युद्ध के बीच शांति की किरण, तुर्की-UAE की मध्यस्थता में 1,200 यूक्रेनी सैनिकों की रिहाई पर सहमति

रूस और यूक्रेन के बीच तीन साल से संघर्ष जारी है। रूस आज भी यूक्रेन पर हमले कर रहा है। हालांकि इनसब के बीच में अब एक अच्छी खबर सामनेआ रही है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोदिमिर जेलेंस्की ने रविवार को कहा कि उनकी सरकार रूस के साथ कैदियों के आदान-प्रदान को फिर से शुरू करनेकी कोशिश कर रही है। इसका मकसद लगभग 1200 यूक्रेनी सैनिकों को घर लाना है। जेलेंस्की ने बताया कि इस पर कई बैठकें और बातचीत चलरही हैं और अलग-अलग माध्यमों से संपर्क बनाए जा रहे हैं। यूक्रेन के राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा परिषद के सचिव रुस्तम उमेरोव ने शनिवार को कहा किइस मामले में तुर्किय और संयुक्त अरब अमीरात की मध्यस्थता में बातचीत हुई। दोनों पक्षों ने इस्तांबुल में 2022 में बनाए गए कैदियों के आदान-प्रदान के नियमों को लागू करने पर सहमति जताई है। उमेरोव ने कहा कि अब तकनीकी और प्रक्रिया से जुड़े अंतिम निर्णय जल्द लिए जाएंगे। उन्होंनेउम्मीद जताई कि लौटे हुए यूक्रेनी सैनिक नए साल और क्रिसमस अपने परिवार के साथ मना सकेंगे। सैनिक नए साल और क्रिसमस अपने परिवार के साथ मना सकेंगेहालांकि इन सबके बीच रूस का यूक्रेन पर हमला जारी है। ताजा अपडेट की बात करें तो रूस के ड्रोन हमलों से यूक्रेन के ओडेसा क्षेत्र में बिजली औरऊर्जा संबंधी कई जगहों को नुकसान हुआ। इसमें एक सोलर पावर प्लांट भी प्रभावित हुआ। यूक्रेन सर्दियों के करीब आते ही लगातार हो रहे रूसीहवाई हमलों और बिजली कटौती से जूझ रहा है। यूक्रेनी वायु सेना के अनुसार, रूस ने एक रात में 176 ड्रोन और एक मिसाइल दागी, जबकि यूक्रेनीसेनाओं ने इनमें से 139 ड्रोन को मार गिराया या बेअसर किया। दूसरी ओर रूस की रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि उसने 57 यूक्रेनी ड्रोन को नष्टकिया। इस समय यूक्रेन अपनी सीमाओं को बचाने और रूस के आगे बढ़ने की कोशिशों को रोकने में जुटा है। साथ ही अब यह कोशिश जारी है किकैदियों को जल्द घर लौटाया जाए और उन्हें अपने परिवार के बीच त्योहार मनाने का मौका मिले। यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा कि उनकीसरकार रूस के साथ कैदियों के आदान-प्रदान को फिर से शुरू करने की कोशिश कर रही है। तुर्की और UAE की मध्यस्थता में हुई बातचीत में 2022 के इस्तांबुल समझौते को लागू करने पर सहमति हुई है। उम्मीद है कि लौटे सैनिक नए साल और क्रिसमस अपने परिवार के साथ मना सकेंगे।
दलाई लामा की हिंदी जीवनी ‘अनश्वर’ का विमोचन, भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी ने तिब्बतियों के संघर्ष की सराहना की “जानें क्या कुछ कहा”

वरिष्ठ भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी ने शनिवार को कहा कि 14वें दलाई लामा की अहिंसा की शिक्षाओं के जरिए ही तिब्बत का पुनरुत्थान होगा।इसके साथ ही उन्होंने निर्वासित तिब्बती बौद्धों की भावनाओं की सराहना की। 14वें दलाई लामा तेनजिन ग्यात्सो की हिंदी में पहली अधिकृत जीवनीकी किताब ‘अनश्वर’ के विमोचन पर भाजपा नेता ने ये बात कही।