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जस्टिस बी.आर. गवई बने भारत के 52वें मुख्य न्यायाधीश राष्ट्रपति मुर्मू ने दिलाई शपथ, हिंदी में ली शपथ, मां से लिया आशीर्वाद

नई दिल्ली में मंगलवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई को भारत के 52वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ दिलाई। उन्होंनेजस्टिस संजीव खन्ना का स्थान लिया है। राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में जस्टिस गवई ने हिंदी भाषा में पद और गोपनीयता की शपथ ली।उनका कार्यकाल करीब साढ़े छह महीने का रहेगा और वे 23 दिसंबर 2025 को सेवानिवृत्त होंगे। शपथ ग्रहण समारोह में गणमान्य लोग रहे मौजूदइस अहम समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ सहित कई शीर्ष नेता उपस्थित थे। साथ ही जस्टिस गवई के परिवारजन और पूर्व राष्ट्रपतिरामनाथ कोविंद भी मौजूद रहे। शपथ के तुरंत बाद जस्टिस गवई ने अपनी मां के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। मां ने जताया गर्व, कहा- मेहनत और सेवा का फल है यह मुकामजस्टिस गवई की मां कमलताई गवई ने बेटे की उपलब्धि पर गर्व जताते हुए कहा कि यह सफलता उनके समर्पण और गरीबों की सेवा का परिणाम है।उन्होंने विश्वास जताया कि उनका बेटा न्यायपालिका के सर्वोच्च पद पर रहते हुए पूरी ईमानदारी से दायित्व निभाएगा। राजनीति और कानून दोनों से जुड़ा रहा है पारिवारिक पृष्ठभूमिजस्टिस गवई का जन्म महाराष्ट्र के अमरावती जिले में हुआ था। उनके पिता आर.एस. गवई, जो ‘रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया’ के नेता रहे हैं, बिहार, केरल और सिक्किम के राज्यपाल पद पर भी कार्य कर चुके हैं। जस्टिस गवई ने 1985 में वकालत की शुरुआत की थी और नागपुर तथा अमरावती केनगर निकायों सहित विश्वविद्यालयों के लिए स्थायी वकील के रूप में सेवाएं दीं। सुप्रीम कोर्ट में निभाई महत्वपूर्ण भूमिकाजस्टिस गवई ने सुप्रीम कोर्ट में कई ऐतिहासिक संविधान पीठों में भाग लिया है। वे उस पांच-न्यायाधीशों की पीठ का हिस्सा रहे, जिसने केंद्र सरकारके अनुच्छेद 370 हटाने के निर्णय को सर्वसम्मति से वैध ठहराया। इसके अलावा, वह इलेक्टोरल बॉन्ड केस और अनुसूचित जातियों के उप-वर्गीकरणको लेकर दिए गए फैसले में भी शामिल थे। संक्षिप्त कार्यकाल लेकिन बड़ी जिम्मेदारियाँहालांकि जस्टिस गवई का कार्यकाल अपेक्षाकृत छोटा है, लेकिन उनके अनुभव और न्यायिक दृष्टिकोण को देखते हुए न्यायपालिका और देश उनसेबड़ी उम्मीदें रख रहा है।

BSF कांस्टेबल पाकिस्तान से रिहा होकर लौटे वतन20 दिन बाद अटारी बॉर्डर से भारत आए जवान, पहलगाम हमले के अगले दिन गलती से सीमा पार कर गए थे

बीएसएफ कांस्टेबल पूर्णम कुमार साहू, जिन्हें 23 अप्रैल को गलती से सीमा पार कर जाने के बाद पाकिस्तान रेंजर्स ने हिरासत में ले लिया था, आखिरकार भारत लौट आए हैं। उन्हें बुधवार को अटारी-वाघा बॉर्डर से भारतीय अधिकारियों को सौंपा गया। पहलगाम हमले के बाद सीमा पर बढ़ा तनाव, उसी दौरान हुई चूकपूरणम कुमार साहू, जो पंजाब के फिरोजपुर सेक्टर में तैनात थे, पहलगाम में हुए आतंकी हमले के अगले दिन यानी 23 अप्रैल को गलती सेपाकिस्तान की सीमा में चले गए थे। उस वक्त भारत-पाकिस्तान के बीच संबंध पहले से तनावपूर्ण थे और इस चूक ने स्थिति को और गंभीर बना दियाथा। 20 दिन की चिंता, गर्भवती पत्नी ने की लगातार अपीलपश्चिम बंगाल के हुगली जिले की निवासी उनकी गर्भवती पत्नी रजनी को जब पति की गिरफ्तारी की खबर मिली, तो वह तुरंत अटारी बॉर्डर पहुंचीं।उन्होंने वहां अधिकारियों से लगातार अनुरोध किया कि उन्हें अपने पति की सुरक्षित वापसी चाहिए। अधिकारियों ने उन्हें आश्वस्त किया कि जवानसुरक्षित हैं और उन्हें जल्द रिहा करवाया जाएगा। BSF और भारतीय अधिकारियों की सतत कोशिशों का नतीजाBSF और भारतीय विदेश मंत्रालय के लगातार प्रयासों के बाद पाकिस्तान रेंजर्स ने पूर्णम को रिहा कर दिया। भारत लौटने के बाद उन्होंने गहरे भावुकमाहौल में पत्नी से मुलाकात की और परिवार में खुशी का माहौल छा गया। रजनी की उम्मीद और संघर्ष ने दिलाई कामयाबीरजनी ने मीडिया से बातचीत में कहा, “मैंने धैर्य नहीं छोड़ा। BSF अधिकारियों ने हर कदम पर हमारा साथ दिया। मुश्किल घड़ी में मैंने भारत सरकारपर विश्वास बनाए रखा और वह विश्वास आज जीत गया है।” सोशल मीडिया पर भारतीय सेना और सरकार की तारीफपूर्णम की वापसी की खबर फैलते ही सोशल मीडिया पर देशभक्ति की लहर दौड़ गई। लोगों ने भारतीय सेना और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसाकरते हुए कहा कि यह नए भारत की ताकत है, जो अपने हर जवान को सुरक्षित वापस लाने का माद्दा रखता है।

