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भारतीय सेना का कड़ा संदेश, POK में आतंकी अड्डों पर सटीक वार

22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना ने असाधारण साहस और रणनीतिक दक्षता का परिचयदेते हुए बड़ा सैन्य अभियान चलाया। “ऑपरेशन सिंदूर” नामक इस जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में स्थितआतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया गया और उन्हें पूरी तरह नष्ट कर दिया गया। पाकिस्तानी जवाब का करारा प्रतिकारपाकिस्तान द्वारा की गई जवाबी सैन्य कार्रवाई की कोशिशों को भारतीय सेना ने कठोर प्रतिशोध के साथ विफल कर दिया। रविवार को जारी किए गएवीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि भारतीय सशस्त्र बलों ने आतंकियों के लॉन्चिंग पैड्स और पाकिस्तानी सेना की चौकियों को बेहद सटीकहमलों में ध्वस्त कर दिया। वेस्टर्न कमांड द्वारा साझा किए गए इस फुटेज में बताया गया कि यह कार्रवाई प्रतिशोध नहीं बल्कि न्याय के सिद्धांतों परआधारित थी। सेना ने दोटूक शब्दों में कहा—“ऐसा सबक दिया गया है, जिसे आने वाली पीढ़ियां भी याद रखेंगी।” राजनीतिक और कूटनीतिक सोच में बदलावकेंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने “ऑपरेशन सिंदूर” की प्रशंसा करते हुए इसे न केवल एक सैन्य उपलब्धि, बल्कि भारत की बदली हुई राजनीतिक औरकूटनीतिक रणनीति का प्रतीक बताया। “कश्मीर क्रॉनिकल्स” पुस्तक के विमोचन के अवसर पर उन्होंने कहा कि सिंधु जल संधि जैसे फैसले उस समयपाकिस्तान को संतुष्ट करने की नीति का हिस्सा थे, लेकिन अब भारत ने अपनी सुरक्षा नीतियों में व्यापक और निर्णायक बदलाव किए हैं। प्रधानमंत्री की नेतृत्व शैली का असरडॉ. सिंह ने यह भी रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सशस्त्र बलों को समय और परिस्थिति के अनुसार स्वतंत्र रूप से कार्रवाई करनेकी पूरी छूट दी गई है—जो पहले की सरकारों से एक बड़ा बदलाव है। “ऑपरेशन सिंदूर” इसी नई सैन्य सोच और स्पष्ट राजनीतिक इच्छाशक्ति कापरिणाम है, जिसने दुश्मन को ऐसी चोट दी है जिसे वह लंबे समय तक भूल नहीं पाएगा।

मणिपुर के चंदेल जिले में भारत-म्यांमार सीमा पर सेना का बड़ा ऑपरेशन, 10 उग्रवादी ढेर

