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दिल्ली में भ्रष्टाचार पर बीजेपी का हमला, ‘AAP सरकार की विफलताओं को ढकने की कोशिश नाकाम होगी’ – वीरेंद्र सचदेवा

नई दिल्ली: दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने आम आदमी पार्टी (AAP) पर करारा प्रहार करते हुए कहा है कि शिक्षा, बिजली, पानी औरस्वास्थ्य क्षेत्रों में भारी भ्रष्टाचार के कारण सत्ता से बाहर हुई AAP अब नई बीजेपी सरकार को बदनाम करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा किआम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल, सौरभ भारद्वाज और आतिशी जनता के फैसले को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं।AAP के भ्रष्टाचार का आरोपवीरेंद्र सचदेवा ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने बिजली सब्सिडी के नाम पर निजी कंपनियों के साथ मिलकर घोटाले किए, जबकि सीवरसफाई और जल आपूर्ति जैसे अहम क्षेत्रों में भी गंभीर लापरवाही बरती गई। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली जल बोर्ड में 60,000 करोड़ रुपये सेअधिक की अनियमितता हुई है। स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्रों पर भी सवालस्वास्थ्य सेवाओं में भी भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि अस्पताल निर्माण में अनावश्यक खर्च और नकली दवाओं का वितरण हुआ।शिक्षा के क्षेत्र में, सरकारी स्कूलों में निर्माण घोटालों की बात सामने आई और महज 5% निजी स्कूलों का ही ऑडिट हुआ। कोर्ट के मामलों में ढिलाईबरतकर फीस वृद्धि को जानबूझकर रास्ता दिया गया। नई सरकार पर भ्रम फैलाने की कोशिश: बीजेपीसचदेवा ने कहा कि AAP नेता सोशल मीडिया पर पुराने पोस्ट्स और फर्जी ट्वीट्स के जरिए लोगों को भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिनजनता यह जानती है कि नई सरकार के आने के बाद न बिजली-पानी की कटौती हो रही है और न ही स्कूलों की फीस में कोई बड़ी वृद्धि हुई है। स्कूल फीस ऑडिट का बड़ा कदमउन्होंने बताया कि दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने निर्देश जारी किए हैं कि शहर के सभी 1665 निजी स्कूलों के खातों का एसडीएम स्तर परऑडिट होगा। जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक कोई भी स्कूल फीस नहीं बढ़ा सकता। सचदेवा ने कहा कि यह कदम AAP द्वारा फैलाईजा रही भ्रांतियों को खत्म करेगा और पारदर्शिता को बढ़ावा देगा।

निजी स्कूलों की फीस वृद्धि पर बवाल,आतिशी ने सीएम रेखा गुप्ता को दी चुनौती, मांगा कैग ऑडिट और तत्काल रोक

आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में निजी स्कूलों द्वारा की जा रही बेतहाशा फीस वृद्धि को लेकर भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। नेता प्रतिपक्षआतिशी ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को पत्र लिखते हुए चुनौती दी है कि यदि भाजपा सरकार की निजी स्कूलों से कोई सांठगांठ नहीं है, तो वह तत्कालप्रभाव से फीस वृद्धि पर रोक लगाए। उन्होंने मांग की कि जिन स्कूलों ने फीस बढ़ाई है, उनका ऑडिट कैग द्वारा अधिकृत ऑडिटर्स से कराया जाए औरकेवल उन्हीं स्कूलों को फीस बढ़ाने की अनुमति दी जाए, जो मुनाफाखोरी नहीं कर रहे। आतिशी ने कहा कि जब दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार थी, तब फीस बढ़ाने से पहले स्कूलों का ऑडिट जरूरी होता था और किसी भीमनमानी पर तत्काल रोक लगाई जाती थी। उन्होंने बताया कि केजरीवाल सरकार के कार्यकाल में कई निजी स्कूलों को अतिरिक्त वसूली गई फीसअभिभावकों को लौटानी पड़ी थी। लेकिन भाजपा सरकार बनने के बाद निजी स्कूलों को पूरी छूट मिल गई है और अभिभावकों की जेब पर सीधा असरडाला जा रहा है। डिजिटल प्रेस वार्ता के दौरान आतिशी ने यह भी बताया कि कई स्कूलों ने 10 से 30 प्रतिशत तक फीस में बढ़ोतरी की है, जिससे माता-पिता सड़कोंपर विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर हो गए हैं। उन्होंने बताया कि स्कूलों के गेट बंद किए जा रहे हैं और पैरेंट्स को अंदर तक नहीं जाने दिया जा रहा।उन्होंने रुक्मिणी देवी, ग्रीन फील्ड, सेंट एंजल्स, डीपीएस, बिरला विद्या निकेतन जैसे कई स्कूलों का नाम लेते हुए कहा कि फीस वृद्धि की घटनाएं रोजसामने आ रही हैं। पत्र में आतिशी ने सीएम रेखा गुप्ता से अपील की है कि एनईपी 2020 के उस प्रावधान को लागू करें, जो शिक्षा के व्यवसायीकरण को रोकने कीबात करता है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के आने के बाद निजी स्कूल मनमाने तरीके से फीस बढ़ाकर पिछले 10 साल के घाटे की भरपाई कर रहेहैं और सरकार इस पर चुप्पी साधे हुए है, जिससे यह संदेश जाता है कि सरकार को इन गतिविधियों का समर्थन प्राप्त है। अंत में आतिशी ने तीन मांगें रखीं—पहली, तत्काल प्रभाव से फीस वृद्धि पर रोक; दूसरी, फीस बढ़ाने वाले स्कूलों का कैग ऑडिट; और तीसरी, केवलउन्हीं स्कूलों को नाममात्र की फीस बढ़ाने की अनुमति, जिनके खर्च वास्तविक रूप से बढ़े हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि भाजपा सरकार शिक्षा कोव्यापार बनने से रोकने के लिए ठोस कदम उठाएगी और आम लोगों के साथ खड़ी होगी।

जातिगत जनगणना पर अड़े राहुल गांधी, बोले- कोई ताकत इसे नहीं रोक सकती

वरिष्ठ कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि भाजपा और आरएसएस जातिगत जनगणना को रोकने की कोशिश कर रहेहैं, लेकिन यह प्रक्रिया अब नहीं रुकने वाली। उन्होंने कहा कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत खुद इसके विरोध में हैं, जबकि कांग्रेस इसे सामाजिकक्रांति का जरिया मानती है। ‘जातिगत जनगणना से उजागर होगा असमानता का सच’पटना में आयोजित संविधान सुरक्षा सम्मेलन को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि देश की 90% से अधिक आबादी जिन वर्गों से आती है, उन्हें उच्च पदों पर जगह नहीं मिलती। उन्होंने कहा कि जातिगत जनगणना से पता चलेगा कि कौन-से वर्गों के पास संसाधनों पर कितना अधिकार हैऔर कौन-से लोग किन पदों पर हैं। उन्होंने तेलंगाना में कांग्रेस सरकार द्वारा कराई गई जातिगत गणना का उदाहरण देते हुए कहा कि इससे यह स्पष्ट हुआ कि वंचित वर्गों की निजी औरसरकारी संस्थानों में भागीदारी नगण्य है। दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यकों को बताया ‘सेकंड क्लास नागरिक’राहुल गांधी ने कहा कि भारत में दलित, आदिवासी, पिछड़े वर्ग, अल्पसंख्यक और महिलाएं अब भी द्वितीय श्रेणी के नागरिक जैसे हालात में जी रहेहैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इन वर्गों को उनका हक दिलाने के लिए 50% आरक्षण की सीमा तोड़ने को तैयार है। संविधान को बताया समता का प्रतीक, भाजपा पर हमलाभाजपा और आरएसएस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि संविधान में महात्मा गांधी, अंबेडकर और नेहरू जैसे नेताओं की सोच है, न कि सावरकरकी। राहुल ने कहा कि भाजपा ‘400 पार’ की बात कर संविधान बदलना चाहती थी, लेकिन जनता के जागने और इंडिया गठबंधन के खड़े होने केबाद उन्हें संविधान का सम्मान करना पड़ा। ‘बिहार सरकार के फैसले उद्योगपतियों के पक्ष में’नीतीश कुमार की सरकार की आलोचना करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि राज्य सरकार की नीतियां अडाणी और अंबानी जैसे बड़े उद्योगपतियों कोफायदा पहुंचा रही हैं। ‘कांग्रेस सामाजिक न्याय के रास्ते पर’राहुल गांधी ने यह भी कहा कि कांग्रेस बिहार में सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को मजबूत करने का काम कर रही है। उन्होंने बताया कि हाल ही मेंजिला अध्यक्षों की नियुक्ति में भी सामाजिक संतुलन का पूरा ध्यान रखा गया है, ताकि वंचित तबकों को आगे लाया जा सके।

