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मोकिम का पत्र ‘भाजपा की मानसिकता’ से प्रेरित, कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल गलत: भक्त चरण दास

ओडिशा प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने कहा कि निष्कासित कांग्रेस नेता मोहम्मद मोकिम का हाल में सोनिया गांधी को लिखागया पत्र ‘भाजपा की मानसिकता’ से तैयार किया हुआ लगता है। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर सवाल उठाने वाला यह पत्र भाजपाके पसंदीदा मुद्दों से भरा हुआ है। पूर्व विधायक मोकिम को सोमवार को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। उन्होंने अपने पत्र में कांग्रेस नेता राहुलगांधी के नेतृत्व और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की उम्र से जुड़े सवाल उठाए थे। भक्त चरण दास ने मंगलवार शाम पीटीआई से कहा, यह पत्रभाजपा की मानसिकता को दर्शाता है। इसमें उठाए गए मुद्दे वही हैं, जिन्हें भाजपा बार-बार उठाती रहती है। उन्होंने बताया कि यह पत्र 14 दिसंबर कोउसी दिन सार्वजनिक किया गया, जब कांग्रेस की शीर्ष इकाई अखिल भारतीय कांग्रेस समिति दिल्ली में एक बड़ी रैली कर रही थी। दास ने कहा, पत्रके समय और उसकी सामग्री पर ध्यान दीजिए। इसे स्थानीय मीडिया से ज्यादा राष्ट्रीय मीडिया में फैलाया गया। ऐसे में यह शक करने की पूरी वजह हैकि यह पत्र भाजपा के हितों को ध्यान में रखकर लिखा गया। सक्रिय नेतृत्व भूमिका’ देने की भी मांग कीबाराबती-कटक के पूर्व विधायक के पत्र की मंशा पर सवाल उठाते हुए दास ने कहा कि अगर कोई पार्टी में सुधार लाना चाहता है, तो वह पहले अपनेपत्र के जवाब का इंतजार करता है। उन्होंने कहा, सोनिया जी को पत्र देना ठीक है, लेकिन उसे मीडिया में जारी करना गलत है। इससे साफ होता है किवह कांग्रेस में रहना नहीं चाहते। ओपीसीसी अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी ने मोकिम को एक बार विधायक रहने के बावजूद पूरा सम्मान दिया था। उन्होंनेकहा, उनके व्यवहार से कांग्रेस के प्रति प्रतिबद्धता की कमी झलकती है। कोई व्यक्ति पार्टी में रहकर उसके वरिष्ठ नेताओं को कैसे चुनौती दे सकता है? दास ने यह भी कहा कि मोकिम अल्पसंख्यक समुदाय से होने के कारण ओपीसीसी की राजनीतिक मामलों की समिति (पीएसी) के सदस्य थे। उन्होंनेकहा, मोकिम पीएसी के पास अपनी बात रख सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। राहुल गांधी के नेतृत्व पर सवाल उठाने को लेकर दास नेकहा, मोकिम उनके बारे में क्या जानते हैं? राहुल गांधी ने पूरे देश में पदयात्रा की और लोगों को जागरूक किया। क्या अब वह राहुल गांधी जैसे नेताको पत्र लिखकर मार्गदर्शन देंगे? अपने पत्र में मोकिम ने पार्टी के कामकाज में राहुल गांधी की जगह प्रियंका गांधी वाड्रा को ‘केंद्रीय, स्पष्ट और सक्रियनेतृत्व भूमिका’ देने की भी मांग की थी।

नेशनल हेराल्ड केस में गांधी परिवार को बड़ी राहत, कोर्ट ने ईडी की याचिका पर संज्ञान से किया इनकार

