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गुजरात में 40 छात्रों ने ब्लेड से काटा हाथ, वीडियो गेम से मिली खतरनाक प्रेरणा

गुजरात के अमरेली जिले में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई, जहां एक प्राथमिक विद्यालय के 40 छात्रों ने अपने हाथों पर ब्लेड से खुद कोघायल कर लिया। बताया जा रहा है कि एक छात्र ने वीडियो गेम से प्रेरित होकर अपने सहपाठियों को इस खतरनाक कार्य के लिए उकसाया और उन्हें10 रुपये का लालच दिया। खेल-खेल में बच्चों ने किया खुद को घायलघटना हत्यामोटा मुंजियासर के बड़े स्कूल की है, जहां करीब 300 छात्र पढ़ते हैं। सातवीं कक्षा में पढ़ने वाले एक छात्र ने अपने सहपाठियों से कहा कियदि वे ब्लेड से हाथ काटेंगे तो उन्हें 10 रुपये मिलेंगे, अन्यथा उन्हें 5 रुपये देने होंगे। इस लालच में आकर 40 छात्रों ने पेंसिल शार्पनर के ब्लेड सेअपने हाथों पर कट लगा लिए। स्कूल प्रशासन की लापरवाहीआरोप है कि शिक्षकों ने इस घटना को आठ दिनों तक छिपाए रखा, जिससे अभिभावकों में रोष फैल गया। जब कुछ अभिभावकों ने अपने बच्चों केहाथों पर कट के निशान देखे तो उन्होंने इसकी शिकायत स्कूल प्रशासन से की। इसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा और जांच शुरू की गई। अभिभावकों ने पुलिस में की शिकायतघटना की गंभीरता को देखते हुए ग्राम पंचायत के जरिए पुलिस को सूचना दी गई। बागासरा पुलिस स्टेशन के पीएसआई को देर शाम अभिभावकोंऔर सरपंच की ओर से शिकायत सौंपी गई। इसमें स्कूल प्रशासन की लापरवाही को उजागर करते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की गई। स्कूल प्रशासन का पक्षमोटा मुंजियासर प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य मकवाना ने बताया कि बच्चों ने एक खेल के दौरान अपने हाथों पर ब्लेड से कट लगा लिए। जबयह बात स्कूल प्रशासन को पता चली, तो तुरंत अभिभावकों की बैठक बुलाई गई और उन्हें इस मामले की पूरी जानकारी दी गई। कैसे हुआ मामले का खुलासा?जब अभिभावकों ने अपने बच्चों के हाथों पर कट के निशान देखे तो उन्होंने स्कूल प्रशासन से सवाल किए। मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्रामपंचायत और पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि यह घटना ऑनलाइन गेमिंग की लत के कारण नहीं, बल्कि’ट्रुथ एंड डेयर’ नामक खेल के दौरान हुई। पुलिस की जांच जारी धारी के सहायक पुलिस अधीक्षक जयवीर गढ़वी ने स्कूल का दौरा किया और सीसीटीवी फुटेज की जांच की। साथ ही बच्चों से पूछताछ कर इसघटना के पीछे के कारणों को समझने की कोशिश की। फिलहाल पुलिस इस मामले की जांच कर रही है और स्कूल प्रशासन से भी पूछताछ जारी है। बच्चों की सुरक्षा को लेकर उठे सवालइस घटना ने एक बार फिर बच्चों पर वीडियो गेम और खतरनाक चैलेंज गेम्स के प्रभाव को उजागर कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों कोडिजिटल कंटेंट के प्रति जागरूक किया जाना जरूरी है, ताकि वे इस तरह के खतरनाक कार्यों से बच सकें। अभिभावकों को भी चाहिए कि वे अपनेबच्चों की गतिविधियों पर नजर रखें और किसी भी असामान्य व्यवहार को नजरअंदाज न करें।

तमिलनाडु विधानसभा ने वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ प्रस्ताव पारित, भाजपा और एआईएडीएमके ने किया विरोध

