अलीगढ़ को 1194 करोड़ की सौगात 5 अगस्त को जनसभा में करेंगें सीएम योगी, 188 परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास

सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 5 अगस्त को अलीगढ़ आ रहे हैं. इस संबंध में 3 अगस्त शाम जारी हुए कार्यक्रम में कुछ बदलाव किया गया है. जिसके तहत वे अब कलक्ट्रेट में मंडलीय समीक्षा के बाद नुमाइश मैदान में जनसभा को भी संबोधित करेंगे. जहां 1194 करोड़ 75 लाख की 188 परियोजनाओं के लोकार्पण-शिलान्यास भी तय किए गए हैं. वे शहर में 3 घंटे 50 मिनट तक रहेंगे. मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी कार्यक्रम के अनुसारमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 4 अगस्त को लखनऊ से सहारनपुर व मेरठ मंडल की समीक्षा के लिए रवाना होंगे. जनसभा को करेंगें संबोधित4 अगस्त रात वे मेरठ में विश्राम के बाद 5 अगस्त सुबह 9:50 बजे आईटीआई मैदान में बनाए जा रहे हेलीपैड पर उतरेंगे। यहां से 10 बजे कलक्ट्रेटपहुंचकर 11:15 बजे तक मंडल के मंत्री, सांसदों, विधायकों व विधान परिषद सदस्यों संग बैठक करेंगे. इसके बाद 11:15 बजे से 12:15 बजे तकमंडलीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करेंगे. इसमें मंडल के सभी अधिकारी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये जुड़े रहेंगे. इसके बाद सीएम 12:30 बजे नुमाइश मैदान पहुंचकर जनसभा को संबोधित करेंगे. इससे पहले विभिन्न विभागों की प्रदर्शनी का अवलोकन, 1194 करोड़ 75 लाख की 188 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास और चयनित लाभार्थियों को प्रमाण पत्र, लाभ वितरण करेंगे. जनसभा को गया है जोड़ासीएम युवा, विश्वकर्मा श्रम सम्मान, 70 प्लस आयुष्मान भारत गोल्डन कार्ड, एनआरएलएम क्रेडिट लिंकेज चैक, पीएम एवं सीएम आवासलाभार्थीगनों को लाभान्वित करने के साथ ही विद्यार्थियों को टैबलेट वितरण एवं अन्न प्रासन्न भी कराएंगे. इसके बाद दोपहर 1:40 बजे वे आगरा कोरवाना हो जाएंगे. अधिकारिक कार्यक्रम आने के बाद अधिकारियों ने तैयारी तेज कर दी हैं. बता दें कि अब तक सीएम का सर्किट हाउस में सिर्फसमीक्षा के लिए आने का कार्यक्रम बन रहा था. मगर इसमें बदलाव कर जनसभा को जोड़ा गया है. सीएम 12:30 बजे नुमाइश मैदान पहुंचकरजनसभा को संबोधित करेंगे। इससे पहले विभिन्न विभागों की प्रदर्शनी का अवलोकन, 1194 करोड़ 75 लाख की 188 विकास परियोजनाओं कालोकार्पण-शिलान्यास और चयनित लाभार्थियों को प्रमाण पत्र, लाभ वितरण करेंगे.