मणिपुर के चंदेल जिले में भारतीय सेना ने हाल ही में एक बड़ी सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया है, जिसमें 10 उग्रवादियों को मार गिराया गया। यहऑपरेशन भारत-म्यांमार सीमा के समीप स्थित नक्सली और उग्रवादी ठिकानों को निशाना बनाकर किया गया। यह कदम सीमा सुरक्षा को मजबूत करनेके साथ-साथ उग्रवादी गतिविधियों को कम करने के लिए उठाया गया है। ऑपरेशन की पृष्ठभूमिचंदेल जिले में पिछले कुछ समय से उग्रवादी गतिविधियों में वृद्धि देखी गई थी। यह क्षेत्र भारत-म्यांमार सीमा के नजदीक होने के कारण नक्सली औरअन्य उग्रवादी समूहों के लिए एक रणनीतिक ठिकाना माना जाता है। इन समूहों ने सीमा पार से हथियारों और अन्य संसाधनों की आपूर्ति प्राप्त की है, जिससे उनके प्रभाव में वृद्धि हुई थी। इस वजह से सुरक्षा बलों ने इस इलाके में विशेष अभियान चलाने का फैसला लिया। ऑपरेशन की शुरुआत और रणनीतिसेना ने खुफिया सूचनाओं के आधार पर म्यांमार की सीमा के नजदीक स्थित उग्रवादी छिपे होने की सूचना पाई। इसके बाद विशेष रूप से प्रशिक्षितसेना की इकाइयों को इलाके में भेजा गया। ऑपरेशन की योजना बड़ी सूझ-बूझ और सटीक जानकारी के साथ बनाई गई थी, जिसमें इलाके को चारोंतरफ से घेरकर उग्रवादियों को पकड़ने का प्रयास किया गया। ऑपरेशन के दौरान सेना ने इलाके में ड्रोन और अन्य तकनीकी उपकरणों का भी उपयोग किया, जिससे उग्रवादियों की गतिविधियों पर नजदीकी नजररखी जा सके। इस प्रकार के हाईटेक उपकरणों ने ऑपरेशन को और भी प्रभावी बनाया। मुठभेड़ और परिणामसेना और उग्रवादियों के बीच कई घंटे चली मुठभेड़ के बाद सेना ने 10 उग्रवादियों को मार गिराया। ये उग्रवादी विभिन्न नक्सली और उग्रवादी समूहोंसे जुड़े थे, जो क्षेत्र में अशांति फैलाने और सुरक्षा बलों पर हमले करने की योजना बना रहे थे। मुठभेड़ के दौरान सेना को कुछ हथियार और विस्फोटकभी बरामद हुए, जो उग्रवादियों के बड़े साजिश का संकेत देते हैं। सेना ने बताया कि इन उग्रवादियों के मार गिराए जाने से न केवल स्थानीय लोगों को बड़ी राहत मिलेगी, बल्कि क्षेत्र में शांति बहाल करने में भी मददमिलेगी। इसके अलावा, इस कार्रवाई से नक्सली और उग्रवादी समूहों को एक कड़ा संदेश गया है कि वे भारत की सीमा सुरक्षा को चुनौती नहीं देसकते। स्थानीय प्रभाव और प्रतिक्रिया चंदेल जिले के स्थानीय लोग इस ऑपरेशन को लेकर सुरक्षा बलों की सराहना कर रहे हैं। कई लोग मानते हैं कि उग्रवादियों की मौजूदगी ने क्षेत्र केविकास को रोक दिया था और लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर नकारात्मक प्रभाव डाला था। इस बड़ी कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों को उम्मीद हैकि अब वे अपने दैनिक जीवन को अधिक सुरक्षित और शांतिपूर्ण तरीके से जी सकेंगे। सेना की सतर्कता और आगे की कार्रवाईसेना ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह ऑपरेशन न केवल एक बार की कार्रवाई है, बल्कि इलाके में उग्रवाद को पूरी तरह खत्म करने के लिए निरंतरसतर्कता और अभियान जारी रहेंगे। सुरक्षा बल इलाके में लगातार निगरानी रखेंगे और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तत्काल कार्रवाई करेंगे। सेना के प्रवक्ता ने बताया कि म्यांमार के साथ सीमा पर सहयोग बढ़ाया जा रहा है ताकि दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियां मिलकर उग्रवादी गतिविधियोंको रोक सकें। सीमा पार से हथियारों की तस्करी और उग्रवाद को बढ़ावा देने वाले नेटवर्क को भी निशाना बनाया जाएगा। भारत-म्यांमार सीमा पर सुरक्षा का महत्वभारत और म्यांमार की सीमा लगभग 1,643 किलोमीटर लंबी है, जो कई घने जंगलों और दुर्गम इलाकों से होकर गुजरती है। इस सीमा क्षेत्र मेंनक्सली और अन्य उग्रवादी संगठन अपने ठिकाने बनाए रखते हैं, जिनसे सुरक्षा बलों को लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में इस क्षेत्रमें सुरक्षा के कड़े इंतजाम रखना आवश्यक है। दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग के तहत नियमित संवाद और संयुक्त अभियान भी चलाए जाते हैं ताकि सीमा पार से होने वाली किसी भी प्रकार कीआतंकवादी या उग्रवादी गतिविधि को प्रभावी ढंग से रोका जा सके।

राहुल गांधी का बिहार दौरा: दलित छात्रावास में संवाद और ‘फुले’ फिल्म, सियासी बयानबाजी तेज

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को बिहार के दरभंगा में अंबेडकर छात्रावास का दौरा किया। जिला प्रशासन की अनुमति न मिलने केबावजूद राहुल गांधी ने छात्रावास जाकर वहां रह रहे दलित छात्रों से संवाद किया और उनकी समस्याएं जानी। इस पहल को लेकर राजनीतिक हलकोंमें चर्चा तेज हो गई है। ‘राहुल गांधी डरते नहीं’: कन्हैया कुमारकांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने राहुल गांधी को ‘न्याय योद्धा’ बताते हुए कहा कि वह बिना किसी डर के छात्रों से मिलने पहुंचे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्रमें हर किसी को कहीं भी जाने और किसी से भी मिलने का अधिकार है। कन्हैया ने प्रशासन द्वारा अनुमति न देने के फैसले को असंवैधानिक करार दियाऔर कहा कि राहुल गांधी ने लोकतांत्रिक मूल्यों का पालन करते हुए छात्रों से सीधे संवाद किया। पटना में ‘फुले’ फिल्म देखीदरभंगा के बाद राहुल गांधी पटना पहुंचे, जहां उन्होंने सामाजिक न्याय पर आधारित फिल्म ‘फुले’ देखी। इस फिल्म को उन्होंने जातीय समानता औरसामाजिक बदलाव के नजरिए से देखा और इसका समर्थन जताया। राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेजराहुल गांधी के इस दौरे पर विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच बयानबाजी शुरू हो गई है। आरएलएम प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि राहुल गांधी काबिहार आना कोई बड़ी बात नहीं है और इससे चुनावी नतीजों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने दावा किया कि बिहार में 2025 में फिर से एनडीएसरकार बनने जा रही है। ‘राहुल बाबा इन, कांग्रेस आउट’: मांझी का तंजकेंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा, “जहां राहुल गांधी जाते हैं, वहां कांग्रेस का सफाया हो जाता है। उनके बिहारदौरे से यह साफ है कि 2025 में एनडीए की ही सरकार बनेगी।” उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा, “राहुल बाबा इन, कांग्रेस आउट।”

