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वक्फ संपत्तियों के लिए केंद्र सरकार का बड़ा कदम, ‘उम्मीद’ पोर्टल 6 जून को होगा लॉन्च

सुप्रीम कोर्ट द्वारा वक्फ कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर रोक लगाए जाने के बाद केंद्र सरकार ने वक्फ से जुड़ी पारदर्शिता और प्रबंधनसुधार की दिशा में बड़ा निर्णय लिया है। सूत्रों के अनुसार, सरकार 6 जून को ‘उम्मीद’ नामक एक डिजिटल पोर्टल लॉन्च करने जा रही है, जिसकाउद्देश्य देशभर की वक्फ संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।क्या है ‘उम्मीद’ पोर्टल?‘उम्मीद’ का पूर्ण नाम Unified Waqf Management, Empowerment, Efficiency, and Development Act है। यह पोर्टल वक्फसंपत्तियों के पंजीकरण को डिजिटल रूप से अनिवार्य बनाता है और इसके माध्यम से संपत्तियों की पहचान, निगरानी और प्रबंधन की प्रक्रिया पारदर्शीकी जाएगी। इस पोर्टल में संपत्तियों को आधार, भू-राजस्व रिकॉर्ड और चुनाव आयोग के डेटा से जोड़ने की योजना है। महिलाओं की संपत्ति को वक्फ घोषित नहीं किया जाएगाएक महत्वपूर्ण बदलाव के तहत महिलाओं के नाम पर दर्ज संपत्तियों या ऐसी संपत्तियों जिनमें महिलाएं उत्तराधिकारी हैं, उन्हें वक्फ संपत्ति घोषित नहींकिया जा सकेगा। इससे महिला संपत्ति अधिकारों को सुरक्षा देने की दिशा में सरकार ने एक अहम कदम उठाया है।जियो-टैगिंग और विवरण अनिवार्यअब प्रत्येक वक्फ संपत्ति का जियो-टैगिंग करना और उसकी पूरी जानकारी पोर्टल पर दर्ज करना अनिवार्य होगा। इससे संपत्तियों का गलत उपयोग याअवैध कब्जा रोकने में मदद मिलेगी। रजिस्ट्रेशन की जिम्मेदारी मुतवल्ली परसंपत्तियों का रजिस्ट्रेशन संबंधित राज्य वक्फ बोर्ड के माध्यम से किया जाएगा, जिसमें मुतवल्ली (प्रबंधक) की जिम्मेदारी होगी कि वह यह प्रक्रियापूरी करें। वक्फ बोर्ड तकनीकी सहायता भी प्रदान करेगा।6 महीने की समय सीमा और अतिरिक्त मौकासरकार ने यह स्पष्ट किया है कि सभी वक्फ संपत्तियों को 6 महीने के भीतर रजिस्टर्ड कराना अनिवार्य होगा। हालांकि, यदि किसी तकनीकी बाधा याअन्य गंभीर कारण से रजिस्ट्रेशन समय पर नहीं हो पाए, तो उन्हें 1 से 2 महीने का अतिरिक्त समय भी दिया जा सकता है।

I.N.D.I.A गठबंधन ने उठाई संसद के विशेष सत्र की मांग, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर सरकार से पारदर्शिता की अपेक्षा

