BJP ने शुरू किया ‘पूर्वांचल सम्मान मार्च’ केजरीवाल के घर के बाहर प्रदर्शन

आगामी लोकसभा चुनावों के मद्देनज़र भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने दिल्ली में ‘पूर्वांचल सम्मान मार्च’ की शुरुआत की है। यह पहल दिल्ली में बसेपूर्वांचल समुदाय के मतदाताओं तक पहुंच बनाने और उनके समर्थन को सुनिश्चित करने के लिए की गई है। पूर्वांचल समुदाय से जुड़ाव बढ़ाने की कोशिशदिल्ली में पूर्वांचल यानी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पूर्वी भारत से आने वाले लोगों की आबादी महत्वपूर्ण है। बीजेपी ने इस मार्च को उन मुद्दोंपर ध्यान केंद्रित करने के लिए डिज़ाइन किया है, जो इस समुदाय को प्रभावित करते हैं। इसमें रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार औरसांस्कृतिक पहचान बनाए रखने जैसे विषय शामिल हैं। पार्टी का दावा है कि वह इस समुदाय के लिए पहले से ही कई योजनाएं और नीतियां लेकर आई है। ‘पूर्वांचल सम्मान मार्च’ के जरिए बीजेपी उनकीजरूरतों और समस्याओं को और बेहतर तरीके से समझने की कोशिश कर रही है। केजरीवाल सरकार पर निशानाइस मार्च के दौरान बीजेपी ने दिल्ली की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार को पूर्वांचलियों की समस्याओं को अनदेखा करने के लिए आड़े हाथोंलिया। बीजेपी नेताओं का आरोप है कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केवल वोट बैंक के तौर पर इस समुदाय का इस्तेमाल किया है। केजरीवाल के घर के बाहर प्रदर्शन*मार्च के साथ ही बीजेपी कार्यकर्ताओं ने केजरीवाल के घर के बाहर विरोध-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने ‘पूर्वांचल का सम्मान बचाओ’ और’केजरीवाल इस्तीफा दो’ जैसे नारे लगाए। उनका आरोप था कि सत्ता में आने से पहले केजरीवाल ने पूर्वांचल समुदाय के लिए कई वादे किए थे, जिन्हेंवह अब तक पूरा नहीं कर पाए हैं। राजनीतिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा अभियान‘पूर्वांचल सम्मान मार्च’ को राजनीतिक विशेषज्ञ आगामी चुनावों के मद्देनज़र बीजेपी की अहम रणनीति मान रहे हैं। यह न केवल पूर्वांचल केमतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने का प्रयास है, बल्कि केजरीवाल सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश भी है। दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी ने इसे चुनावी चाल बताते हुए खारिज किया। पार्टी का कहना है कि दिल्ली सरकार ने हर समुदाय के विकास के लिएकाम किया है और बीजेपी केवल राजनीतिक लाभ के लिए ऐसे मुद्दे उठा रही है। चुनावी समीकरणों पर प्रभावबीजेपी का यह अभियान दिल्ली की राजनीति में हलचल मचा चुका है। यह देखना दिलचस्प होगा कि ‘पूर्वांचल सम्मान मार्च’ आगामी चुनावों मेंकितना प्रभाव डालता है और क्या बीजेपी इस समुदाय के बीच अपनी पकड़ मजबूत कर पाती है। अभी यह अभियान जारी है, और इसके परिणाम आने वाले समय में साफ होंगे। यह स्पष्ट है कि इस कदम ने दिल्ली की राजनीतिक स्थिति को और गर्मकर दिया है।
UGC NET की अनिवार्यता समाप्त: उच्च शिक्षा में महत्वपूर्ण बदलाव, स्टूडेंट्स को कितना होगा नुकसान?