देश की पहली 100% सौर ऊर्जा और कागज रहित विधानसभा बनी दिल्ली, ई-विधान प्रणाली का शुभारंभ

दिल्ली विधानसभा ने पर्यावरण और तकनीक के क्षेत्र में मिसाल कायम की है. रविवार को केंद्रीय कानून एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने500 किलोवॉट के सौर ऊर्जा संयंत्र और नेशनल ई-विधान एप्लिकेशन (नेवा) का शुभारंभ किया. इस मौके पर विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता औरमुख्यमंत्री रेखा गुप्ता मौजूद रहीं. इस तरह दिल्ली अब देश की पहली ऐसी विधानसभा बन गई है जो पूरी तरह सौर ऊर्जा से चलेगी और कागज रहितडिजिटल कार्यवाही करेगी. सोमवार को विधानसभा के मानसून सत्र में कागज का बिल्कुल इस्तेमाल नहीं होगा। सभी विधायकों की उपस्थिति भी नेवासे ही लगेगी. वहीं, सौर संयंत्र न सिर्फ विधानसभा को 100 फीसदी नवीकरणीय ऊर्जा देगा बल्कि माह करीब 15 लाख रुपये की बचत भी कराएगा. इससे सालाना 1.75 करोड़ रुपये तक की बचत का अनुमान है. नेट मीटरिंग से अतिरिक्त बिजली भी पैदा होगी. वहीं, ई-विधान प्रणाली के जरिएविधानसभा की सारी कार्यवाही अब डिजिटल होगी जिससे समय, संसाधन और पर्यावरण की रक्षा होगी. जिम्मेदारी का है प्रतीककेंद्रीय मंत्री मेघवाल ने इसे देश के लिए नजीर बताया उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डिजिटल और स्वच्छ भारत का सपना साकारहो रहा है. दिल्ली विधानसभा की यह पहल दूसरों के लिए प्रेरणा है. उन्होंने संसदीय कार्य मंत्रालय की ओर से हरसंभव सहयोग का वादा किया. अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि 1912 में बने इस ऐतिहासिक भवन में कभी देश की पहली संसद चली थी. अब ये आधुनिक हो गई है ई-विधानप्रणाली सिर्फ 100 दिनों में तैयार हुई सोमवार सुबह 11 बजे इसका परीक्षण होगा और दोपहर 2 बजे विधानसभा का मानसून सत्र पूरी तरह से सौरऊर्जा से पैदा की गई बिजली से रौशन होगा. बिजली बचत का पैसा जनता के विकास में लगेगा. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि ये पर्यावरण के प्रतिउनकी सरकार की जिम्मेदारी का प्रतीक है. शानदार मेल का दिया करारइस साल मार्च में नागालैंड में पहली ई-विधानसभा स्थापित हुई जिसके बाद 19 राज्यों की विधानसभाएं इससे जुड़ीं. दिल्ली विधानसभा 20वीं हैं, जोई-विधान प्रणाली से चलेगी. मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने प्रोजेक्ट को कम बजट और सीमित समय में पूरा करने के लिए अध्यक्ष की तारीफ की. ऊर्जामंत्री आशीष सूद ने इसे दिल्ली के सौर ऊर्जा अभियान का हिस्सा बताया. उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट ने इसे लोकतंत्र और सतत विकास का शानदारमेल करार दिया.रविवार को विधानसभा के भीतर विधायकों का लाइव नेवा टेस्ट लिया गया. उन्हें ई-विधान में स्मार्ट डेलीगेट यूनिट्स, वोटिंग पैनल, आरएफआईडी, एनएफसी एक्सेस, रियल-टाइम दस्तावेज और एचडी कैमरों से लैस एवी सिस्टम की जानकारी दी गई. ई-विधानसभा में लॉगइन करना व फाइलों कोदेखना भी सिखाया गया.
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का निधन, आदिवासी नेता और राज्य निर्माण के पुरोधा है रहे

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का सोमवार को निधन हो गया. वे 81 साल के थे और लंबे समय से बीमार चल रहे थे. उन्होंने दिल्ली के सरगंगा राम अस्पताल में अंतिम सांसद ली. उनके बेटे और झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘आदरणीय दिशोमगुरुजी हम सभी को छोड़कर चले गए हैं। आज मैं शून्य हो गया हूं. इस बीच सर गंगा राम अस्पताल की ओर से बताया गया कि शिबू सोरेन को आजसुबह 8:56 बजे मृत घोषित कर दिया गया. लंबी बीमारी के बाद उनका निधन हो गया. वे किडनी की बीमारी से पीड़ित थे और डेढ़ महीने पहले उन्हेंस्ट्रोक भी हुआ था. पिछले एक महीने से वे लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर थे. 81 वर्षीय शिबू लंबे समय से अस्पताल में नियमित रूप से इलाज करा रहेथे। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 24 जून को अपने पिता के अस्पताल में भर्ती होने पर कहा था, ‘उन्हें हाल ही में यहां भर्ती कराया गया था. अन्याय के खिलाफ उठाई थी आवाजइसलिए हम उनसे मिलने आए थे उनकी स्वास्थ्य समस्याओं की जांच की जा रही है शिबू सोरेन पिछले 38 वर्षों से झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता थेऔर उन्हें पार्टी के संस्थापक संरक्षक के रूप में जाना जाता है. शिबू सोरेन का जन्म 11 जनवरी 1944 को रामगढ़ के नेमरा गांव में हुआ था. बचपन सेही उन्होंने आदिवासी समुदाय की समस्याओं, शोषण और अन्याय को करीब से देखा. 1960 के दशक में उन्होंने आदिवासी अधिकारों और जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष शुरू किया। 1970 के दशक में उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की स्थापना की. उनका मुख्य उद्देश्यअलग झारखंड राज्य की मांग को लेकर आंदोलन चलाना था. इस आंदोलन में उन्होंने आदिवासियों के जमीन छीनने, शोषण और अन्याय के खिलाफआवाज उठाई. गठन की दिशा में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका1980 में शिबू सोरेन पहली बार लोकसभा सदस्य बने. इसके बाद उन्होंने कई बार संसद में आदिवासी मुद्दों को उठाया और झारखंड राज्य गठन कीदिशा में सक्रिय भूमिका निभाई. उनके प्रयासों और लंबे संघर्ष के परिणामस्वरूप 15 नवंबर 2000 को झारखंड राज्य का गठन हुआ. राज्य गठन केबाद शिबू सोरेन तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री बने- 2005, 2008 और 2009 में। हालांकि, राजनीतिक अस्थिरता और गठबंधन की खींचतान केकारण उनका कार्यकाल लंबा नहीं चल सका। इसके बावजूद उन्होंने आदिवासी कल्याण, रोजगार और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए कई पहलकी. उनकी राजनीतिक यात्रा में कई उतार-चढ़ाव भी आए भ्रष्टाचार और हत्या जैसे गंभीर मामलों में वे आरोपित हुए, हालांकि बाद में कई मामलों मेंबरी भी हुए.
