दक्षिणपुरी में चार एसी मैकेनिक बेहोश मिले, तीन की मौत, एक गंभीर हालत में भर्ती, पीसीआर कॉल से हुआ मामले का खुलासा

राजधानी दिल्ली के दक्षिणपुरी इलाके में शनिवार को एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। एक घर की पहली मंज़िल पर चार युवक बेहोशीकी हालत में पाए गए। यह मामला तब उजागर हुआ जब जीशान नामक युवक ने PCR कॉल कर पुलिस को सूचना दी कि उसका भाई फोन नहींउठा रहा और घर अंदर से बंद है।सभी युवक एक साथ रहते और एसी मैकेनिक का काम करते थेजीशान ने बताया कि उसके रिश्तेदार इमरान उर्फ सलमान, मोहसिन, हसीब (जो अभी अस्पताल में भर्ती है) और एक अज्ञात व्यक्ति उस घर में रह रहेथे। चारों एयर कंडीशनर (AC) मैकेनिक के रूप में काम करते थे और एक कमरे के सेट में रहते थे। पुलिस पहुंची मौके पर, अस्पताल में हुई पुष्टिपुलिस जब मौके पर पहुंची, तो देखा कि मकान की पहली मंज़िल पर चारों युवक बेहोशी की हालत में पड़े थे। उन्हें तुरंत अंबेडकर अस्पताल ले जायागया, जहां से सफदरजंग और एम्स ट्रॉमा सेंटर में शिफ्ट किया गया। इलाज के दौरान तीन युवकों को मृत घोषित कर दिया गया, जबकि एक काइलाज चल रहा है। गैस लीक या दम घुटने की आशंका, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजारपुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में दम घुटने या गैस लीक की आशंका जताई जा रही है, लेकिन असली वजह काखुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। तफ्तीश जारी, परिजनों से संपर्क में पुलिसपुलिस का कहना है कि चारों पुरुष थे, जिनमें दो सगे भाई थे। आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है और मृतकों के परिजनों से संपर्क साधा जारहा है। पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और हर एंगल पर पड़ताल की जा रही है।
राम विलास पासवान की 79वीं जयंती, सामाजिक न्याय और जनसेवा को समर्पित एक जीवन को श्रद्धांजलि, जननायक की जयंती पर देशभरमें श्रद्धांजलि

5 जुलाई को देशभर में एक ऐसे जननेता को याद किया जा रहा है, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन समाज के वंचित, दलित और गरीब तबकों के उत्थानके लिए समर्पित कर दिया। यह अवसर है लोक जनशक्ति पार्टी के संस्थापक, पूर्व केंद्रीय मंत्री और पद्म भूषण से सम्मानित स्वर्गीय राम विलासपासवान जी की 79वीं जयंती का। खगड़िया से दिल्ली तक का प्रेरक सफरबिहार के खगड़िया जिले में जन्मे राम विलास पासवान बचपन से ही सामाजिक अन्याय और भेदभाव के खिलाफ मुखर रहे। उन्होंने राजनीति को सत्ताकी बजाय सेवा का माध्यम माना और अपना पूरा जीवन उन लोगों की आवाज़ बनने में लगा दिया, जिनकी आवाज़ अक्सर अनसुनी रह जाती है।राजनीतिक करियर में जनहित सर्वोपरिपासवान जी ने कई बार संसद में जनप्रतिनिधि के रूप में भूमिका निभाई और उपभोक्ता संरक्षण, सामाजिक न्याय, और दलित अधिकारों जैसे विषयोंपर हमेशा मजबूत पक्ष रखा। वे अनेक केंद्रीय मंत्रालयों में मंत्री रहे और हर पद पर उन्होंने अपनी प्रतिबद्धता और ईमानदारी का परिचय दिया। सादगी और सेवा की राजनीति के प्रतीकउनका जीवन बेहद सरल, ईमानदार और जनसमर्पित था। उन्होंने कभी भी पद, सत्ता या प्रतिष्ठा के लिए राजनीति नहीं की। उनका मानना था किराजनीति का मूल उद्देश्य केवल सत्ता प्राप्ति नहीं, बल्कि जनसेवा होना चाहिए। श्रद्धांजलि कार्यक्रमों के माध्यम से स्मरणआज देश के विभिन्न हिस्सों में श्रद्धांजलि सभाएं, गोष्ठियाँ, और सेवा कार्यों के माध्यम से राम विलास पासवान जी को याद किया जा रहा है। नईदिल्ली स्थित लोक जनशक्ति पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। उनके पुत्रचिराग पासवान सहित कई प्रमुख नेताओं ने भावपूर्ण स्मरण किया। आदर्शों को आगे ले जाने का संकल्पहालांकि वे आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका संघर्ष, विचार और जनसेवा का भाव आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बना रहेगा। उनकीजयंती पर देश यह संकल्प ले रहा है कि उनके अधूरे कार्यों को पूरा करने के लिए प्रयास जारी रहेंगे।