14वें दलाई लामा की हिंदी में पहली अधिकृत जीवनी पत्रकार-लेखक अरविंद यादव ने ये किताब लिखी है। इस कार्यक्रम में मुरली मनोहर जोशी, पूर्वसांसद कर्ण सिंह और तिब्बत हाउस के निदेश गेशे दोरजी दामदुल मौजूद रहे। पूर्व केंद्रीय मंत्री जोशी ने कहा, ”मैं तिब्बती बौद्धों और तिब्बती लोगोंको नमन करता हूं कि उन्होंने अपने गुरु, उनके आदर्शों और उनके निर्देशों के लिए कितना कुछ सहा और स्वीकार किया है। फिर भी वे अपने सिद्धांतों सेकभी नहीं डिगे।तिब्बत अपनी जमीन पर फिर से काबिजभाजपा नेता ने कहा, “यहां आकर रहने वाले तिब्बती लोगों ने बहुत दिक्कतें सहीं। उनके सामने इतनी सारी परिस्थितियां आईं कि अगर कोई और याकोई दूसरा समुदाय होता तो वे विद्रोह कर देते या जिंदा रहने के लिए अपने मूल्यों को पूरी तरह बदल देते।” उन्होंने कहा कि बौद्ध धर्मगुरु ने सभी कोअहिंसा और सद्भाव के सिद्धांत सिखाए। उन्होंने कहा, ”तिब्बत एक बार फिर से उठ खड़ा होगा और अपनी जमीन पर फिर से हक जमाएगा। मैं जानताहूं कि वो दिन आएगा। हो सकता है कि मेरे जीवित रहते ये ना हो, लेकिन ऐसा होगा।”भाजपा नेता ने कहा, ”बहुत कम लोग जानते हैं कि बौद्ध धर्म सेचीन का परिचय तिब्बत ने ही कराया था। भारत से बौद्ध धर्म बाद में चीन पहुंचा, लेकिन पहले तिब्बतियों ने ही चीन में बौद्ध धर्म पहुंचाया।” उन्होंनेकहा कि मुझे अटूट विश्वास है कि तिब्बत अपनी जमीन पर फिर से काबिज होगा, जो चीन से भी बड़ी है।आध्यात्मिक प्रतीक के तौर पर उनके उदय तक की जानकारीउन्होंने दावा किया, ”एक समय था, जब चीन खुद तिब्बत के अंदर आता था। तिब्बत प्रशासन के अंतर्गत चीन का इलाका आता था। ये संभव है किएक दिन चीन पर तिब्बत का शासन होगा. वो उन्हें बताएगा कि इस तरह की चीज कभी नहीं करनी है और इस गलती को दोबारा नहीं दोहराना है।” मुरली मनोहर जोशी ने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान निर्वासित इस्राइल के यहूदियों के साथ भी तुलना की। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी मातृभूमि सेनिकाले जाने के अनुभव से कुछ नहीं सीखा। सर्व भाषा ट्रस्ट की ओर से प्रकाशित यह किताब दलाई लामा के जीवन के महत्वपूर्ण पलों को दर्शाती है, जिनमें अमदो में उनके बचपन से लेकर 14वें दलाई लामा के तौर पर मान्यता, तिब्बत पर चीन के कब्जे, उनके निर्वासन और एक वैश्विक आध्यात्मिकप्रतीक के तौर पर उनके उदय तक की जानकारी है।
उल्हासनगर में भाजपा को बड़ा झटका, छह पूर्व नगरसेवक शिंदे गुट शिवसेना और टीओके में शामिल

महाराष्ट्र में होने वाले स्थानीय निकाय चुनाव से पहले भाजपा को बड़ा झटका लगा है। उल्हासनगर से भाजपा के छह पूर्व नगरसेवकों ने शुक्रवार कोपार्टी छोड़कर शिंदे गुट के शिवसेना और उसकी स्थानीय सहयोगी टीम ओमी कालानी (टीओके) का दामन थाम लिया। इनमें से तीन नेता शहर मेंभाजपा के सबसे मजबूत चेहरों में माने जाते थे। बता दें कि एक तरफ जहां बिहार में भाजपा समर्थित एनडीए गठबंधन ने प्रचंड बहुमत हासिल कर, सत्ता में अपना स्थान कायम रखा है। वहीं दूसरी ओर महाराष्ट्र निकाय चुनाव से पहले छह नेताओं का पार्टी छोड़ना भाजपा के लिए बुरी खबर के तौरपर देखा जा रहा है। उल्हासनगर और कल्याण लोकसभा क्षेत्र में होने वाले आगामी नगर निगम चुनावों से पहले हुई यह टूट भाजपा के लिए बड़ानुकसान मानी जा रही है। वहीं, दो महीने पहले पांच पूर्व नगरसेवकों के भाजपा में जाने से कमजोर हुई कालानी परिवार की पकड़ को यह घटना फिर