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बिहार: तानी पिस्तौल और छह बदमाशों ने लूटी 25 करोड़ की ज्वेलरी, वीडियो देख उड़ जाएंगे होश

बिहार के आरा जिले में सोमवार को एक बड़ी लूट की घटना सामने आई, जिसने पूरे इलाके में सनसनी मचा दी है। आरा के गोपाली चौक स्थिततनिष्क ज्वेलरी शोरूम में छह बदमाश रिवॉल्वर लेकर घुस गए और शोरूम के कर्मचारियों को बंधक बना लिया। इसके बाद उन्होंने करीब 25 करोड़रुपये के गहनों की लूट को अंजाम दिया। शोरूम में लूट के बाद बदमाश तेजी से फरार हो गए, लेकिन सूचना मिलते ही पुलिस ने उनका पीछा कियाऔर फायरिंग की। पुलिस की कार्रवाई में दो बदमाशों के पैरों में गोली लग गई और उन्हें गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार बदमाशों के पास से कुछ लूटीहुई ज्वेलरी भी बरामद हुई, जबकि चार बदमाश लूटी हुई ज्वेलरी के साथ भागने में सफल रहे। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसे देखकरकोई भी दंग रह जाएगा। भोजपुर के एसपी राज ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि पकड़े गए बदमाशों के पास से दो पिस्टल, 10 कारतूस, और दो बड़े झोले में तनिष्कशोरूम से लूटे गए गहने मिले हैं। शोरूम के स्टोर मैनेजर कुमार मृत्युंजय ने बताया कि इस शोरूम में उस समय 50 करोड़ रुपये से ज्यादा की ज्वेलरीरखी हुई थी, लेकिन बदमाशों ने 25 करोड़ के गहने ही लूटे। एसपी ने बताया कि पुलिस अब बाकी चार फरार बदमाशों की तलाश में जुटी हुई है। गौरतलब है कि लूट की घटना सुबह करीब 10 बजे हुई, जब शोरूम की सफाई चल रही थी। शोरूम के गार्ड ने बताया कि पहले दो बदमाश शोरूम मेंघुसे और फिर दस मिनट बाद चार और बदमाश शोरूम में घुस गए। बदमाशों ने गार्ड के साथ मारपीट की और उनका हथियार छीन लिया। इसके बादउन्होंने शटर को अंदर से बंद कर लिया और 22 मिनट तक लूटपाट की। बदमाशों ने 10.50 बजे शोरूम से लूटपाट करके फरार हो गए।

पीएम इंटर्नशिप 2025: आवेदन की अंतिम तिथि कल, जानें पूरी जानकारी

प्रधानमंत्री इंटर्नशिप 2025 के दूसरे चरण के लिए आवेदन प्रक्रिया कल, 12 मार्च को समाप्त हो रही है। इस अवसर का लाभ उठाने के लिए इच्छुकउम्मीदवारों को पीएम इंटर्नशिप की आधिकारिक वेबसाइट pminternship.mca.gov.in पर जाकर जल्दी से आवेदन करना चाहिए। इस चरण में1 लाख युवाओं को इंटर्नशिप के लिए चयनित किया जाएगा, जो एक शानदार अवसर है। इस इंटर्नशिप के लिए आवेदन करने वाले युवाओं की उम्र 21 से 24 वर्ष के बीच होनी चाहिए, और उन्हें किसी भी कंपनी में फुल टाइम नौकरी नहींकरनी चाहिए। इसके अलावा, केवल वे उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं जिनकी पारिवारिक आय 8 लाख रुपये से अधिक नहीं है और जो सरकारीसेवा में नहीं हैं। IIT, IIM, IISER जैसे बड़े संस्थानों से ग्रेजुएशन करने वाले और हायर एजुकेशन वाले उम्मीदवारों को इस इंटर्नशिप के लिए आवेदनकरने की अनुमति नहीं है। चयनित उम्मीदवारों को हर महीने 5,000 रुपये की स्टाइपेंड मिलेगा, जिसमें 4500 रुपये केंद्र सरकार और 500 रुपये सीएसआर फंड से दिए जाएंगे।इसके अतिरिक्त, एकमुश्त 6,000 रुपये भी दिए जाएंगे। आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को pminternship.mca.gov.in पर जाकररजिस्ट्रेशन करना होगा, फिर आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने के बाद आवेदन सबमिट करना होगा।