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने हाल ही में उच्च शिक्षा संस्थानों में फैकल्टी भर्ती और प्रमोशन के लिए नए दिशानिर्देशों का मसौदा जारी किया है। इस बदलाव में एक महत्वपूर्ण कदम यह है कि अब असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए UGC NET की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया गया है। इस निर्णय के कई संभावित प्रभाव हो सकते हैं, जिनका विस्तृत रूप से विश्लेषण किया गया है। नई गाइडलाइंस का सारनई गाइडलाइंस के अनुसार, असिस्टेंट प्रोफेसर के पद के लिए NET क्वालिफिकेशन अब अनिवार्य नहीं होगा। इसके बजाय, उम्मीदवारों के पास संबंधित विषय में मास्टर डिग्री और रिसर्च अनुभव होना चाहिए। इसके साथ ही, संस्थानों को चयन प्रक्रिया में अधिक लचीलापन दिया गया है, जिसमें इंटरव्यू, डेमो लेक्चर या लिखित परीक्षा जैसे विकल्प शामिल हो सकते हैं। इस कदम के पीछे का तर्कNET की अनिवार्यता को समाप्त करने से अब उन उम्मीदवारों के लिए अवसर खुलेंगे, जो किसी कारणवश NET परीक्षा पास नहीं कर पाए थे, लेकिन उनके पास अन्य महत्वपूर्ण योग्यताएँ हैं। यह कदम योग्य उम्मीदवारों की संख्या में वृद्धि कर सकता है। इसके अलावा, नई गाइडलाइंस में रिसर्च अनुभव और प्रैक्टिकल नॉलेज को अधिक प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे यह साबित होता है कि परीक्षा परिणामों से कहीं अधिक महत्वपूर्ण इन गुणों को माना जाएगा। इससे उम्मीदवारों की शैक्षणिक क्षमता का आकलन और भी व्यापक रूप से किया जाएगा। इसके साथ ही, संस्थानों को चयन प्रक्रिया में लचीलापन दिया गया है, जिससे वे अपनी विशेष आवश्यकताओं के अनुसार प्रक्रिया को अनुकूलित कर सकते हैं, और यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि चयन पारदर्शी और संस्थान-विशेष हो। यह बदलाव विशेष रूप से ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों से आने वाले छात्रों के लिए लाभकारी हो सकता है, क्योंकि अब उन्हें उच्च शिक्षा में प्रवेश के अधिक अवसर मिल सकते हैं। संभावित नुकसानUGC NET एक मानकीकृत मूल्यांकन प्रणाली थी, जो सभी उम्मीदवारों की योग्यता का समान स्तर पर आकलन करने का कार्य करती थी। इस परीक्षा को हटाने से चयन प्रक्रिया में असमानता और विविधता बढ़ सकती है, जिससे उम्मीदवारों का मूल्यांकन सही तरीके से नहीं हो सकेगा। जब मानकीकरण नहीं रहेगा, तो शिक्षकों की गुणवत्ता में गिरावट हो सकती है, जिसका सीधा असर छात्रों की शिक्षा पर पड़ेगा। बिना एक समान मानदंड के, यह संभावना है कि कुछ संस्थानों में योग्य उम्मीदवारों की जगह कम गुणवत्ता वाले शिक्षक नियुक्त किए जा सकते हैं। इसके अलावा, संस्थानों को अधिक स्वतंत्रता देने से भ्रष्टाचार और पक्षपात का खतरा भी बढ़ सकता है, जिससे योग्य उम्मीदवारों को अवसर नहीं मिल पाएंगे और नियुक्तियाँ निजी संबंधों या प्रभाव के आधार पर हो सकती हैं। आलोचनाएँ और चिंताएँ1. शैक्षणिक समुदाय की प्रतिक्रियाकई शिक्षाविदों का मानना है कि NET जैसी मानकीकृत परीक्षा को हटाना उच्च शिक्षा के लिए दीर्घकालिक नुकसानदेह हो सकता है। 2. रिसर्च अनुभव की प्राथमिकतारिसर्च अनुभव को प्राथमिकता देना सकारात्मक कदम है, लेकिन यह मानदंड भी पक्षपात और भ्रष्टाचार का शिकार हो सकता है। 3. प्रतियोगी परीक्षाओं का महत्वNET और SET जैसी परीक्षाएँ शिक्षक की शैक्षणिक योग्यता और उनके विषय पर पकड़ को परखने का एक मानक तरीका थीं। 4. छात्रों की फीडबैक प्रणालीशिक्षकों की गुणवत्ता का आकलन छात्रों की प्रतिक्रिया पर आधारित होना चाहिए, और केवल शैक्षणिक योग्यता ही पर्याप्त नहीं है। भविष्य की दिशानई गाइडलाइंस के लागू होने के बाद यह महत्वपूर्ण होगा कि यह बदलाव उच्च शिक्षा पर कैसे प्रभाव डालता है, यह निरंतर देखा जाए। सबसे पहले, संस्थानों को भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सशक्त नीतियाँ अपनानी चाहिए, ताकि चयन प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की असमानता न हो। इसके साथ ही, नियमित प्रशिक्षण और कार्यशालाओं के माध्यम से