असम गण परिषद के वरिष्ठ नेता जयंत खाउंद कांग्रेस में शामिल, असम चुनाव से पहले पार्टी को मिली बड़ी मजबूती

सरिता साहनीनई दिल्ली, 9 मार्च कई नेताओं के साथ कांग्रेस का दामन थामने से राज्य की राजनीति में बढ़ी हलचल असम की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखने को मिला जब जयंत खाउंद ने अपने कई साथियों के साथ कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली। खाउंद पहले असम गण परिषद में महत्वपूर्ण पद पर रहे हैं और उन्हें पार्टी का एक प्रभावशाली नेता माना जाता है। नई दिल्ली स्थित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्हें औपचारिक रूप से कांग्रेस में शामिल कराया गया। इस अवसर पर कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे और उन्होंने खाउंद तथा उनके साथ आए नेताओं का स्वागत किया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि असम विधानसभा चुनाव से पहले यह कदम राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है और कांग्रेस को संगठनात्मक रूप से मजबूत बना सकता है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में हुआ स्वागतकांग्रेस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कई वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी रही। इस अवसर पर कांग्रेस के असम प्रभारी महासचिव जितेंद्र सिंह अलवर, कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डी. के. शिवकुमार, असम प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई तथा कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव मनोज चौहान प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।इन नेताओं ने जयंत खाउंद और उनके समर्थकों का पार्टी में स्वागत करते हुए कहा कि उनके आने से कांग्रेस को असम में नई ऊर्जा और मजबूती मिलेगी। कांग्रेस ने इसे बताया परिवर्तन की लहर का संकेतकार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए असम प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने कहा कि जयंत खाउंद जैसे जमीन से जुड़े नेता का कांग्रेस में शामिल होना राज्य में बढ़ते बदलाव का संकेत है।उन्होंने कहा कि असम की जनता अब बदलाव चाहती है और मौजूदा सरकार से निराश हो चुकी है। गोगोई के अनुसार लोगों के मन में सरकार के खिलाफ असंतोष बढ़ता जा रहा है और इसका असर आने वाले चुनावों में दिखाई दे सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में कई लोग वर्तमान राजनीतिक स्थिति से संतुष्ट नहीं हैं और उन्हें लगता है कि सरकार में सक्रिय और ईमानदार कार्यकर्ताओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा पर लगाए आरोपप्रेस वार्ता के दौरान गौरव गोगोई ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राज्य में कई कार्यकर्ताओं और नेताओं को वर्तमान नेतृत्व के साथ काम करने में असहजता महसूस हो रही है। गोगोई ने आरोप लगाया कि सरकार में योग्य और समर्पित कार्यकर्ताओं को किनारे कर दिया गया है और उनकी जगह ऐसे लोगों को आगे बढ़ाया जा रहा है जिन पर भ्रष्टाचार और अयोग्यता के आरोप लगते रहे हैं। उनके अनुसार यही कारण है कि कई नेता अब कांग्रेस की ओर रुख कर रहे हैं और राज्य की राजनीति में बदलाव की संभावना बढ़ती जा रही है। भाजपा पर क्षेत्रीय दलों को खत्म करने का आरोपकांग्रेस के असम प्रभारी महासचिव जितेंद्र सिंह अलवर ने भी इस मौके पर भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा की राजनीति का एक बड़ा उद्देश्य क्षेत्रीय दलों को कमजोर करना और धीरे-धीरे उन्हें समाप्त करना है। उन्होंने कहा कि देश के कई राज्यों में भाजपा ने पहले क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन किया और बाद में धीरे-धीरे उनकी राजनीतिक ताकत को खत्म कर दिया। उन्होंने ओडिशा और बिहार का उदाहरण देते हुए कहा कि यह रणनीति कई जगह देखने को मिली है। असम गण परिषद के भविष्य को लेकर जताई चिंताजितेंद्र सिंह अलवर ने कहा कि असम में भी यही स्थिति देखने को मिल रही है। उनके अनुसार जब से हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में सरकार बनी है, तब से असम गण परिषद के अस्तित्व को धीरे-धीरे कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि असम की क्षेत्रीय पहचान और संस्कृति को बनाए रखने के लिए मजबूत राजनीतिक नेतृत्व की जरूरत है। ऐसे में जयंत खाउंद जैसे नेताओं का कांग्रेस में शामिल होना राज्य की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण कदम है। कांग्रेस ने बताया मूल्यों की राजनीति का विस्तारकार्यक्रम के दौरान कांग्रेस नेताओं ने कहा कि जयंत खाउंद हमेशा अपने मूल्यों और सिद्धांतों के लिए जाने जाते रहे हैं। उनके अनुसार खाउंद का कांग्रेस में शामिल होना केवल एक राजनीतिक घटना नहीं है, बल्कि यह उन विचारों का समर्थन भी है जो लोकतंत्र, संस्कृति और क्षेत्रीय पहचान को मजबूत बनाने की बात करते हैं। नेताओं ने कहा कि उनके आने से असम में कांग्रेस संगठन को नई ताकत मिलेगी और पार्टी राज्य के लोगों की समस्याओं को और मजबूती से उठाने में सक्षम होगी। असम की राजनीति में बढ़ सकता है नया समीकरणराजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि जयंत खाउंद का कांग्रेस में शामिल होना आने वाले समय में असम की राजनीति पर असर डाल सकता है। राज्य में पहले से ही विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच प्रतिस्पर्धा तेज है और ऐसे में बड़े नेताओं का दल बदलना चुनावी समीकरण को बदल सकता है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि आने वाले समय में और भी नेता पार्टी में शामिल हो सकते हैं, जिससे असम में कांग्रेस का संगठन और मजबूत होगा। चुनाव से पहले कांग्रेस को मिली नई ऊर्जाकांग्रेस के नेताओं के अनुसार असम विधानसभा चुनाव से पहले यह घटनाक्रम पार्टी के लिए उत्साहजनक है। गौरव गोगोई और अन्य नेताओं ने कहा कि राज्य में परिवर्तन की लहर दिखाई दे रही है और जनता अब नई राजनीतिक दिशा चाहती है। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि इसी तरह पार्टी का संगठन मजबूत होता रहा और नए नेता जुड़ते रहे तो आने वाले समय में असम की राजनीति में कांग्रेस एक मजबूत विकल्प के रूप में उभर सकती है।