बिहार में बढ़ते अपराधों पर कांग्रेस हमलावर, अखिलेश सिंह ने राज्यपाल से मांगा हस्तक्षेप

कांग्रेस नेता अखिलेश प्रसाद सिंह ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए बिहार में लगातार बिगड़ती कानून व्यवस्था पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने संवादकी शुरुआत एक वीडियो प्रस्तुति से की, जिसमें राज्य में बढ़ते अपराध, पुलिस पर हमले और आम जनता की असुरक्षा की स्थिति को दर्शाया गया।उन्होंने कहा कि कभी ज्ञान, शांति और तप की भूमि के रूप में पहचाने जाने वाला बिहार आज अपराधियों की गोलियों से दहशत में है। उन्होंने विशेषरूप से राजधानी पटना की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि एडीजी लॉ एंड ऑर्डर की मौजूदगी में ही तेजस्वी यादव के आवास के पासगोलीबारी होती है और अपराधी आसानी से फरार हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि अकेले पटना में इस वर्ष अब तक 116 हत्याएं और 41 बलात्कार कीघटनाएं हो चुकी हैं। श्री सिंह ने पुलिस मुख्यालय और एनसीआरबी के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 2005 में जहां बिहार में 1,07,664 आपराधिक मामले थे, वहीं 2022 में यह संख्या बढ़कर 3,47,835 हो गई, जो 323 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है। उन्होंने यह भी बताया कि 17 वर्षों में 53,000 सेअधिक हत्याएं हुईं और हत्या के प्रयास के 98,169 मामले दर्ज हुए। जघन्य अपराधों में 226 प्रतिशत, महिला अपराधों में 336 प्रतिशत, महिलाओंके अपहरण में 1,097 प्रतिशत और बच्चों के खिलाफ अपराधों में 7,062 प्रतिशत की खतरनाक वृद्धि दर्ज की गई। दलित उत्पीड़न के मामलों मेंबिहार देश में उत्तर प्रदेश के बाद दूसरे स्थान पर है। उन्होंने ताजा घटनाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि बीती रात पटना के प्रतिष्ठित व्यापारी गोपाल खेमका की उनके घर के पास हत्या कर दी गई, जबकि वह समाज सेवा और स्वास्थ्य सेवा जैसे क्षेत्रों में सक्रिय थे। यह वारदात उस इलाके में हुई जहां वरिष्ठ पुलिस अधिकारी रहते हैं, जो राज्य कीसुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। उन्होंने कहा कि जब-जब बिहार में भाजपा और नीतीश कुमार की सरकार बनती है, तब-तब अपराधों मेंवृद्धि देखी जाती है और जनता को भगवान भरोसे छोड़ दिया जाता है। उन्होंने राज्यपाल से अपील की कि इस भयावह स्थिति को देखते हुए वे तत्काल हस्तक्षेप करें और सरकार पर दबाव बनाएं कि विधानसभा का विशेषसत्र बुलाकर कानून व्यवस्था और चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची से दो करोड़ नामों को हटाने जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा हो। उन्होंने चुनाव आयोग परभाजपा के इशारे पर काम करने का आरोप लगाते हुए इसे लोकतंत्र के खिलाफ साजिश बताया। अंत में उन्होंने कांग्रेस पार्टी की ओर से यह स्पष्ट मांगरखी कि बिहार में बिगड़ती स्थिति को देखते हुए दो दिवसीय विधानसभा सत्र बुलाया जाए, ताकि जनता की जान-माल की सुरक्षा और लोकतंत्र कीरक्षा के लिए समाधान निकाला जा सके।
बिलावल भुट्टो का बयान, मसूद अजहर की लोकेशन की जानकारी नहीं, भारत ठोस सबूत दे तो करेंगे गिरफ्तारी

