*2027 में पंजाब में निश्चित हार को ध्यान में रखते हुए अरविंद केजरीवाल अपने राजनीतिक भविष्य के लिए फिर से सोशल नेटवर्किंग राजनीति पर लौटना चाह रहे हैं और एथनॉल बलेंडिड पैट्रोल उसी की शुरुआत है — *हर्ष मल्होत्रा*

भारत के वाहन चालक भलीभांति समझते हैं की एथनॉल पैट्रोल कल का मूल ईंधन है और वह अरविंद केजरीवाल से गुमराह नही होने वाले — हर्ष मल्होत्रा इसी लिए मेरी बार बार की चुनौती के बाद भी केजरीवाल 100 ऐसी गाड़ी आज भी नही दिखा सके जिनके पास ई 20 पैट्रोल से खराब होने का ओटोमोबाइल इंजीनियर सर्टिफिकेट हो — दिल्ली भाजपा अध्यक्ष नई दिल्ली 4 अगस्त : दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष श्री हर्ष मल्होत्रा ने कहा है की हमने कल ही कहा था की अरविंद केजरीवाल को एथनॉल पैट्रोल मुद्दे पर केवल राजनीति करनी है, उन्हे अच्छी तरह मालूम है की एथनॉल बलेंडिड पैट्रोल वक्त की जरूरत है और वह केवल खबरों पर बने रहने के लिए मंगलवार को प्रधान मंत्री आवास जाने का नाटक करेंगे। कल जैसा मैंने कहा था ठीक उसी तरह आज अरविंद केजरीवाल ने पुलिस द्वारा रोके जाने का दावा करके लगभग आधे घंटे का धरना नाटक अपने कार्यालय के बाहर किया फिर 5/7 गड्डी कागज पुलिस को सौंप कर कह दिया की हमने 2,33,238 पेटिशन सौंप दीं। असल में 2027 में पंजाब में निश्चित हार को ध्यान में रखते हुए अरविंद केजरीवाल अपने राजनीतिक भविष्य के लिए फिर से सोशल नेटवर्किंग राजनीति पर लौटना चाह रहे हैं और एथनॉल बलेंडिड पैट्रोल उसी की शुरुआत है। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने कहा है की भारत के वाहन चालक भलीभांति समझते हैं की एथनॉल पैट्रोल कल का मूल ईंधन है और वह अरविंद केजरीवाल से गुमराह नही होने वाले और इसी लिए मेरी बार बार की चुनौती के बाद भी 100 ऐसी गाड़ी आज भी नही दिखा सके जिनके पास ई 20 पैट्रोल से खराब होने का ओटोमोबाइल इंजीनियर सर्टिफिकेट हो। बेहतर होगा अरविंद केजरीवाल एथनॉल बलेंडिड पैट्रोल पर राजनीति खेलना बंद करें अन्यथा वह अपना बचा कुचा राजनीतिक अस्तित्व भी खो बैठेंगे।
*अरविंद केजरीवाल की कल 100 लोगों के साथ प्रधान मंत्री आवास जाने की घोषणा उनके और राहुल गांधी के बीच चल रही कौन आराजक न. 1 प्रतियोगिता का भाग है — *हर्ष मल्होत्रा*

पहले आराजकता फैलाना फिर विक्टिम कार्ड खेलना केजरीवाल की पुरानी पहचान है, अब कल जब पुलिस उनको प्रधान मंत्री आवास में प्रवेश से रोकेगी तब केजरीवाल विक्टिम कार्ड खेलेंगे की सरकार ने हमसे बातचीत करने से भी इंकार कर दिया — हर्ष मल्होत्रा केजरीवाल एवं राहुल 11 अगस्त 2005 को संसद में दिया कांग्रेस के तत्कालीन मंत्री श्री मणी शंकर अय्यर का ब्यान सुनें जिसमें उन्होने साफ कहा था की एथनॉल पैट्रोल में मिलाना देश हित में है और हम यह करके दिखायेंगे — दिल्ली भाजपा अध्यक्ष केजरीवल नागरिकों को गुमराह करना बंद करें और देश के सामने 100 ऐसी गाड़ी पेश करें जिनके पास किसी ओटोमोबाइल इंजीनियर का सर्टिफिकेट हो की यह गाड़ी एथनॉल के कारण खराब हुई हैं — हर्ष मल्होत्रा नई दिल्ली 3 अगस्त : दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष श्री हर्ष मल्होत्रा ने कहा है की आम आदमी पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल की कल 100 लोगों के साथ प्रधान मंत्री आवास जाने की घोषणा उनके और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बीच चल रही कौन आराजक न. 1 प्रतियोगिता का भाग है। जब से राहुल गांधी ने प्रधान मंत्री आवास पर प्रदर्शन करा है तब से अरविंद केजरीवाल खुद को आराजकता के खेल में पिछड़ा पा रहे थे और इसी की पूर्ति के लिए केजरीवाल ने एथनॉल मुद्दे पर बिना अनुमति प्रधान मंत्री आवास जाने की घोषणा की है। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने कहा है की पहले आराजकता फैलाना फिर विक्टिम कार्ड खेलना अरविंद केजरीवाल की पुरानी पहचान है, अब कल जब पुलिस उनको प्रधान मंत्री आवास में बिना अनुमति प्रवेश से रोकेगी तब केजरीवाल विक्टिम कार्ड खेल कर कहेंगे की सरकार ने हमसे बातचीत करने से भी इंकार कर दिया। श्री हर्ष मल्होत्रा ने कहा है की एथनॉल बलेंडिड पैट्रोल मुद्दे पर अरविंद केजरीवाल एवं कांग्रेस दोनों के नाटक की पोल खुल चुकी है – एथनॉल प्रयोग एक वक्त की जरूरत है ताकि जहां एक ओर वायु प्रदूषण घटे तो वहीं इससे किसानों की आय बढ़ेगी और साथ में देश को विदेशी मुद्रा की भारी बचत होगी। उन्होने अरविंद केजरीवाल एवं कांग्रेस नेता राहुल गांधी दोनों से कहा है वह 11 अगस्त 2005 को संसद में कांग्रेस के तत्कालीन मंत्री श्री मणी शंकर अय्यर का ब्यान सुनें जिसमें उन्होने साफ कहा था की एथनॉल पैट्रोल में मिलाना देश हित में है और हम यह करके दिखायेंगे। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने कहा है की बेहतर होगा की अरविंद केजरीवाल एवं कांग्रेस नेता एथनॉल बलेंडिड पैट्रोल पर आम नागरिकों को गुमराह करना बंद करें और देश के सामने 100 ऐसी गाड़ी पेश करें जिनके पास किसी ओटोमोबाइल इंजीनियर का सर्टिफिकेट हो की यह गाड़ी एथनॉल के कारण खराब हुई है।
सवर्ण समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती अर्चना श्रीवास्तवा जी 8 अगस्त को अयोध्या में आयोजित आरक्षण की शव यात्रा में होंगी शामिल

सवर्ण समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती अर्चना श्रीवास्तवा जी भोपाल से अयोध्या पहुंचकर 8 अगस्त को आयोजित पार्टी के कार्यक्रम में सहभागिता करेंगी। वे पार्टी द्वारा आयोजित आरक्षण की शव यात्रा में उपस्थित रहकर कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन करेंगी तथा सभा को संबोधित भी करेंगी।पार्टी के राष्ट्रीय प्रभारी श्री अनूप श्रीवास्तव ने सभी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं एवं समर्थकों से अधिक से अधिक संख्या में कार्यक्रम में शामिल होकर इसे शांतिपूर्ण एवं अनुशासित ढंग से सफल बनाने की अपील की है।