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का कड़ा रुख, मंत्री विजय शाह पर FIR के आदेश कर्नल सोफिया कुरैशी पर बयान का स्वतः संज्ञान, DGP को 4 घंटे में कार्रवाई का निर्देश

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का कड़ा रुख, मंत्री विजय शाह पर FIR के आदेश कर्नल सोफिया कुरैशी पर बयान का स्वतः संज्ञान, DGP को 4 घंटे में कार्रवाई का निर्देश मध्यप्रदेश के कैबिनेट मंत्री विजय शाह के एक आपत्तिजनक बयान को लेकर प्रदेश के उच्च न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा आदेश जारीकिया है। हाईकोर्ट ने कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिए गए विवादास्पद बयान पर स्वतः संज्ञान लेते हुए पुलिस महानिदेशक (DGP) को चार घंटेके भीतर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। जस्टिस अतुल श्रीधरन की अध्यक्षता में हुई सुनवाईमुख्य न्यायाधीश की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट रूप से कहा कि विजय शाह के खिलाफ हर हाल में प्राथमिकी दर्ज होनी चाहिए। अदालत ने राज्य केमहाधिवक्ता प्रशांत सिंह को भी सख्त निर्देश दिए हैं और मामले की अगली सुनवाई सोमवार को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ करने की बात कही है। विवादास्पद बयान से मचा हड़कंपमंत्री विजय शाह ने एक जनसभा में बिना नाम लिए कथित रूप से कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर बयान देते हुए कहा था, “हमने उनकी बहन भेजकरउनकी ऐसी-तैसी करवाई।” यह टिप्पणी पाकिस्तानी आतंकियों के परिप्रेक्ष्य में दी गई थी, लेकिन इस बयान ने तुरंत विवाद खड़ा कर दिया। माफी मांगते नज़र आए विजय शाहविवाद बढ़ने के बाद विजय शाह ने मीडिया से बात करते हुए सफाई दी और माफी मांगी। उन्होंने कहा, “मैं कभी सपने में भी सोफिया बहन के बारे मेंकुछ गलत नहीं सोच सकता। उन्होंने जाति और धर्म से ऊपर उठकर देश की सेवा की है। मेरा इरादा सेना का अपमान नहीं था। अगर जोश में कोईशब्द गलत निकल गया, तो मैं क्षमा चाहता हूं।” राजनीतिक घमासान: कांग्रेस का हमलाविवाद को लेकर कांग्रेस ने भी सरकार को घेरा। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि जब पूरा देश आतंकवाद के खिलाफ एकजुट है, तबबीजेपी के वरिष्ठ नेता इस तरह की आपत्तिजनक टिप्पणियां कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि “हमने किसकी बहन को भेजा?” – यह बयान आखिरकिसके लिए था?राज्य प्रशासन और पुलिस महकमे में हलचलहाईकोर्ट के सख्त आदेश के बाद प्रदेश के प्रशासनिक और पुलिस तंत्र में हड़कंप मच गया है। अब देखना होगा कि अगली सुनवाई से पहले अदालतके निर्देशों का पालन किस तरह होता है।

जेवर को सेमीकंडक्टर सेक्टर में बड़ी सौगात,देश की छठी यूनिट को केंद्र सरकार की मंजूरी

उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा स्थित जेवर को टेक्नोलॉजी हब के रूप में नया आयाम मिलने जा रहा है। केंद्र सरकार ने यहां देश की छठी सेमीकंडक्टरयूनिट की स्थापना को हरी झंडी दे दी है। इस संबंध में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में जानकारी साझा की। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत चल रहा विकासयह परियोजना भारत सरकार के ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ का हिस्सा है, जिसके तहत देशभर में सेमीकंडक्टर निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है।अब तक देश में पांच सेमीकंडक्टर यूनिट को मंजूरी दी जा चुकी है और निर्माण कार्य प्रगति पर है। एचसीएल और फॉक्सकॉन का संयुक्त उपक्रमजेवर में लगने वाली यह यूनिट एचसीएल और फॉक्सकॉन के संयुक्त सहयोग से स्थापित की जाएगी। यह प्लांट यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकासप्राधिकरण (YEIDA) क्षेत्र में जेवर एयरपोर्ट के पास बनेगा। इस परियोजना में 3,700 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है और उत्पादन वर्ष 2027 से आरंभ होगा। मोबाइल से लेकर ऑटोमोबाइल तक में होगी चिप्स की उपयोगिताइस यूनिट में तैयार की जाने वाली सेमीकंडक्टर चिप्स का उपयोग मोबाइल फोन, लैपटॉप, ऑटोमोबाइल और कंप्यूटर जैसे उपकरणों में कियाजाएगा। एक अन्य यूनिट में इसी साल से उत्पादन शुरू होने की संभावना है। शिक्षा और स्टार्टअप क्षेत्र को भी बढ़ावाकेंद्रीय मंत्री ने बताया कि देशभर के 270 शिक्षण संस्थानों और 70 से अधिक स्टार्टअप से जुड़े छात्र और नवाचारकर्ता अत्याधुनिक डिज़ाइन तकनीकोंपर कार्य कर रहे हैं, जिससे भारत को सेमीकंडक्टर तकनीक में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में तेजी आ रही है।जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट बना रहा है आधारगौरतलब है कि जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। इसके शुरू होते ही क्षेत्र में वैश्विक निवेश और औद्योगिक गतिविधियोंको नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।