तमिलनाडु विधानसभा ने गुरुवार को केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित वक्फ संशोधन विधेयक 2024 के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया। इस प्रस्ताव कोमुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने पेश किया, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि यह विधेयक मुस्लिम समुदाय की भावनाओं को आहत करने वाला है। वहीं, विधानसभा में भाजपा विधायक वनथी श्रीनिवासन ने इस प्रस्ताव का विरोध किया, जबकि विपक्षी दल एआईएडीएमके ने मुख्यमंत्री स्टालिन पर वोटबैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने विधानसभा में कहा कि केंद्र सरकार वक्फ अधिनियम में संशोधन करने की कोशिश कर रही है, जिससे वक्फ बोर्ड कीशक्तियां प्रभावित होंगी। उन्होंने दावा किया कि यह विधेयक अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारों को कमजोर करेगा और केंद्र सरकार को इसकी कोईपरवाह नहीं है। मुख्यमंत्री द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव में कहा गया कि भारत में सभी धर्मों के लोग सद्भाव और समानता के साथ रहते हैं। भारतीय संविधान ने हरनागरिक को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार दिया है और सरकारों का कर्तव्य है कि वे इन धार्मिक अधिकारों की रक्षा करें। विधानसभा ने केंद्रसरकार से वक्फ संशोधन विधेयक 2024 को वापस लेने की मांग की, क्योंकि इससे मुस्लिम समुदाय पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इस प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए एआईएडीएमके के राष्ट्रीय प्रवक्ता कोवई सत्यन ने डीएमके सरकार की मंशा पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा किडीएमके धर्म और भाषा के आधार पर एक खास नैरेटिव बनाने की जल्दी में है। उन्होंने यह भी पूछा कि इस विधेयक पर पहले संयुक्त संसदीय समितिबनाई गई थी, लेकिन डीएमके और अन्य दल न्यायपालिका में इसे चुनौती क्यों नहीं दे रहे हैं। उन्होंने विधानसभा में प्रस्ताव पारित करने की जल्दबाजीपर भी सवाल उठाया और इसे वोट बैंक की राजनीति का हिस्सा बताते हुए कहा कि इससे समाज में भ्रम और असंतोष पैदा होगा। केंद्र सरकार ने वक्फ संशोधन विधेयक 2024 को वक्फ अधिनियम 1995 में सुधार के उद्देश्य से पेश किया है। सरकार का दावा है कि इस संशोधनसे वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण एक केंद्रीकृत पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी। संपत्ति को वक्फ घोषित करने से पहलेउचित नोटिस और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जाएगा। इसके अलावा, महिलाओं की भागीदारी को अनिवार्य बनाया जाएगा, ताकि वक्फबोर्डों के कामकाज में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके। तमिलनाडु सरकार के इस विरोध के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि केंद्रसरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है।

भुवनेश्वर में कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन हिंसक हुआ, पुलिस से झड़प और लाठीचार्ज

ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया। महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराधों की जांच के लिए कमेटी गठितकरने और कांग्रेस विधायकों के निलंबन के खिलाफ यह प्रदर्शन किया जा रहा था। लेकिन यह जल्द ही पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प मेंबदल गया।पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकरावसोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि कांग्रेस कार्यकर्ता सड़क पर रखी कुर्सियां उठाकर पुलिस पर फेंक रहे हैं। हालात बिगड़तेदेख पुलिस को पीछे हटना पड़ा, लेकिन जल्द ही स्थिति को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया गया। इससे पहले, प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल भी किया। कई कार्यकर्ता घायल, विधानसभा बना किलालगातार बढ़ते तनाव के कारण पुलिस को बार-बार लाठीचार्ज करना पड़ा, जिससे कुछ प्रदर्शनकारियों के घायल होने की भी खबर है। स्थिति कोदेखते हुए विधानसभा के आसपास भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया है, जिससे यह किसी किले जैसा नजर आ रहा है। क्या है पूरा मामला?मंगलवार को ओडिशा विधानसभा में कांग्रेस विधायकों ने भाजपा सरकार के आठ महीनों में महिलाओं के खिलाफ हुए अपराधों की जांच के लिएकमेटी बनाने की मांग की थी। जब उनकी मांगों को अनसुना किया गया, तो उन्होंने सदन में घंटी बजाकर, ‘राम धुन’ गाकर और सीटी-बांसुरी बजाकरविरोध जताया। इस हंगामे के चलते स्पीकर सुरमा पाढ़ी ने 12 कांग्रेस विधायकों को निलंबित कर दिया। निलंबित विधायकों का रातभर धरनासभी 12 निलंबित विधायकों ने मंगलवार रात विधानसभा में ही गुजारी, जबकि कांग्रेस कार्यकर्ता बाहर धरने पर बैठ गए। बुधवार को मामला औरगरमाया जब निलंबित विधायकों को बलपूर्वक विधानसभा से बाहर निकाला गया। इस दौरान दो और विधायकों को निलंबित कर दिया गया, जिससेकांग्रेस और भड़क उठी। विधानसभा घेराव का ऐलानइस कार्रवाई के विरोध में कांग्रेस ने विधानसभा घेरने का फैसला किया और गुरुवार को बड़ी संख्या में कार्यकर्ता जुटे। पुलिस और प्रदर्शनकारियों केबीच हिंसक झड़प हुई, जो अभी भी पूरी तरह शांत होती नहीं दिख रही। स्थिति पर काबू पाने के लिए सुरक्षाबलों की भारी तैनाती की गई है।

केंटकी के गवर्नर एंटी बेशियर ने गर्भपात को किया वीटो, बोले डाल सकता है गर्भवती महिलाओं को खतरे में