क्या गोवा और गुजरात में अकेले विधानसभा का चुनाव लड़ेगी AAP? आतिशी ने दिया जवाब

आम आदमी पार्टी (AAP) की वरिष्ठ नेता आतिशी ने सोमवार को स्पष्ट किया कि पार्टी 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों में गोवा और गुजरातमें कांग्रेस के साथ गठबंधन किए बिना अकेले चुनाव लड़ेगी। दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी गोवा के मडगांव में पार्टी कार्यालय के उद्घाटन केलिए एक दिवसीय दौरे पर थीं। उन्होंने बताया कि “हम अपने दम पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। अब तक किसी भी प्रकार के गठबंधन पर कोईबातचीत नहीं हुई है।” उनका यह बयान खासा महत्वपूर्ण था, क्योंकि इससे पहले कई बार यह चर्चा रही थी कि AAP कांग्रेस के साथ गठबंधन करचुनाव में उतर सकती है। आतिशी ने यह भी बताया कि 2022 में गोवा में पार्टी ने दो सीटें जीती थीं और इस समय पार्टी के पास वहां दो विधायक हैं।उन्होंने कांग्रेस के बारे में कहा कि 2022 चुनावों में कांग्रेस ने 11 सीटें जीतीं, लेकिन पार्टी के आठ विधायक बाद में भारतीय जनता पार्टी (BJP) मेंशामिल हो गए। ऐसे में कांग्रेस केवल तीन विधायकों के साथ मुख्य विपक्षी दल बनी है, जबकि AAP के दो विधायक अभी भी पार्टी के साथ खड़ेहैं। आतिशी ने AAP के दो विधायकों के बारे में भी कहा कि जब पार्टी ने 2022 का चुनाव जीता था, तब यह अफवाहें फैलाई जा रही थीं कि येविधायक पार्टी के साथ ज्यादा समय तक नहीं रहेंगे, लेकिन वे अभी भी पार्टी के साथ हैं, क्योंकि उनका राजनीति में पैसा कमाने का कोई इरादा नहींहै। उन्होंने यह भी कहा कि BJP ने पार्टी के विधायकों को लुभाने की पूरी कोशिश की, लेकिन वे पार्टी के साथ खड़े रहे। जब उनसे यह सवाल पूछागया कि क्या AAP समान विचारधारा वाले दलों के साथ गठबंधन करने में दिलचस्पी नहीं रखती, तो आतिशी ने कहा, “जब 11 में से 8 विधायकभाजपा में शामिल हो जाते हैं, तो समान विचारधारा क्या होती है?” उन्होंने यह भी बताया कि AAP की राजनीति का उद्देश्य केवल चुनाव जीतना औरपैसा कमाना नहीं है, बल्कि वे जनता के लिए काम करने में विश्वास रखते हैं। वे कहती हैं, “हमारे लिए राजनीति का मतलब है लोगों के लिए कामकरना, न कि चुनाव जीतने के बाद केवल सत्ता का फायदा उठाना।” आतिशी ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार का जिक्र करते हुए कहा कि पार्टी के लिए यह सवाल नहीं है कि “AAP का क्या होगा?”, बल्कि असली सवाल यह है कि “दिल्ली के लोगों का क्या होगा?” उन्होंने बीजेपी पर आरोप लगाया कि वे दिल्ली में AAP सरकार द्वारा किए गएकामों को सुनियोजित तरीके से रोक रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, उन्होंने कहा कि बीजेपी ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि वे 250 मोहल्ला क्लिनिकबंद कर देंगे और मुफ्त दवाइयां देने की योजना भी बंद कर देंगे। साथ ही, आतिशी ने यह भी कहा कि अरविंद केजरीवाल ने पहले ही चेतावनी दी थीकि अगर AAP हारती है, तो दिल्ली में बिजली कटौती शुरू हो जाएगी और सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता भी गिर जाएगी। आतिशी ने आरोपलगाया कि बीजेपी ने दिल्ली चुनाव में जोड़-तोड़, मशीनरी का दुरुपयोग और मतदाताओं को डराने-धमकाने का काम किया। इसके बावजूद, बीजेपीऔर AAP के बीच केवल दो प्रतिशत का अंतर रहा, जो यह दर्शाता है कि दिल्ली की जनता पार्टी के प्रति अपनी उम्मीदों को लेकर बहुत उत्साहितथी। आतिशी ने दिल्ली में भाजपा के चुनावी वादों को लेकर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी ने दिल्ली की महिलाओं को2,500 रुपये देने का जो वादा किया था, वह पूरा नहीं किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला दिवस पर यह घोषणा की थी कि 8 मार्च को सभीमहिलाओं के बैंक खातों में पहली किस्त दी जाएगी, लेकिन न तो किस्त दी गई और न ही योजना के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू हुई। आतिशी नेयह भी कहा कि इस पूरी स्थिति से यह साफ हो जाता है कि भाजपा का अपने चुनावी वादों को पूरा करने का कोई इरादा नहीं है। उनका कहना था किभाजपा ने केवल वोट हासिल करने के लिए झूठे वादे किए, लेकिन उन्हें लागू करने का कोई प्रयास नहीं किया। AAP ने यह दिखाया है कि वे जनताके साथ खड़े हैं और उनके हितों के लिए काम कर रहे हैं, जबकि बीजेपी केवल सत्ता में बने रहने के लिए हर हथकंडा अपनाती है।

