पूर्व पीएम मनमोहन सिंह की पहली पुण्यतिथि, नेताओं ने दी श्रद्धांजलि, याद की उनकी सादगी और आर्थिक सुधारों की विरासत

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की आज पहली पुण्यतिथि है। इस मौके पर राहुल गांधी समेत कई नेताओं ने श्रद्धांजलि दी। कांग्रेस नेताओं ने उन्हेंश्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनकी विनम्रता, ईमानदारी और विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुनखरगे ने पूर्व प्रधानमंत्री को एक परिवर्तनकारी नेता बताया। खरगे ने कहा कि उन्होंने देश के आर्थिक पथ को नया रूप दिया और आर्थिक सुधारों केमाध्यम से लाखों लोगों के लिए अवसरों का विस्तार किया। इसके साथ ही लाखों लोगों को गरीबी से बाहर निकाला। उन्होंने कहा, “अपनी विनम्रता, ईमानदारी और बुद्धिमत्ता के लिए जाने जाने वाले, उन्होंने गरिमा और करुणा के साथ नेतृत्व किया, यह सुनिश्चित करते हुए कि प्रगति समावेशी बनी रहेऔर कल्याणकारी लाभ सबसे जरूरतमंद लोगों तक पहुंचें। अधिकार-आधारित प्रतिमान इसी दृष्टिकोण का प्रमाण है। हमने उनके दृष्टिकोण के तहतएक मजबूत भारत का निर्माण किया।” कांग्रेस अध्यक्ष ने एक्स पर लिखा, “हम एक ऐसे राजनेता को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, जिनकी ईमानदारसार्वजनिक सेवा और स्थायी सुधारों की विरासत पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।” राष्ट्र की प्रगति के लिए पूरी तरह समर्पितराहुल गांधी ने एक्स पर लिखा कि भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह जी की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि। अपने दूरदर्शी नेतृत्व सेउन्होंने भारत को आर्थिक रूप से सशक्त किया। देश के वंचितों और गरीबों के लिए उनके ऐतिहासिक प्रयासों और साहसिक निर्णयों ने भारत को विश्वमंच पर एक नई पहचान दिलाई। उनकी विनम्रता, कर्मठता और ईमानदारी हम सभी के लिए सदैव प्रेरणादायी रहेगी। वहीं, प्रियंका गांधी वाड्रा नेकहा, “मनमोहन सिंह जी समानता के प्रबल समर्थक, एक सशक्त, साहसी और गरिमामय व्यक्तित्व थे, जो राष्ट्र की प्रगति के लिए पूरी तरह समर्पितथे। उनकी सादगी, ईमानदारी और देश के प्रति समर्पण हम सभी को हमेशा प्रेरित करता रहेगा।” उनका दस साल का कार्यकाल भी शामिलइसके साथ ही असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने शुक्रवार को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की। सरमा ने कहा कि राष्ट्रकांग्रेस नेता के योगदान को याद रखेगा, जो एक अर्थशास्त्री के रूप में प्रसिद्ध थे। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “आज पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह जी की पहली पुण्यतिथि पर उन्हें याद कर रहा हूं। ममुख्यमंत्री ने आगे कहा, “राष्ट्र के प्रति उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।पिछले साल 92 वर्ष की आयु में निधन हुए सिंह, 1991 से असम से राज्यसभा के लिए पांच बार चुने गए थे, जिसमें प्रधानमंत्री के रूप में उनका दससाल का कार्यकाल भी शामिल है।
क्रिसमस पर हमले की घटनाओं पर शशि थरूर की चिंता: कहा, यह सिर्फ ईसाई नहीं बल्कि पूरे देश की साझा संस्कृति पर हमला

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने क्रिसमस पर ईसाई समुदाय पर हुए हमले की घटनाओं पर चिंता जताई और कहा कि यह केवल एक समुदाय पर नहींबल्कि पूरे देश की साझा संस्कृति पर हमला है। दरअसल गुरुवार को क्रिसमस के अवसर पर ईसाई समुदाय पर हमले की देशभर में कई घटनाएं सामनेआईं। इनमें केरल में पूजा के दौरान हुई झड़प की भी घटना शामिल है। सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में शशि थरूर ने लिखा, केरल में त्योहारका माहौल तो बना रहा, लेकिन यह दुख की बात है कि क्रिसमस 2025 को खास स्थानीय घटनाओं और देशभर में असहिष्णुता के बढ़ते चलन केकारण डर और चिंता के माहौल में मनाया गया। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पलक्कड़ के पुडुस्सेरी में एक क्रिसमस कैरल समूह पर कथित तौर पर एकभाजपा कार्यकर्ता के हमले का जिक्र किया। उन्होंने कहा, हमलावरों ने कथित तौर पर प्रार्थना में शामिल लोगों को पीटा और संगीत वाद्ययंत्रों को तोड़दिया। धर्मनिरपेक्ष परंपरा पर हुए इस हमले से राज्य में सदमा फैल गया। केरल में चिंता तब और बढ़ गई जब दूसरे राज्यों से भी ऐसी खबरें आईं, जिनमें रायपुर (छत्तीसगढ़) के एक मॉल में सांता क्लॉज की मूर्ति को तोड़ना, जबलपुर में एक अंधी ईसाई लड़की पर हमला और उत्तर प्रदेश में एकचर्च में प्रार्थना में बाधा डालने की कोशिश की घटनाएं शामिल हैं। इतनी खुलेआम चुनौती क्यों दी जा रहीकांग्रेस नेता ने क्रिसमस की प्रार्थना सभा के दौरान ईसाई पादरियों की टिप्पणियों पर गहरा दुख जताया। उन्होंने लिखा, ‘मुझे यह सुनकर दुख हुआ किआर्कबिशप नेट्यो ने आधी रात की प्रार्थना के दौरान दुख जताते हुए कहा कि भारत में ईसाई समुदाय क्रिसमस 2025 डर और चिंता के माहौल में मनारहा है, और चेतावनी दी कि मणिपुर और उत्तर भारत में हुई हिंसा अब दूर नहीं है और केरल के दरवाजे पर दस्तक दे रही है।’ इनके अलावा थरूर नेकार्डिनल क्लीमिस के बयान का भी जिक्र किया, जिसमें कार्डिनल क्लीमिस ने हिंसा की घटनाओं के बीच प्रशासन की चुप्पी पर दुख व्यक्त किया।उन्होंने सवाल किया कि अपने धर्म का पालन करने के संवैधानिक अधिकार को इतनी खुलेआम चुनौती क्यों दी जा रही है? अत्याचारों का मूक दर्शक बना रहताथरूर ने पोस्ट में लिखा, ‘मैं भी ईसाई पादरियों के साथ मिलकर सरकार से ऐसी घटनाओं पर अपनी चुप्पी तोड़ने की अपील करता हूं। उनके शब्दों में, नागरिकों की सुरक्षा कोई एहसान नहीं, बल्कि एक कर्तव्य है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ‘नया भारत’ ऐसा नहीं होना चाहिए जहां समुदायप्रार्थना के दौरान होने वाली घटनाओं के डर में रहें। थरूर ने कहा, ‘समाज में एकता होनी चाहिए। सह-अस्तित्व कोई निष्क्रिय स्थिति नहीं है, बल्कि यहअपने पड़ोसी की शांति की रक्षा करने का एक सक्रिय चुनाव है। जब किसी कैरल समूह पर हमला होता है, तो यह सिर्फ ईसाई मुद्दा नहीं है, बल्कि यहहम सभी और केरल की साझा संस्कृति पर हमला है। अगर बहुसंख्यक समुदाय अल्पसंख्यक पर हो रहे अत्याचारों का मूक दर्शक बना रहता है तोशांति कायम नहीं रह सकती।’
त्रिपुरा विधानसभा अध्यक्ष बिस्व बंधु सेन का निधन, प्रधानमंत्री मोदी और नेताओं ने जताया शोक

शुक्रवार 26 दिसंबर को त्रिपुरा विधानसभा के अध्यक्ष बिस्व बंधु सेन का निधन हो गया। उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, असम के मुख्यमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के साथ कई लोगों ने दुख जताया है। 72 साल के सेन का शुक्रवार को बेंगलुरु के एक नीजि अस्पताल में निधन होगया। उन्हें ब्रेन स्ट्रोक आने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सेन का पार्थिव शरीर शनिवार को त्रिपुरा लाया जाएगा। सेन उत्तरी त्रिपुरा केधर्मनगर विधानसभा क्षेत्र से विधायक थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुख जताते हुए कहा कि उन्हें राज्य की प्रगति को बढ़ावा देने के प्रयासों और कईसामाजिक कार्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के लिए याद किया जाएगा। पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा, “त्रिपुरा विधानसभा के अध्यक्ष श्री बिस्व बंधुसेन जी के निधन से दुखी हूं। उन्हें त्रिपुरा की प्रगति को बढ़ावा देने के प्रयासों और कई सामाजिक कार्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के लिए याद कियाजाएगा। इस दुख की घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार और प्रशंसकों के साथ हैं। ओम शांति।”