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हिमाचल में मानसून का कहर जारी-तीन दिनों में 14 बादल फटने और 3 फ्लैश फ्लड की घटनाएं, मंडी सबसे अधिक प्रभावित

हिमाचल प्रदेश में मानसून ने विनाशकारी रूप ले लिया है। पिछले 72 घंटों के भीतर राज्य में बादल फटने की 14 और अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) की 3 घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें से 13 घटनाएं अकेले मंडी जिले में हुई हैं। इस तबाही ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है और राहत व पुनर्वास कीचुनौतियां बढ़ा दी हैं। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, मंडी जिले में अब तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है और 31 लोग लापता हैं। पांचलोग घायल हैं। गोहर, थुनाग, करसोग और जंजैहली इलाकों में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें राहत एवं बचाव कार्यों में लगातार जुटी हुईहैं। अब तक 348 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। जिले में आपदा के चलते 154 मकान पूरी तरह तबाह हो चुके हैं, 31 वाहनक्षतिग्रस्त हुए हैं, दो दुकानें ढह गई हैं, 106 पशुशालाएं नष्ट हुई हैं और 14 पुल बह गए हैं। इसके अलावा, 165 मवेशियों की भी जान गई है। पूरे प्रदेश में 69 मौतें, 495 करोड़ का नुकसानपूरे हिमाचल प्रदेश में मानसून जनित आपदाओं के चलते अब तक 69 लोगों की जान जा चुकी है, 110 लोग घायल हुए हैं और 37 लोग अभी भीलापता हैं। राज्य को अब तक लगभग 495 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है। भूस्खलनों के कारण 246 सड़कें बंद हैं, 404 ट्रांसफार्मर ठप होचुके हैं और 784 पेयजल योजनाओं की आपूर्ति बाधित है। अब तक 250 पशु-पक्षी बह चुके हैं, 18 घर पूरी तरह नष्ट हो गए हैं और 70 घरों कोआंशिक नुकसान हुआ है। 198 गौशालाएं भी प्रभावित हुई हैं। मंडी में सबसे अधिक 145 सड़कें बंद हैं, इसके बाद कुल्लू (36), सिरमौर (25) औरशिमला (22) का स्थान है। फोरलेन निर्माण से लिंडीधार गांव में खतरा बढ़ाशिमला जिले के ढली क्षेत्र स्थित लिंडीधार गांव में फोरलेन निर्माण के दौरान बन रही रिटेनिंग वॉल गुरुवार को अचानक ढह गई, जिससे सैकड़ों सेब केपौधे दब गए और पास के कई घरों पर खतरा मंडराने लगा है। स्थानीय निवासी भय के कारण अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायनकरने को मजबूर हैं। लोगों ने इस हादसे के लिए नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) को जिम्मेदार ठहराते हुए लापरवाही का आरोपलगाया है। मौसम विभाग की चेतावनी, भारी बारिश के आसारमौसम विभाग ने आगामी 24 घंटों के लिए कांगड़ा, मंडी, हमीरपुर, शिमला और सिरमौर जिलों में अचानक बाढ़ की चेतावनी जारी की है। इसकेअलावा, अगले दो दिनों के लिए भारी वर्षा का येलो अलर्ट और 5 जुलाई से 9 जुलाई तक भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी कियागया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन अलर्ट मोड पर है और प्रभावित क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी जा रही है।

कोलकाता गैंगरेप केस: पुलिस ने किया क्राइम सीन का रीक्रिएशन, चार आरोपी हिरासत में, मुख्य आरोपी समेत सभी से गहन पूछताछ जारी, घटनास्थल पर पांच घंटे तक चला सीन रीक्रीएशन