ट्रंप को चुकानी होगी खून की कीमत, ईरान के शीर्ष अधिकारी की खुली चेतावनी

ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी अली लारीजानी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा है कि ईरान अपने नेता और अपने लोगों के मारे जाने का बदला लेगा। ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के बहुत करीबी रहे लारीजानी ने साफ कहा, “हम अपने नेता और अपने लोगों के खून का बदला जरूर लेंगे। ट्रंप को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।” यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब ईरान के साथ अमेरिका और इस्राइल एक बड़े सैन्य टकराव में उलझे हुए हैं। लारीजानी ने यह भी कहा कि ईरान अमेरिका और इस्राइल के ठिकानों पर हमले कर रहा है और उन्हें भारी नुकसान पहुंचा रहा है। उन्होंने वेनेजुएला का उदाहरण देते हुए कहा कि अमेरिका को लगा था कि वह युद्ध जल्दी जीत लेगा, जैसा उसने वेनेजुएला में किया था, लेकिन इस बार वह नाकाम रहा। अमेरिकी सैनिकों की संख्या 500 से ज्यादाइससे पहले अली लारीजानी ने शनिवार को कुछ ऐसे दावे किए जिनसे सनसनी फैल गई। उन्होंने कहा कि ईरान ने कई अमेरिकी सैनिकों को पकड़ लिया है, जो जेलों में बंद हैं। हालांकि, अमेरिका ने इन दावों को तुरंत खारिज कर दिया। अमेरिका के एक सैन्य प्रवक्ता ने कहा कि ईरान के ये दावे उसके झूठ का एक और उदाहरण हैं। लारीजानी ने ट्रंप पर यह भी आरोप लगाया कि वह ईरान के हमलों में मारे गए छह अमेरिकी सैनिकों की मौत के बारे में झूठी खबरें फैला रहे हैं। उनका कहना है कि असल में मरने वाले अमेरिकी सैनिकों की संख्या 500 से ज्यादा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि अमेरिका धीरे-धीरे मरने वालों की संख्या बढ़ाता है और कभी दुर्घटनाएं तो कभी और बहाने बताता है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ अमेरिकी सैनिक बंदी बनाए गए हैं, लेकिन अमेरिका कह रहा है कि वे युद्ध में मारे गए।
निदर्शना गोवानी की पहल लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर महिला सम्मान 2026’ में देश-दुनिया की महिलाओं को मिलेगा सम्मान

महिलाओं की मेहनत, संघर्ष और उपलब्धियों को सम्मान देने के लिए समाज में कई तरह की पहलें की जाती हैं। ऐसी ही एक महत्वपूर्ण पहल समाजसेवी निदर्शना गोवानी द्वारा शुरू किया गया लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर महिला सम्मान है। यह कार्यक्रम उन महिलाओं को पहचान दिलाने के उद्देश्य से शुरू किया गया था जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी और अपने काम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास किया। साल 2026 में इस सम्मान का आयोजन 10 मार्च को नई दिल्ली में किया जाएगा। इस समारोह में देश और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से आई उन महिलाओं को सम्मानित किया जाएगा जिन्होंने अपने साहस, मेहनत और प्रतिभा के दम पर अपनी अलग पहचान बनाई है। यह कार्यक्रम कमला पावर वीमेन के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है और पिछले पांच वर्षों में यह सम्मान महिलाओं को प्रेरित करने वाला एक प्रतिष्ठित मंच बन चुका है। अहिल्याबाई होल्कर के आदर्शों से प्रेरित है यह सम्मानयह सम्मान महान शासक और समाजसेवी अहिल्याबाई होल्कर के जीवन और उनके आदर्शों से प्रेरित है। भारतीय इतिहास में अहिल्याबाई होल्कर को एक न्यायप्रिय और दूरदर्शी शासक के रूप में जाना जाता है। उन्होंने अपने शासनकाल में समाज के हर वर्ग के लिए काम किया और लोगों की भलाई को हमेशा प्राथमिकता दी। उनका जीवन सादगी, सेवा और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। इसी कारण उनके नाम पर शुरू किया गया यह सम्मान उन महिलाओं को समर्पित है जो अपने काम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश कर रही हैं। इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल सम्मान देना ही नहीं बल्कि महिलाओं के योगदान को समाज के सामने लाना भी है। पांच साल पहले शुरू हुई थी यह पहललगभग पांच वर्ष पहले निदर्शना गोवानी ने इस पहल की शुरुआत की थी। उस समय उनका उद्देश्य था कि समाज में चुपचाप काम करने वाली महिलाओं को एक ऐसा मंच दिया जाए जहां उनकी मेहनत और संघर्ष की कहानी लोगों तक पहुंच सके। इन पुरस्कारों के माध्यम से अलग-अलग क्षेत्रों की महिलाओं को सम्मानित किया जाता है। इसमें ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं, छोटे शहरों की महिलाएं, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाएं और दिव्यांग महिलाएं भी शामिल होती हैं। कई बार ऐसी महिलाएं अपने परिवार और समाज की जिम्मेदारियों के बीच भी बड़ा काम कर जाती हैं, लेकिन उन्हें पहचान नहीं मिल पाती। यह सम्मान उन महिलाओं के लिए एक नई उम्मीद और प्रेरणा का माध्यम बनता है। दिल्ली में होगा भव्य समारोहइस वर्ष लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर महिला सम्मान 2026 का आयोजन राजधानी नई दिल्ली में किया जाएगा। यह कार्यक्रम एक भव्य समारोह के रूप में आयोजित होगा जिसमें देश के कई प्रमुख नेता और समाज के प्रतिष्ठित लोग शामिल होंगे। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में कई बड़े नेता मौजूद रहेंगे। इनमें गजेन्द्र सिंह शेखावत, अन्नपूर्णा देवी, अर्जुन राम मेघवाल, रेखा गुप्ता और मनोज तिवारी जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। इन सभी की मौजूदगी इस कार्यक्रम को और भी महत्वपूर्ण बनाएगी। साधारण पृष्ठभूमि से आने वाली महिलाओं को मिलेगा मंचइस सम्मान की सबसे खास बात यह है कि इसमें उन महिलाओं को मंच दिया जाता है जो अक्सर सुर्खियों से दूर रहती हैं। कई महिलाएं बहुत साधारण परिवारों से आती हैं और जीवन में कई मुश्किलों का सामना करती हैं, लेकिन फिर भी वे अपने हुनर और मेहनत के दम पर समाज में बदलाव लाने का काम करती हैं। कुछ महिलाएं छोटे-छोटे व्यवसाय शुरू करके खुद भी आगे बढ़ती हैं और दूसरों को भी रोजगार देती हैं। कई महिलाएं समाज सेवा के क्षेत्र में काम करती हैं और जरूरतमंद लोगों की मदद करती हैं। इस तरह ये महिलाएं समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। निदर्शना गोवानी ने बताया