शिक्षकों की गुणवत्ता बनाए रखी जा सकती है, जिससे वे बेहतर तरीके से छात्रों को शिक्षित कर सकें। इसके अलावा, UGC को इन गाइडलाइंस के प्रभावों की निगरानी करनी चाहिए और यदि आवश्यक हो, तो सुधारात्मक कदम उठाने के लिए तैयार रहना चाहिए। इस तरह से, बदलाव के प्रभावों को समय-समय पर देखा जा सकता है और यदि जरूरत हो तो आवश्यक सुधार किए जा सकते हैं। NET की अनिवार्यता समाप्त करने पर आलोचना के पांच प्रमुख कारण1. गुणवत्ता मानकों में गिरावटNET परीक्षा एक मानकीकृत मापदंड था, जो उम्मीदवारों की विषय-विशेषज्ञता और शैक्षणिक क्षमता का मूल्यांकन करता था। इसके हटने से शिक्षकों की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है। 2. चयन प्रक्रिया में असमानता और पक्षपातजब चयन प्रक्रिया का मानकीकरण नहीं होगा, तो संस्थान अपनी प्रक्रियाएँ तय करेंगे, जिससे चयन में भेदभाव और पक्षपात बढ़ सकता है। 3. भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद का खतरासंस्थानों को अधिक स्वतंत्रता देने से भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद बढ़ सकते हैं, जिससे योग्य उम्मीदवारों को अवसर नहीं मिल पाते। 4. ग्रामीण और क्षेत्रीय प्रतिभाओं पर प्रतिकूल प्रभावNET एक केंद्रीकृत परीक्षा था, जिससे ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के छात्रों को समान अवसर मिलते थे। इसके हटने से यह असमानता बढ़ सकती है। 5. शिक्षा की गुणवत्ता पर सीधा प्रभावयोग्य शिक्षकों की नियुक्ति में ढिलाई से छात्रों की शिक्षा की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है। कम योग्यता वाले शिक्षक छात्रों को प्रभावी रूप से पढ़ाने में असमर्थ हो सकते हैं। NET की अनिवार्यता का हटना शिक्षा में लचीलापन लाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम हो सकता है, लेकिन इसके साथ आवश्यक निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित करना भी बेहद जरूरी है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए मानकीकृत और पारदर्शी चयन प्रक्रियाएँ आवश्यक हैं। NET की अनिवार्यता को समाप्त करने का निर्णय उच्च शिक्षा प्रणाली में लचीलापन लाने का प्रयास हो सकता है, लेकिन इसके साथ चुनौतियाँ भी जुड़ी हुई हैं। यह कदम शिक्षा प्रणाली में सुधार लाने की दिशा में एक साहसिक कदम है, लेकिन इसे लागू करने के दौरान पारदर्शिता और गुणवत्ता बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण होगा। शैक्षणिक समुदाय और सरकार को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि यह बदलाव शिक्षा को अधिक प्रभावी और समावेशी बना सके।
‘इंडिया’ गठबंधन पर उमर अब्दुल्ला की नाराजगी: बैठकें नहीं, नेतृत्व और एजेंडा पर अस्पष्टता

नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने हाल ही में ‘इंडिया’ गठबंधन की बैठकों की कमी को लेकर असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा किगठबंधन की कोई बैठक नहीं हो रही है, जिससे न तो नेतृत्व पर स्पष्टता है और न ही एजेंडा को लेकर। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या यहगठबंधन लंबे समय तक एकजुट रह पाएगा। *भाजपा को रोकने के लिए बना था गठबंधन*अब्दुल्ला ने कहा कि ‘इंडिया’ गठबंधन का उद्देश्य भारतीय जनता पार्टी की लोकसभा सीटों को कम करना है, न कि सहयोगी दलों की सीटें छीनना।उन्होंने यह भी दोहराया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस कश्मीर की तीनों सीटों पर दावा करेगी, जिन्हें उसने पिछले चुनावों में जीता था। सीट बंटवारे पर चिंताइससे पहले, नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने भी सीट बंटवारे को लेकर चिंता जाहिर की थी। उन्होंने कहा था कि अगर जल्द हीसहमति नहीं बनी, तो गठबंधन टूट सकता है और कुछ दल अलग गठजोड़ बना सकते हैं। कांग्रेस को नेतृत्व मजबूत करने की सलाहउमर अब्दुल्ला ने कांग्रेस से आग्रह किया कि वह गठबंधन में अपनी भूमिका को स्पष्ट करे और नेतृत्व को मजबूत बनाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को इसअवसर को हल्के में नहीं लेना चाहिए। *भविष्य की रणनीति पर अनिश्चितता*गठबंधन की पिछली बैठकों में यह तय किया गया था कि 2024 के लोकसभा चुनाव किस एजेंडा पर लड़े जाएंगे। लेकिन उमर अब्दुल्ला ने इस दिशामें प्रगति की कमी पर चिंता जताई है। उनका मानना है कि नियमित बैठकें और स्पष्ट नेतृत्व ही गठबंधन को सफल बना सकते हैं। यह बयान ‘इंडिया’ गठबंधन के भीतर बढ़ते संवादहीनता और रणनीतिक अस्पष्टता को रेखांकित करता है।