लॉ की छात्रा के साथ हुए कथित गैंगरेप मामले में कोलकाता पुलिस की जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। अब तक पुलिस ने इस मामले में मुख्यआरोपी सहित कुल चार लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनसे लगातार पूछताछ की जा रही है। पुलिस ने सोमवार सुबह घटनास्थल पर क्राइम सीन का रीक्रिएशन किया। इस प्रक्रिया के दौरान चारों आरोपी पुलिस के साथ घटनास्थल पर मौजूदरहे। अधिकारियों ने करीब पांच घंटे तक घटनास्थल पर सभी विवरणों की पुनरावृत्ति की, ताकि घटना की सही समयरेखा और परिस्थितियों को समझाजा सके। इसके बाद सभी आरोपियों को वापस हिरासत में ले जाया गया। घटना से जुड़े सूत्रों के अनुसार, क्राइम के बाद मुख्य आरोपी मैंगो, प्रमित मुखर्जी और जैब अहमद के साथ कॉलेज से निकल गया था। अगली सुबह, एक और आरोपी मोनोजित ने कॉलेज के एक अधिकारी को फोन कर पुलिस की मौजूदगी के बारे में जानकारी ली। इसी दिन प्रमित ने एक वकील सेसंपर्क किया और कॉलेज के कुछ वरिष्ठ छात्रों से सहायता की अपील की, लेकिन उन्हें किसी से कोई मदद नहीं मिली। कोलकाता पुलिस की जांच टीम अब आरोपी छात्रों के फोन रिकॉर्ड, घटनास्थल की फॉरेंसिक रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर मामले कोसुलझाने की दिशा में काम कर रही है। यह मामला शहर भर में आक्रोश का विषय बना हुआ है, और छात्र संगठनों से लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओंतक ने पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग की है।

एयर इंडिया विमान हादसे पर मुआवजे को लेकर अंतरराष्ट्रीय विवाद-Stewarts लॉ फर्म ने एयर इंडिया पर लगाया मुआवजा रोकने काआरोप, एयरलाइन ने आरोपों से किया इनकार

12 जून को अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट AI 171 भीषण हादसे का शिकार हो गई थी। इस दुर्घटना में कुल 270 लोगों कीजान चली गई थी, जिनमें 242 विमान यात्री और एक मेडिकल हॉस्टल के 29 लोग शामिल थे। प्लेन एक हॉस्टल की इमारत पर गिरा, जिससे वहांभी भारी जनहानि हुई। इस हादसे में सिर्फ एक यात्री की जान बच सकी। मुआवजे को लेकर एयर इंडिया पर गंभीर आरोपअब इस दुखद हादसे को लेकर मुआवजे पर विवाद खड़ा हो गया है। ब्रिटेन की जानी-मानी कानूनी फर्म Stewarts, जो 40 से अधिक पीड़ितपरिवारों का प्रतिनिधित्व कर रही है, ने एयर इंडिया पर पीड़ितों के अधिकारों को दबाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। फर्म के वरिष्ठ वकील पीटर नीननका कहना है कि एयर इंडिया परिवारों से ऐसी वित्तीय जानकारी मांग रही है, जिसका इस्तेमाल मुआवजे की रकम कम करने के लिए किया जा सकताहै। उन्होंने इसे “अनैतिक और अपमानजनक” करार दिया और आरोप लगाया कि एयरलाइन इस तरीके से करीब 1,050 करोड़ रुपये की बचत करनाचाहती है। एयर इंडिया ने किया आरोपों से इनकारएयर इंडिया ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। एयरलाइन का कहना है कि मुआवजे के लिए फॉर्म भरना अनिवार्य नहीं है और इसकाउद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि मुआवजा सही व्यक्ति तक पहुंचे। वहीं, वकील नीनन ने अपने क्लाइंट्स को सलाह दी है कि वे फॉर्म न भरेंऔर कानूनी प्रक्रिया अपनाएं। यह मामला अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी जांच की मांग तक पहुंच गया है। हादसे का विवरण और पीड़ितों की जानकारीफ्लाइट AI 171 में कुल 242 लोग सवार थे, जिनमें 230 यात्री और 12 क्रू मेंबर शामिल थे। यात्रियों में 169 भारतीय, 53 ब्रिटिश, 7 पुर्तगालीऔर 1 कनाडाई नागरिक थे। इन यात्रियों में 103 पुरुष, 114 महिलाएं, 11 बच्चे और 2 नवजात शिशु शामिल थे। इस हादसे में गुजरात के पूर्वमुख्यमंत्री विजय रूपाणी की भी मृत्यु हो गई, जो लंदन जा रहे थे। यह हादसा न केवल भारत, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए भी एक गहरा आघात साबित हुआ है। अब जब मुआवजे को लेकर विवाद ने कानूनीऔर नैतिक मुद्दों को जन्म दे दिया है, इस त्रासदी का न्यायसंगत समाधान तलाशना और भी आवश्यक हो गया है।