कार्यक्रम का उद्देश्यइस पहल के बारे में बात करते हुए निदर्शना गोवानी ने कहा कि यह मंच पूरी तरह से अहिल्याबाई होल्कर के आदर्शों और उनके मूल्यों से प्रेरित है। उन्होंने बताया कि इस मंच पर सम्मानित होने वाली महिलाएं भारत के अलग-अलग राज्यों और समुदायों से आती हैं और उन्होंने अपनी मेहनत से समाज में एक नई पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि कई महिलाएं बहुत ही साधारण परिस्थितियों से निकलकर आगे बढ़ती हैं और अपने काम से कई परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधारने में भी मदद करती हैं। ऐसी महिलाओं को सम्मानित करना वास्तव में पूरे समाज के लिए प्रेरणा का काम करता है। महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदमआज के समय में महिलाओं को आगे बढ़ाने और उन्हें बराबरी के अवसर देने की आवश्यकता पहले से ज्यादा महसूस की जा रही है। ऐसे में इस तरह के कार्यक्रम महिलाओं को प्रोत्साहित करने और उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने का काम करते हैं। जब किसी महिला को उसके काम के लिए सम्मान मिलता है तो वह न केवल खुद प्रेरित होती है बल्कि अन्य महिलाओं को भी आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। यही कारण है कि इस कार्यक्रम को महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। महिला दिवस के अवसर पर खास आयोजनमार्च का महीना दुनिया भर में महिलाओं के सम्मान के लिए जाना जाता है। इसी दौरान अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस भी मनाया जाता है। इस अवसर पर महिलाओं की उपलब्धियों को याद किया जाता है और उन्हें समाज में बराबरी का स्थान दिलाने की बात की जाती है। इसी भावना के साथ यह सम्मान समारोह आयोजित किया जा रहा है, ताकि समाज में उन महिलाओं की कहानियां सामने आ सकें जिन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को पूरा किया। प्रेरणादायक कहानियों से भरा होगा यह कार्यक्रमइस साल भी इस कार्यक्रम में कई प्रेरणादायक कहानियां सामने आएंगी। अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाली महिलाएं अपनी मेहनत और संघर्ष की कहानी के साथ इस मंच पर सम्मानित होंगी। इन कहानियों से यह संदेश मिलेगा कि अगर किसी के अंदर दृढ़ निश्चय और मेहनत करने की इच्छा हो तो वह किसी भी मुश्किल को पार कर सकता है। यही कारण है कि यह कार्यक्रम केवल एक सम्मान समारोह नहीं बल्कि प्रेरणा और बदलाव का एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है।
‘मोदी की गारंटी’ याद दिलाने के लिए चंदा इकट्ठा कर रहे छात्रों को पुलिस ने हिरासत में लिया — सौरभ भारद्वाज

नई दिल्ली, 7 फरवरी 2026। दिल्ली की राजनीति में एक नया विवाद सामने आया है। आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया है कि आम आदमी पार्टी के छात्र संगठन के कुछ छात्रों को पुलिस ने उस समय हिरासत में ले लिया जब वे कनॉट प्लेस में लोगों से चंदा इकट्ठा कर रहे थे। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि ये छात्र मुख्यमंत्री को महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये देने की ‘मोदी की गारंटी’ याद दिलाने के लिए प्रतीकात्मक रूप से चंदा इकट्ठा कर रहे थे। उनका कहना है कि पुलिस ने बिना किसी बड़े कारण के इन छात्रों को पकड़कर थाने ले जाया गया, जिससे यह साफ होता है कि सरकार छोटी-छोटी राजनीतिक गतिविधियों से भी घबरा रही है। महिला दिवस पर मुख्यमंत्री को 2500 रुपये भेंट करने की थी योजनासौरभ भारद्वाज ने बताया कि आम आदमी पार्टी के छात्र संगठन के कुछ छात्र कनॉट प्लेस इलाके में लोगों से थोड़ी-थोड़ी राशि इकट्ठा कर रहे थे। उनका उद्देश्य था कि वे कुल 2500 रुपये जमा करें और अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को यह राशि भेंट करें। उन्होंने कहा कि यह एक प्रतीकात्मक तरीका था जिससे सरकार को उसके पुराने वादे की याद दिलाई जा सके। छात्रों का कहना था कि अगर सरकार ने महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये देने का वादा किया था, तो उसे पूरा भी करना चाहिए। ‘मोदी की गारंटी’ को याद दिलाने की कोशिशसौरभ भारद्वाज ने कहा कि दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि 8 मार्च 2025 से दिल्ली की महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि अब उस तारीख को गुजरे लगभग एक वर्ष हो गया है, लेकिन महिलाओं को अब तक वह राशि नहीं मिली है। इसी कारण आम आदमी पार्टी के छात्र संगठन के बच्चों ने यह अनोखा तरीका अपनाया था ताकि सरकार को उसका वादा याद दिलाया जा सके। कनॉट प्लेस में चंदा इकट्ठा करते देख पुलिस ने की कार्रवाईसौरभ भारद्वाज के अनुसार जब कुछ छात्र कनॉट प्लेस में लोगों से थोड़ी-थोड़ी राशि इकट्ठा कर रहे थे, तभी पुलिस वहां पहुंच गई। उन्होंने कहा कि पुलिस ने छात्रों से पूछताछ की और कुछ ही समय में उन्हें हिरासत में लेकर कनॉट प्लेस थाने ले जाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई पूरी तरह से अनावश्यक थी। छात्रों का उद्देश्य केवल एक प्रतीकात्मक कार्यक्रम करना था, जिससे किसी को कोई नुकसान नहीं होने वाला था। छात्रों की छोटी पहल से सरकार घबरा गईसौरभ भारद्वाज ने इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह आश्चर्य की बात है कि कुछ छात्रों द्वारा की जा रही छोटी सी गतिविधि से सरकार और प्रशासन इतना घबरा गया। उन्होंने कहा कि अगर कुछ छात्र शांतिपूर्ण तरीके से लोगों से चंदा इकट्ठा कर रहे थे और किसी को कोई परेशानी नहीं थी, तो उन्हें हिरासत में लेने की जरूरत नहीं थी। उनके अनुसार इस घटना से यह संदेश जाता है कि सरकार आलोचना या सवालों से डर रही है। महिला दिवस के अवसर पर सरकार को वादा याद दिलाने की कोशिशसौरभ भारद्वाज ने कहा कि छात्र संगठन की यह योजना थी कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री को 2500 रुपये भेंट किए जाएं। उन्होंने कहा कि इस प्रतीकात्मक भेंट के जरिए यह संदेश दिया जाना था कि सरकार को अपने वादों को याद रखना चाहिए और उन्हें पूरा भी करना चाहिए। उनके अनुसार महिलाओं से जुड़े वादों को गंभीरता से लेना चाहिए क्योंकि इससे लाखों परिवारों की उम्मीदें जुड़ी होती हैं। सरकार को आलोचना से डरना नहीं चाहिएसौरभ भारद्वाज ने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी सरकार को सवालों और आलोचना से डरना नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर लोग या छात्र किसी मुद्दे को लेकर अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रखते हैं तो उसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा माना जाना चाहिए। राजनीतिक टिप्पणी में अंतरराष्ट्रीय मुद्दे का भी जिक्रअपने बयान में सौरभ भारद्वाज ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति का जिक्र करते हुए कहा कि अगर सरकार छोटी-छोटी राजनीतिक गतिविधियों से ही घबरा जाएगी तो बड़े अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर वह कैसे मजबूत रुख दिखा पाएगी। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि दुनिया के बड़े नेताओं के सामने भी देश को मजबूती से खड़ा होना चाहिए। राजनीति में वादों को निभाना जरूरीअपने बयान के अंत में सौरभ भारद्वाज ने कहा कि चुनाव के समय किए गए वादों को निभाना किसी भी सरकार की जिम्मेदारी होती है। उन्होंने कहा कि जनता को उम्मीद होती है कि सरकार उनके लिए किए गए वादों को पूरा करेगी। अगर ऐसा नहीं होता तो जनता को सवाल पूछने का अधिकार है। उनके अनुसार आम आदमी पार्टी का छात्र संगठन केवल इसी अधिकार का इस्तेमाल कर रहा था और सरकार को इससे डरने की जरूरत नहीं है।
दिल्ली के कर्ज को लेकर आम आदमी पार्टी पर वीरेन्द्र सचदेवा का तीखा हमला

नई दिल्ली, 7 मार्च 2026 दिल्ली की राजनीति में एक बार फिर कर्ज और आर्थिक स्थिति को लेकर चर्चा तेज हो गई है। दिल्ली भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने आम आदमी पार्टी के नेताओं द्वारा दिए गए बयानों की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि दिल्ली की पिछली सरकार राजधानी पर भारी कर्ज छोड़कर गई है, जबकि वर्तमान सरकार सीमित कर्ज लेकर विकास कार्यों को आगे बढ़ाने की योजना बना रही है।वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा कि आम आदमी पार्टी के नेता बिना पूरी जानकारी के बयान दे रहे हैं। उनके अनुसार सच्चाई यह है कि ग्यारह वर्षों तक सत्ता में रहने के बाद पिछली सरकार दिल्ली पर बड़ा आर्थिक बोझ छोड़कर गई है। ग्यारह वर्ष के शासन के बाद दिल्ली पर एक लाख बीस हजार करोड़ रुपये का कर्जदिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा कि वर्ष 2024–25 के दिल्ली सरकार के अपने ही आंकड़ों के अनुसार राजधानी पर लगभग एक लाख बीस हजार करोड़ रुपये का कर्ज है। उन्होंने कहा कि यह कर्ज उसी सरकार के समय में बढ़ा जिसने खुद को आर्थिक रूप से मजबूत बताने की कोशिश की थी। लेकिन वास्तविक स्थिति यह है कि उस सरकार के कार्यकाल के बाद दिल्ली पर भारी आर्थिक बोझ रह गया।वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा कि इतने बड़े कर्ज के बावजूद आज आम आदमी पार्टी के नेता नई सरकार पर सवाल उठा रहे हैं, जो पूरी तरह से राजनीतिक बयानबाजी है। राज्य सरकारों के लिए कर्ज लेना सामान्य प्रशासनिक व्यवस्थाअपने बयान में वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा कि किसी भी राज्य सरकार द्वारा कर्ज लेना कोई असामान्य बात नहीं होती। उन्होंने बताया कि राज्य सरकारें विकास कार्यों और योजनाओं को पूरा करने के लिए समय-समय पर कर्ज लेती हैं। यह कर्ज भारत सरकार से, भारतीय रिजर्व बैंक की अनुमति से या अन्य वित्तीय संस्थाओं और खुले बाजार से लिया जाता है। उन्होंने कहा कि यह एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है और इसे लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा करना उचित नहीं है। रेखा गुप्ता सरकार ने विकास कार्यों के लिए सीमित कर्ज का प्रस्ताव रखादिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा कि वर्तमान सरकार, जिसका नेतृत्व रेखा गुप्ता कर रही हैं, ने अपने पहले वर्ष में केवल एक हजार करोड़ रुपये का कर्ज लेने का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने कहा कि यह कर्ज दिल्ली में विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए लिया जा रहा है। इसका उद्देश्य सड़कों, सार्वजनिक सुविधाओं और अन्य आवश्यक परियोजनाओं को मजबूत बनाना है। वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा कि यह एक जिम्मेदार और संतुलित आर्थिक कदम है। चुनाव से पहले दस हजार करोड़ रुपये का कर्ज लेने का आरोपवीरेन्द्र सचदेवा ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने चुनाव से ठीक पहले बड़ी राशि का कर्ज लेने की योजना बनाई थी। उन्होंने कहा कि नवंबर 2024 में चुनाव से पहले उस समय की सरकार ने राष्ट्रीय लघु बचत कोष से दस हजार करोड़ रुपये का कर्ज लेने का प्रस्ताव रखा था। उनके अनुसार यह कर्ज विकास कार्यों के लिए नहीं बल्कि चुनाव से पहले विभिन्न योजनाओं और घोषणाओं पर खर्च करने के लिए लिया जा रहा था। अरविंद केजरीवाल सरकार के समय भी लिया गया था कर्जदिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा कि आज आम आदमी पार्टी के नेता कर्ज को लेकर सवाल उठा रहे हैं, लेकिन उनकी अपनी सरकार ने भी कई बार कर्ज लिया था। उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली सरकार ने वर्ष 2020 और 2022 में भी भारत सरकार से कर्ज मांगा था। इसके अलावा उस समय की सरकार में मंत्री रहीं आतिशी मार्लेना के कार्यकाल में भी चुनाव से पहले कर्ज लेने का प्रस्ताव रखा गया था। सौरभ भारद्वाज की टिप्पणी पर जताई कड़ी आपत्तिदिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज द्वारा दिए गए बयान की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि किसी भी विषय पर टिप्पणी करने से पहले तथ्यों को देखना बहुत जरूरी होता है। अगर सौरभ भारद्वाज पूरी जानकारी लेते तो शायद इस तरह के बयान नहीं देते। पंजाब की आर्थिक स्थिति का भी किया उल्लेखअपने बयान में वीरेन्द्र सचदेवा ने पंजाब का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार ने पंजाब में अपने पहले ही वर्ष में लगभग पचास हजार करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। उन्होंने कहा कि आज पंजाब राज्य पर कुल कर्ज चार लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है, जो राज्य की आर्थिक स्थिति के लिए गंभीर चिंता का विषय है। दिल्ली के विकास के लिए प्रतिबद्ध है सरकारअपने बयान के अंत में वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा कि वर्तमान सरकार दिल्ली के विकास के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य राजधानी में बेहतर सड़कें, बेहतर सुविधाएं और मजबूत आर्थिक व्यवस्था तैयार करना है। इसके लिए यदि योजनाबद्ध तरीके से सीमित कर्ज लिया जाता है तो यह पूरी तरह से उचित है। उन्होंने कहा कि दिल्ली की जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए ही सभी आर्थिक निर्णय लिए जा रहे हैं और सरकार विकास के रास्ते पर लगातार आगे बढ़ रही है।
