुकावट आएगी, बल्कि यह सरकार की असफलता को भी दर्शाएगा।
12 हजार गाड़ियों का फर्जी बीमा करने वाले गैंग का खुलासा, इंश्योरेंस कंपनी के एजेंट समेत 4 गिरफ्तार

देशभर में 12,000 से अधिक वाहनों की फर्जी इंश्योरेंस पॉलिसी जारी करने वाले एक गैंग का खुलासा हुआ है। गाजियाबाद की साइबर थाना पुलिसने इस गैंग के चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक इंश्योरेंस कंपनी का एजेंट भी शामिल है। अधिकारियों के मुताबिक, दो अन्य आरोपीअभी फरार हैं, जिनकी तलाश की जा रही है। इस मामले की शुरुआत तब हुई जब आईसीआईसीआई लोंबार्ड कंपनी के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट संजयठाकुर ने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें दो एजेंटों पर मोटर बीमा पॉलिसी को गलत तरीके से जारी करने का आरोप था। आरोपियों पर यह आरोप था कि उन्होंने वाहनों की श्रेणी को गलत तरीके से दर्ज किया। उदाहरण के तौर पर, कॉमर्शियल वाहनों, निजी कारों औरमाल वाहक वाहनों को दोपहिया वाहनों के रूप में दिखाया गया, जिससे धोखाधड़ी की गई। इस तरीके से 12.31 लाख रुपये की 858 पॉलिसीरोहित कुमार ने और 18.50 लाख रुपये की 128 पॉलिसी विकास कश्यप ने गलत तरीके से जारी की थी। इस फर्जीवाड़े का खुलासा होते ही चारआरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें से विकास कश्यप, आकाश सिसोदिया, याकूब और आरिम शामिल हैं। एडीसीपी क्राइम पीयूष सिंह के मुताबिक, आरोपियों ने एक तकनीकी खामी का फायदा उठाया। पुराने कॉमर्शियल और मालवाहक वाहनों केमालिकों द्वारा थर्ड पार्टी इंश्योरेंस लिया जाता है, जो एक्सीडेंट के बाद कोर्ट से क्लेम करने के लिए पर्याप्त होता है। इसी वजह से बीमा पॉलिसी मेंछेड़छाड़ कर कम मूल्य की थर्ड पार्टी पॉलिसी जारी की जाती थी, जिससे इसकी वेरिफिकेशन नहीं हो पाती थी और गाड़ी मालिक को इसका पता नहींचलता था। अब तक की जांच में यह सामने आया कि इस गैंग ने देशभर में 12,000 से ज्यादा वाहनों की फर्जी इंश्योरेंस पॉलिसी जारी की और लगभग 14 करोड़रुपये का फर्जीवाड़ा किया। इनमें से 61 फर्जी पॉलिसी गाजियाबाद के वाहनों की भी थीं। इसके अलावा, गैंग ने चोला मंडलम इंश्योरेंस कंपनी कीपॉलिसी भी फर्जी तरीके से तैयार की थी। इस मामले में चोला मंडलम के अधिकारियों से संपर्क कर डेटा प्राप्त करने की कोशिश की जा रही है। एडीसीपी ने बताया कि फिलहाल रोहित कुमार और दो अन्य आरोपी फरार हैं, और उनकी गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं। यह खुलासा न केवल इंश्योरेंससेक्टर में धोखाधड़ी के एक बड़े नेटवर्क को उजागर करता है, बल्कि यह भी बताता है कि इस तरह के फर्जीवाड़े को रोकने के लिए और सख्त उपायोंकी आवश्यकता है।
अब छाएगी ‘दीवानियत’, ‘सनम तेरी कसम’ के बाद इस हसीना संग रोमांस करेगा ‘इंदर’