भारत में चीन और तुर्किये के प्रसारकों पर सख्त कार्रवाई,देश विरोधी प्रचार पर एक्शन, कई ‘X’ अकाउंट्स प्रतिबंधित

भारत सरकार ने चीन और तुर्किये के कुछ प्रमुख प्रसारकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए माइक्रोब्लॉगिंग साइट ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर उनकेअकाउंट्स को भारत में प्रतिबंधित कर दिया है। यह कदम देश विरोधी और भ्रामक सूचनाएं फैलाने तथा पाकिस्तानी प्रोपेगैंडा को बढ़ावा देने केआरोपों के तहत उठाया गया है।शिन्हुआ, ग्लोबल टाइम्स और TRT वर्ल्ड पर लगा प्रतिबंधचीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ, प्रमुख समाचार पत्र ग्लोबल टाइम्स, और तुर्किये के सरकारी चैनल TRT वर्ल्ड के ‘X’ हैंडल्स को भारत मेंएक्सेस नहीं किया जा सकेगा। सरकार का कहना है कि ये अकाउंट्स देश की अखंडता और सुरक्षा के खिलाफ अपुष्ट और भ्रामक जानकारी प्रसारितकर रहे थे। चीन के नए नक्शों और अरुणाचल विवाद के बीच आई कार्रवाईयह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब चीन ने हाल ही में अरुणाचल प्रदेश के कुछ स्थानों को नए नाम देकर अपना दावा दोहराया। भारत ने इस परतीखी प्रतिक्रिया दी और इसे “बेतुका और निरर्थक” बताया। विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा था, है औररहेगा। भारतीय दूतावास ने भी दी थी चेतावनीइससे कुछ दिन पहले चीन में भारतीय दूतावास ने स्थानीय मीडिया को अपुष्ट और भ्रामक जानकारी साझा करने पर चेतावनी दी थी। दूतावास ने कहाथा कि बिना पुष्टि के खबरें साझा करना पत्रकारिता की नैतिकता के खिलाफ है और इसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। भारत-पाक तनाव के बीच बढ़ी सतर्कतादिल्ली और इस्लामाबाद के बीच बढ़ते तनाव के चलते भारत ने विदेशी प्रचार माध्यमों पर विशेष नजर रखनी शुरू की है। सरकार का उद्देश्य है कि देशमें शांति और सुरक्षा के खिलाफ किसी भी डिजिटल प्रोपेगैंडा को रोक जाए।

मोदी ने जो कहा वो किया, भारत ना डरता है और ना झुकता है -भारतीय सेना ने की पाक की किरकिरी