मंत्री विजय शाह की एफआईआर को लेकर हाईकोर्ट सख्त, पुलिस की मंशा पर उठाए सवाल

एफ आई आर में अपराध के विवरण का अभाव, कोर्ट ने जताई नाराजगीमध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह के खिलाफ दर्ज एफआईआर की वैधता को लेकर शुक्रवार को हाईकोर्ट में फिर सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरनऔर न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की युगलपीठ ने पाया कि दर्ज की गई एफआईआर में अपराध से संबंधित तथ्य स्पष्ट नहीं हैं। कोर्ट ने इसे गंभीरता सेलेते हुए कहा कि इस तरह की एफआईआर चुनौती दिए जाने पर रद्द हो सकती है। कोर्ट ने निर्देश दिए कि एफआईआर में अपराध की सामग्री स्पष्टरूप से दर्शाई जाए और पुलिस जांच की निगरानी अब हाईकोर्ट करेगा। कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित बयान, कोर्ट ने लिया संज्ञानमंत्री विजय शाह ने महू के अंबेडकर नगर में आयोजित एक सार्वजनिक सभा में भारतीय सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफआपत्तिजनक बयान दिया था। इस पर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए एफआईआर दर्ज करने का आदेश जारी किया था। कोर्ट ने कहा कि सेना देशकी सबसे विश्वसनीय और सम्मानजनक संस्था है और उसके खिलाफ इस तरह की टिप्पणी अस्वीकार्य है। सेना के प्रति बयान को बताया अपमानजनक और खतरनाककर्नल सोफिया कुरैशी, विंग कमांडर व्योमिका सिंह के साथ मिलकर ऑपरेशन “सिंदूर” के बारे में मीडिया को जानकारी दे रही थीं। इसी दौरान विजयशाह ने उन पर व्यक्तिगत टिप्पणी करते हुए उन्हें आतंकियों से जोड़ा, जो कोर्ट की नजर में न केवल अधिकारी बल्कि पूरे सैन्य बल के लिएअपमानजनक और खतरनाक है। कोर्ट ने किन धाराओं में एफआईआर के दिए निर्देशहाईकोर्ट की युगलपीठ ने बी.एन.एस. की धाराओं 152, 196(1)(बी) और 197(1)(सी) के तहत एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था औरस्पष्ट किया कि यदि इसका पालन नहीं किया गया, तो अवमानना की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा। एफआईआर में स्पष्टता न होने पर हाईकोर्ट का निर्देशगुरुवार की सुनवाई में जब अदालत को बताया गया कि मानपुर थाने में एफआईआर दर्ज हो चुकी है, तो अदालत ने एफआईआर का अवलोकन कियाऔर पाया कि उसमें आवश्यक आपराधिक तथ्यों का उल्लेख नहीं है। महाधिवक्ता ने आश्वासन दिया कि सरकार कोर्ट के निर्देशों का पालन करेगी, लेकिन कोर्ट ने आदेश में स्पष्ट किया कि एफआईआर में अपराध के तथ्य दिखने चाहिए।

राष्ट्रपति मुर्मू ने विधेयकों पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर उठाए सवाल, मांगी संवैधानिक व्याख्या