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक सिंघवी ने कहा कि नेशनल हेराल्ड मामला राजनीतिक प्रतिशोध और उत्पीड़न की कहानी है। वहीं, कांग्रेस ने कहा किकानून ने शोर से ज्यादा जोर से बात की है। बता दें कि दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने मंगलवार को नेशनल हेराल्ड मामले में धनशोधन के आरोपों सेजुड़ी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, ये लोग ईडी, सीबीआईजैसी एजेंसियों का उपयोग करके हमारे लोगों को बदनाम कर रहे हैं। खासकर गांधी परिवार को सताने के लिए उन्होंने ये केस डाला है। नहीं तो उसमेंकुछ नहीं है। कोई एफआईआर नहीं है। कोई व्यक्ति शिकायत डालता है और ये उस पर कार्रवाई करते हैं। जिस चीज में कोई दम नहीं है, उसमें दमभरने की कोशिश करके हमारे लोगों का उत्पीड़न करते हैं। हमारी कांग्रेस पार्टी के बहुत से नेता, 50 बड़े नेता जो उनसे सहानुभूति नहीं रखते हैं, उनकेखिलाफ ईडी का केस डालकर उन्हें सता रहे हैं। उन्होंने धनशोधन का मुकदमा डालकर कई लोगों को अपनी ओर किया है। कई सांसदों को अपनी ओरकिया है और कई जगह सरकारें बनाई हैं। साक्ष्यों को इकट्ठा करना जारी रख सकतीकांग्रेस नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी को मंगलवार को बड़ी राहत मिली, जब कोर्ट ने दोनों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की तरफ सेदोनों के खिलाफ दायर किए गए आरोपपत्र का संज्ञान लेने से इनकार कर दिया। ईडी ने दोनों नेताओं को धनशोधन मामले में आरोपी बनाया है।आरोपपत्र में सोनिया और राहुल पर एसोसिएट्स जर्नल लिमिटेड (एजेएल) के अंतर्गत आने वाली 2000 करोड़ रुपये की संपत्ति को हड़पने का आरोपथा। इसके साथ ही कोर्ट ने ईडी को अपनी जांच जारी रखने की अनुमति दी और स्पष्ट किया कि आगे की जांच के लिए उसे स्वतंत्रता है। साथ ही कहाहै कि ईडी का मामला सुब्रमण्यम स्वामी की ओर से दायर एक निजी शिकायत और मजिस्ट्रेट के समन आदेशों पर आधारित है, न कि किसी प्राथमिकीपर। हालांकि, एजेंसी इस मामले से जुड़े तथ्यों और साक्ष्यों को इकट्ठा करना जारी रख सकती है। काटजू के पिता के नाम पर एजेएल में शेयरदेश के पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू ने 20 नवंबर 1937 को एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड यानी एजेएल का गठन किया था। इसका उद्देश्यअलग-अलग भाषाओं में समाचार पत्रों को प्रकाशित करना था। तब एजेएल के अंतर्गत अंग्रेजी में नेशनल हेराल्ड,भले ही एजेएल के गठन में पं. जवाहर लाल नेहरू की भूमिका थी, लेकिन इसपर मालिकाना हक कभी भी उनका नहीं रहा। क्योंकि, इस कंपनी को 5000 स्वतंत्रता सेनानी सपोर्टकर रहे थे और वही इसके शेयर होल्डर भी थे। 90 के दशक में ये अखबार घाटे में आने लगे। साल 2008 तक एजेएल पर 90 करोड़ रुपये से ज्यादाका कर्ज चढ़ गया। तब एजेएल ने फैसला किया कि अब समाचार पत्रों का प्रकाशन नहीं किया जाएगा। अखबारों का प्रकाशन बंद करने के बादएजेएल प्रॉपर्टी बिजनेस में उतरी। बता दें कि शांति भूषण और मार्कंडेय काटजू के पिता के नाम पर एजेएल में शेयर थे।

इथियोपिया ने तोड़ी परंपरा, पीएम मोदी को मिला देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान

इथियोपिया ने प्रधानमंत्री मोदी को अपने सर्वोच्च सम्मान- द ग्रेट ऑनर निशान ऑफ इथियोपिया से सम्मानित किया। इथियोपिया ने पीएम मोदी कोसम्मानित करने में पुरानी परंपराएं तोड़ दीं। पीएम मोदी दुनिया के पहले विदेशी राष्ट्र प्रमुख हैं, जिन्हें इथियोपिया ने देश के सर्वोच्च सम्मान द ग्रेट ऑनरनिशान ऑफ इथियोपिया से नवाजा। उन्हें दुनिया के 25वां देश सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित कर चुके हैं। मोदी से पहले किसी भी भारतीय प्रधानमंत्रीको इतने शीर्ष सम्मान हासिल नहीं हुए हैं। पीएम मोदी को यह सम्मान अदीस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र में आयोजित एक विशेष समारोह में प्रदानकिया गया। विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली में जारी एक बयान में कहा कि प्रधानमंत्री को भारत-इथियोपिया साझेदारी को मजबूत करने में उनकेअसाधारण योगदान और वैश्विक राजनेता के रूप में उनके दूरदर्शी नेतृत्व के लिए यह सम्मान दिया गया है। महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुईप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को जॉर्डन का दौरा खत्म कर इथियोपिया पहुंचे। इस दौरान पीएम मोदी ने इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमदअली के साथ बैठक की। पीएम मोदी ने इथियोपियाई पीएम अहमद अली को अपना भाई और दोस्त बताया। प्रधानमंत्री मोदी ने इथियोपिया कासर्वोच्च सम्मान दिए जाने पर कहा, ‘आप सभी के बीच इथियोपिया की इस महान भूमि पर होना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। आज दोपहर मैंइथियोपिया पहुंचा। यहां पहुंचते ही यहां के लोगों ने मुझे अद्भुत आत्मीयता और अपनेपन का अनुभव कराया। प्रधानमंत्री अली मुझे हवाई अड्डे पर लेनेआए थे। वे मुझे फ्रेंडशिप पार्क और विज्ञान संग्रहालय लेकर गए। यहां नेतृत्व से मेरी महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।’ दोगुना करने का निर्णय लियाइससे पहले इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली से मुलाकात के दौरान पीएम मोदी ने कहा, ‘इथियोपिया की यात्रा से मुझे बहुत खुशी हुईहै। यह मेरी इथियोपिया की पहली यात्रा है। लेकिन यहां कदम रखते ही मुझे एक गहरा अपनापन और आत्मीयता का अहसास हुआ।’ पीएम मोदी नेकहा, ‘पहलगाम आतंकी हमले पर आपकी सहानुभूति और आतंकवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई में आपके समर्थन के लिए हम आपके आभारी हैं।आतंकवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई में मित्र देशों का समर्थन हमारे लिए बहुत मायने रखता है।’ पीएम मोदी ने कहा, ‘भविष्य की अपार संभावनाओंको साकार करने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार किया जाएगा। आज हमें अर्थव्यवस्था, नवाचार, प्रौद्योगिकी, रक्षा, स्वास्थ्य, क्षमता निर्माण औरबहुपक्षीय सहयोग जैसे हमारे सहयोग के मुख्य पहलुओं पर विचार-विमर्श करने का अवसर मिला। मुझे खुशी है कि आज हमने भारत में इथियोपियाके छात्रों के लिए छात्रवृत्ति को दोगुना करने का निर्णय लिया है।’

मेसी इवेंट कुप्रबंधन पर बड़ा कदम, अरूप बिस्वास ने पद छोड़ने की पेशकश की

तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता कुणाल घोष ने मंगलवार को बताया कि पश्चिम बंगाल के खेल मंत्री अरूप बिस्वास ने सॉल्ट लेक स्टेडियम में लियोनेलमेसी इवेंट के “कुप्रबंधन” को लेकर हुए हालिया विवाद के बाद अपने पद से इस्तीफा देने की इच्छा जताई है। इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री ममताबनर्जी को पत्र लिखाकर पद मुक्त करने का अनुरोध किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर कुणाल घोष ने अरूप बिस्वास द्वारा मुख्यमंत्रीममता बनर्जी को लिखे इस्तीफे की कॉपी साझा की है। इस पत्र में बिस्वास ने राज्य के खेल मंत्री के तौर पर अपनी ज़िम्मेदारियों से मुक्त होने कीगुजारिश की है। यह घटनाक्रम 13 दिसंबर को सॉल्ट लेक स्टेडियम में हुए हाई-प्रोफाइल फुटबॉल इवेंट के दौरान कथित कुप्रबंधन और सुरक्षा में चूकको लेकर बढ़ती आलोचना और राजनीतिक विरोध के बीच सामने आया है। इस घटना के चलते गुस्साए दर्शकों ने तोड़फोड़ की थी और पुलिस सेझड़प हुई थी, जिससे स्टेडियम के फर्नीचर को लगभग 2 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। गड़बड़ियों की जांच कर रहीकुणाल घोष ने अपनी पोस्ट में कहा, खेल मंत्री अरूप बिस्वास ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पत्र लिखकर खेल विभाग की जिम्मेदारी से मुक्त करने काअनुरोध किया है और इस कदम की वजह मेसी इवेंट की गड़बड़ी से शुरू हुआ विवाद बताया। हालांकि टीएमसी नेता द्वारा शेयर किया गया पत्रबिस्वास के ऑफिशियल लेटरहेड पर नहीं है, जिससे बाद विपक्षी दलों ने इस पर सवाल उठाए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से भी इस बात कीकोई पुष्टि नहीं हुई कि इस्तीफे का अनुरोध माना गया है या नहीं। टीएमसी नेता और मुख्यमंत्री के करीबी बिस्वास ने अब तक इस मामले पर कोईबयान साझा नहीं किया है। राज्य सरकार ने पहले इस इवेंट के दौरान हुई कथित कमियों की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी बनाई है, जोप्रबंधन में हुए गड़बड़ियों की जांच कर रही है। मेसी मैदान पर सिर्फ कुछ मिनट ही मौजूद रह सकेइससे पहले मेसी के कार्यक्रम में लापरवाही बरतने के मामले में विधाननगर के डीसीपी अनीश सरकार को ड्यूटी में लापरवाही के आरोप में निलंबितकर दिया गया है। उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है। इस मामले में राज्य के खेल सचिव राजेश कुमार सिन्हा को भी कारणबताओ नोटिस जारी किया गया है। इसके अलावा साल्ट लेक स्टेडियम के सीईओ डीके नंदन की सेवाएं वापस ले ली गई हैं। मुख्य सचिव ने कहा किइस पूरे मामले की गहन जांच के लिए राज्य सरकार ने चार वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया है।यह टीम साल्ट लेक स्टेडियम में मेसी के कार्यक्रम के दौरान हुई अव्यवस्था और लापरवाही की जांच करेगी। 13 दिसंबर का दिन कोलकाता के सॉल्टलेक स्टेडियम के लिए कभी न भूलने वाला बन गया। इस दिन फुटबॉल जगत के सबसे बड़े सितारों में से एक लियोनल मेसी पहली बार कोलकाता मेंमैदान पर उतरे। हजारों की संख्या में फैंस स्टेडियम पहुंचे थे। लोगों ने सिर्फ मेसी की एक झलक पाने के लिए भारी-भरकम टिकट कीमतें चुकाईं, लेकिन जो उम्मीद लेकर आए थे, वही सबसे बड़ी निराशा में बदल गई। मेसी मैदान पर सिर्फ कुछ मिनट ही मौजूद रह सके, जिसके बाद उन्हें सुरक्षाकारणों से स्टेडियम से बाहर ले जाया गया। इसके बाद हालात तेजी से बिगड़ते चले गए।