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में वक्फ कानून पर बवाल, लगातार दूसरे दिन ठप रही कार्यवाही

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में मंगलवार को वक्फ कानून को लेकर लगातार दूसरे दिन भी तनावपूर्ण माहौल बना रहा। नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) केविधायकों ने इस कानून पर चर्चा की मांग करते हुए विरोध जताया, जबकि भाजपा विधायकों ने प्रस्ताव का विरोध किया। इस मुद्दे पर नेकां औरपीपुल्स कांफ्रेंस के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। पीडीपी विधायक को सदन से बाहर निकाला गयाहंगामे के चलते प्रश्नकाल की कार्यवाही बाधित हुई। पीडीपी विधायक वाहिद परा को स्पीकर के निर्देश पर मार्शलों द्वारा बाहर निकाला गया, जिससेसदन का माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया। आप और भाजपा के बीच भी तीखी बहसआप विधायक महाराज मलिक और भाजपा विधायक विक्रम रंधावा द्वारा मुफ्ती परिवार को लेकर की गई टिप्पणियों के बाद पीडीपी प्रवक्ता मोहितऔर मलिक के बीच बहस तेज हो गई। स्थिति को संभालने के लिए स्पीकर को सदन की कार्यवाही आधे घंटे के लिए स्थगित करनी पड़ी, लेकिन फिरभी प्रश्नकाल नहीं हो सका। पहले दिन भी रहा था तनावपूर्ण माहौलइससे पहले सोमवार को भी वक्फ कानून पर जमकर हंगामा हुआ था। विपक्ष ने इस विधेयक को मुस्लिम विरोधी करार देते हुए विरोध किया, जबकिभाजपा विधायकों ने इसका समर्थन किया। कांग्रेस विधायक इरफान लोन और भाजपा विधायक सतीश शर्मा के बीच हाथापाई की नौबत आ गईथी। सत्तापक्ष का स्थगन प्रस्ताव हुआ खारिजविधानसभा के बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले दिन नेकां, पीडीपी, कांग्रेस और निर्दलीय विधायकों ने वक्फ कानून पर बहस के लिए स्थगन प्रस्तावरखा, जिसे स्पीकर ने अदालत में विचाराधीन मामला बताते हुए खारिज कर दिया। इस फैसले का विरोध करते हुए कई विधायक वेल तक पहुंच गएऔर नारेबाजी की। विधानसभा के नियमों का हवालास्पीकर अब्दुल रहीम राथर ने कहा कि विधानसभा के नियम 58(7) के तहत अदालत में विचाराधीन विषयों पर चर्चा नहीं हो सकती। इस पर विपक्ष नेआपत्ति जताई और कहा कि जब देश के अन्य राज्यों में वक्फ कानून पर चर्चा हो रही है, तो जम्मू-कश्मीर में क्यों नहीं हो सकती। सदन में नारेबाजी और प्रतीकात्मक विरोध नेकां विधायक सलाम सागर और तनवीर सादिक सहित अन्य विधायकों ने सदन के अंदर वक्फ कानून के खिलाफ नारे लगाए और पर्चे लहराए। कुछविधायकों ने प्रश्नकाल के दस्तावेज भी फाड़ दिए। विपक्ष का आरोप: लोकतांत्रिक अधिकार छीने जा रहेनेकां विधायक मुबारक गुल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में मुस्लिम बहुल आबादी है और वक्फ कानून पर चर्चा करना लोकतांत्रिक अधिकार है। उन्होंनेकहा कि अगर भाजपा इस कानून को सही मानती है तो उसे सदन में मुस्लिम समुदाय के हितों के अनुसार समझाना चाहिए। नेता प्रतिपक्ष का पलटवारवहीं, नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल केवल नाटक कर रहे हैं और विधानसभा की कार्यवाही बाधित करने की कोशिश कररहे हैं। उन्होंने कहा कि यह सब मीडिया में दिखने की रणनीति है और विधानसभा को मंच की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।