देवेन्द्र यादव ने दिल्ली के अस्पतालों में एंटी रेबीज वैक्सीन की कमी पर सरकार को घेरा

अस्पतालों में एंटी रेबीज वैक्सीन और जरूरी दवाइयों की कमी का आरोपदिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने दिल्ली सरकार के अस्पतालों की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि राजधानी के कई सरकारी अस्पतालों में जीवन रक्षक दवाइयों की भारी कमी हो गई है। खास तौर पर कुत्तों और अन्य जानवरों के काटने पर लगाए जाने वाले एंटी रेबीज वैक्सीन और रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन की उपलब्धता नहीं होने से मरीजों को बहुत परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। देवेन्द्र यादव ने कहा कि यह स्थिति बेहद चिंताजनक है, क्योंकि रेबीज एक खतरनाक और जानलेवा बीमारी मानी जाती है। यदि समय पर इसका टीका न लगाया जाए तो मरीज की जान को गंभीर खतरा हो सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में अस्पतालों में इन दवाइयों का उपलब्ध न होना सरकार की लापरवाही को दर्शाता है। अम्बेडकर अस्पताल में सबसे खराब हालातदेवेन्द्र यादव ने विशेष रूप से अम्बेडकर अस्पताल का जिक्र करते हुए कहा कि वहां की स्थिति बेहद खराब हो गई है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ दिनों में बड़ी संख्या में ऐसे लोग अस्पताल पहुंचे हैं जिन्हें कुत्तों ने काट लिया था। लेकिन अस्पताल में एंटी रेबीज वैक्सीन उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों को इलाज नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल में सुरक्षा गार्ड और बाउंसर कई मरीजों को अंदर आने से रोक रहे हैं और उन्हें वापस भेज दिया जा रहा है। इससे मरीजों और उनके परिजनों में भारी नाराजगी और चिंता का माहौल है। देवेन्द्र यादव के अनुसार, यह स्थिति स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर विफलता को दर्शाती है। रेबीज को नोटिफिएबल बीमारी घोषित करने के बावजूद दवा नहींदेवेन्द्र यादव ने कहा कि दिल्ली सरकार ने जनवरी 2026 में रेबीज को नोटिफिएबल बीमारी घोषित किया था। इसका मतलब है कि इस बीमारी के मामलों पर विशेष निगरानी और तुरंत इलाज की व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब सरकार खुद इस बीमारी को गंभीर मानकर इसे नोटिफिएबल घोषित कर चुकी है, तब अस्पतालों में एंटी रेबीज वैक्सीन का उपलब्ध न होना सरकार की चिंता और जिम्मेदारी पर सवाल खड़ा करता है। देवेन्द्र यादव ने कहा कि यह स्थिति दिखाती है कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की सरकार दिल्ली की जनता के स्वास्थ्य के प्रति कितनी गंभीर है। सुप्रीम कोर्ट और स्वास्थ्य मंत्रालय के आदेश का भी नहीं हो रहा पालनदेवेन्द्र यादव ने बताया कि नेशनल मेडिकल कमीशन और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद आदेश जारी किया था। इस आदेश के अनुसार सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में हर समय एंटी रेबीज वैक्सीन और रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन का पर्याप्त स्टॉक होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि हर अस्पताल में डॉग बाइट के मामलों के प्रबंधन के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाए। इस अधिकारी की जिम्मेदारी होगी कि अस्पताल में इन दवाइयों का पर्याप्त स्टॉक बना रहे और मरीजों को समय पर इलाज मिले। देवेन्द्र यादव के अनुसार, इन आदेशों के बावजूद दिल्ली के अस्पतालों में दवाइयों की कमी होना बहुत गंभीर मामला है और यह सीधे तौर पर सरकारी लापरवाही को दर्शाता है। सरकार पर गैर जिम्मेदारी और असंवेदनशीलता का आरोपदेवेन्द्र यादव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद अस्पतालों में जरूरी दवाइयों का उपलब्ध न होना सरकार की गैर जिम्मेदारी और असंवेदनशीलता को दिखाता है। उन्होंने कहा कि यदि किसी मरीज को कुत्ता काट ले और उसे समय पर एंटी रेबीज टीका न मिले, तो उसकी जान को खतरा हो सकता है। ऐसे में सरकार का यह दायित्व है कि अस्पतालों में जरूरी दवाइयों का पर्याप्त इंतजाम हो। देवेन्द्र यादव ने इस मामले में स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य सचिव को जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना है कि यह आपराधिक लापरवाही का मामला है और इसके लिए संबंधित अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। दिल्ली में कुत्ता काटने के मामलों में तेजी से बढ़ोतरीदेवेन्द्र यादव ने बताया कि दिल्ली में कुत्ता काटने के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में प्रतिदिन लगभग 2000 कुत्ता काटने के मामले सामने आए। उन्होंने बताया कि यह संख्या वर्ष 2024 की तुलना में लगभग 59 प्रतिशत अधिक है। अगस्त 2025 तक दिल्ली में करीब 35 हजार कुत्ता काटने की घटनाएं दर्ज की जा चुकी थीं। अनुमान है कि दिसंबर 2025 तक यह संख्या 45 हजार से भी अधिक हो गई होगी। देवेन्द्र यादव ने कहा कि वास्तविक आंकड़े इससे भी अधिक हो सकते हैं, क्योंकि कई मामले सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं हो पाते। रेबीज संक्रमण से मौतों के आंकड़े भी चिंताजनकदेवेन्द्र यादव ने कहा कि रेबीज संक्रमण के कारण होने वाली मौतों के आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 में रेबीज संक्रमण के कारण 50 लोगों की मौत हुई थी। वर्ष 2024 में यह संख्या बढ़कर 54 हो गई, जबकि वर्ष 2025 में अगस्त तक ही 49 लोगों की मौत हो चुकी थी। उन्होंने