ऑपरेशन सिंदूर पर उप सेना प्रमुख का बड़ा बयान, लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह बोले – पाकिस्तान से लड़ते हुए भारत ने तीन मोर्चों पर किया सामना

ऑपरेशन सिंदूर को दो महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन इसे लेकर नई जानकारियां लगातार सामने आ रही हैं। हाल ही में राजधानी दिल्लीमें एक कार्यक्रम के दौरान डिप्टी चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (कैपेबिलिटी डेवलपमेंट एंड सस्टेनेंस) लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह ने इस सैन्य अभियान सेजुड़ी अहम बातें साझा कीं। उन्होंने कहा कि भले ही संघर्ष पाकिस्तान के खिलाफ था, लेकिन वास्तव में भारत ने तीन अलग-अलग विरोधियों कासामना किया। पाकिस्तान के साथ था चीन और तुर्की का समर्थनजनरल राहुल सिंह ने बताया कि पाकिस्तान सीधे तौर पर युद्ध के मैदान में था, लेकिन चीन ने उसे हर स्तर पर सहयोग दिया। पाकिस्तान की सेना कालगभग 81% सैन्य साजोसामान चीनी मूल का है, और इस युद्ध के दौरान चीन ने अपने हथियारों को भारत के खिलाफ एक तरह से “लाइव लैब” कीतरह परखा। इसके अलावा, तुर्की ने भी पाकिस्तान को तकनीकी और मानव संसाधन दोनों तरह से समर्थन दिया। तुर्की ने संघर्ष के समय ड्रोन औरप्रशिक्षित कर्मियों के माध्यम से पाकिस्तान की मदद की। चीन ने दी भारत के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों की जानकारीएक और चौंकाने वाला खुलासा करते हुए उन्होंने कहा कि जब भारत और पाकिस्तान के बीच डीजीएमओ स्तर की बातचीत चल रही थी, तबपाकिस्तान को भारत के कुछ महत्वपूर्ण सैन्य वेक्टर्स की जानकारी थी, जो उसे चीन से मिली थी। उन्होंने इस पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भारतको अपनी एयर डिफेंस प्रणाली को और मजबूत करने की दिशा में तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। ऑपरेशन सिंदूर में भारत की रणनीतिक स्पष्टताऑपरेशन सिंदूर के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया कि भारत की रणनीतिक सोच इस बार बेहद स्पष्ट थी। वर्षों पहले की तरह अब भारत केवलदर्द सहने की नीति पर नहीं चल रहा। उन्होंने कहा कि टारगेट्स के चयन में गहन तकनीकी और मानवीय खुफिया सूचनाओं का इस्तेमाल किया गया।कुल 21 संभावित लक्ष्यों की पहचान की गई, जिनमें से नौ पर हमला करने का निर्णय अंतिम चरण में लिया गया। यह निर्णय एक सोच-समझ करतय की गई रणनीति का हिस्सा था। युद्ध की समय पर रोक भी रणनीति का हिस्साउपसेना प्रमुख ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एक अहम बात यह थी कि भारत को हर समय रणनीतिक बढ़त बनाए रखनी थी। उन्होंने कहा, “हमें हमेशा ‘एस्केलेशन लैडर’ के शीर्ष पर रहना चाहिए। युद्ध शुरू करना आसान होता है, लेकिन उसे नियंत्रित करना कठिन होता है। इसलिए, युद्ध कोउचित समय पर रोकना एक बेहतरीन और सटीक रणनीतिक चाल थी।” लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह के इन बयानों से स्पष्ट है कि ऑपरेशन सिंदूर केवल एक जवाबी सैन्य कार्रवाई नहीं था, बल्कि एक गहराई से सोच-समझकर बनाई गई बहुआयामी रणनीति थी, जिसने भारत को न केवल सैन्य मोर्चे पर बल्कि रणनीतिक स्तर पर भी मजबूती प्रदान की।

उत्तर प्रदेश में 5000 से अधिक स्कूल बंद करने के फैसले पर लोकदल का हमला, कहा – शिक्षा के अधिकार पर सीधा हमला