हम राज्य के विकास के लिए चर्चा करतेलोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने एक्स पर कहा, “त्रिपुरा विधानसभा के माननीय अध्यक्ष श्री बिस्व बंधु सेन जी के असामयिक निधन से गहरा दुखहुआ, उन्हें लोगों की निस्वार्थ सेवा के लिए याद किया जाएगा। उनके परिवार और समर्थकों के प्रति मेरी संवेदनाएं। ओम शांति!” असम के मुख्यमंत्रीहिमंत बिस्वा सरमा ने सेन के निधन पर शोक जताते हुए कहासे न एक जमीनी नेता थे जिन्होंने सामाजिक कार्य किए। सरमा ने सोशल मीडिया पर एकपोस्ट में कहा, “त्रिपुरा विधानसभा के अध्यक्ष श्री बिस्व बंधु सेन जी के निधन से दुखी हूं।” उन्होंने कहा, “माननीय सेन एक जमीनी नेता थे जिन्होंनेअपना जीवन सामाजिक कार्यों के लिए समर्पित कर दिया। मुझे उनके साथ हुई मुलाकातों की याद आती है, जहां हम राज्य के विकास के लिए चर्चाकरते थे।”
दिल्ली 2025: केजरीवाल की हार, BJP की वापसी और प्रदूषण व सुरक्षा की बड़ी चुनौती

2025 का साल दिल्ली के लिए कई मायनों में इतिहास रचने वाला रहा है। एक समय वैकल्पिक राजनीति के प्रेरणा स्रोत बनकर उभरे अरविंदकेजरीवाल की इसी साल के फरवरी में दिल्ली में हुए चुनावों में करारी हार हुई। शराब घोटाले में जेल गए और अपने सरकारी आवास पर भारी पैसाखर्च कर विवादों में घिरे केजरीवाल स्वयं अपनी सीट नहीं बचा सके। भाजपा 27 साल बाद दिल्ली की सत्ता में वापसी कर सकी और उसने दिल्ली मेंबुनियादी बदलाव करने का वादा किया है। साल बीतते-बीतते दिल्ली को लालकिले बम विस्फोट ने आहत कर दिया। दिल्ली की सरकार औरप्रशासन के सामने इस बात की बड़ी चुनौती रहेगी कि वह दिल्ली को आतंकी खतरों से कैसे सुरक्षित रखती है। मुख्यमंत्री बनाते हुए महिला मतदाताओं को विशेष संदेशवर्ष 2025 दिल्ली की स्थानीय राजनीति में बड़े बदलाव पैदा करने वाला साल रहा। इसी साल की शुरुआत में दिल्ली में विधानसभा चुनाव हुए औरआम आदमी पार्टी सरकार की करारी हार हुई। शराब घोटाले में कई महीने जेल के अंदर रहे अरविंद केजरीवाल की करारी हार हुई और वे अपनी सीटतक हार गए। सरकार में नंबर दो रहे मनीष सिसोदिया भी अपनी सीट नहीं बचा सके। केजरीवाल की हार का अर्थ केवल एक राजनीतिक दल की एकचुनाव में हार तक सीमित नहीं है। उनकी हार ने आम आदमी पार्टी की भविष्य की राजनीतिक यात्रा पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। केजरीवाल की हारके बाद दिल्ली में भाजपा ने 27 साल बाद सरकार बनाने में सफलता हासिल की। पार्टी ने एक महिला रेखा गुप्ता को मुख्यमंत्री बनाते हुए महिलामतदाताओं को विशेष संदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार की खिंचाई भी कीभीड़ प्रबंधन न कर पाने के कारण दिल्ली में अनेक बार बड़ी दुर्घटनाएं घट चुकी हैं। इन दुर्घटनाओं में अनेक लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है।2025 भी इस मामले में अछूता नहीं रहा। प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ के लिए 16 फरवरी को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर बड़ी संख्या में यात्रीपहुंचे। भीड़ का सही प्रबंधन न कर पाने के कारण भगदड़ मची और इसमें 18 लोगों की दुखद मौत हो गई। वायु प्रदूषण केंद्र और दिल्ली सरकार केसामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। इस वर्ष वायु प्रदूषण का स्तर 500-600 अंक को पार करता रहा है। 400 पार एक्यूआई वाले दिनों कीसंख्या लगातार बढ़ती रही है। वायु प्रदूषण पर स्थाई लगाम न लगा पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार की खिंचाई भी की है। आने वालेसमय में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए स्थाई उपाय कर पाना रेखा गुप्ता सरकार के लिए बड़ी चुनौती साबित होने वाली है।
CJI Suryakant: मध्यस्थता कानून का उच्चतम विकास, 2.5 लाख प्रशिक्षित मध्यस्थों की जरूरत

देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कानून में मध्यस्थता की अहमियत बताते हुए कहा कि मध्यस्थता, कानून की कमजोरी का संकेत नहीं हैबल्कि यह कानून का उच्चतम विकास है। सीजेआई ने कहा कि मध्यस्थता को अब एक सफल, कम लागत वाले औजार के रूप में दोनों पक्षों सेस्वीकार्यता मिल रही है। गोवा में बार काउंसिल ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय सम्मेलन और मध्यस्थता जागरूकता कार्यक्रम में बोलते हुए मुख्य न्यायाधीश नेकहा, जिला अदालतों से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक, सभी स्तरों पर बड़ी संख्या में मध्यस्थों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता, जो न्यायिक मामलोंके लंबित होने को कम कर सकती है, कानून की कमजोरी का संकेत नहीं है, बल्कि इसका उच्चतम विकास है। 2,50,000 से ज़्यादा प्रशिक्षित मधस्थों की जरूरतमुख्य न्यायाधीश ने कहा, ‘जैसे-जैसे हम भविष्य की ओर देख रहे हैं, मैं बहु-द्वार कोर्टहाउस की कल्पना करता हूं। यह एक दूरदर्शी अवधारणा है जहांकोर्ट सिर्फ ट्रायल की जगह नहीं रह जाता है। बल्कि, यह विवाद समाधान के लिए एक व्यापक केंद्र बन जाता है।’ सीजेआई ने कहा कि जब न्यायचाहने वाला कोई व्यक्ति कोर्ट आता है, तो उसे मध्यस्थता और अंततः मुकदमेबाजी के विकल्प मिलने चाहिए। उन्होंने कहा, ‘हमें यह स्वीकार करनाहोगा कि कुछ ऐसे मामले होंगे जिन्हें मध्यस्थता या मध्यस्थता के माध्यम से हल नहीं किया जा सकता है। इसलिए, न्यायिक प्रणाली हमेशा उनविवादों का निपटारा करने के लिए निष्पक्ष मुकदमेबाजी के लिए मौजूद रहेगी।’ सीजेआई ने कहा कि मध्यस्थता एक ऐसा कारण है जो उनके दिल केबहुत करीब है और जिस पर उन्हें गहरा विश्वास है। उन्होंने कहा, ‘मुकदमेबाजी अक्सर एक मृत रिश्ते का पोस्टमार्टम और क्या गलत हुआ, इसकापरीक्षण होता है। इसके उलट, मध्यस्थता वह उपचारात्मक सर्जरी है जो एक रिश्ते की जीवित रखने की कोशिश करती है।’ मध्यस्थता प्रशिक्षण कीआवश्यकता पर जोर देते हुए, उन्होंने कहा कि 39,000 प्रशिक्षित मध्यस्थ हैं, लेकिन मांग और आपूर्ति में अंतर है। CJI ने कहा कि सभी स्तरों परमध्यस्थता को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए, देश को 2,50,000 से ज़्यादा प्रशिक्षित मधस्थों की जरूरत है। इसके नतीजे बेहद उत्साहजनक रहेउन्होंने कहा कि लोगों को मध्यस्थ के तौर पर ट्रेनिंग देते समय बहुत सावधान रहना होगा क्योंकि मध्यस्थता सिर्फ एक कला नहीं है, बल्कि एकमध्यस्थ का स्वभाव, व्यवहार, दया, जुनून, प्रतिबद्धता और समर्पण प्रयासों को सफल बनाने में बहुत बड़ा फर्क डालता है। उन्होंने कहा कि ‘मेडिएशनफॉर नेशन’ अभियान इस साल जुलाई में शुरू किया गया था ताकि वैवाहिक, कमर्शियल और मोटर दुर्घटनाओं सहित कई तरह के विवादों कोसुलझाकर लंबित मामलों को कम किया जा सके। सीजेआई ने कहा कि इसके नतीजे बेहद उत्साहजनक रहे। मुख्य न्यायाधीश ने देश में मध्यस्थताप्रक्रिया की वकालत करते हुए इसे कानून का उच्चतम विकास बताया। उन्होंने कहा कि देश में मध्यस्थता कर्मियों की नियुक्ति करने पर जोर दिया।उन्होंने कहा कि मध्यस्थता से अदालतों में लंबित मुकदमों की संख्या को कम किया जा सकता है।
अंकिता हत्याकांड: दुष्यंत गौतम ने सोशल मीडिया और मीडिया पर आपत्तिजनक सामग्री हटाने की मांग की

अंकिता हत्याकांड में उर्मिला सनावर की वायरल वीडियो में नाम आने के बाद भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम नेसचिव गृह को पत्र भेजा है। उन्होंने इसे आपराधिक साजिश कराते देते हुए मीडिया, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से आपत्तिजनक सामग्री हटवाने व प्रसारपर प्रतिबंध का अनुरोध किया है। सचिव गृह को भेजे पत्र में दुष्यंत गौतम ने कहा है कि वह देशभर में आमजन के बीच एक प्रतिष्ठित सामाजिक एवंराजनीतिक कार्यकर्ता हैं। उन्हें जानकारी मिली है कि एक आपराधिक साजिश के तहत कुछ आपराधिक तत्वों ने एक फर्जी और मनगढ़त ऑडियोरिकॉर्डिंग तैयार की है। इस आपराधिक साजिश को आगे बढ़ाने के लिए मीडिया और सोशल मीडिया पर ऐसी घृणित, दुर्भावनापूर्ण और झूठी सामग्रीफैला रहे हैं। संलग्न कर पेन ड्राइव में