राहुल गांधी ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र,निष्पक्ष चयनित शिक्षकों की सेवा बहाल करने की अपील

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में 25,753 शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की नियुक्तियों को अवैधकरार दिया। अदालत ने इस प्रक्रिया को “त्रुटिपूर्ण” बताया और कलकत्ता हाई कोर्ट के 22 अप्रैल 2024 के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें इननियुक्तियों को रद्द कर दिया गया था।राहुल गांधी की राष्ट्रपति से मानवीय हस्तक्षेप की मांगलोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 7 अप्रैल को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर इस फैसले के प्रभाव से प्रभावित शिक्षकों के पक्ष मेंदखल देने की अपील की। उन्होंने पत्र में कहा कि वे ‘शिक्षक-शिक्षिका अधिकार मंच’ के प्रतिनिधियों से मिलने के बाद इस मामले में पत्र लिखने कोप्रेरित हुए। बेदाग उम्मीदवार भी हुए प्रभावितराहुल गांधी ने अपने पत्र में इस बात पर चिंता व्यक्त की कि न्यायिक फैसलों के बाद उन उम्मीदवारों को भी सेवा से हटा दिया गया, जिनका चयन पूरीतरह निष्पक्ष और नियमों के अनुसार हुआ था। उन्होंने कहा कि “दागी” और “बेदाग” दोनों तरह के शिक्षकों को एक ही तरीके से सेवा से हटानान्यायसंगत नहीं है। एक दशक की सेवा, फिर भी नौकरी गईउन्होंने कहा कि अधिकतर ‘बेदाग’ शिक्षक लगभग 10 वर्षों से अपनी सेवा दे रहे थे और उनकी बर्खास्तगी न केवल उनके परिवारों के लिए आय कासंकट बन गई है, बल्कि इससे छात्रों की शिक्षा भी प्रभावित होगी, क्योंकि कक्षाएं बिना पर्याप्त शिक्षकों के चलेंगी। शिक्षकों की पीड़ा और छात्रों पर असरराहुल गांधी ने राष्ट्रपति से आग्रह किया कि वे एक पूर्व शिक्षिका होने के नाते इस स्थिति की मानवीय लागत को समझें। उन्होंने कहा कि शिक्षकों कीसेवा समाप्ति से उनका मनोबल टूटेगा और शिक्षा व्यवस्था पर भी बुरा असर पड़ेगा। निष्पक्ष चयनित शिक्षकों को राहत देने की मांगअपने पत्र के अंत में उन्होंने राष्ट्रपति से अनुरोध किया कि सरकार को निर्देशित किया जाए कि निष्पक्ष चयन प्रक्रिया से चयनित शिक्षकों को अपनीसेवा जारी रखने की अनुमति दी जाए। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग अनियमितता के दोषी हैं, उन्हें न्याय के दायरे में लाया जाना चाहिए, लेकिननिर्दोषों के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला,तमिलनाडु के राज्यपाल की कार्रवाई असंवैधानिक घोषित