पहलगाम आतंकी हमले और उसके जवाब में भारत द्वारा किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। दिल्ली स्थितकॉन्स्टिट्यूशन क्लब में I.N.D.I.A गठबंधन से जुड़े प्रमुख दलों की बैठक हुई, जिसमें कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, आरजेडी, शिवसेना (यूबीटी) सहितकुल 16 विपक्षी पार्टियों ने हिस्सा लिया। बैठक के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक संयुक्त पत्र भेजा गया, जिसमें संसद का विशेष सत्र बुलाने कीमांग की गई है। सरकार को संसद में जवाब देना होगाकांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने बताया कि सभी 16 दलों ने मिलकर प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि पहलगाम में हमले के बाद विपक्षने सरकार को पूरा समर्थन दिया, लेकिन अब समय आ गया है कि सरकार पूरे घटनाक्रम पर संसद में विस्तार से जानकारी दे। उन्होंने कहा कि संसदविशेष सत्र का मंच ऐसा होना चाहिए जहां सभी सांसद मिलकर सेना का आभार जता सकें और सरकार की ओर से हर पहलू पर पारदर्शी जानकारी दीजा सके। ट्रंप के बयानों ने भारत को आहत कियाआरजेडी सांसद मनोज झा ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बीते 15 दिनों में 13 बयान दिए हैं, जिनमें से कई भारत की भावनाओं को ठेसपहुंचाने वाले थे। उन्होंने कहा कि यह केवल विपक्ष या सत्ता पक्ष का विषय नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय आत्मसम्मान और जवाबदेही का मामला है। क्या ट्रंप से सत्र बुलाने की अनुमति लें?शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने कहा कि 16 दलों के नेताओं के हस्ताक्षर वाला पत्र प्रधानमंत्री को भेजा गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जबअमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के कहने पर युद्धविराम हो सकता है, तो फिर विपक्ष की मांग पर विशेष सत्र क्यों नहीं बुलाया जा रहा? क्या अब हमें संसदबुलाने के लिए ट्रंप के पास जाना पड़ेगा? डेरेक ओ ब्रायन: “सरकार को संसद के प्रति जवाबदेह होना चाहिए”टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने बताया कि पत्र में पुंछ, उरी और राजौरी में हुई घटनाओं पर स्वतंत्र चर्चा की मांग की गई है। उन्होंने कहा कि संसदजनता की प्रतिनिधि संस्था है और सरकार को उसकी जवाबदेही निभानी चाहिए। आम आदमी पार्टी ने भी कहा है कि वह अलग से प्रधानमंत्री को पत्रभेजेगी। रामगोपाल यादव: “सैनिकों को सलाम, कूटनीति पर सवाल”समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव ने कहा कि हमारी सेना ने उत्कृष्ट कार्य किया है, उन्हें धन्यवाद और बधाई दी जानी चाहिए। लेकिनसवाल यह है कि इतने अंतरराष्ट्रीय प्रयासों के बावजूद भारत को खुला समर्थन किसी भी देश से नहीं मिला। उन्होंने प्रधानमंत्री की विदेश नीति परसवाल उठाते हुए कहा कि संसद को अंधेरे में रखना उचित नहीं है।

राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश में मोदी सरकार पर कसा तंज, ट्रंप के फोन और जातिगत जनगणना पर जताई आपत्ति

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार, 3 मई 2025 को मध्य प्रदेश के भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम में केंद्र की मोदी सरकार परकड़ी आलोचना की। उन्होंने पाकिस्तान के साथ चल रहे सीजफायर पर अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप के बयान का उल्लेख करते हुए केंद्र सरकार कोसवालों के घेरे में लिया। राहुल गांधी ने कहा, “ट्रंप के एक फोन के बाद नरेंद्र मोदी तुरंत हार मान गए। इतिहास इस बात का गवाह है कि बीजेपी-आरएसएस हमेशा दबाव में झुकती है।” 1971 की जंग और कांग्रेस की बहादुरी पर जोरराहुल गांधी ने 1971 के भारत-पाक युद्ध का उदाहरण देते हुए कहा कि उस वक्त अमेरिका की धमकियों के बावजूद भारत ने साहस दिखाया था।उन्होंने कहा, “कांग्रेस के नेताओं ने सुपरपावर के सामने कभी झुका नहीं। इंदिरा गांधी के समय फोन कॉल नहीं बल्कि सातवां बेड़ा आया था, लेकिनउन्होंने हिम्मत दिखाई और जो करना था किया। कांग्रेस कभी सरेंडर नहीं करती। महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल सभी ऐसे नेता थेजिन्होंने हमेशा साहस से सामना किया।” बीजेपी-आरएसएस पर संविधान के खिलाफ आरोपराहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी देश के संविधान की रक्षा करती है, जबकि बीजेपी-आरएसएस इसे खत्म करने में लगे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार कीजातिगत जनगणना को लेकर नीति की भी आलोचना की। राहुल गांधी ने कहा, “बीजेपी और आरएसएस दबाव में आकर जातिगत जनगणना की बातकर रहे हैं, लेकिन असल में वे इसे नहीं कराना चाहते क्योंकि वे देश में न्याय नहीं चाहते।” जातिगत जनगणना पर मोदी सरकार को फटकारनेता प्रतिपक्ष ने कहा, “हमने साफ कर दिया था कि सामाजिक न्याय के लिए लड़ेंगे और लोकसभा में जातिगत जनगणना को पास कराएंगे। इसकेबाद प्रधानमंत्री मोदी, मोहन भागवत और नितिन गडकरी ने इस मुद्दे पर अपनी बातें रखीं। लेकिन जब थोड़ा दबाव पड़ा तो ये लोग झुक गए औरजातिगत जनगणना के समर्थन से पीछे हट गए। यह साबित करता है कि बीजेपी-आरएसएस देश में समानता और न्याय को आगे बढ़ाना नहीं चाहते।”