भारत ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि वह ना तो डरता है, ना ही किसी भी प्रकार के आतंक के सामने झुकता है। पहलगाम, जम्मू-कश्मीर में 22 अप्रैल 2025 को हुए भीषण आतंकवादी हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया, जिसमें 26 निर्दोष नागरिकों की जान गई और 17 लोग गंभीररूप से घायल हुए। यह हमला उस वक्त हुआ जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सऊदी अरब दौरे पर थे और अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भारतकी यात्रा पर थे। इस आतंकवादी हमले के बाद भारत ने जो प्रतिक्रिया दी, वह “ऑपरेशन सिंदूर” के रूप में इतिहास में दर्ज हो गई। आतंकवादी हमला: एक कायरता पूर्ण कृत्य इस हमले का निशाना बने अधिकांश लोग पर्यटक थे जो ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ कहे जाने वाले बायसरन की खूबसूरत वादियों में छुट्टियां बिताने आए थे।हमला इतने सुनियोजित और बर्बर तरीके से किया गया था कि इसकी तुलना 2019 के पुलवामा हमले से की जाने लगी। हमलावरों का उद्देश्य सिर्फजान-माल का नुकसान करना ही नहीं था, बल्कि भारत की सुरक्षा, अखंडता और वैश्विक छवि को भी चोट पहुँचाना था। ऑपरेशन सिंदूर की योजना और क्रियान्वयन भारत सरकार ने तत्काल प्रतिक्रिया दी। प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति में गृह मंत्री, रक्षा मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) ने मिलकर उच्चस्तरीयसुरक्षा बैठकें कीं। 6 और 7 मई की दरम्यानी रात को भारतीय सशस्त्र बलों ने “ऑपरेशन सिंदूर” की शुरुआत की। इस ऑपरेशन के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तानअधिकृत कश्मीर (PoK) में स्थित आतंकवादी शिविरों को लक्षित किया गया। भारतीय वायुसेना और सेना के विशेष बलों ने एक संयुक्त अभियान मेंसिर्फ 25 मिनट के अंदर नौ अलग-अलग ठिकानों पर 24 सटीक हमले किए। ये हमले जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिज्ब-उल-मुजाहिदीनजैसे संगठनों के शिविरों पर केंद्रित थे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत ने यह कार्रवाई “सटीकता, एहतियात और करुणा” के साथ की, ताकि केवल आतंकवादी संरचनाओं को हीनुकसान पहुँचे और निर्दोष नागरिकों को कोई हानि न हो। उन्होंने इसे भारत के “जवाब देने के अधिकार” के तहत उचित ठहराया। पाकिस्तान की प्रतिक्रिया और भारत का प्रत्युत्तर ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने भारत के जम्मू, पठानकोट और उधमपुर स्थित सैन्य ठिकानों को ड्रोन और मिसाइलों से निशाना बनाने कीकोशिश की। हालांकि, भारतीय वायु रक्षा प्रणाली, विशेषकर S-400, ने इन हमलों को नाकाम कर दिया और कई पाकिस्तानी मिसाइलों और ड्रोनको मार गिराया। इसके तुरंत बाद भारत ने पाकिस्तान के वायु रक्षा ठिकानों पर जवाबी हमला किया। खासकर लाहौर में स्थित वायु रक्षा प्रणाली को निष्क्रिय कियागया। इस प्रतिक्रिया के बाद ही दोनों देशों ने 10 मई को “सभी फायरिंग और सैन्य कार्रवाई” को रोकने पर सहमति जताई। अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत भारत का अधिकार संयुक्त राष्ट्र चार्टर का अनुच्छेद 51 सदस्य राज्यों को आत्म-रक्षा का अधिकार देता है, यदि उन पर सशस्त्र हमला होता है। जबकि यू.एन. चार्टर विशेषरूप से यह नहीं कहता कि “सशस्त्र हमला” क्या है, अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) ने इसे “बल के उपयोग का सबसे गंभीर रूप” कहा है। भारत ने ऑपरेशन सिंदूर को अनुच्छेद 51 के अंतर्गत सही ठहराया, भले ही विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने इसका स्पष्ट उल्लेख नहीं किया। उन्होंने इनहमलों को “मापदंडित और गैर-उत्तेजक” करार दिया। 8 मई को उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के 15 में से 13 सदस्य देशों के राजदूतोंको हमलों की जानकारी दी। पाकिस्तान के राजदूत को आमंत्रित नहीं किया गया था। गैर–राज्य अभिनेताओं के खिलाफ आत्म–रक्षा का अधिकार यू.एन. चार्टर की राज्य-केंद्रित प्रकृति के कारण गैर-राज्य अभिनेताओं जैसे आतंकी संगठनों पर कार्रवाई करना जटिल हो जाता है। हालांकि, 9/11 केबाद, अमेरिका जैसे देशों ने यह तर्क दिया कि आत्म-रक्षा का अधिकार आतंकवादी संगठनों पर भी लागू होता है। ICJ की राय अधिक प्रतिबंधात्मक रही है, जो कहती है कि जब तक किसी राज्य को सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, तब तक अनुच्छेद51 का प्रयोग नहीं किया जा सकता। भारत ने अपने बयानों में पाकिस्तान की मिलीभगत और आतंकियों को समर्थन देने के ठोस प्रमाण दिए, जिससेयह हमला एक राज्य-प्रायोजित आतंकवाद का उदाहरण बन गया। सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थिति ऑपरेशन सिंदूर और उसके बाद की गोलाबारी के चलते जम्मू, राजौरी, पुंछ, बारामुल्ला और कुपवाड़ा जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों में भय का वातावरण उत्पन्नहो गया। पाकिस्तानी सेना द्वारा की गई गोलाबारी में कम से कम 12 नागरिकों और एक सैनिक की मृत्यु हो गई, जबकि 51 अन्य घायल हुए। अधिकारियों ने इन क्षेत्रों में अस्थायी राहत शिविर स्थापित किए और प्रत्येक सीमावर्ती जिले को ₹5 करोड़ की राशि जारी की। मुख्यमंत्री उमरअब्दुल्ला ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उपायुक्तों के साथ आपात बैठक कर राहत और बचाव कार्यों का निर्देश दिया। आतंकवादी संगठन और उनकी भूमिका जिन आतंकी शिविरों को निशाना बनाया गया, उनका संबंध प्रमुख प्रतिबंधित संगठनों जैसे जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिज्ब-उल-मुजाहिदीन से था। जैश-ए-मोहम्मद (JeM): इसका मुख्यालय पाकिस्तान के बहावलपुर में है, और इसे मसूद अजहर ने 2000 में स्थापित किया था। यह संगठन संसदपर हमले से लेकर पुलवामा आत्मघाती हमले तक कई हमलों में शामिल रहा है। लश्कर-ए-तैयबा (LeT): यह संगठन 2008 के मुंबई हमलों और 2006 के मुंबई ट्रेन धमाकों के लिए जिम्मेदार रहा है। इसका मुख्यालय पाकिस्तानके लाहौर के पास मुरीदके में है। भारत की सैन्य क्षमताएं और दक्षता भारत ने इस पूरे ऑपरेशन में अपनी सैन्य रणनीति और तकनीकी दक्षता का परिचय दिया। S-400 वायु रक्षा प्रणाली ने पाकिस्तान द्वारा दागी गईआठ मिसाइलों और कई ड्रोन को सफलतापूर्वक निष्क्रिय कर दिया। जवाबी हमले में भारत ने पाकिस्तान के तीन फाइटर जेट्स को भी मार गिराया, जिनमें से एक F-16 और दो JF-17 थे। भारत ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि वह ना तो डरता है, ना ही किसी भी प्रकार के आतंक के सामने झुकता है।  