लोकदल के अध्यक्ष सुनील सिंह ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा राज्यभर में 5000 से अधिक सरकारी विद्यालयों को बंद करने की योजना को दुर्भाग्यपूर्णऔर शिक्षा विरोधी बताया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला न सिर्फ गरीब, ग्रामीण और वंचित वर्ग के बच्चों को शिक्षा से दूर करेगा, बल्कि हजारोंशिक्षकों की नौकरियां भी संकट में डाल देगा। संविधान द्वारा शिक्षा को एक मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी गई है, लेकिन भाजपा सरकार कायह कदम दर्शाता है कि उसकी प्राथमिकता में शिक्षा, बच्चों का भविष्य और शिक्षक नहीं हैं, बल्कि बजट कटौती और शिक्षा का निजीकरण है। सुनील सिंह ने मांग की है कि सरकार इस योजना को तुरंत वापस ले और सभी सरकारी विद्यालयों में मूलभूत सुविधाएं जैसे कि योग्य शिक्षक, स्वच्छशौचालय, पुस्तकालय और स्मार्ट क्लास की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में निजीकरण को बढ़ावा देने केबजाय सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली को सशक्त करना चाहिए। लोकदल ने स्पष्ट किया है कि वह इस फैसले के खिलाफ सड़क से लेकर विधानसभा तक संघर्ष करेगा। पार्टी अध्यक्ष ने कहा, “हम उत्तर प्रदेश केबच्चों का भविष्य अंधकार में नहीं जाने देंगे। हर बच्चे को शिक्षा का अधिकार है, और यही हमारा वादा है।”

भाजपा ने सत्ता में आते ही पुरानी गाड़ियों पर प्रतिबंध लगाने का लिया था फैसला, बोले- सौरभ भारद्वाज

दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने शुक्रवार को प्रेस वार्ता में आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी ने राजधानी में सरकार बनाते ही पुरानीगाड़ियों पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय ले लिया था और अब कोर्ट के आदेश का बहाना बनाकर जनता को भ्रमित कर रही है। उन्होंने बताया कि एक मार्च को पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने ऐलान किया था कि 31 मार्च के बाद पुरानी गाड़ियों को पेट्रोल या डीज़ल नहींमिलेगा, जबकि जिस सीएक्यूएम आदेश का हवाला अब दिया जा रहा है, वह तो 23 अप्रैल को जारी हुआ। इससे साफ है कि निर्णय पहले ही लेलिया गया था और अब ऑटोमोबाइल कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए यह कदम उठाया गया। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि वर्ष 2015 में एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट ने 10 साल से पुरानी गाड़ियों पर प्रतिबंध लगाने के आदेश दिए थे, लेकिन तबआम आदमी पार्टी की सरकार ने जनहित को प्राथमिकता दी और ऐसे कोई कठोर प्रतिबंध नहीं लगाए। लेकिन भाजपा सरकार ने सत्ता में आने के कुछही महीनों के भीतर पेट्रोल-डीज़ल आपूर्ति पर रोक लगाकर जनता को नई गाड़ी खरीदने के लिए मजबूर किया। सीएक्यूएम का आदेश भाजपा सरकार की रणनीति का हिस्सा थाउन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने केंद्र के अधीन काम करने वाले सीएक्यूएम से मिलकर पहले से ही पूरी योजना बना ली थी। इसके तहत23 अप्रैल को एक पत्र लेकर औपचारिकता पूरी की गई, जबकि मंत्री पहले ही घोषणा कर चुके थे। यह दर्शाता है कि यह कदम सुनियोजित था औरइसका उद्देश्य था लाखों नई गाड़ियों की बिक्री कराना। भ्रष्टाचार की आशंका, जांच की मांगआप नेता ने मांग की कि इस पूरे निर्णय प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराई जाए, क्योंकि यह एक बड़े भ्रष्टाचार की ओर संकेत करता है। उन्होंने पूछा किआखिर यह योजना किसने बनाई, किन अधिकारियों या नेताओं की भूमिका थी, और किसे आर्थिक लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई। थ्री व्हीलर नीति पर भी यू–टर्नसौरभ भारद्वाज ने याद दिलाया कि सरकार बनने के बाद भाजपा ने थ्री व्हीलर वाहनों पर भी ऐसा ही तुगलकी आदेश जारी किया था, जिसके तहतकेवल इलेक्ट्रिक थ्री व्हीलर की अनुमति दी गई और पुराने वाहन हटाने की कोशिश की गई। लेकिन ऑटो चालकों के विरोध के बाद सरकार को वहनिर्णय भी वापस लेना पड़ा। जनता के विरोध के बाद यू–टर्नउन्होंने कहा कि भाजपा मंत्री ईंधन प्रतिबंध को लेकर अपनी पीठ थपथपा रहे थे और जनता पर धौंस जमाई जा रही थी। लेकिन जैसे हीदिल्लीवासियों ने विरोध किया, सरकार को यू-टर्न लेना पड़ा और पुरानी गाड़ियों पर लगाया गया प्रतिबंध वापस लेना पड़ा। उन्होंने कहा कि 03 जुलाई को मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा द्वारा सीएक्यूएम को लिखा गया पत्र केवल लीपापोती है और इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