तिरुपति मंदिर में भगदड़: 6 श्रद्धालुओं की मौत, 40 घायल

वैकुंठ एकादशी के विशेष अवसर पर तिरुपति बालाजी मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी, लेकिन भीड़ प्रबंधन में आई चूक के कारण स्थितिबिगड़ गई। इस हादसे में छह लोगों की मृत्यु हो गई और करीब 40 लोग घायल हो गए। घटना का स्थान और कारणयह हादसा तिरुपति मंदिर के विष्णु निवासम क्षेत्र में हुआ, जहां वैकुंठ एकादशी के दिन विशेष वैकुंठ द्वार से दर्शन के लिए टोकन वितरण की व्यवस्थाकी गई थी। टोकन वितरण सुबह 5 बजे शुरू होना था, लेकिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु एक दिन पहले शाम 6 बजे से ही कतार में लग गए। भीड़ केअत्यधिक बढ़ जाने और प्रबंधन में असफलता के कारण भगदड़ मच गई। मृतकों और घायलों की जानकारी?इस दुर्घटना में छह लोगों की जान चली गई, जिनमें पांच महिलाएं शामिल थीं। मृतकों में 50 वर्षीय मल्लिगा, जो सेलम की रहने वाली थीं, भीशामिल थीं। इसके अलावा, लगभग 40 लोग घायल हो गए, जिन्हें तत्काल पास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया। मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया?आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने इस हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया और अधिकारियों को त्वरित राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चितकरने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने घायलों के इलाज की व्यवस्था की निगरानी भी की। मंदिर में दर्शन और पूजा के समय?तिरुपति बालाजी मंदिर में दैनिक दर्शन और विशेष पूजाओं का आयोजन एक निश्चित समय-सारणी के अनुसार होता है. दैनिक दर्शन :सुबह 3:00 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक और दोपहर 2:30 बजे से रात 9:30 बजे तक। शुक्रवार और शनिवार को मंदिर 24 घंटे खुला रहता है।विशेष पूजा का समय? सोमवार: विशेष पूजा सुबह 5:30 बजे से 7:00 बजे तक।मंगलवार: अष्टदल पाद पद्माराधना सुबह 6:00 बजे से 7:00 बजे तक।बुधवार : सहस्रकलशाभिषेकम सुबह 6:00 बजे से 8:00 बजे तक।गुरुवार: तिरुप्पवाड़ा सेवा सुबह 6:00 बजे से 8:00 बजे तक।शुक्रवार: अभिषेकम सुबह 4:30 बजे से 6:00 बजे तक। सुरक्षा पर उठे सवालइस घटना ने भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा उपायों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वैकुंठ एकादशी जैसे महत्वपूर्ण अवसरों पर मंदिर प्रशासन कोश्रद्धालुओं की भारी संख्या को ध्यान में रखते हुए उचित व्यवस्था करनी चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की दुर्घटनाओं से बचा जा सके। श्रद्धालुओं से अपील की जाती है कि वे प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें और भीड़भाड़ से बचने के लिए अपने दर्शन का समय उचितरूप से चुनें।
दिल्ली विधानसभा चुनाव: ‘शीश महल’ विवाद से गरमाया राजनीतिक माहौल

दिल्ली में विधानसभा चुनाव करीब हैं, और राजनीतिक दल अपने-अपने एजेंडे को लेकर मैदान में उतर चुके हैं। इसी बीच, मुख्यमंत्री आवास को लेकरउठे ‘शीश महल’ विवाद ने आप (आम आदमी पार्टी) और बीजेपी (भारतीय जनता पार्टी) के बीच टकराव को और तेज कर दिया है।सौरभ भारद्वाज और संजय सिंह को रोका गयाहाल ही में, आप नेता सौरभ भारद्वाज और संजय सिंह ने मुख्यमंत्री आवास का दौरा करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इसकेबाद, दोनों नेता प्रधानमंत्री आवास की ओर बढ़े, जहां पुलिस ने उन्हें जाने से मना कर दिया और वापस भेज दिया।