चुनाव आयोग के जरिए दिल्ली में 30 लाख वोट कटवाने का षड़यंत्र कर रही भाजपा- सोमनाथ भारती

आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और मालवीय नगर से पूर्व विधायक सोमनाथ भारती ने एसआईआर के बहाने काटे जा रहे वोट को लेकर भाजपा और चुनाव आयोग पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि भाजपा, चुनाव आयोग के जरिए दिल्ली में 30 लाख वोट कटवाने का षड़यंत्र कर रही है। आयोग 2002 वोटर लिस्ट में वोटर या उसके पैरेंट्स का नाम होने की जानकारी मांग रहा है। जिससे लाखों लोग एसआईआर से वंचित हो रहे हैं। मैं खुद 2002 के बहुत पहले से दिल्ली में रह रहा हूं, लेकिन 2002 के वोटर लिस्ट में न मेरा और ना ही पैरेंट्स का नाम मिल रहा है। इसी तरह, दिल्ली का निवासी होने का कोई स्थायी प्रमाण नहीं होने के कारण बड़े पैमाने पर किराएदारों के भी वोट काटे जा रहे हैं। सोमवार को “आप” मुख्यालय पर प्रेस वार्ता कर पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सोमनाथ भारती ने कहा कि दिल्ली में चल रहे एसआईआर की आखिरी तारीख 29 जुलाई से बढ़ाकर 8 अगस्त कर दी गई है। मेरी विधानसभा मालवीय नगर में रविवार तक केवल 47 फीसद वोटरों का ही वेरिफिकेशन हो सका था। ऐसे में अगले पांच दिन में बचे 53 फीसद वोटरों का सत्यापन कैसे संभव होगा? सोमनाथ भारती ने बताया कि एसआईआर के फॉर्म में अजीबोगरीब डिटेल भरनी है कि अगर कोई 2002 की वोटर लिस्ट में है तो अपनी जानकारी भरे और अगर नहीं है तो अपने माता-पिता या दादा-दादी की डिटेल भरे। मैंने 2002 की वोटर लिस्ट में खूब सर्च किया, लेकिन ना तो मेरा नाम मिला, ना मेरी माताजी का और ना ही मेरे पिताजी का नाम मिला। सोमनाथ भारती ने बताया कि मेरे पिताजी का 2016 में देहांत हो गया था, लेकिन मेरे पास उनका 1996 का दिल्ली का वोटर कार्ड है। मेरी माताजी 2005 के आसपास वीआरएस लेकर बिहार से दिल्ली शिफ्ट हो गईं, उनका भी 2004 का वोटर कार्ड है। मुझे ना तो उनका नाम बिहार की वोटर लिस्ट में मिल रहा है और ना ही पिताजी का दिल्ली की लिस्ट में। मेरा खुद का नाम भी उसमें नहीं है। मैंने 1997 में आईआईटी पास आउट किया, फिर दिल्ली यूनिवर्सिटी से लॉ की पढ़ाई की जिसकी डिग्री 2008 की है। 2005 में मैं अपने वर्तमान घर में शिफ्ट हुआ, यानी मैं 2002 में भी दिल्ली में ही था। जब मेरे जैसे व्यक्ति को अपना और अपने माता-पिता का नाम 2002 की वोटर लिस्ट में ढूंढने में इतनी तकलीफ हो रही है, तो सोचिए कि और लोगों की क्या हालत होगी। ज्ञानेश कुमार के चुनाव आयोग से पूछना चाहता हूं कि मैं अब कहां से प्रमाण लाऊं और क्या करूं? सोमनाथ भारती ने कहा कि मैं यह सोचकर हैरान हूं कि जब इतने सारे प्रमाण होने के बावजूद मैं खुद को साबित नहीं कर पा रहा हूं, तो फिर आम आदमी कहां जाएगा? जहां साक्षरता दर इतनी कम है और जहां शिक्षा संस्थान बंद करा दिए गए हैं, वहां का आम नागरिक कैसे साबित करेगा? क्या चुनाव आयोग ने यह ठान लिया है कि वह पूरी तरह से भाजपा का आयोग हो गया है? दिल्ली में 20 से 30 लाख वोट काटने का एक बहुत बड़ा षड्यंत्र चल रहा है। भाजपा के विधायकों के दफ्तरों में बीएलओ को बुलाकर बताया जा रहा है कि हर बूथ की लिस्ट में किन लोगों के नाम रखने हैं, जिन्हें कोई प्रमाण देने की जरूरत नहीं है। सोमनाथ भारती ने कहा कि दिल्ली के अंदर किसी भी बूथ पर प्रोफाइलिंग करना बहुत आसान है। एक बूथ में अगर 1000 वोट हैं, तो वे लगभग 200 घरों में आ जाते हैं। 50 बिल्डिंगों में एक बूथ बन जाता है, जहां किसी पार्क में बैठकर आराम से प्रोफाइलिंग की जा सकती है कि कौन भाजपा और कौन आम आदमी पार्टी का वोटर हैं। इसी प्रोफाइलिंग के आधार पर आराम से 60-70 फीसद वोट सुरक्षित किए जा सकते हैं और अगर ठान लिया है कि आम आदमी पार्टी के वोट काटने हैं, तो बाकी 20 फीसद वोटरों से प्रमाण मांग कर उनके वोट काट दीजिए, क्योंकि वे खुद को साबित ही नहीं कर पाएंगे। सोमनाथ भारती ने बताया कि दिल्ली में बहुत बड़ी संख्या में लोग किराएदार हैं। किराएदारों की सबसे बड़ी मुसीबत यह है कि जिस पते पर उनका आधार, वोटर या पासपोर्ट बनता है, मकान मालिक 11 महीने बाद उन्हें घर खाली करने या किराया बढ़ाने की धमकी देता है। गरीब तबकों में मकान मालिक किराएदार को अपने पते पर कोई पक्का प्रमाण नहीं बनाने देते। आज वे सारे किराएदार इस मुसीबत में हैं कि उनके वोट काटे जा रहे हैं। वे सभी असली भारतीय नागरिक हैं, कोई बांग्लादेशी नहीं हैं, जैसा भाजपा कहती है। एसआईआर के नाम पर जिस प्रकार से यह काम चल रहा है, वह लोकतंत्र के साथ सीधा खिलवाड़ है जो बहुत महंगा साबित होगा। सोमनाथ भारती ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से कहा कि वे कान खोलकर सुन लें, जिस प्रकार जंतर-मंतर पर लोग एकत्रित हुए थे, अगर वे नहीं सुधरे तो हमारे पास सुधारने के और भी तरीके हैं। जनता का वोट काटकर, भाजपा के साथ षड्यंत्र रचकर और लोकतंत्र की हत्या करके चुनाव जिताने का जो प्रयत्न किया जा रहा है, वह बहुत गलत है। ज्ञानेश कुमार भाजपा को चुनाव तो जिता सकते हैं, लेकिन इससे जनता के दिलों में भाजपा के प्रति जो नफरत पैदा हो गई है, उसे वे कभी नहीं मिटा पाएंगे।
रेखा गुप्ता सरकार पर साइकिल खरीद में 90 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप, सौरभ भारद्वाज ने लगाए गंभीर आरोप