केंटकी के गवर्नर एंटी बेशियर ने रिपब्लिकन पार्टी द्वारा लाए गए गर्भपात विधेयक के खिलाफ वीटो कर दिया है. एंडी बेशियर का कहना है कि आपातस्थिति में यह विधेयक गर्भवती महिलाओं के जीवन को खतरे में डालेगा और डॉक्टर्स के निर्णय को भी कमजोर करेगा.वर्जीनिया के रिपब्लिकन गवर्नरग्लेन यंगकिन ने श्रम और बंदूक कानून सुधार वाले विधेयकों पर वीटो लगा दिया है. यंगकिन की आपत्तियों की डेमोक्रेट्स की जनरल असेंबली नेआलोचना की. यंगकिन ने 158 विधेयकों पर वीटो लगाया और करीब 600 पर हस्ताक्षर किए. बेशियर एक गर्भपात अधिकार समर्थक हैं जिन्हें साल2028 में होने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में संभावित उम्मीदवार माना जा रहा है. हालांकि केंटकी में रिपब्लिकन पार्टी के पास बहुमत है.ऐसे मेंगवर्नर का वीटो का फैसला सीनेट में पलटा जा सकता है.बिल समर्थकों का कहना है कि इससे डॉक्टर्स के मन में स्पष्टता आएगी, जो अभी केंटकी केकानून को तोड़ने से डरते हैं. केंटकी में वैसे तो गर्भपात प्रतिबंधित है लेकिन कानून में प्रावधान है कि अगर महिला की जान को खतरा है तो उसकागर्भपात किया जा सकता है. नए विधेयक में आपात स्थितियों की सूची दी गई है. जिसमें मां की जान बचाने के लिए गर्भपात किया जा सकता है. उलट सकता है पासाहालांकि केंटकी गवर्नर का मानना है कि इस विधेयक को लेकर पासा उलट भी सकता है और अब उन्हें कानून में खामियां भी लगती हैं.वर्जीनिया केरिपब्लिकन गवर्नर ग्लेन यंगकिन ने श्रम और बंदूक कानून सुधार वाले विधेयकों पर वीटो लगा दिया है.यंगकिन की आपत्तियों की डेमोक्रेट्स की जनरलअसेंबली ने आलोचना की यंगकिन ने 158 विधेयकों पर वीटो लगाया है. और करीब 600 पर हस्ताक्षर कर दिए है. वहीं करीब 160 विधेयकों मेंसंशोधन किया गया है. गवर्नर ने बजट विधेयक में भी 205 संशोधन पेश किए गवर्नर यंगकिन ने जिन विधेयकों को खारिज कर दिया गया. उनसेवर्जीनिया में न्यूनतम प्रतिघंटा मजदूरी 12 डॉलर से बढ़कर 13.50 डॉलर हो जाएगी और एक साल बाद बढ़कर 15 डॉलर हो जाएगी. साथ ही अन्यविधेयक से वर्जीनिया में सेमी ऑटोमैटिक हथियारों की बिक्री पर भी रोक लग जाती हालांकि ये विधेयक गर्वनर की आपत्ति के बाद अटक गए हैं.अबडेमोक्रेट पार्टी के बहुमत वाली वर्जीनिया की जनरल असेंबली की बैठक 2 अप्रैल को रिचमंड में फिर से होगी. जिसमें गवर्नर के वीटो पर चर्चा होसकती है. इसको लेकर आगे की प्रक्रिया जारी है.

अमेरिका के राष्ट्रपति डेनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका, संघीय जज ने लिया फैसला”कोलंबियाई प्रदर्शनकारी छात्रा को नहीं लिया जाएगा हिरासतमें”

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका लगा है जिसमें संघीय जज ने फैसला सुनाते हुए कहा कि कोलंबिया यूनिवर्सिटी की छात्रा युनसियोचुंग को फलस्तीनी समर्थक विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के कारण आव्रजन हिरासत में नहीं लिया जा सकता है. संघीय जज का यह आदेश चुंग कोसंभावित निर्वासन से बचाने में एक अस्थायी राहत प्रदान करता है हालांकि चुंग सुनवाई के दौरान मौजूद नहीं थीं. अब इस मामले में अगली सुनवाई20 मई को होगी.संघीय जज के फैसले से डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के उन प्रयासों को भी झटका लगा है जिनमें वह कैंपस विरोध प्रदर्शनों में भाग लेनेवाले गैर-नागरिकों को देश से बाहर निकालने की कोशिश कर रहे हैं. सरकार इन प्रदर्शनों को यहूदी विरोधी और उग्रवादी समूह हमास के प्रतिसहानुभूतिपूर्ण मानती है वहीं छात्रों का कहना है कि सरकार उन्हें फलस्तीनी अधिकारों के लिए बोलने के कारण निशाना बना रही है.चुंग के वकीलरामजी कासेम ने आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (ICE) का हवाला दिया. उन्होंने कहा अब युनसियो चुंग को ICE के डर में रहने की जरूरत नहीं हैक्योंकि अब वह रात में उनके दरवाजे पर नहीं आएंगे.मैनहट्टन के संघीय न्यायाधीश नाओमी रीस बुचवाल्ड ने मंगलवार को चुंग के मामले की सुनवाईकी उन्होंने कहा कि सरकारी वकीलों ने चुंग को हिरासत में रखने के लिए पर्याप्त तथ्य पेश नहीं किए हैं जबकि उसका मामला अभी चल रहा है इसकेअलावा, सिरैक्यूज के एक अन्य संघीय न्यायविद ने कॉर्नेल विश्वविद्यालय के डॉक्टरेट छात्र मोमोदो ताल के मामले पर विचार किया. जो विरोध प्रदर्शनमें शामिल होने के बाद संभावित निर्वासन का सामना कर रहा है.बता दें कि चुंग 7 साल की उम्र में अमेरिका आई थीं अब वह 21 वर्ष की हो चुकी हैंऔर उन्हें कानूनी स्थायी निवास प्राप्त है जिसे आम बोलचाल की भाषा में ग्रीन कार्ड कहा जाता है. होमलैंड ने जारी किया बयानवहीं होमलैंड सुरक्षा विभाग ने सोमवार को एक बयान जारी किया.जिसमें कहा गया है कि चुंग ने ‘चिंताजनक आचरण’ किया है.जिसमें एक विरोधप्रदर्शन में गिरफ्तार होना शामिल है. वहीं संघीय न्यायाधीश बुचवाल्ड ने कहा कि सरकार ने ऐसा कुछ भी तथ्य पेश नहीं किया है कि वह खतरनाक हैंया आतंकवादियों से जुड़ी हैं. उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट नहीं था कि चुंग के कारण कोई गंभीर विदेश नीति की समस्या हो सकती है. फैसले के बाद ट्रंपप्रशासन के खिलाफ कई मानवाधिकार संगठनों और प्रदर्शनकारियों ने भी अपना समर्थन जताया. उनका कहना था कि इस फैसले से यह स्पष्ट हो गयाहै कि अमेरिका में नागरिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं किया जा सकता और न्यायपालिका के पास हमेशा ऐसे मामलों में हस्तक्षेप करने की शक्ति है. आगे की कानूनी प्रक्रिया अब देखना यह होगा कि ट्रंप प्रशासन इस फैसले के खिलाफ कोई अपील करता है या नहीं. इस मामले के फैसले ने सरकारऔर न्यायपालिका के बीच संतुलन को स्पष्ट किया है और यह उदाहरण पेश किया है कि कैसे संविधान का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों कोचुनौती दी जा सकती है. इस फैसले ने अमेरिकी समाज में नागरिक अधिकारों के संरक्षण को फिर से रेखांकित किया और यह दिखाया कि किसी भीसरकार को अपनी नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने वाले व्यक्तियों को दबाने का अधिकार नहीं है.