भारत ने यह स्पष्ट कर दिया कि वह युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अगर उसकी संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा पर खतरा आता है तो वह चुप नहीं बैठेगा।रक्षा मंत्रालय ने कहा कि भारतीय प्रतिक्रिया पाकिस्तान के समान ही तीव्रता के साथ उसी क्षेत्र में रही है, लेकिन भारत तनाव नहीं बढ़ाना चाहता। भारत की यह नीति स्पष्ट है: वह न तो पहले हमला करता है और न ही वह किसी भी उकसावे को अनदेखा करता है। “ऑपरेशन सिंदूर” इसका प्रमाणहै। यह न केवल सैन्य कार्रवाई थी, बल्कि यह एक कूटनीतिक और कानूनी संदेश भी था – कि भारत अपनी रक्षा के लिए सक्षम है और इसके लिएअंतरराष्ट्रीय मानदंडों का पालन करता है। ट्रंप की ‘संधि नीति’ और भारत में आक्रोश इस सैन्य संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 10 मई को सोशल मीडिया पर अचानक घोषणा कर दी कि भारत और पाकिस्तान संघर्षविराम पर सहमत हो गए हैं। उन्होंने दावा किया कि यह अमेरिका की मध्यस्थता से संभव हो पाया है और अब दोनों देश एक निष्पक्ष स्थान परबातचीत करेंगे। भारत में इस घोषणा को लेकर व्यापक आक्रोश फैल गया। भारतीय जनता ने ट्रंप के इस कदम को पाकिस्तान के प्रति नरम रुख और भारत की दृढ़रणनीतिक स्थिति को कमजोर करने वाला कदम माना। विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारत की उस ऐतिहासिक नीति के खिलाफ है जिसमें किसीतीसरे पक्ष को भारत-पाक मुद्दों में हस्तक्षेप की अनुमति नहीं दी जाती। ट्रंप की धमकी और विपक्ष का आक्रामक रुख 12 मई को ट्रंप के एक और बयान ने इस विवाद को और गहरा कर दिया। उन्होंने कहा कि यदि भारत और पाकिस्तान युद्ध नहीं रोकते, तो अमेरिकाउनके साथ व्यापार नहीं करेगा। इस धमकी जैसे बयान ने भारत में विरोधियों को प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधने का मौका दे दिया। विपक्षी पार्टियों ने सवाल उठाया कि क्या भारत अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता को अमेरिका के व्यापारिक हितों के लिए गिरवी रखेगा? कांग्रेस, आरजेडीऔर अन्य दलों ने सरकार से संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग की ताकि ट्रंप की ‘चौधराहट’ को लेकर दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया जा सके। आरजेडी सांसद मनोज झा ने कड़े शब्दों में कहा कि ट्रंप को कश्मीर मुद्दे में हस्तक्षेप करने का अधिकार किसने दिया? वहीं आरजेडी की प्रवक्ता प्रियंकाभारती ने मोदी पर कटाक्ष करते हुए उन्हें ’56 इंच की भीगी बिल्ली’ तक कह डाला। ब्रह्मा चेलानी का विश्लेषण: नीति बनाम नेतृत्व विदेश मामलों के विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी ने ट्रंप के रुख की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने पाकिस्तान को भारतीय सेना की सजा से बचा लिया।उन्होंने यह भी कहा कि ट्रंप का यह हस्तक्षेप दरअसल पाकिस्तान के उस एजेंडे को हवा देता है जो कश्मीर मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण करना चाहता है। हालांकि चेलानी ने प्रधानमंत्री मोदी की उस आलोचना की सराहना की जो उन्होंने परोक्ष रूप से अपने संबोधन में ट्रंप को की थी। मोदी ने स्पष्ट करदिया कि भारत पाकिस्तान से केवल दो मुद्दों पर बात करेगा—पाक-अधिकृत कश्मीर की वापसी और आतंकवाद का खात्मा। भारतीय अमेरिकियों की नाराजगी अमेरिका में रहने वाले भारतीयों ने भी ट्रंप की आलोचना की। प्रमुख भारतीय अमेरिकी लेखक और टिप्पणीकार विभूति झा ने ट्रंप को संबोधित करतेहुए कहा कि आपने नरेंद्र मोदी और शहबाज शरीफ को एक ही तराजू में तौलकर ‘दोस्ती’ जैसे शब्द को अपमानित किया है। उन्होंने कहा कि जो नेताअपने सैनिकों और आतंकवादियों के बीच फर्क नहीं कर पाते, वे अच्छे लीडर नहीं कहे जा सकते। एक्स (पूर्व ट्विटर) पर मोहन सिन्हा जैसे भारतीय अमेरिकियों ने भी ट्रंप की अज्ञानता पर तीखी प्रतिक्रिया दी और अमेरिका की दक्षिण एशिया नीति कोएकतरफा और ऐतिहासिक रूप से पाकिस्तान समर्थक बताया। ट्रंप के रुख में बदलाव: चुनावी रणनीति या अमेरिकी नीति? एक बड़ा सवाल यह है कि ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में पाकिस्तान की सैन्य सहायता रोक दी थी, चीन के खिलाफ भारत का समर्थन किया था, फिर अब उन्होंने यह यू-टर्न क्यों लिया? विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप आगामी चुनावों में यह दिखाना चाहते हैं कि वे वैश्विक शांति लाने में सक्षम हैं। ट्रंप पहले ही रूस-यूक्रेन और इजरायल-हमास संघर्ष में कोई उल्लेखनीय भूमिका नहीं निभा पाए हैं। भारत-पाक संघर्ष उन्हें एक मौका लगा जिससे वेअपनी कूटनीतिक सक्रियता प्रदर्शित कर सकें। यह उनका घरेलू चेहरा चमकाने का प्रयास था। वहीं कुछ विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि यह ट्रंप का व्यक्तिगत निर्णय नहीं बल्कि अमेरिका की पारंपरिक रणनीति है। पाकिस्तान की भौगोलिक स्थितिऔर वहां की सैन्य संरचना अमेरिका के लिए हमेशा से रणनीतिक रूप से अहम रही है। भारतीय हमलों के प्रभाव और पाकिस्तान पर परमाणु संकट की मार 12 मई को भारतीय सेना द्वारा की गई कार्रवाई में पाकिस्तान के प्रमुख हवाई ठिकानों को निशाना बनाया गया। इसमें रफीकी एयरबेस (शोरकोट), नूरखान एयरबेस (रावलपिंडी), मलीर छावनी (कराची), और कई रडार साइटें शामिल थीं। इससे यह स्पष्ट हुआ कि भारत ने पाकिस्तान के हर रणनीतिकशहर में सैन्य ठिकानों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया। यह भी दावे किए जा रहे हैं कि भारत ने एक परमाणु सुविधा केंद्र पर भी हमला किया जिससे अमेरिका को अपना परमाणु सुरक्षा सहायता विमानबी350 AMS तैनात करना पड़ा। हालांकि भारत की सेना ने इन दावों को खारिज किया, क्यूंकि इससे तनाव की गंभीरता का अंदाजा लगाया जासकता है। कूटनीति और राष्ट्रीय स्वाभिमान का संतुलन इस पूरे घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत अब 1999 या 2001 वाला भारत नहीं है, जो बाहरी दबाव में झुकता था। हालांकि अमेरिका कीतरह के देशों के साथ रणनीतिक संबंध बनाए रखना भारत के लिए आवश्यक है, लेकिन यह संबंध किसी कीमत पर संप्रभुता की हानि के साथ नहीं होसकते। डोनाल्ड ट्रंप की हालिया भूमिका ने अमेरिका-भारत संबंधों की जटिलता को उजागर कर दिया है। यह भारत की विदेश नीति के लिए एक चुनौतीपूर्णमोड़ है—जहां उसे वैश्विक कूटनीति, क्षेत्रीय सुरक्षा और घरेलू राजनीति के बीच संतुलन साधना होगा। प्रधानमंत्री मोदी को चाहिए कि वे ट्रंप जैसेअप्रत्याशित नेताओं से पार पाने के लिए अधिक सक्रिय और पारदर्शी कूटनीति अपनाएं ताकि भारत की गरिमा और सुरक्षा को कोई आंच न आए।