नई दिल्ली, 2 अगस्त 2026। दिल्ली में छात्राओं को बांटी गई साइकिलों की खरीद को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। आम आदमी पार्टी (आप) ने दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार पर साइकिल खरीद में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाया है। पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने प्रेस वार्ता में कहा कि दवा खरीद के बाद अब साइकिल खरीद में भी सरकार ने करोड़ों रुपये का घोटाला किया है। उन्होंने दावा किया कि पूरी टेंडर प्रक्रिया पहले से तय थी और नियम इस तरह बनाए गए कि केवल कुछ चुनिंदा कंपनियों को ही फायदा मिल सके। सौरभ भारद्वाज ने कहा- साइकिल खरीद में हुआ 90 करोड़ रुपये का घोटालाप्रेस वार्ता के दौरान सौरभ भारद्वाज ने कहा कि दिल्ली सरकार ने लगभग 1 लाख 30 हजार साइकिलें खरीदने के लिए टेंडर जारी किया। उनका आरोप है कि जिस साइकिल की बाजार में कीमत करीब 4,100 रुपये है, उसी साइकिल की कीमत टेंडर में 6,923 रुपये तय की गई। उन्होंने कहा कि इससे सरकार ने जरूरत से कहीं ज्यादा पैसे खर्च किए और सरकारी धन का सही उपयोग नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि यदि सरकार बाजार कीमत पर साइकिल खरीदती तो करोड़ों रुपये की बचत हो सकती थी। लेकिन ऐसा नहीं किया गया और अधिक कीमत पर खरीदारी की गई। दवा खरीद की तरह पहले से तय किया गया टेंडर- सौरभ भारद्वाजसौरभ भारद्वाज ने कहा कि जिस तरह पहले दवा खरीद के मामले में टेंडर को लेकर सवाल उठे थे, उसी तरह इस मामले में भी पहले से तय कर लिया गया था कि टेंडर किस कंपनी को दिया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि उसी के अनुसार टेंडर की शर्तें तैयार की गईं। उन्होंने कहा कि सरकार ने ऐसे नियम बनाए जिनके कारण कई अच्छी और अनुभवी कंपनियां टेंडर में हिस्सा ही नहीं ले सकीं। इससे प्रतिस्पर्धा कम हो गई और कुछ कंपनियों को फायदा पहुंचाने का रास्ता तैयार किया गया। 360 करोड़ रुपये का टर्नओवर मांगने पर उठाए सवालसौरभ भारद्वाज ने कहा कि सरकार ने टेंडर में भाग लेने वाली कंपनियों के लिए 360 करोड़ रुपये का टर्नओवर अनिवार्य कर दिया। उनका कहना है कि 1.30 लाख साइकिलों की खरीद के लिए इतनी बड़ी शर्त की कोई जरूरत नहीं थी। उन्होंने कहा कि नियमों के अनुसार इस तरह के टेंडर में लगभग 180 करोड़ रुपये का टर्नओवर पर्याप्त माना जाता है। लेकिन जानबूझकर इसे दोगुना कर दिया गया ताकि केवल कुछ बड़ी कंपनियां ही टेंडर में शामिल हो सकें। सबसे नए वित्तीय वर्ष को टेंडर से बाहर रखा गयासौरभ भारद्वाज ने कहा कि किसी भी सरकारी टेंडर में सामान्य रूप से पिछले तीन वित्तीय वर्षों का रिकॉर्ड देखा जाता है। लेकिन इस टेंडर में सबसे हाल का वित्तीय वर्ष शामिल नहीं किया गया। उनका आरोप है कि ऐसा इसलिए किया गया ताकि वे कंपनियां बाहर हो जाएं जो कम कीमत पर अच्छी गुणवत्ता वाली साइकिलें उपलब्ध कराने के लिए तैयार थीं। प्री-बिड मीटिंग नहीं कराई गईसौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि सरकार ने इस टेंडर में प्री-बिड मीटिंग भी नहीं कराई। उन्होंने कहा कि किसी भी बड़े सरकारी टेंडर में यह बैठक बहुत महत्वपूर्ण होती है क्योंकि इसमें कंपनियां अपनी आपत्तियां और सुझाव सरकार के सामने रखती हैं। उन्होंने कहा कि कई कंपनियां 4,100 रुपये में साइकिल देने के लिए तैयार थीं, लेकिन सरकार ने उन्हें न तो बैठक में बुलाया और न ही उनकी बात सुनी। कई कंपनियों ने की शिकायतसौरभ भारद्वाज ने बताया कि एसके बाइक्स सहित कई साइकिल बनाने और बेचने वाली कंपनियों ने इस मामले की शिकायत उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री, विजिलेंस और अन्य संबंधित विभागों से की है। उन्होंने कहा कि इन शिकायतों में साफ लिखा गया है कि टेंडर की शर्तें निष्पक्ष नहीं थीं और कुछ कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई गई थीं। लेकिन अब तक किसी भी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। दूसरे राज्यों के टेंडर का भी दिया उदाहरणसौरभ भारद्वाज ने कहा कि शिकायत करने वाली कंपनियों ने राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और असम जैसे राज्यों के टेंडरों का भी उदाहरण दिया है।उन्होंने बताया कि राजस्थान में लाखों साइकिलों की खरीद के बावजूद टर्नओवर की शर्त कम रखी गई। छत्तीसगढ़ में भी कम टर्नओवर वाली कंपनियों को मौका दिया गया। लेकिन दिल्ली सरकार ने कम संख्या में साइकिल खरीदने के बावजूद टर्नओवर की सीमा बहुत ज्यादा रखी। उनका कहना है कि इससे साफ दिखाई देता है कि नियम सामान्य प्रक्रिया के अनुसार नहीं बनाए गए। 36 करोड़ रुपये की कमीशनखोरी का भी आरोपसौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि उन्हें जानकारी मिली है कि सरकार ने साइकिलों की खरीद लगभग 6,957 रुपये प्रति साइकिल की दर से की है। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति दिल्ली के होलसेल बाजार में जाए तो इसी तरह की साइकिल करीब 4,500 रुपये में मिल सकती है। शिकायत करने वाली कंपनियों का दावा है कि पूरे टेंडर में लगभग 36 करोड़ रुपये की कमीशनखोरी हुई है। सरकार से पूछे कई सवालसौरभ भारद्वाज ने सरकार से पूछा कि यदि बाजार में सस्ती कीमत पर अच्छी गुणवत्ता वाली साइकिल उपलब्ध थी तो उसे क्यों नहीं खरीदा गया। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि टेंडर की शर्तें इतनी सख्त क्यों रखी गईं और प्री-बिड मीटिंग क्यों नहीं कराई गई। उन्होंने कहा कि सरकार को इन सभी सवालों का जवाब जनता के सामने देना चाहिए। निष्पक्ष जांच की मांगसौरभ भारद्वाज ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी अधिकारी या कंपनी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।उन्होंने कहा कि छात्राओं के लिए चलाई जाने वाली योजनाएं समाज के हित में होती हैं। इसलिए इन योजनाओं में पूरी पारदर्शिता और ईमानदारी जरूरी है। अगर सरकारी धन का गलत इस्तेमाल हुआ है तो इसकी सच्चाई सामने आनी चाहिए और दोषियों को कानून के अनुसार सजा मिलनी चाहिए। आम आदमी पार्टी ने कहा कि वह इस मुद्दे को जनता के बीच भी उठाएगी और सरकार से पूरे मामले में जवाब मांगेगी।