सेमजबूती की राह पर ला सकती है। शिवसेना में शामिल होने वालों मेंमीडिया रिपोर्ट की माने तो शिंदे गुट के शिवसेना में शामिल होने वालों में किशोर वनवारी और मीना सोनडे हैं, जबकि जम्नु पुरसवानी, प्रकाशमाखीजा, महेश सुखरामानी और चार्ली परवानी टीओके में शामिल हुए। इन नेताओं का स्वागत सांसद श्रीकांत शिंदे और टीओके प्रमुख ओमी कालानीने किया। बता दें कि पुरसवानी पांच बार के नगरसेवक और पूर्व उपमहापौर, माखीजा चार बार स्थायी समिति अध्यक्ष और सुखरामानी महाराष्ट्रसाहित्य अकादमी में राज्य मंत्री के पद पर रह चुके हैं। प्रकाश माखीजा ने पार्टी छोड़ने को लेकर अपना रुख साफ किया। उन्होंने कहा कि भाजपा औरशिवसेना के वरिष्ठ नेता एक-दूसरे के खिलाफ काम कर रहे हैं, इसलिए उन्होंने पार्टी छोड़ने का फैसला लिया। हालांकि सूत्रों का मानना है कि यदिपार्टी के शीर्ष नेता समय रहते हस्तक्षेप नहीं करते, तो यह खींचतान अन्य क्षेत्रों में भी फैल सकती है। शिवसेना में तकरारगौरतलब है कि महाराष्ट्र में होने वाले निकाय चुनाव से पहले भाजपा और शिंदे गुट के शिवसेना में तकरार की खबरें खूब सुर्खियां बटोर रही है। सूत्रों कीमाने तो उल्हासनगर और कल्याण लोकसभा क्षेत्र में महायुति सहयोगियों भाजपा और शिवसेना के बीच तनाव उस समय और बढ़ गया जब इस सालरविंद्र चव्हाण राज्य भाजपा अध्यक्ष बने। उन्होंने कल्याण लोकसभा क्षेत्र में अपने संगठन को मजबूत करने की कोशिश की, जो शिंदे परिवार का गढ़माना जाता है। इससे कई शिवसेना नेता भाजपा में शामिल हुए। जवाब में सांसद श्रीकांत शिंदे ने भाजपा नेताओं को अपने खेमे में शामिल करना शुरूकिया।
प्रधानमंत्री मोदी आज गुजरात दौरे पर: जनजातीय गौरव दिवस पर 9,700 करोड़ की परियोजनाओं का शुभारंभ”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जनजातीय गौरव दिवस मनाने और भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती समारोह में भाग लेने के लिए आज शनिवार कोगुजरात का दौरा करेंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री नर्मदा जिले में 9,700 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भीकरेंगे। इन परियोजनाओं में आदिवासी कल्याण, बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, शिक्षा और विरासत पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। प्रधानमंत्री दोपहरकरीब 12:45 बजे नर्मदा जिले के देवमोगरा मंदिर में पूजा और दर्शन करेंगे। इसके बाद वह दोपहर करीब 2:45 बजे डेडियापाड़ा पहुंचेंगे और एकसार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल होंगे। यहां वह कई परियोजनाओं का शुभारंभ करेंगे और जनसभा को संबोधित करेंगे. जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियानइन परियोजनाओं में प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (डीए-जगुआ) के तहत बने एक लाख घरों का गृह प्रवेश शामिल है। इसके अलावा पीएम मोदी लगभग 1,900 करोड़ रुपये की लागत वाले 42 एकलव्यमॉडल आवासीय विद्यालयों, डिब्रूगढ़ में असम मेडिकल कॉलेज में एक सक्षमता केंद्र और आदिवासी संस्कृति के संरक्षण के लिए इंफाल में एकजनजातीय अनुसंधान संस्थान भवन का भी उद्घाटन करेंगे। कनेक्टिविटी बेहतर बनाने के लिएप्रधानमंत्री गुजरात के 14 आदिवासी जिलों में कनेक्टिविटी बेहतर बनाने के लिए 250 बसों