AAP नेताओं की प्रतिक्रियासंजय सिंह ने इस घटना को लेकर कहा, “हम जनता के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन हमें रोका जा रहा है। यह लोकतंत्र के लिएखतरा है।”सौरभ भारद्वाज ने भी अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, “जनता के पैसे की बर्बादी के खिलाफ हमारी लड़ाई जारी रहेगी। हमारी आवाज दबाने कीकोशिश हो रही है, लेकिन हम पीछे नहीं हटेंगे।”मुख्यमंत्री आतिशी का बयानमुख्यमंत्री आतिशी ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा, “हमारी सरकार पारदर्शिता में विश्वास रखती है। विपक्ष जनता को गुमराह करने के लिए झूठेआरोप लगा रहा है।”बीजेपी का विरोध और आरोप ?दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने मुख्यमंत्री आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और कई आरोप लगाए।सचदेवा के आरोप1. *दो बंगले का दावा*: सचदेवा ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री आतिशी के पास दो सरकारी बंगले हैं और उन्हें ‘बंगले वाली देवी’ कहा।2. *शीश महल पर सवाल*: उन्होंने मुख्यमंत्री आवास के नवीनीकरण पर हुए खर्च को लेकर सवाल उठाए। सीएजी (CAG) रिपोर्ट के अनुसार, नवीनीकरण की प्रारंभिक लागत 8.62 करोड़ रुपये थी, जो बढ़कर 33.66 करोड़ रुपये हो गई। इसमें महंगे पर्दे, मार्बल और जिम उपकरण शामिलबताए गए।CAG की रिपोर्ट में क्या हुआ खुलासा?दिल्ली के मुख्यमंत्री आवास के नवीनीकरण पर कुल खर्च को लेकर विवाद सामने आया है। सीएजी (CAG) की रिपोर्ट के अनुसार, 2020 में इसकीप्रारंभिक लागत ₹8.62 करोड़ अनुमानित थी, जो 2022 तक बढ़कर ₹33.66 करोड़ हो गई। इस खर्च में महंगे पर्दे, मार्बल, जिम उपकरण और अन्यसजावटी वस्तुओं का खर्च शामिल है। विपक्ष ने इसे सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला बताया है और इसे चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहाहै।चुनावी रणनीतियों पर असरविशेषज्ञों का मानना है कि ‘शीश महल’ विवाद दोनों पार्टियों की चुनावी रणनीतियों को प्रभावित कर सकता है। बीजेपी इसे भ्रष्टाचार का मुद्दा बनाकरचुनावी बढ़त हासिल करना चाहती है, जबकि आप इसे छोटा मुद्दा बताते हुए अपने विकास कार्यों को प्राथमिकता देने पर जोर दे रही है।
दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025: भाजपा और आप के बीच पोस्टर वॉर, त्रिकोणीय मुकाबले की तैयारी

दिल्ली में 2025 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और आम आदमी पार्टी (आप) के बीच पोस्टरों के जरिएआरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। भाजपा ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए विभिन्न पोस्टर जारी किए हैं, जिनमें उन्हेंअलग-अलग किरदारों में दिखाया गया है। भाजपा के पोस्टर और आरोप 1. *’राजा बाबू’ की तुलना*भाजपा ने एक पोस्टर में केजरीवाल को अभिनेता गोविंदा के फिल्मी किरदार ‘राजा बाबू’ के रूप में दिखाया, जो उनके नेतृत्व पर व्यंग्य करता है। 2. *’टॉयलेट चोर’ का आरोप*एक अन्य पोस्टर में शौचालय निर्माण से जुड़ी कथित गड़बड़ियों को लेकर उन्हें ‘टॉयलेट चोर’ कहा गया है। 3. *’चुनावी हिंदू’ का तंज*भाजपा ने केजरीवाल पर चुनाव के दौरान धार्मिक भावनाओं का उपयोग करने का आरोप लगाया और उन्हें ‘चुनावी हिंदू’ बताया। 4. ‘गजनी’ की उपमाएक और पोस्टर में उनकी तुलना फिल्म ‘गजनी’ के नायक से की गई, जिसमें उन्हें वादे करके भूल जाने वाला नेता बताया गया है। आप ने क्या दी प्रतिक्रिया ?आम आदमी पार्टी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि भाजपा के पास दिल्ली के विकास के लिए कोई ठोस एजेंडा नहीं है, इसलिए वहव्यक्तिगत हमलों का सहारा ले रही है। आप प्रवक्ताओं ने भाजपा से चुनावी चर्चा को मुद्दों पर केंद्रित करने की अपील की। चुनावी माहौल में बढ़ती गर्मीइन आरोपों और प्रतिक्रियाओं के बीच, दोनों पार्टियों के समर्थक इसे चुनावी रणनीति मान रहे हैं। मतदाताओं की प्रतिक्रिया से चुनावी माहौल और गर्महो गया है। चुनाव कार्यक्रमचुनाव आयोग ने दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 की तारीखों का ऐलान कर दिया है। मतदान 5 फरवरी को एक ही चरण में होगा, जबकि मतगणना8 फरवरी को की जाएगी। दिल्ली में 1.55 करोड़ से अधिक मतदाता हैं, जिनमें 83.49 लाख पुरुष, 71.73 लाख महिलाएं और 1,261 थर्ड जेंडरव्यक्ति शामिल हैं। प्रमुख उम्मीदवार और सीटेंदिल्ली की 70 विधानसभा सीटों में से 58 सामान्य और 12 अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। 