ट्रंप ने व्यापार घाटा कम करने के लिए पारस्परिक टैरिफ लगाने का बचाव किया, कहा ‘देश का कर्ज चुकाएंगे

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दर्जनों व्यापारिक साझेदार देशों पर पारस्परिक टैरिफ लगाने के अपने फैसले का बचाव किया है. ट्रंप ने कहा कि ऐसाकई साल पहले कर दिया जाना चाहिए था. ट्रंप ने कहा कि टैरिफ से मिलने वाले पैसों से अमेरिका अपना कर्ज उतारेगा. मीडिया से बात करते हुए ट्रंपने कहा कि ‘हम कर्ज का भुगतान करेंगे. देश में बहुत सारा पैसा आने वाला है और इतना पैसा देश में कभी एकसाथ नहीं आया होगा. इससे पहले कर्जका भुगतान करेंगे। हमें ये कई साल पहले कर देना चाहिए था. मैंने अपने पहले कार्यकाल में चीन के साथ ये किया था, लेकिन कोरोना महामारी केचलते अन्य देशों के साथ ऐसा नहीं हो सका. अमेरिका का व्यापार घाटाट्रंप ने कहा, ‘मैं किसी तरह का दबाव नहीं, बल्कि निष्पक्षता चाहता हूं. हम जहां भी और जितना हो सके, पारस्परिक कर देखना चाहते हैं। कभी-कभी, यह उनके लिए बहुत ज़्यादा हो जाता है। यह एक बहुत बड़ी राशि होगी और मैं बस इतना ही कह सकता हूं कि इससे हमारा देश सैकड़ों अरब डॉलरकमाएगा. व्हाइट हाउस में आने के छह महीनों के भीतर ही ट्रंप ने वैश्विक आर्थिक व्यवस्था को तबाह कर दिया और अमेरिका की आर्थिक ताकत काइस्तेमाल कर उन देशों को दंडित देना शुरू किया, जिनके साथ अमेरिका का व्यापार घाटा है. 2 अप्रैल को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने उन देशों से आयातपर 50 प्रतिशत तक पारस्परिक कर लगाने और लगभग सभी अन्य देशों पर 10 प्रतिशत आधारभूत कर लगाने की घोषणा की, जिनके साथ अमेरिकाका व्यापार घाटा है. आयात कारों को ठहराया उचितउन्होंने व्यापार घाटे को राष्ट्रीय आपातकाल घोषित करने के लिए 1977 के एक कानून का हवाला दिया, जिसके जरिए उन्होंने अपने व्यापक आयातकरों को उचित ठहराया. जब पारस्परिक करों की आलोचना हुई तो उन्होंने विभिन्न देशों को बातचीत का मौका देने के लिए पारस्परिक शुल्कों को 90 दिनों के लिए स्थगित कर दिया. आखिरकार, कुछ देशों ने ट्रंप की मांगों के आगे घुटने टेक दिए और अमेरिका के साथ व्यापार समझौता कर लिया. व्हाइट हाउस में आने के छह महीनों के भीतर ही ट्रंप ने वैश्विक आर्थिक व्यवस्था को तबाह कर दिया और अमेरिका की आर्थिक ताकत का इस्तेमाल करउन देशों को दंडित देना शुरू किया, जिनके साथ अमेरिका का व्यापार घाटा है.