को हरी झंडी दिखाएंगे। वह आदिवासी क्षेत्रों में 748 किलोमीटर नई सड़कों और डीए-जगुआ के तहत 14 आदिवासी बहु-विपणन केंद्रों की आधारशिला रखेंगे। पीएम मोदी 2,320 करोड़ रुपये से अधिककी लागत वाले 50 नए एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों की भी आधारशिला रखेंगे. पीएम मोदी सूरत में निर्माणाधीन बुलेट ट्रेन स्टेशन का दौराकरेंगे और मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर (एमएएचएसआर) की प्रगति की समीक्षा करेंगे। यह भारत की सबसे महत्वाकांक्षी बुनियादीढांचा परियोजनाओं में से एक है और देश के हाई-स्पीड कनेक्टिविटी के युग में प्रवेश का प्रतीक है। एमएएचएसआर लगभग 508 किलोमीटर लंबा है, जिसमें 352 किलोमीटर हिस्सा गुजरात और दादरा व नगर हवेली में और 156 किलोमीटर महाराष्ट्र में है। यह कॉरिडोर साबरमती, अहमदाबाद, आणंद, वडोदरा, भरूच, सूरत, बिलिमोरा, वापी, बोईसर, विरार, ठाणे और मुंबई सहित प्रमुख शहरों को जोड़ेगा।
सबसे बड़ी हार के बाद लालू परिवार में बढ़ी खटपट, तेजस्वी की नेतृत्व क्षमता पर उठे सवाल, तेज प्रताप की बगावत ने बढ़ाई मुश्किलें

तेजस्वी यादव हमेशा चर्चा में रहे हैं। कभी सबसे कम उम्र का डिप्टी सीएम बन कर तो कभी सबसे कम उम्र में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनकर।कभी जाति की खास पहचान वाले बिहार में अंतरजातीय शादी रचाकर, तो कभी अपनी अगुवाई में युवाओं का नायक बनकर विपक्षी महागठबंधन कोसत्ता की दहलीज में लाने को लेकर। इस बार उनकी चर्चा खुद बमुश्किल चुनाव जीतने के साथ राजद को सबसे बड़ी हार दिलाने वाले खलनायक केतौर पर है। परिवार में खटपट के बीच तेजस्वी के नेतृत्व में राजद को मिली हार के बाद पार्टी के भविष्य को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सवाल है किक्या सबसे बड़ी हार के बाद लालू परिवार में चुनाव के दौरान शुरू हुई खटपट उग्र रूप लेगी? यह सवाल इसलिए कि सोशल मीडिया में आपत्तिजनकपोस्ट के मामले में लालू के सबसे बड़े पुत्र तेजप्रताप पार्टी से निष्कासित हैं। प्रचार के दौरान लालू की सांसद पुत्री मीसा भारती और एक अन्य पुत्रीरोहिणी आचार्य के नाराज होने की भी खबरें आईं। और पार्टी का एक धड़ा राज्यसभा सदस्य बनाए गएदरअसल तेजस्वी पर लालू परिवार के सदस्य और पार्टी का एक धड़ा राज्यसभा सदस्य बनाए गए संजय यादव के इशारे पर मनमानी का आरोप लगातेरहे हैं। पार्टी से निष्कासित होने के बाद तेजप्रताप ने कई बार सार्वजनिक तौर पर संजय समेत तेजस्वी के करीबी नेताओं को शकुनियों की टीम करारदिया। चूंकि सीट बंटवारे से लेकर टिकट वितरण तक सिर्फ तेजस्वी की चली है, ऐसे में वह पार्टी को मिली अब तक की सबसे बड़ी हार की जिम्मेदारीसे बच नहीं सकते। क्रिकेट के कॅरिअर को छोड़ कर 2015 में राजनीति में आते ही तेजस्वी ने कई कीर्तिमान बनाए। उनकी यात्रा के पहले पड़ाव में हीराजद का दस साल का सत्ता का सूखा खत्म हुआ। चुनाव जीतने के बाद सबसे कम (26 वर्ष की) उम्र के डिप्टी सीएम बने। नीतीश ने जब पालाबदला, तो सबसे कम उम्र के नेता प्रतिपक्ष बने। सत्ता की दहलीज तक पहुंचायाबीते चुनाव में युवाओं का नायक बन कर विपक्षी महागठबंधन को सत्ता की दहलीज तक पहुंचाया। जाति की पहचान रखने वाले बिहार में ईसाईबिरादरी की रेचल गोडिन्हो से अंतरधार्मिक विवाह करने का साहस