अम्मान में पीएम मोदी का बड़ा संदेश, भारत-जॉर्डन रिश्ते आंकड़ों से आगे साझेदारी बनें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने जॉर्डन दौरे के आखिरी दिन अम्मान में आयोजित इंडिया-जॉर्डन बिजनेस फोरम में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने भारतऔर जॉर्डन के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ाने पर चर्चा की। साथ ही प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के व्यवसायिक नेताओं से बातचीत की और आर्थिकसहयोग को मजबूत करने के नए अवसर तलाशने पर जोर दिया और दोनों देशों के बीच व्यापार और सहयोग को लेकर अहम बातें भी कहीं। फोरम मेंउपस्थित नेताओं को संबोधित करते हए पीएम मोदी ने कहा कि भारत, जॉर्डन का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और दोनों देशों के रिश्तेसिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इन्हें लंबे समय के मजबूत साझे में बदला जाना चाहिए। सहयोग बढ़ाने में मदद कर रहापीएम मोदी ने कहा कि व्यापार की दुनिया में आंकड़ों की अपनी अहमियत होती है, लेकिन भारत और जॉर्डन का लक्ष्य केवल व्यापार बढ़ाना नहीं, बल्कि भरोसे और साझेदारी पर आधारित भविष्य बनाना है। उन्होंने इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि एक समय था जब गुजरात से यूरोप तकव्यापार पेट्रा के रास्ते होता था। अब समय आ गया है कि उन पुराने व्यापारिक रास्तों और रिश्तों को फिर से जीवित किया जाए, ताकि आने वाले समयमें दोनों देशों को समृद्धि मिल सके। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में आगे बताया कि जॉर्डन के राजा से हुई अपनी मुलाकात में उन्होंने इस बात परविस्तार से चर्चा की कि कैसे भौगोलिक स्थिति को अवसर में बदला जाए और उन अवसरों से आर्थिक विकास किया जाए। उन्होंने जॉर्डन के नेतृत्व कीतारीफ करते हुए कहा कि जॉर्डन आज एक ऐसा सेतु (ब्रिज) बनकर उभरा है, जो अलग-अलग क्षेत्रों के बीच सहयोग बढ़ाने में मदद कर रहा है। आने वाले वर्षों में और मजबूत होगीजॉर्डन बिजनेस फोरम में पीएम नरेंद्र मोदी ने भारत की आर्थिक स्थिति पर भी बातचीत की। उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक विकास दर आठप्रतिशत से ज्यादा है, जो बेहतर उत्पादकता, मजबूत शासन व्यवस्था और नवाचार पर आधारित नीतियों का नतीजा है। इसके कारण भारत में निवेशऔर व्यापार के लिए नए अवसर खुल रहे हैं, जिसका फायदा जॉर्डन के निवेशक और कारोबारी भी उठा सकते हैं। इसके साथ ही पीएम मोदी ने कहाकि आज दुनिया को एक नए ग्रोथ इंजन और भरोसेमंद सप्लाई चेन की जरूरत है। ऐसे समय में भारत और जॉर्डन मिलकर इस वैश्विक जरूरत को पूराकरने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने भरोसा जताया कि भारत–जॉर्डन की साझेदारी आने वाले वर्षों मेंऔर मजबूत होगी और इससे दोनों देशों के लोगों को आर्थिक लाभ मिलेगा।