दिल्ली भाजपा ने किया कर्तव्य पथ से नैशनल वॉर मेमोरियल तक भव्य तिरंगा यात्रा का आयोजन

सिटिजन फॉर नेशनल सिक्योरिटी द्वारा आयोजित एक भव्य तिरंगा यात्रा में आज हजारों दिल्लीवासियों ने देशभक्ति का संदेश दिया। कर्तव्य पथ सेइंडिया गेट स्थित नैशनल वॉर मेमोरियल तक निकली इस यात्रा में कई वरिष्ठ भाजपा नेताओं सहित स्काउट, एनसीसी कैडेट, डॉक्टर, वकील, नर्सिंगस्टाफ और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। भाजपा के दिग्गज नेता हुए शामिलइस राष्ट्रवादी आयोजन में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, प्रदेश अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा, केंद्रीय राज्य मंत्रीहर्ष मल्होत्रा, संगठन महामंत्री पवन राणा, सांसद मनोज तिवारी, नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी, कमलजीत सहरावत, योगेन्द्र चंदोलिया, बांसुरीस्वराज, मंत्री प्रवेश साहिब सिंह, मनजिंदर सिंह सिरसा, आशीष सूद, कपिल मिश्रा, रविन्द्र इंद्राज, एनडीएमसी उपाध्यक्ष कुलजीत सिंह चहल औरदिल्ली भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारी विष्णु मित्तल सहित अनेक विधायक व पार्षदों ने भाग लिया। राष्ट्र की सुरक्षा सर्वोपरिभाजपा दिल्ली अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने आलोचकों पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग पहले सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल उठा रहे थे, आज भीसरकार के निर्णयों पर अविश्वास जता रहे हैं। उन्होंने आम आदमी पार्टी पर पाकिस्तान की भाषा बोलने और कट्टरपंथी वोट बैंक साधने का आरोपलगाया। दिल्ली ने दिखाई एकजुटतामुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि इस यात्रा के माध्यम से दिल्लीवासियों ने प्रधानमंत्री मोदी के आतंकवाद विरोधी रुख को पूर्ण समर्थन दिया है। उन्होंनेकहा कि भारत अब आतंकी हमलों का करारा जवाब देने में संकोच नहीं करेगा और सरकार की नीति स्पष्ट है – गोलीबारी अब युद्ध की श्रेणी मेंआएगी। ऑपरेशन सिन्दूर केवल जवाब नहीं, प्रतिज्ञा हैभाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग ने कहा कि आज का भारत सहनशील जरूर है, लेकिन अब किसी भी प्रकार की आतंकवादी गतिविधि को सहननहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि “ऑपरेशन सिन्दूर” केवल सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि यह न्याय और राष्ट्रगौरव की एक स्पष्ट प्रतिज्ञा है। उन्होंने दोटूक कहा – “टेरर और टॉक एक साथ नहीं चल सकते, अब पाकिस्तान से बात होगी तो सिर्फ पीओके पर या आतंकवाद के खात्मे पर।” तिरंगा देश की आत्मा है श्री चुग ने अपने संबोधन में तिरंगे को केवल एक झंडा नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा करार दिया और कहा कि इस आत्मा का नेतृत्व प्रधानमंत्री मोदी कररहे हैं।