प्रधानमंत्री मोदी 9-10 जून को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर सांसदों से करेंगे मुलाकात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी 9 और 10 जून को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद विदेशों में भारत का पक्ष रखने गए सांसदों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकातकरने वाले हैं। इस बैठक में भारत-पाक सीमा पर आतंकवाद और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत की गई सैन्य कार्रवाई से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां औरसबूत साझा किए जाएंगे। इस प्रतिनिधिमंडल में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता शामिल हैं, जो पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद का असलीचेहरा दुनिया के सामने लाने का काम कर रहे हैं। संसद का सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल विदेशों में भारत का पक्ष रख चुका हैकांग्रेस के शशि थरूर के नेतृत्व में भारत का एक प्रतिनिधिमंडल अमेरिका दौरे पर भी गया था। इसमें झारखंड मुक्ति मोर्चा के सरफराज अहमद, तेलुगुदेशम पार्टी के जीएम हरीश बालयोगी, भाजपा के शशांक मणि त्रिपाठी और भुवनेश्वर कालिता, शिवसेना के मिलिंद देवड़ा, भाजपा के तेजस्वी सूर्याऔर भारत के पूर्व अमेरिकी राजदूत तरनजीत सिंह संधू शामिल थे। इस प्रतिनिधिमंडल का उद्देश्य पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को बढ़ावा देने औरभारत पर इसके प्रभाव को विश्व स्तर पर उजागर करना था। प्रतिनिधिमंडलों का मकसद: दुनिया को आतंकवाद की सच्चाई बतानादोनों प्रतिनिधिमंडलों ने विदेशों में जाकर पाकिस्तान के आतंकवाद प्रायोजित गतिविधियों को दुनिया के सामने लाने का प्रयास किया। भारत चाहताहै कि वैश्विक समुदाय आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर पाकिस्तान पर दबाव बनाए ताकि वह इस खतरे को बंद करे। भारत की उम्मीद है किअंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस विषय पर गंभीरता बढ़ेगी, जिससे क्षेत्र में शांति स्थापित करने में मदद मिलेगी। पहली मंत्रिपरिषद बैठक ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बादप्रधानमंत्री मोदी इसी सप्ताह केंद्रीय मंत्रिपरिषद की बैठक की अध्यक्षता करेंगे, जो ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद पहली मंत्रिपरिषद की बैठक होगी। यहबैठक पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत की सैन्य कार्रवाई के संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसमें आतंकवाद से निपटने कीरणनीति और सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा की जाएगी। इस बैठक में सरकारी नीतियों के क्रियान्वयन पर भी विस्तृत चर्चा होगी। भारत-पाक तनाव के बीच सुरक्षा रणनीतियों पर चर्चा‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद दोनों देशों के बीच बढ़े सैन्य तनाव के बीच यह बैठक खास अहमियत रखती है। भारत ने आतंकवादी ठिकानों पर सटीकहवाई हमले कर अपनी जवाबी कार्रवाई की थी। अब इस कार्रवाई और उसके प्रभावों को लेकर रणनीति तय करने के लिए मंत्रिपरिषद एकजुट होगी।प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में यह बैठक भारत की सुरक्षा नीति को मजबूत करने और आतंकवाद के खिलाफ ठोस कदम उठाने की दिशा में निर्णायकसाबित होगी।

पूर्वोत्तर में बाढ़ और भूस्खलन का कहर, अब तक 36 मौतें, 5.5 लाख से अधिक लोग प्रभावित

बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य: असम में हालात गंभीरपूर्वोत्तर भारत में लगातार बारिश के चलते बाढ़ और भूस्खलन ने तबाही मचा रखी है। अब तक इन प्राकृतिक आपदाओं में 36 लोगों की जान जा चुकीहै, जबकि 5.5 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। सबसे ज्यादा असर असम में देखा गया है, जहां 22 जिलों में 5.35 लाख से अधिक लोग बाढ़की चपेट में आ चुके हैं। राज्य में अब तक 11 लोगों की मौत हो चुकी है और 15 प्रमुख नदियां उफान पर हैं। अन्य राज्यों में भी भारी नुकसानअसम के बाद सबसे ज्यादा मौतें अरुणाचल प्रदेश में हुई हैं, जहां अब तक 10 लोगों की जान गई है। मेघालय में 6, मिजोरम में 5, सिक्किम में 3 और त्रिपुरा में 1 व्यक्ति की मौत की पुष्टि हुई है। विभिन्न राज्यों में बाढ़ के साथ-साथ भूस्खलन की घटनाएं भी लगातार सामने आ रही हैं। सिक्किम में सेना पर आपदा की मारसिक्किम के छतेन क्षेत्र में एक सैन्य शिविर भूस्खलन की चपेट में आ गया, जिसमें तीन सैनिकों की मौत हो गई और छह अन्य सैनिक लापता हैं। रक्षाअधिकारियों के अनुसार, राहत और बचाव अभियान जारी है, लेकिन खराब मौसम और लगातार बारिश के कारण कार्य में बाधाएं आ रही हैं। मणिपुर में हालात भयावह, हजारों घर प्रभावितमणिपुर में भारी बारिश और बाढ़ ने भीषण तबाही मचाई है। अब तक राज्य में 3,365 घरों को नुकसान पहुंचा है और 1,599 लोगों को सुरक्षितस्थानों पर पहुंचाया गया है। लगभग 11.8 हेक्टेयर कृषि भूमि पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी है। प्रदेशभर में 47 स्थानों पर भूस्खलन हुआ है, जिससेजनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। नदियां उफान पर, बांध टूटे, गांवों में पानी भरामणिपुर की प्रमुख नदियां—इंफाल और इरिल खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। कई क्षेत्रों में बांध टूटने के कारण बाढ़ का पानी तेजी से आसपासके इलाकों में फैल गया है। हालांकि कुछ स्थानों पर जलस्तर में मामूली गिरावट आई है, लेकिन अधिकतर नदियां अभी भी उच्च बाढ़ स्तर से ऊपरबनी हुई हैं।

तमिलनाडु: राज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच टकराव फिर चर्चा में, सुप्रीम कोर्ट के दबाव में मिली विधेयकों को मंजूरी?

तमिलनाडु की राजनीति एक बार फिर राज्यपाल आरएन रवि और मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के बीच तनाव के चलते सुर्खियों में है। हाल ही मेंराज्यपाल ने दो अहम विधेयकों को मंजूरी दी है, जिनमें एक ऑनलाइन जुए और सट्टेबाजी पर नियंत्रण से जुड़ा है, जबकि दूसरा शिक्षा क्षेत्र में सुधारोंसे संबंधित है। ये दोनों विधेयक लंबे समय से राज्यपाल की स्वीकृति के इंतजार में थे, जिससे डीएमके सरकार और राज्यपाल के बीच टकराव लगातारबढ़ रहा था। मुख्यमंत्री स्टालिन ने राज्यपाल की मंजूरी को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से उपजा दबाव करार दिया। उन्होंने कहा कि अगर राज्यपाल ने पहले हीसंवैधानिक मर्यादाओं का पालन किया होता, तो मामला अदालत तक नहीं पहुंचता। सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए स्टालिन ने तीखे शब्दों मेंकहा, “राज्यपाल को अब जाकर संवैधानिक जवाबदेही का एहसास हुआ है।” सुप्रीम कोर्ट में लंबित था मामलाराज्य सरकार ने पहले ही आरोप लगाया था कि राज्यपाल संविधानिक प्रक्रियाओं में जानबूझकर देरी कर रहे हैं। विधेयकों को मंजूरी न मिलने परसरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। मामला अब भी कोर्ट में विचाराधीन है, लेकिन इसी बीच राज्यपाल द्वारा विधेयकों को मंजूरी देनाराजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। राज्यपाल की सफाई, विपक्ष की नाराज़गीराजभवन की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि विधेयकों की मंजूरी किसी भी दबाव में नहीं, बल्कि संवैधानिक समीक्षा के बाद दी गई है।बयान में यह भी कहा गया कि राज्यपाल ने विधेयकों के सभी पहलुओं की गहनता से जांच की और उन्हें संविधान के अनुरूप पाए जाने के बाद हीमंजूरी दी। हालांकि, डीएमके और विपक्षी दलों ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि यह कदम सिर्फ सुप्रीम कोर्ट में जवाबदेही सेबचने की रणनीति है। डीएमके नेताओं और समर्थकों ने इसे “जनता की जीत” बताया, वहीं बीजेपी ने राज्यपाल का समर्थन करते हुए कहा कि उन्होंनेपूरी तरह से संवैधानिक मर्यादा का पालन किया है। केंद्र-राज्य संबंधों पर फिर छिड़ी बहसइस पूरे घटनाक्रम ने केंद्र और राज्य सरकारों के बीच अधिकारों के बंटवारे की बहस को एक बार फिर हवा दे दी है। डीएमके और बीजेपी के बीचपहले से ही वैचारिक मतभेद रहे हैं, और राज्यपाल-विधेयक विवाद ने इन मतभेदों को और गहरा कर दिया है। क्यों अहम हैं ये विधेयक?ऑनलाइन सट्टेबाजी नियंत्रण विधेयक राज्य में तेजी से बढ़ रहे डिजिटल जुए के मामलों को रोकने के उद्देश्य से लाया गया है। यह कानून खासकरयुवाओं को इस लत से बचाने के लिए अहम माना जा रहा है। वहीं, शिक्षा सुधार विधेयक विश्वविद्यालयों में नियुक्तियों, प्रशासनिक प्रक्रियाओं औरपारदर्शिता को बढ़ाने के लिए जरूरी माना जा रहा है।