दिल्ली भाजपा कार्यालय में होली मिलन समारोह का आयोजन, ‘रंग बरसे’ की धुन पर जमकर थिरके नेता और पत्रकार

होली के त्योहार के नजदीक आने पर अब जगह-जगह होली को लेकर कार्यक्रम किए जा रहे हैं. इसी क्रम में मंगलवार को दिल्ली बीजेपी कार्यालय मेंआयोजित होली मिलन समारोह में भाजपा नेताओं ने एक दूसरे को रंग गुलाल लगाकर होली खेली और लोगों को शुभकामनाएं दी. दिल्ली प्रदेश भाजपा कार्यालय पर होली मिलन कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्रसचदेवा, मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा समेत और अन्य भाजपा नेता शामिल हुए. इस दौरान मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, वीरेंद्र सचदेवा, भाजपानेता अलका गुर्जर, मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा सहित कई नेताओं ने होली के गानों पर जमकर डांस किया. होली के गीतों पर जमकर थिरके बीजेपी नेता: होली के गीतों पर थिरकते हुए बीजेपी नेताओं ने न सिर्फ एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाया, बल्कि होलीकी शुभकामनाएं भी दी. दिल्ली बीजेपी प्रदेश कार्यालय में होली का रंग नेताओं पर खूब चढ़ा. दिल्ली बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा होली केरंग में डूबे नजर आए. नई दिल्ली से लोकसभा प्रत्याशी बांसुरी स्वराज भी होली खेलने के लिए प्रदेश कार्यालय पहुंचीं. दोनों नेताओं ने एक दूसरे कोगुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दी. बीजेपी के सभी सांसद और प्रत्याशियों ने भी प्रदेश कार्यालय में पहुंच कर एक-दूसरे को रंग गुलाललगाया. 27 साल बाद सत्ता में वापसी: बता दें कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि यह प्रेम, सौहार्द और एकता का प्रतीक है. ऐसे आयोजन समाज मेंभाईचारे को बढ़ावा देते हैं और अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ते हैं. गौरतलब है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत के साथ भारतीयजानता पार्टी ने 27 साल बाद सत्ता में वापसी की है. यह दिल्ली की सत्ता में वापसी के बाद भाजपा नेताओं की पहली होली है. पार्टी ने 70 में 48 सीटों पर जीत हासिल की. वहीं, आम आदमी पार्टी को केवल 22 सीटों पर जीत मिली है.