AI से छेड़छाड़ कर ‘जुगनी’ गाने को बदनाम करने की साजिश, गायक सोनू ठुकराल ने साइबर क्राइम में की शिकायत

नई दिल्ली | लोकप्रिय पंजाबी गायक सोनू ठुकराल का नया गाना ‘जुगनी’ इन दिनों सोशल मीडिया और म्यूजिक प्लेटफॉर्म पर खूब पसंद किया जा रहा है। यह गाना रिलीज होने के बाद तेजी से वायरल हुआ और लाखों लोगों ने इसे देखा। गाने को दर्शकों का अच्छा प्यार मिला, लेकिन इसकी बढ़ती लोकप्रियता के बीच एक विवाद भी सामने आ गया। इस विवाद के कारण गायक सोनू ठुकराल को मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा और आखिरकार उन्हें साइबर क्राइम सेल में शिकायत दर्ज करानी पड़ी। गाना ‘जुगनी’ को मिला दर्शकों का भरपूर प्यार‘जुगनी’ गाना रिलीज होते ही लोगों की पसंद बन गया। सोशल मीडिया पर इसके वीडियो और रील्स तेजी से वायरल होने लगे। गाने का संगीत, बोल और वीडियो लोगों को काफी पसंद आया। कम समय में ही इस गाने ने करोड़ों व्यूज हासिल कर लिए और यह ट्रेंडिंग गानों की सूची में शामिल हो गया। गाने की सफलता से पूरी टीम बेहद खुश थी। फिल्मांकन के दौरान हुई एक तकनीकी गलतीजानकारी के अनुसार, गाने की शूटिंग के समय एक सीन में तकनीकी गलती हो गई थी। अभिनेत्री के डांस वाले एक छोटे से दृश्य में कैमरे का एंगल सही नहीं रहा, जिसकी वजह से वीडियो में ऐसा दृश्य दिखाई देने लगा, जिसे बाद में विवाद का कारण बनाया गया। यह गलती जानबूझकर नहीं हुई थी, बल्कि शूटिंग के दौरान हुई एक सामान्य तकनीकी त्रुटि थी। AI तकनीक का इस्तेमाल कर वीडियो को किया गया एडिटगाने के रिलीज होने के बाद कुछ शरारती और असामाजिक लोगों ने उस छोटे से दृश्य को अलग करके AI तकनीक की मदद से एडिट और मॉर्फ करना शुरू कर दिया। इसके बाद सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो और क्लिप्स फैलाए गए, जिनमें गाने को गलत तरीके से दिखाया गया। इन एडिटेड वीडियो के कारण लोगों के बीच भ्रम फैलने लगा और गाने के बारे में गलत बातें कही जाने लगीं। सोनू ठुकराल और जैकलिन फर्नांडीज पर लगाए गए आरोपAI से तैयार किए गए वीडियो वायरल होने के बाद कुछ लोगों ने गायक सोनू ठुकराल और अभिनेत्री जैकलिन फर्नांडीज पर अश्लीलता फैलाने जैसे आरोप लगाने शुरू कर दिए। सोशल मीडिया पर कई तरह की भ्रामक बातें फैलने लगीं। इन आरोपों के कारण दोनों कलाकारों की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई। गाने को आधिकारिक चैनल से हटाने का लिया गया फैसलाजब विवाद लगातार बढ़ने लगा, तब सोनू ठुकराल ने बड़ा फैसला लिया। उन्होंने लगभग 1.5 करोड़ (15 मिलियन) व्यूज हासिल कर चुके ‘जुगनी’ गाने को अपने आधिकारिक यूट्यूब चैनल से हटा दिया। इसके बाद वीडियो के विवादित हिस्से को एडिट किया गया और गाने का नया संस्करण दोबारा रिलीज किया गया, ताकि किसी तरह की गलतफहमी न रहे। नया वर्जन आने के बाद भी नहीं रुका विवादगाने का नया और संशोधित संस्करण रिलीज होने के बावजूद कुछ लोग लगातार पुराने वीडियो और AI से एडिट किए गए क्लिप्स सोशल मीडिया पर शेयर करते रहे। इससे गाने को लेकर भ्रम की स्थिति बनी रही। गायक का कहना है कि कुछ लोग जानबूझकर उनकी छवि खराब करने के उद्देश्य से ऐसा कर रहे हैं। साइबर क्राइम सेल में दर्ज कराई शिकायतपूरा मामला बढ़ने के बाद गायक सोनू ठुकराल ने साइबर क्राइम सेल में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई। अपनी शिकायत में उन्होंने कहा कि कुछ असामाजिक तत्व AI तकनीक का गलत इस्तेमाल करके उनके गाने को गलत रूप में पेश कर रहे हैं। इससे उनकी प्रतिष्ठा और उनके काम को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। दर्शकों से की महत्वपूर्ण अपीलसोनू ठुकराल ने अपने सभी प्रशंसकों और दर्शकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एडिटेड या मॉर्फ किए गए वीडियो पर विश्वास न करें। उन्होंने कहा कि केवल उनके आधिकारिक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध असली और प्रमाणिक गाने को ही देखें। उन्होंने लोगों से अफवाहों और भ्रामक सामग्री से दूर रहने की भी अपील की। साइबर क्राइम विभाग से कार्रवाई की उम्मीदगायक ने उम्मीद जताई है कि साइबर क्राइम विभाग इस मामले की गंभीरता से जांच करेगा और AI तकनीक का गलत इस्तेमाल करने वाले लोगों के खिलाफ जल्द सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उनका मानना है कि इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाना जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी कलाकार की छवि को इस प्रकार नुकसान न पहुंचाया जा सके। विवाद के बावजूद लोगों की पहली पसंद बना ‘जुगनी’विवादों के बावजूद ‘जुगनी’ गाने की लोकप्रियता में कोई खास कमी नहीं आई है। गाने का नया संस्करण भी दर्शकों के बीच पसंद किया जा रहा है और सोशल मीडिया पर लगातार ट्रेंड कर रहा है। बड़ी संख्या में लोग इस गाने को सुन रहे हैं और कलाकारों के काम की सराहना कर रहे हैं। यह मामला AI तकनीक के गलत इस्तेमाल और सोशल मीडिया पर फैलने वाली भ्रामक सामग्री के प्रति लोगों को सतर्क रहने का भी संदेश देता है।
ताहिर हुसैन को उम्रकैद की सज़ा पर हर्ष मल्होत्रा ने न्यायालय के फैसले का किया स्वागत