पंजाबी अभिनेत्री सोनम बाजवा बॉलीवुड में लगातार अपनी फिल्मों के जरिए कदम बढ़ा रही हैं। हाल ही में, उन्होंने अपनी नई फिल्म ‘दीवानियत’ कीघोषणा की, जिसे उन्होंने अपने इंस्टाग्राम प्रोफाइल पर साझा किया। यह एक रोमांटिक-ड्रामा फिल्म होगी, जिसमें सोनम बाजवा के साथ ‘सनम तेरीकसम’ के अभिनेता हर्षवर्धन राणे नजर आएंगे। फिल्म का पोस्टर इस बात को स्पष्ट करता है कि यह प्यार में डूबे दो लोगों की कहानी होगी। मिलापजावेरी, जो ‘मरजावां’, ‘सत्यमेव जयते’ और ‘कागज’ जैसी फिल्मों के लिए जाने जाते हैं, इसका निर्देशन करेंगे। यह फिल्म 2025 के अंत तक रिलीजहोने की संभावना है। सोनम बाजवा की बॉलीवुड यात्रा में यह फिल्म तीसरी होगी। इससे पहले, वह अक्षय कुमार की मल्टी-स्टारर फिल्म ‘हाउसफुल 5’ से बॉलीवुड में डेब्यूकर रही हैं, और टाइगर श्रॉफ के साथ ‘बागी 4’ भी साइन कर चुकी हैं। उनके बॉलीवुड करियर का यह साल बहुत ही महत्वपूर्ण होने वाला है, क्योंकिउनका हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखना उनके फैंस के लिए खास होगा। सोशल मीडिया पर उनके लाखों फॉलोअर्स हैं, जो उनकी फिल्मों का बेसब्रीसे इंतजार करते हैं। हर्षवर्धन राणे की बात करें तो, उन्होंने 2016 में ‘सनम तेरी कसम’ से बॉलीवुड में कदम रखा था। इस रोमांटिक-ड्रामा में पाकिस्तानी अभिनेत्री मावराहुसैन भी मुख्य भूमिका में थीं। फिल्म को भले ही शुरुआत में वह पहचान नहीं मिली, जो उसे मिलनी चाहिए थी, लेकिन इस साल इसे फिर से रिलीजकिया गया, और इसने 50 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई की। अब यह फिल्म एक ब्लॉकबस्टर बन चुकी है, और राणे को इसके बाद सफलता कास्वाद मिला है। इसके अलावा, हर्षवर्धन राणे ने ‘तैश’, ‘हसीन दिलरुबा’, ‘तारा बनाम बिलाल’ और ‘सावी’ जैसी फिल्मों में भी अभिनय किया है। हालांकि, ‘सनम तेरीकसम’ में उनकी भूमिका को लेकर उन्हें सबसे ज्यादा पहचान मिली। फिल्म के दोबारा रिलीज होने के बाद, ऐसा प्रतीत होता है कि राणे अब लगातारबैक-टू-बैक प्रोजेक्ट साइन कर रहे हैं। ‘दीवानियत’ के अलावा, वह ‘सनम तेरी कसम 2’ में भी नजर आएंगे, जो उनके करियर के लिए और भी महत्वपूर्णसाबित हो सकता है। इस फिल्म के साथ ही सोनम बाजवा और हर्षवर्धन राणे की जोड़ी रोमांस के जरिए एक नई कहानी दर्शकों के सामने पेश करेगी, जो निश्चित ही दर्शकोंको आकर्षित करेगी। ‘दीवानियत’ एक ताजगी और नए प्यार की खोज की ओर इशारा करती है, और यह देखना दिलचस्प होगा कि यह फिल्म दोनोंकलाकारों के करियर में और कितनी सफलता लाती है।
प्रधानमंत्री मोदी को मॉरीशस के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया गया

मॉरीशस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने देश का सर्वोच्च सम्मान “द ग्रैंड कमांडर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द स्टार एंड की ऑफ द इंडियन ओशन” देनेकी घोषणा की। यह सम्मान मोदी को उनके द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने में योगदान और भारत-मॉरीशस के बीच संबंधों को प्रगाढ़ बनाने केलिए दिया जा रहा है। यह सम्मान प्राप्त करने वाले मोदी पहले भारतीय नेता होंगे, और यह उनके लिए 21वां अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर मॉरीशस के राष्ट्रपति धरमबीर गोखुल और उनकी पत्नी वृंदा गोखुल के अलावा, प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम औरउनकी पत्नी वीणा रामगुलाम को ‘ओसीआइ कार्ड’ (ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया कार्ड) सौंपे। प्रधानमंत्री रामगुलाम ने इसे अपने और उनकी पत्नीके लिए एक सुखद आश्चर्य बताया। मोदी को यह सम्मान मॉरीशस द्वारा