भेजाउन्होंने उर्मिला सनावर समेत 28 फेसबुक आईडी, उनके ई-मेल और फोन नंबर के अलावा नौ इंस्टाग्राम हैंडल, आठ यूट्यूब चैनल और दो एक्स हैंडलका नाम भी इस पत्र में शामिल किया है, जिन पर यह सामग्री प्रसारित की जा रही है। सचिव गृह को लिखे पत्र में संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मऔर समाचार चैनलों को इस तरह की सभी सामग्री को हटाने, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रसारित करने पर प्रतिबंध लगाने का अनुरोध किया। उन्होंनेइन सभी सोशल मीडिया अकाउंट से डाउनलोड की गई सामग्री को पत्र के साथ संलग्न कर पेन ड्राइव में भेजा है। दुष्यंत गौतम ने कहा है किआपराधिक साजिश के तहत कुछ आपराधिक तत्वों ने एक फर्जी और मनगढ़त ऑडियो रिकॉर्डिंग तैयार की है। इस आपराधिक साजिश को आगेबढ़ाने के लिए मीडिया और सोशल मीडिया पर ऐसी घृणित, दुर्भावनापूर्ण और झूठी सामग्री फैला रहे हैं।
If Kejriwal Government Had Continued, AQI Would Have Remained Above 500- Virendra Sachdeva

Delhi BJP President Shri Virendra Sachdeva said it is unfortunate that even after nearly a year, leaders like Aam Aadmi Party’s Saurabh Bhardwaj have not been able to accept their defeat in the Delhi Assembly elections. In frustration, they continue to indulge in baseless allegations and counter-allegations against the BJP government in Delhi. The Delhi BJP President said that during its ten-year tenure, the Arvind Kejriwal government not only failed to take steps to control pollution in Delhi, but also destroyed the greenery already present along roadsides and central verges, and left behind broken roads. When vehicles move over the potholes and damaged edges of these roads, they create storms of dust and grime. December would have remained above 500Virendra Sachdeva said that in the last 8–9 months, the BJP government in Delhi has reconstructed nearly 200 square kilometres of roads and filled about 50,000 potholes, resulting in a reduction in dust pollution. The Delhi BJP President said that the Kejriwal government crippled the public transport system in Delhi, especially the bus service, which led to an excessive increase in private vehicles on the roads and, consequently, a sharp rise in pollution from vehicular emissions. Virendra Sachdeva said that today the people of Delhi are realising that controlled pollution is the result of roads repaired by the new BJP government and the introduction of more than 1,000 electric buses. If the Kejriwal government were still in power, the AQI level throughout December would have remained above 500.
Devender Yadav Urges Delhi’s Urban Poor to Join Fight for Employment Guarantee Scheme

Delhi Pradesh Congress Committee President Shri Devender Yadav has written an open letter to the urban poor brothers and sisters of Delhi to join the struggle for the implementation of the Urban Employment Guarantee Scheme in Delhi due to record unemployment in the Capital so that the poor of Delhi can get employment for fixed days and they can live their life with dignity, equality and social stability without being dependent on anyone. Devender Yadav said that while the Central Government was abolishing the Right to Employment Act like MNREGA, which had given legal right to employment to crores of poor villagers of India through MNREGA. He said efforts are being made to abolish MNREGA while in the new Act, the government should have included the urban poor as the rural are migrating to the cities due to financial constraints, unemployment and hunger. He said that Urban workers are completely deprived of this. Standard of living of the urban poor improvesDevender Yadav said in the letter that Delhi has been the capital of the country and a symbol of opportunities for development, but for the last 10 years, lakhs of people in Delhi have been forced to live in conditions of instability due to uncertainty of employment, inflation and unsafe working conditions. He said that After the mass exodus of villagers, urban employment guarantee for the urban poor is a viable solution to ensure equality and livelihood for all in the Capital. He said that because of rapid urbanization, rising cost of living, additional burden on construction workers due to contract system, economic pressure on daily wage workers, workers in unorganized sector, women, youth, street vendors and families living in jhuggi jhopri, JJ clusters and industries and factories due to pollution, the livelihood of urban poor is being snatched away. Devender Yadav said in the letter that urban employment guarantee means that the government should take the responsibility of providing work and the local people should get work for a fixed number of days in a year, as the wages should be paid directly to the bank account on time and unemployment allowance should be given in case of no work. He said that this is not a new or impractical concept, as it is already in place in many States. He said that the Urban Employment Guarantee Scheme is applicable in the States of Rajasthan under the Indira Gandhi Urban Employment Guarantee Scheme, Kerala under the Ayyankali Scheme and in Odisha, Madhya Pradesh, Chhattisgarh, Jharkhand, Himachal Pradesh and Tamil Nadu. With the implementation of such schemes, while the participation of women increases, unemployment and poverty in cities decreases, cities become cleaner, greener and safer, demand in the local market increases and the standard of living of the urban poor improves. Solidarity with the country and the villagerDevender Yadav said in the letter that while in India, the villagers got the right to employment through MNREGA, urban India, especially Delhi, is still deprived of such a right, which is a complete injustice. The urban employment guarantee is not a “freebie” but a fulfilment of the spirit of the Constitution. Article 21 gives the right to a dignified life and livelihood, the Directive Principles of Policy entrust the government with the responsibility of providing employment opportunities. The 74th Constitutional Amendment makes it the duty of local bodies to eradicate urban poverty. While most of the rural land is being acquired in the name of development, lakhs of urban poor living in over 1,700 unauthorised colonies and resettlement colonies need employment to earn a living. Devender Yadav said that Urban Employment Guarantee is not a charity but a right of the people of Delhi. The Congress party and our leader Shri Rahul Gandhi are fighting the battle for the right to employment from the streets to Parliament. He said that this struggle will be successful with the cooperation of the public, the urban poor and ordinary citizens should raise their voice in solidarity with the country and the villagers. Countrywide labour struggleLet all the citizens of Delhi be a part of our struggle. He said that in Delhi, we are struggling to implement the Urban Employment Guarantee Act, which provides for at least 150 days of work per year, unemployment allowance for 15 days if there is no work, wages of Rs.500 for unskilled work and Rs.700 per day for skilled/ semi-skilled work, and employment to one or more family members on the basis of any government identity card for residents aged 18-60. Devender Yadav said that He was confident that the urban poor of Delhi will establish a just, inclusive, social security, equality environment in Delhi by implementing, with your support and unity for Urban Employment Guarantee. He said that the Delhi people support is important to make the voice of the urban poor a part of the national employment discourse and to connect Delhi strongly with the countrywide labour struggle.
Film Review- Kartik Aaryan and Ananya Panday’s ‘Tu Meri Main Tera, Main Tera Tu Meri’ Hits Theatres, A Fresh Romantic Treat for Young Audiences

Bollywood stars Kartik Aaryan and Ananya Panday’s new film, Tu Meri Main Tera, Main Tera Tu Meri, released in theatres on 25th December, bringing a light-hearted, visually appealing, and romantic story perfect for young audiences. The film, directed by Sameer Vidwans, explores the modern-day dynamics of love and relationships with a fresh and entertaining approach. The story follows Rey (Kartik Aaryan), who lives in Los Angeles and believes in living “in the moment,” and Rumi (Ananya Panday), a girl from Agra who dreams of a classic 90s-style love story. Their paths cross during an international holiday, where beautiful locations, shared adventures, and memorable moments bring them closer. The first half of the film is filled with fun, romance, and youthful chemistry, while the second half introduces emotional twists and conflicts, keeping the audience engaged. Escape from everyday lifeKartik Aaryan delivers a natural performance as Rey, the loving son of his mother, while Ananya Panday infuses innocence and emotional depth into her character. Their on-screen chemistry is a highlight of the film, marking their second collaboration after Pati, Patni Aur Woh. The supporting cast, including veterans Nina Gupta and Jackie Shroff, adds depth and charm to the narrative. Visually, the film stands out with stunning international locations and captivating cinematography that transport viewers to serene and picturesque settings. The music and background score complement the story, enhancing the overall emotional impact. For audiences in busy and polluted cities like Delhi, the film offers a refreshing cinematic escape from everyday life. Young audiences and fans of feel-good romantic filmsProduced by Karan Johar, Adar Poonawalla, Apoorva Mehta, Sharin Mintri Kadiya, Kishore Arora, and Bhumika Tiwari under Dharma Productions and Namah Pictures, the film combines high production values with an engaging narrative. Overall, Tu Meri Main Tera, Main Tera Tu Meri is a light, romantic, and youthful film that delivers entertainment and visual delight. While the story may not be entirely new, its presentation, music, and visuals make it worth watching, especially for young audiences and fans of feel-good romantic films.
भारत रत्न अटल जी की जयंती के अवसर पर ममता चैरिटेबल ट्रस्ट ने आयोजित किया विशाल सेवा शिविर, जरूरतमंदों में बांटी कंबल और स्वास्थ्य सुविधाएँ

भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की जन्म जयंती की पूर्व संध्या पर ममता चैरिटेबल ट्रस्ट ने पीटीसी फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में एक विशालसेवा और सहायता शिविर आयोजित किया। कार्यक्रम का आयोजन 24 दिसंबर 2025 को पीटीसी कंपनी के बगल ग्राउंड, मालवीय नगर, ऐशबाग, लखनऊ में किया गया। इस अवसर पर हजारों लाभार्थियों ने शिविर में पहुंचकर कंबल, स्वास्थ्य किट, कृत्रिम अंग, व्हीलचेयर, ट्राईसाइकिल, बैसाखी, स्टिक, कान की मशीन और चश्मे प्राप्त किए। पूर्व उपमुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया और कहा किममता ट्रस्ट गरीबों, महिलाओं, बुजुर्गों, विद्यार्थियों, खिलाड़ियों, दिव्यांगों और अनाथों की सेवा में नित नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। उन्होंने कहाकि यह शिविर श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन के आदर्शों—सेवा, समर्पण और समाज कल्याण को याद करने और निभाने का प्रतीक है। प्रतिबद्धता का उदाहरणकार्यक्रम में मुख्य रूप से पीटीसी इंडस्ट्रीज के निदेशक श्री सचिन अग्रवाल, पीटीसी फाउंडेशन की निदेशक श्रीमती स्मिता अग्रवाल, नीलांश ग्रुप केचेयरमैन श्री संतोष श्रीवास्तव, कथावाचक लवी मैत्री, परम पूज्य संत पं. श्री राम शरण शास्त्री जी महाराज, संस्थापक ट्रस्टी डॉ. राजेश शुक्ला, कोषाध्यक्ष गौरव पांडेय, राजीव मिश्रा, मोहित मिश्रा, शशि कान्त शुक्ल, पूर्व मंडल अध्यक्ष मनोज लोधी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।ममता ट्रस्ट के चीफ ट्रस्टी एवं बीजेपी क्षेत्रीय उपाध्यक्ष राजीव मिश्रा ने कहा कि सेवा और समर्पण ही जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य है और यह शिविर इसीप्रतिबद्धता का उदाहरण है। उन्होंने सभी उपस्थित लोगों और सहयोगियों को धन्यवाद देते हुए कहा कि समाज की भलाई और जरूरतमंदों की सहायताके लिए उनका प्रयास निरंतर जारी रहेगा। यह शिविर ममता ट्रस्ट की नारा सेवा ही नारायण सेवा है की सोच को साकार करता है और यह दर्शाता है किकैसे संगठन सामाजिक कल्याण और सेवा के माध्यम से जरूरतमंदों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।