अमेरिकी सीनेट ने जय भट्टाचार्य को बनाया एनआईएच का निदेशक, सीनेट ने नियुक्ति पर लगाई मुहर

अमेरिकी सीनेट ने जय भट्टाचार्य को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (एनआईएच) का निदेशक बनाने को अपनी मंजूरी दे दी है. मंगलवार को इसे लेकरसीनेट में मतदान हुआ और जय भट्टाचार्य 53-47 वोटों से जीत गए. इसके साथ ही डोनाल्ड ट्रंप ने जो उनकी एनआईएच पद पर नियुक्ति की थी उसपर भी अंतिम मुहर लग गई अमेरिका के स्वास्थ्य मंत्री रॉबर्ट एफ केनेडी ने भी जय भट्टाचार्य के नाम को मंजूरी मिलने पर खुशी जताई.जय भट्टाचार्यस्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में हेल्थ पॉलिसी के प्रोफेसर हैं साथ ही वे नेशनल ब्यूरो ऑफ इकोनॉमिक रिसर्च में रिसर्च एसोसिएट और स्टैनफोर्ड इंस्टीट्यूटऑफ इकोनॉमिक पॉलिसी रिसर्च, स्टैनफोर्ड फ्रीमैन स्पोग्ली इंस्टीट्यूट और हूवर इंस्टीट्यूट में सीनियर फेलो के पद पर तैनात हैं. जय भट्टाचार्य स्टैनफोर्डसेंटर फॉर डेमोग्राफी एंड इकोनॉमिक्स ऑफ हेल्थ एंड एजिंग का भी नेतृत्व करते हैं.जय भट्टाचार्य ग्रेट बेरिंगटन डिक्लेयरेशन के भी सह-लेखक हैं. इसमेंजय भट्टाचार्य ने अक्तूबर 2020 में कोरोना महामारी के समय लगाए गए लॉकडाउन का विकल्प बताया था. जय भट्टाचार्य के अर्थव्यवस्था, कानूनी, मेडिकल, सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वास्थ्य नीतियों को लेकर जर्नल भी छप चुके हैं.जय भट्टाचार्य का नाम उस समय चर्चा में आया था जब उन्होंनेकोरोना महामारी के दौरान सरकार के लॉकडाउन लगाने, मास्क पहनने और कोरोना वैक्सीन का बूस्टर डोज लगाने का विरोध किया था. बहुत सी आलोचनाओं का किया था सामनाजय भट्टाचार्य कहना था कि लॉकडाउन का लोगों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ेगा. इस वजह से भट्टाचार्य को आलोचनाओं कासामना भी करना पड़ा उनके आलोचकों में डॉक्टर फ्रांसिस कॉलिंस भी शामिल हैं डॉक्टर कॉलिंस उसी एनआईएच के पूर्व निदेशक हैं. जिसके लिएभट्टाचार्य को नियुक्त किया गया है कोरोना से निपटने के तरीको को लेकर भट्टाचार्य जो बाइडन सरकार के मुखर आलोचक रहे. इसे लेकर उन्होंने कुछलोगों के साथ मिलकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की थी. भट्टाचार्य की दलील थी कि बाइडन प्रसाशन सोशल मीडिया पर कोविड-19 कोलेकर रूढ़िवादी विचारों को गलत तरीके से दबा रहा है.जय भट्टाचार्य स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में हेल्थ पॉलिसी के प्रोफेसर हैं. साथ ही वे नेशनल ब्यूरोऑफ इकोनॉमिक रिसर्च में रिसर्च एसोसिएट और स्टैनफोर्ड इंस्टीट्यूट ऑफ इकोनॉमिक पॉलिसी रिसर्च, स्टैनफोर्ड फ्रीमैन स्पोग्ली इंस्टीट्यूट और हूवरइंस्टीट्यूट में सीनियर फेलो के पद पर तैनात हैं. जय भट्टाचार्य स्टैनफोर्ड सेंटर फॉर डेमोग्राफी एंड इकोनॉमिक्स ऑफ हेल्थ एंड एजिंग का भी नेतृत्वकरते हैं. जय भट्टाचार्य ग्रेट बेरिंगटन डिक्लेयरेशन के भी सह-लेखक हैं.इसमें जय भट्टाचार्य ने अक्तूबर 2020 में कोरोना महामारी के समय लगाए गएलॉकडाउन का विकल्प बताया था. जय भट्टाचार्य के अर्थव्यवस्था, कानूनी, मेडिकल, सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वास्थ्य नीतियों को लेकर जर्नल भीछप चुके हैं. कोरोना के दौरान आया था चर्चा में नामजय भट्टाचार्य का नाम उस समय चर्चा में आया था जब उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान सरकार के लॉकडाउन लगाने मास्क पहनने और कोरोनावैक्सीन का बूस्टर डोज लगाने का विरोध किया था. उनका कहना था कि लॉकडाउन का लोगों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ेगा. इस वजह से भट्टाचार्य को आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ा उनके आलोचकों में डॉक्टर फ्रांसिस कॉलिंस भी शामिल हैं. डॉक्टर कॉलिंस उसीएनआईएच के पूर्व निदेशक हैं जिसके लिए भट्टाचार्य को नियुक्त किया गया है कोरोना से निपटने के तरीको को लेकर भट्टाचार्य जो बाइडन सरकार केमुखर आलोचक रहे. इसे लेकर उन्होंने कुछ लोगों के साथ मिलकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की थी. भट्टाचार्य की दलील थी कि बाइडनप्रसाशन सोशल मीडिया पर कोविड-19 को लेकर रूढ़िवादी विचारों को गलत तरीके से दबा रहा है.