दिया जाने वाला पांचवां विदेशी नागरिक सम्मान है। मोदी ने मॉरीशस के राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद सोशल मीडिया पर साझा किया कि दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने केतरीकों पर चर्चा की। मोदी ने बताया कि यह उनके लिए गर्व की बात है कि वे मॉरीशस के राष्ट्रीय दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में दूसरी बारशामिल हो रहे हैं। इससे पहले, मोदी ने 2015 में मॉरीशस की यात्रा की थी।प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति गोखुल को महाकुंभ से संगम का पवित्र जल और बिहार का सुपरफूड मखाना भेंट किया। इसके अलावा, उन्होंने राष्ट्रपतिगोखुल की पत्नी को एक बनारसी रेशमी साड़ी भी उपहार में दी। इस दौरान मोदी ने मॉरीशस में आयुर्वेद उद्यान का भी दौरा किया, जो भारत सरकारकी मदद से स्थापित किया गया था। उन्होंने आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में मॉरीशस को भारत का महत्वपूर्ण साझीदार बताया।मॉरीशस पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत करने के लिए प्रधानमंत्री रामगुलाम सहित 200 गणमान्य लोग हवाई अड्डे पर मौजूद थे। भारतीयसमुदाय की महिलाओं ने पारंपरिक भोजपुरी संगीत ‘गीत गवई’ से उनका स्वागत किया। मोदी ने वहां उपस्थित लोगों के साथ ‘भारत माता की जय’ केनारे लगाए और तिरंगा लहराया, जिससे उनका स्वागत शानदार बना।
‘होली पर हिजाब की तरह तिरपाल ओढ़कर निकलें’, योगी के मंत्री ने किसे दे दी नसीहत?

उत्तर प्रदेश के योगी सरकार के मंत्री रघुराज सिंह ने हाल ही में होली के त्योहार के दौरान एक विवादित बयान दिया, जो अब सियासी हलकों में चर्चाका विषय बन गया है। अलीगढ़ जिले में भाजपा के वरिष्ठ नेता रघुराज सिंह ने कहा कि इस शुक्रवार को होली और रमजान का महीना एक साथ आ रहेहैं, ऐसे में मुस्लिम पुरुष यदि नमाज के लिए बाहर निकलते हैं तो उन्हें रंगों से बचने के लिए खुद को हिजाब की तरह तिरपाल से ढक लेना चाहिए।यह बयान तब आया है जब होली और रमजान एक ही समय पर मनाए जा रहे हैं, और कई मुस्लिम क्षेत्रों में होली खेलने को लेकर विवाद की स्थितिबन सकती है। रघुराज सिंह ने इस बयान में यह भी कहा कि सनातन धर्म के अनुयायियों के लिए होली का त्योहार बहुत महत्वपूर्ण है, जो साल में एक बार आता है, और ऐसे में यह अपेक्षाएं करना कि वे मस्जिदों या अन्य संवेदनशील स्थानों के पास होली न खेलें, व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने मुस्लिम महिलाओं केहिजाब ओढ़ने और मस्जिदों को तिरपाल से ढकने की मिसाल देते हुए यह सुझाव दिया कि मुस्लिम पुरुष भी होली के दिन बाहर जाते समय तिरपालओढ़ सकते हैं ताकि वे रंगों से बच सकें। यह बयान विशेष रूप से उस समय दिया गया जब यूपी में होली और रमजान की समयावधि के कारण कुछधार्मिक और सांप्रदायिक मुद्दे उठे हैं। यह विवादित बयान भाजपा के संभल जिले के एक सर्कल अधिकारी की उस टिप्पणी के बाद आया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि जो लोग होली केरंगों से असहज महसूस करते हैं, उन्हें इस दिन घर के अंदर रहना चाहिए, क्योंकि होली एक बार का त्योहार है, जबकि जुमा की नमाज साल में 52 बारहोती है। इस टिप्पणी को यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी समर्थन दिया था। इसके बाद कई मस्जिदों ने होली के दिन शुक्रवार की नमाजका समय बदल दिया है। वहीं, रघुराज सिंह ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में राम मंदिर के निर्माण को लेकर एक प्रस्ताव का भी समर्थनकिया और इस प्रक्रिया में योगदान देने की इच्छा जताई। इन घटनाओं के बीच, जिला प्रशासन ने होली के त्योहार को शांतिपूर्ण तरीके से मनाने केलिए सभी एहतियाती कदम उठाए हैं।
वोटर लिस्ट विवाद के बीच Rahul Gandhi और प्रियंका ने ओम बिरला से की मुलाकात, जानें क्या हुई बात

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की। राहुलगांधी ने लोकसभा में वोटर लिस्ट के मुद्दे पर चर्चा की मांग की और कहा कि यह मुद्दा देश भर में महत्वपूर्ण हो चुका है। उन्होंने बताया कि विभिन्नराज्यों में मतदाता सूची पर सवाल उठ रहे हैं और पूरा विपक्ष इस पर चर्चा चाहता है। राहुल गांधी का कहना था कि यह एक गंभीर मुद्दा है, जिसे संसदमें उठाया जाना चाहिए ताकि जनता को इस पर साफ-साफ जानकारी मिल सके और लोकतंत्र की मूलभूत प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से चलाया जासके। विपक्ष का एकजुट रुख इस मुद्दे पर सरकार से चर्चा की अनुमति देने की मांग कर रहा है ताकि मतदाता सूची में संभावित धांधली और गड़बड़ियोंको सामने लाया जा सके। इस बीच, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सरकार से संसद में इस मुद्दे पर चर्चा की अनुमति देने का आग्रहकिया। प्रियंका गांधी ने कहा कि देश में मतदान प्रक्रिया में गड़बड़ी और मतदाता सूची में धांधली की खबरें केवल चुनावों से पहले सामने आती हैं, जोलोकतंत्र के लिए अत्यधिक खतरनाक हैं। उन्होंने कहा कि यह समय की जरूरत है कि इस मुद्दे पर संसद में खुलकर चर्चा हो और सरकार इस पर अपनीजिद छोड़कर विपक्ष की मांगों पर ध्यान दे। प्रियंका गांधी ने कहा कि यह मुद्दा सिर्फ एक सूची का नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा का है।उनका कहना था कि यदि सरकार अपने रवैये में लचीलापन दिखाए, तो यह लोकतंत्र के हित में होगा। उन्होंने राहुल गांधी द्वारा उठाए गए मुद्दे कोसमर्थन देते हुए कहा कि मतदाता सूची पर चर्चा जरूरी है ताकि इस मामले की जांच की जा सके और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को रोका जा सके। इस बीच, विपक्षी दलों की चिंता इस बात को लेकर बढ़ी है कि मतदाता सूची में गड़बड़ी और धांधली के आरोप लगातार बढ़ते जा रहे हैं। हरियाणाऔर महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में मिली हार के बाद विपक्षी पार्टियों ने वोटर लिस्ट पर सवाल उठाए थे। इसके अलावा दिल्ली में अरविंद केजरीवालने भी दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान वोटर लिस्ट पर सवाल उठाए थे, जिससे इस मुद्दे पर राजनीतिक तनाव बढ़ गया था। 6 मार्च को टीएमसी केएक प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग से मुलाकात की थी, जिसमें एक ही मतदाता फोटो पहचान पत्र (EPIC) नंबर से जुड़े फर्जी मतदाता होने केआरोप लगाए गए थे। हालांकि, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि एक ही EPIC नंबर का मतलब यह नहीं है कि यह डुप्लिकेट या फर्जी मतदाता हैं, और मामले की गंभीरता से जांच की जाएगी। इसके बावजूद, विपक्षी पार्टियां लगातार इस मुद्दे को लेकर सरकार पर दबाव बना रही हैं, ताकि मतदातासूची की वैधता और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।