संसद का बजट सत्र: विपक्ष का हंगामा, मतदाता सूची और परिसीमन पर उठे सवाल

संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण आज से शुरू हो गया है। इस दौरान विपक्षी दलों ने मतदाता सूची में कथित हेराफेरी और लोकसभा सीटों केपरिसीमन के मुद्दे पर जमकर हंगामा किया। जैसे ही राज्यसभा की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी सांसदों ने इन मुद्दों पर तत्काल चर्चा की मांग की, जिसके बाद कार्यस्थगन के तहत चर्चा कराने की उनकी मांग को उपसभापति हरिवंश ने खारिज कर दिया। इसके बाद कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस औरद्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के सांसदों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए सदन से बहिर्गमन किया। विपक्ष का वॉकआउट और हंगामाकार्यवाही की शुरुआत में उपसभापति हरिवंश ने यह जानकारी दी कि उन्हें मतदाता फोटो पहचान पत्र (ईपीआईसी) क्रमांक के दोहराव, परिसीमन, और मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए अमेरिका से धन देने से संबंधित कुछ मुद्दों पर 12 नोटिस प्राप्त हुए थे। हालांकि, उन्होंने इन सभी नोटिस कोअस्वीकार कर दिया। इसके बाद विपक्षी सदस्यों ने आसन के पास आकर हंगामा किया और इन मुद्दों पर चर्चा की मांग की। द्रविड़ मुनेत्र कषगम केसदस्य लोकसभा सीटों के परिसीमन से दक्षिण भारतीय राज्यों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर विरोध कर रहे थे। इस बीच, मल्लिकार्जुन खरगे कोअपनी बात रखने की अनुमति दी गई, लेकिन जब उन्होंने बात शुरू की, तो उपसभापति ने कहा कि वे खारिज किए गए नोटिस से संबंधित मुद्दे नहींउठा सकते। इस पर विरोध बढ़ गया और अंत में विपक्षी सांसदों ने सदन से वॉक आउट कर दिया। विपक्षी दलों के मुद्देविपक्षी दलों की ओर से कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए जाने की संभावना है। इनमें मतदाता सूची में कथित हेराफेरी, मणिपुर में हिंसा की ताजा घटनाएं, और भारत के ट्रंप प्रशासन के साथ रिश्तों पर सवाल उठाए जाने की संभावना है। इसके अलावा, सरकार का ध्यान बजट प्रक्रिया को पूरा करने, मणिपुर के बजट को मंजूरी दिलवाने और वक्फ संशोधन विधेयक को पारित कराने पर रहेगा। इन मुद्दों पर गहरी चर्चा होने की संभावना है, और इससत्र में सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस हो सकती है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पेश करेंगी मणिपुर का बजटइस दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण मणिपुर का बजट भी पेश करेंगी। मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद, मणिपुर की राजनीतिक स्थितिजटिल हो गई है। एन. बीरेन सिंह के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के बाद से मणिपुर में केंद्रीय सरकार का शासन है। विपक्ष ने कहा कि वह मतदाता फोटोपहचान पत्र (ईपीआईसी) के क्रमांक में गड़बड़ी के मुद्दे पर सरकार को घेरने की योजना बना रहा है। तृणमूल कांग्रेस ने इस मुद्दे को उठाने में अग्रणीभूमिका निभाई है। इसके बाद निर्वाचन आयोग ने कहा था कि वह अगले तीन महीनों में इस मुद्दे को सुधारने के लिए कदम उठाएगा। टीएमसी का मतदाता सूची में हेराफेरी का आरोपतृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि मतदाता सूचियों में हेराफेरी की जा रही है ताकि अन्य राज्यों के लोग पश्चिम बंगाल में वोट डाल सकें।हालांकि, निर्वाचन आयोग ने इन आरोपों को खारिज किया और कहा कि हालांकि कुछ मतदाताओं के मतदाता पहचान पत्र क्रमांक समान हो सकते हैं, लेकिन उनके अन्य विवरण जैसे जनसांख्यिकी जानकारी, विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र और मतदान केंद्र अलग होते हैं। तृणमूल कांग्रेस के नेता सोमवारको निर्वाचन आयोग के अधिकारियों से मिलकर इस मुद्दे को सुलझाने का प्रयास करेंगे। इसके अलावा, वे इस मुद्दे को संसद के दोनों सदनों में उठानेके लिए अन्य विपक्षी दलों को एकजुट करने का प्रयास कर रहे हैं। वक्फ संशोधन विधेयक पर सरकार का फोकससरकार के लिए वक्फ संशोधन विधेयक को शीघ्र पारित कराना भी एक अहम प्राथमिकता है। संसद की संयुक्त समिति ने विपक्ष के भारी विरोध केबावजूद इस विधेयक पर अपनी रिपोर्ट लोकसभा में प्रस्तुत की थी। इस विधेयक का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और संचालन में पारदर्शितालाना है, लेकिन विपक्ष का कहना है कि यह विधेयक वक्फ बोर्ड की स्वायत्तता पर हमला कर सकता है। सरकार इसे शीघ्र पारित कराना चाहती है, और यह विधेयक इस सत्र में एक महत्वपूर्ण विषय बन सकता है। अंतरराष्ट्रीय और घरेलू मुद्दों पर चर्चामणिपुर में हिंसा की ताजा घटनाओं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पारस्परिक शुल्क लगाने की धमकी, और संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमनजैसे मुद्दों पर भी संसद में चर्चा हो सकती है। संसद के बजट सत्र का पहला चरण 31 जनवरी से 13 फरवरी तक चला था, और दूसरा चरण 10 मार्चसे शुरू होकर 4 अप्रैल तक चलेगा। इस सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच कई अहम मुद्दों पर गहन बहस और चर्चा होने की संभावना है।

लोकसभा में राहुल गांधी का हंगामा, मतदाता सूची पर उठाया सवाल, स्पीकर से चर्चा की मांग