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी ने अल जज़ीरा को दिए एक इंटरव्यू में कहा है किपाकिस्तान के पास जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर के संबंध में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। उन्होंने दावा किया कि यदि भारत सरकार विश्वसनीयसबूत पेश करती है कि अजहर पाकिस्तान की सरजमीं पर है, तो उसे गिरफ्तार करने के लिए पाकिस्तान तैयार है। बिलावल ने यह भी कहा कि मसूद अजहर संभवतः अफगानिस्तान में हो सकता है, क्योंकि वह वहां लंबे समय से सक्रिय रहा है। उन्होंने पश्चिमी देशोंकी सेना की वापसी और तालिबान की सत्ता में वापसी का ज़िक्र करते हुए कहा कि, “अगर नाटो जैसी ताकतवर सेना उसे अफगानिस्तान में नहीं पकड़सकी, तो पाकिस्तान से यह अपेक्षा करना व्यावहारिक नहीं होगा।” भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पृष्ठभूमि में आया बयानभुट्टो का यह बयान ऐसे समय में आया है जब हाल ही में भारत ने “ऑपरेशन सिंदूर” के तहत पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर हमला कर कई शिविरोंको तबाह किया है। भारतीय सैन्य कार्रवाई में जैश-ए-मोहम्मद के बहावलपुर स्थित बेस और लश्कर-ए-तैयबा के मुरिदके हेडक्वार्टर को निशाना बनायागया था। मसूद अजहर ने खुद दावा किया कि इस हमले में उसके 10 परिजन और 4 सहयोगी मारे गए। हाफिज सईद पर न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट को बताया गलतजब इंटरव्यू के दौरान भुट्टो से न्यूयॉर्क टाइम्स की उस रिपोर्ट पर सवाल किया गया, जिसमें दावा किया गया था कि लश्कर सरगना हाफिज सईदखुलेआम घूम रहा है, तो उन्होंने इस रिपोर्ट को “तथ्यात्मक रूप से गलत” बताते हुए कहा कि हाफिज सईद फिलहाल पाकिस्तान की हिरासत में है। आतंकवाद के खिलाफ सहयोग की बातबिलावल भुट्टो ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद से मुकाबले के लिए सभी देशों को मिलकर काम करना चाहिए और संदिग्ध आतंकवादियोंकी सूचनाएं आपस में साझा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस सहयोग से लंदन, न्यूयॉर्क और पाकिस्तान जैसे शहरों में कई आतंकी हमलों को टालनेमें मदद मिली है। भारत के मोस्ट वांटेड में शामिल है मसूद अजहरगौरतलब है कि मसूद अजहर भारत के सबसे वांछित आतंकियों में शामिल है और उस पर कई बड़े आतंकी हमलों की साजिश रचने का आरोप है।इनमें 2001 का संसद हमला, 2008 का मुंबई हमला, 2016 में पठानकोट एयरबेस पर हमला और 2019 का पुलवामा आत्मघाती हमला प्रमुखहैं। संयुक्त राष्ट्र ने उसे 2019 में वैश्विक आतंकवादी घोषित किया था।
ट्रेड डील पर सियासत गरमाई, राहुल गांधी के बयान पर पीयूष गोयल का पलटवार, कहा-‘राष्ट्रहित सर्वोपरि’

राहुल गांधी के तंज का जवाबअमेरिका के साथ ट्रेड डील को लेकर देश की दो प्रमुख राजनीतिक पार्टियोंकांग्रेस और बीजेपी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। कांग्रेस नेता राहुलगांधी द्वारा प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधने के बाद केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने पलटवार करते हुए कहा कि भारत अब आत्मविश्वास सेभरा हुआ देश है जो किसी भी समझौते में राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखता है। ‘हम डेडलाइन नहीं, राष्ट्रीय हित देखते हैं’पीयूष गोयल ने अमेरिका के साथ चल रही व्यापार वार्ता पर कहा कि भारत किसी भी डेडलाइन के दबाव में आकर समझौता नहीं करता। उन्होंने स्पष्टकिया कि समझौता तभी किया जाएगा जब वह देश के हित में हो। इसी बयान को लेकर राहुल गांधी ने तंज कसते हुए कहा था कि “पीयूष गोयलचाहे जितनी छाती पीट लें, मोदी ट्रंप के