दिखाया। हालांकि सबसे बड़ी हार के बाद अब तेजस्वी नए और नकारात्मक कारणोंसे चर्चा में हैं। लालू प्रसाद के साए से निकल कर सियासी जमीन बनाने निकले तेज प्रताप यादव बुरी तरह विफल रहे। पारिवारिक कलह के चलतेराजद से बाहर किए गए तेज प्रताप जनशक्ति जनता दल (जेजेडी) बनाकर जोरशोर से चुनावी मैदान में उतरे थे। प्रचार के दौरान भावनात्मक अभियानचलाकर उन्होंने लोगों का ध्यान भी खींचा, लेकिन नतीजे बता रहे हैं कि इसका उन्हें तो फायदा मिला नहीं, उल्टे अपने छोटे भाई और विपक्ष के सीएमचेहरा तेजस्वी यादव को नुकसान पहुंचा। तेज प्रताप की राजनीतिक पारी की शुरुआत 2015 के चुनाव में हुई थी। वह दो बार विधायक रहे औरमंत्रिमंडल में भी।
चुनावी जादूगर से राजनीतिक चुनौती तक, बिहार में प्रशांत किशोर की पारी रही फीकी

चुनावी रणनीतिकार के पेशे से दूरी बनाकर राजनीति में उतरे प्रशांत किशोर ने अपनी जनसुराज पार्टी के इस चुनाव में अर्श या फर्श पर रहने कीभविष्यवाणी की थी। तब लगा था कि बिहार की राजनीति को मूल मुद्दे पर खींचने में कामयाब प्रशांत राज्य में नई राजनीति की नींव रखने में सफलरहेंगे। चुनाव में प्रशांत के उठाए मुद्दे तो चले, मगर उनकी पार्टी नहीं चल पाई। पार्टी का खाता खोलना तो दूर, 238 में उसके महज पांच उम्मीदवारकिसी तरह जमानत बचाने में कामयाब हो पाए। बतौर चुनावी रणनीतिकार प्रशांत ने कई दलों को सफलता दिलाई। साल 2014 में भाजपा के चुनावअभियान की कमान संभालने और चाय पर चर्चा के सफल सियासी प्रयोग ने उन्हें चर्चा में ला दिया। बाद में उन्होंने आंध्र प्रदेश में वाईएसआरसीपी केजगन मोहन रेड्डी, पंजाब के सीएम रहे कैप्टन अमरिंदर सिंह, दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल, प. बंगाल की सीएम ममता बनर्जी को सफलता कास्वाद चखाया। साल 2015 में नीतीश-लालू का मिलन कराकर बिहार में-बहार है नीतीशे कुमार है का नारा देकर भाजपा को करारी सियासी पटखनीदेने में सफलता हासिल की। हालांकि, इस दौरान उनका उत्तर प्रदेश में यूपी के लड़के का प्रयोग असफल रहा। प्रशांत ने राजनीति में उतरने के लिए अपने गृह राज्य का चयनजदयू से मोहभंग के बाद तीन साल पहले प्रशांत ने राजनीति में उतरने के लिए अपने गृह राज्य का चयन किया। पद यात्राओं और मुद्दों के जरिये बिहारकी सियासत में सनसनी पैदा की। उनके कारण राज्य में पहली बार पलायन, बेरोजगारी जैसे मुद्दे पर प्रतिद्वंद्वी गठबंधन महागठबंधन को रणनीति मेंबदलाव करना पड़ा। दोनों गठबंधनों ने बेरोजगारी और पलायन रोकने के लिए बड़े-बड़े वादे किए। प्रशांत के उठाए भ्रष्टाचार के मामले ने नीतीशसरकार की भी परेशानी बढ़ाई। इसके बावजूद प्रशांत वोट की फसल नहीं काट पाए। अपने राजनीतिक कॅरिअर में प्रशांत ने पूरे राज्य का दौरा कर एककरोड़ सदस्य बनाने का दावा किया, लेकिन चुनाव में वह कोई छाप छोड़ने में बुरी तरह नाकाम रहे। इस चुनाव में उनकी पार्टी के 238 उम्मीदवारों में से233 उम्मीदवार अपनी जमानत तक नहीं बचा पाए। हमेशा चर्चाओं के केंद्र में रहेप्रचार के दौरान प्रशांत के दावे और बयान हमेशा चर्चाओं के केंद्र में रहे। उनका जदयू का 25 से कम सीटें जीतने का दावा और ऐसा नहीं होने परराजनीति से संन्यास का बयान छाया रहा। इसी प्रकार उनका अपनी पार्टी के फर्श या अर्श पर रहने की भविष्यवाणी भी चर्चा में रही। महागठबंधन केसीएम पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव और डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी की शिक्षा पर उठाए सवालों पर भी खूब चर्चा हुई। हालांकि, नतीजे बताते हैंकि लोगों ने उन्हें गंभीरता से तो चुना मगर प्रशांत वोट हासिल करने का भरोसा पैदा नहीं कर पाए। नतीजे से पहले इस चुनाव की सबसे बड़ी सनसनीबन कर उभरे प्रशांत किशोर अब भविष्य में क्या करेंगे, इस पर सभी की नजर होगी। देखना होगा कि वह इस असफलता के बाद वापस चुनावीरणनीतिकार की भूमिका में लौटते हैं या फिर भविष्य के लिए एक बार फिर संघर्ष का रास्ता अपनाते हैं।
बिहार की मुस्लिम सियासत में बड़ा बदलाव, एआईएमआईएम बनी नई नेतृत्व शक्ति

चुनावी नतीजों से लगता है, जैसे बिहार में लंबे समय से नेतृत्व के सूखे का संकट झेल रही मुस्लिम बिरादरी ने नया नेतृत्व चुन लिया है। इस बिरादरी नेराजद के माई (मुस्लिम-यादव) समीकरण से पल्ला झाड़कर एआईएमआईएम का दामन थाम लिया। मुस्लिम मतों में हुए जबरदस्त बंटवारे के कारणबीते चुनाव के 19 विधायकों के मुकाबले इस बार महज 11 मुस्लिम प्रत्याशी ही चुनाव जीत पाए हैं। इन 11 में से भी पांच एआईएमआईएम से हैं।विपक्षी महागठबंधन में राजद से तीन और कांग्रेस के दो मुस्लिम उम्मीदवार को ही जीत मिली। एक अन्य मुस्लिम को जदयू के टिकट पर जीत मिलीहै। मुस्लिम प्रभाव वाली सीटों पर ताकतऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिममीन (एआईएमआईएम) के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने विपक्षी महागठबंधन को न सिर्फ सीमांचल, बल्कि कई अन्य मुस्लिम प्रभाव वाली सीटों पर ताकत का अहसास कराया। बीते चुनाव के बाद चार विधायकों की बगावत के बावजूद पार्टी नेपिछली बार जीती सभी सीटें बायसी, अमौर, जोकीहाट, बहादुरगंज और कोचाधामन बरकरार रखी हैं। इसके अलावा पार्टी उम्मीदवारों ने बलरामपुर, दरभंगा ग्रामीण, गौराबौरम, प्राणपुर, कसबा, ठाकुरगंज, शेरघाटी सीटों पर दूसरे या तीसरे स्थान पर रहते हुए वोट काटकर विपक्षी महागठबंधन केउम्मीदवारों को जीत हासिल नहीं होने दी। नतीजे मुस्लिम सियासत के संदर्भ में अलग संदेश दे रहे हैं। बीते चुनाव में एआईएमआईएम भले ही पांचसीटें जीती थी, मगर इसके अलावा एक भी सीट पर उसके उम्मीदवार महागठबंधन के उम्मीदवारों की हार का कारण नहीं बने थे। तब उसके अन्यउम्मीदवारों को औसतन दो से तीन हजार वोट मिले थे। इस बार पार्टी ने जिन 25 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, उनमें से 16 सीटों पर पार्टी उम्मीदवारोंको 10 हजार से लेकर एक लाख से भी अधिक वोट मिले। नब्बे के दशक से राजद का साथ देतीराज्य की 18 फीसदी मुस्लिम बिरादरी नब्बे के दशक से राजद का साथ देती रही है। इस चुनाव में महागठबंधन की ओर से मुस्लिम समुदाय से किसीको डिप्टी सीएम का उम्मीदवार नहीं बनाना बड़ा मुद्दा बन गया था। 21वीं सदी में हुए सात चुनावों में इस बार विधानसभा में सबसे कम मुस्लिमप्रतिनिधित्व होगा। जदयू के जमा खान एनडीए से जीतने वाले इकलौते मुस्लिम हैं। 2005 में 16, 2010 में 19, 2015 में 24 और बीते चुनाव में19 मुस्लिम विधानसभा पहुंचे थे।
बिहार चुनाव में कांग्रेस की करारी हार, कमजोर संगठन, गलत रणनीति और दल बदलुओं पर भरोसे ने बिगाड़ा खेल