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्य विधानसभाओं द्वारा पारित विधेयकों पर मंजूरी के लिए समय-सीमा निर्धारित करने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर गंभीरआपत्ति जताई है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 143(1) के तहत सर्वोच्च न्यायालय से 14 अहम संवैधानिक प्रश्नों पर राय मांगी है। अप्रैल का ऐतिहासिक फैसलासुप्रीम कोर्ट ने 8 अप्रैल को तमिलनाडु के राज्यपाल द्वारा विधेयकों को लंबी अवधि तक लंबित रखने पर फैसला सुनाया था। अदालत ने कहा था कियदि कोई विधेयक लंबे समय तक निर्णय के बिना राज्यपाल के पास पड़ा रहता है, तो उसे मंजूरी प्राप्त मान लिया जाएगा। यह आदेश न्यायमूर्ति जेबीपारदीवाला और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने दिया था। राष्ट्रपति ने मांगी संवैधानिक व्याख्याराष्ट्रपति ने सुप्रीम कोर्ट को भेजे गए रेफरेंस में पूछा है कि-क्या संविधान में निर्दिष्ट समय-सीमा के अभाव में न्यायालय विधेयकों पर निर्णय लेने के लिए राष्ट्रपति या राज्यपाल को बाध्य कर सकता है? क्या अनुच्छेद 200 और 201 के तहत राज्यपाल या राष्ट्रपति के विवेकाधिकार पर न्यायिक समीक्षा की जा सकती है? क्या अनुच्छेद 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट को इतनी व्यापक शक्ति प्राप्त है कि वह संवैधानिक प्रावधानों को दरकिनार कर निर्णय दे सकता है? महत्वपूर्ण संवैधानिक सवालों की सूचीराष्ट्रपति द्वारा उठाए गए सवालों में राज्यपालों और राष्ट्रपति की विधायी भूमिका, न्यायिक समीक्षा की सीमाएं, अनुच्छेद 200, 201, 142, 143 और 145 की व्याख्या, तथा विधेयकों के कानून बनने से पूर्व की न्यायिक जांच शामिल हैं। क्या सुप्रीम कोर्ट राष्ट्रपति के विवेक पर सीमा तय कर सकता है?राष्ट्रपति ने यह बुनियादी सवाल उठाया है कि जब संविधान राष्ट्रपति को किसी विधेयक पर निर्णय लेने का विवेकाधिकार देता है, तो क्या सर्वोच्चन्यायालय इस प्रक्रिया में हस्तक्षेप कर सकता है? पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ करेगी सुनवाईसंविधान के अनुच्छेद 143(1) के तहत भेजे गए रेफरेंस पर सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायाधीशों की पीठ सुनवाई करेगी और राष्ट्रपति को सलाह देगी।यह सुनवाई संवैधानिक मूल्यों, शक्तियों के सीमांकन और विधायी प्रक्रिया की प्रकृति को स्पष्ट कर सकती है।

त्राल में एनकाउंटर: जैश-ए-मोहम्मद के तीन आतंकी ढेर, ऑपरेशन अब भी जारी

नादेर गांव बना मुठभेड़ का केंद्रजम्मू-कश्मीर के अवंतीपोरा के त्राल इलाके के नादेर गांव में आज सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच जबरदस्त मुठभेड़ हुई। इस एनकाउंटर में जैश-ए-मोहम्मद संगठन के तीन आतंकियों को मार गिराया गया। फिलहाल इलाके में गोलीबारी जारी है और सुरक्षाबलों द्वारा तलाशी अभियान भी चल रहाहै, क्योंकि आशंका है कि कुछ आतंकी अभी भी छिपे हो सकते हैं। ड्रोन से मिली अहम जानकारीमुठभेड़ स्थल से सामने आए ड्रोन फुटेज में आतंकियों की छिपने की कोशिशें साफ दिखाई दे रही हैं। एक अन्य वीडियो क्लिप में एक आतंकी को ढेरहोते भी देखा जा सकता है। ढेर हुए आतंकियों की पहचानमारे गए आतंकियों की पहचान त्राल के ही रहने वाले आसिफ अहमद शेख, आमिर नजीर वानी और यावर अहमद बट्ट के रूप में हुई है। पिछले 48 घंटे में दूसरा बड़ा ऑपरेशनत्राल एनकाउंटर से पहले, पुलवामा जिले में पिछले 48 घंटों में यह दूसरा बड़ा ऑपरेशन है। इससे पहले मंगलवार को शोपियां जिले के जिनपथेरकेलर इलाके में ‘ऑपरेशन केलर’ के तहत लश्कर-ए-तैयबा के तीन आतंकियों को मार गिराया गया था। शोपियां ऑपरेशन: लश्कर के स्थानीय आतंकी ढेरइस अभियान में मारे गए आतंकियों में एक की पहचान शाहिद कुट्टे के रूप में हुई है, जो 8 मार्च 2023 को लश्कर में शामिल हुआ था और 18 मई2024 को शोपियां में भाजपा सरपंच की हत्या में शामिल था। दूसरे आतंकी अदनान शफी डार की पहचान वंडुना मेलहोरा के निवासी के रूप में हुईहै, जो 18 अक्टूबर 2024 को संगठन में शामिल हुआ था और एक प्रवासी मजदूर की हत्या में शामिल रहा था। पहलगाम हमले के दोषियों की तलाश जारीसुरक्षा एजेंसियों ने हाल ही में पहलगाम आतंकी हमले में शामिल तीन पाकिस्तानी आतंकियों के पोस्टर जारी किए हैं। ये पोस्टर शोपियां के कईइलाकों में लगाए गए हैं। आतंकियों के बारे में सूचना देने पर 20 लाख रुपये का इनाम भी घोषित किया गया है। पहलगाम हमले में मारे गए मासूमपर्यटकों की मौत के लिए जिम्मेदार आतंकियों की तलाश तेज कर दी गई है।