टैरिफ के आगे झुक जाएंगे।” ‘ये नया भारत है, आत्मविश्वासी भारत’केंद्रीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि यह नया भारत है, जो आत्मविश्वास से परिपूर्ण है और वैश्विक मंच पर मजबूती से अपनी बात रखता है। उन्होंने कहाकि भारत किसी भी देश से मुकाबला करने के लिए पूरी तरह तैयार है और दुनिया के सामने अब झुकने का सवाल ही नहीं उठता। यूपीए शासन पर निशानागोयल ने पूर्ववर्ती यूपीए सरकार पर हमला करते हुए कहा कि वह दौर ऐसा था जब भारत बिना राष्ट्रीय हित के भी समझौतों के लिए तैयार हो जाताथा। उन्होंने कहा कि आज भारत की सरकार हर नीति और बातचीत में सबसे पहले राष्ट्रहित को महत्व देती है। ‘राहुल गांधी को जनता ने नकारा’राहुल गांधी पर कटाक्ष करते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि अब न तो उन्हें जनता गंभीरता से लेती है और न ही उनकी पार्टी को। उन्होंने कहा कि कांग्रेसने आज तक देश के विकास के लिए कोई ठोस और सकारात्मक एजेंडा पेश नहीं किया है। कांग्रेस केवल नकारात्मकता फैलाने में व्यस्त रहती है, जिसकी वजह से वह जनता का विश्वास लगातार खोती जा रही है। टैरिफ विवाद बना राजनीति का मुद्दागौरतलब है कि अमेरिका ने अपने व्यापार घाटे को कम करने के उद्देश्य से भारत समेत 100 देशों पर टैरिफ लगाए थे। भारत पर 26 वस्तुओं पर टैरिफलागू किया गया था, जिसे बाद में 90 दिनों के लिए स्थगित किया गया। यह अवधि 9 जुलाई को समाप्त हो रही है और इसी को लेकर भारत मेंराजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
मध्यप्रदेश में मॉनसून का कहर, कई जिलों में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट, 20 सेमी तक वर्षा की चेतावनी

मध्यप्रदेश में इस समय मॉनसून पूरे जोर पर है और राजधानी भोपाल समेत कई जिलों में लगातार बारिश हो रही है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) नेआज के लिए राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। पूर्वी मध्यप्रदेश के जिलों जैसे सतना, रीवा, सीधी, सिंगरौली, मंडला, बालाघाट, छिंदवाड़ा और नर्मदापुरम में मूसलाधार बारिश की संभावना जताई गई है। इन इलाकों में 64.5 मिमी से लेकर 204.4 मिमी तक वर्षा होसकती है, जिसको देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी वर्षा यानी 20 सेमी से अधिक बारिश की आशंका भीहै। वहीं, पश्चिमी मध्यप्रदेश के इंदौर, उज्जैन, रतलाम और शिवपुरी जिलों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तारसे तेज हवाएं चलने का पूर्वानुमान है। तापमान की बात करें तो अधिकतम तापमान में 3-5 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान में 2-4 डिग्री कीगिरावट दर्ज की जा सकती है। भोपाल में आज का अधिकतम तापमान 32 डिग्री और न्यूनतम 24 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है। राज्य के प्रमुख शहरों की बात करें तो भोपाल में सुबह से बादल छाए हुए हैं और दोपहर तक रुक-रुक कर बारिश होने की संभावना है। इंदौर में हल्कीसे मध्यम बारिश हो सकती है, जिससे उमस से राहत मिलेगी, लेकिन तेज हवाओं का असर दिखेगा। ग्वालियर में मध्यम बारिश के साथ बिजली गिरनेकी आशंका जताई गई है। जबलपुर में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट है और प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वालों को सतर्क रहने की सलाहदी है। रीवा और सिंगरौली जिलों में 4 से 8 इंच तक की भारी वर्षा की संभावना है, जिससे बाढ़ की स्थिति बन सकती है। इस वर्ष मॉनसून ने मध्यप्रदेश में 16 जून को बड़वानी, खरगोन, खंडवा और बुरहानपुर से प्रवेश किया था, जो सामान्य तिथि से केवल एक दिन देर था।बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी और गुजरात के सौराष्ट्र-कच्छ क्षेत्र में बने दबाव के चलते राज्य में मॉनसून की धाराएं बेहद सक्रिय हैं। जून महीने मेंसामान्य से 10-15 प्रतिशत अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई थी, और जुलाई की शुरुआत में भी यह सिलसिला जारी है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि 5 से 8 जुलाई तक राज्य में बारिश का दौर तेज रहेगा, जबकि 7 जुलाई के बाद बारिश की तीव्रता थोड़ी घट सकतीहै। हालांकि, 9 जुलाई तक हल्की से मध्यम बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। मॉनसून ट्रफ लाइन और सक्रिय साइक्लोनिकसर्कुलेशन सिस्टम की वजह से फिलहाल बारिश की रफ्तार में कोई खास कमी नहीं देखी जा रही है।
मराठी भाषा विवाद ने पकड़ा तूल, कारोबारी सुशील केडिया के ऑफिस पर MNS कार्यकर्ताओं का हमला

महाराष्ट्र में मराठी भाषा को लेकर जारी राजनीतिक विवाद अब उद्योग जगत तक पहुंच गया है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के कार्यकर्ताओं नेप्रसिद्ध कारोबारी सुशील केडिया के कार्यालय पर हमला कर दिया। कार्यकर्ताओं ने ईंट और पत्थर बरसाकर ऑफिस में जमकर तोड़फोड़ की।सोशल मीडिया पोस्ट बना हमले की वजहयह घटना 3 जुलाई को सुशील केडिया द्वारा किए गए एक सोशल मीडिया पोस्ट के बाद हुई। उन्होंने राज ठाकरे को टैग करते हुए लिखा था कि वेपिछले 30 वर्षों से महाराष्ट्र में रह रहे हैं, लेकिन उन्हें मराठी नहीं आती। इस बयान से MNS कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा।प्लास्टिक बैग में भरकर लाए थे ईंट-पत्थरMNS के 5-6 कार्यकर्ता नीले रंग के प्लास्टिक बैग में ईंट-पत्थर भरकर केडिया के दफ्तर पहुंचे और हमला शुरू कर दिया। मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मीने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन जब तक बैग खाली नहीं हो गए, तब तक वे लगातार पत्थरबाजी करते रहे। सुशील केडिया ने दिया करारा जवाबहमले के बाद सुशील केडिया ने फिर सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा, “राज ठाकरे अपने कार्यकर्ताओं का डर दिखाकर मुझे मराठीनहीं सिखा सकते। धमकियों से नहीं, प्यार से ही लोग एकजुट होते हैं।” पुलिस ने की त्वरित कार्रवाईइस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद महाराष्ट्र पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया। पुलिस ने हमले में शामिल पांच MNS कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया है और उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। उद्धव ठाकरे ने ली चुटकीदिलचस्प बात यह रही कि कई सालों बाद राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे एक ही मंच पर नजर आए। इस मौके पर उद्धव ठाकरे ने सुशील केडिया परतंज कसते हुए उन्हें “भेड़िया” बताया। उद्धव ने कहा, “आजकल कुछ लोग भेड़िए बनकर समाज में ‘बांटो और राज करो’ की नीति अपना रहे हैं।”
महाराष्ट्र की राजनीति में ऐतिहासिक पल, 20 साल बाद एक मंच पर राज और उद्धव ठाकरे,‘आवाज मराठीचा’ महारैली में मराठी अस्मिता, भाषा और एकता पर हुआ जोरदार प्रदर्शन