राज्यपाल को सुप्रीम कोर्ट की फटकारसुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि द्वारा 10 विधेयकों को रोके रखने को असंवैधानिक और मनमाना करार दिया है। अदालत ने साफकहा कि यह संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन है। न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और आर. महादेवन की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि राज्यपाल नेविधेयकों को लेकर सद्भावपूर्ण और संवैधानिक तरीके से कार्य नहीं किया। राज्यपाल और राज्य सरकार के बीच टकरावतमिलनाडु सरकार और राज्यपाल के बीच विधेयकों को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा था। नवंबर 2023 में राज्यपाल को 12 विधेयक भेजेगए थे, जिनमें से दो को उन्होंने राष्ट्रपति के पास भेज दिया और बाकी 10 पर कोई निर्णय नहीं लिया। राज्य सरकार ने राज्यपाल की निष्क्रियता केखिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। अदालत का सख्त रुख और निर्णयसुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल करते हुए कहा कि 10 विधेयकों को उस तारीख से ही स्वीकृतमाना जाएगा, जब वे दोबारा राज्यपाल के पास भेजे गए थे। अदालत ने यह भी कहा कि राज्यपाल को संविधान के अनुसार कार्य करना चाहिए, न किराजनीतिक विचारधारा के आधार पर। विधेयकों पर समय सीमा निर्धारितकोर्ट ने भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश देते हुए कहा कि राज्यपाल को विधेयकों पर निर्णय लेने के लिए एक निश्चित समय सीमा में कार्यकरना होगा। यदि कोई विधेयक मंत्रिपरिषद की सलाह पर राष्ट्रपति को भेजना है, तो यह प्रक्रिया अधिकतम एक महीने में पूरी होनी चाहिए। अगरबिना मंत्रिपरिषद की सलाह के विधेयक पर निर्णय रोका गया है, तो उसे तीन महीने के भीतर वापस करना होगा। अनुच्छेद 200 की व्याख्यान्यायालय ने कहा कि राज्यपाल को संविधान के अनुच्छेद 200 के अंतर्गत तीन विकल्प दिए गए हैं — विधेयक को स्वीकृति देना, उसे रोकना याराष्ट्रपति के पास भेजना। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्यपाल पॉकेट वीटो या पूर्ण वीटो का इस्तेमाल नहीं कर सकते। विधेयक को अनिश्चितकालतक लंबित रखना संवैधानिक प्रावधानों के विरुद्ध है। राज्य सरकारों के अधिकारों की पुष्टि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने इस फैसले को “ऐतिहासिक” करार देते हुए कहा कि यह निर्णय न केवल तमिलनाडु, बल्कि पूरे देश कीराज्य सरकारों के अधिकारों की पुष्टि करता है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल को दोबारा पारित विधेयकों को स्वीकृति देना अनिवार्य था, लेकिन उन्होंनेजानबूझकर देरी की। दूसरे राज्यों में भी राज्यपालों पर सवालतमिलनाडु से पहले केरल और पंजाब में भी राज्यपालों पर विधेयकों को लंबित रखने के आरोप लगे हैं। केरल में राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान औरपंजाब में तत्कालीन राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित पर इसी तरह की याचिकाएं दायर की गई थीं। इन मामलों में भी सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपालों कीआलोचना करते हुए चेतावनी दी थी। लोकतंत्र और संघीय ढांचे की जीतसुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय को लोकतंत्र और संघीय ढांचे की रक्षा के रूप में देखा जा रहा है। यह फैसला स्पष्ट संदेश देता है कि राज्यपालों को अपनीसंवैधानिक सीमाओं में रहकर कार्य करना चाहिए और राज्य सरकारों द्वारा पारित विधेयकों को राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं देखना चाहिए।