लोकसभा में आज एक दिलचस्प घटनाक्रम हुआ, जब उद्धव ठाकरे की पार्टी के सांसद अपनी बात रख रहे थे और अचानक राहुल गांधी खड़े हो गए।यह घटना उस समय हुई जब स्पीकर ओम बिरला ने एक टिप्पणी की थी, “क्या वोटर लिस्ट सरकार बनाती है?” राहुल गांधी इस टिप्पणी पर अपनीप्रतिक्रिया देने के लिए खड़े हो गए और सदन में हलचल मच गई। स्पीकर की टिप्पणी पर राहुल गांधी ने कहा, “स्पीकर सर, आपने सही कहा किवोटर लिस्ट क्या सरकार बनाती है?” इस पर स्पीकर ने सफाई देते हुए कहा कि यह टिप्पणी उन्होंने नहीं की थी। तब राहुल गांधी ने कहा, “नहीं, आपने ‘क्या’ बोला।” इस घटना के बाद, राहुल गांधी ने सदन में मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ी का मुद्दा उठाया और इस पर चर्चा की मांग की। उन्होंने शून्यकाल केदौरान कहा, “महाराष्ट्र और कुछ अन्य राज्यों में मतदाता सूचियों को लेकर सवाल उठे हैं।” राहुल ने कहा, “मैं इस बात से सहमत हूं कि मतदाता सूचीसरकार नहीं बनाती, लेकिन पूरे देश में मतदाता सूचियों को लेकर सवाल उठ रहे हैं और विपक्ष इस पर गंभीर चिंता जताता है।” राहुल गांधी ने विपक्ष की ओर से यह मांग की कि इस मुद्दे पर सदन में विस्तृत चर्चा हो। उन्होंने कहा, “यह मुद्दा सिर्फ महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है, बल्कि कई राज्यों में मतदाता सूचियों में गड़बड़ी की शिकायतें आ रही हैं। इस पर पूरी तरह से ध्यान देने की आवश्यकता है।” इससे पहले, टीएमसी के सांसद सौगत रॉय ने भी इसी मुद्दे पर सवाल उठाया था। रॉय के सवाल के बाद स्पीकर ओम बिरला ने कहा, “क्या वोटरलिस्ट सरकार बनाती है?” सौगत रॉय अपनी बात रखने के लिए खड़े हुए थे, लेकिन शोर बढ़ने के कारण वे अपनी बात पूरी नहीं कर पाए। इस परस्पीकर ने मुस्कुराते हुए अगला नाम पुकारा और वह नाम था संजय हरिभाऊ जाधव का। जाधव शिवसेना (यूबीटी) के सांसद हैं और परभनी (महाराष्ट्र) से लोकसभा में चुने गए हैं। राहुल गांधी ने आगे कहा, “समाज में मतदाता सूची को लेकर जो विवाद है, वह गंभीर मुद्दा है। इस पर केवल सरकार की ओर से प्रतिक्रिया नहीं बल्किपूरे देश में इस मुद्दे पर चर्चा की आवश्यकता है।” उन्होंने यह भी बताया कि विपक्षी दलों ने इस मामले को लेकर एकजुटता दिखाई है और इस मुद्दे परसदन में गहन बहस की मांग की है। इस पूरी घटना के दौरान, सदन में हलचल बढ़ गई और कई सांसदों ने इस पर अपनी प्रतिक्रियाएं दी। राहुल गांधी ने मतदाता सूचियों के मुद्दे पर यहस्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य सरकार को घेरना नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा कराना था। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा न केवल महाराष्ट्र बल्किपूरे देश के लिए अहम है, क्योंकि यह लोकतंत्र के एक महत्वपूर्ण पहलू से जुड़ा है। राहुल गांधी ने यह भी कहा, “वोटर लिस्ट एक संवेदनशील मुद्दा है, और अगर इसमें कोई गड़बड़ी होती है, तो इससे लोकतंत्र की निष्पक्षता पर सवालखड़े होते हैं। इस पर एक गंभीर और समग्र चर्चा होनी चाहिए।” उन्होंने इस मुद्दे को उठाते हुए विपक्ष की मांग को सही ठहराया और यह कहा कि सदनमें इस पर चर्चा होनी चाहिए ताकि इस पर उचित समाधान निकाला जा सके। लोकसभा में इस मुद्दे पर होने वाली बहस में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने यह कहा कि यह चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता के लिए महत्वपूर्ण है।विपक्ष का कहना है कि यदि मतदाता सूची में गड़बड़ी हो रही है, तो यह भारतीय लोकतंत्र के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है और इस पर तुरंतध्यान दिया जाना चाहिए।

IIFA अवॉर्ड्स 2025: कार्तिक आर्यन ने जीता बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड, इस फिल्म का रहा दबदबा