महाराष्ट्र में शनिवार को एक ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला जब ठाकरे परिवार के दो चचेरे भाई राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे करीब 20 वर्षों के लंबेअंतराल के बाद एक ही मंच पर साथ नजर आए। यह ऐतिहासिक मिलन मुंबई के वर्ली स्थित एनएससीआई डोम में ‘आवाज मराठीचा’ नामकमहारैली के दौरान हुआ। इस अवसर पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने राज्य सरकार द्वारा तीन-भाषा फॉर्मूले को वापस लेने केफैसले को ‘मराठी अस्मिता की जीत’ बताया। जो बालासाहेब नहीं कर पाए, वो फडणवीस ने कर दिखायाराज ठाकरे ने मंच से कहा, “मैंने पहले भी कहा था कि मेरा महाराष्ट्र किसी भी राजनीति और झगड़े से बड़ा है। आज 20 साल बाद मैं और उद्धव एकसाथ आए हैं। जो काम बालासाहेब ठाकरे नहीं कर पाए, वो देवेंद्र फडणवीस ने कर दिखाया हमें दोनों भाइयों को एक साथ ला दिया।” उनके इस बयान पर पूरा पंडाल तालियों से गूंज उठा। उन्होंने कहा कि बिना किसी का नाम लिए, जो लोग मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करने कीकोशिश कर रहे हैं, वे सफल नहीं होंगे। “अगर किसी ने मुंबई पर हाथ डालने की हिम्मत की, तो मराठी मानुष की ताकत देखेगा,” उन्होंने चेतावनी दी। अचानक हिंदी थोपने की ये ज़िद क्यों?राज ठाकरे ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा, “अचानक हिंदी भाषा को क्यों थोपने की कोशिश हो रही है? यह कोई भाषा प्रेम नहीं, बल्किएजेंडा है। हमारे ऊपर हिंदी थोपने की कोशिश हो रही है, जो हम कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने दोहराया कि जब मराठी बच्चे इंग्लिश मीडियम में पढ़ते हैं तो उनकी मराठी पहचान पर सवाल उठते हैं, जबकि बीजेपी के कई नेता खुद मिशनरीस्कूलों में पढ़े, फिर उनके हिंदुत्व पर कोई सवाल नहीं उठा। “यह दोगलापन अब नहीं चलेगा,” उन्होंने कहा। बालासाहेब का स्पष्ट रुख, ‘मुख्यमंत्री सिर्फ मराठी मानुष होगा’राज ठाकरे ने एक पुराना वाकया साझा करते हुए बताया कि 1999 में जब बीजेपी-शिवसेना गठबंधन सरकार बनने वाली थी और बीजेपी नेता सुरेशजैन को मुख्यमंत्री बनाने की बात सामने आई थी, तब बालासाहेब ठाकरे ने स्पष्ट कहा था कि महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री सिर्फ मराठी व्यक्ति ही होगा। दक्षिण भारत से सीखो भाषा के लिए एकजुटता क्या होती हैउन्होंने तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि “स्टालिन, जयललिता, कनीमोझी, ए.आर. रहमान ये सभी इंग्लिश मीडियम से पढ़े हैं, लेकिन उनकी मातृभाषा के लिए उनका प्रेम कम नहीं हुआ। रहमान ने तो एक बार हिंदी भाषण सुनकर मंच ही छोड़ दिया था।” राज ने कहा, “अगर मैं हिब्रू भी सीख लूं, तो किसी को क्या आपत्ति होनी चाहिए? असल सीख तो दक्षिण भारत से मिलती है, जहां लोग अपनी भाषाके लिए एकजुट रहते हैं। लेकिन महाराष्ट्र में जाति के नाम पर लोगों को बांटा जा रहा है ताकि मराठी भाषा के लिए बनी एकता टूट जाए।” सेना की रेजीमेंट की तरह मराठी समाज भी एकजुट होराज ठाकरे ने भारतीय सेना का उदाहरण देते हुए कहा, “सेना में मराठा, बिहार, नागा रेजीमेंट हैं सब अलग हैं, पर जब युद्ध होता है तो सब एक साथभारत के लिए लड़ते हैं। वैसे ही मराठी समाज को भी एकजुट होकर अपनी भाषा और संस्कृति के लिए लड़ना चाहिए।” मीरा रोड की घटना पर संतुलित प्रतिक्रियाहाल ही में हुई मीरा रोड की घटना पर बोलते हुए राज ने कहा, “अगर किसी झगड़े में किसी को थप्पड़ पड़ गया और वो गुजराती निकला तो क्या करें? क्या माथे पर लिखा होता है कौन है? लेकिन किसी पर बेवजह हाथ न उठाओ, और कोई ज़्यादा करे तो चुप भी मत रहो। और हां, लड़ाई के वीडियोबनाना बंद करो।” उन्होंने कहा कि उनके कई गुजराती मित्र हैं जो दिल से मराठी संस्कृति से जुड़े हैं। “मैं उन्हें ‘गुज-राठी’ कहता हूं, क्योंकि वे दिल से मराठी हैं।” “सरकारें आती-जाती रहेंगी, लेकिन मराठी अस्मिता से कोई समझौता नहीं”राज ठाकरे ने भाषण के अंत में स्पष्ट किया, “सरकारें बनती और टूटती रहेंगी, गठबंधन बदलते रहेंगे, लेकिन मराठी भाषा और संस्कृति के मुद्दे पर कोईसमझौता नहीं होगा। यही बालासाहेब ठाकरे का सपना था, और यही हमारी जिम्मेदारी है।”