चुनाव आयोग में TMC सांसदों के बीच तीखी बहस, वीडियो हुआ वायरल

4 अप्रैल 2025 को चुनाव आयोग के मुख्यालय में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के दो लोकसभा सांसदों के बीच ज़ोरदार बहस हो गई। यह घटना अबसार्वजनिक बहस का विषय बन चुकी है, क्योंकि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के आईटी सेल प्रमुख और पश्चिम बंगाल के लिए पार्टी पर्यवेक्षकअमित मालवीय ने इस बहस के वीडियो क्लिप्स सोशल मीडिया पर साझा किए हैं। अमित मालवीय का दावा: सांसदों में खुलकर हुआ विवादअमित मालवीय ने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि चुनाव आयोग के दफ्तर में दो टीएमसी सांसद आपस में उलझ पड़े। उनका कहना है किएक सांसद ने बहस के बाद ‘वर्सेटाइल इंटरनेशनल लेडी’ को लेकर अपमानजनक टिप्पणी की, हालांकि उन्होंने स्पष्ट नहीं किया कि यह टिप्पणीकिसके लिए थी। वायरल वीडियो में सांसद कल्याण बनर्जी यह कहते सुनाई दे रहे हैं कि वे किसी पार्टी कोटे से नहीं आए हैं, न ही किसी और दल सेआकर टीएमसी में शामिल हुए हैं।कल्याण बनर्जी ने पेश की सफाईविवाद पर सफाई देते हुए टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने बताया कि उन्हें डेरिक ओ’ब्रायन की ओर से निर्देश मिला था कि 27 सांसदों से एकज्ञापन पर हस्ताक्षर करवाए जाएं। उनके मुताबिक, जब वे चुनाव आयोग के कार्यालय पहुँचे, तो एक महिला सांसद ने उन पर चिल्लाना शुरू करदिया। उनका आरोप था कि उन्हें जानबूझकर उस सूची से बाहर रखा गया, और फिर उन्होंने वहां मौजूद बीएसएफ जवानों से उन्हें गिरफ्तार करने कीबात तक कह दी। बहस की जड़: चुनाव आयोग में ज्ञापन देने को लेकर असहमतिबीजेपी आईटी सेल के प्रमुख ने यह भी आरोप लगाया कि टीएमसी नेतृत्व ने सांसदों को संसद कार्यालय में इकट्ठा होकर ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने केलिए कहा था, लेकिन कुछ सांसद सीधे चुनाव आयोग पहुंच गए और संसद सत्र में हिस्सा नहीं लिया। इससे अन्य सांसदों में नाराजगी फैल गई, जोचुनाव आयोग में आमने-सामने होने पर खुलकर सामने आई। दोनों सांसदों के बीच बहस इतनी तीखी हो गई कि पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। बहस का असर सोशल मीडिया और ग्रुप चैट तकअमित मालवीय ने यह भी बताया कि यह विवाद केवल चुनाव आयोग कार्यालय तक सीमित नहीं रहा, बल्कि टीएमसी के “एआईटीसी एमपी 2024” नामक व्हाट्सएप ग्रुप में भी दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप चलता रहा। उन्होंने ग्रुप चैट के कुछ स्क्रीनशॉट भी साझा किए हैं, जिसमें दोनों पक्षोंकी तनातनी साफ दिख रही है।

कांग्रेस का 84वां अधिवेशन, अहमदाबाद से राष्ट्रव्यापी संदेश

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का 84वां पूर्ण अधिवेशन 8 और 9 अप्रैल 2025 को गुजरात के अहमदाबाद में आयोजित हुआ। यह अधिवेशन राजनीतिकदृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण रहा, जिसमें पार्टी की रणनीतियों, विचारधाराओं की पुनः पुष्टि और आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा पर चर्चा हुई। अधिवेशन का मकसद और चर्चा का केंद्रइस अधिवेशन का प्रमुख उद्देश्य केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ पार्टी की रणनीति तैयार करना और संविधान, लोकतंत्र तथा गांधीवादीविचारधारा पर हो रहे हमलों का विरोध करना था। कांग्रेस नेताओं ने मिलकर उन नीतियों और घटनाओं पर चर्चा की, जिन्हें वे जनविरोधी और लोकतंत्रविरोधी मानते हैं। अधिवेशन ने यह संदेश देने की कोशिश की कि कांग्रेस इन मुद्दों पर स्पष्ट और संगठित रूप से देश के सामने खड़ी है। कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की अहम बैठकअधिवेशन की शुरुआत कांग्रेस कार्यसमिति की विस्तारित बैठक से हुई, जो लगभग चार घंटे तक चली। इस बैठक में वर्तमान राजनीतिक हालात, चुनावी रणनीति और पार्टी के संगठनात्मक मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। बैठक में संविधान की रक्षा और गांधीवादी मूल्यों के प्रचार के लिएविशेष प्रस्ताव भी पारित किए गए। गांधीवादी विचारधारा पर हो रहा हमला: जयराम रमेशकांग्रेस प्रवक्ता जयराम रमेश ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि आज महात्मा गांधी की विचारधारा पर योजनाबद्ध तरीके से हमला किया जा रहाहै। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस गांधीजी की विरासत की रक्षा और उसके प्रचार-प्रसार के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। पार्टी का मानना है कि राष्ट्रपिताकी सोच आज के समय में और अधिक प्रासंगिक हो गई है। ‘जय बापू, जय भीम, जय संविधान’ रैली की घोषणाअधिवेशन में यह घोषणा की गई कि कांग्रेस 27 दिसंबर को बेलगावी में एक भव्य रैली आयोजित करेगी, जिसका नाम होगा – ‘जय बापू, जय भीम, जय संविधान’। इस रैली का उद्देश्य गांधीजी और डॉ. बी.आर. आंबेडकर की विचारधाराओं की रक्षा और संविधान की मूल भावना को जन-जन तकपहुँचाना है। आने वाले कार्यक्रम और जनजागरण अभियानकांग्रेस ने यह भी ऐलान किया कि 26 जनवरी 2025 से लेकर 26 जनवरी 2026 तक पार्टी ‘संविधान बचाओ पदयात्रा’ नामक देशव्यापी अभियानचलाएगी। इस यात्रा के माध्यम से पार्टी संविधान की मूल भावना और लोकतांत्रिक मूल्यों के संरक्षण के लिए जनजागरण करेगी, खासकर युवाओंऔर ग्रामीण समुदायों को जागरूक करने पर ज़ोर रहेगा।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पहुंची पुर्तगाल के दौरे पर,27 साल बाद होगा किसी भारतीय राष्ट्रपति का पहला पुर्तगाल दौरा