नई दिल्ली, 31 जुलाई। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष एवं केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने आम आदमी पार्टी के नेता ताहिर हुसैन को माननीय न्यायालय द्वारा उम्रकैद की सज़ा सुनाए जाने के फैसले का स्वागत किया है। हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि यह फैसला न्याय व्यवस्था में लोगों के विश्वास को और मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना निर्णय दिया है और भारतीय जनता पार्टी इस फैसले का सम्मान करती है। हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि सच्चाई सामने आ गई हैहर्ष मल्होत्रा ने कहा कि न्यायालय के फैसले के बाद अब सच्चाई सभी लोगों के सामने आ गई है। हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि इस फैसले से यह साफ हो गया है कि पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों का मामला कितना गंभीर था। उन्होंने कहा कि इस घटना में आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या हुई थी, जिसे उन्होंने बेहद दुखद और दर्दनाक बताया। हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि न्यायालय का फैसला यह दिखाता है कि कानून अपना काम करता है और कानून के सामने सभी बराबर हैं। आम आदमी पार्टी पर लगाए आरोपहर्ष मल्होत्रा ने आम आदमी पार्टी पर कई आरोप लगाए। हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने ऐसे लोगों को अपनी पार्टी में जगह दी, जिन पर गंभीर आरोप लगे। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल को इस पूरे मामले पर जवाब देना चाहिए। हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि आम आदमी पार्टी के नेताओं को यह सोचना चाहिए कि उन्होंने ऐसे लोगों को पार्टी में क्यों रखा। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे लोगों का बचाव करने की कोशिश भी की गई। संसद भवन की घटना का भी किया जिक्रअपने बयान में हर्ष मल्होत्रा ने हाल ही में संसद भवन से जुड़ी घटना का भी उल्लेख किया। हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि देश ने देखा कि आम आदमी पार्टी से जुड़े कुछ लोगों ने संसद भवन में प्रवेश करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि संसद देश का सबसे महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक संस्थान है और उसका सम्मान करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। दिल्ली और पंजाब की जनता का किया उल्लेखहर्ष मल्होत्रा ने कहा कि दिल्ली की जनता अब आम आदमी पार्टी के कामकाज को अच्छी तरह समझ चुकी है। उन्होंने कहा कि पिछले चुनाव में दिल्ली की जनता ने आम आदमी पार्टी को सत्ता से बाहर कर दिया। हर्ष मल्होत्रा ने आगे कहा कि पंजाब की जनता भी अब आम आदमी पार्टी के कामकाज का मूल्यांकन कर रही है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में पंजाब की जनता भी अपना फैसला सुनाएगी। कानून सबसे ऊपर है – हर्ष मल्होत्राहर्ष मल्होत्रा ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी हमेशा कानून और संविधान का सम्मान करती है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को कानून से ऊपर नहीं माना जा सकता। यदि कोई अपराध करता है तो उसे कानून के अनुसार सज़ा मिलनी चाहिए। हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि न्यायालय का यह फैसला कानून के शासन को मजबूत करने वाला है। उन्होंने कहा कि ऐसे फैसलों से लोगों का न्यायपालिका पर भरोसा और बढ़ता है।
राजा गार्डन आरटीओ में परिवहन मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह का औचक निरीक्षण, 1000 से अधिक लंबित मामलों पर जताई नाराज़गी, 10 दिनों में निपटारे के दिए सख्त निर्देश

राजधानी में परिवहन सेवाओं को तेज, पारदर्शी और नागरिकों के लिए आसान बनाने की दिशा में सरकार का बड़ा कदम नई दिल्ली | 30 जुलाई, 2026 दिल्ली सरकार राजधानी के लोगों को बेहतर, तेज़ और पारदर्शी सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में दिल्ली के परिवहन मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने गुरुवार को राजा गार्डन स्थित क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) का औचक निरीक्षण किया। इस निरीक्षण का उद्देश्य आरटीओ के कामकाज की वास्तविक स्थिति का पता लगाना, नागरिकों को मिलने वाली सुविधाओं की समीक्षा करना तथा लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे को सुनिश्चित करना था। निरीक्षण के दौरान डॉ. पंकज कुमार सिंह ने आरटीओ के विभिन्न सेवा काउंटरों का निरीक्षण किया और अधिकारियों से कार्यप्रणाली की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने कार्यालय में मौजूद नागरिकों से भी सीधे बातचीत की और परिवहन विभाग से मिलने वाली सेवाओं के बारे में उनका अनुभव जाना। कई लोगों ने सेवा में देरी, तकनीकी समस्याओं और बार-बार कार्यालय आने की परेशानी के बारे में जानकारी दी। मंत्री ने सभी शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों को तुरंत सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए। डॉ. पंकज कुमार सिंह ने 1000 से अधिक लंबित मामलों पर जताई चिंतानिरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने बताया कि राजा गार्डन आरटीओ में 1000 से अधिक आवेदन और मामले अभी भी लंबित हैं। यह जानकारी मिलने के बाद परिवहन मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने गहरी नाराज़गी और चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इतने अधिक मामलों का लंबित रहना नागरिकों के हित में नहीं है और इससे लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने सभी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रत्येक लंबित मामले का प्राथमिकता के आधार पर निपटारा किया जाए तथा 10 दिनों के भीतर सभी लंबित मामलों में उल्लेखनीय कमी लाकर विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि तय समय के भीतर सुधार नहीं हुआ तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। नागरिकों से