गोलियों का बिहार, कांग्रेस ने नीतीश सरकार को घेरा, कहा – NDA राज में कानून व्यवस्था रसातल में, हर कोने से उठ रही है ‘गुंडाराज’ कीचीख

AICC ने आज एक प्रेस ब्रीफिंग में बिहार की कानून व्यवस्था को लेकर नीतीश कुमार और केंद्र की NDA सरकार पर तीखा हमला बोला। कांग्रेस नेहाल की घटनाओं और सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि आज बिहार में हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि राजधानी पटना की सड़कों परभी लोग सुरक्षित नहीं हैं। बीती रात पटना में एक प्रतिष्ठित डॉक्टर और हॉस्पिटल संचालक गोपाल खेमका की गोली मारकर हत्या कर दी गई, जब वेरात 11 बजे अपने घर लौट रहे थे। ये वारदात मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष के आवास के करीब हुई, जिससे साफ है कि अपराधी अब किसी का खौफनहीं मानते। वहीं, इसी सप्ताह बोरिंग रोड जैसे संवेदनशील क्षेत्र में दिनदहाड़े ADG लॉ एंड ऑर्डर की मौजूदगी में आठ राउंड फायरिंग होना पुलिस कीनाकामी को दर्शाता है। AICC ने NCRB और पुलिस मुख्यालय के आंकड़ों के हवाले से बताया कि 2005 में जहां बिहार में कुल अपराध 1.07 लाख थे, वहीं 2022 मेंयह आंकड़ा बढ़कर 3.47 लाख हो गया, यानी 323% की बढ़ोतरी। पिछले 17 वर्षों में बिहार में 53,150 हत्याएं हुईं, जो यूपी के बाद देश में दूसरास्थान है। हत्या के प्रयास के 98,169 मामले दर्ज हुए हैं 262% की वृद्धि के साथ। बलात्कार, अपहरण, डकैती जैसे जघन्य अपराधों में 206% औरमहिलाओं के खिलाफ अपराधों में 336% की बढ़ोतरी हुई है। महिलाओं के अपहरण के मामलों में 1,097% और बच्चों के खिलाफ अपराधों मेंचौंकाने वाली 7,062% की वृद्धि दर्ज की गई है। दलित उत्पीड़न में बिहार देश में यूपी के बाद दूसरे स्थान पर है। सिर्फ मई-जून 2025 की घटनाओं पर नजर डालें तो बिहार हत्या और यौन अपराधों से थर्रा उठा है। बक्सर में बालू व्यवसाय को लेकर तीन भाइयोंकी हत्या कर दी गई। सहरसा में जेडीयू नेता विनोद भगत की गोली मारकर हत्या हुई। पटना के दानापुर और फतुहा में युवकों की बीच सड़क पर हत्याहुई, जबकि नालंदा—जो मुख्यमंत्री का गृह जिला है—वहां दो लोगों को गोली मारी गई। आरा में 72 घंटों में आठ लोगों को गोली मारी गई, जिनमेंतीन की मौत हो गई। बेतिया में मछली व्यवसायी की हत्या के बाद भीड़ ने पुलिस वाहन फूंक दिया। वहीं मुंगेर और अररिया में मार्च 2025 में दोASI की हत्या की गई। बच्चियों के खिलाफ हालिया जघन्य अपराधों ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। पटना में नाबालिग बच्ची से गैंगरेप, मुजफ्फरपुर में 5वीं कीछात्रा की रेप के बाद गला रेतकर हत्या, छपरा में स्कूल से लौटती छात्रा का अपहरण कर सामूहिक बलात्कार और हत्या, बेतिया में ढाई साल कीबच्ची से दुष्कर्म, और सीतामढ़ी, बगहा, अररिया व मुंगेर में 11-16 वर्ष की कई बच्चियों से गैंगरेप की घटनाएं सामने आई हैं। AICC के अनुसार, बिहार में हर दिन औसतन 28 महिलाओं का अपहरण होता है और प्रतिदिन 55 महिला अपराध दर्ज होते हैं, जिनमें 98% मामले अब भी अदालतों मेंलंबित हैं। अन्य वीभत्स घटनाओं में सीतामढ़ी में पांच बच्चों को नग्न कर सड़कों पर घुमाना, कटिहार में महिला की हत्या और बच्ची के घायल होने, मधेपुरा मेंपति की हत्या कर शव को फांसी में लटकाना और नालंदा में महिला की हत्या कर सूटकेस में शव फेंकना शामिल है। राज्य में संगठित गैंगवार औरमाफिया संघर्ष भी लगातार बढ़े हैं। फरवरी में बेगूसराय में दो गैंगों के बीच 25 राउंड फायरिंग हुई। मोकामा में पूर्व विधायक अनंत सिंह