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू रविवार रात (स्थानीय समयानुसार) पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन पहुंचीं. यह पुर्तगाल और स्लोवाकिया की उनकी 7 से 10 अप्रैलतक की चार दिन की राजकीय यात्रा की शुरुआत है. मुर्मू यह दौरा पुर्तगाल के राष्ट्रपति मार्सेलो रेबेलो डी सूसा के निमंत्रण पर कर रही हैं. यह यात्रा 27 साल बाद हो रही है. इससे पहले 1998 में तत्कालीन राष्ट्रपति के. आर. नारायणन ने पुर्तगाल की राजकीय यात्रा की थी.9 से 10 अप्रैल को राष्ट्रपतिमुर्मू स्लोवाकिया में रहेंगी. यह यात्रा स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पीटर पेल्लेग्रिनी के निमंत्रण पर हो रही है. पिछले 29 वर्षों में किसी भारतीय राष्ट्रपति कीयह पहली स्लोवाकिया यात्रा होगी.इससे पहले विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने रविवार को एक्स पर एक पोस्ट में लिखा राष्ट्रपतिद्रौपदी मुर्मू ने पुर्तगाल और स्लोवाक गणराज्य की राजकीय यात्रा के लिए प्रस्थान किया. पिछले 25 वर्षों से ज्यादा समय बाद भारत की राष्ट्रपति कीइन दोनों देशों में पहली राजकीय यात्रा है. दोनों देशों की दोस्ती और साझेदारी को बढ़ाएगी आगेविदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) तन्मय लाल ने कहा यह यात्रा भारत के इन दोनों अहम यूरोपीय साझेदारों के साथ बहुआयामी सहयोग को औरविस्तार देगी. उन्होंने इसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक यात्रा बताया. पुर्तगाल यात्रा के बारे में जानकारी साझा करते हुए सचिव तन्मय लाल ने कहा किराष्ट्रपति की यात्रा ऐतिहासिक बन जाती है क्योंकि भारत और पुर्तगाल इस समय अपने राजनयिक संबंधों के 50 साल पूरे कर रहे हैं. यह यात्रा दोनोंदेशों की दोस्ती और साझेदारी को आगे बढ़ाएगी.उन्होंने कहा भारत के राष्ट्रपति की पुर्तगाल की पिछली यात्रा को 27 साल हो चुके हैं. इसलिए यहयात्रा बहुत प्रतीकात्मक और ऐतिहासिक है. राष्ट्रपति पुर्तगाल के राष्ट्रपति मार्सेलो रेबेलो डी सूसा के निमंत्रण पर वहां जा रही हैं. सचिव लाल ने बतायाकि पिछले कुछ वर्षों में भारत और पुर्तगाल के बीच उच्च स्तरीय दौरे लगातार हुए हैं. जो दोनों देशों के बीच मजबूत और सक्रिय संबंधों को दर्शाते हैं.