1. आम आदमी पार्टी (AAP)आप ने सभी 70 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। अरविंद केजरीवाल नई दिल्ली सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। 2.भारतीय जनता पार्टी (BJP)भाजपा ने अब तक 29 उम्मीदवार घोषित किए हैं। प्रवेश वर्मा नई दिल्ली सीट से केजरीवाल को चुनौती देंगे। 3.कांग्रेस (INC)कांग्रेस ने 48 उम्मीदवार घोषित किए हैं। संदीप दीक्षित चांदनी चौक सीट से मैदान में हैं। मतदान केंद्रों की संख्या:13,000 से अधिक मतदान केंद्र बनाए गए हैं।विशेष सुविधा:85 वर्ष से अधिक आयु के लोगों के लिए घर से मतदान की व्यवस्था होगी।ईवीएम सुरक्षा: चुनाव आयोग ने ईवीएम की सुरक्षा के लिए कड़े प्रबंध किए हैं। दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में आम आदमी पार्टी, भाजपा और कांग्रेस के बीच त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल सकता है। दिल्ली केमतदाता अपने अधिकार का प्रयोग कर राज्य की राजनीतिक दिशा तय करेंगे।
असम खदान हादसा : नेवी ने एक मजदूर का किया शव बरामद, अभी भी 300 फीट गहराई में फंसे मजदूर

6 जनवरी 2025 को असम के दीमा हसाओ जिले के उमरंगसो क्षेत्र में 300 फीट गहरी कोयला खदान में अचानक पानी भर जाने से नौ मजदूर फंसगए। यह घटना उस समय हुई जब मजदूर खदान में काम कर रहे थे। 8 जनवरी को भारतीय नौसेना ने बचाव अभियान के दौरान खदान से एक मजदूरका शव बरामद किया। घटना के लगभग 48 घंटे बाद शव निकाला गया। वहीं, बाकी आठ मजदूर अब भी खदान में फंसे हुए हैं। उनकी तलाश औरबचाव कार्य तेजी से जारी है। मजदूरों की हुई पहचानफंसे हुए मजदूरों में नेपाल और भारत के विभिन्न राज्यों के निवासी शामिल हैं। नेपाल से गंगा बहादुर श्रेठ, असम के हुसैन अली, जाकिर हुसैन, मुस्तफाशेख, लिजान मगर और सरत गोयारी, कोकराझार जिले के खुसी मोहन राय और सर्पा बर्मन, तथा पश्चिम बंगाल के संजीत सरकार का नाम मजदूरों कीसूची में शामिल है। बचाव अभियान और चुनौतियांघटना के बाद प्रशासन ने तत्काल बचाव कार्य शुरू किया। भारतीय सेना, नौसेना, NDRF और SDRF की टीमें राहत कार्य में जुटी हैं। खदान सेपानी निकालने के लिए ओएनजीसी के विशेष पंपों का उपयोग हो रहा है। पानी का स्तर 100 फीट तक बढ़ जाने के कारण अभियान में कठिनाइयांआ रही हैं। विशाखापत्तनम से विशेषज्ञ गोताखोरों को बुलाया गया है, जो जल्द ही बचाव कार्य में शामिल होंगे। अवैध खनन पर हुई कार्रवाईप्रारंभिक जांच में यह खुलासा हुआ कि खदान अवैध रूप से संचालित हो रही थी। प्रशासन ने खदान के मालिक पुनीश नुनिसा को गिरफ्तार कर लियाहै। उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता और खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है। मुख्यमंत्री ने किया बोला ?असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस घटना पर गहरी संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए जानकारी साझा करते हुए कहाकि बचाव कार्य प्राथमिकता के साथ चल रहा है। साथ ही, उन्होंने घटना की विस्तृत जांच और जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। बचाव कार्य में चुनौतियांखदान की गहराई और पानी का लगातार बढ़ता स्तर बचाव अभियान को मुश्किल बना रहा है। खदान की जटिल संरचना के कारण टीमें अत्यंतसावधानी से काम कर रही हैं। समय बीतने के साथ मजदूरों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। अवैध खनन की पुरानी घटनाएंइस हादसे ने 2018 में मेघालय के ईस्ट जयंतिया हिल्स में हुए एक खदान हादसे की याद दिला दी, जिसमें 370 फीट गहरी खदान में पानी भरने से15 मजदूरों की मौत हो गई थी। अवैध खनन और सुरक्षा उपायों की अनदेखी ऐसी घटनाओं का मुख्य कारण बनी रहती है।