कर्रेगुट्टा जंगलों में 21 दिन तक चला ऑपरेशन, सुरक्षा बलों ने 31 नक्सलियों को किया ढेर

बीजापुर-कर्रेगुट्टा के घने जंगलों में 23 अप्रैल 2025 से शुरू हुआ सुरक्षा बलों और नक्सलियों का 21 दिन तक जारी संघर्ष मंगलवार को शांत होने केबाद सामने आया कि इस ऑपरेशन में कुल 31 नक्सली ढेर हुए। सुरक्षाबलों ने यह कार्वाई छत्तीसगढ़ पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF), केंद्रीयरिज़र्व पुलिस बल (CRPF) की कोबरा बटालियन, जिला रिज़र्व गार्ड (DRG) और अन्य अर्धसैनिक दलों की संयुक्त टुकड़ी के साथ की थी।ऑपरेशन की तैयारी तब तेज हुई जब स्थानीय मुखबिरों और तकनीकी निगरानी से मिली सूचना में बताया गया कि नक्सलियों ने अपने कैंप मजबूत कररखे हैं और टॉप कमांडर हिडमा के नेतृत्व में बड़ी साजिश रची जा रही है। पहले कुछ दिन हल्की-फुल्की झड़पें हुईं, लेकिन जैसे-जैसे सुरक्षाबलों ने कर्रेगुट्टा क्षेत्र में तीन दिशाओं से कड़ी घेराबंदी की, विरोधी समूह की पटरीबिखरनी शुरू हुई। जंगल की दुर्गम पगडंडियों में कभी हमला, कभी घात लगाए जाने से पुलिस और सीआरपीएफ पर स्थितियां मुश्किल हो गईं, लेकिन आधुनिक उपकरणों और संवेदनशील मानवरहित जांबाज यंत्रों (ड्रोन) की मदद से सुरक्षाबलों को कई अहम ठिकानों पर सटीक निशाना लगानेमें सफलता मिली। मुठभेड़ों के बीच दोबाराहिरासत में लिए गए कई नक्सलियों से पूछताछ में खुलासा हुआ कि संगठन ने अपने लॉजिस्टिक हब इलाके में कई तरह केहथियार और गोला-बारूद छुपा रखे थे। इसी आधार पर विशेष टीमों ने सर्च ऑपरेशन तेज किया और इधर-उधर छिपे नक्सलियों को तितर-बितर करदिया। 21 दिनों के इस अभियान के दौरान 31 शव बरामद किए गए, जिनमें कई जनमिलिशिया के ज़ोनल कमांडर, डिवीजनल कमांडर और महिलाविंग की वरिष्ठ नेता भी शामिल हैं। यह संगठन के लिए मर्माघात करने जैसा झटका है, क्योंकि उसकी रीढ़ मानी जाने वाली ये कमानियाँ टूट चुकी हैं। सुरक्षाबलों को भारी मात्रा में असलहा भी मिला। बरामद हथियारों में सात एके-47 राइफलें, पांच इंसास राइफलें, तीन लाइट मशीन गन (एलएमजी), सैकड़ों राउंड कारतूस, आईईडी (इम्प्रूव्ड इन्हैंस्ड डिवाइस) बनाने का कच्चा माल, सैटेलाइट फोन, वायरलेस सेट, भारी राशन और मेडिकल किटशामिल है। साथ ही दस्तावेज और नक्शे भी मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि नक्सलियों ने आसपास के कई ग्रामीण क्षेत्रों में भी गोपनीय नेटवर्कतैयार कर रखा था। इन सूचनाओं का विश्लेषण केंद्रीय खुफिया एजेंसियां कर रही हैं, ताकि इसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सके। बीजापुर रेंज के आईजी समेत वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस सफल ऑपरेशन का विवरण साझा किया। उन्होंने कहा कि यह अभियान नसिर्फ सैनिक दक्षता बल्कि स्थानीय जनता के सहयोग का नतीजा है। ग्रामीणों ने नक्सलियों के खिलाफ फैलाई जा रही गोलबारी और आतंक कीजानकारी पुलिस को समय रहते दी, जिससे दुश्मन को पकड़ने का असली मौका मिला। सुरक्षा बलों का मानना है कि अब इलाके में बनी स्थिरता सेविकास कार्यों को गति मिलेगी और नक्सलियों के कंट्रोल जोन को कमज़ोर करने में मदद मिलेगी। हालांकि इस मुठभेड़ में सुरक्षाबलों को भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। घने जंगलों में जगह-जगह लगी माइन्स और लोहे के तार, साथ हीनक्सलियों द्वारा विरचित झाड़ियों में छिपे आईईडी ने कई बार जगह-जगह दलों को पीछे हटने पर मजबूर किया। लेकिन एटीएस और कोबराबटालियन के विशेष प्रशिक्षण ने टीमों को सुरक्षित रुख अपनाने में मदद की। कई जवान घायल भी हुए, जिन्हें नजदीकी मेडिकल कैंपों में प्राथमिकइलाज के बाद रिकवर कराया गया। इस बड़े ऑपरेशन ने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है कि केंद्र और राज्य मिलकर जब एकठठा हों तो नक्सलवाद जैसीपुरानी चुनौती को भी नियंत्रित किया जा सकता है। गृह मंत्रालय ने इस उपलब्धि पर संतोष जताया है और पूरे देश में नक्सल प्रभावित इलाकों मेंसतर्कता बढ़ाने के निर्देश जारी किए हैं। साथ ही सुरक्षाबलों को आधुनिक हथियार और प्रशिक्षण देने की प्रक्रिया और तेज करने का आश्वासन दियागया है। स्थानीय प्रशासन ने भी दावा किया है कि अब इलाके में विकास गतिविधियों को प्राथमिकता दी जाएगी। सड़कों का विकास, स्वास्थ्य केंद्रों काविस्तार और शिक्षा सुविधाओं का उन्नयन शुरू किया जाएगा, ताकि युवा दोबारा नक्सली गिरोहों की ओर न बढ़ें। ग्रामीणों का भरोसा बढ़ाने के लिएगांवों में साहसिक कार्य और आत्मरक्षा प्रशिक्षण शिविर भी आयोजित किए जाएंगे। कर्रेगुट्टा ऑपरेशन में मिली यह बड़ी कामयाबी छत्तीसगढ़ में नक्सल संघर्ष को नियंत्रित करने की दिशा में एक अहम मोड़ साबित होगी। सुरक्षा बलोंकी सतर्कता, जनता का सहयोग और कड़ी योजना ने मिलकर यह सफलता दिलाई, जिससे आने वाले समय में राज्य के भीतर और आसपास के जिलोंमें शांति और विकास का मार्ग प्रशस्त हो सकेगा।