पूर्व सीएम के बेटे के ठिकानों पर ED का छापा, पूर्व सीएम से भी पूछताछ

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 10 मार्च को छापेमारी की। यह कार्रवाईराज्य में हुए शराब घोटाले के संदर्भ में की जा रही है, जिसके तहत कुल 15 स्थानों पर छापेमारी की गई। ईडी की इस कार्रवाई ने राज्य में राजनीतिकहलचल मचा दी है, और यह पूर्व सीएम के लिए नई चुनौतियां लेकर आई है। सूत्रों के अनुसार, इस छापेमारी का मुख्य उद्देश्य चैतन्य बघेल से जुड़ीकथित अवैध संपत्तियों और घोटाले के संबंध में जानकारी हासिल करना था। चैतन्य बघेल का नाम शराब घोटाले की जांच के दौरान सामने आया था, जिसके बाद से ईडी ने इस मामले में सक्रियता बढ़ा दी है। इस कार्रवाई से भूपेश बघेल की मुश्किलें बढ़ती हुई नजर आ रही हैं, क्योंकि वह खुद भीइस मामले में आरोपों के घेरे में आ सकते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ईडी की कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया दी है और इसे एक षड्यंत्र करार दिया है। भूपेश बघेल के कार्यालय द्वारा उनकेएक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल से एक पोस्ट जारी किया गया, जिसमें उन्होंने इस कार्रवाई को राजनीतिक साजिश बताते हुए कहा कि “सात वर्षों से चलेआ रहे झूठे केस को जब अदालत में बर्खास्त कर दिया गया, तो आज ईडी के मेहमानों ने पूर्व मुख्यमंत्री, कांग्रेस महासचिव भूपेश बघेल के भिलाईनिवास में आज सुबह प्रवेश किया है।” बघेल ने यह भी कहा कि यदि कोई इस षड्यंत्र के माध्यम से पंजाब में कांग्रेस को रोकने का प्रयास कर रहा है, तो यह उनकी बड़ी भूल है। इस बयान से भूपेश बघेल ने स्पष्ट रूप से इस कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध और षड्यंत्र का हिस्सा बताया है, जो उनकेखिलाफ चलाए जा रहे झूठे मामलों को फिर से जीवित करने की कोशिश कर रहा है। ईडी ने पिछले साल मई में भी इस मामले में कई अन्य व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की थी, जिसमें रायपुर के मेयर एजाज ढेबर के भाई अनवर ढेबरऔर पूर्व IAS अधिकारी अनिल टुटेजा शामिल थे। इन आरोपियों की संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया गया था, जिनकी कुल कीमत205.49 करोड़ रुपये के आसपास थी। इसके अलावा, ईडी ने शराब घोटाले से जुड़े पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को भी गिरफ्तार किया था।इस गिरफ्तारी ने मामले में और भी हलचल मचा दी थी, और अब चैतन्य बघेल के ठिकानों पर छापेमारी से यह संकेत मिलता है कि ईडी की कार्रवाईऔर तेज हो सकती है। ईडी ने इस मामले में आरोपियों की संपत्तियों की कुर्की भी की है और जांच में तेजी लाते हुए, राज्य सरकार के पूर्व अधिकारियोंऔर नेताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। अब, भूपेश बघेल की टेंशन भी बढ़ गई है, क्योंकि उनके परिवार के सदस्य के खिलाफ जांच तेज हो गईहै और उनके खिलाफ भी पूछताछ की जा रही है।