बांग्लादेश में ‘जुलाई विद्रोह’ की बरसी पर उबाल, एनसीपी ने नया संविधान मांगा, बीएनपी ने युवाओं से समर्थन की अपील की

ढाका में रविवार को बांग्लादेश की राजनीति एक बार फिर उफान पर आ गई. जब नेशनल सिटिजन पार्टी और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के छात्रसंगठन जातीयताबादी छात्र दल ने अलग-अलग रैलियां निकालीं. ये रैलियां पिछले साल 5 अगस्त को शेख हसीना सरकार को सत्ता से हटाने वाले’जुलाई विद्रोह’ की पहली बरसी के मद्देनजर आयोजित की गईं थीं. ढाका के सेंट्रल शहीद मीनार में आयोजित रैली में NCP ने अपने 24 सूत्रीयघोषणापत्र को जारी किया. पार्टी संयोजक नाहिद इस्लाम ने ‘न्यू बांग्लादेश’ और ‘सेकेंड रिपब्लिक’ की मांग करते हुए मौजूदा संविधान को खत्म करसंविधान सभा के जरिए नया संविधान बनाने की बात कही. घोषणापत्र में रैपिड एक्शन बटालियन को भंग करने, पिछले शासन के दौरान हुए फर्जीएनकाउंटर और गुमशुदगियों पर सख्त कार्रवाई की बात भी शामिल है. मांग को किया खारिजवहीं दूसरी ओर बीएनपी के छात्र संगठन जेसीडी ने ढाका के शहबाग इलाके में रैली की. रैली में छात्रों और पहली बार वोट देने वालों से अपील की गईकि वे पार्टी के चुनाव चिह्न ‘धान की बाली’ को वोट दें. पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारीक रहमान ने लंदन सेवर्चुअल संबोधन में कहा कि बांग्लादेश अब प्रतिशोध की राजनीति से आगे बढ़ना चाहता है और सबको मिलकर एक नया भविष्य बनाना होगा. रैलीआयोजकों ने टकराव की आशंका को देखते हुए समय और स्थान में बदलाव कर एक-दूसरे से दूरी बनाई. पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे इलाके मेंकड़ी निगरानी रखी और अतिरिक्त बलों की तैनाती की गई. हालांकि बीएनपी ने एनसीपी की ‘सेकेंड रिपब्लिक’ की मांग को खारिज कर दिया. सुरक्षा एजेंसियों ने की कड़ी निगरानीबीएनपी नेताओं और कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेश के 1972 के संविधान को खत्म करने की मांग देश की संवैधानिक नींव को कमजोरकर सकती है. जुलाई विद्रोह की सालगिरह से पहले हो रहे इन प्रदर्शनों और घोषणाओं ने संकेत दे दिया है कि बांग्लादेश में राजनीति एक बार फिरअस्थिर मोड़ ले सकती है. जनता, खासकर युवा और नए मतदाता, इस बदलाव में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं. बांग्लादेश में ‘जुलाई विद्रोह’ कीपहली बरसी से पहले बीएनपी और एनसीपी ने अलग-अलग रैलियां निकालीं. एनसीपी ने नया संविधान और ‘सेकंड रिपब्लिक’ की मांग की, जबकिबीएनपी ने पहली बार वोट देने वालों से समर्थन मांगा. सुरक्षा एजेंसियों ने कड़ी निगरानी रखी.