कहा कि इन आंकड़ों से साफ है कि दिल्ली में रेबीज एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है। इसके बावजूद अस्पतालों में जरूरी दवाइयों की कमी होना बेहद चिंताजनक है। अन्य अस्पतालों में भी दवाइयों की भारी कमीदेवेन्द्र यादव ने कहा कि केवल अम्बेडकर अस्पताल ही नहीं, बल्कि दिल्ली के कई अन्य बड़े सरकारी अस्पतालों में भी जरूरी दवाइयों की कमी है। उन्होंने बताया कि लोकनायक अस्पताल, जीटीबी अस्पताल, बुराड़ी अस्पताल, अम्बेडकर अस्पताल, राजन बाबू टीबी अस्पताल और जीबी पंत अस्पताल सहित कई अस्पतालों में जीवन रक्षक दवाइयों का अभाव है। इनमें एंटीबायोटिक्स, मधुमेह की दवाइयां, हृदय रोग से जुड़ी दवाइयां और रेबीज से बचाव के टीके शामिल हैं। देवेन्द्र यादव ने कहा कि इन दवाइयों की कमी के कारण मरीजों को बाहर से महंगी दवाइयां खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। बजट बढ़ने के बावजूद अस्पतालों में दवाइयों की कमीदेवेन्द्र यादव ने कहा कि वर्ष 2025-26 के बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए 66 प्रतिशत की वृद्धि की गई थी। इसके तहत लगभग 12,893 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया था। उन्होंने सवाल उठाया कि इतना बड़ा बजट होने के बावजूद अस्पतालों में जरूरी दवाइयों की कमी क्यों है। उनके अनुसार,
अरविंद केजरीवाल ने भाजपा पर लगाया शहीदों के अपमान और दिल्ली की समस्याओं से ध्यान भटकाने का आरोप

फांसी घर के मुद्दे पर अरविंद केजरीवाल का भाजपा पर हमलाआम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली विधानसभा में मौजूद कथित फांसी घर के मुद्दे को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। विधानसभा की विशेषाधिकार समिति के सामने पेश होने के बाद उन्होंने कहा कि भाजपा को दिल्ली की जनता की समस्याओं की कोई चिंता नहीं है। उनका आरोप है कि भाजपा दिल्ली की असली समस्याओं से ध्यान भटकाने के लिए फांसी घर को टिफिन रूम साबित करने की कोशिश कर रही है। अरविंद केजरीवाल ने कहा कि ऐसा करके भाजपा न केवल राजनीतिक विवाद पैदा कर रही है, बल्कि स्वतंत्रता सेनानियों और शहीदों का अपमान भी कर रही है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी शहीदों के सम्मान से जुड़े इस मुद्दे को लेकर हमेशा गंभीर रही है और आगे भी रहेगी। दिल्ली विधानसभा की ऐतिहासिक इमारत और फांसी घर का इतिहासअरविंद केजरीवाल ने बताया कि दिल्ली विधानसभा का परिसर एक ऐतिहासिक इमारत है। यह इमारत अंग्रेजों के समय बनाई गई थी। जब ब्रिटिश शासन के दौरान भारत की राजधानी को कोलकाता से दिल्ली स्थानांतरित किया गया, तब 1912 में इस भवन का निर्माण हुआ था। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 में उस समय के विधानसभा स्पीकर रामनिवास गोयल के प्रयासों से यह जानकारी सामने आई थी कि इस इमारत के एक हिस्से में एक फांसी घर मौजूद था। कहा जाता है कि अंग्रेजों के शासनकाल में यहां स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी दी जाती थी। अरविंद केजरीवाल के अनुसार, जब यह तथ्य सामने आया तो तत्कालीन स्पीकर ने उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में बुलाया और सुझाव दिया कि इस स्थान को लोगों के लिए खोला जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां देश के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को समझ सकें और उनसे प्रेरणा ले सकें। इसके बाद उस फांसी घर को सार्वजनिक रूप से खोला गया और उसका उद्घाटन भी किया गया। भाजपा पर फांसी घर को टिफिन रूम साबित करने का आरोपअरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया कि जब से दिल्ली में भाजपा की सरकार आई है, तब से वह इस स्थान को फांसी घर मानने से इनकार कर रही है। भाजपा इसे टिफिन रूम साबित करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि इससे स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान होता है। केजरीवाल के अनुसार, उन्हें विधानसभा की विशेषाधिकार समिति के सामने बुलाकर यह साबित करने के लिए कहा गया कि वह स्थान वास्तव में फांसी घर था। उन्होंने समिति के सामने स्पष्ट कहा कि उस समय के स्पीकर ने पूरी जांच और दस्तावेजों की पड़ताल के बाद ही इसे फांसी घर घोषित किया था। इसके बाद केजरीवाल ने समिति से सवाल किया कि अगर भाजपा यह कह रही है कि वह स्थान टिफिन रूम था, तो उसके पास इसके क्या सबूत हैं। केजरीवाल का कहना है कि समिति के पास इस दावे को साबित करने के लिए कोई ठोस प्रमाण नहीं था। उनके अनुसार, इसका मतलब यह है कि भाजपा जानबूझकर इस मुद्दे को उठाकर स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान को ठेस पहुंचा रही है। दिल्ली की समस्याओं पर भी अरविंद केजरीवाल ने उठाए सवालअरविंद केजरीवाल ने कहा कि पिछले एक साल में दिल्ली की हालत खराब हो गई है। उन्होंने दावा किया कि जब से भाजपा की सरकार बनी है, तब से शहर में कई समस्याएं बढ़ गई हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली की सड़कें टूटी हुई हैं, जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हैं और प्रदूषण की स्थिति भी बहुत खराब हो गई है। इसके अलावा मोहल्ला क्लीनिक बंद किए जा रहे हैं और अस्पतालों में दवाइयों की कमी हो रही है। केजरीवाल ने यह भी कहा कि लोगों को पानी और बिजली के बहुत ज्यादा बिल मिल रहे हैं और कई जगह बिजली कटौती की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। उनके अनुसार, इन सभी समस्याओं से दिल्ली के लोग परेशान हैं और उन्हें पहले की सरकार की याद आ रही है। केजरीवाल ने अपने अनुभव साझा करने की बात कहीअरविंद केजरीवाल ने कहा कि वह लगभग दस साल तक दिल्ली के मुख्यमंत्री रहे हैं और उन्हें प्रशासन चलाने का अनुभव है। उन्होंने कहा कि अगर विधानसभा की कोई समिति उनसे यह पूछती कि दिल्ली में सीवर व्यवस्था कैसे सुधारी जाए, सड़कों की मरम्मत कैसे की जाए या बिजली-पानी की व्यवस्था को कैसे बेहतर बनाया जाए, तो उन्हें खुशी होती। उन्होंने कहा कि वह अपने अनुभव को साझा करने के लिए हमेशा तैयार हैं, क्योंकि उनका उद्देश्य केवल दिल्ली का विकास देखना है। उनके अनुसार, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि सरकार किस