विदेश मंत्रालय का जवाब, ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने ट्रंप के दावों को खारिज किया, पाकिस्तान को दी सख्त चेतावनी

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को एक प्रेस ब्रीफिंग में स्पष्ट किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया सैन्यटकराव, विशेष रूप से ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, अमेरिका के साथ हुई बातचीत में व्यापार का कोई जिक्र नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि अमेरिकीराष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा किए गए दावे पूरी तरह से निराधार हैं। प्रवक्ता ने कहा, “7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू होने से लेकर 10 मई को संघर्षविराम की सहमति बनने तक भारत और अमेरिका के बीच सैन्य स्थितिपर बातचीत हुई थी, लेकिन किसी भी चर्चा में व्यापार या प्रतिबंध से जुड़ा कोई मुद्दा नहीं उठा।” भारत की नीति साफ: परमाणु दबाव और आतंकवाद बर्दाश्त नहींरणधीर जायसवाल ने भारत की रणनीतिक नीति को दोहराते हुए कहा कि भारत न तो कभी परमाणु धमकियों के आगे झुकेगा और न ही सीमा पारआतंकवाद को बर्दाश्त करेगा। उन्होंने कहा, “हमने विभिन्न देशों से बातचीत में स्पष्ट कर दिया है कि जो राष्ट्र ऐसे हालात में शामिल होंगे, उन्हें अपने हीक्षेत्र में गंभीर नुकसान उठाना पड़ सकता है।” पाकिस्तान को दो टूक चेतावनीपाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए जायसवाल ने कहा कि जिस देश ने आतंकवाद को संगठित रूप से बढ़ावा दियाहै, उसे यह भ्रम नहीं पालना चाहिए कि वह इसके दुष्परिणामों से बच सकता है। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान जितनी जल्दी यह समझेगा, उसके लिएउतना ही अच्छा होगा।”

पीओके वापस लेने का मौका था, लेकिन मोदी सरकार ने पीछे हटकर देश को धोखा दिया – सौरभ भारद्वाज

आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता सौरभ भारद्वाज ने मोदी सरकार पर कड़ा हमला बोलते हुए कहा कि पाक अधिकृत कश्मीर(पीओके) को वापस लेने का सुनहरा अवसर होते हुए भी सरकार पीछे हट गई और देश के साथ धोखा किया। “जान देने की बात करने वाली भाजपा ने युद्ध विराम कर दिया”सौरभ भारद्वाज ने कहा कि भाजपा नेताओं, जिनमें खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह शामिल हैं, ने वर्षों तक पीओके को भारत मेंमिलाने की कसमें खाईं। वे कहते रहे कि इसके लिए जान भी दे देंगे। लेकिन जब वाकई मौका आया, तो सरकार ने संघर्षविराम की घोषणा कर दी। “प्रधानमंत्री ने भारतीय सेना की जीत का मौका गवां दिया”भारद्वाज ने कहा कि हमारी सेना पाकिस्तान के खिलाफ निर्णायक बढ़त पर थी। भारतीय वायुसेना और थलसेना ने पाकिस्तान को पूरी तरह मात दीथी। ड्रोन और मिसाइल हमलों को नाकाम किया गया। सेना पीओके तक पहुँचने को तैयार थी, लेकिन प्रधानमंत्री ने सीजफायर कर युद्ध रोक दिया। “78 साल से भाजपा कर रही थी जनता को गुमराह”उन्होंने कहा कि पिछले सात दशकों से भाजपा पीओके मुद्दे पर लोगों को झूठे वादे करके गुमराह करती रही है। अब जब उन्हें कार्रवाई का मौका मिला, तो उन्होंने अपने ही संकल्प से पीछे हटकर साबित कर दिया कि पीओके को लेकर उनकी इच्छाशक्ति सिर्फ राजनीतिक नारा थी।“तिरंगा यात्रा से जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश”सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि अब सरकार हताश कार्यकर्ताओं को तिरंगा यात्रा निकालने के लिए कह रही है ताकि युद्धविराम से उपजे जनाक्रोशको दबाया जा सके। उन्होंने कहा कि दशकों से शाखाओं में सुबह-सुबह पीओके का पाठ पढ़ने वाले स्वयंसेवक आज खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। “क्या भाजपा ने पीओके को भूलने का फैसला कर लिया है?”भारद्वाज ने सीधा सवाल किया, “क्या भाजपा अब पीओके को लेकर अपनी राजनीतिक इच्छाशक्ति खो चुकी है? जब भारत की सेना जीत रही थी, तब युद्ध क्यों रोका गया? क्या भाजपा का पीओके लौटाने का वादा एक छलावा था?” “इतिहास ने मोदी को मौका दिया, लेकिन उन्होंने उसे खो दिया”सौरभ भारद्वाज ने कहा कि इतिहास ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पीओके हासिल करने का सबसे बड़ा अवसर दिया था। पाकिस्तान हार रहा था औरभारत जीत रहा था, लेकिन सीजफायर कर यह अवसर गंवा दिया गया। “योगी आदित्यनाथ का वादा भी झूठा साबित हुआ”उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी निशाना साधा और कहा कि उन्होंने चुनावी मंचों से कहा था कि मोदी तीसरी बार पीएम बनेंगेतो छह महीने में पीओके भारत का हिस्सा होगा। अब छह महीने से भी ज़्यादा हो चुके हैं, और सरकार युद्ध विराम कर सेना को वापस बुला चुकी है।