चुनाव आयोग पर पी. चिदंबरम का हमला SIR प्रक्रिया लोकतंत्र के लिए खतरा, 65 लाख मतदाता वंचित

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने बिहार में मतदाता सूची की विशेष सघन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर चुनावआयोग (ईसीआई) पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि आयोग राज्यों की चुनावी संरचना और मतदाता स्वरूप को बदलने की कोशिश कर रहाहै जो अधिकारों का “दुरुपयोग” है और इसका विरोध राजनीतिक व कानूनी तरीके से किया जाना चाहिए. पी. चिदंबरम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मएक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि बिहार में 65 लाख मतदाता अपने मताधिकार से वंचित हो सकते हैं, जबकि तमिलनाडु में 6.5 लाख नए मतदाताओंको जोड़ने की खबरें चिंताजनक और गैरकानूनी हैं. उन्होंने कहा ‘इन लोगों को स्थायी रूप से पलायन कर चुके बताना प्रवासी मजदूरों का अपमान हैऔर यह तमिलनाडु की जनता के अपने चुने हुए प्रतिनिधि चुनने के अधिकार में सीधी दखलअंदाजी है. कानूनी विरोध है जरुरीउन्होंने सवाल उठाया कि जब छठ पूजा जैसे त्योहारों में प्रवासी मजदूर अपने राज्य लौट सकते हैं तो क्या विधानसभा चुनाव के समय नहीं लौट सकते? चिदंबरम ने यह भी कहा ‘कोई भी व्यक्ति तभी मतदाता सूची में शामिल हो सकता है जब उसका स्थायी और कानूनी निवास हो। प्रवासी मजदूरों काऐसा निवास बिहार या उनके गृह राज्य में होता है. फिर उन्हें तमिलनाडु में मतदाता के रूप में कैसे जोड़ा जा सकता है?’ उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावआयोग जानबूझकर राज्यों की चुनावी पहचान और पैटर्न को बदलने का प्रयास कर रहा है. विपक्ष इस पूरे मुद्दे पर संसद में विरोध कर रहा है और इसपइसके साथ चिदंबरम ने दोहराया, ‘चुनाव आयोग का यह व्यवहार लोकतंत्र के लिए खतरा है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. इस लड़ाईको राजनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर लड़ा जाना चाहिए.र चर्चा की मांग कर रहा है. कांग्रेस पार्टी की तरफ से चुनाव आयोग पर कई आरोप लगाए जाने के बीच वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम की तरफ सेभी निशाना साधा गया है. उन्होंने कहा है कि चुनाव आयोग अधिकारों का दुरुपयोग कर रहा है. इसलिए इसका राजनीतिक और कानूनी विरोध जरूरीहै. संरचना को बदलने की कोशिशवहीं दूसरी ओर चिदंबरम ने दावा किया कि तमिलनाडु में लगभग 6.5 लाख प्रवासी मजदूरों को मतदाता सूची में शामिल किया गया है, जो उन्होंने”चुनावी संरचना को बदलने” की कोशिश बताया. उन्होंने सवाल उठाया कि प्रवासी मजदूर अपने गृह राज्य (जैसे बिहार) में दृढ़ निवास रखते हैं फिरउन्हें तमिलनाडु में कैसे वोटर के रूप में जोड़ा जा सकता है? कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस कार्रवाई को “मताधिकार की डकैती” और“exercise of exclusion” करार दिया है. सियासी स्तर पर विरोध के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट में भी शिकायतें दर्ज की गई हैं. वहीं, ECI ने इनआरोपों को “misleading” बताते हुए कहा कि प्रक्रिया संवैधानिक और वैध है। चिदंबरम का मानना है कि यह SIR प्रक्रिया भारत में चुनावीलोकतंत्र की संरचना को बदलने का गंभीर प्रयास है. जिसका राजनीतिक और संवैधानिक तरीके से विरोध आवश्यक है.
तेजस्वी यादव के नाम पर दो वोटर कार्ड? EPIC नंबर विवाद पर चुनाव आयोग ने शुरू की जांच

राजद नेता और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव द्वारा ड्राफ्ट मतदाता सूची से नाम काटे जाने के आरोपों के बाद अब उनके पास वोटर कार्डहोने का मुद्दा गरमा गया है. तेजस्वी ने शनिवार को दावा किया है कि बिहार की ड्राफ्ट मतदाता सूची में उनका नाम नहीं है. जिसका खंडन करते हुएचुनाव आयोग ने उनका लिस्ट में शामिल होने का सबूत दिया था. इस घटना में नया मोड़ तब आया जब तेजस्वी यादव की ओर से बताया गयाईपीआईसी नंबर (RAB2916120) और चुनाव आयोग की ओर से जारी ईपीआईसी नंबर (RAB0456228) दोनों अलग-अलग थे इसके बाद येआशंका जताई गई है, कि तेजस्वी यादव के नाम के दो वोटर कार्ड हो सकते हैं चुनाव आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है. मतदाता सूची का किया था इस्तेमालकेंद्रीय निर्वाचन आयोग के सूत्रों ने बताया कि तेजस्वी यादव ने 2020 के विधानसभा चुनाव