पानीपत से पाकिस्तानी जासूस गिरफ्तार, सोशल मीडिया के जरिए भेजता था खुफिया जानकारी

हरियाणा पुलिस और खुफिया एजेंसियों को बड़ी सफलता हाथ लगी है। पानीपत जिले से एक संदिग्ध पाकिस्तानी जासूस को गिरफ्तार किया गयाहै, जो भारत की सैन्य और संवेदनशील जानकारियों को सोशल मीडिया और ऐप्स के माध्यम से पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI तक पहुंचा रहाथा। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी ने फर्जी पहचान के सहारे भारतीय रक्षा प्रतिष्ठानों से जुड़ी गोपनीय जानकारी एकत्र की और उसेपाकिस्तान भेजा। गिरफ्तारी का घटनाक्रमगिरफ्तार किए गए आरोपी की पहचान शाहिद अली के रूप में हुई है, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के शामली जिले का रहने वाला है लेकिन पिछलेकुछ वर्षों से पानीपत में किराये पर रह रहा था। वह पेशे से कंप्यूटर तकनीशियन बताया गया है और लोकल साइबर कैफे चलाता था। पुलिस को इसबात की भनक तब लगी जब खुफिया एजेंसियों को सोशल मीडिया पर कुछ संदिग्ध गतिविधियों का इनपुट मिला। एजेंसियों ने आरोपी की निगरानी शुरू की और साइबर ट्रेसिंग के माध्यम से उसके मोबाइल और लैपटॉप को ट्रैक किया गया। आखिरकार एक संयुक्तअभियान के तहत हरियाणा ATS और मिलिट्री इंटेलिजेंस की टीम ने आरोपी को पानीपत से हिरासत में लिया। कैसे करता था जासूसी?जांच में खुलासा हुआ है कि शाहिद अली सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे Facebook, WhatsApp, Telegram और कुछ डार्क वेब प्लेटफॉर्म्स केजरिए पाकिस्तान स्थित एजेंट्स के संपर्क में था। वह भारतीय सैन्य छावनियों, रेलवे मूवमेंट, रडार लोकेशन, सेना की यूनिट तैनाती और उपकरणों की आवाजाही से जुड़ी तस्वीरें और दस्तावेजपाकिस्तानी एजेंट्स को भेजता था। इसके लिए उसे डिजिटल पेमेंट और क्रिप्टो करेंसी के जरिए भुगतान मिलता था। सूत्रों के अनुसार, आरोपी को पाकिस्तानी महिला एजेंट ने ‘हनी ट्रैप’ में फंसाया था। महिला खुद को एक रिसर्च स्कॉलर बताकर आरोपी से संपर्क मेंआई और बाद में उसे राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के लिए उकसाया गया। आरोपी के पास से दो मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, एक हार्ड डिस्क और कईफर्जी पहचान पत्र बरामद किए गए हैं। ISI से जुड़े थे तारपुलिस का कहना है कि शाहिद के पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI से सीधे संपर्क थे। उसे कोड भाषा में निर्देश दिए जाते थे और वह उसी शैली मेंजवाब देता था। मोबाइल फोन से मिली चैट और ईमेल से यह भी स्पष्ट हुआ है कि वह कई बार सीमावर्ती सैन्य ठिकानों की फोटोग्राफी कर चुका था। इसके अलावा वह रेलवे स्टेशन, सैन्य लॉजिस्टिक्स हब, और BSF की गतिविधियों पर भी निगाह रखता था। वह इन सूचनाओं को एक वर्चुअलप्राइवेट नेटवर्क (VPN) के जरिए पाकिस्तान भेजता था, जिससे ट्रैकिंग मुश्किल हो जाती थी। राष्ट्रीय सुरक्षा पर गंभीर खतराखुफिया एजेंसियों का कहना है कि यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला है। आरोपी की गतिविधियों से न केवल भारत की सैन्य तैयारियोंकी जानकारी दुश्मन देश को मिल रही थी, बल्कि इससे भविष्य की सैन्य योजनाओं को भी खतरा हो सकता था। यह आशंका भी जताई जा रही है किआरोपी के नेटवर्क में और लोग भी शामिल हो सकते हैं, जिनकी तलाश की जा रही है। पुलिस और खुफिया एजेंसियों का बयानपानीपत पुलिस अधीक्षक ने बताया कि आरोपी से पूछताछ जारी है और जल्द ही उसे अदालत में पेश कर रिमांड लिया जाएगा। हरियाणा एटीएस, मिलिट्री इंटेलिजेंस, और IB की टीम मिलकर आरोपी से गहन पूछताछ कर रही है ताकि उसके नेटवर्क का पूरा खुलासा हो सके। पड़ोसी से मिली थी सूचनास्थानीय लोगों के मुताबिक शाहिद अली बेहद शांत स्वभाव का व्यक्ति था और किसी को अंदाजा नहीं था कि वह इस तरह की देशविरोधीगतिविधियों में शामिल है। पड़ोस में रहने वाले एक व्यक्ति ने पुलिस को सूचना दी थी कि वह देर रात तक कंप्यूटर और मोबाइल पर कुछ संदिग्धकाम करता है। इसी इनपुट के आधार पर एजेंसियों ने उस पर नजर रखी। अंतरराष्ट्रीय साजिश का हिस्सा?