बिहार में चुनाव की तारीखें करीब आने के साथ जमीनी स्थिति के मद्देनजर कांग्रेस के कई नेताओं को यह आभास होने लगा था कि पार्टी शायद बहुतअच्छा प्रदर्शन न कर पाए। पर इस तरह औंधे मुंह गिरने की उन्होंने भी कल्पना नहीं की थी। करारी हार से हैरान कांग्रेस नेता इसके लिए जिन प्रमुखकारणों को जिम्मेदार मान रहे हैं, उनमें कमजोर संगठन, गलत टिकट वितरण, नकारात्मक प्रदर्शन, खराब रणनीति और गठबंधन में तालमेल के अभावको जिम्मेदार मानते हैं। उनका कहना है, वोट चोरी के आरोप को जोर-शोर से उछालना, दलबदलुओं को टिकट देना और सामाजिक न्याय के मुद्दे कोपूरी तरह धार न दे पाना भी पार्टी पर भारी पड़ गया। नतीजों से यह भी साफ हो गया कि राहुल गांधी का पार्ट टाइम सियासत का तरीका नहीं चलसकता है। नेताओं ने कहा किनतीजे आने शुरू होने के बीच दिल्ली से पटना तक कई नेताओं ने कहा कि सामाजिक न्याय की राजनीति से लेकर वोट चोरी अभियान तक पार्टी केमुख्य मुद्दे जमीनी स्तर पर काम नहीं कर रहे थे, लेकिन सियासी संकेतों को ठीक से समझा नहीं गया। पार्टी नेताओं के मुताबिक, सामाजिक न्याय केमुद्दे ने पार्टी के बचे-खुचे उच्च वर्ग के वोट बैंक को भी दूर धकेल दिया। राहुल गांधी ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) औरवोट चोरी अभियान को प्रिय चुनावी मुद्दा बना लिया लेकिन जमीनी स्तर पर इनका बिल्कुल भी असर नहीं दिखा। राहुल के करीबी पार्टी की रणनीतिको लेकर इस कदर आश्वस्त थे कि उन्होंने इन्हें जोर-शोर से उठाना जारी रखा. दलबदलुओं को न केवल पार्टी में जगह दीकांग्रेस ने भाजपा, जदयू और लोजपा से आए कई दलबदलुओं को न केवल पार्टी में जगह दी, बल्कि उन्हें टिकट भी दिया। ऐसे में स्थानीय स्तर परनाराजगी बढ़ी। एक पार्टी नेता ने कहा, सोनबरसा का उम्मीदवार हो या कुम्हरार, नौतन, फारबिसगंज, कुचियाकोट या बलदौर का। पार्टी नेदलबदलुओं को अहमियत दी। अगर आप उन लोगों को टिकट देते हैं, जिनकी सोशल मीडिया वॉल पर अभी तक एनडीए नेताओं के साथ तस्वीरें हैं, तो विश्वसनीयता क्या रह जाती है?कांग्रेस के ही वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि एसआईआर और वोट चोरी जैसे मुद्दे जमीनी स्तर पर दम तोड़ते नजरआए, तब नेतृत्व ने अपनी रणनीति में थोड़ा बदलाव किया। इसके बाद रोजी-रोजगार के मुद्दे पर ध्यान केंद्रित किया गया, लेकिन तब तक काफी देरहो चुकी थी।
नीतीश कुमार को दसवीं बार CM बनने पर चिराग पासवान समेत सभी NDA नेताओं ने दी बधाई, गठबंधन सहयोगियों की भूमिका की सराहना

बिहार चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को प्रचंड बहुमत के बाद नीतीश कुमार का दसवीं बार मुख्यमंत्री बनना परिणाम आने के साथ ही स्पष्ट होगया था। शुक्रवार दोपहर जैसे ही रुझान आना शुरू हुआ, एनडीए में खुशी की लहर दौड़ गई। शाम होते-होते सीएम आवास में चहलकदमी बढ़ गई।जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा, केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर के अलावा भारतीय जनता पार्टी के भी कई नेताओं ने सीएम आवास पहुंचकरमुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बधाई दी। दिल्ली से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बधाई दी। इसके बाद भाजपा सहित एनडीए के बाकी दलों ने भी एक-एककर सीएम नीतीश को बधाई दी और नई पारी की शुभकामनाएं भी। आज, यानी शनिवार सुबह से ही गहमागहमी है। चिराग पासवान सीएम नीतीशकुमार को बधाई देने पहुंचे। पासवान ने लिखा किमुलाकात के बाद केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने लिखा कि बिहार विधानसभा चुनाव परिणाम के पश्चात आज बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सेमुलाकात कर उन्हें एनडीए के प्रचंड बहुमत की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि एनडीए ने नीतीश कुमार के नेतृत्व में ऐतिहासिकजीत दर्ज की है। इसलिए, लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास के एक प्रतिनिधिमंडल ने उनसे मुलाकात की और उन्हें बधाई दी। पटना में केंद्रीय मंत्रीचिराग पासवान ने बताया कि लोजपा (रा.) के प्रतिनिधियों ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात कर सरकार गठन पर चर्चा की। उन्होंनेकहा कि 2020 में लोजपा (रा.) की चुनावी हार के लिए कई लोग ज़िम्मेदार थे और पार्टी को पुनर्जीवित करने के लिए उन्होंने संघर्ष किया। चिरागपासवान ने यह भी कहा कि बिहार चुनाव अभियान के दौरान यह झूठा नैरेटिव तैयार किया गया था कि जदयू और लोजपा (रा.)) के बीच मतभेद हैं।कुछ लोग जदयू और लोजपा (रा.) के बारे में भ्रम फैला रहे थे, वे सिर्फ एक गलत कहानी सेट कर रहे थे। एनडीए में शामिल हर गठबंधन सहयोगीउन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एनडीए में शामिल हर गठबंधन सहयोगी की भूमिका की सराहना की है, और उन्होंने जदयू और लोजपा (रा.) के बीच “गलत कहानी” बनाने वाले विपक्ष पर निशाना साधा। मैं बहुत खुश हूं कि मुख्यमंत्री ने एनडीए में शामिल हर गठबंधन सहयोगी की भूमिकाकी सराहना की। जब वह वोट देने गए तो उन्होंने लोजपा (रा.) उम्मीदवार का समर्थन किया। आलाउली, जहां मैं वोट देता हूं, मैंने जदयू उम्मीदवार कासमर्थन किया।
जया किशोरी पहुँचीं धीरेंद्र शास्त्री की पदयात्रा में, भजन-प्रवचन और सेंड आर्ट ने खींचा ध्यान

धीरेंद्र शास्त्री की पदयात्रा में शनिवार सुबह मशहूर कथावाचक और सादगी और मधुर वाणी के लिए जाने जानी वाली जया किशोरी पहुंचीं। जयाकिशोरी का धीरेंद्र शास्त्री ने सम्मान किया। इसके बाद राष्ट्रगान हुआ और बाबा की पदयात्रा अगले पढ़ाव के लिए रवाना हो गई। इस दौरान पुंडरीकगोस्वामी और परमार्थ निकेतन आश्रम के प्रमुख चिदानंद सरस्वती भी यात्रा में शामिल हुए। यात्रा ने कोसीकलां मंडी से सुबह छाता की ओर अजीजपुर, दौताना होते हुए प्रस्थान किया। कंपनी के सामने मैदान में की गईदोपहर के भोजन की व्यवस्था बेकमेट कंपनी के सामने मैदान में की गई है। भोजन के बाद महाराज के भजन, प्रवचन कार्यक्रम होंगे। इसके बाद 8 किलोमीटर आगे रात्रि विश्राम गुप्ता रेजिडेंसी पर होगा। इससे पूर्व अन्नपूर्णा रसोई में पदयात्रियों के लिए भोजन व धीरेंद्र शास्त्री प्रवचन करेंगे। राष्ट्रीयराजमार्ग स्थित गुप्ता रेजिडेंसी पर होने वाले पदयात्रा की रात्रि विश्राम से पूर्व धीरेंद्र शास्त्री के भजन एवं प्रवचन होंगे। इसके लिए वाराणसी केकलाकारों ने बाबा बागेश्वर धाम की रेत पर कलाकृति बनाई है। वाराणसी निवासी रूपेश सिंह ने बताया कि वह पंडित धीरेंद्र शास्त्री की सेंड सेकलाकृति बना रहे हैं। हमें उम्मीद है कि महाराज हमारी सेंड आर्ट से प्रसन्न होंगे और हमसे मिलेंगे। सेंड आर्ट बनाने वालों में मोहन सिंह, अलंकुता, आशु कुमारी रोहन सिंह आदि शामिल हैं।