मनरेगा पर वार, प्रियंका गांधी का VB-G RAM G बिल पर तीखा हमला “नाम बदला, हक घटाया”

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा आज लोकसभा में विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण), VB-G RAM G बिल, 2025 का विरोध किया। यह बिल दो दशक पुराने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) की जगह लाने काप्रस्ताव है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक में बदलाव करने पर अपनी आपत्ति दर्ज करना चाहती हूं। MGNREGA पिछले 20 वार्षों से ग्रामीण भारतको रोजगार देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में सक्षम रहा है। यह कितना क्रांतिकारी कानून है कि जब इसे बनाया गया तो सदन केसभी राजनीतिक दलों ने अपनी पूरी सहमती दी थी। इसके द्वारा 100 दिन का रोजगार देश के गरीब से गरीब लोगों को मिलता आया है। वेतन की बढ़ोतरी की कोई बात नहींप्रियांका ने आगे कहा कि हम सभी जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्रों में जाते हैं तो दूर से ही मनरेगा का मजदूर दिखाई देता है। मनरेगा के तहत हमारे गरीबभाई-बहनों को जो रोजगार की कानूनी गारंटी मिलती है, वो इस योजना में मांग के आधार पर संचालित होता है, मतलब जहां-जहां रोजगार की मांग हैवहां 100 दिनों का रोजगार अनिवार्य है। इसके साथ ही केंद्र से जो इसके लिए पूंजी जाती है वो भी मांग पर आधारित है। इसमें केंद्र को इजाजत दीगई है कि वो पहले से ही निर्धारित कर लें कि कितनी पूंजी कहां भेजी जाएगी। हालांकि इस नए विधेयक में संविधान के 73वें संशोधन कोनजरअंदाज किया जा रहा है। इस योजना में ग्राम सभाओं के अधिकार को कमजोर किया जा रहा है। इस विधेयक के प्रबंधन से रोजगार का कानूनकमजोर हो रहा है। यह हमारे संविधान के विपरित है। कांग्रेस नेता ने कहा कि मनरेगा में 90 प्रतिशत अनुदान केंद्र से आता था, इस विधेयक के तहतअब ज्यादातर प्रदेशों में यह 60 प्रतिशत आएगा। इससे प्रदेशों की अर्थव्यवस्था पर बहुत भार पड़ेगा खासतौर से उन राज्यों के लिए जो पहले से हीकेंद्र से जीएसटी के बकाए के इंतजार में है। इस विधेयक द्वारा केंद्र का नियंत्रण बढ़ाया जा रहा है और जिम्मेदारी घटाई जा रही है। इसे रोजगार केदिन भले ही बढ़ाए जा रहे हैं लेकिन वेतन की बढ़ोतरी की कोई बात नहीं है। सनक के आधार पर पेश नहीं होना चाहिएप्रियांका ने कहा कि हर योजना का नाम बदलने की जो सनक है वह समझ में नहीं आती है। जब-जब ये किया जाता है तो केंद्र को पैसे खर्च करनेपड़ते हैं। बिना चर्चा के और बिना सदन की सलाह लिए इस तरह जल्दी-जल्दी में विधेयक को पास नहीं कराना चाहिए। ये विधेयक वापस लियाजाना चाहिए, इसके बदले में सरकार को एक नया विधेयक पेस करना चाहिए। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी भले ही मेरे परिवार के नहीं थे लेकिन मेरेपरिवार जैसे ही हैं और पूरे देश की यही भावना है। इसे गहन चर्चा और जांच पड़ताल के लिए स्थायी समिति के पास भेजा जाना चाहिए। और कोई भीविधेयक किसी की निजी महत्वकांक्षा, पूर्वाग्रह और सनक के आधार पर पेश नहीं होना चाहिए।

नेशनल हेराल्ड केस में गांधी परिवार को राहत, ED चार्जशीट पर कोर्ट का संज्ञान से इनकार