सूत्रों का कहना है कि शाहिद सिर्फ एक मोहरा हो सकता है और इसके पीछे एक बड़ी जासूसी साजिश छुपी हो सकती है। एजेंसियां यह पता लगानेकी कोशिश कर रही हैं कि क्या वह केवल सूचनाएं भेज रहा था या फिर देश के भीतर किसी आतंकी गतिविधि में भी उसकी भूमिका रही है। फिलहाल, इस मामले ने सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया है और देशभर में संवेदनशील प्रतिष्ठानों पर नजर बढ़ा दी गई है।सरकार की प्रतिक्रियागृह मंत्रालय ने इस गिरफ्तारी को गंभीरता से लिया है और हरियाणा सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। साथ ही सभी राज्यों को भी सतर्क किया गया हैकि इस प्रकार के हनी ट्रैप और सोशल मीडिया आधारित जासूसी गतिविधियों पर नजर रखी जाए।

बलिया में बीजेपी नेता का अश्लील वीडियो वायरल, नैतिकता पर बड़ा सवाल

उत्तर प्रदेश के बलिया ज़िले से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता बब्बन सिंह रघुवंशी का एक अश्लील वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी सेवायरल हो रहा है। बब्बन सिंह रसड़ा चीनी मिल के चेयरमैन, भाजपा प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य और बांसडीह से पूर्व विधानसभा प्रत्याशी रह चुकेहैं। वीडियो में क्या है?इस वीडियो में बब्बन सिंह एक कार्यक्रम के दौरान मंच पर बार बाला के साथ आपत्तिजनक हरकतें करते दिखाई दे रहे हैं। वह सार्वजनिक रूप सेनर्तकी के साथ बेहद अशोभनीय और अश्लील व्यवहार करते नजर आ रहे हैं। खास बात यह है कि यह पूरी घटना कई लोगों की मौजूदगी में हुई, लेकिन वहां किसी ने उन्हें रोका तक नहीं। पार्टी से संबंध और सवालबब्बन सिंह को प्रदेश के मंत्री दयाशंकर सिंह का करीबी माना जाता है। ऐसे में यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या भाजपा जैसी बड़ी पार्टी में टिकट वितरणऔर पदों की जिम्मेदारी देने से पहले किसी की पृष्ठभूमि और व्यवहार की जांच नहीं होती? क्या पार्टी की आंतरिक नैतिकता और अनुशासन सिर्फदिखावा बनकर रह गया है? महिला सम्मान और सामाजिक संदेशइस घटना के सामने आने के बाद भाजपा के महिला सम्मान के दावों पर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं। आम जनता, खासकर महिलाएं, पूछ रही हैं किक्या यही है भाजपा का ‘नारी सम्मान’ मॉडल? क्या यही है ‘रामराज्य’ जिसकी बात भाजपा करती है, या फिर यह ‘रावणराज्य’ का उदाहरण है? सामाजिक प्रतिक्रियावीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कई लोगों ने कहा है कि यह घटना समाज के लिए शर्मनाक है औरभाजपा को तत्काल इस पर कार्रवाई करनी चाहिए। राजनीतिक दलों की ज़िम्मेदारी सिर्फ सत्ता में बने रहने की नहीं होती, बल्कि सामाजिक नैतिकता और उदाहरण प्रस्तुत करने की भी होती है। अगर ऐसेलोग पार्टी में ऊंचे पदों पर हैं और उनके खिलाफ कोई सार्वजनिक अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं होती, तो यह लोकतंत्र और समाज दोनों के लिएखतरे की घंटी है। जनता की मांगलोग यह मांग कर रहे हैं कि भाजपा को इस पूरे प्रकरण पर तुरंत संज्ञान लेना चाहिए, संबंधित नेता के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए औरयह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि पार्टी में इस प्रकार के व्यक्तियों के लिए कोई स्थान न हो।

