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मणिपुर में राष्ट्रपति शासन खत्म, युमनाम खेमचंद सिंह संभालेंगे सत्ता की कमान

मणिपुर में लगभग एक साल से चले आ रहे राष्ट्रपति शासन को हटा दिया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बुधवार को एक अधिसूचना जारी कर राज्य से राष्ट्रपति शासन को तत्काल प्रभाव से हटाने की घोषणा की। इसके साथ ही भाजपा के युमनाम खेमचंद सिंह आज शाम 6 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। बीजेपी विधायक दल के नेता युमनाम खेमचंद सिंह ने आज लोक भवन में राज्यपाल अजय भल्ला से मुलाकात कर बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार बनाने का दावा पेश किया है। राष्ट्रपति की ओर से जारी घोषणा में कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 356 के खंड (2) के तहत मिली शक्तियों का उपयोग करते हुए यह फैसला लिया गया है। इसके तहत 13 फरवरी 2025 को जारी की गई उद्घोषणा को 4 फरवरी 2026 से वापस लिया जाता है। अधिसूचना जारी कर इसकी घोषणा कीबता दें कि इससे पहले मंगलवार को भाजपा विधायक दल की बैठक में युमनाम खेमचंद को विधायक दल का नेता चुना गया था। अब वे राज्य के नए मुख्यमंत्री के तौर पर कमान संभालेंगे। पिछले साल 13 फरवरी 2025 को मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाया गया था। यह फैसला तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद लिया गया था। उस समय राज्य लंबे समय से जातीय हिंसा और संवैधानिक संकट से गुजर रहा था, जिसके चलते केंद्र सरकार को यह कदम उठाना पड़ा था। मणिपुर से तत्काल प्रभाव से राष्ट्रपति शासन हटा दिया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आज एक अधिसूचना जारी कर इसकी घोषणा की है।

RSS ने 100 साल में क्या किया? राज्यसभा में खरगे ने महिला आरक्षण पर मोदी सरकार को धोया

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बुधवार को राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, 6062 शब्दों को अभिभाषण इस सरकार ने तैयार किया है। लेकिन कई अहम सवालों पर अभिभाषण मौन है। मैं सदन में सिर्फ पांच जरूरी मुद्दे आपके सामने रखना चाहूंगा। मैं सामाजिक न्याय, सामाजिक सद्भाव, संसदीय लोकतंत्र पर हमला, अर्थव्यवस्था और किसानों मजदूरों की दिक्कतें और विदेश नीति की खामियां.. पर अपनी बात रखना चाहता हूं। विधेयक पास कर सकतेखरगे ने कहा, आपको यह बताना चाहता हूं कि इस सत्ता ने कितना समय देश की भलाई के लिए दिया है। कितना समय इन्होंने देश के बाहर बिताया। यह आप सबको मालूम है। सबसे पहले मैं सामाजिक न्याय पर बात रखूंगा। पिछले 11 वर्षों में मोदी सरकार ने सामाजिक न्याय के ताने-बाने को कमजोर किया है। उनके सांविधानिक हक-हकूकों पर चोट पहुंचाई है। राष्ट्रपति के अभिभाषण में महिला सशक्तिकरण पर बात हुई, लेकिन सच यह है कि महिलाएं भाजपा के लिए केवल वोट बैंक बनकर रह गई हैं। अगर मोदी वाकई महिलाओं का नेतृत्व आगे लाना चाहते हैं, तो सबसे महिला आरक्षण विधेयक पारित करते, इस पर शर्तें नहीं रखते। अगर आपको उन्हें शक्ति देनी है, तो आप ये विधेयक पास कर सकते हैं। उसको लागू कर सकते हैं। आप कहते हैं कुछ, करते हैं कुछ। महिलाओं पर अत्याचार बढ़ रहेआप इस पर शर्तें लागू नहीं करते, जैसे आपने जनगणना के नाम पर किया। आपसे सौ साल पहले जब महिलाओं को वोट का अधिकार भी नहीं था। तब कांग्रेस ने अपनी पार्टी की नेता सरोजनी नायडू को अध्यक्ष चुना। है आपके पास कोई उदाहरण? इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री बनने के भी साठ साल पूरे हो गए। भाजपा ने किसी महिला को अब तक अध्यक्ष नहीं बनाया है। आरएसएस ने सौ साल में किसी महिला को अपना नेतृत्व नहीं सौंपा है। उन्होंने आगे कहा, कमजोर तबकों, खासकर आदिवासियों, अल्पसंख्यकों और महिलाओं पर अत्याचार बढ़ रहे हैं। कांग्रेस की सरकारों में अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति (एससी-एसटी) समुदाय के आर्थिक विकास के लिए कई कदम उठाए गए।