बेंगलुरु AI इंजीनियर की आत्महत्या: सुप्रीम कोर्ट ने बच्चे की कस्टडी दादी को देने से किया इनकार”

बेंगलुरु के एआई इंजीनियर अतुल सुभाष की आत्महत्या के बाद उनके चार वर्षीय बेटे की कस्टडी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। अतुल कीमां, अंजू देवी, ने पोते की कस्टडी की मांग की थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज करते हुए कहा कि बच्चा अपनी दादी के लिए”अजनबी” है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कस्टडी से जुड़े मुद्दे निचली अदालत में उठाए जाने चाहिए। सुनवाई के दौरान, अतुल की पत्नी निकिता सिंघानिया के वकील ने जानकारी दी कि बच्चा हरियाणा के फरीदाबाद में एक बोर्डिंग स्कूल में है। बच्चेको बेंगलुरु लाने की योजना है, ताकि वह अपनी मां के साथ रह सके। सुप्रीम कोर्ट ने बच्चे को 20 जनवरी 2025 को अगली सुनवाई में पेश करने कानिर्देश दिया है। अतुल की आत्महत्या का कारण34 वर्षीय अतुल सुभाष एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे, जो बेंगलुरु में काम करते थे। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के निवासी अतुल ने दिसंबर 2024 मेंआत्महत्या कर ली। अपने 24 पन्नों के सुसाइड नोट में उन्होंने पत्नी निकिता सिंघानिया, सास निशा सिंघानिया, और एक फैमिली कोर्ट की जज परप्रताड़ना और दहेज कानून के दुरुपयोग का आरोप लगाया। अतुल ने अपने नोट में लिखा कि वह “सिस्टम से तंग” आ चुके थे और दहेज कानून के गलत इस्तेमाल के कारण मानसिक तनाव में थे। कानूनी विवाद और आरोपअतुल की आत्महत्या के बाद निकिता सिंघानिया और उनके परिवार के सदस्यों पर आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज हुआ। निकिता औरउनके परिवार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वे निर्दोष हैं। इस विवाद के चलते सोशल मीडिया पर निकिता को आलोचनाओं का सामनाकरना पड़ा, जिससे उनकी कंपनी एक्सेंचर ने उनका प्रोफाइल निलंबित कर दिया। समाज पर प्रभाव और बहसयह घटना दहेज कानून के कथित दुरुपयोग और न्याय प्रणाली की विफलता पर सवाल खड़े करती है। अतुल के परिजनों और ग्रामीणों का मानना हैकि इस घटना ने समाज को दहेज कानून के गलत इस्तेमाल पर विचार करने के लिए मजबूर किया है। मामले की स्थितिअतुल के सुसाइड नोट और वीडियो को मामले की जांच के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जा रहा है। मामले में कानूनी कार्यवाही जारी है, और बच्चे कीकस्टडी पर अंतिम फैसला आना बाकी है।
दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025: मतदान 5 फरवरी को, मतगणना 8 फरवरी को, आदर्श आचार संहिता लागू

चुनाव आयोग ने दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 की तारीखों का ऐलान कर दिया है। मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने बताया कि मतदान 5 फरवरी 2025 को होगा और मतगणना 8 फरवरी 2025 को की जाएगी। इस घोषणा के साथ ही राजधानी में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। *चुनाव कार्यक्रम की घोषणा* दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के लिए चुनाव कार्यक्रम की घोषणा भी कर दी गई है। चुनाव अधिसूचना 10 जनवरी 2025 को जारी होगी, और उम्मीदवार 17 जनवरी 2025 तक अपने नामांकन दाखिल कर सकेंगे। नामांकन पत्रों की जांच 18 जनवरी 2025 को की जाएगी, जबकि नाम वापस लेने की आखिरी तारीख 20 जनवरी 2025 तय की गई है। मतदान 5 फरवरी 2025 को होगा, और मतगणना 8 फरवरी 2025 को की जाएगी, जिसके बाद चुनाव नतीजे घोषित किए जाएंगे। मतदाताओं की संख्या और भागीदारी दिल्ली में कुल मतदाताओं की संख्या 1.55 करोड़ है, जिसमें 83,49,645 पुरुष और 71,73,952 महिला मतदाता शामिल हैं। इसके अलावा, थर्ड जेंडर मतदाताओं की संख्या 1,261 है। इन आंकड़ों के आधार पर आगामी चुनाव में विभिन्न आयु वर्ग और समुदायों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिलेगी। चुनाव आयोग ने इस बार मतदाता सूची में नए नाम जोड़ने और प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए विशेष प्रयास किए हैं, जिससे