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट से नेशनल हेराल्ड मामले में गांधी परिवार को मंगलवार को बड़ी राहत मिली। कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय के आरोपपत्र परसंज्ञान लेने से इनकार कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि राहुल गांधी, सोनिया गांधी और अन्य आरोपी प्राथमिकी की प्रतिलिपि पाने केहकदार नहीं है। इसको लेकर कांग्रेस के नेताओं ने प्रतिक्रिया दी है।कांग्रेस अपने आधिकारिक एक्स खाते से एक पोस्ट में लिखा, सत्य की जीत हुई है। (नरेंद्र) मोदी सरकार की बदनीयत और गैरकानूनी तरीके से की गईकार्रवाई पूरी तरह से बेनकाब हो गई है। माननीय अदालत ने यंग इंडियन मामले में कांग्रेस नेतृत्व सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ ईडी कीकार्रवाई को अवैध और दुर्भावना से ग्रसित पाया है। कोर्ट ने फैसला दिया है कि ईडी का मामला क्षेत्राधिकार से बाहर है, उसके पास कोई प्राथमिकीनहीं है जिसके बिना कोई मामला ही नहीं बनता। मजिस्ट्रेट के समन आदेशों पर आधारितपार्टी ने आगे कहा, मोदी सरकार द्वारा पिछले एक दशक से मुख्य विपक्षी दल के खिलाफ, राजनीतिक प्रतिशोध और बदले की भावना से की जा रहीयह कार्रवाई आज पूरे देश के सामने बेनकाब हो गई है। धनशोधन का कोई मामला नहीं, अपराध की कोई आय नहीं और संपत्ति का कोई हस्तांतरणनहीं, यह सभी निराधार आरोप जो निम्न स्तर की राजनीति, द्वेष की भावना और सम्मान पर हमला करने की भावना से प्रेरित हैं, आज सब धराशायी होगए। कांग्रेस पार्टी और हमारा नेतृत्व सत्य के लिए और हर भारतीय के अधिकारों के लिए लड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। हमें कोई भी डरा नहीं सकता, क्योंकि हम सत्य के लिए लड़ते हैं। सत्यमेव जयते। वहीं, कांग्रेस नेता सुखदेव भगत ने कहा, मैं समझता हूं…एक कहावत है सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं। बहुत ही स्वागत योग्य कदम है। निश्चित रूप से यह सत्य की जीत है। मैं कहूंगा सत्यमेव जयते। कोर्ट ने कहा कि नेशनल हेराल्डधनशोधन मामले में प्रवर्तन निदेशालय अपनी आगे की जांच जारी रख सकता है। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि इस स्तर पर कोई कानूनी कार्रवाई नहींकी जा सकती क्योंकि ईडी का मामला किसी प्राथमिकी पर आधारित नहीं है। यह केवल सुब्रमण्यम स्वामी की ओर से दर्ज कराई गई निजी शिकायतऔर मजिस्ट्रेट के समन आदेशों पर आधारित है।

योगी कैबिनेट में बड़े बदलाव की तैयारी, 2027 से पहले PDA समीकरण साधेगी BJP

भाजपा ने जिस तरह से प्रदेश संगठन में पिछड़ी जाति के नए ‘चौधरी’ को कमान देकर विपक्ष के पीडीए समीकरण की काट की जमीन तैयार करने कासंदेश दिया है, अब उसी तर्ज पर प्रदेश सरकार में भी बदलाव की कवायद की तैयारी है। हालांकि, मंत्रिमंडल विस्तार कब होगा और स्वरूप क्या होगा, इस पर सभी ने चुप्पी साध रखी है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि लखनऊ से लेकर दिल्ली तक मंत्रिमंडल विस्तार में पीडीए समीकरण को दुरुस्त करनेका खाका तैयार करने पर मंथन शुरू हो गया है। यूं तो मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा पिछले साल अक्तूबर में पार्टी के संगठन पर्व के आगाज के साथशुरू हो गई थी लेकिन इसकी तस्वीर पर अब तक धुंध छाई है। चूंकि संगठन पर्व का समापन हो चुका है और पार्टी को नया प्रदेश अध्यक्ष मिल गयाहै इसलिए अब फिर से योगी-2 की टीम में बदलाव की चर्चा तेज हो गई है। बदले सियासी परिवेश में संभावित मंत्रिमंडल के बदलाव में सबसे ज्यादाचर्चा जातीय समीकरण पर है। विशेष स्थान दिया जा सकतासूत्रों का कहना है कि वर्ष 2027 के रण में विपक्ष के पीडीए को मजबूत टक्कर देने के लिए यह कवायद हो रही है। माना जा रहा है कि मौजूदामंत्रिमंडल के सदस्यों में कुर्मी समेत अन्य पिछड़ी व दलित जाति के मंत्रियों का प्रतिनिधित्व व कद बढ़ सकता है। साथ ही कुछ मंत्रियों के स्थान परऊर्जावान व युवा विधायकों को मौका दिया जा सकता है। खास तौर से पार्टी से दूर हो रहे कुर्मी समाज पर मजबूत पकड़ बनाने के लिए इस वर्ग केनेताओं को प्रमोट किया जा सकता है। सूत्रों का कहना है कि पूरी तस्वीर तो मंत्रिमंडल विस्तार के बाद ही साफ होगी, लेकिन इतना जरूर है किआगामी विस्तार में जातीय गुलदस्ता सजाकर सरकार में भी पीडीए की छाप दिखाने की कोशिश दिखेगी। प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी से मुक्त होने केबाद भूपेंद्र चौधरी का सरकार में समायोजन तय माना जा रहा है। चौधरी को सरकार में बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। इनके अलावा करीब आधेदर्जन नए चेहरों को मौका मिल सकता है। मंत्रियों की रिपोर्ट कार्ड की समीक्षा के आधार पर कई को संगठन में भी भेजा जा सकता है। मंत्रिमंडलविस्तार की सुगबुगाहट शुरू होने के साथ ही दावेदार विधायकों ने दिल्ली की दौड़ लगानी शुरू कर दी है. सूत्रों का कहना है कि संभावित विस्तार मेंपीडीए पर फोकस के साथ ही क्षेत्रीय संतुलन बिठाने पर भी खास ध्यान रखा जाएगा। ऐसे में पश्चिम, बुंदेलखंड और मध्य यूपी को विशेष स्थान दियाजा सकता है।

नीतीश कुमार की ‘सीख’ और नितिन नवीन की तरक्की, पुराना वीडियो बना सियासी हथियार

बिहार में इस समय तीन तरह का वीडियो वायरल है। एक में विपक्षी दलों ने सीएम नीतीश कुमार को एक महिला आयुष चिकित्सक का हिजाब छूनेपर हमला किया। जवाब में कांग्रेस नेता अशोक गहलोत का वीडियो भी बिहार में सुर्खियां बटोर रहा है, जहां वह महिला कतार में खड़ी एक महिला काघूंघट हटा रहे हैं। इन दोनों वीडियो के बीच एक तीसरा वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार महागठबंधन सरकार केसमय भाजपा विधायक नितिन नवीन को सीख दे रहे हैं। नितिन नवीन को रविवार को भाजपा ने पार्टी का कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया, अब इसीताजी खबर से जोड़कर उस पुराने वीडियो को वायरल किया जा रहा है। मेरे खिलाफ बोलोगे तो कोई नहीं आगे बढ़ाएगा2023 में जब महागठबंधन की सरकार थी, तब सदन में भाजपा सीएम नीतीश कुमार पर हमलावर थी। इसी दौरान भाजपा विधायक नितिन नवीनतत्कालीन महागठबंधन सरकार पर कुछ बोलने लगे तो सीएम नीतीश कुामर ने उठकर कहा- “तुम क्या जानते हो, बैठो न। जिस दिन तुम्हारे पिताजीकी मृत्यु हो गई थी, उस समय पूरे पटना में मात्र 18 प्रतिशत वोट हुआ था। हम लोग आपके लिए काम कर रहे थे। आपके पिताजी के साथ मेरा क्यासंबंध पौराणिक है, उनका डेथ हो गया। तुरंत हमलोग सरकार में आए। उस समय आपको ही बनाया गया। कितना प्रेम करते रहे। कितना सम्मान देतेरहे। देखो, बोलना जरूर। बोलोगे तभी केंद्र वाला आगे बढ़ाएगा। नहीं अगर मेरे खिलाफ बोलोगे तो कोई नहीं आगे बढ़ाएगा। कार्यक्रम का उनका ताजा वीडियो चर्चा में रहादरअसल, इस वीडियो के अंत में नीतीश कुमार ने उस समय सीख दी थी कि भाजपा वाले उन्हें कब और कैसे आगे बढ़ाएंगे। उस समय नीतीश कुमारसरकार में थे और भाजपा विपक्ष में। तब नीतीश कुमार पर भाजपा हमलावर थी। नीतीश ने उसी समय सदन में नितिन को सीख दी थी कि वह बोलेंऔर उनके खिलाफ जरूर बोलें ताकि भाजपा कुछ बड़ा दे। अब नितिन भाजपा के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बने हैं तो सोशल मीडिया पर यूजर्स कहरहे हैं कि नीतीश की सीख पर चलकर नितिन को यह कद-पद मिला है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चर्चा में हैं। सोमवार को एक कार्यक्रम का उनकाताजा वीडियो चर्चा में रहा तो अब भाजपा के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए गए नितिन नवीन को लेकर सदन में कही उनकी बातें वायरल हैं।

क्राउन प्रिंस ने खुद चलाई कार, पीएम मोदी पहुंचे जॉर्डन म्यूजियम भारत-जॉर्डन रिश्तों की नई मिसाल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जॉर्डन दौरे के दूसरे दिन मंगलवार को एक खास पल देखने को मिला। जहां जॉर्डन के क्राउन प्रिंस अल हुसैन बिन अब्दुल्लाद्वितीय ने खुद गाड़ी चलाकर पीएम मोदी को अम्मान स्थित जॉर्डन म्यूजियम तक पहुंचाया। काउन प्रिंस द्वारा खुद कार चलाकर पीएम नरेंद्र मोदीम्यूजियम ले जाना भारत और जॉर्डन के बीच मजबूत और गर्मजोशी भरे रिश्तों को दर्शाता है। क्राउन प्रिंस अल हुसैन पैगंबर मोहम्मद के 42वीं पीढ़ी केवंशज माने जाते हैं। उनका यह कदम दोनों देशों के बीच आपसी सम्मान और भरोसे को और मजबूत करता है। बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी सोमवार कोजॉर्डन की राजधानी अम्मान पहुंचे थे। वे जॉर्डन के राजा अब्दुल्ला द्वितीय के निमंत्रण पर दो दिवसीय दौरे पर हैं। जॉर्डन, पीएम मोदी की चार दिन कीतीन देशों की यात्रा का पहला पड़ाव है। इसके बाद वे इथियोपिया और ओमान भी जाएंगे। नई दिशा देने वाली मानी जा रहीपीएम मोदी ने इस दौरान अम्मान के रास अल-ऐन इलाके में स्थित जॉर्डन म्यूजियम का भी दौरा किया। यह जॉर्डन का सबसे बड़ा म्यूजियम है, जहांदेश के सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और पुरातात्विक अवशेष रखे गए हैं। साल 2014 में बने इस म्यूजियम में प्रागैतिहासिक काल से लेकर आधुनिकसमय तक की सभ्यता की झलक मिलती है। यहां 15 लाख साल पुराने जानवरों की हड्डियां और 9 हजार साल पुरानी ऐन गजाल की चूने से बनीमूर्तियां भी मौजूद हैं, जिन्हें दुनिया की सबसे पुरानी मूर्तियों में गिना जाता है। इससे पहले जॉर्डन के राजा अब्दुल्ला द्वितीय से मुलाकात के बाद पीएममोदी ने कहा कि दोनों देश आतंकवाद, कट्टरपंथ और उग्रवाद के खिलाफ मजबूती से खड़े हैं। उन्होंने कहा कि प्रभारत और जॉर्डन आतंकवाद केखिलाफ एक जैसी और स्पष्ट सोच रखते हैं। 75 साल पुराने राजनयिक रिश्तों के बीच हुई यह मुलाकात भारत-जॉर्डन संबंधों को नई दिशा देने वालीमानी जा रही है। खुद गाड़ी चलाकर पीएम मोदी को अम्मान के जॉर्डन म्यूजियम ले गएदोनों देशों ने व्यापार और निवेश, रक्षा और सुरक्षा, आतंकवाद विरोध, उर्वरक और कृषि, नवीकरणीय ऊर्जा और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में साझेदारी औरगहरी करने का फैसला किया। पीएम मोदी ने कहा कि भारत और जॉर्डन आने वाले समय में डिजिटल तकनीक, बुनियादी ढांचे और लोगों के आपसीसंपर्क को मजबूत करेंगे। उन्होंने भरोसा जताया कि यह बैठक रिश्तों को नई ऊर्जा देगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जॉर्डन दौरे के दूसरे दिन दोनों देशों केरिश्तों की गर्मजोशी का खास नजारा दिखा, जब क्राउन प्रिंस अल हुसैन बिन अब्दुल्ला द्वितीय खुद गाड़ी चलाकर पीएम मोदी को अम्मान के जॉर्डनम्यूजियम ले गए। यह भारत-जॉर्डन के मजबूत भरोसे और आपसी सम्मान का प्रतीक है।