कोविड-19 मामलों में फिर से तेजी, केरल और महाराष्ट्र सबसे अधिक प्रभावित; सरकार और ICMR ने सतर्कता बरतने की अपील की

देश में एक बार फिर कोविड-19 का खतरा बढ़ता दिख रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश में सक्रिय कोरोना मामलों कीसंख्या 4,026 तक पहुंच गई है। सबसे अधिक मामले केरल (1,416) में दर्ज किए गए हैं, जबकि महाराष्ट्र (494), गुजरात (397) और दिल्ली(393) भी प्रभावित राज्यों में शामिल हैं। पिछले 24 घंटे में कोरोना से पांच लोगों की मौत हुई है इनमें केरल का एक 80 वर्षीय बुजुर्ग, महाराष्ट्र कीदो बुजुर्ग महिलाएं, तमिलनाडु की 69 वर्षीय महिला और पश्चिम बंगाल की 43 वर्षीय महिला शामिल हैं। सभी को पहले से गंभीर बीमारियां थीं जैसेडायबिटीज, हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, पार्किंसन और किडनी फेल्योर। राज्यवार स्थिति पर नज़र डालें तो महाराष्ट्र में 1 जनवरी से अब तक 873 नए मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से 20 केवल मुंबई में हैं। पश्चिम बंगालमें कुल 331 सक्रिय केस हैं, कर्नाटक में 87 नए मामलों के साथ कुल संक्रमितों की संख्या 311 हो गई है। दिल्ली में हालांकि थोड़ी राहत देखने कोमिली है, जहां बीते 24 घंटे में एक्टिव केसों में 90 की गिरावट दर्ज की गई है। ICMR के मुताबिक, इस बार का संक्रमण ओमिक्रॉन के सब-वेरिएंट NB.1.8.1 के कारण हो रहा है, जो तेज़ी से फैलता है लेकिन इसके लक्षणअपेक्षाकृत हल्के हैं। इनमें बुखार, गले में खराश, सिरदर्द, थकान, नाक बहना और भूख की कमी शामिल हैं—जो सामान्य फ्लू जैसे लगते हैं।विशेषज्ञों ने इस मौके पर टीकाकरण और हर्ड इम्युनिटी की अहमियत पर फिर ज़ोर दिया है। वैक्सीन न केवल संक्रमण से बचाती है बल्कि बड़े स्तर पररोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर संक्रमण के प्रसार को रोकने में भी मदद करती है। केंद्र और राज्य सरकारें सतर्क हो गई हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा है कि सरकार कोविड से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।ऑक्सीजन प्लांट, ICU बेड्स और दवाओं के स्टॉक की समीक्षा कर उन्हें और मजबूत किया जा रहा है। देशभर के अस्पतालों को अलर्ट पर रखा गयाहै और जरूरी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। हालांकि इस बार के वेरिएंट के लक्षण हल्के हैं, लेकिन इसके तेज़ी से फैलने की वजह से सतर्क रहना बेहद जरूरी है। सरकार और स्वास्थ्य एजेंसियांपूरी तरह चौकस हैं और नागरिकों से अपील की गई है कि वे घबराएं नहीं, लेकिन कोविड गाइडलाइंस जैसे मास्क पहनना, हाथ धोना और भीड़ सेबचना जरूर अपनाएं।