आतिशी ने पीएम मोदी से पूछा, पहलगाम हमले का बदला लिए बिना क्यों हुआ संघर्ष विराम?

पहलगाम हमले का बदला लिए बिना संघर्षविराम क्यों? — आतिशी ने पीएम मोदी से पूछे तीखे सवाल“क्या संघर्षविराम का समय था? क्या हमने अपनी बेटियों के सिंदूर का बदला ले लिया? क्या पहलगाम हमले के दोषियों को भारत को सौंपा गया?” – आतिशी भारत की जनता को चाहिए जवाबअगर पाकिस्तान ने संघर्षविराम की गुहार लगाई, तो इसका ऐलान भारत की बजाय अमेरिका ने क्यों किया?अगर पाकिस्तान ने हार मानी, तो उसने सार्वजनिक रूप से इसकी घोषणा क्यों नहीं की?क्या पहलगाम हमले के गुनहगार भारत को सौंपे गए?क्या अमेरिकी व्यापार का दबाव भारत की बेटियों के सम्मान से बड़ा हो गया है? दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और आम आदमी पार्टी की वरिष्ठ नेता आतिशी ने केंद्र सरकार द्वारा पाकिस्तान के साथ संघर्षविराम स्वीकार किएजाने पर कड़ा सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि जब भारतीय सेना आतंकवादियों और उनके सरपरस्तों पर करारा वार कर रही थी, तभी अमेरिका केहस्तक्षेप पर भारत ने अचानक चुपचाप संघर्षविराम मान लिया। आतिशी ने पूछा, “क्या हमारी बेटियों के सिंदूर की कीमत अमेरिकी व्यापार से कम है? क्या यह न्याय है कि हमला भारत पर हो और समझौताअमेरिका के दबाव में हो?” पहलगाम हमला – देश की आंखों में आंसूआतिशी ने बताया कि 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में एक भयावह आतंकी हमला हुआ, जिसमें निर्दोष पर्यटकों को निशाना बनाया गया।“उस दिन पूरे देश ने हमारी बेटियों की आंखों में आंसू देखे और न्याय की मांग की,” उन्होंने कहा। ऑपरेशन सिंदूर – सेना का जवाबआम आदमी पार्टी की नेता ने बताया कि जब 7 मई को भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया, तो पूरा देश एकजुट था। सभी दलों ने सरकारका समर्थन किया क्योंकि यह सवाल था भारत की अस्मिता का और हमारी बेटियों की शहादत का। अमेरिका ने किया संघर्षविराम का ऐलान, भारत ने चुपचाप मान लियाआतिशी ने सवाल उठाया कि 10 मई को संघर्षविराम की घोषणा भारत या भारतीय सेना ने नहीं, बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने की—वो भीसोशल मीडिया के ज़रिये। आधे घंटे बाद भारत ने बिना कुछ कहे इसे स्वीकार कर लिया। तीखे सवाल, जिनका जवाब देश मांग रहा है. अगर पाकिस्तान ने आत्मसमर्पण किया, तो इसकी घोषणा भारत ने क्यों नहीं की?. क्या पाकिस्तान ने आधिकारिक रूप से हार मानी? कोई समझौताया बयान क्यों नहीं आया?क्या पहलगाम हमले के दोषियों को भारत को सौंपा गया? क्या अमेरिका के दबाव में लिया गया फैसला?आतिशी ने दावा किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने खुद कहा कि उन्होंने भारत को व्यापार रोकने की धमकी दी थी। उन्होंने पीएम मोदी से सीधासवाल पूछा—“प्रधानमंत्री जी, क्या अमेरिका से व्यापार भारत की बेटियों के सिंदूर से ज़्यादा कीमती हो गया है?” आखिरी सवाल: न्याय कब मिलेगा?“जब तक पहलगाम हमले के गुनहगार भारत के हाथ में नहीं आते, तब तक यह संघर्षविराम अधूरा और अपमानजनक है,” आतिशी ने कहा।”प्रधानमंत्री को अब चुप्पी तोड़नी होगी और देश को सच बताना होगा।”