शिवसेना कार्यकर्ताओं ने सार्वजनिक शौचालय के बाहर लगाई कुणाल कामरा की तस्वीर, जमकर किया विरोध प्रदर्शन

Kunal kamara Case: कुणाल कामरा की कॉमेडी से पैदा हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है कुणाल द्वारा महाराष्ट्र के राजनेता पर निशानासाधते हुए बनाए गए पैरोडी गीत ने देश भर में कई लोगों के बीच गुस्से को जन्म दे दिया जिसके कारण शिवसेना की युवा शाखा के कार्यकर्ताओं नेमंगलवार को इंदौर में एक सार्वजनिक शौचालय के बाहर कामरा की तस्वीर लगा दी.शिवसेना नेता ने कुणाल कामरा को धमकी देते हुए कहा कि अगरवह मध्य प्रदेश आए तो उनका चेहरा काला कर दिया जाएगा और उन्हें सड़कों पर घुमाया जाएगा.यह विरोध प्रदर्शन बंगाली स्क्वायर स्थित एकसार्वजनिक शौचालय के बाहर किया गया जहां शिवसेना कार्यकर्ताओं ने 36 वर्षीय कॉमेडियन के खिलाफ नारे लगाए.जिन्होंने विवाद के बाद भीअपनी बात पर अड़े रहे और माफी मांगने से इनकार कर दिया.शिवसेना की युवा शाखा युवा सेना की मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष अनुराग सोनार नेकहा, ‘कामरा कॉमेडी के नाम पर लोगों को गंदगी परोसते हैं.उनकी गंदी मानसिकता के खिलाफ विरोध जताने के लिए हमने उनकी तस्वीर लगाई है. अगर वह कभी मध्य प्रदेश आए तो शिवसेना कार्यकर्ता उनका मुंह काला कर देंगे और सड़कों पर परेड कराएंगे. राजनीतिक करियर पर किया कटाक्षकॉमेडियन ने अपने शो में एक लोकप्रिय हिंदी फिल्म के गाने के बोल में बदलाव करके राजनेता के राजनीतिक करियर पर कटाक्ष करके बड़ाराजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है. शिवसेना सांसद संजय राउत ने मंगलवार को कहा कि स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा किसी के सामने झुकेंगेनहीं.संजय राउत ने कहा कि मैं कामरा को जानता हूं हमारा डीएनए एक जैसा है. वह लड़ाकू है वह माफी नहीं मांगेंगे अगर आपको उनके खिलाफकार्रवाई करनी है तो आपको कानूनी कदम उठाने होंगे.कुणाल कामरा ने कहा है कि वह राजनेता के बारे में अपनी विवादास्पद टिप्पणियों के लिएमाफी नहीं मांगेंगे और उन्होंने मुंबई में उस स्थान पर तोड़फोड़ की आलोचना की जहां कॉमेडी शो की रिकॉर्डिंग की गई थी.फिलहाल महाराष्ट्र पुलिसनेने बताया कि कॉमेडियन कुणाल कामरा के वकील ने उनसे 7 दिन का समय मांगा है. आज कुणाल को बयान दर्ज कराने के लिए पुलिस ने बुलायाथा लेकिन वे नहीं आए पुलिस अब कानूनी सलाह लेकर आगे की कार्रवाई करेगी.खार इलाके में यूनिकॉन्टिनेंटल होटल में हैबिटेट कॉमेडी क्लब मेंअपने प्रदर्शन के दौरान कामरा ने शिवसेना के नेता को गद्दार कहा था और उनकी पैरोडी भी गाई थी. शिवसेना कार्यकर्ताओं का किया विरोधबता दें कि कामरा की इस टिप्पणी और पैरोडी गाने के कारण शिवसेना कार्यकर्ताओं ने विरोध स्वरूप रविवार को स्टूडियो में तोड़फोड़ की. मुंबई पुलिसने इस मामले में कामरा के खिलाफ शिवसेना विधायक की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए मामला दर्ज किया और उन्हें व्यक्तिगत रूप से पेश होने केलिए नोटिस जारी किया. साथ ही पुलिस ने खार इलाके में हैबिटेट स्टूडियो में तोड़फोड़ करने के आरोप में 40 शिवसेना कार्यकर्ताओं के खिलाफ भीमामला दर्ज किया. सोमवार को 12 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया जिन्हें बाद में स्थानीय अदालत ने जमानत दे दी.दरअसल इससे पहले मई2020 में कुणाल कामरा ने एक एडिटेड वीडियो शेयर किया था. इसमें पीएम मोदी के जर्मनी दौरे के वक्त एक सात साल के बच्चे के गाने के वीडियोसे छेड़छाड़ की गई थी. इसके बाद राष्ट्रीय बालअधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने कॉमेडियन के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए तुरंतवीडियो हटाने के लिए कहा गया था.हालांकि कुणाल कामरा ने अपने बचाव में कहा कि यह वीडियो सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध है. अपने पोस्ट मेंउन्होंने कहा कि एनसीपीसीआर ने उन पर एक मीम पोस्ट करने के लिए कार्रवाई की मांग की है.