पार्टी की है, महत्वपूर्ण यह है कि दिल्ली की जनता को बेहतर सुविधाएं मिलें। भाजपा पर केवल राजनीति करने का आरोपअरविंद केजरीवाल ने कहा कि भाजपा का मुख्य उद्देश्य काम करना नहीं, बल्कि केवल राजनीति करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार दिल्ली की समस्याओं को हल करने के बजाय विवादित मुद्दों को उठाकर राजनीतिक माहौल बनाने में लगी हुई है। उन्होंने कहा कि यह बहुत दुखद है कि जिस स्थान को स्वतंत्रता सेनानियों की कुर्बानी से जोड़ा जाता है, उसे टिफिन रूम साबित करने की कोशिश की जा रही है। उनके अनुसार, इससे देश के शहीदों का सम्मान कम होता है। सोशल मीडिया पर भी अरविंद केजरीवाल की प्रतिक्रियाअरविंद केजरीवाल ने इस पूरे मामले पर सोशल मीडिया मंच एक्स पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि अंग्रेजों के समय बनी दिल्ली विधानसभा के एक हिस्से में स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी दी जाती थी और वर्ष 2022 में इस तथ्य को सामने लाया गया था। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य लोगों को इतिहास से परिचित कराना और स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान की याद दिलाना था। लेकिन अब भाजपा सरकार इसे फांसी घर मानने से इनकार कर रही है और इसे टिफिन रूम साबित करने में लगी हुई है। केजरीवाल के अनुसार, यह स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान के खिलाफ है और इससे बड़ा अपमान नहीं हो सकता। विधानसभा में पेशी के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवालविधानसभा की विशेषाधिकार समिति के सामने पेशी के दौरान अरविंद केजरीवाल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे। आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया कि इस दौरान उनकी सुरक्षा के साथ लापरवाही की गई। पार्टी के अनुसार, जब अरविंद केजरीवाल
सौरभ भारद्वाज और अनुराग ढांडा से एक सीधा सवाल कि आखिर आम आदमी पार्टी के आंतरिक लोकपाल रहे एडमिरल एल. रामदास को किसने ठगा था — दिल्ली भाजपा प्रवक्ता

नई दिल्ली, 5 मार्च : दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता श्री प्रवीण शंकर कपूर ने कहा है कि आम आदमी पार्टी के नेता लगातार भाजपा पर निराधार आरोप लगाने की राजनीति कर रहे हैं, लेकिन उन्हें पहले अपने ही घर के अंदर झांक कर देखना चाहिए। श्री प्रवीण शंकर कपूर ने कहा किसौरभ भारद्वाज और अनुराग ढांडा से एक सीधा सवाल पूछा है कि आखिर आम आदमी पार्टी के आंतरिक लोकपाल रहे एडमिरल एल. रामदास को किसने ठगा था, उन्होने क्यों पार्टी छोड़ी। यदि पार्टी सच में ईमानदारी और पारदर्शिता की राजनीति का दावा करती है तो उन्हें यह भी बताना चाहिए कि आखिर उनके अपने ही लोकपाल को पार्टी से निराश होकर क्यों अलग होना पड़ा ? श्री कपूर ने कहा कि आम आदमी पार्टी का इतिहास इस बात का गवाह है कि पार्टी के शुरुआती दौर में जुड़े अनेक प्रतिष्ठित और सम्मानित लोग समय के साथ या तो पार्टी से अलग हो गए या उन्हें किनारे कर दिया गया। इनमें श्रीमती अंजली दमानिया, श्रीमती किरण बेदी, श्रीमती शाजिया इल्मी, श्रीमती ऋचा पांडेय, श्री योगेन्द्र यादव, श्री प्रशांत भूषण, श्री शांति भूषण, श्री मयंक गांधी, श्री आनंद कुमार, श्री आशुतोष, श्री आशीष खेतान, श्री अश्वनी उपाध्याय सहित अनेक नाम शामिल हैं जिन्होंने कभी आम आदमी पार्टी को मजबूत करने के लिए काम किया था। उन्होंने कहा कि यही नहीं, पिछले कुछ वर्षों में भी कई प्रमुख नेता पार्टी से दूरी बनाते चले गए। इनमें श्री राजकुमार आनंद, श्री कपिल मिश्रा, श्री करतार सिंह तंवर और श्री कैलाश गहलोत जैसे नाम भी शामिल हैं। श्री प्रवीण शंकर कपूर ने कहा कि आम आदमी पार्टी को यह स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर इतने सारे संस्थापक सदस्य, सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी और वरिष्ठ नेता पार्टी से क्यों अलग हुए। क्या यह सभी लोग गलत थे या फिर पार्टी का नेतृत्व ही अपने साथियों के विश्वास को बनाए रखने में विफल रहा। उन्होंने कहा कि भाजपा यह मानती है कि राजनीति में विचारों का मतभेद स्वाभाविक है, लेकिन जिस प्रकार से आम आदमी पार्टी में एक के बाद एक वरिष्ठ लोग अलग होते गए, वह यह साबित करता है कि पार्टी के भीतर नेतृत्व शैली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह हैं।
बिहार से राज्यसभा जाएंगे नितिन नवीन, होली मिलन के दिन बना सियासी संयोग

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन राज्यसभा जा रहे हैं। उन्हें भारतीय जनता पार्टी ने बिहार से राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है। यानी अब वह विधायकी छोड़ेंगे। संयोग ऐसा है कि नितिन नवीन आज ही दो दिवसीय दौरे पर पटना आए हैं। होली मिलन समारोह में शामिल होने वह पटना पहुंचे। कुछ देर बाद ही भारतीय जनता पार्टी के महासचिव और मुख्यालय प्रभारी अरूण सिंह की ओर से बिहार से नितिन नवीन और पूर्व विधायक शिवेश कुमार उर्फ शिवेश राम को राज्यसभा भेजने की चिट्ठी जारी हुई। नितिन देखते ही देखते सुर्खियों में आ गए। सोशल मीडिया पर नितिन नवीन का नाम फिर से ट्रेंड करने लगा. प्रतियोगिता की तैयारी में जुटेनितिन नवीन भाजपा के बड़े नेताओं से एक और जेपी आंदोलन से राजनीति की शुरुआत करने वाले दिवंगत नवीन सिन्हा के बेटे हैं। 23 मई 1980 पटना में नितिन नवीन का जन्म हुआ है। भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाए गए नितिन नवीन का बचपन पीरमुहानी और लोहानीपुर इलाके में बीता। उनके पिता दिवंगत नवीन किशोर सिन्हा इधर ही रहते थे। हालांकि विधायक आवास मिलने के बाद से लंबे समय तक मिलर स्कूल के आसपास का आशियाना रहा। नितिन की शुरुआती पढ़ाई बिहार के सबसे प्रतिष्ठित प्राइवेट स्कूल- संत माइकल हाई स्कूल से हुई थी। यहीं से 1996 में 10वीं की सीबीएसई परीक्षा पास करने के बाद वह दिल्ली में 12वीं करने गए। 1998 में 12वीं करने के बाद वह मूल धारा की स्नातक से अलग पढ़ाई करने के लिए प्रतियोगिता की तैयारी में जुटे थे।
-केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, सोमवार को पश्चिम बंगाल में आयोजित परिवर्तन यात्रा में शामिल हुए और जनसभा को संबोधित किया।………………..