से जुड़े गैंगऔर प्रतिद्वंद्वी गिरोहों के बीच तीन दिनों तक गोलीबारी हुई। पंडारक में एक युवक को घर के सामने गोली मार दी गई, जबकि बांका में बालू माफियाके बीच संघर्ष में तीन लोग घायल हुए। AICC ने इन घटनाओं को ‘गोलियां उगलता NDA राज’ करार देते हुए कहा कि आज बिहार में कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। जबराजधानी की सड़कों पर गोलियां चल रही हों, बच्चियों से दुष्कर्म हो रहा हो और पुलिस पर हर दूसरे दिन हमले हो रहे हों, तो यह ‘सुशासन’ नहीं बल्किखुला ‘गुंडाराज’ है। कांग्रेस ने बिहार की जनता से अपील की कि अब वक्त आ गया है जब इस अराजकता के खिलाफ आवाज उठानी होगी।
श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर, ‘बम-बम भोले’ और ‘भारत माता की जय’ से गूंजे पहलगाम और बालटाल मार्ग

जम्मू, डिजिटल डेस्क – हाल ही में हुए पहलगाम आतंकी हमले और उसके बाद भारत द्वारा चलाए गए सफल ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बावजूद श्रीअमरनाथ यात्रा में श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ है, बल्कि पहले से अधिक दिखाई दे रहा है। यात्रा के पहले तीन ही दिनों में जम्मू स्थित आधारशिविर से 17,549 श्रद्धालु बालटाल और पहलगाम मार्ग से अमरनाथ के दर्शन के लिए रवाना हो चुके हैं। ऑपरेशन सिंदूर ने भरा जोश, श्रद्धालुओं में दिखा अभूतपूर्व उत्साहपहले यह आशंका जताई जा रही थी कि 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले, जिसमें 26 निर्दोष लोगों की जान गई थी, का असर इस बारकी यात्रा पर देखने को मिलेगा। लेकिन इसके विपरीत, श्रद्धालु ‘बम-बम भोले’ और ‘भारत माता की जय’ के नारों के साथ बड़ी संख्या में यात्रा मेंशामिल हो रहे हैं। रातभर भजन-कीर्तन कर श्रद्धालु पूरे जोश के साथ रवाना हो रहे हैं। हर दिन बढ़ रही संख्या, गैर-पंजीकृत श्रद्धालुओं का भी उमड़ रहा सैलाबदेशभर से भारी संख्या में श्रद्धालु जम्मू पहुंच रहे हैं। पंजीकरण की सीमा बढ़ाए जाने के बावजूद सैकड़ों श्रद्धालु एडवांस टोकन से वंचित रह जा रहे हैं।शुक्रवार को करीब 6,400 श्रद्धालुओं का तीसरा जत्था दो काफिलों में जम्मू के भगवती नगर आधार शिविर से बालटाल और पहलगाम के लिए रवानाहुआ। इनमें 4,723 पुरुष, 1,071 महिलाएं, 37 बच्चे और 580 साधु-साध्वियां शामिल हैं। दोनों मार्गों से भारी संख्या में तीर्थयात्री कर चुके हैं दर्शनअब तक करीब 14,000 श्रद्धालु पवित्र गुफा में हिमशिवलिंग के दर्शन कर चुके हैं। इनमें से 3,622 श्रद्धालु 138 वाहनों के साथ पारंपरिक 48 किलोमीटर लंबे पहलगाम मार्ग से रवाना हुए, जबकि 2,789 श्रद्धालु 153 वाहनों में सवार होकर 14 किलोमीटर लंबे लेकिन कठिन बालटाल मार्ग सेयात्रा कर रहे हैं। शहीदों को दी श्रद्धांजलि, आतंकवाद के खिलाफ एकजुटतापहलगाम मार्ग से यात्रा कर रहे श्रद्धालुओं ने आतंकी हमले में जान गंवाने वाले नागरिकों को श्रद्धांजलि दी और संकल्प लिया कि वे आतंक के भय सेपीछे नहीं हटेंगे। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी कड़े इंतजाम किए गए हैं। भगवती नगर बेस कैंप को बहुस्तरीय सुरक्षा घेरे में रखा गया है। प्रशासन के इंतजाम, अब तक 3.5 लाख से अधिक ऑनलाइन पंजीकरणजम्मू में 34 आवासीय केंद्र स्थापित किए गए हैं, जबकि तीर्थयात्रियों को रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) टैग भी जारी किए जा रहे हैं।ऑन-स्पॉट पंजीकरण के लिए 12 काउंटर भी खोले गए हैं। इस सबके बीच, अमरनाथ यात्रा न सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक बनी हुई है, बल्कि यह भारत की आतंकवाद के सामने अडिग एकता और संकल्पका भी परिचायक बन गई है।