कमल हासन की फिल्म ‘ठग लाइफ’ की कर्नाटक में रिलीज पर रोक, हाई कोर्ट ने बयान पर जताई नाराज़गी

साउथ के सुपरस्टार कमल हासन ने अपनी फिल्म ‘ठग लाइफ’ को फिलहाल कर्नाटक में रिलीज न करने का फैसला किया है। यह निर्णय कन्नड़ भाषाको लेकर दिए गए उनके एक बयान के बाद उपजे विवाद और कोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद आया है। कन्नड़ भाषा पर बयान को लेकर हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणीकमल हासन ने हाल ही में कहा था कि “कन्नड़ भाषा की उत्पत्ति तमिल से हुई है”, जिसके बाद राज्य में विवाद खड़ा हो गया। इस बयान पर कर्नाटकहाई कोर्ट ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “आप कमल हासन हो सकते हैं, लेकिन किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का अधिकार किसी को नहींहै।” माफी से किया इनकार, अदालत ने जताई असहमतिकमल हासन ने अदालत में स्पष्ट किया कि वह अपने बयान पर माफ़ी नहीं मांगेंगे। उन्होंने कहा कि बयान में कोई दुर्भावना नहीं थी। अदालत ने इस परअसहमति जताते हुए कहा कि “माफ़ी कोई मजबूरी नहीं, बल्कि एक विनम्रता होनी चाहिए थी।” कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि “यह अहंकार से प्रेरितप्रतीत होता है।” ‘माफ़ी से मामला सुलझ सकता था‘ – कोर्टहाई कोर्ट ने वकीलों से सवाल किया कि अगर माफ़ी से मामला शांत हो सकता था, तो उसे क्यों नहीं अपनाया गया। कोर्ट ने पत्र को देखने के बादकहा कि “इसमें भावनाओं की अभिव्यक्ति है, पर स्पष्ट रूप से माफी नहीं है।”कमल हासन की कानूनी टीम का पक्षहासन के वकील ने अदालत में कहा कि यह बयान एक खास व्यक्ति के संदर्भ में दिया गया था, न कि किसी भाषा को नीचा दिखाने के लिए। उन्होंनेयह भी कहा कि कमल हासन लंबे समय से कन्नड़ संस्कृति और भाषा के प्रशंसक रहे हैं, और उनके दिल में इस भाषा के लिए गहरा सम्मान है। फिल्म रिलीज पर अस्थायी रोक, अगली सुनवाई 10 जून कोकमल हासन के वकील ने यह भी कहा कि वह स्थिति को देखते हुए अभी कर्नाटक में फिल्म रिलीज नहीं करेंगे। अदालत ने इस स्थिति को रिकॉर्ड मेंलेते हुए ‘ठग लाइफ’ की रिलीज पर अस्थायी रोक लगाने की याचिका को स्वीकार कर लिया। अब इस मामले की अगली सुनवाई 10 जून को दोपहर3:30 बजे होगी। फिल्म उद्योग की एकता की अपीलहासन की टीम ने अंत में यह स्पष्ट किया कि भाषा के नाम पर देश को बांटने का कोई प्रयास नहीं है। वकील ने कहा, “तमिल फिल्में कर्नाटक में औरकन्नड़ फिल्में तमिलनाडु में रिलीज होती रही हैं। हम सबको साथ मिलकर काम करना है। हर किसी को अपनी बात कहने का अधिकार है, लेकिन साथही सम्मान की मर्यादा भी रखनी चाहिए।”