चीन के ‘मैन्युफैक्चरिंग’ किले में सेंध लगाएगा भारत, बजट 2026-27 में दिखा विकसित भारत का रोडमैप

चीन और अमेरिका इस समय निर्यात आधारित अर्थव्यवस्था के केंद्र बने हुए हैं। चीन सामान्य उपभोग की वस्तुओं के उत्पादन और निर्यात का वैश्विक केंद्र बना हुआ है तो अमेरिका और यूरोप के कुछ देश तकनीक, मशीन और युद्ध सामग्री के निर्यातक के रूप में अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहे हैं। भारत अब तक अपनी आंतरिक खपत, खाद्यान्न प्रसंस्कृत उत्पादों और सेवाओं के निर्यात से एक मजबूत अर्थव्यवस्था बना हुआ है। लेकिन 2026-27 का बजट यह बताता है कि भारत अब मूलभूत वस्तुओं-सेवाओं के निर्यात के साथ-साथ उन्नत तकनीक पर आधारित वस्तुओं के उत्पादन-निर्यात पर आधारित व्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। निर्मला सीतारमण द्वारा पेश नौवां बजट उसी औद्योगिक ढांचे को विश्वसनीय मजबूती प्रदान करने की कोशिश करता हुआ दिखाई दे रहा है। महत्त्वपूर्ण सेक्टरों में देश को मजबूत करना चाहतीबजट में औद्योगिक उत्पादन के लिए आवश्यक वस्तुओं, मशीनों, कलपुर्जों और तकनीक के आयात पर इम्पोर्ट ड्यूटी शून्य से लेकर दस प्रतिशत के बीच कर दी गई है। सरकार का यह कदम देश में रक्षा उत्पादों, सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहनों और इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं के उत्पादन के लिए सहायक होगा। केंद्र सरकार लगातार देश को रक्षा उत्पादों के एक वैश्विक निर्यातक के रूप में विकसित करने का प्रयास कर रही है। इससे यह समझ आता है कि सरकार का विजन ही बजट में कानूनी प्रावधानों के रूप में उभर कर सामने आया है। आज घरेलू उपभोग की छोटी-छोटी वस्तुओं से लेकर कारों-वायुयानों और उपग्रह निर्माण तक में जिस तरह सेमीकंडक्टर चिप्स का उपयोग बढ़ रहा है, कोई भी देश चिप्स के लिए चीन जैसे प्रतिद्वंदी देश पर निर्भर नहीं रह सकता। बजट में देश को इस सेक्टर में मजबूत बनाकर देश को रणनीतिक मजबूती देने की कोशिश की गई है। क्लाउड कंप्यूटिंग और डाटा सेंटरों के भारत में सेंटर निर्माण करने पर विदेशी कंपनियों को 2047 तक टैक्स हॉलीडे प्रदान करना भी सरकार की उसी नीयत को स्पष्ट करता है जिसके अंतर्गत वह महत्त्वपूर्ण सेक्टरों में देश को मजबूत करना चाहती है। बिना विकसित अर्थव्यवस्था नहीं बन सकताभाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और जर्मनी की ड्यूश बैंक की भारतीय इकाई के पूर्व प्रबंध निदेशक जफर इस्लाम ने अमर उजाला से कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को 2047 में एक विकसित देश बनाने की बात करते रहे हैं। वर्तमान बजट देश को उसी दिशा में ले जाने का एक रोड मैप दिखाई देता है। लेकिन कोई भी देश औद्योगिक उत्पादन का केंद्र बने बिना विकसित अर्थव्यवस्था नहीं बन सकता। यह बजट देश को सभी महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में निर्माण की एक वैश्विक इकाई के रूप में विकसित करने का फ्रेम वर्क प्रदान करता है।