सांसद प्रवीन खंडेलवाल का निरीक्षण दौरा, चावड़ी बाजार, सीताराम बाजार और माता सुंदरी क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने व सड़कों की मरम्मत केनिर्देश

चांदनी चौक से सांसद श्री प्रवीन खंडेलवाल ने बृहस्पतिवार को चावड़ी बाजार, सीताराम बाजार और माता सुंदरी गुरुद्वारा क्षेत्र का निरीक्षण किया।इस दौरान उनके साथ दिल्ली नगर निगम के शहरी क्षेत्र उपायुक्त, दिल्ली पुलिस के मध्य जिला उपायुक्त, जल बोर्ड, लोक निर्माण विभाग (PWD), बीएसईएस, दिल्ली मेट्रो सहित कई विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। दौरे में चांदनी चौक जिला भाजपा अध्यक्ष श्री अरविंद गर्ग, भाजपा केमीडिया प्रमुख प्रवीण शंकर कपूर, कार्यालय मंत्री अमित गुप्ता और नेता दीप्ति इंदौरा भी सम्मिलित हुए।अतिक्रमण और सड़कों की हालत पर दिए स्पष्ट निर्देशसांसद खंडेलवाल ने चावड़ी बाजार क्षेत्र में कुछ स्थायी अतिक्रमणों को हटाने के लिए नगर निगम अधिकारियों को निर्देशित किया। साथ ही दिल्लीजल बोर्ड और लोक निर्माण विभाग को निर्देश दिया कि वे क्षेत्र में धंसे हुए सीवर और गड्ढों की शीघ्र मरम्मत करें। उन्होंने अवैध पार्किंग और रिक्शासंचालन पर नियंत्रण के लिए पुलिस को आवश्यक कदम उठाने को कहा। हौजकाज़ी चौक और सीताराम बाजार पर विशेष फोकसहौजकाज़ी चौक क्षेत्र में अवैध स्कूटर पार्किंग हटाने को लेकर सांसद ने पुलिस को निर्देश दिए। वहीं, सीताराम बाजार की सड़कों की मरम्मत कराने औरपटरी दुकानदारों, जो स्थानीय निवासी भी हैं, को व्यवस्थित तरीके से वहीं बैठाने के निर्देश दिए ताकि बाजार व्यवस्था बनी रहे और व्यापारियों कोनुकसान न हो।माता सुंदरी मार्ग पर अवैध कब्जों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारीसांसद ने नगर निगम अधिकारियों से कहा कि माता सुंदरी रोड, विशेष रूप से दीनदयाल उपाध्याय पार्क के पीछे, लोकनायक अस्पताल के गेट के पासऔर गुरुद्वारे के आसपास मौजूद कबाड़ियों के अवैध कब्जों को हटाने के लिए ठोस योजना तैयार की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रकार केअतिक्रमण क्षेत्र की सफाई, सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को बाधित कर रहे हैं, जिन्हें हटाना अत्यंत आवश्यक है। सार्वजनिक सुविधाओं में सुधार हेतु प्रतिबद्धतासांसद प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि उनका उद्देश्य क्षेत्र के नागरिकों को बेहतर आधारभूत सुविधाएं और साफ-सुथरा वातावरण प्रदान करना है। इसदिशा में संबंधित विभागों के साथ मिलकर निरंतर निरीक्षण और सुधार कार्य जारी रहेंगे।

आप का केंद्र पर हमला, पुराने वाहनों पर रोक से 61 लाख परिवार प्रभावित, मनीष सिसोदिया ने बताया जनविरोधी फैसला

आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में पुराने वाहनों पर प्रतिबंध लगाने के केंद्र सरकार के फैसले को लेकर कड़ा विरोध जताया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीषसिसोदिया ने इस नीति को एकतरफा, जनविरोधी और कंपनियों के हित में बताया। उन्होंने कहा कि यह फैसला दिल्ली के 61 लाख मध्यमवर्गीयवाहन मालिकों के लिए भारी आर्थिक बोझ बन गया है। जिन वाहनों की स्थिति अच्छी है, जिनका प्रदूषण स्तर मानकों के भीतर है, उन्हें भी स्क्रैप करनेको मजबूर किया जा रहा है। इससे साफ है कि सरकार का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण नहीं, बल्कि वाहन निर्माता कंपनियों और स्क्रैप इंडस्ट्री को मुनाफापहुंचाना है। सिसोदिया ने आरोप लगाया कि सरकार और ऑटोमोबाइल कंपनियों के बीच मिलीभगत है, जिसके तहत आम आदमी पर नई गाड़ी खरीदने का दबावबनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में लाखों ऐसे वाहन हैं जो आज भी चालू हालत में हैं, लेकिन सिर्फ उम्र के आधार पर उन्हें ईंधन देने से मनाकिया गया है। इस फैसले से सबसे ज्यादा असर सैलरी क्लास और वरिष्ठ नागरिकों पर पड़ा है। ऐसे कई बुजुर्ग हैं जिनकी कार महीने में मुश्किल सेएक-दो बार ही निकलती है, लेकिन उन्हें भी नई गाड़ी खरीदने को कहा जा रहा है। वहीं, निम्न आय वर्ग के लोग जो सेकेंड हैंड गाड़ियां खरीदकर कामचलाते हैं, उनके लिए भी यह नीति विनाशकारी है। उन्होंने यह भी बताया कि 1 जुलाई को पुराने वाहनों पर ईंधन प्रतिबंध लागू करने के साथ ही केंद्र सरकार ने ओला-उबर जैसी टैक्सी सेवाओं को पीकऑवर्स में दोगुना किराया वसूलने की अनुमति भी दे दी। इससे साफ जाहिर होता है कि सरकार सुनियोजित तरीके से निजी कंपनियों को लाभ पहुंचारही है। मनीष सिसोदिया ने इस निर्णय की तुलना वेब सीरीज ‘पंचायत’ की उस नई पंचायत से की, जिसमें छल-कपट और सत्ता के दुरुपयोग सेफैसले होते हैं। उन्होंने कहा कि आज दिल्ली की सरकार भी वैसा ही व्यवहार कर रही है—प्रशासनिक एजेंसियों और कानून व्यवस्था का दुरुपयोगकरते हुए आम जनता के खिलाफ नीतियाँ लागू की जा रही हैं। सिसोदिया ने कहा कि कार और बाइक कोई फैशन का सामान नहीं, बल्कि एक आम भारतीय परिवार का सपना होता है, जैसे कोई अपना घर बनानाचाहता है। लोग वर्षों की मेहनत और बचत से वाहन खरीदते हैं, लेकिन अब उन्हें इसे स्क्रैप कर नई गाड़ी लेने को कहा जा रहा है। उन्होंने सवाल उठायाकि जब सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के विरुद्ध अध्यादेश लाकर अपनी मनचाही नीति लागू कर सकती है, तो क्या वह 61 लाख परिवारों को राहतदेने के लिए कोई वैकल्पिक उपाय नहीं कर सकती? आम आदमी पार्टी की मांग है कि पुराने वाहनों को पेट्रोल-डीजल न देने का निर्णय तुरंत रद्द किया जाए और प्रदूषण नियंत्रण के लिए तकनीकीसमाधान अपनाए जाएं, न कि आम लोगों को आर्थिक रूप से बर्बाद कर दिया जाए। पार्टी ने सरकार से अपील की है कि वह जनता की तकलीफ कोसमझे और कंपनियों के हितों की बजाय आम नागरिकों के पक्ष में निर्णय ले।

लाजपत नगर डबल मर्डर: मां-बेटे की बेरहमी से हत्या, नौकर गिरफ्तार-दिल्ली के पॉश इलाके में सनसनीखेज वारदात