दिल्ली में प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर आम आदमी पार्टी का हमला,सौरभ भारद्वाज का आरोप – भाजपा सरकार में स्कूल बेलगाम, डीपीएसद्वारका ने 34 छात्रों को निकाला

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश संयोजक सौरभ भारद्वाज ने एक प्रेस वार्ता में दिल्ली की भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।उन्होंने कहा कि राजधानी में भाजपा की सरकार बनने के बाद निजी स्कूलों ने बेहिसाब फीस वृद्धि शुरू कर दी है, जिससे अभिभावकों में गहरा आक्रोशहै। डीपीएस द्वारका में फीस न भरने पर 34 बच्चों को निकाला गयासौरभ भारद्वाज ने बताया कि द्वारका स्थित डीपीएस स्कूल ने फीस वृद्धि का विरोध करने वाले 34 छात्रों को स्कूल से निष्कासित कर दिया। उन्होंनेकहा कि जिन बच्चों के माता-पिता ने बढ़ी हुई फीस नहीं दी, उन्हें स्कूल में कक्षा में नहीं बैठने दिया गया और लाइब्रेरी में बैठाकर मानसिक रूप सेप्रताड़ित किया गया। अंततः इन बच्चों को स्कूल बस से लौटा दिया गया और कहा गया कि उनका नाम हटा दिया गया है। भाजपा सरकार की नीयत पर सवालउन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने जनता का गुस्सा शांत करने के लिए फीस ऑडिट का दिखावा किया। शिक्षा विभाग ने एसडीएम के जरिएजांच की घोषणा की थी और कहा था कि 15 दिनों में रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी, लेकिन कई हफ्ते बीत जाने के बाद भी रिपोर्ट सामने नहीं आईहै। जांच रिपोर्ट के बावजूद कोई कार्रवाई नहींसौरभ भारद्वाज ने बताया कि डीएम की अध्यक्षता में गठित समिति ने स्पष्ट रूप से माना कि डीपीएस द्वारका बच्चों के साथ अमानवीय व्यवहार कर रहाहै। बावजूद इसके, दिल्ली सरकार ने कोई सख्त कदम नहीं उठाया। भाजपा और प्राइवेट स्कूलों की ‘सांठगांठ’ का आरोपआप नेता ने यह भी कहा कि भाजपा सरकार जानबूझकर कार्रवाई से बच रही है क्योंकि प्राइवेट स्कूलों के संगठन के अध्यक्ष भरत अरोड़ा भाजपा कीदिल्ली कार्यकारिणी में शामिल हैं। उन्होंने कहा, “जब संगठन का अध्यक्ष ही सरकार के साथ बैठा है तो कार्रवाई कैसे संभव होगी?” अखबारों पर भी सवालप्रेस वार्ता में भारद्वाज ने कुछ बड़े अंग्रेजी अखबारों को भी आड़े हाथों लिया और आरोप लगाया कि इतनी बड़ी घटना के बावजूद उन्होंने खबरप्रकाशित नहीं की। उन्होंने कहा कि ये अखबार उन पाठकों के साथ भी धोखा कर रहे हैं, जिनके बच्चे इन्हीं स्कूलों में पढ़ते हैं। आप सरकार में कभी नहीं हुई थी ऐसी मनमानी पूर्व मंत्री ने कहा कि जब दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार थी, तब निजी स्कूलों की मनमानी पर सख्ती से रोक थी। केजरीवाल सरकार केदौरान किसी स्कूल को मनचाही फीस बढ़ाने या बच्चों को प्रताड़ित करने की इजाजत नहीं थी।