में नामांकन के लिए जो हलफनामा भरा था उसमें उन्होंनेईपीआईसी नंबर RAB0456228 का इस्तेमाल किया था. यही ईपीआईसी नंबर 2015 की मतदाता सूची में भी मौजूद था और हाल ही में जारी कीगई मसौदा सूची में भी उनका नाम इसी नंबर के साथ है. सूत्रों ने कहा कि आयोग को आशंका है कि तेजस्वी के पास दो ईपीआईसी नंबर हैं और इसकीजांच कराई जाएगी. सूत्रों ने कहा कि यह पूरी तरह संभव है कि दूसरा ईपीआईसी (चुनाव फोटो पहचान पत्र) कभी भी आधिकारिक माध्यम से नहींबनाया गया हो. आयोग सूत्रों ने तेजस्वी प्रसाद के इस आरोप को खारिज कर दिया कि उनका ईपीआईसी नंबर बदल दिया गया था. उन्होंने कहा किराजद नेता ने 2020 में हलफनामे पर अपना नामांकन पत्र भरने के लिए ईपीआईसी नंबर RAB0456228 के साथ मतदाता सूची का इस्तेमाल कियाथा. जांच कर रहा है चुनाव आयोगउन्होंने कहा कि अन्य ईपीआईसी संख्या RAB2916120 अस्तित्वहीन पाई गई है 10 वर्षों से अधिक के रिकार्ड की जांच की गई है, तथा यहसमझने के लिए आगे जांच की जा रही है कि क्या यह जाली दस्तावेज है. एक अधिकारी ने कहा संभव है कि यह दूसरा कार्ड कभी आधिकारिकप्रक्रिया से बनाया ही नहीं गया हो. इसकी असलियत पता लगाने के लिए जांच की जा रही है कि यह नंबर कहीं फर्जी दस्तावेज तो नहीं है. बिहार केपूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने शनिवार को दावा किया था कि चुनावी राज्य बिहार में शुक्रवार को प्रकाशित संशोधित मसौदा मतदाता सूची मेंउनका नाम नहीं है. हालांकि, तत्काल ही चुनाव आयोग ने मतदाता सूची से तेजस्वी का विवरण साझा करके इस आरोप का तुरंत खंडन कर दिया. अबउनके पास दो वोटर कार्ड होने की बात कही जा रही है. जिसकी जांच चुनाव आयोग कर रहा है.
दुर्गा पूजा अनुदान पर सियासत गर्म भाजपा ने ममता सरकार पर धर्म की राजनीति का लगाया आरोप

पश्चिम बंगाल भाजपा ने ममता बनर्जी सरकार पर धर्म की राजनीति करने का आरोप लगाया है. ममता बनर्जी सरकार द्वारा सामुदायिक दुर्गा पूजासमितियों को 1.1 लाख रुपये का सरकारी अनुदान देने का फैसला किया गया है. जिसकी भाजपा ने आलोचना की है भाजपा की प्रदेश महासचिवअग्निमित्रा पॉल ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी की सरकार विकास की अनदेखी कर दान बांट रही है. आसनसोल दक्षिण सीट से विधायकअग्निमित्रा पॉल ने आरोप लगाया कि ‘मंदिर बनाने और पूजा के लिए अनुदान देना सरकार का काम नहीं है. उन्होंने कहा कि ‘ये दिखाता है कि इससरकार की प्राथमिकताएं क्या हैं सड़कें बनाने और रोजगार के अवसर पैदा करने के बजाय ममता बनर्जी धर्म की राजनीति करने में व्यस्त हैं. भाजपाविधायक ने कहा कि अब दूसरे समुदाय के लोग भी मांग करेंगे कि सरकार उनके भी पूजा स्थल बनाए, जैसे उन्होंने दीघा का जगन्नाथ मंदिर बनवाया. लाख रुपये का देगा अनुमानअग्निमित्रा पॉल ने कहा कि वे चाहती हैं कि सरकार शिक्षा के क्षेत्र को बेहतर करने, रोजगार पैदा करने और हर नागरिक के जीवन को बेहतर बनाने कीदिशा में काम करे.पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को एलान किया कि उनकी सरकार राज्य भर में लगभग 40 हजार दुर्गा पूजासमितियों में से प्रत्येक को 1.10 लाख रुपये का अनुदान देगी. पिछले वर्ष दुर्गा पूजा समितियों में से प्रत्येक को 85,000 रुपये की अनुदान राशि दीगई थी. मुख्यमंत्री ने इसके अलावा यह घोषणा भी की कि अग्निशमन विभाग, कोलकाता नगर निगम, पंचायतें और नगर पालिकाएं जैसी सरकारीएजेंसियां और नगर निकाय भी पूजा समितियों से कोई कर या सेवा शुल्क नहीं लेंगे. साधने की हो सकती है रणनीतिभाजपा की प्रदेश महासचिव अग्निमित्रा पॉल ने आरोप लगाया कि यह अनुदान विकास कार्यों को दरकिनार कर धर्म‑आधारित वोट बैंक राजनीति काहिस्सा है. उन्होंने कहा कि मंदिर बनाने और पूजा समितियों को अनुदान देना सरकार का काम नहीं है जबकि सड़कें, रोजगार, शिक्षा जैसे मुद्दे अनदेखे रहगए हैं ममता बनर्जी और TMC नेताओं ने इसे बंगाल की सांस्कृतिक पहचान और समावेशी विकास रणनीति बताया, न कि वोट बैंक ड्राइव उनकेअनुसार, यह ज़रूरी है क्योंकि दुर्गा पूजा केवल धार्मिक उत्सव ही नहीं, बल्कि बंगाल की जीवनशैली और अर्थव्यवस्था की रीढ़ है यह कदम राजनीतिकविश्लेषकों द्वारा आगामी 2026 विधानसभा चुनाव की तैयारी के नजरिए से भी जोड़ा जा रहा है, विशेषकर इस बात पर कि यह स्थानीय क्लबों औरधार्मिक समुदायों को साधने की रणनीति हो सकती है.