सीएम योगी बोले देश की जनता को गुमराह कर रहा विपक्ष,मस्जिदों पर कब्जा करके क्या करेंगें भाजपा

UP Latest News: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मस्जिदों और वक्फ संपत्तियों को लेकर सरकार की नीतियों के बारे में गलतसूचना फैलाने पर विपक्ष को निशाने पर लिया. उन्होंने विपक्ष के इरादों पर सवाल खड़ा किया पूछा कि वे वक्फ के नाम पर कितनी जमीन लेने कीयोजना बना रहे हैं. विपक्ष लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है.मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कहा कि क्या कभी विपक्ष ने वक़्फ के नाम परकोई अच्छा काम किया. उन्होंने उस संपत्ति का अपने निजी स्वार्थ के लिए दुरुपयोग किया है. एक संपत्ति को कई लोगों को बेच दिया गया अब इसकीवजह से विवाद हो रहे हैं.मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा का लक्ष्य वक़्फ संपत्तियों को अतिक्रमण और दुरुपयोग से मुक्त कराना है. साथ ही उस समुदायके कल्याण के लिए उनका उपयोग सुनिश्चित करना है. सरकार वक़्फ संपत्तियों के प्रबंधन में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए जोर दे रही हैजो मुस्लिम समुदाय की सेवा के लिए है. उन्होंने वक़्फ संशोधन विधेयक को अपना समर्थन दिया कहा कि यह देश और मुस्लिम समुदाय के लाभ केलिए आवश्यक है. योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जेपीसी ने अनुरोध किया है कि वक्फ संशोधन को आज की जरूरत बनाया जाए.समयबद्ध तरीके से बढ़ाया जाए आगेइसे समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाए मुझे लगता है कि यह देश के हित में होगा. मुसलमानों के भी हित में होगा संशोधन के लागू होने से उन लोगोंको जरूर परेशानी हो सकती है जो वक्फ संपत्तियों पर बसे हैं या फिर उनमें पैसा लगाया है। इससे उनका पैसा डूब सकता है.मुख्यमंत्री ने वक्फ बोर्ड केभूमि अधिग्रहण के अधिकार पर सवाल खड़ा किया कहा कि उन्होंने सरकारों को ब्लैकमेल करने के लिए अपनी शक्ति का दुरुपयोग किया है. बिनाकिसी औचित्य के संपत्तियों और सार्वजनिक भूमि पर कब्जा किया गया है. वे लोग संपत्ति की तलाश करते थे फिर सरकारों को ब्लैकमेल करते थेवक्फ के नाम पर कई गलत निर्णय लिए गए हैं. खासकर वक्फ जो कहता है कि यह जमीन उनकी है. वक्फ के नाम पर आप कितनी जमीन लेंगे? उन्होंने वक्फ के नाम पर कोई कल्याणकारी काम किया है.उन्होंने अपने निजी स्वार्थ के लिए उस संपत्ति का दुरुपयोग किया है.इसे किसी भी कीमत परबेचा गया है. आज स्थिति क्या से क्या हो गई है. संपत्ति के बेचने को लेकर हो रहा विवादउन्होंने एक संपत्ति कई लोगों को बेच दी है अब इसकी वजह से विवाद हो रहा है.उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भाजपा का लक्ष्य वक्फ संपत्तियोंको अतिक्रमण और दुरुपयोग से मुक्त कराना और समुदाय के कल्याण के लिए उनका उपयोग सुनिश्चित करना है. पार्टी वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन मेंअधिक पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए जोर दे रही है जो मुस्लिम समुदाय की सेवा के लिए हैं.योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जेपीसी ने अनुरोधकिया है कि वक्फ संशोधन को आज की जरूरत बनाया जाए इसे समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाए मुझे लगता है कि यह देश के हित में होगामुसलमानों के भी हित में होगा संशोधन के लागू होने से उन लोगों को जरूर परेशानी हो सकती है.जो वक्फ संपत्तियों पर बसे हैं या फिर उनमें पैसालगाया है इससे उनका पैसा डूब सकता है.