IIFA अवार्ड्स 2025 का सिल्वर जुबली संस्करण रविवार रात जयपुर में शानदार समारोह के साथ संपन्न हुआ। इस मौके पर बॉलीवुड के बड़े सितारेजैसे करीना कपूर, करण जौहर और कार्तिक आर्यन सहित कई मशहूर कलाकार शामिल हुए। शनिवार को डिजिटल अवार्ड्स के बाद रविवार को फिल्मअवार्ड्स दिए गए, जिसमें लापता लेडीज ने रात की सबसे बड़ी विजेता के रूप में 10 अवार्ड्स जीते। किरण राव द्वारा निर्देशित इस फिल्म ने खासपहचान बनाई, वहीं कार्तिक आर्यन की फिल्म भूल भुलैया 3 ने भी महत्वपूर्ण पुरस्कार जीते। मुख्य भूमिका में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन (पुरुष) का अवार्ड कार्तिक आर्यन को भूल भुलैया 3 के लिए मिला। वहीं, मुख्य भूमिका में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन (महिला) का अवार्ड नितांशी गोयल को लापता लेडीज के लिए मिला। लापता लेडीस ने कई अन्य प्रमुख अवार्ड्स भी जीते, जैसे कि सर्वश्रेष्ठ निर्देशन, सर्वश्रेष्ठकहानी (मूल), और सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक। किल ने भी रात में अपनी छाप छोड़ी और कई ट्रॉफियां जीती। आईफा अवार्ड्स 2025 में कई और कलाकारों को भी सम्मानित किया गया, जैसे नकारात्मक भूमिका में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए राघव जुयाल (किल) और सहायक भूमिका में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन (महिला) के लिए जानकी बोदीवाला (शैतान)। इसके अलावा, फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ गीत का अवार्ड प्रशांतपांडे को लापता लेडीस से “सजनी” के लिए मिला, और सर्वश्रेष्ठ गायिका का अवार्ड श्रेया घोषाल को भूल भुलैया 3 से “अमी जे तोमर 3.0” के लिएमिला। समारोह के दौरान, करीना कपूर खान ने एक शानदार परफॉर्मेंस दी और अपने दादा, फिल्म निर्माता राज कपूर को श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके साथशाहरुख खान, माधुरी दीक्षित, नोरा फतेही और कार्तिक आर्यन भी मंच पर नजर आए। करीना और शाहिद कपूर के बीच एक प्यारा मोमेंट भी वायरलहुआ, जिसे देखकर फैंस को जब वी मेट के पुराने दिनों की याद आ गई।

लोकदल ने गेहूं के समर्थन मूल्य में मामूली वृद्धि पर जताई नाराजगी, कहा- किसानों का विकास ….

लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील सिंह ने सरकार द्वारा गेहूं के समर्थन मूल्य (MSP) में केवल 150 रुपये की वृद्धि किए जाने पर कड़ी प्रतिक्रियाव्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह मूल्य किसानों के लिए नाकाफी है और खेती की बढ़ती लागत के मुकाबले यह बहुत ही कम है। किसानों का कहनाहै कि गेहूं के समर्थन मूल्य से उनका कोई विशेष लाभ नहीं हो पा रहा है और उनकी आमदनी मनरेगा मजदूर की एक दिन की मजदूरी से भी कम रहजाती है। फसलों की बढ़ती लागत और कम MSP पर असंतोषसुनील सिंह ने कहा कि किसानों की समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं और खेती की लागत में भी वृद्धि हो रही है। परंतु, MSP में कोई खास वृद्धि नहीं कीजा रही है। एक तरफ खेती की लागत बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ सरकार से समर्थन मूल्य में सही इजाफा नहीं हो पा रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुएकहा कि गेहूं के उत्पादन के लिए 1 से 1.5 कट्ठा जमीन की आवश्यकता होती है और बुआई से लेकर कटाई तक खेत का किराया, खाद, बीज, सिंचाई, मजदूरी और जुताई में लगभग 1,300 से 1,500 रुपये का खर्च आता है। किसानों की हालत:किसान अपनी मेहनत के बाद भी MSP के बावजूद मुनाफे में नहीं हैं। सुनील सिंह ने बताया कि 2,425 रुपये प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य से कोईविशेष लाभ नहीं हो रहा है। किसानों का कहना है कि उनके लिए गेहूं की खेती अब घाटे का सौदा बन गई है, जहां एक महीने की मेहनत का परिणामएक मनरेगा मजदूर की एक दिन की मजदूरी के बराबर हो जाता है। सरकार पर निशानालोकदल ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार को किसानों की समस्याओं की पूरी जानकारी होने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।किसानों की हालत दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है, और उनका विकास अब भी एक सपना ही बना हुआ है। लोकदल ने सरकार से अपील की हैकि किसानों की समस्या का समाधान तुरंत किया जाए और MSP में उचित वृद्धि की जाए, ताकि वे अपने परिवार का पालन-पोषण ठीक से करसकें।

उत्तर प्रदेश: पत्रकार राघवेंद्र वाजपेई की हत्या ने उठाए यूपी के कानून-व्यवस्था पर सवाल, चार लेखपालों समेत 12 लोगों लिए गए हिरासत में

उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में शनिवार को एक पत्रकार की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। यह घटनाइमलिया सुलतानपुर थाना क्षेत्र के हेमपुर रेलवे क्रॉसिंग के पास हुई, जहां मोटरसाइकिल सवार बदमाशों ने राघवेंद्र वाजपेई (35) को निशाना बनाया।राघवेंद्र एक प्रमुख हिंदी दैनिक समाचार पत्र के क्षेत्रीय संवाद दाता थे और उनकी हत्या ने पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना का विवरणशनिवार की दोपहर, राघवेंद्र वाजपेई अपने मोटरसाइकिल पर सीतापुर-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर जा रहे थे, तभी दो बदमाशों ने उन्हें घेरकर ताबड़तोड़गोलियां चलाईं। पुलिस के अनुसार, हमलावरों ने राघवेंद्र के कंधे और सीने में तीन गोलियां मारीं। घटना के बाद, हमलावर मोटरसाइकिल पर फरार होगए। स्थानीय लोगों की मदद से राघवेंद्र को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।धमकियों का इतिहासमृतक के परिजनों ने मीडिया को बताया कि राघवेंद्र को कुछ दिन पहले फोन पर धमकी मिली थी। यह धमकी उनके द्वारा लेखपालों के खिलाफ कीगई रिपोर्टिंग के कारण मिली थी। सूत्रों के अनुसार, राघवेंद्र ने हाल ही में धान खरीद घोटाले और जमीन की रजिस्ट्री में धांधली के खिलाफ कई खबरेंप्रकाशित की थीं, जिससे कुछ लोगों के साथ उनका विवाद बढ़ गया था। पुलिस की कार्रवाईसीतापुर के अपर पुलिस अधीक्षक (एएसपी) प्रवीण रंजन सिंह ने बताया कि अपराधियों को पकड़ने के लिए सीमाएं सील कर दी गई हैं और साक्ष्यजुटाने का काम शुरू कर दिया गया है। पुलिस ने कॉल डिटेल और अन्य कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। इस मामले में चार लेखपालों को हिरासत मेंलिया गया है और उनसे पूछताछ की जा रही है। पुलिस ने यह भी बताया कि सीसीटीवी फुटेज में हमलावरों की पहचान करने की कोशिश की जा रहीहै। राजनीतिक प्रतिक्रियापत्रकार की हत्या के बाद से राजनीति गरम हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अनूप गुप्ता ने जिला अस्पताल पहुंचकर घटना की निंदाकी और प्रशासन से आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की। वहीं, उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाने का आश्वासन दियाहै। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने भी परिजनों से मुलाकात की और न्याय का आश्वासन दिया। पत्रकारों की सुरक्षा पर सवालइस घटना ने पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पत्रकारों को अक्सर अपने काम के कारण धमकियों का सामना करना पड़ताहै, और यह हत्या इस बात का प्रमाण है कि पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करना कितना खतरनाक हो सकता है। राघवेंद्र वाजपेई की हत्या ने यह स्पष्टकर दिया है कि पत्रकारों को अपनी जान की कीमत पर सच बोलने के लिए मजबूर होना पड़ता है। हाईलाइटराघवेंद्र वाजपेई की हत्या ने न केवल सीतापुर बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। यह घटना एक बार फिर से यहसवाल उठाती है कि क्या राज्य में पत्रकारों को सुरक्षित वातावरण प्रदान किया जा रहा है? क्या सरकार इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए ठोसकदम उठाएगी? पत्रकारिता का काम समाज को सच बताना है, लेकिन जब पत्रकारों की जान को खतरा होता है, तो यह समाज के लिए एक गंभीरचिंता का विषय बन जाता है। पुलिस की कार्यवाहीहत्या के मामलेमें पुलिस ने उनकी पत्नी रश्मि बाजपेयी की तहरीर पर रविवार को अज्ञात आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दीफोटो है। पुलिस अधीक्षक चक्रेश मिश्र ने बताया कि पुलिस टीमें विभिन्न बिंदुओं पर कार्य कर रही हैं। चार लेखपालों समेत 12 लोगों को हिरासत मेंलेकर पूछताछ की जा रही है। इस दौरान पुलिस को कुछ अहम सुराग हाथ लगे हैं। जल्द ही वारदात का राजफाश किया जाएगा। उधर, पीड़ितपरिवार अंतिम संस्कार से पहले दोषियों पर कठोर कार्रवाई कर न्याय, नौकरी व आर्थिक सहायता की मांग पर अड़ा रहा। बाद में उत्तर प्रदेश भाजपाअध्यक्ष भूपेन्द्र सिंह चौधरी और वरिष्ठ अधिकारियों के आश्वासन पर अंत्येष्टि की गई।

संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण आज से होगा शुरू, वक्फ संशोधन विधेयक सहित इन मुद्दों पर रहेगी नजर

संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण आज से शुरू हो रहा है, और इस चरण में सरकार और विपक्ष के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीदहै। विशेष रूप से, विपक्ष द्वारा मतदाता सूची में कथित हेराफेरी, मणिपुर में हाल की हिंसा की घटनाओं, और भारत के ट्रंप प्रशासन के साथ रिश्तों परसवाल उठाए जाने की संभावना है। वहीं, सरकार का ध्यान बजट प्रक्रिया को पूरा करने, मणिपुर के लिए बजट को मंजूरी दिलाने, और वक्फ संशोधनविधेयक को पारित करने पर रहेगा। इस चरण के दौरान इन मुद्दों के अलावा कई अन्य भी महत्वपूर्ण होंगे, जो भारतीय राजनीति और सरकार के लिएसंवेदनशील होंगे। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस चरण के दौरान मणिपुर का बजट भी पेश करेंगी। मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद, 13 फरवरी से राज्य मेंराजनीतिक स्थिति जटिल हो गई है। मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद, राज्य में अब केंद्र सरकार का सीधा नियंत्रण है, और वित्त मंत्री कामणिपुर के लिए बजट पेश करना महत्वपूर्ण है। मणिपुर के बजट में राज्य की अर्थव्यवस्था, विकास योजनाओं और कानून-व्यवस्था की स्थिति परध्यान केंद्रित किया जाएगा। विपक्ष इस बजट पर भी सरकार से सवाल पूछने की तैयारी में है, और यह मामला संसद में गर्मागर्म बहस का कारण बनसकता है। वहीं, विपक्षी दलों, खासकर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), ने मतदाता सूची में हेराफेरी के मुद्दे पर सरकार को घेरने की योजना बनाई है। टीएमसी नेआरोप लगाया है कि निर्वाचन आयोग ने कुछ राज्य के मतदाताओं के पहचान पत्र क्रमांक को दोहराया है, जिससे पश्चिम बंगाल में अन्य राज्यों केमतदाता मतदान कर सकते हैं। हालांकि, निर्वाचन आयोग ने इन आरोपों को खारिज किया और स्पष्ट किया कि भले ही कुछ मतदाताओं के पहचानपत्र क्रमांक समान हो सकते हैं, लेकिन उनके अन्य विवरण जैसे जनसांख्यिकी जानकारी, विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र, और मतदान केंद्र अलग-अलग होतेहैं। निर्वाचन आयोग ने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर सुधारात्मक कदम अगले तीन महीनों में उठाए जाएंगे। इसके बावजूद, तृणमूल कांग्रेस ने अन्यविपक्षी दलों जैसे कांग्रेस, द्रमुक, और शिवसेना (यूबीटी) को इस मुद्दे को संसद में उठाने के लिए एकजुट किया है, और संसद के दोनों सदनों में इस परचर्चा होने की संभावना है। सरकार के लिए वक्फ संशोधन विधेयक को पारित कराना भी इस सत्र की एक प्रमुख प्राथमिकता है। संसद की संयुक्त समिति ने विपक्ष के भारीविरोध के बावजूद विधेयक पर अपनी रिपोर्ट लोकसभा में प्रस्तुत की है। वक्फ संशोधन विधेयक, जो वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और संचालन सेसंबंधित है, पर विपक्षी दलों ने गंभीर आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि इस विधेयक के जरिए सरकारी हस्तक्षेप को बढ़ाया जा रहा है, जिससेवक्फ बोर्ड की स्वायत्तता पर प्रभाव पड़ेगा। हालांकि, सरकार का कहना है कि यह विधेयक वक्फ संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन और पारदर्शिता के लिएआवश्यक है। सरकार इसे शीघ्र पारित कराना चाहती है, और यह विधेयक इस सत्र में एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकता है। इसके अलावा, मणिपुर मेंहिंसा की ताजा घटनाओं और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पारस्परिक शुल्क लगाने की धमकी जैसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी संसद में चर्चा होसकती है, जो भारतीय राजनीति और विदेश नीति के संदर्भ में महत्वपूर्ण हैं। संसद का बजट सत्र 10 मार्च से शुरू होकर चार अप्रैल तक चलेगा, और इस दौरान विभिन्न मुद्दों पर गहन चर्चा होने की संभावना है। पहले चरण में, जो 31 जनवरी से 13 फरवरी तक चला था, सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखी बहस हुई थी। अब, दूसरे चरण में, जो संसद के विधायीकार्यों को पूरा करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, सरकार का मुख्य ध्यान बजटीय प्रक्रिया को पूरा करना और मणिपुर के बजट को मंजूरी दिलवानारहेगा। वहीं विपक्ष विभिन्न मुद्दों पर सरकार से सवाल पूछने की तैयारी कर रहा है। यह सत्र भारतीय राजनीति के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है, क्योंकि इसमें न केवल देश की आंतरिक राजनीति और चुनावी मुद्दों पर चर्चा होगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति और विदेश नीति से जुड़े मुद्दों पर भीबात की जाएगी।