बातचीत कर जाना जमीनी हालातनिरीक्षण के दौरान डॉ. पंकज कुमार सिंह ने आरटीओ में मौजूद लोगों से सीधे बातचीत की। उन्होंने नागरिकों से पूछा कि उन्हें ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन पंजीकरण, वाहन स्वामित्व हस्तांतरण और अन्य परिवहन सेवाओं में किस प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों ने मंत्री को बताया कि कई बार तकनीकी कारणों और प्रक्रिया में देरी की वजह से उन्हें कई बार कार्यालय आना पड़ता है। नागरिकों की बातें सुनने के बाद मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि लोगों की समस्याओं का जल्द समाधान किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी व्यक्ति को बिना वजह कार्यालय के बार-बार चक्कर न लगाने पड़ें। ऑनलाइन सेवाओं को और प्रभावी बनाने पर दिया जोरपरिवहन मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने कहा कि परिवहन विभाग की अधिकांश सेवाएं पहले से ही ऑनलाइन उपलब्ध हैं। इसलिए नागरिकों को केवल उन्हीं मामलों में कार्यालय बुलाया जाए जहां दस्तावेजों का सत्यापन या व्यक्ति की उपस्थिति वास्तव में आवश्यक हो। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ऑनलाइन सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जाए ताकि लोगों का समय और धन दोनों बच सके। तकनीकी समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर दूर करने के निर्देशनिरीक्षण के दौरान कई नागरिकों ने तकनीकी समस्याओं के कारण सेवाओं में हो रही देरी की शिकायत की। इस पर डॉ. पंकज कुमार सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी तकनीकी समस्याओं का जल्द से जल्द समाधान किया जाए। उन्होंने कहा कि ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन पंजीकरण, वाहन स्वामित्व हस्तांतरण और अन्य सभी सेवाओं का समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से निपटारा होना चाहिए। ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ नीति पर दोहराया सरकार का रुखपरिवहन मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सेवा में देरी, लापरवाही और अनियमितताओं के प्रति सरकार की ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ नीति है। उन्होंने कहा कि हर नागरिक समय पर, पारदर्शी और बिना किसी परेशानी के सरकारी सेवाएं पाने का हकदार है। किसी भी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा अनावश्यक देरी या लापरवाही को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में बेहतर जनसेवा का लक्ष्यडॉ. पंकज कुमार सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार नागरिकों को पारदर्शी, जवाबदेह और बेहतर प्रशासन देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सरकार का उद्देश्य है कि राजधानी के प्रत्येक नागरिक को बिना किसी परेशानी और बिना बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाए समय पर सभी परिवहन सेवाएं उपलब्ध हों।
यमुना को स्वच्छ बनाने के लिए दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला, दिल्ली जल बोर्ड ने ₹4,500 करोड़ की परियोजनाओं को दी मंजूरी

15 नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनेंगे, लाखों लोगों को मिलेगा लाभ नई दिल्ली, 29 जुलाई। दिल्ली सरकार ने यमुना नदी को साफ और प्रदूषणमुक्त बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। दिल्ली जल बोर्ड की 179वीं बैठक में लगभग ₹4,500 करोड़ की कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। इन परियोजनाओं में 15 नए विकेन्द्रीकृत सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (DSTPs) बनाना, सीवर नेटवर्क का विस्तार करना, पुराने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों का आधुनिकीकरण, स्लज प्रबंधन की नई सुविधाएं विकसित करना और कई नालों का इन-सीटू ट्रीटमेंट करना शामिल है। इन सभी योजनाओं का मुख्य उद्देश्य यह है कि बिना उपचारित गंदा पानी यमुना नदी में न पहुंचे और नदी को स्वच्छ बनाया जा सके। जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने बताया सरकार का लक्ष्यदिल्ली के जल मंत्री एवं दिल्ली जल बोर्ड के अध्यक्ष प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि सरकार यमुना की सफाई के लिए केवल वादे नहीं कर रही, बल्कि मजबूत बुनियादी ढांचा तैयार कर रही है। उन्होंने कहा कि जब तक शहर में निकलने वाली हर बूंद सीवेज का उपचार नहीं होगा, तब तक यमुना को पूरी तरह साफ नहीं किया जा सकता। इसलिए सरकार एक ऐसी व्यवस्था तैयार कर रही है, जिससे हर घर और हर इलाके का गंदा पानी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचे और उसका वैज्ञानिक तरीके से उपचार हो। अब दिल्ली में कुल 28 विकेन्द्रीकृत सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट होंगेप्रवेश साहिब सिंह ने बताया कि इससे पहले 13 DSTPs को मंजूरी दी जा चुकी थी। अब 15 नए प्लांटों की स्वीकृति मिलने के बाद दिल्ली में ऐसे प्लांटों की कुल संख्या 28 हो जाएगी। उन्होंने कहा कि यह दिल्ली के इतिहास में सीवेज प्रबंधन को मजबूत बनाने की सबसे बड़ी पहलों में से एक है। इन प्लांटों के बनने से राजधानी में गंदे पानी के उपचार की क्षमता में बड़ा सुधार होगा। सीवेज शोधन क्षमता पहली बार जरूरत से अधिक होगीप्रवेश साहिब सिंह ने बताया कि वर्तमान में दिल्ली में हर दिन लगभग 1,000 एमजीडी सीवेज निकलता है। जब मौजूदा सरकार ने काम संभाला था, तब सीवेज शोधन की क्षमता केवल 749 एमजीडी थी। सरकार ने पुराने प्लांटों के उन्नयन के बाद इसे बढ़ाकर 814 एमजीडी कर दिया है। अब सभी 28 DSTPs के तैयार होने के बाद कुल क्षमता 1,041 एमजीडी हो जाएगी। उन्होंने कहा कि यह पहली बार होगा जब दिल्ली की सीवेज शोधन क्षमता, शहर में निकलने वाले कुल सीवेज से भी अधिक होगी। इससे यमुना में बिना उपचारित पानी जाने की समस्या काफी हद तक समाप्त हो जाएगी। करीब 20 लाख लोगों को मिलेगा सीधा फायदाजल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने बताया कि 15 नए DSTPs लगभग ₹2,000 करोड़ की लागत से बनाए जाएंगे। इनकी कुल क्षमता 103.5 एमजीडी होगी और इससे लगभग 20 लाख लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं का सबसे अधिक लाभ उन इलाकों को मिलेगा, जहां आज भी सीवर नेटवर्क नहीं है या अधूरा है। इन क्षेत्रों का गंदा पानी अब सीधे नालों में जाने के बजाय सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचेगा। 