CDS जनरल अनिल चौहान का बड़ा खुलासा, पाकिस्तान का 48 घंटे का प्लान 8 घंटे में ढेर

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और पाकिस्तान के जवाबी हमले को लेकर कई अहम जानकारियों काखुलासा किया है। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान ने भारत पर दबाव बनाने के लिए 48 घंटे का सैन्य अभियान तैयार किया था, लेकिन भारतीय सेना कीतगड़ी प्रतिक्रिया ने उसकी योजना को महज 8 घंटे में ध्वस्त कर दिया। 10 मई की रात शुरू हुआ पाकिस्तान का हमलाजनरल चौहान ने बताया कि 10 मई की रात करीब 1 बजे पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ आक्रामक अभियान की शुरुआत की थी। पाकिस्तान कोविश्वास था कि वह 48 घंटे के भीतर भारत को झुकने पर मजबूर कर देगा। लेकिन भारत की तरफ से की गई सख्त कार्रवाई ने उसके मंसूबों पर पानीफेर दिया।भारतीय जवाबी कार्रवाई से पाकिस्तान को भारी नुकसानभारत ने जब ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत आतंकी अड्डों पर प्रहार किया, तो पाकिस्तान ने जवाबी हमले शुरू कर दिए। लेकिन भारतीय वायुसेना कीप्रतिक्रिया इतनी तीव्र और सटीक थी कि पाकिस्तान के नूर खान, मुरीद और रफीकी जैसे अहम एयरबेस तबाह हो गए। जनरल चौहान के अनुसार, हालात बेकाबू होते देख पाकिस्तान के डीजीएमओ ने भारत के डीजीएमओ को फोन कर बातचीत की पेशकश की। पाकिस्तान को हुआ भारी नुकसान का अंदेशाभारत की प्रभावी जवाबी कार्रवाई से घबराकर पाकिस्तान को यह एहसास हो गया कि अगर वह संघर्ष को और आगे बढ़ाएगा, तो उसे व्यापक नुकसानउठाना पड़ेगा। इसी वजह से उसने जल्द ही युद्धविराम की पहल की, जिसे भारत ने भी स्वीकार कर लिया। 26 इलाकों में हमले, एयरफोर्स ठिकाने और सिविल टारगेट्स पर निशाना10 मई को पाकिस्तान ने सीमा से सटे 26 क्षेत्रों में हमले किए। इसके निशाने पर उधमपुर, पठानकोट, आदमपुर और भुज स्थित भारतीय वायुसेना केठिकाने थे। इसके अलावा एयरफोर्स से जुड़े स्कूलों और मेडिकल सेंटर को भी लक्ष्य बनाया गया। पाकिस्तानी सेना ने रात में हाई-स्पीड मिसाइलों सेहमला किया, लेकिन भारत ने अपनी एयर डिफेंस प्रणाली के जरिए अधिकांश मिसाइलों को हवा में ही निष्क्रिय कर दिया। भारत ने सात पाकिस्तानी एयरबेस किए ध्वस्तभारत ने जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान के कुल सात एयरबेस को पूरी तरह निष्क्रिय कर दिया। इस प्रभावशाली जवाब के बाद ही पाकिस्तान कोबातचीत और युद्धविराम की दिशा में आगे बढ़ना पड़ा।

भाजपा ने निगम चुनावों में दिखाई मजबूती, दिल्ली मेंस अध्यक्ष का बयान, ‘आप’ में बढ़ता असंतोष

दिल्ली भाजपा अध्यक्ष श्री वीरेन्द्र सचदेवा ने आज दिल्ली नगर निगम की वार्ड समितियों और स्थायी समिति के चुनाव परिणामों को लेकर आमआदमी पार्टी पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि इन नतीजों ने यह साबित कर दिया है कि आम आदमी पार्टी न केवल जन समर्थन खो चुकी है, बल्कि उसके अपने निर्वाचित जन प्रतिनिधि और पदाधिकारी भी अब पार्टी से दूरी बना रहे हैं।8 चेयरमैन, 9 डिप्टी चेयरमैन सीटों पर भाजपा का कब्जाश्री सचदेवा ने बताया कि दक्षिणी दिल्ली सहित 8 निगम क्षेत्रों में चेयरमैन और रोहिणी समेत 9 क्षेत्रों में डिप्टी चेयरमैन पद पर भाजपा की जीत आमआदमी पार्टी के अंदर गहराते असंतोष का स्पष्ट संकेत है। उन्होंने कहा कि स्थायी समिति में एक अतिरिक्त सदस्य की जीत इस बात का सबूत है किपार्टी के भीतर नेतृत्व के प्रति विश्वास टूट रहा है। स्थायी समिति में अगली जीत का भरोसाभाजपा अध्यक्ष ने दावा किया कि कल होने वाले स्थायी समिति के 11वें सदस्य के चुनाव में भी भाजपा की जीत तय है। उन्होंने कहा कि भाजपा शीघ्रही स्थायी समिति के चेयरमैन का चुनाव करवाएगी और निगम प्रशासन को सक्रिय करते हुए रुके हुए विकास कार्यों को गति देगी।