भाजपा बना रही ‘कांग्रेस-युक्त’ पार्टी हर्षवर्धन सपकाल का महायुति पर बड़ा हमला” सपकाल का आरोप

महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने आरोप लगाया है कि भाजपा राज्य में महायुति की अपनी सहयोगी पार्टियों शिवसेना और एनसीपी कोदबाव में लेने के लिए उन क्षेत्रों से पूर्व कांग्रेस नेताओं को पार्टी में शामिल कर रही है. जहां विधानसभा चुनावों में शिवसेना और एनसीपी के विधायकविजयी हुए थे. सपकाल ने कहा कि हाल के महीनों में पार्टी छोड़ने वाले नेताओं ने डर और लालच के कारण ऐसा किया, लेकिन कांग्रेस स्पष्टता औरआक्रामकता के साथ अपनी विचारधारा की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि 2024 विधानसभा चुनाव में सिर्फ 16 सीटें जीतने के बाद सेकांग्रेस लगातार दलबदल का सामना कर रही है. सपकाल ने कहा जो पूर्व कांग्रेसी विधायक पार्टी छोड़ गए हैं. वे कई वर्षों तक विधायक रहे, लेकिनअब वे रुकने को तैयार नहीं हैं. हमारे पास उन क्षेत्रों में संगठन को पुनर्गठित करने के लिए पर्याप्त समय है. बुलढाणा से विधायक सपकाल ने कहा किजो नेता पार्टी छोड़ गए वे सत्ता-लोभी थे और कांग्रेस ने उन पर अपने दरवाजे बंद करने का फैसला कर लिया है. उम्मीदवार से गए थे हारउनका दावा है कि भाजपा जानबूझकर उन विधानसभा क्षेत्रों से कांग्रेस नेताओं को शामिल कर रही है जहां पिछले चुनाव में शिवसेना या एनसीपी केउम्मीदवार जीते थे. ताकि अपने सहयोगियों पर दबाव बना सके. उन्होंने बताया कि जिन नेताओं ने हाल ही में कांग्रेस छोड़ी. उनमें से कुणाल पाटिलधुले ग्रामीण में भाजपा उम्मीदवार से हारे थे. जबकि राकांपा उम्मीदवारों ने परभणी जिले के पाथरी निर्वाचन क्षेत्र में सुरेश वारपुडकर और खडकवासलामें संजय जगताप को हराया और जालना में कैलाश गोरंट्याल शिवसेना से हार गए। उन्होंने कहा कि भोर के पूर्व विधायक संग्राम थोपटे, जो भाजपा मेंशामिल हुए थे। वह भी राकांपा उम्मीदवार से हार गए थे. सपकाल ने कहा, ऐसा लग रहा है कि भाजपा महायुति गठबंधन के अंदर ही खेल खेल रहीहै. वे रेडी-मेड नेता ले रहे हैं. आश्वचर्य की नहीं है बातउन्होंने बताया कि कांग्रेस छोड़ने वाले पूर्व विधायकों ने इस फैसले के लिए निजी कारणों को जिम्मेदार ठहराया है. सपकाल ने कहा यह कोई आश्चर्यकी बात नहीं थी. क्योंकि वे पहले से ही हमारे संभावित दलबदलुओं की सूची में थे. इन नेताओं के पार्टी छोड़ने से संगठन को मजबूत बनाने और उसेमहत्वपूर्ण स्थानीय निकाय चुनावों के लिए तैयार करने के हमारे उद्देश्य पर कोई असर नहीं पड़ा है. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब भाजपा खुदको एक करोड़ कार्यकर्ताओं वाली सबसे बड़ी पार्टी बताती है तो उसे दूसरी पार्टियों के नेताओं को क्यों लेना पड़ रहा है? सपकाल ने तंज कसते हुएकहा, भाजपा अपने नेताओं को सक्षम क्यों नहीं बना पा रही? इसका मतलब है कि वह कमजोर दल है और अन्य पार्टियों को खत्म करके अपनाविस्तार करना चाहती है. ‘कांग्रेस-मुक्त भारत’ बनाने की जगह बीजेपी ने खुद को ‘कांग्रेस-युक्त’ पार्टी बना लिया है.