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र लाजपत नगर में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। बुधवार देर रात एक महिला और उसकेनाबालिग बेटे की उनके घर में धारदार हथियार से निर्मम हत्या कर दी गई। मृतकों की पहचान 42 वर्षीय रुचिका और उनके 14 वर्षीय बेटे कृष के रूपमें हुई है। पति की गैरमौजूदगी में हुई हत्याघटना के वक्त रुचिका का पति कुलदीप घर पर मौजूद नहीं था। जब वह देर रात लौटे तो उन्हें घर का दरवाजा बाहर से बंद मिला और सीढ़ियों परखून के धब्बे दिखे। उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी। रात करीब 9:40 बजे पुलिस मौके पर पहुंची और दरवाजा तोड़कर अंदर दाखिल हुई। अलग-अलग कमरों से मिले शवघर के भीतर दाखिल होने पर पुलिस और कुलदीप को चौंकाने वाली स्थिति देखने को मिली। रुचिका का शव बेडरूम में मिला, जबकि बेटे कृष कीलाश बाथरूम से बरामद हुई। दोनों के शरीर खून से लथपथ थे, जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि हत्या बेहद क्रूरता से की गई। ड्राइवर ने कबूला जुर्म, वजह बताई डांट-फटकारपुलिस ने घर में काम करने वाले नौकर को हिरासत में लिया है। पूछताछ में आरोपी ने अपना गुनाह कबूल करते हुए बताया कि मालकिन ने उसे डांटाथा, जिससे गुस्से में आकर उसने हत्या कर दी। आरोपी की पहचान मुकेश के रूप में हुई है, जो बिहार का रहने वाला है। वह परिवार के लिए ड्राइवरका काम करता था और साथ ही कपड़े की दुकान में भी सहायक के रूप में काम करता था। जांच जारी, इलाके में दहशत का माहौलफिलहाल पुलिस हत्या की वजहों की गहराई से जांच कर रही है। इस दोहरे हत्याकांड से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है, और स्थानीय लोग बेहदसहमे हुए हैं। पुलिस मामले की तह तक पहुंचने के लिए फॉरेंसिक जांच और कॉल डिटेल्स की भी मदद ले रही है।

पूर्व पीएम शेख हसीना को अदालत की अवमानना में छह महीने की सजा-अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने सुनाया फैसला

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को अदालत की अवमानना का दोषी पाया गया है। अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण की तीन सदस्यीयपीठ ने बुधवार को यह सजा सुनाई, जिसकी अध्यक्षता न्यायमूर्ति मोहम्मद गुलाम मुर्तजा मजूमदार ने की। बांग्लादेश के इतिहास में यह पहला मामलाहै जब किसी पूर्व प्रधानमंत्री को इस तरह की सजा दी गई है। विवादित ऑडियो क्लिप बनी सजा का आधारयह मामला उस समय उठा जब पिछले वर्ष शेख हसीना की एक ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई। इस ऑडियो में कथित तौर पर वहगोबिंदगंज उपजिला चेयरमैन शकील बुलबुल से बात करते हुए कहती हैं, “मेरे खिलाफ 227 केस दर्ज हैं, इसलिए मुझे 227 लोगों को मारने कालाइसेंस मिल गया है।” यह बयान न्यायपालिका के प्रति असम्मानजनक माना गया। शकील बुलबुल को भी मिली सजाउसी ऑडियो मामले में शामिल शकील बुलबुल को भी अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण दो महीने की जेल की सजा सुना चुका है। न्यायालय नेशेख हसीना के बयान को न केवल अदालत की अवमानना बल्कि पीड़ितों और गवाहों को डराने की कोशिश के रूप में देखा। अदालत ने सजा पर रखी शर्तेंन्यायाधिकरण ने स्पष्ट किया कि यह सजा सश्रम कारावास नहीं होगी और तब से लागू मानी जाएगी जब शेख हसीना स्वयं अदालत में आत्मसमर्पणकरेंगी या पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर लेगी। फोरेंसिक जांच ने पुष्टि की आवाजमामले की जांच कर रहे अधिकारियों ने फोरेंसिक जांच के आधार पर बताया कि वायरल ऑडियो में आवाज शेख हसीना की ही है। मुख्य अभियोजकताजुल इस्लाम ने 30 अप्रैल को यह मामला न्यायाधिकरण के समक्ष रखा था।