प्रधानमंत्री मोदी ने श्रीलंका में महो-अनुराधापुरा रेलवे लाइन का किया शुभारंभ,पड़ोसी देशों के विकास में अहम भूमिका निभा रहा भारत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रीलंका की हालिया यात्रा के दौरान 128 किलोमीटर लंबी महो-अनुराधापुरा रेलवे लाइन के लिए सिग्नलिंग सिस्टम काशुभारंभ किया. पिछले 10 वर्षों में पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत की ओर से अपने पड़ोसी देशों को दी गई सहायता और परियोजनाओं की लंबी सूचीहै. यह भारत की नेबरहुड फर्स्ट नीति और वसुधैव कुटुंबकम के सिद्धांतों के तहत क्षेत्रीय विकास में एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में प्रतिबद्धता कोदर्शाता है.श्रीलंका में भारत ने इंडियन हाउसिंग प्रोजेक्ट (फेज 3) के तहत मध्य और उवा प्रांतों में बागान श्रमिकों के लिए लगभग 4,000 घर बनाए. 2022 में श्रीलंका के आर्थिक संकट के दौरान भारत ने एक बिलियन डॉलर की क्रेडिट लाइन दी. इससे श्रीलंका को भोजन, दवाइयां और अन्यआवश्यक वस्तुओं के आयात में मदद मिली. सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करते हुए पीएम मोदी ने 2015 में जाफना यात्रा के दौरान जाफनासांस्कृतिक केंद्र की आधारशिला रखी. 2022 में इसके उद्घाटन के बाद 2023 में श्रीलंका के लोगों को समर्पित किया गया.नेपाल के साथ ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ा है. मोतिहारी-अमलेखगंज पेट्रोलियम पाइपलाइन का उद्घाटन 2019 में किया गया था. यह दक्षिण एशियाकी पहली सीमा पार पेट्रोलियम पाइपलाइन बनी.ग्रीनफील्ड टर्मिनल के लिए हुआ समझौताजून 2023 में सिलिगुड़ी-झापा पाइपलाइन और चितवन व झापा में दो ग्रीनफील्ड टर्मिनल के लिए समझौता हुआ. दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों नेअप्रैल 2022 में जयनगर-कुर्था-बरदिबास रेल लिंक का उद्घाटन किया.जोगबनी-बिराटनगर रेल लिंक का माल ढुलाई खंड जून 2023 में शुरू हुआ. जबकि रक्सौल-काठमांडो रेल लिंक की अंतिम सर्वे रिपोर्ट तैयार हो रही है. व्यापार के लिए नेपालगंज, बिराटनगर और बीरगंज में एकीकृत जांचचौकियां (आईसीपी) विकसित की गई हैं. 2015 के भूकंप के बाद भारत ने एक बिलियन डॉलर की सहायता दी. जिसमें 250 मिलियन डॉलरअनुदान और 750 मिलियन डॉलर क्रेडिट लाइन के तौर पर शामिल थे. सोलु कॉरिडोर 132 केवी ट्रांसमिशन लाइन (2022) और मोदी-लेखनाथट्रांसमिशन लाइन (2023) ने नेपाल में बिजली आपूर्ति में सुधार किया. नेपाल को स्वास्थ्य क्षेत्र में 200 किडनी डायलिसिस मशीनें और 50 रिवर्सऑस्मोसिस सिस्टम दिए गए. बांग्लादेश में 270.2 करोड़ की लागत से बनी अखौराबांग्लादेश में 270.2 करोड़ रुपये की लागत से बनी अखौरा-अगरतला रेल लिंक और मैत्री सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट (2023) का उद्घाटन पीएममोदी ने किया. खुलना-मोंगला रेल लाइन और भारत-बांग्लादेश मैत्री पाइपलाइन का निर्माण 285.24 करोड़ रुपये की लागत से किया गया. इसनेऊर्जा और कनेक्टिविटी में अहम योगदान दिया. आपात स्वास्थ्य सहायता के लिए 109 बेसिक लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस दी गईं.अफगानिस्तान में भीभारत का सहयोग व्यापक रूप से है. 2016 में पीएम मोदी ने अफगान-भारत मैत्री बांध (सलमा बांध) का उद्घाटन किया. सिंचाई और बिजली आपूर्तिमें इसकी अहम भूमिका है. 2015 में अफगान संसद भवन का उद्घाटन भी पीएम मोदी ने किया. जो अफगान लोकतंत्र के प्रति समर्थन का प्रतीकहै.संकट के समय में खाद्य सुरक्षा के लिए भारत ने 2.45 लाख मीट्रिक टन गेहूं की आपूर्ति की.