244 कॉलोनियों और 57 गांवों तक पहुंचेगा नया सीवर नेटवर्कप्रवेश साहिब सिंह ने जानकारी दी कि लगभग 989 किलोमीटर लंबा नया सीवर नेटवर्क तैयार किया जाएगा। इस परियोजना पर करीब ₹1,600 करोड़ खर्च किए जाएंगे। इसके माध्यम से 244 कॉलोनियों और 57 गांवों के लाखों घरों को सीवर नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इससे लोगों को बेहतर सीवर सुविधा मिलेगी और यमुना में गंदे पानी का प्रवाह कम होगा। 21 महीने में पूरे होंगे सभी नए प्रोजेक्टजल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि सरकार ने सभी 15 नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों को 21 महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य तय किया है। उन्होंने बताया कि भूमि चिन्हांकन, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर), डिजाइन, निविदा प्रक्रिया और परियोजनाओं के आवंटन जैसे सभी महत्वपूर्ण काम बहुत कम समय में पूरे कर लिए गए हैं। अब निर्माण कार्य भी तेजी से शुरू किया जाएगा। पुराने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों का भी होगा आधुनिकीकरणप्रवेश साहिब सिंह ने बताया कि सरकार केवल नए प्लांट नहीं बना रही, बल्कि पुराने प्लांटों को भी आधुनिक बनाया जा रहा है। मौजूदा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों की क्षमता 66 एमजीडी से बढ़ाकर 86.8 एमजीडी की जाएगी। इसके अलावा लगभग ₹918 करोड़ की लागत से 35 एमजीडी क्षमता का नया सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी बनाया जाएगा। स्लज प्रबंधन और ड्रेनों की सफाई पर भी रहेगा विशेष ध्यानजल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने बताया कि कोरोनेशन पिलर, केशोपुर, रिठाला, नरेला और रोहिणी स्थित 10 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों में आधुनिक स्लज प्रबंधन सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इस परियोजना पर लगभग ₹274 करोड़ खर्च किए जाएंगे। वहीं दिल्ली गेट ड्रेन के इन-सीटू ट्रीटमेंट के लिए ₹65 करोड़ की परियोजना को भी मंजूरी दी गई है। इससे यमुना में पहुंचने वाले पानी की गुणवत्ता में सुधार होगा। प्लांटों के कामकाज पर रहेगी सख्त निगरानीप्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि अब सभी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों में परफॉर्मेंस आधारित मॉनिटरिंग प्रणाली लागू की जाएगी। इसके तहत प्लांट संचालकों को भुगतान तभी किया जाएगा, जब उपचारित पानी निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुसार होगा। इससे सभी संयंत्र बेहतर तरीके से काम करेंगे और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी। यमुना को स्वच्छ बनाना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिलअंत में जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि यमुना की सफाई केवल एक योजना नहीं, बल्कि दिल्ली के भविष्य से जुड़ा एक बड़ा अभियान है। उन्होंने कहा कि हर घर को सीवर नेटवर्क से जोड़ना, हर बूंद सीवेज का उपचार करना और आधुनिक तकनीक के माध्यम से मजबूत सीवेज व्यवस्था तैयार करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने विश्वास जताया कि इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद यमुना पहले की तुलना में अधिक स्वच्छ होगी और दिल्ली के लोगों को बेहतर पर्यावरण और आधुनिक सीवर सुविधाओं का लाभ मिलेगा।
दिल्ली विधानसभा पहुंचे प्रशिक्षु न्यायिक अधिकारी, विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने बताया संविधान में शक्तियों के संतुलन का महत्व

युवा जनसंपर्क कार्यक्रम के तहत दिल्ली विधानसभा का किया भ्रमण, न्यायपालिका और विधायिका के संबंधों पर हुई विस्तृत चर्चा नई दिल्ली, 28 जुलाई। दिल्ली विधानसभा में सोमवार को एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें दिल्ली न्यायिक अकादमी के 45 प्रशिक्षु न्यायिक अधिकारियों ने विधानसभा का भ्रमण किया। यह कार्यक्रम युवा जनसंपर्क कार्यक्रम के तहत आयोजित किया गया। इस दौरान प्रशिक्षु अधिकारियों को विधानसभा की कार्यप्रणाली, कानून बनाने की प्रक्रिया, संविधान की व्यवस्था और लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। इस अवसर पर दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता, उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट, लोकसभा के पूर्व महासचिव पी. डी. टी. आचार्य, दिल्ली सरकार के विधि, न्याय एवं विधायी कार्य विभाग के प्रधान सचिव रीतेश सिंह तथा दिल्ली विधानसभा के सचिव डॉ. युमनाम अरुण कुमार मौजूद रहे। विजेंद्र गुप्ता बोले- शक्तियों का विभाजन टकराव नहीं, संतुलन बनाए रखने का माध्यम हैदिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने प्रशिक्षु न्यायिक अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत का लोकतंत्र संविधान की मजबूत व्यवस्था पर आधारित है। उन्होंने कहा कि विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका तीनों संस्थाओं की अपनी-अपनी जिम्मेदारियां हैं और सभी को एक-दूसरे का सम्मान करते हुए काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संविधान में शक्तियों का विभाजन इसलिए नहीं किया गया कि संस्थाएं एक-दूसरे से अलग हो जाएं, बल्कि इसलिए किया गया ताकि शासन व्यवस्था में संतुलन बना रहे और हर संस्था अपने अधिकार क्षेत्र में रहकर जिम्मेदारी निभाए। विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि न्यायिक सेवा में आने वाले युवाओं के लिए संविधान के इस संतुलन को समझना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि कानून केवल नियमों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने, न्याय दिलाने और लोकतंत्र को मजबूत बनाने का सबसे प्रभावी माध्यम है। न्यायिक अधिकारियों से ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ काम करने की अपीलअपने संबोधन में विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि न्यायपालिका से जुड़े लोगों के फैसले सीधे आम नागरिकों के जीवन और सम्मान को प्रभावित करते हैं। इसलिए हर न्यायिक अधिकारी को ईमानदारी, निष्पक्षता, संवेदनशीलता और विवेक के साथ अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संविधान का सही ज्ञान तभी सार्थक है जब उसके साथ मानवीय संवेदनाएं और न्याय के प्रति समर्पण भी जुड़ा हो। मोहन सिंह बिष्ट ने बताया ऐसे कार्यक्रम क्यों हैं जरूरीदिल्ली विधानसभा के उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम न्यायिक अधिकारियों और विधि छात्रों के लिए बेहद उपयोगी हैं। इससे उन्हें यह समझने का अवसर मिलता है कि विधानसभा किस प्रकार कानून बनाती है और लोकतांत्रिक व्यवस्था कैसे संचालित होती है। उन्होंने कहा कि विधायिका और न्यायपालिका दोनों अलग-अलग संस्थाएं हैं, लेकिन दोनों का उद्देश्य संविधान और लोकतंत्र को मजबूत बनाना है। ऐसे संवाद दोनों संस्थाओं के बीच बेहतर समझ विकसित करने में मदद करते हैं। पी. डी. टी. आचार्य ने समझाया शक्तियों के विभाजन का संवैधानिक महत्वलोकसभा के पूर्व महासचिव पी. डी. टी. आचार्य ने “व्यवहार में विधायिका-न्यायपालिका संबंध शक्तियों का विभाजन” विषय पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान में शक्तियों का विभाजन पूरी तरह कठोर नहीं है, बल्कि यह संतुलित व्यवस्था पर आधारित है। संसद और विधानसभाएं कानून बनाती हैं, जबकि न्यायालय उन कानूनों की व्याख्या करते हैं और जरूरत पड़ने पर कानूनी कमियों को भी दूर करने का काम करते हैं। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 123 के तहत अध्यादेश जारी करने की व्यवस्था का भी उदाहरण दिया और बताया कि अध्यादेश को भी संसद के कानून के समान कानूनी मान्यता प्राप्त होती है। विधायी विशेषाधिकार और न्यायपालिका की भूमिका पर भी हुई चर्चापी. डी. टी. आचार्य ने अपने संबोधन में केशव सिंह प्रकरण सहित कई महत्वपूर्ण संवैधानिक मामलों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 105 और अनुच्छेद 194 के तहत संसद और विधानसभाओं को विशेष अधिकार प्राप्त हैं। उन्होंने कहा कि जहां विधानमंडल अपनी कार्यवाही और विशेषाधिकारों की रक्षा करता है, वहीं न्यायपालिका संविधान और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करने का महत्वपूर्ण दायित्व निभाती है। उन्होंने कहा कि न्यायालयों के कई ऐतिहासिक फैसलों ने देश में कानून के विकास और चुनावी पारदर्शिता को मजबूत किया है। रीतेश सिंह ने विधानसभा भ्रमण को बताया ऐतिहासिक पहलदिल्ली सरकार के विधि, न्याय एवं विधायी कार्य विभाग के प्रधान सचिव श्री रीतेश सिंह ने कहा कि पहली बार न्यायिक अधिकारियों को संस्थागत संवाद के लिए दिल्ली विधानसभा लाया गया है।उन्होंने बताया कि अब दिल्ली न्यायिक अकादमी के वार्षिक प्रशिक्षण कार्यक्रम में विधानसभा भ्रमण को औपचारिक रूप से शामिल कर लिया गया है। इससे भविष्य में सभी प्रशिक्षु न्यायिक अधिकारियों को विधानसभा की कार्यप्रणाली को करीब से समझने का अवसर मिलेगा। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता द्वारा विधानसभा की ऐतिहासिक विरासत को सुरक्षित रखने के लिए किए जा रहे प्रयासों की भी सराहना की। उन्होंने 89 ऐतिहासिक वाद-विवाद खंडों के संकलन और विधानसभा के इतिहास पर आधारित डॉक्यूमेंट्री तैयार कराने को महत्वपूर्ण पहल बताया। डॉक्यूमेंट्री देखी, विधानसभा सदन का किया भ्रमणकार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षु न्यायिक अधिकारियों, संकाय सदस्यों और विधि छात्रों ने विठ्ठलभाई पटेल और दिल्ली विधानसभा के इतिहास पर आधारित डॉक्यूमेंट्री देखी। इसके अलावा उन्होंने “एक शताब्दी यात्रा” कॉफी टेबल बुक की प्रस्तुति भी देखी। इसके बाद सभी प्रतिभागियों ने विधानसभा सदन का भ्रमण किया, जहां उन्हें कानून बनाने की पूरी प्रक्रिया, संविधान की परंपराओं, विधानसभा के इतिहास और लोकतांत्रिक व्यवस्था के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदमदिल्ली विधानसभा में आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक शैक्षणिक भ्रमण नहीं था, बल्कि न्यायपालिका और विधायिका के बीच बेहतर संवाद स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल भी रहा। कार्यक्रम के माध्यम से प्रशिक्षु न्यायिक अधिकारियों को संविधान की भावना, लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका और कानून निर्माण की प्रक्रिया को करीब से समझने का अवसर मिला। सभी वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि लोकतंत्र तभी मजबूत होगा, जब देश की सभी संवैधानिक संस्थाएं अपने-अपने अधिकारों का सम्मान करते हुए जनता के हित में मिलकर कार्य करें।