अयोध्या में ‘धर्मयुद्ध’ जगद्गुरु परमहंस की शंकराचार्य को दोटूक, ‘माफी मांगो वरना अयोध्या में नो एंट्री’

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर विवाद तेज होता जा रहा है। अयोध्या में तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में अविमुक्तेश्वरानंद के लिए चेतावनी जारी की है। उन्होंने शंकराचार्य को अयोध्या में प्रवेश न करने देने की चेतावनी जारी की है। जगद्गुरु परमहंस आचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर की गई कथित अभद्र टिप्पणियों से नाराज हैं। परमहंस आचार्य का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को औरंगज़ेब और हुमायूं का बेटा कहना अत्यंत निंदनीय है। यह एक संत को शोभा नहीं देता। विपक्ष को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किया जा रहाउन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सनातन धर्म और उत्तर प्रदेश के हित में लगातार काम कर रहे हैं। इस तरह की भाषा अस्वीकार्य है। जब तक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने शब्द वापस नहीं लेते और सीएम योगी से क्षमा नहीं मांगते, तब तक उन्हें अयोध्या में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। यह भी आरोप लगाया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का गाय को लेकर चल रहा आंदोलन राजनीति से प्रेरित है और विपक्ष को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किया जा रहा है। सभी सनातनी उनका बहिष्कार करेंउन्होंने कहा कि गाय को राष्ट्र माता घोषित करने की मांग के बावजूद बछड़ा और बैल के वध पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया जा सका है। परमहंस आचार्य ने केंद्र और राज्य सरकार से गोवंश को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने और पूर्ण रूप से गौहत्या पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। साथ ही ग्रामस्तर पर गौरक्षा के लिए ठोस व्यवस्था किए जाने की अपील की। जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने कहा कि भगवा पहनकर इस तरह की टिप्पणी करना पूरे संत समाज का अपमान है। जब तक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने शब्द वापस नहीं लेते, तब तक सभी सनातनी उनका बहिष्कार करें।

राहुल का संसद में ‘चीन राग’, पीएम मोदी पर लगाया किसानों को बेचने का आरोप!

लोकसभा में कांग्रेस सांसद और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने लगातार दूसरे दिन भारत-चीन सीमा विवाद का मुद्दा उठाया। इस दौरान सत्ता पक्ष की तरफ से ऐतराज जताया गया। वहीं स्पीकर ने कई बार उन्हें राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोलने के लिए कहा, आखिर में स्पीकर ने दूसरे सदस्यों को बोलने के लिए आमंत्रित किया। जिसके बाद विपक्ष की तरफ से जोरदार हंगामा किया गया। भारी हंगामे को देखते हुए स्पीकर लोकसभा की कार्रवाई दोपहर तीन बजे तक के लिए स्थगित कर दी। इससे पहले विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने उस लेख की प्रति को प्रमाणित किया जिसमें पूर्व सेना प्रमुख एम एम नरवणे के अप्रकाशित ‘संस्मरण’ का हवाला दिया गया था। उन्होंने इसे प्रमाणित करते हुए सदन के पटल पर रखा। इसके बाद स्पीकर ने उन्हें राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोलने के लिए कहा। राहुल गांधी ने कहा, ‘कल मैंने इस आर्टिकल पर अपना भाषण शुरू किया था। स्पीकर सर ने कहा था इसे प्रमाणित करें। मैं आज इसे प्रमाणित कर रहा हूं। सदन की कार्यवाही बाधित हो गईइसके बाद विपक्ष के नेता ने कहा, ‘राष्ट्रपति के भाषण में एक बहुत ही महत्वपूर्ण मुद्दा राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित है। पाकिस्तानियों, चीनियों और हमारे बीच के संबंध। इस लेख में एक बहुत ही महत्वपूर्ण बिंदु है जिसकी मैंने पुष्टि की है। यह प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया के बारे में बात करता है… हमारे राष्ट्रपति का भाषण उस मार्ग के बारे में था जिस पर भारत को आज चलना है। विश्व मंच पर, अंतरराष्ट्रीय मामलों का मुख्य मुद्दा चीन और अमेरिका के बीच संघर्ष है। यह हमारे राष्ट्रपति के भाषण का केंद्र बिंदु है। मैं बस इतना कह रहा हूं कि मुझे चीन और भारत के बीच जो हुआ और हमारे प्रधानमंत्री ने उस पर क्या प्रतिक्रिया दी, उस पर एक बयान देने दीजिए। मुझे क्यों रोका जा रहा है?’ वहीं जब राहुल गांधी ने अपनी चीन राग अलापना जारी रखा तो स्पीकर ने कई अन्य सदस्यों को बोलने के लिए आमंत्रित किया। तो राहुल गांधी के समर्थन में विपक्ष के तीन सांसद नरेश उत्तम पटेल, शताब्दी राय, डीएम खातिर आनंद ने बोलने से इनकार कर दिया। इसके बाद विपक्ष की तरफ से जोरदार हंगामा किया गया और सदन की कार्यवाही बाधित हो गई। भारत-अमेरिका ट्रेड डील के जरिए बेच दिया गयाकांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका के दबाव में आकर ट्रेड डील को फाइनल करने के लिए झुक गए हैं और इस समझौते के जरिए भारतीय किसानों की मेहनत को बेच दिया है। संसद भवन परिसर में पत्रकारों से बात करते हुए, जब उन्हें लोकसभा में बोलने नहीं दिया गया क्योंकि वे एक आर्टिकल से कोट करना चाहते थे जिसमें पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण का जिक्र था, राहुल गांधी ने कहा कि इतिहास में यह पहली बार है कि विपक्ष के नेता को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोलने नहीं दिया गया। राहुल गांधी ने कहा, ‘हमें यह समझने की जरूरत है कि लगभग चार महीने से अटकी हुई ट्रेड डील अचानक कल शाम को क्यों फाइनल हो गई,’ उन्होंने आगे कहा कि ‘प्रधानमंत्री मोदी पर बहुत ज्यादा दबाव था।’ यह पूछे जाने पर कि वे किस तरह के दबाव की बात कर रहे हैं, राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि अमेरिका में उद्योगपति गौतम अडानी के खिलाफ एक मामला है और एपस्टीन फाइलों में और भी बहुत कुछ सामने आने वाला है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी समझौते में फंस गए हैं और भारतीय किसानों को यह समझना चाहिए कि उनकी मेहनत साथ ही उनका खून-पसीना भारत-अमेरिका ट्रेड डील के जरिए बेच दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि पूरा देश बेच दिया गया है।

आम आदमी पार्टी की राजनीति की नींव ईमानदारी पर टिकी है – सोमनाथ भारती

सरिता साहनीनई दिल्ली – 02 फ़रवरी 2026 आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता सोमनाथ भारती ने पार्टी कार्यालय में एक अहम प्रेस वार्ता को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने भारतीय राजनीति, भ्रष्टाचार और भाजपा सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए। सोमनाथ भारती ने साफ शब्दों में कहा कि आम आदमी पार्टी का जन्म ही राजनीति में ईमानदारी लाने के उद्देश्य से हुआ था और पार्टी आज भी उसी रास्ते पर मजबूती से चल रही है। दिल्ली और पंजाब में ईमानदार सरकार का उदाहरणसोमनाथ भारती ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने जब दिल्ली में सरकार बनाई, तब उसने यह साबित कर दिया कि ईमानदारी से भी सरकार चलाई जा सकती है। उन्होंने बताया कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार ने बिना किसी घोटाले के काम किया। इसी तरह आज पंजाब में भी आम आदमी पार्टी की सरकार ईमानदारी के साथ जनता के लिए काम कर रही है।उन्होंने कहा कि यह बात भाजपा को शुरू से खटकती रही है, इसलिए वह आम आदमी पार्टी और खासतौर पर अरविंद केजरीवाल की ईमानदार छवि को खराब करने की कोशिश करती रही है। अरविंद केजरीवाल पर झूठे आरोप, लेकिन सबूत नहींसोमनाथ भारती ने कहा कि भाजपा ने बार-बार अरविंद केजरीवाल जी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए, लेकिन आज तक एक भी आरोप साबित नहीं कर पाई। उन्होंने साफ कहा कि झूठे आरोप लगाने से सच्चाई नहीं बदलती। उन्होंने कहा कि जब किसी पर आरोप लगाया जाता है तो सबूत भी होने चाहिए, लेकिन भाजपा के पास आज तक कोई ठोस सबूत नहीं है। जीतन राम मांझी के बयान ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े किएप्रेस वार्ता के दौरान सोमनाथ भारती ने एक वीडियो का ज़िक्र किया और कहा कि यह वीडियो बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी का है। उन्होंने बताया कि जीतन राम मांझी 1980 से राजनीति में हैं और हाल ही में 21 दिसंबर 2025 को गया (बिहार) में अपने नेताओं को संबोधित कर रहे थे। इस वीडियो में जीतन राम मांझी यह कहते हुए दिखाई देते हैं कि हर सांसद और विधायक विकास कार्यों में कमीशन खाता है। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने बेटे से भी यह कहने की बात कही कि वह पार्टी अध्यक्ष है और उसे यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सांसद और विधायक कमीशन लें। भ्रष्टाचार को खुलकर स्वीकार करना बेहद गंभीरसोमनाथ भारती ने कहा कि आज तक राजनीति में भ्रष्टाचार की बातें तो होती रही हैं, लेकिन इस तरह खुले मंच से कोई मंत्री यह स्वीकार करे कि सांसद और विधायक कमीशन लेते हैं, यह बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट भी कई बार भ्रष्टाचार के मुद्दे पर चिंता जता चुका है, लेकिन इस तरह का खुला बयान पहले कभी सामने नहीं आया। कानूनी नोटिस और माफ़ी की मांगसोमनाथ भारती ने बताया कि उन्होंने इस बयान का संज्ञान लिया और जीतन राम मांझी को कानूनी नोटिस भेजा। नोटिस में उन्होंने साफ कहा कि आम आदमी पार्टी ईमानदारी के लिए प्रतिबद्ध है और ऐसे बयान से सभी जनप्रतिनिधियों की छवि खराब होती है। उन्होंने जीतन राम मांझी से सार्वजनिक रूप से माफ़ी मांगने की मांग की। मोदी और नीतीश कुमार को भी लिखी चिट्ठीसोमनाथ भारती ने बताया कि चूंकि जीतन राम मांझी मोदी कैबिनेट में मंत्री हैं, इसलिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पत्र लिखा। इसके साथ ही उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी चिट्ठी भेजी। उन्होंने मांग की कि जीतन राम मांझी के बेटे को बिना चुनाव जीते मंत्री बनाए जाने के मामले पर ध्यान दिया जाए और पूरे मामले का ऑडिट कराया जाए। सरकार की चुप्पी पर सवालसोमनाथ भारती ने कहा कि हैरानी की बात यह है कि न तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ओर से अब तक कोई बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि जब एक केंद्रीय मंत्री खुलेआम भ्रष्टाचार की बात स्वीकार कर रहा है, तब सरकार की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। वीडियो मौजूद, फिर भी बयान से इनकारसोमनाथ भारती ने बताया कि जीतन राम मांझी की ओर से उन्हें जवाब मिला है, जिसमें उन्होंने कहा है कि उन्होंने ऐसा कोई बयान नहीं दिया। इस पर सोमनाथ भारती ने कहा कि जब वीडियो साफ मौजूद है, तब इस तरह से बयान से इनकार करना सच्चाई से भागने जैसा है। उन्होंने कहा कि वीडियो खुद सबूत है। भ्रष्टाचार को ‘नॉर्मल’ बनाने की कोशिशसोमनाथ भारती ने कहा कि सबसे खतरनाक बात यह है कि भ्रष्टाचार को सामान्य यानी “नॉर्मल” बनाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि जब कोई मंत्री यह कहता है कि 5 या 10 प्रतिशत कमीशन खुले में लो, तो यह पूरे लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है। केजरीवाल पर आरोप, लेकिन मंत्रियों पर कोई कार्रवाई नहींउन्होंने सवाल उठाया कि अरविंद केजरीवाल जी पर झूठे आरोपों को लेकर बड़ी-बड़ी बातें की जाती हैं, लेकिन जब एक मंत्री खुद भ्रष्टाचार स्वीकार कर रहा है, तब उस पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं होती। मोदी राज में भ्रष्टाचार को सामान्य बना दिया गयाप्रेस वार्ता के अंत में सोमनाथ भारती ने कहा कि आज के दौर में मोदी सरकार के राज में भ्रष्टाचार को सामान्य बना दिया गया है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी इस सोच के खिलाफ लड़ती रहेगी और ईमानदार राजनीति के लिए अपनी आवाज़ बुलंद करती रहेगी।

आय दोगुनी नहीं, अब ‘बहु-गुणित’ होगी मुख्यमंत्री योगी का नया कृषि मॉडल, गन्ने के साथ दलहन-तिलहन की खेती से मालामाल होंगे किसान

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि उत्तर प्रदेश को कृषि क्षेत्र में नई छलांग दिलाने का सबसे प्रभावी तरीका ‘गन्ना के साथ तिलहनी एवं दलहनी अन्तः फसली खेती’ को बड़े पैमाने पर लागू करना है। उन्होंने कहा कि यह मॉडल गन्ना किसानों की आय को केवल दोगुना नहीं, बल्कि ‘बहु-गुणित’ करने की क्षमता रखता है। मुख्यमंत्री सोमवार को इस विषय पर आयोजित उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि गन्ने के साथ सरसों, मसूर, उर्द और मूंग जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों की अंतःफसल किसानों को अतिरिक्त उत्पादन, कम लागत और पूरे वर्ष स्थिर आय उपलब्ध कराती है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति अधिक मजबूत होती है। वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक आधार पर किया जाएमुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में कृषि योग्य भूमि का क्षैतिज विस्तार अब संभव नहीं है, इसलिए ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी के लक्ष्य के लिए उत्पादन बढ़ाने का एकमात्र रास्ता इकाई क्षेत्रफल से अधिक फसल उत्पादन है। उन्होंने कहा कि ‘गन्ना आधारित अंतःफसली खेती उत्तर प्रदेश के कृषि भविष्य का नया मॉडल है। यह किसानों को अधिक उत्पादन, अधिक कमाई और जोखिम से सुरक्षा तीनों प्रदान करती है। मुख्यमंत्री ने इस योजना को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक मिशन मोड में लागू करने के निर्देश दिए। वर्तमान में प्रदेश में 29.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती होती है, जिसमें 14.64 लाख हेक्टेयर नया बोया गया क्षेत्र और 14.86 लाख हेक्टेयर पेड़ी शामिल है। उन्होंने कहा कि इतने बड़े क्षेत्र में तिलहन और दलहन की अंतःफसल जोड़ने से उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और साथ ही प्रदेश एवं देश की तिलहन-दलहन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को नई मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि कृषि विज्ञान केंद्र एवं कृषि विश्वविद्यालयों के माध्यम से क्रियान्वित करते हुए अंतःफसल का चयन वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक आधार पर किया जाए।

दिल्ली पुलिस को दोष नहीं देती, उन्हें दोष देती हूँ जो शीर्ष पर बैठे, बंगा भवन के बाहर सुरक्षाकर्मियों पर भड़कीं ममता बनर्जी

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को दिल्ली के बंगा भवन के बाहर तैनात सुरक्षाकर्मियों का सामना किया। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि वह राष्ट्रीय राजधानी में किसी आंदोलन के लिए नहीं आई हैं। उनका मकसद चुनावी सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाना है। ममता बनर्जी रविवार को दिल्ली पहुंची थीं। इसके बाद वो बंगा भवन गईं, जो दिल्ली में पश्चिम बंगाल सरकार का गेस्ट हाउस है। वहां वे परिवार ठहरे हुए हैं जो बंगाल में चुनावी सूची की जांच प्रक्रिया से प्रभावित हुए हैं। इमारत के बाहर भारी पुलिस बल तैनात देखकर मुख्यमंत्री नाराज हो गईं। उन्होंने सुरक्षाकर्मियों से कहा कि वे बंगाल के लोगों के साथ संवेदनशीलता से पेश आएं। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि बंगा भवन में बंगाल के लोगों को डराया जा रहा है। उन्होंने मीडिया से कहा, “हमारा मामला सुप्रीम कोर्ट में है और हमारी चुनाव आयोग के साथ बैठक तय है। लोग परेशान हैं, क्या उनके परिवार मीडिया से बात भी नहीं कर सकते?” मुख्यमंत्री ने कहा, जहां भी एसआईआर से प्रभावित परिवार ठहरे हैं, वहां दिल्ली पुलिस तैनात है। जब दिल्ली में धमाका होता है तो दिल्ली पुलिस कहां होती है? मुख्यमंत्री ने कहा मैं दिल्ली पुलिस को दोष नहीं देती, मैं उन लोगों को दोष देती हूं जो शीर्ष पर हैं। उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठे लोग देश की रक्षा करने में नाकाम हैं और आम लोगों पर एसआईआर के नाम पर अत्याचार कर रहे हैं। उन्होंने दिल्ली की तुलना एक जमींदारी से की, जहां गरीबों के लिए कोई जगह नहीं है।

किसी एक मुद्रा पर भरोसा नहीं! जानिए क्यों सोने की तरफ भाग रहे हैं निवेशक? निर्मला सीतारमण का बड़ा खुलासा

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि केंद्र सरकार की बजट रणनीति में निवेश को प्राथमिक औजार बनाया गया है, ताकि आर्थिक वृद्धि को टिकाऊ बनाए रखा जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि बजट का फोकस ऐसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों पर है, जहां बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की क्षमता मौजूद है। सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव को लेकर वित्त मंत्री ने कहा कि यह वैश्विक अनिश्चितता की वजह से हो रहा है। इससे पता चलता है कि निवेशकों को फिलहाल किसी एक मुद्रा पर पूरा भरोसा नहीं है, इसलिए वे सुरक्षित विकल्पों की तलाश में हैं। सीतारमण ने कहा है कि 7-8 प्रतिशत की आर्थिक विकास दर बनाए रखना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है, क्योंकि इससे सभी नागरिकों को फायदा होगा और ज्यादा रोजगार पैदा होंगे। नौकरियों में महिलाओं की संख्या बढ़ रहीवित्त मंत्री ने कहा कि अगर अर्थव्यवस्था की रफ्तार अच्छी रहती है, तो उसका लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचता है। उन्होंने कहा कि भारत को दुनिया की सबसे तेजr से बढ़ती अर्थव्यवस्था बने रहने के लिए 7 से 8 प्रतिशत की विकास दर बनाए रखनी होगी। सीतारमण ने कहा कि आर्थिक विकास से रोजगार के अवसर बढ़ते हैं, ज्यादा लोग कार्यबल से जुड़ते हैं और उत्पादकता में सुधार होता है। महिलाओं की भागीदारी पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि नियोक्ता अब महिलाओं की दक्षता और सटीक कामकाज को अधिक महत्व देने लगे हैं। इसका असर यह है कि सेमी-स्किल्ड नौकरियों में महिलाओं की संख्या बढ़ रही है। हालांकि, उन्होंने चिंता जताई कि बोर्डरूम और नेतृत्व के स्तर पर महिलाओं की मौजूदगी अभी भी कम है। वित्त मंत्री ने कहा कि ज्यादा महिलाओं को नेतृत्व की भूमिका में आना चाहिए, ताकि वे फैसलों को प्रभावित कर सकें और दूसरों के लिए प्रेरणा बन सकें।

अजीत पवार के निधन के बाद बड़ा उलटफेर, सुनेत्रा पवार बनीं महाराष्ट्र की पहली महिला डिप्टी सीएम

एनसीपी के दिवंगत नेता अजीत पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार ने शनिवार को महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। इसी बीच एनसीपी (शरद पवार) के महाराष्ट्र अध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने दावा किया है कि पार्टी प्रमुख शरद पवार और अन्य वरिष्ठ नेताओं को सुनेत्रा पवार के राज्य की उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की पूर्व जानकारी नहीं थी। शशिकांत शिंदे ने शनिवार को पत्रकारों से कहा कि शरद पवार को उनके शपथ ग्रहण के बारे में पहले से कोई जानकारी नहीं थी। दोनों एनसीपी के एक साथ आने पर चर्चा और बैठकें हुई थीं। लेकिन अजीतदादा अब नहीं रहे। कुछ मोटे तौर पर पदों पर पहले चर्चा हुई थी। अब हम चर्चा करेंगे कि क्या करने की आवश्यकता है और फिर एक फैसला लेंगे। दूसरे कैसे प्रतिक्रिया देते हैं, यह उन पर है। विलय की उम्मीदों पर ग्रहण लग गयासुनेत्रा पवार के शपथ ग्रहण समारोह में जल्दबाजी के बारे में पूछे जाने पर शिंदे ने कहा कि इसका जवाब उनके परिवार, वरिष्ठ पार्टी नेताओं, या मुख्यमंत्री और उनके सहयोगियों को देना चाहिए। अजीत पवार का निधन महाराष्ट्र के लिए एक बड़ा नुकसान है। जब राज्य शोक में है, तो यह फैसला क्यों लिया गया, यह हमें नहीं पता। उन्हें इसका स्पष्टीकरण देना होगा। महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री बनीं सुनेत्रा पवार राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) की अध्यक्ष भी रहेंगी। इससे दिवंगत अजीत पवार की एनसीपी और शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (सीपी) के विलय की उम्मीदों पर ग्रहण लग गया है। साथ ही पवार परिवार में एकता पर भी संकट गहरा गए हैं। सुप्रिया सुले शपथ ग्रहण समारोह से भी गैरहाजिरदरअसल, विधान भवन में शनिवार को हुई विधायक दल और वरिष्ठ नेताओं की बैठक में दो प्रस्ताव पारित किए गए। एक में सुनेत्रा पवार को विधायक दल का नेता चुना गया और दूसरे प्रस्ताव में पार्टी में सभी निर्णय लेने का सर्वाधिकार भी उन्हें सौंप दिया गया। यह सियासी उलटफेर पिछले दो दिनों में हुआ। अजीत के विमान हादसे में निधन के बाद शरद पवार की पार्टी के नेताओं की ओर से ये बयान आने शुरू हो गए थे कि वह परिवार में एकता चाहते थे। अजीत की इच्छा थी कि दोनों पार्टियों का विलय हो लेकिन, इस पर अजीत की पार्टी के नेता खामोश रहे। इससे पवार परिवार में सियासी टकराहट की आहट सुनाई देने लगी थी। शरद पवार और उनकी बेटी सांसद सुप्रिया सुले शपथ ग्रहण समारोह से भी गैरहाजिर रहे।