‘केसरी चैप्टर 2’ के असली हीरो की कहानी: अक्षय कुमार का किरदार सर सी शंकरन नायर

बॉलीवुड सुपरस्टार अक्षय कुमार अपनी आगामी फिल्म ‘केसरी चैप्टर 2: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ जलियांवाला बाग’ में एक निडर और साहसी वकीलकी भूमिका निभाते हुए नजर आएंगे, जिसका नाम है सर सी शंकरन नायर। इस फिल्म का टीजर हाल ही में रिलीज हुआ है, जिसमें अक्षय कुमार कोएक ब्रिटिश जज को कोर्ट में गाली देते हुए दिखाया गया। इस दृश्य ने दर्शकों के बीच उत्सुकता और सवालों को जन्म दिया कि आखिर यह किरदारकौन है जो अंग्रेजों से बेfearless तरीके से बात कर रहा है। टीजर को देखकर कई लोगों के मन में यह सवाल जरूर आया कि क्या यह किरदारकाल्पनिक है या फिर यह एक असली हीरो पर आधारित है। अक्षय कुमार जिस किरदार में नजर आ रहे हैं, वह वास्तविक जीवन के एक नायक, सर चेट्टूर शंकरन नायर पर आधारित है। सर शंकरन नायर भारतीयस्वतंत्रता संग्राम के एक महान नेता और वकील थे, जिन्होंने जलियांवाला बाग हत्याकांड के बाद ब्रिटिश साम्राज्य को चुनौती दी थी। यह फिल्मजलियांवाला बाग नरसंहार के पीछे की सच्चाई को उजागर करने के लिए उनके ऐतिहासिक संघर्ष पर आधारित है। सर सी शंकरन नायर का परिचयसर चेट्टूर शंकरन नायर का जन्म 11 जुलाई 1857 को पालघाट जिले में हुआ था। नायर ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा मद्रास (अब चेन्नई) से प्राप्त कीऔर फिर कानून की डिग्री हासिल करने के लिए मद्रास विश्वविद्यालय में दाखिला लिया। वे एक प्रतिष्ठित वकील बने और बहुत जल्दी कानून के क्षेत्रमें अपने कड़े संघर्ष और संघर्षशील व्यक्तित्व के कारण पहचान बनाने में सफल रहे। नायर की कार्यशैली ने उन्हें विशेष रूप से सम्मानित किया। 1908 में उन्हें मद्रास उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। इसके बादउन्होंने वायसराय की कार्यकारी परिषद में शामिल होकर भारतीय शिक्षा मंत्री के रूप में भी कार्य किया। नायर भारतीय राजनीति और कानून में एकबहुत बड़ा नाम बन चुके थे। ब्रिटिश साम्राज्य से सम्मान, लेकिन निडर रुखहालांकि नायर ब्रिटिश साम्राज्य के साथ जुड़े थे और उन्होंने कुछ महत्वपूर्ण सरकारी पदों पर कार्य किया था, लेकिन उनका दिल हमेशा भारतीयस्वतंत्रता संग्राम के पक्ष में था। वे एक प्रगतिशील विचारक थे और उनके विचारों ने उन्हें ब्रिटिश सरकार के भीतर भी सम्मान दिलाया। 1912 में, ब्रिटिश साम्राज्य ने उन्हें नाइट की उपाधि दी थी। इसके बाद, 1915 में वे वायसराय की कार्यकारी परिषद में शामिल हुए। नायर का दृष्टिकोण औरउनका साहस उन्हें ब्रिटिश सरकार के अधिकारियों द्वारा भी सराहा जाता था। लेकिन जब नायर ने महसूस किया कि ब्रिटिश सरकार भारतीयों के खिलाफ दमनात्मक नीतियां लागू कर रही थी, तो उन्होंने विरोध जताना शुरू करदिया। खासकर जलियांवाला बाग हत्याकांड के बाद नायर ने ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ अपना स्वर बुलंद किया और ब्रिटिश साम्राज्य की कईनीतियों की खुलकर आलोचना की। जलियांवाला बाग हत्याकांड पर संघर्षजलियांवाला बाग हत्याकांड, जो 13 अप्रैल 1919 को हुआ था, भारत के इतिहास का सबसे काला दिन था। इस घटना ने भारतीय स्वतंत्रता संग्रामको एक नई दिशा दी। इस नरसंहार में जनरल डायर के नेतृत्व में ब्रिटिश सैनिकों ने निहत्थे भारतीयों पर गोलियां चलाईं, जिससे सैकड़ों लोगों की जानचली गई। सर शंकरन नायर ने इस कांड के खिलाफ अपनी आवाज उठाई और ब्रिटिश अधिकारियों की गलत नीतियों के खिलाफ कड़ा विरोध किया। उन्होंनेअपनी पुस्तक ‘गांधी एंड एनार्की’ में माइकल ओ’डायर को उसकी अज्ञानता और अहंकार के लिए चुनौती दी। नायर ने इस घटना की सच्चाई को सामनेलाने के लिए कई कानूनी लड़ाइयां लड़ीं और जलियांवाला बाग नरसंहार के अपराधियों को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की। अंग्रेजों से इस्तीफा और संघर्ष की शुरुआतजब नायर ने देखा कि ब्रिटिश साम्राज्य अपनी गलतियों को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं था, तो उन्होंने उस समय के सबसे बड़े सरकारी पदों में सेएक से इस्तीफा देने का फैसला किया। जुलाई 1919 में उन्होंने वायसराय की कार्यकारी परिषद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस कदम ने भारतीयस्वतंत्रता संग्राम को एक नई दिशा दी। नायर के इस्तीफे के बाद प्रेस सेंसरशिप को हटाने और पंजाब में मार्शल लॉ को समाप्त करने में मदद मिली। नायर की राष्ट्रवादी भूमिकानायर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ भी जुड़े हुए थे। 1897 में, उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सम्मेलन की अध्यक्षता की थी और भारतीय राजनीतिमें अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करवाई थी। वे भारतीय समाज के लिए सुधारक थे और उन्होंने जातिवाद, बाल विवाह और लैंगिक असमानता केखिलाफ आवाज उठाई। वे न केवल एक महान वकील थे, बल्कि एक प्रखर राष्ट्रवादी भी थे, जिन्होंने अपने विचारों को स्वतंत्रता संग्राम के दौरानबेझिजक तरीके से व्यक्त किया। फिल्म ‘केसरी चैप्टर 2’ में अक्षय कुमार का किरदारअक्षय कुमार इस फिल्म में सर शंकरन नायर का किरदार निभा रहे हैं, और उनका यह किरदार ब्रिटिश साम्राज्य से बिना डर के न्याय की बात करता है।फिल्म का टीजर यह साफ दिखाता है कि अक्षय का किरदार न्याय के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। नायर का यह संघर्ष और साहस ही उन्हेंइतिहास में एक नायक बनाता है, और अक्षय कुमार ने इस किरदार को बेहतरीन तरीके से निभाया है।

IPL 2025: लखनऊ की हार की क्या रही वजह? कप्तान पंत और कोच क्लूजनर की राय जुदा

लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) की टीम नए कप्तान ऋषभ पंत की अगुवाई में IPL 2025 का आगाज जीत से करने में नाकाम रही। लखनऊ कोदिल्ली कैपिटल्स (DC) के हाथों हार का सामना करना पड़ा। पहले बल्लेबाजी करते हुए लखनऊ ने 20 ओवर में 8 विकेट खोकर 209 रनों का स्कोरखड़ा किया। इसके जवाब में दिल्ली ने 1 विकेट शेष रहते 210 रनों का टारगेट हासिल कर लिया। IPL इतिहास में 5वीं बार ऐसा हुआ जब कोई टीमएक विकेट से मैच जीतने में सफल रही। दिल्ली की जीत में आशुतोष शर्मा का सबसे बड़ा योगदान रहा, जिन्होंने शानदार अर्धशतक जड़ा। पंत ने स्कोर को बताया पर्याप्तलखनऊ की पहले मैच में हार के बाद कप्तान ऋषभ पंत ने कहा कि टीम ने अच्छा स्कोर खड़ा किया था। हालांकि 13 से 17 ओवर के बीच में हमनेमोमेंटम खोया लेकिन स्कोर काफी अच्छा था। हम इस हार से सीखेंगे और सुधार करने का प्रयास करेंगे। यह कहना आसान है कि कहां गलती हुईलेकिन विकेट बल्लेबाजी के लिए अच्छी थी। ट्रिस्टन स्टब्स, आशुतोष ने बेहतरीन बल्लेबाजी की और विपराज निगम ने मिलकर मैच दिल्ली के पक्षमें कर दिया। कप्तान ने आगे कहा कि उन्हें लगता है कि हमारे शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों ने वास्तव में अच्छा खेला और उन्हें लगता है कि इस विकेट परयह काफी अच्छा स्कोर था। एक टीम के तौर पर हम हर मैच से सकारात्मकता लेना चाहते हैं और सीखना चाहते हैं। असिस्टेंट कोच की राय जुदाहालांकि, मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में LSG के असिस्टेंट कोच लांस क्लूजनर की राय अपने कप्तान से जुदा नजर आई। क्लूजनर ने कहा कि मिचेलमार्श और निकोलस पूरन से मिली अच्छी शुरुआत के बाद वे लगभग 20-30 रन पीछे रह गए। उन्होंने कहा कि शायद यही वजह थी कि हम गेंदबाजीके दौरान दबाव में आ गए। उन्होंने कहा कि दिल्ली कैपिटल्स ने बल्ले से अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन हम इस स्थिति में इसलिए हैं क्योंकि हमनेपर्याप्त रन नहीं बनाए, जो हमें बनाने चाहिए थे। जब गेंदबाजों ने सही गेंदबाजी की, तो थोड़ी स्पिन हुई, इसलिए उन्हें लगा कि यह बहुत अच्छा विकेटथा। सभी के लिए थोड़ा बहुत कुछ था।