तेलंगाना की मंत्री कोंडा सुरेखा के खिलाफ कोर्ट ने आदेश दिया, के टी आर की मानहानि के आरोप में दर्ज होगा आपराधिक मामला

हैदराबाद की एक अदालत ने तेलंगाना सरकार की मंत्री कोंडा सुरेखा के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने का आदेश दिया है. यह मुकदमा भारतराष्ट्र समिति के कार्यकारी अध्यक्ष और राज्य के पूर्व मंत्री केटी रामाराव की मानहानि की शिकायत पर दर्ज किया गया है. नामपल्ली कोर्ट ने केटीआरकी शिकायत के बाद इस मामले में पर्याप्त प्रारंभिक सबूतों की समीक्षा के बाद, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 356 के तहत मामला दर्जकरने का आदेश दिया. अदालत ने निर्देश दिया है कि आपराधिक मामला दर्ज किया जाए और 21 अगस्त तक मंत्री सुरेखा को नोटिस दिया जाए.मानहानि का यह मामला पिछले साल अक्तूबर का है जब मंत्री कोंडा सुरेखा द्वारा केटीआर को लेकर एक विवादास्पद टिप्पणी की गई थी. कोंडासुरेखा ने कथित तौर पर फिल्म अभिनेत्री समांथा और अभिनेता नागा चैतन्या के तलाक के लिए पूर्व मंत्री केटीआर को जिम्मेदार ठहराया था. केटीआर को ठहराया जिम्मेदारइसके अलावा भी कई अन्य निराधार आरोप लगाए थे। केटीआर के वकील ने तर्क दिया कि ये बयान निराधार थे और दुर्भावना से दिए गए थे. इनबयानों से केटीआर की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा.कोंडा सुरेखा की कानूनी टीम ने शिकायत के न्यायाधिकार और स्वीकार्यता को लेकर आपत्ति जताई, लेकिन अदालत ने उनकी आपत्ति को खारिज करदिया. अदालत ने उच्च न्यायालय के एक पूर्व निर्देश का हवाला दिया जिसमें मामले पर सुनवाई करने के न्यायालय के अधिकार की पुष्टि की गई थी. अदालत ने सबूत के तौर पर मंत्री के विवादित बयान का वीडियो भी स्वीकार कर लिया. जो एक पेन ड्राइव में है। इससे पहले केटीआर ने कोंडा सुरेखाको नोटिस भेजकर उनके बयान के लिए सार्वजनिक रूप से माफी की मांग की थी. कोंडा सुरेखा ने कथित तौर पर फिल्म अभिनेत्री समांथा औरअभिनेता नागा चैतन्या के तलाक के लिए पूर्व मंत्री केटीआर को जिम्मेदार ठहराया था. KTR पर कई आरोप गए थे लगाएइसके अलावा भी कई अन्य निराधार आरोप लगाए थे केटीआर के वकील ने तर्क दिया कि ये बयान निराधार थे और दुर्भावना से दिए गए थे. सुरेखा केवकीलों द्वारा की गई न्यायाधिकार और स्वीकार्यता से जुड़ी आपत्तियों को अदालत ने खारिज कर दिया और उसने पेन ड्राइव में मौजूद उस वीडियो कोसबूत के रूप में स्वीकार किया जिसमें मंत्री के बयान दर्ज थे घटना लगभग अक्टूबर 2024 की है, जब सुरेखा ने KTR पर कई आरोप लगाए थे. जिनकी आलोचना हुई और KTR ने पहले एक 100 करोड़ रूपये का मानहानि दावा भी दायर किया था. अदालत ने पाया कि सुरेखा के कथितविवादास्पद बयान जिन्में उन्होंने टीओलिवुड अभिनेता नागा चैतन्या और समांथा के तलाक के लिए KTR को जिम्मेदार ठहराया था—के खिलाफप्राथमिक स्तर पर पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं.