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ममता बनर्जी का SIR पर निशाना, कहा ‘एनआरसी के पीछे असली मंशा छुपी, भाजपा ने जवाब में बोला राज्य की जनता ने ठान लिया’

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को दावा किया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के पीछे असली मंशाएनआरसी है। संविधान दिवस के अवसर पर रेड रोड स्थित बी.आर. आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए बनर्जीने कहा कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी लोगों की नागरिकता पर सवाल उठाया जा रहा है। एक दिन पहले एक्स पर एक पोस्ट में सीएम ममता नेकहा कि जब लोकतंत्र दांव पर हो, धर्मनिरपेक्षता खतरे में हो और संघवाद को ध्वस्त किया जा रहा हो, तो लोगों को संविधान से मिले मूल्यवानमार्गदर्शन की रक्षा करनी चाहिए। सीएम बनर्जी ने कहा कि संविधान राष्ट्र की रीढ़ है, जो भारत की संस्कृतियों, भाषाओं और समुदायों की विविधता कोकुशलतापूर्वक एक साथ पिरोता है। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘इस संविधान दिवस पर मैं हमारे महान संविधान और भारत में हमें जोड़ने वालेमहान दस्तावेज के प्रति गहरा सम्मान और श्रद्धांजलि अर्पित करती हूं।’ राज्य की जनता ने ठान लियासंसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत से पहले राज्यसभा सचिवालय ने सदस्यों को संसदीय शिष्टाचार और अनुशासन को लेकर नया बुलेटिन जारीकिया है। इस बुलेटिन में सदन की गंभीरता बनाए रखने के लिए नारेबाजी समेत जय हिंद, वंदे मातरम, थैंक यू जैसे शब्दों पर भी प्रतिबंध लगाया गयाहै। इसे लेकर सवाल पूछे जाने पर मुख्यमंत्री बनर्जी ने कहा, ‘अब आप सोचिए, देश में क्या चल रहा है। क्यों नहीं बोलेंगे। जय हिंद और वंदे मातरमराष्ट्रीय गीत हैं। ये हमारी आजादी के नारे हैं। जय हिंद हमारे नेताजी सुभाष चंद्र बोस का नारा है। इससे जो टकराएगा, चूर-चूर हो जाएगा।’ वहीं, ममता बनर्जी के बयान पर भाजपा सांसद और पश्चिम बंगाल भाजपा के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा कि वो जितने आरोप लगाना चाहें, लगा लें।उन्होंने कहा कि क्या वो देश में सांप्रदायिक तनाव फैलाना चाहती हैं? भाजपा नेता ने कहा कि क्या वो एक और शाहीन बाग बनाना चाहती हैं? उन्होंनेकहा कि राज्य की जनता ने ठान लिया है कि वो पश्चिम बंगाल को पश्चिमी बांग्लादेश नहीं बनने देंगे। उन्होंने कहा कि अब ममता बनर्जी को कोई सुनताही नहीं है।

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा का संविधान दिवस संदेश, जम्मू-कश्मीर में भेदभाव और आतंकवाद को खत्म कर नागरिकों के जीवन में सुधार लाना हमारी प्राथमिकता

जम्मू और कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि उनके जम्मू-कश्मीर में मिशन का उद्देश्य नागरिकों के जीवन में सुधार लाना, भेदभाव औरअन्याय को समाप्त करना तथा आतंकवाद के पूरे तंत्र को खत्म करना रहा है। संविधान दिवस समारोह में बोलते हुए सिन्हा ने कहा कि लंबे समय तकअलगाववादियों को पुरस्कृत करने और देशभक्तों को प्रताड़ित करने की जो नीति चली आ रही थी, उसे पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। समारोह मेंउन्होंने संविधान की प्रस्तावना का पाठ कराया और संविधान निर्माताओं को श्रद्धांजलि दी। एलजी ने कहा कि 2019 में अनुच्छेद 370 को रद्द करनेऔर जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के बाद जम्मू-कश्मीर में संविधान की सभी व्यवस्थाएं पूरी तरह लागू कर दी गईं, जिससेभेदभाव और अन्याय का शासन समाप्त हुआ। वरिष्ठ नागरिक और पुलिस अधिकारी उपस्थित रहेअब जम्मू-कश्मीर संविधान में निहित समानता, सामाजिक और आर्थिक न्याय के आदर्शों के मार्गदर्शन में आगे बढ़ रहा है। मैं यह साफ करना चाहता हूंकि पिछले पांच वर्षों में जो भी उपलब्धियां मिली हैं, उनमें मुख्य उपलब्धि यह है कि अलगाववादियों को पुरस्कृत करने और देशभक्तों को प्रताड़ितकरने की नीति पूरी तरह खत्म कर दी गई है। उपराज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संविधान की सभी व्यवस्थाओं को लागू कर जम्मू-कश्मीरके नागरिकों के सम्मान, गौरव और गरिमा को सुनिश्चित किया है। संविधान दिवस समारोह संस्कृति विभाग और कानून, न्याय एवं संसदीय कार्य विभागके संयुक्त आयोजन में आयोजित किया गया। समारोह में जम्मू-कश्मीर विधान सभा के स्पीकर अब्दुल रहीम रदर, वरिष्ठ नागरिक और पुलिसअधिकारी उपस्थित रहे। सुधार लाना तथा आतंकवाद के पूरे तंत्र को खत्म करना रहासिन्हा ने अधिकारियों और नीति निर्धारकों से संविधान के मूल्यों की रक्षा और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने का आग्रह किया और कहा किसंविधान हमें एकता, समानता और आत्म-सम्मान का मार्ग दिखाता है। राष्ट्रीय एकता और अखंडता बनाए रखना हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है और हमेंभारत को शक्तिशाली और आत्मनिर्भर बनाने के लिए सभी संसाधनों का उपयोग करना चाहिए। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने संविधान दिवस पर कहाकि जम्मू-कश्मीर में उनका मिशन भेदभाव और अन्याय को समाप्त कर नागरिकों के जीवन में सुधार लाना तथा आतंकवाद के पूरे तंत्र को खत्म करनारहा है।

पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच अगले महीने से शुरू होंगी ढाका-कराची सीधी उड़ानें, कनेक्टिविटी और व्यापार में मिलेगी नई रफ्तार

ढाका के एक शीर्ष राजनयिक ने बुधवार को बताया कि पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच सीधी उड़ान सेवा अगले महीने से शुरू होगी। जो दोनोंदेशों के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में ये एक बड़ी छलांग होगी। पिछले कई वर्षों से पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच कोई सीधीफ्लाइट नहीं थी। इस साल दोनों देशों के बीच रिश्ते बेहतर होने पर, हाल ही में दो पाकिस्तानी निजी एयरलाइंस को बांग्लादेश के लिए सीधी फ्लाइटके लिए मंजूरी मिली है। इस्लामाबाद में बांग्लादेश के उच्चायुक्त इकबाल हुसैन खान ने लाहौर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (LCCI) में कहा, ‘महान एयर अगले महीने से ढाका और कराची के बीच हफ्ते में तीन फ्लाइट्स शुरू करेगी।’ हालांकि, उन्होंने कोई तारीख नहीं बताई और न ही विस्तृतजानकारी दी। उच्चायुक्त ने आगे कहा ‘वीजा प्रक्रिया को भी आसान बना दिया गया है। वीजा अब LCCI और लाहौर में बांग्लादेश ऑनरेरी कॉन्सुलेटकी संयुक्त सिफारिश पर जारी किए जा रहे हैं। सदस्यों को तीन से चार दिनों के अंदर वीजा जारी कर दिए जाएंगे, जिससे दोनों देशों के बीच यात्रा तेजऔर आसान हो जाएगा।’ बांग्लादेशी उच्चायुक्त ने कहा कि ढाका और कराची के बीच हफ्ते में तीन फ्लाइट्स संचालित होंगी। तेहरान में मौजूद एकनिजी ईरानी एयरलाइन महान एयर इन फ्लाइट्स का संचालन करेगी। तीन अरब डॉलर तक बढ़ सकताबांग्लादेशी उच्चायुक्त ने कहा कि ढाका और कराची के बीच हफ्ते में तीन फ्लाइट्स संचालित होंगी। बता दें कि महान एयरलाइंस, जो महान एयर केनाम से चलती है, तेहरान में मौजूद एक निजी ईरानी एयरलाइन है। 5 अगस्त, 2024 को बांग्लादेश में छात्रों के विरोध प्रदर्शनों के बाद प्रधानमंत्रीशेख हसीना को पद से अपदस्थ कर दिया गया था और मोहम्मद यूनुस ने वहां की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार का पद संभाला, तब से ढाकाऔर इस्लामाबाद के बीच रिश्ते बेहतर हुए हैं। हाल ही में, दो पाकिस्तानी निजी एयरलाइन फ्लाई जिन्ना और एयरसियाल को भी बांग्लादेश में उड्डयनप्राधिकरण से पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच सीधी उड़ान चलाने की मंजूरी मिली है। हाई कमिश्नर खान ने कहा कि दोनों देशों के बीच एकसीधी कार्गो शिपिंग सर्विस भी जल्द ही शुरू की जाएगी। लाहौर चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष फहीमुर रहमान सैगोल ने कहा कि पाकिस्तानबांग्लादेश को चावल का निर्यात बढ़ा सकता है और ढाका टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट्स के अलावा पाकिस्तान को फल भी सप्लाई कर सकता है।उन्होंने कहा कि दोनों देशों के पास IT, ऑटोमोबाइल और दूसरी इंडस्ट्रीज़ में मिलकर काम करने के मौके हैं। सैगोल ने कहा, ‘अभी, दोनों देशों के बीचसात करोड़ डॉलर की है, लेकिन अगले कुछ वर्षों में यह तीन अरब डॉलर तक बढ़ सकता है।’

अरुणाचल की बेटी का चीनी एयरपोर्ट पर अपमान, CM खांडू भड़कें, 18 घंटे की हिरासत पर कड़ा विरोध

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने मंगलवार को चीनी आव्रजन अधिकारियों की निंदा की। खांडू ने राज्य की एक महिला के साथ किए गएव्यवहार को अस्वीकार्य और भयावह बताया। महिला को शंघाई पुडोंग हवाई अड्डे पर करीब 18 घंटे तक हिरासत में रखा गया, क्योंकि अधिकारियों नेकथित तौर पर उसका भारतीय पासपोर्ट पहचानने से इनकार कर दिया था। सीएम खांडू ने कहा कि वह ब्रिटेन में रहने वाली भारतीय नागरिक पेमावांगजोम थोंगडोक के साथ हुई घटना से सदमे में हैं। उन्होंने दावा किया कि चीनी अधिकारियों का आचरण ‘अपमानजनक और नस्लीय उपहास’ केजैसा है। कामेंग जिले के रूपा की निवासी थोंगडोक फिलहाल ब्रिटेन में रहतीमुख्यमंत्री ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘वैध भारतीय पासपोर्ट होने के बावजूद उनके साथ ऐसा व्यवहार करना भयावह है।’ उन्होंने कहा, ‘अरुणाचलप्रदेश भारत का अभिन्न अंग है और हमेशा रहेगा। इसके विपरीत कोई भी आरोप निराधार और आपत्तिजनक है।’ इस घटना को अंतरराष्ट्रीय मानदंडों काउल्लंघन और भारतीय नागरिकों की गरिमा का अपमान बताते हुए खांडू ने कहा कि उन्हें भरोसा है कि विदेश मंत्रालय इस मामले को तत्काल उठाएगाताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। पश्चिमी कामेंग जिले के रूपा की निवासी थोंगडोक फिलहाल ब्रिटेन में रहती हैं। 21 नवंबर को लंदन से जापान जा रही थीं, जब उनका तीन घंटे का ट्रांजिट एक लंबे और कष्टदायक टकराव में बदल गया। कनेक्टिंग फ्लाइट में चढ़ने से रोक दिया गयारविवार को एक्स पर एक विस्तृत पोस्ट में, उन्होंने लिखा, ‘मुझे 21 नवंबर 2025 को चीन के आव्रजन और चाइना ईस्टर्न एयरलाइंस की ओर सेशंघाई हवाई अड्डे पर 18 घंटे से ज्यादा समय तक रोके रखा गया। उन्होंने मेरे भारतीय पासपोर्ट को अमान्य घोषित कर दिया, क्योंकि मेरा जन्मस्थानअरुणाचल प्रदेश है, जिसे उन्होंने चीनी क्षेत्र बताया।’ महिला ने बताया कि उन्हें बिना कोई ठोस वजह बताए और बिना बुनियादी सुविधाओं के ट्रांजिटएरिया में ही रोक दिया गया। कथित तौर पर उनका पासपोर्ट जब्त कर लिया गया और वैध वीजा होने के बावजूद उन्हें जापान जाने वाली कनेक्टिंगफ्लाइट में चढ़ने से रोक दिया गया। थोंगडोक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखकर इस घटना को भारत की संप्रभुताऔर अरुणाचल प्रदेश के लोगों का सीधा अपमान बताया है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह इस मामले को बीजिंग के समक्ष जोरदार तरीके सेउठाए, जवाबदेही की मांग करे, इसमें शामिल लोगों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग करे तथा उत्पीड़न के लिए मुआवजे की मांग करे।महिला ने बताया कि उन्हें बिना कोई ठोस वजह बताए और बिना बुनियादी सुविधाओं के ट्रांजिट एरिया में ही रोक दिया गया। कथित तौर पर उनकापासपोर्ट जब्त कर लिया गया और वैध वीजा होने के बावजूद उन्हें जापान जाने वाली कनेक्टिंग फ्लाइट में चढ़ने से रोक दिया गया।

500 साल का इंतज़ार खत्म अयोध्या के राम मंदिर पर लहराई धर्मध्वजा, शिखर पर आस्था का इतिहास फिर हुआ जीवंत

500 वर्षों से एक तरह का विरह झेल रही अयोध्यानगरी का राम मंदिर आज तब संपूर्ण हो गया, जब भव्य और दिव्य मंदिर के शिखर पर आस्था कीध्वजा लहराई। वही ध्वज, जो केवल वस्त्र नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति का साक्षात प्रतीक है। यह ध्वज आस्था के धागों से तैयार हुआ। इस क्षण कासाक्षी बनने के लिए स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौजूद थे। साथ में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुखमोहन भागवत भी मौजूद थे। आइए जानते हैं कि मंगलवार को आखिर अयोध्या में हुआ क्या…अयोध्या में राम मंदिर को लेकर लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आया था। इसके बाद 5 अगस्त2020 को अयोध्या में भव्य मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन हुआ। कोरोना काल में हजारों श्रमिकों की अथक मेहनत के बाद राम मंदिर का पारंपरिकनागर शैली में निर्माण पूरा हुआ। इसकी लंबाई 380 फीट, चौड़ाई 250 फीट और ऊंचाई 161 फिट है। यह कुल 392 खंभों और 44 दरवाजों सेयुक्त है। चार महीने तक अध्ययन किया गयादरअसल, 22 जनवरी 2024 को भगवान श्रीराम बालक राम के रूप में स्थापित किए गए थे। 5 जून 2025 को दूसरी प्राण प्रतिष्ठा में भगवान रामराजा के रूप में स्थापित किए गए। इसके बाद अंतिम कार्य ध्वज ध्वजा स्थापित करने का था। सनातन परंपरा में शिखर पर लहराते ध्वज को मंदिर कारक्षक, ऊर्जा का वाहक और पूर्णता तथा ईश्वर की उपस्थिति का प्रतीक माना जाता है। ध्वजा से ही मंदिर को पूर्णता प्राप्त होती है। ध्वजा आरोहण केलिए 25 नवंबर 2025 को सुबह 11:58 बजे से दोपहर 12:30 बजे के बीच का मुहूर्त निकाला गया। मंगल-स्वस्ति गान के बीच ध्वजा आरोहणहुआ। 32 मिनट का यह शुभ योग भगवान श्रीराम के जन्म नक्षत्र अभिजीत मुहूर्त से मेल खाता है। दिन भी मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी काचुना गया, जिसे विवाह पंचमी के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन भगवान श्रीराम और माता सीता का दिव्य विवाह हुआ था। यह 22 गुणा 11 फीटकी है। रंग चमकदार केसरिया है। इसे पैराशूट ग्रेड के तीन परत वाले कपड़े से बनाया गया है और आस्था के रेशमी धागों में पिरोया गया है। यहअहमदाबाद में बनकर तैयार हुआ। इसे 161 फीट ऊंचे शिखर पर 42 फीट ऊंचे एक दंड के माध्यम से स्थापित किया गया है। दंड पर 21 किलोसोना मढ़ा गया है। ध्वजा चार किमी दूर से भी दिखाई देगी। धर्म ध्वजा भयानक तूफान में भी सुरक्षित रहेगी। ध्वजा दंड पर बॉल बियरिंग लगे हैं।इससे ध्वजा हवा बदलने पर बिना उलझे पलट जाएगी। ध्वजा पर प्रभु श्रीराम के सूर्यवंश का चिह्न और ओंकार बना हुआ है। साथ ही कोविदार वृक्षका भी चिह्न है। इन चिह्नों के लिए चार महीने तक अध्ययन किया गया था। इन चिह्नों को ध्वज पर हाथ से बुना गया है। अयोध्या में अब न्यायाधीश के रूप में भगवान विराजमान हो चुकेअयोध्या का राज ध्वज और उस पर अंकित कोविदार वृक्ष सनातन संस्कृति की अमूल्य निधि रही है। इसका उल्लेख वाल्मीकि रामायण के अयोध्याकांड में है। इसके अनुसार चित्रकूट में वनवास के दौरान भगवान राम ने लक्ष्मण को अश्व और रथों से आती सेना के बारे में पता लगाने को कहा था। इसेदेखकर लक्ष्मण ने कहा था कि निश्चय ही भरत स्वयं सेना लेकर आया है। कोविदार युक्त विशाल ध्वज उसी के रथ पर फहरा रहा है। इसी प्रसंग सेजाहिर है कि कोविदार वृक्ष युक्त ध्वज अयोध्या की पहचान और प्राचीन धरोहर रही है। हरिवंश पुराण में उल्लेख है कि महर्षि कश्यप ने पारिजात केपौधे में मंदार के गुण मिलाकर इसे तैयार किया था। इस बारे में अयोध्या के महंत विवेक आचारी दिलचस्प वर्णन करते हैं। वे कहते हैं कि इसकी धर्मध्वजा की लंबाई-चौड़ाई यूं ही नहीं तय हुई है। अंक ज्योतिष की गणना में इसके मायने समझ में आते हैं। ध्वज का आकार 22 गुणा 11 फीट है। इसेगुणा करने पर 242 का अंक आता है, जिसका गुणांक आठ है। आठ को न्याय के देवता शनि का अंक माना जाता है। यह कहा जा सकता है कि राममंदिर के शिखर यानी अयोध्या में अब न्यायाधीश के रूप में भगवान विराजमान हो चुके हैं। जो मर्यादा में रहेगा, सुखी रहेगा। जो मर्यादा विहीनआचरण करेगा, उसका रावण जैसा हश्र होगा।

कर्नाटक में सत्ता संग्राम तेज: सिद्धारमैया, DK शिवकुमार खेमों की हलचल, सीएम बदलने का फैसला हाई कमान पर

कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद और शासन परिवर्तन को लेकर कांग्रेस में चल रहा सत्ता संघर्ष अभी भी थम नहीं पाया है। मंगलवार को एक तरफउपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यश्र मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात की। वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया एक बार फिरपार्टी हाई कमान के फैसले का राग गाया। उन्होंने कहा कि पार्टी हाई कमान को राज्य में मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रहे भ्रम को खत्म करना ही होगा।सिद्धारमैया ने इस दौरान फिर से इस बात को दोहराया कि वे सीएम बदलने के मामले में हाई कमान के फैसले का पालन करेंगे। उन्होंने कहा किविधायक पार्टी नेतृत्व से मिलकर अपनी राय साझा कर सकते हैं। बता दें कि कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर अटकलें तेज तब हो गई जब राज्यकी कांग्रेस सरकार ने 20 नवंबर को अपने पांच साल के कार्यकाल का आधा समय पूरा किया। इसी बीच, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और शिवकुमार केबीच कथित ‘पावर शेयरिंग’ समझौते की बातें भी सामने आई हैं। ऐसे में चर्चा तेज हो गई कि क्या अब डीके शिवकुमार को अगले ढाई साल के लिएमुख्यमंत्री पद दिया जा सकता है। सीएम बदलने के मामले में वे हाई कमान के निर्णय का पालन करेंगेसिद्धारमैया ने शिवकुमार के समर्थन में दिल्ला जाने वाले विधायकों को लेकर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि विधायक दिल्ली जाएं, उनकीस्वतंत्रता है। अंत में फैसला हाई कमान का है। हम हाई कमान के निर्णय का पालन करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जो विधायक मामला सुलझाने केलिए हाई कमान से बात करना चाहते हैं, वे अपनी बात रख सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, 23 नवंबर को छह कांग्रेस विधायक शिवकुमार का समर्थनकरने के लिए दिल्ली गए, वहीं कुछ और विधायक भी जल्द उच्च नेतृत्व से मिल सकते हैं। इससे पहले पिछले हफ्ते लगभग दस विधायक भी दिल्लीमें एआईसीसी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मिले थे। कर्नाटक में कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद और सत्ता को लेकर संघर्ष जारी है। इसी बीच सिद्धारमैया नेदो टूक अंदाज में पार्टी हाई कमान की बात को दोहराया है। उन्होंने कहा कि इस पूरे विवाद को खत्म करने का अंतिम फैसला हाई कमान का होगा।उन्होंने कहा कि सीएम बदलने के मामले में वे हाई कमान के निर्णय का पालन करेंगे।

बंगाल में वोटर लिस्ट विवाद भड़का! ममता बनर्जी का 3 किमी मार्च, TMC का एसआईआर के खिलाफ शक्ति प्रदर्शन

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को राज्य में मतदाता सूची को लेकर चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध मेंनॉर्थ 24 परगना जिले के बनगांव के चांदपारा से मतुआ के गढ़ ठाकुरनगर तक तीन किमी का मार्च निकाला। वहीं तृणमूल कांग्रेस के एक नेता नेबताया कि यह जुलूस, जो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भारत-बांग्लादेश बॉर्डर के पास बनगांव शहर में एसआईआर के खिलाफ एक रैली को संबोधितकरने के बाद निकाला, ठाकुरनगर के ढाकुरिया स्कूल में खत्म होगा। बता दें कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस जुलूस-प्रदर्शन की अगुवाई कर रही थीं, जिसमें शामिल लोग नीले और सफेद गुब्बारे लिए हुए थे, तृणमूल कांग्रेस के झंडे लहरा रहे थे और एसआईआर के खिलाफ नारे लगा रहे थे। चुनावआयोग (ईसीआई) ने पश्चिम बंगाल समेत देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची की शुद्धता के लिए एसआईआर शुरू की है।पश्चिम बंगाल में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। लेकिन एसआईआर को लेकर राज्य की सत्ताधारी दल तृणमूल कांग्रेस और मुख्य विपक्षी दलभाजपा में आरोप-प्रत्यारोप का दौर चरम पर है। भारी संख्या में टीएमसी कार्यकर्ता शामिल हुएविपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस और ‘इंडिया’ गठबंधन के घटक दलों का आरोप है कि एसआईआर की प्रक्रिया में गंभीर विसंगतियां हैं और इसकाउद्देश्य कुछ खास लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाना है, जिससे चुनावों में लाभ पहुंचाया जा सके। हाल ही में एसआईआर से जुड़े कुछ लोगों की मौतकी खबरें भी आई हैं, हालांकि इन मौतों के कारणों की स्वतंत्र जांच की मांग की जा रही है। निर्वाचन आयोग ने 27 अक्तूबर को 12 राज्यों औरकेंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों की शुद्धि का अभ्यास शुरू करने का एलान किया था। आयोग ने इसे एसआईआर का फेज-दो बताया है (बिहारमें हुए एसआईआर को फेज-1 बताया गया था)। बता दें कि एसआईआर का दूसरा चरण 4 नवंबर को शुरू हुआ और 4 दिसंबर तक चलेगा।एसआईआर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम मतदाता सूची 7 फरवरी, 2026 को प्रकाशित की जाएगी। एसआईआर का दूसरा चरण अंडमानऔर निकोबार द्वीप समूह, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगालकराया जा रहा है। बंगाल में एसआईआर के खिलाफ सीएम ममता बनर्जी ने पैदल मार्च किया है। जानकारी के मुताबिक, तीन किमी लंबे पैदल मार्चकी सीएम ने खुद अगुवाई की जो चांदपारा से मतुआ-हार्टलैंड ठाकुरनगर तक चला। इस दौरान भारी संख्या में टीएमसी कार्यकर्ता शामिल हुए।

एमी अवॉर्ड्स में दिलजीत का सितारों वाला जलवा, पर ‘अमर सिंह चमकीला’ की झोली रही खाली

53वें इंटरनेशनल एमी अवॉर्ड्स में दिलजीत दोसांझ ने भले ही अपने शानदार लुक से महफिल लूट ली। मगर, अवॉर्ड के मामले में उनकी झोली खालीरह गई। एमी अवॉर्ड्स 2025 में एक्टर-सिंगर अवॉर्ड पाने से चूक गए। उन्हें इम्तियाज अली की फिल्म ‘अमर सिंह चमकीला’ में उनकी परफॉर्मेंस केलिए नॉमिनेट किया गया था। 53वें इंटरनेशनल एमी अवॉर्ड्स में दिलजीत दोसांझ को बायोग्राफिल ड्रामा ‘अमर सिंह चमकीला’ के लिए बेस्ट एक्टरके लिए नॉमिनेट किया गया था। वहीं, इस फिल्म को बेस्ट TV मिनी मूवी/मिनी सीरीज कैटिगरी में नॉमिनेट किया गया था। मगर, दोनों ही कैटिगरी मेंफिल्म अवॉर्ड नहीं जीत पाई। शिमर ब्लेजर में वे खूब जंचेबेस्ट एक्टर का अवॉर्ड दिलजीत दोसांझ की बजाय ओरिओल प्ला को ‘आई, एडिक्ट’ फिल्म के लिए मिला। वहीं, बेस्ट टीवी मिनी मूवी/मिनी सीरीजकैटिगरी में ‘अमर सिंह चमकीला’ की बजाय ‘लॉस्ट बॉयज एंड फेयरीज’ ने अवॉर्ड झटका। दोनों कैटेगरी में फिल्म को नॉमिनेशन मिलने पर फैंस उम्मीदकर रहे थे कि इसे अवॉर्ड मिल सकता है, क्योंकि ‘अमर सिंह चमकीला’ को दुनियाभर में पसंद किया गया। मगर, दोनों श्रेणी में अवॉर्ड नहीं मिलने परफैंस निराश हैं। अवॉर्ड फंक्शन में दिलजीत दोसांझ और इम्तियाज अली को शानदार अंदाज में रेड कार्पेट पर देखा गया। दिलजीत ने शिमर सूट जैकेट, व्हाइट शर्ट, ब्लैक बो, ब्लैक ट्राउजर और अपनी सिग्नेचर ब्लैक पगड़ी में एक शानदार स्टाइल स्टेटमेंट दिया। बात करें फिल्म ‘अमर सिंह चमकीला’ कीतो यह फिल्म साल 2024 में नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई थी। दिलजीत के अपोजिट फिल्म में परिणीति चोपड़ा ने लीड रोल अदा किया। यह फिल्मपंजाब के मशहूर लोक गायक अमर सिंह चमकीला की कहानी पर आधारित है। 53वें इंटरनेशनल एमी अवॉर्ड्स में सिंगर-एक्टर दिलजीत दोसांझअपने शानदार लुक से छा गए। ऑफ व्हाइट कलर के शिमर ब्लेजर में वे खूब जंचे। मगर, अवॉर्ड के मामले में उनके हाथ खाली रह गए।

तमिल बनाम हिंदी विवाद फिर गर्माया राज्यपाल आर.एन. रवि का बड़ा बयान, ‘तमिल राजनीति क्षेत्रवाद नहीं, तमिल विशिष्टता

तमिलनाडु के सियासी गलियारों में तमिल बनाम हिंदी का मुद्दा हमेशा ही सुर्खियों में रहता है। इस बीच तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि का बड़ाबयान सामने आया है। राज्यपाल ने कहा कि तमिलनाडु की राजनीति क्षेत्रवाद नहीं है, बल्कि यह अनिवार्य रूप से तमिल ‘विशिष्टता’ है, जो इस बातपर जोर देता है कि तमिल अन्य भाषाओं से अलग है।तमिलनाडु के राज्यपाल के तौर पर आर.एन. रवि का एम.के. स्टालिन के नेतृत्व वाली डीएमके सरकार के साथ गतिरोध का लंबा इतिहास है।राज्यपाल ने कहा, ‘यह तमिल विशिष्टता अन्य भाषाओं के प्रति घृणा से व्यक्त होती है, यहां तक कि द्रविड़ परिवार से संबंधित तेलुगू, कन्नड़ औरमलयालम जैसी भाषाओं के प्रति भी। यह केवल हिंदी तक ही सीमित नहीं है।’ उन्होंने तमिल राजनेताओं की आलोचना करते हुए यह भी कहा कि वेवास्तव में तमिल से प्रेम नहीं करते, क्योंकि उन्होंने तमिल भाषा या तमिल संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए कुछ भी नहीं किया है। कार्यक्रम में सिर्फ एक मेहमानउन्होंने एक साक्षात्कार में कहा, ‘सच्चाई यह है कि हर साल छात्र तमिल माध्यम से अंग्रेजी माध्यम की ओर जा रहे हैं। तमिल में पढ़ाई करने वाले छात्रोंकी संख्या में लगातार और तेजी से गिरावट आ रही है।’ रवि ने कहा कि तमिलनाडु सरकार ने तमिल भाषा और संस्कृति में अनुसंधान के लिए शून्यबजट दिया है। उन्होंने बताया, “राज्य अभिलेखागार में 11 लाख से अधिक ताड़पत्र पांडुलिपियां सड़ रही हैं। उनके संरक्षण के लिए कोई धनराशिआवंटित नहीं की गई है।” अक्टूबर 2024 में दूरदर्शन के एक कार्यक्रम में ‘तमिल थाई वजथु’ से जुड़े विवाद का जिक्र करते हुए राज्यपाल ने कहा किडीएमके के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार ने बिना किसी बात के हंगामा खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा कि वे इस कार्यक्रम में सिर्फ एक मेहमान थे औरआयोजकों से गलती हुई। उन्होंने माफी भी मांगी। राज्यपाल ने कहा, ‘मैं तमिल थाई वजथु उन कई लोगों से कहीं बेहतर गा सकता हूं जो तमिलबोलते हैं।’ तमिल थाई वजथु’ से जुड़े विवाद का जिक्रसरकार और राज्यपाल के बीच तनाव को उजागर करने वाली एक अन्य घटना को याद करते हुए – रवि ने जनवरी में विधानसभा के पहले सत्र में अपनापारंपरिक अभिभाषण देने के बजाय वॉकआउट कर दिया था – उन्होंने कहा कि यह एक ‘दुखद निर्णय’ था। रवि इस बात का विरोध कर रहे थे कि सत्रकी शुरुआत में राष्ट्रगान नहीं बजाया गया। उन्होंने बताया कि ऐसे समारोहों में जहां राज्यपाल या राष्ट्रपति भाग लेते हैं, वहां कार्यक्रम की शुरुआतराष्ट्रगान से होती है और समापन भी राष्ट्रगान से होता है। अक्टूबर 2024 में दूरदर्शन के एक कार्यक्रम में ‘तमिल थाई वजथु’ से जुड़े विवाद का जिक्रकरते हुए राज्यपाल ने कहा कि डीएमके के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार ने बिना किसी बात के हंगामा खड़ा कर दिया।

नीतीश सरकार का बिग विज़न 5 साल में 1 करोड़ रोजगार, बिहार बनेगा न्यू एज टेक्नोलॉजी हब

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शपथ ग्रहण के बाद ही युवाओं और रोजगार को लेकर अपनी तैयारी दिखा दी थी। उन्होंने बिहार में उद्योग की संभावनाबढ़ाने की तैयारी पहले ही बता दी थी। मंगलवार को इधर कैबिनेट की बैठक में उद्योग और विकास की बात हुई तो दूसरी तरफ मुख्यमंत्री नीतीशकुमार ने युवाओं को अगले 5 साल में रोजगार उपलब्ध कराने को लेकर अपनी पूरी योजना बताई। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने सोशल मीडियाअकाउंट पर क्या लिखा. राज्य में अधिक से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी और रोजगार मिले, यह शुरू से ही हमलोगों की प्राथमिकता रही है।सात निश्चय-2 के तहत वर्ष 2020-25 के बीच राज्य में 50 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी एवं रोजगार दिया गया है। अगले 5 वर्षों (2025-30) में हमलोगों ने 1 करोड़ युवाओं को नौकरी एवं रोजगार देने का लक्ष्य निर्धारित किया है।कार्ययोजना तैयार की जाएगीनई सरकार के गठन के पश्चात राज्य में उद्योगों को बढ़ावा देने एवं अधिक से अधिक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए हमलोगों ने तेजी सेकाम शुरू कर दिया है। बदलते बिहार के विकास की गति को बल देने हेतु बिहार में प्रौद्योगिकी और सेवा आधारित नवाचारों की न्यू ऐज इकोनॉमी(New Age Economy) के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु इस क्षेत्र से संबंध रखने वाले बिहार के अग्रणी उद्यमियोंके सुझाव प्राप्त कर योजनाओं एवं नीतियों का निर्धारण किया जाएगा। साथ ही बिहार को एक ‘वैश्विक Back-end Hub’ एवं ‘ग्लोबल वर्कप्लेस’ के रूप में विकसित एवं स्थापित करने हेतु महत्वपूर्ण विभागों तथा प्रतिष्ठित अर्थशास्त्रियों एवं विशेषज्ञों के सहयोग से एक विस्तृत कार्ययोजना तैयारकी जाएगी। बिहार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मिशनबिहार की जनसंख्या में युवाओं की भागीदारी काफी अधिक है। इसको सार्थक दिशा देने पर बिहार देश का सबसे तेजी से विकास करने वाला राज्यबन सकता है। बिहार में बड़ी संख्या में उपलब्ध युवा मानव संसाधन को ध्यान में रखते हुए बिहार को पूर्वी भारत के नए टेक्नोलॉजी हब(Technology Hub) के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए बिहार में डिफेंस कॉरिडोर, सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग पार्क, ग्लोबलकैपेबिलिटी सेंटर्स, मेगा टेक सिटी व फिनटेक सिटी की स्थापना की जाएगी एवं उद्योगों का जाल बिछाने हेतु वृहद कार्ययोजना तैयार कर योजनाओंको क्रियान्वित किया जाएगा। राज्य में नई चीनी मिलों की स्थापना एवं पुरानी बंद पड़ी चीनी मिलों को पुनः चालू करने हेतु नीति एवं कार्ययोजनाबनाई गई है। इसके साथ ही राज्य के सभी प्रमुख शहरों को बेहतर एवं सुंदर बनाने की योजना पर कार्य करने हेतु तैयारी की जा रही है, तथा नईतकनीकों का उपयोग कर राज्य को अग्रणी बनाने हेतु बिहार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मिशन की स्थापना की जाएगी।