TMC- का मतलब टार्चर, माफिया और क्राइम है बंगाल में माँ लहूलुहान, माटी खून से सनी और मानुष तड़प रहा है TMC को बंगाल और जनता की नहीं, घुसपैठियों की चिंता है टीएमसी सिंडिकेट वाले बहन-बेटियों की अस्मत के साथ खिलवाड़ कर रहे ममता दीदी के राज में बेटियां अस्पताल, कॉलेज, सड़क कहीं भी सुरक्षित नहीं घुसपैठियों की रक्षा के लिए धरना दे रही ममता दीदी परिवर्तन यात्रा केवल राजनीतिक नहीं बंगाल के नवजागरण की यात्रा है नई दिल्ली/पश्चिम बंगाल- केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान सोमवार को पश्चिम बंगाल के दौरे पर थे। इस दौरान शिवराज सिंह बशीरहाट जिले की संदेशखाली विधानसभा क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी की परिवर्तन यात्रा में शामिल हुए और एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि, बंगाल की पवित्र धरती ने पूरे देश को दिशा दी है। राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत दोनों, इसी धरा से निकले हैं। गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर और महर्षि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय जैसे महापुरुषों ने राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत देकर देश की आत्मा को जागृत किया। वंदे मातरम् का उद्घोष केवल एक नारा नहीं था, बल्कि वह देशभक्ति की ऐसी धारा थी, जिसने पूरे देश को खड़ा कर दिया। इस धरती को सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का संदेश स्वामी विवेकानंद ने दिया, आध्यात्मिक राष्ट्रवाद का मार्ग अरविंद घोष ने दिखाया और एकता और अखंडता का मंत्र श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने दिया। वहीं केंद्रीय मंत्री ने राज्य की टीएमसी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए बंगाल की कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार, घुसपैठ और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना की। बंगाल की जनता TMC के कुशासन से त्रस्त हैकेन्द्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि, बंगाल की जनता आज टीएमसी के कुशासन से त्रस्त है। लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति बदहाल है। जो सरकार मां, मानुष और माटी की बात करती थी, आज वही मां लहूलुहान है, माटी खून से सनी हुई है और यहां का मानुष अत्याचार और अन्याय के कारण तड़प रहा है। राज्य में महिलाओं के खिलाफ अत्याचार बढ़े हैं। जिस तरह बहनों और बेटियों पर अन्याय और अत्याचार हो रहे हैं, वह बेहद चिंताजनक है। बंगाल में कानून व्यवस्था नाम की कोई चीज ही बची नहीं है। उन्होंने कहा कि, आज टीएमसी का मतलब टार्चर और ट्रेजेडी हो गया है। ‘एम’ का मतलब मनी, मर्डर और माफिया है, और ‘सी’ का मतलब करप्शन, क्राइम और क्रूरता। भ्रष्टाचार के कारण पूरा बंगाल त्रस्त और परेशान है। घुसपैठिए राज्य के संसाधनों पर कब्जा कर रहे हैं। जल, जमीन और जंगल पर कब्जा हो रहा है। बंगाल की जनता के हक छीने जा रहे हैं और आम आदमी पीड़ित है। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि, बंगाल की जनता अब बदलाव चाहती है। जनता परिवर्तन का मन बना चुकी है और यह परिवर्तन यात्रा केवल राजनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि बंगाल की नवजागरण यात्रा है। TMC को बंगाल और जनता की नहीं घुसपैठियों की चिंताकेन्द्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि, टीएमसी को बंगाल की चिंता नहीं है, बंगाल की जनता की चिंता नहीं है। चिंता है तो केवल घुसपैठियों को बचाने की, क्योंकि वही घुसपैठिए वोट बैंक बन जाते हैं। टीएमसी का सिंडिकेट पहले घुसपैठ कराता है, फिर उनके आधार कार्ड बनवाए जाते हैं, वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाए जाते हैं। और अब जब छानबीन करके, तथ्यों के आधार पर ऐसे लोगों के नाम काटे जा रहे हैं, जो भारत के नागरिक ही नहीं हैं, तो धरने पर बैठने का नाटक किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि, यह कार्रवाई नियम और कानून के तहत की जा रही है। जो भारत का नागरिक नहीं है, उसे पहचानना और कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई करना आवश्यक है, लेकिन इसे राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि, यह भारतीय जनता पार्टी का संकल्प है कि, एक-एक घुसपैठिए की पहचान की जाएगी और जो देश का नागरिक नहीं है, उसे चुन-चुनकर बाहर निकाला जाएगा। टीएमसी की घुसपैठ और तुष्टीकरण की नीति ने बंगाल को दंगों की आग में झोंकने का काम किया है। वोट बैंक की राजनीति के लिए समाज को बांटने की कोशिश की जा रही है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि, राज्य में धार्मिक आयोजनों को लेकर भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है। हिंदू त्योहार और पर्व मनाने के लिए अनुमति लेनी पड़ती है। यह स्थिति शर्मनाक है। तुष्टीकरण की नीति के कारण असामाजिक तत्वों को बढ़ावा मिल रहा है। गुंडों को संरक्षण दिया जा रहा है। कानून का डर खत्म होता जा रहा है और आम जनता असुरक्षित महसूस कर रही है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बंगाल की जनता अब इस स्थिति को और बर्दाश्त नहीं करेगी। बंगाल अब यह सहन नहीं करेगा। जनता परिवर्तन चाहती है और न्यायपूर्ण, सुरक्षित और समरस समाज की स्थापना के लिए संकल्पित है। घोटालों और क्राइम के दलदल में बंगालकेन्द्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि, टीएमसी शासन में हुई भर्ती घोटालों ने हजारों नौजवानों के सपनों को तोड़ दिया है। सबसे पहले नौजवानों की नौकरी खा ली गई। शिक्षक भर्ती घोटाले में हजारों युवाओं को नौकरी मिल सकती थी, लेकिन भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। यह केवल शिक्षक भर्ती तक सीमित नहीं है, नगरपालिका, नगर निगम और स्थानीय निकायों की भर्तियों में भी घोटाले हुए हैं। राज्य में रोजगार के अवसर छीन लिए गए। भर्तियों में बेईमानी की गई। जो अवसर बचे-खुचे थे, वो भी घुसपैठियों को दे दिए गए। यह बंगाल के युवाओं के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि, चुनावों से पहले बेरोजगारी भत्ता देने की घोषणाएं केवल राजनीतिक दिखावा हैं। अब वोटिंग से पहले बेरोजगारी भत्ते का नाटक किया जा रहा है। नौजवान इस नाटक को अच्छी तरह समझते हैं। टीएमसी का यह लॉलीपॉप अब काम नहीं आने वाला। राज्य के युवा अब परिवर्तन के लिए तैयार हैं। वह पारदर्शिता, ईमानदारी और अपने अधिकारों की लड़ाई के लिए खड़ा होगा। वहीं शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि, टीएमसी में एक नहीं, कई शेख शाहजहाँ जैसे लोग हैं, जो बहनों और बेटियों की अस्मत और इज़्ज़त से खिलवाड़ कर रहे हैं। महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। आज ज़रूरत है हमारी बहनों के स्वाभिमान