मतदान प्रतिशत बढ़ने की संभावना है। क्या है चुनाव आयोग की तैयारियां? चुनाव आयोग ने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) की सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाए गए हैं। जनता का भरोसा बढ़ाने और मतदान प्रक्रिया को सुचारु बनाने के लिए आयोग ने कई नई पहल की हैं, जिसमें सभी मतदान केंद्रों पर ईवीएम और वीवीपैट का उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। क्या हैं राजनीतिक दलों की तैयारियां? दिल्ली विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद सभी प्रमुख राजनीतिक दल अपनी तैयारियों में जुट गए हैं। आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि उनकी पार्टी पूरी तरह तैयार है और उन्हें विश्वास है कि जनता एक बार फिर उन्हें समर्थन देगी। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता मनोज तिवारी ने कहा कि उनकी पार्टी दिल्ली में बदलाव लाने के लिए विकास के मुद्दों पर चुनाव लड़ेगी। वहीं, कांग्रेस ने पिछले चुनावों में कमजोर प्रदर्शन के बावजूद इस बार मजबूती के साथ मैदान में उतरने का दावा किया है। *दिल्ली के पिछले चुनावों के परिणाम* 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 62 सीटें जीती थीं, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) को केवल 8 सीटें मिलीं। कांग्रेस इस चुनाव में एक भी सीट नहीं जीत सकी। इस बार चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबला होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे चुनाव परिणाम और भी दिलचस्प हो सकते हैं। क्या है 2025 के चुनावी मुद्दे? दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दे अहम रहेंगे। दिल्ली के मतदाताओं को यह मौका मिलेगा कि वे अपनी राजधानी के विकास के लिए सही सरकार का चुनाव करें। *निर्णायक मतदान* चुनाव आयोग ने भरोसा दिया है कि मतदान निष्पक्ष और स्वतंत्र माहौल में होगा। दिल्ली की जनता के सक्रिय रूप से मतदान में भाग लेने से लोकतंत्र और मजबूत होगा।
प्रशांत किशोर को मिली जमानत, किस महिला अधिकारी के कोर्ट में हुए पेश, जिन्होंने फटाफट दे दी बेल

जन सुराज अभियान के प्रमुख प्रशांत किशोर को सोमवार को पटना की एसडीजेएम कोर्ट से जमानत मिल गई। गांधी मैदान कांड संख्या 5/25 मेंउनकी गिरफ्तारी के बाद उन्हें एसडीजेएम आरती उपाध्याय की अदालत में पेश किया गया, जहां उन्हें तुरंत जमानत दे दी गई। प्रशांत किशोर औरउनके समर्थकों पर पटना हाई कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करने का आरोप है, जिसमें गांधी मैदान में धरना-प्रदर्शन पर प्रतिबंध लगाया गया था।पटना डीएम चंद्रशेखर सिंह ने बताया कि प्रशांत किशोर को इस बारे में पहले ही सूचित किया गया था, लेकिन निर्देशों को नजरअंदाज कर प्रदर्शनजारी रखा गया। रविवार रात को पटना पुलिस ने गांधी मैदान को खाली कराना शुरू किया और सोमवार सुबह प्रशांत किशोर को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद उन्हेंएम्स पटना ले जाया गया और फिर नौबतपुर भेजा गया। गिरफ्तारी के दौरान उनके समर्थक लगातार उनके साथ मौजूद रहे। डीएम चंद्रशेखर सिंह नेबताया कि इस कार्रवाई के तहत 43 लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें से 30 की पहचान हो चुकी है। प्रशासन ने 15 गाड़ियों को जब्त किया, जिनमें से तीन को गांधी मैदान से सीज किया गया। डीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि हाई कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्तकदम उठाए जाएंगे और जनता को केवल निर्धारित धरना स्थलों पर ही प्रदर्शन करने की अपील की। प्रशांत किशोnर की गिरफ्तारी और इसके बाद की प्रशासनिक कार्रवाई ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। हालांकि, कोर्ट से जमानत मिलनेके बाद प्रशांत किशोर की अगली रणनीति पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। पटना डीएम ने जनता से अपील की है कि यह मामला अब उच्चतमन्यायालय में विचाराधीन है और प्रदर्शनकारियों को अपनी बात वहीं रखनी चाहिए।